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‘पाकिस्तान की जय… कन्नड़ लोग कु***या के बच्चे’: टोयोटा प्लांट के बाथरूम में गाली लिखने वाले सादिक और हामिद गिरफ्तार, बताया- चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की जीत देख भड़के

कर्नाटक में टोयोटा बोशोकू ऑटोमोटिव इंडिया के दो श्रमिकों ने भीमनहल्ली स्थित कंपनी के बाथरूम में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लिखे। इसके साथ ही उन्होंने कर्नाटक के लोगों के लिए गाली भी लिख दी। कर्नाटक पुलिस ने आरोपितों की पहचान करके बुधवार (19 मार्च) को 24 साल के हामिद हुसैन और 20 साल के सादिक एच. को गिरफ्तार कर लिया। दोनों कंपनी में ठेका पर काम करते हैं।

टोयोटा बोशोकू ऑटोमोटिव इंडिया का यह प्लांट रामनगर जिले के बिदादी स्थित भीमनहल्ली में स्थित है। कंपनी में काम करने वाले कुछ लोगों ने देखा कि बाथरूम की दीवारों पर ‘पाकिस्तान की जय’, ‘पाकिस्तान की जीत हो’ जैसे नारे लिखे हुए हैं। इस के साथ कन्नड़ लोगों के लिए ‘कन्नड़ लोग कु**या/र**डी की औलाद हैं’ जैसे अपमानजनक शब्द लिखे हुए हैं।

इसकी जानकारी कंपनी और फिर पुलिस को दी गई। पुलिस ने इस मामले में शिकायत दर्ज करके आरोपितों की पहचान शुरू कर दी। इसके लिए दर्जनों सीसीटीवी फुटेज की जाँच की गई और 50 से अधिक संदिग्ध लोगों की लिखावट की जाँच की गई। बिदादी पुलिस ने पाया कि भाषा शैली पर ध्यान दिया तो पाया कि जो शब्द लिखे गए हैं, वह कन्नड़ शब्द उत्तर कर्नाटक की बोली के थे।

इसके बाद पुलिस ने इस पर ध्यान केंद्रित किया और कंपनी की इस यूनिट में काम करने वाले लोगों से पूछताछ शुरू की। यूनिट में उत्तर कर्नाटक के बहुत कम लोग थे। अंत में पुलिस ने 50 से अधिक लोगों में से 10 लोगों को अंतिम रूप से छाँट कर बाथरूम में लिखे गए शब्दों को एक कागज पर लिखने के लिए कहा। इस दौरान दोनों आरोपितों ने अपनी भाषा शैली बदलने की कोशिश की, लेकिन हस्तलेखन विशेषज्ञों ने उन्हें पहचान लिया।

आखिरकार पुलिस ने बिदादी के रहने वाले हैमद/हामिद हुसैन और सादिक को गिरफ़्तार कर लिया। दोनों बताया कि इस साल फरवरी में दुबई में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी मैच में भारत से हार के बाद उनके सहकर्मियों ने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को भला-बुरा कहा था। यह बात आरोपितों को बुरी लगी थी। इसलिए दोनों ने बाथरूम में यह बात लिख दी। पुलिस ने कहा कि आरोपितों का किसी से बहस हुई थी या नहीं, ये पता लगाना है।

उत्तरी कर्नाटक के बीदर के रहने वाले दोनों आरोपित पिछले एक साल से कंपनी की इस यूनिट में काम कर रहे थे। हुसैन स्टोर में हेल्पर के तौर पर काम करता था, जबकि सादिक प्रोडक्शन लाइन में असिस्टेंट के तौर पर काम करता था। मामले की जानकारी जब प्रबंधन को दी गई तो उसने दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ़ चेतावनी नोटिस करके छोड़ दिया।

प्रबंधन के इस रूख से कंपनी के कर्मचारी नाराज हो गए। सोशल मीडिया पर आक्रोश के बाद आखिरकार कंपनी के मानव संसाधन (HR) विभाग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जाँच शुरू की और दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को गुरुवार (20 मार्च) को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

रामनगर के SP श्रीनिवास गौड़ा ने बताया, “एफआईआर में कहा गया है कि मामला 15 मार्च की सुबह सामने आया, जब एक ऑपरेटर ने नारे देखे। कुछ समय बाद हाउसकीपिंग स्टाफ ने इन नारों को मिटा दिया। तब तक किसी ने इसकी तस्वीरें ले लीं और इसे अन्य कर्मचारियों को भेज दिया। हमने अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है। अन्य लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। तब तक जाँच जारी रहेगा।”

इस घटना को लेकर भाजपा ने सीएम सिद्धारमैया की नेतृत्व वाली कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला बोला है। कर्नाटक भाजपा ने कहा, “जब से कॉन्ग्रेस ने सत्ता सँभाली है, पाक समर्थक कन्नड़ लोगों का खुलेआम अपमान कर रहे हैं। क्या यह हलाल सरकार उन्हें ‘मानसिक रूप से अस्थिर’ बताकर बचाएगी और अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए एफआईआर रद्द करेगी? या वह कम-से-कम एक बार ही सही, कभी कन्नड़ लोगों के साथ खड़ी होगी?”

SP श्रीनिवास गौड़ा ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 67 (अश्लील सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण), धारा 193 (अपनी संपत्ति पर गैरकानूनी सभाओं या दंगों को रोकने या रिपोर्ट करने में विफल रहने के लिए भूमि मालिकों या कब्जाधारियों की देयता) और भारत न्याय संहिता की धारा 356 (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु… बड़े शहर नहीं, अब छोटे कस्बे घुसपैठियों का हॉटस्पॉट: महाराष्ट्र के सांगली में पकड़े गए बांग्लादेशी ने घुसपैठ के नए ट्रेंड का किया खुलासा

बांग्लादेशी घुसपैठिए अब दिल्ली, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु छोड़ कर देश के छोटे शहरों में घुस रहे हैं। ऐसा इन शहरों में सख्ती और बढ़ती महँगाई के चलते हो रहा है। इन घुसपैठियों की मदद के लिए एक पूरा नेटवर्क सीमा पर काम कर रहा है। यह सीमा पार करवाने से लेकर फर्जी कागज बनवाने तक संभालते हैं।

