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‘च#रों की गवाही वापस लो, वरना जान से मार देंगे’ – मेवात में दलित परिवार का साथ देने पर अलीम और उसके गुंडों ने किया हमला

मेवात के नगीना थाने के उलेटा गाँव में गत 21 अप्रैल को गाँव की बहुसंख्यक आबादी के कुछ युवकों ने एक दलित परिवार को अपनी दबंगई का निशाना बनाया। एक मामूली सी बात पर 24 साल के राहुल पर धारदार फरसे से हमला किया गया और उसके परिवार को जातिसूचक शब्द बोलकर धमकाया गया कि यदि गाँव में रहना है तो जूती के नीचे रहना होगा। 

लगातार दो दशकों से ऐसे अत्याचार सहने के बाद दलित परिवार ने पुलिस में मुकदमा दायर करने की ठानी और इंसाफ की गुहार लगाने लगे। प्रशासन की ढिलाई कहिए या बहुसंख्यक आबादी का दबाव, लेकिन घटना के 4 महीने बीत जाने के बाद भी राहुल का परिवार आरोपितों की गिरफ्तारी की आस लगाए बैठा है।

अब इस मामले में गिरफ्तारी कब होगी, ये बाद में पता चलेगा। मगर, उससे पहले खबर यह है कि राहुल के मामले में जो ग्रामीण गवाही देने को आगे आए थे, उनके साथ मारपीट हुई है।

मेवात, उलेटा जगदेव, राहुल और जसवंत
राहुल और उसके परिजन (पीड़ित परिवार)

राहुल के चाचा जसवंत ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इस घटना की जानकारी दी। वह बताते हैं कि उनके गवाह साबिर के साथ 19 अगस्त को मारपीट हुई है। इसके अलावा, गवाह के बड़े भाई को भी पीटा गया है। जसवंत बताते हैं कि यह हमला रात के अंधेरे में करीब 8 बजे हुआ। 

राहुल के चाचा बताते हैं कि साबिर के भाई सलीम पर भी बड़े सुनियोजित ढंग से हमला बोला गया। जब वह हमले की शिकायत थाने में कराने जा रहे थे, तो एक आदमी उनके पीछे लग गया और उसने नगीना में बैठे लोगों को सलीम के आने की जानकारी दे दी। इसके बाद उनकी बाइक को एक पिक-अप गाड़ी से टक्कर मारी गई, फिर उन पर लाठी बरसानी शुरू कर दी। इसके बाद आसपास के दुकान वालों व उनके ही गाँव के कुछ लोगों ने उनकी जान बचाई।

बता दें, इस हमले के संबंध में राहुल के मामले में गवाह साबिर और उनके बड़े भाई ने नगीना थाने में अपनी दरख्वास्त दी है। इसकी कॉपी इसी रिपोर्ट में संलग्न की गई है।

साबिर की दरख्वास्त

साबिर अपनी दरख्वास्त में घटना के मद्देनजर लिखते हैं कि 19 अगस्त को रात 8 बजे वह अपने परिवार के साथ घर पर थे। तभी अचानक 8-10 लोगों ने उनके घर पर लाठी-डंडों के साथ हमला बोल दिया। साथ ही उन्होंने कहा, “तुझे मजा चखाते हैं, तू हमारे ख़िलाफ गवाही देगा!” 

परिवार के साथ मारपीट होती है। उनके घर में लूटपाट होती है। सामानों को तोड़ा-फोड़ा जाता है। इसी बीच मज्जलिश नाम का एक युवक धारदार फरसे से साबिर की भाभी राहिसन के सिर पर मार देता है। जबकि, अलीम व अन्य आरोपित लाठी व सरिया से घर वालों को मारते हैं।

इस दौरान शोरगुल सुनकर उनके पड़ोसी भी वहाँ आ जाते हैं और उन्हें बचा लेते हैं। लेकिन तब तक साबिर की भाभी गंभीर रूप से घायल हो चुकी थीं। दरख्वास्त में बताया गया है कि हमले में घायल राहिसन को बहुत गहरी चोट आई। इसलिए उन्हें माँडीखेड़ा अस्पताल ले जाया गया। जहाँ से उन्हें नल्हड मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। 

इस दरख्वास्त में साबिर ने दलित परिवार का जिक्र करके हमले की वजह भी स्पष्ट बताई है। उनका कहना है कि चूँकि वह गाँव के दलित परिवार के गवाह हैं, इस लिए उन पर हमला हुआ। वहीं साबिर के भाई सलीम ने अपनी दरख्वास्त में बताया कि यह लोग घर में आकर साबिर से केस वापस लेने की बात कह रहे थे।

सलीम के मुताबिक हमलावरों ने अचानक हमला करते हुए कहा, “तुम च#रों (जातिसूचक शब्द/गाली) की गवाही वापस ले लो, नहीं तो तुम्हें जान से मार देंगे।”

उन्होंने भी वही घटना अपनी दरख्वास्त में लिखी, जिसका जिक्र जसवंत करते हैं। सलीम लिखते हैं कि 19 अगस्त की घटना के बाद जब वह नगीना जा रहे थे, तो उन पर जान से मारने की नीयत से हमला हुआ। एक पिक-अप ने उन्हें टक्कर मारी और फिर कुछ लोगों ने लाठी बरसानी शुरू कर दी।

