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‘आपने बुलाया है तो आ जाऊँगा लेकिन मेरे पास गाड़ी नहीं है’ – वो मोदी, जो PM नहीं थे लेकिन वचन के पक्के थे

देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज 70 साल के हो गए। देश और दुनिया के सामने जितना कुछ नज़र आता है, वह है सिर्फ एक तस्वीर। तस्वीर में सब कुछ अति उत्तम है लेकिन तस्वीर में सब कुछ इतना बेहतर हुआ कैसे? इसके जवाब पर चर्चा का दायरा सीमित है।

स्टेशन पर अपने पिता के साथ चाय बेचने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की कमान संभालने तक… 7 दशकों की यात्रा में ऐसे अनेक मौके आए, जब देश के प्रधानमंत्री के सामने हालात सामान्य नहीं थे। ऐसा ही एक किस्सा है, जब उन्हें एक समाचार समूह से चर्चा में शामिल होने का बुलावा आया और उन्होंने कहा उनके पास गाड़ी नहीं है।  

इससे पहले उनके जीवन के अन्य पहलुओं को जान लेते हैं। नरेन्द्र मोदी अपने बचपन में स्वभाव के बेहद शरारती थे, अक्सर साक्षात्कारों में उन्होंने इस बात का ज़िक्र भी किया है। एक बार मन की बात कार्यक्रम में उन्होंने इस बारे में एक किस्सा भी साझा किया था। उन्होंने बताया था कि बचपन में शहनाई वालों को इमली का लालच देकर उनका ध्यान हटाया करते थे।

नरेन्द्र मोदी पढ़ाई में औसत थे पर उन्हें रंगमंच का बहुत ज़्यादा शौक था, उन्होंने कई नाटकों में भी हिस्सा लिया था। बचपन में सभी का कोई न कोई नाम होता है, नरेन्द्र मोदी का भी था। नरेन्द्र मोदी के दोस्त उन्हें ‘नरिया’ कह कर पुकारते थे। उन्हें यह नाम बहुत पसंद नहीं था लेकिन वह इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चर्चाओं के लिहाज़ से कितने कुशल हैं, सोशल मीडिया पर मौजूद कई वीडियो क्लिप्स इस बात की तस्दीक करती हैं। साक्षात्कारों से हट कर और प्रधानमंत्री बनने से पहले भी नरेन्द्र मोदी के ऐसे तमाम वीडियो मौजूद हैं, जिनमें उन्होंने अपनी बात पूरी स्पष्टता से रखी है

नरेन्द्र मोदी के लिए क्या इन चर्चाओं तक हिस्सा बनने का सफ़र भी बहुत आसान रहा? नहीं। यह संघर्षों से भरा था। संघर्षों से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा है, जब नरेन्द्र मोदी को एक समाचार चैनल की परिचर्चा में शामिल होने का मौक़ा मिला था। 

90 के दशक का अंत था। टीवी चैनल का दायरा काफी बढ़ चुका था। लोग समझ चुके थे कि यह संचार का एक बड़ा माध्यम बनने वाला है। खासकर राजनीतिक दृष्टिकोण से। समाचार चैनल्स में चर्चाएँ शुरू हो चुकी थीं, हर राजनीतिक दल अपने नेता-प्रवक्ता भेजा करता था। कुल मिला कर ज़िम्मेदारी बस एक होती थी, अपने दल का नज़रिया मज़बूती से रखना।

यह वाकया भी तभी का है। एक समाचार चैनल (आज तक) में एक चर्चा आयोजित कराई गई, जिसमें लगभग हर दल के नेता को बुलावा भेजा गया। भाजपा में विजय मल्होत्रा को निमंत्रण मिला, लेकिन किसी कारणवश कार्यक्रम से कुछ ही समय पहले उनका आना रद्द हो गया। 

चैनल वाले परेशान। अब किसे बुलाएँ BJP से? नामों की खोजबीन शुरू हुई और नरेन्द्र मोदी को बुलावा भेजा गया। अब तक वह ऐसी चर्चाओं की अहमियत बखूबी समझ चुके थे। उस वक्त तक वह एक अच्छे हिन्दी भाषी वक्ता के रूप में स्थापित भी हो चुके थे, लिहाज़ा आने के सवाल पर उन्होंने तुरंत हामी भर दी।

समस्या लेकिन टली नहीं। क्योंकि एक दुविधा थी। स्पष्टवादी मोदी ने तुरंत चैनल को अपनी दुविधा बताई। उन्होंने कहा, “मैं कार्यक्रम में आने के लिए तैयार हूँ लेकिन मेरे पास वाहन नहीं है।” यह तब की बात है, जब नरेन्द्र मोदी 9 अशोका मार्ग स्थित भाजपा कार्यालय के पास अन्य संघ प्रचारकों के साथ रहते थे। 

चैनल की ओर से उनसे कहा गया कि वह टैक्सी से आ सकते हैं, बाद में इसका भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन कार्यक्रम ऑन एयर होने में सिर्फ चंद मिनट का समय शेष था, और नरेन्द्र मोदी की कोई ख़बर नहीं थी। सब इंतज़ार कर ही रहे थे, तभी मोदी मौके पर नज़र आ गए।

नरेन्द्र मोदी जानते थे कि वह किसी दूसरे नेता के स्थान पर आए हैं लेकिन उन्होंने अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई। यह इकलौती ऐसी घटना नहीं है, जब प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ अपनी बात रखने के लिए परेशानियों का सामना किया हो लेकिन जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटे। 

दूसरा किस्सा जुलाई 2001 में हुई आगरा समिट का है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ भारत आए थे। इस दौरान भी चैनल पर राजनीतिक दलों के नेताओं की ज़रूरत थी। मुश्किल के समय में एक बार फिर समाचार समूह ने नरेन्द्र मोदी से संपर्क किया और इस बार भी उन्होंने निराश नहीं किया।

चर्चा से कुछ देर पहले खूब बारिश होने लगी। सिग्नल न होने की वजह से नरेन्द्र मोदी को कई घंटे इंतज़ार करना पड़ा। क्योंकि वह मौजूद रहने का वादा कर चुके थे, इसलिए काफी देर इंतज़ार करने के बावजूद भी चर्चा में शामिल हुए।

इन दोनों ही घटनाओं में एक बात पूरी तरह समान थी कि नरेन्द्र मोदी हर बुलावे को सहर्ष स्वीकार करते थे। इसके बाद अपने राजनीतिक दल का पक्ष पूरी स्पष्टता से रखते थे। वह अपने नज़रिए और पार्टी के एजेंडे दोनों को लेकर कभी भ्रम में नहीं रहे।

साल 2001 में पहली बार गुजरात की कमान संभालने से लेकर 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों तक… काफी कुछ देखने और झेलने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने यहाँ तक का सफ़र तय किया। फ़िलहाल देश की सत्ताधारी पार्टी के सामने कई चुनौतियाँ हैं लेकिन जनता ने अभी तक इस चेहरे पर पूरा भरोसा जताया है।    

पुस्तक साभार – The Election That Changed India

कॉन्ग्रेस के पूर्व MLA बदरुद्दीन के बेटे का लव जिहाद: 10वीं की हिंदू लड़की से रेप, फँसा कर निकाह, गर्भपात… फिर छोड़ दिया

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से लव जिहाद का मामला सामने आया है। आरोपित ने लड़की को गुमराह करके उससे मित्रता की, फिर 10वीं क्लास में लड़की का बलात्कार किया। फिर फँसाया, निकाह किया। इतना करने के बाद आरोपित ने लड़की का गर्भपात भी कराया और अंततः छोड़ दिया।

लव जिहाद की इस घटना को अंजाम देने वाले व्यक्ति का नाम अजीजुद्दीन कुरैशी बताया जा रहा है। सबसे ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि अजीजुद्दीन छत्तीसगढ़ स्थित दुर्ग से कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक बदरुद्दीन कुरैशी का बेटा है।

