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मोदी किसानी-गाय-बैल-मछली की बात कर रहा है… हम लड़ेंगे साथी, पौव्वा पीकर उससे लड़ेंगे

मुझे लगता है कि ये आदमी पागल है! बताइए भला जिस राज्य में चुनाव सर पर हों, वहाँ क्या घोषणाएँ की जाती हैं? अरे सरकारी कर्मचारियों के वेतन-भत्ते बढ़ाने की बात करता तो समझ में भी आता। चलिए वो नहीं करना था तो किसी फैक्ट्री पुल वगैरह का शिलान्यास कर देता और कहता कि इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा।

तालियाँ बजतीं, अख़बारों में छपता, वाह-वाही होती, विरोधियों को बोलने को कुछ ना मिलता। मगर नहीं! ये तो तीन सौ करोड़ के लगभग की योजनाएँ किसानों के लिए लेकर आ रहा है! बताइए, 300 करोड़? अरे किसानों के मुद्दे पर किसने इस देश में चुनाव लड़ा है आजतक?

उसमें भी कैसी-कैसी चीज़ें हैं? सीधे कृषि की होती तो “अन्नदाता” वाला जुमला उछालते और काम बन जाता। लेकिन यहाँ तो 5 करोड़ की लागत से डुमरा, सीतामढ़ी में बखरी मछली बीज फार्म खोला जा रहा है!

दस करोड़ लगाकर किशनगंज के मत्स्य पालन कॉलेज, पूसा में समेकित उत्पादन प्रौद्योगिकी और मधेपुरा में एक करोड़ की लागत से मत्स्य चारा मिल लगाया जा रहा है। किसी ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ के तहत 107 करोड़ की लागत की परियोजना के शुरुआत भी होने वाली है।

पटना में एक बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय है, जहाँ के हॉस्टल में कभी लालू रहते थे, जो आजकल चारा घोटाले में जेल में हैं। वहाँ जलीय रेफरल प्रयोगशलाएँ बनेंगी और पटना के ही मसौढ़ी में 2 करोड़ की लागत से फिश ऑन व्हील्स और 2.87 करोड़ की लागत से कृषि विश्वविद्यालय का उद्घाटन भी प्रधानमंत्री मोदी करेंगे।

अब ये फिश इन वाटर तो हमको बुझाता है, लेकिन ई ससुरा फिश ऑन व्हील्स क्या है? इतने कार्यक्रम होंगे तो हम दावे से कह सकते हैं कि इनमें से किस परियोजना में होता क्या है, ये तो खुद अख़बार वाले भी हमें नहीं बता पाएँगे!

इनके अलावा डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर में कुल 74 करोड़ की विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास होने वाला है। सबसे पहले तो 11 करोड़ की लागत से बने स्कूल ऑफ एग्रीबिजिनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के भवन का उद्घाटन होगा।

इसके साथ ही ब्वायज हॉस्टल (27 करोड़), स्टेडियम (25 करोड़), और इंटरनेशनल गेस्ट हाउस (11 करोड़) का शिलान्यास भी प्रधानमंत्री मोदी करेंगे।

पशुपालन की तरफ आएँ तो ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ के तहत 84.27 करोड़ की लागत से पूर्णिया सीमेन स्टेशन, 8.06 करोड़ की लागत से बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में इम्ब्रयो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी (ईटीटी) एवं आईवीएफ लैब और 2.13 करोड़ की लागत से समस्तीपुर, नालंदा, बेगूसराय, खगड़िया और गया में तैयार सेक्स सॉर्टेड सीमेन परियोजना की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी करेंगे।

अगर हम याद करने की कोशिश भी करें तो याद नहीं आता कि पिछले डेढ़-दो दशकों में हमने कभी एक राज्य में एक साथ सिर्फ कृषि क्षेत्र के लिए इतनी अलग-अलग परियोजनाओं का नाम सुना हो।

सच बताएँ तो हमें “एवरीबॉडी लव्स ए गुड ड्राउट” वाले पी. साईंनाथ के बाद से किसी ऐसे पत्रकार और किसी ऐसे अख़बार का नाम भी नहीं पता, जो इन सारी योजनाओं की साधारण जानकारी भी हमें दे सके। स्थानीय पत्रकारों में से कोई ये करेगा, या उसे करने दिया जाएगा, ये भी शंका का विषय है।

