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इस्लाम पर बहस के बाद साथी फ़ारुन माद ने ही कर दी अल्पसंख्यक प्रोफेसर की हत्या, शरीर में धँस गईं 5 गोलियाँ

पाकिस्तान के पेशावर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जहाँ एक प्रोफेसर के साथ इस्लाम पर बहस के बाद उनके दोस्त ने ही गोली मार कर उनकी हत्या कर दी। ये घटना सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) की है। अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय से आने वाले प्रोफेसर नईम खटक की एक दूसरे प्रोफेसर फ़ारुन माद के साथ इस्लाम को लेकर बहस हुई थी। इसके बाद फ़ारुन ने फायरिंग शुरू कर दी और प्रोफेसर नईम खटक की हत्या कर डाली।

आरोपित प्रोफेसर ने इस हत्याकांड में एक गनमैन की भी मदद ली। प्रोफेसर नईम खटक पर तब हमला किया गया, जब वो कॉलेज जा रहे थे। वो गवर्नमेंट सुपीरियर साइंस कॉलेज में फैकल्टी मेंबर के रूप में कार्यरत थे। मृतक प्रोफेसर के भाई की तहरीर पर एक FIR दर्ज की गई है, जिसमें कहा गया है कि मजहबी मुद्दों पर हुई बहस के कारण उनकी हत्या हुई। खटक के भाई ने बताया कि वो भी कॉलेज गए थे और वहाँ से साथ में निकल रहे थे।

उन्होंने बताया कि वो बाइक पर थे और खटक कार में जा रहे थे। जब वो दोपहर के 1:30 बजे वजीरबाग से गुजर रहे थे, तभी दो बाइक सवारों ने उनकी गाड़ी रोकी और फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद वो दोनों ही आरोपित वहाँ से भाग निकले। उनके शरीर में पाँच गोलियाँ मारी गईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। उनके परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे और तीन बेटियाँ भी हैं। पुलिस ने कहा है कि आरोपितों की पहचान हो गई है।

पुलिस ने घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ करने के बाद आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। पाकिस्तान में अहमदी समुदाय के प्रवक्ता सलीमुद्दीन ने कहा कि खटक ने जूलॉजी में अपनी डॉक्टरेट पूरी की थी और उन्हें अपनी धारणाओं की वजह से परेशान किया जा रहा था। उन्हें पहले से ही धमकियाँ दी जा रही थीं। पिछले कई सालों से अहमदिया समुदाय पर लगातार हमले हो रहे हैं।

इसी तरह जुलाई 2020 में ईशनिंदा के आरोपित ताहिर शमीम अहमद को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया था। ताहिर को मारने वाले का नाम खालिद खान था। सोशल मीडिया पर सामाजिक कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने दावा किया था कि खालिद ने ताहिर को गोली मार कर कहा कि उसके सपने में पैगंबर आए थे। इसलिए उसने ताहिर को गोली मारी। वहीं पुलिस की हिरासत में खालिद ने ये माना था कि उसने ताहिर को इसलिए गोली मारी. क्योंकि वह अहमदिया समुदाय का था।

‘गैंगरेप की बात कहो तो ₹50 लाख दूँगा’, हाथरस केस में यह कैसी ‘साजिश’: एक नेता और पत्रकार के खिलाफ राजद्रोह का केस

हाथरस मामले को लेकर हुई बड़ी साजिश के मामले में उत्तर प्रदेश की पुलिस ने 19 FIR दर्ज किए हैं। हाथरस जिले में लोगों को दंगे के लिए भड़काने और उकसाने के आरोप में एक राजनेता और एक पत्रकार के खिलाफ भी राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ है। अज्ञात के रूप में इन दोनों के नाम FIR में दर्ज हैं। इन सभी पर लोगों को उकसाने के साथ-साथ आपराधिक साजिश रचने और हाथरस कांड को लेकर झूठी अफवाह फैलाने का आरोप है।

हाथरस के चंदप्पा थाने में ये मामला दर्ज हुआ है। साथ ही यहाँ दर्ज हुई 3 FIR में ‘भीम आर्मी’ के मुखिया चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ समेत 680 लोगों के खिलाफ धारा-144 के उल्लंघन का ममला दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश में दर्ज हुई 19 FIR के बाद इसे दर्ज किया गया है। इससे पहले रविवार (अक्टूबर 4, 2020) को एक पुलिसकर्मी की तरफ से की गई शिकायत के आधार पर दर्ज FIR में पीड़िता के परिवार पर दबाव बनाने के आरोप लगाए गए थे।

इस शिकायत में कहा गया था कि पीड़िता के परिवार पर गलत बयान देने का दबाव था और इसके एवज में उन्हें 50 लाख रुपए देने का लालच एक राजनेता ने दिया था। साथ ही एक पत्रकार द्वारा पीड़िता के भाई को कहा गया था कि वो पिता को मीडिया में उसका मनपसंद बयान देने के लिए मनाए। पिता पर मीडिया में ये कहने का दबाव था कि वो सरकार की कार्रवाई से खुश नहीं हैं। एडीजी प्रशांत कुमार ने भी इसकी पुष्टि की है कि राज्य में अशांति फैलाने की कोशिश हो रही थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा कि बाहर से धन मँगा कर उत्तर प्रदेश में दंगे व अशांति फैलाने की साजिश रची गई थी। सब-इंस्पेक्टर अवधेश कुमार की ओर से दर्ज शिकायत के आधार पर इस मामले में FIR दर्ज की गई है। इस शिकायत में कहा गया है कि असामाजिक तत्व मिल कर सामाजिक सौहार्द को भंग करने के लिए सरकार के खिलाफ सुनियोजित साजिश रच रहे हैं। हाथरस गेट थाने में भी इस मामले में मुकदमे दर्ज हुए हैं।

