राजस्थान के बारां (Baran) जिले में दो नाबालिग लड़कियों से गैंगरेप (Gang rape) का मामला सामने आया है। ज़ी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरोपितों ने पहले बारां से दो नाबालिग लड़कियों का अपहरण किया। अपहरण के बाद आरोपित दोनों लड़कियों को कोटा, जयपुर और अजमेर ले गए। कथिततौर पर तीन दिनों तक उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।
#Baran | दो नाबालिग लड़कियों के साथ गैंगरेप का मामला आया सामने।
रिपोर्ट के अनुसार, लड़कियों के पिता ने खुद पुलिस को इस घटना की जानकारी दी और अपने साथ उन्हें लड़कियों के पास ले गया। जिसके बाद पूछताछ के लिए पुलिस लड़कियों और एक नाबालिग आरोपित को थाने ले आई।
लड़कियों के साथ हुई दरिंदगी को लेकर पिता ने पुलिस से न्याय की माँग की है। वहीं जब लड़कियों ने पुलिस अधिकारियों को घटना के बारे में बताने की कोशिश की तो आरोपितों ने पुलिस के सामने ही उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।
नोट: पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है, आगे की रिपोर्ट आने के बाद लेख को अपडेट किया जाएगा।
कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामले में मथुरा के सिविल कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मंदिर-ईदगाह के स्थान में कोई बदलाव नहीं होगा। याचिका में मंदिर के पास बनी ईदगाह को हटाने की माँग की गई थी।
अदालत ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ताओं ने अब इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने का फैसला किया है। मथुरा सिविल जज सीनियर डिवीजन में श्रीकृष्ण विराजमान का वाद दायर करने वाले हरिशंकर जैन, विष्णु जैन व रंजना अग्निहोत्री ने कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामले में याचिका दाखिल की थी।
Mathura court refuses to admit plea seeking to remove the mosque, situated adjacent to Krishna Janmabhoomi, citing the Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991.
बता दें कि मथुरा की अदालत में दायर हुए एक सिविल मुकदमे में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर की 13.37 एकड़ जमीन का मालिकाना हक माँगा गया था। इसके साथ ही मंदिर स्थल से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की अपील की गई। इससे पहले 28 सितंबर को हुई संक्षिप्त सुनवाई में एडीजी छाया शर्मा ने मामले को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया था। श्रीकृष्ण विराजमान व सात अन्य ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर एक दावा 25 सितंबर को अदालत में प्रस्तुत किया था।
याचिका में जमीन को लेकर 1968 के समझौते को गलत बताया गया। इस याचिका के माध्यम से कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन का स्वामित्व माँगा गया। याचिकाकर्ता रंजना अग्निहोत्री ने कहा कि अयोध्या का केस हम लोगों ने लड़ा, उसे जनता को सौंप दिया गया है। अब श्रीकृष्ण की मुख्य जन्मभूमि और जो इटेलियन ट्रैवलर ने अपने एकांउट में मेंशन किया है, उसके नक्शे के हिसाब से मुकदमे को सिविल कोर्ट में डाला गया है।
हालाँकि, पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 इस मामले के आड़े आ रहा है, जिसमें विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुकदमेबाजी को लेकर मालकिना हक पर मुकदमे में छूट दी गई थी, लेकिन मथुरा काशी समेत सभी विवादों पर मुकदमेबाजी से रोक दिया था। इस एक्ट में कहा गया है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में भी उसी का रहेगा।
पिछले साल 9 नवंबर को अयोध्या पर फैसला सुनाते हुए SC की पाँच जजों की बेंच ने ऐसे मामलों में काशी मथुरा समेत देश में नई मुकदमेबाजी के लिए दरवाजा बंद कर दिया था। हालाँकि इस संबंध में वकील विष्णु शंकर जैन के माध्यम से हिंदू समूह ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कानून की वैधता को चुनौती दी है। लेकिन अयोध्या मामले में SC ने कहा था कि अदालतें ऐतिहासिक गलतियाँ नहीं सुधार सकतीं।
सितम्बर के पहले सप्ताह में ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में माँग की गई थी कि अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन होने के बाद काशी में बाबा विश्वनाथ और मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर को मुक्त कराने की ओर प्रयास किया जाए। काशी-मथुरा को मुक्त कराने के लिए प्रस्ताव पारित करते हुए अखाड़ा परिषद ने इस कार्य में विश्व हिन्दू परिषद का भी सहयोग माँगा गया था।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिजनों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। बुधवार (सितंबर 30, 2020) शाम को हुई बातचीत में सीएम योगी ने न्याय का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को ढाँढस बँधाया।
इस दौरान पीड़िता के पिता ने मुख्यमंत्री से आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की माँग की। मुख्यमंत्री ने बच्ची के पिता को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया और प्रशासन को पीड़ित परिवार की हर संभव मदद के निर्देश दिए।
