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‘तुम बिना कपड़ों के सोती हो?’ – ईसाई मिशनरी स्कूलों में ‘उपदेश’ देने वाला डायरेक्टर, करता है छात्राओं का पीछा

ट्विटर यूजर जोएल गिफ़्ट्सन ने ट्विटर पर एक थ्रेड के जरिए ईसाई मिशनरी स्कूलों के बारे में बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने लिखा कि ईसाई मिशनरी स्कूलों में पढ़ाई करने वालों को ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ नामक संस्था के बारे में पता होगा – जो एक ईसाई मिशनरी संस्था है और दुनिया भर के ईसाई मिशनरी स्कूलों में उपदेश देता है। अब इसी ईसाई मिशनरी संस्था के एक अधिकारी द्वारा नाबालिग छात्राओं को आपत्तिजनक मैसेज भेजने की बात सामने आई है।

उन्होंने लिखा कि सैम जयसुंदर तमिलनाडु में कई वर्षों तक ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ का डायरेक्टर था। ये कई ईसाई मिशनरी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को आपत्तिजनक मैसेज भेजते हुए उन्हें वीडियो कॉल करने और अकेले में मिलने की माँग करते हुए उन्हें आलिंगन करने की इच्छा जता रहा था। उन्होंने बताया कि ये सब 2016 से ही चल रहा है और अब कई लड़कियों ने आगे आकर इसका खुलासा किया है।

अब तक उस पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई भी नहीं की गई है। कई छात्राओं और उनके माता-पिता ने आवाज़ उठाई है कि सैम जयसुंदर नाबालिग लड़कियों को आपत्तिजनक मैसेज भेजता है। वो भारत के ईसाई मिशनरी स्कूलों में जीसस और गॉस्पेल के बारे में पढ़ाता है। साथ ही उस पर लड़कियों पर अश्लील टिप्पणियाँ करने के आरोप भी हैं। लड़कियों ने कई बार उसकी शिकायत भी की लेकिन ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ का सदस्य होने के कारण उस पर कार्रवाई नहीं हुई

कई लड़कियों ने सोशल मीडिया पर बताया है कि वो एक ‘पीडोफाइल’ और ‘प्रिडेटर’ है। लड़कियों ने कहा है कि इस मामले में दो तरफ का कोई पक्ष ही नहीं है क्योंकि कई लड़कियों ने उसके इस व्यवहार का सामना किया है। लड़कियों ने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो सैम जयसुंदर का बचाव कर रहे हैं। इंस्टाग्राम और व्हाट्सप्प पर स्टोरीज लगा कर इन लड़कियों ने कहा कि जो भी पीड़ित आरोपित के खिलाफ सामने आ रही हैं, वो काफी बहादुरी का कार्य कर रहीं।

साथ ही जोएल गिफ्टसन ने कई मैसेजों का स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किया, जो ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ के लोगों ने उन लड़कियों को भेजे थे। एक मैसेज में संस्था का एक व्यक्ति एक लड़की को स्कर्ट में अपनी ‘सुंदर तस्वीर’ भेजने को कह रहा है। एक अन्य लड़की से सैम जयसुंदर ‘साइड वाली तस्वीर’ भेजने को कह रहा है। इसके अलावा एक लड़की को उसने लिखा, “तुमने मेरी तस्वीरें लाइक की हैं, जिससे मुझे ख़ुशी हुई। अब अपनी सबसे क्यूट सी तस्वीर मुझे भेजो।

एक लड़की से उसने पूछा कि क्या तुम कभी नंगा (फिर समझाते हुए उसने फिर पूछा- ‘बिना कपड़ों के?’) सोती हो? साथ ही वो लड़कियों को ‘स्वीटी’ कहते हुए उनसे फ्री होकर उससे बात करने को कहता भी दिख रहा है। एक 14 वर्षीय लड़की से उसने पूछा कि क्या वो और उसके साथी लड़का-लड़की एक-दूसरे को गले लगाते हैं? सैम ने नाबालिग से पूछा कि क्या किसी ने उसे आलिंगन में लिया है या किस किया है?

9वीं वर्ग की एक छात्रा से उसने कहा कि जब बारिश के दिनों में वो खेल रही थी तो उसके कपड़े भींग गए थे और उसके शरीर से चिपक रहे थे। एक लड़की को अपने बारे में बताते हुए उसने कहा कि चौथी वर्ग की एक छात्रा ने उसे गले लगाया था और किस भी किया था। उसने कहा कि उस लड़की के पिता नहीं हैं, वो उसे पसंद आई। एक छात्रा से उसने कहा कि वो ‘छोटे स्कर्ट्स में’ एकदम क्यूट दिख रही थी।

वो छात्राओं को अपने फोन नंबर देकर उन्हें कॉल करने को भी कहता था और कहता था कि वो उसकी आवाज़ सुनना चाहता है। साथ ही एक रुबेन क्लेमेंट नामक व्यक्ति का भी स्क्रीनशॉट वायरल हुआ है, जो ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ से ही जुड़ा हुआ है। एक मैसेज में वो एक लड़की से पूछ रहा है कि उसके ‘पसंदीदा नाइट ड्रेस’ कौन सा है। वहीं सैम लड़कियों से उनके ‘बॉयफ्रेंड’ के बारे में भी पूछा करता था।

एक लड़की से उसने पूछा कि वो अपने पिता के साथ क्यों सोई हुई है? एक अन्य छात्रा से उसने ऐसी ड्रेस में तस्वीर भेजने को कहा, जिसमें उसका टीशर्ट ‘एक कंधे से नीचे’ लटक रहा हो। साथ ही उसने पूछा कि उसने अंतिम बार किस कब किया था? वो कई महीनों और सालों तक लड़कियों के पीछे पड़ा रहता था और उन्हें मैसेज भेजता रहता था। अधिकतर मैसेजों में वो तस्वीरों की डिमांड्स ही करता था।

बता दें कि मिशनरी स्कूलों में और चर्चों में यौन शोषण की कई ख़बरें अक्सर सामने आती रहती हैं और अधिकतर मामलों में आरोपित इतने पॉवरफुल होते हैं कि उन पर कार्रवाई नहीं होती। केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा ने अपनी आत्मकथा में खुलासा किया था कि पादरी और बिशप अपने पदों का दुरूपयोग करते हुए ननों के साथ जबरदस्ती यौन सम्बन्ध बनाते हैं। वो इसके लिए कई ननों की जबरन सहमति भी लेते हैं।

BJP नेता मनीष शुक्ला की गोली मार कर हत्या, बंगाल BJP ने कहा – ‘TMC का अंत निश्चित’

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर भाजपा नेता की हत्या की घटना सामने आई है। खबर है कि बीजेपी के पार्षद व वकील मनीष शुक्ला की रविवार (अक्टूबर, 4 2020) को उत्तर परगना जिले में गोली मार कर हत्या कर दी गई। यह घटना टीटागढ़ पुलिस स्टेशन के सामने हुई। कहा जा रहा है कि कुछ अज्ञात बदमाशों ने इसे अंजाम दिया। हालाँकि, भाजपा ने इसका आरोप टीएमसी के गुंडों पर लगाया है।

