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धर्मांतरण के बाद निकाह फिर अश्लील फोटो वायरल कर सऊदी अरब भाग गया शौहर रिफाकत, ससुराल वालों ने की पिटाई

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले की एक लड़की रुड़की जाकर दूसरे समुदाय के रिफाकत के साथ लिव-इन में रहने लगी। 6 माह पहले युवती ने धर्मांतरण के बाद रिफाकत से निकाह कर लिया। अचानक एक दिन उसी अश्लील तस्वीरें सार्वजनिक कर रिफाकत गायब हो गया। उसका पता लगाने जब युवती ससुराल पहुॅंची तो रिफाकत की अम्मी, अब्बा और बहनोई ने उसकी पिटाई कर दी। अब युवती ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई है।

युवती टिहरी गढ़वाल के कीर्तिनगर से चार साल पहले देहरादून में काम करने आई थी। इसी बीच वह सोशल मीडिया के जरिए रिफाकत के नजदीक आई। दोनों के बीच बातचीत आगे बढ़ने लगी और युवती देहरादून से हरिद्वार के ज्वालापुर आ गई। रिफाकत रुड़की में कपड़ों की दुकान करता था, जबकि युवती बहादराबाद में एक ऑटो मोबाइल कंपनी में काम करती थी।

दोनों के बीच नजदीकियाँ बढ़ने के बाद दोनों हरिद्वार, ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र में रहने लगे। इसके बाद 6 माह पहले ही युवती ने रिफाकत से विवाह कर लिया। लेकिन इस घटना में मोड़ तब आया जब गत 22 फरवरी को युवती का पति रिफाकत, निवासी मक्कखनपुर, भगवानपुर गायब हो गया और युवती उसका पता लगाने के लिए भगवानपुर पहुँची।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोप है कि युवती के साथ उसके पति रिफाकत के पिता, माँ और बहनोई ने मारपीट की। युवती ने आरोप लगाया है कि कुछ ही दिनों पहले पति रिफाकत ने उसकी अश्लील फोटो वायरल दी। पुलिस ने पीडि़ता की शिकायत पर उसके पति रिफाकत व अन्य आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कोतवाली प्रभारी प्रवीण कोश्यारी ने बताया कि उसके पति रिफाकत समेत 4 पर केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार युवती का पति रिफाकत फरवरी में ही सउदी अरब चला गया है और उसके परिवार को भी इस बात की जानकारी नहीं है कि रिफाकत वहाँ क्या काम कर रहा है।

वामपंथी चीन में गूँज रहा ‘हरे कृष्णा-हरे रामा’ – वीडियो में चीनी झूम रहे राम-कृष्ण के भजनों पर

चीन जैसे वामपंथी देश में ऐसी बातों की कल्पना करना लगभग असंभव है। चीन के स्थानीय लोग सड़कों पर हरे राम – हरे कृष्ण का जाप करते हुए नज़र आए। इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ़ कृष्ण कॉनशियसनेस (ISKCON) ने इस पूरी घटना का वीडियो अपने आधिकारिक ट्विटर एकाउंट पर साझा किया। ISKCON द्वारा साझा किए गए इस वीडियो को फिलहाल सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रियाएँ भी मिल रही हैं।  

ISKCON द्वारा ट्विटर पर साझा किए गए वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि उसमें चीन की कई महिलाएँ एक घेरा बना कर नृत्य कर रही हैं। उनके अलावा कई आदमी मंजीरा और मृदंगम जैसे वाद्य यंत्र बजा रहे हैं।

वीडियो में मौजूद लगभग हर इंसान हरे कृष्ण – हरे राम का जाप भी कर रहा है। इतना ही नहीं, मौके पर मौजूद कई लोग भजन गाने में उनका साथ देते हुए भी नज़र आते हैं। वहीं कुछ लोग भजन गाते हुए लोगों की तस्वीरे लेते हैं और वीडियो बनाते हुए भी दिखते हैं।  

चीन अवधारणा के लिहाज़ से नास्तिक देश है। इसके बावजूद गुज़रे कुछ सालों में चीन के नास्तिक लोगों का झुकाव भी कृष्ण की तरफ हुआ है। पूरे चीन में ISKCON के कुल 5 आध्यात्मिक केंद्र हैं। श्रीकृष्ण भगवान जन्मदिन जन्माष्टमी पूरे चीन में बेहद उत्साह के साथ कई इलाकों में मनाया जाता है।

