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फोरेंसिक रिपोर्ट से रेप की पुष्टि नहीं, जान-बूझकर जातीय हिंसा भड़काने की कोशिश हुई: हाथरस मामले में ADG

हाथरस घटना में पीड़िता की मौत की बाद मामले में राजनीति शुरू हो चुकी है। मीडिया में भी तरह-तरह की भ्रामक खबरें चलाई जा रही है। वहीं हाथरस पुलिस ने गुरुवार को मामले की जानकारी देते हुए कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में “जबरन यौन संबंध” बनाने का पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट में गला गला दबाने से हुए जख्म को मौत का कारण बताया गया है।

बता दें मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में कथित सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत हो गई थी। खबरों के अनुसार, उसके साथ दो सप्ताह पहले कथित तौर पर बलात्कार किया गया था। वहीं इस घटना में लोगों का गुस्सा तब और फूटा जब सोशल मीडिया पर यह भ्रामक खबर चलाई गई कि हाथरस पुलिस ने परिवार के सदस्यों की सहमति के बिना मंगलवार रात लड़की का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया। हालाँकि पुलिस ने बाद में खबरों को खरिज करते हुए कहा था कि दाह संस्कार के दौरान पीड़िता के पिता मौजूद थे।

एएनआई से बात करते हुए, एडीजी प्रशांत कुमार ने आज जानकारी दी है कि फोरेंसिक रिपोर्ट आ गई है। एडीजी ने कहा कि एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर से सैंपल इकट्ठे किए गए थे, उसमें किसी तरह का स्पर्म या शुक्राणु नहीं पाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता से किसी भी प्रकार का यौन शोषण नहीं किया गया था।

उन्होंने आगे कहा, “इससे स्पष्ट होता है कि कुछ लोगों के द्वारा प्रदेश में जातीय तनाव पैदा करने के लिए इस तरह की चीजें कराई गईं। पुलिस ने शुरू से इसमें त्वरित कार्रवाई की है। अब हम आगे की विधिक कार्रवाई करेंगे। ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी जो प्रदेश में सामाजिक सद्भाव बिगाड़ना और जातीय हिंसा भड़काना चाहते थे।”

एडीजी प्रशांत ने कहा कि पुलिस ऐसे लोगों की पहचान करेगी, जिन्होंने मामले से राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए फर्जी खबरें और झूठे तथ्य फैलाए हैं। यूपी पुलिस पहले ही मामले में चार दोषियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

वहीं एसपी विक्रम वीर ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि विशेष जाँच दल फिलहाल शहर में है। उन्होंने बुधवार को अपराध और घटनास्थल का दौरा किया और परिवार के सदस्यों से बात की।

गौरतलब 14 सितंबर को पीड़िता चारा इकट्ठा करने के लिए खेत में गई थी, जब युवकों के एक समूह ने उस पर पीछे से हमला किया था। किशोरी को उसके गले में दुपट्टे से बाँधकर घसीट कर खेत में ले जाया गया, जहाँ कथित तौर पर उसके साथ बलात्कार किया गया। शायद घसीटने की वजह से ही उसकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी। दुष्कर्म का विरोध करने पर आरोपितों ने पीड़िता की गला दबा कर हत्या करने की कोशिश की। पुलिस ने कहा कि इसी दौरान पीड़िता की जीभ दाँत के बीच में आ गई और कट गई।

वहीं इस मामले पर संज्ञान लेते हुए पीएम मोदी ने भी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मामले में जानकारी ली थी और आरोपितों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे। घटना की जाँच के लिए सीएम ने एक विशेष टीम बनाने का आदेश दिया था, जो अगले सात दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी।

इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिजनों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की थी। जिस दौरान दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार के लिए कई घोषणाएँ कीं थी। इसमें परिवार को कुल 25 लाख रुपए की सहायता राशि उपलब्ध की जाएगी। परिवार के एक सदस्य को कनिष्ठ सहायक के पद पर नौकरी दी जाएगी। सूडा योजना के अंतर्गत हाथरस शहर में एक घर का आवंटन किया जाएगा। इसके अलावा सीएम ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई अनुमति दे दी है।

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा आज (अक्टूबर 01, 2020) अपने भाई राहुल गाँधी के साथ पीड़ित परिवार से मुलाकात करने के लिए एक बड़ा काफिला लेकर हाथरस निकली थीं। जिस कारण हाइवे पर लंबा जाम लग गया है। बता दें हाथरस में इस वक्त धारा 144 लागू है।

‘द वायर’ की परमादरणीया पत्रकार रोहिणी सिंह ने बताया कि रेप पर वैचारिक दोगलापन कैसे दिखाया जाता है

हाथरस में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना से पूरा देश दुखी है। 14 सितंबर को 4 युवकों ने 19 साल की दलित लड़की को उत्तर प्रदेश स्थित हाथरस में जान से मारने का प्रयास किया। घटना के एक हफ्ते बाद पीड़िता ने पुलिस को बयान दिया कि 4 युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। इसके बाद से पीड़िता की स्थिति नाज़ुक बनी हुई थी, अंत में मंगलवार 29 सितंबर 2020 को उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस घटना की वजह से पूरे देश के लोग आक्रोश में हैं। 

