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अब नागाओं का वास्तविक हितधारक और हितैषी नहीं है NSCN (IM): अन्य स्टेकहोल्डर्स को भी शामिल किए जाने की माँग

सन 2014 में मोदी सरकार और एनएससीएन (आईएम) के बीच हुए समझौते में इस हिंसावादी संगठन ने कई अनुचित माँगों को डलवाया था। समझौते के दौरान एनएससीएन (आईएम) द्वारा रखी गई एक शर्त विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

इस संगठन ने समझौते में यह शर्त रखी थी कि शांति-वार्ता केवल भारत सरकार के शांति-वार्ताकार और एनएससीएन (आईएम) (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड) के बीच ही हो। उसमें अन्य सशस्त्र संगठनों, शांति-समूहों या व्यापक नागरिक समाज की कोई भागीदारी न हो। इस शर्त के माध्यम से इस संगठन ने अन्य सभी ‘स्टेकहोल्डर्स’ को हाशिए पर कर दिया है, और अपनी केन्द्रीय भूमिका और स्थिति सुनिश्चित कर ली है।

इस शर्त का मूल कारण यह है कि यह संगठन नागा-समस्या के समाधान की प्रक्रिया पर अपना एकाधिकार और वर्चस्व बनाए रखना चाहता है। जबकि, आज नागा-समस्या के वास्तविक स्टेकहोल्डर्स कई अन्य संगठन हैं।

नागालैंड में कुल 14 नागा समुदाय रहते हैं। उनकी संख्या कुल नागा जनसंख्या का 80 फीसदी है। इन समुदायों के अलग-अलग छात्र संगठन और महिला संगठन हैं। इसके नागालैंड गाँव बूढ़ा फेडरेशन (1585 गाँव प्रमुखों की सर्वोच्च संस्था), नागा ट्राइब्स कौंसिल और नागा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप जैसे अनेक प्रभावी संगठन हैं, जो कि नागा अस्मिता और अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से कार्यरत हैं।

ये ‘नागा क्लब’ और ‘नागा पीपुल्स कन्वेंशन’ जैसे संगठनों की वैचारिक विरासत और कार्यशैली के उत्तराधिकारी संगठन हैं। ये संगठन नागा समुदाय के वास्तविक हितैषी और हितधारक हैं। 7 नागा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुपों ने मिलकर शांति-वार्ता में भागीदारी और समस्या के समाधान के लिए एक ‘वर्किंग कमेटी’ भी बनाई है।

इनके अलावा 7 सशस्त्र संगठन भी हैं, जो भूमिगत सक्रिय हैं। इन संगठनों के साथ एनएससीएन (आईएम) की हिंसक प्रतिद्वंद्विता है। केंद्र की सरकारों द्वारा शांति-वार्ता और संघर्ष-विराम के दौरान इस संगठन को दिए अत्यधिक महत्व ने उत्तरोत्तर इसका भाव बढ़ाया है। बारीकी से देखें तो केंद्र सरकार ने इस हिंसावादी संगठन को नागा हितों का ‘कॉपी राइट’ देकर इसकी शक्ति और महत्व को अनायास बढ़ाया है। इस संगठन को नागा हितों का एकमात्र प्रतिनिधि संगठन और हितधारक मानना और सिर्फ इसके साथ ही शांति-वार्ता और संघर्ष-विराम करना ऐतिहासिक रणनीतिक भूल है।

अपनी स्थापना के प्रारम्भिक समय में इस संगठन ने बेहिसाब खून-खराबे और दहशतगर्दी के बल पर खूब राष्ट्रीय सुर्खियाँ बटोरीं। यह उसकी कुटिल रणनीति थी जो बेहद कामयाब हुई। उसने न सिर्फ सुरक्षा बलों, पुलिसवालों, उद्योग-धंधे चलाने वालों और राजनेताओं की नृशंस हत्याएँ कीं, बल्कि अपने असंख्य नागा भाई-बहिनों को भी बेरहमी से मौत के घाट उतारा।

इस खून-ख़राबे और दहशत के बल पर यह संगठन नागा अस्मिता और अधिकारों का स्वघोषित एकमात्र संगठन बन बैठा। इस संगठन को नागा हितों का एकमात्र झंडाबरदार बनाने में राष्ट्रीय मीडिया और एक-के-बाद एक आने वाली केंद्र सरकारों की भी बड़ी भूमिका रही है। पिछले 24 साल में हुई शांति-वार्ताओं और संघर्ष-विरामों ने इस संगठन को लगातार खुराक दी है।

एकदम शुरू में विभिन्न नागा समुदायों की काफी बड़ी संख्या का इस संगठन से भावनात्मक जुड़ाव था। लेकिन इसके सभी महत्वपूर्ण पदों पर मणिपुर के तन्ग्खुल समुदाय के हावी होते जाने से लोगों का मोहभंग होने लगा। उल्लेखनीय है कि इस संगठन का स्वयंभू चीफ थुंगालेंग मुइवा भी मणिपुर के अल्पसंख्यक नागा समुदाय तन्ग्खुल से ही है।

