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हैदराबाद: फिरोज खान के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने ANI के पत्रकार पर किया हमला, देखें Video

तेलंगाना में फिरोज खान के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने ANI के पत्रकार पर हमला किया। यह घटना तब हुई जब हाथरस केस में विरोध दर्ज कराने के लिए कॉन्ग्रेस कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने हैदराबाद के टैंक बंद इलाके में रैली निकाली थी।

कथित तौर पर, रैली के लिए कई कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता और पार्टी के वरिष्ठ नेता आंबेडकर की प्रतिमा के पास इकट्ठे हुए थे। प्रदर्शन के दौरान तेलंगाना प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के प्रमुख उत्तम कुमार रेड्डी भी मौजूद थे। रैली की शुरुआत गाँधी भवन से हुई, लेकिन पहले से परमिशन नहीं लेने की वजह से उन्हें रोक दिया गया।

उसी दौरान एएनआई के एक पत्रकार अब्दुल बशीर ने कॉन्ग्रेस नेताओं की बाइट लेने की कोशिश की। इसी दौरान कॉन्ग्रेस के प्रमुख नेता फिरोज़ खान से उनकी बहस हो गई। बहस इस कदर बढ़ गया कि फिरोज़ और उनके कई समर्थक पत्रकार से हाथापाई पर उतर आए। घटनास्थल पर मौजूद अन्य पत्रकारों और पुलिसकर्मियों ने किसी तरह रिपोर्टर को उनसे बचाया।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो क्लिप में स्पष्ट रूप से फिरोज़ खान को पत्रकार पर हमला करते देखा जा सकता है। फिरोज़ खान से झड़प होते ही अन्य कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भी आगे आ गए और उन लोगों ने भी ANI के रिपोर्टर को लात-घूँसों से मारा। इतना ही नहीं जब पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित पत्रकार को बचाने की कोशिश की तो उनके साथ भी कॉन्ग्रेस के गुंडों ने धक्का-मुक्की की।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर अपनी दादागिरी दिखाने के लिए गुंडागर्दी का सहारा लिया है। हाल ही में कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में एक क्षेत्रीय समाचार पत्र, भूमिकल समचार के संपादक कमल शुक्ला को भी कॉन्ग्रेस के गुंडों ने सड़क पर घसीटते हुए पीटा था। उन पर धारदार हथियार से हमला भी किया गया था। यह घटना छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कांकेर पुलिस स्टेशन से लगभग 100 मीटर की दूरी पर हुई थी। शुक्ला ने अपने बयान में कहा था कि कुछ लोगों के एक समूह ने पुलिस स्टेशन से बाहर निकलते ही उनको घेर लिया था। उनको पीटा गया और धारदार हथियार से हमला किया गया।

चीनी माल पर सख्ती से एक्सपोर्ट सेक्टर में 5.27% का उछाल, रेलवे के राजस्व में भी 13.54% का इजाफा

देश में कोरोना महामारी के प्रकोप के बावजूद कई सेक्टर्स में धीरे-धीरे रिकवरी होनी शुरू हो गई है। इनमें से एक निर्यात (एक्सपोर्ट) का क्षेत्र भी है। पिछले साल के मुकाबले इस क्षेत्र में सालाना आधार पर 5.27% की वृद्धि हुई है। इसकी जानकारी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दी है।

उन्होंने गुरुवार (अक्टूबर 1, 2020) को बताया कि लगातार 6 महीने की गिरावट के बाद देश का निर्यात, सितंबर महीने में सालाना आधार पर 5.27 प्रतिशत बढ़कर 27.4 अरब डॉलर रहा। उन्होंने इसे अर्थव्यवस्था में तेज गति से होने वाली रिकवरी के संकेत कहा। 

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड… भारतीय माल का निर्यात पिछले साल की तुलना में इस साल सितंबर में 5.27% बढ़ा है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की तेजी से रिकवरी करने का एक और संकेत है, क्योंकि इसने कोविड पूर्व के स्तर के पैरामीटर को पार किया है।” 

बता दें कि सितंबर 2019 में 26.02 अरब डॉलर का निर्यात किया गया था। मगर, कोविड-19 महामारी और इसके कारण वैश्विक स्तर पर माँग में कमी से इस साल मार्च से ही निर्यात में गिरावट जारी थी। पेट्रोलियम, चर्म उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और रत्न एवं आभूषण जैसे प्रमुख क्षेत्रों के निर्यात में गिरावट देखने को मिल रही थी।

बाजार के जानकार व निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो के अध्यक्ष शरद कुमार सर्राफ ने कहा, “यह उम्मीद के अनुरूप है। इसका कारण यह है कि चीन विरोधी धारणा से काफी ऑर्डर मिले हैं।” उन्होंने कहा कि अगर भारत वस्तु निर्यात योजना (एमईआईएस), जोखिम निर्यात और आरओडीटीईपी (निर्यात उत्पादों पर शुल्कों तथा करों में छूट) से जुड़े मसलों का समाधान हो जाता है तो निर्यातक और अच्छा कर सकते हैं।

