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अब The Hindu के पत्रकार महेश लांगा को ED ने किया गिरफ्तार, मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है मामला: अखबार में नाम छापकर बदनाम करने की देता था धमकी, करता था वसूली

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार (25 फरवरी 2025) को गुजरात में ‘द हिंदू’ के पत्रकार महेश लांगा को वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार कर लिया। दरअसल, केंद्रीय जाँच एजेंसी ने अहमदाबाद के पुलिस उपायुक्त द्वारा महेशभाई लांगा और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी एवं आपराधिक विश्वासघात के आरोप में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर यह जाँच शुरू की थी।

ED के अनुसार, जाँच में पाया गया कि अहमदाबाद के सैटेलाइट पुलिस स्टेशन ने महेशभाई लांगा के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन, विश्वासघात का एक और मुकदमा दर्ज था। ED ने कहा, “जाँच में पता चला है कि महेश प्रभुदान लांगा बड़ी रकम वाले कई वित्तीय धोखाधड़ी में शामिल था। उसके वित्तीय लेन-देन में विभिन्न व्यक्तियों से जबरन वसूली, हेरफेर और मीडिया प्रभाव का इस्तेमाल शामिल था।”

संघीय जाँच एजेंसी का कहना है कि यह पत्रकार ‘जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले’ में भी शामिल है, जिसकी जाँच ED कर रही है। लांगा ने धोखाधड़ी और जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले में शामिल वित्तीय लेनदेन को छिपाने और उसमें हेरफेर करने की कोशिश की है। एजेंसी ने कहा, “उनके बार-बार के बदलते बयान की वजह से धन मिलने और उसके उद्देश्य को छिपाने का संदेह पैदा हुआ।”

महेश लांगा के वकील ने पहले उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया था। महेश लांगा को पहले गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अब धनशोधन का मामला सामने आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले की जाँच अपने हाथ में ले ली है। लांगा को अदालत ने फिलहाल पूछताछ के लिए चार दिनों के लिए ED की हिरासत में भेज दिया है।

बता दें कि अंग्रेजी अखबार The Hindu के पत्रकार महेश लांगा के खिलाफ 23 जनवरी 2025 को अहमदाबाद के सैटेलाइट थाने में एक और एफआईआर दर्ज की गई थी। यह शिकायत प्रॉपर्टी डीलर जनक ठाकोर ने दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने लांगा पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) के तहत ₹40 लाख की जबरन वसूली का आरोप लगाया है।

लांगा ने ठाकोर से कहा था कि उनका नाम The Hindu में छापने से उनके बिज़नेस को बड़ा फायदा होगा। जनवरी 2024 में लांगा ने ठाकोर से ₹20 लाख लिए और एक आर्टिकल में उसका नाम शामिल किया। इसके बाद उसने दोबारा ₹20 लाख माँगे और कुल ₹40 लाख वसूल किए। लांगा ने वादा किया कि अगर ठाकोर का नाम अखबार में छपेगा तो वह एक सफल बिल्डर बन सकते हैं।

पत्रकार महेश लांगा को 8 अक्टूबर 2024 को GST धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया गया था। यह मामला 13 कंपनियों और उनके मालिकों द्वारा फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाने से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, 220 से अधिक बेनामी फर्मों का इस्तेमाल फर्जी दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी के लिए किया गया। इस तरह लांगा पर धोखाधड़ी, जबरन वसूली, जीएसटी घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग सहित 6 केस दर्ज हो गए हैं।

साइन बोर्ड पर लिखी हिंदी को नहीं पोत रहे DMK के वर्कर, CM स्टालिन की राजनीति पर पोत रहे कालिख: अन्नामलाई ने पाखंड की खोली पोल, बताया- NEP में अनिवार्य नहीं है हिंदी

तमिलनाडु में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को लेकर बड़ा विवाद छिड़ गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके नेता एमके स्टालिन इस नीति के खिलाफ जोर-शोर से आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि ये नीति तमिलनाडु पर हिंदी थोपने की साजिश है।

एमके स्टालिन ने कड्डालोर में आयोजित एक सभा में कहा कि केंद्र सरकार भले ही 10,000 करोड़ रुपये का लालच दे, लेकिन वो इस नीति को राज्य में लागू नहीं होने देंगे। उनका दावा है कि इससे राज्य 2000 साल पीछे चला जाएगा। दूसरी तरफ, बीजेपी नेता के अन्नामलाई ने डीएमके की इस नाराजगी को ढोंग करार दिया और उनकी पाखंडी हरकतों पर सवाल उठाए।

डीएमके कार्यकर्ताओं ने हिंदी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए चेन्नई और आसपास के इलाकों में कई जगहों पर हिंदी नाम वाली पट्टियों को काले रंग से पोत दिया। सेंट थॉमस माउंट पोस्ट ऑफिस, बीएसएनएल ऑफिस और कई रेलवे स्टेशनों के बोर्ड पर हिंदी अक्षरों को मिटा दिया गया।

तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष अन्नामलाई ने इसे बेकार की शरारत बताया और कहा कि डीएमके नेता अपने बच्चों को तो उन स्कूलों में पढ़ाते हैं जहाँ तीन भाषाएँ सिखाई जाती हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों के बच्चों को इससे वंचित रखना चाहते हैं। उन्होंने स्टालिन से सवाल किया कि अगर हिंदी वैकल्पिक है तो इसमें इतना हंगामा क्यों?

अन्नामलाई ने डीएमके की दोहरी नीति पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि डीएमके नेता अपने बच्चों को महँगे स्कूलों में पढ़ाते हैं जहाँ हिंदी, अंग्रेजी और तमिल सिखाई जाती है, लेकिन सरकारी स्कूलों के बच्चों को ये मौका नहीं देना चाहते। उन्होंने पूछा कि क्या भाषा सीखने का हक सिर्फ अमीरों के लिए है? अन्नामलाई ने ये भी याद दिलाया कि डीएमके के संस्थापक अन्नादुराई ने तीन भाषा नीति का समर्थन किया था, तो अब ये विरोध क्यों?

