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हलाल सर्टिफिकेशन हर भारतीय (हिंदू+मुस्लिम+सिख+ईसाई आदि) का अधिकार: जमीयत ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, हलाल सीमेंट-सरिया पर SG के बयान को बताया पूर्वाग्रह से प्रेरित

हलाल प्रमाण पत्र पर प्रतिबंध को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (24 फरवरी 2025) को सुनवाई की। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि सीमेंट, लोहे की छड़ जैसे विभिन्न उत्पादों के लिए भी हलाल प्रमाण पत्र देकर करोड़ों रुपए जुटाए जा रहे हैं। इससे सामानों की कीमतें बढ़ रही हैं। वहीं, जमीयत उलमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया हर भारतीय उपभोक्ता के अधिकार का हिस्सा है।

जमीयत ने कहा कि इस्तेमाल होने वाले वस्तुओं के के संबंध में जानकारी देना भारतीय उपभोक्ता के अधिकारों का हिस्सा है। इस्लामी संगठन ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन को केवल मांसाहारी खाद्य पदार्थों और निर्यात उद्देश्यों तक सीमित नहीं किया जा सकता है। हलाल प्रमाण पत्र जारी करने वाले इस ट्रस्ट ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता की दलीलों को पूरी तरह से गलत और निंदनीय बता दिया।

दरअसल, इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान 20 जनवरी 2025 को तुषार मेहता ने अदालत में कहा था, “जहाँ तक ​​हलाल मांस आदि का सवाल है, किसी को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन, आश्चर्य है कि इनके (जमीयत) अनुसार सीमेंट का भी हलाल-प्रमाणन होना चाहिए। सरिया का भी हलाल-प्रमाणन होना चाहिए। पानी की बोतलें जो हमें मिलती हैं, उनका भी हलाल-प्रमाणन होना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश SG तुषार मेहता ने कहा, “यहाँ तक ​​कि आटा, बेसन का भी हलाल-प्रमाणन होना चाहिए। बेसन हलाल या गैर-हलाल कैसे हो सकता है?” उन्होंने कहा कि हलाल प्रमाण पत्र देने वाली एजेंसियों ने इस तरह के सर्टिफिकेट जारी करके लाखों करोड़ों रुपए कमाए हैं। उन्होंने कहा कि हलाल प्रमाण पत्र जारी करने सामानों की कीमतें बढ़ रही हैं।

सरकार के इन आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जमीयत से जवाबी हलफनामा दायर करने के कहा था। जमीयत ट्रस्ट ने 22 फरवरी 2025 को अपने हलफनामे में कहा कि SG की दलीलें याचिकाकर्ताओं को बदनाम करने वाला बताया। ट्रस्ट ने कहा, “कई मीडिया संगठनों ने इस मुद्दे पर बहस की शुरुआत की, ताकि पूरी प्रक्रिया को बदनाम किया जा सके। ये दलीलें हलाल की अवधारणा और इसकी प्रमाणन प्रक्रिया के खिलाफ एक नैरेटिव बन गईं।”

जमीयत ट्रस्ट ने अपनी याचिका में शीर्ष न्यायालय से यह भी आग्रह किया है कि वह केंद्र सरकार इस तथ्य का खुलासा करने का निर्देश कि किस अधिकारी ने SG को कोर्ट में ऐसा बयान देने का निर्देश दिया। ट्रस्ट का कहना है कि इन बयानों से हलाल की अवधारणा के प्रति गंभीर पूर्वाग्रह पैदा हो गया है, जो एक बहुत बड़े समुदाय के व्यवहार और जीवनशैली की बुनियादी आवश्यकताओं में से एक है।

ट्रस्ट ने अपने हलफनामे में कहा है, “यह भारतीय नागरिकों के एक बड़े वर्ग की धार्मिक आस्था और व्यवहार का गंभीर मुद्दा है और इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत संरक्षित किया गया है। केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार किसी व्यक्ति की यह स्वतंत्रता नहीं छीन सकती कि कोई व्यक्ति क्या खा रहा है।” ट्रस्ट ने कहा कि कंपनियाँ माँग करती हैं, इसलिए हलाल प्रमाण पत्र दिया जाता है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन ने नवंबर 2023 में हलाल-प्रमाणित उत्पादों के निर्माण, बिक्री, भंडारण और वितरण तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार के इस निर्णय के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट ने कोर्ट में याचिका दायर की है।

