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‘UPSC जिहाद’: केंद्र ने सुदर्शन न्यूज को भेजा नोटिस, सुनवाई 26 अक्टूबर तक स्थगित

सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम UPSC जिहाद के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इंटर मैजिस्ट्रियल कमेटी ने ‘UPSC जिहाद’ कार्यक्रम के आगे के एपिसोड के प्रसारण पर सलाह देते हुए अपनी सिफारिशें दी हैं। सुदर्शन न्यूज टीवी को कमेटी की सिफारिशों को संबोधित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। 

मामले में सुदर्शन न्यूज टीवी को एक और नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई को टालने का अनुरोध किया, इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई टाल दी। मामले में अब 26 अक्‍टूबर को सुनवाई होगी।

कल (अक्टूबर 4, 2020) केंद्र सरकार द्वारा स्थगन की माँग वाला एक पत्र प्रसारित किया गया था। पत्र में कहा गया है कि, जैसा कि बेंच को सूचित किया गया था, भारत संघ ने केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 की धारा 20 (3) के तहत केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए, सुदर्शन न्यूज को 23.09.2020 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और 28.09.2020 को वापस किया गया।

नोटिस का पालन करते हुए सुदर्शन समाचार ने इसका जवाब दिया और फिर उस पर विचार करने एवं सिफारिशों के लिए इंटर मैजिस्ट्रियल कमेटी को भेज दिया गया। इसके बाद इंटर मैजिस्ट्रियल कमेटी ने अपनी कार्यवाही की, जिसमें सुदर्शन न्यूज को लिखित दलीलें दाखिल करने के साथ-साथ मौखिक दलीलें देकर मामले का प्रतिनिधित्व करने का पूरा मौका दिया गया।

कार्यवाही के बाद, आईएमसी ने कुछ कार्यक्रमों के संबंध में 04.10.2020 को केंद्र सरकार को कुछ अतिरिक्त सिफारिशें दीं जिनका सुदर्शन टीवी समाचार चैनल द्वारा प्रसारण किया जाना बाकी है।

पत्र में कहा गया है, “केंद्र सरकार का सक्षम प्राधिकारी सुदर्शन टीवी समाचार चैनल को एक और अवसर देने के लिए बाध्य है, जो इंटर मैजिस्ट्रियल कमेटी द्वारा दी गई सिफारिश और भविष्य के कार्यक्रम के संबंध में इंटर मैजिस्ट्रियल कमेटी द्वारा की गई अतिरिक्त सिफारिश पर अपना प्रतिनिधित्व सामान्य रूप से और विशेष रूप से सम्मान के साथ प्रस्तुत करे।”

Letter circulated by the central government
Letter circulated by the central government

पत्र में आगे कहा गया है, “सुदर्शन टीवी न्यूज़ चैनल को सुनवाई का अंतिम अवसर देने के बाद ही केंद्र सरकार केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 की धारा 20 की उप-धारा 3 के तहत आदेश पारित करने की स्थिति में होगी।”

सुनवाई के दौरान, डी वाई चंद्रचूड़, इंदु मल्होत्रा और इंदिरा बनर्जी की बेंच ने इस स्थगन को स्वीकार कर लिया। केंद्र सरकार के सामने सुदर्शन न्यूज की सुनवाई कल यानी 6 अक्टूबर 2020 को होनी है।

एक याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत को केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले के बावजूद बड़े मामले पर फैसला करने की जरूरत है। इसके बाद, सॉलिसिटर जनरल, जो केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने कहा, “क्या मैं एक अनुरोध कर सकता हूँ? मेरे हिसाब ये यह मामला कोर्ट, याचिकाकर्ता और प्रतिवादी के बीच में ही रहने दें। हर कोई हस्तक्षेप कर रहा है और इस दायरे को बढ़ा रहा है।” हालाँकि, बाद में अधिवक्ता शाहरुख आलम ने हस्तक्षेप किया और अदालत से अनुरोध किया कि वह 23 सितंबर को दिए गए आदेश पर अड़े रहे। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने उन्हें आश्वासन दिया कि अदालत पूरी सुनवाई करेगी।

सुनवाई के दौरान, एक वकील ने संजीव नेवार की ओर से पेश होने और इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की, क्योंकि वह यूपीएससी-जिहाद के एक शो में एक पैनलिस्ट थे और पिछली सुनवाई के दौरान उनकी टिप्पणियों का उल्लेख किया गया था।

हालाँकि, जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और कहा कि चूँकि वह टेलीविजन शो में दिखाई देते हैं, इसलिए वह शिकायत नहीं कर सकते। इसके अलावा, न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि भविष्य में संभवत: हस्तक्षेपकर्ता उसी चैनल पर वापस जाएगा। जस्टिस चंद्रचूड़ ने सुनवाई की अगली तारीख 26 अक्टूबर तय की।

गौरतलब है 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया अवलोकन करने के बाद सुदर्शन न्यूज के ‘बिंदास बोल’ शो के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, इंदु मल्होत्रा ​​और केएम जोसेफ की एक पीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सुदर्शन न्यूज के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके द्वारा होस्ट किया गया शो ‘बिंदास बोल’ सेवाओं में समुदाय विशेष के युवाओं के प्रवेश को सांप्रदायिक रूप दे रहा था।