इसके बाद, उनकी जेब से 1200 निकाले गए जिनमें 400 रुपए छीना झपटी में फट गए और मोबाइल भी टूट गया। खुद को फँसा देख उन्होंने मदद के लिए शोर मचाया जिसके बाद उनके गाँव के ही कुछ अन्य युवकों ने उन्हें आकर बचाया। इन दरख्वास्तों में अलीम, मकसूद, आरिफ, तारिफ, वारिस, सद्दाम के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की माँग की गई है।

सलीम की दरख्वास्त

दलित परिवार का साथ देने पर पहले भी लोगों को बनाया गया निशाना

ऐसी घटना पहली बार नहीं हुई है कि दलित परिवार का समर्थन करने पर गाँव की बहुसंख्यक संप्रदाय विशेष की आबादी ने अपने समुदाय के लोगों से मारपीट की हो या उन्हें प्रताड़ित किया हो। इससे पहले भी दलित परिवार के बेहद करीबी हकीमुद्दीन के परिवार पर हमला बोल दिया गया था। साथ ही, उनके भाई के घर में जाकर काफी तोड़फोड़ मचाई गई थी। 29 जून को करीब 6 बजे यह घटना हुई थी। मगर, पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत कुछ दिन बाद दायर करवाई थी।

शिकायत के मुताबिक, हकीमुद्दीन के भाई मोहम्मद उमर से कहा गया, “तू अगर राहुल वगैरह के साथ कार्रवाई करने गया तो तुझे इस बात का मजा चखाएँगे।” जिस पर उन्होंने कहा कि वे लोग गरीब आदमी हैं, इसलिए वह उनका साथ देंगे।

बस इतना सुनते ही उन पर लात-घूँसों से हमला कर दिया गया। किसी तरह वह वहाँ से अपनी जान छुड़ाकर अपने भाई शौकत के घर में घुस गए। मगर मजलिस, मकसूद, आरिफ, सद्दाम, फारूख, लियाकत, मोमिन जुहरू, सानिर व अन्य हथियारों से लैस वहाँ भी आ गए व घर के पुरुषों के साथ-साथ घर की महिलाओं पर भी हमला बोल दिया। 

मोहम्मद उमर की एफआईआर

इस दौरान यहूदा और कलसुम ने आमिर की पत्नी शबनम की चोटी पकड़ कर उसे मारा, वहीं 5 माह की गर्भवती घर की दूसरी बहू समीना को भी जमीन पर गिराया गया, जिसके बाद उसके पेट में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। घर के पुरुषों को भी बड़ी बेहरमी से पीटा गया। बर्तनों को तोड़ दिया गया। घर में डीजल का ड्रम गिरा दिया गया तथा वॉशिंग मशीन और चारा कूटने वाली मशीन को भी तोड़ दिया गया। 

आरोपित पक्ष में शामिल महिलाओं (मरियम, आसूबी, आमीना, कलसुम) ने घर में खूब पत्थर बरसाए। इस बीच मोहम्मद को और उनके भाई को कमरे में बंद कर दिया गया। हालाँकि, शोर मचने के बाद पड़ोसियों ने इकट्ठा होकर उन लोगों की जान बचाई और हमलावरों को भागने पर मजबूर किया। लेकिन इन उपद्रवियों ने जाते-जाते धमकी दी, “आज इन लोगों ने बचा लिया, मौका मिलने पर तुझे जान से मार देंगे।”

मोहम्मद उमर पर हमला करने के दौरान घर में हुई तोड़फोड़

दलित परिवार का साथ देने पर नहीं पढ़ने दी गई मस्जिद में नमाज

दलित परिवार के पड़ोसी हकीमुद्दीन ऑपइंडिया को बताते हैं कि इन लोगों की दबंगई गाँव में इतनी ज्यादा है कि उन्हें इस रमजान में घर के एकदम पास मस्जिद में नमाज तक पढ़ने को नहीं दी गई। वे कहते हैं कि जब उन्होंने मस्जिद में जाने की कोशिश की तो उन्हें कहा गया कि उनका उस पर कोई अधिकार नहीं है।

वहीं मोहम्मद उमर बताते हैं कि आरोपित पक्ष इतने दिन बीतने के बाद भी उन्हें आते-जाते धमकी देते हैं। वह कहते हैं कि एक उनका घर गाँव के बीच में पड़ता है। इसके कारण उन्हें दरवाजा बंद ही करके रखना पड़ता है। दूसरा पक्ष उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ देता है।

उमर के अनुसार, उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बल्कि दूसरे दबंग पक्ष ने उनके ऊपर झूठा इल्जाम डाल दिया। उनकी मानें तो गाँव के सरपंच अलीम ने पूरे गाँव में आतंक मचा रखा है। हर जगह पैसे देकर काम कराता है।

इससे पहले याद दिला दें कि सरपंच अलीम को लेकर जॉब कार्ड के फर्जीवाड़े का मामला भी उजागर हुआ था। कई ग्रामीणों ने इस पर शिकायत दर्ज करवाई थी। जिस पर ऑपइंडिया ने एक विस्तृत रिपोर्ट की थी।

उलेटा में अलीम ने की धोखाधड़ी
सरपंच अलीम के हाथों फर्जीवाड़े का शिकार हुए ग्रामीण

पुलिस ने कहा – ‘जल्द होंगे आरोपित अरेस्ट’

