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‘न्याय’ माँग रहे कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ ठहाके लगाते दिखे ‘दलित नेता’ उदित राज, वीडियो वायरल

कॉन्ग्रेस नेता लगातार हाथरस मामले को जातीय कोण देकर प्रदेश में राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। एक ओर जहाँ एक वंचित समाज की बेटी ने कथित तौर पर कुछ ‘सवर्णों’ के कारण अपनी जान गवाई है, वहीं कॉन्ग्रेसी राजनेताओं के लिए उसका घर अब पिकनिक स्पॉट बन गया है।

कुछ दिन पहले हमने हाथरस की तरफ कूच कर रहे राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा को वीडियो में हँसते हुए व लॉन्ग ड्राइव का आनंद उठाते देखा था। अब सोमवार (अक्टूबर 05, 2020) को यही दृश्य दलित नेता उदित राज के पहुँचने पर देखने को मिला।

हालाँकि, उदित राज को पहले यूपी गेट के पास गाजियाबाद पुलिस ने रोका क्योंकि उनके पास वहाँ जाने की अनुमति नहीं थी। मगर, उन्होंने दावा किया कि उन्होंने जिला प्रशासन और हाथरस एसपी व आगरा डीजीपी से अनुमिति ले ली है। इसके बाद उन्होंने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया, जिसकी बाद में वीडियो भी वायरल हुई। 

वीडियो में देख सकते हैं कि ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाते हुए प्रदर्शन पर बैठे कॉन्ग्रेसी नेता किस तरह ठहाके लगा रहे हैं। वहीं, उदित राज कॉन्ग्रेस की महिला समर्थक से हँसी-मजाक भी कर रहे हैं।

वीडियो में स्पष्ट देख सकते हैं कि पहले उदित राज महिला के कंधे पर हाथ रखकर उनके कान में कुछ फुसफुसाते हैं और उसके बाद सब मिल कर हँसने लगते हैं। गौर करने वाली बात है कि ऐसा दृश्य उस प्रदर्शन में देखने को मिलता है जहाँ कहने को एक मृत लड़की के लिए इंसाफ की माँग की जा रही हो।

बता दें कि इस वीडियो के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद उदित राज की बहुत आलोचना हो रही है। उन्हें उनके असंवेदनशील बर्ताव के लिए सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। उनसे सवाल पूछा जा रहा है कि क्या वह पिकनिक पर आए हैं।

उल्लेखनीय है कि हाथरस मामले के तूल पकड़ने के बाद से जिला मजिस्ट्रेट ने इलाके में सीआरपीसी की धारा 144 लगाई हुई है। इसमें 5 लोगों से ज्यादा को इकट्ठा होने की अनुमति नहीं है।

गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि उदित राज हाथरस में एक रैली निकालना चाहते थे, लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया। हालाँकि 6 वाहनों के साथ उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति दे दी गई।

जब उदित राज लड़की के घर पहुँचे तो उन्होंने पीड़ित परिवार के सदस्यों को गले लगाया। उन्होंने फोटो खिंचवाते हुए दावा किया कि वह मृतक लड़की के परिवार के साथ खड़े हैं, मगर जैसे ही फोटो खिंच गई वो फौरन लड़की के पिता के बगल से हट गए।

उन्होंने पीड़ित परिवार से मिलते हुए कोई कोरोना में जारी गाइडलाइन का पालन नहीं किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि परिवार से मिल कर उन्होंने अपनी संवेदना व्यक्त की है और दावा किया कि वह अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ेंगे।

याद दिला दें कि इससे पहले वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को भी संवेदनहीनता के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था। लोगों ने उनकी वीडियो शेयर करके ध्यान आकर्षित करवाया था कि कैसे पीड़ितों से मिलने जाते वक्त दोनों भाई-बहन हँस रहे हैं।

गौरतलब है कि हाथरस मामले में पीड़िता की मौत के बाद से तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। शुरू में पीड़िता के घरवालों ने कहा था कि उसका रेप हुआ है। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि रेप की बात गलत है। बाद में, स्थानीय पुलिस में परिवार द्वारा दर्ज किए गए प्रारंभिक बयान और पुलिस रिपोर्टें सामने आईं, जिसमें किसी भी बलात्कार या यौन हमले का उल्लेख नहीं किया गया था। जिससे पूरी घटना में सामने आए बयानों पर संदेह पैदा हो गया। इसके बाद आरोपितों की जाति को आधार बनाकर विपक्ष ने योगी सरकार पर निशाना साधा और पूरे मामले का राजनीतिकरण करने में जुट गए। ज्ञात हो कि इस केस में पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

हाथरस: UP सरकार ने की CBI जाँच की माँग, हलफनामे में SC को बताई अंतिम संस्कार करने की वजह

