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सुरेश रैना के रिश्तेदारों के मर्डर केस में सावन, मुहब्बत और शाहरुख खान गिरफ्तार: 11 आरोपित अब भी फरार

क्रिकेटर सुरेश रैना के रिश्तेदारों के यहाँ की गई चोरी और कत्ल के मामले में पठानकोट पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बताया है कि उस गैंग के 3 मेंबर्स को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम सावन, मुहब्बत और शाहरुख खान हैं।

पंजाब पुलिस के महानिदेशक दिनकर गुप्ता ने कहा कि पकड़े गए तीनों आरोपित लुटेरों और अपराधियों के एक अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा थे। हालाँकि इस मामले में अभी 11 और आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पंजाब पुलिस ने कहा बाकी आरोपितों की तलाश जारी है।

पुलिस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, “पाँचों आरोपित छत की तरफ से घर में गए, जहाँ उन्होंने 3 लोगों को चटाई पर सोते हुए देखा। इन तीनों पर हमला करने के बाद वो और अंदर गए। इसके बाद दो लोगों पर हमला किया। हमले के बाद पैसा, जेवरात लूटकर वहाँ से फरार हो गए।”

रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब पुलिस की विशेष जाँच टीम (SIT) ने मामले से जुड़े 24 संदिग्धों को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया। एसआईटी पंजाब जाँच के लिए चिरवा में डेरा डाले हुए थी। झुंझुनू पुलिस ने उन्हें सुविधा प्रदान की थी।

झुंझुनू के एसपी जगदीश चंद्र शर्मा ने कहा था, “पंजाब पुलिस की एसआईटी, जो पिछले तीन दिनों से चिरवा में डेरा डाले हुए है, को झुंझुनू पुलिस की सुविधा दी गई है। पठानकोट एसएसपी के अनुरोध पर, हमने उन्हें तीन अलग-अलग टीमें और अन्य संसाधन दिए हैं। अब तक, उन्होंने लूट और हत्या के मामलों की जाँच के लिए 24 लोगों को हिरासत में लिया है। टीम अभी भी हमारे साथ है और वे हत्या के रहस्य को सुलझाने के लिए और लोगों की तलाश कर रहे हैं।”

बता दें कि 19 अगस्त को लूट और हमले की वारदात में रैना के फूफा अशोक कुमार और फुफेरे भाई कौशल की मौत हो गई थी। उनकी बुआ आशा रानी निजी अस्पताल में कोमा में हैं। उनकी बुआ आशा देवी और चचेरे भाई आपिन कुमार हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती कराया गया था। अशोक कुमार की माँ, सत्य देवी को भर्ती होने के कुछ समय बाद ही रिलीज कर दिया गया था, लेकिन उन्हें मानसिक आघात लगा है। 

क्रिकेटर सुरैश सेना अपने रिश्तेदारों की हत्या के बाद बुधवार (सितंबर 16, 2020) को पहली बार पठानकोट के गाँव थरियाल पहुँचे थे। उन्होंने परिवार को सांत्वना दी। अगस्त में हुई घटना के बाद, रैना ने मामले में जाँच शुरू करने के लिए सीएम सिंह को ट्वीट किया था। सिंह ने घटना के बारे में पता चलने के बाद डीजीपी को एसआईटी बनाने का आदेश दिया।

370 हटाने, राम मंदिर निर्माण के फैसले को हथियार की तरह इस्तेमाल कर लोगों को दंगे के लिए बरगलाया गया: चार्जशीट दाखिल

दिल्ली पुलिस ने आज दिल्ली कोर्ट में दिल्ली दंगों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में अबतक 15 लोगों का नाम सामने आया है। जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम शामिल नहीं हैं। हालाँकि, पूरक चार्जशीट में उनका नाम होगा।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार चार्जशीट में इस बात उल्लेख किया गया है कि अनुच्छेद 370 के हटने और राम मंदिर निर्माण में रामजन्मभूमि के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अल्पसंख्यकों को वर्तमान सरकार के खिलाफ भड़काने का प्रयास किया गया। उन्हें बड़ी संख्या में इकट्ठा करने का प्रयास किया गया ताकि उनका इस्तेमाल सांप्रदायिक दंगों को अंजाम देने के लिए किया जा सके। चार्जशीट में कहा गया है कि उमर खालिद भीड़ जुटाने में प्रमुख भूमिका निभा रहे लोगों में से एक था।