Lucknow: Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath speaks to the family of #Hathras gang-rape victim, via video conferencing. pic.twitter.com/htIprJUk0W
इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार के लिए कई घोषणाएँ कीं। इसमें परिवार को कुल 25 लाख रुपए की सहायता राशि उपलब्ध की जाएगी। परिवार के एक सदस्य को कनिष्ठ सहायक के पद पर नौकरी दी जाएगी। सूडा योजना के अंतर्गत हाथरस शहर में एक घर का आवंटन किया जाएगा। इसके अलावा सीएम ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमें की सुनवाई अनुमति दे दी है और मामले की जाँच के लिए एसआईटी की 3 सदस्यी कमेटी का गठन कर दिया है।
Kin of #Hathras gang-rape victim to be given Rs 25 lakh as ex-gratia and a house along with a governmnet job to one family member. Fastrack court to hear the matter; three-member SIT formed to probe the case: State govt
आज सुबह ही पीएम मोदी ने भी इस मामले पर सीएम योगी से बात कर आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की बात कही थी। उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 19 वर्षीय एक दलित लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया था। ये वारदात 14 सितंबर को चंदपा पुलिस थाना क्षेत्र के एक गाँव में हुई थी।
चार युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था और विरोध करने पर उसका गला घोंटने की कोशिश की थी, इस दौरान उसकी जीभ कट गई थी। इसके बाद से ही लड़की की स्थिति गंभीर बनी हुई थी। मंगलवार को किशोरी ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया।
गैंगरेप पीड़िता की मौत और देर रात को हुए अंतिम संस्कार को लेकर लोगों में काफी आक्रोश है। वहीं राज्य की योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। देर रात हुए अंतिम संस्कार को लेकर विपक्ष का कहना है कि पुलिस ने साक्ष्य को मिटाने के लिए परिजनों की गैरमौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं पुलिस और प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा कि मंगलवार सुबह पीड़िता की मृत्यु हो गई थी। देर रात पोस्टमार्टम के बाद जब शव पहुँचा तो परिवार वालों की सहमति से और उनकी उपस्थिति में अंतिम संस्कार कराया गया था। प्रशांत कुमार ने कहा कि कुछ महिलाओं द्वारा आरोप लगाए गए हैं, परंतु सत्य यही है कि उनकी उपस्थिति से और सहमति से ही अंतिम संस्कार कराया गया था। शांति व्यवस्था के लिए वहाँ पुलिस उपस्थित थी। एडीजी ने कहा कि पीड़िता की डेड बॉडी खराब हो रही थी, इसलिए घर के लोगों ने सहमति जातई थी कि रात को ही अंतिम संस्कार कर देना उचित होगा।
गौरतलब है कि 14 सितंबर को पीड़िता चारा इकट्ठा करने के लिए खेत में गई थी, जब 4 युवकों ने उस पर पीछे से हमला किया था। किशोरी को उसके गले में दुपट्टे से बाँधकर घसीट कर खेत में ले जाया गया, जहाँ कथित तौर पर उसके साथ बलात्कार किया गया।
जघन्य कृत्य के कुछ दिनों बाद, सोशल मीडिया पर सामूहिक बलात्कार की क्रूरता की भयावहता का वर्णन करने वाली कई रिपोर्टें सामने आई। जिसमें दावा किया गया कि अपराधियों ने लड़की की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी, उसकी जीभ काट दी और आँखें भी फोड़ दी। हालाँकि, हाथरस पुलिस ने सितंबर 29, 2020 के एक बयान में इन आरोपों से इनकार किया था।
हाथरस मामले में सवर्णों को गाली देकर यदि मन भर गया हो तो एक नजर अपने इर्द-गिर्द घुमा कर भी देखिएगा। पहचानने की कोशिश कीजिएगा कि कहीं कोई ‘काटजू’ तो आपके आस-पास नहीं है। ऐसे लोगों की पहचान होगी कि वो बलात्कार को सेक्स बताएँगे। फिर एकदम से तेज आवाज में कहेंगे कि हम रेप जैसे अपराध की निंदा करते हैं और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलवाने की पैरवी।
ऐसे लोग ‘बलात्कारियों’ को अप्रत्यक्ष रूप से मासूम साबित करने के लिए आपके सामने देश की भौगोलिक स्थिति रख देंगे। आपको आजादी से पहले का इतिहास समझा देंगे। आप ज्यादा संस्कृति और सभ्यता से प्यार करने वाले हुए तो ‘कामसूत्र’ का बाण छोड़ देंगे और खुजराहो में बनी नक्काशी का हवाला दे देंगे।
इसके बाद अगर आपमें सोचने-समझने का विवेक बचा तो हो सकता है आप उनका विरोध करें। मगर, उस समय वह आपको ये कहकर चुप कराएँगे कि हमने पहले ही कहा था कि हम रेप जैसे अपराध की निंदा करते हैं और दोषियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की माँग। शायद, तब आपके पास ‘काटजू’ जैसी सोच की आलोचना करने के लिए शब्द न बचें, जो व्यक्तिगत विचार के नाम पर आपके सामने बलात्कार को सेक्स बताकर परोसी जा रही हो।
आज हाथरस कांड ने जब एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया है तब अपने विवादित बयानों के कारण पहचाने जाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू दोबारा चर्चा मे हैं। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट लिखा है। पोस्ट में उन्होंने हाथरस की घटना की निंदा बिलकुल उसी अंदाज में की है, जैसा ऊपर जिक्र किया गया। दुखद बात यह है कि मार्कंडेय काटजू पूर्व न्यायाधीश (वो भी सुप्रीम कोर्ट में!) रह चुके हैं और फिर भी ऐसा मानते हैं कि रेप की घटनाएँ बेरोजगारी के कारण हो रही हैं!
