गुजरात के अहमदाबाद के उपनगरीय इलाके साणंद में हर शुक्रवार को सड़क पर नमाज पढ़ने की खबरें आती है, जिसकी वजह से स्थानीय लोगों खासकर व्यापारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है। ऐसे में शनिवार (8 मार्च 2025) को हिंदू नेताओं ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की माँग की है। व्यापारियों का कहना है कि इस समस्या का तुरंत हल निकाला जाए, क्योंकि इससे उनके व्यापार पर असर पड़ रहा है।
ज्ञापन में कहा गया है, ”साणंद में डाक चौक के पास एक मस्जिद है, जिसके बाहर की सड़क हर शुक्रवार को बंद कर दी जाती है। इस दौरान सड़क पर ही नमाज पढ़ा जाता है। जिसकी वजह से व्यापारियों, पैदल चलने वालों और आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।” ज्ञापन में कहा गया है कि मस्जिद 3 मंजिला इमारत में है। उसमें काफी जगह है। इसके बावजूद सिर्फ आम लोगों को परेशान करने के लिए सड़क पर नमाज पढ़ी जा रही है।
व्यापारियों ने प्रशासन से पूछा है कि क्या तीन मंजिला मस्जिद होने के बावजूद सड़क पर हो रही नमाज को लेकर कोई अनुमति दी गई है? अगर ऐसी व्यवस्था प्रशासन की तरफ से की गई है, तो ये प्रशासन हमें बता दे और अगर ऐसा कोई कदम प्रशासन ने नहीं उठाया है, तो वो तत्काल कार्रवाई करते हुए इन गतिविधियों को रुकवा दे।
हिंदू नेताओं और व्यापारियों ने कहा है कि अगर सड़क पर नमाज पढ़ना बंद नहीं हुआ, तो वो लोग आंदोलन के लिए मजबूर हो जाएँगे। इस ज्ञापन को साणंद के एसपी, अहमदाबाद के कलेक्टर, साणंद नगरपालिका के अध्यक्ष और मामलातदार को भी भेजी गई है। इसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास भी उपलब्ध है।
नमाज अदा करने वाले ज्यादातर प्रवासी, सुरक्षा व्यवस्था पर असर
प्रशासन से हस्तक्षेप की माँग करने वाले व्यापारियों और हिंदू नेताओं में आणंद शहर बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष कमलेश व्यास ने ऑपइंडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि काफी समय से सार्वजनिक सड़क पर नमाज पढ़ी जा रही है। इस दौरान घंटे – 2 घंटे के लिए सड़क बंद कर दी जाती है। लोगों का आना-जाना थम जाता है, तो व्यापार भी ठप पड़ जाता है।
कमलेश व्यास ने कहा कि अभी तो रमजान का महीना शुरू ही हुआ है, लेकिन भीड़ हर बार बढ़ती ही जा रही है। इनमें से अधिकतर नमाजी प्रवासी हैं। उनका सवाल है कि जब 3 मंजिला मस्जिद बनी है, उसके बावजूद सड़क पर नमाज क्यों पढ़ी जा रही। उन्होंने कहा, “हमें नमाज पढ़ने, किसी धर्म से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सार्वजनिक सड़कों को जाम करके नमाज पढ़ने से आम लोगों को समस्या हो रही है।”
भारत ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का फाइनल मैच न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराकर जीत लिया। भारतीय टीम की इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश में लोग खुशी मना रहे थे। गाँधीनगर के दहेगाम में भी लोगों ने जश्न मनाया, लेकिन दहेगाम में विजय जुलूस निकालना उन पर भारी पड़ गया, क्योंकि ‘उगमणोवास बड़ी मस्जिद’ के पास मुस्लिमों की भीड़ ने उन पर पथराव कर दिया। इस घटना के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और कुछ मुस्लिम हमलावरों को पकड़ भी लिया है।
यह घटना रविवार (9 मार्च 2025) को हुई। भारत की जीत के बाद गाँधीनगर के दहेगाम में हिंदू लोग विजय जुलूस निकाल रहे थे। जुलूस में लोग ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगा रहे थे। जब यह जुलूस कस्बे के इलाके में ‘उगमणोवास बड़ी मस्जिद’ के पास पहुँचा, तो वहाँ मौजूद मुस्लिम भीड़ ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इस हमले में कई गाड़ियों को भी तोड़ दिया गया।
दहेगाम में हुई इस पत्थरबाजी में 3 हिंदू नौजवान घायल हो गए। उन्हें फौरन गाँधीनगर के अस्पताल में ले जाया गया। घायल युवक धवल मिस्त्री ने दहेगाम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने हमलावरों मोहम्मद, अरबाज खान, ओवैश, साजिद हुसैन, वसीम, मोहम्मद तोफीक, संजय, मोहम्मद इरफान और नासिर खान के साथ-साथ 6 अनजान लोगों की भीड़ के खिलाफ मामला दर्ज किया। एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।