एनईपी 2020 में त्रिभाषा नीति की बात है, जिसमें कहा गया है कि बच्चे तीन भाषाएँ सीखेंगे-दो भारतीय और एक विदेशी। इसमें हिंदी को अनिवार्य नहीं बल्कि एक विकल्प बताया गया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी स्टालिन को चिट्ठी लिखकर साफ किया कि कोई भाषा थोपने का सवाल ही नहीं है। नीति में ये भी कहा गया है कि राज्य और बच्चे अपनी पसंद की भाषा चुन सकते हैं। फिर भी डीएमके इसे हिंदी थोपने का बहाना बनाकर विरोध कर रही है।

दूसरी तरफ, डीएमके हिंदी से इतना परहेज करती है, लेकिन तमिलनाडु में अरबी भाषा के बढ़ते प्रभाव पर चुप है। राज्य में कई जगह अरबी में पढ़ाई होती है और नामों वाली पट्टियाँ (नेम प्लेट) भी अरबी में हैं, लेकिन इसके खिलाफ कोई हंगामा नहीं। जानकारों का कहना है कि डीएमके का ये रवैया वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है। पार्टी तमिल संस्कृति को खतरे में बताकर लोगों को भड़काती है और केंद्र के खिलाफ माहौल बनाती है।

इस बीच, स्टालिन के बेटे और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि ने भी दिल्ली में यूजीसी के खिलाफ प्रदर्शन किया और कहा कि एनईपी तमिल भाषा और शिक्षा को बर्बाद कर देगी। डीएमके का कहना है कि वो हिंदी और संस्कृत को राज्य में नहीं आने देगी। लेकिन बीजेपी का आरोप है कि ये सब राजनीतिक ड्रामा है और डीएमके सिर्फ तमिलनाडु में अपनी सत्ता बचाने के लिए ऐसा कर रही है।

मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई इस रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

मराठों ने दिखाया रौद्र रूप, मरते दम तक भागता रहा औरंगजेब: पराक्रम का वो इतिहास जो छत्रपति संभाजी को 40 दिन तक दी गई यातना और हत्या के बाद लिखा गया

छत्रपति शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र छत्रपति संभाजी पर बनी फिल्म ‘छावा’ आज सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है। फिल्म ने संभाजी के जीवन को जन-जन तक पहुँचाया है। देश भर में ऐसा माहौल है कि लोग भावुक होकर आँसू बहाते हुए सिनेमाघरों से निकल रहे हैं। छत्रपति संभाजी की यशस्वी ख्याति सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक स्थापित हो चुकी है। हालाँकि, देश का एक बड़ा वर्ग संभाजी की मृत्यु के बाद मराठों की बहादुरी से आज भी अनजान है।

‘हिंदवी स्वराज्य’ के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु के बाद औरंगजेब और उसकी मुगल सेना जश्न मनाने में व्यस्त थी, क्योंकि दक्षिण पर विजय पाने का उसका सपना अब साकार हो रहा था। हालाँकि, उनके बेटे संभाजी ने मुगलों को इतना भयभीत कर दिया कि दक्षिण भारत पर विजयका उनका सपना पूरा नहीं हो सका। छत्रपति संभाजी महाराज की मृत्यु के बाद भी मुग़ल बहुत खुश थे और दक्कन पर विजय पाने के लिए दृढ़ थे। हालाँकि, इस बार मराठा पराजित होकर भाग गए।

छत्रपति संभाजी के बलिदान से एकजुट हुए मराठा

छत्रपति संभाजी को औरंगजेब ने 40 दिनों तक भयानक यातनाएँ दीं और उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया, लेकिन उन्होंने अपना धर्म त्यागने के बजाय मृत्यु को चुना। छत्रपति संभाजी की नृशंस हत्या के बाद मराठा क्रोधित हो गए और एकजुट होने लगे। मराठा साम्राज्य के सभी मतभेद सुलझ चुके थे और केवल एक ही लक्ष्य बचा था – क्रूर इस्लामी शासक औरंगजेब का विनाश।

मराठा साम्राज्य में कई बहादुर योद्धा थे। संगमेश्वर के किले में जब छत्रपति संभाजी अपने मुट्ठी भर मराठा योद्धाओं के साथ औरंगजेब के सिपहसालार मुकर्रम खान की विशाल मुगल सेना के खिलाफ युद्ध कर रहे थे, तब छत्रपति के साथ एक अन्य मराठा योद्धा भी अपनी बहादुरी दिखा रहा था। उनका नाम माल्होजी घोरपड़े था। इन योद्धाओं ने मुगलों से लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।

छत्रपति राजाराम का राज्याभिषेक और संताजी की वीरता

घोरपड़े ने मराठा साम्राज्य के लिए एक जीवंत और स्वाभिमानी विरासत छोड़ी। वह जीवित विरासत थे माल्होजी के पुत्र संताजी घोरपड़े। संभाजी की हत्या के बाद औरंगजेब के सेनापति जुल्फिकार खान ने मराठा साम्राज्य की राजधानी रायगढ़ पर कब्जा कर लिया। इस दौरान उसने संभाजी की पत्नी यशुबाई और उनके बेटे को बंदी बना लिया। इसके बाद सन 1689 में संभाजी के छोटे भाई राजाराम छत्रपति बने।