यह सारे खुलासे महाराष्ट्र के सांगली में पकड़े गए एक बांग्लादेशी घुसपैठिए से हुए हैं। सांगली पुलिस ने रात को गश्त के दौरान मोहम्मद आमिर नाम के एक बांग्लादेशी घुसपैठिए को पकड़ा। उससे जब पूछताछ की गई तो उसने दावा किया कि वह दिल्ली का रहने वाला है।

यह सिद्ध करने के लिए उसने अपनी जेब से कई सरकारी दस्तावेज भी निकाल कर दिखा दिए। हालाँकि, पुलिस इनसे संतुष्ट नहीं हुई। पुलिस को उसकी बोली पर शक हुआ। जब उससे गहन पूछताछ हुई तो पता चला कि वह एक बांग्लादेशी घुसपैठिया है।

वह सांगली के अलग-अलग लॉज में फर्जी दस्तावेज के सहारे रह रहा था। उसने इन दस्तावेज पर ₹20 हजार खर्च किए थे। उसके फोन की जाँच की गई तो पता चला कि वह असल में ढाका का रहने वाला है। यह भी पता चला है कि वह बांग्लादेश की एक राजनीतिक पार्टी से जुड़ा हुआ है।

पता चला है कि वह त्रिपुरा के रास्ते बांग्लादेश से भारत में घुसा था। त्रिपुरा में घुसने के बाद वह अगरतला पहुँचा और इसके बाद वह कोलकाता आ गया। यहाँ से वह महाराष्ट्र पहुँचा था। अब इस मामले की जाँच पुलिस के साथ ही महाराष्ट्र की ATS कर रही है।

उसने ATS की पूछताछ में भी कई बड़े खुलासे किए हैं। उसने बताया है कि भारत और बांग्लादेश सीमा पर पूरा एक नेटवर्क काम कर रहा है। यह नेटवर्क लोगों को बांग्लादेश से भारत में प्रवेश करवाने, उनके फर्जी कागज बनवाने, यहाँ तक कि उन्हें भारत में काम दिलाने का भी जिम्मा लेता है।

घुसपैठिए के नए खुलासों के चलते एजेंसियाँ अब बाकी ऐसे ही मामलों का पता लगाने में जुट गई हैं। गौरतलब है कि बीते कुछ समय से भारत भर में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा अभियान चल रहा है। दिल्ली में ही हाल में 7 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया गया था।

इससे पहले बीएसएफ ने मेघायल और त्रिपुरा बॉर्डर पर कार्रवाई करते हुए 11 घुसपैठियों और 4 भारतीय सहायकों को पकड़ा था। इनमें से 7 बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं, तो 4 रोहिंग्या। इन्हें इन राज्यों के सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों से रविवार (16 मार्च 2025) को पकड़ा गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएसएफ ने इस ऑपरेशन के दौरान 187 सेकंड हैंड मोबाइल फोन भी बरामद किए थे। मोबाइल फोनों की बरामदगी त्रिपुरा के सेपाहिजला जिले से हुई है। इनसे खुलासा हुआ था कि सीमा पार करवाने वाले घुसपैठिए ₹25 हजार तक में प्रति व्यक्ति को भारत प्रवेश करवाते हैं।

लोहे की चादरों से ASI ने ढका औरंगजेब का कब्र, नागपुर में दंगा करवाने के लिए बांग्लादेश के IP एड्रेस से पोस्ट कर मुस्लिमों को उकसाया

नागपुर दंगा का बांग्लादेशी कनेक्शन सामने आया है। पुलिस को पता चला है कि बांग्लादेश के सोशल मीडिया अकाउंट नागपुर में मुस्लिमों को हिंसा करने के लिए भड़का रहे थे। पुलिस ने इस संबंध में जाँच चालू कर दी है। पुलिस ने तमाम ऐसी पोस्ट भी हटाई हैं, जिनमें आपत्तिजनक सामग्री थी। इस बीच हिंसा के मामले में 84 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

पुलिस को बांग्लादेश के कई ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट मिले हैं, जिनसे हिंसा भड़काने की धमकियाँ दी गई थीं। अभी तक 97 सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की गई है। इनमें से ज़्यादातर पोस्ट बांग्लादेशी IP एड्रेस वाले कंप्यूटर से किए गए थे।

ऐसे ही एक बांग्लादेशी IP एड्रेस से की गई पोस्ट में कहा गया था कि यह दंगा तो बस एक शुरुआत है। महाराष्ट्र साइबर सेल ने अफ़वाह फैलाने और हिंसा भड़काने के आरोप में 34 सोशल मीडिया अकाउंट के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है। पुलिस अभी तक 10 FIR दर्ज कर चुकी है।

पुलिस ने 140 ऐसी पोस्ट सोशल मीडिया पर से हटाई हैं, जिनमें दंगा भड़काने वाली बातें लिखी हैं। नागपुर दंगे के बाद पुलिस अब धरपकड़ में भी लगी है। पुलिस ने अब तक 84 लोगों को गिरफ्तार किया है। हिंसा का मास्टरमाइंड फहीम शमीम खान भी गिरफ्तार हो गया है।

गिरफ्तार होने वालों में 8 विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी शामिल हैं। हालाँकि, उन्हें जमानत मिल गई थी। गिरफ्तार किए गए 19 आरोपितों को 21 मार्च तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। बाकी भी लोगों को पुलिस गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है।

गौरतलब है कि 17 मार्च को इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने कुरान जलाने की अफवाह के नाम पर नागपुर में काफी उत्पात मचाया था। इस दौरान मुस्लिम भीड़ ने पुलिसवालों पर पथराव किया था। उनके पथराव में 30+ अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

मुस्लिमों ने एक महिला पुलिसकर्मी को भी दबोच कर उसके साथ छेड़छाड़ की थी और उनके कपड़े फाड़ने का प्रयास किया था। एक DCP पर कुल्हाड़ी से हमला हुआ था, इसमें वह गंभीर रूप से घायल हुए थे। दंगे के दौरान हिन्दुओं की दुकानों और घरों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया था। उनकी गाड़ियाँ भी जलाई गईं थी।

इस दंगे के बाद छत्रपति संभाजीनगर में औरंगजेब की कब्र पर ASI ने सुरक्षा बढ़ाई है। ASI ने बताया है कि इसके चारों तरफ टिन और तार की बाड़ लगाई गई है। अब यह कब्र पूरी तरह ढक दी गई है। पुलिस ने भी इस कब्र की सुरक्षा व्यवस्थाओं को देखा है।