चार्जशीट में उल्लेख किया गया है कि उमर खालिद के साथ AAP नेता ताहिर हुसैन और खालिद सैफी (जिस पर IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का मामला दर्ज है) नाम भी शामिल है। बता दें खालिद सैफी प्रोपेगैंडा समूह यूनाइटेड अगेंस्ट हेट का संस्थापक हैं।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, चार्जशीट में कहा गया है कि दिल्ली के दंगों की साजिश की शुरुआत जनवरी में हुई थी जब तीनों शाहीन बाग में बैठकर विरोध प्रदर्शन और बाद में जामिया के पीएफआई कार्यालय में मिले थे।

निम्नलिखित लोगों का चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट में नाम दिया गया है।

  1. शरजील इमाम
  2. उमर खालिद
  3. दानिश
  4. मोहम्मद परवेज अहमद
  5. खालिद
  6. इशरत जहाँ
  7. मीरान हैदर
  8. ताहिर हुसैन
  9. गुलशन
  10. सफ़ुरा ज़रगर
  11. शफा-उर रहमान
  12. आसिफ इकबाल तनहा
  13. शादाब अहमद
  14. नताशा नरवाल
  15. देवांगना कलिता
  16. तस्लीम अहमद
  17. सलीम मलिक
  18. मोहम्मद सलीम खान
  19. अतहर खान
  20. मोहम्मद इलियास

कथिततौर उमर खालिद और शरजील इमाम पर दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। दिल्ली दंगों में उमर खालिद की भूमिका का पहला प्रमाण उसके द्वारा दिए गए एक भाषण के बाद सामने आया था।

कथिततौर पर 20 फरवरी को अमरावती में भाषण दिया गया था। उस भाषण में उसे स्पष्ट रूप से यह कहते हुए सुना गया कि 24 फरवरी को जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत का दौरा करेंगे, तो अमेरिकी राष्ट्रपति को यह दिखना चाहिए कि भारत के लोग सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ लड़ रहे हैं।

इस मामले में और अधिक जानकारी आप इस लिंक के जरिए जान सकते है।

कथिततौर पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाया है कि सीएए विरोध में हुए दिल्ली दंगे एक पूर्व नियोजित साजिश थी। एंटी-सीएए प्रदर्शन करने का पैसा पीएफआई के साथ साथ विदेशों से भी आया था। कथिततौर पर उस राशि का उपयोग करके हथियार भी खरीदे गए थे। दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद के फोन से 40 जीबी डेटा भी बरामद किया है। जो 11 लाख पेज के डेटा में शामिल है।

उमर खालिद ने कैसे रची थी दिल्ली दंगों की साजिश: फोन से बरामद 40 जीबी डेटा से हुआ खुलासा, हाथ लगे कई सुबूत

दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार जेएनयू का पूर्व छात्र उमर खालिद को लेकर कई नए खुलासे हुए है। जिसके जरिए इस बात के सबूत मिले है कि खालिद ने ही दंगों की साजिश रचने में अहम भूमिका निभाई थी। पुलिस को उसके मोबाइल फ़ोन से दंगों से संबंधित 40 जीबी डेटा बरामद हुआ है। बता दें फ़ोन के फोरेंसिक रिपोर्ट विश्लेषण के जरिए यह बात सामने आई है। इसकी जाँच की जा रही है।

गौरतलब है कि दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद को स्पेशल सेल ने 10 दिन की पुलिस रिमांड में रखा है। पुलिस चार्जशीट में इस बात का उल्लेख किया है कि किस तरह उमर खालिद ने पहले से दंगों की पूरी तैयारियाँ कर ली थी। साथ ही उसने इस कार्य के लिए विभिन्न संगठनों से मदद और आम जनता के समर्थन पाने के लिए भड़काऊ भाषण का प्रयोग किया था।

