Home Blog Page 4532

ताहिर हुसैन को ED ने किया गिरफ्तार, CAA विरोध प्रदर्शनों की फंडिग से जुड़ा है मामला

आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज (अगस्त 31, 2020) गिरफ्तार कर लिया है। ये गिरफ्तारी PMLA 2002 के प्रावधानों के तहत हुई है। ईडी ने कड़कड़डूमा कोर्ट से ताहिर हुसैन का 6 दिनों का कस्टोडियल रिमांड हासिल किया है।  

ईडी की तरफ से कहा गया है कि ताहिर हुसैन को मनी लॉन्ड्रिंग में उसकी भूमिका और सीएए विरोधी प्रदर्शन की फंडिंग और इस साल फरवरी में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों के मामले में गिरफ्तार किया गया है।

यह जाँच दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच और दयालपुर पुलिस थाने में दायर विभिन्न एफआईआर पर होगी, जिनमें ताहिर के ख़िलाफ़ आईपीसी धारा 302, 385, 307 & 120 के तहत मामला दर्ज है।

पीएमएलए के तहत हुई जाँच में यह पाया गया है कि ताहिर हुसैन व उसके रिश्तेदारों की कंपनियों में काफी पैसों को हेरफेर हुआ। उन्होंने संदिग्ध संस्थाओं को पैसा भेजा, जिसके बदले उन्हें कैश मिला और इस कैश से ही विरोध प्रदर्शनों और दिल्ली दंगों को फंड किया गया। जाँच में यह भी पता चला कि ताहिर हुसैन और उसके साथी पहले भी अवैध तरीके से धनशोधन करते रहे हैं।

ईडी के बयान के मुताबिक, हुसैन के आवास और कार्यालयों पर 23 जून 2020 को छापेमारी की गई था, जहाँ से कई डॉक्यूमेंट्स और फर्जी बिल मिले। बताया जा रहा है कि इनका इस्तेमाल पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया गया।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ईडी अधिकारियों ने ताहिर से तिहाड़ जेल में पूछताछ की थी। उस समय वह दिल्ली पुलिस की हिरासत में था। बाद में उसकी गिरफ्तारी पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के लिए हुई और आज उसे ईडी ने कस्टोडिल रिमांड पर लिया है।

रिमांड से पहले एजेंसी ने दिल्ली दंगों और तबलीगी जमात मामले में पूछताछ के लिए ताहिर को तिहाड़ जेल से बुलाया था। ईडी के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, ताहिर को पूछताछ के लिए तिहाड़ जेल से दक्षिणी दिल्ली के खान मार्केट इलाके में ईडी के मुख्यालय लाया गया था।

अधिकारियों ने पहले ही जानकारी दी थी कि ताहिर से दिल्ली दंगों के लिए फंडिंग के बारे में भी पूछताछ की जाएगी। इसके अलावा यह भी बताया था कि ताहिर से यह भी पूछताछ की जा रही है कि दंगों के लिए धन इकट्ठा करने के लिए वह किस हवाला संचालक के संपर्क में था।

नहीं रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, आरआर अस्पताल में हुआ निधन

पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न प्रणब मुखर्जी का देहांत हो गया।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा, “भारी मन के साथ, आपको यह सूचित करना है कि डॉक्टरों के सर्वोत्तम प्रयासों और पूरे भारत में लोगों की प्रार्थना, दुआओं के बावजूद आरआर अस्पताल में मेरे पिता श्री प्रणव मुखर्जी का निधन हो गया है। आप सभी को हाथ जोड़कर धन्यवाद देता हूँ।”

इसके पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की हालत गंभीर बनी हुई थी और वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। लेकिन इंडिया टुडे के कर्मचारी राजदीप सरदेसाई ने अगस्त 13, 2020 की सुबह आदतन उतावलेपन में उनकी मौत की फेक न्यूज़ को ‘ब्रेकिंग’ बताते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर कर डाली थी।

मधुबनी: रात में ताजिया निकालने की कोशिश, पुलिस ने रोका तो पथराव; महिला मुखिया के घर पर भी हमला

बिहार के मधुबनी जिला में शनिवार (अगस्त 19, 2020) देर रात ताजिया निकालने की कोशिश की गई। पुलिस ने रोका तो जमकर बवाल हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तोड़फोड़ व पत्थरबाजी के साथ कई राउंड फायरिंग हुई। कई लोग जख्मी बताए जा रहे हैं। राहगीरों पर भी पत्थर फेंके की बात सामने आ रही है। घटना रहिका की है।

रहिका थाना प्रभारी ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि ताजिया निकालने से मना करने पर लोग पुलिस पर पत्थरबाजी करने लगे। हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर कर दिया गया। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने प्रशासन की ओर से फायरिंग से इनकार किया है। इसके साथ ही उन्होंने किसी के जख्मी होने की खबर पर अनभिज्ञता जाहिर की।