4 लोगों ने किया रेप, प्राइवेट पार्ट पर चोट, शरीर से बह रहा था खून… दिशा सालियान की मौत पर दावे कई, इसलिए 5 साल बाद भी उठ रहे सवाल: अब पीड़ित पिता ने कहा- मेरी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर दिशा सालियान की मौत को 5 साल हो गए हैं। 8-9 जून 2020 की रात उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में 14वीं मंजिल से गिरकर मौत हुई थी। प्राथमिक जाँच के बाद पुलिस द्वारा इसे ‘आत्महत्या’ माना गया था, लेकिन कुछ लोगों ने इसे बाद में ‘हत्या’ करार दिया था और मामले में विस्तृत जाँच की माँग की थी। अब 2025 में ये केस दोबारा से चर्चा में है क्योंकि दिशा के पिता बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँचे हैं ये माँग लेकर कि उनकी बेटी की मौत मामले में जाँच दोबारा हो और साथ ही उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे के विरुद्ध एफआईआर की जाए।

उनका कहना है कि सुशांत सिंह राजपूत और उनकी बेटी की हत्या एक दूसरे से जुड़ी हुई है। बेटी ने सुसाइड नहीं की थी, बल्कि उसकी हत्या हुई थी। सालियान ने याचिका में सूरज पंचोली और डिनो मोर्या पर भी आरोप लगाए हैं। वहीं पुलिस को लेकर उन्होंने कहा है कि पुलिस ने उन्हें नजरबंद रखा और अपने द्वारा पेश सबूतों को सच मानने को मजबूर किया। उनका कहना है, “मैं पाँच साल तक चुप था, लेकिन अब सच्चाई सामने आनी ही चाहिए। जो भी करना पड़े, मेरी बेटी को न्याय मिलना चाहिए।”

बता दें कि 2020 के बाद दिशा सालियान का मामला समय-समय पर लोगों के बयानों के कारण गर्माता रहा है। साल 2023 में खबर आई थी दिशा सालियान की मौत की फाइल फिर से खुलेगी और एसआईटी नए सिरे से इसकी जाँच करेगी। बार-बार इस मामले के उठने के पीछे यही वजह है कि कई लोग इसे आज भी हत्या ही मानते हैं और चश्मदीद भी यही दावा करते रहे हैं कि उस दिन दिशा सालियान का रेप हुआ था। इन बयानों पर कई मीडिया रिपोर्ट पूर्व में प्रकाशित हो चुकी हैं। आइए आज उन्हीं बयानों को दोबारा से याद दिलाएँ कि किसने कब और क्या कहा।

दिशा के शरीर से बह रहा था खून – एंबुलेंस का ड्राइवर

दिशा सालियान के मृत शरीर को ले जाने के लिए बुलाई गई एंबुलेंस के ड्राइवर पंकज सैदन ने रिपब्लिक भारत के साथ बातचीत में कहा था, “दिशा सालियान के पूरे शरीर पर घाव थे। उनकी ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच का छेद था। उनकी आँख, नाक, दाँत से खून बह रहा था। उनका हाथ भी मुड़ गया था।”

रेप हुआ था- चश्मदीद का दावा

एक चश्मदीद, जो एक एक्टर भी हैं उन्होंने न्यूजनेशन से बातचीत में दावा किया था कि दिशा सालियान का उस रात रेप हुआ था। उन्होंने बताया था कि घटना वाली रात पार्टी चल रही थी जिसमें म्यूजिक काफी तेज था, इसी कारण दिशा सालियान की चीख-पुकार उसमें दब गई थी।

प्राइवेट पार्ट में थे चोट के निशान

इसी प्रकार नारायण राणे ने भी इस संबंध में एक बयान दिया था। उन्होंने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दावा किया था कि दिशा की हत्या हुई थी। उन्होंने एक रिपोर्ट का भी उल्लेख किया था जिसके हवाले से वो कह रहे थे कि दिशा के प्राइवेट पार्ट में चोट लगी थी।

मौत से पहले की वीडियो देख उठे सवाल

भाजपा नेता नितेश राणे ने तो इस मामले में आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट तक कराने की माँग की थी। वहीं दिशा के मंगेतर रोहन राय से अपील की थी कि वो सामने आकर पूरा सच पुलिस को बताएँ। ये भी मालूम हो कि जिस रात दिशा सालियान की मौत हुई।

उसी रात की एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब प्रसारित हुई थी। इसमें दिशा हँसते-मुस्कुराते डांस करती दिख रही थीं। लोगों ने सवाल किया था कि आखिर दिशा ने क्यों सुसाइड किया होगा, जब उनके चेहरे पर ऐसी कोई चिंता दिख ही नहीं रही।

केवल गिरने की वजह से नहीं थे शरीर पर चोट के निशान- फॉरेंसिक विशेषज्ञ

वहीं रिपब्लिक टीवी पर फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने भी कहा था कि दिशा के शव पर दो तरह के चोट के निशान थे। एक गिरने से पहले और दूसरा गिरने के बाद के। डॉ दिनेश राव ने कहा था, “दिशा के शव पर चोट के पैटर्न को देखकर मैं इसमें एक अहम जानकारी जोड़ना चाहता हूँ। मैंने निश्चित तौर पर दो तरह की चोट के निशान देखे थे। एक चोट ऊँचाई से गिरने की वजह से आई थी और दूसरी गिरने से पहले की है, जिसकी जाँच होनी चाहिए।”

विशेषज्ञ ने यह भी कहा था कि या तो दिशा के साथ मारपीट की गई या उन्हें प्रताड़ित किया गया था। या यह भी ही सकता है कि उन्होंने हमले से बचने की कोशिश की हो जो उनकी मौत की वजह बन गई हो।

शायद सुशांत की मौत का सच भी आए सामने- सुशांत के पिता

गौरतलब है कि ये सारे बयान उस समय के हैं जब दिशा सालियान की मौत का मामला गरमाया हुआ था और ये कहा जा रहा था कि दिशा की मौत और सुशांत की मौत में कुछ कनेक्शन जरूर है। आज भी इस पर सवाल खड़े होते ही हैं। ताजा याचिका को लेकर सुशांत सिंह राजपूत के पिता से भी प्रतिक्रिया ली गई।

इस पर उन्होंने कहा, “पहले दिशा सालियान के पिता ने कहा था वे कुछ नहीं जानते हैं आत्महत्या ही होगी। बाद में किस बात पर वे कह रह हे हैं कि ये आत्महत्या नहीं हत्या है ये मुझे नहीं पता… उन्होंने जो किया है ठीक किया है। इससे सुशांत का केस भी साफ हो जाएगा कि क्या हुआ था। पहले की सरकार और अब की सरकार में फर्क है। वर्तमान मुख्यमंत्री अपने स्तर पर जो भी करेंगे सही करेंगे।”

पोर्न देखती है पत्नी, घर का काम नहीं करती, मोबाइल में रहती है बिजी… हाई कोर्ट ने नहीं माना तलाक का आधार, कहा- खुद को ‘संतुष्ट’ करना पति के साथ क्रूरता नहीं

मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी विवाहित महिला का पोर्न देखना अपराध नहीं माना जा सकता और इस आधार पर तलाक नहीं हो सकता। हाई कोर्ट ने इस तर्क के आधार पर तलाक माँगने वाले पति को कोई राहत देने से इनकार किया है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला का खुद को यौन सुख देना भी कोई अपराध नहीं है।

क्या था मामला?

