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अल्लाह हू अकबर कहते हुए पुलिस के गले में चाकू घोंपने वाला ISIS समर्थक निकला अवैध प्रवासी

जेनान कैमोविक (Dzenan Camovic) ने जून में ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ विरोध-प्रदर्शनों के दौरान ‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाते हुए न्यूयॉर्क शहर के एक पुलिस अधिकारी की गर्दन में चाकू घोंप दिया था। उसने अपने मजहब से प्रेरित होकर इस घटना को अंजाम देने की बात कबूली थी।

इस शख्स के बारे में खुलासा हुआ है कि वह बोस्निया-हर्जेगोविना (Bosnian national) का एक अवैध अप्रवासी है। वह हिंसक इस्लामी कट्टरपंथ ISIS समर्थक है।

3 जून की इस घटना की रिकॉर्डिंग और कैमरा फुटेज में यह स्पष्ट देखा गया कि 21 साल का आरोपित जेनान कैमोविक ‘अल्लाह हू अकब’ कहते हुए ब्रुकलिन स्ट्रीट के कोने पर एक एंटी-लूटिंग पोस्ट पर तैनात न्यूयॉर्क पुलिस अधिकारी योनफ्रंट जीन पियरे (Yayonfrant Jean Pierre) की ओर बढ़ा और और उनकी गर्दन में चाकू घोंप दिया।

एक पुलिस अधिकारी की गर्दन में छुरा घोंपने के बाद आरोपित एक और अधिकारी रैंडी रामनारायण (Randy Ramnarine) का पीछा करते हुए दिखाई दिया था। अधिकारियों के अनुसार, रैंडी रामनारायण ने कैमोविक पर 2 बार गोलियाँ चलाईं और जीन पियरे ने 6 बार गोलीबारी की। पुलिस की गोलियों से घायल होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारियों ने कहा कि कैमोविक ने पुलिस अधिकारी जीन पियरे की बंदूक को छीन लिया और उससे 6 शॉट दागे जिसमें रैंडी रामनारायण और एक अन्य अधिकारी घायल हो गए। रैंडी रामनारायण और एक हवलदार ने जवाबी कार्रवाई में गोलियाँ चलाईं। दोनों अधिकारी इस घटना में बुरी तरह से जख्मी हुए और उनका इलाज अभी तक जारी है।

इसकी जाँच में पता चला था कि पुलिस अधिकारियों पर हमला करने वाला 21 वर्षीय जेनान आतंकवादी संगठन ISIS से जुड़ा हुआ था और वह एक अवैध प्रवासी था।

अधिकारियों ने जब जेनान के ब्रुकलिन स्थित घर में तलाशी ली तो उन्हें वहाँ CD और एक पेन ड्राइव मिली, जिसमें अनवर अल-अवलाकी, एक मृत इस्लामिक धर्मगुरु और अल-कायदा नेता के ऑडियो और वीडियो व्याख्यान के साथ ही उनके मजहबी उपदेश शामिल थे।

दिलचस्प बात यह है कि यह हमला मिनियापोलिस पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जा रहे एक अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद न्यूयॉर्क शहर में चल रहे ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ विरोध प्रदर्शन और दंगों के दौरान हुआ था।

आरोपित जेनान कैमोविक के फोन में इस्लामिक स्टेट के संदर्भ में अरबी लेख की कर दी गई तस्वीरें और एक पत्रिका थीं, जिसका इस्तेमाल ISIS संगठन में अनुयायियों को भर्ती करने और उन्हें कट्टरपंथी बनाने के लिए किया जाता था।

मुल्तान में मिली देवी-देवताओं की स्वर्ण मूर्तियाँ भारत को सौंपी जाए: पाकिस्तानी उच्चायुक्त से VHP

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार (अगस्त 31, 2020) को नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त को एक ज्ञापन दिया। तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की अगुआई दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष कपिल खन्ना ने की। ज्ञापन में पाकिस्तान से पिछले हफ्ते मुल्तान में अदालत परिसर से बरामद किए गए भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की सोने की मूर्तियों को सौंपने के लिए कहा गया। 

ज्ञापन की एक प्रति भारत के विदेश मामलों के मंत्री एस जयशंकर को भी भेजी गई है। ज्ञापन में वीएचपी ने माँग की है कि मूर्तियों को पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग को सौंप दिया जाए ताकि इसे भारत वापस लाया जा सके और पूजा के लिए मंदिर में रखा जा सके। 

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तानी मीडिया के माध्यम से यह पता चला है कि मुल्तान में मलखाना नंबर 1 के अंदर नई इमारत बनाने के लिए जमीन खोदने के दौरान अन्य चीजों के अलावा हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मिली है।

Copy of the memorandum sent by VHP to the High Commissioner of Pakistan in New Delhi

ज्ञापन में कहा गया है कि चूँकि मलखान को विभाजन से पहले बना हुआ माना जाता है और स्थानीय पुष्टि के अनुसार, उसी के संबंध में पंजाब सरकार को एक पत्र पहले ही भेजा जा चुका है। प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया कि इन मूर्तियों को पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग को सौंप दिया जाए। 

