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करण जौहर को विंग कमांडर नमृता चंडी ने फटकारा, जान्हवी से कहा- ऐसी फिल्में दोबारा न करना

जान्हवी कपूर की फिल्म गुंजन सक्सेना लगातार विवादों में है। भारतीय वायुसेना की तरफ से फिल्म को लेकर आपत्ति जताई जा चुकी है। वायुसेना ने सेंसर बोर्ड से इसकी शिकायत भी की है। सोशल मीडिया पर भी लगातार फिल्म का विरोध हो रहा है। इस बीच वायु सेना के एक पूर्व अधिकारी ने फिल्म के निर्माताओं को एक चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में कहा है कि वे क्रिएटिव फ्रीडम के नाम पर दर्शकों के सामने झूठ नहीं परोस सकते।

गुंजन सक्सेना फिल्म के निर्माताओं को संबोधित अपने पत्र में विंग कमांडर नमृता चंडी (सेवानिवृत्त) ने भारतीय सशस्त्र बलों, विशेष रूप से भारतीय वायु सेना के नकारात्मक चित्रण को लेकर एक विस्तृत प्रतिक्रिया लिखी है। साथ ही उन्होंने फिल्म में दिखाए गए महिला के साथ भेद-भाव, दुर्व्यवहार और उनके साथ उत्पीड़ने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। 

विंग कमांडर चंडी (सेवानिवृत्त) ने अपने पत्र में कहा है कि पुरुषों और महिलाओं दोनों ने सशस्त्र बलों में एक साथ प्रशिक्षण लिया है। आउटलुक में प्रकाशित पत्र के अनुसार उन्होंने गुंजन के साथ प्रशिक्षण लिया है और एक-दूसरे को सबसे खराब परिस्थितियों में देखा है।

उन्होंने करण जौहर की धर्मा प्रोडक्शन्स और उनके बेकार लेखकों और उनकी घटिया कहानियों को दोषी ठहराया, जिन्होंने प्राउड ब्लू यूनीफॉर्म को बहुत ही नकारात्मक तरीके से पेश किया।

विंग कमांडर नमृता ने कहा, “मैंने इस फिल्म को थोड़ी उम्मीद के साथ देखा। बहुत कम फिल्में सत्य के साथ कोई न्याय करती हैं, इस फिल्म के साथ भी यही हुआ। फिल्म निर्माताओं ने डिस्क्लेमर जारी किया और सिनेमाई लाइसेंस एवं क्रिएटिव फ्रीडम की आड़ में खुद को दोषमुक्त कर लिया।”

वायु सेना अधिकारी ने कहा कि सिनेमा लाइसेंस और क्रिएटिव फ्रीडम को ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसी बबल गम फिल्मों पर लागू किया जा सकता है, लेकिन भारतीय वायु सेना जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के तहत निर्धारित नियमों और स्थापित प्रोटोकॉल के पूर्ण दायरे में इसे फिट नहीं किया जा सकता है।

नमृता ने फिल्म निर्माताओं पर ‘झूठ बोलने’ का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, “श्रीविद्या राजन पहली महिला पायलट थीं जिन्होंने कारगिल से उड़ान भरी थी, न कि गुंजन। हालाँकि, मुझे पूरा विश्वास है कि श्रीविद्या को इस क्रेडिट के छिन जाने को लेकर कोई शिकायत नहीं होगी।”

उन्होंने कहा कि वो इस बात को लेकर निश्चित नहीं हैं कि गुंजन ने फिल्म निर्माताओं के शोधकर्ताओं को क्रू रूम में अपने अनुभवों के बारे में क्या बताया है, लेकिन वो पूरे यकीन के साथ कह सकती है कि जिसने भी वर्दी पहनी है, पाँच-छ: साल के लिए गुंजन की तरह ही सही, वो कभी भी सिनेमा के लिए इस तरह के तुच्छ परिदृश्य को नहीं दर्शाएगा।

भारतीय वायु सेना में अपने स्वयं के अनुभव को बताते हुए, नमृता चंडी ने कहा, “मैंने खुद एक हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में देश की सेवा की है और मैंने कभी भी उस तरह के दुर्व्यवहार और उत्पीड़न का सामना नहीं किया है जैसा कि फिल्म में दिखाया गया है। जबकि सच्चाई यह है कि, वर्दी में पुरुष सच्चे सज्जन और पेशेवर होते हैं। वे महिला अधिकारियों को सहज और समायोजित करने की पूरी कोशिश करते हैं।”

वो आगे कहती हैं, “हाँ, शुरू में बिना किसी कमरे या विशेष लेडीज टॉयलेट्स जैसी शुरुआती परेशानियाँ थीं; फिर भी पुरुषों ने हमारे लिए जगह बनाई। कभी-कभी जब मैं चेंज करती थी तो मेरे ब्रदर ऑफिसर्स पर्दे के बाहर पहरा दिया करते थे। मेरे 15 साल के पूरे करियर में कभी भी मेरे साथ बदसलूकी या मेरा अपमान नहीं हुआ।”

पूर्व अधिकारी ने यह भी कहा कि वे लोग जो सभी ऑपरेशनल स्क्वाड्रनों में बोझ उठाते हैं, वे महान पेशेवर क्षमता के पुरुष होते हैं, ना कि उस तरह के, जैसा कि फिल्म में दिखाया गया है। उन्होंने आगे कहा, “वायु सेना में हर पायलट को खुद को साबित करना होता है, चाहे वो पुरुष हो या महिला।”

तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर अपना नैरेटिव सेट करने वाले मूवी मेकर्स पर तीखा हमला करते हुए वायु सेना अधिकारी ने कहा कि सिनेमा लाइसेंस अलग चीज है, लेकिन जब आप किसी संस्था के ऊपर काम करते हो तो आप उसके तथ्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसमें थोड़ा सा विस्तार दिया जा सकता है, मगर झूठ नहीं फैलाया जा सकता।

