कॉन्ग्रेस के सीनियर सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने अपनी पार्टी को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस (Congress) को सिर्फ अपने पुराने वोटरों के भरोसे नहीं रहना चाहिए, बल्कि नए लोगों को जोड़ना होगा। केरल में लेफ्ट सरकार की तारीफ करने पर पार्टी में उनकी आलोचना हुई थी, लेकिन थरूर ने साफ किया कि वो देश और राज्य के भले के लिए अपनी राय खुलकर रखते हैं। उनका कहना है कि तिरुवनंतपुरम से चार बार सांसद चुने जाने से पता चलता है कि लोग उनकी बात को पसंद करते हैं, भले ही वो कॉन्ग्रेस के खिलाफ वोट देने वाले हों।
शशि थरूर ने एक पॉडकास्ट में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस को 2026 के केरल विधानसभा चुनाव में जीत चाहिए, तो उसे अपनी पहुँच बढ़ानी होगी। थरुर का मानना है कि पार्टी का वोट सिर्फ 19% है, जो सत्ता में आने के लिए काफी नहीं। इसके लिए 26-27% अतिरिक्त वोट चाहिए। उन्होंने कहा, “मेरी बात का असर तिरुवनंतपुरम में दिखता है। यहाँ लोग मुझे वोट देते हैं, चाहे वो कॉन्ग्रेस को पसंद न करें। यही तरीका पार्टी को अपनाना चाहिए।” थरूर ने ये भी बताया कि केरल कॉन्ग्रेस में नेतृत्व की कमी है और कई कार्यकर्ता उनकी बात से सहमत हैं।
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक शशि थरूर ने कहा कि अगर पार्टी उनकी लोकप्रियता का फायदा उठाना चाहे, तो वो तैयार हैं। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो उनके पास किताबें लिखने, भाषण देने जैसे दूसरे रास्ते भी हैं। थरूर ने बताया कि सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह जैसे बड़े नेताओं के कहने पर ही वो यूएन की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए थे। वो हमेशा बेबाकी से बोलते हैं, चाहे नरेंद्र मोदी की तारीफ हो या पिनराई विजयन की। उनका कहना है कि अच्छे काम की तारीफ करनी चाहिए, भले ही वो विरोधी पार्टी का हो।
हालाँकि, पार्टी में कुछ लोग इसे पसंद नहीं करते। थरूर ने कहा कि आम लोग उनकी इस सोच को समझते हैं, लेकिन पार्टी के भीतर सवाल उठते हैं। उन्होंने ये भी साफ किया कि वो पार्टी नहीं छोड़ेंगे, पर जरूरत पड़ी तो निर्दलीय रह सकते हैं। साथ ही, कॉन्ग्रेस की संगठन व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही, जिसमें बीजेपी उनसे आगे है। कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी में शामिल होने के बाद भी उन्हें लगता है कि वहाँ फैसले लेने की ताकत कम है।
पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ धार्मिक भेदभाव और अत्याचार का एक और मामला सामने आया है। कराची स्थित दाऊद यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ने होली मनाने पर हिंदू छात्रों को नोटिस जारी किया है। यही नहीं, कुछ छात्रों के खिलाफ FIR भी दर्ज कर दी गई है, जिन पर ‘राष्ट्र-विरोधी नारे’ लगाने का आरोप लगाया गया है।
ओम प्रकाश नाम के हिंदू छात्र को भेजे गए नोटिस में लिखा है, “21 फरवरी 2025 को यूनिवर्सिटी कैंपस में राज्य विरोधी नारा ‘तुहुंजो देश मुहुंजो देश सिंधु देश’ आपने नारा लगाया और शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित किया। ये नियमों का उल्लंघन है।” इसके बाद नोटिस में बताया गया है कि छात्र की यूनिवर्सिटी में एंट्री को बैन कर दिया गया है।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के पूर्व सदस्य लाल चंद मल्ही ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, “क्या अब पाकिस्तान में होली मनाना भी अपराध हो गया है?” मल्ही का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ती असहिष्णुता पर बहस छिड़ गई।
اب ہولی کا تہوار منانا بھی جرم بن گیا ہے ؟ کیا اب یونیورسٹی میں ہولی کا تہوار منانا بھی ریاست کے خلاف ہے ؟ دائود یونیورسٹی آف انجینئرنگ اینڈ ٹیکنالوجی کراچی میں ہولی منانے والے بچوں پر ریاست مخالف نعرے بازے کرنے کہ پرچہ درج۔ اسٹوڈنٹس کو نوٹسز۔ #LUMS#گولی_کیوں_چلائیpic.twitter.com/IWJtvgyrZg
यूनिवर्सिटी कैंपस में होली मनाने का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें छात्र रंग खेलते और त्योहार का आनंद लेते नजर आ रहे हैं। लेकिन इसके बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए नोटिस जारी कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया कि छात्रों ने ऐसा कुछ किया जो ‘राष्ट्रविरोधी’ हो सकता है।
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय पहले से ही भारी भेदभाव और हिंसा का शिकार है। खासकर ग्रामीण इलाकों में हिंदुओं को जबरन धर्म परिवर्तन, अपहरण और अत्याचार का सामना करना पड़ता है। कानूनी रूप से भी उनके लिए न्याय पाना मुश्किल होता है, क्योंकि कई बार कानून का दुरुपयोग कर उनके खिलाफ झूठे केस बनाए जाते हैं।
इस मामले पर भारतीय पत्रकार आदित्य राज कौल ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। कराची की इस यूनिवर्सिटी ने छात्रों को सिर्फ होली खेलने पर नोटिस जारी कर दिया और FIR तक दर्ज कर दी गई। कट्टरपंथी इस्लामी तत्व छात्रों को डराने में लगे हुए हैं।”