थाना प्रभारी ने बताया कि रात करीब 10 बजे मधुबनी-रहिका मुख्य सड़क पर सप्ता नीम चौक के पास ताजिया जुलूस में शामिल लोग मुहर्रम खेल रहे थे, तभी पुलिस वहाँ पहुँची। कोरोना को लेकर गाइडलाइन का हवाला देते हुए पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो पत्थरबाजी शुरू हो गई। इसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। वहीं कई वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। एसपी डाॅ. सत्य प्रकाश ने बताया कि इस बाबत जाँच रिपोर्ट माँगी गई है। जाँच के दौरान दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

ताजिया निकालने वाले लोगों ने न सिर्फ पुलिस के ऊपर पत्थरबाजी की, बल्कि मुखिया पिंकी देवी के घर पर भी पथराव किया। उनके घर में घुस कर तोड़फोड़ की गई। इस दौरान उपद्रवियों ने पिंकी देवी के घर में रखी दो बाइक, कुर्सी सहित अन्य सामान क्षतिग्रस्त कर दिया।

सदर एसडीओ अभिषेक रंजन और सदर एसडीपीओ कामिनी बाला ने नियम के विरुद्ध जाकर मुहर्रम को लेकर सिफल, ताजिया व जुलूस निकालने वालों के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही। उन्होंने लोगों से अपील की कि वो भीड़ का हिस्सा न बनें।

बता दें कि इससे पहले सीओ रामकुमार पासवान व थानाध्यक्ष अनिल कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिकारियों ने कहा था कि कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार मोहर्रम पर ताजिया जुलूस नहीं निकाले जाएँगे। कोरोना वायरस को लेकर पूरे राज्य में 6 सितंबर तक लॉकडाउन है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुहर्रम के मौके पर सभी लोग राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश का पालन करें। इन आदेशों का तोड़ने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और हैदराबाद में भी कोर्ट के आदेश की अनदेखी कर मुहर्रम पर जुलूस निकालने की घटना सामने आई थी। पीलीभीत में इसके बाद 53 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

इसी तरह हैदराबाद में भी लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए मुहर्रम का जुलूस निकाला गया। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियाँ तो उड़ाई ही गई, साथ ही किसी ने मास्क पहनना भी उचित नहीं समझा। हाई कोर्ट के आदेश को ताक पर रखते हुए सैकड़ों की संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए।

ज़कात फाउंडेशन… जहाँ से बने 27 UPSC ऑफिसर… वहाँ के मौलाना की बात – ‘हिंदू जल कर नर्क में जाते हैं’

ज़कात फाउंडेशन शरिया काउंसिल के सदस्य मौलाना कालिम सिद्दीकी का विवदित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। ये वीडियो उनके साक्षात्कार का है, जो उन्होंने सऊदी अरब के एक चैनल को दिया। ट्विटर पर इसे संजीव नेवर ने शेयर किया है।

इन वीडियोज में हम देख सकते हैं कि कालिम इस्लाम को अव्वल दर्जे का दिखाने के लिए हिंदुओं की परंपराओं पर न केवल सवाल उठा रहे हैं। बल्कि ये बताने की कोशिश भी कर रहे हैं कि हिंदू इतने ज्यादा नासमझ हैं कि वह बहुत आसानी से इस्लाम कबूल लेते हैं।

अपनी वीडियो में वह कहते हैं कि आज दूसरे धर्म के लोगों के इस्लाम कबूल करने की तादाद बेहद मामूली होती जा रही है। वह अपने आप को धर्म परिवर्तन करवाने के पेशे में काफी मशहूर नाम बताते हैं।

वह कहते हैं कि एक रिमोट एरिया में रहने के बावजूद अगर लोगों को उनकी मौजूदगी का पता चल जाता है, तो पूरे दिन अलग-अलग जगह से लोग इस्लाम कबूलने आते हैं। दिन भर लाइन लगी रहती है।

जब साक्षात्कार लेने वाला व्यक्ति उनसे कहता है कि दुनिया में और खासकर हिंदुस्तान में रहने वाले हिंदू सबसे ज्यादा मुश्किल से इस्लाम कबूलते हैं। क्या यह सही है? तो कालिम कहते हैं कि अगर सऊदी अरब में इस्लाम कबूल करने वालों में हिंदुओं की संख्या सबसे कम है तो उसका कारण यह है कि वहाँ पर लोग उस तरह की कोशिश नहीं करते।

इसके बाद सेकुलरिज्म की धज्जियाँ उड़ाते हुए जकात फाउंडेशन के सदस्य उन लोगों की धारणा को भी ध्वस्त करते हैं जिनका मानना यह है कि अल्लाह और राम सब एक ही होते हैं।

इंटरव्यू लेने वाला पूछता है कि हिंदुस्तान में कहा जाता है- अल्लाह कहो, राम कहो…बात एक है। प्याले अलग-अलग हैं लेकिन जाम एक है। इस पर कालिम बताते हैं कि अल्लाह और राम अलग-अलग हैं। केवल इस्लाम ही सच्चा मजहब है। जो लोग अलग-अलग चीजों को मानते हैं वह शैतान बराबर होते हैं क्योंकि शैतान का भी ये कहना था कि रास्ते अलग-अलग हैं लेकिन मंजिल एक है।

वह आगे कहते हैं कि इंसान इस्लाम के प्रति आकर्षित होता है क्योंकि यह एक लॉजिक वाला मजहब तो है। लेकिन जो इसमें आने का फैसला करता है, वो जन्नत के लालच व जहन्नुम के डर से करता है।

वह बताते हैं कि लोग कुरान की आयतें सुनकर ही इसकी ओर खिंचे चले आते हैं। देहरादून के दो लोगों का जिक्र करते हुए वो बताते हैं कि जब उन्होंने कुरान सुनी तो वह इतना प्रभावित हुए कि जब उनसे तर्जुमा करने को कहा गया तो वह कहने लगे कि हम मान चुके हैं, जो लिखा है वो सच है। अब बस बताओ हमें करना क्या है?