He needs psychiatric help….Is anyone there to help him….???
Rapes happen when unemployed men can’t get married: Former SC Judge Markandey Katju’s bizarre explanation for Hathras casehttps://t.co/02WXF2C4Cs
उनका मानना है कि एक पुरुष के लिए खाने के बाद दूसरी सबसे बड़ी जरूरत है – सेक्स। और भारत जैसे दबे समाज में रहते हुए इसकी आजादी सिर्फ शादी के बाद ही मिलती है, यह भी वो मानते हैं। ऐसे में अगर देश में बेरोजगारी होगी और युवाओं की शादी नहीं हो पाएगी तो एक उम्र के बाद उनकी इच्छाएँ प्रबल होंने लगेंगी और जरूरत बन जाएँगी। वह कहते हैं कि देश में बेरोजगारों से कोई लड़की शादी नहीं करना चाहती है। इसलिए बड़ी संख्या में युवा (लड़के/मर्द) सेक्स से वंचित हो जाते हैं। जबकि एक उम्र में जाने के बाद उनके लिए यह सामान्य जरूरत है।
आगे वो कहते हैं कि 1947 से पहले अविभाजित भारत की जनसंख्या लगभग 42 करोड़ थी। आज अकेले भारत में लगभग 135 करोड़ लोग हैं, जिसका अर्थ है कि जनसंख्या में चार गुना वृद्धि हुई है। लेकिन बढ़ी हुई नौकरियों की संख्या चार गुना से भी कम है। उनका कहना है कि जब जून 2020 में अकेल 12 करोड़ लोगों ने अपनी नौकरियाँ गवाईं तो क्या रेप में वृद्धि नहीं होगी।
‘माननीय’ पूर्व न्यायाधीश काटजू
अपनी बात को आगे बढ़ाने से पहले वो एक बार फिर स्पष्ट करते हैं कि वह रेप को जस्टिफाई नहीं कर रहे। बस उस स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करवा रहे हैं, जिसके कारण यह सब बढ़ रहा है। वह मानते हैं कि अगर रेप को कम करना है तो सामाजिक और आर्थिक तंत्र भारत में बनाना होग, जहाँ कोई बेरोजगारी न हो या हो तो बहुत कम।
काटजू का सोशल मीडिया पर काटा जा रहा
अब सोचिए कि एक छोटे से पोस्ट को लिखते वक्त जब व्यक्ति विशेष को हर पैराग्राफ में इस बात को दोहराना पड़े कि वह रेप को जस्टिफाई नहीं कर रहा है। तो कहीं न कहीं इस बात का आभास तो होता है कि उसे खुद भी यह बात मालूम है कि वह बलात्कार पर सफाई ही दे रहा है। फिर चाहे उसे सेक्स के समान बता कर करे या उसे बेरोजगारी का दुष्परिणाम बताकर।
आगे बढ़ने से पहले बता दें कि सोशल मीडिया पर इस पोस्ट की खूब आलोचना हो रही है। लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया देकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की सोच पर सवाल उठा रहे हैं और जो उनको चाहने वाले हैं, वो समझा रहे हैं कि वह इसे डिलीट कर दें। मगर, हर जगह ‘माननीय’ पूर्व न्यायाधीश काटजू एक कमेंट ही कॉपी पेस्ट कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उनका मत तो बस यह है कि जब तक बेरोजगारी है, रेप होते रहेंगे।
कमेंट कॉपी पेस्ट काटजू
काटजू के बयान के मुताबिक सेक्स की जरूरत और बेरोजगारी की समस्या रेप जैसी घटना के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए यह सवाल उठता है कि क्या यह दोनों स्थिति सिर्फ पुरुषों के लिए है? या महिलाएँ इनकी चीजों की परिधि में आती ही नहीं?
सेक्स को पुरुषों की जरूरत तक सीमित कर देने वालों को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक खबर पढ़ने की आवश्यकता है, जो बताती है कि महिलाओ के भीतर सेक्स की इच्छा पुरुषों से अधिक होती है। और फिर रही बेरोजगारी की बात तो इस लॉकडाउन में जहाँ पुरुष कर्मचारियों ने नौकरियाँ गवाई हैं, वहीं महिला कर्मचारियों को भी जॉब से हाथ धोना पड़ा है। अब जाहिर है बेरोजगार हुई लड़कियाँ वयस्क ही हैं। तो अगर ‘काटजू’ थ्योरी को यहाँ अप्लाई किया जाए तो क्या निष्कर्ष समान मिलेंगे?