मेवात के इस गाँव में दलित परिवार पर और उनका साथ देने वाले लोगों के ख़िलाफ़ बहुसंख्यक आबादी के दबंगों पर पुलिस कार्रवाई की जानकारी लेने के लिए ऑपइंडिया ने नगीना थाने में संपर्क किया। जहाँ पुलिस ने साबिर और सलीम के मामले पर अनभिज्ञता जताई। वहीं, राहुल केस में उन्होंने बताया कि इस केस में एफआईआर दर्ज हुई थी। लेकिन बाद में हरिजन एक्ट हट गया। 

इसके बाद कुछ आरोपितों को लड़ाई-झगड़े की धारा में गिरफ्तार किया गया। मगर बाद में इसकी जाँच डीएसपी पुन्हाना को सौंपी गई। डीएसपी पुन्हाना ने इस मामले में दोबारा हरिजन एक्ट लगा दिया है।

नगीना थाने में एसएचओ रमेश चंद्र के मुताबिक, अब उन्होंने इस संबंध में आरोपितों को दोबारा अरेस्ट करने के लिए अनुमति माँगी है। मामला कोर्ट में है। 7 सितंबर को सुनवाई होगी। जैसे ही फैसला आता है, फौरन इस मामले पर आरोपित अरेस्ट किए जाएँगे।

‘मैंने नरेंद्र मोदी का अकाउंट हैक कर लिया है, COVID के लिए इसमें पैसे डालो’ – रात 3:09 से 3:16 के बीच 4 ट्वीट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट (www.narendramodi.in) का टि्वटर अकाउंट रात में हैक हो गया था। जॉन विक (John Wick) नाम के हैकर ने अकाउंट हैक करने के बाद कोविड-19 रिलीफ फंड के लिए बिटक्वॉइन में डोनेशन की माँग की।

हैक करने के बाद सबसे पहला ट्वीट
हैकर जॉन विक का दूसरा ट्वीट

2-3 सितंबर की रात में 3 बजकर 9 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट का टि्वटर अकाउंट हैक रहा। इस दौरान हैकर ने कुल चार ट्वीट किए। इनमें से तीन ट्वीट कोविड-19 रिलीफ फंड के लिए पैसे की माँग को लेकर थी।

रात के 3:14 पर तीसरा ट्वीट

जॉन विक (John Wick) नाम के हैकर ने हालाँकि चालाकी बहुत दिखाई लेकिन बिटक्वॉइन में डोनेशन की माँग कर वह मूर्खता कर बैठा। आपको बता दें कि भारत में बिटक्वॉइन की कानूनन मान्यता नहीं है। इसलिए संवैधानिक पद (प्रधानमंत्री) की ओर से इस मुद्रा में कोविड-19 रिलीफ फंड के लिए पैसे माँगने पर लोग चौंके और सोशल मीडिया पर उसी तरह के रिएक्शन भी देखने को मिले।

‘हाँ, मैंने यह अकाउंट हैक कर लिया है’

रात के 3 बजकर 16 मिनट पर हैकर जॉन विक ने यह बताया कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट का ट्विटर अकाउंट हैक कर लिया है। हालाँकि इसके तुरंत बाद PM मोदी के इस पर्सनल ट्विटर अकाउंट को रिस्टोर किया गया और हैकर द्वारा किए गए सभी ट्वीट्स डिलीट कर दिए गए।

सब कुछ ठीक होने के बाद PM मोदी के पर्सनल वेबसाइट का ट्विटर हैंडल पहले के जैसा

हैकर जॉन विक ग्रुप

पेटीएम मॉल की डेटा चोरी में भी इसी हैकर ग्रुप जॉन विक का नाम आया था। साइबर सिक्योरिटी फर्म साइबल ने तब इस बात का दावा किया था। लेकिन PM मोदी के पर्सनल ट्विटर अकाउंट को हैक करने वाले ने अपने आखिरी ट्वीट में इस बात से इनकार किया है।

ट्विटर और हैकिंग

15 जुलाई को हाई-प्रोफाइल बिजनस लीडर और राजनेताओं के पर्सनल या उनसे संबंधित ट्विटर अकाउंट हैक किए गए थे। ट्विटर के 14 साल के इतिहास में इसे सबसे बड़ा हैकिंग माना गया। इसके बाद ट्विटर ने एक बयान जारी कर कहा था:

“ऐसा कुछ आम हैकरों और इंजिनियरों (social engineering attack) द्वारा एक साथ मिल कर किए गए हैकिंग के कारण हुआ। कुछ लोगों (हैकरों) ने संभवतः हमारे कुछ कर्मचारियों और हमारी आंतरिक प्रणालियों तक अपनी पहुँच बनाने में सफलता पाई। कंपनी (ट्विटर) की आंतरिक प्रणालियों से समझौता हुआ है। इस हैकिंग में ट्विटर यूजर की गलती नहीं है।”

CPM नेता के बेटे के बेंगलुरु ड्रग कार्टेल से जुड़े होने का भंडाफोड़: मास्टरमाइंड मोहम्मद अनूप को दी थी आर्थिक मदद

दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में ड्रग माफिया पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की नकेल कस रही है। बताया जा रहा है कि इसका नेटवर्क काफी बड़ा है। मिरर नाउ ने बेंगलुरु में एक ड्रग रैकेट के मास्टरमाइंड मोहम्मद अनूप की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो जाँच रिपोर्ट को एक्सेस किया है। बता दें कि मोहम्मद अनूप को पिछले हफ्ते एनसीबी ने गिरफ्तार किया था। 

अपने बयान में, मोहम्मद अनूप कहता है कि वह 2013 से बेंगलुरु में ड्रग सौदों में शामिल है। वह विदेशी नागरिकों से MDMA की गोलियाँ लेता था और उसे शहर की रेव पार्टी में कॉलेज के छात्रों को इसकी आपूर्ति कराता था।

मोहम्मद अनूप ने अपने बयान में केरल सीपीएम नेता और अभिनेता कोडिएरी बालाकृष्णन के बेटे बिनेश कोडिएरी का भी जिक्र किया। उसने बताया कि बिनेश ने उसे 2015 में रेस्टॉरेंट शुरू करने के लिए बेंगलुरु के कम्मनहल्ली में लीज पर प्रॉपर्टी लेने के लिए पैसे दिए थे।

जब टाइम्स नाउ ने कथित ‘ड्रग कार्टेल-नेता लिंक’ पर कोडिएरी बालाकृष्णन के बेटे बिनेश कोडियरी से बात की। तो उन्होंने कहा, “यह मेरे खिलाफ एक और आरोप है।”

हालाँकि, बिनेश कोडियरी ने भी 2012 से मोहम्मद अनूप के बहुत अच्छे दोस्त होने की बात स्वीकार की है, उन्होंने अनूप के ड्रग लिंक के बारे में कोई भी जानकारी होने से इनकार किया है। बिनेश कोडिएरी ने कहा, “2015 के बाद, उसने एक रेस्टॉरेंट बिजनेस शुरू किया और मुझसे पैसे उधार लिए। उसने न सिर्फ मुझसे बल्कि कई अन्य लोगों से भी उधार लिया। यह बहुत चौंकाने वाला है कि वह इस तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल था। उसका परिवार भी हैरान है।”

फरवरी 2020 में अनूप और उसके दो सहयोगियों ने बेंगलुरु में होटल और अपार्टमेंट का एक नया व्यवसाय शुरू किया, लेकिन यह COVID-19 महामारी के कारण घाटे में चला गया। एनसीबी को दिए अपने बयान में, अनूप ने उल्लेख किया कि उसने पैसे कमाने के लिए फिर से ड्रग्स बेचने के लिए अपनी किस्मत आजमाई और रिजीश के संपर्क में रहा। 

बता दें कि एनसीबी द्वारा पिछले सप्ताह गिरफ्तार किए गए रिजिश की अनूप से गोवा में एक संगीत कार्यक्रम में मुलाकात हुई थी। हाल ही में एक बार फिर से दोनों कॉलेज के छात्रों को ड्रग्स बेचने के लिए साथ में आए थे, लेकिन एनसीबी ने इसका भंडाफोड़ किया।

गौरतलब है कि 21 अगस्त को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अधिकारियों ने तीन स्थानों पर मुताबिक और तीन ड्रग डीलरों को गिरफ्तार किया। एनसीबी ने बेंगलुरु के कल्याण नगर में एक ड्रग पैडलर के आवास पर छापा मारा और 60 ग्राम वजन में 145 एमडीएमए की गोलियाँ और 2,25,000 कैश जब्त किए।

एक अन्य छापे में बेंगलुरु के निकू होम्स में एमडीएमए की 96 गोलियाँ और 180 एलएसडी ब्लोट्स जब्त किया गया। इसके बाद एमडीएमए की 270 गोलियाँ डोड्डागुब्बी स्थित अनिका के घर से बरामद की गई।

एनसीबी के उप निदेशक केपीएस मल्होत्रा ​​ने बताया था कि ड्रग रैकेट ने न केवल कर्नाटक में प्रमुख संगीतकारों और अभिनेताओं को, बल्कि राज्य में वीआईपी के बच्चों को भी ड्रग्स सप्लाई किया है। एनसीबी अधिकारियों के अनुसार, जब्त किए गए ड्रग्स पश्चिमी यूरोप, विशेष रूप से बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स से लाए गए है। कथित तौर पर ब्रसेल्स से ड्रग्स की सप्लाई बच्चों के खिलौनों के खेप में छुपा कर की जाती है।

विकिपीडिया ने आयुर्वेद को बताया अवैज्ञानिक, आक्रोशित छात्रों ने चलाया ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान

विकिपीडिया (Wikipedia) दक्षिणपंथी विचारधारा के प्रति अपने पूर्वग्रहों के लिए कुख्यात है। इस बार विकिपीडिया ने नया शिकार आयुर्वेदिक (Ayurveda) चिकित्सा पद्धति को बनाया है लेकिन आयुर्वेद के छात्रों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है। दरअसल, विकिपीडिया पर आयुर्वेद को ‘अवैज्ञानिक’ (Pseudoscientific) बताया गया है, जिसे लेकर आयुर्वेद के छात्रों में खासा रोष है।

