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चैंपियंस ट्रॉफी में जीत का मना रहे थे जश्न, हैदराबाद-करीमनगर में पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा: BJP ने पूछा- कॉन्ग्रेस शासित राज्यों का ये कैसा तरीका, कहाँ जश्न मनाएँ भारतीय?

भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर देश को जश्न का मौका दिया, लेकिन कॉन्ग्रेस शासित तेलंगाना में क्रिकेट प्रशंसकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पूरे देश में लोग जीत की खुशी मना रहे थे, वहीं तेलंगाना के शहरों करीमनगर और हैदराबाद के दिलसुखनगर में तिरंगा लिए फैंस को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैदराबाद के दिलसुखनगर में भीड़ जश्न मना रही थी, लेकिन पुलिस ने लाठियाँ भाँजकर उन्हें खदेड़ दिया। करीमनगर में भी तिरंगे के साथ जश्न मनाने वालों को रोक दिया गया और झंडा लहराने तक की इजाजत नहीं दी। लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि कॉन्ग्रेस सरकार भारत की जीत पर जश्न को क्यों रोक रही है, जबकि पाकिस्तान की जीत पर कुछ नहीं कहती। केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने इस मुद्दे पर तेलंगाना की कॉन्ग्रेस सरकार को घेरा।

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “हैदराबाद पुलिस ने दिलसुखनगर में लाठीचार्ज किया। लोग भारतीय टीम की जीत का जश्न मना रहे थे। करीमनगर में भी ऐसा ही हुआ। कॉन्ग्रेस शासित राज्यों का ये नया तरीका है? वे किसे खुश करना चाहते हैं? भारतीय कहाँ जश्न मनाएँ?”

करीमनगर के बीजेपी सांसद बंदी संजय कुमार ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “तेलंगाना के गृह मंत्री रेवंत रेड्डी बताएं- करीमनगर पुलिस किस देश का समर्थन कर रही है? भारत की जीत का जश्न नहीं मना सकते, लेकिन पाकिस्तान का नाम लिखी फ्लेक्सी हटाई जाएगी? जीत का उत्सव सांप्रदायिक कैसे हो गया? तेलंगाना डीजीपी और खुफिया विभाग बताएँ कि पुलिस कानून-व्यवस्था क्यों बिगाड़ना चाहती है? युवा कॉन्ग्रेस को इसका जवाब देंगे।”

लोगों में नाराजगी है कि अपनी ही जीत पर खुशी मनाने की आजादी छीनी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी सवाल उठ रहे हैं कि कॉन्ग्रेस की ऐसी मानसिकता क्यों है।

बता दें कि दिलसुखनगर वही इलाका है, जो 2 बार आतंकी हमलों का शिकार रहा है। साल 2002 में सिमी आतंकियों ने टाइम बॉम्ब का इस्तेमाल करके धमाका किया था, तो साल 2013 में इंडियन मुजाहिद्दीन के दोहरे धम धमाकों में 17 लोग मारे गए और 80 से ज्यादा घायल हुए। इस मामले में इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकियों को सजा भी सुनाई गई थी।

चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की जीत का जश्न मना रहे थे लोग, अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाती भीड़ ने कर दिया हमला: महू में आगजनी-पत्थरबाजी के बाद बुलानी पड़ी सेना

मध्य प्रदेश के इंदौर में चैंपियंस ट्रॉफी का जश्न मनाते लोगों पर मस्जिद से निकली मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। रमजान में मस्जिद में मौजूद लोगों ने चैंपियंस ट्रॉफी का जश्न मनाने वालों पर पथराव किया। इंदौर के कुछ इलाकों में कई गाड़ियों में आग लगाई गई। इस घटना के कई वीडियो भी वायरल हुए हैं।

रविवार (9 मार्च, 2025) को भारत ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया था और चैंपियंस ट्रॉफी जीत ली थी। इसके बाद पूरे देश में जश्न का माहौल था। इंदौर में भी युवा इसका जश्न मना रहे थे। उन्होंने बाइक पर बैठ कर इंदौर के अलग-अलग इलाकों में जुलूस निकाला।

जब यह सभी इंदौर के महू शहर में जामा मस्जिद रोड पर पहुँचे तो मस्जिद के सामने विवाद हो गया। एक वायरल वीडियो में दिखता है कि जुलूस के यहाँ पहुँचते ही मस्जिद से मुस्लिम भीड़ निकल आती है। इसके बाद शोर मचने लगता है। इस दौरान जुलूस में शामिल लोग टीम की जीत पर नारे लगा रहे होते हैं।

कुछ ही देर में यहाँ जुलूस पर हमला हो जाता है। वायरल वीडियो में अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के शोर भी सुनाई पड़ते हैं। इसके बाद लोग इधर उधर भागते हैं और पथराव होने लगता है। एक और वीडियो में दिखाई पड़ता है कि अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाती भीड़ एक स्कूटी तोड़ रही है।

इसके बाद यह पथराव जामा मस्जिद के अलावा पत्ती बाजार, सब्जी मार्केट, गफ्फार होटल समेत कई इलाके हिंसा की चपेट में आ गए। यहाँ भारतीय क्रिकेट टीम के फैन्स पर जम कर पथराव हुआ। इस पथराव के बाद दंगाई भीड़ ने कई गाड़ियों में आग भी लगा दी।

पेट्रोल बम भी चलाए जाने की सूचना है। दंगाई भीड़ ने कई जगह काफी गाड़ियाँ तोड़ी भी हैं। पथराव-आगजनी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। दंगे की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस के साथ ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ भी शहर में अलग-अलग जगह भेजी गईं।

इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वत्सल ने इस घटना के बारे में कहा, “इंडिया न्यूजीलैंड मैच के बाद जुलूस निकल रहे थे, इसमें मस्जिद के बाहर पटाखे चले तो विवाद हो गया। इसके बाद दो पक्षों के बीच पथराव हो गया। पुलिस बल अब मौजूद है। स्थिति नियंत्रण में है। अभी कुछ लोगों को चिन्हित किया गया है। रात को ही उनको पकड़ा गया है।”