वहीं, सितंबर महीने के आँकड़े पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद (TPCI) के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि निर्यात रिकवरी के रास्ते पर है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार अब खुल रहा है और खरीदारों ने ऑर्डर देने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने कहा, “खाद्य एवं कृषि क्षेत्र का निर्यात पहले की तरह जारी रहेगा, क्योंकि इनका प्रदर्शन खराब दौर में भी बेहतर रहा।”

भारतीय रेलवे के राजस्व में भी वृद्धि

इसी प्रकार रेलवे क्षेत्र में भी प्रगति के नए आयाम देखने को मिल रहे हैं। निर्यात क्षेत्र में सालाना आधार पर वृद्धि के साथ ही भारतीय रेलवे में भी उल्लेखनीय बदलाव आए हैं। सितंबर में रेलवे के राजस्व में 13.54 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके मतलब साफ है कि भारतीय अर्थव्यवस्था सुधार के रास्ते पर है।

रेलवे के अनुसार माल ढुलाई इस महीने में 15.35 प्रतिशत बढ़कर 10.212 करोड़ टन रहा जो एक साल पहले इसी महीने में 8.853 करोड़ टन था। पिछले साल रेलवे को सितंबर माह में 8,176.29 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। वहीं इस साल रेलवे ने माल ढुलाई से 9,896.86 करोड़ रुपए कमाए। इसका मतलब साफ है कि इस बार भारतीय रेलवे को माल ढुलाई में पिछले साल के मुकाबले 1,180.57 करोड़ रुपए का फायदा हुआ और 13.54%की वृद्धि हुई। 

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने कहा, “इन चुनौतीपूर्ण समय के बावजूद, भारतीय रेलवे ने व्यवसाय विकास के लिए कई पहल की हैं और माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए अनेक शुरुआत की हैं, जिसका परिणाम सितंबर महीने में आया है।”

हरियाणा में 6 मुस्लिम परिवारों के 35 लोगों ने की घर वापसी, कहा- हमारे पूर्वज हिन्दू थे, दबाव बना कर उन्हें कराया गया था इस्लाम कबूल

हरियाणा में 6 मुस्लिम परिवारों के कुल 35 सदस्यों ने हिन्दू धर्म स्वीकार किया या जिसे घर वापसी कहना ज़्यादा बेहतर होगा। धमतान साहिब गाँव के लगभग 35 लोगों ने सनातन पद्धति और रीति-रिवाज़ों से अपने पूर्वजों की ओर लौट आए। मीडिया रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है कि घर वापसी करने वाले लोगों ने इस बात को स्वीकार किया कि उनके पूर्वज हिन्दू थे। 

अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ इन लोगों ने कहा कि सदियों पहले उनकी पीढ़ियों पर दबाव बना कर उन्हें इस्लाम कबूल कराया गया था। उनके तौर तरीके और गतिविधियाँ हिन्दू रीति रिवाज़ों पर आधारित थीं, अंततः उन्होंने अपने मूल धर्म की ओर वापस लौटने का फैसला लिया। कुछ ही महीनों पहले हरियाणा के ही धानोदा गाँव में भी कई मुस्लिम परिवारों की घर वापसी हुई थी। 

वहीं दूसरी तरफ गाँव के लोगों और हिन्दू परिवारों ने इस कदम का समर्थन किया है और ख़ुशी भी जाहिर की है। मुस्लिम परिवारों की घर वापसी के दौरान वहाँ पर यज्ञ और हवन का आयोजन भी कराया गया था, इस हवन में नज़ीर के कुल 5 परिवार और जंगा के परिवार ने हिन्दू धर्म स्वीकार किया। सभी 35 लोग इस हवन में शामिल हुए और उन्होंने अंत में जनेऊ भी धारण किया। 

दलजीत, राजेश, सादिक, जंगा, सतवीर समेत कई अन्य लोगों ने कहा कि उन्होंने अपनी स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन का निर्णय लिया है। ऐसा करने के लिए उन पर किसी ने दबाव नहीं बनाया था। गाँव वालों का यहाँ तक कहना था कि इन लोगों के परिवार हिन्दू रीति रिवाज़ों का ही पालन करते थे, त्यौहार भी धूम धाम से मनाते थे और अपने बच्चों के हिन्दू नाम ही रखा करते थे। परिवारों ने इस बात की जानकारी दी क्योंकि सदियों पहले उनके पूर्वज हिन्दू ही थे, उनकी परम्पराएं भी हिन्दू तौर तरीकों पर आधारित थीं। 

