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ऑपइंडिया का असर: बिहार से अपहृत लड़की अहमदाबाद से बरामद, साबिर ने धर्म परिवर्तन के लिए किया था अपहरण

बिहार के मधुबनी जिले हरलाखी थानांतर्गत नहरनियाँ गाँव से एक महीने पहले गायब नाबालिग लड़की अब मिल गई है। स्वयं राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इसकी जानकारी अपने ट्विटर पर दी है। लड़की को उसके ही गाँव में रहने वाले साबिर ने 20 अगस्त को घर के बाहर से अगवा किया था।

NCPCR अध्यक्ष ने बताया, “बिहार के मधुबनी ज़िले से अपहृत हुई बच्ची के मामले में ऑपइंडिया की खबर पर राष्ट्रीय बाल आयोग ने संज्ञान लिया था, आज समन सुनवाई के दौरान पुलिस ने अवगत करवाया है कि बच्चे का बचाव कर लिया गया है। आरोपित को भी गिरफ़्तार किया गया है।”

लड़की के भाई ने भी ऑपइंडिया को इस बात की जानकारी दी कि उनकी बहन को बिहार प्रशासन ने ढूँढ लिया है। उसकी बरामदगी अहमदाबाद से हुई है। आरोपित गिरफ्तार हो चुका है। जल्द ही उन्हें वापस लेकर आया जाएगा।

लड़की के भाई के अनुसार, लड़की हाल ही में बरामद हुई है। इसकी जानकारी उन्हें उनके जीजा से मिली, जो बिहार पुलिस के साथ बच्ची को ढूँढने गए थे। ऑपइंडिया ने इस मामले में हरलाखी थाना व क्षेत्र डीएसपी से भी बात करने की कोशिश की। लेकिन फिलहाल उनसे हमारा संपर्क नहीं हो पाया है। मामले में आगे जानकारी होते ही हम रिपोर्ट अपडेट करेंगे।

बता दें कि 20 अगस्त को नाबालिग अपने घर से शौच के लिए बाहर निकली थी। इसके बाद वह लापता हो गई। घरवालों ने उसके अपहरण का आरोप गाँव में ही रहने वाले दूसरे समुदाय के साबिर पर लगाया। पीड़ित पक्ष का ये भी कहना था कि जब वह साबिर के घर पर अपनी बेटी का पता पूछने गए तो उन्हें लड़की के बारे में बताने की बजाय ये कहा गया कि तुम्हारे बेटी का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए ले गए हैं।

इस संबंध में 23 अगस्त को लड़की के घरवालों ने शिकायत दर्ज करवाई थी और 26 अगस्त को इस मामले पर एफआईआर हुई थी। लड़की के पिता ने अपनी शिकायत में कहा था कि जब वह लोग अपनी लड़की के बारे में पूछने साबिर के घर गए तो उन्हें कहा गया, “तुमको जो ताकत लगाना है लगाओ। हमने तैयारी कर ली है। तुम्हारी लड़की का धर्मांतरण कर देंगे। तुम्हारी औकात नहीं है कि तुम हम सबका कुछ कर सको। मेरे घर से चले जाओ नहीं तो मारकर फेंक देंगे।“

28 अगस्त को जब ऑपइंडिया ने इस मामले पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की। तो, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पूरे मामले पर संज्ञान लिया। NCPCR के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जानकारी दी थी कि इस मामले में आयोग ने संज्ञान लिया है और कार्रवाई की जा रही है। प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर ऑपइंडिया की खबर का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा था कि उन्होंने मधुबनी के पुलिस अधीक्षक से बात कर के इस मामले में आवश्यक निर्देश दिए हैं। साथ ही आश्वासन दिया कि NCPCR इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखते हुए इसकी निगरानी करेगा।

JEE की परीक्षा में छात्रों की संख्या को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी के दावे का शिक्षा मंत्री ने कर दिया फैक्ट चेक

केन्द्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ने बुधवार (9 सितंबर 2020) को अपने ही राजनीतिक दल के नेता सुब्रमण्यम स्वामी का फैक्ट चेक कर दिया। दरअसल, सुब्रमण्यम स्वामी ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने हाल ही में हुई JEE की परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या को लेकर दावा किया था। इसका जवाब देते हुए केन्द्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ने ट्वीट करते हुए उन्हें सही जानकारी दी। 

भाजपा राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट में लिखा कि JEE की परीक्षाओं का एडमिट कार्ड डाउनलोड करने वाले कुल 18 लाख छात्रों में से सिर्फ 8 लाख ही परीक्षाओं में शामिल हुए थे। सुब्रमण्यम स्वामी पिछले हफ्ते से माँग कर रहे थे कि NEET – JEE की परीक्षाओं की तिथि आगे बढ़ा दी जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसे समय में इतनी अहम परीक्षाओं का आयोजन कराना देश का अपमान है। साथ ही ‘विद्या और ज्ञान’ जैसे शब्दों की अहमियत कम करने जैसा है। 