स्पेशल सेल उमर खालिद के कारनामों की चार्जशीट 17 सितंबर से पहले कड़कड़डूमा कोर्ट में दायर करेगी। रिपोर्ट के अनुसार चार्जशीट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि खालिद ने 2019 में सीएए के विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली दंगों साजिश रचने की तैयारी दिसंबर में ही शुरू कर दी थी। अपने भड़काऊ भाषणों की वजह से उसे मुस्लिम लोगों का समर्थन मिलता चला गया। इतना ही नहीं उसने दंगों को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए वामपंथी और समुदाय विशेष संगठनों का सहारा भी लिया।

चार्जशीट में यह बात भी सामने आई कि खालिद ने उन्हीं जगहों को धरना प्रदर्शन के लिए चुना था, जहाँ मुस्लिम जनसंख्या ज्यादा थी और आसपास मस्जिद भी हो ताकि बिना किसी रुकावट के वह मस्जिदों का पूर्ण रूप से इस्तेमाल कर सके। ऐसे स्थलों का चुनाव लाउडस्पीकर के जरिए भीड़ बुलाने और मुस्लिम महिलाओं की बढ़चढ़ कर भागीदारी के लिए भी किया गया था। ताकि पुलिस महिलाओं की वजह से ज्यादा बल प्रयोग न कर सके।

चार्जशीट में कहा गया है कि आम जनता को भड़काने और लोगों को आक्रोशित करने के लिए ही ऐसी सड़क को जाम किया गया था जहाँ लाखों की संख्या में लोगों का रोज आना जाना होता था। ताकि आपस में लोगों का टकराव हो सके और दो समुदायों में दंगा भड़के। वाट्सअप ग्रुप बना कर लोगों को बरगलाने का काम भी किया जाता था। खालिद ऐसे ही कई व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ा हुआ था।

चार्जशीट में कहा गया है कि खालिद ने पहले जामिया विश्वविद्यालय को अपने साजिश को अंजाम देने के लिए चुना था। लेकिन पुलिस ने उसके इरादे को नाकाम कर दिया। जिसके बाद उसने 15 दिसंबर को शाहीनबाग का इलाका चुना। और शांतिपूर्ण धरने की आड़ में गहरी साजिश की शुरुआत की। इसके अलावा तुर्कमान गेट, सदर बाजार, शास्त्री नगर, सीलमपुर, चाँदबाग, कर्दमपुरी, शाहदरा, निजामुद्दीन, वजीराबाद, जाफराबाद आदि मुस्लिम बाहुल्य इलाकों पर स्थायी रूप से लोगों को धरने पर बैठाया गया।

खालिद ने शरजील इमाम, खालिद सैफी और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर लोगों को धरना प्रदर्शन के लिए उकसाने का काम किया था। साथ ही अलग-अलग प्रदर्शन स्थल पर कमेटियों का गठन भी किया गया था। जो उन्हें आवश्यक जनकारियाँ प्रदान करते थे। वहीं पिंजरा तोड़ की सदस्यों को महिलाओं को एकत्रित करने और उन्हें धरने से जोड़ने का काम सौंपा गया था।

पिंजरा तोड़ के सदस्यों में मुख्य जिम्मेदारी अथरा व रवीश को दी गई थी। अथरा को दिल्ली पुलिस स्पेशल ने यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया है। वहीं रवीश अभी भी पुलिस गिरफ्त से फरार है। अदालत ने रवीश को भगोड़ा भी घोषित कर दिया है। गुलफिश उर्फ गुल, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता व सुभाषिनी को भी पुलिस गिरफ्तार कर पूछताछ कर चुकी है। जिसमें इन सदस्यों ने खालिद को लेकर कई खुलासे किए है।

AMU वाले स्कूल की लीज समाप्त, जिस जाट राजा ने दान दी थी जमीन, उनके वंशज ने कहा – ‘वापस करो’

स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक, पूर्व जाट राजा महेंद्र प्रताप सिंह (1886-1979) ने 1929 में 90 साल की लीज पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को स्कूल स्थापित करने के लिए लगभग 3.04 एकड़ जमीन दी थी। पिछले साल लीज समाप्त होने के बाद जाट राजा के वंशजों ने माँग की है कि विश्वविद्यालय के आगरा स्थित स्कूल का नाम बदल कर उनके नाम पर रखा जाए और साथ ही महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा एएमयू को दी गई बाकी जमीन उन्हें वापस कर दी जाए।

मामले को देखने और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद द्वारा एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर तारिक मंसूर हैं।