इसके अलावा यह होली, दिवाली और नवरात्र जैसे त्यौहार भी मनाते थे। इन परिवारों के बीच सबसे बड़ा मुस्लिम पहलू यही था कि ये मरने वालों को दफ़न करते थे। घर वापसी के बाद सभी परिवारों ने घोषणा कर दी है कि उनके यहाँ मरने वालों का अंतिम संस्कार हिन्दू पद्धति के आधार पर होगा। इस मुद्दे पर बात करते हुए एडीएम नरवना संजय बिश्नोई ने भी जानकारी दी। 

उन्होंने कहा कि फ़िलहाल उन्हें इस तरह की घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके बाद उनका कहना था कि परिवारों के पास इस बात की आज़ादी है कि वह जिस धर्म को चाहें उसे स्वीकार करें। इस दौरान इकलौती महत्वपूर्ण बात यही कि ऐसा उन्होंने अपनी मर्ज़ी से किया हो न कि किसी के दबाव में आकर।  

हाथरस केस: पीड़िता और माँ के सबसे पहले बयानों का स्पष्ट वीडियो सामने आया, गला दबाने की बात

उत्तर प्रदेश के हाथरस स्थित बुलगढ़ी ग्राम में हुई घटना को लेकर सोशल मीडिया से लेकर मुख्पयधारा की मीडिया में कई प्रकार की बातें चल रही हैं। एक ओर जहाँ राजनीतिक दल इस घटना का राजनीतिकरण करने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं तो वहीं इस सब उठा-पटक के बीच शायद तथ्य बहुत पीछे छूटते भी नजर आ रहे हैं।

घटना के वक्त मौके पर मौजूद लोगों से लेकर, अस्पताल में पीड़िता के पहले बयान, लड़की के भाई द्वारा स्वयं लिखित पहली तहरीर के बाद अब घटना के फौरन बाद मृतका की माँ का दिया गया सबसे पहला बयान सामने आया है। इन वीडियो को शेयर करने वालों का दावा है कि मृतका की माँ ने घटना के बाद जो सबसे पहले बयान दिए थे, उनमें कहीं भी बलात्कार का जिक्र नहीं था।

ट्विटर पर मृतका की माँ का एक वीडियो शेयर करते हुए ऋषि बागरी ने लिखा है – “यूपी को बदनाम करने की साज़िश रचने वालों को एक्सपोज़ करने वाला वीडियो, घटना के तत्काल बाद माँ का असली बयान।”

इस वीडियो में मृतका की माँ कहते सुनी जा सकती हैं – “आज तो कुछ बात ही नहीं थी, हम घास काट रहे थे। अब पीछे से कोई आ जाएगा तो हमें कैसे पता चलेगा? यही बात है, और कोई बात नहीं है। छोरा… पीछे से ही आ गया और बाजरे में खींच कर ले गया। संदीप नाम था उसका। गाँव का ही लड़का है, ठाकुरों का। रस्सी से उसने गर्दन ‘काट’ दी। मैं तो देख भी नहीं पाई, मारा-मारी हो रही थी।”

इस वीडियो में पीछे पीड़िता लेटी हुई नजर आ रही हैं। वीडियो में लड़की ने जो कहा वो भी पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं है लेकिन लड़की ने भी संदीप का नाम स्पष्ट रूप से लिया है और किसी का नाम वह नहीं बोल रही, न ही माँ ने किसी और का नाम लिया। घटना के समय पीड़िता की माँ कुछ ही दूर पर थी।

बताया जा रहा है किये वीडियो इस घटना के फ़ौरन बाद के हैं जब तक कि यह मुद्दा सनसनी नहीं बना था। वहीं, शुरुआत के ही एक अन्य वीडियो में, पीड़िता की माँ का बयान था, “अकेला लड़का था संदीप जिसने मारा, पुरानी रंजिश चल रही थी!”

एक अन्य वीडियो में पीड़िता की माँ का कहना है कि हम तो (पीड़िता भी साथ में ) घास लेने गए थे, वहीं मारपीट हो गई, मैं कुछ दूर पे थी। पीड़िता की माँ आगे कहती हैं, “अकेला लड़का था संदीप जिसने मारा, पुरानी रंजिश चल रही थी!”