भाजपा के दिग्गज नेता की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने JEE परीक्षाओं से संबंधित कुछ आँकड़े पेश किए। उन्होंने सबसे पहले कहा कि परीक्षाओं में आवेदन करने वालों की संख्या 18 लाख नहीं सिर्फ 8.5 लाख थी। 

अपने ट्वीट में आगे जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने लिखा लगभग 8.58 छात्रों ने परीक्षाओं में शामिल होने के लिए आवेदन किया था। जिसमें लगभग 6.35 लाख छात्र परीक्षाओं में शामिल हुए थे। इतना ही नहीं केंद्र सहित तमाम राज्य सरकारों ने छात्रों की मदद के लिए हर संभव कदम भी उठाए थे जिससे छात्रों को परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। यह पूरा प्रयास सहकारी संघवाद (cooperative federalism) का बेहतरीन उदाहरण था। 

परीक्षा में छात्रों की कम उपस्थिति के दावे को खारिज करते हुए रमेश पोखरियाल ने बताया कि JEE की परीक्षाएँ एक साल में दो बार होती हैं। इसलिए जो छात्र सितंबर के दौरान हुई परीक्षाओं में शामिल नहीं हुए हो सकता है वह जनवरी के दौरान हुई परीक्षाओं में शामिल हुए हों। ऐसे में यह हो भी सकता है कि इस वजह से छात्र इन परीक्षाओं में शामिल न हुए हों। इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि हम छात्रों की संख्या की सही जानकारी रख रहे हैं। फ़िलहाल परीक्षाओं में देरी करने का मतलब है छात्रों के भविष्य को खतरे में डालना क्योंकि परीक्षाएँ नहीं हुई तो छात्रों का दाख़िला कैसे होगा। 

महामारी के दौरान परीक्षाओं का आयोजन कराने के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री ने कहा, “छात्रों ने कॉलेज में दाख़िला लेने के लिए पढ़ाई की है। अगर इन परीक्षाओं की तिथि आगे बढ़ाई जाती है तो यह छात्रों की मेहनत को अहमियत न देने जैसा होगा। हमारी सरकार छात्रों और समाज की सुरक्षा और विकास के मुद्दे पर हमेशा से सुदृढ़ रही है। हम हमेशा छात्रों के लिए हित में ही काम करेंगे। 

सुब्रमण्यम स्वामी का ट्वीट

खुद पर किए गए फैक्ट चेक के बाद सुब्रमण्यम स्वामी ने मुद्दे के दूसरे पहलू पर ज़ोर देने लगे। उन्होंने कहा मंत्रालय ने अदालत में छात्रों की संख्या को लेकर जो दावा किया था और जवाब देते समय जिस संख्या का दावा किया था दोनों पूरी तरह अलग था। सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा कि उन्होंने छात्रों की संख्या 18 लाख क्यों बताई। इसके विपरीत अपने ट्वीट में कहा ‘शिक्षा मंत्री के मुताबिक़ परीक्षा में शामिल होने छात्रों की संख्या 8.5 लाख थी। जबकि सर्वोच्च न्यायालय में इस संख्या को लेकर उनका दावा कुछ और ही था। 

JEE मेन्स की परीक्षाएँ 1 से 6 सितंबर के बीच देश अलग-अलग केन्द्रों में एनटीए द्वारा आयोजित कराई गई थीं। इन परीक्षाओं का परिणाम 11 सितंबर तक आने की संभावना है। 

अनुराग कश्यप चरस फूँकते हैं क्या? आखिर सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड किया #HappyBirthdayCharsiAnurag

बुधवार (9 सितंबर 2020) की शाम से लेकर गुरूवार (10  सितंबर 2020) के बीच ट्विटर पर एक हैशटैग खूब चर्चा में रहा। हैशटैग था #HappyBirthdayCharsiAnurag। दरअसल 10 सितंबर को फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप का जन्मदिन है। जिसके बाद ट्वीटर पर मौजूद नेटीजन्स ने उन्हें कुछ अलग तरीके से जन्मदिन की शुभकामनाएँ दी। 

ट्विटर यूज़र्स ने अनुराग कश्यप का एक वीडियो साझा किया। इसमें वह जॉइंट रोल करते हुए नज़र आ रहे हैं। मज़े की बात यह है कि ऐसा वह एक साक्षात्कार के दौरान करते हुए नज़र आ रहे हैं। अनुराग कश्यप ने एक अमेरिकी यूट्यूब चैनल Our stupid reactions से बातचीत की थी, जिसका वीडियो 8 अप्रैल 2020 को साझा किया गया था। इस बातचीत के दौरान अनुराग कश्यप जॉइंट रोल करते हुए नज़र आते हैं। 