सिंह के प्रपौत्र चरत प्रताप सिंह के अनुसार, उन्होंने 2018 में लीज की समाप्ति के बारे में विश्वविद्यालय को कानूनी नोटिस दिया था। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उनके परदादा द्वारा दी गई जमीन के दो हिस्से थे। 

हालाँकि, उन्होंने आगे ये भी कहा कि वे उस जमीन का बड़ा हिस्सा दान कर रहे हैं, जिस पर आगरा में महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर एएमयू का सिटी स्कूल बनाने की माँग की गई है। चरत ने कहा कि भूमि के दूसरे छोटे टुकड़े (1.2 हेक्टेयर) को परिवार को वापस सौंप दिया जाना चाहिए या फिर जमीन के मौजूदा बाजार मूल्य के अनुसार उन्हें मुआवजा दिया जाना चाहिए।

महेंद्र प्रताप सिंह मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज के पूर्व छात्र थे, जो बाद में एएमयू बन गया।

सिंह को मान्यता देने को लेकर एएमयू और बीजेपी के बीच रस्साकशी

गौरतलब है कि पिछले साल, अलीगढ़ की इगलास सीट पर उप-चुनावों के दौरान प्रचार करते हुए, सीएम योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर एक विश्वविद्यालय स्थापित करेगी। एएमयू में इस तरह के योगदान देने के बावजूद यूनिवर्सिटी द्वारा मान्यता नहीं दी गई थी। इसके बाद यूपी कैबिनेट ने पूर्व जाट राजा के नाम पर एक विश्वविद्यालय के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

सिंह, भाजपा और यूनिवर्सिटी के बीच विवाद की वजह बन गए थे।  पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के चित्र को एएमयू परिसर में लटकाए जाने के बाद विश्वविद्यालय के नाम बदलने की माँग ने 2018 में गति पकड़ ली थी।

1 दिसंबर 2014 को AMU में जाट राजा की 128 वीं जयंती मनाने के लिए भाजपा सांसद सतीश गौतम के सुझाव के बाद विवाद खड़ा हो गया था। भाजपा ने तब अलीगढ़ में अपने कार्यालय में एक छोटे से समारोह की व्यवस्था की थी और बाद में सिंह पर एक संगोष्ठी आयोजित करने के लिए यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति की तरफ से आश्वासन मिला था।

सिंह ने 1957 के लोकसभा चुनावों में अटल बिहारी वाजपेयी को हराया था

महेंद्र प्रताप सिंह प्रथम विश्व युद्ध के मध्य अफगानिस्तान में एक अस्थाई सरकार स्थापित करने के लिए जाने जाते हैं। बाद में उन्हें 1932 में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। सिंह 1957-62 के दौरान मथुरा निर्वाचन क्षेत्र से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित लोकसभा सदस्य भी थे, उन्होंने कद्दावर भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी को हराया था। अटल बिहारी वाजपेयी बाद में भारत क प्रधानमंत्री बने।

‘ब्यूरोक्रेसी पर कब्जा करो… अपने नस्लों के फायदे के लिए पावर हाथ में लो’ – इमरान प्रतापगढ़ी का वीडियो वायरल

पिछले दिनों सुरेश चव्हाणके ने अपने आगामी शो का एक ट्रेलर ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि सिविल सेवाओं में ‘संप्रदाय विशेष की घुसपैठ’ का ‘पर्दाफाश’ किया गया है। वीडियो में उन्होंने जामिया के रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी (RCA) से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में स्थान पाने वाले छात्रों को ‘जामिया के जिहादी’ कहा था।

सुदर्शन न्यूज के सुरेश चव्हाणके वाले इस न्यूज एपिसोड को लेकर काफी बवाल हुआ। इस कार्यक्रम के 4 एपिसोड टेलीकास्ट हो चुके हैं, आगे के प्रसारण के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

इस बीच इमरान प्रतापगढ़ी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें इमरान प्रतापगढ़ी मुस्लिमों से ब्यूरोक्रेसी पर ‘कब्जा’ करने के लिए कहते हैं। वीडियो में इमरान प्रतापगढ़ी का कहना है कि फासिस्टों ने पिछले 30 सालों में उनके नस्ल का काफी नुकसान किया है।