उसने सुनियोजित ढंग से अपने समुदाय को आगे बढ़ाकर अन्य समुदायों को किनारे कर दिया और अपनी और अपने समुदाय की स्थिति अत्यंत मजबूत कर ली। किन्तु इस प्रक्रिया में इस संगठन की विश्वसनीयता में भारी गिरावट आयी और मुइवा का यह जेबी संगठन नागाओं का प्रतिनिधि संगठन न रहकर तन्ग्खुल समुदाय का प्रतिनधि संगठन मात्र रह गया है।

परिणामस्वरूप अनेक नागा समुदायों ने अपने पृथक और स्वतंत्र संगठन बना लिए हैं। उन्होंने एनएससीएन (आईएम) या कहें तन्ग्खुल समुदाय के वर्चस्व वाले पैन नागा हो-हो, नागा स्टूडेंट फेडरेशन और नागा मदर्स एसोसिएशन जैसे संगठनों से सम्बन्ध और सदस्यता-विच्छेद कर लिया है।

यह इस संगठन के सीमित और अल्पसंख्यक आधार का प्रमाण है। इसकी स्वीकार्यता और विश्वसनीयता में भारी गिरावट आई है। इसलिए केवल एनएससीएन (आईएम) को नागाओं का प्रतिनधि संगठन और एकमात्र हितधारक मानकर उससे ही वार्तालाप करना अन्य संगठनों और समुदायों की ‘आवाज’ की उपेक्षा करने जैसा है।

केंद्र सरकार और उसके रणनीतिकारों को इस बार उस भूल से बचने की जरूरत है, जो पिछले 24 साल में बार-बार दुहराई गई यह भूल नागा-समस्या के समाधान के लिए होने वाली शांति-वार्ता का एक मात्र स्टेकहोल्डर एनएससीएन (आईएम) को मानने और उसकी आपराधिक गतिविधियों का गंभीर संज्ञान लेकर उन पर अंकुश न लगाने की थी।

शांति-वार्ता और तद्जन्य संघर्ष-विराम को नई-नई वजहों से लम्बा खींचना उसकी पुरानी और अत्यंत लाभप्रद रणनीति रही है। इस बार केंद्र सरकार को शांति-वार्ता को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लक्ष्य के साथ अन्य स्टेकहोल्डर्स को भी वार्ता के दायरे में शामिल करना चाहिए।

गालिब खाँ, नावेद, रिजवान, रहीमुद्दीन कर रहे थे अवैध तमंचे-पिस्टल का निर्माण: UP पुलिस के साथ मुठभेड़ में हुए गिरफ्तार

उत्तरप्रदेश के थाना बहादुरगढ़ में अवैध हथियारों को बनाकर उन्हें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रों (NCR) में बेचने के आरोप में हापुड़ पुलिस ने कल (सितंबर 7, 2020) 4 लोगों की गिरफ्तारी की। इनकी पहचान गालिब खाँ, नावेद अहमद, रिजवान, रहीमुद्दीन सैफी के रूप में हुई।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने अवैध हथियार बनाने एवं NCR क्षेत्र में सप्लाई करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर इन 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार इनके कब्जे से उन्होंने 11 पिस्टल, 21 तमंचे, 8 अधबने तमंचे, 5 रायफल, भारी मात्रा में हथियार बनाने के उपकरण/कारतूस एवं ब्रेजा कार बरामद की।

हापुड़ पुलिस के ट्विटर पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, इन आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि देशी असलहा, पिस्टल, तमंचे बनाकर बेचने का काम ये सभी काफी समय से मेरठ में कर रहे थे। अभी कुछ दिन पहले जब मेरठ पुलिस को इसकी भनक लगी, तो यह पकड़े जाने के डर से भाग आए।

इनका कहना है कि चूँकि कोरोना की वजह से मंदी चल रही है इसलिए कुछ दिन इन्होंने गालिब के घर पर असलहा बनाने का काम किया। मगर, मेरठ में दिलशाद के घर पर जिस मशीन पर वह तमंचों की नाल आदि ढालते थे वह भारी होने के कारण वहाँ से नहीं आ पाई।

ऐसे में फिर भी अधिकतर सामान गालिब के घर पर आ गया था। इसी के बाद इन आरोपितों ने बहादुरगढ़ में पिस्टल तमंचे व बंदूक बनाने का काम शुरू किया। इनका कहना है कि क्योंकि प्रधानी के चुनाव आ रहे हैं। इसलिए इस समय इनकी माँग बढ़ती है।

आरोपित बताते हैं कि अभी तक उन्होंने जितने भी पिस्टल तमंचे बनाए उन्हें वह चोरी छिपे बेचने जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने पकड़ लिया। एक पिस्टल की कीमत 35 हजार रुपए है। तमंचा 5 हजार व बंदूक 10 हजार की है। इनके ऊपर पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 149, 307 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा अभी दो अभियुक्त मामले में फरार हैं। इनकी पहचान निखिल और दिलशाद के रूप में हुई है।

परिवार ने जबरन दी पागलपन की दवाई, हाउस अरेस्ट में रखा… करण जौहर ने किया अपमानित: आमिर का भाई फैसल खान