तमाम ट्विटर यूज़र्स ने अनुराग कश्यप के इस वीडियो को साझा किया और उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। एक ट्विटर यूज़र ने लिखा – “अनुराग कश्यप चरसी क्यों है? यह रही असल वजह।”

वहीं कुछ ट्विटर यूज़र्स ने इस वीडियो का स्क्रीनशॉट साझा किया था। जिससे यह साफ़ तौर पर नज़र आए कि अनुराग कश्यप क्या कर रहे हैं। ऐसा करते हुए एक और ट्विटर यूज़र ने लिखा ‘अनुराग कश्यप को ड्रग्स दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। जो लोग अनुराग के लिए चरसी, आतंकवादी और असफल निर्देशक जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं… देखो और आराम से गाली दो।’    

इसके एक दिन पहले अनुराग कश्यप ने बताया था कि उन्होंने सुशांत सिंह के साथ काम करने से इसलिए मना कर दिया था क्योंकि उन्हें लगा सुशांत सिंह के साथ कोई परेशानी है। सुशांत सिंह की मौत के बाद जुलाई में उनकी फिल्म ‘दिल बेचारा’ रिलीज़ हुई थी। इस पर अनुराग कश्यप ने कहा था कि सुशांत एक ‘गैर पेशेवर’ कलाकार हैं।

सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को बांद्रा स्थित अपने आवास पर मृत पाए गए थे। सीबीआई समेत अन्य जाँच एजेंसी मामले की पड़ताल कर रही है।  

उखाड़ दिया: लोकतंत्र का खुला उपहास है शिवसेना के ‘सामना’ का शीर्षक

कंगना रनौत के ऑफिस में की गई तोड़फोड़ के ठीक अगली सुबह शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ अखबार की बड़ी खबर का शीर्षक है- ‘उखाड़ दिया।’ शिवसेना ने इस शीर्षक के साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि कंगना रनौत के टि्वर पर शिवसेना को दी गई चुनौती का ही नतीजा था कि उसकी सरकार ने अभिनेत्री का ऑफिस तोड़ डाला।

शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ का फ्रंट पेज

अभिनेत्री कंगना रनौत के दफ्तर पर बीएमसी द्वारा बुलडोजर चलाने बाद बृहस्पतिवार (सितम्बर 10, 2020) को शिवसेना के मुखपत्र सामना ने ‘उखाड़ दिया’ के शीर्षक को अपने अखबार के पहले पन्ने पर छापा है।

कल ही बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने कंगना रनौत के बांद्रा स्थित बंगले में कथित ‘अवैध हिस्से’ को नष्ट कर दिया था। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई को गलत इरादे से की गई कार्रवाई बताते हुए इस पर रोक लगाने का भी आदेश दिया लेकिन तब तक बीएमसी के जेसीबी अभिनेत्री के बंगले के अधिकांश भाग को ध्वस्त कर कीमती सम्पत्ति को नुकसान पहुँचा चुकी थी।

दरअसल, सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में एक के बाद एक खुलासे करने पर कंगना रनौत महाराष्ट्र की शिवसेना के निशाने पर आ गई थी। यहाँ तक कि शिवसेना नेता संजय राउत ने उन्हें ‘हरामखोर’ तक कह दिया और शिवसेना द्वारा कंगना को धमकियाँ भी दी गईं।

शिवसेना की ओर से दी गई धमकियों के बीच कंगना रनौत ने टि्वटर पर चुनौती दी थी कि वो 9 सितम्बर को मुंबई जाएँगी और कहा कि ‘उखाड़ सको तो उखाड़ लो’। अब कंगना रनौत का बंगला तोड़ने के बाद शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के शीर्षक में ‘उखाड़ लिया’ लिखकर अपनी द्वेषपूर्ण फासीवादी विचारधारा का परिचय दिया है ।

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ का यह शीर्षक इस बात का संकेत है कि महाराष्ट्र में कोई भी व्यक्ति अपनी अभिव्यक्ति खुलकर नहीं रख सकता और यदि वह ऐसा करेगा तो उसके खिलाफ शिवसेना पूरी बेशर्मी के साथ किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है।

दिलचस्प तो यह देखना है कि कंगना के खिलाफ इस खुली गुंडागर्दी के दौरान भी देश के वाम-उदारवादी वर्ग एकदम मौन हैं। सोचिए, महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार होती और JCB कंगना रनौत के बजाए बेफिटिंग रिप्लाय वाली तापसी पन्नू, सोनम कपूर या दीपिका पादुकोण के पास से गुजर भी गई होती तो अब तक कितने लोग भाजपा के कथित फासीवादी शासन के खिलाफ मैदान में उतर गए होते?