इन छोटी-मोटी समस्याओं को छोड़ भी दें तो हमें एक बड़ी चिंता सता रही है। इन गरीब किसानों की गरीबी के नाम पर दादी से लेकर पोते तक की तीन पीढ़ियों ने अपनी राजनीती चलाई है। उनके अलावा भी तथाकथित एक्टिविस्ट, सोशल वर्कर, एडवोकेसी पार्टनर जैसे कई लोग/संस्थाएँ हैं, जो इनके ही नाम पर चंदा माँग-माँग कर खाते हैं।

अगर इस किस्म की परियोजनाएँ आती रहीं तो फिर उन बेचारों का क्या होगा? क्या बड़ी बिंदी और झोला-कुर्ता, जीन्स-चप्पल वाले सिर्फ टीवी और इतिहास की बातें बनकर रह जाएँगे? नहीं-नहीं, ऐसा हरगिज नहीं होना चाहिए!

साथी हमारा आह्वान है कि इससे पहले कि सारे मुद्दे छीन लिए जाएँ, चाँद को रोटी बताने वाली कविताएँ बचाने के लिए हमें लड़ना चाहिए! आओ, हम लड़ेंगे साथी! हम विकास के मुद्दों से लड़ेंगे! हम मछली को दिए जा रहे पानी के लिए लड़ेंगे! अन्नदाता को अनाज क्यों नहीं, मछली वाले को शोध का पैसा क्यों कहकर लड़ेंगे! ठहरो, मैं जरा पौव्वा गटक कर गला तर कर लूँ, फिर हम लड़ेंगे साथी!

आजतक की पत्रकार को चैनल के विरोध चलते करना पड़ा शर्मिंदगी का सामना: लोगों ने लाइव TV पर लगाए ‘मुर्दाबाद’ के नारे

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत के ऑफिस को महाराष्ट्र सरकार के इशारे पर BMC द्वारा ध्वस्त कर दिया। इसी दौरान आजतक की पत्रकार मौसमी सिंह को चैनल की करतूतों के चलते काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।

मौसमी को सबसे पहले अपने चैनल के खिलाफ विरोध करने वाली नाराज महिलाओं का सामना करना पड़ा, फिर कंगना के ऑफिस को बीएमसी के आदेशों पर ढहाने आए जेसीबी के ऑपरेटर ने भी उनकी जबरदस्त बेइज्जती की जिसका सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने मिम्स बना कर जम कर मजे लिए।

आजतक की रिपोर्टर मौसमी कंगना रनौत के ध्वस्त किए जा रहे ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर रही महिलाओं को कवर कर रही थी, उसी दौरान उन्हें अपने चैनल के खिलाफ चल रहे विरोधों का सामना करना पड़ा। रिपोर्टिंग करते वक्त मौसमी ने जैसी ही बीएमसी के खिलाफ महिला प्रदर्शनकारियों से सवाल पूछने गई, महिलाएँ उनके चेहरे पर ही “आज तक मुर्दाबाद” के नारे लगाने शुरू कर दिए।

बता दें, आजतक की कवरेज के दौरान पत्रकार द्वारा सामना की गई यह एकमात्र शर्मिंदगी नहीं थी। कंगना के ऑफिस को ध्वस्त करने आए जेसीबी मशीन के संचालक ने भी उनके एक सीधे से प्रश्न का ऐसा उत्तर दिया, जिसके बारे में उन्होंने सोचा भी नहीं होगा। कहाँ वो जेसीबी पर चढ़ कर अनोखी पत्रकारिता का प्रदर्शन करने वालीं थी और कहाँ अब लोग उनके मिम्स बना कर सोशल मीडिया पर फैला रहे है।

गौरतलब है कि जैसे ही मौसमी सिंह ने ड्राइवर से बातचीत करने के लिए जेसीबी पर चढ़कर ऑपरेटर का नाम पूछा, तो ड्राइवर ने सीधे उनसे पूछा कि उन्हें उसका नाम जानने में दिलचस्पी क्यों है। उन्होंने पूछा, “ड्राइवर साब आपका क्या नाम है।” जिस पर ड्राइवर ने जवाब दिया, “क्या करोगे मेरा नाम जान के।”

उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब मौसमी सिंह को रिपोर्टिंग करते समय शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। पिछले साल, प्रियंका गाँधी वाड्रा को उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रभारी के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद मौसमी सिंह को कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को वाड्रा के लिए उत्साहित दिखने के निर्देश देते हुए भी सुना गया था।

इससे पहले उन्होंने श्रीनगर हवाई अड्डे से रिपोर्टिंग के दौरान कैमरे पर विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश की थी, जहाँ वीडियो शूट करना मना था। मौसमी सिंह ने सुरक्षाकर्मियों पर आरोप लगाया था कि जब उन्होंने उसे वीडियो रिकॉर्ड करने से रोकने की कोशिश की तो उसके साथ छेड़खानी की गई थी। वहीं 2019 के आम चुनावों से पहले प्रियंका गाँधी वाड्रा को यूपी की कमान सौंपे जाने के बारे में उनकी अपनी उत्तेजना तब सामने आई जब उन्होंने वाड्रा की हवाई जहाज की यात्रा को “सामान्य इंडिगो फ्लाइट” पर कवर किया।

वैसे आज का दिन टीवी मीडिया के लिए विशेष रूप से बुरा दिन था, क्योंकि एक अन्य घटना में, वे एक गलत व्यक्ति से पूछते हुए देखे गए थे कि उन्होंने कंगना रनौत के कार्यालय को क्यों ध्वस्त किया था। सोशल मीडिया पर इस घटना पर लोग जमकर मीडिया की खिंचाई कर रहे है।

वायरल हुए एक वीडियो में आप देख सकते है कि एक व्यक्ति कई टीवी पत्रकारों से घिरा हुआ है, जो ध्वस्त के पीछे का कारण पूछ रहे है। लेकिन इन सवालों पर आदमी जवाब देता है, “मैंने इसे ध्वस्त नहीं किया है, मैं एक पोस्टमैन हूँ।”

मुंबई पुलिस ने किया कंगना समर्थकों पर लाठी चार्ज, बॉम्बे HC की फटकार, कहा- गलत भावना से की गई कार्रवाई

कंगना रनौत के मुंबई पहुँचते ही मुंबई स्थित उनके ऑफिस के सामने भारी संख्या में उनके समर्थक एकत्रित हुए और उन्होंने कंगना रनौत के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर शिवसेना प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। रिपब्लिक भारत की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई पुलिस ने कंगना रनौत के इन समर्थकों को हटाने के लिए लाठी चार्ज किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान शिवसेना के खिलाफ नारेबाजी कर रहे कंगना के समर्थकों को जबरन पुलिस वैन में भरकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया गया। यही नहीं, इस दौरान पुलिस को कई समर्थकों के साथ धक्का-मुक्की और बल का इस्तेमाल करते हुए भी देखा गया।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के रिपोर्टर अनुज कुमार, वीडियो जर्नलिस्ट यशपालजीत सिंह और ओला कैब ड्राइवर प्रदीप दिलीप धनावड़े को भी महाराष्ट्र पुलिस ने गैरकानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया।

कंगना रनौत के दफ्तर के बाहर जुटे समर्थकों ने कहा कि उन्हें न्याय चाहिए। ये सभी समर्थक कंगना के साथ सुशांत सिंह राजपूत के लिए भी न्याय माँग रहे हैं और उन्होंने BMC द्वारा की गई तोड़फोड़ को नाजायज ठहराया।

अभिनेत्री कंगना रनौत ने मुंबई पहुँचते ही अपने ध्वस्त किए गए ऑफिस के कुछ वीडियो शेयर करते हुए इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ बताया। साथ ही, BMC की कार्रवाई के बाद वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे को चेतावनी दी और कहा कि ‘आज मेरा घर टूटा है, कल आपका घमंड टूटेगा।’

बॉम्बे हाईकोर्ट ने रोक लगाकर BMC को लगाई फटकार

वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी द्वारा की गई इस कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह तोड़फोड़ गलत इरादों से की गई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में कल फिर सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट ने कंगना रनौत के ऑफिस में कथित अवैध निर्माण को गिराने में इतनी जल्दबाजी करने के लिए बीएमसी से जवाब माँगा है। कोर्ट ने कहा कि अगर इस तरह से काम किया गया तो यह शहर रहने लायक नहीं रहेगा। .