संभाजी के राज्याभिषेक के बाद मुगलों की कमर तोड़ने की कवायद शुरू की गई। छत्रपति राजाराम के शासनकाल के दौरान संताजी को मराठा साम्राज्य का सेनापति घोषित किया गया। संताजी के साथ एक अन्य मराठा योद्धा भी था। उनका नाम धनाजी जाधव था। औरंगजेब और मुगल सेना को पूरा विश्वास था कि संभाजी की मृत्यु के बाद मराठों का मनोबल टूट जाएगा, लेकिन हुआ इसका उलटा।

मनोबल टूटने की बजाय मराठे अब औरंगजेब के खून के प्यासे हो चुके थे। ‘हर हर महादेव’ और ‘जय भवानी’ के उद्घोष से मुगल सेना काँप उठी। कहा जाता है कि मुगल, मराठा साम्राज्य के आसपास की नदियों में अपने घोड़ों को पानी पिलाने के लिए भी नहीं रुकते थे। धनाजी के साथ मिलकर संताजी ने मुगलों को लगभग 17 वर्षों तक भ्रम में रखा। उनका एकमात्र लक्ष्य औरंगजेब को ख़त्म करना था।

हिंदू स्वराज्य से मराठा साम्राज्य बना शक्तिशाली

छत्रपति संभाजी की मृत्यु के बाद शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिंदवी स्वराज्य में अराजकता फैल गई। पूरा साम्राज्य अस्त-व्यस्त हो गया। तब छत्रपति राजाराम ने संताजी को हिंदवी स्वराज बहाल करने का आदेश दिया। उस समय मराठों के पास मुगलों जितनी बड़ी सेना नहीं थी और ना ही धन था। उस समय सेनापति संताजी ने हिंदवी स्वराज्य को पुनर्जीवित किया और इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की।

औरंगजेब के शिविर पर हमला, जान बचाकर भागा

महाराष्ट्र के लेखक बशीर कमरुद्दीन मोमिन ने अपनी पुस्तक ‘भंगले स्वप्न महाराष्ट्राचे’ में उल्लेख किया है कि अगस्त 1689 को सावन में संताजी ने अचानक तुलापुर पर हमला कर दिया। औरंगजेब एक बड़ी सेना के साथ तुलापुर में डेरा डाले हुए था। यह वही स्थान है, जहाँ संभाजी की निर्मम हत्या की गई थी। संताजी ने धनाजी को साथ लेकर मुट्ठी भर मराठों के साथ मिलकर औरंगजेब के शिविर पर हमला कर दिया।

इस युद्ध का वर्णन करते हुए मुगल ‘इतिहासकार’ काफ़ी ख़ान (मोहम्मद हाशिम) लिखते हैं कि तुलापुर के युद्ध के बाद संताजी का डर मुगल सैनिकों में दहशत फैला रहा था। जो भी मुगल सैनिक संताजी के सामने आता, वह या तो मारा जाता था या उसे पकड़ लिया जाता था। स्थिति ऐसी थी कि संताजी का नाम सुनते ही मुगल सेना में भगदड़ मच जाती थी।

तुलापुर में मराठों के अचानक आक्रमण से मुगल जोर-जोर से चिल्लाने लगे, “हुजूर, मराठा आ रहे हैं!” एक ओर संताजी मुगल सेना का नाश कर रहे थे। वहीं, मुगल सेना के सैनिक औरंगजेब को बचाने के लिए पीछे-पीछे आ रहे थे। मराठे मुगल शिविर में गहराई तक घुस गए थे। उन्होंने इतने मुगलों का कत्लेआम किया कि औरंगजेब को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा।

औरंगजेब तो बच गया, लेकिन उसने भी पूरी मुगल सल्तनत की नाक कटवा दी। कई इतिहासकारों का यह भी कहना है कि मराठा हमले के दौरान औरंगजेब अपनी बेटी के तंबू में भाग गया था। इसके बाद मराठों ने औरंगजेब के तम्बू पर रखे दो स्वर्ण कलशों को काट दिया और सिंहगढ़ की ओर चल पड़े। इस घटना के बाद मराठों ने रायगढ़ पर भी हमला किया।

इतियाद खान को हराने के बाद मराठा लगातार आगे बढ़ रहे थे। ऐसा कहा जाता है कि मुगल सरदार जुल्फिकार भी रायगढ़ में रहता था। यह वही सरदार था जिसने छत्रपति संभाजी की पत्नी यशुबाई को कैद कर लिया था। मराठों ने जुल्फिकार की सेना को पराजित कर दिया और अपने साथ बहुमूल्य खजाने और पाँच हाथी लेकर पन्हाला पहुँच गए।

गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाकर मराठों ने मुगलों का मनोबल पूरी तरह तोड़कर रख दिया था। अब बारी थी मुकर्रम खान की, जिसने छल से छत्रपति संभाजी को कैद कर लिया था। मुकर्रम खान को औरंगजेब ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर और कोंकण प्रांत का गवर्नर नियुक्त किया था। दिसंबर 1689 में मराठों ने मुकर्रम खान की सेना को घेर लिया और मुगलों की लाशों का ढेर लगा दिया।

एक भीषण युद्ध में संताजी ने मुकर्रम खान का पीछा किया और उसे मार डाला। मुकर्रम की दुर्दशा देखकर मुगल सेना उसे लेकर जंगल में भाग गई, जहाँ मुकर्रम खान की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस तरह मुकर्रम खान की हत्या करके मराठों ने छत्रपति संभाजी महाराज की हत्या का बदला ले लिया। इस घटना ने मराठों का मनोबल और ऊँचा कर दिया।

महाराष्ट्र में हो गई औरंगजेब की मृत्यु

इन सब घटनाओं के बाद औरंगजेब भी डरकर भाग रहा था। वह सह्याद्रि की पहाड़ियों में छिप गया था। लगातार 27 वर्षों तक मराठों ने औरंगजेब को भागने पर मजबूर कर दिया था। आखिरकार मराठों के हाथों मुगलों की लगातार हार के दर्द से उबरकर औरंगजेब की महाराष्ट्र में मौत हो गई। ऐसा कहा जाता है कि उसकी मृत्यु महाराष्ट्र के औरंगाबाद में हुई थी।