इस ट्वीट में पीड़िता की माँ का बयान सुन सकते हैं –

पीड़िता का वीडियो उनकी माँ के बयान के बाद बनाया गया था, जिसमें वह अपनी पूरी जीभ भी दिखा रही हैं और गला दबाने की बात कह रही हैं।

घटना के कुछ देर बाद रिकॉर्ड किए गए वीडियो में पीड़िता और उनकी माँ ने बलात्कार की बात नहीं कही है। इसमें उन्होंने मुख्य अभियुक्त का नाम लिया है और हत्या के प्रयास की बात की है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार का कहना है कि फ़ोरेंसिक रिपोर्ट में ये साफ़ कहा गया है कि महिला के साथ बलात्कार नहीं हुआ, बल्कि मौत का कारण गर्दन में आई गंभीर चोटें हैं।

घटना के फ़ौरन बाद पीड़िता और उनकी माँ के बयान को आप इन वीडियो में देख सकते हैं –

हाथरस कांड

मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) की सुबह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता की मौत के बाद से हाथरस मामले को लेकर काफी बहस और राजनीतिक उथल-पुथल देखी जा सकती हैं। हाथरस पुलिस ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘जबरन यौन क्रिया’ की अभी तक भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि नहीं हो पाई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटने से मौत को मौत का कारण बताया गया था।

मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में एक कथित सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत हो गई। उसके साथ दो सप्ताह पहले कथित तौर पर बलात्कार किया गया था। इस मामले ने देशव्यापी आक्रोश देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि हाथरस पुलिस ने परिवार के सदस्यों की सहमति के बिना मंगलवार रात लड़की का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया। हालाँकि, पुलिस ने बाद में कहा था कि दाह संस्कार के दौरान पीड़िता के पिता मौजूद थे

ताहिर ने युवती को बनाया बंधक और 3 महीने तक करता रहा दुष्कर्म: चंगुल से छूटने के बाद महिला ने पुलिस को बताई आपबीती

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। इस घटना में ताहिर नाम के कपड़ा व्यापारी ने एक युवती को 3 महीने तक बंधक बना कर अपने फ़्लैट में रखा। इस अवधि के दौरान आरोपित ने युवती के साथ दुष्कर्म और अत्याचार किया। किसी तरह युवती उस व्यक्ति के चंगुल से छूटी और फिर उसने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित ताहिर के विरुद्ध मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार किया। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भोपाल स्थित नदीम प्रेस रोड कोतवाली में आरोपित ताहिर की फैशन अड्डा नाम से कपड़ों की दुकान चलाता था। एक दिन पीड़िता उस युवक की दुकान पर ख़रीददारी करने पहुँची थी तभी ताहिर ने उसे बहला फुसला कर अपने झाँसे में ले लिया। इसके बाद वह युवती को भोपाल के रेतघाट तलैया स्थित अपने फ़्लैट लेकर गया। जहाँ उसने युवती को बंधक बना लिया। इसके बाद उसने लगातार 3 महीनों तक युवती का शारीरिक शोषण किया और उसे यातनाएँ दी। शोषण और अत्याचार का यह सिलसिला जुलाई महीने से लगातार चल रहा था।  

इस मुद्दे पर बात करते हुए तलैया थाना के थाना प्रभारी डीपी सिंह ने भी कई जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपित ताहिर फैशन अड्डा नाम से कपड़ों की दुकान चलाता था। युवती को बंधक बनाने के बाद ताहिर ने उस पर शादी का दबाव भी बनाया था लेकिन पीड़िता ने उसकी यह बात स्वीकार नहीं की। पीड़िता ने कई बार वहाँ से भागने का प्रयास किया लेकिन ताहिर फ़्लैट बंद करके जाता था इसलिए युवती कहीं जाने में असमर्थ थी। 

कई प्रयासों के बाद वह आरोपित के चंगुल से छूट कर आई और सीधे परिजनों के पास गई। उसने अपने परिजनों से पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद उसने आरोपित ताहिर के विरूद्ध मामला भी दर्ज कराया। इसके बाद थाना प्रभारी ने यह भी बताया कि कि पुलिस ने ताहिर के विरुद्ध दंड संहिता की धारा 376 (2), 366, 344, 323 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपित को भोपाल के इब्राहिमपुरा इलाके से गिरफ्तार किया था।    

मुख्य सलाहकार के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और पहली महिला मेलानिया ट्रंप कोरोना पॉजिटिव, ट्वीट कर दी जानकारी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट करते हुए इस बात की जानकारी दी कि वह कोरोना पॉजिटिव हैं। उनके अलावा अमेरिका की पहली महिला (उनकी पत्नी) मेलानिया ट्रंप भी कोरोना वायरस से प्रभावित पाई गई हैं। उन्होंने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए लिखा, “आज मैं और @FLOTUS कोविड 19 पॉजिटिव पाए गए हैं। हम बहुत जल्द अपनी क्वारंटाइन अवधि शुरू करेंगे और बचाव के लिए हर ज़रूरी कदम उठाएँगे।” 

इसके कुछ ही घंटों पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “हॉप हिक्स, जो बिना आराम किए लगातार घंटों काम करता है वह कोरोना वायरस से प्रभावित है, भयावह! देश की पहली महिला और मैं हमारी जाँच रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं। इस दौरान हम अपनी क्वारंटाइन अवधि की तैयारियाँ शुरू करने वाले हैं।” साथ ही उन्होंने देश के लोगों को पूरी सावधानी बरतने का निवेदन भी किया था।   