इस मौके पर ISKCON पूरे चीन की कई अलग-अलग जगहों पर बड़े आयोजन करवाता है। इस तरह के आयोजनों में चीन में रहने वाले तमाम श्रीकृष्ण भक्त शामिल होते हैं। वह श्रीकृष्ण के भजन गाते हैं और श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करते हैं।   

रिया के समर्थन में तापसी का ‘कानून पाठ’, CAA का किया था विरोध: ऐसे कैसे चलेगा ‘नाम शबाना’

फिल्म अभिनेत्री तापसी पन्नू ने ढाई महीने बाद सुशांत सिंह राजपूत मामले में चुप्पी तोड़ी है और रिया चक्रवर्ती का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वे न तो सुशांत को जानती थीं और न रिया को। लेकिन एक मनुष्य होने के कारण वे मानती हैं कि न्यायपालिका द्वारा किसी को दोषी ठहराए जाने के बिना ही किसी को दोषी करार देने का क्या अर्थ होता है। उन्होंने कहा कि अभी रिया चक्रवर्ती दोषी साबित नहीं हुई हैं, इसीलिए ऐसा करना गलत है।

तापसी पन्नू ने कहा कि मृतक की आत्मा की पवित्रता और अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए लोगों को क़ानून में विश्वास रखना चाहिए। ऐसा उन्होंने अभिनेत्री लक्ष्मी मांचू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, जिसमें उन्होंने कहा था कि मीडिया ने एक लड़की को राक्षस बना बना कर पेश किया है और फैक्ट जाने बिना हमें किसी लड़की या उसके परिवार की दुष्टतापूर्वक और क्रूरतापूर्वक लिंचिंग नहीं करनी चाहिए।

हालाँकि, इस दौरान तापसी पन्नू का सीएए को लेकर दिया गया बयान भी याद करने की ज़रूरत है, जब उन्होंने उपद्रवी प्रदर्शनकारियों को छात्र बताते हुए कहा था कि वे उनका ‘दर्द’ को समझती हैं। आज भले ही वे ‘Law of the Land’ में भरोसा जताने की सबको सलाह दे रही हैं, लेकिन जब उन्होंने CAA विरोधियों का समर्थन किया था, तब इस ‘Law of the Land’ में उनका विश्वास कहाँ गया था?

तब तापसी पन्नू का खूब विरोध भी हुआ था। सीएए भी इसी देश का क़ानून है, जिसे संसद के दोनों सदनों ने पास किया है और उस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हैं। लेकिन, सुशांत मामले में क़ानून में विश्वास जताने की सलाह देते फिर रही तापसी को CAA के समय कानून में भरोसा नहीं था। जेएनयू में वामपंथियों द्वारा की गई हिंसा के दौरान भी ‘क़ानून पर भरोसा’ गायब था, क्योंकि उन्होंने सड़क पर उतर कर विरोध-प्रदर्शन किया था।

एक इंटरव्यू के दौरान तापसी पन्नू ने कहा था कि अगर लोग अभी नहीं जगे तो फिर वे मृत हो जाएँगे। इससे पहले कई बार तापसी ये भी कहती हुई पाई गई थीं कि वे सीएए को समझती ही नहीं है और न इसके बारे में उनके पास ज्ञान है, इसीलिए वो इस पर टिप्पणी नहीं कर सकतीं। लेकिन, बावजूद इसके उन्होंने लगातार प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। इसके जवाब में लोगों ने उनकी फिल्म ‘थप्पड़’ का बॉयकॉट किया था।

हाल ही में तापसी पन्नू पर निशाना साधते हुए कंगना रनौत ने कहा था, “बॉलीवुड में बाहर से आए तमाम चापलूस कंगना की शुरू की गई मुहिम को रास्ते से भटकाना चाहते हैं। वह मूवी माफियाओं के पसंदीदा बने रहना चाहते हैं, ऐसे लोग कंगना पर हमले करके फिल्म और पुरस्कार लेते हैं। इतना ही नहीं, वह एक महिला को सार्वजनिक तौर पर परेशान करने में दूसरों की मदद कर रहे हैं। तुम्हें शर्म आनी चाहिए तापसी, तुम कंगना के संघर्षों का फल ले रही हो और उसी के खिलाफ गुटबाज़ी में शामिल भी हो रही हो।”

प्रतिबंधित संगठन PFLI के 3 नक्सली गिरफ्तार, 5 महीने से घर बदल-बदल कर रांची में छिपे हुए थे