#BREAKING: Pakistan continues to target its minorities. Dawood University Karachi has issued a show-cause notice to students for celebrating the Hindu festival of Holi. FIR also registered against Hindu students. Islamist radicals have been intimidating students for playing Holi. pic.twitter.com/ginApv6kQg
पाकिस्तान में यह कोई नया मामला नहीं है। पहले भी कई बार हिंदू त्योहारों को रोकने, मंदिरों पर हमले करने और अल्पसंख्यकों पर झूठे आरोप लगाने की घटनाएँ सामने आई हैं। साल 2023 में लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी में होली खेलने पर हिंदू छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी और आधिकारिक तौर पर होली खेलने पर बैन लगा दिया गया था। यही नहीं, एक मौलाना ने ये कहते हुए होली का विरोध किया था कि पाकिस्तान में सिर्फ मोहम्मद का दिन मनेगा, कोई होली नहीं।
भारत का कण-कण अपनी शूरवीरता कहानी कहती है। इसके पग-पग पर बलिदान की गाथा है। विदेशी आक्रांताओं से लड़ते हुए यहाँ से वीरों ने ना समय देखा और ना उम्र, ना परिवार और ना परिणाम, बस राष्ट्र और धर्म को बचाने के अपने सनातन कर्तव्यों के लिए खुद को बलि वेदी पर न्योछावर कर दिए। ऐसे लाखों शूरवीरों की कहानी भारत की इस पवित्र भूमि में समाहित है। ऐसे ही एक शूरवीर का नाम हमीर सिंहजी गोहिल है।
गहलोत राजवंश के क्षत्रिय कुल में जन्म लेने वाले महाप्रतापी हमीर सिंहजी गोहिल एक ऐसे शख्सियत हैं, जिन्होंने सनातन परंपरा के मान्य द्वादशलिंगों में से प्रथम लिंग सोमनाथ मंदिर को बचाने के लिए अपने प्राणों की चिंता नहीं की। अब हमीर सिंह गोहिल पर ‘केसरी वीर’ नाम से एक फिल्म आ रही है, जिसमें उनके पराक्रम को दिखाया गया है। इस फिल्म में सुनील शेट्टी और विवेक ओबेरॉय मुख्य भूमिका में हैं।
प्रिंस धीमन और कनु चौहान द्वारा निर्मित केसरी वीर 14 मार्च 2025 को देश भर के सिनेमा घरों में रिलीज होगी। वीर हमीर सिंह जी गोहिल पर गुजराती में कई किताबें लिखी गई हैं और साल 2012 में एक गुजराती फिल्म ‘वीर हमीरजी- सोमनाथ नी सखाते’ बनी है। इस फिल्म को अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म की श्रेणी में भारतीय प्रस्तुति के रूप में भी चुना गया था। हालाँकि, अंतिम कट में यह फिल्म पिछड़ गई।
हाल ही में ऐसी ही एक फिल्म छावा रिलीज हुई है, जिसमें छत्रपति शिवाजी के पुत्र छत्रपति संभाजी के पराक्रम को दिखाया गया है। संभाजी ने मुगल आक्रांता औरंगजेब को नाकों चने चबवा दिया था। अंत में वे औरंगजेब की क्रूरता के शिकार बन गए, लेकिन उन्होंने अपने धर्म का त्याग नहीं किया। इस फिल्म को खूब सराहा जा रहा है।
वीर हमीर सिंह गोहिल की समाधि (साभार: nirvandiaries)
हमीर सिंह गोहिल और जफर खान का आक्रमण
भारत के इतिहास में वीर हमीर सिंह गोहिल को पराक्रम और उनके साहस के लिए याद किया जाता रहेगा। उन्होंने दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद तुगलक-II के गर्वनर जफर खान की सेना से युद्ध करते हुए अद्वितीय साहस का परिचय दिया था। उन्होंने अपने भील दोस्त वेगड़ा जी के साथ अपनी अंतिम साँस तक युद्ध किया और सोमनाथ मंदिर को बचाते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
बात 14वीं शताब्दी की है। गुजरात के अमरेली जिले के अर्थिला के राजा थे भीमजी सिंह गोहिल। उनके तीन बेटे थे। दुदाजी, अर्जुनजी और हमीरजी। एक बार अपने मझले भाई अर्जुन जी के साथ वे मुर्गों की लड़ाई के चक्कर में दोनों भाई के बीच विवाद हो गया और अर्जुन जी ने उन्हें सौराष्ट्र छोड़कर जाने का आदेश दे दिया। वे 200 क्षत्रियों को लेकर मारवाड़ की ओर चले गए।
कुछ समय के बाद अर्जुन जी अपनी गलती का अहसास हुआ और अपने छोटे भाई हमीर जी बुलवा भेजा। वे आपस आ गए। घर पहुँचकर वे अपने भाइयों और भाभी से मिले। इस तरह पूरी प्रजा हमीर जी के वापस आने पर खुश थी। तीनों भाई जंगलों में जाकर शिकार खेलने और युद्ध का लगातार अभ्यास करते। उनकी उम्र 16 साल थी, लेकिन अभी शादी नहीं हुई थी।
उधर, गुजरात के हालात बदल रहे थे। दिल्ली का सुल्तान मोहम्मद तुगलक द्वितीय जूनागढ़ में अपने गवर्नर शम्ससुद्दीन को हटाकर जफर खान को गवर्नर नियुक्त किया था। जफर खान बेहद ही क्रूर और धर्मांध था। वह गुजरात में हिंदुओं पर तरह-तरह से अत्याचार करता था और मंदिरों को ध्वस्त करता। जफर खान का अगला निशाना हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थस्थल सोमेश्वर धाम यानी सोमनाथ मंदिर था।
उसने सोमनाथ में रसूल खान को थानेदार नियुक्त किया और आदेश दिया को मंदिर में हिंदुओं को इकट्ठा ना होने दे। कहा जाता है कि उस दिन महाशिवरात्रि था और हर कोई भगवान शिव का अभिषेक करना चाहता था। रसूल खान ने उन्हें रोकने के लिए श्रद्धालुओें के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसे आक्रोशित हिंदू श्रद्धालुओं ने रसूल खान को मार डाला। इससे जफर खान को सोमनाथ मंदिर पर हमला करने का मौका मिल गया।
उधर, भीमजी सिंह गोहिल और उनके दोनों बेटे बदले हालात के लिए तैयार हो रहे थे, जबकि हमीर सिंह जी को इसके बारे में जानकारी नहीं थी। एक दिन वे दरबारगढ़ आए और अपने सबसे बड़े भाई दूदाजी की पत्नी खाना माँगा। तब उनकी बड़ी भाभी ने कहा, “क्यों देवर जी, इतनी जल्दी क्या है? खाना खाकर सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए साका करने जाना है?”