इमरान प्रतापगढ़ी के अनुसार इससे एक फायदा भी हुआ है और वह फायदा यह है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और नेपाल के बॉर्डर से लेकर राजस्थान के बॉर्डर तक डंडा लेकर भैंस चराने वाला आम मुस्लिम भी यह समझ चुका है कि इस देश में जिंदा रहना है तो बच्चों को पढ़ाना पड़ेगा।

इमरान प्रतापगढ़ी आगे कहते हैं:

“किसी भी देश का सिस्टम परफेक्ट नहीं होता है। माइक पर खड़े होकर कितना भी कोस लो, कितनी भी गालियाँ दे दो, लेकिन निजाम नहीं बदलता। मैं आपको दावत देता हूँ, अगर निजाम बदलना है तो सिस्टम का हिस्सा बनिए। अगर थाने में तुम्हारे नाम का सिपाही आ जाता है, तो थाने का निजाम बदल जाता है। अगर तुम मुल्क को सुधारना चाहते हो, अपना हक लेना चाहते हो तो ब्यूरोक्रेसी पर कब्जा करो। इसके अलावा कोई चारा नहीं है। अगर बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर या बहुत बड़ा बिजनेसमैन बनाते हो तो सिर्फ तुम्हारा फायदा होगा। अगर नस्लों का फायदा करना चाहते हो तो सिर्फ ब्यूरोक्रेसी पर कब्जा करो, पावर अपने हाथ में लो।”

गौरतलब है कि मंगलवार (सितंबर 15, 2020) को सुदर्शन न्यूज के कथित विवादित कार्यक्रम ‘नौकरशाही में मुस्लिमों की घुसपैठ’ पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जब आप कहते हैं कि जामिया मिलिया के छात्र सिविल सेवाओं में घुसपैठ करने वाले समूह का हिस्सा हैं, तो फिर हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। देश के सर्वोच्च न्यायालय के रूप में, हम आपको यह कहने की अनुमति नहीं दे सकते कि मुस्लिम सिविल सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं। आप यह नहीं कह सकते कि पत्रकार को यह करने की पूर्ण स्वतंत्रता है।”

सुरेश चव्हाणके ने शो के दौरान कहा था कि यूपीएससी के लिए प्रवेश परीक्षा में सेंध लगाने के लिए उड़ान योजना के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को 1 लाख रुपए दिए जाते हैं, जबकि हिंदुओं को ऐसा कोई लाभ नहीं मिलता है। इसी तरह, राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) में गैजेटेड पदों के लिए, अल्पसंख्यक समुदाय को 50000 रुपए और PSC के नन-गैजेटेड पोस्ट एवं SSC परीक्षा के लिए 25000 रुपए दिए जाते हैं।

सुदर्शन न्यूज ने यह भी खुलासा किया कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए योजनाओं का लाभ उठाने वालों में से अधिकांश मुस्लिम हैं। मुस्लिम समुदाय के बाद, ईसाई दूसरे स्थान पर आते हैं; इसके बाद क्रमशः सिख, बौद्ध और पारसी आते हैं। बहरहाल, ब्योरोक्रेसी में ‘जाना’ एक बात है, मगर उस पर ‘कब्जा’ करने की तमन्ना अलग और नकारात्मक है।

27 साल बाद बाबरी विध्वंस केस में 30 सितंबर को आएगा कोर्ट का फैसला: आडवाणी, जोशी, कल्याण सहित 49 हैं आरोपित

बाबरी विध्वंस मामले में 27 साल से सुनवाई कर रही सीबीआई की एक विशेष अदालत अब 30 सितंबर को अपना फैसला सुनाएगी। अदालत ने इस मामले में आरोपित लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह और उमा भारती, विनय कटियार को फैसले के दिन अदालत में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

बता दें 6 दिसंबर, 1992 को विवादित ढाँचे को ध्वस्त करने के आरोप में 49 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। जिनमें से 17 लोगों का निधन हो चुका है। वकील केके मिश्रा ने बताया कि सीबीआई की अदालत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अंतिम फैसला देने के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है। मिश्रा मामले के 32 में से 25 आरोपितों की वकालत कर रहे हैं, जिनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती सहित कई अन्य शामिल हैं।