सोशल मीडिया में झूठे पोस्ट डालने, सीएम योगी आदित्यनाथ की एडिटेड तस्वीरें अपलोड करने, जाति आधारित संघर्ष और देश की एकता-अखंडता को भंग करने के प्रयास करने और सरकार की छवि बिगाड़ने के लिए द्वेषपूर्ण सूचनाएँ फैलाने के आरोप हैं। बिजनौर, सहारनपुर, बुलंदशहर, प्रयागराज, हाथरस, अयोध्‍या और लखनऊ में कुल 13 अभियोग पंजीकृत किए गए। दुष्कर्म वाली बात कहने के लिए भी परिवार पर दबाव डाला गया।

उधर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक ने बताया कि धारा-153A के तहत दर्ज हुआ मुकदमा मनी लॉन्ड्रिंग के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आता है। हाथरस पर रातोंरात बनी वेबसाइट का डोमेन किसने खरीदा, मेल आईडी व फोन नंबर किसने इस्तेमाल किया और इसके लिए कितने रुपए कहाँ से जमा किए गए थे, इसकी जाँच अब ED करने वाला है। सर्वर प्रोवाइडर से जानकारी ली जाएगी और धन के अवैध आवागमन के स्रोत का पता लगाया जाएगा।

यूपी पुलिस ने एक राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल के खिलाफ हाथरस के चंदपा पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज की है, जिन्होंने मृतका के घर का दौरा किया था। पुलिस ने उन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मृतका के परिजनों का प्रोपेगेंडा आधारित वीडियो/ऑडियो प्रसारित करने का आरोप लगाया। उन पर भादवि की धारा- 147, 148, 323, 504, 332, 353, 427, 188 और सीएलए अधिनियम 7 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

दिल्ली से हाथरस जाते पकड़े गए 4 PFI सदस्य: UP में जातीय हिंसा फैलाने की साजिश का है आरोप

दिल्ली से उत्तर प्रदेश के हाथरस जाते हुए 4 संदिग्ध लोगों को मथुरा पुलिस ने कल (अक्टूबर 5, 2020) गिरफ्तार किया। पड़ताल में पता चला कि इनके लिंक पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) से हैं। टोल प्लाजा पर चेकिंग के दौरान इनकी गिरफ्तारी हुई। अब मथुरा पुलिस इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है।

एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि उन्हें ऐसी सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति दिल्ली से हाथरस की तरफ जा रहे हैं, जिसके आधार पर सोमवार को मथुरा के मांट टोल प्लाजा पर संदिग्ध वाहनों की चेकिंग चल रही थी।

इस दौरान एक स्विफ्ट डिजायर कार (DL 01 jdc 1203) को रोका गया। उसमें चार लोग थे। पुलिस ने इन्हें इनकी संदिग्ध गतिविधियों के कारण रोका और अपनी पूछताछ शुरू की। पुलिस को पड़ताल में मालूम चला कि इन सबका संबंध पीएफआई से है।

पुलिस ने इनकी पहचान उर रहमान पुत्र रौनक अली निवासी नगला थाना रतनपुरी जिला मुजफ्फरनगर; सिद्दीकी पुत्र मोहम्मद चैरूर निवासी बेंगारा थाना मल्लपुरम केरल; मसूद अहमद निवासी कस्बा व थाना जरवल जिला बहराइच व आलम पुत्र लईक पहलवान निवासी घेर फतेह खान थाना कोतवाली जिला रामपुर, के रूप में की।

पुलिस ने पूछताछ के बाद इन्हें अपनी हिरासत में ले लिया व इनके पास से मोबाइल, लैपटॉप एवं शांति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला संदिग्ध साहित्य बरामद किया। अब चारों के विरुद्ध मांट थाने के द्वारा कार्रवाई की जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ये चारों उत्तर प्रदेश में जातीय और सांप्रदायिक हिंसा करने की साजिश में जुटे हुए थे।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के हाथरस में आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधि मंडल जब पीड़ित परिवार से मिलने गया था, उस समय भी युवक ने अपने नारों में पीएफआई का जिक्र करके आप नेताओं पर गुस्सा जाहिर किया था। उसने AAP नेता संजय सिंह पर इंक फेंकते हुए कहा था- “PFI के दलालों वापस जाओ…वापस जाओ…PFI के गिद्धों वापस जाओ…लाशों पर राजनीति करना बंद करो।”

इससे पहले खुफिया एजेंसियों ने भी इस मामले पर खुलासे किए थे कि उन्हें ऐसे सुराग हाथ लगे हैं जो साबित करते हैं कि हाथरस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बदनाम करने की बड़ी साजिश रची गई। इसके लिए एमनेस्टी इंटरनेशनल के साथ-साथ कई इस्लामी मुल्कों ने भी फंडिंग की थी। रातोंरात ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ नाम से एक वेबसाइट भी बना ली गई थी। इस वेबसाइट पर विरोध प्रदर्शन की आड़ में देश-प्रदेश में दंगे करने और उसके बाद उससे बचने के तौर-तरीके बताए गए थे।