हमीर सिंह जी को पहली बार सोमनाथ मंदिर पर संकट के बारे में पता चला। उन्होंने अपनी भाभी से पूछा कि ‘क्या सोमनाथ पर संकट है?’ तब उनकी भाभी ने बताया कि दिल्ली का सूबेदार जफर खान अपने दल के साथ हमले के लिए रास्ते में है। यह बात सुनकर हमीर सिंह जी बिना खाना खाए ही खड़े हो गए। वे अपने 200 साथियों को लेकर जफर खान से लड़ने के लिए तैयारी करने लगे।
कहा जाता है कि रास्ते में हमीर सिंह जी को अंधेरी रात में किसी महिला के शोक गीत गाते हुए आवाज सुनाई दी। एक झोंपड़ी में एक वृद्ध चारण यह शोक गीत गा रही थी। हमीर सिंह ने वहाँ जाकर पूछा तो महिला ने कहा कि वह अपने मृत पुत्र के लिए शोकगीत गा रही है। इसके बाद वीर हमीर सिंह ने लाखबाई चारण नाम की वृद्धा से अपने लिए भी शोकगीत गाने को कहा और बताया कि वह सोमनाथ के लिए साका करने जा रहे हैं।
मंदिर के बाहर लगी वीर हमीर सिंह जी गोहिल की विशाल प्रतिमा (साभार: nirvandiaries)
तब महिला ने कहा, “बेटा हमीर तुम विवाहित हो?” तब हमीर सिंह ने कहा कि नहीं। तब वृद्ध चारण महिला ने कहा कि रास्ते में जो मिले उससे विवाह कर लेना, क्योंकि कुँवारों को युद्ध में वीरगति प्राप्त करने भी अप्सरा वरण नहीं करती हैं। रास्ते में उन्हें द्रोणगढा गाँव में भीलों के सरदार वेगड़ा मिल गए। दोनों मित्र थे। वेगड़ा ने अपनी युवा कन्या राजबाई थी, जिसका विवाह उन्होंने हमीर सिंह से कर दिया।
वेगड़ा भी हमीर सिंह जी के साथ जफर खान के खिलाफ युद्ध के लिए अपनी 1200 सैनिकों को लेकर निकल गए। वे सोमनाथ मंदिर के प्रांगण में पहुँचकर जफर खान की सेना का इंतजार करने लगे। जफर खान अपनी सेना के साथ जैसे सोमनाथ मंदिर की ओर बढ़ा, दोनों ओर के सैनिकों में भीषण युद्ध हुआ। जफर खान के सैनिक गाजर-मूली की तरह काटे जाने लगे। आखिरकार जफर खान ने हाथियों पर लाए तोपों का इस्तेमाल शुरू कर दिया।
इससे हमीर सिंह जी की सेना को भारी नुकसान हुआ। वेगड़ा अपनी सेना के साथ बाहरी रक्षा कवच के रूप में जफर खान से लड़ रहे थे। वहीं, हमीर सिंह मंदिर और गर्भगृह को बचा रहे थे। इसी बीच जफर खान के एक महावत ने अपनी हाथी को इशारा करके वेगड़ा को रौंद दिया। हमीर सिंह के साथी वीर वेगड़ा वीरगति को प्राप्त हो गए। जफर खान ने मंदिर को तीन तरफ से घेर रखा था और चौथी तरफ समुद्र था।
जफर खान की विशाल सेना को 200 राजपूतों की सेना ने रात भर उलझा कर रखा। रात में निर्णय हुआ कि सुबह होते ही जफर खान की सेना पर हमला किया जाएगा। ऐसा ही हुआ। सिर पर केसरिया साफा बाँधे शौर्यवान राजपूतों की सेना ने जफर खान पर हमला कर दिया। दोनोें से तरफ से भीषण युद्ध हुआ था। जफर खान की विशाल सेना के बीच राजपूत वीरगति को प्राप्त होने लगे।
इसी बीच जफर खान ने भी हमीर सिंह जी पर पीछे से हमला कर दिया। उनका सिर कट कर धरती पर गिर गया, लेकिन धड़ युद्ध करता रहा। आखिरकार बेजान धड़ कब तक लड़ता? वीर हमीर सिंह गोहिल सोमनाथ को बचाते हुए भगवान शिव के धाम चले गए। अकेले 9 दिनों तक वे जफर खान को मंदिर में घुसने नहीं दिए। उधर वृद्धा चारण हमीर सिंह जी गोहिल के लिए शोकगीत गाती रहीं। ऐसा रहा है हमीरसिंह जी का स्वर्णिम इतिहास।
सोमनाथ मंदिर का बार-बार विध्वंस
सोमनाथ मंदिर, जिसे सोमेश्वर भी कहा जाता है, भगवान शंकर को समर्पित हिंदुओं का प्रसिद्ध मंदिर है। कपिला, हिरण और सरस्वती नामक तीन नदियों का संगम पर यह स्थित है। कहा जाता है कि इस मंदिर को स्वयं चंद्रदेव ने बनवाया था। कालांतर में इस मंदिर का 649 ईस्वी में वल्लभी के यदुवंशी क्षत्रियों ने इसका निर्माण कराया। इस मंदिर पर पहला हमला अरब का सूबेदार अल जुनैद ने 725 ईस्वी में किया था।
इसके बाद प्रतिहार वंश के क्षत्रिय महाराजा नागभट्ट-II ने 815 ईस्वी में इस मंदिर का फिर से निर्माण कराया था। उन्होंने अपने आलेखों में इसका जिक्र किया है। उन्होंने इतिहास में लिखवाया है कि उन्होंने सोमेश्वर सहित सौराष्ट्र के कई तीर्थों का दौरा किया था। अरब यात्री अलबरूनी ने अपने संस्मरण में इस मंदिर के वैभव के बारे में विस्तार से बताया था। इससे गजनी का कबायली शासक महमूद आक्रर्षित हो गया।
उसने सोमनाथ पर आक्रमण कर लूटने की योजना बनाई और अपने 5000 सैनिकों को लेकर गुजरात की ओर चल पड़ा। सन 1026 में महाराजा भीमदेव सिंह सोलंकी-I का शासन था। उस समय तुर्क मुस्लिम शासक महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला कर दिया और लूटपाट करके इस ज्योतिर्लिंग को तोड़ दिया। कहा जाता है कि मंदिर से उसने उस समय वह 2 करोड़ दीनार लूटकर ले गया था।
एक शिलालेख के अनुसार, महाराजा कुमारपाल (शासनकाल 1143-72) ने ‘उत्कृष्ट पत्थरों से और रत्नों’ से सन 1169 में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण किया। उन्होंने लकड़ी के इस मंदिर को पूरी तरह बदल दिया। सन 1299 में उलुग खान के नेतृत्व में अलाउद्दीन खिलजी की सेना ने गुजरात पर फिर हमला किया। इसमें क्षत्रिय राजा कर्ण सिंह मंदिर को बचाते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।