जीत का जश्न मना रहे लोगों को दी गालियाँ
एफआईआर में कहा गया है कि धवल मिस्त्री भारत की जीत की खुशी में अपने दोस्त की बाइक लेकर विजय जुलूस की बाइक रैली में शामिल हुए थे। रात करीब 11 बजे यह रैली मुस्लिम कस्बे में पहुँची। वहाँ ‘उगमणोवास बड़ी मस्जिद’ के पास एक मुस्लिम भीड़ बैठी हुई थी। शिकायत में बताया गया कि गाड़ियों की रेस की आवाज से भीड़ भड़क गई और ‘यहाँ क्यों आए हो?’ कहकर हमला कर दिया। यह भी आरोप है कि मुस्लिम भीड़ ने जीत का जश्न मना रहे लोगों को गालियाँ दीं।
एफआईआर की कॉपी
घायल का इलाज जारी, कुछ आरोपित गिरफ्तार
शिकायत में आगे कहा गया कि इस घटना के बाद 2-3 और मुस्लिम लोग हाथ में डंडे लेकर आए और जुलूस पर टूट पड़े। इस दौरान 7-8 बाइकों में तोड़फोड़ भी की गई। एफआईआर के मुताबिक, इसके बाद धवल मिस्त्री डर गए और अपनी बाइक वहीं छोड़कर भागने लगे। भागते वक्त वह घायल हो गए। फिर वहाँ मौजूद दूसरे हिंदुओं ने उन्हें रिक्शे में बिठाकर गाँधीनगर सिविल अस्पताल भेज दिया। डॉक्टर ने बताया कि धवल के पैर में फ्रैक्चर हो गया है।
अभी धवल मिस्त्री का इलाज चल रहा है। ऑपइंडिया से बात करते हुए उनके भाई ने बताया कि वह अस्पताल में अकेले हैं और अपने भाई का इलाज करवा रहे हैं। धवल के भाई राहुल अभी अस्पताल में उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना के बारे में बाद में और जानकारी देंगे। जब नई जानकारी आएगी, तो इस खबर को अपडेट कर दिया जाएगा।
दहेगाम पुलिस स्टेशन के पीआई देसाई ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने कहा कि जैसे ही घटना की खबर मिली, पुलिस मौके पर पहुँच गई और हालात को काबू में करने की कोशिश शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि मोहम्मद, अरबाज खान, ओवैश, साजिद हुसैन, वसीम, मोहम्मद तोफीक, संजय, मोहम्मद इरफान और नासिर खान के अलावा 6 अज्ञात लोगों की भीड़ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(2), 191(2), 191(3), 352 और 324(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गुजरात पुलिस के अधिकारी ने आगे बताया कि अभी अलग-अलग टीमें इसकी जाँच कर रही हैं। कुछ हमलावरों को पकड़ भी लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जाँच चल रही है। जब मौके से और खास जानकारी मिलेगी, तो इस खबर को अपडेट कर दिया जाएगा।
मूल रूप से ये रिपोर्ट गुजराती भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
अरुणाचल प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किए जाने का ईसाई विरोध कर रहे हैं। प्रदेश की जनसंख्या में एक तिहाई हिस्सा रखने वाले ईसाई समुदाय के कई संगठन इसको लेकर सड़क पर उतर आए हैं। यह कानून बीते 5 दशक पहले अरुणाचल विधानसभा की मंजूरी पा चुका है लेकिन अब तक लागू नहीं हो सका है। इस बीच राज्य में ईसाई आबादी 30 गुना बढ़ चुकी है। लेकिन अब भाजपा सरकार इस कानून को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह काम गुवाहाटी हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद हो रहा है।
क्यों हो रहा प्रदर्शन?
6 मार्च, 2025 को अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में लाखों ईसाई सड़कों पर उतरे। इन्हें अरुणाचल क्रिश्चियन फोरम (ACF) नाम के एक संगठन ने इकट्ठा किया था। यह ईसाई अरुणाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम कानून (APFRA) वापस लेने की माँग कर रहे हैं। यह कानून अरुणाचल प्रदेश के जनजातीय समुदाय के संरक्षण के लिए बनाया गया था।
ईसाई प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह क़ानून उनके धार्मिक अधिकारों पर हमला करता है और सरकार इसे लागू ना करे। इससे पहले फरवरी, 2025 में भी उन्होंने इस कानून के विरोध में एक बार भूख हड़ताल भी की थी। ACF ने दावा किया है कि यह क़ानून ईसाई समुदाय को लक्ष्य बनाकर लागू किया जाएगा।
ACF ने अरुणाचल प्रदेश के बाकी संगठनों से भी इस क़ानून का विरोध करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि इससे राज्य की लगभग एक तिहाई ईसाई जनसंख्या को नुकसान होगा। राज्य में विपक्षी कॉन्ग्रेस ने भी ईसाई संगठनों का समर्थन किया है और कहा है कि सरकार यह कानून लागू करके जबरदस्ती बवाल खड़ा करना चाहती है।
क्या कहता है यह क़ानून?