घटना के बाद से इलाके में तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद बंगाल की भाजपा ईकाई ने बैरकपुर में बंद का ऐलान किया है। वहीं राज्यपाल जयदीप धनखड़ ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर बात करने के लिए डीजीपी समेत कई आला अधिकारियों को राजभवन बुलाया है। वहीं ममता सरकार को भी समन भेजा। साथ ही पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) हरि कृष्ण द्विवेदी को भी तलब किया है।

राज्यपाल ने इस घटना के मद्देनजर ट्विटर पर भी अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा, “पश्चिम बंगाल में एक और भाजपा नेता की हत्या। टीटागढ़ में पार्षद मनीष शुक्ला को गोली मारी गई। टीएमसी विरोधियों को डराना और उन्हें मारना चाहती है। उनके पाँव के नीचे से जमीन खिसक रही है। करीब 110 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। बेहतर बंगाल के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष चलता रहेगा।”

वहीं, कैलाश वियजवर्गीय ने इस संबंध में सीबीआई जाँच की माँग की। उन्होंने कहा- “बीजेपी वर्कर मनीष शुक्ला को टीटागढ़ पुलिस स्टेशन (उत्तरी 24 परगना जिला) के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले की जाँच सीबीआई के द्वारा की जानी चाहिए।”

पार्टी की बंगाल ईकाई ने भी इस घटना पर अपने अकॉउंट से टीएमसी पर निशाना साधा। भाजपा बंगाल के ट्विटर पर लिखा गया:

बंगाल अब ऐसी जगह बन चुका है, जहाँ हत्याएँ सामान्य हैं। टीटागढ़ से भाजपा पार्षद मनीष शुक्ला को टीएमसी गुंडों ने मार गिराया। TMC ये हत्याओं की श्रृंखला तुम्हारे निश्चित अंत की ओर संकेत करती है।

जानकारी के मुताबिक, भाजपा पार्षद पर हमला करने वाले दोनों हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार थे और मास्क के साथ ही हेलमेट पहने हुए थे। उन्होंने मनीष शुक्ला पर पीछे से कई फायर किए और जब वो गिर गए तो उनके सीने में भी गोलियाँ दागी।

ये सब कुछ टीटागढ़ पुलिस स्टेशन के पास हुआ, जहाँ से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हमले में मनीष को बचाने की कोशिश कर रहे उनके दो साथी भी घायल हो गए।

उल्लेखनीय है कि पार्षद मनीष शुक्ला बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के स्थानीय सांसद अर्जुन सिंह के करीबी थे और दो साल पहले उनके साथ ही बीजेपी में शामिल हो गए थे। उससे पहले दोनों टीएमसी में थे।

बता दें कि 4 अक्टूबर की इस घटना से पहले सितंबर में बंगाल के गूगली जिले में भी एक भाजपा समर्थक गणेश रॉय की मौत का मामला आया था। भाजपा नेता दिलीप घोष और कैलाश विजयवर्गीय ने इसका इल्जाम तृणमूल पर लगाया था और गणेश की मौत को हत्या बताया था।

‘क्राइम सीन को बर्बाद किया, ऑटोप्सी रिपोर्ट में कई खामियाँ’: सुशांत मामले में डेढ़ महीने में पलटे AIIMS के डॉ सुधीर

‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ ने सुशांत सिंह राजपूत के मामले में एम्स के पैनल की अध्यक्षता कर रहे डॉक्टर सुधीर गुप्ता का एक टेप जारी कर के बड़ा खुलासा किया है। उस ऑडियो टेप में डॉक्टर सुधीर गुप्ता कहते दिख रहे हैं कि क्राइम सीन ‘कंटेमिनेट’ कर दिया गया था और फॉरेंसिक रूप से जाँच के लिए कोई विश्वस्त साक्ष्य उपस्थित नहीं थे। अब ‘रिपब्लिक’ ने पूछा है कि कुछ हफ्ते पहले के इस बयान से वो पलट कैसे गए?

चैनल ने कहा कि आज सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले पर तब सवाल उठाने वाले डॉक्टर सुधीर गुप्ता अब इसे आत्महत्या कैसे बता सकते हैं? वायरल टेप में डॉक्टर गुप्ता कहते दिख रहे हैं कि जब तक क़ानूनन फैसला न हो जाए, तब तक सबूतों को बिना छेड़छाड़ किए रखने की जिम्मेदारी होती है। उस समय उन्होंने कहा था कि सुशांत से जुड़े सारे दस्तावेज अभी नहीं भेजे गए हैं, जिनका वो लोग इंतजार कर रहे हैं।

तब डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने कहा था कि सबूत आगे की जाँच के लिए उपयुक्त नहीं हैं और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कई खामियाँ हैं, लेकिन अब मीडिया में उनके हवाले से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं कि सुशांत की मौत आत्महत्या है। साथ ही चैनल ने उनका एक व्हाट्सप्प चैट भी निकाला है, जिसमें वो दावा कर रहे हैं। वकील विकास सिंह ने भी कहा है कि सुशांत की बहन द्वारा लिए गए फोटोग्राफ्स को देख कर डॉक्टर गुप्ता ने कहा था कि ये हत्या का मामला है, आत्महत्या हो ही नहीं सकता।

ये सारा स्टिंग ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के पत्रकार प्रकाश सिंह ने किया। इस पर बोलते हुए अर्नब गोस्वामी ने कहा कि इस टेप को दिखाने के लिए वो इसलिए बाध्य हो गए क्योंकि 43 दिन पहले (अगस्त 22, 2020) एक डॉक्टर ने ऑटोस्पी रिपोर्ट में इतनी खामियाँ देखीं और बताया कि उनके आधार पर रिपोर्ट तैयार नहीं की जा सकती। तब डॉक्टर गुप्ता ने कहा था कि सारे सबूतों को मिटा दिया गया। इसी को लेकर अर्नब ने पूछा कि अब सबूत वापस कैसे आ गया?

अर्नब गोस्वामी ने चुनौती दी कि अब डॉक्टर सुधीर गुप्ता ये कह कर दिखाएँ कि ये उनकी आवाज़ नहीं है। डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने ये भी कहा था कि क्राइम सीन को यथावत नहीं रखा गया और इसके साथ छेड़छाड़ हुई है। बकौल अर्नब गोस्वामी, डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने उस समय ये कहा था कि जो डिटेल्स हैं, उनके आधार पर निर्णयात्मक रिपोर्ट देना संभव नहीं है, क्योंकि क्राइम सीन ‘फॉरेंसिक्ली सुइटेबल’ नहीं है।

डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने ये भी पूछा था कि सुशांत के मृत शरीर को सीधे मॉर्चरी में क्यों ले जाया गया, उन्हें इमरजेंसी ट्रीटमेंट क्यों नहीं दिया गया? साथ ही एक न्यूज़ चैनल पर निशाना साधते हुए अर्नब गोस्वामी ने कहा कि ‘तक’ वाले दलाल लोग रिया चक्रवर्ती के पीआर मशीनरी हैं। डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने तब प्रकाश सिंह से ये भी पूछा था कि मौत के समय को लेकर ऑटोप्सी रिपोर्ट में कुछ लिखा ही नहीं है – ऐसा चैनल ने दावा किया।

एनडीटीवी सहित कई मीडिया चैनलों और खबरिया पोर्टलों ने एम्स के जाँच पैनल की अगुवाई कर रहे डॉक्टर सुधीर गुप्ता के हवाले से खबर प्रकाशित की थी कि सुशांत मामले की गुत्थी सुलझ गई है और उनकी रिपोर्ट में आया है कि ये हत्या नहीं, आत्महत्या था। इससे 1 दिन पहले अर्नब गोस्वामी ने इन ख़बरों को ‘प्लांटेड स्टोरीज’ करार दिया था। उन्होंने पूछा था कि ये चीजें ऑन रिकॉर्ड क्यों नहीं बोली जा रही?