चीन में 15 और उइगर के यातना शिवरों का पता चला: इसी क्षेत्र में शूटिंग के कारण ‘डिज्नी’ की नई फिल्म ‘मुलान’ भी निशाने पर

चीन के उत्तर-पश्चिम प्रांत शिनजियांग में कैद करके रखे गए उइगरों के 15 और यातना शिविरों की जानकारी सामने आई है। वाशिंगटन स्थित एक उइगर संगठन ने इस बात की जानकारी साझा की है कि अमेरिकी प्रोडक्शन हाउस  ‘डिज्नी’ की नई फिल्म ‘मुलान’ के कई दृश्यों को इसी इलाके में फिल्माया गया है। बता दें इस वक्त चीन से संबंधित इस फ़िल्म को सोशल मीडिया पर काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

उइगर के यातना शिविरों का पता चलने के बाद फ़िल्म मुलान को लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार प्रोडक्शन हाउस ने 11 सितंबर को रिलीज होने वाली फ़िल्म में सहयोग करने के लिए तुरपान के जन सुरक्षा विभाग और कम्युनिस्ट पार्टी के प्रचार विभाग का आभार व्यक्त किया था। जिसको लेकर अब बवाल खड़ा हो चुका है। दरअसल इन्हीं चीनी संस्थाओं को उइगर पर हुए उत्पीड़न और सामूहिक नजरबंदी के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाता हैं।

इसके अलावा फिल्म की मुख्य किरदार लियू याइफी को लेकर भी सोशल मीडिया पर फ़िल्म को बॉयकॉट करने की माँग बढ़ रहीं है क्योंकि उन्होंने लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हॉन्गकॉन्ग पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया है।

गौरतलब है कि चीन के तुरपान क्षेत्र में स्थित 130 किलोमीटर के दायरे में 10 यातना शिविरों और पाँच कारागारों की जानकारी उइगरों के लिए समर्पित संस्था ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल अवेकनिंग मूवमेंट (ईटीएनएएम) द्वारा साझा की गई है। सिर्फ इतने ही नहीं नवंबर 2019 में ईस्ट तुर्किस्तान में स्थित 182 यातना शिविरों, 209 कारागारों और 74 श्रम शिविरों का कच्चा चिट्ठा सामने आया था।

इस मामले को लेकर मानवाधिकार संगठन ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ ने भी ट्वीट कर डिजनी की निंदा की है। ट्वीट में इस बात पर जोर दिया गया कि डिज्नी ने शिनजियांग प्रांत में शूटिंग की, लेकिन उइगर के मानवाधिकारों का ख्याल नहीं रखा।

उल्लेखनीय है कि चीन के शिनजियांग प्रांत में निर्दयता से उइगर के सामूहिक उत्पीड़न की आलोचना करते हुए ब्रिटेन के 130 सांसदों ने इस घटना की जानकारी देते हुए चीनी राजदूत को एक चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में इस मामले पर संज्ञान लेने और मानवाधिकार को मद्देनजर रखते हुए उचित कदम उठाने के लिए कहा गया है। चिट्ठी में कुछ वीडियो का हवाला देते हुए उइगर पर हुए कठोर अत्याचार जैसे जबरदस्ती नसबंदी करवाना, सामूहिक नजरबंदी से जुड़ी रिपोर्ट पेश की गई है।

CBI-ED को रिया-सुशांत मामले ज्यादा गंभीर चीजों की जाँच करनी चाहिए – ट्विटर ट्रोल स्वरा भास्कर

ट्विटर ट्रोल स्वरा भास्कर का मानना है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी एजेंसियों को सुशांत राजपूत की मौत में रिया चक्रवर्ती की संभावित भूमिका की जाँच से ज्यादा गंभीर मामलों पर फोकस करना चाहिए। जहाँ ED रिया चक्रवर्ती द्वारा दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के धन की हेराफेरी के आरोपों को देख रहा है, वहीं सीबीआई उसके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों की जाँच कर रही है।

प्रोपेगेंडा समाचार चैनल NDTV से बात करते हुए, ‘रसभरी’ वेब सीरीज फ़ेम स्वरा भास्कर ने कहा, “मुझे लगता है कि रिया पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं वो बिल्कुल भयानक हैं। उस इंडस्ट्री से एक युवा के रूप में, मैं महसूस कर सकती हूँ, यह बहुत ही डरावना है कि सोशल मीडिया पर एक या दो ‘ब्लू-टिक’ वाले अकाउंट के आरोपों और गुस्से से वास्तव में एक व्यक्ति को पकड़ा जा सकता है और इस तरह के गंभीर अपराधों के आरोप लगाए जा सकते हैं।”