एसपी ने अपील की कि लोग अफवाह ना फैलाएँ और उन पर विश्वास भी करें। एसपी वत्सल के अनुसार, 3 लोग इस पथराव में घायल हुए हैं। पुलिस ने घटना के बाद महू में लाठीचार्ज भी किया है। 300 से अधिक पुलिसवाले यहाँ तैनात किए गए हैं।

महू, भारतीय सेना का भी एक प्रमुख केंद्र है। इसके चलते प्रशासन ने सेना की भी त्वरित कार्यवाही बल (QRT) की 8 टुकडियां भी बुला लीं। सेना ने भी शहर में फ्लैग मार्च किया। पथराव करने वालों कड़ी कार्रवाई की माँग कई संगठनों ने की है।

चैंपियंस ट्रॉफी का चैंपियन बना भारत, न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया: जिस रोहित की कॉन्ग्रेसी कर रहे थे बुराई, तूफानी पारी खेलकर दिलाई जीत, स्पिनरों का शानदार प्रदर्शन

भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर ICC चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 जीत ली है। 9 मार्च को दुबई में खेले गए फाइनल में भारत ने चार विकेट से जीत हासिल की। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 251 रन बनाए, जिसे भारत ने 49वें ओवर की आखिरी गेंद पर चेज कर लिया। रोहित शर्मा फाइनल मुकाबले में ‘मैन ऑफ द मैच’ बने।

बता दें कि चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान ही कॉन्ग्रेस पार्टी की प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने बॉडी शेमिंग करते हुए रोहित शर्मा को निशाने पर लिया था। शमा मोहम्मद ने रोहित शर्मा को ‘मोटा’ और ‘भारत का सबसे बेकार कप्तान’ कहकर तंज कसा था।

ऐसा रहा फाइनल मुकाबले का हाल

भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने 76 रनों की तूफानी पारी खेली और शुभमन गिल के साथ 105 रनों की ओपनिंग साझेदारी की। गिल ने 31 रन बनाए, लेकिन मिचेल सेंटनर ने उन्हें आउट किया। इसके बाद विराट कोहली (1) और रोहित आउट हुए, फिर श्रेयस अय्यर (48) और अक्षर पटेल (29) ने पारी संभाली। आखिर में केएल राहुल और रवींद्र जडेजा ने भारत को जीत दिलाई। जडेजा ने चौका मारकर मैच खत्म किया। यह भारत की तीसरी चैम्पियंस ट्रॉफी है- 2002, 2013 के बाद अब 2025।

न्यूजीलैंड के लिए डेरिल मिचेल (63) और माइकल ब्रेसवेल (53*) ने अर्धशतक जड़े। रचिन रवींद्र (37) और विल यंग (15) ने अच्छी शुरुआत दी, लेकिन वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव ने दो-दो विकेट लेकर कीवी टीम को रोका। मोहम्मद शमी और जडेजा को एक-एक विकेट मिला।

खिलाड़ियों ने भी जीत पर खुशी जाहिर की। हार्दिक पांड्या ने कहा, “ICC इवेंट जीतना हमेशा खास होता है। 2017 में हार याद है, इस बार खुशी है। केएल ने शानदार खेल दिखाया।” जडेजा बोले, “कभी हीरो, कभी जीरो। विकेट मुश्किल था, लेकिन हार्दिक और केएल ने कमाल किया।” केएल राहुल ने हँसते हुए कहा, “डर लग रहा था, पर संयम रखा। टीम में स्किल है, BCCI ने हमें तैयार किया।”

रोहित शर्मा को प्लेयर ऑफ द मैच मिला। उन्होंने कहा, “बहुत अच्छा लग रहा है। हमने पूरे टूर्नामेंट में शानदार क्रिकेट खेला। नतीजा हमारे हक में आना कमाल का अहसास है।”

आक्रामक खेल पर पूछे सवाल पर उन्होंने कहा, “ये मेरा नेचुरल स्टाइल नहीं है, पर मैं ऐसा करना चाहता था। जब कुछ अलग करते हो, तो टीम और मैनेजमेंट का साथ चाहिए। मैंने पहले राहुल भाई से बात की, अब गौती भाई से भी। ये मेरा मन था। मैंने सालों तक अलग तरीके से खेला, अब इस स्टाइल से नतीजे मिल रहे हैं। हमें पिच को समझना पड़ता है। मैं शुरू के पाँच-छह ओवर कैसे खेलना चाहता हूँ, ये मेरे दिमाग में साफ था। पहले आउट भी हुआ, पर सही तरीके से खेलना जरूरी है। टीम में गहराई होने से आजादी मिलती है। जडेजा जैसे खिलाड़ी 8 नंबर पर हों, तो ऊपर से तेज खेलने का भरोसा रहता है। जब तक मेरा दिमाग साफ है, सब बढ़िया है।”

मैच के बाद भारतीय खिलाड़ी जश्न में डूबे। जडेजा, हर्षित राणा और अर्शदीप ने गंगनम डांस किया, तो रोहित-कोहली ने डांडिया। वरुण चक्रवर्ती की तारीफ हुई, जिन्होंने टूर्नामेंट में कमाल किया। भारत पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहा और लगातार दूसरा ICC खिताब जीता।

बता दें कि रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने लगातार दूसरी आईसीसी ट्रॉफी जीती है। वो दुनिया के इकलौते कप्तान हैं, जिन्होंने बतौर कप्तान आईसीसी के सभी टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला खेला है। बतौर कप्तान उन्होंने 2 आईसीसी ट्रॉफी जीती है।

₹55 लाख देकर ‘डंकी रूट’ से अमेरिका गया ‘गरीब’ सतपाल सिंह, इंडिया टुडे के मंच से उसे ‘बेचारा’ दिखा रहे थे राजदीप सरदेसाई: नेटिजन्स ने रगड़ कर ‘इमोशन’ का भूत उतारा