गौरतलब है कि हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने औरंगाबाद का नाम बदलकर ‘छत्रपति संभाजीनगर’ कर दिया है। औरंगजेब का अंत सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे मुगल साम्राज्य का अंत था। मराठा साम्राज्य के वीर योद्धाओं ने मुगलों में इतना भय पैदा कर दिया था कि औरंगजेब अंत तक मराठों से भागकर अपनी जान बचाता रहा। दूसरी ओर, मराठे दिन-प्रतिदिन अधिक शक्तिशाली होते जा रहे थे।

संदर्भ:-

(ये खबर मूल रूप से गुजराती में राज्यगुरु भार्गव ने लिखी है. इस लिंक को क्लिक करके आप पढ़ सकते हैं)

6 साल में ₹35000 करोड़ बढ़ा घाटा, 45% बसें कबाड़: DTC को भी AAP सरकार ने कर दिया बर्बाद; ₹2000+ करोड़ की दारू में लगाई चपत, दिल्ली वालों के स्वास्थ्य से भी ‘घोटाला’

दिल्ली विधानसभा में मंगलवार (25 फरवरी 2025) को नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की 2021-22 की शराब नीति से ₹2,026 करोड़ से अधिक का राजस्व नुकसान होने का खुलासा हुआ। यही नहीं, इस नीति के जरिए दिल्ली की जनता के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ किया गया। इस रिपोर्ट ने न केवल शराब नीति में अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन को उजागर किया, बल्कि दिल्ली परिवहन निगम (DTC) सहित अन्य क्षेत्रों में भी भारी वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा किया।

यह रिपोर्ट AAP के शासनकाल (2017-2022) के दौरान की गई 14 लंबित ऑडिट रिपोर्ट्स का हिस्सा है, जिन्हें अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई सरकार ने सदन में पेश करने का फैसला किया है। इन रिपोर्ट्स से AAP सरकार के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

CAG की 14 रिपोर्ट्स में से शराब नीति पर एक के अलावा 13 अन्य रिपोर्ट्स भी पेश की जानी हैं। इनमें राज्य वित्त ऑडिट, वाहन प्रदूषण पर खर्च, शीश महल (मुख्यमंत्री आवास नवीकरण) पर ₹33.66 करोड़ का अतिरिक्त खर्च, सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे (मोहल्ला क्लीनिक), शिक्षा विभाग, सामाजिक योजनाएँ (मुफ्त बिजली-पानी), आर्थिक परियोजनाएँ (सड़कें-पुल), सार्वजनिक उपक्रमों की स्थिति, सामान्य प्रशासनिक खर्च, पर्यावरण नीतियाँ (कचरा प्रबंधन), और डीटीसी का वित्तीय प्रबंधन शामिल हैं।

डीटीसी का घाटा ₹35 हजार करोड़ बढ़ा

दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की स्थिति को लेकर CAG रिपोर्ट ने सबसे चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, डीटीसी का घाटा 2015-16 में ₹25,300 करोड़ था, जो 2021-22 तक बढ़कर ₹60,750 करोड़ हो गया। पिछले छह वर्षों में यह घाटा ₹35,000 करोड़ तक बढ़ा, जिसे AAP सरकार की लापरवाही और ठोस योजना की कमी का परिणाम माना जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि डीटीसी की 45% बसें कबाड़ हो चुकी हैं और मार्च 2022 तक इसके पास केवल 3,937 बसें थीं। जबकि दिल्ली हाई कोर्ट ने 2007 में 11,000 बसों का बेड़ा अनिवार्य बताया था। यह संख्या बाद में कैबिनेट द्वारा 5,500 तक सीमित कर दी गई, लेकिन वह भी हासिल नहीं हुई।

डीटीसी की समस्याएँ यहीं खत्म नहीं होतीं। साल 2009 से बस किराये में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, और महिलाओं को मुफ्त बस सेवा शुरू करने से वित्तीय बोझ और बढ़ गया। CAG ने बताया कि 468 रूट्स पर चलने वाली बसें अपनी परिचालन लागत भी वसूल नहीं कर पाईं, जिससे 2015-22 के बीच ₹14,199 करोड़ का अतिरिक्त नुकसान हुआ। अरविंद केजरीवाल ने 2015 में 10,000 नई बसें लाने का वादा किया था, लेकिन 2022 में केवल 300 बसें खरीदी गईं। FAME-I योजना के तहत ₹49 करोड़ की केंद्रीय सहायता का लाभ भी नहीं उठाया गया, और FAME-II के तहत इलेक्ट्रिक बसों के अनुबंध की अवधि 12 से घटाकर 10 साल कर दी गई।

रिपोर्ट में रूट प्लानिंग की कमियों को भी उजागर किया गया। डीटीसी की बसें हर 10,000 किमी में 2.9 से 4.5 बार खराब होती हैं, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। इसके विपरीत, निजी क्लस्टर बसें बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन और सीसीटीवी सिस्टम जैसे प्रोजेक्ट्स भी नौ साल बाद अधूरे हैं। दिल्ली सरकार ने 2015-22 के बीच डीटीसी को ₹13,381 करोड़ का अनुदान दिया, लेकिन घाटा कम करने के लिए कोई ठोस बिजनेस प्लान या MoU तैयार नहीं किया गया।

ब्यावर के ‘मुस्लिम गैंग’ से जुड़ा हुआ है पूर्व पार्षद हकीम कुरैशी भी, स्कूली छात्राओं को ब्लैकमेल कर इस्लाम कबूलने का बनाते थे दबाव: अब तक 9 गिरफ्तार, बुलडोजर एक्शन की तैयारी