यूपी सरकार ने मंगलवार (अक्टूबर 06, 2020) को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर माँग की है कि उसे यूपी के हाथरस में लड़की से कथित बलात्कार और हमले की CBI जाँच का निर्देश देना चाहिए जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई निहित स्वार्थ से गलत और झूठे विमर्श नहीं रच पाएगा। सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में यूपी सरकार की माँग है कि PIL पर सुनवाई की जगह अदालत को CBI जाँच की निगरानी करनी चाहिए।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक अनुसूचित जाति की युवती से कथित सामूहिक बलात्कार और मौत के मामले में केस की SIT से जाँच कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है जिसकी सुनवाई चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की बेंच कर रही है।

पीड़िता के परिवार की सहमति से ही किया था रात को अंतिम संस्कार

उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें कहा गया है कि पीड़िता के परिवार की सहमति से ही उस रात अंतिम संस्कार किया गया था। मामले में एसआईटी की जाँच चल रही है। आज एसआईटी की टीम उस जगह पहुँची है, जिस जगह पीड़िता का शव जलाया गया था।

हलफनामे में बताया गया है कि जिला प्रशासन ने सुबह बड़े पैमाने पर हिंसा से बचने के लिए, रात में सभी धार्मिक संस्कारों के साथ पीड़िता के अंतिम संस्कार के लिए पीड़िता के माता-पिता को समझाने का फैसला लिया। इस घटना का राजनीतिक किया जा सकता था और कुछ निहित स्वार्थों द्वारा विभाजित जातिगत विभाजन से उत्पन्न राजनीतिक हिंसा को समाप्त करने के लिए ही अंतिम संस्कार किया गया।

‘राज्य सरकार को बदनाम कराने के लिए चलाए जा रहे हैं अभियान’

यूपी सरकार की ओर से, एसजी तुषार मेहता ने कहा कि इस घटना के बारे में निहित स्वार्थों द्वारा फैलाई जा रही झूठी बातें हैं और यही कारण है कि यूपी सरकार ने सीबीआई जाँच की सिफारिश करने का फैसला किया। राज्य सरकार ने कहा कि सीबीआई जाँच सुनिश्चित करेगी कि कोई निहित स्वार्थ से गलत और झूठे विमर्श नहीं रच पाएँ।

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का नोटिस मिलने का इंतजार किए बिना ही अपनी तरफ से हलफनामा फाइल कर दिया है। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि हाथरस कांड के बहाने राज्य सरकार को बदनाम करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया, टीवी और प्रिंट मीडिया पर आक्रामक अभियान चलाए गए। इस हलफनामे में कहा गया है कि चूँकि यह मामला अब पूरे देश के आकर्षण के केंद्र में आ गया है, इसलिए इसकी केंद्रीय एजेंसी से जाँच होनी चाहिए।

हलफनामे में कहा गया है कि खुफिया विभाग के मुताबिक, 29 सितंबर से कुछ लोग हालात को खराब करने के लिए सक्रिय हो गए थे। इसकी शुरुआत दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल से हुई। खुफिया विभाग के मुताबिक, कुछ लोगों ने 30 सितंबर को हाथरस में जमा हो कर दंगा भड़काने की साजिश रची और मामले को जातीय और धार्मिक रंग देने की कोशिश की।

यूपी सरकार ने हलफनामे में कहा कि राज्य सरकार सीबीआई को इस घटना की जाँच कर जातिगत संघर्ष को फैलाने के साथ ही हिंसा और मीडिया के कुछ वर्गों द्वारा तोड़-मरोड़कर पेश कर घटना का दुष्प्रचार करने वालों की सच्चाई को उजागर करने की माँग करती है।

यूपी सरकार ने दोहराई मेडिकल जाँच में बलात्कार की पुष्टि न होने की बात

इस बीच, यूपी सरकार ने SC में भी दोहराया कि जेजे मेडिकल अस्पताल अलीगढ़ की मेडिकल रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया बलात्कार की बात नहीं थी। यूपी सरकार के हलफनामे में कहा गया है कि नमूने को एफएसएल आगरा भेजा गया था, जिसने अपनी अंतिम राय बताई थी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक युवती का 14 सितंबर को कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया था और दो सप्ताह बाद नई दिल्ली के अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर देशभर में विवाद जारी है और इसमें कई तरह के नए खुलासे भी सामने आ रहे हैं।

हाथरस केस में सुनवाई के दौरान सीजेआई ने यचिकाकर्ताओं से कहा, “हर कोई कह रहा है कि घटना झकझोरने वाली है। हम भी यह मानते हैं। तभी आपको सुन रहे हैं, लेकिन आप इलाहाबाद हाईकोर्ट क्यों नहीं गए? क्यों नहीं मामले की सुनवाई पहले हाईकोर्ट करे, जो बहस यहाँ हो सकती है, वही हाईकोर्ट में भी हो सकती है। क्या ये बेहतर नहीं होगा कि हाईकोर्ट मामले की सुनवाई करे?” इस मामले में आगे की सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