फिल्म में एक दृश्य के बारे में बताते हुए जहाँ एक आर्मी मेजर गुंजन सक्सेना के चरित्र पर कुछ टिप्पणी करता है, सेवानिवृत्त अधिकारी चंडी ने कहा कि यहाँ तक कि एक मूर्ख को भी पता है कि जब आप एक कमीशन अधिकारी होते हैं, तो आप भारत के संविधान के लिए प्रतिबद्ध होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने मूवी मेकर्स से कहा कि एक नागरिक को यह कल्पना भी नहीं करना चाहिए कि आदेशों की अवज्ञा करना संभव है।

उन्होंने बताया कि कैसे भारतीय सशस्त्र बल महिला पुरुष में भेदभाव किए बिना काम करती है। उन्होंने कहा, “मैं खुद पहली महिला अधिकारी रही हूँ। मैंने 1996 में पाकिस्तान के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर उड़ान भरी थी। मुझे हर उस अधिकारी पर विश्वास था, जो क्रू रूम में मेरे साथ बैठे थे। मैं लेह में तैनात होने वाली पहली महिला पायलट थी और सियाचिन ग्लेशियर में चीता हेलिकॉप्टर उड़ाती थी, एक ऐसा क्षेत्र जहाँ वहम था कि जब भी कोई महिला बेस कैंप का दौरा करती थी तो सेना को हताहत होना पड़ता था! लेकिन एक बार भी मेरे सहकर्मियों या फ्लाइट कमांडर ने मेरे उड़ान या क्षमता पर आपत्ति नहीं जताई थी। मेरे पति और मैं दोनों दिसंबर 2000 से दिसंबर 2002 तक लेह में एक साथ तैनात थे। अगर मुझे संदेह होता, तो वह आपत्ति करने वाले पहले व्यक्ति होते।”

उन्होंने कहा कि उनकी महिला अधिकारी सहकर्मी भी हैरान और दुखी हैं कि इस फिल्म के माध्यम से क्या दिखाया गया है। नमृता चंडी ने खुलासा कि गुंजन सक्सेना को शौर्य चक्र मिला, यह खबर बिल्कुल असत्य है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माताओं ने तथ्यों के साथ खिलवाड़ किया है, जो वास्तविक शौर्य चक्र विजेताओं की बहादुरी को अपमानित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं फिर से दोहराती हूँ कि हममें से किसी के भी मन में गुंजन के खिलाफ कुछ भी नहीं है। हमारी सबसे बड़ी आपत्ति उस तरीके को लेकर है जिस तरह से महिला अधिकारियों को दिखाया गया है। मेरी साथी महिला अधिकारी, और मैं, वर्षों से, हमारे पुरुष सहयोगियों का प्रखरता से बचाव करते हैं। उन्होंने हमारा स्वागत किया है और हमें समान सम्मान दिया है।”

विंग कमांडर नमृता चंडी (सेवानिवृत्त) ने कहा, “मैंने एक हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में पूरे 15 साल तक सेवा की और खुद को एक बहुत ही गौरवशाली भारतीय वायु सेना अधिकारी मानती हूँ। मैं किसी को भी इस तरह से फोर्स की छवि को धूमिल करने की इजाजत नहीं दूँगी, फिर चाहे वो क्रिएटिविटी या सिनेमाई लाइसेंस की आड़ में ही क्यों न हो।”

नमृता चंडी ने पत्र के अंत में फिल्म में गुंजन का किरदार निभाने वाली जान्हवी को संदेश देते हुए कहा है कि अगर वो खुद को प्राउड भारतीय महिला मानती हैं, तो इस तरह की फिल्में दोबारा न करें। भारतीय पेशेवर महिलाओं और पुरुषों की इस तरह से नकारात्मक छवि दिखाना बंद करें।

गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रीय महिला आयोग ने फिल्म पर आपत्ति जताई है। इससे पहले भारतीय वायुसेना ने फिल्म पर अपनी खराब छवि दिखाने का आरोप लगाते हुए इसे प्रतिबंधित करने की माँग की थी। राष्ट्रीय महिला आयोग ने अब निर्माताओं से कहा है कि ‘गुंजन सक्सेना’ की स्ट्रीमिंग पर रोक लगाई जाए। साथ ही राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा है कि ‘गुंजन सक्सेना’ ने भारतीय वायुसेना की जिस तरह से नकारात्मक छवि दिखाई है, उसके लिए इसके निर्माताओं को माफ़ी माँगनी चाहिए।

ममता बनर्जी राजभवन की ही करवा रही हैं जासूसी? खुद राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने लगाए गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ममता बनर्जी सरकार पर जासूसी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की सरकार राजभवन को निगरानी में रख रही है। उनके मुताबिक़ इस कदम से राजभवन की पवित्रता पर प्रभाव पड़ेगा। पत्रकारों से बात करते हुए जगदीप धनखड़ ने इस मुद्दे पर कई बातें कहीं।    

उन्होंने कहा “मैं आपको बताना चाहता हूँ कि राजभवन सर्विलांस पर है। ऐसे कदम राजभवन की शुचिता कम करते हैं। मैं राजभवन की पवित्रता बरकरार रखने के लिए जितना कुछ हो पाएगा, सब करूँगा।” उन्होंने यह भी कहा कि राजभवन ने सर्विलांस से जुड़ी एक सूची तैयार की है। जिसे उनके आदेश के बाद जारी किया जा सकता है।    