विकिपीडिया पर आयुर्वेद की व्याख्या

उत्तर प्रदेश की वाराणसी के आयुर्वेद चिकित्सा से जुड़े छात्रों ने विकिपीडिया के इस कारनामे के विरोध में ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। आयुर्वेद के छात्रों का कहना है कि आयुर्वेद भारत की चिक्तिसा पद्धति और सांस्कृतिक पहचान का एक बड़ा और महत्वपूर्ण अंग है। लेकिन विकिपीडिया पर आयुर्वेद की जो व्याख्या की गई है वह गलत, आपत्तिजनक और भ्रामक है।

विरोध कर रहे इन छात्रों का कहना है कि विकिपीडिया पर आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को अवैज्ञानिक बताने के साथ ही कई अन्य आपत्तिजनक बातें भी लिखी गई हैं। जबकि कोरोना महामारी से निपटने में भी लोगों के द्वारा आयुर्वेद का इस्तेमाल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर किया गया है।

इस विवाद पर IMS, BHU में ही आयुर्वेद संकाय के डीन प्रोफ़ेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा कि आयुर्वेद के छात्रों को आयुर्वेद को लेकर लोगों के दृष्टिकोण में परिवर्तन के लिए प्रदर्शन के साथ-साथ इस पर शोध को बढ़ावा देने के लिए भी प्रयास करना चाहिए।

प्रोफ़ेसर त्रिपाठी ने कहा कि भारत की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति को बदनाम करना गलत है लेकिन वास्तविकता यह है कि इस प्रकार की भ्रांतियाँ तब तक लोगों के बीच लोकप्रिय रहेंगी जब तक गंभीरता से आयुर्वेद के उत्थान के लिए प्रयास नहीं किए जाते। प्रोफ़ेसर त्रिपाठी इस विषय पर पहले भी ऑपइंडिया से बात कर चुके हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल विकिपीडिया की इस टिप्पणी के विरोध में देशभर के स्टूडेंट्स एकजुट हुए हैं और ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान में महज 3 दिन में ही 7,000 से ज्यादा लोग अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं।

नवंबर से राज्य के सभी सरकारी मदरसे बंद होंगे, सरकार केवल धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देगी: हिमांत विश्व शर्मा

असम के शिक्षा मंत्री हिमांत विश्व शर्मा ने ग्रीष्मकालीन विधानसभा सत्र के दूसरे दिन शिक्षा विभाग पर बोलने के दौरान मदरसों के प्रान्तीयकरण के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सरकार के मदरसे नवंबर से बंद हो रहे हैं, इसलिए नए मदरसों के प्रांतीयकरण करने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि अब से असम सरकार केवल धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देगी।

सरकार धार्मिक तर्ज पर चलने वाले किसी भी शैक्षणिक संस्थानों को संरक्षण नहीं देगी। शिक्षा मंत्री डॉ हिमांत विश्व शर्मा ने प्रदेश के सभी मदरसे और संस्कृत टोल (संस्कृत विद्यालय) को आगामी नवम्बर माह से बंद किया जा रहा है। साथ ही कहा कि अब और अरबी शिक्षकों की नियुक्ति की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि निजी मदरसा पूर्व की तरह चल सकते हैं। सरकार निजी मदरसा में किसी भी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार धर्मनिरपेक्ष शिक्षा प्रदान करेगी क्योंकि, हम सदैव सेकुलर शिक्षा देने के पक्षधर हैं।

मंत्री ने पहले घोषणा की थी कि मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया जाएगा और संस्थानों के शिक्षाविदों को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को सौंप दिया जाएगा। संस्कृत के बारे में बात करते हुए शर्मा ने कहा कि संस्कृत सभी आधुनिक भाषाओं की जननी है। असम सरकार ने सभी संस्कृत टोल्स को कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत और प्राचीन अध्ययन विश्वविद्यालय (नलबाड़ी में) के तहत लाने का फैसला किया है। वे एक नए रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा, “इस वैकल्पिक उपाय पर एक अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी।” 

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार राज्य में 150 नए हाई स्कूल स्थापित कर रही है। इसका निर्माण 2 अक्टूबर 2020 से शुरू होगा। इन स्कूलों में अप्रैल 2021 से कक्षाएँ शुरू होंगी। राज्य में पंद्रह सरकारी कॉलेज स्थापित किए जाएँगे, जिसमें नौ कॉलेज लड़कियों के लिए हैं। मंत्री ने कहा कि असम के विशाल चाय सम्पदा में काम करने वाले लोगों की मदद करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

फरवरी 2020 में, एक महत्वपूर्ण निर्णय में, असम सरकार ने घोषणा की थी कि सरकार सभी राज्य संचालित मदरसों और संस्कृत टोल्स को बंद कर रही है। शर्मा ने उस समय कहा था कि धार्मिक उद्देश्यों के लिए धार्मिक शास्त्र, अरबी और अन्य भाषाओं को पढ़ाना सरकार का काम नहीं है। मंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि राज्य सरकार के अधीन सभी धार्मिक स्कूल बंद रहेंगे। मस्जिदों द्वारा संचालित मदरसा और गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित संस्कृत स्कूलों पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

‘दी वायर’ ने लगाया SC के आदेश के बावजूद श्रमिकों से किराया वसूलने का आरोप: रेलवे ने फैक्ट चेक कर बताया फर्जी खबर