यह सारी बातें मद्रास हाई कोर्ट ने तलाक के एक मामले में याचिका की सुनवाई में कही हैं। दरअसल, तमिलनाडु के करूर के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से तलाक की माँग करते हुए एक याचिका डाली थी। दोनों की शादी 2018 में हुई थी और 2020 से दोनों अलग-अलग रहते थे। यह दोनों व्यक्तियों की दूसरी शादी थी।

बात बिगड़ने के चलते 2021 में दोनों का मामला कोर्ट में चला गया। महिला ने कोर्ट से उसके वैवाहिक स्थिति को बहाल करने की माँग की थी। वहीं उसके पति ने कहा था कि वह तलाक चाहता है। हालाँकि, निचली अदालत ने तलाक देने से मना कर दिया और पत्नी की याचिका को सही माना।

इसका विरोध करते हुए पति ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। मद्रास हाई कोर्ट से पति ने माँग की कि उसको तलाक दिया जाए क्योंकि उसकी पत्नी उसके साथ क्रूरता करती है। उसने क्रूरता सिद्ध करने के लिए कई आरोप भी पत्नी पर जड़े।

क्या थे महिला पर आरोप?

पति ने अपनी याचिका में दावा किया कि उसकी पत्नी को सेक्सुअल बीमारियाँ हैं। उसने दावा किया कि यह बीमारियाँ ऐसी हैं जो सम्बन्ध बनाने से उसे भी हो सकती हैं। उसने एक आयुर्वेदिक सेंटर के कुछ दस्तावेज भी अपनी पत्नी के संबंध में दिखाए।

इसके अलावा पति ने दावा किया कि उसकी पत्नी पोर्न देखती है। पति ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी पत्नी ‘हस्तमैथुन’ में लिप्त रहती है। इसके अलावा उसने पत्नी पर घर का काम ना करने, सास-ससुर की सेवा ना करने, मोबाइल पर देर तक बात करने और पैसा अधिक खर्च करने का आरोप भी लगाया। पति ने इन सभी को क्रूरता बताया और तलाक की माँग की।

क्या बोला मद्रास हाई कोर्ट?

मद्रास हाई कोर्ट में यह मामला जस्टिस स्वामीनाथन और जस्टिस पूर्णिमा की बेंच ने सुना। मद्रास हाई कोर्ट ने पति का सेक्सुअल बीमारियों का आरोप मानने से इनकार कर दिया और कहा कि इस संबंध में कोई भी पक्का सबूत नहीं मिला है, ऐसे में इसे नहीं माना जा सकता।

वहीं हाई कोर्ट ने पोर्न देखने और इसकी आदत लगने को लेकर भी टिप्पणियाँ की। हाई कोर्ट ने कह़ा कि निजी स्थान पर पोर्न देखना (प्रतिबंधित के अलावा) अपराध नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने इसे क्रूरता मानने से मना किया और कहा कि यह तलाक का कोई आधार नहीं बन सकता।

वहीं ‘हस्तमैथुन’ के मुद्दे पर भी हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने कहा, “आरोप यह है कि महिला हस्तमैथुन में लिप्त थी। किसी महिला से इस आरोप का जवाब देने को कह़ा जाना ही उसकी यौन स्वायत्तता पर हमला है। अगर शादी के बाद कोई महिला विवाह से अलग संबंध बनाती है तो यह तलाक का आधार माना जा सकता है।”

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया, “लेकिन, खुद को संतुष्ट करना विवाह को खत्म किए जाने का कारण नहीं माना जा सकता।” हाई कोर्ट ने इसके अलावा पति के परिजनों के प्रति क्रूरता के संबंध में भी सबूत नहीं पाए, ऐसे में यह भी सिद्ध नहीं हुआ।

हाई कोर्ट ने कहा, “यदि पति द्वारा लगाए गए आरोप सही होते, तो यह असंभव है कि वे करीब 2 साल तक साथ रहते। पति ने यह दिखाने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया है कि पत्नी घर के काम करने में विफल रही। सभी सबूत की जाँच के बाद निचली अदालत इस निष्कर्ष पर पहुँची कि पति ने आरोप साबित नहीं किए।”

हाई कोर्ट ने यह फैसला बरकरार रखने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने कहा, “रिकॉर्ड पर मौजूद अभी सबूत फिर से जाँचने के बाद , हम निचली अदालत के फैसले के खिलाफ कोई नजरिया नहीं अपना सकते। हम निचली अदालत द्वारा दिए गए आदेश की पुष्टि करते हैं।”

स्तन दबाना, पायजामे का नाड़ा खींचना… रेप का प्रयास नहीं: इलाहाबाद HC, 11 साल की बच्ची को पुलिया के नीचे खींचकर ले गए थे आरोपित; राहगीरों ने बचाया था

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कासगंज में एक नाबालिग लड़की से हुए यौन उत्पीड़न के एक मामले में आरोपितों को राहत देते हुए एक चौंकाने वाली टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि किसी लड़की के स्तन को पकड़ना, उसके पायजामे के नाड़े को तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचना… रेप या रेप के प्रयास वाले अपराध में नहीं आता है।

यह निर्णय जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ द्वारा दिया गया। हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बलात्कार के प्रयास का आरोप नहीं बनता क्योंकि अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होता है कि आरोपितों की कार्रवाई अपराध करने की तैयारी से आगे बढ़ चुकी थी, जो कि साबित नहीं हुआ।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बलात्कार के प्रयास और अपराध की तैयारी के बीच अंतर को सही तरीके से समझना चाहिए। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को संशोधित करते हुए निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह आरोपितों के खिलाफ धारा 376(बलात्कार) के बजाय धारा 354-बी (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन हमला) के तहत नया आदेश जारी करें।