नशे में धुत पुलिस ने फिंकवाई माँ दुर्गा की मूर्ति, दान के पैसे और जेवर भी ले गए: ग्रामीणों का दावा, पुलिस ने नकारा

बिहार के सीतामढ़ी जिले के मेघपुर गाँव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच आपसी झड़प का मामला सामने आया है। घटना शनिवार (अक्टूबर 3, 2020) की है।  पुलिस का कहना है कि पूरा मामला अफवाह के कारण शुरू हुआ। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने उन पर ज्यादती की। उन पर गोली चलाई और माँ दुर्गा की प्रतिमा को पानी में फिंकवा दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीतामढ़ी जिले के मेघपुर में कुछ लोग दुर्गा पूजा का आयोजन करवा रहे थे। साथ ही दुर्गा माँ की मूर्ति का निर्माण भी वहाँ कराया जा रहा था। जब पुलिस प्रशासन को इसकी जानकारी मिली तो सशस्त्र बल के साथ थाना प्रभारी दुर्गा पूजा के आयोजन को रोकने और प्रतिमा हटाने के लिए पहुँच गए। इस पर मेघपुर के ग्रामीण कथित तौर पर भड़क गए और पुलिस पर पथराव करने लगे। 

ग्रामीणों का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पहले तो पुलिस विभिन्न मूर्तियों को उठाकर जबरन विसर्जन करवाना चाहती थी। लेकिन बाद में उन्होंने माँ दुर्गा की प्रतिमा के साथ बने गणपति, सरस्वती, कार्तिक, लक्ष्मी आदि की छोटी-छोटी मूर्तियों को उठवा कर पूजा स्थल से करीब 1 किलोमीटर दूर पानी में फिंकवा दिया।

इसी के बाद बात बढ़ी और गुस्साए ग्रामीणों ने पत्थर फेंकने शुरू किए। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पुलिस ने यह काम शराब के नशे में किया। इधर, पुलिस का कहना है कि जब उनकी टीम पर ग्रामीण भारी पड़ने लगे, तो उन्होंने हवाई फायरिंग की।

दोनों पक्ष के लोग हुए घायल

बता दें कि इस आपसी झड़प में पलक चौधरी का बेटा राघवेंद्र चौधरी गोली लगने से जख्मी हो गया, जिसे इलाज के लिए सीतामढ़ी के निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया है। पुलिस का कहना है कि राघवेंद्र को गोली ग्रामीणों की फायरिंग में लगी है।

उसके अलावा पत्थरबाजी बाजी व लाठीचार्ज में ग्रामीण सुशील चौधरी, उमेश चौधरी, सुनील झा, सर्किल इंस्पेक्टर अरुण कुमार, जोनल ऑफिसर संजय कुमार, अवर निरीक्षक ललन सिंह समेत 12 से अधिक लोग घायल हो गए।

भाजपा मंडल अध्यक्ष अध्यक्ष ने उठाई जाँच की माँग

गौरतलब है कि इस मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष सुरेश कुमार मिश्रा ने जाँच के बाद कार्रवाई की माँग की है। दूसरी ओर पूजा समिति के अध्यक्ष ब्रजेश चौधरी, उपाध्यक्ष राकेश चौधरी, सचिव बृजेश मंडल व कोषाध्यक्ष साकिर हुसैन आदि ने आरोप लगाया है कि साजिश के तहत व बिना जानकारी दिए पुलिसकर्मियों द्वारा फायरिंग की गई। 

ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिसकर्मी मूर्तियाँ फिंकवाने के साथ-साथ दान की गई 55 हजार की नकद राशि व 1 लाख रुपए के जेवर भी ले गए। इसी सब से नाराज हो कर ग्रामीणों व दुर्गा पूजा से जुड़े पूजा समिति के दर्जनों सदस्यों ने सुरसंड मेघपुर पथ को घंटों तक जाम कर विरोध-प्रदर्शन किया। ये लोग आरोपित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग कर रहे थे।

पुलिस का पक्ष

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरसंड थानाध्यक्ष भोला प्रसाद सिंह ने बताया कि शनिवार की रात पुलिस इलाके में गश्त लगा रही थी। इसमें जोनल अधिकारी, सर्किल इंस्पेक्टर के साथ कई अधिकारी शामिल थे। इसी बीच 2-3 संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही थी। तभी, किसी ने मेघपुर स्थित एक मंदिर में लगे माइक से अफवाह फैलाते हुए घोषणा कर दी कि पुलिसवाले मारपीट कर रहे हैं।

बता दें कि एसपी प्रमोद कुमार यादव ने आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि 2-3 बदमाशों ने अफवाह फैलाकर लोगों को उकसाने का काम किया है। सबकी पहचान कर ली गई है। इन लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई की जा रही है। पुलिस पर लगाए जा रहे आरोप गलत है और इलाके में शांति है।

बिहार चुनाव: जूते-चप्पल, अंडे, मोबिल और पत्थर… सब खाने वाले कन्हैया कुमार को टिकट नहीं

राजद और कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर वाम दल बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। गठबंधन में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया है। लेकिन, इस सूची में भाकपा नेता कन्हैया कुमार का नाम नहीं है। बेगूसराय से लोकसभा चुनाव हार चुके कन्हैया के बछवाड़ा से विधानसभा चुनाव लड़ने की अटकलें थी। 