महिलाओं में भी सेक्स की होती है इच्छा
नहीं। आप कभी नहीं सुनेंगे कि किसी बेरोजगार ‘कमला (महिला-जो वयस्क भी है)’ ने अपनी सेक्स की इच्छा पूरी करने के लिए ‘काटजू (मजबूर, गरीब… खेत में शौच के लिए जाता एक मर्द)’ को धर दबोचा क्योंकि उससे उसके हार्मोन कंट्रोल नहीं हो रहे थे। मगर आज ‘काटजू’ से आप यह जरूर सुन रहे हैं कि ‘कमला (हाथरस पीड़िता जैसी अनेक महिलाएँ)’ का रेप इसलिए हुआ क्योंकि युवक बेरोजगार होते हैं और उनकी उम्र में सेक्स की जरूरत होती है। पर बेरोजगारी के कारण उनकी शादी नहीं होती, जिससे वह इस जरूरत से वंचित हो जाते हैं।
रेप और सेक्स के बीच में अंतर तक न जानने-समझने वाले लोगों के बारे में जब मालूम चलता है कि वो भारतीय न्याय व्यवस्था (वो भी सबसे ऊपरी हिस्से में बैठे) का हिस्सा रहे हैं, तो इससे ज्यादा हास्यास्पद कुछ भी नहीं लगता। कल्पना कीजिए कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देने वाला आरोपित कटघरे में खड़ा है और उसे देख कर लोग तरस खा रहे हैं। सबके मन में बस यही चल रहा है कि काश इसके पास नौकरी होती तो यह आराम से सेक्स कर पाता, किसी लड़की की जिंदगी बर्बाद नहीं करता।
लोगों के मन में रेप आरोपित को लेकर सोच का यह विकल्प क्यों? इसे भी ‘काटजू’ थ्योरी से समझिए। नौकरी होती तो शादी होती। शादी हो जाती तो बीवी के साथ सेक्स कर पाता। इच्छाएँ वहीं शांत हो जातीं। न मन इधर-उधर भागता, न वह किसी लड़की को पकड़ कर रेप करता और न ही हवस शांत होते ही फँसने के डर से उसे बर्बरता से मारता।
‘काटजू’ थ्योरी के साथ कई लोग आपको अपने आस-पास देखने को मिलते होंगे। उन्हें रेप के पीछे बलात्कारी मानसिकता नहीं, प्रशासन की ढिलाई नजर आती होगी। उन्हें लड़कों की गंदी नजर से आपत्ति नहीं होगी, लड़की ने क्या पहना था, इस पर उनका सवाल होगा। उनके साथ बात करने के बाद आप बलात्कारी को भी घृणा की जगह मानवीय दृष्टि से देखने लगेंगे। बिलकुल उसी तरह जैसे आतंकियों को उनके प्रोफेशन और फैमिली बैकग्राउंड से जज करने लगते हैं। उनके लिए संवेदनाएँ प्रकट करने लगते हैं।
साभार: world population review
अगर भारत में रेप की वारदातें वाकई बेरोजगारी के कारण बढ़ रही हैं तो world population review के आँकड़े में क्यों स्वीडन शामिल है? वहाँ की इम्प्लॉयमेंट रेट तो 75 प्रतिशत के भी पार है। क्यों रेप मामलों में टॉप 10 की गिनती में कहीं भी भारत नहीं है?
इसके अलावा देश की ही अगर बात करें तो बॉलीवुड का उदाहरण ले सकते हैं। इन दिनों सुर्खियों में भी है। बॉलीवुड के न जाने कितने लोगों पर रेप का आरोप लगा है। अब उनका अपराध सही साबित करने के लिए कौन सी बेरोजगारी या पुरुषों की हवस वाला कार्ड खेला जाएगा? कार्यस्थलों पर होने वाले लड़की के शोषण पर कैसे सफाई दी जाएगी? खुद के ही रिश्तेदारों द्वारा सताई पीड़िता के लिए क्या कहा जाएगा?
रेप और सेक्स में फर्क होता है। इस बात को सब अच्छे से जानते हैं। रेप की बढ़ती घटनाओं में बेरोजगारी एक फैक्टर की तरह हो सकती है। मगर, रेप के लिए सिर्फ़ बेरोजगारी को जिम्मेदार ठहराना और उस पर भी पुरुष की इच्छा व अवस्था का हवाला देने वाली समझ आपके भीतर के इंसान को गर्त में पहुँचा देगी। ऐसा होते ही आपकी सोच कुछ-कुछ ऐसी हो जाएगी:
महिलाओं की इज्जत आपको ख़िलवाड़ लगेगी! आप इस बात को भूल जाएँगे कि सेक्स नैचुरल है और आपसी सहमति से बनाया गया संबंध है!