जब उनसे उसे समझने को कहा गया तो बोले कि उन्हें समझने की जरूरत नहीं है। कालिम के अनुसार, आज वह लोग दावत का काम रहे हैं।

यहाँ बता दें कि संजीव कुमार ने कामिल सिद्दीकी की ये वीडियोज अपने ट्विटर पर शेयर करते हुए हैरानी जताई है। उन्होंने कहा है कि कल्पना करिए ऐसा व्यक्ति यूपीएससी में सिलेक्ट होने वाले बच्चों को पढ़ाता है! यह भावी सिविल सर्वेंट्स को ट्रेन करता है! आपको बता दें कि इस साल इस फाउंडेशन से 27 छात्र-छात्राएँ UPSC में सिलेक्ट हुए हैं।

इनमें से एक वीडियो में कालिम हिंदू धर्म में होने वाले अंतिम संस्कार की क्रिया पर भी सवाल उठाते हैं और उदाहरण देकर समझाते हैं कि लोग इसलिए हिंदू से इस्लाम धर्म अपनाना चाहते हैं क्योंकि वह जहन्नुम की आग से खुद को बचाना चाहते हैं।

वे लंबी उम्र में मरने वाले हिंदुओं के आगे स्वर्गीय शब्द पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि हिंदुओं को लगता है कि आग में जलकर वह स्वर्ग जाते हैं जबकि जाते वह नर्क में हैं। उनका कहना है कि इंसान को जलाना इंसानियत के भी ख़िलाफ़ है।

बता दें कि एक अन्य वीडियो भी संजीव नेवर ने कालिम सिद्दीकी की शेयर की है। जिसमें उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से बताते देखा जा सकता है कि एक बार एक टैक्सी ड्राइवर से उन्होंने बहुत अच्छा बर्ताव किया, जिससे वह उनका कायल हो गया और बदले में तारीफ करने लगा।

ऐसे में उन्होंने उससे 10-11 मिनट बात की और उसका ऐसा ब्रेनवॉश किया कि वह कलमा पढ़ने को तैयार हो गया। अपनी ऑडियो में आगे वह कहते हैं कि इसके बाद उस आदमी ने अपने घर-परिवार-रिश्तेदारों और दोस्तों में सबको मिलाकर तकरीबन 83 लोगों को इस्लाम कबूल करवाया था।

उल्लेखनीय है कि मजहबी कट्टरता की बातें जो कालिम सिद्दीकी अपनी वीडियो में बड़े मीठे अंदाज में कह रहे हैं, वह चिंताजनक इसलिए हैं क्योंकि जकात फाउंडेशन वहीं संस्था है, जो अब सिविल सर्विस के लिए संप्रदाय विशेष के लोगों को ट्रेनिंग देता है। पिछले साल फाउंडेशन के 18 छात्रों ने यूपीएससी एग्जाम उत्तीर्ण किया था।

शरिया एडवाइजरी काउंसिल में मौलाना कालिम का नाम यूपी क्षेत्र के लिए आता है। इसके अलावा इस फाउंडेशन का ताल्लुक जाकिर नाईक जैसे कट्टरपंथी से है, जो कई इस्लामिक संगठनों का संचालक है। इनकी माँग सरकारी नौकरियों में संप्रदाय विशेष के लोगों के आरक्षण की है।

क्या PMO ने NEET-JEE पर छात्रों की चिंताओं से बचने के लिए YouTube पर बंद किया मन की बात का कमेंट सेक्शन?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त 2020 को 68वीं बार मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से अपने विचार साझा किए। चूँकि यह पीएमओ के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइव हुआ था, इसलिए कुछ अफवाहें फैल रही हैं कि पीएमओ ने ‘छात्रों’ के आक्रोश से बचने के लिए जान-बूझकर कमेंट सेक्शन को बंद कर दिया। कहा जा रहा है कि छात्र पीएम मोदी से काफी आक्रोशित हैं, क्योंकि उन्होंने अपने संबोधन में आगामी NEET-JEE पर चर्चा नहीं की।

NEET-JEE परीक्षा का विरोध

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा- संयुक्त प्रवेश परीक्षा या NEET-JEE सितंबर के महीने में होगी। कोरोना वायरस महामारी के बहाने इस वर्ष परीक्षा को लेकर देशव्यापी अभियान चल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आगामी परीक्षाओं खिलाफ रुझानों से भरा हुआ है और पाकिस्तान के NEET उम्मीदवार ‘छात्र’ इसे इस तरह से पेश करना चाह रहे हैं कि भारतीय भी इसमें सक्रिय रूप से शामिल हैं।