इस मामले की एक जाँच भी शुरू कर दी गई है, जिससे सच्चाई सामने आ सके। बीते दिन (15 अगस्त 2020) स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजभवन में परंपरागत समारोह का आयोजन था। इसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल नहीं हुई थीं। राज्यपाल ने इस मुद्दे पर ममता बनर्जी की कड़ी आलोचना की थी। उनका कहना था कि वह इस बात से स्तब्ध हैं।  

रविवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल नहीं हुईं। जिस पर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ट्वीट किया। ट्वीट में उन्होंने लिखा कि संविधान से दूरी बनाने की एक और घटना सामने आई है। राज्यपाल धनखड़ ने इसके आगे लिखा:

“राज्य में क़ानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई है और राजनीतिक हिंसा और हत्याएँ चरम पर हैं। लेकिन राज्य सरकार ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठा रही है। लोगों में न तो संविधान के प्रति आस्था है और न ही क़ानून का भय।”     

यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है, जब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का राज्य सरकार से टकराव सामने आया है। अप्रैल में उन्होंने ममता बनर्जी को 11 पन्नों का पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार पर अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का आरोप लगाया था।

उन्होंने उस घटना का भी ज़िक्र किया था, जब ममता बनर्जी ने तबलीगी जमात के लोगों द्वारा कोरोना वायरस फैलाने पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा था, “मुझे सांप्रदायिक सवाल नहीं पूछे जाएँ।” जगदीप धनखड़ ने अपने पत्र में यह भी लिखा था कि एक अपराधी कभी निर्दोष को नहीं बचा सकता है।         

अखिलेश यादव की ‘राम’ राजनीति जारी, अब कहा- विष्णु भगवान के सभी अवतार हमारे

देश की राजनीति में श्रीराम को अपना बताने की होड़ सी मची है। इसके अलावा सपा और बसपा ने राज्य में परशुराम की मूर्ति लगवाने का भी ऐलान किया था। इस मुद्दे पर अभी तक राजनीति बयानबाज़ी जारी है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बयान दिया है। अखिलेश यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम के सभी अवतार हमारे हैं। भारतीय जनता पार्टी को इस बात से क्या परेशानी है। इसके बाद उन्होंने भाजपा की कार्यप्रणाली पर भी कई तरह के सवाल खड़े किए।     

रविवार (16 अगस्त 2020) को लखनऊ एक्सप्रेस वे से सैफई जाते हुए अखिलेश यादव ठठिया मंडी के पास रुके। वहाँ उनसे परशुराम की मूर्ति पर राजनीति होने से संबंधित सवाल किया गया। जिस पर अखिलेश यादव ने कहा, “भगवान विष्णु हमारे, भगवान राम हमारे और भगवान कृष्ण हमारे। विष्णु भगवान के सभी अवतार हम सभी के हैं इससे भाजपा को कैसी परेशानी हो सकती है? हम तो नवरात्र में देवियों की पूजा करते हैं, क्या देवियाँ भी भारतीय जनता पार्टी की हैं?” इसके बाद अखिलेश यादव ने कहा प्रदेश में बढ़ते अपराध की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बस राम के नाम पर राजनीति की जा रही है।     

उन्होंने उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन की आलोचना करते हुए कहा यहाँ सिर्फ आम जनता ही नहीं बल्कि विधायक भी सुरक्षित नहीं हैं। इस तरह के हालत ठोक दो नीति के कारण हो रहा है। अलीगढ़ के विधायक कांड से जुड़े सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा जब मुख्यमंत्री सदन के भीतर कहेंगे “ठोक दो” तब ऐसे हालत बनना स्वाभाविक है। पुलिस को नहीं पता है किसे ठोकना है और न ही विधायक को पता है किसे ठोकना है? आखिर यह सब सिखा कौन रहा है? उनके ही विधायक परेशान हैं और उन्हें ही अपमानित होना पड़ रहा है। सरकार का प्रदेश की क़ानून-व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं है।            

दरअसल हाल ही में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी दोनों ने राज्य में परशुराम की मूर्ति बनवाने का ऐलान किया था। सपा ने वादा किया था कि वो भगवान परशुराम की 108 फीट ऊँची प्रतिमा का निर्माण करवाएगी। इसके लिए जगह ढूँढने की बात भी कही जा रही है। बताया गया है कि प्रतिमा बनवाने के लिए समाजवादी पार्टी देश के लोकप्रिय मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति और लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में लगी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य मूर्ति बनाने वाले राजकुमार के संपर्क में है। इतना ही नहीं, सपा हर जिले में भगवान परशुराम की मूर्ति लगवाने और ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित कराने की योजना बना रही है। 

इसके पहले मायावती ने भी उत्तर प्रदेश में परशुराम की मूर्ति लगवाने की बात कही थी। पार्टी की मुखिया मायावती ने तो यहाँ तक कहा था कि वह सपा से भी ऊँची परशुराम की प्रतिमा लगवाएँगी। उन्होंने भगवान परशुराम के नाम पर अस्पताल बनवाने से लेकर साधु-संतों के ठहरने के लिए स्थल बनाने तक की बात कही। 

उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण समाज को बसपा ने पूरा प्रतिनिधित्व दिया है और ब्राह्मणों का बसपा पर पूरा विश्वास है। मायावती का पूरा जोर इस बात पर है कि वो ब्राह्मण हितों की रक्षा के मामले में सपा से ऊपर हैं। उन्होंने सपा से पूछा कि जब वो सत्ता में थी तब उसने परशुराम की मूर्ति क्यों नहीं लगवाई?