उसके बाद मंदिर का पुनर्निर्माण सौराष्ट्र के चूड़सामा वंश के क्षत्रिय राजा महिपाल-I ने सन 1308 में करवाया। बाद में उनके बेटे खेंगारा गद्दी पर बैठे तो उन्होंने शिवलिंग की की स्थापना करवाई। यह कार्य उन्होंने सन 1331 और 1351 के बीच की थी। सन 1395 में इस मंदिर को तीसरी बार ज़फ़र खान ने नष्ट कर दिया। वह मोहम्मद बिन तुलगक-II का सेनापति था। बाद में वह गुजरात का सुल्तान बन गया था।
इसके बाद 1451 में गुजरात के सुल्तान मोहम्द बेगड़ा ने इसे फिर से नष्ट कर दिया। इसके बाद आजाद भारत में इस मंदिर के पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ। मंदिर के निर्माण की देखरेख और धन इकट्ठा करने के लिए सोमनाथ ट्रस्ट की स्थापना की गई थी। इस मंदिर की स्थापना के लिए 11 मई 1951 को भारत के राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने स्थापना समारोह आयोजित किया था।
वीर हमीर सिंह जी गोहिल की समाधि (nirvandiaries)
हमीर सिंह की समाधि पर चढ़ाकर मंदिर के शिखर पर चढ़ाया जाता है ध्वज
वर्तमान में इस ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। इस मंदिर को बचाने के लिए अपना प्राण उत्सर्ग करने वाले वीर हमीर सिंह गोहिल की प्रतिमा मंदिर में स्थापित है, जिसे मंदिर में आने वाले श्रद्धालु बड़े भक्तिभाव से पूजते हैं। वीर हमीर सिंह गोहिल के साथ भील समुदाय के उनके साथी वीर वेगड़ा की प्रतिमा भी मंदिर में स्थित है।
इसके अलावा, सोमनाथ मंदिर के बाहर घोड़े पर सवार और हाथ में भाला लिए वीर हमीर सिंह जी गोहिल की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है। इसका मंदिर और श्रद्धालुओं में विशेष महत्व है। सोमनाथ मंदिर के शिखर पर फहराया जाने वाला झंडा पहले वीर हमीर सिंह गोहिल के स्मारक पर चढ़ाया जाता है। उसके बाद मंदिर के शिखर पर लगाया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फरवरी, 2025 के अंतिम रविवार (23 फरवरी) को देशवासियों के साथ ‘मन की बात’ की। पीएम मोदी ने इस दौरान अन्तरिक्ष में भारत की सफलताओं से लेकर बोर्ड परीक्षाओं और मोटापे तक की समस्या पर अपने विचार रखे। पीएम मोदी ने देश में वैज्ञानिक वैचारिकता को बढ़ाने के लिए भी आइडिया सुझाए।
पीएम मोदी ने कहा, ” पिछले महीने देश इसरो (ISRO) के 100वें रॉकेट की लॉन्चिंग के साक्षी बने हैं। यह केवल एक नंबर नहीं है, बल्कि इससे अन्तरिक्ष विज्ञान में नित नई ऊंचाइयों को छूने के हमारे संकल्प का भी पता चलता है।” पीएम मोदी ने इस दौरान चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य L-1 समेत भारत की बाकी अन्तरिक्ष सफलताएँ गिनाईं।
देश में वैज्ञानिक माहौल को बढ़ावा देने के लिए युवाओं ने पीएम मोदी से कहा कि वह एक दिन अपना वैज्ञानिक के तौर पर मनाएँ। उन्होंने कहा, “हमारे बच्चों का, युवाओं का विज्ञान में रूचि और शौक होना बहुत मायने रखता है। इसे लेकर मेरे पास एक आइडिया है, जिसे आप ‘One Day as a Scientist’ कह सकते हैं।”
पीएम मोदी ने कहा, ” आप अपनी सुविधा के अनुसार, अपनी मर्जी के अनुसार, कोई भी दिन चुन सकते हैं। उस दिन आप किसी रिसर्च लैब, प्लेनेटोरियम, या फिर अन्तरिक्ष केंद्र जैसी जगहों पर जरूर जाएँ। इससे विज्ञान को लेकर आपकी जिज्ञासा और बढ़ेगी।” पीएम मोदी ने इस दौरान AI के क्षेत्र ने भारत की मजबूत स्थिति के बारे में भी बात की।
Highlighted an inspiring effort from Adilabad, Telangana of how AI can be used to preserve and popularise India’s cultural diversity. #MannKiBaatpic.twitter.com/52ADlv39hA
उन्होंने बताया कि AI का इस्तेमाल अब स्थानीय भाषाओं के संरक्षण में भी हो रहा है। उन्होंने तेलंगाना के एक ऐसे ही सरकारी शिक्षक का उदाहरण दिया। थोडासम कैलाश नाम के इन शिक्षक ने एक भाषा कोलामी में कई गीत बनाए हैं, यह उन्होंने AI की मदद से किया है।
पीएम मोदी ने ऐलान किया कि आगामी 8 मार्च को महिला दिवस के मौके पर वह अपने सोशल मीडिया अकाउंट देश की अलग-अलग महिलाओं को सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि यह महिलाएँ इस दिन उन एकाउंट्स से अपनी कहानियाँ और अनुभव साझा करेंगी।
देश-दुनिया में बढती मोटापे की समस्या पर भी पीएम मोदी ने बात की। पीएम मोदी ने कहा कि इस समस्या से लड़ने के लिए तेल की खपत कम करनी पड़ेगी। उन्होंने कह़ा, “आप तय कर लीजिए कि हर महीने 10% कम तेल उपयोग करेंगे। आप तय कर सकते हैं कि जो तेल खाने के लिए खरीदा जाता है, खरीदते समय ही अब 10% कम ही खरीदेंगे।”
How about ‘One Day as a Scientist’…where youngsters spend a day at a research lab, planetarium or space centre and deepen their connect with science? #MannKiBaatpic.twitter.com/wx0skFNHry
पीएम मोदी ने कह़ा कि यह मोटापा कम करने की दिशा में एक अहम कदम होगा। पीएम मोदी की इस बात का समर्थन एथलीट नीरज चोपड़ा और निखत जरीन ने भी किया। बोर्ड परीक्षाओं को लेकर भी पीएम मोदी ने बात की। उन्होंने अभ्यर्थियों से इस पर स्ट्रेस ना लेने को कहा है।