राजस्थान के ब्यावर की एक पीड़िता ने बताया था कि ‘मुस्लिम गैंग’ उन पर मौलवी और मस्जिद जाने का दबाव डाला जाता था। अब इस मामले में बिजयनगर में पूर्व पार्षद हकीम कुरैशी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पता चलता है कि इस गैंग में मुस्लिमों के अलग-अलग तबके शामिल थे।

इस इस मामले में पुलिस ने हकीम कुरैशी को रविवार (23 फरवरी 2025) को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। जहाँ से कोर्ट ने उसे हिरासत में भेज दिया। पुलिस के मुताबिक, हकीम इस वारदात में सहयोगी था और उससे पूछताछ जारी है। इस बीच, प्रशासन ने आरोपितों के घरों के कागज माँगे हैं और बुलडोजर चलाने की तैयारी चल रही है।

बता दें कि ये मामला तब सामने आया जब 15 फरवरी को एक नाबालिग लड़की ने बिजयनगर थाने में शिकायत की। इसके बाद चार और लड़कियों के परिवार वालों ने भी पुलिस से मदद माँगी। पीड़िताओं का कहना है कि एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली इन नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण हुआ। उनकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया गया। इतना ही नहीं, उन्हें जबरन कलमा पढ़ने और रोज़ा रखने के लिए भी मजबूर किया गया। पुलिस ने पोक्सो एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज कर जाँच शुरू की। अब तक 9 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं और तीन नाबालिग हिरासत में हैं।

गिरफ्तार लोगों में श्रवण (कैफे संचालक), करीम और आशिक को सात दिन की रिमांड मिली है। लुकमान, सोहेल, रिहान और अफराज को पाँच दिन के लिए रिमांड पर लिया गया है। पुलिस ने पाँच आरोपितों को अपने मकान के कागजात जमा करने को कहा है। बिजयनगर नगर पालिका ने भी इन पाँचों को तीन दिन में दस्तावेज देने का नोटिस दिया, वरना मकान तोड़ने की कार्रवाई होगी। जामा मस्जिद और कब्रिस्तान को भी नोटिस भेजा गया है।

इस मामले से इलाके में गुस्सा है। लोग आरोपितों के लिए फाँसी की सजा माँग रहे हैं। मसूदा बाजार बंद रहा और चार थानों की पुलिस तैनात की गई। पुलिस का कहना है कि जाँच पूरी होने के बाद सख्त कार्रवाई होगी।

दिल्ली में मिलावटी और घटिया दारू… वो भी महँगी: AAP वाली केजरीवाल सरकार ने ‘1 पर 1 फ्री’ पिलाकर लूटा

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार (25 फरवरी) को अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार के खिलाफ CAG रिपोर्ट को सदन में पेश किया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि AAP सरकार की शराब नीति में कई गड़बड़ियाँ थीं। इसमें ना ही मूल्यों को तय किया गया और ना ही शराब की गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया। इन गड़बड़ियों के कारण सरकार को 2002.68 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि आबकारी विभाग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के कर राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है। इस विभाग से कुल राजस्व का अकेले 14 प्रतिशत कर के रूप में हासिल होता है। इतना बड़ा स्रोत होने के बावजूद AAP सरकार ने इसमें भारी गड़बड़ी की। इसमें लाइसेंस का उल्लंघन, पारदर्शिता की कमी, कमजोर निगरानी आदि शामिल हैं।

शराब के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की कमी

भाजपा सरकार द्वारा सदन में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखपरीक्षक (CAG) के मुताबिक, आबकारी विभाग ने एल1 लाइसेंसधारी (निर्माता और थोक विक्रेता) को एक निश्चित स्तर से अधिक कीमत वाली शराब के लिए अपनी EDP कीमत घोषित करने का अनुमति दी। इसके बाद निर्माण के बाद सभी मूल्य घटकों को जोड़ा गया, जिसमें निर्माता का लाभ भी शामिल था।

इसमें CAG ने एक ही शराब निर्माता द्वारा विभिन्न राज्यों में अलग-अलग EDP (एक्स-डिस्टिलरी मूल्य) पर शराब की आपूर्ति पाई गई है। इतना ही नहीं, खुद EDP घोषित करने की अनुमति ने शराब निर्माताओं और थोक विक्रेताओं को शराब की कीमतों में अपने फायदे के लिए हेरफेर करने की अनुमति दी। इससे शराब की बिक्री में गिरावट आई और सरकार को भारी नुकसान हुआ।

दरअसल, शराब के उचित मूल्य के निर्धारण के लिए भी निर्माताओं से लागत विवरण नहीं माँगा गया था। इसलिए एल1 लाइसेंसधारी को बढ़ी हुई EDP में छिपे मुनाफे से मुआवजा मिलने का जोखिम था। CAG का कहना है कि आबकारी विभाग को मूल्य के निर्धारण को विनियमित करना चाहिए, ताकि मूल्य के कारण बिक्री पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण करके उत्पाद शुल्क राजस्व को अनुकूलित किया जा सके।

गुणवत्ता निर्धारण में भारी कमी

दिल्ली में शराब की गुणवत्ता का निर्धारण भी आबकारी विभाग ही करता है। मौजूदा नियमों में प्रावधान है कि थोक लाइसेंसधारियों (एल1) के लिए लाइसेंस जारी करते समय भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के प्रावधानों के अनुसार विभिन्न परीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य बनाता है। आबकारी आयुक्त ने इसके लिए अलग से गुणवत्ता निर्देश नहीं दिए हैं।

CAG ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि ऐसे अनेक मामले पाए गए, जिसमें परीक्षण रिपोर्ट BIS के मानकों के अनुरूप नहीं थे। AAP सरकार में आबकारी विभाग ने बड़ी कमियों के बावजूद लाइसेंस जारी किए थे। विभिन्न ब्रांडों के लिए जल की गुणवत्ता, हानिकारक तत्व, भारी धातुओं, मिथाइल अल्कोहल, सूक्ष्मजीव परीक्षण रिपोर्ट आदि प्रस्तुत ही नहीं किए गए।