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के भाई फैसल ने अपने परिवार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें जबरन एक साल तक हाउस अरेस्ट में रखा गया और गलत-गलत दवाएँ खिलाई गईं। करण जौहर का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में पूर्वग्रह या पक्षपात कोई नई चीज नहीं है और ये हमेशा से अस्तित्व में रही है, उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इसे अनुभव किया है। साथ ही उन्होंने उस घटना को भी याद किया, जब फिल्म निर्देशक करण जौहर ने उनका अपमान किया।

‘बॉलीवुड हंगामा’ को दिए गए इंटरव्यू में फैसल खान ने कहा कि अगर आपकी फिल्म फ्लॉप हो जाए तो आपके साथ वो लोग अच्छे से व्यवहार नहीं करते। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को वो लोग देखते तक नहीं और ऐसा उनके साथ हो चुका है। उन्होंने कहा कि वो नाम तो नहीं लेना चाहते लेकिन एक बार ऐसा हुआ कि जब वो किसी से बात कर रहे थे तो करण जौहर ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उनका अपमान किया।

फैसल ने अपने भाई आमिर के साथ आई फिल्म ‘मेला’ की बात करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि उनके काम की तारीफ होगी लेकिन उन्हें पूरी तरह साइडलाइन कर दिया गया। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि बाहरी लोगों के लिए फिल्म इंडस्ट्री में स्थान बनाना असंभव नहीं है। उन्होंने इसके लिए शाहरुख़ खान, अक्षय कुमार और आयुष्मान खुराना का उदाहरण दिया। उन्होंने माना कई स्टार किड्स के साथ शुरू में फायदा रहता है लेकिन बाद में वो अपने काम से जज किए जाते हैं।

फैसल खान ने इससे पहले 2007 में भी आमिर खान और अपने परिवार पर आरोप लगाया था कि उन्हें जानबूझ कर मानसिक बीमारी की दवाएँ दी गईं और 1 साल के लिए हाउस अरेस्ट में रखा गया। इसे याद करते हुए फैसल ने कहा कि उन्हें जबरन पागल घोषित करने का प्रयास किया गया था। उन्होंने कहा कि करण जौहर ने उन्हें उनके भाई आमिर खान के 50वें जन्मदिन के मौके पर आयोजित पार्टी में ही अपमानित किया था।

बता दें कि आमिर खान पहले से ही विवादों में चल रहे हैं। भारत के खिलाफ जहर उगलने और मजहब वालों का मसीहा बनने की कोशिश में लगे तुर्की की प्रथम महिला एमीन एर्दोगन से बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने शनिवार (अगस्त 15, 2020) को मुलाकात की थी। इस्तांबुल के ह्यूबर मेंशन के राष्ट्रपति निवास में यह मुलाकात हुई। आमिर खान ने मुलाकात का अनुरोध किया था। वे वाटर फाउंडेशन के काम के बारे में एर्दोगन को जानकारी देना चाहते थे। 

कंगना रनौत के ऑफिस में कुछ नहीं मिला तो लीकेज का नोटिस चिपका कर चले गए BMC वाले

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के मुंबई स्थित कार्यालय पर सोमवार (सितंबर 7, 2020) को बीएमसी ने रेड मारने के बाद उन्हें आज (सितंबर 8, 2020) नोटिस जारी कर दिया है। लंबी पड़ताल के बाद जब बीएमसी को कार्यालय में कुछ नहीं मिला तो उन्होंने इस नोटिस में लीकेज का हवाला देकर वहाँ चल रहे काम को रोकने के निर्देश दिए हैं।

बीएमसी ने म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट के सेक्शन 354ए के तहत यह नोटिस जारी किया है, जिसे कंगना के ऑफिस के गेट पर भी चस्पा किया गया है। इसमें बीएमसी ने कंगना के ऑफिस में हो रहे लीकेज को रोकने के लिए कहा है।

नोटिस चस्पा होने के बाद कंगना ने भी इसकी जानकारी अपने ट्विटर पर दी है। उन्होंने लिखा, “सोशल मीडिया पर मेरे दोस्तों की आलोचना सहने के कारण बीएमसी वाले बुलडोजर के साथ नहीं आए। इसके बदले उन्होंने मेरे कार्यालय में हो रहे लीकेज को रोकने का नोटिस चिपका दिया। दोस्तों मुझे खतरा बहुत है। लेकिन मैंने आप सबसे बहुत सारा प्यार और समर्थन पाया है।”

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को कंगना के मुंबई स्थित दफ्तर पर बीएमसी ने रेड मारी थी। जिसकी जानकारी अभिनेत्री ने वीडियो ट्वीट करते हुए दी थी। साथ ही इसे बदले की कार्रवाई बताया था।

कंगना रनौत ने ट्वीट कर लिखा था, “ये मुंबई में मणिकर्णिका फ़िल्म्स का ऑफ़िस है। इसे मैंने पंद्रह साल मेहनत कर कमाया है। मेरा ज़िंदगी में एक ही सपना था कि मैं जब भी फ़िल्म निर्माता बनूँ, मेरा अपना खुद का ऑफ़िस हो। मगर लगता है ये सपना टूटने का वक़्त आ गया है। आज वहाँ अचानक बीएमसी के कुछ लोग आए हैं।”