बता दें कि यह मामला 11 वर्षीय पीड़िता से संबंधित है, जिसके साथ 10 नवंबर 2021 को आरोपित पवन, आकाश और अशोक ने पुलिया के पास खींचकर यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की थी। इनमें एक ने उसके स्तन दबाए थे और एक ने पीड़िता के पायजामे का नाड़ा तोड़ दिया था। जब शोर बढ़ा तो इस मामले में राहगीरों ने हस्तक्षेप किया और आरोपित वहाँ से फरार हो गए। बाद में मामला पॉक्सो की धाराओं में दर्ज हुआ और आरोपित राहत पाने हाई कोर्ट पहुँचे। यहाँ इन्होंने यही तर्क दिया कि उन्होंने रेप नहीं किया। कोर्ट ने भी इनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते किया और यह निर्णय सुनाया।

कौन है जामिया से पढ़ने वाला बद्र खान, आतंकी संगठन हमास से क्या हैं रिश्ते, अमेरिका ने क्यों रद्द किया वीजा: जानिए सब कुछ

अमेरिका में पढ़ने वाले एक भारतीय छात्र बद्र खान सूरी का वीजा खत्म कर दिया गया है। उस पर इस्लामी आतंकी संगठन हमास से जुड़े होने का आरोप है। उसे गिरफ्तार भी किया गया है। अब ट्रम्प सरकार उसके ऊपर आगे की कार्रवाई की तैयारी में है। इस बीच उसके वकील उसे बचाने में लग गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सूरी को वर्जिनिया राज्य में सोमवार (17 मार्च, 2025) को हिरासत में लिया गया। उसके घर के बाहर एजेंसियाँ पहुँची और अपने साथ ले गईं। उसे वर्तमान में एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है।

सूरी का अमेरिकी वीजा भी सरकार ने खत्म कर दिया है। बद्र खान सूरी ने सरकार से खुद को छोड़े जाने की याचिका भी लगाई थी। हालाँकि, ट्रम्प सरकार इस मामले में सख्त है और उसने एक विशेष कानून का इस्तेमाल करके उसे निर्वासित किए जाने का आदेश जारी किया है।

बद्र खान सूरी अमेरिका के जार्जटाउन विश्वविद्यालय में रिसर्चर है। वह यहाँ पढ़ाता भी था। उसने एक अमेरिकी महिला से निकाह किया है। वह यहाँ के अल वलीद बिन तलाल मुस्लिम-ईसाई सेंटर में शोधार्थी था। अमेरिका में वीजा, पासपोर्ट और आंतरिक सुरक्षा देखने वाले डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्युरिटी (DHS) ने बद्र खान पर कार्रवाई चालू की है।

DHS ने अपने बयान में कहा, “बद्र खान सूरी जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में एक छात्र था जो हमास का प्रचार कर रहा था और सोशल मीडिया पर यहूदी विरोधी भावना को बढ़ा रहा था। सूरी के हमास के एक आतंकी से संबंध हैं, यह आतंकी हमास में सलाहकार है।”

DHS ने बताया, “विदेश मंत्री ने 15 मार्च, 2025 को एक निर्णय जारी किया है कि सूरी की अमेरिका में हरकतों के चलते उसे INA धारा 237(a)(4) के तहत निर्वासित किया जा सकता है।” बद्र खान सूरी के विषय में उसके जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय ने भी एक बयान जारी किया है। विश्वविद्यालय ने कहा कि उन्हें सूरी पर लगे आरोपों की जानकारी नहीं है।

सूरी के विषय में और भी जानकारी निकली है। पता चला है कि वह 2020 तक जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली में पढ़ता था। सूरी हमास के समर्थन के चलते अमेरिका की कार्रवाई का सामने करने वाला दूसरा भारतीय छात्र है।

इससे कुछ ही दिन पहले भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन पर भी यही आरोप लगे थे। हालाँकि, उसे गिरफ्तार नहीं किया गया था। रंजनी श्रीनिवासन इसके बाद चुपके से खुद ही अमेरिका से निकल कर चली गई थी। उसने DHS के एक एप का इस्तेमाल करके खुद को निर्वासित किया था। इसके बाद वह कनाडा गई थी।

रंजनी श्रीनिवासन कोलंबिया विश्वविद्यालय में शहरी नियोजन में डॉक्टरेट की छात्रा के रूप में F-1 छात्र वीज़ा पर अमेरिका गई थी। उसके ऐसे कुछ निबन्ध सामने आए थे जहाँ वह कथित ब्राम्हणवादी मानसिकता को कोस रही है। रंजनी श्रीवास्तव अमेरिका जाने से पहले भारत में अहमदबाद के भीतर CEPT विश्वविद्यालय में पढ़ती थी। 

दिशा सालियान केस में आदित्य ठाकरे पर हो FIR, CBI करे जाँच: पीड़ित पिता की हाई कोर्ट से गुहार, कहा- मेरी बेटी के शरीर पर नहीं थे चोट के निशान

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान का केस एक बार दोबारा खुलने को है। खबर आई है कि उनके पिता सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत की दोबारा से जाँच कराने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी माँग है कि शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो और पूरा मामला सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने कहा कि वे अभी इस मामले में याचिका दायर करने की प्रक्रिया में हैं और 20 मार्च को उच्च न्यायालय रजिस्ट्री विभाग में केस दर्ज कराएँगे। याचिका में आरोप है कि दिशा सालियान की रेप के बाद हत्या हुई थी और बाद में कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने के लिए इस मामले में साजिश रची गई।

वहीं सतीश सालियान ने भी मीडिया से बात करते हुए कहा है कि उनकी बेटी के शव पर कोई चोट के निशान नहीं थे। उसने आत्महत्या नहीं की थी। उसकी मौत और बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह की मौत के तार जुड़े थे।

शिवसेना प्रवक्ता ने उठाए सवाल

सतीश सालियान की याचिका की बात सामने आने पर शिवसेना की प्रवक्ता किशोरी पेडनेकर ने इस पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि ये ताजा याचिका डाले जाने के पीछे जरूर कोई न कोई है और इसके पीछे साजिश जरूर है, वरना चार साल बाद मामला कैसे स्पॉटलाइट में आ सकता है? सीआईडी ने जाँच की है और इस मामले पर पहले से एक एसआईटी टीम काम कर रही है।