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सतपाल सिंह नाम के एक शख्स को बुलाया, जो अमेरिका से डिपोर्ट हुआ था। सतपाल ने 55 लाख रुपये खर्च कर गैरकानूनी तरीके से अमेरिका जाने की कोशिश की थी, लेकिन उसे वापस भेज दिया गया। इस इंटरव्यू ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया। लोग राजदीप पर गैरकानूनी इमिग्रेशन को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे हैं।

सतपाल ने बताया कि उसने पंजाब के फिरोजपुर से अमेरिका जाने के लिए अपनी जमीन बेची। उसका कहना था कि गरीबी की वजह से ऐसा किया, क्योंकि पिता की किडनी फेल हो गई थी और माँ की हार्ट सर्जरी हुई थी। उसने ट्रैवल एजेंट को 55 लाख दिए, जो उसे सूरीनाम ले गया। एजेंट ने वादा किया था कि वो फ्लाइट से अमेरिका जाएगा, लेकिन बाद में गैरकानूनी रास्ता अपनाने को कहा। सतपाल ने कहा, “मैं ऐसा नहीं करना चाहता था, लेकिन मजबूरी थी।”

सतपाल ने अपनी आपबीती सुनाई कि अमेरिका में उसे ठंडे कमरों में रखा गया, बीमार होने पर दवा नहीं दी गई और डिपोर्टेशन के दौरान 15 दिन पनामा और 5 दिन सैन डिएगो में हथकड़ियों में रखा गया। उसने कहा, “हमें जानवरों की तरह ट्रीट किया गया।” उसने पंजाब सरकार से फर्जी एजेंट्स पर कार्रवाई और नौकरी देने की गुहार भी लगाई। लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों ने सतपाल को ही कटघरे में खड़ा किया।

पॉपुलर एक्स यूजर @GabbbarSingh ने ट्वीट कर पूछा कि 55 लाख खर्च करने वाला शख्स पीड़ित कैसे हो सकता है? उन्होंने तंज कसा कि क्या इंडिया टुडे अब ‘डंकी विकास योजना’ शुरू करेगा?

पद्मश्री से सम्मानित मोहनदास पई ने भी राजदीप को लताड़ा और कहा, “आप गैरकानूनी काम को ग्लोरिफाई क्यों कर रहे हैं? ये लोग जानते थे कि ये गलत है, फिर भी 55 लाख खर्च किए। इसे यहाँ इन्वेस्ट करते तो बेहतर जिंदगी होती।”

राजदीप ने जवाब में कहा, “मैं किसी को ग्लोरिफाई नहीं कर रहा। डंकी रूट लेने वालों की कहानी सुनना जरूरी है। ये एजेंट्स के शिकार हैं, विलेन नहीं। सवाल ये है कि लोग जमीन बेचकर विदेश क्यों जाना चाहते हैं? हम अपने आरामदायक जीवन से गरीबों को निशाना बनाना बंद करें। इन्हें रिहैबिलिटेट करें, जज न करें।” लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं। उनका कहना है कि 55 लाख रुपये वाला शख्स ‘गरीब’ कैसे हो सकता है? कुछ ने सतपाल को ‘भोला’ नहीं, बल्कि ‘दिल से पागल’ बताया, जो अमेरिकी सपने के पीछे सब कुछ दाँव पर लगा बैठा।

ये विवाद तब और बढ़ा, जब हाल ही में अमेरिका से कई भारतीयों को हथकड़ियों में डिपोर्ट किया गया। सतपाल की कहानी ने इस बहस को हवा दी। पहले भी अमेरिका गैरकानूनी इमिग्रेंट्स को वापस भेजता था, लेकिन इस बार तस्वीरों ने सनसनी मचा दी। कुछ लोगों ने इसे मोदी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश माना। कुल मिलाकर सतपाल की कहानी और राजदीप का उसे मंच देना लोगों को पसंद नहीं आया। लोग कह रहे हैं कि गैरकानूनी काम को जायज ठहराना गलत है, चाहे मजबूरी हो या एजेंट की धोखेबाजी।

कमरे में कैद कर रेप करता था अब्दुल, बाहर पहरा देती थी उसकी बीवी: अजमेर दरगाह ले जाकर मुस्लिम बनाने की कोशिश, रिश्तेदारों-दोस्तों से भी करवाया बलात्कार

राजस्थान में रेप और धर्मांतरण के दबाव की खबरें लगातार आ रही हैं। ब्यावर के बाद भीलवाड़ा के कोतवाली थाना और बिजयनगर के बाद प्रताप नगर से मुस्लिमों द्वारा हिंदू नाबालिग के साथ गैंगरेप की खबर आई है। नाबालिग के साथ 5 मुस्लिमों गैंगरेप किया और अश्लील वीडियो बनाकर दूसरों से भी रेप करवाया। इतना ही नहीं, लड़की पर धर्मांतरण का दबाव भी बनाया और उसे अजमेर दरगाह भी लेकर गए।

पीड़ित लड़की के पिता ने अब्दुल कादिर, उसकी बीवी सोनिया उर्फ सोनू, साले आदिल उर्फ गोविंदा और तीन उसके दोस्त समीर, आशिक और इमरान के खिलाफ केस दर्ज कराया है। यह केस 8 मार्च को प्रताप नगर थाने में दर्ज कराई गई है। SHO सुरजीत ठोलिया ने बताया कि आरोपितों ने अश्लील फोटो-वीडियो वायरल और माता-पिता की हत्या की धमकी देकर लड़की से कई बार गैंगरेप किया।

पीड़िता के पिता ने अपनी शिकायत में कहा कि वह भीलवाड़ा के प्रताप नगर के एक इलाके में पिछले 7 वर्षों से अपने परिवार के साथ रह रहे थे। परिवार में उनकी पत्नी और एक नाबालिग बेटी भी है। पीड़ित पिता का कहना है कि किराए के उस मकान में एक मुस्लिम भी अपनी बीवी और साले के साथ किराए पर रह रहा था। वह अपनी बीवी के माध्यम से उनकी पत्नी और बेटी से दोस्ती कर लिया।