झारखंड पुलिस ने रविवार (अगस्त 30, 2020) को राँची से प्रतिबंधित संगठन पिपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया के 3 नक्सलियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। इनके नाम विनय तिग्गा (28), कचना पाहन (25) और सनी कच्छप (20) हैं। ये पिछले 5 महीने से किराए का घर बदल बदल कर राँची के अलग-अलग इलाकों में रुके हुए थे और एरिया कमांडर पुनई उरांव के इशारे पर व्यवसायियों से वसूली करके संगठन को पैसा पहुँचाने का काम करते थे।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इनके पास से 2 देसी बंदूकें, 31 कारतूस, 3 मोबाइल फोन और एक बाइक जब्त की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, राँची एसएसपी को खूफिया सूत्रों से इनकी मूवमेंट की सूचना मिली थी। इसके बाद एसएसपी के निर्देशों पर राँची डीएसपी के नेतृत्व में टीम गठित हुई और इन लोगों को चुटिया के केतारीबागन इलाके से गिरफ्तार किया गया।

ग्रामीण एसपी नौशाद आलम ने बताया कि पकड़े गए तीनों नक्सलियों ने जानकारी दी है कि अब तक वे 25 व्यवसायियों से लेवी की माँग कर चुके हैं। इनमें से लगभग 15 व्यवसायियों ने कुछ रकम उनको दी है। लेकिन, किसी ने पुलिस में शिकायत नहीं की। तीनों ने यह भी बताया कि व्यवसायियों से लेवी की माँग करने के लिए व्हाट्सएप कॉलिंग का इस्तेमाल किया जाता है।

यहाँ बता दें कि तीनों के पकड़े जाने के बाद पड़ताल में यह भी मालूम चला कि इनमें से दो पहले से हिस्ट्रीशीटर हैं व इन पर कई मामले दर्ज हैं। पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार झा ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि विनय तिग्गा के खिलाफ राँची में तीन मामले दर्ज हैं।

पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार झा ने कहा कि वर्ष 2016 में धुर्वा थाना से जुआ कांड में आरोपित, वर्ष 2018 में नगड़ी थाना से रंगदारी लूटपाट और आर्म्स एक्ट में आरोपित और वर्ष 2019 में नगड़ी थाना से अपने चाचा प्रकाश तिग्गा की हत्या कांड में विनय तिग्गा फरार था।

वहीं सनी कच्छप के खिलाफ नगड़ी थाने क्षेत्र में बाबू खान की हत्या करने, रातू थाना क्षेत्र में इम्तियाज अंसारी की हत्या करने और मांझी थाना क्षेत्र में सुंदर दास को गोली मारने का आरोप है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों ने पूछताछ में अपने तीन अन्य साथियों का भी खुलासा किया जिसके बाद अन्य तीन भी पकड़ लिए गए। यह भी लेवी के लिए शहर में ठहरे हुए थे। रिपोर्ट का कहना है कि इन तीनों की गिरफ्तारी की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पत्रकार और सपा नेता मो. कतील शेख पर नौकरी का झाँसा देकर रेप करने का आरोप: कोर्ट से हुए दोषमुक्त

अपडेट: नीचे की खबर अगस्त 2020 में आरोप लगाए जाने के बाद लिखी गई थी। अब कोर्ट का आदेश आने के बाद इस खबर के हेडलाइन को संपादित किया गया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि आरोपित को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के एक पत्रकार को 24 साल की एक लड़की से बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पत्रकार की पहचान मो. कतील शेख के रूप में हुई है। कतील पर आरोप है कि उसने एक लड़की को पत्रकारिता जगत में अच्छी नौकरी दिलाने के बहाने कई बार अपने पास बुलाया। फिर, एक दिन कॉफी में नशीला पदार्थ देकर उसका रेप कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रभारी निरीक्षक धीरज कुमार ने बताया कि शनिवार देर रात आरोपित के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया है। चिनहट इलाके की रहने वाली 24 वर्षीय युवती ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 1 साल पहले वह नौकरी की तलाश में विनीतखंड निवासी मो. कतील के घर गई थी। जहाँ कतील ने उसे नौकरी दिलाने की बात कही और इसी कारण दोनों के बीच आगे बातें शुरू हो गईं।