कंगना ने फिर दूसरा वीडियो शेयर किया, जिसमें बीएमसी के लोग कंगना के ऑफिस में सब कुछ नाप रहे हैं। इस वीडियो को शेयर करते हुए कंगना ने लिखा, “वे जबरदस्ती मेरे ऑफिस में घुस गए और सब कुछ नापने लगे। जब मेरे पड़ोसियों ने आपत्ति जताई तो उन्हें भी परेशान किया। अधिकारियों की भाषा कुछ इस तरह थी- वो जो मैडम है उसकी करतूत का परिणाम सबको भरना होगा। मुझे सूचित किया गया कि वे कल मेरी संपत्ति को ध्वस्त कर रहे हैं।”

अभिनेत्री ने तीसरा ट्वीट करते हुए लिखा, “मेरे पास सभी कागज हैं और बीएमसी की परमिशन भी। मैंने अपनी प्रॉपर्टी में कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया है। बीएमसी को स्ट्रक्चर प्लान भेजना चाहिए यह दिखाने के लिए कहाँ गैरकानूनी कंस्ट्रक्शन हुई है, वो भी नोटिस के साथ। लेकिन उन्होंने आज मेरे ऑफिस पर रेड मारी बिना किसी नोटिस के और कल वह सब कुछ ध्वस्त कर देंगे।”

उल्लेखनीय है कि कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच विवाद दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। कंगना के कार्यालय पर ये कार्रवाई भी उन्हें केंद्र सरकार से Y-कैटेगरी की सुरक्षा मिलने के चंद घंटे बाद हुई थी।

चीन ने की फायरिंग, हमने दिखाया संयम… देश की सुरक्षा किसी भी कीमत पर: चायनीज झूठ पर इंडियन आर्मी का हथौड़ा

पूर्वी लद्दाख में LAC पर सोमवार (सितम्बर 7, 2020) की रात हुए संघर्ष को लेकर भारत की सेना ने आधिकारिक बयान जारी किया है। सेना ने बताया है कि भारत सीमा पर तनाव को कम करने और स्थिति को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन चीन स्थिति को बिगाड़ने के लिए लगातार भड़काऊ गतिविधियों में लगा हुआ है। भारतीय सेना ने कहा कि उन्होंने न तो फायरिंग की है, न LAC को पार किया है और न ही किसी अन्य आक्रामक माध्यम का इस्तेमाल किया है।

भारतीय सेना ने आरोप लगया कि चीन की सेना बेशर्मी से करारों का उल्लंघन कर रही है और ऐसी गतिविधियों में लिप्त है, जो आक्रामक हैं। ये सब ऐसे समय में किया जा रहा है जब सैन्य, राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यमों से तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों में बातचीत लगातार जारी है। 7 सितम्बर की रात हुई घटना को लेकर भारतीय सेना ने कहा कि LAC पर उसकी एक फॉरवर्ड पोजीशन को निशाना बनाने का प्रयास किया गया।

बताया गया कि जब चीन की फ़ौज को इसके लिए मना किया गया तो उन्होंने भारतीय सेना को उकसाने के लिए फायरिंग की। उन्होंने ही हवा में कुछ राउंड्स गोलियाँ चलाईं। भारतीय सेना ने बताया कि उनके जवानों ने इस अवसर पर जिम्मेदार तरीके से व्यवहार करते हुए समझदारी और धैर्य का प्रदर्शन किया, जिससे स्थिति नियंत्रण में रही। सेना ने कहा कि वो सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

लेकिन, साथ ही सेना ने ये भी कहा कि देश की सुरक्षा और अखंडता की वो किसी भी कीमत पर रक्षा के लिए तैयार हैं। चीन के बयान को लेकर सेना ने कहा कि वो अपने देश में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों को बहकावे में डालने के लिए ऐसे आरोप लगा रहे हैं। भारतीय सेना ने चीन के उस आरोप को साफ़ नकार दिया, जिसमें उसने भारत पर LAC पार कर के गोलीबारी करने के आरोप लगाए थे। इस बयान के बाद एक बार फिर चाइना की पोल खुल गई है।

इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि लद्दाख़ सीमा पर बनी तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारतीय सेना ने काला टॉप और हेलमेट टॉप जैसी रणनीतिक जगहों पर डेरा डाला हुआ है, जिससे चीन बौखलाया हुआ है। इसी बौखलाहट में चीन की ‘पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA)’ ने आगे बढ़ना शुरू कर दिया और अपनी सीमा तक भूल गए। इसी बीच भारतीय सेना ने खतरे को भाँप कर वार्निंग शॉट दागे। इसके तहत हवा में फायरिंग कर के दुश्मन को आगे न बढ़ने की चेतावनी दी जाती है।

एक्ट्रेस को मारने के लिए थप्पड़ उठा के दौड़ी थी कॉन्ग्रेस नेता कविता, केस हुआ दर्ज… पहले पत्रकार से की थी बदतमीजी

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रवक्ता कविता रेड्डी के खिलाफ आईपीसी की धारा-323, 504B और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि कॉन्ग्रेस प्रवक्ता कविता रेड्डी ने कन्नड़ अभिनेत्री संयुक्त हेगड़े पर हमला किया था। वो थप्पड़ लेकर संयुक्ता हेगड़े और उनके दो दोस्तों की ओर दौड़ी थीं। ये घटना शुक्रवार (सितम्बर 4, 2020) की है, जब कन्नड़ अभिनेत्री अपने दोस्तों के साथ पार्क में वर्कआउट कर रही थीं।