पीड़िता ने अपने बयान में था कि उसके साथ दुष्कर्म की घटना हुई है, लेकिन शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी। हाथरस के एसपी ने कहा था कि अलीगढ़ अस्पताल से आई मेडिकल रिपोर्ट में चोट की बात थी, लेकिन दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की गई थी। यहाँ तक की डॉक्टर्स ने भी अभी तक दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की है, एफएसएल रिपोर्ट आना अभी बाकी है। इस घटना पर समाज का दुःख और आक्रोश ख़त्म नहीं हुआ था कि उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में 22 साल की दलित युवती के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना हुई, लेकिन क्या इस घटना पर भी उतनी ही प्रतिक्रिया आई? सीधा जवाब है- नहीं।

द वायर की कर्मचारी रोहिणी सिंह ने ऐसे अपराधों पर ‘लिबरल’ हिपोक्रेसी की ब्रांड एम्बेसडर का जिम्मा सँभाल रखा है। जैसे ही रोहिणी सिंह ने इस घटनाक्रम में जातिवादी पहलू खोजने का प्रयास किया, वैसे ही उनसे सवाल किया गया। पूछे गए सवाल पर रोहिणी सिंह का जवाब कुछ इस तरह का था। 

रोहिणी ने अपने ट्वीट में दावा करते हुए कहा कि बलात्कार सिर्फ सेक्स से संबंधित नहीं है, यह महिलाओं को उनका स्थान बताने के लिए भी किया जाता है। रोहिणी के अनुसार ऊँची जाति वाले लोग नीची जाति की महिलाओं के साथ दुष्कर्म इसलिए करते हैं, जिससे वह निम्न समुदाय के लोगों को संदेश दे सकें। जिस ट्विटर यूज़र ने प्रश्न किया था उसका उपनाम मिश्रा था जो कि एक ऊँची जाति है। इस बात को आधार बनाते हुए रोहिणी ने कहा कि वह इस बात को नहीं समझ सकती, जबकि रोहिणी खुद एक ऊँची जाति से आती हैं। रोहिणी सिंह ने बलरामपुर में हुई बलात्कार और हत्या की घटना पर किस तरह की प्रतिक्रिया दी होगी? जब उसे पता लगा होगा कि 22 साल की दलित लड़की के साथ दुष्कर्म करने वाले शाहिद और सलील थे। 

जब एक दलित लड़की के साथ दुष्कर्म करने वाले युवक उच्च जाति के नहीं थे, बल्कि दो मुस्लिम युवक इस घटना के लिए ज़िम्मेदार है। ऐसे में यह मामला क़ानून व्यवस्था का विषय बन गया, साफ़ देखा जा सकता है कि कैसे एक ही तरह की घटनाओं के सामने होने पर लोगों का नज़रिया बदल जाता है। अगर अपराधी उच्च जाति के हिन्दू न होकर मुस्लिम युवक हैं, तब अपराध की परिभाषा की बदल जाती है। 

इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस पर उचित कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए रोहिणी सिंह ने कुछ ऐसा लिखा, 

साफ़ देखा जा सकता है कि रोहिणी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से नाराज हैं। अब यहाँ कुछ ऐसा हुआ कि कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान के बारां जिले में 13 और 15 साल की नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म की घटना हुई। दोनों ने इस बात को कैमरे पर स्वीकार किया कि उनके साथ दुष्कर्म हुआ था। लड़कियों ने आरोप लगाया कि आरोपित उन्हें कोटा, अजमेर और जयपुर लेकर गए और वहाँ उनके साथ पूरे 3 दिनों तक लगातार दुष्कर्म किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आरोपित भी नाबालिग थे।               

इस घटना पर ट्वीट करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लिखा कि हाथरस और राजस्थान में हुई घटना की तुलना करना अनुचित है, क्योंकि लड़कियों ने मजिस्ट्रेट के सामने यह बात स्वीकार की है कि वह अपनी मर्ज़ी से लड़कों के साथ गई थीं। 

कुल मिला कर अशोक गहलोत के मुताबिक़ 2 नाबालिग लड़कियों ने मजिस्ट्रेट के सामने जो कुछ कहा वह अपनी मर्ज़ी से कहा और इसके पहले जो कैमरे पर कहा था वह वह गलत था। नाबालिग के साथ भले ही कोई भी घटना क्यों न हुई हो, भले मर्ज़ी के साथ लेकिन वह बलात्कार की श्रेणी में आएगी। रोहिणी सिंह ने पहले तो अशोक गहलोत के ट्वीट को रीट्वीट किया, लेकिन जब उनकी बात में संदेह महसूस हुआ तब उसे अनडू (Undo) कर दिया। 

बलात्कार की घटनाओं में तमाम पहलू देख समझ कर आक्रोश व्यक्ति करना रोहिणी सिंह की हिप्पोक्रेसी ही कही जाएगी। इस तरह के हिप्पोक्रेट अगर यह कहते कि उन्हें दोनों घटनाओं में इंसाफ चाहिए, वैसी आलोचना में तर्क है। पहली घटना में रोहिणी सिंह समेत कई लिबरल्स ने आरोपित की जाति देखी और आलोचना करना शुरू कर दिया। भले लोग उनसे कह रहे थे कि इसमें जाति लेकर आने का क्या मतलब। 