ख़बरों के मुताबिक़ आरोपित ने हिन्दू लड़की से तब मित्रता की, जब लड़की की मात्र उम्र 13 साल थी। इसके बाद आरोपित अजीजुद्दीन ने उसे प्रेम का झाँसा देकर फँसाया। इसके बाद वह पीड़िता के साथ लगातार कई सालों तक बलात्कार करता रहा। इस दौरान लड़की गर्भवती हुई, जिसके बाद अजीजुद्दीन ने उसका गर्भपात करा दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पीड़िता के साथ तमाम तरह के अत्याचार जारी थे। 

पीड़िता के मुताबिक़ उसे तमाम तरह की प्रताड़ना का सामना करना पड़ता था। वह जब कभी किसी ईश्वर की (खासकर गणेश भगवान की) पूजा करतीं तो अजीजुद्दीन उसे जम कर पीटता था। आरोपित उनसे कुरान की आयतें रटवाता था, धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता था।

पीड़िता बीते चार वर्षों से मुंबई में अकेले रह रही थी। ख़बरों की मानें तो उसके माता-पिता और अन्य घर वालों ने उसका साथ छोड़ दिया है। फ़िलहाल पीड़िता अपनी पहचान, धर्म, परिवार और अब अपने बच्चे को भी खो चुकी है। अभी वह पूरी तरह अकेली है। पीड़िता ने साल 2016 में अजीजुद्दीन कुरैशी पर बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। लेकिन इस मामले पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 

अजीजुद्दीन के अलावा दो और मामले नीचे के वीडियो में

लव जिहाद का यह मामला इकलौता नहीं है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में पिछले दिनों लव जिहाद के बढ़ते मामलों की जाँच के मद्देनजर एसआईटी का गठन हुआ था। बीते दिन इस मामले में ख़बर आई थी कि एसआईटी ने अपनी पड़ताल में एक दर्जन मामले ऐसे पकड़े हैं, जहाँ विवाह के लिए धर्म परिवर्तन करवाया गया था। एसआईटी इनका पता लगाने के बाद ये जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं इनके पीछे किसी संगठन का तो हाथ नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बारे में जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया था कि अपर पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर की अगुवाई वाली एसआईटी ने हाल में ‘लव जिहाद’ के एक दर्जन से ज्यादा मामले पकड़े हैं। इनमें ज्यादातर मामले जूही इलाके से हैं। अब एसआईटी इस बात की जाँच करेगी कि कहीं लव जिहाद रैकेट में किसी कथित इस्लामी संगठन का तो हाथ नहीं है।

नरेंद्र मोदी: यह नाम लेते ही आपके जेहन में कैसी तस्वीर उभरती है?

1934 में भूकंप आया और कोसी नदी पर बना रेल पुल क्षतिग्रस्त हो गया। इसके कुछ साल बाद देश आजाद हो गया और तब से अब तक न जाने कितनी सरकारें आईं। लेकिन, कोसी रेल पुल नहीं बना। 18 सितंबर 2020 को इस रेल पुल की सौगात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार को देने जा रहे हैं।

हालाँकि इसकी नींव 2003 में 6 जून को उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ही रख दी थी। लेकिन, बाद के सालों में यह प्रोजेक्ट ‘कॉन्ग्रेसशाही’ में लटक गई। जिस योजना की लागत 323.41 करोड़ रुपए थी, वह बढ़कर 516.02 करोड़ रुपए हो गई। सत्ता में मोदी के आगमन के बाद इस प्रोजेक्ट ने तेजी पकड़ी और अब इस पर ट्रेनें दौड़ने को तैयार हैं।

आज, यानी 17 सितंबर को 70 साल के हो गए मोदी असल में पीढ़ियों के ऐसे ही सपने को पूरा करने का नाम है। चाहे वह घर-घर बिजली पहुँचाने की योजना हो या फिर शौचालय। जन-धन के जरिए बैकिंग सिस्टम से अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को जोड़ना हो या फिर रसोई गैस सिलेंडर से धुएँ में रोज़ झुलसने से महिलाओं को मुक्ति दिलाना।

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत लाभान्वित लोगों को लेकर 1 जुलाई 2019 को लोकसभा में सरकार की ओर से दिया गया जवाब

इन्हीं वजहों से मोदी की वह छवि आपके मन में पैदा होती है, जिससे बीजेपी 2019 के आम चुनावों से पहले रूबरू हुई थी। वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार ने अपनी पुस्तक ‘भारत कैसे हुआ मोदीमय’ में लिखा है, “इस प्रजेंटेशन में सवाल हुआ- अगर आप (दो बड़े उद्योपतियों का नाम लिया गया, जिसमें एक भगोड़ा है तो दूसरा लंबे समय तक जेल में रहा, जिनके नाम का खुलासा करना उचित नहीं होगा) इनका नाम लेते हैं तो आपके जेहन में क्या छवि आती है? जवाब था- फ्रॉड की। लेकिन जब नरेंद्र मोदी का नाम लेते हैं तो क्या जवाब होता है? एक ऐसा नेता जो कोई भी बड़ा निर्णय ले सकता है, चाहे विकास के एजेंडे पर हो या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा।”

आपके जेहन में उभरने वाली इसी छवि का चमत्कार था कि 2019 में अकेले दम पर बीजेपी 300 के पार चली गई। इस ऐतिहासिक जनादेश की कई तरहों से व्याख्या हो चुकी है, इसलिए हम इसके ग्राउंड जीरो पर हुए असर पर नजर डालते हैं।

‘मोदी मैंडेट 2019’ में प्रदीप भंडारी लिखते हैं कि उन्होंने कैराना में एक बुजुर्ग महिला से पूछा;

माताजी, आप क्या चाहती हैं प्रधानमंत्री कौन बनना चाहिए इस बार? वे जवाब देती हैं- भैया, हमको तो मोदी ठीक लगता है। भंडारी फिर पूछते हैं क्यों? ऐसा क्या किए हैं मोदी? महिला का जवाब होता है: क्या नहीं दिए। गैस चूल्हा दिए। घर दिए। पैखाना दिए। इतना कोई नहीं किया हम गरीब लोगों के लिए। उनको ऊपर वाला भेजा है हमलोगों के लिए!

इसी तरह प्रयागराज में एक नाविक भंडारी से कहता है, “पाकिस्तान को घर में घुसकर मारे हैं मोदी जी। ये होता है मर्द का जिगरा। ऐसी हवा टाइट की है इनकी कि अब भारत की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखेंगे।” जनता ऐसे जवाब तभी देती है, जब किसी का नाम उम्मीद जगाता हो और साथ ही उनके पूरे होने का भरोसा भी।

ऐसा भी नहीं है कि यह प्रभाव किसी खास राज्य या इलाके तक ही सीमित है। पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर में एक पूर्व सैनिक ने भंडारी से कहा था, “जीते कोई भी, मेरा वोट मोदी को जाएगा। राष्ट्रीय सुरक्षा और ओआरओपी के लिए।” ओआरओपी यानी वन रैंक-वन पेंशन। अब आप याद करिए कि सैनिकों की यह माँग कितने समय से लंबित थी और मोदी के सत्ता में आते ही किस तेजी से इसे पूरा किया गया था।

याद करिए कि आम चुनाव के वक्त लिबरल गैंग बेगूसराय में कन्हैया कुमार नामक गुब्बारे में कितनी हवा भर रहे थे। वहीं एक युवा ने भंडारी को बताया था, “वोट मोदी को ही देंगे। वो देश को जोड़ने और आगे बढ़ाने का काम किए हैं। कन्हैया देश के टुकड़े-टुकड़े करने की बात करता है। अगर वो संसद में चला गया तो कश्मीर को भी अलग करने की माँग करने लगेगा।” यही भरोसा सीतामढ़ी में दिखा, जब कोई कहता है, “भैया अब बिजली आने लगी है तो लालटेन का क्या काम।”