इसके अलावा, कुछ लाइसेंसधारियों द्वारा दिए गए परीक्षण रिपोर्ट राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से नहीं थीं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) अधिनियम की दिशान-निर्देशों के अनुसार NABL की रिपोर्ट जमा करना जरूरी है। नमूना जाँच रिपोर्ट की जाँच के दौरान अपर्याप्त परीक्षण प्रमाण-पत्र भी पाए गए।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक में रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी शराब से संबंधित 51 प्रतिशत मामलों में नमूना जाँच रिपोर्टों उपलब्ध नहीं कराई गईं। अगर रिपोर्ट दी भी गईं तो परीक्षण रिपोर्ट एक वर्ष से या उससे अधिक पुरानी थीं या फिर उस रिपोर्ट में तारीख का उल्लेख ही नहीं किया गय था। इस तरह ये पूरा मामला ही संदिग्ध बन जाता है।

‘प्रीति जिंटा का ₹18 करोड़ का लोन माफ’: कॉन्ग्रेस का हिसाब बॉलीवुड हिरोइन ने किया दुरुस्त, बताया- 10 साल हो गए न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक का बकाया चुकाए, अब अकाउंट भी बंद

बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा एक बार फिर सुर्खियों में हैं और इस बार मामला उनके कथित 18 करोड़ रुपये के लोन से जुड़ा है। खबरों के मुताबिक, जिस न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने फाइनेंशियल गड़बड़ियों के चलते बैन कर दिया, उसने प्रीति जिंटा का लोन माफ कर दिया था।

रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि प्रीति का 18 करोड़ का लोन था, जिसे संकटग्रस्त न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक ने माफ कर दिया। ये खबर तब जोर पकड़ने लगी जब प्रीति हाल ही में महाकुंभ पहुँची थीं, और सोशल मीडिया पर उनके लोन माफी की चर्चा वायरल हो गई। ऐसे में कॉन्ग्रेस ने भी मौके पर चौका मारने की कोशिश की और प्रीति जिंटा को घेरने की कोशिश की। यही नहीं, केरल कॉन्ग्रेस ने तो यहाँ तक कह दिया कि 18 करोड़ का लोन माफ होने के बाद प्रीति जिंटा ने अपना सोशल मीडिया अकाउंट बीजेपी को दे दिया है।

प्रीति जिंटा पर महज कुछ घंटों के अंदर इतनी तेजी से हमले हुए, कि लोग हैरान रह गए कि क्या वाकई में एक डूबते बैंक ने इतनी बड़ी रकम को यूँ ही माफ कर दिया। हालाँकि इसके बाद प्रीति जिंटा ने पूरी असलियत सामने रख दी।

प्रीति जिंटा ने केरल कॉन्ग्रेस के दावे को कोट करते हुए एक्स पर लिखा, “नहीं। मैं अपना सोशल मीडिया अकाउंट्स खुद हैंडल करती हूँ। आपको फेक न्यूज फैलाते हुए शर्म आनी चाहिए। मेरा किसी ने लोन माफ नहीं दिया है। मैं हैरान हूँ कि एक राजनीतिक पार्टी और उसके लोग किसी तरह से फेक न्यूज फैला रहे हैं और मेरे नाम का इस्तेमाल कर मेरी छवि धूमिल कर रहे हैं। रिकॉर्ड के लिए बता हूँ मैंने लोन लिया था और उसे पूरी तरह से चुका दिया, वो भी 10 साल पहले। उम्मीद है कि ये आपको सही राह दिखाएगा और भविष्य में किसी उलझन में फँसने से बताएगा।”

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रांच मैनेजर की जानकारी के बिना बैंक से 25 करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट लोन मंजूर किए गए थे। इनमें से कई लोन कथित तौर पर फंड डाइवर्जन कारण एक साल के अंदर नॉन परफार्मिंग असेस्ट्स में बदल गए। बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा का भी कथित तौर पर इस बैंक में 18 करोड़ रुपये का लोन शामिल था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह लोन प्रॉपर रिकवरी प्रोसीजर का पालन किए बिना लिया गया था। ये रिपोर्ट मनीलाइफ नाम की बिजनेस न्यूज वेबसाइट पर छपी थी।

इस पूरे विवाद को लेकर प्रीति जिंटा ने मनीलाइफ की संपादक सुचेता दलाल को भी फटकार लगाई। प्रीति जिंटा ने लिखा “जो लोग मेरी इज्जत नहीं कर सकते, मैं भी उनकी इज्जत नहीं करूँगी। मैंने अपने जीवन में बहुत सारे पत्रकारों को फेक न्यूज फैलाते देखा है और वो माफी भी नहीं माँगते। लेकिन सुचेता दलाल, आप जब अगली बार ऐसी कोई खबर छापें तो मुझे कॉल कर लें। मेरा नाम शामिल करने से पहले उसकी सच्चाई के बारे में पूछ लेते। मैंने भी आपकी तरह सालों की मेहनत कर प्रतिष्ठा और सम्मान बनाया है, इसलिए अगर आप मेरी प्रतिष्ठा का सम्मान नहीं कर सकती है, तो मुझे भी आपकी प्रतिष्ठा से कोई लेना-देना नहीं। मैं कोई बड़ी इंसान नहीं हूँ। ये बात यहीं खत्म होती है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पूरे मामले में प्रीति जिंटा की लीगल टीम ने बयान जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि 12 साल से ज्यादा समय पहले उनके (प्रीति जिंटा) पास न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक के साथ एक ओवरड्राफ्ट सुविधा थी। 10 साल से ज्यादा समय पहले, उन्होंने इस ओवरड्राफ्ट सुविधा के संबंध में सभी बकाया राशि पूरी तरह से चुका दी थी और अब अकाउंट बंद हो गया था।