पिता का आरोप है कि मार्च 2021 में अब्दुल कादिर और उसकी बीवी सोनिया उसकी बेटी को जबरन अपने कमरे में ले गए। वहाँ अब्दुल ने उसकी बेटी से अश्लील हरकत की और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। इस दौरान उस सोनिया बाहर निगरानी करती रही। पीड़ित पिता का आरोप है कि उसकी बेटी जब 14 साल की थी तब अप्रैल 2022 में पहली बार अब्दुल ने उसका रेप किया।

उस दौरान अब्दुल कादिर और उसकी बीवी सोनिया पीड़िता को जबरन अपने कमरे में ले गए और रेप किया। उस दौरान अब्दुल ने पीड़िता की अश्लील फोटो और वीडियो बना लिए। वहीं, सोनिया बाहर निगरानी करती थी। इस अश्लील फोटो-वीडियो का डर दिखाकर अब्दुल पीड़िता को जबरन बुलाकर रेप करता। अगली बार उसने मई 2022 में फिर पीड़िता को जबरन कमरे में बुलाया और रेप किया।

अब सोनिया अपने भाई आदिल के साथ दोस्ती करने का नाबालिग लड़की पर दबाव बनाने लगी। उसे बदनाम करने का डर दिखाया गया। आखिरकार बार-बार की धमकी से नाबालिग डर गई। इसके बाद अक्टूबर 2023 में अब्दुल के साले आदिल ने नाबालिग लड़की से रेप किया। फिर दिसंबर में भी रेप किया। इसके बाद अब्दुल और आदिल नाबालिग पर अपने जानकार से संबंध बनाने का दबाव बनाने लगे।

जनवरी 2024 में अब्दुल और आदिल अपने जानकार को घर लेकर आए। उसके बाद नाबालिग लड़की को जबरन घर में बुलाया और अपने दोस्त समीर से उसका रेप करवाया। इस दोनों ने भी उसके साथ गैंगरेप किया। इस तरह अब्दुल, आदिल और उसके दोस्त समीर आए दिन नाबालिग लड़की को अपने कमरे में लेकर उसका रेप करते थे। अब इनका दोस्त अपने दूसरे दोस्त इमरान को लेकर आता और रेप करवाता था।

इमरान अब अपने दोस्तों को लेकर भी आने लगा। वह नाबालिग को देखकर गंदे-गंदे इशारे करता और फब्तियाँ कसता। उसके दोस्त भी नाबालिग लड़की को देखकर गंदे इशारे करते। आते-जाते हुए नाबालिग लड़की से गंदे इशारे करते और कमेंट करते थे। नाबालिग विरोध करती तो उसके माता-पिता और भाइयों को जान से मारने की ये लोग धमकी देते थे।

पीड़ित नाबालिग के पिता ने बताया कि नवंबर 2024 में भी उसकी नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप किया गया। पीड़ित पिता ने बताया कि आरोपित उसकी बेटी को जबरन अजमेर दरगाह लेकर गए और वहाँ उस पर धर्म परिवर्तन करके इस्लाम अपनाने का दबाव डाला। इसके बाद 4 मार्च को आरोपित अब्दुल ने उसकी बेटी को अपने कमरे में ले जाने की कोशिश की, लेकिन वह हाथ छुड़ाकर भाग गई।

पीड़िता के पिता का कहना है कि वह अपने कमरे में आकर काफी देर तक रोती रही। जब उससे काफी पूछताछ की गई तो उसने सारी कहानी परिजनों को बता दी। उसने बता दिया कि पिछले चार सालों से उसके साथ किस तरह की हैवानियत की जा रही है। आखिरकार पीड़ित पिता ने शनिवार (8 मार्च) को थाने में जाकर किराए अब्दुल कादिर, उसकी बीवी सोनिया, साले आदिल और 3 दोस्तों के खिलाफ FIR दर्ज कराई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। इस मामले में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि पुलिस आरोपितों से जल्दी ही पूछताछ कर सकती है। इस घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठन आक्रोश हो गए हैं। लगातार आ रहे इस तरह मामलों के खिलाफ हिंदू संगठन और संत समाज ने 10 मार्च को भीलवाड़ा बंद रखने का आह्वान किया है।

बता दें कि ऐसा ही मामला भीलवाड़ा के कोतवाली थाना क्षेत्र से सामने आया था। इस मामले में 2 मार्च 2025 को थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई है। एक युवती के साथ मुस्लिम लड़कों के एक गैंग ने एक साल तक रेप किया। युवती पर अश्लील फोटो-वीडियो से दबाव बनाया जाता था। उसे लगातार ब्लैकमेल करके एक कैफे में ले जाकर रेप किया गया।

पीड़िता को अपनी सहेलियों से दोस्ती करवाने को कहा गया। सभी आरोपितों को इस मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लड़की से रेप करने वालों में मिस्त्री से लेकर मजदूर तक शामिल हैं। वहीं, बिजयनगर से भी ऐसी ही एक खबर सामने आई थी। इससे पहले राजस्थान के ब्यावर से हिंदू लड़कियों से रेप एवं गैंगरेप की ऐसी ही घटना सामने आई थी।

‘लाउडस्पीकर बजा तो हिंदुओं को गाँव से निकाल देंगे’: रामपुर में शिव भजन बजाने पर मुस्लिम भीड़ ने पुजारी को मंदिर से खींचकर पीटा, ग्राम प्रधान अफसर अली की दिखाई धौंस

रामपुर के टांडा थाना इलाके में सिकंदराबाद गाँव के शिव मंदिर में लाउडस्पीकर पर भजन बजाने को लेकर बड़ा बवाल हो गया। गाँव के मुस्लिमों ने पुजारी प्रेम सिंह को मंदिर से खींचकर बाहर निकाला और जमकर पीटा। आरोपितों ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। इनमें भूरी, तौफीक, इकबाल, छिद्दा, इजराइल, शायदा, शकील, मुनसा अली, गुलनाज और अनीस जैसे नाम शामिल हैं।