पत्रकार पल्लवी घोष को इतने ज्यादा अपशब्द कहे गए जब उन्होंने कहा कि बलात्कार जैसी घटना को जाति तक सीमित नहीं कर देना चाहिए। 

उन पर यह आरोप भी लगाया गया कि कि वह दलितों को उपदेश दे रही हैं कि वह अपनी कहानी किस तरह बताएँ। 

अगर उच्च वर्ग से आने वाले दलितों को यह उपदेश दे रहे हैं कि उन्हें अपनी कहानी कैसे बतानी है तो दूसरे मामले में पहचान को केंद्र में क्यों नहीं रखा जा रहा है? जिसमें दो मुस्लिम युवकों ने एक दलित लड़की के साथ बलात्कार किया? क्या आपराधिक मामलों में जाति की तरह मजहब अहम पहलू नहीं होता है? यह विचार खुद में कितना विचित्र है, क्योंकि समाज में मजहब की भूमिका अहम होती है, चाहे वह लोगों की मानसिकता को आकार देना ही क्यों न हो। तब हम मजहब को क्यों पीछे छोड़ देते हैं? लोग कुछ ही सालों में ‘आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता से हिन्दू आतंकवाद’ पर चले आए हैं। ठीक इसी तरह सिर्फ कुछ घंटों में ही ‘बलात्कार करने वालों की जाति होती है से बलात्कार करने वालों का कोई मजहब नहीं होता है’ पर आ गए।      

रात 3 बजे रिया को घर छोड़ने गए थे सुशांत, सुबह फँदे से लटके मिले: डेथ मिस्ट्री में एक और चौंकाने वाला दावा

8 जून 2020: रिया चकवर्ती का दावा रहा है कि इसी तारीख को वे सुशांत सिंह राजपूत का फ्लैट छोड़कर चली गईं थी। इसके बाद से दोनों का संपर्क नहीं था।

14 जून 2020: सुशांत अपने घर में फँदे से लटके मिले थे।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत शुरुआत में आत्महत्या लग रही थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया मौत को लेकर रहस्य गहराता गया। उनकी गर्लफ्रेंड रहीं रिया चकवर्ती जो इस समय ड्रग्स मामले में जेल में बंद हैं, पर कई सवाल उठे। अब बीजेपी नेता के एक दावे से रिया की भूमिका और संदिग्ध हो गई है। इसके मुताबिक 13 जून को सुशांत और रिया की मुलाकात हुई थी। सुशांत उन्हें घर छोड़ने भी गए थे।

मुंबई बीजेपी के महासचिव विवेकानंद गुप्ता ने रिपब्लिक टीवी को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया, “13 जून की देर रात को एक पार्टी के बाद सुशांत रिया को छोड़ने उनके अपार्टमेंट में आए थे। इसकी जानकारी उन्हें एक चश्मदीद ने दी है।” उन्होंने चश्मदीद की बातों का जिक्र करते हुए बताया 13 और 14 की दरम्यानी रात की यह घटना है। सुशांत सिंह राजपूत रात के 2 या 3 बजे के आसपास रिया को छोड़ने उसके फ्लैट तक गए थे। फिर 14 की सुबह वे मृत मिले। इसलिए यह कहना कि 8 जून को छोड़ दिया था, यह गुमराह करने की बात है क्योंकि चश्मदीद ने उन्हें साथ में देखा है।”

उन्होंने कहा, “मैंने हर चीज के बारे में ट्वीट किया है और सभी ट्वीट में सीबीआई को टैग किया है। अगर वो मुझसे संपर्क करते है तो मैं चश्मदीद की पहचान और सभी जानकारी सीबीआई को दे दूँगा। लेकिन इस मामले में मैं मुंबई पुलिस को कोई जानकारी साझा नहीं करूँगा।”

इसके अलावा उन्होंने कूपर अस्पताल द्वारा किए गए पोस्टमार्टम पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, “मुंबई पुलिस दवाब में काम कर रही थी, जिसके कारण दो-तीन दिन की जाँच को 55 दिन खींच दिया गया। ये हत्या का मामला है जिसे बिना जाँच के ही पुलिस ने आत्महत्या करार दिया था।” बता दें बीजेपी नेता का यह बयान सुशांत के मर्डर केस को एक अलग दिशा दे सकता है।

सुशांत की बॉडी नीचे उतारने वाले पिठानी बन सकते हैं सरकारी गवाह

सुशांत मामले में चल रही जाँच में सिद्धार्थ पिठानी सरकारी गवाह बन सकते हैं। रिपब्लिक टीवी के अनुसार, वह धारा 164 के तहत केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को अपना बयान दर्ज करा सकते हैं।

बता दें पिठानी ने CBI को दिए अपने बयान में दावा किया था कि “सुशांत अपनी मैनेजर दिशा सालियान की मौत की खबर सुनकर बेहोश हो गए थे। होश में आने के बाद, उन्होंने कहा कि ‘मुझे मार दिया जाएगा’ और इसके एक हफ्ते बाद ही उनकी मौत हो गई।” रिपब्लिक टीवी के सूत्रों के मुताबिक, पिठानी ने अपने बयान में ये भी बताया कि ‘दिशा की मौत के बाद सुशांत की लिव-इन-गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती उनका लैपटॉप और अन्य उपकरणों के साथ घर छोड़कर चली गई थी।”

