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अंकिता ने शेयर किए फ्लैट के रजिस्ट्रेशन और बैंक डिटेल, बताया- उनकी ईएमआई नहीं भरते थे सुशांत

अंकिता लोखंडे ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है जिसमें दावा किया गया था कि सुशांत सिंह राजपूत उनके फ्लैट की ईएमआई भरते थे। अंकिता ने फ्लैट का रजिस्ट्रेशन और बैंक डिटेल शेयर करते हुए बताया है कि ईएमआई हर महीने उनके ही बैंक अकाउंट से जाती है।

अंकिता ने ट्वीट कर कहा है, “यहॉं मैं सभी अटकलों को विराम देती हूॅं। मैं इससे ज्यादा चीजों को साफ-साफ नहीं बता सकती। यहॉं मैं अपने फ्लैट के रजिस्ट्रेशन और अपने बैंक खातों (1 जनवरी 2019 से 1 मार्च 2020 तक) का पूरा व‌िवरण रख रही हूॅं। मेरे अकाउंट से हर महीने सभी ईएमआई के अमाउंट कटे हैं। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकती। सुशांत को न्याय मिले।”

दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया था कि सुशांत सिंह राजपूत उस फ्लैट की ईएमआई भी भरते थे, जिसमें उनकी एक्स गर्लफ्रेंंड अंकिता लोखंडे रहती हैं। ईडी सुशांत सुसाइड मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जॉंच कर रही है।

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सुशांत मलाड में स्थित 4.5 करोड़ रुपए के एक फ्लैट का ईएमआई भर रहे थे। ये शायद वही फ्लैट है जिसमें अंकिता रहती हैं। सूत्रों के मुताबिक सुशांत के खाते से हर महीने इस फ्लैट का ईएमआई कट रहा था। यह फ्लैट सुशांत के ही नाम पर है।

बताया जा रहा था कि रिया चक्रवर्ती ने भी पूछताछ के दौरान इस फ्लैट का जिक्र किया था। उसने दावा किया था कि सुशांत चाह कर भी अंकिता से ये फ्लैट खाली करने को नहीं कह पा रहे थे। उल्लेखनीय है कि सुशांत की आत्महत्या की खबर आने के बाद से ही अंकिता मुखर रही हैं और लगातार इस मामले की जॉंच की मॉंग करती रही हैं। दोनों 6 साल तक एक-दूसरे के साथ रिलेशनशिप में थे।

इस बीच ED ने मुंबई पुलिस पर जॉंच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि चार बार चिट्ठी लिखे जाने के बावजूद मुंबई पुलिस सुशांत का फोन उसे सौंप नहीं रही है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सुशांत सिंह राजपूत के खातों से 15 करोड़ रुपए के गबन के मामले की जाँच कर रही है।

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईडी को अपनी तफ्तीश आगे बढ़ाने के लिए सुशांत के मोबाइल फोन के रिकॉर्ड की जरूरत है। लेकिन अभी तक मुंबई पुलिस से सहयोग नहीं मिला है।

ईडी सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती और उसके परिवार के सदस्यों से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ कर रही है। ईडी ने कथित तौर पर 2 आईपैड और एक लैपटॉप सहित परिवार से संबंधित मोबाइल फोन जब्त किए हैं। ईडी के डायरेक्टर ने मुंबई पुलिस को चार बार पत्र लिखकर कहा कि उन्हें अपनी जाँच में सुशांत के फोन की जरूरत है। इसके बावजूद मुंबई पुलिस ने सुशांत का फोन ईडी को नहीं सौंपा है।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने देश को किया संबोधित, गलवान के बलिदानियों को किया याद

74वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को देशवासियों को संबोधित किया। देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि स्वाधीनता सेनानियों के बलिदान के बल पर ही, हम सब, आज एक स्वाधीन देश के निवासी हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि महात्मा गाँधी हमारे स्वाधीनता आंदोलन के मार्गदर्शक रहे। उनके व्यक्तित्व में एक संत और राजनेता का जो समन्वय दिखाई देता है, वह भारत की मिट्टी में ही संभव था।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के उत्सवों में हमेशा की तरह धूम-धाम नहीं होगी। इसका कारण स्पष्ट है। पूरी दुनिया एक ऐसे घातक वायरस से जूझ रही है जिसने जन-जीवन को भारी क्षति पहुँचाई है और हर प्रकार की गतिविधियों में बाधा उत्पन्न की है। यह बहुत आश्वस्त करने वाली बात है कि इस चुनौती का सामना करने के लिए, केंद्र सरकार ने पूर्वानुमान करते हुए, समय रहते, प्रभावी कदम उठा‍ लिए थे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र उन सभी डॉक्टरों, नर्सों तथा अन्य स्वास्थ्य-कर्मियों का ऋणी है जो कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के योद्धा रहे हैं। ये हमारे राष्ट्र के आदर्श सेवा-योद्धा हैं। इन कोरोना-योद्धाओं की जितनी भी सराहना की जाए, वह कम है।