‘युवाओं में बढ़ती उत्सुकता’ और ‘इंटरनेट’ से बढ़ रहे रेप के मामले: सबसे ज्यादा बलात्कार वाले राजस्थान के DGP

राजस्थान के डीजीपी भूपेंद्र सिंह ने राज्य में होने वाली बलात्कार की घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए बेतुका बयान दिया है। राजस्थान में बलात्कार की लगातार बढ़ती घटनाओं के पीछे का कारण बताते हुए डीजीपी ने ‘इंटरनेट’ और ‘युवाओं में बढ़ती उत्सुकता’ को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि आज की युवा जनरेशन रिलेशनशिप को ‘एक्सप्लोर’ कर रही है, इसीलिए ऐसी घटनाएँ हो रही हैं।

डीजीपी ने कहा कि उनका अनुभव ये कहता है कि पिछले कुछ वर्षों में न सिर्फ राजस्थान, बल्कि पूरे उत्तर भारत में हिंसक अपराध की घटनाओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इसके बहुत सारे कारण हैं।

उन्होंने कहा कि कुल मिला कर फोकस इस बात पर होना चाहिए कि बच्चों को किस प्रकार से शिक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि लड़कियों में आत्मविश्वास बढ़ा कर उन्हें बताना होगा कि कैसे वो अपने साथ होने वाली दुर्घटनाओं को ‘अवॉयड’ करें। राजस्थान डीजीपी भूपेंद्र सिंह यादव ने रेप के बढ़ते मामलों पर कहा,

“युवाओं की बढ़ती संख्या भी इसका कारण हो सकती है, बेरोजगारी भी हो सकती है, कुछ इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्रियाँ हैं, जिन्हें देख कर बच्चे प्रेरणा ले रहे हैं – वो भी इसका कारण हो सकता है। क़ानून कहता है कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे आपस में सम्बन्ध नहीं बना सकते हैं। ये अपराध की श्रेणी में आ जाता है। लेकिन बच्चों में क्यूरिऑसिटी है, वो मित्रता भी करते हैं। कई बार साथ निकल भी जाते हैं। ऐसे मामले भी आजकल काफी हो गए हैं।”

डीजीपी ने कहा कि दुर्घटना होने की स्थिति में लड़कियों को किससे संपर्क करना है, कैसे करना है – उन्हें ये सब बताना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि लड़कों को और उनके परिवारों को भी समझाना पड़ेगा। इससे पहले उन्होंने बताया था कि राजस्थान सरकार बलात्कार के मामलों में तेज़ी से एक्शन ले रही है और कुछ NGO के साथ मिल कर यौन हिंसा के विरोध में माहौल बनाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

उधर भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान के सभी जिलों में सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को राज्य में महिलाओं, बच्चों और दलितों के खिलाफ बढ़ रहे अत्याचार और गैंगरेप की घटनाओं के विरोध में प्रदर्शन की योजना बनाई है। सुबह 11 बजे सभी जिलों के डीएम को भाजपा नेताओं की तरफ से ‘हल्ला बोल’ कार्यक्रम के तहत ज्ञापन सौंपा जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियाँ जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय से सविल लाइंस फाटक तक पैदल मार्च करेंगे।

NCRB की सूची के मुताबिक, सबसे ज्यादा बलात्कार की घटनाएँ राजस्थान में सामने आई हैं। वहाँ पिछले साल 5997 मामले दर्ज किए गए। यानी प्रतिदिन का औसत देखा जाए तो प्रदेश में हर दिन 16 रेप की घटना हुई। इतना ही नहीं, प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर अपराध की दर 15.9 है। साल 2019 में भारत में रेप के 30,641 मामले दर्ज किए गए थे।

2019 में राजस्थान में आए बलात्कार के मामलों में 1313 मामले ऐसे थे, जिनमें पीड़ित की उम्र 18 वर्ष से कम थी, वो नाबालिग थे। दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा जयपुर में ही 517 मामले दर्ज किए गए। प्रति एक लाख की जनसंख्या में राजस्थान की राजधानी में बलात्कार के 35.6 मामले सामने आए, जो बड़े शहरों में सबसे ज्यादा है। इसी तरह 2017 में राज्य में बलात्कार के 3305 और 2018 में 4335 मामले सामने आए थे।

2017 से 2018 के बीच बलात्कार के मामलों में 2.4% की बढ़ोतरी हुई लेकिन 2018-19 में 4.2% की उछाल आई, जो पिछली वृद्धि की तुलना में लगभग दोगुनी थी। राजस्थान यूनिवर्सिटी में सोशियोलॉजी डिपार्टमेंट की हेड रश्मि जैन ने TOI को बताया कि राज्य के लोग अभी भी उसी सामंती सोच में रह रहे हैं, जिसमें महिलाओं को ऑब्जेक्ट की तरह ट्रीट किया जाता है। उन्होंने कहा कि रेप का शिक्षा से भी कोई सीधा सम्बन्ध नहीं क्योंकि सबसे ज्यादा साक्षरता दर वाले केरल में भी काफी मामले हैं।

कासिम ने 13 साल के बच्चे को मारते-मारते जान से मार दिया, दफना भी दिया… आरोप सिर्फ चॉकलेट चुराने का

बिहार के मधुबनी जिले के हरलाखी थानांतर्गत सोठगाँव में एक 13 वर्षीय बच्चे को बेरहमी से पीट-पीट कर मार देने का मामला सामने आया है। बच्चे पर चॉकलेट चोरी का आरोप था। उसकी पहचान गाँव के ही हवीव राइन के पुत्र मोहम्मद अहमद राइन के रूप में हुई। उसे मारने का आरोप गाँव के ही अन्य लोगों पर है।

हत्या के इस मामले में शिकायत घटना के चार दिन बाद हुई। आरोपितों ने बच्चे को मारकर तब तक दफन कर दिया था। शिकायत के बाद बच्चे के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए कब्र से निकाला गया और मुख्य आरोपित कासिम को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अहमद 30 सितंबर को अपने कुछ दोस्तों के साथ खेलने के लिए घर से निकला था। उसके पिता उस समय साबुन बेचने बाजार गए थे और माँ खेत में घास काटने गई थी।

