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सचिन बन अली ने फँसाया, गौमांस खिला इस्लाम कबूलने को किया मजबूर: कानपुर की हिंदू पीड़िता

पहचान छिपाकर हिंदू लड़कियों को फॅंसाने की घटनाएँ लगातार उत्तरप्रदेश के कानपुर से सामने आ रही है। इसी तरह के एक मामले में शीबू अली ने सचिन बनकर एक लड़की को पहले प्रेमजाल में फॅंसाया। फिर अश्लील वीडियो बनाकर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव डाला। उसे गौमांस खिलाया। मौलवी संग शारिरिक संबंध बनाने का दबाव डाला। जब लड़की ने विरोध किया तो चाकू से उस पर हमला किया।

रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता ने खुद मीडिया के सामने आपबीती बयॉं की। उसने बताया कि शीबू अली नाम के लड़के में उससे सचिन बनकर दोस्ती की थी। बातचीत के दौरान उसने मुझे अपनी बातों में फँसा लिया और हमारा अफेयर शुरू हो गया। बाद में उसकी हरकतों को देखने के बाद पता चला कि वह हिंदू नहीं मुस्लिम है।

पीड़ित ने बयाँ किया दर्द (साभार: न्यूज़ ट्रैक)

पीड़िता ने बताया, “शीबू मुझ पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा। मेरे साथ मारपीट करता रहा। एक दिन तो एक मौलवी को साथ लेकर आया और मुझसे कहने लगा कि तुम्हें इससे संबंध बनाना पड़ेगा। मैंने इसका विरोध किया। जब मैंने धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर दिया तो उसने मुझ पर चाकू से हमला कर दिया।”

पीड़िता ने कहा, “शीबू अली ने सचिन बनकर मुझसे दोस्ती की थी। उससे मेरा 2013 में अफेयर शुरू हुआ था। इसके बाद बहला-फुसलाकर वो मुझे 2014 में नोएडा ले गया। सेक्टर-63 में उसने मुझे रखा। जिस एरिया में उसने मुझे रखा था वह पूरा मुस्लिम इलाका था। शुरुआत में उसने अपना नाम सचिन शर्मा बताया था। लेकिन धीरे-धीरे मुझे उसकी ऐक्टिविटी देखकर शक होने लगा। एक दिन मैंने उसे मस्जिद में जाते हुए देखा। इसके बारे में पूछा तो उसने मेरे साथ मारपीट की। उसने मेरे साथ कुछ वीडियो बनाए थे। जिसको लेकर वो मुझे ब्लैकमेल करता था। वीडियो वायरल करने की धमकी देता था और कहता था बदनाम कर दूँगा। मुझे किसी से बातचीत नहीं करने देता था, और कमरे में बंद करके रखता था।”

पीड़िता ने जबरन संबंध बनाने वाली घटना के बारे में बताते हुए कहा, “एक दिन वो मस्जिद के मौलवी को लेकर आया और कहने लगा कि मौलवी को तुम्हे खुश करना है। मैने उसकी इस हरकत का विरोध किया। उसने मुझे मौलवी के सामने ही जमकर पीटा। लगातार मुझपर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाता था। कहता था कि तुम्हें मुस्लिम बनकर रहना है, मैं भी मुस्लिम हूँ। उसकी इन बातों से मुझे काफी शॉक लगा। फिर जैसे-तैसे करके किसी तरह से मैं वापस कानपुर आ गई और अपनी फैमली के साथ रहने लगी।”

पीड़िता ने आगे बताया, “डेढ़ से दो साल बाद फिर से मेरे संपर्क में आया और कहने लगा कि मुझसे गलतियाँ हुई है। तुम जैसे रहना चाहती हो वैसे रहो। तुम पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डालूँगा। उसकी बातों से मेरा दिल पिघल गया। एक बार फिर से मैं उसकी बातों में आ गई और साथ रहने लगी। शुरुआत में तो सब सही था। लेकिन फिर इसने अपने घर के पास एक किराए का कमरा लेकर मुझे रखा। जिस इलाके में इसने कमरा लिया वहाँ भी सारे मुस्लिम रहते थे।”

ससुरालवालों के रवैये को लेकर हिंदू युवती ने बताया,” शीबू के परिजन आते थे। वो मुझपर दबाव डालते थे कि तुम्हे धर्म परिवर्तन करना पड़ेगा। तुम्हे मुस्लिम बनकर रहना पड़ेगा, नॉनवेज खाना पड़ेगा, नकाब पहनना पड़ेगा। जब मैं इनका विरोध करती थी तो ये लोग मिलकर मेरे साथ मारपीट करते थे। मुझसे कई बार कहा गया किब तुम जब धर्म परिवर्तन करोगी तभी तुम्हें ठीक से रखा जाएगा। वरना तुम्हारे साथ यहीं होगा।”

पीड़िता ने बताया, “मौका पाकर मैं वापस अपने घर पर वापस आ गई। इसके फिर डेढ़ से दो साल बाद शीबू ने मुझसे बातचीत करने का प्रयास किया, और बहलाने फुसलाने की कोशिश की कि मैं फिर से इसके साथ रहने लगूँ, लेकिन मैं नहीं मानी। फिर इसने कई बार ये बोला अच्छा ठीक है मुझे तुमसे बात करनी है सिर्फ बात कर लो आकर, फिर कभी तुमको परेशान नहीं करूँगा। मैंने काफी बार मना कर दिया फिर सोचा चलो सुन लेते है इसे क्या कहना है।”

हमले के बारे में बताते हुए लड़की ने बताया, “बीते 14 अगस्त 2020 को इसने मुझे बातचीत करने के बुलाया, शीबू और इसका भाई इरशाद वहाँ पहले से ही मौजूद थे। मुझ पर साथ में रहने का दबाव बना रहा था, जब मैंने उसकी बात नहीं मानी तो, शीबू के भाई ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और शीबू ने मेरे ऊपर चाकू से हमला कर दिया। जिस दौरान वहाँ से जा रहे दो लड़कों को मैंने मदद के लिए बुलाया, जिसको देखते ही शीबू अली का भाई भाग गया लेकिन ये नहीं भाग पाया।”

पीड़िता की माँ ने बताया कि हत्या के आरोप में शीबू अली को जेल भेज दिया गया है। वहीं एसपी साउथ ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि मामले में पीड़िता से पूछताछ की जाएगी। साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जाँच एसआईटी से करवाई जाएगी।