कोरोना काल से भी बहुत पहले से बेरोजगार चल रहे कितने ही कलाकार अब तक अपने अप्सरा पेन्सिल अवार्ड लौटाने के लिए आगे आ गए होते, वामपंथियों के स्केच बन रहे होते, कॉमरेड ढपलियाँ बजाते नजर आते और साहित्य का ‘काँजीवरम उद्योग’ अब तक किलोमीटर की लम्बाई से असहिष्णुता और फासिज्म पर निबंध लिख रहा होता।

अगर अभी भी किसी को लगता है कि कोई कथित वाम-उदारवादी वर्ग फासीवाद, पितृसत्ता, निजीकरण या ऐसे ही किसी नव-आधुनिक प्रगतिशील नजर आने वाले ‘लाहौर-लहसुन’ मसलों के खिलाफ लड़ रहा है तो वह वास्तव में ‘हरामखोर’ कहे जाने योग्य है।

और तो और, जब यह तोड़फोड़ की जा रही थी, तब वहाँ कंगना के समर्थन में और शिवसेना के खिलाफ नारेबाजी कर रहे लोगों के साथ भी मुंबई पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज किया गया। यहाँ तक कि समाचार चैनल रिपब्लिक भारत के रिपोर्टर्स को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस तोड़फोड़ पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसे गलत इरादे से की गई कार्रवाई बताया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि इस तरह के काम किए गए तो यह शहर रहने लायक नहीं रह जाएगा। इसके बावजूद शिवसेना द्वारा द्वेषपूर्ण तरीके से संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जाना और उस पर गर्व महसूस करना किसी भी तरह की गुंडागर्दी से कम नहीं कहा जा सकता है।

शायद यही वजह भी है कि कंगना रनौत ने बृहस्पतिवार की सुबह ही एक ट्वीट में शिवसेना को याद दिलाया है कि यह शिवसेना बाल ठाकरे की विचारधारा वाली शिवसेना से अब राजनीति के लिए सोनिया सेना में तब्दील हो चुकी है।

कंगना ने आज सुबह ही अपने एक ट्वीट में लिखा, “जिस विचारधारा पे श्री बाला साहेब ठाकरे ने शिव सेना का निर्माण किया था आज वो सत्ता के लिए उसी विचारधारा को बेच कर शिव सेना से सोनिया सेना बन चुके हैं। जिन गुंडों ने मेरे पीछे से मेरा घर तोड़ा उनको सिविक बॉडी मत बोलो, संविधान का इतना बड़ा अपमान मत करो।”

‘चीन से विवाद के चलते गाँव-घर छोड़ रहे बॉर्डर के लोग’ – मीडिया ने चलाई खबर, भारतीय सेना ने कहा – ‘फेक न्यूज’

भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी सीमा विवाद को लेकर दो समाचार समूहों ने एक ख़बर प्रकाशित की। दोनों ख़बरों के अनुसार अरुणाचल प्रदेश के तवांग स्थित मैकमोहन रेखा के आस-पास रहने वाले कई ग्रामीण वह क्षेत्र छोड़ कर जा रहे हैं। लेकिन ख़बर सामने आने के कुछ ही समय बाद भारतीय सेना ने इसका खंडन किया। इसके अलावा इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए सही जानकारी दी। 

EastMojo में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ लद्दाख स्थित सीमा पर भारतीय और चीनी सेना के बीच विवाद बढ़ा। जिसके बाद अरुणाचल प्रदेश के तवांग स्थित मैकमोहन रेखा के आस-पास रहने वाले गाँव के लोग अपना घर छोड़ कर जाने लगे।

ख़बर में यह भी बताया गया कि ज़मीथांग क्षेत्र से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तवांग जिले में तकसंग गाँव है। हाल ही में इस गाँव के लोगों ने भारत और चीन की सेना के बीच तनाव की ख़बरें सामने आने के बाद अपने घर छोड़े थे। 

ईस्ट मोजो में प्रकाशित ख़बर का स्क्रीनशॉट

इसके बाद HWnews ने भी यही ख़बर प्रकाशित की, जिसमें लोगों के अपने घरों को छोड़ने का दावा किया गया था। ख़बर में यह भी लिखा हुआ है कि साल 1986 में भारत चीनी सेना के सामने तवांग जिले की ज़मीथांग स्थित सुमदोरोंग चू वैली हार गया था। उस दौरान कृष्ण स्वामी सुंदरजी भारतीय सेना के मुखिया थे। 