‘अर्नब गोस्वामी को फर्जी खबर के केस में गलत ढंग से फँसाया’ : कर्नाटक HC ने लगाई राज्य पुलिस और कॉन्ग्रेस सरकार को फटकार, केस भी खारिज किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के खिलाफ दायर एक केस को खारिज कर दिया। उन्होंने अर्नब को टारगेट करने और गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव दिखाने के मामले में राज्य पुलिस को फटकार भी लगाई।

कोर्ट ने कहा कि ये सब सिर्फ और सिर्फ उनके मीडिया में बड़ा चेहरा होने की वजह से किया गया है। उन्हें मामले में बिना किसी वैध कारण के अनुचित ढंग से फँसाया गया। इसके बाद न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने गोस्वामी के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज कर दिया।

बता दें कि अर्नब गोस्वामी के खिलाफ पिछले साल मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बारे में फर्जी खबर प्रसारित करने का आरोप लगाया गया था। ये आरोप कर्नाटक कॉन्ग्रेस के सदस्य रवींद्र ने लगाया था।

अपनी शिकायत में उन्होंने कहा था कि पिछले साल 27 मार्च को रिपब्लिक टीवी कन्नड़ ने एक समाचार रिपोर्ट प्रसारित की थी जिसमें दावा किया गया था कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के काफिले को गुजरने देने के लिए बेंगलुरु के एमजी रोड पर यातायात रोक दिया गया था, जिससे एक एम्बुलेंस आगे नहीं बढ़ पाई। रवींद्र का कहना था कि ये जानकारी गलत है क्योंकि सिद्धारमैया उस समय मैसूर में थे, बेंगलुरु में नहीं। इसी मामले में गोस्वामी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया।

पत्रकार को सूचना मिली तो वो इस केस को रद्द कराने कोर्ट पहुँचे। मामले में सुनवाई हुई और न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा कि गोस्वामी का नाम इस मामले में क्यों लिया गया है। कोर्ट ने पाया कि जो खबर चली थी वह रिपब्लिक टीवी कन्नड़ पर थी। अर्नब उसमें सीधे सीधे तौर पर शामिल नहीं थे। जब पूछा गया कि गोस्वामी ने कौन सा विशेष अपराध किया है, तो राज्य सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया।

न्यायालय ने पूरे केस की सुनवाई के पाया कि गोस्वामी को गलत तरीके से फँसाया गया। उन्होंने उनका उस खबर से लेना-देना नहीं था। न्यायालय ने कहा कि गोस्वामी को मामले में घसीटना केवल ‘बदला लेने’ की कार्रवाई थी और मामले में शिकायत दर्ज होना सिर्फ पुलिस की लापरवाही है।

हिंदू बच्चियों से रेप मामले में भड़का राजस्थान का माहौल… हिंदूवादी संगठन प्रदर्शन पर उतरे, कई शहर बंद: राज्यपाल ने दी लड़कियों को सीख- ईंट का जवाब पत्थर से दो

राजस्थान के ब्यावर जिले के बिजयनगर में हुए रेप और ब्लैकमेल कांड ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। इस मामले के विरोध में सोमवार (23 फरवरी 2025) को अजमेर, ब्यावर और भीलवाड़ा में बंद बुलाया गया। सुबह से ही लोग सड़कों पर उतर आए और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। हर तरफ एक ही माँग गूँज रही है कि आरोपितों को फाँसी की सजा दी जाए।

राजस्थान के ब्यावर जिले में ये घटना 15 फरवरी 2025 को सामने आई थी, जब बिजयनगर के एक निजी स्कूल की नाबालिग छात्राओं ने बताया कि उनके साथ रेप हुआ और अश्लील फोटो-वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया। परिजनों का आरोप है कि लड़कियों को जबरन धार्मिक काम करने और धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

अब तक 11 गिरफ्तार, 3 नाबालिग शामिल

पुलिस ने इस मामले में तेजी दिखाते हुए अब तक 11 लोगों को पकड़ा है। 8 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 3 नाबालिगों को हिरासत में लिया गया। 23 फरवरी को हकीम कुरैशी नाम के पूर्व पार्षद को भी पकड़ा गया, जो बाकी आरोपियों की मदद कर रहा था। उसे 5 दिन की रिमांड पर भेजा गया है। इसके अलावा श्रवण, करीम और आशिक 7 दिन की रिमांड पर हैं, जबकि लुकमान, सोहेल, रिहान और अफराज को 5 दिन के लिए रिमांड मिली है। तीन नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सबूत जुटाए जा रहे हैं।