वहीं, भाजपा नेता नीतेश राणे ने इस नए अपडेट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आदित्य ठाकरे को मामले में सामने आकर सच बोलना चाहिए और विधायक पद से इस्तीफा देकर, जाँच करनी चाहिए।

भाजपा ने माँगा आदित्य ठाकरे का इस्तीफा

बता दें कि नीतेश राणे वहीं नेता हैं जिन्होंने दावा किया था कि दिशा सालियान की हत्या हुई है और सीसीटीवी फुटेज गायब की जा चुकी है। वहीं महाराष्ट्र के मंत्री योगेश कदम का कहना है कि अगर दिशा सालियान के पिता के पास कोई सबूत हैं तो उन्हें गृह विभाग को देने चाहिए। जाँच में कोई राजनीति नहीं की जाएगी, जो निर्देश हाईकोर्ट देगा वही माना जाएगा।

दिशा सालियान ‘हत्या’ या ‘आत्महत्या’

गौरतलब है कि बॉलीवुड अभिनेता दिशा सालियान की मृत्यु मलाड में एक इमारत से गिरने के कारण हुई थी। प्रारंभिक जाँच में, पुलिस ने इसे आत्महत्या माना था। हालाँकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में चोट और अन्य अप्राकृतिक चोटों का उल्लेख किया गया था, जिससे यह मामला संदिग्ध बन गया। दिशा की मौत के कुछ दिन बाद सुशांत सिंह राजपूत का शव भी उनके फ्लैट में पाया गया था, जिसने इस मामले पर और प्रश्न खड़े कर दिए।

शंभू बॉर्डर से भगाए गए ‘आंदोलनकारी किसान’, पुलिस ने टेंट पर चलाया बुलडोजर : दल्लेवाल-पंढेर हिरासत में, 400 दिन बाद खुलेगी हरियाणा-पंजाब की सड़क

हरियाणा और पंजाब की सीमा पर एक वर्ष से अधिक समय से बैठे आंदोलनकारी किसान आखिरकार भगा दिए गए। पंजाब की पुलिस ने शंभू और खन्नौरी बॉर्डर पर बैठे किसानों को हटा दिया है। पुलिस ने किसान नेताओं को भी गिरफ्तार कर लिया है। जल्द ही पंजाब-हरियाणा बॉर्डर को खोल दिया जाएगा।

बुधवार (19 मार्च, 2025) शाम को पंजाब पुलिस शंभू और खन्नौरी सीमा पहुँची। यहाँ उसने धरने पर बैठने वाले अधिकांश किसानों को हिरासत में ले लिया। इसके पहले पुलिस ने यहाँ बिजली सप्लाई रोक दी थी। पुलिस ने दोनों सीमाओं पर 200 से अधिक किसानों को हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने किसानों को हिरासत में लेने से पहले उन्हें बसों में बैठ कर वापस चले जाने को कहा। हालाँकि, किसान नहीं माने। DIG मनदीप सिंह ने कहा, “हम 3,000 से ज़्यादा है और तुमलोग सिर्फ कुछ 100 हैं। हम साइट खाली करके रहेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए। आपके नेताओं को चंडीगढ़ में पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है… हम बल नहीं प्रयोग करना चाहते।”

पंजाब पुलिस ने किसान नेता सरवन सिंह पंढेर और जगजीत सिंह दल्लेवाल को भी हिरासत में लिया है। यह दोनों नेता ही इस धरने की अगुवाई कर रहे थे। पुलिस ने धरना देने वाले किसानों को गिरफ्तार करने के बाद सीमा पर बनाई गई झोपड़ियों और टेंट पर बुलडोजर चला दिया।

पंजाब पुलिस ने इन सीमाओं पर बनाया गया आंदोलन का सारा इन्फ्रा खत्म कर दिया। पंजाब पुलिस के DIG हरमनबीर गिल ने बताया कि ये आंदोलन अवैध था और पंजाब सरकार ने लगातार इनका सहयोग किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के चलते व्यापारियों और आम लोगों को परेशानी हो रही थी।

उन्होंने कहा कि किसानों को पहले इस बात के लिए मनाया गया कि वह प्रदर्शन खुद ही खत्म कर लें लेकिन वह नहीं माने। DIG गिल ने बताया कि इन गाँव के आसपास रहने वाले जमींदारों ने खुद ही पुलिस को ट्रैक्टर और बाकी सामान दिया है, ताकि किसानों का इन्फ्रा तोड़ा जा सके।

पंजाब के कारोबारियों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। कयास लगाए गए हैं कि AAP सरकार पर राज्य में लगातार दबाव बढ़ता जा रहा था, जिसके चलते यह एक्शन लिया गया। बीते कुछ दिनों में भगवंत मान सरकार राज्य में रोज होने वाले धरना प्रदर्शन को लेकर सख्त हुई है।

गौरतलब है कि यह आंदोलनकारी किसान 13 फरवरी, 2024 से ही सीमा पर कब्जा करके बैठे थे। इसके चलते दिल्ली-हरियाणा की तरफ से पंजाब या हिमाचल प्रदेश जाने वाले वाहनों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता था। हजारों करोड़ के कारोबार का नुकसान हो चुका था। लगभग 400 दिनों के बाद यह आंदोलन खत्म कर दिया गया।

आशा जताई जा रही है कि अब इन दोनों सीमाओं पर हरियाणा की तरफ से लगाए गए बैरिकेड तोड़ दिए जाएँगे और कुछ ही दिनों में यह रास्ता फिर से बहाल हो जाएगा।

संभल ही नहीं… जहाँ-जहाँ डाला डेरा, वहाँ-वहाँ मुस्लिम लगाते हैं ‘मेला’: हिंदू घृणा से सैयद सालार बना ‘गाजी’, जानिए क्यों हो रही बहराइच के ‘जेठा मेला’ को भी बंद करने की माँग

उत्तर प्रदेश के संभल में पिछले 800 सालों से विदेशी आक्रांता सालार मसूद के कब्र पर आयोजित होने वाले ‘नेजा मेले’ की अनुमति नहीं दी गई है। सालार मसूद क्रूर आक्रांता था, जिसने बड़े पैमाने पर हिंदुओं का नरसंहार किया और मंदिरों को ध्वस्त किया। इसी कारण उसे ‘गाजी’ (इस्लाम के लिए काफिरों से लड़ने वाला) की उपाधि मिली थी। संभल के बाद सालार के लिए बहराइच में लगने वाले जेठा मेला और बाराबंकी में उसके बाप की कब्र पर लगने वाले मेले पर रोक की माँग उठने लगी है।