विरोध-प्रदर्शन के बीच इस साल NEET-JEE परीक्षा देने वाले 24 लाख छात्रों में से 11.49 लाख छात्रों ने NEET एडमिट कार्ड पहले ही डाउनलोड कर लिए हैं, और 7.6 लाख छात्रों ने अब तक JEE एडमिट कार्ड डाउनलोड किए हैं। लगभग 80 प्रतिशत छात्रों ने पहले ही अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लिए हैं। ऐसा लगता है कि परीक्षा का बहिष्कार करने का प्रयास बिना सोचे-समझे बात का बतंगड़ बनाने जैसा है।

NEET-JEE के खिलाफ “अंतर्राष्ट्रीय समर्थन”

एक बात जो किसी भी समझदार व्यक्ति को परेशान कर सकती है, वह है स्व-घोषित पर्यावरणविदों, जिनमें ग्रेटा थुनबर्ग भी शामिल हैं, ने परीक्षा के विरोध में “छात्रों” के लिए समर्थन दिखाया है। यह समझना मुश्किल है कि वह किसी भी तरह से परीक्षा से कैसे जुड़ सकती है। बता दें कि वह खुद एक स्कूल ड्रॉपआउट है।

Tweet By Greta Thunberg

इसके साथ ही, सोनू सूद सहित भारत की कुछ हस्तियाँ छात्रों के समर्थन के लिए आगे आई हैं। परीक्षा के विरोध और छात्रों के समर्थन में लिसिप्रिया कंगुजम नाम की एक बच्ची भी सामने आई है। वह एक 8 वर्ष की बच्ची है, जिसे उसके अभिभावकों द्वारा ‘पर्यावरणविद्’ के रूप में पेश किया जा रहा है।

इस बच्ची के नाम पर ट्विटर हैंडल चलाने वाले उसके अभिभावकों को कई बार झूठ फैलाते हुए पकड़ा गया है। बच्ची  NEET-JEE के उम्मीदवारों के लिए 3 पेज का खत भी लिखती है। उसका पूरा टाइमलाइन परीक्षा के खिलाफ ट्वीट से भरा हुआ है। यह विश्वास करना काफी मुश्किल है कि 8 साल की बच्ची इस तरह का प्रोपेगेंडा चलाने के बारे में सोच सकती है।

Tweet by Licypriya Kangujam

PMO YouTube चैनल के बारे में दावे

कुछ “प्रमुख” सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया है कि पीएमओ ने मन की बात के नए एपिसोड के बाद जान-बूझकर कमेंट सेक्शन को बंद कर दिया है, क्योंकि NEET-JEE exams को लेकर नकारात्मक टिप्पणियाँ की जा रही थी।

Twitter user claimed PMO disabled comments recently.

ऑल्ट न्यूज़ कोफ़ाउंडर सहित कई ट्विटर यूजर्स ने ट्वीट करते हुए कहा कि कमेंट सेक्शन इसलिए बंद कर दी गई हैं क्योंकि PMO ‘छात्रों’ की नकारात्मक टिप्पणी नहीं सुनना चाहता है, जो परीक्षा के खिलाफ हैं।

सच क्या है

हालाँकि, जब हमने PMO के यूट्यूब चैनल के वीडियो को स्क्रॉल किया, तो हमें पता चला कि चैनल पर कमेंट सेक्शन हमेशा से बंद था। यहाँ तक कि यूट्यूब लाइव और कॉम्युनिटी टैब के दौरान भी कमेंट सेक्शन बंद ही रहता है।

Screenshots of old PMO’s videos. Comments section is disabled on all videos.

जनवरी 2020 के पॉलिसी अपडेट के अनुसार, यूट्यूब पर पोस्ट किया गया कोई भी कंटेंट, जिसे “मेड फॉर किड्स” के रूप में चिह्नित किया जाता है, उस पर कमेंट नहीं किया जा सकता।  यूट्यूब ने यह बदलाव बच्चों के ऑनलाइन गोपनीयता संरक्षण अधिनियम (COPPA) के अनुपालन के लिए लाया है। यह अधिनियम कंपनियों को 13 साल से कम उम्र के बच्चों से जुड़ी जानकारी को उनके माता-पिता की सहमति के बिना लेने से मना करता है। पीएमओ के यूट्यूब चैनल पर कमेंट सेक्शन बंद करने का एक कारण यह है कि वीडियो “मेड फॉर किड्स” के रूप में चिह्नित है।

भारतीय जनता पार्टी का यूट्यूब चैनल, पीएम मोदी का यूट्यूब चैनल और कुछ अन्य चैनल भी मन की बात कार्यक्रम का एपिसोड अपलोड करते हैं। पीएम मोदी के यूट्यूब चैनल पर मॉडरेशन के लिए टिप्पणियाँ की जाती हैं, भाजपा टिप्पणियों को फ़िल्टर नहीं करती है। मगर ऐसा लगता है कि कुछ ट्विटर यूजर्स ने चुपके से बिना वीडियो का टाइटल दिखाए पीएमओ के चैनल और अन्य चैनलों से वीडियो का स्क्रीनशॉट शेयर कर अफवाहें फैलाने की कोशिश की।

Screenshot of Mann Ki Baat video on BJP’s YouTube channel that has comment section active.