हिंदू लड़कियों को बनाया गया निशाना

इस बीच, रविवार(23 फरवरी 2025) को झुंझुनूं के नवलगढ़ में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने इस मामले पर सख्त बात कही। डूंडलोद गर्ल्स स्कूल में छात्राओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का जवाब देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं की बेटियों को निशाना बनाया गया। लोगों में गुस्सा इस कदर है कि जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। अजमेर, ब्यावर और भीलवाड़ा में दुकानें बंद रहीं और सड़कों पर नारेबाजी हुई। लोग चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई करे।

₹210000 करोड़ का करेंगे निवेश, 120000 से ज्यादा देंगे रोजगार: अडानी समूह ने मध्य प्रदेश को दी सौगात, ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का किया ऐलान

मध्य प्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में अडानी समूह ने बड़े निवेश का ऐलान किया है। अडानी समूह मध्य प्रदेश में पंप स्टोरेज, सीमेंट, खनन, स्मार्ट मीटर और थर्मल एनर्जी में 2 लाख 10 हजार करोड़ रुपये का भारी निवेश करेगा। इस निवेश के तहत समूह 1 लाख करोड़ रुपए के जरिए एक ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, एयरपोर्ट प्रोजेक्ट और एक कोयला गैसीकरण प्रोजेक्ट पर राज्य सरकार से चर्चा कर रहा है। अडानी समूह के इस निवेश से बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा के साथ ही कनेक्टिविटी बढ़ेगी और मध्य प्रदेश एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित होगा। जिससे 2030 तक 1 लाख 20 हजार से ज्यादा नौकरियाँ पैदा होंगी।

भोपाल में मध्य प्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 को संबोधित करते हुए अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने राज्य के लिए समूह की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश भारत के सबसे अधिक निवेश के लिए तैयार राज्यों में से एक बन गया है। गौतम अडानी ने कहा, “ये मात्र निवेश नहीं हैं। ये एक ऐसी यात्रा की शुरुआत है – जिससे मध्य प्रदेश औद्योगिक और आर्थिक विकास के क्षेत्र में सबसे आगे होगा। हम माननीय प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में इस राज्य के असाधारण उत्थान के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं।

अडानी समूह ने पहले ही मध्य प्रदेश में एनर्जी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग , लॉजिस्टिक्स और कृषि-व्यवसाय में 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, जिससे 25 हजार से अधिक नौकरियाँ पैदा हुई हैं। नए निवेश से राज्य के औद्योगिक इकोसिस्टम और मजबूत करेगा, जो भारत की आत्मनिर्भरता और इनोवेशन के अनुरूप होगा।

इस महीने की शुरुआत में अपने बेटे जीत की शादी के अवसर पर गौतम अडानी ने सामाजिक कार्यों के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के दान की घोषणा की थी। इस राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कौशल विकास क्षेत्रों में वंचितों के लिए किफायती और सुलभ विश्व स्तरीय बुनियादी ढाँचा बनाने पर केंद्रित होगा।

ICC चैंपियन्स ट्रॉफी के बीच पाकिस्तान में विदेशी हो सकते हैं किडनैप: आतंकी संगठन ISKP ने की ठिकाने लगाने की पूरी तैयारी, खुफिया एजेंसियाँ अलर्ट

पाकिस्तान में ICC चैंपियन्स ट्रॉफी के दौरान विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा हुई हैं। खबर रहै कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इस्लामी स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से चीनी और अरब से आने वाले लोगों, के अपहरण करने की योजना बना रहा है।

जानकारी सामने आई है कि ISKP ने प्रमुख स्थानों पर लगातार निगाह बनाई हुई है। इनमें बंदरगाह, हवाई अड्डे, कार्यालय और आवासीय क्षेत्र शामिल हैं जिन्हें विदेशियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।

इस काम के लिए, ISKP ऑपरेटिव्स ऐसी संपत्तियों को किराए पर ले रहे हैं जहाँ सुरक्षा कम हो और सीसीटीवी आदि न लगे हों। ये ठिकाने शहरों के बाहरी हिस्सों में हो सकते हैं जहाँ केवल ऑटो-रिक्शा या मोटरसाइकिल जाने की सुविधा हो।