‘ये मेरा आखिरी अभियान होगा’: चीन बॉर्डर का शॉर्ट रूट खोज रहे थे रिटायर BSF अधिकारी, पहाड़ों पर ही हुई मौत

रिटायरमेंट के बाद अमूमन लोग अपना बाकी जीवन परिवार के साथ गुजर-बसर करने के सपने देखते हैं। लेकिन सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक अधिकारी ने रिटायर होने के 10 साल बाद राष्ट्र सेवा में अपनी जान गँवा दी। इस अधिकारी का नाम है- एससी नेगी।

हिमाचल प्रदेश से चीन सीमा तक पहुँचने का छोटा या शॉर्टकट रास्ता खोजते हुए बीएसएफ के सेवानिवृत्त अधिकारी नेगी की बुधवार (30 सितंबर 2020) को मौत हो गई। 70 वर्ष की उम्र में वह चीन सीमा तक पहुँचने का सबसे छोटा मार्ग खोज रही टीम का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन अभियान के दौरान ही उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।

साल 2010 में रिटायर हो चुके एससी नेगी इस अभियान में स्वेच्छा से गए थे। उनके परिवार ने उनकी उम्र के कारण उन्हें अभियान पर जाने से मना किया था। लेकिन, परिवार को आश्वास्त करते हुए उन्होंने कहा था, “यह मेरा अंतिम अभियान होगा”। किसे पता था कि सेवानिवृत्त अधिकारी के कहे शब्द इस तरह से सिद्ध होंगे। उन्होंने दुर्गम पहाड़ियों में सर्वेक्षण टीम का नेतृत्व किया और रास्ते में ही अपनी आखिरी साँस ली।

बीएसएफ ने एक बयान में कहा है, “उन्होंने हिमाचल की पहाड़ियों में आखिरी साँस ली, रिटायर होने के बावजूद वे स्वेच्छा से सुरक्षा बलों की एक टीम के साथ चीन के लिए नजदीकी रास्ते की तलाश कर रहे थे।”

सीमा सुरक्षा बल ने कहा कि उनकी उम्र को देखते हुए उनके परिवार ने उन्हें सलाह दी थी कि वे इस अभियान पर न जाएँ, लेकिन नेगी ने कहा कि ये उनका आखिरी दौरा होगा। इसके साथ ही वे इस ट्रिप पर निकल पड़े। ये नियति की इच्छा ही थी कि उनके कहे मुताबिक उनका ये आखिरी अभियान बन गया।

आईटीबीपी ने कहा कि उसकी पेट्रोलिंग पार्टी ने किन्नौर जिले के नेसंग गाँव के नजदीक एससी नेगी को रेस्क्यू किया। ये इलाका एलएसी के नजदीक पड़ता है। ITBP की पेट्रोलिंग टीम ने नेगी को बेहोशी की हालत में पाया, उनके शरीर पर कई फ्रैक्चर थे। जब आईटीबीपी के जवान उन्हें इलाज के लिए ले जा रहे थे तो इसी दौरान उनकी मौत हो गई।

आईटीबीपी के मुताबिक, एससी नेगी का पार्थिव शरीर 18600 फीट की ऊँचाई पर ITBP के पोस्ट पर रखा हुआ था। पार्थिव शरीर को भेजने के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल हुआ। बीएसएफ ने बताया कि 1977 बैच के अफसर नेगी माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ाई करने वाले सबसे बुजुर्ग पुलिस अधिकारी माने जाते हैं। उन्होंने 2006 में 56 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट पर विजय हासिल की थी। इसके अलावा वे बीएसएफ की केंद्रीय पर्वतारोही टीम के सीनियर सदस्य भी थे।

16 साल की बेटी को 1 साल से हवस का शिकार बना रहा था गुलाम रसूल, गर्भवती होने पर हुआ खुलासा

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के फतेहपुर थाना के एक गाँव में अपनी ही नाबालिग बेटी से अब्बू द्वारा दुष्कर्म करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपित अब्बू, गुलाम रसूल ने पिछले 1 साल से अपनी ही 16 साल की बेटी को हवस शिकार बनाया। वहीं लगातार दुष्कर्म के बाद जब उसकी बेटी 7 माह गर्भवती हो गई तब मामले का खुलासा हुआ।

इस मामले में पीड़ित किशोरी ने अपने अब्बू गुलाम रसूल के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाया है। बाप बेटी के रिश्तें को शर्मसार करती इस घटना को लेकर पुलिस अधीक्षक डॉ अरविंद चतुर्वेदी ने बुधवार (30 सितंबर, 2020) को बताया कि शहर कोतवाली के फतेहपुर क्षेत्र निवासी एक 16 साल की गर्भवती किशोरी ने अपने अब्बू पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है।

दर्ज शिकायत के अनुसार आरोपित गुलाम रसूल को लेकर पुलिस ने बताया कि वह आपराधिक प्रवृत्ति का है और अपने आपराधिक कारनामों की वजह से कई बार जेल भी जा चुका है। उस पर डकैती और हमले के कई मामले भी दर्ज है। गुलाम रसूल की पत्नी की 2 साल पहले ही मृत्यु हो गई थी जब वह अपने 8 वें संतान को जन्म दे रही थी।