पश्चिम बंगाल में BJP नेता मनीष शुक्ला की हत्या के आरोप में मोहम्मद खुर्रम और गुलाब शेख को CID ने किया गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के अपराध जाँच विभाग (CID) ने सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को बैरकपुर इलाके के टीटागढ़ पुलिस स्टेशन के पास भाजपा नेता मनीष शुक्ला की निर्मम हत्या के लिए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। हत्या रविवार (अक्टूबर 4, 2020) शाम करीब 8:30 बजे उस वक्त हुई जब वह एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पार्टी कार्यालय गए थे। कथित तौर पर, बाइक सवार हमलावरों ने शुक्ला को बेहद करीब से गोली मारी थी।

सीआइडी ने मामले में मोहम्मद खुर्रम और गुलाब शेख नाम के दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। खुर्रम को दिन में ही गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि शेख को 5 अक्टूबर और 6 अक्टूबर की मध्यरात्रि को गिरफ्तार किया गया। सीआईडी अधिकारियों ने दोनों से पूछताछ की और बताया कि मोहम्मद खुर्रम की मृतक भाजपा नेता के साथ ‘व्यक्तिगत दुश्मनी’ थी।

दोनों आरोपितों ने मनीष शुक्ला की हत्या किस मकसद से किया था, CID इसकी जाँच कर रही है। इसके साथ ही जाँच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उन दोनों ने इस हत्या के वारदात को अंजाम कैसे दिया। CID ने कहा है कि मामले की जाँच उन्हें अन्य आरोपितों तक ले जाएगी।

गौरतलब है कि भाजपा नेता मनीष शुक्ला की कथित तौर पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा की गई हत्या के एक दिन बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मामले की जाँच सीआईडी को सौंप दी थी। इस बात की जानकारी सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई ने रोष जताया था। संगठन का कहना था कि उन्हें तृणमूल सरकार के अंतर्गत काम करने वाली पुलिस पर भरोसा नहीं है।

भाजपा की तरफ से इस मुद्दे पर असहमति का एक सबसे बड़ा कारण पिछले कुछ समय में वहाँ पार्टी के कई कार्यकर्ताओं की अप्राकृतिक मृत्यु हुई है, जिसे राज्य की पुलिस ने आत्महत्या घोषित कर दिया या उस पर कोई नतीजा नहीं निकला। इन बातों को मद्देनज़र रखते हुए भाजपा ने इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग की है।

सोमवार (5 अक्टूबर 2020) को भाजपा कार्यकर्ता नील रतन सरकार अस्पताल के सामने इकट्ठा हुए, जहाँ मृतक का शरीर रखा गया था। कार्यकर्ताओं का कहना था कि शरीर उनके हवाले किया जाए। पार्टी ने इस बात की जानकारी दी कि वह अपने कार्यकर्ता का शव कोलकाता से ले जाना चाहते थे। हालाँकि, पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं की माँगों को सिरे से खारिज कर दिया था। पुलिस ने अस्पताल के लगभग हर गेट पर बैरीकेडिंग लगा दी थी, सिर्फ एम्बुलेंस और मरीजों को भीतर दाखिल होने की अनुमति दी थी।

CM गहलोत के कार्यकाल में हुआ था ‘द्रौपदी का चीरहरण’: पति को बंधक बना दलित महिला के साथ गैंगरेप में 4 दोषियों को आजीवन कारावास

राजस्थान के अलवर स्थित थानागाजी गैंगरेप मामले में एससी-एसटी कोर्ट ने सभी 5 आरोपितों को दोषी करार दिया है। मंगलवार (अक्टूबर 6, 2020) को स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया। ये मामला अप्रैल 26, 2019 का है, जब एक 19 वर्षीय दलित महिला का उसके पति के सामने ही इन पाँचों ने गैंगरेप किया था। इस मामले में राजस्थान की पुलिस ने FIR तक दर्ज करने में भी काफी देरी की थी।

इस मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनवाई की जा रही थी। पाँच आरोपितों छोटे लाल (22), हंस लाल गुर्जर (20), अशोक कुमार गुर्जर (20), इंद्रज सिंह गुर्जर (22) और एक नाबालिग के खिलाफ आईपीसी की धारा-147 (दंगेबाजी), 149 (गैर-क़ानूनी ढंग से जुटान), 323 (जानबूझ कर चोट पहुँचाना), 327 (जबरन वसूली और नुकसान), 341 (सदोष अवरोध), 354B (महिला का सम्मान भंग करना), 365 (गुप्त रूप से अपहरण), 376D (गैंगरेप), 384 (रंगदारी), 395 (डकैती) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामले दर्ज किए गए थे।

साथ ही इस मामले में एससी-एसटी एक्ट और आईटी एक्ट की धाराएँ भी लगाई गई थीं। इस घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश का माहौल बन गया था और 2019 लोकसभा से पहले चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बसपा प्रमुख मायावती ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार की निंदा की थी। अशोक गहलोत दिसंबर 2018 में तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने थे। देश भर में उनकी किरकिरी हुई थी।