PMO द्वारा अपलोड किए गए अधिकांश वीडियो के टाइटल के अंत में “PMO” लिखा होता है। इससे यूजर्स को पता चलता है कि वे किस चैनल पर वीडियो देख रहे हैं। दूसरी ओर, अन्य चैनल जैसे- बीजेपी आदि टाइटल में इस तरह का कुछ नहीं लिखते हैं।

Screenshots of videos by PMO. Titles have “PMO” as suffix.

यह साबित करता है कि NEET-JEE के उम्मीदवारों की नकारात्मक टिप्पणियों से बचने के लिए PMO द्वारा YouTube पर कमेंट सेक्शन बंद करने का दावा फर्जी है।

रोज कम हो रहे हैं 40-50,000 फ़ॉलोअर्स: कंगना रनौत ने ट्विटर पर लगाया ‘घोस्ट बैन’ करने का आरोप

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत पिछले कुछ हफ्तों से ट्विटर पर काफी मुखर होकर अपनी बातें रख रही हैं। शुरुआत में अपनी टीम के माध्यम से बॉलीवुड और फिल्म उद्योग की कुछ बातों पर खुलासे करने और कड़े बयान देने के बाद कंगना रनौत कुछ दिनों पहले आधिकारिक तौर पर ट्विटर से जुड़ी थीं। इसी बीच कंगना रनौत ने कहा है कि उनके ट्विटर फ़ॉलोअर्स की संख्या प्रति दिन 40,000 से 50,000 तक कम हो रही है।

कंगना रनौत को एक ट्विटर यूजर ने बताया कि ट्विटर अकाउंट पर उन्हें फॉलो करने वालों की संख्या एक ही घंटे में 9 लाख 92 हजार से 9 लाख 88 हजार पर आ गई। अभिनेत्री कंगना रनौत ने ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी को टैग करते हुए लिखा है कि उन्होंने रोजाना अपने 40 से 50 हजार फ़ोलोअर्स को कम होते हुए देखा है। कंगना ने सवाल किया है कि वह ट्विटर पर नई हैं और उनके साथ यह क्यों हो रहा है?

एक अन्य ट्विटर यूजर ने कंगना को बताया कि देश-विरोधी गिरोहों के खिलाफ बोलने, राष्ट्रवादी भावनाओं का समर्थन करने और वामपंथी गिरोहों के षड्यंत्रों को उजागर करने के कारण उन्हें ‘घोस्ट बैन’ किया जा रहा है, और जब यह अकाउंट लोकप्रिय हो गया, तो ऐसे में ट्विटर उनके ट्वीट्स की पहुँच कम कर देता है।

कंगना ने जवाब दिया कि मजबूत रैकेट के कारण राष्ट्रवादियों को हर जगह संघर्ष करना पड़ा है। कंगना ने कहा कि क्योंकि वह 1 मिलियन फ़ोलोअर की संख्या के करीब थीं इस कारण उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया। कंगना ने कहा कि वह उन ट्विटर फ़ॉलोअर्स से माफ़ी माँगती हैं, जो इन कारणों से उनके ट्विटर अकाउंट से चुपचाप हटा दिए गए।

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म और मूवी माफिया के खिलाफ खुलकर बोलने के बाद कंगना रनौत आधिकारिक रूप से ट्विटर पर सक्रिय हुई हैं। ट्विटर पर अब उन्हें फॉलो करने वालों की संख्या 1 मिलियन हो चुकी है।

टैंकों के साथ खतरनाक इरादे से आए थे 500+ चीनी सैनिक, भारतीय सेना की घेराबंदी देख बिना लड़े उल्टे पाँव भागना पड़ा

भारत-चीन सीमा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा। चीनी सरकार की आक्रामक नीति का नतीजा है कि कई हफ्ते से शांत दिख रहे लद्दाख की सीमा पर 29-30 अगस्त की रात को पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र के दक्षिणी तट की ओर से चायनीज सैनिकों ने फिर से घुसपैठ करने की कोशिश की।

चीनी सैनिकों को इस प्रयास में हालाँकि मुँह की खानी पड़ी। भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग त्सो (PangongTso) के दक्षिण तट पर घुसपैठ कर रहे चीनी सैनिकों को खदेड़ दिया। लेकिन पढ़ने में जितना यह आसान है, हकीकत में चीनी सैनिकों को पीछे धकेलना उतनी ही मुस्तैदी और शौर्य भरा काम था।

ऐसा इसलिए क्योंकि चायनीज सैनिक बहुत ही तैयारी के साथ आए थे। आक्रामक होकर आए थे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील के पास 500 से अधिक चीनी सैनिकों ने भारतीय इलाकों में घुसने का प्रयास किया।

चीनियों के आक्रामक रवैये को समझना है तो सिर्फ 500+ सैनिकों की घुसपैठ को मत देखिए। नवभारत टाइम्स में पूनम पांडे (रक्षा संवाददाता) की रिपोर्ट बताती है कि इन 500 से अधिक चायनीज सैनिकों को कवर करने के लिए इनके साथ-साथ टैंक भी आए थे।