रिपोर्ट ये भी बताती हैं कि आईएस ने किडनैपिंग के बाद विदेशियों को अपने अलग-अलगल ठिकानों पर रखने की योजना बनाई है और वो चैंपियन्स ट्रॉफी के बीच अधिक सक्रिय हैं।

बता दें कि पहली बार नहीं है कि पाकिस्तान में विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता सामने आई हो। इससे पहले भी वहाँ विदेशियों पर कई बार हमले हुए हैं। 2024 में शांगला में चीनी इंजीनियरों पर हुआ हमला और 2009 में लाहौर में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर हुआ हमला।

‘होली मनाओगे तो लाशें बिछा देंगे’ : बरेली में त्योहार की प्लानिंग कर रहे हिंदुओं पर मुस्लिम लड़कों ने किया लाठी-डंडे से हमला; अयान, सलमान, रेहान समेत 6 पर FIR

उत्तर प्रदेश के बरेली में होली से पहले बड़ा बवाल हो गया। बारादरी थाना क्षेत्र के हजियापुर मोहल्ले में हिंदू समुदाय के कुछ लोग होली के लिए प्लानिंग कर रहे थे, तभी मुस्लिम समुदाय के युवकों ने उन पर हमला बोल दिया। आरोप है कि हमलावरों ने न सिर्फ मारपीट की, बल्कि धमकी दी कि “होली मनाओगे तो लाशें बिछा देंगे।” इस घटना से इलाके में तनाव फैल गया है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हजियापुर में रहने वाले लक्ष्मण, मुन्ना, शनि और आकाश अपने मोहल्ले में होली का प्रोग्राम फिक्स कर रहे थे। तभी वहाँ अयान, सलमान, अमन, रेहान, भूरा और आलम समेत कुछ युवक पहुँचे और अचानक हमला कर दिया। पीड़ितों का कहना है कि हमलावरों ने लाठी-डंडों से पीटा और जान से मारने की धमकी दी। लक्ष्मण और उसके साथियों का आरोप है कि ये हमला होली से पहले माहौल खराब करने की साजिश है। इस मारपीट में लक्ष्मण, मुन्ना और आकाश को चोटें आईं। इसके बाद पीड़ितों ने पुलिस को बुलाया।

बारादरी थाना पुलिस फौरन मौके पर पहुँची और हालात को काबू में किया। इलाका मिश्रित आबादी वाला और संवेदनशील है, इसलिए पुलिस ने कोई रिस्क नहीं लिया। छह नामजद आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि जाँच चल रही है। फिलहाल 2 को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले सावन में जोगी नवादा इलाके में कांवड़ियों पर पथराव और फायरिंग हुई थी। तब भी पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। अब होली से पहले ये नया विवाद सामने आने से लोग डरे हुए हैं। बारादरी का हजियापुर, जोगी नवादा और चकमहमूद इलाका पहले भी सांप्रदायिक झगड़ों का गवाह बन चुका है। ऐसे में पुलिस की कोशिश है कि होली तक शांति बनी रहे।

‘कंजर्वेटिव नेता’ बनेगा जर्मनी का अगला चांसलर, घुसपैठियों के लिए मन में कोई रहम नहीं: जानें कौन है फ्रेडरिक मर्ज, संन्यास के बाद की राजनीति में वापसी

जर्मनी की कंजर्वेटिव पार्टी सीडीयू के नेता फ्रेडरिक मर्ज अब देश के अगले चांसलर बनने की ओर बढ़ रहे हैं। रविवार (23 फरवरी 2025) को हुए चुनावों में उनकी पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें हासिल कीं और मौजूदा चांसलर ओलाफ शोल्ज को हार का सामना करना पड़ा। मर्ज का नाम खासकर शरणार्थियों और प्रवास को लेकर उनके सख्त रुख की वजह से चर्चा में रहा है। लेकिन कौन हैं ये शख्स, और कैसे पहुँचे वे इस मुकाम तक? आइए जानते हैं।

फ्रेडरिक मर्ज (Friedrich Merz) शरणार्थियों और प्रवास के मुद्दे पर सख्त रवैया अपनाने के लिए जाने जाते हैं। उनका मानना है कि जर्मनी में अवैध प्रवास को पूरी तरह रोकना जरूरी है। वे स्थायी बॉर्डर कंट्रोल की बात करते हैं और कहते हैं कि जो लोग देश में गैरकानूनी ढंग से घुसने की कोशिश करें, उन्हें तुरंत वापस भेजा जाए। सीडीयू के नेता बनने के बाद उन्होंने पार्टी को दक्षिणपंथी रास्ते पर ले जाने की कोशिश की, ताकि उग्र दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी का उभार रोका जा सके। उनका कहना है कि जर्मनी अपनी क्षमता से ज्यादा बोझ नहीं उठा सकता।

