Homeवीडियोहाथरस केस में पुलिस पर सवाल उठना लाजमी: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet...

हाथरस केस में पुलिस पर सवाल उठना लाजमी: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Hathras Case

शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट और फिर बाद में आई पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में अंतर की वजह से केस बहुत ही ज्यादा पेचीदा हो गया है। शुरू के बयान में रेप के बारे में कुछ नहीं गया और आरोपित भी एक ही बताया गया। बाद वाले बयान में ‘गैंगरेप’ की बात आती है और आरोपितों में भी तीन और नाम जुड़ जाते हैं।

हाथरस केस में बहुत सारी बातें कही जा रही है। शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट और फिर बाद में आई पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में अंतर की वजह से केस बहुत ही ज्यादा पेचीदा हो गया है। शुरू के बयान में रेप के बारे में कुछ नहीं गया और आरोपित भी एक ही बताया गया। बाद वाले बयान में ‘गैंगरेप’ की बात आती है और आरोपितों में भी तीन और नाम जुड़ जाते हैं। आईजी ने भी अपने बयान में यही बातें कहीं।

29 सितंबर को पीड़िता के दम तोड़ने के बाद अलग-अलग तरह की रिपोर्ट्स आनी शुरू होती है। गैंगरेप ट्रेंड कराया गया। भयावहता को दर्शाने के लिए जीभ काटने, रीढ़ की हड्डी तोड़ने, आँख फोड़ने की बात कही गई। ये भी कहा गया कि आरोपित सवर्ण है, इसलिए पुलिस छेड़छाड़ का मामला बताकर रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारती
अजीत भारती
पूर्व सम्पादक (फ़रवरी 2021 तक), ऑपइंडिया हिन्दी

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।
- विज्ञापन -