भारतीय सेना हालाँकि चीनियों की इस आक्रामक नीति और चुपके से घुस कर बैठे जाने की प्रवृति से वाकिफ थी। इसीलिए तैयार भी थी। अपनी सीमा की इंडियन आर्मी ने ऐसी घेराबंदी की थी, पट्रोलिंग में ऐसी मुस्तैदी थी कि चायनीज सैनिकों को बिना लड़े भागना पड़ा।

29-30 अगस्त की रात की बात की जाए तो दोनों देशों की ओर से सैनिकों के बीच लड़ाई नहीं हुई है। भारतीय सेना के सूत्र ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि आपसी लड़ाई (फिजिकल फाइट) की नौबत ही नहीं आई। इससे पहले ही चायनीज सैनिक पीठ दिखा कर चले गए।

भारतीय सेना के पीआरओ, कर्नल अमन आनंद ने सोमवार (31 अगस्त) को कहा कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA, चायनीज सैनिक) के सैनिकों ने 29 और 30 अगस्त (शनिवार और रविवार) की रात को पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी तट पर दोनों देशों के बीच बनी आम सहमति का उल्लंघन किया।

आगे उन्होंने बताया,

“भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों के इस दुस्साहस भरे एक्शन को समय रहते निष्क्रिय कर दिया। भारतीय सेना ने इसके बाद सीमा पर अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया। सीमा पर चीनी इरादों को पूरी तरह विफल कर दिया गया।

जाकिर नाइक ने राजीव गाँधी ट्रस्ट को दिए ₹50 लाख, भगोड़े चोकसी से मिले थे ₹10 लाख: कॉन्ग्रेस पर बीजेपी का बड़ा आरोप

भाजपा ने आरोप लगाया है कि भगोड़े इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक और कारोबारी मेहुल चोकसी के साथ कॉन्ग्रेस पार्टी के सम्बन्ध हैं। पार्टी ने कहा है कि जाकिर नाइक ने जुलाई 8, 2011 को राजीव गाँधी ट्रस्ट को 50 लाख रुपए का डोनेशन दिया था। इसके अलावा भगोड़े मेहुल चोकसी ने भी कॉन्ग्रेस के गाँधी परिवार से सम्बंधित इस ट्रस्ट को 10 लाख रुपए दिए थे।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि जाकिर नाइक की इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन पर भी जाँच चल रही है। साथ ही बताया कि इस फाउंडेशन द्वारा राजीव गाँधी ट्रस्ट को डेवलपमेंट क्रेडिट बैंक (DCB) के एक खाते से ये डोनेशन दिया या। ये खाता ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग’ के अंतर्गत सीज किया गया है। साथ ही एक पेपर मैन्युफैक्चरिंग कम्पनी नवराज एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड का भी नाम सामने आया है।

बताया गया है कि इस कम्पनी ने 2012-14 के बीच किसी भी प्रकार की व्यापारिक सक्रियता नहीं दिखाई, लेकिन इसे गीतंजलि इंफ्राटेक से एक बार में 47.48 करोड़ रुपए प्राप्त हुए। बाद में इसे 24.25 लाख रुपए ट्रांसफर किया गया। गीतांजलि इंफ्राटेक मेहुल चोकसी के स्वामित्व वाली कम्पनी है। वहीं नवराज रोहन चोकसी के स्वामित्व वाली कम्पनी है। इस ट्रांजेक्शन के बाद नवराज ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को डोनेशन दिया।

इसके अलावा राजीव गाँधी फाउंडेशन को यस बैंक से भी 9.45 लाख रुपए मिलने का आरोप लगाया गया है। संबित पात्रा ने कहा कि ये राणा कपूर के रुपए नहीं थे बल्कि वे रुपए थे, जिन्हें डायवर्ट किया गया था। इसके अलावा NSEL स्कैम के लिए कुख्यात जिग्नेश शाह का नाम भी सामने आया है। ये मामला भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत चल रहा है। आरोप है कि अक्टूबर 27, 2011 को फाइनेंसियल टेक्नोलॉजीज इंडिया लिमिटेड (FTIL) ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को 50 लाख रुपए ट्रांसफर किए।

बताया गया है कि FTIL और जिग्नेश शाह के बीच मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का मामला 5600 करोड़ का है। संबित पात्रा का आरोप है कि इसमें से एक बड़ा हिंसा कॉन्ग्रेस के राजीव गाँधी फाउंडेशन को ट्रांसफर किया गया। उन्होंने कहा कि जाकिर नाइक की इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ), मैसर्स हारमोनी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड से ट्रस्ट को रुपए दिए गए। मैसर्स हारमोनी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने लगभग 50 करोड़ रुपए 2012 से 2016 के बीच दिए।

वहीं आरोप है कि आईआरएफ ने 64.86 और 75 करोड़ रुपए 2003-04 और 2016-17 के बीच दिए। इसकी पीएमएलए (प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत जाँच की जा रही है। भाजपा का आरोप है कि इसी में से रकम निकाल कर कॉन्ग्रेस पार्टी के ट्रस्ट को दिया गया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेस कर ये आरोप लगाए। कॉन्ग्रेस पार्टी की फिलहाल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इससे पहले खुलासा हुआ था कि वर्ष 2018-19 की राजीव गाँधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारती फाउंडेशन उन संगठनों में से एक था, जिसने इसे दान किया था। उस समय भारती फाउंडेशन Huawei के साथ भी पार्टनरशिप में था, जिसके चीन के साथ व्यापक संबंध हैं। वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018-19 में राजीव गाँधी फाउंडेशन में अनुदान और दान से कुल 95,91,766 रुपए की आय हुई थी।