ईसाई समूह वर्ष 1978 में राज्य विधानसभा द्वारा पारित किए गए अरुणाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (APFRA) कानून को लागू ना करने की माँग कर रहे हैं। यह कानून लालच या दबाव से करवाए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए बनाया गया था।
इस कानून के अंतर्गत बौद्ध धर्म (मोनपा, मेम्बा, शेरदुकपेन, खम्बा, खम्पति और सिंगफोस द्वारा प्रचलित), वैष्णव (नोक्टेस द्वारा प्रचलित), आका और प्रकृति पूजक (दोन्यी-पोलो उपासक) को स्थानीय धर्म का दर्जा दिया गया था। यानी यह राज्य में पहले से मौजूद धर्म माने गए थे।
यह कानून कहता है, “कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्षत रूप से या किसी भी व्यक्ति को शक्ति, लालच किसी और झाँसे में लेके धार्मिक आस्था से किसी अन्य धार्मिक आस्था में परिवर्तित नहीं करेगा या परिवर्तित करने का प्रयास नहीं करेगा और ना ही कोई व्यक्ति ऐसे किसी धर्म परिवर्तन के लिए उकसाएगा।”
इसका उल्लंघन करने वाले को 2 साल की सजा और ₹10 हजार तक का जुर्माना झेलना पड़ सकता है। इसके अलावा कानून में यह भी स्पष्ट किया गया था कि राज्य में यदि कोई धर्मांतरण करना चाहता है तो उसे पहले प्रशासन को सूचित करना पड़ेगा। ऐसा ना करने पर 1 वर्ष तक की सजा या फिर ₹1000 का जुर्माना झेलना पड़ेगा।
1978 में पास हुआ, अब हो रहा लागू
अरुणाचल प्रदेश में यह कानून 1978 में जनता पार्टी के शासनकाल में लाया गया था। तब प्रेम खांडू थान्गुन यहाँ के मुख्यमंत्री थे। उनकी सरकार ने राज्य के जनजातीय समूहों की संस्कृति का संरक्षण करने और उन्हें धर्मांतरण के जाल से बचाने के लिए यह कानून पारित किया था। लेकिन बाद में लम्बे समय तक राज्य में कॉन्ग्रेस सरकारें रहीं और इसे लागू नहीं किया गया।
अरुणाचल प्रदेश में यह कानून इसलिए लाया गया था क्योंकि इससे पहले मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड जैसे राज्य में बड़ी आबादी ईसाई हो चुकी थी। हालाँकि, यह कानून 1978 के बाद से 2025 तक लागू नहीं हो सका। इसके पीछे राज्य में ईसाई समूहों का दबाव था।
अब यह कानून गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश के बाद लागू किया जा रहा है। सितम्बर, 2024 में हाई कोर्ट की ईटानगर बेंच ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि वह इसे लागू करने के लिए मसौदा तैयार करें। इसकी डेडलाइन मार्च में खत्म हो रही है, ऐसे में राज्य सरकार इस पर कदम बढ़ा रही है। वहीं इसके विरोध में ईसाइयों ने अपना प्रदर्शन तेज कर दिया है।
क्यों जरूरी है कानून लागू होना?
अरुणाचल प्रदेश में जहाँ दशकों तक इस कानून का विरोध ईसाई करते रहे हैं, वहीं इस बीच राज्य में ईसाइयों की आबादी लगभग 30 गुना बढ़ चुकी है। जनसंख्या के आँकड़े बताते हैं कि वर्ष 1971 में राज्य में मात्र 0.79% आबादी ही ईसाइयत मानती थी। 2011 की जनसंख्या में यह आँकड़ा 30% के पार पहुँच चुका था।
यह तेज बढ़त तब हुई जब अरुणाचल प्रदेश को इंदिरा गाँधी ने 1971 में केन्द्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया। इसके बाद राज्य में राजीव गाँधी के राज के दौरान जब यह राज्य बना तो इसने और भी तेज रफ्तार पकड़ ली। वहीं इसी दौरान हिन्दुओं की आबादी केवल 22% से 29% तक ही पहुँची है।
अरुणाचल प्रदेश में 1971 से 2011 के बीच सबसे तेजी से बौद्धों और स्थानीय मान्यताओं को मानने वाले (अधिकांश दोन्यी पोलो) की संख्या में कमी आई है। जनसंख्या रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 1971 में राज्य की 63% आबादी स्थानीय धर्मों को मानने वाली (अधिकांश दोन्यी पोलो) और 13% से अधिक बौद्ध थे।
2011 आते-आते बौद्ध जनसंख्या जहाँ घट कर 11% पर आ गई है तो वहीं दोन्यी पोलो राज्य में मात्र 26% पर आ गए हैं। राज्य में अब आगे और भी धर्मांतरण ना हो सके, इसलिए राज्य में कानून लागू हो रहा है तो ईसाई संगठन विरोध कर रहे हैं। हालाँकि, इस कानून को यहाँ के स्थानीय समूहों ने पूरा समर्थन दिया है।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और बेटे चैतन्य के घर पर ED ने 10 मार्च 2025 को छापेमारी की है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों के सिलसिले में की गई। ईडी की टीम ने भिलाई स्थित चैतन्य बघेल के निवास समेत कुल 14 स्थानों पर एक साथ छापे मारे।
VIDEO | ED raids Congress leader Bhupesh Baghel's premises in Bhilai as part of a money laundering investigation against his son – Chaitanya Baghel – in an alleged liquor scam case.