रेप पीड़िता/पीड़ित के मन पर हुआ आघात है। उसके शरीर पर किया गया हमला है। इसमें पीड़ित के साथ संबंध तो बनाए जाते हैं, मगर उसके अंतर्मन को झकझोर दिया जाता है। रेप में पीड़िता की गैर रजामंदी होती है और वो असहनीय पीड़ा होती है, जो किसी अनचाहे इंसान को अपने ऊपर महसूस करने के कारण बढ़ती जाती है।
पीड़ित लड़की/लड़का वहीं खत्म होना शुरू हो जाती/जाता है, जब कोई उसे ऐसी मंशा से छूता है। तब वो इतना समझदार नहीं रह जाती/जाता कि उसे ये पता चले कि रेप करने वाला लड़का बेरोजगार है या उस पर हवस का भूत सवार है। उसके सामने सीधे वो निर्भया का चेहरा आ जाता है, जिसके विरोध करने पर योनि में लोहे की रॉड घुसा दी गई थी और आँतों को बाहर कर दिया गया था।
बाबरी विध्वंस के आरोपितों को सीबीआई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बबाद संगम नगरी प्रयागराज के साधु संतों में खुशी की लहर है। साधु संतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि आज का दिन सभी सनातनधर्मियों के लिए खुशी का दिन है।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने कोर्ट द्वारा बरी किए गए सभी को बधाई देते हुए कहा कि भगवान राम के कार्य में कोई अपराध नहीं होता है। यह बात आज कोर्ट के फैसले से साबित हो गया, जब कोर्ट ने कहा कि यह घटना कोई सुनियोजित घटना नहीं थी। यह काम भगवान राम का था, उन्होंने अपना काम सभी से लिया।
महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि न्याय की अदालत में सत्य की हमेशा जीत होती है। आज सभी संत महात्मा कोर्ट के इस फैसले से बेहद खुश हैं। जो लोग न्यायालय में विश्वास नहीं करते हैं, वे लोग राष्ट्रद्रोही हैं। सीबीआई कोर्ट लखनऊ ने बेहद सुखद फैसला सुनाया है। महंत नरेंद्र गिरि ने आम जनमानस से अपील की है कि वो कोर्ट के आदेश को माने।
गौरतलब है कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के आपराधिक मामले में 28 साल बाद आज सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी व कल्याण सिंह समेत सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया है।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ‘सत्यमेव जयते’ के अनुरूप सत्य की जीत हुई है। इसके साथ ही उन्होंने तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार पर तीखा वार भी किया।
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित हो पूज्य संतों, भाजपा नेताओं, विहिप पदाधिकारियों, समाजसेवियों को झूठे मुकदमों में फँसाकर बदनाम किया गया। इस षड्यंत्र के लिए इन्हें जनता से माफी माँगनी चाहिए।”
ढाँचा विध्वंस पर 28 साल बाद आए फैसले पर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि स्पेशल कोर्ट का फैसला अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम सब के लिए यह बहुत खुशी का दिन है। जब यह समाचार सुना तो इसका स्वागत किया। बहुत समय बाद अच्छा समाचार मिला, जय श्रीराम। वहीं यूपी के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह के कोर्ट के फैसले पर हर्ष जताया। पूर्व मुख्यमंत्री इन दिनों कौशाम्बी में यशोदा अस्पताल में कोरोना संक्रमित होने के बाद से भर्ती हैं।
इस फैसले के बाद केस में आरोपित रहे आचार्य धर्मेंद्र ने कहा, “सत्य की जीत हुई है। इस पर मैं प्रणाम करूँगा। हम सब मिलकर जितने भी पुराने दाग हैं, उनको धोएँगे। यह तो पहली झाँकी है, काशी-मथुरा बाकी है। जहाँ-जहाँ भी दाग है, उनको धोकर साफ करेंगे।”
इस मामले में कुल 49 अभियुक्त थे लेकिन उनमें से 17 की पहले ही मौत हो चुकी है। आरोपितों पर आपराधिक साजिश रचने से लेकर आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज हुए थे। ये मामला 28 वर्षों तक चला, जिनमें 351 गवाहों को पेश किया गया था।
पेरिस में तेज धमाके सी आवाज आने के बाद लोगों के होश उड़ गए। धमाके की दहशत इतनी थी कि जो जहाँ था, वहीं ठहर गया। लोगों को समझने में देर लगी कि आखिर हुआ क्या?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जोरदार धमाके जैसी आवाज राफेल विमान के गुजरने से पैदा हुए सुपरसॉनिक बूम के चलते हुई। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी इसी बात की पुष्टि की है कि यह आवाज सोनिक बूम के चलते ही पैदा हुई थी।
गौरतलब है कि किसी सुपरसॉनिक फाइटर विमान के सॉनिक बूम की आवाज तब सुनी जाती है जब वह सुनने वाले शख्स से 65 से 80 किलोमीटर दूर से गुजरा हो। यह आवाज इतनी तेज होती है कि खिड़कियों के शीशे तक चटख जाते हैं।
हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार बुधवार (30 सितंबर, 2020) तड़के सुबह पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में उसके पिता द्वारा कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उनकी इच्छा के खिलाफ शव का दाह संस्कार किया। परिजन पीड़िता का दाह संस्कार सुबह करना चाहते थे। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि पीड़िता की मृत्यु के 24 घंटे बीत जाने की वजह से शव का सड़ना शुरू हो गया था, जिस वजह से बिना देर किए अंतिम संस्कार करना पड़ा।