कॉन्ग्रेस, TMC और AAP के प्रचारक हैं फेसबुक के वरिष्ठ अधिकारी, स्तुति गान में एक से बढ़कर एक ट्वीट

फेसबुक को लेकर जारी विवाद हर दिन गहराता ही जा रहा है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने विजय मूर्ति द्वारा किए गए ट्वीट का एक कोलाज शेयर किया है। फेसबुक के अधिकारी बताए जा रहे मूर्ति इन ट्वीटों में कॉन्ग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर करते दिख रहे हैं। मूर्ति ने ये ट्वीट 2013-2017 के बीच किए थे।

कॉन्ग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा प्रदर्शित करते हुए विजय मूर्ति ने दिसंबर 2013 में ट्वीट किया था, “कॉन्ग्रेस के लिए – उठो, जागो और तब तक नहीं रुकें, जब तक लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता!” अक्टूबर 2013 के एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “आज की रैली नाम: दिल्ली में राहुल और पटना में मोदी। पूर्वानुमान- पहले वाला जो करता है, उसके बारे में बात करेगा और दूसरा वाला पहले के बारे में बात करेगा।”

इसके अलावा, मूर्ति ने पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी आरोप लगाए थे। ऐसे ही एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, “किसी ने मुझसे पूछा कि क्या होता है जब दो फासीवादी मिलते हैं। मैंने कन्धा उचकाया और कहा कि आज भारत की राजधानी में यही हो रहा है।”

लिंक्ड इन प्रोफाइल के अनुसार, मूर्ति 2019 से फेसबुक इंडिया के सार्वजनिक नीति प्रबंधक हैं। यहाँ पर यह स्पष्ट हो जाता है कि फेसबुक के पब्लिक पॉलिसी मैनेजर भाजपा के आलोचक हैं और कॉन्ग्रेस के प्रशंसक। हालाँकि अब उनका अकाउंट ट्विटर पर उपलब्ध नहीं है, लेकिन फिर भी माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म पर उनके यूजरनेम वाले ट्वीट अभी भी मौजूद हैं।

विजया मूर्ति द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट (साभार: Twitter/Amit Malviya)

अमित मालवीय ने ट्वीट कर कहा, “विजय मूर्ति से मिलिए। यह संभवत: सरकार से फेसबुक के संवाद को नियंत्रित करते हैं। लगभग एक दशक तक राहुल गाँधी की टीम के साथ काम किया (अपने पूर्व बॉस के लिए प्यार अभी भी मजबूत है)… कॉन्ग्रेस-फेसबुक की साँठगाँठ के बारे में बात करें? तो, ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस फेसबुक चला रही है!”

अंखी दास फेसबुक की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर हैं। उन पर लेफ्ट-लिबरल जमात ने ‘बीजेपी एजेंट’ होने का आरोप लगाया है, जबकि उनके पुराने फेसबुक पोस्ट एक अलग ही कहानी बताते हैं। दिसंबर 2013 में, अंखी दास ने ममता बनर्जी के राजनीतिक अभियान ‘परिवर्तन’ और अरविंद केजरीवाल के ‘आम आदमी’ कैंपेन की खुले तौर पर प्रशंसा की थी। उनके कई AAP समर्थित पोस्ट लोकप्रिय ट्विटर यूजर अंकुर सिंह द्वारा शेयर किए गए थे।

उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, “परिवर्तन- ममता बनर्जी लेखकों के पास गईं और अरविंद केजरीवाल ने मेट्रो यात्रा की। अब हम कई नेताओं को आम आदमी होने की कोशिश करते देखेंगे। वे धरती पर चलना सीखेंगे। बेशक, कुछ लोग इसे प्रतीकात्मक मान सकते हैं जिसका वास्तविक तौर पर कोई अर्थ नहीं है। लेकिन कुछ भी, जो लोगों को केंद्र में रखता है, उसे सराहने की जरूरत है। मैं निश्चित रूप से करूँगी।”

अंखी दास के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट (साभार:  Twitter/ Ankur Singh)

2014 में लोकसभा चुनाव से पहले मार्च में, उन्होंने कोलकाता टाउन हॉल में तृणमूल कॉन्ग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के साथ एक ‘फेसबुक वार्ता’ का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम का ‘पत्रकार’ मधु त्रेहान ने भी स्वागत किया था, जो लेफ्ट प्रोपेगेंडा वेबसाइट, न्यूज लॉन्ड्री चलाती हैं।

अंखी दास के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट (साभार:  Twitter/ Ankur Singh)

जब आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव से पहले ‘झाड़ू डांस’ का वीडियो शेयर किया था, तो अंखी दास ने इसे ‘कूल कैंपेन’ करार दिया था।