हॉप हिक्स अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उच्च सलाहकार हैं। गुरूवार (1 अक्टूबर 2020) को लक्षण नज़र आने के बाद उन्होंने अपनी कोरोना वायरस जाँच कराई थी। जाँच की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जिसके बाद से ट्रंप और उनके साथ मौजूद अन्य अधिकारियों ने अपनी कोरोना जाँच करवाई थी। इसके अलावा हॉप हिक्स राष्ट्रपति ट्रंप के साथ लगातार ‘एयर फ़ोर्स वन’ में यात्रा करते हैं। इतना ही नहीं हाल ही में हुए राष्ट्रपति डिबेट और क्लेवलैंड में भी वह डोनाल्ड ट्रंप के साथ मौजूद थे। इस दौरान कई अन्य दिग्गज अधिकारी भी शामिल हुए थे।

वाइट हाउस की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक बयान में यह कहा गया था कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने साथ मौजूद रहने वाले हर छोटे – बड़े अधिकारी और कर्मचारी के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखते हैं। इसके अलावा वह देश के लोगों का भी पूरा ध्यान रखते हैं, उनके मुताबिक़ कोरोना वायरस महामारी के संबंध में जारी किए गए हर दिशा निर्देश का पालन बेहद ज़रूरी है। ताकि इस महामारी के प्रभाव को कम से कम किया जा सके। 

हुई गवा? करवा ली बेइज्जती? ‘दी प्रिंट’ ने पहले थूका, फिर पकड़े जाने पर चाटा

शेखर गुप्ता और उनके प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘दी प्रिंट’ ने दक्षिणपंथी समाचार पोर्टल ‘स्वराज्य मैगजीन’ की जर्नलिस्ट स्वाति गोयल शर्मा पर एक कथित ‘विचार’ प्रकाशित किया, जिस पर हुए भारी विरोध के बाद आखिर में ‘दी प्रिंट’ को माफ़ी माँगते हुए अपनी वेबसाइट से चुपके हटाना पड़ा।

दरअसल, दी प्रिंट ने एक रिपोर्ट प्रकाशित करते हुए इसमें स्वाति गोयल शर्मा का नाम घसीटते हुए ‘लव जिहाद’ पर की गई उनकी रिपोर्टिंग के तरीकों पर कई तरह के आरोप लगाए थे। लेकिन स्वाति गोयल ने ना सिर्फ दी प्रिंट के अजेंडा को बेनकाब किया बल्कि उन्हें जमकर लताड़ा भी।

दी प्रिंट ने एक रिपोर्ट (विचार) प्रकाशित की जिसमें उन्होंने स्वाति गोयल शर्मा पर आरोप लगे कि उन्होंने ट्विटर पर ‘लव-जिहाद’ का कैम्पेन चलाया। यही नहीं, दी प्रिंट ने अपनी इस रिपोर्ट में स्वाति गोयल शर्मा पर आरोप लगाया कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड में पीड़िता और आरोपितों की जाति को भी विवादित तरीके से पेश किया।

1 अक्टूबर को, शेखर गुप्ता के ‘दी प्रिंट’ ने यह ‘विचार’ प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने स्वाति गोयल शर्मा पर हाथरस हत्या मामले में जाति के नजरिए को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने ट्विटर पर ‘लव जिहाद’ के बारे में ‘एक अभियान चलाने’ के लिए भी स्वाति गोयल को निशाना बनाया और कहा कि उन्होंने ‘लव’ में ‘जिहाद’ देखा।

स्वाति गोयल शर्मा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेखर गुप्ता को टैग किया और ‘दी प्रिंट’ की इस रिपोर्ट के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “यह गटर के स्तर की चीज है। क्या आपके कम अनभिज्ञ लेखकों की यह आदत है और उनके काम की जाँच के बिना ही उन पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाते हैं? आपने आईआईटी-कानपुर के वाशी शर्मा के साथ भी ऐसा ही किया और बाद में माफी माँगी थी।”

स्वाति शर्मा ने लिखा, “तुम्हारे अनपढ़ लेखक मुझे यह स्पष्ट करें कि मैंने हाथरस मामले में जाति की बात को कब नकारा या फिर माफ़ी माँगे।”

प्रिंट के इस लेख का शीर्षक था – “आप हाथरस बलात्कार के बारे में अन्य बलात्कारों को भी रखते हुए बात नहीं कर सकते – आईटी सेल की व्हाटअबाउट्री को धन्यवाद।”

‘व्हाटअबाउट्री’ का सामान्य शद्बों में अर्थ गुमराह करने की कला होता है। इस ‘विचार’ में स्वाति शर्मा पर यह कहते हुए हमला किया गया कि जब वह ‘लव’ में ‘जिहाद’ देख सकती हैं, तो वह ‘जाति के नजरिए’ को नहीं देख पाई क्योंकि ‘4 ऊँची जाति के पुरुषों ने एक दलित महिला का बलात्कार किया था’।