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पीड़िता के परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की गई है। वहीं इस मामले पर संज्ञान लेते हुए पीएम मोदी ने भी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मामले में जानकारी ली। सीएम ने टेलीफोन पर बातचीत में बताया कि इस घटना की जाँच के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है। टीम अगले सात दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी।
गौरतलब है कि घटना के कुछ दिन बीत जाने के बाद अलीगढ़ से इलाज के लिए लाई गई 19 वर्षीय पीड़िता ने एक दिन बाद 29 सितंबर, 2020 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था। जिसके कुछ घंटों बाद 19 वर्षीय हाथरस सामूहिक बलात्कार पीड़िता के खिलाफ की गई क्रूरता की रिपोर्ट सोशल मीडिया पर आनी शुरू हो गई। कुछ लोगों ने पीड़िता को लेकर दावा किया कि आरोपितों ने क्रूर बलात्कार के दौरान उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी, उसकी ऑंखें फोड़ दी और उसकी जीभ को भी काट डाला। हालाँकि, पुलिस ने मामले की जानकारी देते हुए कि मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि अपराधियों द्वारा गला घोटते वक्त उसको चोटें आई थीं। पुलिस ने कहा कि शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार के कोई संकेत नहीं हैं।
घटना की पूरी जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया, “घटना 14 सितंबर की है, पीड़िता के भाई ने थाने में तहरीर दी थी कि उसकी माँ और पीड़िता खेत में चारा काटने गई थी तो किसी ने उसे मारने के लिए गला दबा कर उस पर हमला किया। जिसके बाद 14 तारीख को ही आईपीसी धारा 307 और एस सी एस ती एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया। अधिकारियों ने आगे बताया कि मामले में पीड़िता के भाई सतेंद्र ने एक ही अभियुक्त (संदीप) की जानकारी दी थी।”
पुलिस ने आगे बताया, लड़की गंभीर रूप से घायल थी इसलिए उसे अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका इलाज शुरू हुआ। इस बीच, पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी और 19 सितंबर को संदीप को गिरफ्तार कर लिया गया था। जब पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब वह अपना बयान देने की हालत में नहीं थी। जिसके बाद 22 सितंबर को एक महिला अधिकारी को पीड़िता का बयान दर्ज कराने के लिए भेजा गया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट
हाथरस के पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि पीड़िता ने अपने बयान में तीन अन्य आरोपितों के नाम लेते हुए बताया कि उनके द्वारा उसका बलात्कार किया गया था। जिसके आधार पर आईपीसी की धारा 376 D (सामूहिक बलात्कार का आरोप) को भी एफआईआर में शामिल किया गया।
पीड़िता द्वारा दर्ज कराए गए बयान के आधार पर पुलिस ने 23 सितंबर को दूसरे आरोपित लवकुश को गिरफ्तार किया। तीसरे आरोपित रवि को 25 सितंबर को और चौथा आरोपित रामू 26 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। सभी चार आरोपितों को जेल भेज दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि इस मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालत द्वारा की जाएगी।
सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक खबरों को पुलिस ने किया खारिज
पुलिस ने बताया, पीड़िता को 28 सितंबर सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में भर्ती कराया गया था। गंभीर चोटों के कारण 29 सितंबर को उसकी मृत्यु हो गई। जिसके बाद आईपीसी की धारा 302 (हत्या की सजा) भी लागू कर दी गई है। साथ ही एससी / एसटी अधिनियम के तहत, पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है।
वहीं पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों को खारिज करते हुए कहा कि अपराधियों द्वारा लड़की की जीभ नहीं काटी गई थी। जब उसका गला घोंटा गया तो उसकी जीभ उसके दांतों के बीच आ गई, जिसकी वजह से उसमें चोट लग गई।
इस मामले पर एक अन्य बाईट देते हुए आईजी पीयूष मोर्डिया ने मीडिया से कहा कि पीड़िता के मेडिकल परीक्षण के दौरान बलात्कार के कोई संकेत नहीं थे। उन्होंने आगे कहा कि डॉक्टरों द्वारा दिए गए सुझाव के अनुसार, आगे के मेडिकल परीक्षण के लिए आगरा में फोरेंसिक विज्ञान लैब में पीड़िता के रिपोर्ट्स को भेजा गया है। जल्द ही मामले की पुष्टि की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब 14 सितंबर को पीड़िता चारा इकट्ठा करने के लिए खेत में गई थी, जब युवकों के एक समूह ने उस पर पीछे से हमला किया था। किशोरी को उसके गले में दुपट्टे से बाँधकर घसीट कर खेत में ले जाया गया, जहाँ कथित तौर पर उसके साथ बलात्कार किया गया। शायद घसीटने की वजह से ही उसकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी। दुष्कर्म का विरोध करने पर आरोपितों ने पीड़िता की गला दबा कर हत्या करने की कोशिश की। पुलिस ने कहा कि इसी दौरान पीड़िता की जीभ दाँत के बीच में आ गई और कट गई।
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के चन्दपा पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को मामले में ‘तुरंत कार्रवाई करने में उनकी विफलता’ के कारण जिला पुलिस लाइनों में ट्रांसफर कर दिया गया है। हाथरस एएसपी प्रकाश कुमार ने पुष्टि की है कि शव का पोस्टमॉर्टम करने के बाद उसे गाँव लाया जाएगा।
पीड़िता के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद गाँव लाया गया जहाँ बाद में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