कानपुर के जूही इलाका धीरे धीरे बन रहा लव जिहाद का अड्डा

गौरतलब है कि कानुपर की जूही कॉलनी शालिनी यादव मामले के बाद से खबरों की चर्चा में आया था। लेकिन स्थानीय लोग इसके बारे में पहले से बात करते आ रहे हैं। 20 जून को जब शालिनी लापता हुईं तो उनके पिता ने जूही कॉलनी के युवक सहित सात लोगों पर अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन इस अपराध के बाद पूरी कॉलनी चर्चा में बनी हुई है। क्योंकि सिर्फ शालिनी ही नहीं जूही कॉलोनी से ऐसे दर्जनों मामले सामने आए जिसमें हिंदू लड़कियों को मुस्लिम युवकों द्वारा लव जिहाद का शिकार बनाया गया है।

‘दिल्ली के युवा नेता भी लेते हैं ड्रग्स’, कहने के बाद रिया (एंड्रिया डिसूजा) को कॉन्ग्रेस से देना पड़ा इस्तीफा

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा से ट्रोल होकर चर्चा में आने वाली रिया उर्फ़ एंड्रिया डिसूजा ने कॉन्ग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। रिया ने ट्विटर पर जानकारी दी है कि उन्होंने भविष्य में बेहतर संभावनाओं के लिए ‘ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कॉन्ग्रेस’ को अलविदा कह दिया है। उन्होंने सलमान अनीस, संजीव बत्रा और शशि थरूर को टैग करते हुए कहा कि इनलोगों के साथ काम करना काफी अच्छा अनुभव रहा।

रिया का इस्तीफा ऐसे वक्त में सामने आया है जब वे बॉलीवुड और ड्रग्स के बीच कनेक्शन बताने को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने बॉलीवुड पार्टियों में कई लोगों को ड्रग्स लेते देखने का दावा किया है। साथ ही ये भी कहा था कि दिल्ली के युवा नेता भी ड्रग्स लेते हैं।

अपने इस्तीफे की जानकारी देते हुए रिया ने कॉन्ग्रेस के साथियों को ‘शानदार जर्नी’ के लिए धन्यवाद दिया है। रिया (एंड्रिया डिसूजा) ने कहा कि वो एक बड़े और बेहतर प्लेटफॉर्म का रुख कर रही हैं, इसीलिए उन्होंने कॉन्ग्रेस का दामन छोड़ा है। तजिंदर बग्गा यहाँ भी तंज कसने से नहीं चूके और उन्होंने दावा किया कि 1 दिन पहले एक टीवी डिबेट के दौरान शहजाद पूनावाला से एक्सपोज होने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने रिया को इस्तीफा देने के लिए कहा है।

इसके जवाब देते हुए रिया ने तजिंदर बग्गा को मूर्ख करार दिया और कहा कि अगर उन्हें बड़े और बेहतर प्लेटफॉर्म का मतलब नहीं पता है तो उन्हें डिक्शनरी में इसका अर्थ खोजना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वो जल्द ही बड़ा हमला करने वाली हैं। रिया आजकल सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद चल रहे विवाद में कंगना रनौत का विरोध और शिवसेना का समर्थन करने में लगी हैं। वो संजय राउत के विवादित बयानों का भी समर्थन करती रही हैं।

रिया ने कहा है कि वो एक सप्ताह में चीजें अच्छी तरह से स्पष्ट करेंगी। साथ ही कहा कि कुछ ही दिनों में सभी को इस बारे में पता चल जाएगा। रिया (एंड्रिया डिसूजा) कॉन्ग्रेस में रहते हुए पार्टी पर आरोप लगाने वालों से सोशल मीडिया पर बहस कर के खुद को व्यस्त रखा करती थीं। वो अक्सर दूसरों को ट्रोल करने के चक्कर में खुद बेइज्जत होने के कारण सुर्ख़ियों में रहती हैं। अब उन्होंने कॉन्ग्रेस को अलविदा कह दिया है।

रिया ने हाल ही में बताया कि टेलीविजन और फिल्म इंडस्ट्री के अधिकांश लोग ड्रग्स का सेवन करते हैं। सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह के पोस्ट का जवाब देते हुए रिया ने कहा यह बात कम ही लोग जानते हैं। यह सच्चाई है कि बॉलीवुड और टीवी के तमाम ज़्यादातर कलाकार मादक पदार्थों का सेवन करते थे और सुशांत सिंह उनमें से ही एक था। बकौल रिया, पूरी इंडस्ट्री के लोग ड्रग्स लेते थे, लेकिन फिटनेस का भी ध्यान रखते थे।

बता दें कि एक बार रिया 500 रुपए लेकर ट्वीट करने के लिए तैयार हो गई थी। बग्गा ने एक नंबर से मैसेज कर के रिया को फ्लिटकार्ट सेल के बारे में ट्वीट करने के लिए कहा था। इसमें कहा गया था कि 24 सितंबर को फ्लिपकार्ट का स्थापना दिवस है और इस दिन से सेल शुरू हो रहा है। जबकि सच्चाई ये थी कि 24 सितंबर को फ्लिपकार्ट का स्थापना दिवस नहीं, बल्कि बग्गा का जन्मदिन था। रिया के ट्वीट करने के बाद बग्गा ने इसका खुलासा किया।

​आतंकियों के जिस एनकाउंटर पर रोईं सोनिया, उसमें सिब्बल के सामने हुई थी पुलिस की पेशी

बाटला हाउस एनकाउंटर (सितंबर 19, 2008) पर पूर्व आईपीएस अधिकारी करनाल सिंह ने एक किताब लिखी है। नाम है- बाटला हाउस: एन एनकाउंटर दैट शुक द नेशन। इस एनकाउंटर के वक्त सिंह दिल्ली पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त थे और इस ऑपरेशन को लीड किया है।

उनकी पुस्तक ने इस एनकाउंटर को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इससे पता चलता है कि तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने एनकाउंटर को तुष्टिकरण, वोट बैंक की राजनीति, मीडिया टीआरपी और षड्यंत्र के लिए प्रभावित किया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को समझाना पड़ा था कि बाटला हाउस एनकाउंटर वास्तविक था।’

गृह मंत्रालय ने दिए थे मीडिया से बात ना करने के आदेश

अपनी पुस्तक ‘Batla House: An Encounter That Shook the Nation’ में करनाल सिंह ने बताया है कि दिल्ली पुलिस ने बाटला हाउस मुठभेड़ के बाद कुछ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसके बाद गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि जाँच की प्रगति के बारे में मीडिया को और जानकारी न दी जाए।

1984 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी करनाल सिंह वर्ष 2018 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। करनाल सिंह ने वर्ष 2008 में दिल्ली में हुए सिलसिलेवार विस्फोटों की जाँच की थी। उन्होंने लिखा है कि आतंकवाद से निपटने के लिए एक राजनीतिक सहमति की कमी ने इसे निपटने के लिए कठोर नीतियाँ बनाना मुश्किल बना दिया था।