Copy of the memorandum sent by VHP to the High Commissioner of Pakistan in New Delhi

दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष कपिल खन्ना ने इस बारे में मीडिया को अवगत कराते हुए कहा है कि हालाँकि कोरोना वायरस प्रोटोकॉल के कारण नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त के साथ व्यक्तिगत बैठक नहीं की जा सकती है, लेकिन उन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें ज्ञापन मिल गया है और वो ई-मेल के जरिए इसका जवाब देंगे।

कपिल खन्ना ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “हमारा एक ही उद्देश्य है। हम केवल मूर्तियों को वापस प्राप्त करना चाहते हैं, क्योंकि यह हमारी आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है। हम केवल इसे वापस लाना चाहते हैं ताकि इसे हिंदू मंदिरों में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार स्थापित किया जा सके।”

इससे पहले, पाकिस्तानी मीडिया ने खबर दी थी कि मलखाना के कचेरी परिसर में खजाने के मिलने के बाद शहर की पुलिस ने पाकिस्तान के मुल्तान के इलाके को सील कर दिया था।

इसका खुलासा तब हुआ, जब जिला प्रशासन के ठेकेदारों ने जिला अदालतों को विस्तार देने को लेकर एक नई इमारत बनाने के लिए मलखाना के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया और जमीन की खुदाई की।

यह बताया गया था कि शहर के जिला प्रशासन ने पंजाब के पुरातत्व विभाग और मुख्य सचिव को खजाने के पुरातात्विक मूल्य को स्थापित करने के लिए दो पत्र लिखे थे।

प्रशांत भूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने किया 1 रुपए का फाइन: अजीत भारती का वीडियो। Ajeet Bharti on Prashant Bhushan fined ₹1

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी मानते हुए ₹1 का फाइन लगाया है। ₹1 जमा न करने पर 3 महीने की जेल होगी और कोर्ट प्रैक्टिस भी नहीं कर पाएँगे। बहुत लोग इस पर बिफर पड़े कि जस्टिस कर्णन को अवमानना के लिए 6 महीने की जेल हुई थी, इन्हें ₹1 का ही जुर्माना क्यों? इस पर कुछ ट्विटर यूजर्स ने रोचक उदाहरण देते हुए कहा कि दो कौड़ी के लोगों पर ₹1 का जुर्माना लगाना भी बहुत बड़ी बात है। 

कुछ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भूषण को उनकी औकात दिखाई है। कोर्ट ने भूषण को उनकी जगह दिखाई है और उन्होंने फाइन देने का स्वीकार करके ये मान लिया है कि उनसे गलती हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी परिस्थिति उत्पन्न की। जबकि सच्चाई यह है कि प्रशांत भूषण आदतन इस तरह के काम करने के आदी रहे हैं।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

पहले दिन से ही उनका मार्गदर्शन, समर्थन और आशीर्वाद मिला: प्रणब मुखर्जी को पीएम मोदी ने दी भावुक विदाई

पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न से विभूषित प्रणब मुखर्जी का सोमवार को 84 साल की उम्र में निधन हो गया है। वे पिछले कुछ हफ़्तों से दिल्ली में सेना के आरआर अस्पताल में इलाज करवा रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को विद्वान और कद्दावर स्टेट्समैन बताते हुए कहा कि उन्होंने देश की विकास यात्रा में अपनी अमिट छाप छोड़ी। पीएम मोदी ने ट्विटर पर अपनी और दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति से जुड़ी कुछ यादें शेयर की हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रणब मुखर्जी के साथ अपनी कुछ तस्वीर ट्विटर पर शेयर की है। इन्हीं में से एक तस्वीर में वे प्रणब मुखर्जी का पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते हुए दिख रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा, “भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के निधन से भारत दुखी है। हमारे देश की विकास यात्रा में उन्होंने अमिट छाप छोड़ी है। वह उत्कृष्ट कोटि के विद्वान और कद्दावर स्टेट्समैन थे, जिन्हें हर राजनीतिक तबके और समाज के सभी तबकों से तारीफ मिलती थी।”

पीएम मोदी ने एक और ट्वीट में लिखा है कि राष्ट्रपति रहते हुए प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन को आम लोगों के लिए और ज्यादा पहुँच वाला बनाया। एक अन्य ट्वीट में मोदी ने 2014 में खुद को प्रणब मुखर्जी से मिले मार्गदर्शन और सहयोग को याद किया है। उन्होंने लिखा कि 2014 में दिल्ली में वह नए थे, लेकिन पहले दिन से ही उन्हें प्रणब मुखर्जी का मार्गदर्शन, समर्थन और आशीर्वाद मिला।