Chaitanya Baghel shares the Bhilai accommodation with his father and hence the premises are being… pic.twitter.com/AdUWic1y26
ईडी का आरोप है कि भूपेश बघेल के कार्यकाल में 2161 करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ, जिसमें कई उच्च पदस्थ अधिकारी और कारोबारी शामिल थे। उन्हें संदेह कि इस घोटाले में चैतन्य बघेल भी शामिल हो सकते हैं। टीम अपनी छानबीन कर रही हैं।
VIDEO | On ED conducting raids premises of party leader Bhupesh Baghel as part of its probe against his son in Bhilai, Congress MP Ranjeet Ranjan (@Ranjeet4India) says, "This is not something new, and his family is repeatedly being harassed, but we respect the court. The ED -… pic.twitter.com/M27B15ew9X
इस बीच भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा यह एक झूठा मामला है जो पिछले सात वर्षों से चल रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यदि कोई पंजाब में कॉन्ग्रेस को रोकने का प्रयास कर रहा है, तो यह गलतफहमी है।
सात वर्षों से चले आ रहे झूठे केस को जब अदालत में बर्खास्त कर दिया गया तो आज ED के मेहमानों ने पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल के भिलाई निवास में आज सुबह प्रवेश किया है.
अगर इस षड्यंत्र से कोई पंजाब में कांग्रेस को रोकने का प्रयास कर रहा है, तो यह गलतफहमी है.
इस छापेमारी की खबर सुनने के बाद पार्टी सांसद मणिकम टैगोर ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि ईडी पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री का पालतू कुत्ता बन गई है। वे इस कुत्ते को जहाँ चाहते हैं वहाँ भेज देते हैं। भूपेश बघेल कॉन्ग्रेस के मजबूत नेता हैं और उन्होंने ऐसी जंग लड़ी हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी और छत्तीसगढ़ के लोग उनके साथ खड़े हैं हम सभी जानते हैं कि भाषा और आरएसएस की गढ़ी झूठी बातें हारेंगी।”
पश्चिम बंगाल में एक बार फिर हिंदू मंदिरों पर हमले की खबर सामने आई है। रविवार (9 मार्च 2025) को बशीरहाट शहर के शंखचूरा बाजार में काली माता के मंदिर में कट्टरपंथियों ने तोड़फोड़ की और काली माता की मूर्ति को खंडित कर दिया गया। इस भीड़ की अगुवाई स्ठानीय टीएमसी नेता शाहनूर मंडल कर रहा था।
भाजपा नेता दिलीप घोष ने सोशल मीडिया एक्स पर बताया कि माँ काली की मूर्ति को नुकसान पहुँचाया गया। उनके मुताबिक, ये हमला स्थानीय टीएमसी नेता शाहनूर मंडल के नेतृत्व में हुआ, जो निंदरिया पंचायत से हैं। दिलीप घोष ने लिखा, “बशीरहाट पुलिस स्टेशन के तहत शंखचूरा बाजार के काली मंदिर में मूर्ति तोड़ी गई। ये शाहनूर मंडल के इशारे पर हुआ।”
1.1 In a shocking incident, the idol of Goddess Kali was vandalized at the Kali temple in Shankhchura Bazaar, under the jurisdiction of the Basirhat Police Station. The act of vandalism reportedly took place under the leadership of Shahanoor Mondal (TMC) of Nindaria Panchayat. pic.twitter.com/9t3z5by2KG
— Dilip Ghosh (Modi Ka Parivar) (@DilipGhoshBJP) March 9, 2025
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमित मालवीय ने भी इस घटना पर गुस्सा जताया। उन्होंने कहा, “जादवपुर के बाद अब बशीरहाट दक्षिण विधानसभा के शंखचारा बाजार में काली माता की मूर्ति क्षतिग्रस्त की गई। टीएमसी विधायक इसे भाजपा की साजिश बता सकते हैं या कह सकते हैं कि हिंदुओं ने खुद ऐसा किया। ममता बनर्जी पिछले पाँच दिनों से हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचार पर चुप क्यों हैं?”