युवती का आरोप है कि बातचीत शुरू होने के करीब चार दिन बाद क़तील ने उसे घर बुलाया और कॉफी पिलाई। कॉफी पीते ही उसे कुछ होश नहीं रहा। जब होश में आई तो कपड़े अस्त-व्यस्त थे। लड़की के मुताबिक, उसने जब इस मामले में पुलिस से शिकायत करने की बात कही तो वह माफी माँगने लगा और उसे शादी का झाँसा देकर चुप करवा दिया। इसके बाद वह अक्सर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता।

पीड़िता की मानें तो एक दिन उसने जब कतील से उसकी पत्नी और बच्चों के बारे में सवाल किया तो पत्रकार ने अपने रुतबे का प्रभाव दिखाकर उसे जान से मारने की धमकी दे दी। इसी के बाद लड़की पुलिस थाने पहुँची और तहरीर दी। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज करके पड़ताल शुरू कर दी है।

अभी तक की जाँच में पता चला है कि पत्रकार कतील ने न केवल मान्यता प्राप्त पत्रकार का दर्जा ले रखा है बल्कि लखनऊ के पॉश इलाके में विधायक निवास में सरकारी मकान भी अलॉट करवाया हुआ है। पुलिस का कहना है कि आरोपित की पहली पत्नी भी हिंदू है, जिससे उसके दो बच्चे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पटेल उमरांव ने भी इस मामले पर ट्वीट किया है। उनका दावा है कि कतील सपा शासनकाल में राज्य मुख्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकार बने थे।

FACT CHECK: स्वीडन में दंगाइयों से चर्च बचाने के लिए संप्रदाय विशेष के लोगों ने बनाया ह्यूमन चेन? दोहराया बेंगलुरु?

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसे स्वीडन का बताया जा रहा है। इस तस्वीर में कुछ लोग ह्यूमन चेन बनाए दिख रहे हैं। इसे शेयर करते हुए लोग पूछ रहे हैं कि ये असली है या फिर फॉटोशॉप? बता दें कि स्वीडन में हाल ही में हुए दंगों को लेकर लोग ये पूछ रहे थे कि क्या अभी तक बेंगलुरु की तरह संप्रदाय विशेष के लोगों ने ह्यूमन चेन नहीं बनाया या फिर मीडिया में इस तरह की खबर नहीं चली, जिससे दंगाइयों की करतूतें और पहचान छिपाई जा सके।

ज्ञात हो कि हाल ही में बेंगलुरु में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में संप्रदाय विशेष की भीड़ ने जम कर उत्पात मचाया था। पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने का आरोप लगाते हुए एक कॉन्ग्रेस विधायक के घर को घेर लिया गया था और जम कर आगजनी व पत्थरबाजी की गई थी। इसके बाद मीडिया में इस तरह की खबरें जम कर चली थीं कि कैसे कुछ संप्रदाय विशेष के लोगों ने ह्यूमन चेन बना कर एक मंदिर को बचाया। हालाँकि, मीडिया के हिसाब से बचाने वालों का तो मजहब था, लेकिन जिनसे वो मंदिर को बचा रहे थे, उनका कोई मजहब नहीं था।

ठीक इसी तरह, स्वीडन के बारे में भी ऐसा ही दावा करते हुए तस्वीर वायरल हुई। ये तस्वीर किसी अब्दुल हमीद के फ़ेसबुक पोस्ट की स्क्रीनशॉट के रूप में है, जिसके बारे में कहा गया है कि ये एडिटेड भी हो सकती है। इस पोस्ट में लिखा हुआ है कि स्वीडन में चर्चों को भीड़ से बचाने के लिए संप्रदाय विशेष के लोगों ने ह्यूमन चेन बनाया है। साथ ही ये सवाल भी पूछा गया है कि क्या आपने कभी यहूदी, ईसाई या हिन्दू को मस्जिदों को बचाते हुए देखा है?