गोकशी के लिए बछिया लेकर जा रहा फुरकान अली गिरफ्तार: मुठभेड़ में पुलिस ने पाँव में मारी गोली, घायल

नोएडा में पुलिस ने गोकशी के लिए गाय को ले जाते हुए एक अपराधी को धर-दबोचने में सफलता पाई है। नोएडा पुलिस कमिश्नर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जानकारी दी है कि सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को जारचा थाना क्षेत्र के चोना नहर की पटरी पर पुलिस और गोकशी करने वाले बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें फुरकान अली नामक अपराधी अपने पाँव में गोली लगने से घायल हो गया।

पैर में गोली लगने से घायल अपराधी फुरकान अली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उक्त अपराधी के पिता का नाम महमूद है, जो मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र स्थित नंगला साहू का निवासी है। फिलहाल वो हापुड़ के हाफिजपुर थाना क्षेत्र स्थित बड़ोदा में रह रहा था। वहीं उसका साथी बदमाश मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश के लिए पुलिस कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रही है। उसकी भी गिरफ़्तारी जल्द हो सकती है।

पुलिस ने जानकारी दी है कि गिरफ्तार अभियुक्त फुरकान अली पर पहले से ही 9 मामले दर्ज हैं। उसके कब्जे से एक बिना नंबर की वैगनआर कार भी बरामद की गई है। साथ ही उस गाड़ी के पीछे की सीट से एक बछिया भी बँधी हुई मिली। साथ ही उसके पास से रस्सी और चाकू भी जब्त हुए। गिरफ्तार अपराधी के पास से 315 बोर का तमंचा, 2 ज़िंदा कारतूस और 1 खोखा कारतूस पुलिस ने जब्त किया। दोनों अपराधी गोवंश को किसी सुनसान इलाके में जे जाकर उसकी हत्या करना चाहते थे।

घायल होने के कारण उक्त बदमाश को जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। साथ ही उसके आपराधिक इतिहास के बारे में पूरी छानबीन की जा रही है। उसके सीट के पीछे बँधी हुई गाय की बछिया को भी बचा लिया गया है, जिसे वो गोकशी के लिए लेकर जा रहा था। पुलिस ने इस पूरे मामले के सम्बन्ध में वीडियो भी जारी किया और अपने बयान के जरिए पूरे प्रकरण के बारे में समझाया।

बता दें कि पहले यूपी में गोहत्या के आरोपित 7 साल के कारावास की सज़ा के प्रावधान के कारण जमानत पाने में सफल हो जाते थे। इसे ध्यान में रखते हुए सज़ा को अधिकतम 10 साल कर दिया गया है। साथ ही गोहत्या पर लगने वाले जुर्माने को भी 3 लाख रुपए से बढ़ा कर 5 लाख रुपए कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में अब जो भी गोहत्या या गो-तस्करी में संलिप्त होगा, उसके फोटो भी सार्वजनिक रूप से चस्पा होंगे। जून 2020 में ही यूपी कैबिनेट ने ये फ़ैसला लिया गया था।

UP: मुख्तार अंसारी की बीवी और सालों पर ₹25-25 ​हजार का इनाम, पुलिस की 4 टीमें कर रही तलाश

उत्तर प्रदेश में बाहुबलियों के खिलाफ पुलिस प्रशासन की सख्ती जारी है। मऊ सदर के विधायक मुख्तार अंसारी की बीवी आफसा और साले शरजील रजा तथा अनवर शाहजहां पर गाजीपुर पुलिस ने 25-25 हज़ार रुपए के इनाम का ऐलान किया है। कोर्ट की ओर जारी वारंट पर हाजिर नहीं होने के कारण तीनों पर कार्रवाई की गई है।

गैंगस्टर न्यायालय ने तीनों को पेश होने का आदेश दिया था।। मुख्तार अंसारी की पत्नी और सालों की तलाश जनपद की कुल चार पुलिस टीमें कर रही हैं। इसमें एसओजी, सर्विलांस, करंडा और जंगीपुर शामिल हैं। शासन से लेकर प्रशासन तक पुलिस लखनऊ, वाराणसी, मऊ, गृह जनपद गाजीपुर में भी एक एक करके कार्रवाई कर रही है।    

तीनों पर आरोप है कि यह संगठित आपराधिक गिरोह के रूप में काम करते हैं। शरजील और अनवर पर सरकारी ठेका हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज़ देने का आरोप है। जिसके बाद पुलिस ने इस मामले में दोनों पर मुकदमा दर्ज किया था। वहीं आफसा अंसारी पर सरकारी पैसों के गबन और अमानत में खयानत की आपराधिक गतिविधि के संबंध में मामला दर्ज है। 

इन पर कई जमीनों पर अवैध रूप से कब्जे का भी आरोप है। जिलाधिकारी गाजीपुर ने शहर कोतवाली की छावनी लाइन स्थित ज़मीन गाटा संख्या 162 को कुर्क शुदा घोषित किया था, तीनों पर इस ज़मीन को कब्जे में करने का आरोप है। इसके अलावा थाना मौजा बवेरी भूमि आराजी संख्या 598 (कुर्क शुदा) पर भी अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप है। फ़िलहाल पुलिस तीनों की तलाश कर रही है।   

इससे पहले मुख्तार अंसारी के बेटों उमर और अब्बास पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। यह कार्रवाई हजरतगंज के डालीबाग में सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण कराने के मुकदमे में की गई थी।