कविता रेड्डी ने जब संयुक्ता पर हमला किया तब उनके साथ कई और लोग भी थे, जो ‘मोरल पुलिसिंग’ करते हुए कन्नड़ अभिनेत्री पर अश्लीलता फैलाने का आरोप लगा रहे थे। उन लोगों का कहना था कि संयुक्ता के कपड़े ठीक नहीं हैं और उन्हें इस तरह से पार्क में वर्कआउट नहीं करना चाहिए। कविता रेड्डी और उनके साथियों ने धमकी दी कि वो संयुक्ता का नाम उस ड्रग्स रैकेट में घसीट लाएँगे, जिसमें कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के कई लोगों के नाम सामने आए हैं।

हालाँकि, कविता रेड्डी इससे पहले वीडियो जारी कर के माफ़ी भी माँग चुकी हैं और कह चुकी हैं कि वो ‘मोरल पुलिसिंग’ का समर्थन नहीं करती हैं। उन्होंने कहा कि वो हमेशा से इसकी विरोधी रही हैं लेकिन इस बार विवाद ज्यादा बढ़ने के कारण वो आक्रामक हो गईं, जो उनकी गलती थी। उन्होंने कहा कि वो एक जिम्मेदार नागरिक और प्रोगेसिव महिला होते हुए संयुक्ता हेगड़े और उनकी दोस्तों से माफ़ी माँगती हैं।

संयुक्ता हेगड़े ने भी कविता रेड्डी की माफ़ी को स्वीकार करते हुए कहा कि अब समय आ गया है, जब हम सब इस घटना से आगे बढ़ें और साथ ही महिलाओं को हर जगह सुरक्षित महसूस कराने की कोशिश करें। इससे पहले उन्होंने एक वीडियो शेयर कर के दिखाया था कि कैसे उनके पहनावे को लेकर उन्हें धमकी दी जा रही है। रेड्डी ने उन्हें गाली देते हुए कहा था कि कल को अगर तुम्हारे साथ कुछ हो जाए तो रोते हुए मत आना।

कविता रेड्डी इससे पहले तब सुर्ख़ियों में आई थीं, जब उन्होंने वामपंथियों के साथ मिल कर कन्नड़ पत्रकार महेश हेगड़े के साथ मेंगलुरु एयरपोर्ट पर बदतमीजी की थी। उन्होंने वामपंथी एक्टिविस्ट अमूल्या लियोना के साथ मिल कर ये हरकत की थी। दोनों ने महेश हेगड़े के साथ बदतमीजी करते हुए उन्हें राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ गा कर अपनी देशभक्ति साबित करने को कहा था। अब सोशल मीडिया पर भी उनकी खासी आलोचना हो रही है।

हरामखोर = नॉटी: संजय राउत ने दी सफाई, लोगों ने बोला – ‘आप भी कम नॉटी नहीं’

कंगना रनौत और संजय राउत के बीच चल रही जुबानी जंग अब सोशल मीडिया पर सभी के लिए बहस का विषय बन गई है। ऐसे में संजय राउत ने अपनी ‘हरामखोर’ वाली टिप्पणी पर स्पष्टीकरण पेश किया है। उनका कहना है कि उन्होंने कंगना रनौत को हरामखोर इसलिए बोला था क्योंकि इसके मायने महाराष्ट्र में अलग हैं। राउत के अनुसार हरामखोर का मतलब वहाँ नॉटी या बेईमान होता है।

संजय राउत ने कंगना को केंद्र से मिली सुरक्षा पर कहा कि महाराष्ट्र की छवि बिगाड़ने की कोशिश की गई है। उन्होंने मुंबई पुलिस को क्रेडिट देते हुए कहा कि मुंबई पुलिस की वजह से बॉलीवुड से अंडरवर्ल्ड का सफाया हुआ है।

संजय राउत ने बोला, “अगर महाराष्ट्र सरकार नहीं दे पाती सुरक्षा तो एक्टर्स मुंबई में इतने अच्छे से काम नहीं कर सकते थे। मुंबई पुलिस की वजह से सब सुरक्षित हैं। एक जमाने में अंडरवर्ल्ड का खतरा था। धमकियाँ आती थीं। मुंबई पुलिस ने सब साफ कर दिया। एक व्यक्ति चाहे महिला हो या पुरुष कलाकार, वो पूरी इंडस्ट्री नहीं है।”

उन्होंने कहा, “100 साल के इतिहास में किसी ने ऐसी (कंगना जैसी) बात नहीं की है। अगर आपके पास ड्रग्स को लेकर जानकारी है तो आप पुलिस को बताओ। मुंबई पुलिस को बताओ, अपने शहर की पुलिस के पास जाओ। आपके तो रिश्ते भारतीय जनता पार्टी से भी अच्छे हैं तो दिल्ली में जाकर शिकायत करो।”