पुजारी का कहना है कि मुस्लिमों ने ग्राम प्रधान अफसर अली का हवाला देते हुए कहा कि गाँव में उनकी चलती है और लाउडस्पीकर दोबारा बजा तो हिंदुओं को गाँव से निकाल देंगे। उनकी जमीन पर कब्जा करने की भी धमकी दी गई। इस घटना के बाद से गाँव में तनाव है और पुलिस ने वहाँ फोर्स तैनात कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार (7 मार्च 2025) शाम को ये हंगामा हुआ। पुजारी प्रेम सिंह रोज की तरह मंदिर में आरती के लिए लाउडस्पीकर पर भजन बजा रहे थे। तभी भूरी, तौफीक, इकबाल और बाकी लोग मंदिर में घुस आए। उन्होंने पहले भजन बंद करने को कहा, लेकिन पुजारी ने मना किया तो गाली-गलौज शुरू कर दी। फिर इजराइल, शायदा और शकील ने उन्हें मंदिर से बाहर खींच लिया। बाहर छिद्दा, मुनसा अली और अनीस ने मिलकर उनकी पिटाई की। गुलनाज और दूसरी महिलाएँ भी भीड़ में थीं और चिल्लाकर धमकी दे रही थीं। गाँव वालों के आने पर ये लोग भागे, लेकिन जाते-जाते कह गए कि अगली बार भजन बजा तो जान ले लेंगे।

पुजारी का कहना है कि गाँव में मुस्लिम आबादी ज्यादा है और हिंदुओं की संख्या कम होने की वजह से वो लोग डरे हुए हैं। उनका आरोप है कि ग्राम प्रधान अफसर अली भी आरोपितों के साथ है, जिससे उनकी हिम्मत बढ़ी हुई है। रात में ग्रामीण पुजारी को लेकर थाने पहुँचे और तहरीर दी। पुलिस ने भूरी, तौफीक, इकबाल, छिद्दा, इजराइल, शायदा, शकील, मुनसा अली, गुलनाज, अनीस समेत 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

कोतवाली प्रभारी ओमकार सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और बाकी आरोपितों की तलाश चल रही है। गाँव में हालात काबू में रखने के लिए पुलिस तैनात है। हालाँकि, पुलिस का ये भी कहना है कि मामला इतना बड़ा नहीं था।

प्रभारी निरीक्षक ओमकार सिंह ने बताया कि एक महिला ने पुजारी से लाउडस्पीकर की आवाज कम करने को कहा था, क्योंकि रमजान में नमाज की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी। इसी बात पर कहासुनी हुई, लेकिन मारपीट जैसी बड़ी बात नहीं हुई। फिर भी पुजारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। सभी आरोपितों को शांतिभंग में चालान कर कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जमानत मिल गई।

सीओ कीर्तिनिधि आनंद ने कहा कि गाँव में शांति के लिए पीस कमेटी की बैठक भी हुई है। फिलहाल गाँव में तनाव बना हुआ है। मुस्लिम आबादी के दबदबे और ग्राम प्रधान के समर्थन की बात से हिंदू डरे हुए हैं।

कप्तान रोहित शर्मा, पर मीडिया से बात करने आए शुभमन गिल… क्या चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल ‘हिटमैन’ के करियर का होगा आखिरी वनडे? जानिए संन्यास की क्यों लग रही अटकलें

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा के संन्यास को लेकर इन दिनों मीडिया और क्रिकेट फैंस के बीच खूब चर्चा हो रही है। ये बातें खासतौर पर तब तेज हुईं जब भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का फाइनल खेल रही है। 37 साल के रोहित की उम्र और हाल के कुछ मैचों में उनका फॉर्म देखकर लोग कयास लगा रहे हैं कि क्या ये उनका आखिरी वनडे टूर्नामेंट होगा। रोहित ने 2024 में टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद टी20 इंटरनेशनल से संन्यास ले लिया था, तो अब सवाल उठ रहा है कि क्या वनडे से भी वो रिटायरमेंट ले लेंगे।

ये अटकलें क्यों लग रही हैं? दरअसल, रोहित का टेस्ट में हालिया प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और सिडनी टेस्ट से वो बाहर भी रहे। उधर शुभमन गिल और हार्दिक पंड्या जैसे युवा खिलाड़ी कप्तानी के दावेदार माने जा रहे हैं। मीडिया को लगता है कि रोहित अब नए खिलाड़ियों के लिए रास्ता खोल सकते हैं। लेकिन इन सबके बीच टीम का फोकस अभी ट्रॉफी जीतने पर है।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सूत्रों के अनुसार चैंपियंस ट्रॉफी के बाद रोहित वनडे में अपने भविष्य को लेकर चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर के साथ चर्चा की बात सामने आ रही है। और फिर चैंपियंस ट्रॉफी में उनका स्कोर (41, 20, 15, 28) भी कुछ खास नहीं रहा, लेकिन उनकी कप्तानी में टीम फाइनल तक पहुँची है। वो इकलौते कप्तान हैं, जो आईसीसी के हर टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला खेल चुके हैं। अब अगर भारत चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब भी जीतता है, तो कईयों को लगता है कि रोहित शर्मा इसे अपने करियर का शानदार अंत मान सकते हैं।

दरअसल, संन्यास की अटकलों के बीच ही रोहित शर्मा ने महत्वपूर्ण प्रेस-कॉन्फ्रेंस से दूरी बना ली। शायद उन्हें ये पता था कि उनके संन्यास पर सवाल होंगे। ऐसे में उन्होंने अपनी जगह शुभमन गिल को मीडिया के सामने भेजा। हालाँकि शुभमन गिल से प्रेस कॉन्फ्रेंस में रोहित शर्मा के संन्यास पर सवाल पूछ ही लिया गया।

रोहित शर्मा पर पूछे गए सवाल के जवाब में गिल ने कहा, “अभी तक ड्रेसिंग रूम में या मेरे साथ इस बारे में कोई बात नहीं हुई है। रोहित भाई का पूरा ध्यान कल के मैच पर है। वो मैच के बाद फैसला लेंगे। अभी हम सिर्फ चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बारे में सोच रहे हैं।” गिल का जवाब सुनकर साफ है कि टीम में अभी ये मसला चर्चा का विषय नहीं है, और रोहित खुद भी फाइनल पर फोकस्ड हैं।