आरोपितों की गिरफ्तारी, हिंसा की अंतरराष्ट्रीय साजिश और पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा: हाथरस केस में दर्ज FIR की डिटेल

उत्तर प्रदेश पुलिस ने हाथरस की घटना के संबंध में कई एफआईआर दर्ज की है। यहाँ पिछले सप्ताह मंगलवार को एक 19 वर्षीय पीड़िता की मौत हो गई थी। इस संदर्भ में पुलिस ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी किया है। इस स्टेटमेंट में मामले में कई व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गई विभिन्न एफआईआर की जानकारी दी गई है।

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि पीड़िता के भाई की गवाही के आधार पर आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद 3 सदस्यीय एसआईटी जाँच का आदेश दिया गया और फिर मामले में सीबीआई जाँच की सिफारिश की गई है। इसके बावजूद कुछ संगठन और निहित स्वार्थ वाले व्यक्ति सरकार की छवि को धूमिल करने के लिए जातीय और सांप्रदायिक हिंसा फैलाने पर आमादा हैं।

इसके लिए वे विभिन्न सोशल मीडिया वेबसाइटों पर बिना सोचे-समझे और फर्जी दावे पोस्ट कर रहे थे और सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन में भाग लेने के लिए COVID-19 के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए गैरकानूनी तरीके से गाँव के बाहर लोगों को इकट्ठा कर रहे थे।

इस संबंध में पुलिस द्वारा कई FIR दर्ज की गई हैं। यूपी पुलिस द्वारा उनकी प्रेस रिलीज में शेयर की गई जानकारी इस प्रकार हैं-

जातीय हिंसा को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय साजिश रचने पर FIR

यह सामने आने के बाद कि हाथरस की घटना पर विरोध-प्रदर्शन करने के बहाने उत्तर प्रदेश में दंगे भड़काने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय साजिश रची जा रही है, यूपी पुलिस ने हाथरस में जाति आधारित दंगों की साजिश रचने के लिए एक प्राथमिकी दर्ज की।

हाथरस पुलिस स्टेशन में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें राज्य में जातीय और सांप्रदायिक दंगों की साजिश रचने, अराजकता फैलाने, दंगा करने के बहाने योगी सरकार को बदनाम करना, अफवाहें फैलाना, पीड़ित परिवार को योगी सरकार के खिलाफ भड़काना, फर्जी फोटो, फर्जी सूचना, फोटोशॉप्ड तस्वीरों के जरिए नफरत फैलाना शामिल है। 

पुलिस ने इस संबंध में आईपीसी की धारा 109, 120 (बी), 124-ए, 153-ए, 153-ए (1), 153-ए (1) (ए), 153-ए (1) b), 153-A (1) (c), 153-B, 195, 195-A, 465, 468, 469, 501, 505 (1), 505 (1) (b), 505 (1) (c) ), 505 (2), और 67 के तहत FIR दर्ज की है।

पीड़ित और उसके परिवार के बारे में प्रोपेगेंडा वीडियो प्रसारित करने के लिए एक राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल के खिलाफ FIR दर्ज

यूपी पुलिस ने एक राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल के खिलाफ हाथरस के चंदपा पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज की है, जिन्होंने मृतका के घर का दौरा किया था। पुलिस ने उन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मृतका के परिजनों का प्रोपेगेंडा आधारित वीडियो/ऑडियो प्रसारित करने का आरोप लगाया। उन पर भादवि की धारा- 147, 148, 323, 504, 332, 353, 427, 188 और सीएलए अधिनियम 7 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

एक राजनीतिक दल के सदस्यों के खिलाफ हंगामा करने और पुलिस अधिकारियों पर पथराव करने के लिए FIR दर्ज की गई

मामले में तीसरी FIR एक पार्टी के राजनीतिक सदस्यों के अनधिकृत दौरे से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल की बैठक के बाद पार्टी के कई सदस्यों और समर्थकों ने बिना अनुमति के गाँव में प्रवेश किया और धारा 144 का उल्लंघन किया। उन पर कानून प्रवर्तन अधिकारियों को गाली देने और उनके साथ हाथापाई करने का भी आरोप है। राजनीतिक पार्टी समर्थकों द्वारा उन पर पथराव करने के बाद कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए। उन पर भादवि की धारा -148, 148, 323, 504, 332, 353, 427, 188 और सीएलए अधिनियम 7 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

भड़काऊ भाषण वाले वीडियो प्रसारित करने के लिए FIR

उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक राजनीतिक पार्टी के एक सदस्य के खिलाफ सार्वजनिक रूप से एक वीडियो प्रसारित करने के लिए एक एफआईआर दर्ज की, जिसमें भड़काऊ बयान दिए गए। इस भाषण में पुलिसकर्मियों का हाथ काटने, पुलिस अधिकारियों को निलंबित करना और जाति/समुदायों के बीच सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना आदि शामिल था। आरोपित के खिलाफ भादवि की धारा-153 ए, 505, 506, 489 और आईटी एक्ट की धारा 84 सी के तहत मामला दर्ज किया गया है।

धारा 144 का उल्लंघन करने और यातायात अवरुद्ध करने के लिए भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और 400-500 अन्य के खिलाफ FIR दर्ज