‘दी प्रिंट’ ने जो लिखा है, वह ट्विटर पर पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा द्वारा साझा किए गए इन स्क्रीनशॉट्स में देखा जा सकता है –

दिलचस्प बात यह है कि, ‘दी प्रिंट’ इस लेख को प्रकाशित करने से पहले मूल तथ्यों की भी जाँच नहीं कर पाए। स्वाति गोयल शर्मा एक ग्राउंड रिपोर्टर हैं, जिन्होंने दलितों के अधिकारों और उनके खिलाफ अपराधों के बारे में कई मामले सामने रखे हैं। यहाँ तक ​​कि वह दलित कार्यकर्ता संजीव नेवार या अज्ञेय के साथ एक एनजीओ भी चलाती हैं।

स्वाति गोयल शर्मा द्वारा दी प्रिंट के झूठ को उजागर करने के बाद ‘दी प्रिंट’ ने चुपचाप अपने इस ‘विचार’ को हटा दिया। लेकिन तब तक स्वाति गोयल शर्मा लेख के स्क्रीनशॉट ले चुकी थीं। स्वाति गोयल शर्मा ने ट्विटर पर लिखा कि उन्हें ख़ुशी है कि यह लेख हटा लिया गया है लेकिन लेखक फैक्ट चेक करने का ध्यान अवश्य रखें।

यह देखने के बाद कि ‘दी प्रिंट’ का प्रोपेगेंडा बेनकाब हो चुका है, उन्होंने एक ट्वीट के माध्यम से स्वाति गोयल शर्मा से माफ़ी माँगी जिसमें कि डिलीट भी स्क्रीनशॉट रह गया था। दी प्रिंट ने अपने आर्टिकल की ही तरह फिर इस ट्वीट को भी डिलीट किया और दोबारा ट्वीट किया और इस बार स्वाति गोयल के ट्वीट को इसमें लिंक नहीं किया।

हाथरस कांड

मंगलवार (सितम्बर 29, 2020) की सुबह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता की मौत के बाद से हाथरस मामले को लेकर काफी बहस और राजनीतिक उथल-पुथल देखी जा सकती हैं। हाथरस पुलिस ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘जबरन यौन क्रिया’ अभी तक भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि नहीं हो पाई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटने से मौत को मौत का कारण बताया गया था।

मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में एक कथित सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत हो गई। उसके साथ दो सप्ताह पहले कथित तौर पर बलात्कार किया गया था। इस मामले ने देशव्यापी आक्रोश देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि हाथरस पुलिस ने परिवार के सदस्यों की सहमति के बिना मंगलवार रात लड़की का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया। हालाँकि, पुलिस ने बाद में कहा था कि दाह संस्कार के दौरान पीड़िता के पिता मौजूद थे

चीन के विरुद्ध हो रहे प्रदर्शन में हॉन्गकॉन्ग की सड़कों पर लहराया तिरंगा, लोगों ने कहा- भारत चीन से लड़ रहा इसलिए हमारा दोस्त

हाल फ़िलहाल के कुछ दिनों में हॉन्गकॉन्ग के भीतर चीन सरकार के विरुद्ध बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखा गया है। लौरेल कोर (laurel chore) नाम की पत्रकार और फोटोग्राफर ने हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों की कुछ तस्वीरें और वीडियो ट्विटर पर एक थ्रेड में साझा किए। तमाम तस्वीरों के बीच एक तस्वीर में कुछ ऐसा नज़र आया जिसने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा। 

विरोध के दौरान वहाँ लोगों के हाथ में भारत का झंडा था। जब उस व्यक्ति से पूछा गया कि उसके पास भारत का झंडा क्यों है तब उसने कहा, “भारत चीन से लड़ रहा है इसलिए भारत हमारा दोस्त है।” लौरेल ने अपने ट्वीट में इस बात का भी ज़िक्र किया कि वह व्यक्ति “STAND WITH INDIA” (भारत के साथ खड़े हो) कह रहा था और भीड़ उसका समर्थन भी कर रही थी। 

चीन के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर हॉन्गकॉन्ग के नागरिक चीनी सरकार का विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरे थे। लोकतांत्रिक व्यवस्था के समर्थक यह प्रदर्शनकारी लगभग एक साल से सड़कों पर विरोध कर रहे हैं जबसे चीन ने प्रत्यर्पण विधेयक (Hong Kong’s Extradition Bill) पारित किया था। इस विधेयक की मदद से अगर कोई व्यक्ति अपराध करके हॉन्गकॉन्ग आ जाता है तो उसे चीन वापस भेजा जा सकता है। इसमें ताइवान भी शामिल हैं। 