गौरतलब है कि 24 जुलाई को वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में विशेष सीबीआई अदालत के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपना बयान दर्ज कराया था। खुद को निर्दोष बताते हुए आडवाणी ने कहा था कि उन पर लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

इस मामले में मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती भी अपना बयान दर्ज करा चुके हैं और खुद को निर्दोष भी बता चुके हैं। जोशी ने उस वक्त केंद्र की तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए झूठे सबूत पेश करने की बात भी कही।

उल्लेखनीय है कि अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को ‘कारसेवकों’ ने विवादित बाबरी मस्जिद के ढाँचे को गिरा दिया था। उनका दावा था कि मस्जिद की जगह पर राम का प्राचीन मंदिर हुआ करता था। राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले लोगों में आडवाणी और जोशी भी शामिल थे।

12 साल की लड़की 5 दिन बाद बरामद: बंटी खान समेत 7 लोग गिरफ्तार, हिंदूवादी संगठनों ने किया था प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के इबादतनगर इलाके से 11 सितंबर को अगवा की गई किशोरी को पुलिस ने बुधवार (16 सितंबर, 2020) को बरामद कर लिया है। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपित बंटी खान समेत 7 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, इरादतनगर की रहने वाली 12 साल की नाबालिग किशोरी से बंटी खान नाम के एक युवक ने दोस्ती की थी। बंटी अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर टिकटॉक पर वीडियो बनाता था। साथ ही एक मेडिकल दुकान पर काम करता था। 5 दिन पहले यानी 11 सितंबर को लड़की अपने घर से टहलने निकली थी, जिसके बाद वह वापस नहीं आई। परिजनों ने उसे ढूँढने की बहुत कोशिश की लेकिन वह नहीं मिली। जिसके बाद परिजनों के इसकी शिकायत पुलिस में की।

परिजनों ने अपनी शिकायत में बंटी खान और उसके अन्य 2 दोस्तों के खिलाफ अपहरण का शक जाहिर किया था। वहीं मामले में पुलिस की तरफ से ढीले रवैए को देखते हुए परिवारवालों ने अपनी समस्या हिंदूवादी संगठनों से भी की। जिसके बाद संगठनों ने इस मामले में पुलिस से सख्त कदम उठाने की माँग करते हुए अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज किया।

लोगों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने खोजबीन शुरू कर दी। वहीं मंगलवार को दबिश देते हुए पुलिस ने मुकदमें में दर्ज बंटी खान समेत 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। एसएसपी ने नाबालिग की तलाश में सात टीमें लगाई थी। वहीं मामले में पुलिस के रवैए को देखते हुए इरादतनगर के इंस्पेक्टर का तबादला भी कर दिया।

मामले में एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि बुधवार सुबह किशोरी को बरामद कर आरोपित भी गिरफ्तार कर लिया है। किशोरी का मेडिकल कराया जा रहा है। मुख्य आरोपित और अपहरण में सहयोग करने वाले अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा दिया गया है।

‘हीरो के साथ सोकर मिलते हैं फिल्मों में 2 मिनट के रोल’: कंगना ने जया बच्चन को जवाब देते हुए किया नया खुलासा

महाराष्ट्र सरकार और कंगना रनौत के बीच अभी जुबानी जंग खत्म भी नहीं हुई थी कि संसद सत्र में जया बच्चन की स्पीच ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी। कंगना ने इसी बहस की प्रतिक्रिया में एक नया ट्वीट किया और कहा कि उन्होंने इंडस्ट्री को फेमेनिज्म सिखाया और यहाँ देश भक्ति व नारी प्रधान फिल्में की।

कंगना ने एक ट्वीट के रिप्लाई में लिखा, “कौन सी थाली दी है जया जी और उनकी इंडस्ट्री ने? एक थाली मिली थी जिसमें दो मिनट के रोल आइटम नम्बर्ज़ और एक रोमांटिक सीन मिलता था वो भी हीरो के साथ सोने के बाद। मैंने इस इंडस्ट्री को फ़ेमिनिज़्म सिखाया, थाली देश भक्ति नारी प्रधान फ़िल्मों से सजाई, यह मेरी अपनी थाली है जया जी आपकी नहीं।”

बता दें कि कल जया बच्चन ने संसद सत्र में अपने भाषण के दौरान रवि किशन को निशाना बनाते हुए ताना दिया था कि ऐसे लोग जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं। इसके बाद रवि किशन का जवाब आया और जया बच्चन ट्विटर पर ट्रेंड करनी लगी। कंगना रनौत ने भी इस बीच जया बच्चन से पूछा कि जैसा उनके साथ हुआ वैसा उनकी बेटी श्वेता के साथ होता या जैसा सुशांत के साथ हुआ वैसे उनके बेटे अभिषेक के साथ होता तो भी क्या वह ऐसे ही कहतीं?