वैसे, कोच गौतम गंभीर पहले ही कह चुके हैं कि वो खिलाड़ी के आँकड़े नहीं, बल्कि मैच पर उसके असर को देखते हैं, जिसमें रोहित कामयाब रहे हैं। वो लंबे समय से टीम को तेज शुरुआत दिलाते हैं, जो ये बताता है कि वो टीम हित को देखने वाले कप्तान हैं। वैसे, रोहित के खिलाफ एक बात जो जाती है, वो है बढ़ती उम्र। वो 37 साल से अधिक के हो चुके हैं। 50 ओवरों का अगला आईसीसी इवेंट यानी क्रिकेट विश्वकप 2027 में होना है और तब तक वो 39 साल के हो जाएँगे। ऐसे में संभव है कि वो चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर बतौर विजेता कप्तान ही ओडीआई क्रिकेट को अलविदा कह दें।

हालाँकि इस समय रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर अटकले भले ही चल रही हैं, तो मामला कुछ साफ नहीं है। वैसे, रोहित का फैसला चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल के बाद पता चल ही जाएगा। बहरहाल, क्रिकेट फैंस को तो यही उम्मीद रहेगी कि ‘हिटमैन’ अभी क्रिकेट खेलते रहें, क्योंकि उनका बल्ला और कप्तानी दोनों कमाल के हैं।

‘लाल पानी’ पिलाकर बनाया ईसाई, दिन बदलने का दिया था झाँसा, 4 साल बाद भी झोपड़े में कट रहे दिन… मीना ने की घर वापसी, बताया- चर्च के लोग ही हमसे लेते थे पैसा

राजस्थान के बाँसवाड़ा में ईसाई धर्म अपनाए लोग खुद ही घर वापसी कर रहे हैं। वहाँ की चर्च को मंदिर में बदला जा रहा है। सोडलदूधा गाँव के मंदिर में भैरवनाथ, भगवान राम आदि देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित की जा रही हैं। इस गाँव के चर्च के पादरी सहित 30 से अधिक ईसाइयों ने घर वापसी कर ली है। इन लोगों का दावा है कि बाकी के बचे हुए कुछ लोग जल्दी ही घर वापसी कर कर लेंगे।

गौतम गरासिया 30 साल पहले ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए थे। इसके बाद उनके साथ गाँव के 45 से अधिक लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया। उन्होंने धर्म का प्रचार करने के लिए मिशनरियों के सहयोग से एक चर्च भी बनवाया। उन्हें इस चर्च का पादरी बना दिया। चर्च के बदले उन्हें 1500 रुपए मासिक मिलते थे। यहीं पर हर रविवार को प्रार्थना सभा का आयोजन होता था। हालाँकि, वे घर वापसी कर चुके हैं।

भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, पाँचवीं कक्षा तक पढ़े गौतम ने बताया कि वे मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। इससे छुटकारा पाने के लिए वे हॉस्पिटल से लेकर देवी-देवताओं के चक्कर काटे, लेकिन फायदा नहीं हुआ। आखिरकार उनकी मुलाकात ईसाई धर्म का प्रचार करने वाले मिशनरियों से हुई। गौतम का कहना है कि मिशनरी के लोगों ने कहा कि यीशु की आराधना करो, शांति मिलेगी।

गौतम ने बताया कि मिशनरी के लोगों ने कुछ समय के बाद लाल रंग का दाकरस (खास प्रकार का जूस) पिलाते और मन परिवर्तन की बात करते थे। इस तरह उन लोगों ने इन्हें झाँसे में लेकर ईसाई धर्म में परिवर्तन करा दिया। चर्च बनाने के लिए पैसे देने के साथ-साथ किराया के रूप में 1500 महीना देने का लालच देकर अन्य लोगों को भी ईसाई धर्म से जोड़ने के लिए कहा। गौतम ने ऐसा ही किया।

गौतम का कहना है कि पिछले 30 सालों में ऐसा कुछ नहीं लगा कि उन्हें मानसिक शांति मिली है। उनका कहना है कि मानसिक से लेकर आर्थिक हालात आज भी जस के तस है। तीस साल में पक्की छत तक नहीं बना पाया। उन्होंने कहा कि ईसाई बन जाने के बाद अपने लोगों ने उनसे बोलना तक बंद कर दिया था। गौतम की 6 बेटियाँ और 5 बेटे सहित कुल 30 लोगों का परिवार है।

गौतम का कहना है कि कुछ समय पहले उन्होंने अन्य लोगों के साथ घर वापसी कर ली है। हालाँकि, उनकी पत्नी ईसाई धर्म छोड़ने के तैयार नहीं है। गौतम का कहना है कि ईसाई धर्म से सबसे ज्यादा वही प्रभावित थी। अब वह कहती है कि पति को छोड़ देगी, लेकिन ईसाई धर्म नहीं छोड़ेगी। फिलहाल वह गौतम को छोड़कर अपने मायके में है। इस तरह गौतम का परिवार भी बर्बाद हो गया।

वहीं, धर्मांतरण करने वाली मीना गरासिया ने बताया कि उसके पति मजदूरी करते हैं। प्रार्थना सभा में आने वाले लोग बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजगार की बातें करते थे। इससे मीना को लगा कि उसके परिवार का भी भला हो जाएगा। इसके बाद मीना ने अपने पति और बच्चों के साथ ईसाई धर्म अपना लिया। अब मीना का कहना है कि ईसाई बने चार साल हो गए, लेकिन उसका जीवन नहीं बदला।

मीना का कहना है कि वह और उसका पति आज भी मजदूरी ही करते हैं। मीना ने बताया मिशनरियों के आने वाले लोगों की सेवा करने के कारण उसके घर गहने भी बिक गए। वे पैसा नहीं देते थे और आने-जाने के लिए पेट्रोल एवं खाने-पीने के पैसे अलग से माँगते थे। मीना का कहना है कि इससे परेशान होकर वह वापस अपने धर्म में लौट आई। इसी तरह एक हिंदू लड़के शादी करने के लिए एक ईसाई हिंदू बन गई।