सितंबर 19, 2008 को दिल्ली के जामिया नगर में हुई मुठभेड़ के बारे में कई अन्य जानकारियाँ शामिल की है। बाटला हाउस एनकाउंटर में इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के दो आतंकवादी मारे गए थे। इसके साथ ही, बाटला हाउस इलाके में पुलिस की कार्रवाई का नेतृत्व करने वाले एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा ने भी इस ऑपरेशन के दौरान अपनी जान गँवाई थी।

करनाल सिंह ने अपनी पुस्तक में खुलासा किया है कि पुलिस द्वारा मीडिया को एक-दो बार ब्रीफ करने के बाद, उन्हें, जो कि उस समय स्पेशल सेल में संयुक्त पुलिस आयुक्त थे, को पुलिस आयुक्त से एक कॉल आई कि गृह मंत्रालय नहीं चाहता कि आगे से वह इस जाँच की कोई भी जानकारी मीडिया ब्रीफिंग में दें।

UPA सरकार को अल्पसंख्यकों की नाराजगी का था डर

करनाल सिंह ने किताब में एनकाउंटर के जुड़े पहलुओं की आँखों देखी जानकारी दी है। वे लिखते हैं, “राजनीतिक गलियारों के कुछ वर्ग अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित आतंकवादियों के खिलाफ सामने आ रहे तथ्यों से परेशान थे। मैंने तर्क दिया कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और पुलिस अधिकारियों के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम अपने विश्वास के बावजूद आतंकवादियों का नेतृत्व करें और उन्हें गिरफ्तार करें।”

करनाल सिंह के अनुसार, मीडिया जानकारी माँग रही थी, लेकिन उनके साथ जाँच की जानकारी ना देने के सख्त आदेश थे। उन्होंने लिखा है कि वहाँ अराजकता थी और दिल्ली पुलिस ‘परसेप्शन’ की लड़ाई हार रही थी। उन्होंने लिखा है कि बाटला हाउस मुठभेड़ आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक घटना बन गई।

सिंह ने लिखा, “इसने आईएम को एक महत्वपूर्ण झटका दिया, क्योंकि इसमें उनके प्रमुख सदस्य मारे गए और भारत में उनके नेटवर्क की रीढ़ टूट गई। हमने सबसे बुद्धिमान और बहादुर अधिकारियों में से एक को खो दिया, जिसके निष्कर्षों ने हमें मुख्य आईएम सदस्यों तक पहुँचाया था।”

उन्होंने कहा कि इस मामले ने एक राजनीतिक तूफान ला दिया, स्पेशल सेल अधिकारियों के खिलाफ एक ‘व्हिच हंटिंग’ जारी की गई। जनता की अलग-अलग राय और मीडिया ने इसे हमेशा के लिए एक विवादास्पद विषय बना दिया, जो आज तक जारी है।

इस पुस्तक में लिखा गया है कि बाटला हाउस मुठभेड़ के बाद सभी मोर्चों से सरकार पर दबाव बढ़ रहा था। दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट हुए थे और सरकार पर आरोप लगाया जा रहा था कि वह आतंकवाद के प्रति नरम है।

‘मजहब के खिलाफ साजिश’

करनाल सिंह लिखते हैं, “इसके बाद 14 अक्टूबर को एनकाउंटर को एक नया आयाम दिया गया जब भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के कुछ वरिष्ठ राजनेताओं ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मिलने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया। एनकाउंटर को ‘समुदाय विशेष के साथ अन्याय’ बताते हुए इसकी न्यायिक जाँच की माँग की गई।”

इसके बाद करनाल सिंह को दिल्ली के तत्कालीन लेफ्टिनेन्ट गवर्नर तेजेंद्र खन्ना का फोन आया और उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल, जो कि एक केंद्रीय मंत्री थे, मुठभेड़ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना चाहते थे। खन्ना ने सिंह को ‘तैयार होकर आने’ की सलाह दी थी।

करनाल सिंह लिखते हैं कि सिब्बल ने उन्हें मीडिया सहित कई विभिन्न मुद्दों के बारे में बताने के लिए कहा और उन्होंने हर मुद्दे पर जवाब दिया और पुलिस के पास उपलब्ध सभी सूचनाओं को सिब्बल से शेयर किया।

करनाल सिंह के अनुसार, दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल के घर पर कैबिनेट मंत्री कपिल सिब्बल को एनकाउंटर के सारे तथ्य दिखाए गए। इन तथ्यों से तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को भी अवगत कराया गया। बाद में एक मुलाकात में मनमोहन सिंह ने खुद उन्हें बेहतरीन जाँच के लिए बधाई दी।

जामिया के किसी भी गवाह को नहीं थी जानकारी, तब भी दी गवाही

सिंह कहते हैं कि बाटला हाउस मुठभेड़ को एक सार्वजनिक मुकदमे में रखा गया था। पुस्तक के अनुसार, अक्टूबर 12, 2008 को जामिया मिलिया इस्लामिया के शिक्षकों के एक समूह ने एक जन सुनवाई की। जूरी में राजनेता और कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश, मानवाधिकार राजनीतिक कार्यकर्ता जॉन दयाल और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तृप्ता वाही, विजय सिंह और निर्मलंगशु मुखर्जी शामिल थे। करनाल सिंह आगे लिखते हैं कि जामिया के दर्जनों निवासियों ने उस बैठक में गवाही दी। बाद में जूरी ने अपने निष्कर्ष दिए, जो बात पहले से ही मीडिया के कुछ हिस्सों में कही जा रही थी। हमारे विभाग द्वारा पहले से ही इन बातों के जवाब दे दिए गए थे।

वह लिखते हैं कि जन सुनवाई के निष्कर्ष बेकार थे। जिन लोगों को इसमें शामिल किया गया था, उनमें से किसी को भी घटना की जानकारी नहीं थी। यही कारण है कि उनमें से कोई भी बाद में इन गवाही को शेयर करने के लिए आगे नहीं आया या उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में कोई हलफनामा नहीं दिया।

बाटला हाउस एनकाउंटर पर रोई थीं सोनिया गाँधी

फरवरी 2012 में आजमगढ़ में एक रैली को संबोधित करते वक्त कॉन्ग्रेस नेता और तत्‍कालीन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने दिल्ली के बाटला हाउस एनकाउंटर का जिक्र करते हुए कहा था कि जब उन्होंने इसकी तस्वीरें सोनिया गाँधी को दिखाई, तब उनकी आँखों में आँसू आ गए और उन्होंने पीएम से बात करने की सलाह दी थी।