दोस्तों के साथ खेलने के दौरान वह कासिम नाम के व्यक्ति के घर की ओर चला गया। जहाँ उसे कासिम और उसके घर वालों ने दुकान में चोरी का आरोप लगाकर पकड़ लिया और उसे खंबे से बाँधकर बुरी तरह पीट दिया, इससे बच्चे की मौत गई।

खबर से संबंधित लोकल न्यूज कवरेज

स्थानीय समाचारों की मानें तो घटना के बाद सभी आरोपित बच्चे के घर गए और उसके घर वालों से माफी माँगते हुए मुआवजा देने की बात कही। इसके बाद बच्चे को भी कब्र में दफना दिया गया। हालाँकि, चार दिन बाद इस मामले में शिकायत हुई और बच्चे के पिता ने आरोप लगाया कि उन लोगों को इतने टाइम तक घर में कैद करके रखा गया था। अपनी शिकायत में बच्चे के पिता ने मो कासिम राइन, मो नाजिम राइन, नसीम राइन, मो जिलानी राइन, दाऊद राइन, रुवानी राइन व रजाउल्लाह राइन के खिलाफ FIR करवाई।

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपित मोहम्मद कासिम को गिरफ्तार किया। वहीं, एसपी के निर्देश पर मजिस्ट्रेट के सामने शव को कब्र से बाहर निकाला गया और बाद में पोस्टमॉर्टम के लिए भी भेजा गया। जानकारी के अनुसार, बच्चे को पीट-पीट कर मारने के बाद कासिम ने देखा कि बच्चे की मौत हो गई, तो वह बच्चे को उसके घर में छोड़ कर भाग आया। 

शव को देख कर परिजन ने पुलिस को बुलाना चाहा, तो समाज के कुछ लोगों ने कानूनी पचड़े में नहीं पड़ने की सलाह देते हुए शव को दफना दिया। साथ ही परिजनों के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी।

कासिम का आरोप है कि अहमद ने उसकी परचून की दुकान से चॉकलेट चुराई थी, जिसके बाद उसने बच्चे के साथ मारपीट की। थानाध्यक्ष प्रेम लाल पासवान ने इस मामले में बताया कि गिरफ्तार करने के बाद कासिम को जेल भेज दिया गया है। वहीं अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों हरलाखी थाना क्षेत्र के ही एक गाँव से एक बच्ची के अपहरण और धर्म-परिवर्तन का मामला सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने करीब 20 दिनों बाद लड़की को अहमदाबाद से बरामद किया था। साथ ही गाँव के ही मो साबिर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

‘तुम डो# हो, विधानसभा में नहीं घुसने देंगे’ – तेजस्वी और तेज प्रताप पर FIR, दलित नेता की हत्या का मामला

बिहार में 37 वर्षीय दलित नेता शक्ति मलिक की हत्या के मामले में तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को आरोपित बनाया गया है। दलित नेता शक्ति मलिक की रविवार (अक्टूबर 4, 2020) को पूर्णिया स्थित उनके आवास के बाहर ही गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। वो राष्ट्रीय जनता दल के ही नेता थे। मृतक नेता की पत्नी ने भी आरोप लगाया है कि उनकी हत्या राजनीतिक हत्या है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

इस मामले में राजद दलित सेल के अध्यक्ष अनिल कुमार साधु, अररिया से पार्टी के नेता कालो पासवान, सुनीता देवी और एक अन्य राजद नेता को भी इस मामले में आरोपित बनाया गया है। शक्ति मलिक को राजद सुप्रीमो लालू यादव ने पार्टी से निकाल दिया था, जिसके बाद उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने की ठानी थी। पुलिस इस हत्याकांड के खुलासे के लिए तलाशी अभियान चला रही है।

शक्ति मलिक ने एक वीडियो के माध्यम से आरोप लगाया था कि राजद नेता तेजस्वी यादव ने रानीगंज सीट से पार्टी का टिकट देने के एवज में उनसे 50 लाख रुपए का डोनेशन माँगा था। रविवार को तड़के सुबह 3 बजे मास्क पहने 3 अपराधी उनके घर में घुसे और उनकी गोली मार कर हत्या कर दी। उस समय घर में सिर्फ उनकी पत्नी, बच्चे और एक ड्राइवर थे। उन्हें सदर अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

के हाट पुलिस स्टेशन के एसएचओ सुनील कुमार मंडल ने कहा कि क्राइम सीन से एक देशी पिस्टल और एक खाली कारतूस बरामद किया गया है। एसपी विशाल शर्मा और सदर डीएसपी आनंद पांडेय ने भी घटनास्थल का दौरा किया। शक्ति मलिक को तीन गोलियाँ लगी थीं। पुलिस ने बताया कि हर एंगल से इस मामले की जाँच की जा रही है। क्राइम सीन से एक लोडेड हथियार की बरामदगी भी हुई है।

अब जब बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में 1 महीने के आसपास बचे हुए हैं, जदयू ने राजद पर निशाना साधते हुए कहा है कि तेजस्वी यादव ने अपना असली रंग देश के सामने दिखा दिया है। शक्ति मलिक ने अपने वीडियो में ये भी आरोप लगाया था कि तेजस्वी यादव ने उनकी जाति को लेकर उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनका कहना था कि वो राजद दलित प्रकोष्ठ के प्रमुख के साथ पूर्णिया दौरे पर आए थे, तब उन्होंने ऐसा किया था।

वीडियो में शक्ति मलिक के बयान के अनुसार, तेजस्वी यादव ने उन्हें ‘डो#’ जाति का बताते हुए कहा था कि तुम्हें विधानसभा नहीं जाने देंगे। उन्होंने अनिल कुमार साधु पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्होंने यह कह कर धमकी दी थी, “राजद में एक से बढ़ कर एक क्रिमिनल सब है। जब तुम क्षेत्र में जाओगे या अच्छा काम करोगे तो मार कर फेंकवा दिए जाओगे।” जदयू के कई नेताओं ने इस हत्याकांड के लिए लालू परिवार पर निशाना साधा है।

बता दें कि बिहार में जब से विधानसभा चुनाव का ऐलान हुआ है, तब से हत्या की यह कोई पहली वारदात नहीं है। कुछ दिनों पहले भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष राजेश कुमार झा उर्फ राजा बाबू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राजेश कुमार झा की पटना में हत्या हुई थी। वह बेउर थाना क्षेत्र के अंतर्गत तेज प्रताप नगर में अपने घर के नज़दीक टहलने के लिए निकले थे, तभी दो पहिया वाहन सवार नकाबपोश अपराधी उनके नज़दीक आए और उनकी कनपटी पर गोली मार दी। 

‘हत्यारे’ कंडक्टर की #मीडिया_लिंचिंग: जिसे फाँसी से बचाया उस माँ-बाप ने, जिनका 7 साल का बच्चा मारा गया था

प्रद्युम्न ठाकुर का नाम सुना है? कुछ वर्ष पहले सुना होगा, बस अचानक पूछ लेने पर आपको याद नहीं आया है। दिल्ली के पास गुरुग्राम में ये रयान इंटरनेशनल स्कूल का छात्र था। ये सात साल का बच्चा एक दिन (8 सितम्बर 2017) स्कूल में ही एक वाशरूम के पास मिला। उस वक्त उसके गले और शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। अफरातफरी में उसी स्कूल के एक बस कंडक्टर पर बच्चे की हत्या करने का अभियोग लगा।