गणेश भगवान की मूर्ति पटक-पटक कर तोड़ रही बुर्का पहने महिला: वीडियो वायरल, इस्लामी कट्टरपंथी मना रहे जश्न

एक दुकान में भगवान गणेश की मूर्तियों को तोड़ने वाली बुर्का पहने एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। नीचे आप उस वीडियो को देख सकते हैं।

वीडियो में, बुरका पहने दो महिलाओं को पास में खड़े देखा जा सकता है। उनसे सटे ही हिंदू देवताओं (खासकर भगवान गणेश की) की मूर्तियाँ एक रैक पर रखी हुई हैं। दोनों महिलाओं में से एक वहाँ रखी मूर्तियों को एक-एक कर उठाती है और फिर उन्हें फर्श पर फेंक कर तोड़ती जाती है।

किसी मॉल या दुकान के अंदर शूट हुआ यह वीडियो जल्द ही वायरल हो जाता है। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने मूर्तियों को तोड़ने और ऐसा करने के लिए महिला को प्रोत्साहित करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया।

इनमें से कुछ लोगों की राय दिलचस्प भी रही। उनके अनुसार मूर्तियों केवल तभी तोड़ा जाना चाहिए जब अल्लाह इसकी आज्ञा दे। अल्लाह कैसै आज्ञा देगा, यह नहीं बताया। और हाँ, ऐसे लोगों के अनुसार अल्लाह से सीधे निर्देश के बिना मूर्तियों को तोड़ना अनुचित है।

ट्विटर के अलावा फेसबुक पर भी बहरीन की इस महिला के ‘साहस’ को जम कर सलाम किया गया।

फेसबुक पर मोदी, संप्रदाय विशेष, बीफ तक ले गए लोग इस बहस को

इस्लामी कट्टरपंथियों ने फेसबुक पर भी इसका जश्न मनाया। नीचे के दो स्क्रीनशॉट इसके उदाहरण हैं।

मूर्ति तोड़ने पर वाहवाही और प्रोत्साहन!
अल्लाह हू अकबर – भीड़ हो या दंगा या मूर्ति-भंजन… यह आवाज कट्टरपंथियों के मुँह से निकल ही आती है

इस पूरे प्रकरण में अंततः एक अच्छी खबर आई। बहरीन के गृह मंत्रालय ने वायरल वीडियो के बारे में एक बयान जारी किया। बयान के अनुसार स्थानीय पुलिस ने 54 वर्षीय महिला को जानबूझकर एक दुकान में धार्मिक मूर्तियों को तोड़ने के लिए समन (बुलावा भेजा) किया है। मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले में कानूनी कार्यवाही चल रही है।

सुशांत की बॉडी, काला बैग थामे एक व्यक्ति और एक मिस्ट्री महिला: नए वीडियो से बढ़ा रहस्य, परिवार ने उठाए सवाल

सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या मामले में एक और बड़ा रहस्य सामने आया है। एक तरफ सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियाँ इस मामले की जाँच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सामने आए एक वीडियो में एक मिस्ट्री बैग और एक संदिग्ध महिला के देखे जाने के बाद चर्चा का बाजार फिर से गर्म हो गया है। इस वीडियो में एक और व्यक्ति भी दिख रहा है, जिसकी पहचान हो गई है।

ये वीडियो ‘रिपब्लिक टीवी’ ने जारी किया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि सुशांत सिंह राजपूत के मृत शरीर के पास एक व्यक्ति काले रंग का बैग लेकर खड़ा है। गुलाबी रंग की टोपी पहने उस आदमी को सुशांत सिंह राजपूत का हाउस मैनेजर दीपेश सावंत बताया जा रहा है, जो काला बैग लेकर सीढ़ियों से उतर रहा है। साथ ही एक महिला भी दिख रही है, जो नीले और सफ़ेद रंग की स्ट्रीप्ड शर्ट पहनी हुई है।

इस वीडियो में उक्त महिला को सुशांत के अपार्टमेंट वाली कंपाउंड में दौड़ते हुए देखा जा सकता है। वो लड़की दौड़ते हुए आकर उस आदमी से मिलती है, जो काला बैग थामे हुए है। अगले फुटेज में उस आदमी के हाथ से बैग गायब नज़र आता है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि जब ये होता है, तब मुंबई पुलिस वहीं पर मौजूद रहती है। इस बैग का क्या रहस्य है और वो ‘मिस्ट्री वुमन’ कौन है, इस पर सवाल उठ रहे हैं।

इस वीडियो के सामने आने के बाद सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के वकील ने भी बैग, उसे थामे व्यक्ति और लड़की को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वकील विकास सिंह ने कहा कि इस वीडियो में जो दिख रहा है वो सब संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि उक्त व्यक्ति क्या सामान लेकर जा रहा है और वो लड़की कौन है, इसका खुलासा होना चाहिए। उन्होंने पूछा कि कहीं ये सब सबूत मिटाने के लिए तो नहीं क्या गया?

विकास सिंह का पूछना था कि मुंबई पुलिस की मौजूदगी में अनजान लोग घटनासरथल पर कैसे आवाजाही कर रहे हैं? उन्होंने पूछा कि क्राइम सीन में ये सब कैसे हो रहा है? साथ ही उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि उनके पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का समय नहीं लिखा हुआ है, जो कि एक महत्वपूर्ण डिटेल है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को मारा गया या फिर मार कर लटकाया गया, ऐसा मौत का समय जाने बिना स्पष्ट नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि सुबह में सुशांत के जूस पीने की बात कही गई, लेकिन किसी ने भी उन्हें जूस पीते नहीं देखा है। उन्होंने कूपर अस्पताल को बदनाम हॉस्पिटल बताते हुए कहा कि वहाँ से किसी को भी सर्टिफिकेट मिल जाता है। उन्होंने कहा कि कूपर में सुशांत को ले जाना ही संदिग्ध है। वहीं वीडियो में बैग थामे व्यक्ति और मिस्ट्री लड़की को बातें करते हुए भी देखा जा सकता है, जिस पर चर्चा हो रही है।