फरवरी 2020 में दिल्ली की एक चुनावी रैली को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने भी कहा था कि जो लोग बाटला हाउस के आतंकवादियों के लिए रोते हैं, वो दिल्ली का विकास नहीं कर सकते।

अक्टूबर, 2008 को तृणमूल कॉन्ग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी कहा था कि यह एक फर्जी एनकाउंटर था। ममता ने यहाँ तक कहा था कि अगर वो गलत साबित हुई तो राजनीति छोड़ देंगी।

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह शुरू से ही बटला हाउस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते रहे। वास्तव में, इस मुद्दे की राजनीतिकरण की शुरुआत उन्होंने ही की थी।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी की बीवी आलिया ने दर्ज कराया बयान, शौहर के भाई पर लगाए थे छेड़छाड़ और गंदे क्लिप दिखाने के आरोप

फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की पत्नी आलिया ने शनिवार को यूपी के बुढ़ाना कोतवाली पहुॅंचकर अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने मुंबई के वर्सोवा थाने में नवाजुद्दीन और उनके परिजनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसमें मारपीट और प्रताड़ना का आरोप लगाया था।

आलिया ने मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कोतवाली में अपने पति और ससुरालवालों के खिलाफ कई आरोप लगाते हुए बयान दर्ज करवाया। बुढ़ाना इंस्पेक्टर कुशलपाल सिंह ने बताया कि मुकदमे के संबंध में आलिया ने महिला पुलिस की मौजूदगी में एफआईआर के अनुसार ही अपना बयान दिया है।

बता दें कि आलिया सिद्दीकी ने 27 जुलाई को मुंबई के वर्सोवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। यह रिपोर्ट नवाजुद्दीन, उनके भाई मिनाजुद्दीन, फैजुद्दीन, अयाजुद्दीन और माता मेहरूनिशा आदि के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। मुंबई पुलिस ने घटनास्थल बुढ़ाना में होने के कारण विवेचना मुजफ्फरनगर स्थानांतरित कर दिया था। इसी मुकदमे में आलिया बयान देने बुढ़ाना पहुँची।

आलिया ने अभिनेता के भाई पर आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश में नवाजुद्दीन के घर पर मिनहाजुद्दीन ने उनके साथ छेड़छाड़ की और अश्लील क्लिप दिखाया। उस समय नवाजुद्दीन मुंबई में थे। मुंबई लौटने पर आलिया ने जब नवाजुद्दीन को उनके भाई की करतूतों के बारे में बताया तो उन्होंने उसे मुँह बंद रखने के लिए कहा।

गौरतलब है कि इससे पहले नवाजुद्दीन की भतीजी ने भी उनके भाई पर यौन शोषण के आरोप लगाया था। वहीं उनकी पत्नी ने भी आरोप लगाया था कि नवाज के भाई अपने घर की औरतों के साथ मारपीट करते हैं और एक भाई ने उन्हें भी थप्पड़ मारा था।

आलिया ने एक इंटरव्यू के दौरान आरोप लगाया था कि, “नवाज के दो या तीन भाई हैं, जो पूरी तरह पागल हैं। उनके पास दिमाग नहीं है, वो इसी तरह के माहौल में बड़े हुए हैं इसलिए वो लोग ऐसे बन गए हैं। उनकी परिवार में महिलाओं की बिल्कुल इज्ज़त नहीं की जाती। उनका जब मन करता है वे अपने घर की औरतों को मारते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा था, “हमारी शादी से पहले और शादी के बाद भी काफी लड़ाई होती थी। जब मैं प्रेग्नेंट थी तो मुझे चेकअप के लिए खुद ही ड्राइव करके जाना पड़ता था। मेरे डॉक्टर हमेशा मुझे कहते थे कि मैं पागल हूँ और मैं पहली ऐसी महिला हूँ, जो डिलीवरी के लिए अकेले आई है। मेरा लेबर पेन शुरू हुआ तो नवाज व उनके माता-पिता वहीं थे। लेकिन उस समय भी मेरे पति मेरे साथ नहीं थे। वह अपनी गर्लफ्रेंड से कॉल पर बात किया करते थे। मुझे इसका पता उनके फोन बिल्स से चला था।”

PM नरेंद्र मोदी फासिस्ट हैं, क्योंकि महाराष्ट्र से लेकर तेलंगाना और पश्चिम बंगाल तक में खौफ है ‘उनका’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ़ासिस्ट (फासीवादी) हैं।

शिवसेना ने केबल ऑपरेटर को रिपब्लिक मीडिया चैनल को ब्लॉक करने की दी धमकी

महाराष्ट्र सरकार की सत्तारूढ़ पार्टी शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का अपमान करने के लिए रिपब्लिक भारत चैनल को गुरुवार (10 सितंबर, 2020) को बंद करने के लिए कहा। उन्होंने शिवसेना के सहयोगी शिव केबल सेना द्वारा एक पत्र के माध्यम से केबल ऑपरेटरों को इस बात का निर्देश दिया।

इतना ही नहीं शिवसेना ने केबल ऑपरेटरों को अर्णब गोस्वामी के नेतृत्व वाले मीडिया नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने या फिर परिणामों को भुगतने की खुली धमकी भी दी है। शिवसेना वर्तमान में सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ महाराष्ट्र की सत्ता में है।

लेकिन, मोदी आलोचना नहीं कर सकते।

तेलंगाना सीएम ने केबल ऑपरेटर को धमकाया

वहीं तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने सितंबर 2014 में, तेलंगाना का अपमान करने के आरोपों पर केबल ऑपरेटरों को धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर केबल ऑपरेटरों ने हाल ही में बने राज्य का अपमान करना जारी रखा तो वे उन्हें जमीन के 10 फीट नीचे गाड़ देंगे।

लेकिन लिबरल गिरोह की मानें तो जाहिर है, मोदी प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगा रहे हैं।

ममता बनर्जी की आलोचना करने पर पश्चिम बंगाल सरकार ने बैन किया चैनल

पश्चिम बंगाल सरकार ने इस साल मई में राज्य सरकार पर सवाल उठाने के कारण केबल नेटवर्क पर एक समाचार चैनल का प्रसारण रोक दिया था। यह प्रसारण कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में रोका गया था।

लेकिन नहीं… हम मोदी शासन के तहत अघोषित आपातकाल की स्थिति में रह रहे हैं।

आपातकाल से याद आया! क्यों न हम अब आपातकाल की बात करते हैं। आइए हम अपने इतिहास के बारे में जानते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने 25 जून 1975 को, भारत में आपातकाल की स्थिति घोषित की थी। यह आपातकाल 21 मार्च 1977 को वापस लिया गया था। यह कुल 21 महीने तक चला था।