पुलिस ने प्रारंभिक जाँच के बाद उसी बस कंडक्टर को हत्या के अभियोग में गिरफ्तार कर लिया। बच्चे की मौत हो चुकी थी, वो गवाही देने की स्थिति में नहीं था और सोशल मीडिया पर अपना क्षोभ व्यक्त कर रहे कई लोगों का मानना था कि ये हत्या चरसी कंडक्टर ने ही की है।

हरियाणा पुलिस की जाँच सीसीटीवी कैमरे पर आधारित थी। उसमें नजर आ रहा था कि प्रद्युम्न के गले से खून बह रहा है और वो जैसे-तैसे वॉशरूम से बाहर आने की कोशिश कर रहा है। वो लम्बे गलियारे में गिर पड़ा। स्कूल के कर्मचारी वहाँ पहुँच गए थे और उन्होंने अशोक कुमार नाम के कंडक्टर को मदद के लिए कहा। अशोक ने ही प्रद्युम्न को उठाकर कार में डाला था, जिससे उसे अस्पताल ले जाया गया।

एक नामी-गिरामी स्कूल में हुई बच्चे की हत्या की खबर से सारा देश हिल गया। हरियाणा पुलिस ने दस लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और कपड़ों पर लगे खून और उँगलियों के निशान के आधार पर अशोक कुमार को कातिल घोषित कर दिया। ये निशान संभवतः बच्चे को कार तक पहुँचाने में अशोक कुमार के कपड़ों पर लग गए होंगे।

उस वक्त के डीसीपी सुमित कुमार ने बताया कि बस के टूल किट में वो सब्जी काटने वाला चाकू था, जिससे हत्या हुई। कहा गया कि उसे धोने के लिए कंडक्टर अशोक स्कूल के बाथरूम में ले गया था, जहाँ प्रद्युम्न पहले से मौजूद था। अशोक ने बच्चे का यौन शोषण करने की कोशिश की और बच्चे के विरोध करने पर उसने चाकू चला दिया जिससे बच्चे की जान चली गई। पुलिस ने यह भी कहा कि इस हत्या में केवल कंडक्टर अशोक ही शामिल था, उसका कोई साथी नहीं था।

एक गरीब बस कंडक्टर, वो भी पुलिस के मुताबिक नशेड़ी, ऊपर से बच्चे का यौन शोषण करने की कोशिश में उसकी हत्या कर दे! ऐसे किसी को कोई मदद क्यों मिलनी चाहिए? हरियाणा बार एसोसिएशन के वकीलों ने भी साफ़ कह दिया कि इस गरीब, नशेड़ी कंडक्टर का मुकदमा उनमें से कोई नहीं लड़ने वाला। बात भी सही थी, आखिर एक गरीब बेकसूर भी हो सकता है, ऐसा सोचा भी क्यों जाए?

मगर समस्या यह थी कि प्रद्युम्न ठाकुर के परिवार वाले ये मानने को तैयार नहीं थे कि अशोक नाम के उस बस कंडक्टर ने उनके बच्चे की हत्या की है। इस वक्त तक हरियाणा पुलिस अपने तरीकों से अशोक से अपराध भी कबूल करवा चुकी थी। इन सबके बावजूद प्रद्युम्न के माता-पिता मान नहीं रहे थे कि ये हत्या अशोक नाम के कंडक्टर ने की है। संभवतः पूरे मामले में इक्का-दुक्का लोगों को छोड़ कर सिर्फ वही थे, जो गरीब कंडक्टर को फाँसी पर टाँगने को तैयार नहीं थे।

आखिरकार बच्चे के माता-पिता के दबाव पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मामले की जाँच का काम सीबीआई को दे दिया। जाँच जब ढंग से शुरू हुई तो मामले में नए खुलासे होने लगे। जिस बस में कंडक्टर अशोक काम करता था, उसके ड्राइवर सौरभ ने बताया कि चाकू बस के टूल किट में था, ऐसा कहने के लिए उसे पुलिस ने कहा था।

प्रद्युम्न के शव की फॉरेंसिक जाँच में पता चल चुका था कि यौन शोषण का कोई मामला नहीं था। स्कूल के माली हरपाल सिंह ने बताया कि पहले अशोक के कपड़ों पर खून के कोई दाग नहीं थे। वो निशान बच्चे को कार तक पहुँचाने में ही लगे होंगे।

थोड़े ही समय के बाद सीबीआई की जाँच रयान इंटरनेशनल स्कूल के ही ग्यारहवीं कक्षा के एक छात्र तक पहुँच गई। सोलह वर्षीय इस छात्र ने प्रद्युम्न की हत्या इसलिए की थी ताकि स्कूल की पैरेंट-टीचर मीटिंग ना हो और परीक्षाएँ कुछ दिनों के लिए टाल दी जाएँ।

जैसा रायन इंटरनेशनल स्कूल है, ये कहना नहीं होगा कि हत्या करने वाला ये “बच्चा” किस किस्म के आर्थिक परिवेश से आता था। स्कूल प्रबंधन में लापरवाही बरतने के लिए रयान इंटरनेशनल स्कूल के तीन ट्रस्टी भी बाद में गिरफ्तार हुए थे। उन्हें कुछ समय बाद जमानत मिल गई।

इस मामले के खुलने के बाद हरियाणा की सरकार ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा बढ़ाए जाने के लिए कई नीतिगत सुधार भी किए थे। जनभावनाओं का अंदाजा लगाना हो तो बता दें कि इस मामले में जनता से शांति बनाए रखने के लिए, मृत बच्चे के पिता, वरुण ठाकुर को जनता से अपील करनी पड़ी थी।

जाहिर है कि हरियाणा एक भाजपा शासित राज्य था तो “बनाना रिपब्लिक” की तर्ज पर किसी को पकड़ कर फाँसी पर टाँग देने के लिए कई गिरोह लालायित थे। जनभावनाओं का उन्होंने जम कर दोहन भी किया और बेक़सूर गरीब बस कंडक्टर अशोक कुमार की #मीडिया_लिंचिंग तो लगभग कर ही डाली थी। शुक्र है कि प्रद्युम्न के माता-पिता नहीं माने और उन्होंने मामले की पूरी जाँच करवा डाली।

पुरानी घटनाओं से सीखना हो तो सबसे पहले ये सीखिए कि अपराध के मामले हों तो जज्बात आपा को घर छोड़ आइए। जरा-जरा सी बात पर हर्ट होती सेंटिमेंट सिस्टर और हर मोड़ पर जिसे ठेस लग जाए, ऐसी जज्बात आपा का यहाँ कोई काम नहीं होता।

जघन्य अपराधों के मामले में मीडिया लिंचिंग नहीं तटस्थ भाव से जाँच की जरूरत होती है। बाकी राजनेताओं का क्या है? आज गिद्ध की तरह हाथरस में मंडरा रहे हैं तो कल कहीं और होंगे। जज्बात आपा को घर छोड़ कर ना आने की वजह से किसी बेक़सूर की मीडिया लिंचिंग में आप शामिल होना चाहते हैं, या बेगुनाह के क़त्ल का पाप अपने सर नहीं लेना, ये तो आपको सोचना है।