साथ ही इस फ़ेसबुक पोस्ट में दावा किया गया है कि ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि इस्लाम दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण मजहब है और जब तक पूरी दुनिया इस्लाम नहीं अपनाएगी, तब तक विश्व में शांति नहीं आ सकती। अब्दुल हामिद के इस स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए ट्विटर हैंडल ‘सूपस्टार राज’ ने पूछा कि क्या ये सच में हुआ है या फिर किसी ने तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की है? जब हमने इस तस्वीर को खँगाला तो कुछ और सच्चाई सामने आई।

जब हमने इसका फैक्ट-चेक किया तो पाया कि ह्यूमन चेन वाली ये तस्वीर 5 साल पुरानी है। 2015 की यह तस्वीर नॉर्वे की है। ओस्लो के चर्च का समर्थन करने के लिए संप्रदाय विशेष के लोगों ने ऐसा किया था। उनका दावा था कि वो नॉर्वे के यहूदियों के साथ सहानुभूति जताने के लिए ऐसा कर रहे हैं। इस ‘रिंग ऑफ पीस’ में करीब 1000 संप्रदाय विशेष के लोगों ने भाग लिया था। ये वही संप्रदाय विशेष के लोग थे, जो फिलिस्तीन का समर्थन करते हुए इजरायल को गाली देते हैं। दिलचस्प यह है कि स्वीडन में हिंसा और आगजनी के अगले दिन संप्रदाय विशेष के लोगों ने ओस्लो में भी दंगे किए थे।

मीडिया हमेशा ऐसी किसी भी घटना में हमलावरों के मजहब को छिपाने के लिए ऐसी खबर बनाता है, जिससे पता चले कि किसी खास मजहब के लोग मानवता के लिए कितना अच्छा काम कर रहे हैं और दंगों के दौरान भी समाजसेवा में लगे रहे। इसके लिए मंदिरों को बचाने के लिए ह्यूमन चेन बनाने या फिर महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा करते हुए संप्रदाय विशेष के लोगों को दिखाया जाता है और सैकड़ों की भीड़ द्वारा की गई हिंसा को छिपाने की कोशिश की जाती है।

बता दें कि बेंगलुरु दंगों के दौरान बने ह्यूमन चेन का भी एक वीडियो वायरल हुआ था, जिससे ऐसा लग रहा था कि ये सब पब्लिसिटी के लिए किया जा रहा है। बाद में एक और वीडियो सामने था। इसमें वीडियो शूट करने वाले व्यक्ति को बैकग्राउंड से किसी को ये कहते हुए सुना जा सकता है कि इसे ‘जल्दी से अपलोड करे।’

पालघर साधु लिंचिंग मामला: 3 पुलिसकर्मियों ने धोया नौकरी से हाथ, 2 ASI भी शामिल

महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की लिंचिंग मामले में दो पुलिसकर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई जबकि एक पुलिसकर्मी को उसकी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इसकी जानकारी स्वयं एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दी।

उन्होंने बताया कि इन 3 पुलिसकर्मियों में सहायक पुलिस निरीक्षक आनंदराव का नाम भी शामिल है क्योंकि वह 16 अप्रैल को पालघर के कासा पुलिस थाने के प्रभारी थे। उनके अलावा सहायक पुलिस निरीक्षक (एएसआई) रवि सांलुके और कॉन्सटेबल नरेश धोडी को भी सेवा से बर्खास्त किया गया है।

अधिकारी ने बताया कि कोंकण रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने शनिवार को जारी एक आदेश में तीनों पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। इससे पहले ये तीनों पुलिसकर्मी अन्य पाँच पुलिसकर्मियों के साथ निलंबित किए गए थे।

बता दें कि 16 अप्रैल को पालघर में दो साधुओं की बेरहमी से लिंचिंग के बाद इस मामले में महाराष्ट्र पुलिस पर सवाल खड़े हुए थे। कुछ दिन पहले जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने साधुओं की हत्या मामले में सीबीआई की माँग उठाई थी। उनके साथ कई साधु संतों ने भी मामले पर कार्रवाई के लिए आवाज उठाई थी।

इसके बाद मामले की जाँच के लिए गठित एक स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा था कि इस घटना के पीछे गहरी साजिश थी। साथ ही इस घटना के तार नक्सलियों से भी जुड़ रहे हैं।

उक्त कमिटी में वकील, रिटायर्ड जज और पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया था। जिसने हाल में कहा कि पालघर में साधुओं की हत्या के मामले की जाँच सीबीआई और एनआईए करे।

कमिटी ने अपनी जाँच में यह भी पाया है कि वहाँ उपस्थित पुलिसकर्मी अगर चाहते तो इस हत्याकांड को रोक सकते थे लेकिन उन्होंने हिंसा की साजिश में शामिल होने का रास्ता चुना। शनिवार (अगस्त 29, 2020) को एक ऑनलाइन कार्यक्रम के जरिए कमिटी ने अपनी रिपोर्ट के कुछ अंश पेश किए।