वहीं सुशांत सिंह राजपूत के दोस्त रहे गणेश हीरवरकर ने भी बड़ा दावा करते हुए कहा कि निर्देशक संदीप सिंह को सुशांत की मौत की जानकारी पहले से ही थी, ऐसा उनकी टीम से जुड़े सूत्रों ने उन्हें जानकारी दी है। उन्होंने मुम्बई पुलिस की आत्महत्या वाली थ्योरी को नकारते हुए इसे हत्या करार दिया। गणेश ने पुलिस से सुरक्षा माँग करते हुए कहा है कि वो सीबीआई के सामने सारी बातों को रखेंगे।

‘ट्रेनों में मोदी सरकार का गुणगान करेंगे 3000 भिखारी’: झूठा है दावा, AIR ने बताई हकीकत

पूरे देश ने शनिवार को 74वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया। लेकिन मोदी घृणा में कुछ मीडिया हाउस इस दिन भी झूठी खबर फैलाने से बाज नहीं आए। कुछ मीडिया हाउस ने खबर चलाई कि अब मोदी सरकार का गुणगान करने के लिए तीन हजार भिखारियों को भर्ती किया जाएगा।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय एक ऐसी योजना बना रही है जिसमें तीन हजार भिखारी चुने जाएँगे। इनका काम विभिन्न रेलगाड़ियों में यात्रियों के सामने मोदी सरकार की सफलताओं के गीत गाना होगा।

हालाँकि ऑल इंडिया रेडियो और पीआईबी ने इस दावे को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि ये दावा झूठा है और सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना नहीं बनाई जा रही है।

बता दें कि मीडिया हाउस ने दैनिक भास्कर के जयप्रकाश चौकसे का संदर्भ देते हुए खबर चलाई। हालाँकि यह खबर दैनिक भास्कर में 5 साल पहले यानी 2015 में छपी थी। 2015 में इकॉनॉमिक्स टाइम्स में भी ये खबर छापी थी, जिसे अभी सर्कुलेट किया जा रहा है। हालाँकि सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया है कि यह दावा निराधार है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी पीआईबी के इस ट्वीट को रिट्वीट करके बात साफ कर दिया है।

मोदी घृणा से ओतप्रोत कुछ मीडिया हाउस सरकार को घेरने और नीचा दिखाने के लिए इतने उतावले रहते हैं कि पाँच साल पुरानी इस खबर को लेकर प्रकाश जावड़ेकर को खत लिखा है। इसमें तंज कसा गया है कि न्यूज चैनल कम पड़ गए हैं क्या जो अब मंत्रालय मोदी का गुणगान करने के लिए भिखारियों की भर्ती कर रहा है।

बहरहाल, इनकी उत्सुकता को देखकर तो यही लगता है कि कहीं इनके लिए न्यूज तो नहीं कम पड़ गए तो इन्हें पाँच साल पुरानी खबर को लेकर सरकार को खत लिखना पड़ा।

इस ऑर्टिकल में प्रधानमंत्री के हिंदुत्ववादी छवि को लेकर भी निशाना बनाया गया है और ये दिखाने की कोशिश की गई कि पीएम संप्रदाय विशेष और अल्लाह के खिलाफ हैं। आर्टिकल लिखने वाले ने खुद को ‘प्राउड हिंदू’ बताया है।

इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत अभियान का भी माखौल उड़ाया गया है। बता दें कि जब से कोरोना महामारी का प्रकोप बढ़ा है, पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान पर जोर दिया है। इसके साथ ही कई सारी फालतू और अनर्गल दलील दी गई। बता दें कि इस आर्टिकल को ‘विमर्श’ की कैटेगरी में रखा गया है, तो हो सकता है कि यह मीडिया हाउस की संपादकीय नीति के तहत आता है।

खैर, इतना लंबा चौड़ा खत लिखने से पहले अगर मीडिया हाउस ने सच जानने की और खबर को सत्यापित करने की थोड़ी सी भी मशक्कत की होती, तो शायद सच से महरुम नहीं रहती। मगर एक सच्चाई यह भी है कि नैरेटिव को भी पकड़े रहने की मजबूरी है।

5 महीने बाद फिर शुरू हुई वैष्णो देवी यात्रा, रोजाना 2000 श्रद्धालुओं को होगी दर्शन की इजाजत

वैष्णो देवी यात्रा रविवार (16 अगस्त 2020) से शुरू हो गई है। करीब पॉंच महीने से पवित्र गुफा की यात्रा बंद थी। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर 18 मार्च को यात्रा बीच में ही रोक दी गई थी।

कोरोना को देखते हुए फिलहाल केवल 2000 श्रद्धालुओं को रोजाना दर्शन की इजाजत होगी। इस दौरान श्रद्धालुओं की जगह-जगह थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। उन्हें फोन पर आरोग्य सेतु ऐप भी डाउनलोड करनी होगी।

लंबे अंतराल के बाद शुरू की गई यात्रा में कई बदलाव किए गए हैं। पहले की तरह श्रद्धालु पंजीकरण केंद्रों पर रजिस्ट्रेशन नहीं करवा सकेंगे। इस बार केवल ऑनलाइन पंजीयन होगा और उसके बाद ही यात्रा में शामिल होने की अनुमति मिलेगी। फेस मास्क और फेस कवर पहनना अनिवार्य होगा।

यात्रा के शुरुआती बिंदुओं और अहम पड़ावों पर थर्मल स्कैनर भी लगा होगा। 10 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। जम्मू-कश्मीर के रेड जोन इलाकों और राज्य के बाहर के श्रद्धालुओं को कोविड नेगेटिव रिपोर्ट भी दिखानी होगी।    