‘शरणार्थियों के दाँत बनवाने पर टैक्सपेयर का पैसा खर्च’

फ्रेडरिक मर्ज का एक बयान सितंबर 2023 में खूब सुर्खियों में रहा। उन्होंने कहा था, “शरणार्थी टैक्सपेयर के पैसों से अपने दाँत बनवा रहे हैं, जबकि आम जर्मन मरीजों को डॉक्टर की अपॉइंटमेंट तक नहीं मिल रही।” इस बयान ने हंगामा मचा दिया। जर्मन डेंटल एसोसिएशन ने इसे गलत बताया और कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है। कई लोगों ने इसे शरणार्थियों के खिलाफ नफरत भड़काने वाला करार दिया। हालाँकि, मर्ज ने अपनी बात पर कायम रहते हुए कहा कि वे बस देश की सच्चाई सामने लाना चाहते हैं। उन्होंने वैध और अवैध शरणार्थियों के खिलाफ हमेशा ही कड़ा रुख अपनाया है। उनकी जीत से प्रवासियों के बीच संशय की स्थिति है।

राजनीति से कभी ले लिया था संन्यास, फिर की वापसी

69 साल के फ्रेडरिक मर्ज का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे 1989 में यूरोपीय संसद और 1994 में जर्मन संसद के लिए चुने गए थे। 2000 में वे सीडीयू/सीएसयू संसदीय समूह के अध्यक्ष बने, लेकिन तत्कालीन उभरती नेता एंजेला मर्केल से सत्ता की जंग में हार गए। 2004 में उन्होंने राजनीति छोड़ दी और वकील व लॉबिस्ट बनकर खूब पैसा कमाया। मर्केल के रिटायरमेंट के समय 2018 में वे वापस लौटे। दो बार हारने के बाद 2022 में वे सीडीयू के नेता बने और पार्टी को फिर से मजबूत किया। अब 2025 के चुनाव में जीत के साथ वे चांसलर बनने वाले हैं।

फ्रेडरिक मर्ज के चांसलर बनने से जर्मनी और यूरोप में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। वे अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बिजनेस-फ्रेंडली नीतियाँ लाना चाहते हैं, जो जर्मनी की ठहरी हुई अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत हो सकता है। विदेश नीति में वे अमेरिका के साथ मजबूत रिश्ते और यूक्रेन को ज्यादा समर्थन देने की बात करते हैं। वे जर्मनी को यूरोपीय यूनियन और नाटो में अहम भूमिका देने के पक्षधर हैं। हालाँकि शरणार्थियों पर उनकी सख्त नीति से यूरोप में बहस छिड़ सकती है। कई देश पहले ही शरणार्थियों को लेकर सख्ती बरत रहे हैं और मर्ज का रुख इसे और तेज कर सकता है।

नेटो-यूरोपीय यूनियन में बढ़ाएँगे जर्मनी की भागीदारी

वैसे, फ्रेडरिक मर्ज राष्ट्रवादी नजरिए के लिए तो जाने ही जाते हैं, साथ ही वो यूरोपीय यूनियन (ईयू) में भी जर्मनी का दबदबा बढ़ाना चाहते हैं। वो यूरोप की सेना रखने के पक्ष में हैं, ताकि यूक्रेन जैसी कोई नौबत यूरोप के साथ न आए। यही नहीं, जर्मनी की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने नेटो (NATO) में भी अपने सहयोग को बढ़ाने का ऐलान किया है। उन्होंने यूक्रेन को समर्थन देने का भी ऐलान किया था और कहा था कि अगर वो सत्ता में आएँगे, तो यूक्रेन को लंबी दूरी तक मार वाली मिसाइलों की भी सप्लाई करेंगे।

फ्रेडरिक मर्ज जर्मनी को एक नए रास्ते पर ले जा सकते हैं। उनका बिजनेस बैकग्राउंड और सख्त नजरिया देश को आर्थिक और सुरक्षा मोर्चे पर मजबूत कर सकता है, लेकिन शरणार्थी नीति पर विवाद उनके लिए चुनौती बनेगा। यूरोप में जर्मनी की नई भूमिका और दुनिया के साथ उसके रिश्ते अब मर्ज के हाथों में हैं। यह देखना बाकी है कि वे इस मौके को कैसे भुनाते हैं।