₹1 दीजिए… वरना जेल जाइए: प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई सजा, पैसे जमा करने के लिए 15 सितम्बर तक का समय

सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण को उनके अवमानना वाले ट्वीट के मामले में 1 रुपए का जुर्माना लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 15 सितम्बर तक प्रशांत भूषण 1 रुपया जमा कराएँ। बता दें कि उन्होंने इस मामले में अदालत से माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद 14 अगस्त को उन्हें इस मामले में दोषी पाया गया था। अगर वो 1 रुपया नहीं जमा कराते हैं तो उन्हें 3 महीने के लिए जेल जाना होगा।

साथ ही जुर्माना न जमा करने की स्थिति में उन्हें बतौर अधिवक्ता प्रैक्टिस के लिए भी तीन महीने तक प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। प्रशांत भूषण ने न्यायपालिका के खिलाफ 2 ट्वीट किए थे, जिसके लिए उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का मामला चल रहा था। वकील राजीव धवन ने कहा था कि इस मामले में प्रशांत भूषण को सजा देकर उन्हें ‘शहीद’ न बनाया जाए। सुनवाई के बाद उन्हें अदालत ने दोषी पाया।

सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अवमानना के बीच एक पतली रेखा है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था, “पहली नज़र में हमारी राय यह है कि ट्विटर पर इन बयानों से न्यायपालिका की बदनामी हुई है और सुप्रीम कोर्ट, और ख़ास तौर पर भारत के चीफ़ जस्टिस के ऑफ़िस के लिए जनता के मन में जो मान-सम्मान है, यह बयान उसे नुक़सान पहुँचा सकते हैं।”

मीडिया के एक बड़े वर्ग द्वारा लगातार प्रशांत भूषण का समर्थन कर के उनके लिए माहौल बनाया जा रहा था। कई वकीलों ने उनके समर्थन में मोर्चा खोला था, जिसके बाद कई वकीलों ने पत्र लिख कर उन पर कार्रवाई की भी माँग की थी। प्रशांत भूषण ने सीजेआई जस्टिस बोबडे पर भी टिप्पणी की थी।

क्या दो कौड़ी का आदमी ₹1 फाइन भर पाएगा? प्रशांत भूषण पर हुए फाइन पर लोगों ने लिए मजे

प्रशांत भूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अब इसकी हर जगह चर्चा है। अदालत ने आज उन पर 1 रुपए का फाइन लगाया है। साथ ही फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर 15 सितंबर तक फाइन नहीं भरा गया तो भूषण को जेल जाना पड़ेगा और उनका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है।

कोर्ट के इस फैसले ने कुछ लोगों को अचंभित किया है। तो अधिकांश लोग इसे सुनकर प्रशांत भूषण की चुटकी ले रहे हैं। यूजर्स उन्हें दो कौड़ी का आदमी बता कर पूछ रहे हैं कि क्या प्रशांत भूषण एक रुपया का फाइन भर पाएँगे?

एक यूजर मजे लेते हुए कहता है, “सर, मैं आपका बहुत बड़ा फैन हूँ। फासीवाद के ख़िलाफ आपकी लड़ाई की सराहना करता हूँ। मुझे उम्मीद है आप 1 रुपए का जुर्माना नहीं भरोगे। ऐसा किया तो मोदी को राहत मिल जाएगी।”

इसी तरह देसी मोजिटो नाम के ट्विटर हैंडल से पूछा गया है कि ये सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है या प्रशांत भूषण की या फिर प्रशांत भूषण की औकात ही एक रुपए की है।

अनुज धर लिखते हैं, “गाँधीवादी भावना पर खरे उतरिए जैसे पहले किया था। प्रशांत भूषण जी ये एक रुपए का फाइन देने से मना कर दीजिए और खुशी-खुशी कानूनी रूप से मिलने वाले दंड को स्वीकारें।”

कॉन्ग्रेस से जुड़ी हासिबा बार एंड बेंच का ट्वीट शेयर करते हुए लिखती हैं, “अब प्रशांत भूषण के लिए फंड इकट्ठा किया जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए डायरेक्ट मैसेज करें।”

बता दें कि ऐसे ही अनेकों ट्वीट इस समय सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं। लोग कई मीम्स के जरिए प्रशांत भूषण की खिल्ली उड़ा रहे हैं।