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को 6, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को 4 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (सीपीआई-एमएल) को 19 सीटें गठबंधन में मिली है। इनमें सीपीआई ने सभी 6 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है, सीपीएम ने भी अपने चार उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। माना जा रहा कि जल्द ही सीपीआई एमएल भी अपने कैंडिडेट्स के नाम का ऐलान कर देगा।

सीपीआई ने इन्हें दिया टिकट

सूर्यकांत पासवान को बेगूसराय की बखरी विधानसभा सीट से टिकट दिया गया है। बेगूसराय की तेघड़ा से राम रतन सिंह, बछवाड़ा से अवधेश कुमार राय, मधुबनी की हरलाखी विधानसभा सीट से राम नरेश पांडेय, मधुबनी की झंझारपुर सीट से रामनारायण यादव, पूर्णिया की रूपौली सीट से विकास चंद्र मंडल उम्मीदवार बनाए गए हैं।

सीपीएम उम्मीदवारों की लिस्ट

सीपीएम ने जिन चार सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है उनमें समस्तीपुर की विभूतिपुर विधानसभा सीट से अजय कुमार उम्मीदवार होंगे। सारण की मांझी सीट पर सत्येंद्र यादव, पूर्वी चंपारण की पीपरा सीट से राजमंगल प्रसाद और बेगूसराय की मटिहानी सीट से राजेंद्र प्रसाद सिंह कैंडिडेट होंगे।

कन्हैया कुमार नहीं लड़ेंगे चुनाव

सीपीआई ने सभी 6 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए, इसमें कन्हैया कुमार का नाम नहीं है। ऐसे में उन अटकलों पर विराम लग गया कि कन्हैया कुमार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बन सकते हैं। कन्हैया कुमार 2019 लोकसभा चुनाव में सीपीआई के टिकट पर बेगूसराय सीट से उम्मीदवारी की थी, हालाँकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उनके विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा थी।

2020 के शुरू से ही कन्हैया कुमार बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर खासे एक्टिव रहे और अक्सर बताते रहे कि चुनावी मुद्दा क्या होने वाला है। कन्हैया कुमार CAA, NPR और NRC के विरोध में बिहार दौरे पर निकले थे और कई जगह उनको लोगों का विरोध भी झेलना पड़ा था। एक-दो जगह तो काफिले पर लोगों के हमले के बाद पुलिस को उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए मशक्कत करनी पड़ी थी। कुछ जगहों पर तो जूते-चप्पल, अंडे, मोबिल और पत्थर वगैरह भी चले थे। कुछ जगहों पर ‘कॉमरेड कन्हैया मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए गए।

कन्हैया कुमार जिन दिनों बिहार चुनाव को लेकर खासे तत्पर दिखाई दे रहे थे, फोर्ब्स मैगजीन ने दुनिया के टॉप-20 निर्णायक लोगों की एक सूची जारी की थी। सूची में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को अगले दशक का निर्णायक चेहरा बताया गया था। सूची में कन्हैया कुमार को 12वाँ स्थान दिया गया था।

‘क्या तुम नंगी सोती हो’: नाबालिग छात्राओं को गंदे मैसेज भेजने वाले बाइबिल ‘उपदेशक’ को ईसाई संस्था ने पद से हटाया

ईसाई मिशनरी स्कूलों में बाइबिल की शिक्षा देने वाली संस्था ‘स्क्रिप्चर यूनियन (SU)’ के तमिलनाडु के निदेशक सैम जयसुंदर को उसके पद से हटा दिया गया है। उस पर छात्राओं को आपत्तिजनक मैसेज भेजते के आरोप हैं। यौन शोषण के उद्देश्य से उसनेकई नाबालिग छात्राओं को आपत्तिजनक मैसेज भेजे थे। ट्विटर यूजर जोएल गिफ्टसन ने एक थ्रेड के जरिए कई स्क्रीनशॉट्स के माध्यम से सैम जयसुंदर की करतूतों का खुलासा किया था।

सैम जयसुंदर छात्राओं को फँसाने के लिए उनके पहनावे के बारे में पूछता था और ‘मिनी स्कर्ट में’ तस्वीरें भेजने को कहता था। वेल्लोर की ईसाई मिशनरी स्कूलों की कई छात्राओं ने उसके खिलाफ आवाज़ उठाई थी। इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद SU के बोर्ड मेंबर्स ने रविवार (अक्टूबर 4, 2020) को एक इमरजेंसी बैठक बुलाई।

इस बैठक में उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की गई। इसके ठीक एक दिन बाद सोमवार को उसे सस्पेंड करने की घोषणा की गई। SU के नेशनल डायरेक्टर जोशुआ किरुबारज ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि उन्होंने इस मामले में एक जाँच समिति का गठन किया है, जो पूरी रिपोर्ट तैयार करके देगी। इस रिपोर्ट के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई करने का आश्वासन संस्था की तरफ से दिया गया है।

सैम जयसुंदर पिछले 17 सालों से SU से जुड़ा हुआ है और हर साल संस्था के लिए कई कार्यक्रमों को आयोजित करता आ रहा है। उसके अलावा संस्था के दो अन्य अधिकारियों रुबेन क्लेमेंट और अल्बर्ट पर भी इसी तरह के मैसेज भेजने के आरोप लगे हैं। वेल्लोर स्कूल मैनेजमेंट ने कहा है कि मई में SU का एक कार्यक्रम उसके यहाँ होना था, लेकिन कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण उसे स्थगित कर दिया गया था।