राजस्थान के अजमेर में 1990 के दशक में एक सेक्स स्कैंडल सामने आया था। इसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। अजमेर दरगाह से जुड़े नेताओं ने हिन्दू बच्चियों को फंसा कर उनका यौन शोषण किया था। ऐसा ही एक और कांड वापस अजमेर के पास के इलाके ब्यावर से 2025 में सामने आया जिसमें अनपढ़ मुस्लिम लड़कों ने गैंग बनाकर एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली हिन्दू बच्चियों को फंसाया। इस बीच अजमेर से 250 से अधिक बच्चियों के गायब होने की बात राजस्थान विधानसभा के स्पीकर ने कही है।
विधानसभा स्पीकर ने कहा- 200+ बच्चे गायब
राजस्थान विधानसभा के स्पीकर ने वासुदेव देवनानी ने ब्यावर के मुस्लिम गैंग के कांड को चिंताजनक बताया है। उन्होंने इसी के साथ कहा है कि अजमेर में 200-250 बच्चे गायब हुए हैं। उन्होंने कहा है कि इनमें अधिकांश लड़कियाँ हैं। उन्होंने इस पर चिंता जताई है। इससे जुड़ा आँकड़ा हाल ही में राजस्थान विधानसभा में सामने आया है। राज्य सरकार ने एक जवाब में बताया है कि बीते एक वर्ष में 7339 बच्चे गायब हुए हैं। राज्य सरकार के अनुसार, गायब होने वालों में अधिकांश लड़कियाँ हैं। हालाँकि, इनमें से कई को वापस खोज लिया गया है।
पुलिस ने बताया- 310 गायब हुए
अजमेर जिले की मानव तस्करी यूनिट के प्रभारी अशोक विश्नोई ने बताया है कि बीते एक साल में 310 बच्चों के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है। इनमें से 251 लड़कियाँ थीं। पुलिस ने बताया है कि इन गायब हुए बच्चों में कई को ढूंढ लिया गया है। पुलिस ने कहा है कि इसके लिए वह तकनीक का भी सहारा ले रही है। गायब हुए कई बच्चे-बच्चियों को दूसरे प्रदेशों से भी वापस ढूंढ कर लाया गया है। बच्चों का अपहरण करने वालों को गिरफ्तार किया गया है।
अजमेर में 2022 में POCSO के 85 मामले
राजस्थान अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) की एक रिपोर्ट बताती है कि 2022 में अजमेर जिले में 85 मामले POCSO के तहत दर्ज हुए थे। इसके अलावा जिले में रेप के मामले भी 200 से अधिक थे। अजमेर 2022 में महिलाओं से छेड़खानी के मामलों में भी टॉप पर रहा था। 2022 में अजमेर में महिलाओं से 687 मामले छेड़खानी के दर्ज हुए थे। अजमेर में लड़कियों के अपहरण के भी मामले 2022 में अधिक थे। इनकी संख्या 2022 में 331 थी।
ब्यावर कांड में आरोपितों के खिलाफ गुस्सा
ब्यावर में हिन्दू बच्चियों को फंसा कर उनका शारीरिक शोषण करने वाले और उन्हें ब्लैकमेल करने वाले मुस्लिम लड़कों के खिलाफ गुस्सा थम नहीं रहा है। इस मामले में गिरफ्तार 6 आरोपितों को वकीलों ने दोबारा पीटने की कोशिश कोर्ट परिसर में की। वहीं हिन्दू संगठनों ने इसको लेकर ब्यावर में एक प्रदर्शन रैली आयोजित की। जिस फैफे में हिन्दू लड़कियों को लाकर उनकी अश्लील तस्वीरें बनाई जाती थीं, उसको भी प्रशासन ने सील कर दिया है। उस पर बुलडोजर भी चल गया है।
ब्यावर कांड के आरोपित रिहान मोहम्मद (20 वर्ष), सोहेल अंसारी (19 वर्ष), लुकमान (20 वर्ष), अरमान पठान (19 वर्ष), साहिल कुरैशी (19 वर्ष) को कोर्ट ने दोबारा 7 दिन की रिमांड पर भेज दिया है। इससे पहले उन्हें 4 दिन की रिमांड पर भेजा गया था। पूछताछ के दौरान उन्होंने स्कूल बच्चियों को फंसाने के लिए पर्ची डालने और उन्हें कैफे ले जाकर अश्लील फोटो खींचने की बात कबूली थी। पीड़ित हिन्दू बच्चियों ने भी कैमरा पर कहा कि यह लड़के रोजा-कलमा और नमाज की ट्रेनिंग दी थी।
अजमेर कांड की आई याद
अजमेर में यह कांड 1992 में हुआ था। इस दौरान शहर में अचानक कई हिन्दू लड़कियों की न्यूड तस्वीरें वायरल होना शुरू हुई थी। लड़कियाँ सुसाइड करने लगी थीं और पूरा शहर इन तस्वीरों को देख शर्मसार हो रहा था। केस में रसूखदारों के नाम आने लगे थे। सेक्स कांड के आरोपितों के तार दरगाह के खादिमों से जुड़ते मिले थे। पता चला था कि अधिकांश पीड़िता शहर के सोफिया कॉलेज की छात्राएँ थी। मामले के खुलासे के 30 वर्षों तक केस चलता रहा था। इस मामले में 2024 में 6 आरोपितों को उम्रकैद की सजा मिली थी।
कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने दावा किया है कि उनकी हत्या के लिए ₹1 लाख का इनाम घोषित किया गया है और उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि यह धमकियाँ उन्हें तब से मिल रही हैं जब से उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती की आलोचना की थी। राज ने पुलिस से सुरक्षा की माँग करते हुए कहा कि उन्हें हर दिन सैकड़ों धमकी भरे फोन कॉल आ रहे हैं। दरअसल, उन्होंने कहा था कि अब मायावती का गला घोंटने का वक्त आ गया है।
#WATCH | Delhi: On receiving death threats, Congress leader Udit Raj says, "You can see the tweets of BSP chief Mayawati, BSP national coordinator Akash Anand, in which they have written in a threatening tone, after which I am getting death threats, and I have also recorded about… pic.twitter.com/UYmpZbqAcQ
उदित राज ने बताया कि उन्होंने कुछ धमकी भरे कॉल रिकॉर्ड कर लिए हैं और दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा को लिखित शिकायत के साथ सौंपे हैं। उन्होंने मायावती और उनके भतीजे व बीएसपी के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद पर इन धमकियों को भड़काने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग की।
क्या बोले थे उदित राज?