इंदिरा गाँधी ने भारत में जब इमरजेंसी की घोषणा की थी

फ्रीडम ऑफ प्रेस सहित नागरिक स्वतंत्रता को तब निलंबित कर दिया गया था। इंदिरा गाँधी सरकार द्वारा पत्रकारों, विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। प्रिंटिंग प्रेसों पर छापे मारे गए और समाचार पत्रों को बंद करा दिया गया था।

मीडिया को अनुसरण करने के लिए ‘दिशा-निर्देश’ दिए गए थे। मुख्य प्रेस सलाहकार के अप्रूवल के बाद ही कोई खबर प्रकाशित की जाती थी। सरकार के खिलाफ खबरों को सेंसर कर दिया जाता था। सिर्फ देश ही नहीं विदेशी प्रकाशनों के पत्रकारों को निष्कासित कर दिया गया था। और धमकियाँ मिलने के बाद कुछ विदेशी अपने देश वापस लौट गए थे।

गृह मंत्रालय के अनुसार, 1976 के मई में लगभग 7,000 पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को गिरफ्तार भी किया गया था।

लेकिन, इन सब के बावजूद मोदी फ़ासिस्ट (फासीवादी) हैं।

लेहरू जी ने बनवाए इतने अस्पताल, फिर भी सोनिया-राहुल क्यों जाते हैं विदेश?

सोनिया गाँधी अपने रूटीन स्वास्थ्य चेकअप के लिए विदेश गई हैं। उनके साथ-साथ राहुल गाँधी भी गए हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी ने खुद इस सूचना को ट्वीट किया और जानकारी दी कि कोरोना संक्रमण आपदा के कारण सोनिया गाँधी का मेडिकल चेकअप नहीं हो पाया था, जिसके लिए अब वो विदेश गई हैं।

इधर सोमवार (सितम्बर 14, 2020) से संसद का सत्र भी चालू हो रहा है। सोनिया और राहुल, दोनों सांसद भी हैं। ये दोनों संसद के ओपनिंग सेशन में भाग नहीं लेंगे। अब सवाल उठ रहा है कि क्या सोनिया-राहुल को ‘नेहरू के अस्पतालों’ पर भरोसा नहीं है?

कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष और पूर्व-अध्यक्ष (संभव है कि भावी भी) ऐसे समय में विदेश गए हैं, जब संसद में मोदी सरकार को घेरने के लिए कॉन्ग्रेस बड़ी तैयारी का दावा कर रही है। कृषि और अनाज के बाजार को लेकर मोदी सरकार द्वारा जारी किए गए अध्यादेशों को कॉन्ग्रेस ‘हरित क्रांति’ के विरुद्ध बता कर इसे किसानों को दबाने का जरिया बता रही है। साथ ही ‘क्रोनी कैपटलिस्ट्स’ के लिए ‘ईस्ट इंडिया कम्पनी’ के गठन का आरोप लगाया है।

दिक्कत इससे नहीं है कि सोनिया-राहुल इलाज कराने के लिए विदेश क्यों जाते हैं। समस्या इस बात से है कि जब भाजपा का कोई नेता किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हो जाए तो यही लोग तंज कसते हैं कि वो लोग सरकारी अस्पतालों में अपना इलाज क्यों नहीं करा रहे? वहीं जब सोनिया-राहुल केवल मेडिकल चेकअप के लिए विदेश जाते हैं तो ये गर्व से इसकी घोषणा करते हैं। आखिर ये दोहरा रवैया क्यों अपनाया जाता है?

कुछ ही दिनों पहले जब कोरोना संक्रमित होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुग्राम स्थित मेदांता में भर्ती हुए थे, तब उन पर खूब तंज कसा गया था। विशाख चेरियन नामक व्यक्ति ने AIIMS की प्रशंसा करते हुए इसे आधुनिक भारत का मंदिर बताया था और कहा था कि इसकी रूपरेखा भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने तैयार की थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस ट्वीट का रिप्लाई देते हुए अमित शाह को निशाना बनाया था।

शशि थरूर ने कहा था कि वे ये सोचते हैं कि जब भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बीमार पड़ते हैं तो वो नई दिल्ली में स्थित AIIMS में भर्ती होने के बजाए पड़ोसी राज्य में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाने क्यों जाते हैं? उन्होंने कहा था कि अगर जनता के बीच इन संस्थानों को लेकर सकारात्मक छवि बनानी है तो इन्हें बढ़ावा देना होगा। अब इन्हीं शशि थरूर से सवाल पूछे जा रहे हैं कि वो क्यों चुप हैं?

भारत में कॉन्ग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की बड़ी ब्रीड है और उनका समर्थन करने वाला लिबरल गिरोह भी है, जो बात-बात में ये गिनाने बैठ जाता है कि नेहरू ने इतने अस्पताल बनवाए, इतने स्कूल बनवाए, ये बनवाया, वो बनवाया- तो आज ये लोग अपनी ही अध्यक्ष सोनिया और पूर्व-अध्यक्ष राहुल से ये क्यों नहीं पूछते कि क्या उनलोगों को नेहरू के बनवाए अस्पतालों पर भरोसा नहीं है? या फिर उन्हें विदेश में चेकअप कराने का शौक है?

जब नेहरू के अपने ही वंशजों को उनके बनवाए अस्पतालों पर भरोसा नहीं है (अगर नेहरू ने सच में बनवाया है तो), तो फिर कॉन्ग्रेस ये कैसे उम्मीद करती है कि देश की जनता इस बात का रट्टा लगाए कि नेहरू ने कितने अस्पताल बनवाए। क्या उनमें मेडिकल चेकअप की सुविधा नहीं है या फिर उनका हाल भी दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों जैसा हो गया है? कम से कम शशि थरूर को तो सामने आकर इसका जवाब देना चाहिए।

इंडस्ट्री के लोग ड्रग्स लेते हैं, बॉलीवुड पार्टियों में खुद देखा है: मॉडल से कॉन्ग्रेस नेत्री बनी रिया डिसूजा

बॉलीवुड में ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर सनसनीखेज खुलासे जारी है। इस कड़ी में मॉडल से कॉन्ग्रेस नेता बनी एंड्रिया डिसूजा ने कहा है कि बॉलीवुड में होने वाले पार्टियों में उन्होंने कई लोगों ड्रग्स का सेवन करते देखा है। एंड्रिया को लोग रिया डिसूज़ा के नाम से भी जानते हैं। एक सोशल मीडिया यूज़र को जवाब देते हुए उन्होंने यह बात कही।  