West Bengal is fast turning into another Bangladesh.
After Jadavpur, another incident has emerged—an idol of Goddess Kali has been vandalized in Sankhachara Bazaar, located in the Basirhat South Assembly constituency.
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष डॉ. सुकांत मजूमदार ने भी टीएमसी और ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर लिखा, “साकचुरो बाजार में मंदिर में घुसकर माँ काली की मूर्ति के हाथ, पैर और सिर तोड़ दिए गए। शाहनूर मंडल के कट्टरपंथी गुट ने हिंदुओं को जान से मारने की धमकी दी। पुलिस खामोश है। ममता बनर्जी, बहुत हो गया! अगर आप पश्चिम बंगाल को ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ समझती हैं, तो गलतफहमी में हैं। हम हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। भाजपा इसका जवाब देगी।”
At the Sakchuro Bazar area of Nindaria Gram Panchayat, under the Basirhat Dakshin Assembly constituency, a temple was forcibly entered, and the idol of Shri Shri Kali Mata was vandalized—Her hands, feet, and head broken. Local Hindus are also being threatened with death by the… pic.twitter.com/Fv9vI3AxIw
— Dr. Sukanta Majumdar (@DrSukantaBJP) March 9, 2025
ये पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में मंदिरों पर हमले हुए हैं। भाजपा ने ममता सरकार से सख्त कार्रवाई की माँग की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।
बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट करने में बड़ा हाथ संयुक्त राष्ट्र (UN) था। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNCHR) के कमिश्नर ने खुद यह बात कबूली है। उन्होंने एक इंटरव्यू में यह बात स्वीकार की है कि उन्होंने बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों के प्रदर्शन के दौरान फ़ौज के हाथ बाँध दिए थे।
BBC के साथ एक इंटरव्यू में हाई कमिश्नर वोल्कर तुर्क ने यह बातें कहीं हैं। उन्होंने कहा है कि UN ने फ़ौज को ISIS, अल कायदा और हरकत उल अंसार जैसे इस्लामी कट्टरपंथियों पर एक्शन लेने से मना किया था। उन्होंने बांग्लादेशी फ़ौज को धमकाया भी था।
क्या कहा वोल्कर तुर्क ने?
5 मार्च, 2025 को BBC के हार्डटॉक कार्यक्रम में तुर्क से गाजा, सूडान, यूक्रेन समेत बाकी इलाकों पर बात की। इस दौरान BBC ने कहा कि इन सभी इलाकों में UN एकदम निष्प्रभावी रहा है। तुर्क ने इसके बाद बांग्लादेश का उदाहरण दिया।
वोल्कर तुर्क ने कहा, “मैं आपको पिछले साल बांग्लादेश का उदाहरण दे रहा हूँ। जुलाई-अगस्त के दौरान, छात्रों द्वारा वहाँ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ था। वह शेख हसीना सरकार से तंग आ चुके थे, वहाँ बड़े पैमाने पर दमन हो रहा था।”
उन्होंने आगे कहा, “उनके लिए (प्रदर्शनकारियों) सबसे बड़ी उम्मीद वास्तव में हमारी आवाज़, मेरी आवाज़ और हम जो कर पाए, वह थी। हमने स्थिति पर ध्यान दिया और फ़ौज को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोका, तो उन्हें शांति अभियानों में सैनिक नहीं भेजने दिए जाएँगे। इसके बाद फ़ौज के रुख में बदलाव आया।”
क्यों UN की धमकी से डरी बांग्लादेशी फ़ौज
गौरतलब है कि बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र के शान्ति मिशन में बड़ी संख्या में सैनिक भेजता है। वर्तमान में बांग्लादेश ने लगभग 5000 सैनिक UN मिशन में भेजे हुए हैं। UN मिशन में गए सैनिकों को औसत तनख्वाह से अधिक पैसा मिलता है और फ़ौज को भी इससे कमाई होती है।
बांग्लादेश को शान्ति मिशन से हर साल लगभग ₹2600 करोड़ की कमाई होती है। इनमें से आधा ही वह अपने सैनिकों को देता है। बाकी पैसा फ़ौज के हिस्से जाता है। इससे उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी बड़ी जगह मिलती है।
ऐसे में UN की यह धमकी फ़ौज पर काम कर गई और उन्होंने अंत समय में शेख हसीना के आदेश मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा और दंगाइयों ने हिंसा जारी रखी। मोहम्मद यूनुस ने इसके बाद सत्ता पर कब्जा कर लिया था।