उदित राज ने 17 फरवरी 2025 को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने महाभारत में भगवान कृष्ण और अर्जुन के संवाद का जिक्र करते हुए कहा था, “जब अर्जुन ने कृष्ण से पूछा कि मैं अपने ही रिश्तेदारों को कैसे मारूँ, तो कृष्ण ने कहा था कि न्याय के लिए लड़ो और अपने लोगों को मारो। आज मेरे कृष्ण ने मुझसे कहा कि पहले अपने दुश्मन को खत्म करो।” इसके बाद उन्होंने कहा कि “समाजिक न्याय की सबसे बड़ी दुश्मन मायावती हैं, जिन्होंने सामाजिक आंदोलन का गला घोंट दिया। अब समय आ गया है कि उन्हें खत्म किया जाए।”
Urgent attention please..⚠️??
Congress leader Udit Raj openly gave death threat to Behen Mayawati ji. He is threatening to strangle her. Horrifying!
उन्होंने दलितों और मुसलमानों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा, “मुसलमान अकेले इस लड़ाई को नहीं लड़ सकते, और दलित भी अकेले सक्षम नहीं हैं।”
आकाश आनंद ने की कड़ी कार्रवाई की माँग
राज के बयान के बाद बीएसपी ने 18 फरवरी को लखनऊ और अन्य शहरों में प्रदर्शन किया और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। आकाश आनंद ने X पर पोस्ट कर यूपी पुलिस से 24 घंटे के भीतर उदित राज पर कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द कदम नहीं उठाया गया तो बहुजन समाज के युवा चुप नहीं बैठेंगे।
आज लखनऊ में मान्यवर कांशीराम साहेब के कुछ पुराने सहयोगी और कभी भाजपा कभी कांग्रेसी चमचे उदितराज ने साहेब के मिशन पर लंबा चौड़ा ज्ञान दिया है। जबकि उदितराज अपने स्वार्थ के लिए दूसरे दलों में मौका तलाशने के लिए कुख्यात है। उसे बहुजन मूवमेंट की चिंता सिर्फ इसलिए है ताकि वो किसी दल… https://t.co/Fp8lk500is
इसके बाद 19 फरवरी को उदित राज ने X पर सफाई देते हुए कहा कि उनके ‘गला घोंटने’ वाले बयान का मतलब गलत तरीके से लिया गया। वह सिर्फ यह कहना चाहते थे कि मायावती के असली चेहरे को पहचानना चाहिए और उनका समर्थन बंद कर देना चाहिए।
मुझे आश्चर्य हुआ कि बीएसपी के लोगों में कोई सोच भी है या नहीं। प्रेस कांफ्रेंस में मैंने कहा कि सुश्री मायावती ने बहुजन आंदोलन का गला घोटा है और अब इनका गला घोटने का समय आ गया है। बहुजन आंदोलन का गला घोटा, मतलब तलवार से किसी का गला मायावती जी ने नहीं काटा। मैंने एक ही वाक्य में…
20 फरवरी को रायबरेली में एक जनसभा के दौरान राहुल गाँधी ने मायावती पर निशाना साधा और कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने INDI गठबंधन से दूरी बना ली। राहुल ने कहा कि कॉन्ग्रेस चाहती थी कि बीएसपी उनके साथ मिलकर बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़े, लेकिन मायावती ने ऐसा नहीं किया।
#WATCH | During his interaction with students in Rae Bareli today, Congress MP Rahul Gandhi said, "We wanted Behenji to be with us in the fight against BJP. But for some reason, Mayawati ji did not do so. If all three parties had come together, the BJP would have never won…" pic.twitter.com/wwSnP54Z7x
राहुल गाँधी के आरोपों का जवाब देते हुए मायावती ने X पर कॉन्ग्रेस को ‘दोहरी मानसिकता’ और ‘जातिवादी सोच’ वाली पार्टी बताया। उन्होंने कहा कि जहाँ कॉन्ग्रेस मजबूत है, वहाँ वह बीएसपी के खिलाफ रहती है, लेकिन यूपी जैसे राज्यों में जहाँ वह कमजोर है, वहाँ गठबंधन की बातें करती है।
1. कांग्रेस पार्टी जिन राज्यों में मजबूत है या जहाँ उनकी सरकारें हैं वहाँ बीएसपी व उनके अनुयाइयों के साथ द्वेष व जातिवादी रवैया है, किन्तु यूपी जैसे राज्य में जहाँ कांग्रेस कमजोर है वहाँ बीएसपी से गठबंधन की वरग़लाने वाली बातें करना यह उस पार्टी का दोहरा चरित्र नहीं तो और क्या है?