राज्य के भीतर रेड ज़ोन से आए तीर्थ यात्रियों को कोविड परीक्षण की नकारात्मक रिपोर्ट हेलीपैड, प्रवेश बिंदु, बाण गंगा और कतरा में दिखानी होगी। अपनी नेगेटिव रिपोर्ट साथ रखने वालों को ही आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी। प्रशासन का यह भी कहना है कि घोड़ा, पिट्ठू और पालकिस को इजाज़त नहीं होगी।    

तीर्थ यात्रियों को असुविधा से बचाने के लिए बैटरी वाले वाहन, हेलिकॉप्टर और यात्री रोपवे चलाया जाएगा। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि समाजिक दूरी का पूरा पालन हो। किसी भी तरह की भीड़ इकट्ठा न हो इसके लिए कई इंतज़ाम किए गए हैं। सामूहिक समारोहों से बचने के लिए अटका आरती क्षेत्र में तीर्थ यात्रियों की बुकिंग और विशेष पूजा पर अगले आदेश तक रोक लगाई गई है।

कोरोना का हवाला दे बलात्कार आरोपित इब्राहिम ने पाई जमानत, जेल से निकलते ही पीड़िता को मार डाला

अमेरिका के वर्जीनिया से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ बलात्कार आरोपित जमानत पर निकला और उसने पीड़िता को ही मार डाला। ब्यूटी क्वीन कार्ला एलिज़ाबेथ डोमिंगेज गोंजालेज से बलात्कार करने के आरोपित इब्राहिम ऐल्काहलील बौआइची ने ही उसकी हत्या कर दी। बाद में वो फरार भी हो गया, जिसके बाद पुलिस को मिडिल-ईस्ट मूल के 6 फ़ीट 2 इंच लम्बे इस आरोपित को ढूँढने में खासी मशक्कत करनी पड़ी।

दिसंबर 2019 में अलेक्जेंडेरिया डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में कार्ला ने बताया था कि इब्राहिम ने उसके साथ बलात्कार किया और अक्टूबर में हुई इस घटना में सहमति नाम की कोई चीज नहीं थी। साथ ही उसने इब्राहिम पर बलात्कार, गला घोंटने और अपहरण के आरोप लगाए थे। आरोपित को पकड़ के जेल में डाल दिया गया था।

इसके बाद पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर फैसले लगा। अमेरिका में इसकी सबसे ज्यादा मार पड़ी और इब्राहिम के वकील को इस मामले में मौक़ा मिल गया। उसने कोर्ट में दावा किया कि महामारी के इस दौर में आरोपित को जेल में रखना न सिर्फ उसके और उसके साथ रहने वाले कैदियों बल्कि अटॉर्नी लोगों के लिए भी ठीक नहीं है। दलील दी गई कि ट्रायल पूरी होने तक उसे रिहा कर दिया जाए। हालाँकि, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने इसका विरोध किया।

उससे 25,000 डॉलर का बॉन्ड भरवा कर रिहा किया गया। भारतीय रुपयों में ये रकम 18,71,367 होती है। साथ ही शर्त रखी गई थी कि वो अपने मैरीलैंड वाले घर से तभी निकलेगा जब उसे अपने वकीलों से मिलना हो या फिर सुनवाई से जुड़े अधिकारियों से। लेकिन, उसके इरादे कुछ और ही थे। जुलाई 29 को वो अलेक्जेंडेरिया लौटा और उसने शहर के पश्चिमी छोर पर स्थित कार्ला के अपार्टमेंट के बाहर ही उसे मार डाला।

इसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। जनता की मदद लेनी पड़ी। पुलिस ने उसका एक वीडियो फुटेज जारी कर उसे हथियारबंद और खतरनाक करार दिया। साथ ही कहा कि उसे जहाँ भी देखें, लोग उसके बारे में सूचना दें। बुधवार (अगस्त 5, 2020) को फ़ेडरल मार्शल्स और एलेक्जेंडरिया पुलिस ने इब्राहिम को प्रिंस जॉर्ज काउंटी में आत्मसमर्पण करने को कहा।

लेकिन, ब्यूटी क्वीन रही कार्ला की हत्या कर भागते फिर रहे इब्राहिम ने पुलिस की एक न सुनी और इसी दौरान उसकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। जब पुलिस उसके पास पहुँची तो पाया कि उसने खुद को गोली मार ली थी। अब जब अमेरिका में सिविल लिबर्टी एक्टिविस्ट्स कोरोना आपदा के बीच कैदियों को संक्रमित होने से बचाने के लिए उन्हें रिहा करने की माँग कर रहे हैं, ये घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

वकीलों ने इब्राहिम के मामले में भी यही दलील दी थी कि जेल में रहते सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना असंभव हो सकता है और इससे संक्रमण का ख़तरा और बढ़ जाएगा। ताज़ा खबर ये है कि अस्पताल में भर्ती कराए जाने के 3 दिनों बाद इब्राहिम की भी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि कार्ला एलिज़ाबेथ के बलात्कार व हत्या मामले में उसे कस्टडी में लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उसने खुद को गोली मार ली और उससे ही उसकी मौत हुई।

‘लोकतंत्र की हत्या करने वाले कूड़ेदान में…’ – आपातकाल के बाद अटल बिहारी वाजपेयी का रामलीला मैदान वाला भाषण

1975 से लेकर 1977 के बीच देश की जनता ने लोकतंत्र का सबसे भयावह दौर देखा। जब देश की मर्ज़ी के खिलाफ़ देश के लोगों पर आपातकाल थोप दिया गया था। भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी और तमाम नेताओं व समाजसेवियों को जेल में ढूँस दिया गया था। फिर जनता ने ‘आपातकाली’ इंदिरा सरकार को हटा कर नई सरकार चुनी।