यूनुस और UN किस तरह आपस में मिले हुए थे, इसकी सच्चाई भी तुर्क ने बता दी। उन्होंने बताया कि मोहम्मद यूनुस ने सत्ता संभालते ही UN से एक जाँच कमिशन बनवाया। इसके लिए उन्होंने तुर्क से सम्पर्क किया। तुर्क ने बताया कि उन्होंने यूनुस की पूरी मदद की।
उन्होंने यह भी बताया कि मोहम्मद यूनुस ने तुर्क से फ़ौज पर नियंत्रण करने को कहा था। UN अब शेख हसीना के शासन के दौरान हुए कथित दमन को लेकर रिपोर्ट तैयार कर रहा है। वहीं अभी तक UN की तरफ से यह नहीं पूछा गया हैकि बांग्लादेश में यूनुस किस हैसियत से सत्ता पर काबिज हैं।
उत्तर प्रदेश के आगरा में चैंपियंस ट्रॉफी का मैच देख रहे एक युवक की हत्या कर दी गई। बाइक पर आए कुछ लोगों ने उसकी चाकू गोदकर हत्या कर दी। हत्यारे इसके बाद फरार हो गए। पुलिस अब मामले की जाँच में जुटी है। वहीं हरियाणा के रोहतक में पुलिस ने चैंपियंस ट्रॉफी मैच के बाद जीत का जश्न मना रही भीड़ को तितर बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आगरा के आवास विकास कॉलोनी के रहने वाले सिद्धांत शर्मा की रविवार (9 मार्च, 2025) को हत्या की गई है। सिद्धांत इस दौरान अपने तीन दोस्तों के साथ एक जगह खड़े होकर चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल देख रहा था। उसके साथ मौजूद दोस्तों ने बताया कि मैच देखने के दौरान ही तीन युवक बाइक पर आए।
पहले उन्होंने इन लोगों पर रौब जमाया और गालीगलौज की। इसके बाद उन्होने सिद्धांत से पैसे माँगे। इस बीच इंडिया टीम को लेकर भी कुछ टिप्पणियाँ हुईं। जब विवाद बढ़ा तो हमलावरों ने चाकू निकाल लिया और सिद्धांत की उससे गोद कर हत्या कर दी। उन्होंने बाकियों के साथ भी मारपीट की।
सिद्धांत के दोस्तों ने इसके बाद पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुँची और जाँच चालू की। सिद्धांत बीटेक का छात्र था और अपने पिता के साथ व्यापार में भी हाथ बटाता था। पुलिस को घटना स्थल से बीयर के कैन वगैरह मिले हैं। पुलिस पुरानी रंजिश के एंगल से भी जाँच कर रही है। अभी हमलावर पकड़ में नहीं आए हैं। पुलिस आसपास CCTV जाँच रही है।
वहीं हरियाणा के रोहतक में चैंपियंस ट्रॉफी में जीत के बा एक चौराहे पर इकट्ठा हुए युवकों पर पुलिस लाठियाँ चलाईं। मैच में जीत के बाद देर रात तक रोहतक में जीत का जश्न चल रहा था। इसी दौरान पुलिस भीड़ को हटाने पहुँची, यहाँ किसी बात पर तकरार हुई और पुलिस को भीड़ तितर करने के लिए लाठी चलानी पड़ी।
जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में बर्फ के बीच फैशन शो आयोजित होने से इस्लामी कट्टरपंथी नाराज हैं। हाल में हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि पर्यटन के नाम पर अश्लीलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं उमर अब्दुल्ला ने उन्हें तसल्ली देते हुए अपने ट्वीट में लिखा कि वो इस मामले पर लोगों का गुस्सा समझते हैं इसलिए उन्होंने स्थानीय प्रशासन से इस मामले पर रिपोर्ट तलब करने को कहा है।
बता दें कि ये फैशन शो लक्जरी ब्रांड Elle India की 15वीं वर्षगाँठ के अवसर पर शुक्रवार (7 मार्च) को गुलमर्ग के स्काइ रिसॉर्ट के पास खुले आसमान के नीचे आयोजित किया गया था। इसकी एक वीडियो सामने आई थी, जिसे देखने के बाद मीरवाइज उमर फारूक समेत कई मजहबी नेता भड़क उठे।
Gulmarg's snowy slopes recently hosted a stunning fashion show, showcasing Kashmir's peaceful revival. But Islamist radicals & local politicians are up in arms, deeming it a 'national security threat'! Talk about misplaced priorities! Frustrated folks! #Kashmir#FashionForPeacepic.twitter.com/b9haijcaYM
मीरवाइज उमर फारूक ने कहा, “बेहद शर्मनाक! रमज़ान के पाक महीने में गुलमर्ग में एक अश्लील फैशन शो आयोजित किया गया। इसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए हैं, जिससे लोगों में गुस्सा है और वो सदमे में हैं।” फारूक ने आगे कहा कि सूफी-संत संस्कृति और लोगों की गहरी मजहबी आस्था वाली इस घाटी में ये सब कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है?