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सह-मंत्री स्वामी रामस्वरूप का कहना है कि इस इलाके में पिछले 150 साल से ईसाई धर्मांतरण का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि बांसवाड़ा और डूंगरपुर में धर्मांतरण कराने वाले दूसरे प्रदेश से आकर रहने लगे। धीरे-धीरे 400 छोटी स्कूलें खोलीं। वे लोगों के लिए दवा की व्यवस्था करते थे। दवा के बहाने प्रार्थना सभा करते और फिर चर्च खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि लोगों में अब जागरूकता आ रही है और वे खुद ही इसका विरोध कर रहे हैं।

ब्यावर के ‘मुस्लिम गैंग’ पर बुलडोजर एक्शन नहीं, राजस्थान हाई कोर्ट ने घर तोड़ने पर लगाई रोक: ब्लैकमेल कर हिंदू बच्चियों का करते थे रेप, रोजा-कलमा का बना रहे थे दबाव

राजस्थान हाई कोर्ट ने ब्यावर में हिंदू लड़कियों के यौन शोषण के आरोपित मुस्लिमों के घरों पर बुलडोजर चलाने पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने आरोपितों के घरों के ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी किया था। यह नोटिस 20 फरवरी को दिया गया था। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की एकल बेेंच ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल ने अपने आदेश में कहा है, “याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने प्रस्तुत किया है कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 194 और धारा 245 के तहत उनके निर्माण को ध्वस्त करने के लिए दिनांक 20.02.2025 को कारण बताओ नोटिस प्राप्त होने पर उन्होंने समय पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है, लेकिन प्रतिवादी जवाब पर निर्णय लिए बिना ही उनके निर्माण को ध्वस्त करने पर आमादा हैं।”

अदालत ने आरोपित मुस्लिम याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा कि वे अपनी रिट याचिकाओं की एक कॉपी अतिरिक्त महाधिवक्ता के कार्यालय को दें। प्रतिवादियों के वकील ने अपने निर्देश पूरे करने के लिए समय माँगा। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें समय दे दिया। इस मामले की सुनवाई 11 मार्च को 2 बजे के लिए सूचीबद्ध किया गय है। तब तक दोनों पक्षों से यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि पिछले महीने पुलिस ने एक प्रेस नोट जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि मोबाइल फोन के जरिए प्रेम संबंधों में फँसाकर नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करने वाले 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, 2 किशोर अपराधियों को हिरासत में लिया गया है। इसके बाद संबंधित नगरपालिका के अधिकारियों ने इन आरोपितों के घरों के लिए नोटिस जारी किया।

याचिका में दावा किया गया है कि नगरपालिका के कार्यकारी अधिकारी द्वारा आरोपित व्यक्तियों के घरों को हाथ से लिखित 8 नोटिस जारी किए। इनमें एक मस्जिद और एक कब्रिस्तान तथा बाकी 6 आरोपितों के घर शामिल हैं। इनमें से एक घर याचिकाकर्ता का भी है, जिसमें वह अपने पूरे परिवार के साथ रहता है।

याचिका में आगे कहा गया है कि नोटिस प्राप्त करने वाले व्यक्ति से कहा गया है कि वह नोटिस प्राप्त होने के तुरंत बाद संबंधित नगरपालिका में स्थित अपने घर/भवन के पक्ष में स्वामित्व के दस्तावेज, रिकॉर्ड और स्वीकृत नक्शा प्रस्तुत करे। नोटिस प्राप्त करने वाला व्यक्ति अपने पक्ष में स्वामित्व के दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहता है तो उसके खिलाफ राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 194(1) और 245 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि पिछले महीने 11 मुस्लिमों ने 5 हिंदू लड़कियों का रेप और ब्लैकमेल किया था। इस मामले में 16 फरवरी को 3 एफआईआर दर्ज की गई। इस घटना के कारण इलाके में सांप्रदायिक तनाव भी पैदा हो गया। इसके बाद बिजयनगर नगरपालिका ने आरोपितों के घरों को ध्वस्त करने का नोटिस भेजा। इसके बाद मुस्लिम आरोपितों के परिजनों ने नगरपालिका के इस निर्णय को राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

सीरिया में 2 दिन में 1000+ का कत्लेआम, हर तरफ बिखरी हैं लाशें: औरतों को नंगा कर सड़क पर घुमाया, जानिए क्यों ID चेक कर ढेर किए जा रहे अलावी

सीरिया (Syria) में पिछले दो दिनों से खून की नदियाँ बह रही हैं। सीरिया के अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थकों और नई सरकार के सुरक्षा बलों के बीच हुई भयंकर झड़पों में 1,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इसमें करीब 750 आम लोग शामिल हैं, जो इस हिंसा की चपेट में आ गए।

ब्रिटेन के मानवाधिकार संगठन ‘सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने शनिवार (9 मार्च 2025) को ये चौंकाने वाला आँकड़ा जारी किया। संगठन का कहना है कि ये पिछले 14 साल से चल रहे सीरिया के गृहयुद्ध में सबसे खतरनाक घटनाओं में से एक है। इसमें 745 नागरिकों के अलावा 125 सरकारी सैनिक और असद के वफादार 148 लड़ाके भी मारे गए हैं। ये हिंसा गुरुवार (6 मार्च 2025) से शुरू हुई और अब तक थमने का नाम नहीं ले रही।

फिर से क्यों सुलग रहा है सीरिया

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सब तब शुरू हुआ जब गुरुवार (6 मार्च 2025) को तटीय शहर जबलेह के पास सुरक्षा बल एक भगौड़े अपराधी को पकड़ने पहुँचे, लेकिन इस दौरान उन पर कथित तौर पर असद के समर्थकों ने घात लगाकर हमला कर दिया। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए। नई सरकार का कहना है कि वो असद के बचे हुए लड़ाकों के हमलों का जवाब दे रही है, लेकिन शुक्रवार से ये झड़पें बदले की कार्रवाई में बदल गईं। सरकार से वफादार सुन्नी मुस्लिम हमलावरों ने असद के अलावी समुदाय के लोगों पर हमले शुरू कर दिए।