राष्ट्रपति ने कहा कि इसी दौरान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आए ‘अम्फान’ चक्रवात ने भारी नुकसान पहुँचाया , जिससे हमारी चुनौतियाँ और बढ़ गयीं। इस आपदा के दौरान, जान-माल की क्षति को कम करने में आपदा प्रबंधन दलों, केंद्र और राज्यों की एजेंसियों तथा सजग नागरिकों के एकजुट प्रयासों से काफी मदद मिली। इस महामारी का सबसे कठोर प्रहार, गरीबों और रोजाना आजीविका कमाने वालों पर हुआ है। संकट के इस दौर में, उनको सहारा देने के लिए, वायरस की रोकथाम के प्रयासों के साथ-साथ, अनेक जन-कल्याणकारी कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ की शुरुआत कर सरकार ने करोड़ों लोगों को आजीविका दी है, ताकि महामारी के कारण नौकरी गँवाने, एक जगह से दूसरी जगह जाने तथा जीवन के अस्त-व्यस्त होने के कष्ट को कम किया जा सके।

किसी भी परिवार को भूखा न रहना पड़े, इसके लिए जरूरतमन्द लोगों को मुफ्त अनाज दिया जा रहा है। इस अभियान से हर महीने, लगभग 80 करोड़ लोगों को राशन मिलना सुनिश्चित किया गया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि अपने सामर्थ्य में विश्वास के बल पर, हमने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अन्य देशों की ओर भी मदद का हाथ बढ़ाया है। अन्य देशों के अनुरोध पर, दवाओं की आपूर्ति करके, हमने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि भारत संकट की घड़ी में, विश्व समुदाय के साथ खड़ा रहता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए, हाल ही में सम्पन्न चुनावों में मिला भारी समर्थन, भारत के प्रति व्यापक अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना का प्रमाण है। आज जब विश्व समुदाय के समक्ष आई सबसे बड़ी चुनौती से एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है, तब हमारे पड़ोसी ने अपनी विस्तारवादी गतिविधियों को चालाकी से अंजाम देने का दुस्साहस किया।

उन्होंने कहा कि जवानों के शौर्य ने यह दिखा दिया है कि यद्यपि हमारी आस्था शांति में है, फिर भी यदि कोई अशांति उत्पन्न करने की कोशिश करेगा तो उसे माकूल जवाब दिया जाएगा। हमें अपने सशस्त्र बलों, पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों पर गर्व है जो सीमाओं की रक्षा करते हैं, और हमारी आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

सीमाओं की रक्षा करते हुए, हमारे बहादुर जवानों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। भारत माता के वे सपूत, राष्ट्र गौरव के लिए ही जिए और उसी के लिए मर मिटे। पूरा देश गलवान घाटी के बलिदानियों को नमन करता है। हर भारतवासी के हृदय में उनके परिवार के सदस्यों के प्रति कृतज्ञता का भाव है।

राष्ट्रपति ने बताया कि कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किए गए हैं। किसान बिना किसी बाधा के, देश में कहीं भी, अपनी उपज बेचकर उसका अधिकतम मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। किसानों को नियामक प्रतिबंधों से मुक्त करने के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ में संशोधन किया गया है। इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि हमारे देश और युवाओं का भविष्य उज्ज्वल है। केवल दस दिन पहले अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का शुभारंभ हुआ है और देशवासियों को गौरव की अनुभूति हुई है। पूरा देश गलवान घाटी के बलिदानियों को नमन करता है।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह ने इंडिया टुडे को बताया ‘सुस्त’, कहा- स्टिंग से पहले हो चुकी थी कार्रवाई

इंडिया टुडे समूह ने एक ‘स्टिंग ऑपरेशन’ किया था। इसमें सरकार पर एजेन्ट्स और ट्रैवल ऑपरेटर्स पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया था। इस स्टिंग में ऐसा खुलासा किया गया था कि एजेन्ट्स और ट्रैवल ऑपरेटर्स एयर इंडिया की वन्दे भारत के टिकट मन मुताबिक़ दाम पर बेच रहे थे। इस पर नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह ने इंडिया टुडे को फटकार लगाई है।   

इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए उड्डयन मंत्री ने कहा कि ऐसा स्टिंग करने के लिए किसी भी मीडिया समूह को पूरा होम वर्क कर लेना चाहिए। हालाँकि उन्होंने अपने ट्वीट में इंडिया टुडे का नाम नहीं लिया है।

इंडिया टुडे ने इस स्टिंग के आधार पर कई बड़े दावे किए थे। उनका कहना था कि महामारी के बाद इस योजना के तहत देश के कई हिस्सों में टिकट की कालाबाज़ारी हो रही है। सरकार इस पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर रही है, जिसकी वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

इन दावों का जवाब देते हुए हरदीप सिंह ने कहा कि मंत्रालय ऐसी घटनाओं पर हमेशा से निगरानी रख रहा था। मंत्रालय ने यात्रियों को ऐसे बिचौलियों से बचने के लिए अक्सर चेतावनी भी जारी की है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि टिकट केवल आधिकारिक तौर पर तय किए गए दामों पर ही खरीदे जाएँ।   

मंत्रालय की कोशिश लगातार यही रही है कि आम लोगों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं हो। उड्डयन मंत्री ने एयर इंडिया द्वारा हाल ही में जारी किए गए सर्कुलर का भी हवाला दिया। इस आदेश में मंत्रालय ने लिखा है कि पिछले कुछ समय में ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जिसमें बिचौलिए वंदे भारत मिशन के तहत चलने वाली हवाई जहाज के लिए ज़्यादा रुपए वसूल रहे थे।    

इस आदेश में यह भी साफ़ किया गया है कि मंत्रालय ने इस मामले में 3 एजेन्ट्स को चेतावनी भी जारी की है। इसके अलावा मंत्रालय ने तीन एजेंट्स का लाइसेंस भी रद्द कर दिया है। यह सब कुछ इंडिया टुडे के स्टिंग के बहुत पहले ही हो चुका है। इस संबंध में 2 जून 2020 को आरोपित एजेन्ट्स पर मामला भी दर्ज किया गया था। इस घटना को अब दो महीने से ज्यादा का समय हो चुका है और इंडिया टुडे इस मुद्दे पर अब स्टिंग कर रहा है।   

हरदीप सिंह ने कहा, “लेज़ी जर्नलिज्म (सुस्त पत्रकारिता) अपने लिए गड्ढे खोदने जैसा है। अगर मीडिया समूह (इंडिया टुडे) ने एयर इंडिया से ही जानकारी माँग ली होती या सोशल मीडिया पर इस मुद्दे से संबंधित जानकारी खोज ली होती तो उन्हें ऐसे नतीजे कभी हासिल नहीं होते।” हरदीप सिंह ने यह भी कहा कि जो लोग स्टिंग में शामिल हुए हैं वह असल में एजेन्ट्स हैं भी नहीं। एजेन्ट्स और सब एजेन्ट्स को IATA नियुक्त करता है। आरोपित बिचौलियों पर भी मामला दर्ज कर लिया गया है।    

यह पहला मौक़ा नहीं है जब उड्डयन मंत्रालय को वंदे भारत मिशन पर मीडिया द्वारा फैलाई गई झूठी ख़बरों के संबंध में सफाई जारी करनी पड़ी हो। इसके पहले मंत्री हरदीप सिंह ने ऐसे ही स्टिंग के लिए इकोनॉमिक टाइम्स को फटकार लगाई थी। इकोनॉमिक टाइम्स ने दावा किया था कि जो लोग भारत वापस आना चाहते हैं या भारत से कहीं जाना चाहते हैं, वह वंदे भारत मिशन से परेशान हो चुके हैं। इसके अलावा यह भी कहा था कि एयर इंडिया दूसरे देश में मौजूद भारतीय नागरिकों को वापस लेकर आने के लिए अत्यधिक दाम वसूल रही है। इस पर हरदीप सिंह ने सिलसिलेवार तरीके से जवाब दिया था। साथ ही इस रिपोर्ट को बेहद निचले स्तर की पत्रकारिता करार दिया था।    

वंदे भारत मिशन भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना थी। इसके तहत दुनिया के तमाम देशों में फँसे भारतीय नागरिकों वापस लाया जाना था। इस योजना के तहत एयर इंडिया ने अब तक विदेश में फँसे हज़ारों भारतीय नागरिकों को वापस बुलाया है। महामारी के दौर में भारत सरकार की इस योजना ने दूसरे देशों में फँसे नागरिकों की बहुत मदद की।  