भंडारी ने यह किताब आम चुनावों के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में किए गए भ्रमण के अपने अनुभवों पर लिखी है। जब आप इसे पढ़ेंगे तो पाएँगे कि मोदी की विकासवादी और मजबूत नेता की यह छवि देशव्यापी है।

सत्ता में लौटने के बाद उन्होंने जिस तरह जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने, सीएए और हाल में चीन के साथ सीमा पर तनाव को लेकर रूख दिखाया है, उससे उनकी मजबूत नेता की वह छवि और पुख्ता हुई है, जो सर्जिकल और एयर स्ट्राइक जैसे साहसिक निर्णयों से बनी थी।

दूसरी तरफ कोरोना संकट के दौरान जिस तरह आत्मनिर्भर भारत का अभियान और आर्थिक पैकेज लाया गया, उसने वंचित तबकों के बीच मोदी की विकासवादी छवि और प्रगाढ़ की है। चाहे वह 10 करोड़ गरीबों के खाते में सीधे रकम ट्रांसफर करना हो या उज्‍ज्‍वला स्‍कीम के तहत 8 करोड़ से ज्‍यादा बीपीएल महिलाओं को तीन महीने तक एलपीजी सिलेंडर मुफ्त देने का फैसला या फिर गरीबों को 5 किलो प्रति व्यक्ति मुफ्त गेहूँ या चावल तीन महीने तक देने का ऐलान वगैरह, वगैरह…।

​घनघोर संकट के वक्त भी निचले पायदान के लोगों को लेकर यही चिंता जमीन पर मोदी मैजिक पैदा करती है और यह हर बीतते दिन के साथ पहले से ज्यादा प्रभावी दिखती है।

जैसा कि संतोष कुमार ने भारत कैसे हुआ मोदीमय में लिखा भी है, “जैसे कोई माँ अपने सुंदर बेटे को देखकर ईष्र्या नहीं कर सकती, वैसे ही मोदी भाजपा के लिए हैं और जब तक ऐसा चेहरा मौजूद हो, पार्टी उसे भुनाएगी ही। निश्चित तौर से भाजपा की वर्ष 2024 की पटकथा तैयार है और शायद 2026 की भी, जब मोदी 75 साल के हो जाएँगे।”

यह केवल भाजपा की ही पटकथा नहीं है। यह सपने देखने छोड़ देने वाली आँखों में उम्मीदें जगाने की पटकथा है। विकास के सपनों को पूरा करने की पटकथा है। और सबसे बढ़कर मजबूत एवं आत्मनिर्भर भारत की पटकथा है। इन पटकथाओं का ईंधन केवल एक है। उसका नाम है: मोदी।

केरल सहित कई दक्षिणी राज्यों में सक्रिय IS आतंकी, NIA ने दर्ज किए 17 मामले, 122 आरोपित गिरफ्तार: गृह मंत्रालय

दुनियाभर में आतंक का साया तेजी से बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए दुनियाभर के नेता एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं भारत के दक्षिणी राज्यों के कुछ लोगों के इस्लामिक स्टेट (IS) में शामिल होने की बात केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों के सामने आई है। इसको लेकर नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) ने 17 मामले दर्ज किए हैं।

गृह मंत्रालय ने कहा कि एनआईए ने तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में आईएस की उपस्थिति से संबंधित 17 मामले दर्ज किए हैं और 122 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

बता दें कि राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने बताया कि एनआईए की जाँच में पता चला है कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बिहार, यूपी, मध्य प्रदेश, और जम्मू-कश्मीर में सबसे अधिक सक्रिय है।

उन्होंने बताया कि IS, इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवांत (ISIL), इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS), दाएश, इस्लामिक स्टेट इन खोरासान प्रॉविन्स (ISKP), आईएसआईएस विलायत खोरासान, इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और शाम-खोरासान को केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) कानून, 1967 के तहत प्रथम अनुसूची में शामिल कर उन्हें आतंकी संगठन घोषित किया है।

किशन रेड्डी ने बताया कि अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए IS सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों का इस्तेमाल कर रहा है। इसे देखते हुए संबद्ध एजेंसियाँ सोशल मीडिया की लगातार निगरानी कर कानून के अनुसार कार्रवाई कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इन लोगों को होने वाली फंडिंग के बारे में पूरी जानकारी है। उनकी इस फंडिंग को रोकने की कोशिश की जा रही है।

वहीं इस मामले को लेकर खुफिया एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह एक तथ्य है कि केरल में कट्टरता प्रचलित है और एनआईए और राज्य, केंद्रीय खुफिया एजेंसियों द्वारा इस मामले में विस्तृत जाँच की गई है। कुछ संगठनों द्वारा ब्रेनवॉश किए गए युवा अभी भी हमारे रडार पर हैं और उन पर निगाह रखी जा रही है। सभी एजेंसियां ​​ऐसे नेटवर्क को नष्ट करने के लिए पूर्ण समन्वय के साथ काम कर रही हैं।”

खालिस्तानी समूह ‘सिख फॉर जस्टिस’ ने भारत में शुरू किया नियुक्ति अभियान: आतंकवाद विरोधी एजेंसियों ने जारी किया हाई अलर्ट

प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक समूह ‘सिख फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) ने अपने अलगाववादी एजेंडे का समर्थन करने वाले वोटरों के पंजीकरण के लिए डोर-टू-डोर अभियान चलाने घोषणा की है। उन्होंने इस अभियान का नाम ‘रेफरेंडम 2020’ रखा है। वहीं इस घोषणा के बाद भारतीय आतंकवाद विरोधी एजेंसियों ने राज्यों में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है।

अमेरिका स्थित खालिस्तानी समूह ने भारत में अपने समर्थकों को आकर्षित करने के लिए एक नई रणनीति तैयार किया है। बता दें इससे पहले अलगाववादी संगठन कनाडा और रूसी पोर्टलों पर ‘रेफरेंडम 2010’ के लिए अपने समर्थकों को रिझा नहीं पाया था। इस संगठन की योजना रेफरेंडम 2020 के लिए 1000 अम्बेसडर की भर्ती करने की है, जिन्हें 7,500 रुपए मासिक वजीफा प्रदान किया जाएगा।

एसएफजे का लक्ष्य 21 सितंबर से इस अभियान की शुरुआत करेगा। जिसमें 30 दिनों के भीतर पंजाब के 12,000 गाँवों को कवर किया जाएगा। चरमपंथी समूह ने पहले घोषणा की थी कि वे इस साल नवंबर में रेफरेंडम 2020 आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। इसने 4 जुलाई को अपना ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण शुरू करने के लिए पंजाब, दिल्ली और जम्मू और कश्मीर का चयन किया है। एसएफजे के जनरल काउंसलर और नामित आतंकवादी गुरपवंत सिंह पन्नून ने आज रेफरेंडम 2020 के बारे में घोषणा की और कहा कि भारत संगठन की वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशन को ब्लॉक करके पंजाब के लोगों को मताधिकार से वंचित कर रहा है।

गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने एसएफजे को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत गैरकानूनी करार दिया था। इसके नेताओं सहित, पन्नून, नज्जर को भी अधिनियम के तहत आतंकवादी घोषित किया गया था।

इस आतंकवादी समूह ने पहले पंजाब के किसानों को रेफरेंडम 2020 से अनुदान के रूप में प्रत्येक किसान को 3,500 रुपए देने की कोशिश की थी। समूह ने घोषणा की थी कि यह उन किसानों को मासिक आधार पर धन मुहैया कराएगा जो अपना ऋण नहीं चुका सकते हैं।