अलावी समुदाय लंबे वक्त से असद का समर्थन करता रहा है। इस हिंसा ने नई सरकार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है, जो तीन महीने पहले ही असद को हटाकर सत्ता में आई थी।

बदले की आग में जल रहा सीरिया

शुक्रवार (7 मार्च 2025) को हालात तब और खराब हो गए, जब सुन्नी लड़ाकों ने अलावी गाँवों और कस्बों में घुसकर लोगों को निशाना बनाना शुरू किया। अलावी समुदाय के ज्यादातर पुरुषों को सड़कों पर या उनके घरों के बाहर ही गोली मार दी गई। कई जगहों पर घरों को लूटा गया और फिर आग के हवाले कर दिया गया। महिलाओं को नंगा करके सड़क पर घुमाया गया।

बनियास जैसे शहरों में हालात इतने खराब हैं कि सड़कों पर शव बिखरे पड़े हैं। वहाँ के लोगों का कहना है कि छतों पर भी लाशें पड़ी हैं, लेकिन उन्हें उठाने की इजाजत तक नहीं दी जा रही। बनियास से अपने परिवार के साथ भागे 57 साल के अली शेहा ने बताया कि उनके इलाके में कम से कम 20 लोग मारे गए। कुछ को उनकी दुकानों में, तो कुछ को घरों में गोली मारी गई।

अली ने कहा, “हालात बहुत डरावने थे। हमलावर हमारे अपार्टमेंट से सिर्फ 100 मीटर दूर थे और अंधाधुंध गोलियाँ चला रहे थे।” उन्होंने ये भी बताया कि हमलावर लोगों से उनकी आईडी माँगते थे, उनका मजहब और संप्रदाय चेक करते थे, फिर उन्हें मार देते थे। कई घरों को जलाया गया, गाड़ियाँ लूटी गईं और संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। अली का कहना है कि ये हमले असद की सरकार के पुराने अपराधों का बदला लेने के लिए किए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने ये भी कहा कि हमलावरों में विदेशी लड़ाके और आसपास के गाँवों से आए आतंकी शामिल थे।

लताकिया में बुनियादी सुविधाएँ ठप

इस हिंसा का असर सिर्फ जानमाल तक सीमित नहीं है। तटीय शहर लताकिया के बड़े इलाकों में बिजली और पानी की सप्लाई बंद हो गई है। कई बेकरी बंद हो चुकी हैं, जिससे लोगों को खाने-पीने की चीजों के लिए भी जूझना पड़ रहा है। लोग डर के मारे पहाड़ों की ओर भाग रहे हैं। बनियास के एक शख्स ने बताया कि उनके 5 पड़ोसियों को शुक्रवार को करीब से गोली मारी गई, लेकिन घंटों तक कोई उनके शवों को हटा नहीं सका। हमलावरों ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया। साफ है कि ये हिंसा अब सिर्फ लड़ाई नहीं, बल्कि एक समुदाय के खिलाफ नफरत का रूप ले चुकी है।

हयात तहरीर अल-शाम के लिए मुसीबत

ये हिंसा उस गुट ‘हयात तहरीर अल-शाम’ (HTS) के लिए बड़ा झटका है, जिसने असद को हटाकर सत्ता हासिल की थी। HTS के नेतृत्व में विद्रोही समूहों ने दमिश्क पर कब्जा किया था, लेकिन अब उनके सामने अपने ही देश को संभालने की चुनौती है। अलावी समुदाय के खिलाफ ये हमले सीरिया में गहरी धार्मिक और जातीय दरार को दिखाते हैं। अगर ये हालात काबू में नहीं आए, तो ये हिंसा और खतरनाक रूप ले सकती है।

सीरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी ने रक्षा मंत्रालय के अधिकारी के हवाले से कहा कि सरकारी बलों ने ज्यादातर इलाकों पर फिर से कब्जा कर लिया है। तटीय इलाकों की ओर जाने वाली सड़कों को बंद कर दिया गया है, ताकि और हिंसा न हो और धीरे-धीरे हालात सामान्य किए जा सकें। शनिवार (8 मार्च 2025) को तुवायम गाँव में 31 लोगों की सामूहिक कब्र बनाई गई, जिनमें 9 बच्चे और 4 महिलाएँ शामिल थीं। इन लोगों को शुक्रवार की हिंसा में मारा गया था। वहीं, उत्तर-पश्चिम के अल-जनौदिया गाँव में चार सैनिकों का अंतिम संस्कार हुआ, जो तटीय इलाकों में मारे गए थे।

लेबनान के सांसद हैदर नासर ने बताया कि लोग डर के मारे सीरिया से लेबनान की ओर भाग रहे हैं। कुछ लोग रूस के ह्मेमिम एयरबेस पर शरण ले रहे हैं। नासर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलावियों की सुरक्षा की माँग की। उनका कहना है कि असद के जाने के बाद कई अलावियों को नौकरी से निकाल दिया गया। यही नहीं, जिन सैनिकों ने नई सरकार से सुलह कर ली थी, उन्हें भी मार दिया गया। फ्रांस ने भी इस हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वो धार्मिक आधार पर नागरिकों और कैदियों के खिलाफ अत्याचारों की कड़ी निंदा करता है। फ्रांस ने सीरिया की अंतरिम सरकार से माँग की है कि इन अपराधों की निष्पक्ष जाँच हो।

ये हिंसा नई सरकार के लिए एक बड़ा इम्तिहान है। असद के शासन के दौरान अलावी समुदाय सेना और सुरक्षा एजेंसियों में बड़े पदों पर रहा था। अब नई सरकार का कहना है कि असद के समर्थक पिछले कुछ हफ्तों से उनके सैनिकों पर हमले कर रहे हैं। लेकिन जिस तरह ये हिंसा बदले की भावना में बदल गई है, उससे साफ है कि सीरिया में शांति अभी दूर की बात है।