एचडब्ल्यू न्यूज़ में प्रकाशित ख़बर का स्क्रीन शॉट

ख़बर के अगले हिस्से में बताया गया कि 26 जून साल 1986 में भारत ने इस घटना का आधिकारिक तौर पर विरोध किया था। साथ ही 16 जून को चीनी सेना द्वारा की गई घुसपैठ पर आक्रोश जताया था। तब चीन ने भारत के इस दावे को पूरी तरह से नकार दिया था और कहा था चीनी सेना की तरफ से ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। 

इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए भारतीय सेना के तेजपुर रक्षा जनसंपर्क विभाग (असम – अरुणाचल प्रदेश) ने खंडन किया। अपने खंडन में उन्होंने लिखा कि एलएसी के आस-पास स्थानीय लोगों के पलायन की ख़बरें पूरी तरह फ़र्ज़ी हैं।

इतना ही नहीं, भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश और असम के आम नागरिकों से निवेदन भी किया कि वह इस तरह की झूठी और बेबुनियाद ख़बरों पर भरोसा न करें। ऐसी किसी भी ख़बर को संज्ञान में लेने या रीट्वीट करने से पहले अधिकारियों से पुष्टि करा लें।   

सोनिया सेना बन चुकी है बाल ठाकरे की शिवसेना, घर तोड़ने वाले गुंडे थे… सिविक बॉडी मत बोलो उन्हें: कंगना रनौत

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने बीएमसी द्वारा की गई इस ‘गुंडागर्दी’ को ट्वीट में ‘शिवसेना’ को ‘सोनिया सेना’ बताया है। कंगना रनौत ने कहा कि शिवसेना ने राजनीति के लिए बाल ठाकरे की विचारधारा को त्याग दिया।

बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने बुधवार (सितम्बर 09, 2020) को बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के पाली हिल स्थित कार्यालय को ध्वस्त कर दिया। बीएमसी की इस कार्रवाई को कंगना ने लोकतंत्र की हत्या करार दिया।

कंगना रनौत ने बीएमसी द्वारा की गई तोड़फोड़ की अगली सुबह बृहस्पतिवार (सितम्बर 10, 2020) अपने ट्वीट में लिखा, “जिस विचारधारा पर श्री बाला साहेब ठाकरे ने शिव सेना का निर्माण किया था आज वो सत्ता के लिए उसी विचारधारा को बेच कर शिव सेना से सोनिया सेना बन चुकी है, जिन गुंडों ने मेरे पीछे मेरा घर तोड़ा उनको सिविक बॉडी मत बोलो, संविधान का इतना बड़ा अपमान मत करो।”

बीएमसी टीम ने कल सुबह 11 बजे कंगना के ऑफिस में तोड़फोड़ शुरू की और दो घंटे के भीतर कीमती संपत्ति को बर्बाद कर दिया। कंगना के वकील, रिजवान सिद्दीकी ने सुबह एक याचिका दायर कर अदालत से 11:30 बजे तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया। अदालत ने याचिका का नोटिस लिया और सुनवाई दोपहर 12:30 बजे के लिए निर्धारित की।

‘मुंबई मिरर’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, जब अदालत की सुनवाई शुरू हुई, तो यह पता चला कि बीएमसी ने अदालत से अनुरोध करते हुए एक कैविएट दायर की थी कि वह केस के पक्ष को सुने बिना कंगना को कोई राहत न दे।

सुनवाई के दौरान बीएमसी की वकील ने कहा कि उन्हें तोड़फोड़ की कोई जानकारी नहीं

कैविएट एक दिन पहले ही मंगलवार को दायर किया गया था। इसके अलावा, अदालत में पेश हुए बीएमसी वकील ने कहा कि उनके पास इस मामले के बारे में कुछ भी पता नहीं और इससे एक दिन पहले कंगना को भेजे गए नोटिस के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। यह बयान तब दिया गया, जब कंगना रनौत के ऑफिस में BMC की तोड़फोड़ जारी थी।

जब अदालत ने वकील से बीएमसी कमिश्नर इकबाल चहल को फोन करके उन्हें तोड़फोड़ को रोकने के लिए कहा, तो वकील ने कहा कि उनका संदेश चहल तक पहुँच गया है या नहीं, वह स्पष्ट रूप से नहीं बता सकतीं। जब अदालत के एक सहयोगी ने उसे फोन करने की कोशिश की, तो उसका फोन बंद मिला। उसके दस मिनट के भीतर, बीएमसी वकील ने अदालत को बताया कि तोड़फोड़ को रोकने का उनका संदेश पहुँच चुका है।

अंत में, न्यायमूर्ति एसजे कथावाला और आरआई छागला की खंडपीठ ने बीएमसी के खिलाफ अभिनेत्री कंगना रनौत की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि नागरिक निकाय ने सुनवाई में जानबूझकर देरी की, ताकि यह संपत्ति को ध्वस्त कर सके।