“मेरा मतलब है, हम मनी लॉन्ड्रिंग के बारे में बात कर रहे हैं। ईडी इस युवती की जाँच कर रही है। ये वो लोग हैं जिन्हें नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को वापस लाना चाहिए था लेकिन वे क्या जाँच कर रहे हैं? सीबीआई वास्तव में गंभीर मामलों की जाँच करने वाली संस्था है और वो ये जाँच कर रही है। रिया के साथ जो हुआ है वह शर्मनाक और चौंकाने वाला है।”

गौरतलब है कि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह की प्रेमिका रिया चक्रवर्ती को मंगलवार को नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो ने गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। एनसीबी ने अपने रिमांड आवेदन में कहा था कि रिया एक ड्रग सिंडिकेट के सक्रिय समूह की सदस्य है। इसके कुछ ही दिन पहले रिया के भाई शोविक को भी ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार किया गया था। शोविक ने ही रिया द्वारा ड्रग्स खरीदने की बात का जिक्र किया था।

‘कहीं शिवसेना का डिमॉलिशन न शुरू हो जाए!’ BMC की कार्रवाई पर बीजेपी नेता ने शिवसेना को बताया- ‘चूहा सेना’

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत मुंबई में घर पहुँच चुकी हैं। उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच मुंबई एयरपोर्ट से बाहर निकाला गया और खार स्थित उनके घर पहुँचाया गया। घर पहुँचते ही कंगना ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा। कंगना ने कहा कि आज मेरा घर टूटा है, कल तेरा घमंड टूटेगा। 

दूसरी तरफ शिवसेना कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। वहीं अभिनेत्री के मुंबई पहुँचने से पहले ही बीएसमी ने उनके बांद्रा स्थित बंगले में अवैध निर्माण को गिरा दिया। इस कार्रवाई के खिलाफ कंगना ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बीएमसी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

इस कार्रवाई पर विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेता प्रवेश साहिब ने शिवसेना को चूहा सेना कहा है। इससे पहले भाजपा सांसद प्रवेश साहिब ने महाराष्ट्र सरकार को नपुंसक सरकार करार दिया। भाजपा सांसद ने अपने ट्वीट में लिखा, “नपुंसक है महाराष्ट्र सरकार। नपुंसक हैं वो सब जो ऐसे मर्दानगी दिखाते हैं।”

वहीं, अयोध्या के संत समाज ने नाराजगी जाहिर की है। साथ ही ने संतों ने श्राप दिया है कि अब शिवसेना समाप्त हो जाएगी, उसका अंतिम दौर शुरू हो गया है।

महाराष्ट्र के मंत्री नितिन राउत ने कहा है, “कंगना रनौत एक अभिनेत्री है, उनकी बयानबाजी को महत्व देना मुनासिब नहीं। उनको हिदायत देना चाहूँगा कि अपना काम अच्छे से करें, इस पचड़े में न पड़ें। महाराष्ट्र और मुंबई ने ही उन्हें शोहरत दी। जिस माटी ने उन्हें सम्मान दिया, उस माटी का इमान रखना चाहिए।”

वहीं हिमाचल प्रदेश के CM जयराम ठाकुर ने कहा, “महाराष्ट्र सरकार का आचरण दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं इसकी भर्त्सना करता हूँ। हिमाचल की बेटी कंगना रनौत ने सिर्फ अपनी आवाज बुलंद की और कुछ बातों का जिक्र किया। उन्होंने (महाराष्ट्र सरकार) प्रतिशोध और बदले की भावना से कार्रवाई की है जो सचमुच में दुर्भाग्यपूर्ण है।”

कॉन्ग्रेस नेता संजय निरूपम ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कंगना का ऑफिस अवैध था या उसे डिमॉलिश करने का तरीका? क्योंकि हाई कोर्ट ने कार्रवाई को गलत माना और तत्काल रोक लगा दी। पूरा एक्शन प्रतिशोध से ओत-प्रोत था। लेकिन बदले की राजनीति की उम्र बहुत छोटी होती है। कहीं एक ऑफिस के चक्कर में शिवसेना का डिमॉलिशन न शुरू हो जाए!”