पत्नी की मौत के बाद उसने अपनी 16 साल को बेटी को हवस का शिकार बनाना शुरू कर दिया। घर में उसकी दरिंदगी को रोकने वाला भी कोई नहीं था। वहीं बेटी के विरोध करने पर वह उसे मारता-पिटता और धमका कर रखता था। लगभग एक साल से उसने अपनी बेटी का कई बार यौन शोषण किया। इसी दौरान वह गर्भवती हो गई। गर्भवती होने के बावजूद अब्बू अपनी बेटी से शारीरिक संबंध बनाता रहा।

इस दरिंदगी के बारे में किशोरी की बुआ को 24 सितंबर को पता चला, जब पीड़िता के भाई का निकाह समारोह था। घर मे काफी नाते रिश्तदार मौजूद थे। इसी बीच घर का काम करने के दौरान उसके पेट में तेज दर्द शुरू हो गया। जिसके बाद लड़की के फूफी को अपने भाई की दरिंदगी की जानकारी हुई तो उनके होश उड़ गए। पीड़िता की फूफी ने उसे अपने साथ लेकर इलाके के थाने में शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद से आरोपित गुलाम रसूल फरार है।

पुलिस ने बताया कि किशोरी जब मुकदमा दर्ज कराने आई थी तो उसकी हालत ठीक नहीं थी। इस कारण उसे सीएचसी में भर्ती कराया गया, हालत में सुधार न होने पर चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। बुधवार को किशोरी ने बच्ची को जन्म दिया, पर उसकी मृत्यु हो गई।

पुलिस अधीक्षक ने बताया की फरार आरोपित गुलाम रसूल की तत्काल सूचना अपने आला अधिकारियों को दे दी गई थी। किशोरी और मृत बच्चें का मेडिकल कराया गया है। आरोपी पिता गुलाम रसूल के विरुद्ध कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश की जा रही है।

हाथरस पर पॉलिटिक्स करते भाई-बहन गिरफ्तार, पुलिस से धक्का-मुक्की के बाद झाड़ियों में गिरे राहुल गाँधी

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा आज बृहस्पतिवार (अक्टूबर 01, 2020) को अपने भाई राहुल गाँधी के साथ हाथरस कांड की पीड़िता के परिवार से मुलाकात करने के लिए दिल्ली से रवाना हुए हैं। कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं की भीड़ को जब पुलिस द्वारा रोका गया तो दोनों भाई-बहन अपने कार्यकर्ताओं के साथ पैदल ही निकल पड़े। इस बीच खबर आ रही है कि राहुल गाँधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

इस बीच राहुल गाँधी के काफिले को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बॉर्डर पर ही रोक दिया गया और उनके साथ धक्का-मुक्की की बातें भी सामने आ रही हैं। जब पुलिस ने राहुल गाँधी को रोकने का प्रयास किया तो राहुल गाँधी जमीन पर गिर गए। हालाँकि, राहुल गाँधी का यह वीडियो देखते वक्त यह प्रतीत हो रहा है कि वह सुरक्षित जगह देखने के बाद घास के ऊपर खुद ही गिर गए थे। राहुल गाँधी ने कहा कि प्रशासन चाहे कितना भी रोके वो हाथरस जाकर रहेंगे।

पुलिस ने राहुल गाँधी से कहा कि आपको आगे नहीं जाने देंगे, आपको अरेस्ट कर रहे हैं। राहुल गाँधी ने पुलिस से कहा कि मैं अकेले जाना चाह रहा हूँ। इस पर पुलिस ने कहा कि आप को धारा 188 के तहत अरेस्ट कर रहा हूँ। पुलिस ने कहा कि धारा 188 के तहत आप भीड़ के साथ नहीं जा सकते। 

प्रियंका गाँधी के भाई राहुल गाँधी ने कहा, ”अभी-अभी पुलिस ने मुझे धक्का दिया, मुझ पर लाठीचार्ज किया और मुझे जमीन पर फेंक दिया। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या केवल मोदी जी ही इस देश में चल सकते हैं? एक सामान्य व्यक्ति नहीं चल सकता है? हमारा वाहन रोक दिया गया, इसलिए हमने चलना शुरू किया।”

बहन प्रियंका भी लगा चुकी है झूठे आरोप

गौरतलब है कि पुलिस पर इस प्रकार का झूठा आरोप राहुल गाँधी की बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा भी लगाती आई हैं। दिसम्बर 2019 में ही नागरिकता कानून को लेकर चल रही राजनीति के बीच प्रियंका गाँधी ने झूठा आरोप लगाते हुए कहा था कि एक महिला अधिकारी ने उनका गला दबाया और धक्का देकर गिरा दिया।

प्रियंका गॉंधी से कथित बदसलूकी को लेकर कॉन्ग्रेस ने एक वीडियो भी जारी किया था लेकिन दिलचस्प बात यह थी कि इस वीडियो में प्रियंका गॉंधी के साथ कोई जोर-जबर्दस्ती नहीं दिखाई पड़ी।

प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी एक बड़ा काफीला लेकर पीड़ित परिवार से मिलने निकले हैं जिस कारण हाइवे पर लंबा जाम लग गया है। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक होने से यूपी पुलिस इस काफिले को दिल्ली वापस नहीं कर पाई। हाथरस के जिलाधिकारी का कहना है कि जिले की सीमाएँ सील हैं और धारा 144 लागू कर दी गई है।

कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर लिखा कि सत्य और अहिंसा की लड़ाई में हर बार हिंसा बाधक बनी है, लेकिन हर बार सत्य ने अहिंसा के बल पर हिंसा को हराया है।

उल्लेखनीय है कि गत 14 सितंबर को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के चंदपा थाना क्षेत्र स्थित एक गाँव में 19 साल की एक दलित लड़की के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। घटना के बाद पुलिस ने इस मामले में 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

इस्लाम में दुर्गा बनना हराम, अल्लाह से तौबा करे नुसरत जहां: TMC सांसद पर भड़का देवबंदी मौलाना

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद और बंगाली फिल्म अभिनेत्री नुसरत जहां ने 20 सितंबर 2020 को अपने इन्स्टाग्राम एकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था। वीडियो में वह महिषासुरमर्दिनि के रूप में नज़र आ रही थीं। इसके कारण वह एक बार फिर मज़हब विशेष के लोगों के निशाने पर आ गई हैं। देवबंद के मौलाना इसहाक गोरा ने इसे इस्लाम की नजर में हराम बताते हुए कहा है कि नुसरत जहां इसके लिए अल्लाह से तौबा करें।

मौलाना इसहाक गोरा ने कहा, “नुसरत को ऐसी हरकतें करना पसंद है। वह अक्सर विवादों में रहती है। इस्लाम में इस तरह की तमाम चीज़ें हराम हैं, लेकिन नुसरत फिर भी ऐसा करती है। इस तरह की हरकतों से लोगों की भावनाएँ आहत होती हैं। मेरे अनुसार यह पूरी तरह गलत है। नुसरत जहां को अपनी इस हरकत के लिए सार्वजनिक तौर पर माफ़ी माँगनी चाहिए।” 

मौलाना इसहाक ने यह भी कहा कि इस तरह दुर्गा का वेष धारण करके लोगों को ‘शुभो महालया’ की शुभकामना देना इस्लाम में हराम है। वह ऐसा नहीं कर सकती है। वहीं सोशल मीडिया पर मौजूद कट्टरपंथियों ने तो यहाँ तक कह दिया कि वह अल्लाह से नहीं डरती हैं, इसलिए उनकी मौत का समय नज़दीक आ गया है। अब उन्हें अल्लाह से कोई नहीं बचा सकता है।  

इसके पहले भी 17 सितंबर को नुसरत जहां ने इन्स्टाग्राम पर एक तस्वीर साझा की थी। इस तस्वीर में नुसरत दुर्गा का रूप धारण किए हुए नज़र आ रही थीं। इसके बाद वह सोशल मीडिया पर मौजूद कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गई थीं। एक सोशल मीडिया यूज़र ने तो यहाँ तक लिख दिया था, “तुम्हारी मृत्यु का समय आ गया है। अल्लाह से डरो। क्या तुम अपने शरीर को ढक कर नहीं रख सकती? छी छी छी।” वहीं कुछ ने कहा कि उन्हें अपनी इस हरकत पर शर्म आनी चाहिए कि वह मुस्लिम होकर ऐसा कर रही हैं। ऐसा करने की वजह से वह सीधा जहन्नुम जाएँगी।    

नुसरत फ़िलहाल एक बंगाली फिल्म की शूटिंग के लिए लंदन में हैं। इस तरह की धमकियों के बाद नुसरत के सहयोगी ने पश्चिम बंगाल सरकार और विदेश मंत्रालय ने शूटिंग के दौरान सुरक्षा बढ़ाने का निवेदन किया है। धमकियों को लेकर नुसरत ने खुद इंग्लैंड में भारत के उच्चायुक्त को पत्र लिखा है। 

पत्र में उन्होंने कहा है, “मैं दो दिन पहले शूटिंग के लिए यहाँ आई हूँ लेकिन मुझे सोशल मीडिया के ज़रिए लगातार धमकी दी जा रही है। इसमें कई कट्टरपंथी भारत और कई पड़ोसी देशों के हैं। इन बातों को मद्देनज़र रखते हुए मेरा आपसे निवेदन है कि मेरी सुरक्षा बढ़ाई जाए।” इसके पहले भी साल 2019 के दौरान हुई दुर्गा पूजा में सिन्दूर और मंगल सूत्र पहनने पर कट्टरपंथियों ने उन्हें खूब निशाने पर लिया था।   

‘कागज नहीं दिखाएँगे’ वाले अनुराग कश्यप कागजों का पुलिंदा लेकर पहुँचे पुलिस स्टेशन: अभिनेत्री के यौन शोषण का मामला

बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप आज (अक्टूबर 1, 2020) सुबह 10 बजे वर्सोवा पुलिस थाने पहुँचे। अभिनेत्री पायल घोष की शिकायत के मद्देनजर उन्हें मुंबई पुलिस ने कल समन जारी कर थाने में 11 बजे हाजिर होने के आदेश दिए थे

थाने पहुँचने के दौरान अनुराग कश्यप के हाथ में कागजों का बंडल नजर आया। इस बंडल के साथ वह पुलिस थाने में घुस रहे थे। फिल्म निर्माता की हालिया तस्वीरें सामने आने के बाद ट्विटर पर एक पुरानी बहस छिड़ गई है। यह बहस कागज नहीं दिखाने की है।