आरोपितों ने इस गैंगरेप का वीडियो भी शूट कर के वायरल कर दिया था, जिसके बाद जनता का आक्रोश और बढ़ गया था। पीड़िता के पति को आरोपित तीन घंटे तक पीटते रहे थे और एक आरोपित वीडियो बना रहा था। मई 2, 2019 को वीडियो वायरल होने के बाद थानागाजी के इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में 32 गवाह पेश किए गए थे। एक नाबालिग की सुनवाई डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज की अदालत में चल रही थी।

अंत में अशोक गहलोत सरकार ने अलवर के एसपी और थानागाजी के एसएचओ को निलंबित कर दिया था। जून 7, 2019 को SHO के खिलाफ अपनी ड्यूटी करने में विफल रहने के कारण 166A(C) के तहत FIR दर्ज की गई। इस मामले के सम्बन्ध में सारी सूचनाएँ व सबूत होने के बावजूद उन्होंने मामला दर्ज नहीं किया था। एसपी ने घटना के 24 घंटे बाद भी घटनास्थल का दौरा नहीं किया था।

पुलिस की जाँच में उन्हें क्लीनचिट दे दी गई थी लेकिन बाद में हुए प्रशासनिक जाँच में उन्हें लापरवाही का दोषी पाया गया था। जयपुर डिविजनल कमिश्नर वर्मा ने इस मामले में प्रशासनिक जाँच की थी। सर्कल अधिकारी जगमोहन शर्मा को चार्जशीट दायर होने के बाद जिले से बाहर भेज दिया गया था। अन्य पुलिस अधिकारियों को भी जयपुर पुलिस रेंज से बाहर ट्रांसफर कर दिया गया था। अब सभी आरोपित दोषी पाए गए हैं। 4 आरोपितों को आजीवन कारावास और एक को आईटी एक्ट के तहत 5 साल जेल की सज़ा दी गई। कोर्ट ने कहा है कि ये घटना ‘द्रौपदी के चीरहरण’ जैसी है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी अलवर, राजस्थान दुष्कर्म प्रकरण का संज्ञान लेते हुए राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया था। आयोग ने मामले में पुलिस की निष्क्रियता पर मुख्य सचिव और डीजीपी से रिपोर्ट माँगी थी। वहीं, आयोग ने प्रदेश सरकार को आदेश देते हुए कहा था कि पूरे प्रकरण की 6 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करें। पीड़िता अपने पति के साथ बाइक पर सवार होकर दोपहर 3 बजे तालवृक्ष जा रही थी, तभी थानागाजी-अलवर बाइपास रोड पर उनकी बाइक के सामने 5 युवकों ने अपनी मोटरसाइकिलें लगा दी थी।

इसके बाद वे महिला एवं उसके पति को रेत के टीलों की तरफ ले गए। वहाँ उन्होंने पति के साथ मारपीट की और दंपति को बंधक बना लिया। पाँचों युवकों ने इसके बाद दोनों पति-पत्नी के कपड़े उतरवाए। पति के साथ मारपीट की। पीड़िता के साथ भी मारपीट की और रेप की कोशिश की। शुरुआत में जब पीड़िता ने रेप की कोशिश का विरोध किया तो उसके पति को और मारा गया। अंततः पीड़िता ने अपने पति की रक्षा के लिए हार मान ली। इसके बाद उन दरिंदों ने 3 घंटे तक बारी-बारी से पीड़िता के साथ रेप किया। 11 वीडियो क्लिप भी बनाए। 

केरल: जुड़वा भाई नौशाद व नवास ने कई बार किया 5 और 10 साल की मासूम बच्चियों का रेप, गिरफ्तार

केरल की त्रिवेंद्रम पुलिस ने रविवार (अक्टूबर 4, 2020) को दो नाबालिग बच्चियों के रेप के आरोप में कथिततौर पर दो जुड़वा भाइयों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों की पहचान नौशाद और नवास के रूप में हुई है। पीड़ित बच्चियों की उम्र 10 साल और 5 साल है। दोनों भाइयों पर बच्चियों के साथ कई बार रेप करने का आरोप है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नाबालिगों के माता पिता काम पर जाने के कारण उन्हें इन दोनों के पास देख-रेख के लिए छोड़ कर जाते थे। मगर, उन्हें इस संबंध में शक तब हुआ जब उन्हें अपने बच्चों के बर्ताव में फर्क दिखने लगा और उन्होंने इस बारे में उनसे बात की। दोनों बच्चियों ने माता पिता को सारी बातें बताईं, जिसे सुनकर वह फौरन थाने पहुँचे।

बच्चियों के माता पिता ने मामले में दोनों भाइयों नौशाद और नवास के ख़िलाफ़ शिकायत करवाई और आरोप लगाया कि दोनों बच्चियों का कई बार रेप किया गया है। पुलिस ने इस मामले को दर्ज करने बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया और उनके ऊपर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।