हाथरस केस के बहाने दंगा भड़काना चाहता है विपक्ष: CM योगी ने बताया- क्यों रची जा रही साजिश

हाथरस मामले को कॉन्ग्रेस, टीएमसी और अन्य विपक्षी दल अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने के लिए इस्तेमाल कर रहे है। इधर इस मामले पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि विपक्ष राज्य में सांप्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिश कर रहा है।

हत्या और कथित बलात्कार के मामले में विपक्ष द्वारा जारी विरोध-प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सीएम ने कहा, “जिसे विकास अच्छा नहीं लग रहा, वे लोग देश में और प्रदेश में भी जातीय दंगा, सांप्रदायिक दंगा भड़काना चाहते हैं। इस दंगे की आड़ में विकास रुकेगा। इस दंगे की आड़ में उनकी रोटियाँ सेंकने के लिए उनको अवसर मिलेगा, इसलिए नए-नए षड्यंत्र करते रहते हैं।”

उल्लेखनीय है कि घटना की आड़ में राज्य में आपराधिक साजिश रचने वालों के खिलाफ यूपी पुलिस द्वारा आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज करने के बाद बिना किसी का नाम लिए यूपी सीएम की यह टिप्पणी सामने आई है।

खबरों के मुताबिक, पुलिस को संदेह है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) दंगे भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।

इन संगठनों द्वारा हाथरस मामले का इस्तेमाल कर प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा और अराजकता पैदा करने के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग की जा रही है। इसके अलावा योगी सरकार द्वारा माफिया समूह से वसूली कराए जाने और घरों की कुर्की कराने जाने की सख्त कार्रवाइयों से परेशान तत्वों ने प्रशासन से बदला लेने के लिए इस अवसर का उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस को पता चला है कि जो तत्व एंटी-सीएए दंगों के पीछे थे, वह भी एक और दंगा यूपी में कराने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस सोशल मीडिया और मीडिया पर फर्जी समाचार और तस्वीरें फैलाकर हिंसा भड़काने में समन्वित प्रयास की ओर इशारा कर रही है, जिसके जरिए लोगों को उकसाया जा रहा है।

यूपी पुलिस के अनुसार, हाथरस मामले से जुड़ी कई झूठी खबरें- जैसे जीभ काट दी गई, आँखें फोड़ दी गई, गैंग-रेप जैसे तमाम अफवाहें उड़ा कर नफरत की आग भड़काने की कोशिश की गई थी। वहीं फर्जी तस्वीर को भी हाथरस मामले की पीड़िता बताते हुए वायरल किया गया था। जिन लोगों ने भी इस तरह के भड़काने और उकसाने वाली बातें और फोटो वायरल की है, वह सभी अब पुलिस की निगरानी में हैं।

इसके अलावा पुलिस ने पीड़ित के परिवार को विशेष बयान देने और लालच देकर मामले में हस्तक्षेप करने की कोशिश करने वाले मीडिया हाउसों को भी संदर्भित किया है। पीड़ित परिवार और पत्रकारों के बीच बातचीत के लीक ऑडियो से पता चला था कि परिवार को सरकार के खिलाफ भड़काऊ बयान देने का लालच दिया जा रहा था।

बता दें कि प्रदेश में अराजकता पैदा करने के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग की बात भी सामने आ रही है। खुफिया रिपोर्ट में योगी सरकार को बदनाम करने के लिए 100 करोड़ रुपए की फंडिंग की बात भी सामने आ रही है। यूपी सरकार को भेजी गई खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि चूँकि पीड़िता दलित थी, इसलिए हाथरस के बहाने उत्तर प्रदेश में जातीय और सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

बिग बॉस और राधे माँ: स्वयंभू हिन्दुवादी चेहरों को पेश कर धर्म का उपहास करने की एक और स्क्रिप्ट क्यों?

इस बात पर बहस का कोई अंत नहीं है कि एक धर्म का बुनियादी ढाँचा बिगाड़ने के कितने प्रयास हुए थे और लगातार हो रहे हैं। इस स्वभाव के प्रयासों में अच्छी-भली आबादी शामिल है। राजनीति से लेकर मनोरंजन तक और छोटे परदे से लेकर बड़े परदे तक, सारा द्वेष सिर्फ एक शब्द से है ‘हिन्दू’। कहीं इस शब्द को कट्टरता का प्रतीक बताया जाता है तो कहीं इस शब्द की धुरी पर दोयम दर्जे के उदाहरण पेश किए जाते हैं। उदाहरण पेश करने वालों की लंबी सूची का मोटा नाम है ‘बिग बॉस’

यह तर्क बहुत से लोगों के लिए विचित्र होगा कि आखिर एक मनोरंजन परोसने वाला रियलिटी शो हिन्दू शब्द का मज़ाक कैसे बना सकता है? इसका प्रश्न का जवाब असल में उतना कठिन भी नहीं है, जितना पहली बार में नज़र आता है। यह प्रयास दशकों पुराने भी नहीं है जो कालान्तर में भुला दिए गए हों, सबसे बड़ी समस्या यही है कि सारे उपक्रम हाल फ़िलहाल के हैं

टीवी की दुनिया के सबसे चर्चित कार्यक्रमों में एक बिग बॉस के पिछले कुछ सीज़न पर गौर करिए। हिन्दू धर्म के ऐसे नुमाइंदे ही बुलाए गए जिन्होंने लाखों-करोड़ों लोगों के सामने धर्म की ऐसी तस्वीर पेश की जिस पर एक आम इंसान खीझने के अलावा कुछ और नहीं कर सकता है। 

इस बार बिग बॉस के सीज़न 14 का प्रसारण शुरू होने ही वाला है। इस सीज़न की शुरुआत सुखविंदर कौर उर्फ़ ‘राधे माँ’ नज़र आने वाली हैं। यह कौन हैं इस बारे में लगभग सभी जानते हैं और यह क्या करती हैं यह फ़िलहाल चर्चा का विषय नहीं है। इनके नाम ही स्पष्ट है कि यह अपना चित्रण किस तरह करती हैं, इनके तमाम साक्षात्कारों के वीडियो मौजूद हैं। 

जिन वीडियो में वह खुद को देवी तुल्य बताती हैं और अक्सर अपने तथाकथित भक्तों के साथ नृत्य भी करती हैं। राधे माँ की धार्मिक और सात्विक मौलिकता कितनी है इस बारे में एक बहुत बेहतर उदाहरण है। साल 2017 में आखाड़ा परिषद ने नकली धर्म गुरुओं और बाबाओं की सूची तैयार की थी, जिसमें सुखविंदर कौर उर्फ़ राधे माँ का नाम भी शामिल था।       