वेल्लोर के उस स्कूल प्रबंधन कमिटी के एक सदस्य ने कहा कि उन्हें फ़िलहाल इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने ये भी कहा कि स्कूल का मई 2020 के बाद से SU से किसी प्रकार का संपर्क नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे ही प्रबंधन को इसका पता चला, इस मामले को तुरंत SU के साथ उच्च स्तर पर उठाया गया और आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की गई।

स्क्रीनशॉट्स के अनुसार, एक लड़की से उसने पूछा कि क्या तुम कभी नंगी (फिर समझाते हुए उसने फिर पूछा- ‘बिना कपड़ों के?’) सोती हो? साथ ही वो लड़कियों को ‘स्वीटी’ कहते हुए उनसे फ्री होकर बात करने को कहता भी दिख रहा है। एक 14 वर्षीय लड़की से उसने पूछा कि क्या वो और उसके साथी लड़का-लड़की एक-दूसरे को गले लगाते हैं? सैम ने नाबालिग से पूछा कि क्या किसी ने उसे आलिंगन में लिया है या किस किया है?

4 वीडियो, कुछ तस्वीरें, मीडिया और हाथरस: टीआरपी और एजेंडा का घिनौना तमाशा

हाथरस में घटी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद यह मीडिया पर्यटक स्थल बन गया है। विभिन्न मेनस्ट्रीम न्यूज नेटवर्क के पत्रकार नई-नई तकनीकें अपनाकर टीआरपी की होड़ में आगे बढ़ने की जुगाड़ में लगे हुए हैं। इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसे वीडियो से भरे हुए हैं, जिसमें तथाकथित पत्रकार न्याय के लिए लड़ाई की आड़ में अपनी नीच आचरण का परिचय दे रहे हैं।

हिंदी न्यूज चैनल भारत समाचार के पत्रकार द्वारा इसी तरह का वीडियो शेयर किया गया है। इसमें पत्रकार खेत के पास बैठ जाती है और पीड़ितों से मिलने की जिद करती है। इतनी ही नहीं, वो पुलिस अधिकारियों को यह कहकर उकसाती है कि क्या वे भी उसे उसी तरह जला देंगे, जैसा उन्होंने हाथरस पीड़िता के शव का दाह संस्कार किया था।

महिला पुलिस अधिकारी उस पत्रकार के सामने हाथ जोड़ती है और वहाँ से उठने का निवेदन करती है। महिला पुलिस अधिकारी पत्रकार से कहती है कि वो वहाँ से उठ जाए, किसी तरह का तमाशा न करें। वहीं दूसरी तरफ पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा का पुलिस अधिकारियों को उकसाकर ये पूछना कि क्या वो उन्हें भी जलाएँगे, ये उनकी नैतिक स्तर का परिचय देती है।

इस तरह का व्यवहार करने के पीछे दो कारण हैं- पहला तो ये कि वह चाहते हैं कि दर्शकों को इस बात पर विश्वास को पत्रकार ग्राउंड लेवल पर जाकर भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ पीड़िता के लिए न्याय की लड़ रही है और दूसरा कारण है- टीआरपी, जो कि उल्लेखनीय गति के साथ घट रही है।

इसी तरह का एक वीडियो ABP न्यूज की तरफ से 2 अक्टूबर को शेयर किया गया। जिसमें मीडिया नेटवर्क की पत्रकार प्रतिमा मिश्रा हंगामा करते हुए जबरन गाँव के अंदर घुसने का प्रयास करती है। इस दौरान वो बार-बार ये कहती हैं कि वो अपना काम कर रही है। हालाँकि बाद में उन्हें और कैमरामैन को गाड़ी में बैठाकर गाँव के बाहर कर दिया जाता है। प्रतिमा मिश्रा आरोप लगाती है कि उन्हें बिना महिला पुलिसकर्मी वाली गाड़ी में बैठाकर जबरन गाँव के बाहर किया जाता है।

एबीपी न्यूज़ ने उसी दिन एक और वीडियो पोस्ट किया। इस पोस्ट का कैप्शन था, “हाथरस की बेटी के लिए एबीपी न्यूज के सत्याग्रह को पुलिस ने की रोकने की कोशिश। आखिर गाँधी जयंती पर बापू के विचारों को कुचलने वाला ‘गोडसे’ कौन?”