मायावती ने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन हमेशा बीएसपी के लिए नुकसानदायक रहा है क्योंकि बीएसपी के वोट कॉन्ग्रेस को ट्रांसफर हो जाते हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस के वोट बीएसपी को नहीं मिलते।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिक्षा-स्वास्थ्य के नाम पर धर्मांतरण के खेल में शामिल गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के जाँच के आदेश दिए हैं। एजेंसियों के निशाने पर ऐसे NGO हैं, जिनकी विदेशों से फंडिंग होती है। छत्तीसगढ़ में कुल 153 संस्थाएँ हैं, जो विदेशों से फंडिंग लेने के लिए ‘विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FERA) के तहत पंजीकृत हैं। इनकी वित्तीय पड़ताल शुरू हो गई है।
प्रदेश में FERA के अंतर्गत पंजीकृत कुल 153 एनजीओ में इनमें से 52 ने खुद को ईसाई समुदाय से जुड़ा हुआ बताया है। दरअसल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक कार्यों के नाम पर बनाए गए इन एनजीओ की गतिविधियाँ संदिग्ध पाई गई हैं। इसको लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चेतावनी भी दी थी। उन्होंने धर्मांतरण को ना केवल अनैतिक, बल्कि संविधान की मूल भावना के भी विरुद्ध बताया था।
सीएम साय ने कहा था कि कुछ संदिग्ध NGO के बारे में जानकारी मिली है, जो धर्मांतरण के काम में लिप्त हैं। उन्होंने कहा था कि ये NGO शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर विदेशों से फंडिंग लेते हैं और उसका इस्तेमाल धर्मांतरण के लिए करते हैं। अशिक्षा, गरीबी, चंगाई या लोक-परलोक के नाम पर लोगों को बहकाकर और लालच देकर जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा था कि इसकी जाँच की जाएगी और पता लगाया जाएगा कि इन एनजीओ के पास पैसा कहाँ से आ रहा है और वे इन पैसों का कहाँ एवं कैसे उपयोग कर रहे हैं। इस मामले में नई दुनिया दैनिक अखबार ने FCRA पंजीकृत संस्थानों की जाँच की तो पाया कि ये अधिकांश एनजीओ ने अपने कार्य स्थल के रूप में जनजातीय इलाकों का चयन किया।
बस्तर में एफसीआरए पंजीकृत 19 में से 9 और जशपुर में 18 में से 15 संस्थाएँ ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित की जा रही हैं। राज्य में ईसाई मिशरियों द्वारा सबसे अधिक संस्थाएँ जशपुर में ही संचालित की जा रही हैं। यहाँ धर्मांतरण भी सबसे अधिक है। कहा जाता है कि जशपुर की कुल आबादी का 35 प्रतिशत से अधिक जनजातीय लोग ईसाई बन चुके हैं।
जशपुर में ईसाइयों की संख्या को लेकर मार्च 2024 में एक आरटीआई दाखिल किया गया था। इसमें बताया गया था कि सिर्फ 210 लोग ही कानूनी तौर पर धर्मांतरण करके ईसाई बने थे और उन सभी की मौत हो चुकी है। वहीं, 2011 की जनगणना रिपोर्ट की मानें तो जशपुर के 22.5 प्रतिशत लोगों ने खुद को ईसाई बताया था। अब यह आँकड़ा लगभग दोगुनी हो चुकी है।
बता दें कि राज्य में धर्मांतरण को लेकर 11 महीने में 13 FIR हुई हैं। वहीं, बस्तर संभाग में इसकी अलग-अलग 23 शिकायतें मिली हैं। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो छत्तीसगढ़ के बजट सत्र में राज्य की भाजपा सरकार धर्मांतरण पर नए एवं सख्त कानून ला सकती है। कहा जा रहा है कि इसकी तैयारियाँ भी शुरू हो गई हैं।
नए कानून को छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम नाम दिया गया है। इसका मसौदा तीन राज्यों के संंबंधित कानूनों का अध्ययन करने के बाद इसे तैयार किया गया है। नए कानून के लागू होने के बाद धर्म परिवर्तन से पहले सूचना देनी होगी। इसके अलावा, बिना इजाजत के धर्म परिवर्तन कर शादी करने पर वह शादी अमान्य होगी।
बहलाकर या लालच देकर धर्मांतरण कराना अपराध होगा। वहीं, दो या इससे अधिक लोगों को धर्मांतरण कराने को सामूहिक धर्मांतरण में शामिल किया गया है। इस तरह के अपराध के लिए 10 साल तक की जेल और 2 लाख रुपए जुर्माना की सजा का प्रावधान किया गया है। दूसरे धर्म के व्यक्ति/महिला से शादी के समय अपना धर्म छिपाना भी अपराध की श्रेणी में होगा।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण विरोधी मसौदे में नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों का अवैध धर्मांतरण कराने पर 2 साल से 10 साल तक की जेल हो सकती है। वहीं, सामूहिक धर्मांतरण का दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 3 साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक की सजा और 50,000 रुपए का जुर्माना हो सकता है।
कानून के मसौदे में कहा गया है कि धर्मांतरण अवैध नहीं था, यह साबित करने की जिम्मेदारी धर्मांतरण करने वाले और कराने वाले व्यक्ति की होगी। अब देखना ये है कि इस बार भी यह धर्मांतरण संशोधन विधेयक सदन में पास हो पाता है या नहीं, क्योंकि इससे पहले दो बार यह सदन से पारित नहीं हो सका है।
फ्रांस के मुलहाउस शहर में शनिवार (22 फरवरी 2025) को प्रदर्शन के दौरान ‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाते हुए एक व्यक्ति ने कई लोगों को चाकू मार दिया। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य घायल हो गए हैं। हमले में 2 पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हैं, जबकि 3 मामूली रूप से घायल हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे ‘इस्लामी आतंकवादी हमला’ बताया है।
हमलावर पुलिस अधिकारियों को निशाना बना रहा था। इसी दौरान 69 वर्षीय पुर्तगाल का एक नागरिक पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए आगे आया, लेकिन हमलावर ने उसे चाकू घोंप दिया। इस हमले में उस व्यक्ति की मौत हो गई है। जिस समय घटना हुई, उस समय मुलहाउस शहर में कांगो के समर्थन में प्रदर्शन हो रहा था। इस प्रदर्शन में यह इस्लामी हमलावर भी शामिल हुआ था।
फ्रांस के आतंकवादी निरोधी प्रॉसिक्यूटर निकोलस हेट्ज़ ने बताया है कि हमले में एक अधिकारी की गर्दन की धमनी (कैरोटिड आर्टरी) कट गई है। वहीं, दूसरे दूसरे की छाती (थोरैक्स) में गंभीर चोट आई है। इसके अलावा, तीन अधिकारियों को मामूली चोट आई है। हमले के बाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया और उस इस्लामी आतंकी को काबू में कर लिया।