सीज़न 10 को याद कीजिए। स्वामी ओम, खुद ही सोचिए कि 2016 के पहले इस नाम से कितने लोग परिचित थे। एक ऐसा व्यक्ति जिसके गले में रुद्राक्ष की मालाएँ हैं, जिसने टीका लगा रखा है, वह खुद को धर्म का विशेषज्ञ बताता है और धर्म को लेकर ऐसे दावे करता है, जिन्हें सुन कर एक आम इंसान का धर्म से विश्वास उठ जाए। सभी जानते हैं कि बिग बॉस देखने वालों की संख्या लाखों में है। 

ऐसे में कल्पना करिए एक स्वघोषित हिन्दू धर्म के नुमाइंदे ने हिन्दू शब्द के इर्द-गिर्द किस तरह की लकीर खींची। बिग बॉस के बाद भी स्वामी ओम ने मूर्खता भरी हरकतों का साथ नहीं छोड़ा। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए जिसमें लोग उसे बुरी तरह पीट रहे हैं या खुद उसकी बातों का मज़ाक बना रहे हैं। यह तो केवल एक उदाहरण है। ऐसे कई और नमूने हैं। 

बिग बॉस का सीज़न 11, जिसमें शिवानी दुर्गा नाम की तथाकथित महिला तांत्रिक आई थीं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ इन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय से पीएचडी की है और उसके बाद अघोर तंत्र की दीक्षा ली। उज्जैन के सिंहस्थ के दौरान उनका नाम विवादों से जुड़ा था। वह बिग बॉस में बहुत समय तक नही थीं, लेकिन जितने समय थीं उस दौरान इन्होंने कोई ऐसी नज़ीर नहीं पेश की जो धर्म के हित में होती। उल्टा बिग बॉस में रहते हुए इनके क्रियाकलापों के तमाम वीडियो चर्चा का कारण बने रहे। 

इस बात को लेकर अक्सर दावे होते रहते हैं कि बिग बॉस तय स्क्रिप्ट पर चलने वाला शो है। अगर इस दावे में ज़रा भी सच्चाई है तो उसका मतलब यही है कि धर्म के तथाकथित नुमाइंदे जितनी भी बातें करते हैं सब पहले से तय होती हैं। इस प्रक्रिया में एक बात की परवाह कतई नहीं की जाती है कि धर्म जैसे अहम विषय पर कही जाने वाली बातों में कितनी गंभीरता है। या उस बात से धर्म की छवि पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

बेशक किसी धर्म का प्रतिनिधित्व ऐसे लोगों के माथे नहीं हो सकता है। लेकिन देखने वालों के बीच धर्म को लेकर निराधार और हास्यास्पद संदेश ही जाता है। यह भी कितना विकट संयोग है कि इस शो में कभी किसी मज़हब विशेष का स्वघोषित विशेषज्ञ नहीं नज़र आता है। धर्म के नाम पर जितना कुछ नज़र आता है वह सिर्फ हिन्दू है, चाहे कितना ही हास्यास्पद और मिथ्या क्यों न हो। इसके बावजूद इस धर्म की सहिष्णुता पर अक्सर सवाल खड़े किए जाते हैं।    

हाथरस केस में वायर का प्रोपेगेंडा, पीड़िता के बयान को डॉक्टर की रिपोर्ट बताकर पेश किया

उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित लड़की की हत्या और कथित सामूहिक बलात्कार का मामला विपक्षी दलों के लिए भाजपा सरकार पर हमला करने का एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। मामले में बलात्कार के बारे में अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। 

उत्तर प्रदेश पुलिस ने फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि लड़की के साथ रेप नहीं हुआ था, मगर इस दावे के विपरीत आज (अक्टूबर 4, 2020) वामपंथी पोर्टल ‘द वायर’ ने एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट पब्लिश की। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल द्वारा तैयार किए गए मामले पर एक मेडिको-लीगल एग्जामिनेशन रिपोर्ट पुलिस वर्जन को गलत ठहराती है।

द वायर ने 54 पन्नों की रिपोर्ट को एक्सेस किया है और इसके आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि पीड़िता के साथ बलात्कार किया गया था। लेकिन हम आपको बता दे, पोर्टल द्वारा एक्सेस की गई रिपोर्ट में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया है। मेडिकल रिपोर्ट के कई दूसरे हिस्सों को अनदेखा किया गया है, जिसमें किसी भी यौन हमले का उल्लेख नहीं है।

द वायर ने लिखा, “JNMCH द्वारा किए गए पीड़िता की MLC रिपोर्ट के सेक्शन 16 में डॉक्टर के रिकॉर्ड के अनुसार, घटना के दौरान पीड़ित की योनि के अंदर पेनिस गया था। अगले कॉलम में, डॉक्टरों ने कहा कि पेनिट्रेशन ‘पूरा’ था।” लेकिन यह तथ्य लोगों को गुमराह करने के अलावा और कुछ भी नहीं है, क्योंकि सेक्शन 16 में जिस कंटेंट के बारे में कहा गया है, इसमें डॉक्टरों द्वारा किए गए किसी भी मेडिकल परीक्षण का उल्लेख नहीं है। इसमें केवल पीड़ित द्वारा दिए गए बयानों का ही उल्लेख है।

बता दें यह सेक्शन ‘Details provided by the survivor’ के अंतर्गत आता है और सेक्शन 16 को “Details of the Act” टाइटल दिया गया है। इसलिए इसमें केवल वही बातें रिकॉर्ड की जाती है जो पीड़ित द्वारा घटना के बारे में बताया जाता है। द वायर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये बातें डॉक्टर की तरफ से कही गई है, मगर ऐसा नहीं है।

Victim’s statement included in the MLC report

रिपोर्ट में आगे ‘Orifice penetrated’ के बारे में कहा गया है कि यह पूरी तरह से हुआ था और पेनिस के माध्यम से हुआ था। हालाँकि आगे के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया गया, क्योंकि पीड़िता को इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था, वह बेहोश हो गई थी।

इसका उल्लेख रिपोर्ट में ही किया गया है, जिसे वायर ने अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। अब सवाल उठता है कि यदि ये डॉक्टरों द्वारा किए गए अवलोकन थे, तो उन सवालों के जवाब भी होने चाहिए। मगर ऐसा नहीं है। इससे यह साफ होता है कि सेक्शन 16 में घटना को लेकर केवल पीड़िता का ही बयान है। इसमें उन डॉक्टरों की राय नहीं है जिन्होंने पीड़िता का इलाज किया था। वायर ने पीड़िता के बयानों को डॉक्टरों का बयान बताते हुए लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की।

गौरतलब है कि घटना के कुछ दिनों बाद सामने आए एक वीडियो में भी पीड़िता की माँ ने सिर्फ हमले का जिक्र किया था। उस समय माँ ने भी किसी भी तरह के बलात्कार का आरोप नहीं लगाया था।