इस कार्रवाई पर कंगना रनौत को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का भी साथ मिला है। आरएसएस के अखिल भारतीय सह-प्रमुख रामलाल ने कंगना के बचाव में ट्वीट करते हुए लिखा है, “असत्य के हथौड़े से सत्य की नींव नहीं हिलती।” हालाँकि उन्होंने इस ट्वीट में किसी का नाम नहीं लिया है, लेकिन इसे सीधे तौर पर कंगना से जोड़कर देखा जा रहा है।

कंगना के ऑफिस पर BMC की कार्रवाई पर महाराष्ट्र पूर्व CM देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “अगर अवैध कंस्ट्रक्शन है तो जरूर कार्रवाई होनी चाहिए। किसी ने आपके खिलाफ बात कही इसलिए अगर आप तब कार्रवाई करते हो तो ये कायरता है बदले की भावना है और महाराष्ट्र में इस तरह की भावना का कोई सम्मान नहीं हो सकता।”

वहीं अनुपम खेर ने कंगना रनौत के दफ्तर टूटने पर अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि किसी का घरोंदा इस बेरहमी से तोड़ना बिल्कुल गलत है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव या प्रहार कंगना के घर पर नहीं बल्कि मुंबई की जमीन और जमीर पर हुआ है। 

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सोमवार (सितंबर 7, 2020) को केन्द्र सरकार के अभिनेत्री कंगना रनौत को Y श्रेणी की सुरक्षा देने के फैसले पर हैरानी जताई थी। उन्होंने कहा था कि रनौत ने अपनी टिप्पणी से मुम्बई और महाराष्ट्र का ‘अपमान’ किया है।

गृहमंत्री ने मंगलवार (सितंबर 8, 2020) को कहा था कि मुम्बई पुलिस अध्ययन सुमन के उन आरोपों की जाँच करेगी, जिसमें उन्होंने कंगना पर मादक पदार्थ लेने का आरोप लगाया है। देशमुख ने कहा कि अभिनेता शेखर सुमन के बेटे अध्ययन सुमन का कंगना के साथ रिश्ता था और उन्होंने आरोप लगाया है कि वह मादक पदार्थ लेती थीं।

रिपब्लिक मीडिया के 2 रिपोर्टरों सहित 3 को महाराष्ट्र पुलिस ने किया गिरफ्तार: चैनल ने उद्धव सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

महाराष्ट्र पुलिस ने टीवी न्यूज़ चैनल रिपब्लिक भारत के रिपोर्टर समेत 3 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह जानकारी न्यूज़ चैनल ने अपने आधिकारिक ट्विटर एकाउंट से दी है। गिरफ्तार किए गए रिपब्लिक भारत के कर्मचारियों में एक रिपोर्टर, एक कैमरामैन और एक ड्राइवर शामिल हैं।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के मुताबिक, महाराष्ट्र पुलिस द्वारा अवैध तरीके से रिपोर्टर अनुज कुमार, कैमरामैन यशपालजीत सिंह और ओला कैब ड्राइवर प्रदीप दिलीप धनवडे को 4 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में लिया गया है। यह टीम रायगढ़ के कर्जत में इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग करने गई थी। उन्होंने कहा, बिना किसी कानूनी कार्रवाई के हमारे कर्मचारियों को चार दिन के लिए जेल में डालना लोकतंत्र की हत्या है। रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क अपनी टीम को न्याय दिलाने के लिए उपलब्ध हरसंभव कानूनी मदद लेगा।

रिपब्लिक मीडिया समुह ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के अनुच्छेद 19 (डी) के तहत हर व्यक्ति को भारत में स्वतंत्र रूप से कहीं भी घूमने का अधिकार है। हमें पता चला है कि हमारे कर्मचारियों पर महाराष्ट्र की सरकारी मशीनरी द्वारा गुप्त सूत्रों की जानकारी को उगलवाने का दबाव डाला जा रहा है जिसकी जानकारी हमारे कर्मचारी पुलिस को कभी नहीं देंगे।

रिपब्लिक ने डेमोक्रेसी में मीडिया के महत्व पर जोर देते हुए कहा, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है और देश के किसी भी मुख्यमंत्री के पास यह अधिकार नहीं है कि वह उनके आवास के आसपास के क्षेत्रों में हो रही रिपोर्टिंग करने वालों को जेल में डाल दें। यह लोकतंत्र और रिपोर्टिंग करने के वाले व्यक्ति के अधिकार के ख़िलाफ़ है।