बागेश्वर धाम में PM मोदी ने कैंसर अस्पताल की रखी नींव, हीराबेन के नाम पर भी होगा वार्ड: धीरेंद्र शास्त्री को बताया ‘छोटा भाई’, कहा- अब भजन-भोजन के साथ निरोगी जीवन का आशीर्वाद भी मिलेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बागेश्वर धाम में बागेश्वर धाम कैंसर चिकित्सा एवं विज्ञान अनुसंधान संस्थान की नींव रखी और कहा कि ये जगह अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सेहत का भी ठिकाना बनेगी।

पीएम मोदी ने जनसभा में कहा, “मुझे कुछ ही दिनों में दूसरी बार बुंदेलखंड आने का मौका मिला और इस बार हनुमान जी का बुलावा आया। अब यहाँ भजन, भोजन के साथ-साथ निरोगी जीवन का आशीर्वाद भी मिलेगा।” इस अस्पताल का पहला चरण 10 एकड़ में बनेगा, जिसमें 100 बेड होंगे। पीएम ने धीरेंद्र शास्त्री की तारीफ की, जिन्होंने ये नेक काम शुरू किया। इस दौरान उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को अपना छोटा भाई भी कहा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री लंबे वक्त से देश में एकता की बात करते आए हैं और अब कैंसर अस्पताल बनवाकर समाज की भलाई का नया कदम उठाया है। उन्होंने कुछ नेताओं पर भी निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा, “आजकल कुछ लोग धर्म का मजाक उड़ाते हैं, समाज को तोड़ने की कोशिश करते हैं। विदेशी ताकतें भी इनका साथ देती हैं। ये लोग हमारे मंदिरों, संस्कृति और परंपराओं पर हमला करते हैं।” पीएम ने ये भी बताया कि हमारे ऋषियों ने आयुर्वेद और योग जैसी चीजें दीं, जो आज दुनिया भर में छाई हुई हैं।

महाकुंभ का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि ये एकता का बहुत बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा, “करोड़ों लोग वहाँ पहुँचे, संतों से मिले। पुलिसवालों ने भी साधक की तरह सेवा की, जिसकी हर कोई तारीफ कर रहा है।” उन्होंने बताया कि इस बार महाकुंभ में डॉक्टर और स्वयंसेवक भी बड़ी संख्या में जुटे हैं।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत में कितने ही बड़े अस्पताल हमारी धार्मिक संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य और विज्ञान से जुड़े कितने ही शोध संस्थान धार्मिक ट्रस्टों द्वारा चलाए जा रहे हैं। इन संस्थाओं में करोड़ों गरीबों का इलाज और सेवा की जाती है… मुझे खुशी है कि बागेश्वर धाम के रूप में इस गौरवशाली परंपरा में एक और नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। अब बागेश्वर धाम में स्वास्थ्य का आशीर्वाद भी मिलेगा।”

पीएम मोदी ने अपनी सरकार के काम का भी जिक्र किया। “हमने ‘सबका साथ, सबका विकास’ का मंत्र अपनाया। इस साल के बजट में कैंसर से लड़ने के लिए बड़े ऐलान किए गए। दवाइयाँ सस्ती होंगी और अगले तीन साल में हर जिले में कैंसर डे केयर सेंटर खुलेंगे।”

धीरेंद्र शास्त्री ने एक खास बात बताई कि इस अस्पताल में एक वार्ड का नाम पीएम की माँ हीराबेन के नाम पर रखा जाएगा। उन्होंने हँसते हुए कहा कि पीएम ने उनकी माँ से मुलाकात की और मजाक में बोले, “आपके मन में धीरेंद्र की शादी की बात चल रही है।” इस पर शास्त्री ने कहा, “तो हम आपको अपनी बारात का न्योता दे देते हैं।”

पीएम मोदी का ये दौरा दो दिन का है। बागेश्वर धाम के बाद वो भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में भी शामिल होंगे। लोगों में इस बात की खुशी है कि अब उनके इलाके में कैंसर जैसी बीमारी का इलाज आसानी से मिल सकेगा।

जिस राज्य में कॉन्ग्रेस आई, वह राज्य रसातल में समाई: अब तेलंगाना का निकला तेल, धड़ाधड़ कर्ज के बाद भी महिलाओं को हर महीने ₹2500 देने का वादा नहीं हुआ पूरा