बंगाली नव वर्ष पर 100 गाय काटने की कट्टरपंथियों ने दी धमकी, ‘पोहेला बोइशाख’ को इस्लामी जलसे में बदलने की कोशिशों पर युनुस सरकार चुप: खौफ में बांग्लादेश के हिंदू

बांग्लादेश में बंगाली नववर्ष को इस्लामिक त्योहार में बदलने की कोशिश हो रही है। कुछ कट्टरपंथी 14 अप्रैल को होने वाले पोहेला बोइशाख के मौके पर 100 गायों को काटने की धमकी दे रहे हैं। ये त्योहार दो महीने से भी कम वक्त में आने वाला है और इससे हिंदू समुदाय के लोग खासे परेशान हैं। पोहेला बोइशाख वसंत के आने और फसल के मौसम की खुशी का त्योहार है।

ढाका के रमना पार्क में हर साल रमना बतमूल बरगद के पेड़ के नीचे पोहेला बोइशाख के मौके पर बड़ा सांस्कृतिक आयोजन होता है। इस कार्यक्रम को छायानट संगीत विद्यालय चलाता है, जो 1961 में बना था और बंगाली संस्कृति व संगीत को बढ़ावा देता है।

18 फरवरी को बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सलाहकार मोस्तफा सरवर फारूकी से इस धमकी के बारे में पूछा गया। एक रिपोर्टर ने बताया कि ये धमकियाँ सोशल मीडिया पर खुलेआम दी जा रही हैं। लेकिन फारूकी ने इसे हल्के में लिया और कहा, “सोशल मीडिया पर तो लोग बहुत कुछ कहते हैं, हम हर बात का जवाब नहीं दे सकते।” रिपोर्टर ने कहा कि सोशल मीडिया की धमकियाँ असल जिंदगी में हमलों में बदल सकती हैं।

फारूकी ने फिर कहा, “पोहेला बोइशाख बड़ा त्योहार है। इसे हमेशा की तरह ही मनाया जाएगा। बस इतना कह सकता हूँ।” हालाँकि इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ लगाकार हिंदुओं के आयोजनों पर हमले बोलती रही है, जो खुद को ‘तौहीदी जनता‘ कहती है।

इस्लामी कट्टरपंथियों को शह दे रही यूनुस सरकार

मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार इस्लामिक कट्टरपंथियों को शह दे रही है। यूनुस ने इन भीड़ के हमलों को रोकने के लिए कुछ नहीं कहा। उसकी सरकार ने कट्टर इस्लामिक नेताओं और दोषी आतंकियों को रिहा किया है और हिंदुओं पर हमलों को ‘झूठा’, ‘बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया’ या ‘राजनीति से प्रेरित’ कहकर खारिज किया है।

रमना पार्क में 100 गायों को काटने की धमकी को गंभीरता से लेना चाहिए। पहले भी 14 अप्रैल 2001 को इस्लामिक आतंकी संगठन ‘हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लाजी’ ने रमना पार्क में दो बम धमाके किए थे, जिसमें 9 लोग मारे गए थे और 50 से ज्यादा घायल हुए थे।

रमना पार्क में 2001 में हुआ था बम से हमला (फोटो साभार: The Daily Star)

उस हमले के 8 आतंकियों मुफ्ती अब्दुल हन्नान, मौलाना अकबर हुसैन, मौलाना मोहम्मद ताजुद्दीन, हाफिज जहाँगीर आलम बादर, मौलाना अबु बकर, मुफ्ती शफीकुर रहमान, मुफ्ती अब्दुल हई और आरिफ हसन को 2014 में फाँसी की सजा सुनाई गई थी।

इस मामले में कुछ और आतंकियों मौलाना अबु ताहेर, मौलाना सब्बीर उर्फ अब्दुल हन्नान, मौलाना याहिया, मौलाना शौकत उस्मान, मौलाना अब्दुर रऊफ और शहादत उल्लाह को उम्रकैद की सजा मिली। लेकिन ताजुद्दीन, हाफिज जहाँगीर, मौलाना अबु बकर, मुफ्ती शफीकुर और मुफ्ती हई जैसे आतंकी 24 साल बाद भी फरार हैं।

मुहम्मद यूनुस की सरकार की तरफ से पोहेला बोइशाख पर धमकियों के खिलाफ कोई ठोस भरोसा नहीं मिला है। ऐसे में हिंदू समुदाय इस त्योहार से पहले डरा हुआ है। बता दें कि शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं पर जमकर अत्याचार हुए हैं, हालाँकि यूनुस सरकार इन हमलों को लगातार छिपाने में लगी है।

महाकुंभ जा रही नाजिया इलाही पर हमला हुआ या हुईं हादसे का शिकार? पुलिस ने बताया- ड्राइवर को नींद आने से एक्सीडेंट हुआ, BJP प्रवक्ता का दावा- मुझे घायल छोड़ चाय पीने चले गए

बीजेपी प्रवक्ता नाजिया इलाही खान पर प्रयागराज जाने के क्रम में हुए हमले के मामले में अहम मोड़ आया है। यूपी पुलिस ने नाजिया के दावे को खारिज किया है और कहा है कि उनकी गाड़ी के ड्राइवर को नींद आने से ये हादसा हुआ। हालाँकि नाजिया ने इस पर पलटवार किया है और आरोप लगाया है कि कानपुर देहात पुलिस ने अभी तक जाँच भी शुरू नहीं की और फैसले पर पहुँच गई।