इसके बाद हज़ारों लोग सड़कों पर उतर गए और उन्होंने नारे भी लगाए “Liberate Hong Kong, Revolution of our Times” यानी हॉन्गकॉन्ग को आज़ाद करो, यह हमारे वक्त की क्रांति है। इसके बाद पुलिस ने आंदोलनकारियों को विफल करने का प्रयास किया, हज़ारों पुलिस वालों ने लोगों की तलाशी लेना शुरू कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस ने दर्जन भर लोगों की घेराबंदी की, उन्हें दीवारों के सामने खड़ा कर दिया, उन्हें हथकड़ियाँ लगा कर अपने साथ ले गई। पुलिस का कहना था कि हॉन्गकॉन्ग की आज़ादी के लिए लगाए जाने वाले नारे लोगों में अलगाव की भावना पैदा करने के लिए और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने के लिए लगाए गए थे।

लोकतंत्र समर्थक समूह सिविल ह्यूमन राइट फ्रंट ने पिछले साल हज़ारों लोगों की मौजूदगी में विरोध प्रदर्शन किया था। इसके अलावा सिविल ह्यूमन राइट्स फ्रंट ने पुलिस से चीन के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर रैली निकालने की अनुमति भी माँगी थी। लेकिन कोरोना वायरस महामारी के चलते इस रैली की अनुमति नहीं दी गई थी। पिछले साल इतिहास में पहली बार पुलिस ने नौजवान प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई थी। इसके अलावा भीड़ को अलग करने के लिए आँसू गैस के गोले भी छोड़े गए थे।  

PM मोदी ने महात्मा गाँधी और शास्त्री जी को दी श्रद्धांजलि, कहा- बापू के आदर्श समृद्ध, दयालु भारत बनाने में मदद करेंगे

आज लाल बहादुर शास्त्री और महात्मा गाँधी की जयंती है, दोनों नेताओं का देश के लिए योगदान अतुलनीय था। आज पूरा देश उन्हें याद कर रहा है, इसी कड़ी में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजघाट जाकर महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें याद करने के अलावा उनकी दी हुई सीख का भी उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने विजयघाट पर लाल बहादुर शास्त्री को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत अन्य नेता भी मौजूद थे। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजघाट पर महात्मा गाँधी के सामने सिर झुकाया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा विजयघाट पर देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा उन्होंने महात्मा गाँधी का एक वीडियो भी ट्वीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “गाँधी जयंती के अवसर पर हम बापू के सामने सिर झुकाते हैं। महात्मा गाँधी के जीवन और महान विचारों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। हम आशा करते हैं कि बापू के आदर्श एक समृद्ध और दयालु भारत बनाने में मदद करेंगे।”  

प्रधानमंत्री मोदी ने लाल बहादुर शास्त्री का वीडियो साझा करते हुए उन्हें भी नमन किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “लाल बहादुर शास्त्री जी विनम्र और दृढ़ निश्चय वाले व्यक्ति थे। वह सादगी के प्रतीक थे और वह हमेशा देश की भलाई के लिए जिये। उनकी जयंती के अवसर पर हम हृदय तल की गहराइयों से उनका सम्मान करते हैं, हर उस काम के लिए जो उन्होंने देश की भलाई के लिए किया है।” 

वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी उन्हें महात्मा गाँधी की जयंती की पूर्व संध्या पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा, “सरकार जितने भी बड़े कदम उठाती है वह पूरी तरह महात्मा गाँधी की शिक्षा और विचारों से प्रेरित होते हैं।” मोदी सरकार द्वारा देश के लिए किए गए कई उल्लेखनीय प्रयास जैसे महिला सशक्तिकरण, स्वच्छ भारत अभियान, गरीबों और दलितों को सशक्त बनाना किसानों की सहायता और गाँवों में आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना, इन सभी प्रयासों पर राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें इस बात की प्रसन्नता है कि गाँधी जी की शिक्षा ही उनकी सरकार का आधार है। इसके अलावा राष्ट्रपति ने नैतिकता और लक्ष्यों की शुद्धि पर भी बहुत महत्त्व दिया।

राष्ट्रपति ने कहा, “आइए हम राष्ट्र के कल्याण और प्रगति के लिए खुद को फिर से समर्पित करने का संकल्प लें, सत्य और अहिंसा के मार्ग का पालन करें। स्वच्छ, सक्षम, समृद्ध और मज़बूत भारत के निर्माण का संकल्प लें और महात्मा गाँधी के सपनों को सच में तब्दील करें। हमारे राष्ट्रपति महात्मा गाँधी की 151वीं जयंती के अवसर पर मैं कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उनकी जीवन शैली समाज के कमज़ोर लोगों को सशक्त और मज़बूत बनाने का ज़रिया है। उनके द्वारा दिए गए सत्य और अहिंसा के संदेश से समाज में समरसता और समानता का मार्ग प्रशस्त होता है।”