प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘दी वायर’ को उत्तर रेलवे ने श्रमिकों से किराया लेने की फर्जी खबर प्रकशित करने के लिए फटकार लगाईं है और उन्हें वास्तविकता का ज्ञान कराया है। दी वायर ने बुधवार (सितम्बर 02, 2020) को एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसका शीर्षक था, “सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए रेलवे ने श्रमिकों से वसूला करोड़ों रुपए किराया।”

इस रिपोर्ट में ‘दी वायर’ ने दावा किया है कि ‘सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को दिए एक आदेश में कहा था कि ट्रेन या बस से यात्रा करने वाले किसी भी प्रवासी मज़दूर से किराया नहीं लिया जाएगा। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार शीर्ष अदालत के निर्देशों के बावजूद रेलवे द्वारा श्रमिक ट्रेनों के यात्रियों से किराया लिया गया है।’

‘दी वायर’ की इस ख़बर के मुताबिक, सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून, 2005 के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि भारतीय रेल के उत्तर मध्य ज़ोन के प्रयागराज डिवीजन ने जून महीने में श्रमिक ट्रेनों में यात्रा करने वाले 46,650 यात्रियों से करीब 2.12 करोड़ रुपए का किराया वसूला है।

लेकिन उत्तर मध्य रेलवे ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ‘दी वायर’ की इस रिपोर्ट को फर्जी और तथ्यों से अलग बताते हुए फेक खबर प्रकाशित करने से बचने की सलाह दी है।

उत्तर मध्य रेलवे ने अपने पत्र में लिखा है कि दी वायर की इस रिपोर्ट में किए गए दावे झूठे हैं और श्रमिक स्पेशल गाड़ियों में यात्रा के लिए किसी भी श्रमिक से किसी भी तरह का किराया नहीं वसूला गया है।

रेलवे के बयान के अनुसार, “श्रमिक विशेष गाड़ियों की सेवा एक अत्यधिक सब्सिडी युक्त सेवा थी। जिसमें लगभग 85% भाड़े का वहन रेलवे द्वारा स्वयं किया गया था एवं इसकी शेष राशि का भुगतान सम्बन्धित राज्य सरकारों द्वारा रेल प्रशासन को किया गया था। इन भुगतानों में श्रमिकों के परिवहन हेतु प्रयागराज मंडल सम्बन्धित सेवाओं के लिए उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मई माह में 4,79,07,695 और जून माह में 2,11,71,600 भुगतान किया गया और उत्तर मध्य रेलवे द्वारा किसी भी श्रमिक से कोई भी किराया नहीं लिया गया।”

दी वायर द्वारा श्रमिकों को दिए गए खाद्य पदार्थ के सम्बन्ध में स्पष्ट करते हुए इस बयान में आगे लिखा है, “भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम द्वारा निशुल्क रूप से भोजन उपलब्ध कराया गया था। जिसके अंतर्गत 22.04 लाख से अधिक भोजन एवं फ़ूड पैकेट प्रदान किए गए हैं।”

रेलवे ने दी वायर से कहा है कि विभाग का यह स्पष्टीकरण उन्हें अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करना चाहिए ताकि पाठकों के बीच भ्रामक और गलत धारणा का निवारण किया जा सके। रेलवे ने अनुरोध किया है कि भविष्य में समाचार प्रकाशित करने से पहले विभाग के अधिकारियों के बयान को भी अपने लेख में शामिल किया जाना चाहिए।

गुजरात: प्रॉपर्टी बेचने के लिए फिरोज़ ने छिपाया मजहब, डिस्टर्ब्ड एरिया ऐक्ट के तहत मामला दर्ज

गुजरात के वडोदरा के वासना रोड में अपना धर्म छिपाकर प्रॉपर्टी बेचने के आरोप में फिरोज़ नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ डिस्टर्ब्ड एरिया ऐक्ट (Disturbed Areas Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है। कॉन्ट्रैक्टर फिरोज़ ने अपना धर्म छिपा कर समर्पण सोसाइटी में प्लॉट को फिरोज पटेल, उनकी माँ हनीफा और भाई सबीर पटेल को बेच दिया।

बता दें कि गुजरात में डिस्टर्ब्ड एरिया ऐक्ट के अनुसार अचल संपत्तियों को बिना जिला प्रशासन की अनुमति के दूसरे धर्म के व्यक्ति को बेचा नहीं जा सकता है। यह कानून संबंधित ऐक्ट के तहत आने वाले इलाकों में लागू होता है।

वडोदरा के जेपी रोड पुलिस स्टेशन में रविवार को दर्ज हुई शिकायत के अनुसार आरोपित फिरोज कॉन्ट्रैक्टर ने अपना धर्म छिपाकर और फर्जी दस्तावेज के सहारे संपत्ति बेच दी।

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हाल ही में हुआ, जब फिरोज पटेल प्रॉपर्टी पर निर्माण कराने लगे। तब जाकर पता चला कि कॉन्ट्रैक्टर ने संपत्ति बेच दी है। इस बात की शिकायत उसी सोसाइटी के प्रेसिडेंट मनीष मल्होत्रा ने पुलिस कमिश्नर से की और केस दर्ज करवाया।

मनीष के अनुसार कॉन्ट्रैक्टर असल में पारसी हैं। फिरोज को प्लॉट बेचने के लिए जिला प्रशासन की अनुमति लेते वक्त उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया था। शिकायत के अनुसार धर्म छिपाकर कॉन्ट्रैक्टर ने यह जताना चाहा कि वे और फिरोज पटेल एक ही धर्म के हैं।