अकबरपुर की सीओ प्रिया सिंह ने कहा, “24 फरवरी 2025 को गाड़ी के गुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना पर मौके पर तुरंत चौकी पुलिस पहुँची, जिसमें चालक ने बताया कि नींद आ जाने की वजह से एक्सीडेंट हुआ। प्रथम दृष्ट्या ये मामला नींद आने की वजह से हुई दुर्घटना से जुड़ा लगता है। इस मामले में एक्स पोस्ट में हमले का दावा किया गया था, लेकिन शुरुआती जाँच और महिला के बयान में अंतर नजर रहा है। अभी तथ्यों का सामने आना बाकी है। हम सभी से अनुरोध करते हैं कि कोई भ्रामक दावा सोशल मीडिया पर न फैलाएँ।”

हालाँकि इसके बाद नाजिया ने यूपी पुलिस को आड़े हाथों लिया और गंभीर आरोप लगाए। नाजिया ने कहा कि पुलिस के लोगों ने मुझे घटनास्थल पर ही चोटिल अवस्था में छोड़ दिया था, क्योंकि उन्हें चाय की तलब लगी थी।

नाजिया ने कानपुर पुलिस पर गुमराह करने के आरोप लगाए और कहा कि पुलिस ने मेरा बयान भी दर्ज नहीं किया और न ही उस अस्पताल गई, जहाँ मेरा इलाज हुआ। यही नहीं, ये जानते हुए भी कि हादसे के समय कार में 3 महिलाएँ थी, यूपी पुलिस की टीम में एक भी महिला नहीं पहुँची। नाजिया ने कहा कि पुलिस मौके पर अपनी मौजूदगी को साबित करे, अन्यथा वो मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएँगी।

एक अन्य ट्वीट में नाजिया ने कहा, “कानपुर देहात पुलिस किसको बचाना चाह रही है? हाँ फिर अपनी गलती को छुपाने में लग चुकी है! घटना के वक्त एक भी महिला पुलिस तक नहीं थी जबके घायल सभी महिला थी! ये दर्द नहीं दिख रहा पुलिस को क्या! प्रिया अभी ऑपरेशन रूम में है ये भी नहीं दिख रहा है! समस्या क्या है कानपुर देहात पुलिस को जाँच शुरू करने में!”

बता दें कि सोमवार (24 फरवरी 2025) को नाजिया इलाही खान ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर वीडियो शेयर कर बताया था कि प्रयागराज आने के क्रम में उन पर हमला हुआ है। उनका कुछ मुस्लिमों द्वारा एटा से पीछा किया जा रहा था। इस दौरान उन्हें भी चोट लगी, तो गाड़ी में मौजूद प्रिया नाम की महिला का सर भी फट गया।

सरकारी जमीन पर है संभल का मजहबी ढाँचा, ‘यज्ञ कूप’ को छिपाया भी: सुप्रीम कोर्ट को जामा मस्जिद कमेटी की करतूत UP सरकार ने बताई, कहा- गलत फोटो दिखाए

उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद के पास स्थित ‘वाराही कुआँ’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जानकारी सामने आई है। यूपी सरकार ने कोर्ट में कहा है कि ये कुआँ, जिसे मस्जिद कमिटी निजी बता रही है, असल में सार्वजनिक जमीन पर है।

सरकार का कहना है कि मस्जिद कमिटी इस कुएँ पर अपना हक जताने की कोशिश कर रही है, जबकि ये सबके लिए है। यही नहीं, जिस मस्जिद को लेकर विवाद है, वो मस्जिद भी सार्वजनिक भूमि पर है। बता दें कि कोई भी मस्जिद सार्वजनिक या सरकारी जगह पर नहीं, बल्कि निजी जमीन पर ही बन सकती है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को सरकार से इसकी स्टेटस रिपोर्ट माँगी थी, जिसके बाद ये बात सामने आई।

दरअसल, संभल की शाही जामा मस्जिद की मैनेजमेंट कमिटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि मस्जिद के पास का कुआँ उसका है और जिला प्रशासन इसे सार्वजनिक करके यथास्थिति बिगाड़ रहा है। कमिटी चाहती थी कि कोर्ट प्रशासन को रोके और बिना इजाजत कोई कदम न उठाया जाए। दूसरी तरफ, सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये कुआँ मस्जिद के अंदर नहीं, बल्कि बाहर है और इसका मस्जिद से कोई लेना-देना नहीं। इतना ही नहीं, सरकार ने ये भी कहा कि खुद मस्जिद भी सार्वजनिक जमीन पर बनी है।

यूपी सरकार ने जाँच के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई थी, जिसमें संभल के एसडीएम, क्षेत्रीय अधिकारी और नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी शामिल थे। इस टीम ने पाया कि कुआँ मस्जिद की दीवार से बाहर है और पहले सभी समुदाय इसका इस्तेमाल करते थे। रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि मस्जिद कमिटी ने कोर्ट में गलत तस्वीरें दीं, ताकि लगे कि कुआँ उनके परिसर में है। हकीकत में मस्जिद के अंदर से कुएँ तक पहुँच भी नहीं है। जाँच टीम ने ये भी बताया कि मस्जिद में पहले से एक दूसरा कुआँ ‘यज्ञ कूप’ मौजूद है, जिसे कमिटी ने छिपाया।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये कुआँ जिसे स्थानीय लोग ‘धरनी वराह कूप’ कहते हैं, वो अभी सूखा पड़ा है। 1978 के दंगों के बाद इसके एक हिस्से पर पुलिस चौकी बन गई थी। बाकी हिस्सा 2012 में ढक दिया गया। मस्जिद वाला कुआँ, उन 19 कूपों का हिस्सा है, जिन्‍हें जिला प्रशासन की ओर से पुनर्जीवित किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि वो इसे बारिश का पानी जमा करने और भूजल बढ़ाने के लिए ठीक कर रही है, ताकि सब इसका फायदा उठा सकें।