पीएम मोदी ने लिखा, “2014 में दिल्ली में मैं नया-नया था। पहले ही दिन से मुझे श्री प्रणब मुखर्जी का मार्गदर्शन, समर्थन और आशीर्वाद मिला। मैं हमेशा उनके साथ बिताए पलों को याद रखूँगा। उनके परिवार, मित्रों, प्रशंसकों और पूरे भारत में उनके समर्थकों के प्रति संवेदना। ॐ शांति।”

गौरतलब है कि प्रणब मुखर्जी दिमाग में खून के एक थक्के के ऑपरेशन के लिए अस्पताल गए थे, जहाँ वो जाँच के दौरान कोरोना पॉज़िटिव भी पाए गए थे। बीते 10 अगस्त को उन्होंने खुद ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी थी। अस्पताल में ही सर्जरी के दौरान वो कोमा में चले गए थे।

दावा कमरे का दरवाजा पीटने का, हो रही थी ब्रांड डील पर बात: दीपेश के व्हाट्सएप मैसेज से सुशांत के सुसाइड पर सवाल

सुशांत सिंह राजपूत मामले में एक और नया खुलासा हुआ है। सीबीआई ने जाँच में पाया है कि सुशांत सिंह राजपूत के साथी सिद्धार्थ पिठानी, उनके बावर्ची नीरज और दीपेश सावंत के बयानों में काफी अंतर है।

ख़बरों के मुताबिक़ 14 जून 2020 को दीपेश सावंत ने सुशांत सिंह के दोस्त कुशल जावेरी को संदेश भेजा और यह संदेश एक ई कॉमर्स डील के संबंध में था। हैरानी की बात यह है कि दीपेश ने सुशांत सिंह की मौत के कुछ ही समय बाद संदेश भेजा था। ठीक उस वक्त जब सुशांत के घर पर मौजूद तमाम लोग बंद दरवाज़ा खटखटाते हुए परेशान हो रहे थे।

इसके अलावा 9 से 14 जून के बीच जितनी भी व्हाट्सएप चैट बरामद हुई हैं। उनके आधार पर 14 जून के घटनाक्रम पर कई तरह के सवाल खड़े होते हैं।  

रिपब्लिक टीवी की खबर के मुताबिक़ सुशांत के दरवाज़ा न खोलने पर मचे शोर के बावजूद दीपेश उन्हें एक ब्रांड डील के संबंध में मैसेज कर रहा था। जबकि इसके पहले उसके द्वारा किए गए दावे इस जानकारी से पूरी तरह अलग थे। जिसके बाद 14 जून को हुए घटनाक्रम को लेकर शक का दायरा बढ़ जाता है।

यहाँ तक कि सुशांत के बावर्ची नीरज ने दावा किया था कि सुबह 10:30 बजे आस-पास मौके पर मौजूद लोग परेशान होकर सुशांत का दरवाज़ा खटखटा रहे थे। पिछले हफ्ते सिद्धार्थ पिठानी, नीरज और दीपेश सावंत को पूछताछ के लिए बांद्रा में सुशांत के फ़्लैट ले जाया गया था। यह पूछताछ 13 और 14 जून को हुए घटनाक्रम के संबंध में हुई थी।  

एक ई कॉमर्स कंपनी सुशांत सिंह राजपूत के एक दोस्त कुशल जावेरी के संपर्क में थी। प्राप्त चैट के मुताबिक़ ई कॉमर्स कंपनी सुशांत के साथ एक बड़ी ब्रांड इंडोर्समेंट डील की तैयारी कर रही थी। सुशांत के करीबी दोस्त कुशल ने सुशांत को 9 जून के दौरान ब्रांड डील के संबंध में संदेश भेजा। जिस पर सुशांत ने कहा कि दीपेश इस डील के मामले में बात करेंगे। सुशांत के इस सन्देश से यह बात साफ़ है कि अपनी मौत के 4 दिन पहले भी वह अपने भविष्य को लेकर सक्रिय और आशावादी थे।  

इसके बाद 14 जून को दीपेश सावंत ने सुबह 10:51 बजे इस डील के मामले में कुशल को संदेश भेजा। दीपेश ने अपने संदेश में लिखा, “हाय (Hii) सर, सुशांत सिंह राजपूत ने मुझे आपसे ब्रांड डील (फ्लिपकार्ट) के बारे में बात करने के लिए कहा था।” व्हाट्सएप चैट में सामने आई यह बातचीत नीरज के दावों पर बड़े सवालिया निशान खड़े करती है। जिसके मुताबिक़ वह सुबह 10:30 बजे सुशांत सिंह का दरवाज़ा खटखटा रहा था। इतना ही नहीं 14 जून को हुए घटनाक्रम को लेकर अभी तक कई अलग वर्ज़न सामने आ चुके हैं।  