एमएचए ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की सिफारिश पर एसएफजे नेताओं की संपत्तियों को इस महीने के शुरू में जब्त करने का आदेश दिया था। एसएफजे कथित तौर पर सिख प्रवासियों को जुटाने की कोशिश कर रहा है और इस उद्देश्य के लिए वह अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका में बैठके आयोजित कर रहा है। आतंकवादी समूह के पास पाकिस्तान का समर्थन भी है, जो इन्हें पैसों के साथ जरूरत के समान प्रदान करने में भी सहायता करता है।

‘सुशांत का लैपटॉप और हार्ड ड्राइव लेकर चली गई रिया, बैंक अकाउंट का एक्सेस था’: सिद्धार्थ पिठानी ने CBI के सामने खोले कई राज

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी ने सीबीआई के सामने कबूल किया है कि सुशांत, दिशा सालियन की मौत के बारे में सुनकर डर गए थे। मीडिया सूत्रों के अनुसार, सिद्धार्थ पिठानी ने जाँच एजेंसी से कहा है कि सुशांत सिंह राजपूत चिंतित थे क्योंकि रिया चक्रवर्ती उनका लैपटॉप और हार्ड ड्राइव लेकर चली गई थी। रिया चक्रवर्ती ने 14 जून को उसी फ्लैट में मृत पाए जाने से 8 दिन पहले कथित तौर पर सुशांत के बांद्रा स्थित घर से चली गई थी।

मीडिया रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि रिया उनका इलेक्ट्रॉनिक सामान लेकर चली गई थी, जिसकी वजह से वह काफी बेचैन थे, क्योंकि रिया उनका पासवर्ड जानती थी और उनके सभी अकाउंट का रिया के पास एक्सेस था। जाँच की शुरुआत से ही सिद्धार्थ पिठानी सीबीआई की रडार पर हैं। जाँच एजेंसी द्वारा उन्हें कई बार तलब भी किया गया है और सीन के रीक्रिएट करने के लिए सुशांत सिंह राजपूत के आवास पर ले जाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता के मृत पाए जाने के बाद 14 जून को पिठानी भी सुशांत के फ्लैट में मौजूद थे।

गौरतलब है कि सिद्धार्थ पिठानी ने जाँच टीम को पूछताछ के दौरान बताया था कि 8 जून को रिया ने फ्लैट छोड़ने से पहले 8 हार्ड ड्राइव नष्ट करवाई थीं। सिद्धार्थ ने बताया था कि हार्ड ड्राइव के लिए बाकायदा आईटी प्रोफेशनल को बुलवाया गया था। लेकिन यह साफ नहीं किया कि उसे बुलाया किसने था। पिठानी के अनुसार, इस दौरान सुशांत और रिया दोनों कमरे में मौजूद थे और सब कुछ देख रहे थे। उनके अलावा डोमेस्टिक हाउसहेल्पर दीपेश सावंत और बावर्ची नीरज भी कमरे में थे।

इससे पहले सिद्धार्थ पिठानी ने समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि वह सुशांत को एक डॉक्टर के कहे अनुसार दवाइयाँ देते थे। उन्होंने कहा था, “मैंने दो गोलियाँ दीं, लेकिन मुझे नहीं पता कि वे किस चीज़ की थी।” हालॉंकि, रिया चकवर्ती से जुड़े सवाल पूछे जाने पर सिद्धार्थ बीच में ही रिपब्लिक टीवी का इंटरव्यू छोड़कर चले गए। इससे पहले उन्होंने रिया को जानने से इनकार किया था। साथ ही सुशांत के पिता केके सिंह के आरोपों को भी खारिज कर दिया था।

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को मुंबई में स्थित अपने घर में फाँसी लगाकर जान दे दी थी, जिसके बाद से मुंबई पुलिस लगातार इस मामले की जाँच कर रही थी। वहीं, पटना में सुशांत के पिता द्वारा एफआईआर दर्ज करवाने के बाद बिहार पुलिस की एक टीम भी इस मामले की जाँच के लिए मुंबई पहुँची थी।

अब यह मामला सीबीआई के पास है। वहीं, दूसरी ओर इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) भी अपनी जाँच में जुटी हुई है। रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उन्हें NCB ने गिरफ्तार किया है।

शाहीन बाग ‘एक्टिविस्ट’ आइमान रिजवी ने RSS पर जबरन कारसेवकों को ट्रेन में बैठाने और गोधरा में आग लगाने का झूठा आरोप लगाया

यूट्यूबर आइमान रिज़वी (Aiman Rizwi) ने दो वीडियो अपलोड किए हैं, जिसमें उसने जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के समर्थन में बात की है। दोनों वीडियो 15 सितंबर को अपलोड किए गए हैं। पहले वीडियो में, उसने गोधरा में 56 कारसेवकों की मौत के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को दोषी ठहराया। उसने कहा कि आरएसएस ने कारसेवकों को जबरदस्ती ट्रेन में बिठाया और जला दिया।

वीडियो में, रिज़वी ने आरोप लगाया कि गोधरा की घटना में मरने वाले एक भी कारसेवक उच्च वर्ग से नहीं थे। जले हुए पीड़ितों में से सभी निचली जाति के थे जो विवादित ढाँचे को गिराने के लिए अयोध्या गए थे। इसी तरह की गलत जानकारी फिक्शन राइटर अरुंधति रॉय द्वारा भी फैलाई गई थी। हालाँकि गलत जानकारी फैलाने की होड़ में उसने इस बात को नजरअंदाज कर दिया कि विवादित संरचना का विध्वंस 1992 में हुआ था, जबकि गोधरा की घटना 2002 में हुई थी।

उसने आरोप लगाया कि 2002 के गुजरात दंगों की साजिश 1990 में भाजपा सरकार के लिए एक आधार स्थापित करने के लिए विकसित की गई थी। रिजवी ने मजहब विशेष के लाखों लोगों की मौत के लिए पीएम मोदी को जिम्मेदार ठहराया।

उसने दावा किया कि एक बैठक में गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों से कहा कि वे हिंदुओं के खिलाफ कोई कार्रवाई न करें और उन्हें गोधरा की घटना का बदला लेने के लिए मजहब विशेष वालों को मारने दें। रिजवी का यह दावा भट्ट के बयान पर आधारित है। हालाँकि, नानावती-मेहता आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि संजीव भट्ट उस बैठक में भी उपस्थित नहीं थे जिसके बारे में उसने दावा किया था कि इस तरह के निर्देश दिए गए थे।

उसने अपने वीडियो में कफील खान का भी उल्लेख किया, जिसे पिछले तीन वर्षों में यूपी पुलिस ने दो बार जेल में डाला था। पहली बार वह गोरखपुर के अस्पताल में बच्चों की मौत से संबंधित मामले में जेल गया था। फिर, 2020 में उसे CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण देने के कारण जेल में डाल दिया गया। उसने कहा कि वह अपने मजहब के कारण जेल में था, और भट्ट एक अच्छा इंसान होने के कारण जेल गया था। उन्होंने महात्मा गाँधी के साथ दोनों की तुलना की और कहा कि उन्हें भी सत्यवादी होने के लिए आरएसएस द्वारा मार दिया गया।

रिजवी ने दावा किया कि कई प्रयासों के बाद जब मोदी सरकार भट्ट को किसी मामले में नहीं फँसा पाई, तो उन्होंने 1990 के एक पुराने लंबित मामले को उठाया और पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति की मौत के लिए उसे दोषी ठहराया। उसने आरोप लगाया कि इस मामले के आधार पर भट्ट को उनकी नौकरी से निलंबित कर दिया गया था। दिलचस्प बात यह है कि भट्ट को ड्यूटी से अनाधिकृत अनुपस्थिति के लिए 2011 में निलंबित कर दिया गया था।