Outrageous! That In the holy month of Ramzan an obscene fashion show is organised in #Gulmarg, pictures & videos from which have gone viral sparking shock and anger among people. How could it be tolerated in the valley known for its sufi, saint culture and the deeply religious…
— Mirwaiz Umar Farooq (@MirwaizKashmir) March 9, 2025
फारूक के इसी ट्वीट पर उमर अब्दुल्ला का ट्वीट आया। उन्होंने मीरवाइज के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “आपका गुस्सा पूरी तरह जायज है। मैंने जो तस्वीरें देखी हैं उसमें स्थानीयों की पूरी तरह से उपेक्षा दिखाई देती है और वह भी इस पाक महीने में…। मेरा कार्यालय स्थानीय लोगों के संपर्क में है। अगले 24 घंटे के भीतर एक रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
The shock & anger are totally understandable. The images I have seen show a complete disregard for local sensitivities & that too during this holy month. My office has been in touch with the local authorities & I’ve asked for a report to be submitted within the next 24 hours.… https://t.co/xwY17ZdeAt
— Office of Chief Minister, J&K (@CM_JnK) March 9, 2025
बता दें कि मीरवाइज अकेला नहीं है जिसे इसे फैशन शो से समस्या हुई हो। आवामी इत्तेहाद पार्टी के विधायक खुर्शीद अहमद शेख ने भी गुलमर्ग में हुए फैशन शो की निंदा की। खुर्शीद ने पूछा, “रमज़ान के पाक महीने में गुलमर्ग में इस शर्मनाक फैशन शो की अनुमति किसने दी? बर्फ पर अर्धनग्न पुरुषों और महिलाओं के साथ, क्या पर्यटन विभाग और गुलमर्ग विकास प्राधिकरण (GDA) के सीईओ अपना पक्ष स्पष्ट करेंगे? आप हमारे नैतिक, सांस्कृतिक और मजहबी मूल्यों को नष्ट करने पर इतने क्यों तुले हुए हैं?”
भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर देश को जश्न का मौका दिया, लेकिन कॉन्ग्रेस शासित तेलंगाना में क्रिकेट प्रशंसकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पूरे देश में लोग जीत की खुशी मना रहे थे, वहीं तेलंगाना के शहरों करीमनगर और हैदराबाद के दिलसुखनगर में तिरंगा लिए फैंस को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैदराबाद के दिलसुखनगर में भीड़ जश्न मना रही थी, लेकिन पुलिस ने लाठियाँ भाँजकर उन्हें खदेड़ दिया। करीमनगर में भी तिरंगे के साथ जश्न मनाने वालों को रोक दिया गया और झंडा लहराने तक की इजाजत नहीं दी। लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि कॉन्ग्रेस सरकार भारत की जीत पर जश्न को क्यों रोक रही है, जबकि पाकिस्तान की जीत पर कुछ नहीं कहती। केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने इस मुद्दे पर तेलंगाना की कॉन्ग्रेस सरकार को घेरा।
This is how the Congress govt. in Telangana not allowing India’s #ChampionsTrophy2025 win celebrations.
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “हैदराबाद पुलिस ने दिलसुखनगर में लाठीचार्ज किया। लोग भारतीय टीम की जीत का जश्न मना रहे थे। करीमनगर में भी ऐसा ही हुआ। कॉन्ग्रेस शासित राज्यों का ये नया तरीका है? वे किसे खुश करना चाहते हैं? भारतीय कहाँ जश्न मनाएँ?”
Hyderabad police used lathicharge in Dilsukhnagar to stop citizens from celebrating India’s Champions Trophy victory. Similar scenes were reported in Karimnagar as well. Is this the new playbook in Congress-ruled states? Who exactly are they trying to appease? Where are Indians… pic.twitter.com/z34BOHQd6C
करीमनगर के बीजेपी सांसद बंदी संजय कुमार ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “तेलंगाना के गृह मंत्री रेवंत रेड्डी बताएं- करीमनगर पुलिस किस देश का समर्थन कर रही है? भारत की जीत का जश्न नहीं मना सकते, लेकिन पाकिस्तान का नाम लिखी फ्लेक्सी हटाई जाएगी? जीत का उत्सव सांप्रदायिक कैसे हो गया? तेलंगाना डीजीपी और खुफिया विभाग बताएँ कि पुलिस कानून-व्यवस्था क्यों बिगाड़ना चाहती है? युवा कॉन्ग्रेस को इसका जवाब देंगे।”
Can the Home Minister of Telangana Shri Revanth Reddy garu clarify – which country is Karimnagar police supporting?
We can’t celebrate India’s win, but a flexi with Pakistan’s name will be removed?