अभी तक सुशांत सिंह राजपूत की मौत का सही समय सामने नहीं आया है। क्योंकि ऑटोप्सी रिपोर्ट में मौत के समय का कोई ज़िक्र ही नहीं है और मुंबई पुलिस ने इस बारे में कुछ नहीं कहा है। सुशांत के दोस्त कुशल ने ठीक उसी दिन लगभग 2:48 मिनट पर संदेश (रिप्लाई) भेजा ‘भाई सुरक्षित है, प्लीज़ हाँ या ना में बताओ?’ इसके बाद कुशल ने दीपेश को 3:34 पर संदेश भेजा ‘भाई हम बाहर हैं अगर कोई परेशानी हो तो बता सकते हो।’ इस बातचीत से भी कई तरह के सवाल खड़े होते हैं, जो व्यक्ति कथित तौर पर आत्महत्या करने जा रहा है, उसे एक ई कॉमर्स डील की चिंता क्यों हो रही थी।  

पिछले कुछ हफ़्तों में ऐसे तमाम लोग जो सुशांत सिंह को किसी न किसी तरह जानते या पहचानते थे, उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है कि वे आत्महत्या कर सकते हैं। ऐसे दावे के पीछे एक नहीं बल्कि कई तरह की वजहें हैं। चाहे सुशांत का अपने काम को लेकर रवैया रहा हो या निजी तौर पर सोचने का तरीका हो। इन सारी बातों में सबसे उल्लेखनीय है सुशांत की 150 पॉइंट्स की विश लिस्ट।  

वहीं सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच पर बात करें तो आज सीबीआई ने रिया चक्रवर्ती को लगातार चौथे दिन पूछताछ के लिए तलब किया। सीबीआई ने सबसे पहले सुशांत की मानसिक बीमारी को लेकर किए गए रिया चक्रवर्ती के दावों पर पूछताछ की। सीबीआई ने यूरोप यात्रा पर भी सवाल किए जो सुशांत और रिया ने साथ में की थी। इसके अलावा सीबीआई ने रिया चक्रवर्ती से ड्रग्स संबंधी सवाल भी किए थे।  

11 दिन बाद भी 14 साल की हिंदू बच्ची का सुराग नहीं, साबिर ने किया था अगवा; नेपाल ले जाने की आशंका

बिहार के मधुबनी जिले के हरलाखी थाना क्षेत्र के नहरनियाँ गाँव से 20 अगस्त को अगवा की गई 14 साल की बच्ची का अब तक सुराग नहीं लगा है। उसे अगवा करने का आरोप गाँव के ही मोहम्मद साबिर पर है।

हरलाखी थाना के प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि साबिर के दोस्त मोहम्मद आशिक को गिरफ्तार किया गया है। मगर, लड़की का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है। आशिक ने साबिर के भागने की सूचना दी है। पुलिस की मानें तो वह पूरे मामले पर निगरानी बनाए हुए हैं।

इससे पहले बता दें लड़की के भाई ने ऑपइंडिया को संपर्क किया था। उन्होंने जानकारी दी थी कि आशिक की गिरफ्तारी के बाद से आरोपित पक्ष के लोगों ने उनके घर पर आकर हंगामा किया और केस वापस लेने की धमकी दी।

लड़की के भाई के मुताबिक, कुछ लोगों से उन्हें यह भी पता चला था कि उन्हें मारने की बातें की जा रही हैं, जिसके कारण उनकी पत्नी काफी परेशान हो गई हैं। हालाँकि, पुलिस से जब हमने इस बारे में पूछा तो उन्होंने ऐसी किसी भी प्रकार की स्थिति का खंडन किया। उन्होंने कहा कि वह लगातार इस केस पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है।

वहीं, पंचायत समिति के बिश्वेश्वर महतो ने बताया कि इस केस में अभी तक एक ही गिरफ्तार हुआ है, जबकि साबिर भाग चुका है। इससे पहले उन्होंने जानकारी दी थी कि पुलिस कार्रवाई के बाद लड़की के घर में दूसरे पक्ष के लोगों ने आकर हंगामा किया था और उन्हें केस वापस लेने के लिए धमकाया भी गया। हालाँकि, पीड़ित परिवार के घरवालों की तरफ से जब लोगों ने सख्ती दिखाई, तब वह उनके घर से चले गए।

बता दें 20 अगस्त 2020 को लड़की के गायब होने के बाद इस मामले में 23 अगस्त को शिकायत दर्ज हुई थी। फिर 25-26 को जाकर इस केस में जदयू विधायक सधांशु शेखर के हस्तक्षेप से केस दर्ज हुआ।

लड़की के परिजनों का कहना है कि उन्हें जब साबिर के बारे में पता चला तो वह अपनी बेटी के बारे में पता करने उसके घर गए। लेकिन उन्होंने जवाब दिया कि तुम्हारी बेटी का धर्म परिवर्तन करवाने ले गए हैं।

शिकायत के अनुसार, लड़की के पिता से कहा गया, “तुमको जो ताकत लगाना है लगाओ। हमने तैयारी कर ली है। तुम्हारी लड़की को मुसलमान बना देंगे। तुम्हारी औकात नहीं है कि तुम हम सबका कुछ कर सको। मेरे घर से चले जाओ नहीं तो मारकर फेंक देंगे।”