उसने आगे आरोप लगाया कि योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में दस पुलिस अधिकारियों की हत्या कर दी और विकास दुबे एनकाउंटर मामले को यूपी सरकार का काम बताया। हालाँकि, विकास दुबे एक कुख्यात गैंगस्टर था, जिसके खिलाफ 60 से अधिक मामले दर्ज थे। पुलिस में उसके संपर्कों ने दुबे को छापे के बारे में जानकारी लीक कर दी जिसके कारण आठ पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई जिसके परिणामस्वरूप यूपी पुलिस ने उसकी खोजबीन की।

दूसरे वीडियो में, उसने संजीव भट्ट के बारे में अपनी बात जारी रखी। अंधविश्वास फैलाने के लिए सरकार और ब्राह्मणों को दोषी ठहराते हुए, उसने आरोप लगाया कि राम मंदिर भूमि पूजन अशुभ तिथि पर किया गया था। यह झूठ दिग्विजय सिंह जैसे कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा फैलाया गया था। रिजवी ने आगे आरोप लगाया कि भूमि पूजन बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए किया गया था।

उसने न्यायमूर्ति लोहिया की मृत्यु सहित कुछ मामलों का उल्लेख किया, और आरएसएस को दोषी ठहराया। वीडियो के अंत में, उसने दावा किया कि भारत में 90 प्रतिशत लोग अपनी नौकरी और बिजनेस खो चुके हैं। उसने लोगों से अपने मोबाइल का उपयोग करने और सरकार के खिलाफ वीडियो पोस्ट करने का आग्रह किया।

पिछले कुछ वर्षों में कई हिंदू विरोधी और भारत विरोधी यूटूबर्स सामने आए हैं। हाल ही में, यूपी पुलिस ने माँ सीता और अयोध्या पर अपमानजनक वीडियो पोस्ट करने के लिए हीर खान को गिरफ्तार किया।

कॉमेडियन कुणाल कामरा को कंगना ने जमकर लताड़ा, स्पष्ट शब्दों में कहा- मूर्ख

बॉलीवुड-ड्रग नेक्सस को उजागर करने के बाद बॉलीवुड क्वीन कंगना महाराष्ट्र सरकार और शिवसेना के आँखों में खटकने लगी है। वहीं अब कंगना ने कॉमेडियन कुणाल कामरा के अपमानजनक ट्वीट पर जमकर लताड़ते हुए उन्हें स्पष्ट शब्दों में मूर्ख घोषित कर दिया है। बता दें कुणाल कामरा खबरों में बने रहने के लिए अक्सर अजीबोगरीब पोस्ट और हरकतें करते ही रहते हैं।

दरअसल, कंगना ने हाल ही में एक ट्वीट किया था कि कैसे नशे की लत, ग्लैमर की दुनिया को पहचानने और अप्रभावित रहने के लिए एक मजबूत आध्यात्मिक पक्ष की ज़रूरत होती है। वहीं इस पोस्ट पर खुद को अपने ट्विटर बायो में पाखंडी बताने वाले कुणाल कामरा ने कंगना पर तंज कसते हुए उनकी तुलना भारतीय आध्यात्मिक गुरु सदगुरु से कर दी।

जिसके बाद कंगना ने कामरा के वाहियात कमेंट पर उन्हें मूर्ख कहते हुए लताड़ा और कहा, “ये मूर्ख लोग मेरे संघर्ष, बौद्धिकता, आध्यात्मिक गहराई, हिम्मत, सफलता और उपलब्धियों का श्रेय किसी ताकतवार आदमी को देने के लिए बहुत बेताब हैं। मैं खुद अपने दम पर सफल हुई हूँ और अपनी शर्तों पर जिंदगी जी रही हूँ। यह इनके अहंकार को चोट पहुँचाता है। इसे स्वीकार करो।”

वहीं कंगना के बेबाक जवाब से बेज्जती महसूस करते हुए कामरा ने कंगना को दी गई Y सिक्योरिटी का मजाक उड़ाया। कुणाल कामरा ने ट्वीट कर लिखा कि मैं सोच रहा था कि तुम्हारी जैसी शक्तिशाली महिला को Y सुरक्षा की क्यों जरूरत पड़ी।

जिस पर मुंहतोड़ जवाब देते हुए कंगना ने लिखा कि एक लोकतान्त्रिक देश में यह संविधान का कर्तव्य है कि वह एक क्रांतिकारी को सुरक्षा दें। इस केस में आप लोकतंत्र के दो पहलू देखते हैं एक बचाव करने वाला और एक बचने वाला। उन्होंने कामरा का मजाक उड़ाते हुए कहा कि तुम दोनों में से कुछ भी नहीं बन पाओगे। साथ ही कंगना ने सलाह दी कि एक ऐसा इंसान बनों जो देश के लिए कुछ कर सके।

कामरा इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने अपने मानसिक दिवालिएपन का खुलासा करते हुए रानौत की फिल्म मणिकर्णिका के शूट से एक वीडियो साझा किया जिसमें वह एक प्रोप पर घुड़सवारी के दृश्य की शूटिंग कर रही है।

अब ये तो हर किसी को पता है कि एक्शन फिल्मों में स्टंट करना आम बात है और इसके लिए स्टंटमैन या बॉडी डबल्स एक्टर्स सीन शूट करने के लिए हायर किए जाते हैं। विशेष प्रभाव दिखाने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग भी बहुत आम है। इसके अलावा पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के बढ़ते प्रभाव की वजह से हिंसक एक्शन दृश्यों को शूट करने के लिए वास्तविक घोड़ों या अन्य जानवरों का उपयोग करना लगभग असंभव हो गया है।

इसलिए कंप्यूटर जनरेटेड इमेजरी का उपयोग आमतौर पर ऐसी स्थितियों में किया जाता है और अभिनेताओं को वास्तविक जानवरों के बजाय प्रॉम्प्स के साथ अपने दृश्यों को शूट करने की आवश्यकता होती है। उनका यह ट्वीट कंगना द्वारा उनपर की गई टिप्पणी के एकदम सटीक बैठता है। इससे यह तो पता चल गया कि कामरा के ट्वीट्स भी उन्हीं की तरह मज़ाकिया है, जिस पर बिल्कुल भी हँसी नहीं आती है।

यह पहली बार नहीं है कि कामरा को सार्वजनिक रूप से अपमान का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले लेखक चेतन भगत ने भी उनकी बेज़्ज़ती की थी। वहीं कामरा को कई एयरलाइनों द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ अजीबोगरीब हरकते करते हुए एक वीडियो शूट किया था।

भारत ने एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक से लिया कर्ज: वामपंथी मीडिया और राहुल गाँधी ने चीन से ऋण लेने का किया झूठा दावा

भारत और चीनी सेना के बीच जारी गतिरोध के बीच भी कुछ लोग और वामपंथी मीडिया संगठन हैं, जिन्होंने विस्तारवादी चीनी डिजाइन के खिलाफ भारत के रुख को कमजोर करने और मोदी सरकार के खिलाफ अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए इस संकट का इस्तेमाल किया है।

पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने आज एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर तंज कसा। राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए बताया कि भारत सरकार ने दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के बीच चीन स्थित एक बैंक से भारी ऋण लिया है।

राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “आप chronology समझिए: PM बोले कि कोई सीमा में नहीं घुसा। फिर चीन-स्थित बैंक से भारी क़र्ज़ा लिया। फिर रक्षामंत्री ने कहा चीन ने देश में अतिक्रमण किया। अब गृह राज्य मंत्री ने कहा अतिक्रमण नहीं हुआ। मोदी सरकार भारतीय सेना के साथ है या चीन के साथ? इतना डर किस बात का?”