पुलिस बताती है कि आरोपितों ने बच्चियों का कथिततौर पर रेप करने के बाद उन्हें धमकी दी थी कि वह अपने पिता और रिश्तेदारों में से किसी को इस संबंध में न बताएँ। आरोपितों ने बच्चियों को धमकाते हुए कहा था कि अगर वह ऐसा करेंगी तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। बता दें, पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ केरल में दोनों बच्चियों के साथ रेप की वारदात का मामला सामने आया है। वहीं हाथरस में भी एक और रेप के बाद मौत का मामला उजागर हुआ है। पीड़िता की उम्र मात्र 6 साल थी। जानकारी के अनुसार, रेप का आरोप बच्ची की मौसी के बेटे पर ही लगा है।

‘आरोपित संदीप और पीड़ित परिवार के बीच फोन पर होती थी घंटों बातचीत’: हाथरस पर ‘Zee News’ की रिपोर्ट में कई खुलासे

हाथरस मामले में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में अब कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पीड़िता के भाई और आरोपित संदीप आपस में मित्र थे। कहा जा रहा है कि इन दोनों के बीच बातचीत भी होती थी और इनकी पुरानी जान-पहचान थी। दोनों के बीच कई घंटों तक बातचीत होती थी। कुछ ग्रामीणों ने भी इस खबर की पुष्टि करते हुए चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

ये सब ‘Zee News’ में विशाल पांडेय की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है। ‘Zee News’ ने दावा किया है कि उसके पास वो कॉल रिकार्ड्स हैं, जिसके आधार पर पता चलता है कि आरोपित संदीप और पीड़ित परिवार के बीच घंटों बातचीत होती थी। खबर में कहा गया है कि उक्त नंबर पर अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच दोनों के बीच 5 घंटों की बातचीत हुई थी। वहीं पीड़िता के बड़े भाई ने परिवार के आरोपित संदीप से बातचीत होने की बात से इनकार किया है।

‘Zee News’ की रिपोर्ट में बूलगढ़ी के ग्रामीणों ने बताया है कि पीड़िता और आरोपित के बीच प्रेम सम्बन्ध भी थे। हालाँकि, प्रेम सम्बन्ध होने का ये मतलब नहीं है कि कोई किसी की हत्या नहीं कर सकता – यहाँ ये स्पष्ट करनी ज़रूरी है। मीडिया संस्थान का कहना है कि इस मामले की छानबीन जाँच एजेंसियाँ करेंगी, जिसमें सच सामने आएगा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पीड़िता का भाई कुछ न कुछ छिपा रहा है।

हाथरस मामले में ‘Zee News’ की ग्राउंड रिपोर्ट (साभार)

आरोपित लवकुश की माँ का कहना है कि उनके बेटे को उन्होंने घायल पीड़िता को पानी पिलाने के लिए भेजा था लेकिन उसे भी आरोपित बना दिया गया। वहीं आरोपित रामू की माँ ने आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि उनका बेटा सुबह 7 बजे ही डेयरी प्लांट के लिए निकल चुका था, जहाँ वह नौकरी करता था। डेयरी प्लांट के मालिक ने बताया कि वो सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक वहीं पर ड्यूटी कर रहा था।

डेयरी मालिक आरोपित रामू को सीधा-साधा लड़का बताते हुए कहा कि रजिस्टर में उस दिन उसकी एंट्री भी दर्ज है और अन्य कर्मचारियों ने भी उसे देखा था। पुलिस रजिस्टर ले गई है। वहीं खुद को प्रत्यक्षदर्शी बताने वाले ओंकार सिंह ने कहा कि घायल लड़की जब खेत में पड़ी हुई थी तो उसका भाई उसे ‘संदीप का नाम लेने’ को कह रहा था और उस समय संदीप अपने पिता के साथ गाय को पानी पिलाने में लगा हुआ था।

उधर यूपी पुलिस द्वारा दर्ज एक FIR के अनुसार, पीड़िता के परिवार पर गलत बयान देने का दबाव था और इसके एवज में उन्हें 50 लाख रुपए देने का लालच एक राजनेता ने दिया था। साथ ही एक पत्रकार द्वारा पीड़िता के भाई को कहा गया था कि वो पिता को मीडिया में उसका मनपसंद बयान देने के लिए मनाए। पिता पर मीडिया में ये कहने का दबाव था कि वो सरकार की कार्रवाई से खुश नहीं हैं। एडीजी प्रशांत कुमार ने भी इसकी पुष्टि की है कि राज्य में अशांति फैलाने की कोशिश हो रही थी।

अनुराग कश्यप मामले में ऋचा चड्ढा ने पायल घोष के खिलाफ किया ₹1.1 करोड़ की मानहानि का केस, सुनवाई 7 अक्टूबर को

अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली अभिनेत्री पायल घोष के ख़िलाफ़ बॉलीवुड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने कानूनी कार्रवाई करते हुए 1.1 करोड़ रुपए का मानहानि का दावा किया है।

ऋचा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में इस संबंध में कल याचिका दायर करवाई। हालाँकि, कोर्ट ने आज इस याचिका को 7 अक्टूबर तक के लिए खारिज कर दिया। कोर्ट की तरफ से ऐसा उत्तरदाताओं (respondents) को नोटिस नहीं दिए जाने को लेकर किया गया है। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों मीटू अभियान के तहत पायल घोष ने अनुराग कश्यप के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कई एक्ट्रेस का नाम इस मामले में उजागर किया था। उस समय उन्होंने अनुराग पर आरोप लगाते हुए कहा था कि जब उन्होंने अनुराग की हरकतों का विरोध किया था तो उन्होंने उनसे कहा कि ये सब तो नॉर्मल बात है।

इसके अलावा पायल के मुताबिक कश्यप ने घोष से यह भी कहा था कि बॉलीवुड की कई एक्ट्रेस उनके साथ बहुत सहज हैं। इस बातचीत को उजागर करते हुए पायल घोष ने ऋचा चड्ढा का नाम भी शामिल किया था और उसके बाद ही ऋचा चड्ढा ने एक्ट्रेस को कानूनी तरीकों से जवाब देने के लिए मानहानि की याचिका दायर की।

बताया जा रहा है सबसे पहले एक्ट्रेस ने 21 सितंबर को ही अपनी लीगल टीम की ओर से नोटिस जारी कर दिया था और लीगल कार्रवाई करने की बात कही थी। इसके बाद एक्ट्रेस ने महिला आयोग में भी इस मामले की शिकायत की थी। ऋचा ने पायल को लीगल नोटिस भेजा था, मगर उनके स्टाफ ने उसे स्वीकार नहीं किया था, जिसके बाद ऋचा ने नोटिस की सॉफ्ट कॉपी एक्ट्रेस को मेल की थी।

अपने लीगल नोटिस में ऋचा ने लिखा था, “मैं हर महिला के लिए न्याय चाहती हूँ। लेकिन किसी भी महिला द्वारा उसकी आजादी का दुरुपयोग दूसरी महिलाओं के खिलाफ निराधार, बिना किसी वजूद के, झूठे और आधारहीन आरोप लगाने के लिए नहीं किया जा सकता।”

बता दें कि ऋचा ने पायल के अलावा कमाल आर खान और एक न्यूज चैनल पर भी मानहानि केस किया है। एक्ट्रेस का दावा है कि इन सभी ने कई आपत्तिजनक बयान दिए हैं, जिससे उनकी छवि को ठेस पहुँची है। ऋचा ने माँग की है कि सोशल मीडिया पर इस केस संबंधित उनके खिलाफ डाले गए वीडियो और बयानों को भी डिलीट करवाया जाए।

इस मामले पर सोमवार को बॉम्बे हाइकोर्ट के जज अनिल मेनन के समक्ष सुनवाई की गई थी। इस दौरान ऋचा चड्ढा के आरोपों पर एक्ट्रेस घोष की ओर से कोई भी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। अब इस मामले पर 7 अक्टूबर को फिर से कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा और सभी दस्तावेज फिर से पेश करने होंगे।

VIDEO: हाथरस मामले पर प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी से भिड़े कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता, हुई सख्त कार्रवाई की माँग

हाथरस मामले में योगी सरकार का विरोध करते-करते सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को कॉन्ग्रेस और भीम आर्मी वाले आपस में झगड़ पड़े। बात इतनी बढ़ गई कि मारपीट तक पहुँच गई। पूरा मामला छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चंपा जिले का है। विरोध प्रदर्शन के दौरान दोनों दलों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भीम आर्मी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी के ख़िलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी थी, इसी के कारण दोनों दलों में झड़प हुई। प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी के सदस्यों ने छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ दलित विरोधी होने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की, जिसके कारण कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए। नतीजतन, दूसरी ओर से भी भीम आर्मी पर हमला बोल दिया गया।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा जारी की गई वीडियो में देख सकते हैं कि दोनों दल के कार्यकर्ता एक दूसरे को पकड़ कर मारने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं पुलिस उन्हें छुड़ा-छुड़ा कर अलग कर रही है। इसके बाद वीडियो में दोनों समूहों को एक दूसरे के खिलाफ अपमानजनक नारे लगाते हुए भी देखा जा सकता है।

पुलिस अधिकारी ने इस संबंध में कहा, “कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता हाथरस मामले में प्रदर्शन कर रहे थे। इस बीच भीम आर्मी वाले आ गए और उनके ख़िलाफ़ नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इसके बाद ही हिंसा भड़की।”