नोट: ताजा जानकारी के अनुसार रिपोर्ट को आगे अपडेट किया जाएगा।
बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। बुधवार (सितंबर 30, 2020) को लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत कुल 32 आरोपितों को बरी कर दिया गया। कोर्ट का फैसला आने के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नाराजगी जताई है। औवैसी ने एक शायरी ट्वीट करके अपनी बात कही है।
vahī qātil vahī munsif adālat us kī vo shāhid bahut se faisloñ meñ ab taraf-dārī bhī hotī hai
असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर लिखा, ”वही कातिल वही मुनसिफ अदालत उसकी वो शाहिद, बहुत से फैसलों में अब तरफदारी भी होती है।”
Today is a sad day in the history of Indian judiciary. Now, the court says there was no conspiracy. Please enlighten me, how many days of months of preparations are required to disqualify an action from being spontaneous?: Asaduddin Owaisi, on the #BabriMasjidDemolitionVerdictpic.twitter.com/iMumkda50l
इसके साथ ही सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रेस कॉन्फ्रेस करते हुए कहा, ”सीबीआई कोर्ट का आज का फैसला भारत की अदालत की तारीख का काला दिन है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने जो 9 नवंबर को जो फैसला दिया था, आज का फैसला उसके खिलाफ है। क्या जादू से मस्जिद को गायब कर दिया था, क्या जादू से मूर्तियाँ रखी गईं थीं, क्या जादू से ताले खोले गए। आप अंदाजा लगाइए आडवाणी की रथयात्रा जहाँ भी गई वहाँ हिंसा हुई, लूटपाट हुई, मासूम लोगों के कत्ल हुए और लोगों के घर जला दिए गए। ये बताना चाहिए कि जब इतने महीने से तैयारी हो रही थी, तो फिर सब अचानक कैसे हो गया।”
उन्होंने आगे कहा, ”क्या यह सच नहीं है कि उमा भारती ने कहा था कि एक धक्का और दो, बाबरी मस्जिद तोड़ दो। क्या जब बाबरी मस्जिद शहीद हुई तब उमा भारती, आडवाणी मिठाई नहीं खा रहे थे। वो लोग खुशियाँ मना रहे थे। 1959 से अब तक इस पूरे मामलों में समुदाय के लोगों को इंसाफ नहीं मिला।”
ओवैसी ने आरोप लगाया कि सीबीआई की चार्जशीट में कहा गया है कि कल्याण सिंह ने कहा था कि रोक बनाने पर है, गिराने पर नहीं। 5 दिसंबर की रात को विनय कटियार के घर पर बैठक हुई थी, जिसमें लालकृष्ण आडवाणी भी शामिल थे।
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “तब मुझे शर्म महसूस हुई थी कि मैं मस्जिद बचा नहीं सका हूँ और अब ऐसा फैसला दे रहे हैं। बीजेपी सरकार की ओर से लालकृष्ण आडवाणी को सम्मान दिया गया, तभी साफ हो गया था क्या फैसला आएगा।” ओवैसी ने आरोप लगाया कि एक आरोपी अदालत के बाहर खड़ा होकर विध्वंस की बात स्वीकार रहा है और उसे अदालत ने बरी कर दिया।
ओवैसी ने सीबीआई कोर्ट के फैसले को नाइंसाफी करार देते हुए कहा, “मैं बतौर भारतीय मुस्लिम आज अपमान, शर्म और असहाय महसूस कर रहा हूँ। बिल्कुल वैसा ही जैसा 6 दिसंबर 1992 में युवावस्था में किया था।” उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) से इस फैसले को चैंलेज करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि यह न्याय का मामला है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए जिम्मेदार लोगों को दोषी ठहराया जाना चाहिए और आज बीजेपी इस मसले की वजह से ही सत्ता में है। ओवैसी ने कहा, “इस मसले में इंसाफ नहीं हुआ है। सारी दुनिया जानती है कि भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद, शिवसेना और कॉन्ग्रेस की मौजूदगी में ये हुआ और इनकी जड़ कॉन्ग्रेस पार्टी है। इन्हीं की हुकूमत में राजीव गाँधी ने ताले खुलवाए। मूर्ति रखी गई, शिलान्यास हुआ और इन्हीं की हुकूमत में मस्जिद शहीद हुई।”
बता दें कि बाबरी विध्वंस केस में सभी 32 आरोपितों को लखनऊ की सीबीआई की विशेष अदालत ने बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि विध्वंस की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी और यह अचानक हुई थी। कोर्ट ने सीबीआई के कई साक्ष्यों को भी नहीं माना और 28 साल से चले आ रहे इस विवाद पर अपना फैसला सुना दिया। बरी होने के बाद आरोपितों और उनके समर्थकों में खुशी की लहर छा गई। कोर्ट रूम में ही जय श्री राम के नारे गूँज उठे।
सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में ड्रग्स एंगल में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। बीते दिनों ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बॉलीवुड की तीन बड़ी अभिनेत्रियों दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से पूछताछ की। अब NCB की रडार पर तीन अभिनेता हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धर्मा प्रोडक्शंस के पूर्व एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर क्षितिज रवि प्रसाद ने बॉलीवुड के तीन बड़े अभिनेताओं के नाम लिए हैं। इन अभिनेताओं के नाम S, R और A से शुरू होते हैं। तीनों कलाकारों ने दीपिका पादुकोण के साथ काम किया है।
सूत्रों के मुताबिक, A नाम से शुरू होने वाला अभिनेता ड्रग्स लेता भी था और संपर्क वाले लोगों को ड्रग्स देता भी था। A नाम के सुपरस्टार का नाम क्रिकेटर से भी जुड़ा है। ड्रग्स केस में एनसीबी अब इन तीनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत जुटाने में लगी है। उसके बाद उन्हें जल्द ही पूछताछ के लिए समन भेज जा सकता है।