संभल में सालार मसूद गाजी के कब्र पर मेला (उर्स) के इजाजत देने से इनकार करते हुए ASP श्रीश चन्द्र दीक्षित ने कहा कि किसी लुटेरे आक्रान्ता की याद में मेला आयोजित नहीं किया जाएगा। यह अपराध है। उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा करने का प्रयास करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि वह महमूद गजनवी का सेनापति था, उसने सोमनाथ को लूटा था।

ASP ने कहा, “किसी भी लुटेरे के प्रति आप कहेंगे कि यह बहुत अच्छा है तो यह बिलकुल नहीं माना जाएगा। अगर आप लोग अभी तक कर रहे थे तो यह कुरीति थी और आप अज्ञानता में यह कर रहे थे। अगर जानबूझ कर रहे थे तो आप देशद्रोही थे।” उन्होंने कहा कि उसने इस देश के प्रति अपराध किया था। लुटेरे की याद में कोई नेजा (झंडा-निशान) नहीं गड़ेगा। अगर ये झंडा गड़ गया तो वह देशद्रोह है।

सालार मसूद गाजी भारत में आक्रमण करने के दौरान जहाँ-जहाँ डेरा डाला था, वहाँ-वहाँ आज मुस्लिमों द्वारा उर्स मनाया जाता है। इनमें मेरठ का नौचंदी मेला, पुरनपुर (अमरोहा) का नेजा मेला, थमला और संभल के मेले प्रमुख हैं। इसके अलावा, कई अन्य स्थानों पर आज भी उर्स भी मनाए जाते हैं।

सालार मसूद गाजी का बाराबंकी में है मजार

बाराबंकी में सालार मसूद गाजी के अब्बू सैयद सालार साहू गाजी उर्फ बूढ़े बाबा की दरगाह है। यहाँ भी यह सालाना उर्स हर साल के ज्येष्ठ माह (जेठ महीना) के पहले शनिवार को मनाया जाता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यहाँ रहने वाले मोहम्मद सिद्दीकी और अन्य कार्यकर्ताओं ने बताया कि बूढ़े बाबा अफगानिस्तान का रहने वाले था। वह अफगानिस्तान के गजनी के शासक महमूद गजनवी का बहनोई था।

कहा जाता है कि 1400 साल पहले वह अपनी बीवी और बेटों के साथ अजमेर शरीफ आ गया था। यहीं पर सालार मसूद गाजी का जन्म हुआ। कहा जाता है कि बच्चे के जन्म के बाद उसकी बीवी वापस अफगानिस्तान चली गई। वहीं, अबू सैयद सालार साहू गाजी बूढ़े बाबा अपने बेटे सैयद सालार मसूद गाजी के साथ बाराबंकी के सतरिख आ गया। यहाँ पर अबू सैयद मर गया और दफना दिया गया।

इसे ही आज बूढ़े बाबा की दरगाह कहा जाता है। समय-समय पर बूढ़े बाबा के कब्र को भी मजार का रूप दे दिया गया इसके बाद उसे दरगाह में तब्दील कर दिया गया। उसे गाजी के बाद बूढ़ा बाबा नाम के संत के रूप में प्रचारित किया गया। इसके कारण बड़ी संख्या में हिंदू भी इस मजार पर आते हैं। इन हिंदुओं की इन आक्रांताओं के इतिहास के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

कौन था सैयद सालार मसूद गाजी

सैयद सालार मसूद गाजी का जन्म 11वीं सदी में सन 1014 ईस्वी में राजस्थान के अजमेर में हुआ था। हालाँकि, सालार के जन्म को लेकर भी संशय है और इतिहासकारों में एकमत नहीं है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि सालार का जन्म अफगानिस्तान में हुआ था और वह महमूद गजनवी के साथ भारत आया था। खैर, उसका जन्म जहाँ कहीं भी हुआ हो, लेकिन वह बेहद ही क्रूर और हिंदुओं से नफरत करने वाला था।

यह प्रमाणित सत्य है कि अफगानिस्तान के गजनी के शासक महमूद गजनवी का भाँजा था। इसके साथ ही वह गजनवी के सेना का सेनापति भी था। यह वहीं गजनवी है, जिसने सबसे पहले सन 1001 में भारत पर हमला किया था। इसके बाद उसने एक-के-बाद एक करके लगातार 17 बार हमले किए और भारत के सोमनाथ मंदिर सहित भारत के कई मंदिरों को लूटा और उन्हें ध्वस्त कर दिया था।

सन 1930 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से छपी ‘द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ सुल्तान महमूद ऑफ गाजना’ नाम की पुस्तक में इतिहासकार मोहम्मद नाजिम ने इसके बारे में बताया है। उन्होंने लिखा है कि वह गजनी के नेतृत्व में सन 1026 ईस्वी में सैयद सालार मसूद गाजी ने सबसे बड़ा हमला सोमनाथ मंदिर पर किया था। रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों, रियासतों और हिंदुओं का नरसंहार करता आया।

‘अनवार-ए-मसऊदी’ नाम की अपनी किताब में बहराइच के रहने वाले और इतिहासकार मौलाना मोहम्मद अली मसऊदी ने लिखा है कि सोमनाथ और आसपास की रियासतों पर लूटने-पाटने केबाद सैयद सालार गाजी आगे बढ़ा। वह 1030 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के सतरिख पहुँचा। वहाँ से वह श्रावस्ती पहुँचा और वहाँ के राजा सुहेलदेव से उसका मुकाबला हुआ।

सन 1034 ईस्वी में बहराइच जिला मुख्यालय के पास सालार मसूद का मुकाबला महाराजा सुहेलदेव से हुआ। कहा जाता है कि महाराजा सुहेलदेव ने 21 अन्य छोटे-बड़े राजाओं के साथ मिलकर उसका सामना किया और आखिरकार इस गाजी का उपाधि धारण करने वाले इस आक्रांता को मार गिराया। इसके बाद स्थानीय मुस्लिमों ने उसके शव को दफना दिया।