दरअसल, जिस समय सीएए के विरोध में प्रदर्शन हो रहे थे और प्रदर्शनकारी ‘कागज नहीं दिखाएँगे’ जैसे नारे लगा रहे थे, उस समय अनुराग बॉलीवुड की उन शख्सियतों में से थे जो सोशल मीडिया पर जोर-शोर से इसका समर्थन कर रहे थे और ज्यादातर ट्वीट के जवाब में लिखते थे, ‘कागज नहीं दिखाएँ।’

अब सोशल मीडिया यूजर्स उनके ऐसे ही ट्वीट को उनकी हालिया तस्वीर के साथ शेयर करके मजाक उड़ा रहे हैं। कोई पूछ रहा है कि अनुराग ने जब अपने सारे डॉक्यूमेंट्स जला दिए थे तो कागज कहाँ से आए। कोई कह रहा है कि अभी तो एनआरसी भी नहीं आई, अभी से क्यों कागज निकाल लिए। इसके अलावा कोई अनुराग के हाथों में बंडल देखकर उसे फिल्म की स्क्रिप्ट बता रहा है तो कोई उन्हें ही झूठा बता रहा है।

सत्येंद्र तिवारी लिखते हैं, “ध्यान से देखो ये वही अनुराग कश्यप है नफरत फैलाने वाला। जो 4 दिन पहले कहता था कि कागज नहीं दिखाएँगे। ये केवल घर में बैठकर बेकसूर लोगों की मानसिकता में जहर घोलकर लोगों से दंगा करवाते हैं और खुद कागज लेकर घूमते हैं। कब तक इनके भड़काने पर आग लगाओगे?”

एक यूजर ने अनुराग का पुराना ट्वीट शेयर करते हुए लिखता है, “अनुराग कश्यप बोल रहा था कागज नहीं दिखाएगा। एनआरसी तो आई नहीं। कागज पहले निकल आए तेरे।”

सौरभ सिंह कहते हैं, “कागज नहीं दिखाने वालों का ये हाल हो गया है। खुद ही कागज दिखाने जा रहे हैं।” विजय गुप्ता कहते हैं, “हम भी देखेंगे। बस तब मत कहना कि कागज नहीं दिखाएँगे।” एक यूजर लिखता है कि ये सब वही गैंग है जो कह रहे थे, कागज नहीं दिखाएँगे। लेकिन अब कागज भी पैदा हो गया।”

गौरतलब है कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों के समय अनुराग कश्यप के कई ट्वीट ऐसे सामने आए थे, जिनमें डॉक्यूमेंट्स किसी भी कीमत पर नहीं दिखाने की बात कही गई थी। मेनका गुरुस्वामी ने जब 10 जनवरी को यह जानकारी दी थी कि सीएए प्रभाव में आ गया है, उस समय अनुराग कश्यप ने कहा था, “आने दो हम कागज नहीं दिखाएँगे।”

इसके बाद एक ट्वीट में उन्होंने हर्ष गुप्ता को जवाब दिया था। हर्ष ने उन्हें कहा था, “तेरा बाप भी कागज दिखाएगा।” इस पर उन्होंने कहा, “अपने बाप की बात कर। जला दिए कागज सारे और औकात है किसी कि तो निकाल दे यहाँ से।”

यहाँ बता दें कि 19 सितंबर को अनुराग कश्यप पर अभिनेत्री ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसके बाद पिछले हफ्ते निर्माता के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ। केस में अनुराग पर दुष्कर्म, गलत इरादे से रोकने और महिलाओं का अपमान करने पर आईपीसी की यू/एस 376 (1), 354, 341, 342 सहित कई धाराएँ लगीं। इन्हीं पर कार्रवाई करते हुए फिल्ममेकर अनुराग से आज वर्सोवा थाने में पूछताछ हो रही है।

जानकारी के मुताबिक, अनुराग कश्यप अपने वकील के साथ लगभग 10 बजे वर्सोवा पुलिस स्टेशन पहुँचे। थाने के बाहर भारी पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया था। जैसे ही उनकी कार ने पुलिस स्टेशन के परिसर में प्रवेश किया अधिकारियों ने पुलिस स्टेशन के गेट को बंद कर दिया।

परिसर में सिर्फ उन्हीं लोगों को प्रवेश की अनुमति है, जिन्हें पुलिस ने बुलाया था। किसी अन्य व्यक्ति को उन लोगों के अलावा प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई है। वहीं वर्सोवा पुलिस अधिकारी महिला शिकायतकर्ता को मेडिकल परीक्षण के लिए कूपर अस्पताल ले गए हैं।

बारां की नाबालिग लड़कियों ने कैमरे पर बताया- उनके साथ 3 दिनों तक हुआ रेप, CM गहलोत ने कहा- ‘नहीं हुई जबरदस्ती’

राजस्थान के बारां से कल 13 और 15 वर्षीय दो नाबालिग लड़कियों के साथ हुए बलात्कार की घटना सामने आई थी। कथिततौर पर लड़कियों को अगवा कर कोटा, जयपुर और अजमेर ले जाया गया और तीन दिनों तक उनके साथ बलात्कार किया गया था। अपने साथ हुए इस घिनौने अपराध को उन्होंने कमरे पर भी बताते हुए कहा था कि दो लड़कों द्वारा उनका अपहरण किया गया और नशीली दवाइयाँ देकर तीन दिन तक बलात्कार किया गया।