रिया ने बताया कि टेलीविजन और फिल्म इंडस्ट्री के अधिकांश लोग ड्रग्स का सेवन करते हैं। सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह के पोस्ट का जवाब देते हुए रिया ने कहा यह बात कम ही लोग जानते हैं। यह सच्चाई है कि बॉलीवुड और टीवी के तमाम ज़्यादातर कलाकार मादक पदार्थों का सेवन करते थे और सुशांत सिंह उनमें से ही एक था। 

इसके बाद एक सोशल मीडिया यूज़र ने सुशांत सिंह जैसे कलाकारों की फिटनेस को लेकर किए गए एंड्रिया के दावों पर सवाल किया। इस सवाल का जवाब देते हुए एंड्रिया ने अगले ट्वीट में लिखा “पूरी इंडस्ट्री के लोग ड्रग्स लेते थे, लेकिन फिटनेस का भी ध्यान रखते थे।”

एंड्रिया ने इस बात का भी खुलासा किया कि उनके एक सूत्र ने उन्हें एक हैरान कर देने वाली बात बताई थी। जानकारी के मुताबिक़ दिवाली या फिल्मों की सफलता के मौके पर प्रोडक्शन हाउस पार्टी का आयोजन करते थे, सुशांत सिंह उन पार्टी में ड्रग्स का सेवन करता था। हालाँकि एंड्रिया ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि वह कौन से प्रोडक्शन हाउस थे, जिनमें सुशांत ऐसा करता था। 

इसी तरह एंड्रिया ने मीडिया पर भी आरोप लगाया कि मीडिया ने सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स कार्टेल मामले में तब्दील कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि सुशांत सिंह राजपूत अक्सर टीवी इंडस्ट्री की पार्टी में ड्रग्स लेते हुए देखा गया था। हाई प्रोफाइल पार्टी में ड्रग्स का सेवन बहुत सामान्य बात थी। 

एंड्रिया ने इस बात का भी खुलासा किया कि सुशांत जिस प्रोडक्शन हाउस का हिस्सा थे, वह प्रोडक्शन हाउस आज भी इस तरह की पार्टी का आयोजन करता है। 

रिया ने यह भी आरोप लगाया कि देश की राजधानी दिल्ली में भी युवा और नेता भी ड्रग्स लेते हैं। उन्होंने कहा कि ड्रग्स का सेवन सिर्फ मुंबई में ही नहीं होता है, लेकिन मीडिया दिल्ली में होने वाले नशे के कारोबार पर चुप क्यों है। 

एंड्रिया ने कहा मीडिया कारोबारियों और नेताओं का भी ज़िक्र किया जो ड्रग्स का सेवन करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार दिग्गजों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ मुंबई और बॉलीवुड में ही ड्रग्स का इस्तेमाल किया जाता है।

हाल ही में रिया चक्रवर्ती ने पूछताछ में कहा था लगभग 80 फीसदी बॉलीवुड कलाकार ऐसे हैं जो ड्रग्स का सेवन करते हैं। रिया ने जिन नामों का खुलासा किया था उनमें से कई बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता, प्रोड्यूसर और निर्देशक भी हैं। अपने बयान में रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स उपलब्ध कराने की बात भी स्वीकार की है।

हैरान कर देने वाले खुलासे में रिया चक्रवर्ती ने बताया कि सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और डिज़ाइनर सिमोन खम्मबट्टा मादक पदार्थों का सेवन करती हैं। पूछताछ के दौरान रिया ने सुशांत सिंह की दोस्त रोहिणी अय्यर और फिल्म निर्माता मुकेश छाबड़ा पर भी ड्रग्स लेने का आरोप लगाया है। सारा अली खान मशहूर अभिनेत्री अमृता सिंह और अभिनेता सैफ अली खान की बेटी हैं। सारा ने साल 2018 में आई ‘केदारनाथ’ फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत के साथ अभिनय किया था। रिया ने यह भी बताया कि सारा अली खान सुशांत सिंह और उनके दोस्तों के साथ थाइलैंड भी गई थीं।

मेरा नाम ‘मोहम्मद’ रखना चाहते थे, नाजायज संतान जैसा बर्ताव किया: महेश भट्ट की जब बेटे राहुल ने खोली थी पोल

महेश भट्ट के बेटे राहुल भट्ट ने साल 2012 में एक साक्षात्कार के दौरान कई खुलासे किए थे। साक्षात्कार में राहुल भट्ट ने बताया था कि पिता महेश भट्ट का रवैया उनके लिए कैसा था। राहुल भट्ट के मुताबिक़ महेश उन्हें अपने बेटे की तरह मानते ही नहीं थे और उनका नाम ‘मोहम्मद’ रखना चाहते थे। इसके अलावा राहुल भट्ट ने अपनी किताब ‘हेडली एंड आई’ की चर्चा करते हुए अपने पिता के साथ रिश्ते पर कई अहम बातें कहीं थी। 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित साक्षात्कार में बिग बॉस कंटेस्टेंट ने कहा मेरे पिता का नज़रिया मेरे लिए कभी बहुत अच्छा नहीं रहा। वह मुझे अपने बेटे की तरह मानते ही नहीं थे और न ही वैसा बर्ताव करते थे। वह मेरा नाम ‘मोहम्मद’ रखा रखना चाहते थे। बहुत से लोगों को इस बात पर भरोसा नहीं होता, लेकिन यह सच है। वह हमेशा चाहते थे कि मेरी पहचान मोहम्मद नाम से हो। फिर उनके पड़ोस में रहने वाले महाराष्ट्र के लोगों ने उनकी एंग्लो इंडियन माँ से इस मुद्दे पर निवेदन किया और कहा कि महेश भट्ट के पास अपनी धर्म निरपेक्षता दिखाने के और भी मौके हैं। 

राहुल ने इंटरव्यू के दौरान कहा कि अगर महेश भट्ट को ऐसा लगता है कि वह एक अच्छे मुस्लिम हैं तो उन्हें अपनी सभी औलादों के साथ एक जैसा व्यवहार करना चाहिए। उन्हें अपने बेटे और बेटियों में किसी भी तरह का अंतर नहीं करना चाहिए। उनकी माँ भले मुस्लिम थीं, लेकिन मेरा उनसे कभी कोई संवाद नहीं रहा। इस बात का अंदाज़ा लगा पाना तक मुश्किल है कि अगर मेरा नाम मोहम्मद होता तो मेरा क्या होता? मुझे कोई नहीं जानता और न ही किसी को पता चलता कि महेश भट्ट का एक बेटा भी है। मैं तिहाड़ जेल में बंद कर दिया जाता और उसकी चाभी समुद्र में फेंक दी जाती।  