कुछ यूजर्स का ये भी कहना है कि कोर्ट ने ऐसा करके भूषण को उनका स्तर दिखाया है और कुछ इसे जोक ऑफ द डे बता रहे हैं।

इसके अलावा भूषण की तस्वीर सामने आई है जिसमें वह अपनी वकील से 1 रुपया लेते दिख रहे हैं।

इससे पहले याद दिला दें प्रशांत भूषण पर कोर्ट और सीजेआई की अवमानना का आरोप तय होने के बाद मीडिया के एक बड़े वर्ग द्वारा लगातार प्रशांत भूषण का समर्थन कर उनके लिए माहौल बनाया जा रहा था। कई वकीलों ने उनके समर्थन में मोर्चा खोला था, जिसके बाद कई वकीलों ने पत्र लिख कर उन पर कार्रवाई की भी माँग की थी।

शालिनी यादव (फातिमा) को चुपके से विदेश भेज रहा आरोपित फैसल: कानपुर ‘लव जिहाद’ में परिजनों का आरोप

कानपुर में शालिनी यादव से फातिमा बनी महिला को लेकर परिवार ने ‘लव जिहाद’ का आरोप लगाया था। धर्म परिवर्तन के बाद शालिनी ने फैसल के साथ निकाह कर के अपना नाम बदल लिया था। अब आरोप लग रहे हैं कि ‘लव जिहाद’ के आरोपों के बीच शालिनी यादव को विदेश भेजने की तैयारी हो रही है। ये आरोप परिवार वालों ने ही लगाया है। ये मामला सोशल मीडिया में भी खासा वायरल हुआ था।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, शालिनी यादव के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि आरोपित और उसका परिवार उसे विदेश भेजने की तैयारी में है, ताकि क़ानून के शिकंजे से बचा जा सके। भाई विकास ने बताया कि शनिवार (अगस्त 29, 2020) को दो पुलिसकर्मी उनके घर पर आए थे। वो वहाँ आकर शालिनी यादव और उसके पूरे परिवार के बारे में ज़रूरी जानकारियाँ जुटा रहे थे।

विकास ने बताया कि इस दौरान उन पुलिसकर्मियों ने शालिनी यादव के पासपोर्ट के बारे में भी पूछा। ये वही पुलिसकर्मी थे, जो उसके पासपोर्ट के सत्यापन के समय भी आए थे। परिवार उसे पढ़ने के लिए विदेश भेजना चाहता था, इसीलिए उसका पासपोर्ट बनवाया गया था। विकास का दावा है कि उसी पासपोर्ट के आधार पर आरोपित उसका वीजा बनवा रहा है, जिसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

विकास ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने कुछ खास नहीं बताया लेकिन इतना ज़रूर बताया कि वीजा हासिल करने की प्रक्रिया चल रही है। विकास ने आरोप लगाया है कि उनकी बहन पर दबाव डाल कर जबरन वीडियो बनवाया गया और बयान दिलवा कर वायरल करवाया गया। साथ ही ये भी आरोप लगाया कि आरोपित पक्ष ने गलत तथ्यों को पेश कर के हाईकोर्ट से राहत ली है। परिजनों ने पुलिस पर भी आरोप लगाए।

परिवार का आरोप है कि हाईकोर्ट की आँखों में धूल झोंक कर सुरक्षा भी ले ली गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता कौशल किशोर ने कहा कि अगर मामला किसी अन्य अदालत में विचाराधीन है तो हाईकोर्ट में शपथ पत्र देना होता है। उन्होंने इसे अदालत को गुमराह करने के साथ-साथ उसकी अवमानना का मामला भी माना है। एसपी साउथ दीपक भूकर ने कहा कि पुलिस क़ानून के हिसाब से कार्रवाई करेगी और मामला अदालत में होने के कारण वो टिप्पणी नहीं कर सकते।

इससे पहले विकास ने कहा कि शालिनी यादव घर से 10 लाख रुपए लेकर निकली थी। फैसल ने उसे बहला-फुसलाकर प्रेमजाल में फँसाया है। भाई ने कहा था कि इसके पीछे लव जिहाद गैंग का हाथ है। बहन के प्रति अपनी चिंता को जाहिर करते हुए उसने शहर में चल रहे लव जिहाद का खुलासा करते हुए कहा था कि लव जिहाद का गैंग हिंदू लड़कियों को निशाना बना कर उन्हें अपने झाँसे में लेता है। फिर उनसे इस्लाम कबूल कराता है।