इस पूरे मामले पर ऑपइंडिया ने 28 अगस्त को रिपोर्ट की थी। इसके बाद NCPCR ने भी मामले पर संज्ञान लिया। वहीं जदयू विधायक ने इस पूरी घटना को बेहद दर्दनाक बताया था और पुलिस को कार्रवाई करके सच्चाई सामने लाने के लिए कहा था।

बता दें, लड़की के गायब होने के बाद परिवार के लिए इंसाफ की गुहार लगा रहे कुछ लोगों से ऑपइंडिया ने बात की। हमसे बात करते हुए लोगों ने आशंका जताई कि साबिर लड़की को लेकर नेपाल लेकर भाग सकता है, क्योंकि उनका गाँव बॉर्डर के पास ही है। एक ग्रामीण ने हमसे बात करते हुए यह भी कहा था, “हमें आशंका है कि कहीं पुलिस कार्रवाई और एफआईआर को देखते हुए आरोपित लड़की की हत्या न कर दे।”

प्रशांत भूषण के नहले पर सुप्रीम कोर्ट का दहला: कथित गाँधीवादी घेराबंदी बनाम ₹1 की इज्ज़त

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश की अवमानना के मसले पर प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण पर एक रुपए का ज़ुर्माना लगाया है। ज़ुर्माना न भर पाने की सूरत में तीन महीने की क़ैद तथा साथ ही तीन साल के लिए वकालत पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। हालॉंकि बेशर्मी से माफी नहीं मॉंगने की बात कहने वाले भूषण अब जुर्माना भरने को तैयार हैं।

इस फैसले को सुनकर प्रथम दृष्ट्या आपको लगेगा कि यह क्या हास्यास्पद फैसला है। एकदम बकवास, बोगस, विद्रुपतापूर्ण, सस्ता और प्रशांत भूषण के विरोध के आगे झुकता सा, हार मानता सा, घुटने टेकते सा फैसला।

लेकिन यह असल में वैसा नहीं है जैसा कि यह ऊपर-ऊपर से लग रहा है। सुप्रीम-कोर्ट की इस बेंच ने दुनिया के सुप्रीम-कोर्ट्स के इतिहास में पहली बार वह किया, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। दुनिया के न्यायालय हमेशा प्रतिरोध की आवाज़ और एकेडमिक घेरेबंदी के आगे बौने साबित हुए हैं। दुनिया में हर बार न्यायालय सत्तावादी विमर्श में शोषक और निर्मम साबित किए जाते रहे हैं। दुनिया का हर इतिहास ऐसी घटनाओं और उदाहरणों से भरा पड़ा है।

लेकिन भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस शानदार फैसले में मानो कलम तोड़ दी हो। प्रशांत भूषण ने अपनी सूझबूझ और रणनीति से सुप्रीम कोर्ट को विराट सत्ता और शोषण के रूपक की तरह चित्रित कर दिया था। पूरी दुनिया में भारत का सुप्रीम कोर्ट अभिव्यक्ति की आज़ादी और जनता की आवाज़ को दबाने वाली इकाई की तरह दिखने लगा था। प्रशांत ने इंग्लैंड और अमेरिका तक में अपने लिए समर्थन का जुगाड़ कर लिया। इस खूबसूरत घेरेबंदी के बाद अगर प्रशांत को सुप्रीम कोर्ट सज़ा देता तो यह एक सत्तावादी धड़े का एक जनवादी वकील पर सत्ता का इस्तेमाल करके आवाज़ दबाना होता। यानी फिर एक न्यायालय का परास्त होना होता।

कानून की नज़र में सुप्रीम कोर्ट अथवा बार काउंसिल अपनी पीठ और नैतिकता को ज़रूर सहला लेते, थपथपा लेते लेकिन, अभिव्यक्ति के नज़रिए से, अभिव्यक्ति के माध्यमों और अभिव्यक्ति के मंचों पर भारत का सुप्रीम कोर्ट भारत की सरकार का सबऑर्डिनेट सिद्ध हो जाता और भारत और उसके न्याय की विश्वसनीयता दुनिया की नज़र में दो कौड़ी की हो जाती।

प्रशांत के इस अकेले कदम से मोदी और उनकी सरकार की छवि को बड़ा धक्का लगता और यह भी कि चुनाव जीत कर आने के बाद मोदी सरकार ने संवैधानिक संस्थाओं पर कब्ज़ा जमाकर देश को तानाशाही दे दी है- का रूपक लोगों में घर कर जाता।

वैसे भी, पहले से ही हिन्दुत्ववादी सत्ता विमर्श और बहुसंख्यक शक्ति के बल पर देश में लोकतंत्र की हत्या का एकेडेमिक्स रूपक दुनियाभर के ज्ञानजगत और अभिव्यक्ति के मंचों पर सिर चढ़कर बोल रहा है। इन मंचों पर प्रधानमंत्री मोदी की किम जोंग से कम की छवि नहीं है।