मुलहाउस शहर की मेयर मिशेल लुट्ज़ ने शनिवार को सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर कहा, “हमारे शहर में आतंक की स्थिति है। एक व्यक्ति ने नहर के बाजार में राहगीरों पर चाकू से हमला किया, उसे रोकने के लिए हस्तक्षेप करने वाले कई नगरपालिका पुलिस अधिकारी भी घायल हो गए हैं।” इस मामले की जाँच आतंकवाद निरोधी एजेंसी PNAT कर रही है।
पुलिस ने 37 साल के हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है। वह अल्जीरिया का रहने वाला है। हमलावर पहले से ही फ्रांस के आतंकवादी निगरानी सूची (FSPRT) में शामिल था। वह न्यायिक निगरानी और हाउस अरेस्ट था। निगरानी के लिए संदिग्ध इस्लामी आतंकियों की यह सूची साल 2015 में शार्ली एब्दो कार्यालय और यहूदी सुपरमार्केट में हुए आतंकी हमलों के बाद बनाई गई थी।
फ्रांस के गृह मंत्री ब्रूनो रिटेलो ने कहना है कि इस हमलावर को पहले आतंकवादी कृत्य या समूह समर्थन करने के अपराध का दोषी ठहराया जा चुका है। रिटेलो ने कहा कि उसे अल्जीरिया निर्वासित किया जा रहा था, लेकिन उसके देश ने ही उसे स्वीकार करने से अब तक 10 बार इनकार किया है। उन्होंने कहा कि यह इस्लामी आतंकवाद है और इसकी वजह आप्रवासी की समस्या है।
इस हमले के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा, “हमारी सरकार फ्रांस की धरती पर से आतंकवाद को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।” उन्होंने इस हमले में मारे गए और घायल व्यक्तियों को प्रति संवेदना प्रकट की। मैक्रों ने कहा कि पूरा फ्रांस हमले के पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ खड़ा है।
जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में एक अदालत ने जितेन्द्र नारायण त्यागी की गिरफ्तारी का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश पैगम्बर मुहम्मद और इस्लाम पर की गई कथित तौर पर विवादित टिप्पणियों को लेकर दिया है। कोर्ट ने पुलिस से उन्हें गिरफ्तार कर पेश करने को कहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रीनगर की एक अदालत ने 20 फरवरी को अपने आदेश में कहा कि बार बार समन भेजे जाने और बुलाए जाने के बाद भी आरोपित (जितेन्द्र त्यागी) पेश नहीं हुआ। अदालत ने इसके बाद पुलिस को त्यागी की गिरफ्तारी के लिए एक टीम गठित करने को कहा।
अदालत ने कहा है कि पुलिस त्यागी को गिरफ्तार करके अगली सुनवाई पर उन्हें पेश करे। अदालत ने पुलिस को आदेश दिया है कि 25 अप्रैल, 2025 तक गिरफ्तारी और पेश करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। अदालत ने इस आदेश की कॉपी SSP को भेजने को कहा है।
जितेन्द्र त्यागी के विरुद्ध यह मामला 2021 में एक व्यक्ति ने दर्ज करवाया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जितेन्द्र नारायण त्यागी ने इस्लाम और पैगम्बर मुहम्मद को लेकर अपमानजनक टिप्पणियाँ की। शिकायत में जितेन्द्र त्यागी पर कार्रवाई की माँग की गई थी।
इसके बाद 2022 से चालू हुए इस मुकदमे में 10 बार से अधिक सुनवाई हो चुकी है लेकिन इस दौरान जितेन्द्र नारायण त्यागी पेश नहीं हुए हैं। ऐसे में अदालत ने इस बार उन्हें पेश करने का आदेश पुलिस को दिया है। जितेन्द्र नारायण त्यागी का पहले नाम वसीम रिजवी था।
वह इस्लाम से धर्मांतरण करके हिन्दू बन गए थे। इसके बाद उन्होंने अपना नाम जितेन्द्र नारायण त्यागी रख लिया था। वह इससे पहले उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन भी रहे थे। जितेन्द्र त्यागी लगातार इस्लाम की आलोचना के चलते चर्चा में रहे हैं। उनके खिलाफ और भी कई मामलों में FIR दर्ज की गई हैं।
अमेरिकी एजेंसी USAID द्वारा भारत में कथित तौर पर 21 मिलियन डॉलर की चुनावी फंडिंग को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि सरकार मामले की गहराई से जाँच कर रही है और जल्द ही तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा।
एस जयशंकर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी लिट्रेचर फेस्टिवल में बोलते हुए कहा कि USAID को काम करने की अनुमति ‘गुड फेथ’ यानी सद्भावना के तहत दी गई थी, लेकिन अब अमेरिका से संकेत मिल रहे हैं कि इसमें किसी विशेष नैरेटिव को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
जयशंकर ने कहा, “मुझे लगता है कि ट्रंप प्रशासन के कुछ लोगों ने कुछ जानकारी सार्वजनिक की है, जो निश्चित रूप से चिंताजनक है। इससे यह संकेत मिलता है कि कुछ गतिविधियाँ किसी विशेष उद्देश्य के तहत की जा रही हैं, ताकि एक खास नैरेटिव या विचारधारा को बढ़ावा दिया जा सके।” उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले की सक्रिय रूप से जाँच कर रही है। एक सरकार के रूप में हम इस मामले को देख रहे हैं, क्योंकि ऐसी संस्थाओं के लिए अपनी गतिविधियों की रिपोर्ट देना आवश्यक होता है। मेरा मानना है कि जल्द ही तथ्य सामने आएँगे।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फंडिंग को लेकर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका को भारत के चुनावों में हस्तक्षेप करने की जरूरत क्यों पड़ी? ट्रंप ने इस रकम को ‘किकबैक स्कीम’ करार दिया । 20 फरवरी को मियामी में एक कार्यक्रम के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने यूएसएआईडी की 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग पर सवाल उठाते हुए संदेह जताया था कि यह फंडिंग ‘किसी अन्य व्यक्ति को जिताने’ के लिए तो नहीं की गई थी।
बता दें कि कॉन्ग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है और माँग की है कि इस फंडिंग और अमेरिका से आने वाले अन्य अनुदानों पर श्वेत पत्र (White Paper) जारी किया जाए। कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया कि 2001 से अब तक $2.1 बिलियन अमेरिकी फंड भारत में आया है, जिसमें से 40% सिर्फ मोदी सरकार के कार्यकाल में आया। उन्होंने पूछा कि यह पैसा किसे और क्यों दिया गया?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर सरकार की ओर से बयान देते हुए कहा कि विभिन्न एजेंसियाँ इसकी गहराई से जाँच कर रही हैं और आवश्यक कदम उठाए जाएँगे। सरकार ने इस फंडिंग को ‘बेहद चिंताजनक’ बताया और भरोसा दिलाया कि सच्चाई जल्द सामने आएगी।