बता दें कि ड्रग्स केस में 26 सितंबर को एनसीबी ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर और सारा अली खान के बयान दर्ज किए थे। इस दौरान चारों ने सवालों के एक जैसे ही जवाब दिए। चारों अभिनेत्रियों ने पूछताछ के दौरान दावा किया कि ‘हैश ड्रग नहीं है’।
इसी दिन एनसीबी ने धर्मा प्रोडक्शन के कार्यकारी निर्माता क्षितिज रवि प्रसाद को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। एजेंसी इस मामले में अब तक कम से कम 18 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। एनसीबी के सूत्रों ने बताया कि क्षितिज ने तीन महीने की अवधि में कम से कम एक दर्जन बार ‘गांजा’ खरीदा और हर पेडलर को 50 ग्राम के लिए 3500 रुपए दिए।
जाँच एजेंसी एनसीबी ने 9 सितंबर को अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया था। रिया चक्रवर्ती की जमानत का विरोध करते हुए एनसीबी ने कहा कि अभिनेत्री और उनके भाई शौविक चक्रवर्ती ‘नामचीन हस्तियों और ड्रग्स आपूर्तिकर्ताओं से जुड़े मादक पदार्थों के सक्रिय समूह के सदस्य हैं।’
एनसीबी ने दावा किया था कि उनके पास रिया के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं, जिनसे साबित होता है कि अभिनेत्री ड्रग तस्करी में शामिल थीं और ड्रग की डिलीवरी करती थीं। इसके अलावा वह ड्रग के लिए पेमेंट भी क्रेडिट कार्ड, कैश और पेमेंट गेटवे के जरिए करती थीं। रिया चक्रवर्ती और सुशांत के साथ जुड़े अन्य लोगों को 6 अक्टूबर तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया है और वर्तमान में वे भायखला जेल में बंद हैं।
पिछले दिनों रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने बॉलीवुड की पार्टियों में शामिल रही एक इनसाइडर का इंटरव्यू लिया था। इनसाइडर ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे। इनसाइडर ने दावा किया था, “बॉलीवुड में ड्रग्स नहीं है, ड्रग्स में बॉलीवुड है। ये कड़वा सच है कि आज के बॉलीवुड स्टार्स सोने से पहले, उठने से पहले, जैसे हमलोग लंच-डिनर करते हैं, वैसे वे ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं। अभी तो सिर्फ A लिस्टेड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का नाम सामने आया है। अभी तो और भी कई अभिनेता और अभिनेत्रियों के नाम सामने आने बाकी हैं।”
एक तरफ जहाँ बाबरी विध्वंस मामले के सभी आरोपितों को कोर्ट ने बरी कर दिया, वहीं दूसरी तरफ गोरखपुर एसएसपी को एक शख्स ने फोन करके गोरखपुर स्थित गुरु गोरखनाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी है। जिसके बाद अधिकारियों ने आनन-फानन में मंदिर की सुरक्षा बढ़ाते हुए अलर्ट जारी कर दिया। साथ ही मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने धमकी देने वाले व्यक्ति को बांसगाँव इलाके से गिरफ्तार कर लिया है।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को बाबरी विध्वंस मामले के आए फैसले के कुछ घंटों बाद बांसगाँव के एक युवक ने जिले के एसएसपी को फोन कर मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी। पुलिस ने मंदिर की चौकसी बढ़ाते हुए फोन करने वाले युवक को कुछ ही घंटों के अंदर गिरफ्तार कर लिया। बता दें गिरफ्तार शख्स एक बार पहले भी इसी प्रकार की धमकी दे चुका है। उस दौरान भी पुलिस ने उसपर शान्ति भंग करने का आरोप लगाते हुए उसे हिरासत में लिया था और मुकदमा भी दर्ज हुआ था। बताया जा रहा है कि उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आरोपित शिवेंद्र सिंह ने 24 घंटे के अंदर मंदिर उड़ाने की धमकी पुलिस को दी थी। साथ में यह भी कहा की बचा सकते हो तो बचा लो। जिसको सुनकर पुलिस सकते में आ गई। जिस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। वहीं मंदिर की सुरक्षा को भी बढ़ा दिया गया।
गौरतलब है पिछली बार दिए गए धमकी को पुलिस ने हल्के में ले लिया था। और मानसिकतौर पर पीड़ित मानकर कोई सख्ती नहीं बरती थी। लेकिन दूसरी बार उसी तरह से की गई गैर जिम्मेदाराना हरकत पर पुलिस इस बार आरोपित से सख्ती बरतने के मूड में है। एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने कहा है कि कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि आज अयोध्या के बाबरी ध्वंस मामले में सीबीआई के स्पेशल जज एसके यादव ने 2000 पन्नों का जजमेंट (फैसला) दिया। इस मामले में सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि अयोध्या में बाबरी ध्वंस साजिशन नहीं हुआ, ये पूर्व-नियोजित नहीं था। इसे संगठन ने रोकने की भी कोशिश की, लेकिन घटना अचानक घट गई। इसके साथ ही सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया है।
इस दौरान लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और महंत नृत्य गोपाल दास उम्र और अस्वस्थता के कारण अदालत में उपस्थित नहीं थे। उमा भारती कोरोना की वजह से नहीं आ सकीं। सतीश प्रधान भी नहीं थे। हालाँकि, ये सभी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फैसला सुनाने के समय उपस्थित थे। इस दौरान मीडिया तक को भी कोर्ट परिसर में जाने की अनुमति नहीं थी। सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है। आसपास की दुकानें भी बंद थीं।