— Bandi Sanjay Kumar (@bandisanjay_bjp) March 9, 2025
लोगों में नाराजगी है कि अपनी ही जीत पर खुशी मनाने की आजादी छीनी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी सवाल उठ रहे हैं कि कॉन्ग्रेस की ऐसी मानसिकता क्यों है।
बता दें कि दिलसुखनगर वही इलाका है, जो 2 बार आतंकी हमलों का शिकार रहा है। साल 2002 में सिमी आतंकियों ने टाइम बॉम्ब का इस्तेमाल करके धमाका किया था, तो साल 2013 में इंडियन मुजाहिद्दीन के दोहरे धम धमाकों में 17 लोग मारे गए और 80 से ज्यादा घायल हुए। इस मामले में इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकियों को सजा भी सुनाई गई थी।
मध्य प्रदेश के इंदौर में चैंपियंस ट्रॉफी का जश्न मनाते लोगों पर मस्जिद से निकली मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। रमजान में मस्जिद में मौजूद लोगों ने चैंपियंस ट्रॉफी का जश्न मनाने वालों पर पथराव किया। इंदौर के कुछ इलाकों में कई गाड़ियों में आग लगाई गई। इस घटना के कई वीडियो भी वायरल हुए हैं।
रविवार (9 मार्च, 2025) को भारत ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया था और चैंपियंस ट्रॉफी जीत ली थी। इसके बाद पूरे देश में जश्न का माहौल था। इंदौर में भी युवा इसका जश्न मना रहे थे। उन्होंने बाइक पर बैठ कर इंदौर के अलग-अलग इलाकों में जुलूस निकाला।
जब यह सभी इंदौर के महू शहर में जामा मस्जिद रोड पर पहुँचे तो मस्जिद के सामने विवाद हो गया। एक वायरल वीडियो में दिखता है कि जुलूस के यहाँ पहुँचते ही मस्जिद से मुस्लिम भीड़ निकल आती है। इसके बाद शोर मचने लगता है। इस दौरान जुलूस में शामिल लोग टीम की जीत पर नारे लगा रहे होते हैं।
— Rishi Tripathi ऋषि त्रिपाठी ??? (@IndiatvRishi) March 9, 2025
कुछ ही देर में यहाँ जुलूस पर हमला हो जाता है। वायरल वीडियो में अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के शोर भी सुनाई पड़ते हैं। इसके बाद लोग इधर उधर भागते हैं और पथराव होने लगता है। एक और वीडियो में दिखाई पड़ता है कि अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाती भीड़ एक स्कूटी तोड़ रही है।
इसके बाद यह पथराव जामा मस्जिद के अलावा पत्ती बाजार, सब्जी मार्केट, गफ्फार होटल समेत कई इलाके हिंसा की चपेट में आ गए। यहाँ भारतीय क्रिकेट टीम के फैन्स पर जम कर पथराव हुआ। इस पथराव के बाद दंगाई भीड़ ने कई गाड़ियों में आग भी लगा दी।
Crowd celebrating Team India victory in #ChampionsTrophy2025 attacked with stones by people of "Peaceful community" near Jama Masjid in Mhow (MP) during Ramadan.
Two groups clashed leading to Stone-Pelting, arson, fire reported!
पेट्रोल बम भी चलाए जाने की सूचना है। दंगाई भीड़ ने कई जगह काफी गाड़ियाँ तोड़ी भी हैं। पथराव-आगजनी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। दंगे की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस के साथ ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ भी शहर में अलग-अलग जगह भेजी गईं।
इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वत्सल ने इस घटना के बारे में कहा, “इंडिया न्यूजीलैंड मैच के बाद जुलूस निकल रहे थे, इसमें मस्जिद के बाहर पटाखे चले तो विवाद हो गया। इसके बाद दो पक्षों के बीच पथराव हो गया। पुलिस बल अब मौजूद है। स्थिति नियंत्रण में है। अभी कुछ लोगों को चिन्हित किया गया है। रात को ही उनको पकड़ा गया है।”
#WATCH | Madhya Pradesh | Indore Rural SP Hitika Vasal says, "Tension occurred between the two sides here, and some incidents of violence have taken place. The incident took place after the victory of team India. The incident occurred over firecrackers. The situation is… https://t.co/6jMBk0F3rCpic.twitter.com/2bpr0Q8FvV
एसपी ने अपील की कि लोग अफवाह ना फैलाएँ और उन पर विश्वास भी करें। एसपी वत्सल के अनुसार, 3 लोग इस पथराव में घायल हुए हैं। पुलिस ने घटना के बाद महू में लाठीचार्ज भी किया है। 300 से अधिक पुलिसवाले यहाँ तैनात किए गए हैं।
महू, भारतीय सेना का भी एक प्रमुख केंद्र है। इसके चलते प्रशासन ने सेना की भी त्वरित कार्यवाही बल (QRT) की 8 टुकडियां भी बुला लीं। सेना ने भी शहर में फ्लैग मार्च किया। पथराव करने वालों कड़ी कार्रवाई की माँग कई संगठनों ने की है।