जांजगीर इलाके के एसडीएम का कहना है कि जिला प्रशासन को भी इस संबंध में महिला कॉन्ग्रेस से शिकायत मिली है। उन्होंने इस केस में भीम आर्मी के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की माँग की है। अधिकारी ने यह भी कहा कि अब मामले में जाँच की जा रही हैं और प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने वालों के ख़िलाफ़ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले दिनों हाथरस में एक लड़की के साथ कथिततौर पर गैंगरेप की वारदात सामने आई थी। इसके बाद उसकी मौत की खबर से पूरा देश फिर हिल गया और बाद में आधी रात में हुए अंतिम संस्कार से तो देश में आक्रोश का माहौल फैल गया। कई विपक्षी पार्टियों ने इसका राजनीतिकरण करना शुरू कर दिया। कॉन्ग्रेस, टीएमसी, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी सब हाथरस की ओर कूच करने लगे और मीडिया में लगातार योगी सरकार पर सवाल उठना शुरू हो गया। वहीं अब इस मामले में योगी सरकार के खिलाफ लगातार साजिशों का भी खुलासा हो रहा है।

‘सुशांत केस में सोशल मीडिया पर मुंबई पुलिस को गाली देने वाले होंगे गिरफ्तार’, ‘सामना’ में राउत ने की UP की पाकिस्तान से तुलना

महाराष्ट्र में मुंबई पुलिस को बदनाम करने के आरोप में कई लोगों और सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने कहा है कि कई सोशल मीडिया हैंडल्स सिर्फ इसीलिए बनाए गए थे, ताकि सुशांत मामले में मुंबई पुलिस को बदनाम किया जा सके – उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि उन सोशल मीडिया हैंडल्स को ट्रैक किया जा रहा है और इस मामले में जल्द ही गिरफ्तारियाँ शुरू होंगी।

‘मुंबई मिरर’ के विनय दलवी से पुलिस कमिश्नर ने कहा कि कई सोशल मीडिया हैंडल्स ने पुलिस पर बिके होने के साथ-साथ सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और उन्हें मिटाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि जब बिहार में इस मामले में FIR दर्ज की गई और फिर सीबीआई को मामला ट्रांसफर किया गया, उसके बाद मुंबई पुलिस को सोशल मीडिया पर जम कर गालियाँ बकी गई थीं। पुलिस कमिश्नर ने कहा, “सच्चाई की हमेशा जीत होती है।“

उन्होंने कहा कि उन्हें शुरू से न तो सुशांत सिंह राजपूत मामले में मुंबई पुलिस की जाँच पर शक था और न ही कूपर हॉस्पिटल द्वारा तैयार किए गए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को लेकर कोई शंका थी। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक टीम ने भी प्रोफेशनल तरीके से अपना काम किया। उन्होंने कहा कि सभी का अंत में यही मानना था कि सुशांत ने आत्महत्या की लेकिन कुछ लोगों ने मुंबई पुलिस को लेकर गलत सूचनाएँ फैलाईं।

कमिश्नर ने दावा किया कि एम्स की रिपोर्ट में और कूपर हॉस्पिटल की रिपोर्ट में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मुंबई पुलिस की जाँच से सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि सीबीआई को केस ट्रांसफर के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई पुलिस को भी जाँच की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा कि रिया चक्रवर्ती द्वारा सुशांत को गलत दवाएँ देने के मामले में दर्ज FIR की भी जाँच सीबीआई ही कर रही है।

उन्होंने कहा कि अगर मुंबई पुलिस के समक्ष सुशांत की मौत के मामले में किसी साजिश या आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे मामले आए होते तो वो पहले ही एफआईआर दर्ज कर लेती। साथ ही उन्होंने दावा किया कि जून 16 को दिए गए बयान में सुशांत के परिवार ने किसी संदिग्ध का नाम नहीं लिया था। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि परिवार फिर कोई शिकायत दर्ज कराने आया ही नहीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीबीआई ‘प्रोफेशनल जाँच’ करेगी।

मुंबई पुलिस ने दावा किया है कि सुशांत की मौत के बाद 84,000 फेक सोशल मीडिया हैंडल्स सिर्फ मुंबई पुलिस को बदनाम करने के लिए बनाए गए थे। साथ ही कहा कि इटली, जापान, फ़्रांस और इंडोनेशिया जैसे देशों से फेक एकाउंट्स बनाए गए थे। बताया गया है कि इन सबके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। कमिश्नर और पुलिस के खिलाफ ‘गाली वाली भाषा’ के प्रयोग करने का भी आरोप है।

उधर शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत ने उत्तर प्रदेश की तुलना पाकिस्तान से करते हुए कहा है कि यूपी में वही सब हो रहा है, जो पाक में होता है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ नारे की आलोचना करते हुए राउत ने लिखा कि लड़कियों को अगवा कर के उनके रेप और हत्या की वारदातें तो पाकिस्तान में होती हैं। उन्होंने महिला आयोग पर भी इस मामले में ‘चुप बैठने’ के आरोप लगाए।