आर्थिक तौर पर सबसे मजबूत राज्यों में से एक रहा तेलंगाना अब आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। जिस तेलंगाना के पास हमेशा राजस्व अधिक रहा करता था, वह हजारों करोड़ के राजस्व घाटे में चला गया है। तेलंगाना में कॉन्ग्रेस सरकार आने के बाद आर्थिक कुप्रबन्धन लगातार बढ़ रहा है। राज्य पर कर्ज का बोझ भी बढ़ रहा है। तेलंगाना की रेवंत रेड्डी की सरकार अब रोजमर्रा के काम के लिए भी कर्ज लेने लगी है। कॉन्ग्रेस सरकार के आते ही तेलंगाना भी हिमाचल प्रदेश के रास्ते चल पड़ा है। यह हाल तब है जब कॉन्ग्रेस ने अपने कई चुनावी वादे पूरे नहीं किए हैं।

कर्जे का पहाड़ बढ़ा

भारतीय रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना पर 2023 में ₹3 लाख 52 हजार करोड़ कर्ज था। मार्च, 2024 तक यह कर्ज बढ़ कर ₹3 लाख 89 हजार करोड़ हो चुका था। तेलंगाना में कुछ ही महीने में हजारों करोड़ की वृद्धि हुई है। तेलंगाना की कॉन्ग्रेस सरकार नए कर्ज लेने में भी अपने रिकॉर्ड तोड़ रही है। तेलंगाना पर सिर्फ यही कर्ज का बोझ नहीं है, बल्कि उस पर ₹38 हजार करोड़ की अतिरिक्त गारंटियों का भी बोझ है। इनकी भी अदायगी सरकार को करनी है।

तेलंगाना कॉन्ग्रेस राज में किस कदर कर्ज के कुचक्र में फंस गया है, इसका एक बड़ा उदाहरण वित्त वर्ष 2024-25 का ही रिकॉर्ड है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि राज्य सरकार जनवरी, 2025 तक ₹58 हजार करोड़ से अधिक नया कर्ज ले चुकी है। जबकि असल में इसे अप्रैल 2024-मार्च 2025 के बीच कुल ₹49 हजार करोड़ का कर्ज लेना था। यानि साल पूरा होने के तीन महीने के पहले ही उसने लगभग ₹10 हजार करोड़ का अतिरिक्त कर्ज ले लिया। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 पूरा होते-होते राज्य का कर्ज ₹4 लाख करोड़ को पार कर जाएगा।

कहाँ फालतू रहना था पैसा, अब घाटे में गए

तेलंगाना की बिगड़ती आर्थिक हालत का एक और बड़ा परिचायक उसका राजस्व घाटा है। तेलंगाना ने वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में बताया था कि वह ₹297 करोड़ के राजस्व सरप्लस में रहेगा। असलियत यह है कि जनवरी 2025 आते-आते वह ₹26 हजार करोड़ से अधिक के राजस्व घाटे में आ चुका है। तेलंगाना में राजस्व इकट्ठा करने में भी समस्याएं हो रही हैं। राज्य लगातार स्टाम्प, शराब और बाकी जरिए से होने वाली कमाई भी खो रहा है।

सैलरी से ज्यादा ब्याज का खर्च

तेलंगाना पर कर्ज का बोझ इतना बढ़ा है कि वह अब राज्य के कर्मचारियों की सैलरी से ज्यादा खर्च हर महीने कर्ज का ब्याज देने पर रही है। एक रिपोर्ट बताती है कि राज्य सरकार वर्तमान में ₹5 हजार करोड़ से अधिक पुराने कर्ज के ब्याज देने पर खर्च कर रही है। वह राज्य में अपने कर्मचारियों को ₹3 हजार करोड़ ही सैलरी के रूप में देती है। तेलंगाना की कमाई का लगभग 40% हिस्सा अब कर्ज चुकाने में जाता है। कॉन्ग्रेस सरकार अब राज्य के मालिकाना हक़ वाली कम्पनियाँ भी बेचना चाहती है।