वह कहते हैं कि उनके ख़िलाफ़ एक पॉलिटिकल पार्टी माहौल बनाना चाहती है। मगर वह उसका भी स्वागत करते हैं। उन्होंने अपनी बात साबित करने के लिए कुछ पुराने उदाहरण दिए। उन्होंने कहा, ” मुझे मालूम है कि इस मामले में शाहरुख खान की बात आई थी, आमिर खान की पत्नी की बात आई थी, मेरी पार्टी शिव सेना और मैंने स्टैंड लिया। आप अपनी भाषा में कोई माहौल बनाना चाहते हो तो वो अलग बात है।”

वह बोलते हैं, “मेरा हरामखोर कहने से वो मतलब नहीं था। हमारे महाराष्ट्र में ‘तू हरामखोर है’ का मतलब है कि नॉटी है, बेईमान है। कंगना दोनों है। मेरे हिसाब से वे नॉटी गर्ल हैं। मैंने देखा है कि वो मजा-मजाक करती हैं। और कोई भी लड़की मुंबई में रहती है, अगर देश के साथ ऐसा करती है। तो मैं कहता हूँ कि वो बेईमान है।”

गौरतलब है कि संजय राउत की इस टिप्पणी के बाद अब सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी चुटकी लेनी शुरू कर दी है। मध्य प्रदेश के भाजपा नेता विश्वास सारंग लिखते हैं, “संजय राउत की अति मासूम सफ़ाई बिल्कुल उस तरह की लग रही है, जैसे बच्चों की तरफ़ से शादी के कार्ड में लिखवाया जाता है -हमाले चाचा की शादी में जलूल-जलूल आना।”

भाजपा यूथ विंग के राष्ट्रीय सचिव सौरभ चौधरी लिखते हैं, “अगर अब आप किसी भी सोनिया सेना के नेता को हरामखोर कहेंगे तो वो बुरा नहीं मानेंगे क्योंकि आज ही उनके टट्टू संजय राउत ने उसका मतलब बताया कि उनकी पार्टी में नॉटी समझा जाता है। तो पप्पू के काका एक बार उद्धव ठाकरे और राहुल गाँधी को भी बोलो न नॉटी…प्लीज।”

पत्रकार सुशांत सिन्हा लिखते हैं, “संजय राउत की परिभाषा के हिसाब से हरामखोर का मतलब नॉटी बताकर उन्होंने बहुत ही ‘हरामखोर’ जवाब दिया है।”

इसी तरह पत्रकार रोहित सरदाना लिखते हैं, “हरामखोर=नॉटी। बेवजगह का बवाल बनाया। नॉटी गर्ल! संजय राउत ने मजाक करने की कंगना की आदत की वजह से ऐसा कहा था।”

कार्टूनिस्ट मंजुल लिखते हैं, “संजय राउत जी भी कुछ कम नॉटी नहीं हैं।” वहीं, भाजपा से जुड़े रवि राणा इस टिप्पणी पर संजय राउत से पूछते हैं कि संजय राउत कौन से स्कूल में शिक्षा ली है।

‘जय श्रीराम बुलवा, जबरन शराब पिला कर मार डाला’: कैब ड्राइवर आफताब की हत्या पर मीडिया का झूठ, UP पुलिस ने खोला राज

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में हुई एक घटना को सांप्रदायिक रंग देकर लोगों को भड़काने की कोशिश हो रही है। मोहम्मद आसिफ खान नामक व्यक्ति ने एक खबर शेयर करते हुए दावा किया कि गौतम बुद्ध नगर में आफताब आलम नामक एक कैब ड्राइवर को मार डाला गया। साथ ही ये भी दावा किया कि हत्या से पहले कैब ड्राइवर को ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए बाध्य किया गया और शराब भी पीने के लिए मजबूर किया गया।

आसिफ ने ट्विटर पर ‘द हिन्द न्यूज़’ नामक वेबसाइट की खबर शेयर की, जिसमें इस घटना को ‘मॉब लॉन्चिंग’ बताया गया है। उस खबर में दिल्ली स्थित त्रिलोकपुरी के कैब ड्राइवर के बेटे के हवाले से दावा किया गया है कि उनके कैब में कुछ लोग जबरदस्ती सवार हो गए और आफताब के मजहब को लेकर कुछ-कुछ बोलने लगे। बेटे साबिर का कहना है कि उसके पिता की मॉब लिंचिंग हुई है और पुलिस ने इस बात को रिपोर्ट में नहीं लिखा।

हालाँकि, नोएडा पुलिस के बयान को देखने के बाद सोशल मीडिया पर चल रहे झूठ की पोल खुल जाती है। पुलिस ने पहले ही सूचित किया था कि बादलपुर थानांतर्गत एक कैब ड्राइवर को गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाया गया है। रविवार (सितम्बर 6, 2020) को हुई इस घटना के दौरान उक्त टैक्सी बुकिंग पर गुरुग्राम से बुलंदशहर जाकर वापस आ रही थी। इसी बीच मोहन स्वरूप अस्पताल के पास स्थित दादरी रोड पर टैक्सी के भीतर घायल ड्राइवर मिले। ड्राइवर को जब अस्पताल ले जाया गया तो उन्हें वहाँ मृत घोषित किया गया।