इससे पहले शिवसेना के मुखपत्र सामना ने अपने संपादकीय में सुशांत सिंह राजपूत को असफल और चरित्रहीन कलाकार बताया था। अपने संपादकीय में सामना ने कहा था कि बीते दिनों बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे को महाराष्ट्र द्वेष का गुप्तरोग हो गया था और देश के कई अन्य ‘गुप्तेश्वरों’ को (जो महाराष्ट्र पुलिस या सरकार पर सवाल उठा रहे थे) भी यह रोग हो गया था। इसमें पूछा गया है कि जिस ‘एम्स’ पर देश के गृह मंत्री को विश्वास है, उस ‘एम्स’ ने सुशांत मामले में जो रिपोर्ट दी है, उसे अंधभक्त नकारेंगे क्या?

द वायर ने सुशांत के न्याय के मुहीम को झुठलाने के लिए सैय्यदा अकबर सहित 5 की ‘मनगढ़ंत’ रिपोर्ट को बताया मिशिगन यूनिवर्सिटी का ‘अध्य्यन’

प्रोपगेंडा पोर्टल द वायर को हाल ही में एक बार फिर सोशल मीडिया पर फजीहत का सामना करना पड़ा। दरअसल, द वायर ने अपनी एक रिपोर्ट में 5 लोगों के ‘मनगढ़ंत अध्य्यन’ को यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन का अध्य्यन बताकर पेश किया। वायर ने अपना यह कारनामा सिर्फ़ इस आधार पर किया क्योंकि 5 लोगों में एक व्यक्ति मिशिगन विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ है।

वायर के इस आर्टिकल का शीर्षक ही यह है- “सुशांत सिंह राजपूत: कॉन्सपिरेसी थ्योरी को बढ़ावा देने में भाजपा का हाथ”, इस लेख में द वायर दावा करता है कि मिशिगन यूनिवर्सिटी ने एक स्टडी की है जिसमें बताया गया कि सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध हालातों में हुई मौत पर कॉन्सपिरेसी थ्योरी को भाजपा सदस्यों ने बढ़ावा दिया था।

‘अध्ययन’ में बताया गया कि शोधकर्ताओं ने सोशल मीडिया के ट्रेंड्स का पिछले तीन महीने में विश्लेषण किया है ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि बीजेपी समर्थक सोशल मीडिया पर अफवाहों को कैसे बढ़ाते हैं।

द वायर ने ‘मनगढ़ंत’ ‘अध्य्यन’ का हवाला देकर बताया कि अभिनेता की मौत पर जिन लोगों ने भी मुंबई पुलिस से सुशांत सिंह राजपूत के मामले में निष्पक्ष जाँच की माँग की, वह सब ट्रोल हमले थे। इस पूरे आर्टिकल में कहीं भी यह नहीं बताया गया कि यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन का यह आधिकारिक अध्य्यन नहीं है।

दिलचस्प बात यह है कि जिस ‘मनगढ़ंत’ अध्य्यन का हवाला देकर द वायर ने अपना पूरा आर्टिकल लिखा, उसे करने वाले 5 लोगों के नाम सैय्यदा जैनब अकबर, अंकुर शर्मा, हिमानी नेगी, अनमोल पांडा और जोयोजीता पाल है और इनमें से सैयदा ज़ैनब अकबर, अंकुर शर्मा, हिमांशी नेगी और अमोल पांडा सभी माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च, बेंगलुरु के शोधकर्ता हैं। वहीं जोयोजीता पाल के कई आर्टिकल पहले भी द वायर पर पब्लिश हो चुके हैं।

गौरतलब है ऑपइंडिया ने इस अध्य्यन से जुड़े सवालों की बाबत यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन को संपर्क किया था। मगर, अभी उनकी तरफ से इस संबंध में कोई जवाब नहीं आया है। जैसे ही हमें कोई प्रतिक्रिया मिलती है, हम यह रिपोर्ट अपडेट करेंगे।

बता दें कि सोशल मीडिया पर द वायर की यह रिपोर्ट मीडिया गिरोह लोगों द्वारा शेयर की जा रही है। हालाँकि, खुलासा होने के बाद कई ट्विटर यूजर अब हकीकत थ्रेड में डाल कर सवाल कर रहे हैं कि ‘अपने द वायर’ से ठगे जाने के बाद उन्हें कैसा लग रहा है?

दरअसल, इस रिपोर्ट को सागरिका घोष ने शेयर करते हुए लिखा था, “मिशिगन यूनिवर्सिटी का अध्य्यन खुलासा करता है कि कॉन्सपिरेसी थ्योरी को फैलाने और बढ़ाने में भाजपा का हाथ है।” इस पर शैश नाम का सक्रिय ट्विटर यूजर लिखता है- “मिशिगन यूनिवर्सिटी का अध्य्यन? छोटी गंगा बोलेके नाले में कुदा दिया तुमको।”