पीड़िताओं के बयान के बावजूद, राजस्थान के सीएम और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने ट्विटर पर दावा किया कि नाबालिग लड़कियों के साथ किसी भी प्रकार की ‘जबरदस्ती’ नहीं की गई है।

ट्विटर पर उन्होंने दावा किया, “बारां में बालिकाओं ने स्वयं मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए 164 के तहत बयानों में अपने साथ ज्यादती नहीं होने एवं स्वयं की मर्जी से लड़कों के साथ घूमने जाने की बात कही। बालिकाओं का मेडिकल भी करवाया गया एवं अनुसन्धान में सामने आया कि लड़के भी नाबालिग हैं, जाँच आगे भी जारी रहेगी।”

खबरों के मुताबिक, राजस्थान पुलिस ने भी सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से इनकार किया है। कथिततौर पर एक पुलिस वाले ने कहा है कि लड़कियों ने अपने बयान में बलात्कार के आरोप से इनकार किया। हालाँकि, दोनों नाबालिग लड़कियों के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें धमकी देकर डराया धमकाया गया था, ताकि वे आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज न करवायें।

गौरतलब है कि कल हमनें आपको बताया था कि पीड़िताओं के पिता ने पुलिस से अपने बच्चियों के साथ हुए अपराध को लेकर न्याय की माँग की थी। अगवा की गई लड़कियों से जब पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ की तो पुलिस के सामने ही उन्हें जान से मारने की धमकी की गई थी। जिस वजह से वह अपने ऊपर हुए जुर्म के बारे में नहीं बता सकी थी।

नाबालिग लड़कियों के पिता ने पुलिस को बताया था कि दो नाबालिग आरोपित 18 सितंबर की रात को बहला फुसला कर उनकी बेटियों को भगा ले गए थे। पिता के आरोप के अनुसार, अगवा करने के बाद उन्हें अजमेर, कोटा और जयपुर ले जाकर तीन दिनों तक लगातार उनका बलात्कार किया गया। दोनों लड़कियों को 21 सितंबर को कोटा से बरामद किया गया था।

एक तरह जहाँ दोनों नाबालिग कैमरे पर नशीला पदार्थ पिलाकर सामूहिक बलात्कार करने की बात स्वीकार की। वहीं इस मामले में पुलिस और सीएम अशोक गहलोत का दावा है कि नाबालिग लड़कियों ने अपने बयान में बलात्कार के आरोपों से इनकार किया।

चितवन में अयोध्यापुरी धाम बनाएगा नेपाल, 40 एकड़ में फैला होगा; PM ओली का ऐलान

पिछले दिनों ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अयोध्या के अपने देश में होने का दावा किया था। अब उन्होंने अयोध्यापुरी धाम के निर्माण का ऐलान किया है। इसके लिए 40 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। जमीन का आवंटन चितवन में किया गया है। ओली का दावा है कि श्रीराम का जन्म यहीं हुआ था।

ओली ने चितवन जिले की माडी नगरपालिका में अयोध्यापुरी धाम बनाने के लिए 40 एकड़ ज़मीन आवंटित करने का आदेश दिया है। माडी के मेयर ठाकुर प्रसाद धाकल ने नेपाल नेशनल न्यूज़ एजेंसी से बताया कि यह फैसला 29 सितंबर को हुई बैठक के दौरान लिया गया था। ओली ने माडी नगरपालिका के साथ हुई बैठक में पुरातात्विक खुदाई के आदेश भी दिए।

ओली ने भारत पर संस्कृति धरोहर पर कब्ज़ा करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वास्तविक अयोध्या नेपाल के चितवन जिले में स्थित है। उन्होंने दावा किया था कि श्रीराम का जन्म नेपाल में हुआ था। भारत के साथ सीमा विवाद पैदा करने की कोशिश में लगे ओली के इस बयान की काफी आलोचना हुई थी।

माडी के मेयर धाकल का कहना है, “हमने 40 एकड़ ज़मीन अयोध्यापुरी धाम के लिए आवंटित की है। हमारे पास लगभग 50 बीघा अतिरिक्त ज़मीन है। अगर हमें कोई तकनीकी मुश्किल आती है उस सूरत में हम इस अतिरिक्त ज़मीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। अयोध्यापुरी धाम के लिए मास्टर प्लान भी तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इस पर विस्तार से एक रिपोर्ट भी तैयार कर ली जाएगी।”       

नेपाल की नेशनल न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़ प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने ठोरी के नज़दीक स्थित माडी नगरपालिका का नाम बदल कर अयोध्यापुरी रखने का आदेश दिया है। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों का अधिग्रहण करके उन्हें अयोध्या की तर्ज पर बनाने का आदेश दिया है। साथ ही वहाँ पर श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की मूर्ति स्थापित करने का भी आदेश दिया है। ओली ने रामनवमी के अवसर पर भूमि पूजन का काम शुरू करने की बात कही है और दो साल बाद रामनवमी के अवसर पर ही मूर्ति का अनावरण करने की बात भी कही है।