पृथ्वीराज चौहान के साथ संभल में युद्ध

कहा जाता है कि दिल्ली के अंतिम हिंदू शासक पृथ्वीराज चौहान का का भी सालार मसूद गाजी के साथ युद्ध हुआ था। संभल जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार, दोनों के बीच दो युद्ध हुए। इसमें पहले युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने सालार गाजी को करारी शिकस्त दी। वहीं, सालार के साथ दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की हार की बात कही जाती है। हालाँकि, ऐतिहासिक रूप से इसके साक्ष्य नहीं हैं।

इतिहासकार बृजेंद्र मोहन शंखधर की किताब ‘संभल: अ हिस्टोरिकल सर्वे’ नाम की अपनी किताब में इसका जिक्र किया है। इसमें उन्होंने लिखा पृथ्वीराज चौहान के संभल में रहने के दौरान एक वाकया हुआ था। किताब के अनुसार, “यहाँ सैयद पचासे नाम का एक मुस्लिम व्यक्ति रहता था। इसकी कब्र फिलहाल मोहल्ला नाला कुस्साबान में है। वह सँभल के किले में रहता था। उसकी एक अत्यंत सुंदर बेटी थी।”

किताब में आगे लिखा है कि एक दिन पृथ्वीराज चौहान के घराने का एक राजकुमार ने उस लड़की को देखा और उसके प्रति आकर्षित हो गया। उसकी बेटी भी राजकुमार से आकर्षित हो गई। इससे सैयद पचासे गुस्सा हो गया और गजनी जाकर महमूद गजनवी से सारी बात बताई। इसके बाद महमूद गजनवी ने अपनी बहन के बेटे सैयद सालार मसूद गाजी के साथ एक विशाल सेना लेकर निकला।

वह सिंध को पारकर मुल्तान, मेरठ और पुरनपुर (अमरोहा) होते हुए संभल पहुँचा। यहाँ पर युद्ध में दोनों ओर से हजारों सैनिक मारे गए। इसमें पृथ्वीराज चौहान के पुत्र भी मारे गए। बाद में सालार ने संभल के किले पर कब्जा कर लिया गया। यहाँ से वह बहराइच भी गया और वहाँ मारा गया।

हालाँकि, इतिहासकारों से लेकर सत्यापित ग्रंथों में इसे एक लोककथा माना जाता है, क्योंकि पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1166 ईस्वी में माना जाता है, जबकि मृत्यु मोहम्मद गोरी के साथ युद्ध में 1192 में हुई थी। वहीं, सालार मसूद ने सन 1026 में 16 साल की अवस्था में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। इस तरह, दोनों में 166 साल का अंतर है।

सैयद सालार मसूद गाजी की कब्र

इसके बाद जिला मुख्यालय के पास पहने वाली नदी के पास चित्तौरा झील के किनारे उसे दफना दिया गया। यह भी कहा जाता है कि जिस जगह पर सालार मसूद को दफनाया गया, वहाँ बालार्क ऋषि का आश्रम था। उस आश्रम में सूर्यकुण्ड नाम का एक कुंड भी थी। बहराइच जिला को वेदों में गंधर्व वन बताया गया है।

बीतते के साथ, उस कब्र को मजार का रूप दे दिया गया। सालार गाजी की मौत के 200 वर्षों के बाद सन 1250 में दिल्ली का मुगल शासक नसीरुद्दीन महमूद ने कब्र को मकबरा का रूप दे दिया। आगे चलकर एक और मुगल शासक फिरोजशाह तुगलक ने इस मकबरे के बगल में कई गुंबदों का निर्माण करा दिया।

वहीं पर अब्दी गेट भी लगवाए। यही अब्दी गेट आगे चलकर सालार मसूद गाजी की दरगाह के नाम पर विख्यात हुआ। चूँकि सालार मसूद को मुस्लिम गाजी मानते थे। इसलिए मुस्लिम उसके कब्र पर सालना उर्स का आयोजन करने लगे और उसे संत ‘बाले मियाँ’ और ‘हठीला’ कहकर प्रचारित करने लगे।

संभल और बहराइच की ओर बढ़ते समय मुस्लिम आक्रांता सालार मसूद गाजी और उसके सैनिकों ने जहाँ-जहाँ डेरा डाला था, वहाँ-वहाँ आज भी मेले आयोजित किए जाते हैं। इनमें मेरठ का नौचंदी मेला, अमरोहा का पुरनपुर का नेजा मेला, थमला का मेला, संभल का मेला और बहराइच का मेला प्रमुख है। इन सभी स्थानों पर उर्स मनाए जाते हैं।

गाजी सैयद सालार मसूद का इतिहास: इस्लामी आक्रांता, जिसे दिखाया गया संत

इन आक्रांताओं की मौत के बाद उसे दरगाह का रूप दे दिया गया। इसके बाद इन्हें संत के रूप में नाम बदलकर प्रसारित किया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में हिंदू भी इन मजारों पर आने लगे और लाखों-करोड़ों रुपए की कमाई इन दरगाह समितियों को होने लगी। इसके लिए की तरह के अफवाह एवं भ्रांतियाँ फैलाई गईं।

कहा जाता है कि सालार मसूद ने ज़ुहरा बीबी नाम की एक लड़की से शादी की थी। उसने अपने चमत्कार से उस लड़की का अंधापन ठीक कर दिया था। इसके बाद उससे निकाह कर लिया था। इतिहासकार एना सुवोरोवा ने तो गाजी मियाँ कहलाने वाले सालार मसूद गाजी की तुलना भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम तक से कर दी है। साथ ही यह भी कहा कि हिन्दू उन्हें इसी रूप में देखते थे।

इसी तरह का चमत्कार सैयद सालार मसूद गाजी के अब्बू अबू सैयद सालार साहू गाजी को लेकर प्रसारित किया गया। उन्हें बूढ़े बाबा के नाम से प्रसारित किया गया और उनके चमत्कारिक किस्से की बात कही जाने लगी। हिंदुओं को तो ये भी नहीं पता कि ये भारत में आक्रमण करने वाले थे और मूर्तिपूजा एवं मंदिरों के सख्त विरोधी थे।

आज हालात ऐसे हैं कि उर्स लगने वाले इन सभी जगहों पर भारी संख्या में हिंदू आते हैं। ये राज्य के अलग-अलग इलाकों से आते हैं और मन्नत मानते हैं। मन्नत पूरा होने के बाद ये यहाँ फिर आते हैं। इस तरह आक्रांता को संत के रूप में प्रसारित करके उन्हें अवतार घोषित करने की कोशिश की गई, जो अब तक सफल भी रही।