इससे पहले आज, ‘द टेलीग्राफ’ में  ‘China loan horse without a mouth‘  शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी, जिसमें कहा गया था कि भारत ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY) के तहत किए गए उपायों का समर्थन करने के लिए $750 मिलियन के लिए एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के साथ एक ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि PLA पर जारी गतिरोध के बीच भारत ने बैंक से 1,350 मिलियन डॉलर के दो ऋण लिए, जिसमें बीजिंग बहुसंख्यक शेयरधारक है।

द टेलीग्राफ ने अपने लेख में लिखा, “गलवान नरसंहार (जिसमें चीन को भी काफी हताहतों का सामना करना पड़ा) के चार दिन बाद 19 जून को, भारत ने AIIB के साथ कोरोना वायरस वायरस के संकट के लिए 750 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह वह दिन भी था जब प्रधानमंत्री मोदी ने “no-intrusion” का दावा किया था।”

लेख में आगे कहा गया, “8 मई को, ऐसे समय में जब पूर्वी लद्दाख में कई बिंदुओं पर चीनी घुसपैठ की पहली रिपोर्ट आनी शुरू हो गई थी, भारत सरकार द्वारा काफी हद तक इसे नजरअंदाज कर दिया गया था। भारत सरकार ने महामारी से लड़ने के लिए AIIB से 500 मिलियन डॉलर का अन्य ऋण लिया गया था।” यह लेख भारत सरकार द्वारा सीमा पर तनाव के मद्देनजर चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाने की नीति पर सवाल उठाता है, साथ ही बीजिंग से ऋण देने की बात पर भी जोर देता है।

राहुल गाँधी ने कहा कि भारत सरकार ने चल रहे LAC गतिरोध के दौरान चीन स्थित बैंक से ऋण लिया, मगर उन्होंने ये नहीं बताया कि यह एशियाई इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) है, जो चीन से बाहर है और एक बहुपक्षीय संस्था हैं, जिसमें 100 से अधिक सदस्य हैं।

इस बैंक की स्थापना एशिया और इससे आगे के क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक परिणामों में सुधार के उद्देश्य से की गई थी। बैंक का संचालन जनवरी 2016 से शुरू हुआ। इसके 103 से अधिक सदस्य हैं। हालाँकि चीन 26. 61 प्रतिशत वोटिंग शेयरों के साथ बैंक का बड़ा शेयरहोल्डर है, लेकिन भारत 7.6 प्रतिशत वोटिंग के साथ दूसरा सबसे बड़ा शेयरहोल्डर है। किसी भी अन्य बहु-राष्ट्र संस्थान की तरह, AIIB एक ऐसा संगठन है जो अपने सदस्य देशों को इंफ्रास्ट्रक्टर डेवलपमेंट की चुनौतियों से उबरने में मदद करता है।

हालाँकि, राहुल गाँधी ने ‘चीन स्थित बैंक’ से ऋण लेने कै आरोप लगाते हुए इस तरह की बारीकियों को जानबूझकर अनदेखा किया। चूँकि भारत संगठन का एक हिस्सा है और बड़ी संख्या में वोटिंग शेयरों का स्वामित्व रखता है, इसलिए कानूनी रूप से और नैतिक रूप से, अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए ऋण प्राप्त करना उसके अधिकार में है।

टेलीग्राफ और राहुल गाँधी ने जो कहा, उससे इतर AIIB वाणिज्यिक चीनी बैंक नहीं है। यह एक बहुपक्षीय संस्था है। सच्चाई यह है कि इसका मुख्यालय बीजिंग में है, मगर यह चीनी बैंक नहीं है। इसके अतिरिक्त, अन्य बहुपक्षीय संगठनों जैसे ब्रिक्स बैंक या न्यू डेवलपमेंट बैंक में, भारत के वित्त मंत्री राज्यपालों के बोर्ड में होते हैं।

सिर्फ 2 महीने में 16 मामले: UP, MP, हरियाणा, दिल्ली सहित कई राज्यों में तेजी से पाँव पसार रहा है लव जिहाद

उत्तरप्रदेश में लव जिहाद जैसी गंभीर समस्या पर भले ही योगी सरकार अब सख्त होकर पूरे मामले में जाँच करवा रही है। लेकिन हकीकत यह है कि ये किसी एक राज्य की परेशानी नहीं है। पूरे देश भर में लव जिहाद के ऐसे तमाम मामले सामने आ चुके हैं जिनमें हिंदू लड़कियों को प्रेम के जाल में फँसा कर पहले उनका धर्म परिवर्तन करवाया गया, उनसे निकाह किया गया और फिर या तो उन्हें मार दिया गया या उन्हें साथ रख कर प्रताड़ित किया जाता रहा। 

आज हम अलग-अलग शहरों के ऐसे ही कुछ हालिया केसों पर आपका ध्यान दोबारा आकर्षित करवाने जा रहे हैं ताकि ये ज्ञात रहे कि लव जिहाद कोई काल्पनिक संकल्पना नहीं है बल्कि वास्तव में कट्टरपंथियों की रची गई साजिश का हिस्सा है, जो आज हिंदू समाज के लिए नासूर बन गई है और न जाने कितनी हिंदू लड़कियों की जिंदगी तबाह कर रही है।

ताजा मामला आज मेरठ से आया है जहाँ 4 बच्चों का अब्बा अब्दुल्ला, अमन बन कर लड़कियों को फँसाता था और फिर उनका अपहरण करके उनके साथ दुष्कर्म करता था। पुलिस ने आज इस अब्दुल्ला को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। इसके अलावा एक बंटी खान नाम का युवक भी नाबालिग लड़की का अपहरण करने के आरोप में गिरफ्तार हुआ है।

पिछले दो महीने में लव जिहाद के कहाँ से कितने मामले?