तब राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में लाखों लोगों की जनसभा हुई थी। उसमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी ने आपातकाल लगाने वाली सरकार की खुल कर आलोचना की थी। अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि जनता अनुशासन थोपने वाली सरकार नहीं चाहती है। इसके अलावा उन्होंने अपने भाषण में कई उल्लेखनीय बातें भी कही थीं।  

अटल बिहारी वाजपेयी ने भीड़ को संबोधित करते हुए अपना भाषण शुरू किया था। उन्होंने भाषण में कहा कि अनेक वर्षों से हमने एक सपना पाला था। अपने हृदय में एक अरमान जगाया था। उस सपने को सत्य में बदलने के लिए हम लगातार जूझते रहे, संघर्ष करते रहे। अब जाकर वह सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। देश में जो कुछ हुआ, उसे केवल चुनाव नहीं कह सकते हैं। एक शांतिपूर्ण क्रांति हुई है, लोक शक्ति की लहर ने लोकतंत्र की हत्या करने वालों को इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया है।    

इसके बाद अटल जी ने कहा जिनके मन में लोकतंत्र के लिए अटूट निष्ठा है, जो सामाजिक समता और आर्थिक बराबरी में विश्वास करते हैं, उन्हें जनता ने सेवा का मौक़ा दिया है। हम दिल्ली की जनता के आभारी हैं, जिसने दिल्ली की सारी सीटें कॉन्ग्रेस के हाथों से छीन कर जनता पार्टी को सौंप दी हैं। देश के और भागों में भी जनता ने असंदिग्ध निर्णय दिया है। याद है आपको, मैं चुनावों की सभा में कहा करता था कि सत्तारुढ़ दल के लोग पूछते हैं हमारा प्रधानमंत्री कौन होगा।    

फिर अटल जी ने कहा कि सत्ताधारी दल के लोग कहते हैं कि उन्होंने अपना प्रधानमंत्री चुन लिया है। वह कोई और नहीं बल्कि इंदिरा गाँधी होंगी। मैं पूछा करता था अगर श्रीमती इंदिरा गाँधी रायबरेली से हार गईं तो क्या होगा? अंततः वह हार गईं और हमने अपना प्रधानमंत्री निर्वाचित कर लिया।

लेकिन जैसा हमने पहले स्पष्ट किया था कि हमारी लड़ाई कुर्सी की लड़ाई नहीं है। हमारे लिए यह शुरू से ही सिद्धांतों की लड़ाई रही है और हमने इसे वैसे ही लड़ा है। हमें प्रसन्नता है कि जनता ने इस संघर्ष की गंभीरता को पहचाना और दो टूक फैसला दिया। जनता ने हमें बड़ी ज़िम्मेदारी दी है, हम प्रार्थना करते हैं कि वह हमें शक्ति दें और हम अपने कर्तव्य का निर्वहन कर सकें।    

इसके बाद अटल जी ने कहा जनता ने सिर्फ हमें ही ज़िम्मेदारी नहीं दी है। बल्कि अपने ऊपर भी ज़िम्मेदारी ले ली है। वोट देकर काम ख़त्म नहीं होता है बल्कि एक नया काम शुरू होता है। जिन्होंने अनुशासन के नाम पर ज़्यादती की थी उनका तो सफ़ाया हो गया। पर अनुशासन की ज़रूरत अभी भी बनी हुई है।

अंतर केवल इतना है कि हमारा अनुशासन ऊपर से थोपा नहीं जाएगा, आत्मानुशासन होगा। जनता ने जो जागरूकता चुनाव में दिखाई है, वही उसे दिन प्रतिदिन के जीवन में दिखानी होगी। समाज का कोई वर्ग इस आँधी से अछूता नहीं रहा है। देश के हर वर्ग, समुदाय और समूह के लोगों ने हमारा साथ दिया है।        

लिबरल गिरोह डिलीट कर रहे अपना फेसबुक एकाउंट: वजह बेंगलुरु दंगा, पैगंबर मोहम्मद या हेट स्पीच?

बेंगलुरु में संप्रदाय विशेष की उग्र भीड़ ने 11 अगस्त 2020 को दलित कॉन्ग्रेस विधायक के घर तोड़-फोड़ की और सामान लूटे। पुलिस थाने और पुलिसकर्मी भी हिंसा और दंगों का शिकार हुए। दंगाइयों ने 250 गाड़ियाँ फूँक दीं और लगभग 60 पुलिसकर्मी घायल हुए। इन सबके पीछे की वजह पैगंबर मोहम्मद के संबंध में कथित फेसबुक टिप्पणी रही। अब फेसबुक पर ही इस घटना की प्रतिक्रिया भी नज़र आ रही है। लिबरल्स का एक बड़ा समूह फेसबुक को अलविदा कह रहा है।    

बेंगलुरु में हुए दंगों के बाद कई लिबरल्स ने ऐलान किया है कि वह अपना फेसबुक एकाउंट बंद कर देंगे। इस कड़ी में एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान ने अपना फेसबुक एकाउंट बंद करने का ऐलान किया। निधि ऐसा करने वाले शुरुआती लोगों में एक हैं।    

वहीं स्वाति चतुर्वेदी ने ट्वीट करते हुए इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने सालों पहले फेसबुक एकाउंट बंद कर दिया था।    

आम तौर पर ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है कि लिबरल्स ने यह कदम बेंगलुरु में हुई हिंसा के बाद उठाया है। लेकिन अफ़सोस ऐसा नहीं है! लिबरल्स ने अपना फेसबुक एकाउंट इस वजह से नहीं बंद किया। बल्कि लिबरल्स ने अपना एकाउंट इसलिए बंद किया क्योंकि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में कुछ दावा किया था। दावे के मुताबिक़ फेसबुक के एक (बेनाम) शीर्ष अधिकारी ने ऐसा कहा कि एंटी मुस्लिम (मुस्लिम विरोधी) पोस्ट को ‘हेट स्पीच’ के दायरे में नहीं रखा जाएगा।    