अपने बचाव में, बीएमसी ने इस तोड़फोड़ को अंजाम देने में शिवसेना या किसी अन्य राजनीतिक दल के प्रभाव में होने से इनकार किया। इसमें कहा गया है कि बीएमसी ने वही किया है, जो विभाग को शहर में अवैध निर्माणों पर करना है। यह भी कहा कि उन्होंने पूरी संपत्ति को नहीं गिराया है, लेकिन सिर्फ ‘बढ़ाई गई दीवारें, पार्टीशन और शौचालय स्लैब’ तोड़े गए हैं।

इस तोड़फोड़ पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसे गलत इरादे से की गई कार्रवाई बताया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि इस तरह के काम किए गए तो यह शहर रहने लायक नहीं रह जाएगा। यहाँ तक कि एनसीपी नेता शरद पवार ने भी इस कार्रवाई को गैरजरूरी बताया है।

सर्व धर्म पूजा के बाद IAF का हिस्सा बने 5 राफेल लड़ाकू जेट, पिछली बार ‘ॐ’ और ‘निम्बू’ ने दिए थे विपक्ष को ‘जख्म’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार (सितम्बर 10, 2020) को औपचारिक रूप से भारतीय वायु सेना (IAF) में 29 जुलाई को भारत आए पाँच राफेल लड़ाकू जेट (Rafale fighter jets) विमानों को शामिल किया। इससे पहले, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके फ्रांसीसी समकक्ष फ्लोरेंस पार्ली ने अम्बाला वायु सेना स्टेशन में राफेल इंडक्शन समारोह में ‘सर्व धर्म पूजा’ (Sarva Dharma Puja) में भाग लिया।

सर्वधर्म यानी, हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के अनुसार यह पूजा हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी अंबाला पहुँचे और इस पूजा का हिस्सा बने हैं। जिसके बाद ही पाँचों फाइटर जेट ने फ्लाईपास्ट किया है। सबसे पहले पाँच सुखोई विमानों ने उड़ान भरी।

यह इंडक्शन समारोह अंबाला एयर फोर्स बेस पर हो रहा है, जहाँ IAF के 17 स्क्वाड्रन, जिसे ‘गोल्डन एरो’ भी कहा जाता है, भी है। इसी के साथ भारत के पहले 5 राफेल लड़ाकू विमान (Rafale fighter jets) ’गोल्डन एरो’ (Golden Arrows) स्क्वाड्रन का हिस्सा होंगे।

रक्षा मंत्री के अलावा, उनके फ्रांसीसी समकक्ष फ्लोरेंस पार्ली इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हैं। भारतीय वायुसेना के प्रमुख आरकेएस भदौरिया, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, रक्षा सचिव डॉ अजय कुमार भी समारोह का हिस्सा हैं।

सितंबर 2016 में, भारत और फ्रांस ने 36 राफेल लड़ाकू जेट के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। ₹60,000 करोड़ में यह भारत द्वारा हस्ताक्षरित सबसे बड़ा रक्षा सौदा है। दिवंगत भाजपा नेता मनोहर पर्रिकर उस समय रक्षा मंत्री थे।

पिछले साल दशहरे के अवसर पर 8 अक्टूबर को राफेल जेट जब भारत को सौंपे गए थे, तब फ्रांस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंदू रीति रिवाज से शस्त्र पूजा करते हुए राफेल पर ‘ॐ’ बनाकर नारियल चढ़ाया और धागा बाँधा था। इस पूजा पर तब लिबरल गिरोह और विपक्ष ने कई तरह के सवाल खड़े किए थे।

गौरतलब है कि लंबी राजनीतिक बहस और कूटनीतिक प्रक्रिया पूरे होने के बाद आख़िरकार राफेल लड़ाकू विमान भारत पहुँचे हैं। ये अत्याधुनिक तकनीक के साथ भारतीय वायुसेना में शामिल हुए हैं, जो वायुसेना की नई ताकत के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं। राफेल चौथी जेनरेशन का सबसे फुर्तीला जेट है, इससे परमाणु हमला भी किया जा सकता है। साथ ही, ये एक बार में साढ़े 9 हजार किलो सामान वहन करने में भी सक्षम है।

जलकर राख हुआ श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर का प्राचीन रथ, साजिश के आरोपों को राज्य सरकार ने नकारा

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के अंटारवेडी में प्रसिद्ध श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर के परिसर में रविवार (सितम्बर 06, 2020) सुबह 62 साल पुराने प्राचीन रथ के जलने से राज्य भर में अशांति फैल गई। भाजपा नेताओं ने इसे साजिश बताया है जबकि राज्य सरकार का कहना है कि इसका राजनीतिकरण किया जा रहा है।