  1. हरियाणा के पानीपत से पिछले महीने 22 अगस्त को 25 साल की विधवा के साथ लव जिहाद, मारपीट और गर्भवती होने के बाद घर से निकालने का मामला सामने आया था। महिला ने इस संबंध में अपनी शिकायत भी करवाई थी। महिला का कहना था कि उसे एक साल पहले एक गोल्डी नाम के लड़के ने प्रेम के जाल में फँसाया, पर बाद में पता चला कि उसका असली नाम निजामुद्दीन है। अपनी शिकायत में महिला ने बताया था कि जब उसने इस रिश्ते का विरोध किया तो उससे जबरन निकाह कर लिया गया और फिर उसे गर्भवती बना कर घर से निकाल दिया गया। 
  1. हरियाणा के मेवात में स्थित तावड़ू में एक व्यक्ति ने 10-12 दिन पहले अपनी बेटी के गायब होने के बाद अपहरण का मामला दर्ज करवाया। शिकायत में लड़की के पिता ने कहा कि वर्ग विशेष का एक लड़का उसकी बेटी को अपने जाल में फँसाकर भगा ले गया। उन्होंने बताया कि लड़की युवक के कहने पर शुक्रवार की रात घर से नकदी और आभूषण भी अपने साथ ले गई। काफी छानबीन के बाद भी दोनों का कहीं कोई सुराग नहीं लगा है। उन्होंने बताया कि आरोपित के मोबाइल पर घंटी तो जा रही है लेकिन वह रिसीव नही कर रहा।
  1. 13 सितंबर की खबर के अनुसार उत्तरप्रदेश के आगरा में ऐसे ही एक नाबालिग लड़की अपने घर से कुछ समय पहले नाराज होकर निकली और समुदाय विशेष का एक युवक इकरार उसे आकर हरियाणा ले गया। बाद में उसे कुछ दिन वहाँ रखा गया और फिर वह उसे अपने घर सहारनपुर ले गया। लड़की को घर ले जाने के बाद पहले उसका धर्म परिवर्तन करवाया गया और बाद में उसका नाम इकराना रख कर उससे निकाह कर लिया गया। कुछ दिन पहले जब पुलिस ने लड़की के पिता की शिकायत पर पूरे मामले की छानबीन करके आरोपित इकरार को गिरफ्तार किया, तब मालूम चला कि इकरार ने लड़की को पहले अपना नाम रवि बताकर दोस्ती की थी और फिर धीरे-धीरे उसे प्रेम के जाल में फँसा लिया था।
  1. उत्तर प्रदेश के कानपुर में लव जिहाद का मामला जिस कारण गर्माया वो केस शालिनी यादव से फातिमा बनी लड़की का है। अभी कुछ महीने पहले ही 22 साल की शालिनी अपने घर से गायब हुई थी। बाद में पता चला कि उसने अब फैजल नाम के लड़के से निकाह कर लिया है और अपना नाम, धर्म, मैरिटल स्टेटस सब बदल लिया है। इस केस में लड़की के भाई ने आरोप लगाया था कि पूरा मामला लव जिहाद का है। उसकी बहन 10 लाख रुपए लेकर घर से निकली थी और उसे बहला फुसला कर फँसाया गया।
  1. पिछले महीने 25 अगस्त को लव जिहाद का एक मामला यूपी के लखीमपुर से सामने आया था। इस केस में मोहम्मद दिलशाद ने एक दलित लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाया और अपने मनसूबे नाकाम होता देख उससे बलात्कार करके बेहरमी से मार डाला। दरअसल, दिलशाद को गुस्सा इस बात का था कि उसने जिस लड़की के साथ प्रेम जाल रचा, उसके घरवालों ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी। पर दिलशाद चाहता था कि लड़की धर्म परिवर्तन करके उससे निकाह करे। जब लड़की ने इससे इंकार किया तो उसे धोखे से बुला कर उसकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई।
  1. यूपी के मेरठ में 31 जुलाई को समुदाय विशेष के कुछ युवकों ने अपने साथियों के साथ एक दलित लड़की को घर से उठाने का प्रयास किया। हालाँकि, जब परिवार ने विरोध किया तो लड़की किसी तरह उनसे बच गई। इस मामले में पुलिस में सुहेल के खिलाफ़ एफआईआर हुई। जिसमें युवती के परिजनों ने बताया कि सुहेल पिछले 6 महीने से नाम बदलकर उनकी बेटी से बात करता था। मगर जब लड़की को इस बारे में पता चला तो उसने बात करने से मना कर दिया। जिसके चलते उसे कई लोगों के साथ मिलकर घर से उठाने की कोशिश की गई।
  1. 23 जुलाई को मेरठ के ही परतारपुर में लव जिहाद का वीभत्स चेहरा सामने आया था। प्रिया नाम की महिला को पहले शमशाद ने कुछ साल पहले अमित गुर्जर बनकर फँसाया और फिर हकीकत खुलने पर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कहने लगा। हालाँकि, प्रिया खुद को और अपनी बेटी को इन चीजों से बचाती रही। मगर, लॉकडाउन का फायदा उठाकर शमशाद ने दोनों को जान से खत्म कर दिया और घर में गड्डा खोद कर दफना दिया। इस केस का खुलासा प्रिया की सहेली चंचल के कारण पूरे 4 महीने बाद हुआ था।
  1. कानपुर के गोविंदनगर इलाके में भी पड़ताल में मालूम चला था कि एक आसिफ शाह नाम के युवक ने पहले एक हिंदू युवती को अपने जाल में फँसाया फिर उसका ब्रेनवॉश करके जबरन उसका धर्म परिवर्तन करवाया। बाद में लड़की खराब और मानसिक रूप से अस्थिर हालत में पाई गई। परिजनों की शिकायत पर इस मामले को धारा 366 के तहत दर्ज किया गया है।
  1. एक अन्य मामला कानपुर के बजरिया थाने में सामने आया। जहाँ लकी खान नाम के एक युवक ने अपना हिंदू नाम बता कर नाबालिग लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाया और उसकी अश्लील तस्वीरें ले कर इस्लाम धर्म कबूलने और निक़ाह करने के लिए युवती को ब्लैकमेल करने लगा। इस केस में भी लड़की के परिजनों ने लकी खान के ख़िलाफ़ एफआईआर करवाई और बताया कि लड़की मंदिर के बाहर फूल की दुकान लगाती थी। उससे दोस्ती करने के लिए लकी खान ने अपना नाम सिर्फ लकी ही बताया। जिससे युवती को आभास नहीं हुआ कि युवक संप्रदाय विशेष से है। 
  1. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी पिछले महीने की 4 अगस्त को लव जिहाद का केस देखने को मिला। आउटर दिल्ली के किराड़ी इलाके में अनवर नाम के एक लड़के ने 20 साल की लड़की को अपना नाम अनु बताकर फँसाया और फिर कई महीनों तक उसके साथ बलात्कार करता रहा। सबसे पहले उसने जब युवती के साथ गलत काम किया तब उसने उसे कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ डाल कर पिलाया था। फिर उसके बेहोश होते ही उसका बलात्कार किया और पूरी घटना को शूट कर लिया। बाद में यह सिलसिला चलता रहा। एक बार उसने लड़की को विश्वास में लेने के लिए उससे मंदिर में शादी भी की। मगर कुछ समय बाद पता चला वह अनु नहीं अनवर है।
  1. दिल्ली के ही ओखला में सिंतबर की शुरुआत में दो पक्षों में विवाद का मामला सामने आया था। इस केस को पहले पुलिस ने मारपीट का मामला बताया था। हालाँकि बाद में मीडिया खबरों से इस केस में लव जिहाद एंगल का खुलासा हुआ। साथ ही ये भी पता चला था कि आरोपित राजा ने पीड़ित की छोटी बेटी को सल्लन ने लल्लन बनकर फँसाया था और कुर्शीद ने बड़ी बेटी को राजा बनकर। मगर, जब दोनों बहनों को हकीकत का पता चला और उन्होंने रिश्ते से इंकार किया तो गाड़ी पार्किंग का बहाना करके उनके परिवार पर हमला बोल दिया गया।
  1. कानपुर के ही एक अन्य केस में हाल में पीड़िता ने मीडिया से खुद आपबीती साझा की। लड़की ने बताया कि शीबू अली नामक लड़के ने उससे सचिन बनकर दोस्ती की और फिर धीरे-धीरे अपनी बातों में फाँसता गया। जब अफेयर शुरू हुआ तो उसकी हरकतों से लड़की को मालूम हुआ कि सचिन का नाम शीबू है।