पूरी दुनिया में मार्क्सवादी एकेडेमिक्स को प्रतिरोध की भाषा का मास्टर माना जाता है। भारत में शाहीनबाग के समय छात्रा का लाठीधारी पुलिसवाले को गुलाब देती तस्वीर ने जैसे इस गुण को उच्चता दे दी थी। वह एक शानदार प्रयोग था। पूरी दुनिया की मीडिया ने उस तस्वीर का इस्तेमाल किया था और भारत की सरकार की पुलिस की बर्बरता के बरअक्स छात्रों का गाँधीवादी विरोध एक शानदार रूपक बन गया था।

प्रशांत भूषण ने भी पिछले दिनों से सरकार के खिलाफ़ अपनी प्रतिबद्धता को पुरज़ोर तरीके से प्रकट किया है। वे लगातार सरकार के तमाम फैसलों के विरुद्ध कोर्ट में अथवा अभिव्यक्ति के विभिन्न मंचों पर जाते रहे हैं। अयोध्या श्रीराम मंदिर मसले पर भी वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ़ थे।

इसी कड़ी में प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पर आपत्तिजनक ट्वीट किए थे। उस ट्वीट के निहितार्थ थे कि सुप्रीम कोर्ट के जज भाजपा सरकार से अनुग्रहित हैं। इसका सीधा अर्थ है कि भारत का उच्चतम न्यायालय संविधान की नहीं, सरकार की चाकरी कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा घटना का संज्ञान लेने पर प्रशांत का माफी माँगने से इनकार करना और उसे सत्ता द्वारा उनकी आवाज़ दबाने के प्रयत्न की तरह प्रचारित करना, एक ऐसा दबाव था जिसके आगे सुप्रीम कोर्ट बौना हो सकता था।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में प्रशांत और उनकी तमाम कोशिशों को पटकनी दे दी है। अब प्रशांत भूषण अगर ज़ुर्माना भरते हैं तो यानी अपनी ग़लती मानते हैं, जिससे उनकी नैतिक और रणनीतिक हार होती है, क्योंकि उन्होंने सप्रीम कोर्ट की जो क्रूर और सत्तावादी चाकर की छवि बनाई थी उस पर आघात लगता है और नहीं देते हैं तो जेल और 1095 दिनों तक वकालत के क्षेत्र से प्रतिबंधित होने का दंश झेलने को बाध्य होंगे। भारत के हर दूसरे मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहने वाले एक्टिविस्ट वकील के लिए यह सज़ा फाँसी से कम नहीं है। ऐसे देखें तो प्रशांत भूषण के नहले पर सुप्रीम कोर्ट ने दहला मारा है।

एक शोषक, सत्तावादी चाकर का सारा रूपक एक रुपए के ज़ुर्माने की रकम के आगे भरभरा जाएगा। शोषण और आवाज़ दबाने के विमर्श को एक रुपया कमज़ोर कर देगा। अगर ज़ुर्माने की रकम एक, दो, दस या बीस लाख होती तो यकीनन प्रशांत को रणनीतिक बढ़त मिलती, लेकिन एक रुपए ने उनकी रणनीति को धता बताते हुए सुप्रीम कोर्ट को बढ़त दे दी है। प्रशांत के गाँधीवाद के बरअक्स सुप्रीम कोर्ट ने गाँधीवाद की बड़ी लकीर खींचकर अपने सयानेपन का सबूत दिया है।

जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षा में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने प्रशांत के गाँधीवादी घेरेबंदी का बेहतरीन तोड़ निकालकर यह साबित कर दिया कि भारत का सुप्रीम कोर्ट किसी भी किस्म के बाहरी दबाव या रणनीति को बेहतरीन ढंग से काउंटर कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट को भारत के संविधान का प्रहरी यूँ ही नहीं कहा जाता।

यह फैसला देकर जजों ने अपनी सूझबूझ का परिचय तो दिया ही है, साथ ही किसी भी लोकतंत्र में नकारात्मक प्रेशर-ग्रुप्स को भी एक शानदार मैसेज दिया है कि वे कोर्ट को कोई हलवा न समझें। दो मज़बूत पक्षों की लड़ाई में एक लोकतांत्रिक संस्था की सूझबूझ और समझदारी को देखकर भारतीय लोकतंत्र को गर्व हो सकता है।

करोलबाग में करना था धमाका, रेकी भी कर ली थी: दिल्ली में पकड़े गए ISIS आतंकी अबू युसूफ का कबूलनामा

हाल ही में दिल्ली में गिरफ्तार किए गए आईएसआईएस आतंकी मोहम्मद मुस्तकीम खान उर्फ अबू युसूफ से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल लगातार पूछताछ करने में लगी है। इसी दौरान अबू युसूफ ने दिल्ली में धमाके करने को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। 

अबू युसूफ ने कहा है कि वो दिल्ली के करोलबाग (KarolBagh) में एक बड़ा बम धमाका करने की प्लानिंग कर रहा था। इसके लिए उसने पूरे इलाके की अच्छी तरह से रेकी भी कर ली थी। उसने ये भी बताया कि वो काफी भीड़-भाड़ वाले इलाके में कुकर बम लगा कर धमाका करना चाहता था।