इसके बाद राहुल भट्ट ने कहा मेरे और मेरे पिता के रिश्ते की सच्चाई यही है कि उन्होंने मुझे कभी अपने बेटे की तरह माना ही नहीं। अगर वह एक बेहतर पिता होते और ज़रूरत पड़ने पर मेरे लिए मौजूद होते तो मैं कभी हेडली के संपर्क में नहीं आता। मेरे लिए वह दौर और हालात बहुत कठिन थे। मुझे सही रास्ता दिखाने वाला कोई भी व्यक्ति मेरे पास नहीं था। शायद मुझे ऐसा कहना नहीं चाहिए, लेकिन उन्होंने मेरे साथ हमेशा नाजायज संतान की तरह की बर्ताव किया। 

राहुल ने कहा कि मुझे गॉडफादर 3 के एंडी गर्शिया जैसा महसूस होता था। उन अनुभवों को याद करना, महसूस करना बेहद डरावना है। लेकिन सच यही है कि उन अनुभवों ने मुझे इतना मज़बूत बनाया है। मेरे भीतर हमेशा एक असुरक्षा का भाव था, नाराज़गी और निराशा हावी थी। लेकिन समय के साथ मैं ऐसे हर जज़्बात से बाहर आ गया और आज पहले से बहुत बेहतर स्थिति में हूँ।    

राहुल भट्ट ने कहा था, “मैं कोई विक्टिम कार्ड नहीं खेलना चाहता हूँ। पर सच यही है कि महेश भट्ट ने मेरे लिए कभी कुछ नहीं किया। मैं एक कड़वा इंसान नहीं हूँ, बल्कि एक बेहतर इंसान हूँ और इसका कारण सिर्फ मेरे पिता ही हैं।”

दरअसल महेश भट्ट के कुल 4 बेटे-बेटियाँ हैं। आलिया और शाहीन भट्ट, जिनकी माँ सोनी राजदान हैं। पूजा और राहुल भट्ट, जिनकी माँ किरन भट्ट हैं। पूजा, आलिया और शाहीन के बारे में सभी ने सुना है, लेकिन राहुल भट्ट के बारे में कम ही लोग जानते हैं। 

बंगाल: पेड़ से लटका मिला BJP कार्यकर्ता गणेश का शव, बेटे ने TMC पर लगाया हत्या का आरोप

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस पर फिर से एक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या करने का आरोप लगा है। गणेश रॉय (Ganesh Roy) का शव रविवार (सितम्बर 13, 2020) सुबह गोघाट स्टेशन (Goghat) के पास एक पेड़ से लटका हुआ मिला।

इसकी सूचना मिलते ही गोघाट पुलिस मौके पर पहुँची। इस घटना के कारण रविवार सुबह से ही गोघाट स्टेशन से सटे इलाकों के लोगों में दहशत है। रिपोर्ट्स के अनुसार, गणेश रॉय अपने इलाके में एक सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे। परिवार के सदस्यों का कहना है कि गणेश बाबू शनिवार (सितम्बर 12, 2020) दोपहर से ही लापता थे।

शव रविवार सुबह ही स्टेशन के पास एक पेड़ से लटका मिला। उनके बेटे ने आरोप लगाया कि उसके पिता की हत्या करने और शव को पेड़ पर लटकाने में तृणमूल कॉन्ग्रेस का हाथ है।

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीष घोष ने कहा है कि मृतक गणेश रॉय भाजपा कार्यकर्ता था और उसकी हत्या सत्ताधारी टीएमसी के लोगों ने की है। टीएमसी पर हत्या का आरोप लगाते हुए दिलीप घोष ने कहा, “आज हमारे मंडल सचिव गणेश रॉय की हत्या कर दी गई और उनके शव को पेड़ से लटका दिया गया, ऐसा हर रोज हो रहा है, सीपीएम अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों की हत्याकर उन्हें गाड़ दिया करती थी, टीएमसी उन्हें लटका देती है।”

मृतक गणेश रॉय का परिवार गोघाट पुलिस स्टेशन में हत्या का मुकदमा दर्ज कराने जा रहा है। घटना के बाद इलाके में भाजपा कार्यकर्ता आक्रोशित हैं और उन्होंने आरामबाग-मेदिनीपुर जाने वाले मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। पुलिस ने भी इस घटना पर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। हालाँकि, उन्होंने मौके पर जाँच के बाद पूरी घटना की छानबीन शुरू कर दी है।

बंगाल में जारी है भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या का सिलसिला

बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ हो रही गुंडागर्दी नई नहीं है। इसी स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने को लेकर हुगली के आरामबाग के नसीबपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र में भी एक भाजपा पंचायत सदस्य की हत्या कर दी गई। इसके बाद भी इलाके में राजनीतिक तनाव फैल गया था।

अगले दिन, स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने विरोध में गोघाट, आरामबाग में 12 घंटे के बंद का आह्वान किया और हत्या के लिए मुकदमा चलाने की माँग के बाद रविवार को गोगाट की इस घटना ने कि बंगाल में अभी भी कुछ नहीं बदला है।

इस घटना की निंदा करते हुए पश्चिम बंगाल में भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक कैलाश विजयवर्गीय ने ट्विटर पर लिखा था, “भय, आतंक, गुंडागर्दी, अराजकता और हिंसा जब किसी राजनीतिक दल की कार्यशैली का अधिकृत अंग हो जाए तो समझ लीजिए उसका अंत निकट है। उसका जनता के बीच जाने का साहस खत्म हो गया है। वो जनता को डराकर उन्हें दूर भगाना चाहती है। बंगाल का बच्चा-बच्चा बोल रहा है, ममता शासन डोल रहा है।”

3000 km गैस पाइपलाइन से जुड़ेंगे बिहार सहित 7 राज्य, PM मोदी ने कहा: ‘रघुवंश बाबू के सपनों को पूरा करें’

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल रैली के जरिए कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने पेट्रोलियम सेक्टर से जुड़े 3 प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया। इससे पहले उन्होंने मत्स्यपालन, पशुपालन व कृषि विभागों से जुड़ी 294 करोड़ रुपयों की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। 

इस दौरान लोगों को सम्बोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के निधन पर शोक जताया और कहा कि रघुवंश सिंह जिन आदर्शों को लेकर चले थे, जिनके साथ चले थे, उनके साथ चलना उनके लिए संभव नहीं रहा था। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री जी को अपनी एक विकास के कामों की सूची भेज दी। बिहार के लोगों की, बिहार के विकास की चिंता उस चिट्ठी में प्रकट होती है।