    पीड़िता के अनुसार, लड़का उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता था। उसके साथ मारपीट करता था। इतना ही नहीं, एक बार तो उसने लड़की को मौलवी के साथ संबंध बनाने के लिए उकसाया। जब लड़की ने इंकार किया तो उसे पीटा गया। बाद में वह भागकर अपने घर आ गई। हालाँकि तब भी शीबू रुका नहीं, उसने दोबारा उसको फुसलाया और फिर उसे अपने साथ रख कर वही दबाव बनाने लगा। जिसके चलते लड़की एक दिन घर आ गई। लेकिन 14 अगस्त को शीबू ने उसे बुलाकर दोबारा वही सब करना चाहा और इंकार करने पर उस पर चाकू से हमला कर दिया गया।
  1. मध्य प्रदेश का ग्वालियर भी लव जिहाद से अछूता नहीं है। 16 अगस्त को सामने आए एक वीडियो के बाद पता चला कि वहाँ एक महिला है जिसे जम्मू कश्मीर के युवक ने झूठी पहचान बताकर फँसाया और फिर शादी कर ली। हालाँकि जब महिला उसके घरवालों से मिली तब उसे लड़के के मजहब का भान हुआ और पता चला लड़के का नाम साहिल कुमार नहीं शौकत अली है। इसका खुलासा होने के कुछ दिन बाद उन्होंने महिला को पीट-पीट कर भगा दिया था। वीडियो में उसने अपने शरीर के घाव भी दिखाए।
  1. बिहार के हरलाखी थाने में 20 अगस्त को एक नाबालिग के अपहरण का मामला सामने आया था। हालाँकि, इस केस में लव जिहाद का एंगल था या नहीं ये कहना मुश्किल है। लेकिन ये बात एक दम सच है कि तीन बच्चों का पिता आरोपित शाबिर जब 14 साल की लड़की को लेकर भागा तो उसके परिवार वालों का कहना यही था कि लड़की का धर्मपरिवर्तन करवाने ले गए हैं। लड़की ने भी बरामद होने के बाद यही बताया कि उसका अपहरण करके उससे सिर्फ़ अल्लाह का नाम लेने को कहा जाता था।
  1. मेरठ में आज 16 सितंबर को कंकरखेड़ा से एक अब्दुल्ला नाम का युवक गिरफ्तार हुआ। इस पर आरोप है कि यह अमन बनकर लड़कियों को फँसाता और फिर उनका अपहरण करके उनके साथ दुष्कर्म करता। उसने हाल में 3 सितंबर को एक युवती का अपहरण किया था। जिसकी बरामदगी 13 दिन बाद हुई। 42 वर्षीय अब्दुल्ला 4 बच्चों का अब्बा बताया जा रहा है।
  2. ताजा मामले की बात करें तो उत्तर प्रदेश के आगरा के इबादतनगर इलाके से बंटी खान ने 11 सिंतबर को एक नाबालिग को अगवा किया था। बंटी ने टिकटॉक के जरिए पहले लड़की से दोस्ती की थी और फिर अपने साथियों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया था। मामले के तूल पकड़ने के बाद यूपी पुलिस ने आज बंटी खान समेत 7 को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया और किशोरी बरामद कर ली गई।
  3. उत्तरप्रदेश के बागपत जिले के खेखड़ा गाँव में भी पिछले दिनों लव जिहाद का एक मामला उजागर हुआ था। हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया था कि एक दूसरे समुदाय का लड़का आदिल शादीशुदा महिला को भगा कर ले गया। 7 महीने बीत जाने के बाद भी महिला का कोई सुराग नहीं है। अगर उसे जल्द नहीं मिली तो वह हंगामा करेंगे। हालाँकि पुलिस की कार्रवाई के बाद एक हफ्ते पहले पीड़िता बरामद कर ली गई और आरोपित को जेल भेज दिया गया।

उल्लेखनीय है कि देशभर में इस्लामी कट्टरपंथ की देन यानी लव जिहाद के ये केवल चुनिंदा मामले हैं। जिन्हें आपके सामने उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है। वरना देश के विभिन्न राज्यों में आज ऐसे अनेकों घटनाएँ हैं जहाँ यदि पड़ताल की जाए तो एक तय पैटर्न साफ नजर आता है। मगर, दुखद बात ये है कि जब भी इस मामले को कोई दल या संगठन प्रमुखता से उठाता है तो एक निश्चित तबके के लोग इसे समाज की अखंडता के खिलाफ़ बताते हैं और दक्षिणपंथियों के दिमाग की उपज करार देने में जुट जाते हैं।

वामपंथ का गढ़ कहे जाने वाले केरल में लव जिहाद के कई मामले पिछले कुछ समय में सामने आए हैं। एक मजहबी सम्मेलन की ओर से हाल में प्रेस रिलीज जारी करके यह बात कही गई थी कि केरल में लव जिहाद के नाम पर हिन्दू महिलाओं को टारगेट किया जा रहा है। हाल में ISIS ज्वॉइन करने वाले जो 21 लोग पकड़े गए हैं उनमें से आधी महिलाएँ हैं जो हिन्दू थीं, इनका धर्मांतरण करवाया गया।

इससे एक बात साफ हो जाती है कि लव जिहाद का खेल केरल में जोरों से चल रहा है। इसके अलावा केरल में लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं ने ईसाइयों की चिंता भी बढ़ाई है। कुछ समय पहले केरल के सबसे बड़े चर्च साइरो मालाबार ने इस पर गहरी चिंता जताई थी। साइरो मालाबार मीडिया कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया था कि लव जिहाद के नाम पर ईसाई लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है। उनकी हत्या हो रही है।

लव जिहाद में नजर आता है एक पैटर्न

लव जिहाद को लेकर आज भी जिन लोगों के मन में संदेह उत्पन्न होता है या इतने मामले पढ़ने के बाद भी उन्हें लगाता है कि ये सब समाज का ही हिस्सा है तो उन्हें इन केसों में कुछ खास बिंदुओं पर गौर करने की आवश्यकता है। ये वो बिंदू हैं जो लव जिहाद से जुड़े हर दूसरे मामले में देखने को मिल जाएँगे

जैसे इन केसों में प्रायः, संप्रदाय विशेष का युवक का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होता, और युवक खुद या तो बेरोजगार होता है या फिर छोटे-मोटे काम करके अपना पेट पालता है। लेकिन, सोचने वाली बात ये है कि जब उन लोगों को हिंदू लड़कियों को फँसाना होता है तो अचानक खुद को मेंटेन रखने के लिए इनके पास पैसे आ जाते हैं। वह महँगे कपड़े पहनते हैं, महँगे तोहफे खरीदते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात जब वह पकड़े जाते हैं तो कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें अव्वल दर्जे की कानूनी मदद भी मिलती है।

इन सबको देखते हुए सवाल तो बनता है न कि आखिर हिंदू लड़कियों से प्रेम के दौरान खुद को सजाने के लिए उनके पास पैसा कहाँ से आता है? शालिनी यादव के केस में उसके भाई ने पूछा था कि फैजल बेरोजगार है, और उसके पिता फर्नीचर डीलर हैं, तो उसके पास आखिर शालिनी को पहले कानपुर से दिल्ली और दिल्ली से प्रयागराज ले जाने के पैसे कहाँ से आए? किसने उसे फंड दिया? आखिर कैसे उसका केस वरिष्ठ वकील न केवल दिल्ली हाईकोर्ट में लड़ रहे हैं, बल्कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी लड़ रहे हैं?

यहाँ बता दें कि लव जिहाद मामले में कई बार सामूहिक रूप से किए गए अध्य्यन में पाया गया कि समुदाय विशेष के युवक सोशल मीडिया पर फेक आईडी बनाकर हिंदू लड़कियों को फँसाते हैं। वह पहले हिंदुओं की तरह वेशभूषा धारण करते हैं फिर उनसे रिश्ता बनाकर शारीरिक संबंध स्थापित करते हैं। कई बार इस अपराध की वीडियो बना ली जाती है। बाद में रिकॉर्डिंग दिखा कर या तो उनका धर्म परिवर्तन हो जाता है या फिर निकाह।

ऐसे अधिकतर रिश्ते शरिया कानून के हिसाब से ही चलते हैं जहाँ लड़की का धर्म परिवर्तन अनिवार्य बताया जाता है। ये लड़कियाँ अधिकांश 15-20 साल की होती हैं। जब निकाह के बाद इन लड़कियों के परिवार इन्हें छोड़ देते हैं तब इन्हें ऐसे बंधन में बाँध कर रखा जाता है जहाँ औरत को कोई अधिकार नहीं होते। जब वह आवाज उठाती हैं तो उन्हें कई बार प्रताड़ित किया जाता है और कई बार जान से मार दिया जाता है।

साथ ही, ऐसे कई मामलों में यह भी देखा गया है कि लड़कियों का सामूहिक शारीरिक शोषण से ले कर, अपने दोस्तों, भाई, पिता आदि से बलात्कार तक करवाते हैं। जब ऐसे मामले सामने आते हैं तो पता चलता है कि लक्ष्य प्रेम का नहीं, बल्कि हिन्दू लड़कियों और उनके परिवारों को समाज में नीचा दिखाना और परिवारों को तबाह करना होता है।