राज्य की विपक्षी पार्टी BRS का आरोप है कि कॉन्ग्रेस सरकार मात्र 12 महीनों में ही ₹1 लाख 27 हजार करोड़ का कर्ज ले चुकी है। वहीं कॉन्ग्रेस अब तक यह कह कर बचती आई है कि वह पिछली सरकार के कर्ज को चुका रही है। हालाँकि, BRS और भाजपा इसे केवल विफलता छुपाने का बहाना बता रही हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में कहा था कि तेलंगाना बनने के दौरान खर्च से अधिक राजस्व वाला राज्य था जबकि अब वह कर्ज लेने के चक्कर में पड़ गया है।

गारंटियों में हो रहा मोटा खर्च

कॉन्ग्रेस ने राज्य में चुनाव जीतने के लिए कई ‘रेवड़ी’ वादे कर दिए थे। अब यही वादे उसके लिए पूरा करना भारी हो रहा है। कॉन्ग्रेस ने राज्य में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का वादा तो पूरा किया है। इसमें ₹1300 करोड़ का खर्च हो चुका है। कॉन्ग्रेस ने किसान कर्ज माफ़ी में भी राज्य में लगभग ₹20 हजार करोड़ खर्च कर चुकी है। उसे अब पता चल रहा है कि बाकी योजनाएँ लागू करने के लिए राज्य के पास पैसा नहीं है। कॉन्ग्रेस सरकार अब तक राज्य में महिलाओं को ₹2500 देने वादा पूरा नहीं कर सकी है।

भाजपा-BRS हमलावर

कॉन्ग्रेस सरकार की विफलता पर लगातार भाजपा और BRS हमलावर हैं। BRS का आरोप है कि उनके राज के दौरान तेलंगाना में प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हो गई थी और कर्ज भी नियंत्रण में रहा था। BRS ने चुनौती दी है कि कॉन्ग्रेस उससे राज्य के वित्तीय संकट पर बहस करे। BRS का आरोप है कि कॉन्ग्रेस ने कोई वादे भी नहीं पूरे किए हैं। वहीं भाजपा ने कहा है कि कॉन्ग्रेस राज में तेलंगाना आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुका है।

तेलंगाना से पहले कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश भी कॉन्ग्रेस राज में आर्थिक संकट में फंस चुके हैं। जहाँ कर्नाटक में SC-ST फंड का पैसा चुनावी गारंटी के लिए लगाया जा रहा है तो वहीं हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री तनख्वाह ना लेने का ऐलान कर रहे हैं। यदि सही आर्थिक कदम ना उठाए गए तो जल्द ही यही स्थिति तेलंगाना में बन सकती है।

3 कोनों पर 3 मंदिर, इनके बीच 87 देव तीर्थ और 5 महा तीर्थ: संभल को ‘तीर्थ नगरी’ बनाएगी योगी सरकार, DM बोले- 60 देव तीर्थ खोजे, अन्य की तलाश जारी

उत्तर प्रदेश के संभल को राज्य सरकार धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। जिला प्रशासन शास्त्रों में वर्णित सभी तीर्थों और कूपों की खोजबीन कर रहा है। संभल के जिलाधिकारी डॉक्टर राजेन्द्र पेंसिया ने बताया कि संभल तीर्थनगरी है। संभल माहात्म्य में शहर के तीन कोनों पर तीन प्रमुख शिव मंदिर के बारे में कहा गया है। इनके बीच 87 देव तीर्थ और 5 महा तीर्थ हैं।

जिलाधिकारी ने कहा कि संभल में अब तक 60 देव तीर्थों की पहचान हो चुकी है और बाकी तीर्थों की खोजबीन की जा रही है। उन्होने कहा कि 44 तीर्थों से अतिक्रमण हटाकर उनके सौंदर्यीकरण का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वंदन योजना, नगर परिषद के 15वें वित्त आयोग और पर्यटन एवं धार्मिक विभाग के बजट से इस काम को पूरा किया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने बताया कि इसके लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी तैयार की जा रही है, जिसे अब सरकार को भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिले में पुराने कुँओं को भी पुनर्जीवित करने की योजना बनाई गई है, ताकि जल संरक्षण किया जा सके। ये तीर्थस्थल जलतीर्थ कहलाते थे। इसलिए इन्हें पुनर्जीवित करना जरूरी है।

जिलाधिकारी राजेंद्र पैंसिया ने आगे बताया कि जब 48 किलोमीटर लंबी 24 कोसी परिक्रमा पूरी होगी और सभी तीर्थस्थलों का सौंदर्यीकरण हो जाएगा, तब संभल एक प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा। बता दें कि संभल को एक प्रमुख तीर्थ एवं पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है।