आतंकी अबू युसूफ ने पुलिस को यह भी बताया कि राम मंदिर भूमि भूजन के बाद आईएसआईएस देश के कई हिस्सों में बम धमाके की योजना बना रहा है। आतंकी ने बताया था कि ये धमाके भूमि पूजन के एक महीने के अंदर ही करने की योजना बनाई गई थी। भारत की खुफिया एजेंसियों ने पहले ही आतंकी हमले का अंदेशा जताया था।

गौरतलब है कि धौला कुआँ और करोल बाग के बीच रिज रोड के एक हिस्से में एनकाउंटर के बाद इस आतंकी को पकड़ा गया था। घटना के समय वह मोटरसाइकिल से जा रहा था। पुलिस ने बताया था कि उसके पास से 15 किलोग्राम विस्फोटक, दो प्रेशर-कुकर IED और एक पिस्तौल बरामद हुआ था। IED में केवल टाइमर लगाकर इसे सक्रिय करना था। आतंकी खान के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

बीते दिनों युसूफ की अम्मी कहकशाँ ने बताया था कि वो 3 साल से बम बना रहा था। उसकी अम्मी का कहना था कि वो हमेशा यूट्यूब वीडियो देखता रहता था और अपने मोबाइल फोन पर ही व्यस्त रहता था। युसूफ यूट्यूब पर भड़काऊ वीडियो देखा करता था और पिछले 3 सालों से बम बनाने के काम में जुटा हुआ था।

युसूफ की अम्मी ने बताया था कि 2010 में जब वह सऊदी से लौटा था, तभी से वो कट्ट्टरता की राह पर चल पड़ा था और ISIS के संपर्क में आने लगा था। कहकशाँ ने ये भी बताया कि उसकी इस्लामी कट्टरता के कारण पूरे गाँव ने उससे और उसके परिवार से किनारा कर रहा था। पड़ोस में रहने वाली बुजुर्ग महिला ने बताया था कि उसने कब्रिस्तान में विस्फोटक का ट्रायल भी किया था। उस समय धुएँ के गुबार से आसमान भर गया था, जिससे गाँव में दहशत का माहौल हो गया था।

देवी सीता को ‘₹#डी’ कहने वाली हीर खान का पाक के पूर्व कैप्टन इंजमाम से है रिश्ता, ​नाना थे कॉन्ग्रेस नेता

हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने वाली हीर खान उर्फ़ सना से पूछताछ जारी है। पुलिस और खुफ़िया एजेंसी द्वारा की जा रही इस पूछताछ में एक और खुलासा हुआ है। पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इंजमाम उल हक़ के पिता हीर खान के मामा हैं। इसके अलावा भी पाकिस्तान समेत कई इस्लामी देशों में उसके रिश्तेदार हैं। इनसे हीर खान लगातार संपर्क में थी। उसकी माँ आसमां हारून ने भी इसकी पुष्टि की है कि पाकिस्तान में उनके कई रिश्तेदार रहते हैं।  

आसमां हारून ने बताया कि इंजमाम उल हक़ के पिता रिश्ते में हीर खान के मामा लगते थे और इंजमाम हीर का ममेरा भाई लगता है। वहीं आसमां के पिता कॉन्ग्रेस के नेता थे। आज़ादी के पहले इंजमाम उल हक़ का परिवार भी भारत में ही रहता था। बँटवारे के बाद इंजमाम का पूरा परिवार पाकिस्तान चला गया और फिर धीरे-धीरे उनसे संपर्क कम होता गया। आसमां ने यह दावा भी किया कि कुछ समय पहले तक हीर खान इंजमाम से फोन पर बात करती थी।  

आसमां हारून ने बताया कि कुछ साल पहले जब हीर खान के पिता यानी उसके पति की मृत्यु हुई उसके बाद से लगभग सभी से संपर्क टूट गया। उसका कहना था कि वह आज तक देश से बाहर नहीं गए। इस जानकारी के बाद पुलिस और खुफ़िया एजेंसी मामले के कई पहलुओं पर काम कर रहे हैं। खासकर इस पहलू पर कि हीर का पाकिस्तान से क्या लेना-देना है।      

रविवार (30 अगस्त 2020) को प्रयागराज पुलिस ने हीर खान का मोबाइल और लैपटॉप भी फॉरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया। जिससे यह पता लगाया जा सके कि वह किन किन लोगों से इंटरनेट कॉल पर बात करती थी। उसने अभी तक कितने वीडियो बनाए और कितने नष्ट किए और किसने उसे आपत्तिजनक- भड़काऊ वीडियो भेजे थे।  

28 साल की दसवीं फेल हीर खान फ़िलहाल 5 दिन की पुलिस रिमांड पर है। पुलिस ने अभी तक सिर्फ उन वीडियो के संबंध में जाँच और पूछताछ की है जो वह बना चुकी है। अभी इस मुद्दे पर उससे पूछताछ जारी है कि इस काम में कौन-कौन उसकी मदद करता था। साथ ही पूछताछ में उसने जितने लोगों का ज़िक्र किया उनके बारे में पता लगाया जा रहा है।  