पीएम नरेंद्र मोदी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया कि रघुवंश प्रसाद जी ने अपनी आखिरी चिट्ठी में जो भावना प्रकट की है, उसको परिपूर्ण करने के लिए आप और हम मिलकर पूरा प्रयास करें। उन्होंने ख़ुशी जताई कि कुछ वर्ष पहले जब बिहार के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की गई थी, तो उसमें बहुत फोकस राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर पर था। उन्होंने बताया कि इसी से जुड़े एक महत्वपूर्ण गैस पाइप लाइन प्रोजेक्ट के दुर्गापुर-बाँका सेक्शन का लोकार्पण करने का अवसर उन्हें मिला।

बिहार की जनता को सम्बोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने जानकारी दी कि इससे पहले पटना LPG प्लांट के विस्तार और Storage Capacity बढ़ाने का काम हो, पूर्णिया के LGP प्लांट का विस्तार हो, मुजफ्फरपुर में नया LGP प्लांट हो, ये सारे प्रोजेक्ट पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। जगदीशपुर-हल्दिया पाइपलाइन प्रोजेक्ट का जो हिस्सा बिहार से गुजरता है, उस पर भी काम पिछले साल मार्च में ही समाप्त कर लिया गया है। मोतीहारी-अमलेखगंज पाइपलाइन पर भी पाइपलनाइन से जुड़ा काम पूरा कर लिया गया है।

पीएम ने कहा कि अब देश और बिहार, उस दौर से बाहर निकल रहा है, जिसमें एक पीढ़ी काम शुरू होते देखती थी और दूसरी पीढ़ी उसे पूरा होते हुए। उन्होंने संकल्प जताया कि नए भारत, नए बिहार की इसी पहचान, इसी कार्यसंस्कृति को हमें और मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि बिहार सहित पूर्वी भारत में ना तो सामर्थ्य की कमी है और ना ही प्रकृति ने यहाँ संसाधनों की कमी रखी है। बावजूद इसके बिहार और पूर्वी भारत विकास के मामले में दशकों तक पीछे ही रहा। इसकी बहुत सारी वजहें राजनीतिक थी, आर्थिक थीं, प्राथमिकताओं की थीं।

पीएम मोदी ने कहा कि गैस बेस्ड इंडस्ट्री और पेट्रो-कनेक्टिविटी, ये सुनने में बड़े टेक्निकल से लगते हैं, लेकिन इनका सीधा असर लोगों के जीवन पर पड़ता है, जीवन स्तर पर पड़ता है। गैस बेस्ड इंडस्ट्री और पेट्रो-कनेक्टिविटी रोजगार के भी लाखों नए अवसर बनाती है।

साथ ही बताया की प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा योजना के तहत पूर्वी भारत को पूर्वी समुद्री तट के पारादीप और पश्चिमी समुद्री तट के कांडला से जोड़ने का भागीरथ प्रयास शुरू हुआ। करीब 3 हजार किमी लंबी पाइपलाइन से 7 राज्यों को जोड़ा जा रहा है, जिसमें बिहार का प्रमुख स्थान है।

उन्होंने गिनाया कि उज्ज्वला योजना की वजह से आज देश के 8 करोड़ गरीब परिवारों के पास भी गैस कनेक्शन मौजूद है। इस योजना से गरीब के जीवन में क्या परिवर्तन आया है, ये कोरोना के दौरान हम सभी ने फिर महसूस किया।

बकौल पीएम, इन प्लांट्स से बिहार के बांका, भागलपुर, जमुई, अररिया, किशनगंज, कटिहार, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, मुजफ्फरपुर, सिवान, गोपालगंज और सीतामढ़ी जिलों, झारखंड के गोड्डा, पाकुड़, देवघर, दुमका, साहिबगंज जिलों और यूपी के कुछ क्षेत्रों की LPG से जुड़ी जरूरतें पूरी होंगी। उन्होंने आगे कहा:

एक समय था जब बिहार में LPG गैस कनेक्शन होना बड़े संपन्न लोगों की निशानी होता था। एक-एक गैस कनेक्शन के लिए लोगों को सिफारिशें लगवानी पड़ती थीं। जिसके घर गैस होती थी, वो माना जाता था कि बहुत बड़े घर-परिवार से है। लेकिन बिहार में अब ये अवधारणा बदल चुकी है। जब मैं कहता हूँ कि बिहार देश की प्रतिभा का पावरहाउस है, ऊर्जा केंद्र है तो ये कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। बिहार के युवाओं की यहाँ की प्रतिभा का प्रभाव चारो तरफ है। भारत सरकार में भी बिहार के कितने बेटे-बेटियाँ हैं जो देश की सेवा कर रहे है। बिहार की कला, यहाँ का संगीत, यहाँ का स्वादिष्ट खाना, इसकी तारीफ तो पूरे देश में होती ही है। आप किसी दूसरे राज्य में भी चले जाइए, बिहार की ताकत, बिहार के श्रम की छाप आपको हर राज्य के विकास में दिखेगी।

पीएम मोदी ने कहा कि हम बिहार के हर एक सेक्टर के विकास को आगे बढ़ा रहे हैं, हर एक सेक्टर की समस्याओं के समाधान का प्रयास कर रहे हैं, ताकि बिहार विकास की नई उड़ान भरे। उतनी ऊँची उड़ान भरे जितना ऊँचा बिहार का सामर्थ्य है।

उन्होंने कहा कि आज बिहार में शिक्षा के बड़े-बड़े केंद्र खुल रहे हैं। अब एग्रीकल्चर कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या बढ़ रही है। अब राज्य में IIT, IIM, ट्रिपल IT, बिहार के नौजवानों के सपनों को ऊँची उड़ान देने में मदद कर रहे हैं।

बकौल पीएम नरेंद्र मोदी, बिहार में बिजली की क्या स्थिति थी, ये जगजाहिर है। गाँवों में 2-3 घंटे बिजली आ गई तो बहुत माना जाता था। शहरों में भी 8-10 घंटे से ज्यादा बिजली नहीं मिलती थी। उन्होंने कहा कि आज बिहार के गाँवों में, शहरों में बिजली की उपलब्धता पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा हुई है।

साथ ही बताया कि स्टार्टअप इंडिया, मुद्रा योजना आदि योजनाओं ने बिहार के नौजवानों को स्वरोजगार के लिए जरूरी राशि मुहैया कराई है। सरकार का प्रयास ये भी है कि जिला स्तर पर बिहार के नौजवानों को स्किल बढ़ाने की ट्रेनिंग दी जाए।