हाथरस में मार्च करते हुए पीड़िता के परिजनों से मिलने के लिए जाने के दौरान भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और 400-500 अन्य के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन करने के लिए FIR दर्ज की गई। आजाद और उनके समर्थकों ने पुलिस के लिए कानून और व्यवस्था की स्थिति पैदा कर दी थी, क्योंकि उन्होंने जबरन गाँव में घुसने और पीड़ित के रिश्तेदारों से मिलने की कोशिश की थी। जब उन्हों रोका गया, तो वे सड़क पर यातायात बाधित कर प्रदर्शन पर बैठ गए, जिसके बाद उनके खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई।

कोविड-19 के दिशा-निर्देशों और सीआरपीसी की धारा 144 के उल्लंघन के लिए लगभग 200 लोगों के खिलाफ FIR

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बसंत बाग कॉलोनी में कोविड-19 के दिशा-निर्देशों और सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन कर बड़ी संख्या में इकट्ठा होने के लिए लगभग 200 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

इसके अलावा, बिजनौर, सहारनपुर, बुलंदशहर, प्रयागराज, हाथरस और अयोध्या जैसे जिलों में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर आपत्तिजनक पोस्ट करने की शिकायतें दर्ज की गईं। कम से कम 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

पुलिस ने कमिश्नरेट लखनऊ में विवादित पोस्टर लगाने के लिए एक व्यक्ति के खिलाफ मामला भी दर्ज किया था। इस संबंध में एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट अपलोड करने के आरोप में लखनऊ ग्रामीण में गिरफ्तारी की गई है। वहीं मथुरा में कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के कोषाध्यक्ष को 3-4 अन्य पदाधिकारियों के साथ सीआरपीसी की धारा 151 के तहत प्रतिबंधित किया गया है।

बंगाल: बीजेपी नेता की हत्या की सीआईडी करेगी जाँच, पुलिस स्टेशन के पास मनीष शुक्ला को मारी गई थी गोली

भाजपा नेता मनीष शुक्ला की कथित तौर पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा की गई हत्या के एक दिन बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मामले की जाँच सीआईडी को सौंप दी है। इसके पहले मामले की जाँच बैरकपुर का पुलिस विभाग कर रहा था। भाजपा पार्षद व वकील मनीष शुक्ला की रविवार (अक्टूबर, 4 2020) को उत्तर परगना जिले में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। 

यह घटना बैरकपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले टीटागढ़ पुलिस स्टेशन के सामने हुई थी। घटना उस वक्त हुई जब वह एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पार्टी कार्यालय गए थे। जैसे ही वह कार्यालय में दाखिल हुए वैसे ही बाइक सवार अपराधी आए और उन पर गोलीबारी कर दी। चश्मदीदों के मुताबिक़ उन्हें बहुत नज़दीक से गोली मारी गई थी।

इस बात की जानकारी सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई ने रोष जताया। संगठन का कहना था कि उन्हें तृणमूल सरकार के अंतर्गत काम करने वाली पुलिस पर भरोसा नहीं है। भाजपा की तरफ से इस मुद्दे पर असहमति का एक सबसे बड़ा कारण है, पिछले कुछ समय में वहाँ पार्टी के कई कार्यकर्ताओं की अप्राकृतिक मृत्यु हुई है जिसे राज्य की पुलिस ने आत्महत्या घोषित कर दिया या उस पर कोई नतीजा नहीं निकला। इन बातों को मद्देनज़र रखते हुए भाजपा ने इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग की है। 

भाजपा नेता की हत्या के बाद पैदा हुए जनता के आक्रोश और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद पश्चिम बंगाल की पुलिस ने ट्विटर पर सफाई पेश की। मामले में निजी दुश्मनी के पहलू पर जाँच करने का दावा करते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस ने लिखा, “एक व्यक्ति को बैरकपुर स्थित टीटागढ़ क्षेत्र में शाम के वक्त गोली मार दी गई थी। पुलिस इस मामले में हर पहलू की जाँच कर रही है। जिसमें निजी दुश्मनी भी शामिल है, क्योंकि मृतक तमाम हत्या और हत्या के प्रयासों के मामले में आरोपित था।”

इसके अलावा पुलिस ने नेटीजन्स के लिए अप्रत्यक्ष चेतावनी भी जारी कि वह किसी भी तरह की गैर ज़िम्मेदार टिप्पणी न करें। ट्वीट में कहा है, “जाँच पूरी होने से पहले किसी भी नतीजे पर मत आइए। सोशल मीडिया में इस मामले पर किसी भी तरह की टिप्पणी करना जाँच में दखलंदाज़ी करने जैसा माना जाएगा। कृपया इससे बचने का प्रयास करें।”

पश्चिम बंगाल पुलिस विभाग द्वारा किया गया ट्वीट

सोमवार (5 अक्टूबर 2020) को भाजपा कार्यकर्ता नील रतन सरकार अस्पताल के सामने इकट्ठा हुए, जहाँ मृतक का शरीर रखा गया था। कार्यकर्ताओं का कहना था कि शरीर उनके हवाले किया जाए। पार्टी ने इस बात की जानकारी दी कि वह अपने कार्यकर्ता का शव कोलकाता से ले जाना चाहते थे।

पार्टी के वरिष्ठ नेता ने एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए कहा, “पुलिस अधिकारी इस मामले में हमारा सहयोग नहीं कर रहे हैं। जब तक हमारी बात नहीं सुनी जाती हम यहाँ से हिलने वाले नहीं हैं। यह लोग (टीएमसी) मामले को दबाना चाहते हैं पर हमने अपना नेता खोया है। इसके पहले इन लोगों ने अर्जुन सिंह को निशाना बनाया था। जो भी टीएमसी का साथ छोड़ता है वह तुरंत इनके निशाने पर आ जाता है। यह लोग या तो उस नेता की हत्या करवा देते हैं या फिर उसके विरुद्ध झूठे मामले दर्ज करवाते हैं। पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र नहीं रह गया है।”

पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं की माँगों को भी सिरे से खारिज कर दिया था। पुलिस ने अस्पताल के लगभग हर गेट पर बैरीकेडिंग लगा दी थी, सिर्फ एम्बुलेंस और मरीजों को भीतर दाखिल होने की अनुमति दी थी। रविवार की शाम भाजपा कार्यकर्ताओं ने 24 परगना को कोलकाता से जोड़ने वाली जीटी रोड को भी जाम कर दिया था। 

पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं की हत्या, रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु अपने चरम पर है। राज्य में राजनीतिक हिंसा का इतिहास दशकों पुराना है। हाल ही में रॉबिन पॉल नाम के भाजपा कार्यकर्ता की कलन स्थित पथर घाटा गाँव में लिंचिंग कर दी गई थी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहले उसे टीएमसी समर्थकों ने बुरी तरह मारा और इसके बाद वह रॉबिन को दूसरे गाँव में लेकर गए, जहाँ टीएमसी के डिप्टी चीफ ने उसकी बुरी तरह पिटाई की। उसके परिवार वालों का आरोप था कि घटना के दौरान जब रॉबिन को उसकी बेटी ने पानी देने का प्रयास किया, तब टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने उसे ऐसा करने से रोका। वह इतने पर ही रुके नहीं उन्होंने उसकी बेटी को धमकी भी दी।

13 जुलाई को पुलिस ने हेमताबाद से विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय का शव बरामद किया था। पुलिस ने भाजपा विधायक का शव राजीगंज की बिंदोल पंचायत स्थित बलिया गाँव से बरामद किया था। उनका शव दुकान की छत से लटका हुआ पाया गया था और वह पिछली रात से लापता थे। पुलिस ने इस मामले में लापरवाही भरे रवैये से काम किया था, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय की हत्या हुई है। 

इस मामले पर भाजपा अध्यक्ष (उत्तरी दिनाजपुर) का कहना था कि सुसाइड नोट कथित हत्यारे नेताओं को बचाने के लिए पुलिस द्वारा रचा गया षड्यंत्र है। उनका कहना था, “हम इस मामले में सीआईडी द्वारा की गई जाँच से संतुष्ट नहीं हैं और सीबीआई जाँच की ही माँग करते हैं।”     

13 साल की दलित से आलम ने की रेप की कोशिश, आग के हवाले कर भाग गया

तेलंगाना के खम्मम जिले में एक 13 वर्षीय दलित को आग के हवाले कर दिया गया। नाबालिग दलित लड़की एक घर में घरेलू सहायिका का काम करती थी। एक दिन घर के मालिक के बेटे ने उसके साथ रेप करने की कोशिश की, इनकार करने पर उसने उसे आग में झोंक दिया। लड़की 70 प्रतिशत जल चुकी है और एक अस्पताल में जीवन के लिए जूझ रही है।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, घटना 18 सितंबर को हुई थी जिसके बाद लड़की के मालिक ने उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया और उसके माता-पिता से घटना की सच्चाई छुपाई।

सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को लड़की ने अपने पिता को बताया कि घटना वाले दिन वास्तव में क्या हुआ था। पीड़िता द्वारा बताए जाने के बाद उन्होंने खम्मम के वन टाउन पुलिस में शिकायत दर्ज की, जिसके बाद मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के मुताबिक लड़की खम्मम जिले के पललीगुडेम गाँव की है। उसने इसी साल मई में आलम सुब्बाराव के घर में काम करना शुरू किया था। वो आलम सुब्बाराव के घर में ही रहती थी।

कुछ दिनों पहले आलम सुब्बाराव ने लड़की के पिता को फोन किया और बताया कि उनकी बेटी काम के दौरान आग लगने से घायल हो गई। जब पीड़िता के पिता अस्पताल पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि पीड़िता गंभीर रूप से जल गई थी और वह अचेत अवस्था में था।

सोमवार को लड़की को होश आया और उसने अपने माता-पिता को बताया कि कैसे आलम सुब्बाराव का बेटा आलम मरैया ने उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश की। पीड़िता ने कहा, “जब मैं कमरे में थी, तो वह अंदर आया और मुझे अपने साथ सोने के लिए कहा। जब मैंने मना कर दिया, तो वो जबरन मेरे ऊपर आ गया। मैंने बहुत संघर्ष किया। उसने मेरे कपड़े फाड़ दिए और बाद में मुझे आग के हवाले कर दिया और वहाँ से भाग गया।”

विजय माल्या को लाने के लिए चल रही ‘गोपनीय’ कार्यवाही: सुप्रीम कोर्ट को केंद्र ने बताया

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के मामले पर सुनवाई हुई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश ब्रिटेन की सर्वोच्च अदालत ने दिया था, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। इस मामले पर केंद्र सरकार का कहना है कि उसे ब्रिटेन में चल रही ‘गुप्त’ कार्यवाही और कारणों की जानकारी नहीं है जो माल्या के प्रत्यर्पण में देरी कर रही है।  