वहीं रायगढ़ पुलिस द्वारा जारी प्रेसनोट के अनुसार, सिक्युरिटी गार्ड रात में उद्धव ठाकरे के फार्महाउस पर ड्यूटी करने जा रहे थे उसी दौरान वैगनआर कार में तीन लोगों ने उससे फार्महाउस का पता पूछा। जिसका जवाब सिक्युरिटी गार्ड ने नहीं दिया। उसके बाद वे लोग जबर्दस्ती गार्ड रूम में घुस कर बतमीजी करने लगे। पुलिस का आरोप है कि तीनों लोग महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के रायगढ़ स्थित फार्म हाउस में बिना इजाज़त घुसने की कोशिश कर रहे थे।

रिपार्ट के अनुसार, पुलिस ने सिक्योरिटी गार्ड की शिकायत पर उन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, 448, 323, 504, 506 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है।

कंगना का ऑफिस BMC ने तोड़ा, बॉलीवुड गैंग चुप: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Kangana Ranaut’s office illegally demolished by BMC

साल 2014 में मोदी सरकार आने के बाद से फासीवाद के आगमन की उलाहनाएँ दी जाती रहीं। कभी देश के लोकतंत्र को खतरे में बताया गया, तो कभी आपातकाल की स्थिति का ऐलान कर दिया गया। आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने पर भी सरकार को फासिस्ट करार दिया गया।

हालाँकि, फासीवाद का असली मतलब क्या होता है? इसके वास्तविक मायने पूरे देश को तब पता चला, जब बीएमसी ने कंगना के कार्यालय पर कार्रवाई करके उसे ध्वस्त कर दिया और राज्य सरकार की संलिप्ता इसमें साफ नजर आई।

इस बीच जहाँ पूरा देश कंगना के साथ खड़ा था। वहीं, बॉलीवुड के स्टार कलाकार न केवल इस घटना पर मौन रहे बल्कि ये जानने के बावजूद कि रिया चक्रवर्ती ने स्वीकार कर लिया है कि वह ड्रग्स का लेन-देन करती थीं, उन्हें पितृसत्ता से पीड़ित महिला बताया और उनके लिए इंसाफ की माँग भी की।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

CM रावत ने बद्रीनाथ को आध्यात्मिक शहर बनाने के लिए PM मोदी के सामने पेश किया ₹424 करोड़ का मास्टर प्लान

उत्तराखंड राज्य के प्रसिद्व चार धामों में से ही एक बद्रीनाथ धाम का जल्द ही कायाकल्प होगा। इसके लिए लगभग 424 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। उत्तराखंड सरकार ने बद्रीनाथ धाम के सौंदर्यीकरण और मंदिर के आसपास के श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार के लिए 424 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान बुधवार (सितम्बर 09, 2020) को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के समक्ष पेश किया है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने ट्विटर अकाउंट से इसकी जानकारी साझा की है। प्रस्तुतिकरण के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, मुख्य सचिव ओमप्रकाश तथा पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर मौजूद थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि श्री बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि वहाँ का पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व बना रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उत्तराखंड सरकार द्वारा बद्रीनाथ के सौंदर्यीकरण एवं श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में विस्तार हेतु बनाए गए 424 करोड़ रुपए के मास्टर प्लान के प्रस्तुतिकरण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि बद्रीनाथ को लघु, स्मार्ट और आध्यात्मिक शहर के रूप में विकसित किया जाए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि बद्रीनाथ धाम व केदारनाथ धाम के विकास कार्यों में स्थानीय लोगों का सहयोग मिल रहा है और निकटवर्ती गाँवों में होम स्टे पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरस्वती व अलकनंदा के संगम स्थल केशव प्रयाग को भी विकसित किया जा सकता है। सीएम रावत ने कहा कि बद्रीनाथ धाम में व्यास व गणेश गुफा का विशेष महत्व है, जिनके पौराणिक महत्व की जानकारी भी श्रद्धालुओं को मिलनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि बद्रीनाथ के सौंदर्यीकरण का मास्टर प्लान केदारपुरी पुनर्निर्माण की तर्ज पर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार तैयार किया गया था। ज्ञात हो कि पीएम मोदी केदारनाथ धाम में पहले से ही चल रही परियोजनाओं की प्रगति की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं।