अंटवेदवी आंध्र प्रदेश में सबसे प्रतिष्ठित वैष्णव धार्मिक केंद्रों में से एक है। त्यौहारों के मौसम में भगवान की शोभायात्रा के दौरान सागौन के बने रथ को इस्तेमाल किया जाता था। गत रविवार की सुबह लोगों ने उसे जलकर राख होते देखा। रथ के पास स्थापित क्लोज-सर्किट टेलीविज़न (सीसीटीवी) कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे जिस कारण लोगों में इस रथ के जलने के कारणों को लेकर जिज्ञासा थी ।

पुलिस के अनुसार, अंटारवेडी गाँव में श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर के रथ में लगभग एक बजे आग लग गई थी और सुबह 3 बजे तक आग बुझा दी गई। सखीनीपेटल्ली के उप-निरीक्षक गोपालकृष्ण ने बताया, “इस घटना में किसी अन्य संपत्ति और ना ही किसी व्यक्ति को कोई नुकसान पहुँचा है क्योंकि रथ का शेड मंदिर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर था।” पुलिस फिलहाल आग के कारणों का पता लगाने में लगी है।

मंगलवार को, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, हनदवा सक्थि, हिंदू चैतन्य वेदिका और धर्मवीर आद्यात्मिक वेदिका, आदि सहित विभिन्न हिंदू समूहों से संबंधित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने गोदावरी नदी के संगम पर स्थित मंदिर में एकत्रित हुए।

वहाँ इकट्ठी भीड़ ने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाते हुए इन कार्यकर्ताओं ने ऐसी घटनाओं पर रोकने की माँग करते हुए प्रदर्शन भी किया। कार्यकर्ताओं ने मंदिर की घेराबंदी की माँग करते हुए कहा कि सरकार कुछ उपद्रवियों द्वारा कथित रूप से रथ को जलाने की न्यायिक जाँच का आदेश दे।

आरोप लगाया गया कि रथ को जलाने के पीछे एक गहरी साजिश थी। हिंदू कार्यकर्ताओं ने घेराव का समर्थन भी किया और उस जगह का निरीक्षण कर रहे थे, जहाँ रथ जला था। इन मंत्रियों को पुलिस ने खदेड़ दिया।

बीजेपी आंध्र प्रदेश के अध्यक्ष सोमू वीरराजू ने कहा कि अंटारवेडी की घटना ने हिंदुओं की भावनाओं को बुरी तरह आहत किया है। उन्होंने कहा, “जबसे वाईएस जगन मोहन रेड्डी सत्ता में आए हैं, तब से विभिन्न मंदिरों पर हमले हुए हैं, जिससे हिंदुओं में बहुत नाराजगी है।”

आंध्र सरकार ने कहा- घटना का राजनीतिकरण न किया जाए

आंध्र प्रदेश के राज्य मंत्री वेल्लमपल्ली श्रीनिवास ने बुधवार (सितम्बर 09, 2020) को स्पष्ट किया कि अंटारवेडी में लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर में आग की दुर्घटना से संबंधित जाँच जारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर दिया, लेकिन विपक्षी दल इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।

मंत्री वेल्लमपल्ली श्रीनिवास ने नए रथम के लिए 95 लाख रुपए भी मंजूर किए, जो फरवरी में रथोत्सव के लिए तैयार होगा। उन्होंने इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के लिए विपक्षी नेताओं चंद्रबाबू नायडू, बीजेपी के सोमू वीरजू और जनसेना प्रमुख पवन कल्याण की भी निंदा की।

12वीं फेल अनवर के पास 700 नाबालिग लड़कियों की न्यूड तस्वीरें: इंस्टाग्राम पर करता था 9 से 15 साल की लड़कियों को कॉन्टैक्ट

मुंबई क्राइम ब्रांच की साइबर पुलिस ने 20 साल के अल्फाज़ अनवर अली ज़मानी नाम के युवक को गिरफ्तार किया है। 12वीं फेल युवक पर आरोप है कि उसने नाबालिग लड़कियों के इन्स्टाग्राम एकाउंट हैक किए और इसके बाद उसने साइबर स्टॉकिंग, ब्लैकमेलिंग और चाइल्ड पोर्नोग्राफी की। 

युवक के पास से लगभग 700 नाबालिग लड़कियों की आपत्तिजनक तस्वीर मिली है। आरोपित अनवर पर आरोप है कि वह नाबालिग लड़कियों के एकाउंट हैक करके उन्हें न्यूड्स (तस्वीरें और वीडियो) भेजने के लिए कहता था।

इस मामले पर डीसीपी रश्मि ने बताया कि आरोपित 9 से 15 साल की लड़कियों को इन्स्टाग्राम पर फॉलो रिकवेस्ट भेजता था। धीरे-धीरे वह लड़कियों से दोस्ती करता था और फिर उनकी तस्वीरें माँगता था। तस्वीर मिल जाने के बाद उन्हें इस तरह मॉर्फ/एडिट करता था कि वह अश्लील लगे। 