एक अन्य वीडियो में, एबीपी न्यूज ने दावा किया कि पीड़ित परिवार से मिलने की कोशिश कर रहे उनके पत्रकार और कैमरामैन के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस ने छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार किया।

‘पत्रकार’ बरखा दत्त ने भी 2 अक्टूबर को तस्वीरें पोस्ट करते हुए बताया था कि कैसे कई किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद वो गाँव पहुँचने में कामयाब हुई, लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें और उनकी मोजो टीम को पकड़कर पुलिस वैन में बैठाया और उन्हें फिर से हाइवे पर पहुँचा दिया।

जब इन वीडियो और तस्वीरों को शूट किया गया था तब धारा 144 लगाई गई थी

उल्लेखनीय है कि जिस समय पर ये तस्वीरें और वीडियो शूट किया गया है, उस समय वहाँ पर SIT जाँच को देखते हुए धारा 144 लगाई गई थी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्य सड़क पर गाँव से लगभग 2 किमी की दूरी पर बैरिकेड्स लगा दिए थे, जिससे गाँव के सभी प्रवेश मार्ग बंद हो गए।

हालाँकि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गाँव में प्रवेश अनुमति नहीं देने के कदम पर सवाल उठाना मीडिया के अधिकार में है। लेकिन मीडिया द्वारा प्रदर्शित इन ड्रामेबाजी से लगता नहीं कि उनका मकसद पीड़ित परिवार से मिलना है।

इससे भी बुरी बात यह है कि एसआईटी जाँच पूरी होने के बाद यूपी सरकार द्वारा मीडिया को गाँव में जाने की अनुमति दिए जाने के बाद सभी चैनलों का दावा था कि ऐसा उनके दवाब की वजह से हुआ। जबकि सच्चाई यह थी कि मीडिया को अनुमति इसलिए दी गई क्योंकि एसआईटी जाँच पूरी हो चुकी थी। इस सबसे यह स्पष्ट होता है कि कोई पत्रकार या चैनल सच्चाई को सामने लाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी गिरती टीआरपी को उठाने के लिए ये सब कर रहे थे। 

इंडिया टुडे की पत्रकार का ऑडियो लीक

गौरतलब है कि ऑपइंडिया ने इंडिया टुडे के पत्रकार और हाथरस पीड़िता के भाई के बीच की लीक बातचीत की रिपोर्ट की थी। इसमें सुना जा सकता था कि इंडिया टुडे की पत्रकार तनुश्री मृतका के भाई संदीप को ऐसा स्टेटमेंट देने के लिए बोल रही हैं, जिसमें लड़की के पिता आरोप लगाए कि उनके ऊपर प्रशासन की ओर से बहुत दबाव था। बातचीत को सुनकर यह साफ पता चलता था कि तनुश्री पीड़िता के भाई से एक निश्चित बयान दिलवाने का प्रयास कर रही थी और संदीप की दबी आवाज सुनकर लग रहा था, जैसे वह ऐसा नहीं करना चाहते।

‘PFI के दलालों वापस जाओ…’: हाथरस पहुँचे AAP सांसद संजय सिंह पर फेंकी स्याही, कहा- लाशों की राजनीति बंद करो

हाथरस के पीड़ित परिवार से मिलने गए आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह के ऊपर आज (अक्टूबर 5, 2020) स्याही फेंकी गई। स्याही फेंकने वाले का नाम दीपक शर्मा बताया जा रहा है। दीपक ने संजय सिंह पर स्याही फेंकते हुए नारे लगाए- ‘PFI के दलालों वापस जाओ… वापस जाओ।’ इस घटना के बाद युवक को फौरन हिरासत में ले लिया गया।

इस घटना की एक वीडियो भी सामने आई है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पहले दीपक शर्मा उस जगह आते हैं, जहाँ संजय सिंह मीडिया से घिरे खड़े होते हैं। इसके बाद इंक की बोतल संजय सिंह पर फेंकते हुए कहते हैं- ‘PFI के दलालों वापस जाओ… वापस जाओ।’ दीपक के इतना करते ही भीड़ में खड़ा एक युवक उन्हें पकड़ कर संजय सिंह से दूर करता है और दोनों के बीच हल्की झड़प हो जाती है।

इतने पर भी दीपक शांत नहीं होते। उन्हें पकड़ने कई लोग उनके पीछे भागते हैं मगर वह तब भी नारे लगाते रहते हैं। वह आप के प्रतिनिधि मंडल को पीएफआई के गिद्ध कहते हैं। साथ ही आरोप लगाते हैं कि ऐसे लोग लाशों पर राजनीति कर रहे हैं।  जब पुलिस दीपक को पकड़ ले जा रही होती हैं, तब भी वह कहते हैं- लाशों की राजनीति बंद करो।

एनडीटीवी रिपोर्टर का दावा है कि यह घटना गाँव के ही बाहर घटी। गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और विधायक राखी बिड़लान 5 लोगों के डेलिगेशन के साथ पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे थे।

वहाँ उन्होंने मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती पर कई गंभीर आरोप लगाए। संजय सिंह ने हाथरस मामले में बसपा अध्यक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि मायावती और उनकी पार्टी इस मामले में भाजपा के मुखपत्र की तरह काम रही है।

संजय सिंह ने यह भी कहा कि आज प्रदेश के कोने-कोने में बेटियों के साथ दरिंदगी हो रही है, जो बताता है कि योगी आदित्यनाथ से प्रदेश नहीं सँभल रहा है, इसलिए उन्हें इस्तीफा देकर अपने मठ में वापस लौट जाना चाहिए। 

आप नेता ने कहा कि जिस तरह से हाथरस मामले में वहाँ के जिलाधिकारी को बचाया जा रहा है, उससे भी साफ लग रहा है कि कहीं, मुख्यमंत्री की पोल ना खुल जाए, इसलिए जिलाधिकारी को सस्पेंड करने के बजाए बचाया जा रहा है।