न्यायमूर्ति उदय यू ललित और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने माल्या के वकील से पूछा कि उसके प्रत्यर्पण के लिए यह किस तरह की गोपनीय कार्यवाही चल रही है। इस पर माल्या के वकील अंकुर सैगल ने अदालत से कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि किस तरह की कार्यवाही चल रही है।

माल्या के वकील ने कहा, “मुझे इतनी ही जानकारी है कि प्रत्यर्पण कार्यवाही के खिलाफ मेरा अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया है।” पीठ ने माल्या के वकील को दो नवंबर तक यह जानकारी देने का निर्देश दिया कि भगोड़ा कारोबारी अदालत में कब पेश हो सकेगा और यह गोपनीय कार्यवाही कब खत्म होने वाली है।

केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता रजत नायर ने पीठ से कहा कि अदालत के निर्देशानुसार ही प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि कोई गोपनीय प्रत्यर्पण कार्यवाही चल रही है, जिसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की सर्वोच्च अदालत ने माल्या के प्रत्यर्पण की कार्यवाही को बरकरार रखा है, लेकिन अभी ऐसा नहीं हो रहा है।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले माल्या की 2017 की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए उसे 5 अक्टूबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। अदालत ने विजय माल्या को कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करके अपने बच्चों के खातों में चार करोड़ अमेरिकी डॉलर हस्तांतरित करने के मामले में 2017 में अवमानना का दोषी ठहराया था। माल्या पर अब बंद हो चुकी किंग्सफिशर एयरलाइंस से संबंधित 9,000 करोड़ रुपए से अधिक का बैंक कर्ज अदा नहीं करने का आरोप है। माल्या इस समय ब्रिटेन में है।

शीर्ष अदालत ने 2017 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह की याचिका पर वह आदेश दिया था। याचिका में कहा गया था कि माल्या ने कथित रूप से विभिन्न न्यायिक आदेशों का ”खुलेआम उल्लंघन” कर ब्रिटिश कंपनी डियाजियो से प्राप्त 40 मिलियन यूएस डॉलर अपने बच्चों के खातों में ट्रांसफर किए थे।

भारतीय एजेंसियाँ उसके प्रत्यर्पण की कोशिश में जुटी हैं। लंदन हाईकोर्ट ने इस साल 14 मई को उस अर्जी को भी खारिज कर दिया, जिसमें माल्या ने प्रत्यर्पण के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की इजाजत माँगी थी। इसके बाद माल्या के पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा है।

रातोंरात वेबसाइट, फेक आईडी, विदेशों से फंडिंग: हाथरस केस के बहाने रची गई जातीय दंगों की साजिश की पूरी डिटेल

जाँच एजेंसियों ने हैरान कर देने वाला खुलासा किया है। खुलासे के मुताबिक़ देश के अलग अलग क्षेत्रों में दंगा कराने का षड्यंत्र रचा जा रहा था। इसमें उत्तर प्रदेश मुख्य रूप से निशाने पर था जहाँ हाल ही में हाथरस घटना हुई है। षड्यंत्र का एक ही उद्देश्य था प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि को नुकसान पहुँचाना।

जाँच एजेंसियों की पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि विरोध-प्रदर्शन की आड़ में रातों रात ‘जस्टिस फॉर हाथरस (Justice for hathras)’ नाम की वेबसाइट बनाई गई। इस वेबसाइट का इकलौता उद्देश्य था, उत्तर प्रदेश को दंगों की आग में झोंक देना। 

रातों रात बन गई ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ वेबसाइट

पीड़िता की मृत्यु के ठीक एक दिन बाद यह वेबसाइट तैयार हुई और हज़ारों लोग इस वेबसाइट से जुड़ गए। हैरानी की बात यह थी कि जुड़ने वाले लगभग सभी लोग फेक आईडी से जुड़े थे। जाँच में सामने आए नतीजों के मुताबिक़ इस वेबसाइट को इस्लामी देशों द्वारा समर्थित कट्टरपंथी संगठन, एमनेस्टी इंटरनेशनल से फंडिंग मिलती थी। यह वेबसाइट बहुसंख्यक समुदाय में असंतोष पैदा करने, योगी और मोदी सरकार को कमज़ोर करने का प्रयास कर रही थी। इस वेबसाइट पर इस तरह की सामग्री पाई गई, जिसमें सांप्रदायिक दंगा भड़काने की बात हो रही थी। 

वेबसाइट सरकार की जानकारी में उस वक्त आई जब इसके जरिए भ्रामक, भड़काऊ और आपत्तिजनक विषय-वस्तु का प्रचार किया जा रहा था। रविवार (4 अक्टूबर 2020) की रात छापेमारी के दौरान वेबसाइट पर कार्रवाई हुई थी। जाँच एजेंसियों को पड़ताल के दौरान यह भी पता चला कि इस वेबसाइट को बनाने में एसडीपीआई और पीएफआई जैसे संगठनों ने भी सहयोग किया था। इस वेबसाइट पर एडिट किए गए वीडियो और फोटोशॉप की गई तस्वीरें साझा की गई थीं, जिससे देश और प्रदेश में अस्थिरता और जातीय दंगों जैसे हालात बनें।