हीर खान को प्रयागराज पुलिस ने 25 अगस्त को गिरफ्तार किया था। हीर खान को उसके यूट्यूब चैनल पर हिंदू विरोधी वीडियो पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। 28 वर्षीय यूट्यूबर (YouTuber) पर धारा 153A/505 IPC और 66 IT कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इसके अलावा हीर खान पर राष्ट्रदोह का मामला भी दर्ज किया गया था। फ़िलहाल उससे पूछताछ के दौरान कई हैरान कर देने वाली बातें सामने आ चुकी है। वह पाकिस्तान के दो युवकों से व्हाट्सएप पर बातचीत करती थी। इसके अलावा उसने बताया था कि आतंकवादी मसूद अज़हर का वीडियो देख कर उसने भी नफ़रत फैलाना शुरू किया था। दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ हीर खान सऊदी अरब, हैदराबाद, दिल्ली, कानपुर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र और लखनऊ के एक मौलाना के भी संपर्क में थी। 

आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) और खुफ़िया एजेंसी के लोगों ने हीर को जेल भेजने के पहले उससे लंबी पूछताछ की थी। यूट्यूब चैनल ‘ब्लैक डे 5 अगस्त’ पर हीर खान ने ऐसा वीडियो साझा किया था, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं को जम कर गालियाँ बकी गई थी। यूट्यूबर हीर खान ने इस वीडियो में माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ शब्द का प्रयोग किया है और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ करार दिया। आईपीएस अधिकारी संदीप मित्तल ने यूपी पुलिस और सीएम योगी आदित्यनाथ को टैग कर नियमानुसार कार्रवाई की अपील की थी। 

हीर खान इस वीडियो में हिन्दुओं को ‘काफिर’ बताते हुए कहती है, “सीता ₹#डी थी, सीता %$ड़ मरवाती थी, सीता चु$% मरवाती थी, झाँ## के बाल नोच लेंगे। अयोध्या तो एक ₹#डीखाना है। सीता को न जाने कितने मुल्लों ने चो$# था। सीता इतना बुरा #$वाती थी कि रावण तक भी हार जाता था। रावण कहता था कि मेरे ल$₹ में दर्द हो रहा है, तेरे %$त में कितना अंदर डालूँ। सीता की माँ का भों$₹₹, श्रीराम की माँ की $%त।” उक्त महिला यहीं नहीं रुकी बल्कि उसने और भी आगे बढ़ कर भगवान राम और माँ सीता के लिए अपशब्दों की बौछार लगा दी थी।

₹1 जुर्माना भरने को प्रशांत भूषण तैयार, कहा- सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करने के मकसद से नहीं किया था ट्वीट

प्रशांत भूषण ने न्यायालय की अवमानना मामले में मिली 1 रुपए जुर्माने की सजा को स्वीकार किया है। प्रशांत भूषण ने कहा है कि वो यह जुर्माना भरेंगे और इसके ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका भी दायर करेंगे। एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस चीज़ के लिए उन्हें दोषी ठहराया है वो हर नागरिक के लिए सबसे बड़ा कर्तव्य है।

अपने बयान में प्रशांत भूषण ने कहा है कि उनके ट्वीट्स का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं था, वे सुप्रीम कोर्ट के अपने शानदार रिकॉर्ड से भटकने को लेकर नाराजगी की वजह से किए गए थे। भूषण ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के द्वारा लगाए गए जुर्माने की रिव्यू पिटिशन फाइल करने का मुझे अधिकार है। कोर्ट ने मुझ पर जो जुर्माना लगाया है, उसका मैं एक नागरिक को तौर पर कर्तव्य निभाते हुए भुगतान करूँगा।”

भूषण ने अपने बयान में कहा कि मेरे मन में सुप्रीम कोर्ट के प्रति काफी सम्मान है और मैंने हमेशा माना है कि सुप्रीम कोर्ट कमजोर और दबे लोगों के लिए आशा की आखिरी किरण है। भूषण ने नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में अपना बयान से पढ़ते हुए अपने वकील राजीव धवन और दुष्यंत दवे का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि ‘इस देश में लोकतंत्र मज़बूत होगा, सुप्रीम कोर्ट मज़बूत होगा, सत्यमेव जयते।’

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को अवमानना मामले में दोषी ठहराने के बाद एक रुपए का जुर्माना लगाया है। फ़ैसले के बाद प्रशांत भूषण ने ट्वीट करके बताया कि उनके वकील राजीव धवन ने उन्हें जुर्माने की राशि के लिए एक रुपया दिया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

प्रशांत भूषण के इस जुर्माने को भरने के लिए तैयार होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें याद दिलाया कि वह कुछ ही दिन पहले उसूलों और आदर्शों का हवाला देते हुए माफ़ी माँगने से इनकार कर रहे थे, जबकि अब वो बेशर्मी से इस काम के लिए तैयार हो गए हैं।