अंखी दास के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट (साभार:  Twitter/ Ankur Singh)

इसके अलावा, उन्होंने ‘Daily-O’ पर “The battle for Delhi on Facebook” टाइटल से एक ओपिनियन लिखा। इसमें उन्होंने आम आदमी पार्टी के फेसबुक अभियान की प्रशंसा की थी। अंखी ने लिखा था, “दिसंबर 2013 के दिल्ली चुनावों में, आम आदमी पार्टी के पास बहुत मजबूत ग्राउंड था। फेसबुक पर उनके अभियान से जमीनी ताकत जुडी थी।” इसके साथ ही उन्होंने अपने पेज पर 1,000 से अधिक पोस्ट करने के लिए AAP को श्रेय दिया था।

उसने भाजपा के 194 पदों और कॉन्ग्रेस के 123 पदों की तुलना करते हुए कहा, “आम आदमी पार्टी ने फेसबुक को एक सोशल लिसनिंग टूल (social listening tool) के रूप में इस्तेमाल किया और अपने अभियान संदेशों और आउटरीच को तेजी से समायोजित किया। AAP अभियान एक नए स्टार्ट-अप की तरह था, जो सीमित संसाधनों के साथ अधिक प्रभाव पैदा कर रहा था।” उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी ने अपने मतदाताओं को फॉर ग्रांटेड ले लिया।

Screenshot of the Daily O opinion piece by Ankhi Das

इससे पहले, कॉन्ग्रेस से जुड़े लोगों ने अंखी दास की व्यक्तिगत जानकारी और तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी थी, ताकि उनकी पार्टी के फॉलोवर्स उन्हें खुले तौर पर गली दे सकें। बाद में अंखी को कॉन्ग्रेस के साकेत गोखले और अरशद खान सहित कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ दिल्ली पुलिस साइबर सेल में शिकायत दर्ज करानी पड़ी।

गौरतलब है कि 14 अगस्त को वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि फेसबुक के एक (बेनाम) शीर्ष अधिकारी ने ऐसा कहा कि एंटी मुस्लिम (मुस्लिम विरोधी) पोस्ट को ‘हेट स्पीच’ के दायरे में नहीं रखा जाएगा।लिबरल्स इस बात से निराश थे कि फेसबुक की शीर्ष अधिकारी अंखी दास कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करती हैं। इसलिए लिबरल्स का मानना था कि फेसबुक मुस्लिम विरोधी पोस्ट को हेट स्पीच के दायरे में नहीं रखता है।

प्रशांत भूषण ने माना वे हैं अवमानना ​​के दोषी, खोखले आदर्शों का हवाला देने के बाद बेशर्मी से जुर्माना देने के लिए हुए सहमत

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार (अगस्त 31, 2020) को आपराधिक अवमानना ​​के मामले में वकील प्रशांत भूषण पर 1 रुपए का जुर्माना लगाया। फैसले के कुछ ही देर बाद प्रशांत भूषण ने बेशर्मी से एक ट्वीट में कहा कि इस फैसले के फ़ौरन बाद उनके सहयोगी और वकील राजीव धवन ने उन्हें 1 रुपया दिया, जो कि उन्होंने स्वीकार कर लिया है।

अभी तक प्रशांत भूषण द्वारा की जा रही बड़ी-बड़ी बातों और दलीलों के आधार पर उन्हें आदर्श और सिद्धांतों वाला व्यक्ति बता रहे लोगों के लिए यह देखना मुश्किल होता जा रहा है कि अपने बयान के लिए माफ़ी माँगने की बात पर मुकरने वाले प्रशांत भूषण माफ़ी के तौर पर महज 1 रुपया दंड लगाने की बात सुनकर फ़ौरन खुद को बेशर्मी से अपराधी मानने को तैयार हो गए हैं।

गौरतलब है कि तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने कहा कि अगर भूषण 15 सितंबर तक राशि जमा करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें तीन महीने के लिए कारावास में रहना होगा और तीन साल के लिए वकालत से रोक दिया जाएगा।

अदालत ने 14 अगस्त को भूषण को अदालत की आपराधिक अवमानना ​​का दोषी ठहराया था और कहा था कि अदालत और सीजेआई के खिलाफ ट्वीट्स में लगाए गए आरोप दुर्भावनापूर्ण हैं।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अवमानना के बीच एक पतली रेखा है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था, “पहली नज़र में हमारी राय यह है कि ट्विटर पर इन बयानों से न्यायपालिका की बदनामी हुई है और सुप्रीम कोर्ट, और ख़ास तौर पर भारत के चीफ़ जस्टिस के ऑफ़िस के लिए जनता के मन में जो मान-सम्मान है, यह बयान उसे नुक़सान पहुँचा सकते हैं।”

मीडिया के एक बड़े वर्ग द्वारा लगातार प्रशांत भूषण का समर्थन कर के उनके लिए माहौल बनाया जा रहा था। कई वकीलों ने उनके समर्थन में मोर्चा खोला था, जिसके बाद कई वकीलों ने पत्र लिख कर उन पर कार्रवाई की भी माँग की थी। प्रशांत भूषण ने सीजेआई जस्टिस बोबडे पर भी टिप्पणी की थी।