उनके इस ट्वीट पर 3 हजार से ज्यादा कमेंट आए। लेकिन कॉन्ग्रेस नेता डॉ उदित राज ने इसका रिप्लाई देते हुए कंगना रनौत को नालायक बता दिया। डॉ उदित राज ने लिखा, “कंगना रनौत आप जैसी नालायक बेटी जया बच्चन की होती तो उसके साथ ऐसा ही होता।”

यहाँ बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता डॉ उदित राज इससे पहले भी कंगना पर टिप्पणी कर चुके हैं। महाराष्ट्र राज्यपाल से मिलने पर कंगना के लिए डॉ उदित राज ने कहा था कि वह नशेड़ी और भाजपा समर्थक हैं। उन्होंने ट्वीट में लिखा था, “नशेड़ी कंगना रनौत से आज राज्यपाल मिले। गोदी मीडिया, भाजपा आईटी सेल और भक्त सभी समर्थन कर रहे हैं। चोर, अपराधी और भ्रष्ट सभी का स्वागत बशर्ते भाजपा का समर्थक हो।”

‘झाड़-फूँक’ करने वाले फैय्याज अली ने किशोरी को अगवा कर इस्लाम कबूल करवाकर की थी निकाह की तैयारी, कानपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के कानपुर में जादू-टोना करने वाले फैय्याज अलीने किशोरी को अगवा कर धर्म परिवर्तन (इस्लाम कबूल) करवाने की कोशिश की। पुलिस ने देर शाम आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। उस पर अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। वहीं, युवती को मेडिकल जाँच के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।

मामला कानपुर के सरसौल के महाराजपुर थाना क्षेत्र का है। महाराजपुर के एक गाँव निवासी रिक्शा चालक की 17 वर्षीय बेटी को फैय्याज अली ने प्रेम जाल में फँसा लिया। वह झाड़-फूँक भी करता था। किशोरी के भाई का आरोप है कि किशोरी घर से बाहर दुकान में सामान लेने गई थी, तभी आरोपित फैय्याज अली ने किशोरी को अगवा कर लिया। आरोप है कि वह किशोरी पर जबरन मुस्लिम धर्म स्वीकारने का दबाव बना रहा था। फैय्याज उसके साथ निकाह करने की भी तैयारी में था।

भाई की तहरीर पर महाराजपुर पुलिस ने आरोपित फैय्याज अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। एसओ राघवेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे पूछताछ जारी है। आरोपित के खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद किशोरी को आरोपित के चंगुल से छुड़ा लिया है। फिलहाल युवक और किशोरी से थाने में पूछताछ चल रही है। पीडि़ता की मानसिक हालत ठीक नहीं है। पीड़िता के भाई ने बताया कि जब उन्हें बहन की कुछ हरकतें अजीब लगीं तो उससे पूछताछ की। पहले वह टालती रही, बाद में उसने पूरी बात बताई और फैय्याज के साथ रहने की जिद करने लगी। उसके घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगाई तो आरोपित फैय्याज ने धमकाना शुरू कर दिया।

जानकारी के मुताबिक पुलिस ने जब पीड़िता को आरोपित फैय्याज के चंगुल से छुड़ाकर महाराजपुर थाना लाया गया तो उसके बाजू में ताबीज और हाथों में हरी चूड़ियाँ थीं। इसके साथ ही उसके पास से उर्दू में लिखा एक पर्चा भी मिला। परिजनों का कहना कि पीड़िता ने बातचीत के दौरान बताया है कि उसे जाजमऊ की एक मस्जिद में ले जाया गया था। वहाँ पर झाड़-फूँक करके उसे मुस्लिम बनाने की कोशिश की गई।