इतना ही नहीं कॉन्ट्रैक्टर पर गलत पता दर्ज कराने का भी आरोप है।उन्होंने अपना पता टंडलजा के तौर पर दर्ज किया जहाँ वो रहता ही नहीं है। उस सोसाइटी में रहने वाले लोगों ने आरोप लगाया कि कॉन्ट्रेक्टर इससे पहले पिछले मालिक दशरथलाल पांचाल से पहले प्लाट खरीद चुका है। कॉन्ट्रैक्टर और पटेल के बीच पिछले साल जून में बिक्री हुई थी। मल्होत्रा ​​ने आरोप लगाया कि कॉन्ट्रैक्टर ने किसी को भी इस डील के बारे में पता नहीं चलने दिया।

सुशांत मामले में NCB ने अब्दुल बासित और जैद विलात्रा को किया गिरफ्तार, रिया के भाई के कहने पर करवाते थे ड्रग्स मुहैया

सुशांत की मौत के मामले में ड्रग्स एंगल की जाँच कर रही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। एनसीबी ने अब्दुल बासित परिहार को मुंबई के बांद्रा इलाके से गिरफ्तार किया है। उसका कनेक्शन सुशांत के साथ काम करने वाले सैमुअल मिरांडा से है। वहीं इस केस से जुड़े जैद विलात्रा को भी गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों पर ड्रग सप्लाई करने का आरोप है।

सुशांत केस में रिया के ड्रग चैट वायरल होने के बाद नारकोटिक्स ब्यूरो इस मामले में जाँच कर रहा है। मिरांडा पर आरोप है कि वह रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक के कहने पर ड्रग्स मुहैया कराते थे। इससे पहले रिपोर्ट थी कि एनसीबी ने जिस सस्पेक्ट ड्रग पेडलर को पकड़ा है, उसने शौविक का नाम भी लिया था। वहीं अब एनसीबी इस मामले में मिरांडा और शौविक से पूछताछ कर सकती है।

वहीं गिरफ्तारी के बाद NCB को जैद और सैमुएल मिरांडा के बीच हुई चैट्स हाथ लगी हैं। इस चैट के जरिए जैद का अब्दुल बासित परिहार और सूर्यदीप मल्होत्रा नाम के दो लोगों का कनेक्शन सामने आया है। गिरफ्तार हुए दोनों आरोपितों का शोविक चक्रवर्ती के साथ लिंक सामने आया है। वहीं शोविक के अब्दुल बासित परिहार और सूर्यदीप मल्होत्रा से ड्रग्स से जुड़े चैट्स लीक होने की बात भी सामने आई है।

गौरतलब है कि सुशांत मामले में ईडी ने रिया चक्रवर्ती के डिलीट किए हुए व्हाट्सएप चैट को बरामद किया था, जिसमें वे ड्रग्स को खरीदने के लिए अपने परिचितों से सलाह-मशविरा कर रही थी। कथित तौर पर रिया के मोबाइल फ़ोन से भेजे गए अनेको मैसेज के जरिए यह बात सामने आई थी कि रिया अपने परिचितों से एमडीएमए, मारिजुआना जैसे ड्रग्स और उसके इस्तेमाल के बारे में चर्चा कर रही थी। उन चैट में ड्रग डीलर गौरव का नाम भी सामने आया था।

चैट के जरिए अभिनेता के मौत के मामले में ड्रग्स का एंगल सामने आने के बाद ईडी ने एनसीबी को पत्र लिख इसकी सूचना दी थी। जिसके बाद एनसीबी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए केस दर्ज किया और जाँच शुरू की। बता दे ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच कर रही है।

मस्जिद जा रहे AIMIM सांसद इम्तियाज जलील हिरासत में, कहा था- 2 सितंबर को मस्जिदें नहीं खुली तो सड़क पर पढ़ेंगे नमाज

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के सांसद इम्तियाज जलील को पुलिस ने बुधवार (सितंबर 2, 2020) को हिरासत में ले लिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सांसद जलील कोविड-19 प्रतिबंधों को तोड़ते हुए एक मस्जिद में नमाज अदा करने जा रहे थे।  

स्थानीय सांसद और पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने पिछले सप्ताह चेतावनी देते हुए कहा था कि आगामी 2 सितंबर को मस्जिदें खोल दी जाएँ। वह इसके लिए सार्वजनिक रूप से आह्वान करेंगे। लेकिन महाराष्ट्र सरकार अगर इस दिन मस्जिदें नहीं खोलती है तो वह सड़क पर नमाज़ पढ़ने बैठ जाएँगे। 

अधिकारी ने बताया कि जलील को तब हिरासत में लिया गया जब वह शाहगंज मस्जिद की ओर जा रहे थे। इसके बाद उन्हें शहर पुलिस कमिश्नर के कार्यालय ले जाया गया। जलील ने कहा कि अगर राज्य सरकार धार्मिक स्थलों पर लगी रोक को नहीं हटाती है तो पूरे राज्य में ऐसी घटनाएँ होने लगेंगी।