DM-SP को माँ-बहन की गाली, CM योगी के लिए भी ‘गंदी बात’: दलित नेता हाथरस में ऐसे सेंक रहे राजनीतिक रोटी

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना का विरोध अभी तक जारी है। विरोध की आड़ में अनेक विपक्षी दल राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह की ख़बरें भी लगातार सामने आ रही हैं। ताज़ा मामले में एक दलित और पिछड़े वर्ग के नेता का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में कमल भारती नाम के नेता ने भरी सभा में बेहद अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया है।

उस नेता ने वीडियो के अंत में कई प्रशासनिक अधिकारियों समेत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी अत्यंत अभद्र टिप्पणी की। विडंबना यह है कि इतनी निम्न श्रेणी की बातें कहने के बाद नेता के आस-पास मौजूद लोग ताली बजा कर उन बातों की प्रशंसा कर रहे हैं।

कुलदीप शुक्ला नाम के इंटरनेट यूज़र ने यह वीडियो ट्विटर पर साझा किया। इसमें हाथरस और उत्तर प्रदेश के तमाम प्रशासनिक-पुलिस अधिकारियों को टैग किया गया है। वीडियो के कैप्शन में यह भी लिखा गया था, “यदि इन जैसों पर कार्यवाही नहीं हुआ तो पूरे उत्तर प्रदेश में मौहाल खराब हो सकता है, मायावती जी आप अपने नेताओं के जुबान को सुनो और निकाल भगाओ ऐसे लोगों को… थोड़ी सी भी इंसानियत हो तो दो शब्द बोलो कृपया संज्ञान लें।”

वीडियो में नेता ने अपना परिचय जिलाध्यक्ष अनुसूचित जाति प्रकोष्ट, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के रूप में दिया। वीडियो की शुरुआत में कमल भारती ने कहा:

“मेरी बहन की इज़्ज़त लूटी गई है तो मैं ठाकुरों की म#या की ऐसी की तैसी करता हूँ। मैं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का जिलाध्यक्ष हूँ अनुसूचित प्रकोष्ठ का, खुला चैलेंज देता हूँ कि जिस ठाकुर की माँ के गोद में अभी ताकत हो वह अपनी बहन बेटी को मेरे यहाँ ले आकर सुला दे। 1 करोड़ रुपया मैं उसको अपनी जायदाद बेच कर दूँगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हाथरस का डीएम अपनी माँ चु# रहा था, वहाँ का एसपी अपनी बहन चु# रहा था। इस प्रदेश का मुख्यमंत्री अपनी माँ के यहाँ सो रहा था।”     

वीडियो चर्चा में आने के बाद पुलिस ने इस मामले का तत्काल प्रभाव से संज्ञान लिया। मऊ पुलिस ने कमल भारती के विरुद्ध धारा 153 ए, 504 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसके अलावा पुलिस ने कमल भारती की गिरफ्तारी के 3 टीमों का गठन भी कर दिया है। पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी ट्वीट के माध्यम से दी। 

इसके पहले कॉन्ग्रेस नेता निजाम मलिक ने भी हाथरस मामले पर विवादित बयान दिया था। निजाम मलिक ने कहा था कि जो हाथरस मामलों के आरोपित का सिर काट कर ले आएगा उसे उनके समुदाय की तरफ से 1 करोड़ रुपए का इनाम दिया जाएगा।

हाथरस मामले पर इस तरह के वीडियो सामने आने के बाद दंगों की साजिश के आरोप के दावे पुख्ता होते जा रहे हैं। प्रदर्शन की आड़ में सार्वजनिक रूप से इस तरह की अमर्यादित भाषा के उपयोग का उद्देश्य न्याय दिलाना कैसे हो सकता है। इसके पहले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस घटनाक्रम पर बयान देते हुए कहा था कि विपक्ष राज्य में सांप्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिश कर रहा है।

हत्या और कथित बलात्कार के मामले में विपक्ष द्वारा जारी विरोध-प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सीएम ने कहा, “जिसे विकास अच्छा नहीं लग रहा, वे लोग देश में और प्रदेश में भी जातीय दंगा, सांप्रदायिक दंगा भड़काना चाहते हैं। इस दंगे की आड़ में विकास रुकेगा। इस दंगे की आड़ में उनकी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने के लिए उनको अवसर मिलेगा, इसलिए नए-नए प्रकार के षड्यंत्र करते रहते हैं।”

बलात्कार आरोपितों की बीवियों को RJD का टिकट, तेजस्वी ने हाथरस पर कहा- 2 मिनट के लिए 1 मिनट का मौन रख लेते हैं

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए दो टिकट बलात्कार आरोपितों के परिवार में बाँटे हैं। उधर जदयू ने बाहुबलियों को टिकट न देने की बात करते हुए ददन पहलवान और गोपालगंज के अमरेंद्र पांडे का टिकट काट दिया है।

राजवल्लभ यादव नवादा से RJD के विधायक थे। फिलहाल बलात्कार के आरोप में जेल में बंद हैं। राजद ने इस बार उनकी पत्नी विभा देवी को टिकट दिया है। वर्ष 2016 में एक नाबालिग लड़की से हुए बलात्कार के मामले में राजवल्लभ यादव आरोपित हैं। उन पर 50,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। राजद उन्हें तो निलंबित कर चुकी है, लेकिन उनकी पत्नी को टिकट से नवाजा गया है।