वेबसाइट पर बहुसंख्यक समुदाय को भड़काने वाली कंटेंट

वेबसाइट पर जिस तरह की विषय-वस्तु साझा की गई थी उसमें विस्तार से उल्लेख था कि दंगों के दौरान प्रदर्शन करने वालों को क्या करना है (Do’s) और क्या नहीं करना है (Don’ts)। इसके बाद वेबसाइट में इस प्रक्रिया का भी उल्लेख था कि कैसे दंगा भड़काना है और उसके आरोपों से बच कर निकलना है। इतना ही नहीं वेबसाइट में खुद की सुरक्षा के लिहाज़ से ऐसे दिशा-निर्देशों की जानकारी दी हुई थी कि प्रदर्शन करने वालों को क्या पहनना है, क्या लेकर आना है, किस तरह आँसू गैस से बचना है। साथ ही पुलिस द्वारा होने वाली कार्रवाई से किस तरह खुद का बचाव करना है।  

जस्टिस फॉर हाथरस वेबसाइट पर Do’s (क्या करना) और Don’ts (क्या नहीं करना) की सूची

वेबसाइट में दंगा भड़काने के साथ साथ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निशाना बनाने की बात का भी ज़िक्र था। मास्क के इस्तेमाल का निर्देश भी दिया गया था और ऐसा कोरोना वायरस से बचाव के लिए नहीं, बल्कि पहचान में आने से बचने के लिए करना था। इसके अलावा वेबसाइट में प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण को बढ़ावा देने की बात कही गई थी, जिससे दंगा ज़्यादा से ज़्यादा भड़के। 

जस्टिस फॉर हाथरस वेबसाइट पर Do’s (क्या करना) और Don’ts (क्या नहीं करना) की सूची

प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों को एन 95 मास्क पहनने का निर्देश दिया गया था, जिससे आँसू गैस का असर कम से कम हो। इसके बाद आँसू गैस के प्रभाव से बचने के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी गई थी। 

जस्टिस फॉर हाथरस वेबसाइट पर Do’s (क्या करना) और Don’ts (क्या नहीं करना) की सूची

दंगाइयों को ख़ास तौर पर वैसलीन, मिनरल आयल या सनस्क्रीन नहीं लगाने का निर्देश दिया गया था, जिससे किसी तरह के रासायनिक पदार्थ नज़र नहीं आएँ। महँगे और ब्रांडेड कपड़े नहीं पहनने की बात भी कही गई थी, क्योंकि इन कपड़ों में उनकी पहचान करने में आसानी होती। इसके स्थान पर ढीले और काले कपड़े पहनने की बात कही गई थी, जिससे पुलिस के लिए उनकी पहचान करना मुश्किल हो। 

जस्टिस फॉर हाथरस वेबसाइट पर Do’s (क्या करना) और Don’ts (क्या नहीं करना) की सूची

अमेरिका में हुए दंगों की तर्ज पर अव्यवस्था फैलाने का प्रयास

खुफ़िया एजेंसी की जाँच रिपोर्ट के मुताबिक़ सीएए और एनआरसी का विरोध करने वाले दंगाइयों ने ही यह वेबसाइट बनाई थी। इसका एक ही उद्देश्य था, जिस तरह अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मृत्यु के बाद दंगे भड़काए गए थे, उसकी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में दंगों को अंजाम दिया जाए। जो दंगाई सीएए और एनआरसी के विरोध-प्रदर्शन में शामिल थे, उन्होंने इस वेबसाइट में बनाने में मदद कि क्योंकि वह योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई का बदला लेना चाहते थे।   

दंगाई लॉबी मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए देश के अलग-अलग क्षेत्रों  में बड़े पैमाने पर दंगा भड़काना चाहती थी। नफरत फैलाने के लिए दंगे का षड्यंत्र रचने वालों ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके भड़काऊ भाषणों का जम कर प्रचार-प्रसार किया। जिससे लोगों आक्रोशित होकर प्रतिक्रिया दें और हालात बदतर हों। 

दंगा भड़काने के आरोप में मामला दर्ज 

जैसे ही यह ख़बर प्रकाश में आई कि हाथरस विरोध-प्रदर्शन की आड़ में दंगा भड़काने की वैश्विक स्तर पर साजिश रही जा रही है, वैसे ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज किया। हाथरस पुलिस ने इस मामले में कई आरोपों के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसमें जातीय और सांप्रदायिक आधार पर दंगा भड़काना, अराजकता फैलाना, दंगों का आरोप लगा कर सरकार की छवि को नुकसान पहुँचाना, अफवाहों को बढ़ावा देना, पीड़िता के परिवार को सरकार के विरुद्ध भड़काना, फर्जी अफवाहें, तस्वीरें और जानकारी मुख्य हैं। 

दंगा भड़काने वाली वेबसाइट के विरुद्ध हाथरस पुलिस की प्राथमिकी

पूरे घटनाक्रम में पुलिस ने कई प्रकार की धाराएँ लगाई हैं, जिसमें शामिल हैं- 109, 120(B), 124-A, 153-A, 153-A(1), 153-A(1)(a), 153-A(1)(b), 153-A(1)(c), 153-B, 195, 195-A, 465, 468, 469, 501, 505(1), 505(1)(b), 505(1)(c), 505(2) और 67 

‘जस्टिस फॉर हाथरस’ विक्टिम कार्ड 

जाँच शुरू होने के कुछ घंटों बाद ही वेबसाइट बंद हो गई। यह कार्ड (Carrd) वेबसाइट थी। यह प्लेटफॉर्म इस साल की शुरुआत में अमेरिका में हुए ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ विरोध-प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आई थी। अधिकृत डोमेन नहीं होने के कारण इसे ट्रैक करना मुश्किल होता है।