अपने बयानों के चलते अक्सर सुर्ख़ियों में रहने वाले एआईएमआईएम सांसद ने पिछले हफ्ते एक समाचार चैनल से बात करते हुए चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा था कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों को बंद रखने के फैसले का कोई तर्क नहीं है। उन्होंने कहा था कि अगर सरकार 2 सितंबर को मस्जिदें बंद रखती है तो वो खुद औरंगाबाद की शाहगंज स्थित मस्जिद में नमाज़ पढ़ने जाएँगे। बता दें कि कोविड-19 महामारी के चलते राज्य में सभी धार्मिक स्थलों के खुलने पर रोक है।

पुलिश कमिश्नर चिरंजीव प्रसाद ने कहा कि जलील को उनके कार्यालय के पास से हिरासत में लिया गया था। उन्होंने कहा, “हमने जलील को राज्य सरकार की ओर से जारी ताजा दिशा-निर्देशों से अवगत करा दिया है। अगर आने वाले समय में जरूरत पड़ी तो हम कार्रवाई भी करेंगे।”

मंगलवार (सितंबर 1, 2020) को जलील ने ऐलान किया था कि वह खड़केश्वर मंदिर जाएँगे और अधिकारियों को मंदिर खोलने के लिए ज्ञापन सौंपेंगे। इसके बाद शहर में शिवसेना और एआईएमआईएम के कार्यकर्ता आमने सामने आ गए थे। जलील ने कहा था कि धार्मिक स्थलों को बंद रखना तर्कसंगत नहीं है।

एआईएमआईएम सांसद ने चेतावनी देते हुए कहा था, “हम आखिर कब तक इंतज़ार करेंगे? यह लोकशाही है, सरकार के निरर्थक फैसलों को जनता भी कब तक बर्दाश्त करेगी। तो हमने यह फैसला किया है कि एक तारीख़ (सितंबर) को महाराष्ट्र में गणेश विसर्जन किया जाता है। हिंदुओं के लिए बड़ा दिन होता है। मैं उन तमाम हिंदुओं से अनुरोध करना चाहता हूँ कि वह तमाम मंदिर और पूजा स्थल खुलवाने में लग जाएँ। फिर हम दो तारीख़ (सितंबर) को राज्य में स्थित तमाम मस्जिदों को खुलवाने का आह्वान करेंगे। सरकार अगर इजाज़त दे तो ठीक नहीं तो हम सड़क पर नमाज़ पढ़ेंगे।”

‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण में शामिल लोगों के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई: बजरंग दल का CM योगी से अनुरोध

बजरंग दल के नेताओं ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कानपुर में लव जिहाद और धर्म परिवर्तन मामलों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है। बजरंग दल के अध्यक्ष अतुल द्विवेदी और राज्य सचिव रामजी तिवारी ने पत्र में बताया कि कुछ मुट्ठी भर संगठन ऐसे हैं, जो राष्ट्र विरोधी कृत्यों में शामिल हैं।

बजरंग दल का कहना है कि वे भारत में बहुसंख्यक हिंदू समाज के प्रति नफरत फैला रहे हैं। वे नियमित रूप से देश को अस्थिर करने के प्रयासों में संलग्न हैं और भारत की सांस्कृतिक विरासत को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “ये संगठन और कुछ लोग लव जिहाद और धर्मांतरण की गतिविधियों में शामिल हैं। पिछले कुछ महीनों से, हर कोई लव जिहाद और धर्मांतरण से संबंधित मामलों की बढ़ती संख्या को देख रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि यह विभिन्न समुदायों के व्यक्तियों के बीच लव अफेयर्स के बारे में नहीं है। यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है, जो देश में बड़े पैमाने पर गृहयुद्ध की ओर धकेलने के प्रयास के रूप में हो रहा है।

वो आगे कहते हैं, “एक देश-भक्त सरकार का चुनाव करके, हिंदू अपने सम्मान को बचाने के लिए उनकी ओर देख रहे हैं, और उन्हें उम्मीद है कि हम इस अपमान से मुक्त हो जाएँगे।” 

इसके साथ ही बजरंग दल ने सीएम योगी से उनकी चार माँगें मानने का अनुरोध किया है:-

  • पूरे उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण पर रोक लगाई जानी चाहिए।
  • लव जिहाद में शामिल होने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
  • जो भी मौलवी हिंदू लड़की से शादी कराने और उसे इस्लाम में परिवर्तित कराने में शामिल हो, उसे दंडित किया जाना चाहिए।
  • अंतर-धार्मिक हिंदू-मुस्लिम विवाह पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

कानपुर में पिछले कुछ दिनों में कई लव जिहाद के मामले सामने आए हैं। इसकी शुरुआत 21 अगस्त को हुई शालिनी यादव के मामले से हुई। उसने फैसल से शादी कर ली और इस्लाम धर्म अपना लिया। उनके भाई ने दावा किया कि यह लव जिहाद का मामला है। शालिनी यादव के मामले के बाद कई और अन्य मामले सामने आने लगे। 

28 अगस्त को एक मामला सामने आया था, जिसमें लकी खान ने कथित रूप से एक नाबालिग हिंदू लड़की से दोस्ती की और उसे ब्लैकमेल करने के लिए आपत्तिजनक तस्वीरें लीं। 29 अगस्त को एक और मामला प्रकाश में आया, जहाँ एक हिंदू लड़की के परिवार ने दावा किया कि आसिफ ने उनकी बेटी को फँसाया और उसका जबरन धर्म परिवर्तन करा कर उससे शादी कर ली।