गौरतलब है कि पिछले दिनों बजरंग दल के नेताओं ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कानपुर में लव जिहाद और धर्म परिवर्तन मामलों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया था। बजरंग दल के अध्यक्ष अतुल द्विवेदी और राज्य सचिव रामजी तिवारी ने पत्र में बताया था कि कुछ मुट्ठी भर संगठन ऐसे हैं, जो राष्ट्र विरोधी कृत्यों में शामिल हैं।

बजरंग दल का कहना था कि वे भारत में बहुसंख्यक हिंदू समाज के प्रति नफरत फैला रहे हैं। वे नियमित रूप से देश को अस्थिर करने के प्रयासों में संलग्न हैं और भारत की सांस्कृतिक विरासत को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

दशकों बाद वापस अपने घर पधारे राम, लक्ष्मण व सीता: ब्रिटिश पुलिस ने भारत को सौंपा 1978 में चोरी हुई विजयनगर काल की मूर्तियाँ

1978 में तमिलनाडु के विष्णु मंदिर से चोरी हुई विजयनगर काल की भगवान राम, माँ सीता और लक्ष्मण की 3 बेशकीमती मूर्तियाँ ब्रिटिश पुलिस द्वारा लंदन में भारतीय वाणिज्य दूतावास को सौंप दी गई हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवसर पर लंदन में भारतीय उच्चायोग के भवन में इंडिया हाउस में एक औपचारिक समारोह आयोजित किया गया। जिसमें मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अधिकारी, इंडिया हाउस के कर्मचारी और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भाग लिया।

वहीं इस समारोह के दौरान एक हिंदू पुजारी द्वारा देवताओं की एक पारंपरिक पूजा- अर्चना भी की गई थी। इन मूर्तियों की वापसी भारत की सांस्कृतिक विरासत की चोरी और तस्करी की गई कलाकृतियों को वापस लाने के लिए भारत सरकार के बढ़ते प्रयासों का एक हिस्सा है।

इस कार्यक्रम के दौरान मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि 1947 से 2014 के बीच हमें केवल 13 मूर्तियों को वापस किया गया था। लेकिन सरकार के बढ़ते प्रयासों के परिणामस्वरूप 2014 के बाद विदेशी देशों द्वारा 40 से अधिक कलाकृतियों को भारत को सौंप दिया गया है।

स्वराज्य की एक रिपोर्ट के अनुसार, मूर्तियों को आनंदमंगलम राम, लक्ष्मण और सीता के नाम से जाना जाता है। ये मूर्तियाँ विजयनगर काल में कांस्य प्रतिमाओं से विशेष रूप से तैयार की जाती थी। इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट के एस विजय कुमार की रिपोर्ट के अनुसार इन मूर्तियों की उपस्थिति की पुष्टि पिछले साल हुई थी जब एक स्वयंसेवक ने एक तस्वीर भेजी थी। तस्वीरों को श्री राजगोपाला स्वामी मंदिर, आनंदमंगलम, मयूरम तालुक, तंजावुर जिले से चोरी की गई मूर्तियों के साथ मिलान किया गया था।

तमिलनाडु सरकार के मूर्ति विंग के अधिकारियों की मदद से, लंदन में भारतीय दूतावास और एएसआई ने मूर्तियों की पहचान और उत्पत्ति की पुष्टि की थी।

कथिततौर पर भारत के पहले उच्चायुक्त, लंदन के सचिव राहुल नंगारे ने उस डीलर का पता लगाया था जिसके पास ये मूर्तियाँ थी। कथित तौर पर वह भी इन मूर्तियों की चोरी की स्थिति से अनजान थे। डीलर ने इन मूर्तियों के महत्व को समझने के बाद वापस इन मूर्तियों को उन्हें सौंप दिया।

इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट ने बताया कि उसी समूह की एक और हनुमान मूर्ति है, जिसे वर्तमान में दक्षिण पूर्व एशिया के एक संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है।

अब मूर्तियों को वापस मंदिर में पूजा के लिए लाया जाएगा। गौरतलब है कि लंदन पुलिस ने 2018 में 12 वीं शताब्दी की बुद्ध प्रतिमा सौंपी थी, जो 1961 में नालंदा में एएसआई संग्रहालय से चोरी हो गई थी।