‘द हिन्द न्यूज़’ की खबर शेयर कर के फैलाया जा रहा है झूठ

उधर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी ‘द वायर’ की खबर शेयर कर के सीधा पीएम मोदी पर निशाना साधा। इसमें दावा किया गया है कि आफताब का नाम पूछने के बाद उसे ‘जय श्री राम’ बोलने को मजबूर किया गया। साथ ही ऑडियो डाल कर इसकी पुष्टि करने की कोशिश की गई। इसमें बताया गया है कि बेटे ने 40 मिनट तक कॉल रिकॉर्ड किया, जब तक फोन स्विच ऑफ नहीं हो गया। इसमें आफताब के पूरे परिवार से बात कर के ये आरोप लगाए गए।

क्या है सच्चाई

दरअसल, मामला सांप्रदायिक नहीं है। कैब ड्राइवर आफ़ताब जब बुलंदशहर में एक बुकिंग को छोड़ कर वापस लौट रहे थे, तभी कुछ असामाजिक तत्व टैक्सी में बिना बुकिंग कराए ही बैठ गए। इसके बाद वो किराए को लेकर लड़ने-झगड़ने लगे। बाद में पुलिस ने जब गाड़ी में घायल ड्राइवर को देखा तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। ग्रेटर नोएडा पुलिस का कहना है कि इलाज के दौरान ही आफताब को मृत घोषित किया गया।

इस दौरान मृतक का मोबाइल फोन भी बरामद नहीं हो सका है। सेंट्रल नोएडा के डीसीपी ने बताया है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर के आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने अपने किसी भी बयान में इस घटना में कोई सांप्रदायिक एंगल होने की बात नहीं कही है, बावजूद इसके सोशल मीडिया पर झूठ फैलाया जा रहा है। पुलिस ने पंचनामा की कार्यवाही के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भी भेजा।

‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, परिजनों ने हत्या को लेकर दर्ज कराई गई एफआईआर में 3500 रुपए और एक मोबाइल फोन की लूट की बात भी कही है। आरोपितों के टोलकर्मी के साथ भी विवाद हुआ था और वो बादलपुर के ही निवासी हैं, ऐसा पता चला है। लुहारली टोल पर वो खुद को स्थानीय बता रहे थे। हालाँकि, इस दौरान सीसीटीवी में उनकी तस्वीरें कैद हो गईं, जिसके आधार पर पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

वहीं नोएडा के पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि इस प्रकरण में मुकदमा पंजीकृत है, विवेचना जारी है। उनके अनुसार, जहाँ तक ऑडियो रिकॉर्डिंग का प्रश्न है उसको सुना गया है, मृतक को कोई भी नारा लगाने के लिए नहीं कहा गया है बल्कि किसी और से खरीदारी करते वक्त ये वाक्य आया है फिर भी हर बिंदू पर विवेचना प्रचलित है। पुलिस ने असदुद्दीन ओवैसी द्वारा शेयर की गई ‘द वायर’ के खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए ये बयान दिया।

पालघर साधु लिंचिंग केस में नहीं हो CBI जाँच: सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र पुलिस ने कहा, – ‘याचिका खारिज कर जुर्माना भी लगाएँ’

पालघर में 2 साधुओं की लिंचिंग मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में महाराष्ट्र पुलिस ने मामले के मद्देनजर CBI जाँच की माँग का विरोध किया है।

पुलिस ने कहा है कि याचिका खारिज करने के साथ याचिकाकर्ता पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए। राज्य CID गहन जाँच के बाद पहले ही 126 आरोपितों के ख़िलाफ़ दो चार्जशीटें दायर कर चुकी है इन चार्जशीटों को भी कोर्ट में दाखिल किया गया है।

हलफनामे में उन पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का विवरण है, जिन्होंने अपराध को रोकने या अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही बरती। पुलिस के इस हलफनामे के अनुसार, उन्होंने उन सभी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ विभागीय जाँच की और जाँच के बाद जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए, उन्हें बर्खास्त किया गया या फिर उन्हें न्यूनतन आय की श्रेणी में डाल दिया गया।

इसमें बताया गया कि विभागीय जाँच में दोषी पाए गए अस्सिटेंट पुलिस इस्पेक्टर (ASI) आनंदराव शिवाजी काले को सर्विस से बर्खास्त किया गया है। इसके अलावा असिस्टेंट पुलिस सब इस्पेक्टर रविंद्र दिनकर सालुंखे और हेडकांस्टेबल नरेश ढोंडी को कंपल्सरी रिटायरमेंट दिया गया है। वहीं लापरवाही के दोषी पाए गए 15 दूसरे पुलिस कर्मियों को 2-3 साल के लिए न्यूनतम आय दिए जाने का दंड दिया गया है।

गौरतलब है कि इस मामले में पिछली सुनवाई 6 अगस्त को हुई थी। उस सुनवाई में कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस से इस मामले में दायर चार्जशीट माँगी थी। साथ ही इस मामले में लापरवाही के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की ब्यौरा भी माँगा था।

इसके बाद राज्य पुलिस की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि लापरवाही बरतने वाले 18 पुलिसकर्मियों के खिलाफ अलग-अलग तरह की कार्रवाई की गई है। इनमें से कुछ को नौकरी से बर्खास्त भी किया गया है और कुछ को समय से पहले रिटायर दिया गया है।

बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय इस केस में वकील शशांक शेखर झा, साधुओं के रिश्तेदार के अलावा पीठ श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा व कुछ अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इन याचिकाओं में मामले की CBI और NIA से जाँच की माँग की गई है।

पालघर मामले में NCP नेता की मौजूदगी

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ 16 अप्रैल की घटना पर महाराष्ट्र पुलिस ने सीबीआई जाँच का विरोध किया है। वहीं, एक फैक्ट फाइंडिंग टीम ने कुछ दिन पहले ही इस केस की पड़ताल में एनसीपी के कनेक्शन को उजागर किया है और दावा किया है कि घटना के समय भीड़ के बीच एनसीपी नेता काशीनाथ चौधरी मौजूद थे। उनके अलावा साधुओं की लिंचिंग कर उनकी निर्मम हत्या करने वाली भीड़ में वामपंथी पार्टी सीपीएम के पंचायत सदस्य व उसके साथ विष्णु पातरा, सुभाष भावर और धर्मा भावर भी शामिल थे।

LAC पर 40 वर्षों में पहली बार फायरिंग: भारत ने आगे बढ़ रहे चीनी सेना के छक्के छुड़ाए, पीछे हटने को किया मजबूर

लाइन ऑफ एक्चुअल कण्ट्रोल (LAC) पर चीन अपनी गुस्ताखी से बाज नहीं आ रहा है। एक बार फिर उसके सैनिकों ने सीमा पर गोलीबारी की, जिसका भारत के जवानों ने भरपूर जवाब दिया। ये घटना इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि LAC पर भारत और चीन के बीच पिछले 4 दशक से गोलीबारी नहीं हुई थी। हालाँकि, इस फायरिंग में जानमाल की क्षति की कोई सूचना नहीं है। बातचीत के प्रयासों के बीच इससे तनाव फिर बढ़ गया है।

लद्दाख़ सीमा पर बनी तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारतीय सेना ने काला टॉप और हेलमेट टॉप जैसी रणनीतिक जगहों पर डेरा डाला हुआ है, जिससे चीन बौखलाया हुआ है। इसी बौखलाहट में चीन की ‘पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA)’ ने आगे बढ़ना शुरू कर दिया और अपनी सीमा तक भूल गए। इसी बीच भारतीय सेना ने खतरे को भाँप कर वार्निंग शॉट दागे। इसके तहत हवा में फायरिंग कर के दुश्मन को आगे न बढ़ने की चेतावनी दी जाती है।

इसके बाद चीन के जवान LAC पर पीछे हट गए। भारत ने एक बार फिर से उसके इरादों को नाकाम कर दिया। चीन की सेना द्वारा वहाँ गोलीबारी करने की भी ख़बर है, जिसके प्रत्युत्तर में भारतीय जवानों ने भी फायरिंग की। बीते जून 15 को हुए संघर्ष में भी फायरिंग नहीं हुई थी। ये एक तरह से 1975 के बाद पहली दोतरफा आक्रामक फायरिंग है, जो भारत-चीन सीमा पर हुई। 31 अगस्त की रात भी भारतीय सेना ने चीन को पीछे धकेला था।

वहीं सोमवर (सितम्बर 7, 2020) की रात हुई घटना को लेकर चीन ने अब उलटा भारत पर ही आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। चीन का आरोप है कि भारतीय सेना ने ही आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए सीमा को पार किया। चीन ने कहा है कि भारत की तरफ से हुई फायरिंग का उसने जवाब दिया। उसने गोलीबारी की बात स्वीकार तो की है लेकिन इसके लिए भारत को ही जिम्मेदार ठहराया है। फ़िलहाल स्थिति काबू में कही जा रही है।

पेंगोंग त्सो के दक्षिणी किनारे पर स्थित शेपाओ माउंटेन टॉप्स पर चीन ने ये हरकत की, जिसका भारतीय सेना ने माकूल जवाब दिया। अब भारत इन दुर्गम पहाड़ियों पर ज़रूरी सामग्रियाँ पहुँचाने में लगा है और साथ ही वहाँ जवानों की तैनाती चुस्त करते हुए बढ़ा दी गई है। पूर्वी लद्दाख में हुई चीनी फायरिंग भारतीय चौकी को निशाना बना कर की गई थी। स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है। पूर्वी लद्दाख में अगस्त में भी चीन ऐसी हिमाकत कर चुका है।

इधर सीमा पर चीन के साथ जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने लद्दाख क्षेत्र में सामरिक उद्देश्यों के लिहाज से महत्वपूर्ण सड़क निर्माण के काम में तेजी लाई है। इसके लिए कई अत्याधुनिक मशीनों को काम पर लगाया गया है। यह वही सड़क है, जिसके निर्माण को लेकर चीन ने पूर्व में आपत्ति जताई थी। बीआरओ ने लेह को जोड़ने वाली उन सभी सड़कों पर दिन-रात काम जारी रखा है, जिनका काम भूस्खलन आदि कारणों से और चीन के साथ तनावपूर्ण स्थिति के कारण बीच में अवरुद्ध हो गया था।