हालाँकि बलात्कार की पुष्टि करने वाली पीड़िता का बयान मामले के संदर्भ में बहुत ही सांकेतिक है, लेकिन रिपोर्ट इसकी पुष्टि नहीं करती है, जैसा कि वायर ने दावा किया है। रिपोर्ट के कई अन्य बिंदु भी ध्यान देने योग्य हैं, जिससे पता चलता है कि रिपोर्ट बलात्कार के आरोप के बारे में निर्णायक नहीं है, और जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती, निष्कर्ष पर आने से बेहतर है कि इंतजार कर लिया जाए। रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु दिए गए हैं जिनके बारे में वायर ने अपने पूरी रिपोर्ट में कहीं भी उल्लेख नहीं किया है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के तहत जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट की शुरुआत में कहा गया है कि मरीज को 14 सितंबर को एडमिट किया गया था। इसमें कहा गया, “मुखबिर द्वारा आरोप लगाया गया था कि जब मरीज खेत में कुछ काम कर रही थी तो एक अज्ञात शख्स ने गर्दन में दुपट्टा फँसा कर उसे पीछे से घसीटा था।”

मुखबिर लड़की के पिता ओम प्रकाश थे। इससे पता चलता है कि इस घटना के पहले आधिकारिक रिकॉर्ड में बलात्कार का उल्लेख नहीं था। इसमें कहा गया कि लड़की पर एक शख्स ने हमला किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लड़की को तब होश आया जब उसे अस्पताल लाया गया था।

Statement of father of Hathras victim on 14 September

रिपोर्ट में दर्ज की गई पीड़िता की फिजिकल कंडीशन का विस्तृत अवलोकन गर्दन पर चोट के निशान का उल्लेख करता है, जो पिता के बयान से मेल खाता है कि उसका गला घोंटा गया था। रिपोर्ट में इस सेक्शन में किसी भी यौन हमले का उल्लेख नहीं किया गया है।

22 सितंबर को जब पीड़िता की हालत काफी नाजुक हो गई थी तो अस्पताल ने एक मजिस्ट्रेट से उसका बयान रिकॉर्ड करने के लिए कहा। इसी समय पहली बार बलात्कार का आरोप लगाया था और साथ ही एक से अधिक हमलावरों की भी बात कही गई थी। 22 सितंबर को दर्ज की गई रिपोर्ट में उसके पिता का बयान है, जिसमें लिखा गया है, “मुखबिर द्वारा कथित रूप से, पीड़िता के साथ उसी गाँव के चार ज्ञात व्यक्तियों द्वारा यौन उत्पीड़न किया गया था, जब वह 14 सितंबर 2020 को सुबह 9:00 बजे बुलगढ़ी गाँव के खेतों में कुछ काम कर रही थी। 

Statement of father of Hathras victim on 22 September

इस तरह एक हफ्ते में ही पिता का बयान “एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा गला घोंटना” से चार ज्ञात व्यक्तियों द्वारा यौन उत्पीड़न” में बदल गया। यह काफी महत्वपूर्ण बदलाव है।

नए आरोप लगाए जाने के बाद, यौन उत्पीड़न के लिए एक फोरेंसिक एग्जामिनेशन की गई, जिसके डिटेल्स रिपोर्ट में है। फॉरेंसिक जाँच के ‘Details provided by the survivor’ सेक्शन के रिपोर्ट में हमलावरों के रूप में उसी गाँव के संदीप, रामू, लवकुश और रवि का नाम है। इसके अलावा वायर की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें पेनिस द्वारा वेजाइनल पेनिट्रेशन (vaginal penetration) का भी उल्लेख है। हालाँकि इसमें इस बात का जिक्र नहीं है कि चारों बलात्कार में शामिल थे या नहीं।

बलात्कार के मामलों को निर्धारित करने में एक महत्वपूर्ण कारक अल्ट्रा वायलेट लाइट के तहत पीड़ित के शरीर की जाँच है। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि अल्ट्रा वायलेट लाइट के तहत जाँच नहीं की गई थी, क्योंकि शरीर को कई बार साफ कर दिया गया था। रेप का आरोप एक सप्ताह बाद लगाया गया था। अगर यह आरोप सच है तो इस तरह से मामले में अहम सबूत खो चुका है।

रिपोर्ट में पीठ और नितंबों पर चार चोट के निशान का उल्लेख है, लेकिन जननांग में कोई चोट नहीं बताई गई है। फोरेंसिक परीक्षा में लेबिया मेजा, लेबिया मिनोरा, मूत्रमार्ग, हाइमन, योनि, चौकोर और पेरिनेम में कोई चोट नहीं पाई गई, जैसा कि द वायर की रिपोर्ट में दावा किया गया है।

रिपोर्ट में शामिल स्पेकुलम परीक्षण का कहना है कि ‘कोई भी असामान्यता का पता नहीं चला है, गर्भाशय ग्रीवा और योनि स्वस्थ है।’

रिपोर्ट में जिन डॉक्टरों द्वारा परीक्षण की बात कही गई है, उनका कहना है, “परीक्षण के आधार पर मेरी राय है कि बलपूर्वक संभोग के संबंध में बल के संकेत हैं लेकिन FLS की रिपोर्ट आनी अभी बाकी हैं।” इन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि रिपोर्ट ने बलात्कार के आरोप के संबंध में राय सुरक्षित रखी है, इसकी पुष्टि नहीं की है, जैसा कि झूठा दावा ‘द वायर’ कर रहा है। राय में ‘बल के संकेत’ का जिक्र लड़की पर होने वाले शारीरिक हमले को संदर्भित करते हैं, क्योंकि रिपोर्ट में किसी भी यौन हमले का उल्लेख नहीं है, और इसमें जननांगों पर कोई चोट नहीं पाई गई है।

यह उल्लेखनीय है कि योनि और पेरिनेल स्वैब को मानक अभ्यास के अनुसार कई अन्य अंगों से स्वैब के अलावा, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए एकत्र किया गया था। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, FSL रिपोर्ट भी आ गई है, जिसमें बलात्कार के आरोपों से इनकार किया गया है। 

टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार अरविंद चौहान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग से एक फाइनल ओपिनियन रिपोर्ट पोस्ट की है, जिसमें कहा गया है कि वेजाइनल/एनल इंटरकोर्स का कोई संकेत नहीं है। रिपोर्ट यह भी कहता है कि शारीरिक हमले के सबूत हैं और गर्दन एवं पीठ पर चोट के निशान हैं, जो जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल द्वारा तैयार की गई मेडिकल रिपोर्ट से मेल खाता है।

इस तरह से मामले में बलात्कार का एकमात्र सबूत पीड़िता का बयान ही है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मृत्यु से पहले पीड़िता द्वारा दिया गया बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य है, और अदालतें किसी भी अन्य साक्ष्य के अभाव में, सिर्फ इस आधार पर भी अभियुक्तों को दोषी ठहरा सकती हैं। लेकिन तथ्य यह है कि किसी भी मेडिकल या फोरेंसिक रिपोर्ट में इसकी पुष्टि नहीं हो रही है, जैसा कि द वायर दावा कर रहा है।

JNMCH द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट बलात्कार की पुष्टि नहीं करती है, इसमें केवल पीड़िता का बयान और उसके पिता द्वारा बलात्कार का उल्लेख करने वाला दूसरा बयान शामिल है। द वायर द्वारा कथित तौर पर बलात्कार की पुष्टि करने वाले किसी भी डॉक्टर या किसी भी मेडिकल जाँच रिपोर्ट द्वारा कोई टिप्पणी नहीं की गई है।