अंत में लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए उन्होंने कहा, “देश के पूर्व प्रधानमंत्री की जयंती पर हम उन्हें याद करें, इस देश के एक महान पुत्र जिन्होंने देश के लिए प्रत्याशित रूप से समर्पित थे। चाहे हरित क्रांति हो या श्वेत क्रांति, दोनों में उनकी अहम भूमिका और अद्भुत लीडरशिप देश के लिए हमेशा प्रेरणादायी बनी रहेगी।”

पुलिस स्टेशन में 8 घंटे तक हुई अनुराग कश्यप की ‘रगड़ाई’, रेप के आरोपों का किया खंडन, जाँच के लिए फिर बुला सकती है पुलिस

फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप से मुंबई पुलिस द्वारा अभिनेत्री पायल घोष द्वारा लगाए गए आरोपों के सम्बन्ध में आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई। पुलिस द्वारा बुलाए जाने के बाद कश्यप सुबह 11 बजे अपने दो सहयोगियों और अपने वकील के साथ वर्सोवा पुलिस स्टेशन पहुँचे। अनुराग कश्यप बुलाए गए समय से पहले ही कागजों के ढेर के साथ उपस्थित हो गए थे।

‘मिड-डे’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अनुराग कश्यप ने एक विस्तृत बयान दिया और एफआईआर में उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया। मुंबई पुलिस अब उनके लंबे बयानों को सत्यापित करने के लिए तैयारी कर रही है। प्राथमिकी में कश्यप के बयान में अगर कोई विसंगतियाँ पाई जाती हैं, तो कश्यप को फिर से बुलाया जाएगा।

अनुराग कश्यप शाम 6 बजे पुलिस स्टेशन से चले गए थे। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि अनुराग कश्यप के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के बाद अभिनेत्री पायल घोष ने अपना मेडिकल परीक्षण करवाया।

अनुराग कश्यप के खिलाफ पायल घोष ने गत 22 सितंबर को वर्सोवा पुलिस के पास एफआईआर दर्ज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि उसने 2013 में उसके साथ बलात्कार किया था। कश्यप ने अपने सभी आरोपों से इनकार किया है। घोष और केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कश्यप के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल बी एस कोश्यारी से मुलाकात की थी।

वहीं, अनुराग कश्यप ने अपने वकील प्रियंका खिमानी के माध्यम से एक बयान जारी कर कहा था कि आरोप पूरी तरह से झूठे और दुर्भावनापूर्ण हैं। इस बयान के अनुसार, “मेरे मुवक्किल, अनुराग कश्यप पर लगे यौन दुराचार के झूठे आरोपों से उन्हें गहरा दुख हुआ है, जो हाल ही में उनके खिलाफ सामने आए हैं। ये आरोप पूरी तरह से झूठे, निंदनीय और गलत हैं। यह दुखद है कि #MeToo आंदोलन जितना महत्वपूर्ण है, उसे निहित स्वार्थों के लिए चुना गया है और चरित्र हनन का एक उपकरण मात्र बना दिया गया है।”

कागज के ढेर के साथ उपस्थित हुए अनुराग कश्यप

बृहस्पतिवार (अक्टूबर 01, 2020) सुबह थाने पहुँचने के दौरान अनुराग कश्यप के हाथ में कागजों का बंडल नजर आया। इस बंडल के साथ वह पुलिस थाने में घुस रहे थे। फिल्म निर्माता की हालिया तस्वीरें सामने आने के बाद ट्विटर पर एक पुरानी बहस छिड़ गई। यह बहस ‘कागज नहीं दिखाने’ को लेकर थी।

दरअसल, जिस समय सीएए के विरोध में प्रदर्शन हो रहे थे और प्रदर्शनकारी ‘कागज नहीं दिखाएँगे’ जैसे नारे लगा रहे थे, उस समय अनुराग बॉलीवुड की उन शख्सियतों में से थे जो सोशल मीडिया पर जोर-शोर से इसका समर्थन कर रहे थे और ज्यादातर ट्वीट के जवाब में लिखते थे, ‘कागज नहीं दिखाएँ।’

अब सोशल मीडिया यूजर्स उनके ऐसे ही ट्वीट को उनकी हालिया तस्वीर के साथ शेयर करके मजाक उड़ा रहे हैं। कोई पूछ रहा है कि अनुराग ने जब अपने सारे डॉक्यूमेंट्स जला दिए थे तो कागज कहाँ से आए। कोई कह रहा है कि अभी तो एनआरसी भी नहीं आई, अभी से क्यों कागज निकाल लिए। इसके अलावा कोई अनुराग के हाथों में बंडल देखकर उसे फिल्म की स्क्रिप्ट बता रहा है तो कोई उन्हें ही झूठा बता रहा है।