लिबरल्स इस बात से निराश हैं कि फेसबुक की शीर्ष अधिकारी अंखी दास कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करती हैं। इसलिए लिबरल्स का मानना है कि फेसबुक संप्रदाय विशेष विरोधी पोस्ट को हेट स्पीच के दायरे में नहीं रखता है।

कुल मिला कर लिबरल्स ने बेनामी ‘पूर्व या वर्तमान’ फेसबुक कर्मचारी के आधार पर ऐसा अनुमान लगा लिया। साथ ही घोषित भी कर दिया कि अंखी दास मोदी समर्थक हो सकती हैं। वहीं दूसरी तरफ संप्रदाय विशेष की भीड़ ने जिस तरह शहर में दंगा भड़काया और आम लोगों को नुकसान पहुँचाया, वह कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे को कोसने का एक सटीक ज़रिया बन गया। वह जिसके कथित फेसबुक पोस्ट या कॉमेंट के कारण बेंगलुरु को दंगा देखना पड़ा।  

इसके बाद भाजपा विधायक टी राजा सिंह को भी निशाने पर लिया गया, जिन्होंने रोहिंग्या और संप्रदाय विशेष पर पोस्ट किया था। वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में इसका ज़िक्र है। रिपोर्ट में फेसबुक के एक कर्मचारी ने टी राजा को खतरनाक व्यक्ति बताया।

यह भी कहा गया कि अंखी दास ने टी राजा के संप्रदाय विशेष विरोधी पोस्ट हेट स्पीच के दायरे में रखने का विरोध किया। क्योंकि ऐसा करने से भारत में फेसबुक का व्यावसायिक प्रभाव कम होगा। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि ऐसा सिर्फ टी राजा ही नहीं बल्कि 3 और हिंदूवादी नेताओं के मामले में किया गया है। उनके भड़काऊ भाषणों को हेट स्पीच के दायरे में नहीं रखा गया है।    

वॉल स्ट्रीट की रिपोर्ट में इसके अलावा भी कई और दावे किए गए हैं। फेसबुक की कम्युनिकेशन एग्जीक्यूटिव एंडी स्टोन ने बताया कि अंखी दास ने सिर्फ अपने डर के आधार पर टी राजा का एकाउंट बंद नहीं किया। इसके अलावा फेसबुक ने ऐसे कई कदम उठाए हैं, जो कथित तौर पर भाजपा के हित में हैं।

फेसबुक ने 2019 के आम चुनावों के दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी के तमाम पेज भी निष्क्रिय कर दिए थे। इसके अलावा फेसबुक पर यह आरोप भी लगाया गया कि समूह ने भाजपा विरोधी ख़बरों को प्रतिबंधित कर दिया था।    

हैरानी की बात यह कि जब संप्रदाय विशेष के एक व्यक्ति ने सितंबर में एक दलित लड़की के साथ बलात्कार किया था, तब फेसबुक ने उल्टा उस संप्रदाय विशेष के व्यक्ति का बचाव किया था तब इनमें से किसी लिबरल ने अपना फेसबुक एकाउंट नहीं डिलीट किया था। बल्कि फेसबुक ने इस घटना से जुड़े लेख और ख़बरें ही हटा दी थीं।

फेसबुक ने ऐसे व्यक्ति को अब्यूजिव ट्रोल एज़ पॉलिसी हेड नियुक्त किया था, जो पहले प्रशांत किशोर के लिए काम करता था। इतना ही नहीं बेंगलुरु दंगों के मामले में भी लिबरल मीडिया ने भुक्तभोगी को ही आरोपित बना कर दिखाया। लिबरल मीडिया उन्हें ही भीड़ के सामने रख देना चाहता था, जिन्होंने इस घटना की सबसे महँगी कीमत चुकाई। यहाँ तक कि फेसबुक पर भी तमाम लोगों ने उनके (कॉन्ग्रेस विधायक और उसके भतीजे) को धमकियाँ दी। लेकिन फेसबुक ने इसे हेट स्पीच के दायरे में नहीं रखा।    

संप्रदाय विशेष के तमाम लोगों ने कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे को फेसबुक पर जान से मारने की धमकी तक दी। इस बात पर लिबरल्स ने गुस्सा नहीं जताया लेकिन एक ‘बेनाम फेसबुक कर्मचारी’ ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को कई बातें बताई, जिसके आधार पर उन्होंने फेसबुक पर भाजपा का समर्थन करने का आरोप लगा दिया। इससे लिबरल्स में गुस्सा और आक्रोश भर गया। जबकि फेसबुक पर खुद न जाने कितनी ऐसी ख़बरें और लेख मौजूद हैं, जो सीधे शब्दों में भाजपा की आलोचना करते हैं।    

इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव जीतने पर भी ऐसी ही बातें सामने आई थीं। जैसे ही दोनों चुनाव जीत कर आए थे उन पर तैयार की गई रिपोर्ट ऐसी नज़र आ रही थी जैसे लोगों के घावों पर नमक छिड़क दिया गया हो। अब उन्हें एक नियंत्रण के लिए कुछ कारणों की ज़रूरत पड़ सकती है।

इससे पहले आकार पटेल ने भी ब्राह्मणों पर होने वाली हिंसा को सामान्य बताया था। उनके हिसाब से यह बुद्धिजीवी है। लेकिन जैसे ही ब्राह्मण शब्द की जगह संप्रदाय विशेष शब्द का इस्तेमाल होता है वैसे ही यह हेट स्पीच बन जाती है। यहाँ किसी भी तरह के सिद्धांत काम नहीं करते हैं।