इस योजना के तहत बद्रीनाथ मंदिर के चारों ओर श्रद्वालुओं के आवागमन की सुविधा के साथ ही अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा । चमोली जनपद की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने के लिए हाल में संबधित अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की थी।

उन्होंने मास्टर प्लान के तहत प्रस्तावित निर्माण कार्यो के लिए प्रभावित होने वाली सरकारी एवं प्राइवेट भूमि, भवन और परिसंपत्तियों का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश एसडीएम को दिए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, बद्रीनाथ धाम में तीन चरणों में विकास कार्य होने हैं। पहले चरण के तहत शेष नेत्र झील और बद्रीश झील का सौन्दर्यीकरण, दूसरे चरण के तहत मुख्य मंदिर एवं उसके आस-पास के क्षेत्र का सौन्दर्यीकरण और अंतिम चरण में मंदिर से शेष नेत्र झील को जोड़ने वाले रास्ते का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। शेष नेत्र झील नारायण पर्वत की तलहटी में स्थित है।

योजना के तहत बद्रीनाथ धाम में तालाबों के साथ ही मंदिर एवं घाटों का सौन्दर्यीकरण, बद्रीश वन को विकसित करना, पार्किंग सुविधा बढ़ाना, सड़कों का विस्तार एवं ‘रिवर फ्रंट’ विकास आदि भी प्रस्तावित हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बद्रीनाथ के मास्टर प्लान का स्वरूप पर्यटन पर आधारित न होकर पूर्ण रूप से आध्यात्मिक होना चाहिए। पीएम मोदी ने मास्टर प्लान में निकटवर्ती अन्य आध्यात्मिक स्थलों को भी जोडने तथा गृहनिवास (होम स्टे) विकसित करने के भी निर्देश दिए हैं।

2020-21 में सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में नहीं मिलेगा मराठा आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

महाराष्ट्र में शिक्षण संस्थानों में दाखिले और नौकरियों में मराठा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत की बेंच ने कहा कि फिलहाल इसे मंजूरी नहीं दी जा सकती है। इस मामले पर बड़ी बेंच की ओर से फैसला लिया जाएगा, जिसका गठन मुख्य न्यायाधीश की ओर से होगा। अदालत ने यह भी साफ किया है कि इस आदेश का असर पोस्ट ग्रैजुएट मेडिकल कोर्सेज के दाखिलों पर नहीं होगा, जो पहले ही हो चुके हैं।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एलएन राव न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट्ट की पीठ ने कहा कि इस फैसले से अब तक इस कोटे का लाभ ले चुके लोगों के स्टेटस पर कोई असर नहीं होगा। कोर्ट के इस आदेश से उन लोगों को राहत मिली है, जिन्हें बीते करीब दो सालों में अब तक इस कोटे का लाभ मिला था।

कोर्ट के इस फैसले से मौजूदा शैक्षणिक सत्र में छात्रों को कोटे का फायदा नहीं मिल पाएगा। बेंच ने कहा है कि फिलहाल इस पर रोक लगाई जाती है और संवैधानिक बेंच की ओर से इसकी वैधता पर फैसला लिया जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे फैसला लेंगे।

बंबई उच्च न्यायालय ने पिछले साल जून में इस कानून को वैध ठहराते हुए कहा था कि 16 प्रतिशत आरक्षण न्यायोचित नहीं है और इसकी जगह रोजगार में 12 और प्रवेश के मामलों में 13 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश और इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में कहा गया है कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) अधिनियम, 2018, जो शिक्षा और नौकरियों में मराठा समुदाय को 12% और 13% कोटा प्रदान करता है, इंदिरा साहनी मामले में निर्धारित सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। इसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50 फीसदी तय कर दी थी।

गौरतलब है कि 27 जून, 2019 को, बॉम्बे हाई कोर्ट की एक पीठ ने अधिनियम की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर महाराष्ट्र राज्य को 16 प्रतिशत आरक्षण को घटाकर 12-13 फीसदी करने का निर्देश दिया। इसने आगे उल्लेख किया कि इंदिरा साहनी के मामले के अनुसार, विशेष परिस्थितियों में राज्य सरकार 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण दे सकती है।