पटना की एक अदालत ने राजवल्लभ यादव को नाबालिग से बलात्कार के मामले में सज़ा भी सुनाई थी। यादव समेत 5 आरोपतों के खिलाफ सजा मुक़र्रर की गई थी। वहीं भोजपुर जिले के सन्देश से विधायक अरुण यादव भी एक नाबालिग से बलात्कार के मामले में फरार चल रहे हैं। उनकी पत्नी किरण यादव को भी RJD ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

वहीं जदयू ने बक्सर जिले में अंजुम आरा को टिकट दिया है। कहा जा रहा है कि अमरेंद्र पांडे के परिवार में भी किसी को टिकट से नवाजा जा सकता है। पार्टी इससे पहले भी बाहुबलियों को टिकट देती आई है। वहीं राजद द्वारा दो बलात्कार आरोपित नेताओं के परिवार को टिकट दिए जाने के बाद से पार्टी की किरकिरी हो रही है, क्योंकि खुद तेजस्वी यादव भाजपा पर निशाना साधने के लिए हाथरस जैसे मामलों को भुना रहे हैं।

इधर राजद नेता तेजस्वी यादव ने हाथरस मामले में जिस तरह से संवेदनहीनता दिखाई है, उसे लेकर भी उनकी किरकिरी हो रही है। एक संवाददाता सम्मलेन में कॉन्ग्रेस नेता अविनाश पांडेय से तेजस्वी यादव ने कहा, “हाथरस में जो हुआ उसके लिए दो मिनट का मौन रख लेते हैं.. अच्छा सन्देश जाएगा..मनोज जी.. एक मिनट.. एक मिनट का मौन रख लेते हैं।” उनकी ये बात मीडिया कैमरों में रिकॉर्ड हो गई और सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

बंगाल में वहाबी कट्टपंथियों का बढ़ रहा प्रभाव, ‘जिहाद’ के लिए युवाओं की हो रही भर्ती: रिपोर्ट

पिछले महीने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में अलकायदा के 7 आतंकी पकड़े गए थे। अब संडे गार्जियन के अनुसार इन आतंकियों के पकड़े जाने के बाद राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के लिए पड़ताल का विषय यह है कि आखिर सीमावर्ती जिलों में ऐसे नेक्सस ने स्थानीय युवकों पर कितना प्रभाव डाला है और उन्हें किस हद तक उन्हें कट्टरपंथी बना दिया है।

जाँच एजेंसियों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में कई छोटे-छोटे संगठन निकल कर सामने आए हैं जिनका काम नवयुवकों को अपने समूह में शामिल करना और उन्हें कट्टरपंथी बनाना होता है। ऐसे समूहों में युवकों को वहाबी के सिद्धांत पढ़ा कर जिहाद के लिए तैयार किया जाता है।

आतंकियों का खुलासा

संदिग्ध आतंकियों ने गिरफ्तार होने के बाद एनआईए की पूछताछ में खुलासा किया कि वह कई महत्वपूर्ण जगहों पर हमला करके बेगुनाहों को मारने वाले थे। रिपोर्ट बताती है कि ये आतंकी सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भी शामिल हुए थे और इन्होंने सड़कों पर हमला बोलने के लिए भीड़ को भी जुटाया था।

एनआईए को अपनी पड़ताल में इन आतंकियों के पास से जिहादी लिट्रेचर, डिजिटल डिवाइस, धारदार हथियार आदि मिले हैं। संडे गार्जियन ने अपनी रिपोर्ट में एनआईए के सूत्रों का हवाला देते हुए कहा, “हम इस बारे में भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये लोग अपने संगठन में नए लोगों की भर्ती के लिए कैसे काम कर रहे थे। इसके अलावा, अगर बंगाल में किसी भी तरह के इनके ट्रेनिंग कैंप मौजूद हैं, तो उनका सरगना कौन है और कितने लोग उसमें शामिल हैं।”

मीडिया रिपोर्ट्स में एनआईए के सूत्रों का हवाला देकर यह भी बताया गया है कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान 6 आतंकियों को मुर्शिदाबाद में पिछले साल दिसंबर में तैनात किया गया था। वहाँ इन्होंने भीड़ को बड़े पैमाने पर आगजनी, दंगों और लूटपाट के लिए जुटाया था।

जनसांख्यिकीय बदलाव, बेरोजगारी और कट्टरपंथ की अवधारणा

पिछले कुछ सालों में पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) बदलाव देखने को मिला है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। जाँच एजेंसियाँ मानती हैं कि कई कट्टरपंथियों और वहाबी मौलवियों ने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर क्रॉस कर लिया है। वह ‘मजहबी लड़ाई’ के लिए भारत के स्थानीय मुस्लिम आबादी के साथ काम कर रहे हैं।

पिछले दिनों एनआईए ने 6 अलकायदा आतंकियों को पकड़ा था। वह कई कट्टरपंथियों के साथ बंगाल में काम कर रहे थे। जाँच एजेंसी ने जमात उल मुजाहिद्दीन बांग्लादेश के आतंकियों को भी देश के अलग-अलग कोनों से पकड़ा था। इन बातों का खुलासा होने के बाद ऐसा माना गया था कि हो सकता है शेख हसीना की सरकार बंगाल में कट्टरपंथियों को निशाना बना रही हो, जिस कारण वह भागकर बॉर्डर क्रॉस करके बंगाल आ रहे हो।