आरोपित अल्फाज़ अनवर इतने पर रुकता नहीं था। इसके बाद वह लड़कियों को उनकी अश्लील तस्वीरें भेज कर उन्हें वायरल करने की धमकी देता था। फिर वह लड़कियों से उनके इन्स्टाग्राम एकाउंट की जानकारी माँग लेता था। अंत में वह इन तस्वीरों को अन्य लोगों को भेज कर उनसे रेट तय करता था।

पुलिस की जाँच में यह बात भी सामने आई कि अनवर अल्फाज़ कुल 17 फ़र्ज़ी इन्स्टाग्राम एकाउंट संचालित कर रहा था। उसने तस्वीरों के लिए लगभग 800 लड़कियों से संपर्क किया था, जिसमें से 700 लड़कियों की तस्वीर लेने में वह कामयाब हुआ।

फ़िलहाल पुलिस इस पहलू पर भी जाँच कर रही है कि क्या आरोपित नाबालिग लड़कियों की तस्वीरें किसी को देता या बेचता था? क्योंकि इस बात की संभावनाएँ भी जताई जा रही हैं कि वह इन तस्वीरों को किसी पोर्न वेबसाइट को बेचने की तैयारी में था।

पुलिस ने उसे गुजरात से गिरफ्तार किया है। फ़िलहाल उसे 12 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। अल्फाज़ अनवर पहले भी इस तरह के मामले में पुणे से गिरफ्तार किया जा चुका है।

दरअसल 4 सितम्बर को डीसीपी रश्मि करंदीकर के पास 7 नाबालिग लड़कियों के माता-पिता की शिकायत आई। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी बेटियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही हैं। 

सूचना मिलने के बाद साइबर पुलिस ने इस मामले की जाँच शुरू की और तमाम पूछताछ के बाद अल्फाज़ अनवर नाम के युवक को गिरफ्तार किया। आरोपित पर लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉस्को एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

‘मंदिर में लाउडस्पीकर क्यों बजा रहे हो, बंद करो’ – अफजल, शराफ और गुलजार ने स्वराज सिंह को बुरी तरह पीटा

उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर स्थित एक गाँव में मंदिर के भीतर लाउडस्पीकर बजाने की वजह से कुछ युवकों ने स्वराज सिंह को बुरी तरह पीट दिया। मारपीट करने वाले गुलज़ार, अफज़ल, शराफ़ समेत कुछ अन्य लोग हैं। पुलिस अभी तक इस मामले में 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। 

घटना गौतम बुद्ध नगर के थाना दनकौर क्षेत्र स्थित अच्छेजा गाँव की है। गाँव के ही एक मंदिर में स्वराज सिंह पूजा पाठ करते हैं। बुधवार 9 सितंबर को दोपहर में गुलज़ार, अफज़ल, शराफ़ समेत अन्य युवकों ने उनके साथ मारपीट की। मारपीट की वजह थी कि मंदिर में लाउडस्पीकर बजाया जाता था। इसके बाद स्वराज सिंह की शिकायत पर पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। 

उन्होंने अपनी शिकायत में यह बताया था कि वह रोज़ाना लाउडस्पीकर से भजन और आरती करते थे। बुधवार (4 सितंबर 2020) की सुबह गाँव के कुछ युवक आए और उन्होंने लाउडस्पीकर न बजाने की धमकी दी। इस पर उन्होंने विरोध किया, जिसके बाद आरोपितों ने जबरन लाउडस्पीकर बंद करवा दिया।  

दोपहर के वक्त वह अपनी बेटी के साथ खेत में चारा लेने के लिए गए थे। तभी कई युवक मौके पर लाठी और डंडे लेकर आए और उन्होंने बेटी के सामने खूब पीटा। फिर गुलज़ार, अफज़ल और शराफ़ नाम के युवकों ने उनको लाउडस्पीकर न बजाने के लिए कहा और ऐसा करने पर जान से मारने की धमकी दी।

घटना पर बात करते हुए अपर पुलिस उपायुक्त विशाल पांडे ने कहा, “हमें जानकारी मिली थी कि गाँव के एक पुजारी के साथ लाउडस्पीकर बजाने को लेकर मारपीट हुई। घटना दनकौर थाना क्षेत्र के अच्छेजा गाँव की है और इस मामले में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। इसके अलावा आरोपितों को गिरफ्तार किया का चुका है और मामले की जाँच जारी है।” सावधानी के लिहाज़ से पूरे इलाके में भारी मात्रा में पुलिसबल तैनात कर दिया गया है।