जाँच एजेंसियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी की वजह से कट्टरपंथी मौलवियों के लिए युवाओं के बीच वहाबी मजहब की शिक्षा का प्रचार-प्रसार आसान हो गया है। वे प्रिंटेड सामग्री, व्हाट्सएप फॉरवर्ड, बैनरों को स्थानीय आबादी में प्रसारित कर रहे हैं। इनके जरिए युवाओं को भारत में इस्लामी शासन लाने के लिए साथ जुड़ने को ‘प्रेरित’ कर रहे हैं।

5 दिन में क्वारंटाइन से निकल हाथरस पहुँचे AAP के कोरोना+ विधायक कुलदीप कुमार, खतरे में डाली कई जिंदगियाँ

दिल्ली की कोंडली विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक कुलदीप कुमार की बड़ी गलती सामने आ रही है। कुलदीप कुमार ने 29 सितंबर को खुद को कोरोना पॉजिटिव बताया, लेकिन पाँच दिन के अंदर ही 4 अक्टूबर को राजनीति करने हाथरस पहुँच कर उन्होंने कई लोगों की जिंदगी दाँव पर लगा दी।

Kuldeep Kumar tested positive for coronavirus on 29th September 2020

AAP विधायक ने 29 अक्टूबर की दोपहर दो बजकर 29 मिनट पर एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि उनको हल्का बुखार हुआ जिसके बाद उन्होंने कोरोना टेस्ट कराया। टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उन्होंने लिखा कि वो घर पर ही आइसोलेट रहेंगे। इसके बाद उन्होंने 4 अक्टूबर को दूसरा ट्वीट करते हुए बताया कि वो हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिजनों से मिलने पहुँचे हैं।

उन्होंने क्वारंटाइन के सारे नियमों का उल्लंघन कर हाथरस की यात्रा की। इस दौरान वो अपनी पूरी यात्रा के बारे में ट्वीट करते रहे। हाथरस जाने के दौरान अपने पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “हाथरस में हुए बर्बरतापूर्ण हत्याकांड से दुःखी होकर बहन मनीषा के परिवार से मिलने जा रहा हूँ।”

COVID-19 पॉजिटिव होने के एक हफ्ते भी नहीं हुए और उन्होंने 4 अक्टूबर को बड़ी भीड़ में लोगों को इकट्ठा किया और हाथरस जाने का फैसला किया।

फिर वह ट्वीट कर बताते हैं कि लगभग 1 घंटे के संघर्ष के बाद उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति मिल गई है।

इसके बाद उन्होंने ट्वीट करते हुए बताया कि प्रशासन की अनुमति के बाद हाथरस में पीड़िता के परिवार से मिलने पहुँच गए हैं।

फिर उन्होंने एक अन्य ट्वीट करते हुए लिखा, “अभी हाथरस में पीड़ित परिवार से मिलकर लौटा हूँ। परिवार में डर और भय का माहौल पैदा किया जा रहा है। ये लोकतंत्र और संविधान की हत्या है। उत्तर प्रदेश में योगी राज में क़ानून नही जंगल राज चल रहा है!”

इस ट्वीट के साथ उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह पीड़ित परिवार के काफी नजदीक बैठे दिख रहे हैं। राजनीतिक रोटी सेंकने के चक्कर में उन्होंने इस बात को नजरअंदाज कर दिया कि वह घातक कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहे हैं, जिस बीमारी ने देश में 1 लाख से अधिक लोगों की जानें ली हैं और 66 लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं।

भाजपा दिल्ली यूनिट ने AAP विधायक के लापरवाह कदम की आलोचना की है और दूसरों के जीवन को जान-बूझकर जोखिम में डालने के लिए महामारी अधिनियम के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

बीजेपी दिल्ली यूनिट ने ट्वीट करते हुए लिखा, 29 सितम्बर को केजरीवाल जी के विधायक अपने आप को कोरोना पॉजिटिव बता रहे हैं और 4 तारीख को सभी की जान जोख़िम में डालकर ये घटिया राजनीति करने हाथरस चले गए। कौन से प्रोटोकॉल के तहत ये 5 दिन में हाथरस गए? इन पर एपिडेमिक एक्ट के तहत तुरंत कार्यवाही होनी चाहिए।”

अब बड़ा सवाल ये है कि जब विधायक कोरोना से संक्रमित थे तो फिर वो परिजनों से मिलने क्यों पहुँचे। क्योंकि पॉजिटिव आने के बाद 15 दिन तक क्वारंटाइन होना होता है। उसके बाद टेस्ट कराना होता है। अगर टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव है तभी आप बाहर निकल सकते हैं।

लेकिन AAP विधायक ने हाथरस की घटना को अपनी पार्टी के पक्ष में मोड़ने की जल्दबाजी में, क्वारंटाइन नियमों को तोड़ दिया और सकारात्मक परीक्षण के पाँच दिनों के बाद पीड़ित के परिवार से मिलने के लिए गाँव पहुँचे। 4 अक्टूबर को, विधायक ने खुद ट्विटर पर जानकारी दी कि वह पीड़ित परिवार से मिलने गाँव पहुँचे थे।