कोरोना संक्रमण से मुक्त हुए अमित शाह, 12 दिन पहले पाए गए थे पॉजिटिव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कोरोना टेस्ट की रिपार्ट निगेटिव आई है। पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने कोरोना निगेटिव होने की जानकारी खुद ट्वीट कर दी है।

गृहमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा, “मैं ईश्वर का धन्यवाद करता हूँ और इस समय जिन लोगों ने मेरे स्वास्थ्य लाभ के लिए शुभकामनाएँ देकर मेरा और मेरे परिजनों को ढांढस बँधाया उन सभी का ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
डॉक्टर्स की सलाह पर अभी कुछ और दिनों तक होम आइसोलेशन में रहूँगा।”

एक और ट्वीट में उन्होंने अपना इलाज करने वाले डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को शुक्रिया कहते हुए लिखा, “कोरोना संक्रमण से लड़ने में मेरी मदद करने वाले और मेरा उपचार करने वाले मेदांता अस्पताल के सभी डॉक्टर्स व पैरामेडिकल स्टाफ का भी आभार व्यक्त करता हूँ।”

गृह मंत्री अमित शाह का हरियाणा के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था। 2 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद डॉक्टरों की सलाह पर वह मेदांता में भर्ती हुए थे। इसकी जानकारी उन्होंने खुद ट्वीट करके दी थी। उन्हें कोरोना के हल्के लक्षण थे। वायरस के पता चलने के 12 दिन बाद उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है।

बता दें, इससे पहले कुछ लोगों ने अमित शाह के कोरोना टेस्ट के रिपोर्ट को निगेटिव बताते हुए फर्जी अफवाह फैला दी थी। जिसके बाद 9 अगस्त को गृह मंत्रालय ने इस खबर को फर्जी बताते हुए स्पष्टीकरण जारी किया था। वहीं एमएचए ने भी बताया था कि अभी तक गृहमंत्री का टेस्ट नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि अमित शाह का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद, सोशल मीडिया पर इस्लामवादियों ने गृह मंत्री की मृत्यु की कामना की थी और जश्न भी मनाया था। कोरोना वायरस संक्रमित होने की वजह से अमित शाह भूमिपूजन में भी हिस्सा नहीं ले सके थे।

आतंकियों के जिस एनकाउंटर पर रोईं थी सोनिया गाँधी उसमें बलिदान हुए इंस्पेक्टर को गैलेंट्री अवॉर्ड

शुक्रवार (अगस्त 14, 2020) को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैलेंट्री अवॉर्ड का ऐलान किया। इसमें साल 2008 के बाटला हाउस एनकाउंटर में वीरगति प्राप्त हुए दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा का नाम भी है। उन्हें मरणोपरांत सातवीं बार वीरता पदक से सम्मानित किया जाएगा।

मोहन शर्मा के अलावा उनकी टीम के इंस्पेक्टर कैलाश सिंह बिष्ट (फिलहाल स्पेशल सेल में हैं), देवेंद्र मलिक और धर्मेंद्र समेत स्पेशल सेल के 6 बहादुरों को इस बार गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।

कुल मिलाकर देश के 215 पुलिसकर्मियों को (मरणोपरांत भी) गैलेंट्री अवॉर्ड के लिए चुना गया है। वहीं 80 पुलिसकर्मियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक और मेधावी सेवा के लिए 631 पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया जाएगा।

सातवीं बार वीरता पदक से सम्मानित होने वाले इंस्पेक्टर मोहन शर्मा के बारे में याद दिला दें कि उन्होंने मात्र 44 वर्ष की आयु में अपने प्राण देश की सेवा में गॅंवाए थे।। उन्हें बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान 3 गोलियाँ लगी थीं, जिसके बाद उन्होंने अस्पताल में अपना दम तोड़ा था।

जानकारी के अनुसार, 19 सितंबर 2008 को मोहन शर्मा को यह सूचना मिली थी कि इंडिया मुजाहिद्दीन के 5 आतंकी बाटला हाउस के एक मकान में मौजूद हैं। इसके बाद पुलिस टीम सतर्क हो गई। मोहन शर्मा ने भी अपने डेंगू से पीड़ित बेटे को अस्पताल पहुँचाया और पूरी टीम का नेतृत्व करने बाटला हाउस पहुँचे।

आतंकियों के फ्लैट में घुसने पर मुठभेड़ शुरू हुई। इस मुठभेड़ में पुलिस ने दो आतंकियो को ढेर कर दिया। इसी दौरान मोहन शर्मा भी घायल हो गए। बाद में पुलिस ने दो अन्य आतंकियों को भागते हुए गिरफ्तार कर लिया था।

मोहन शर्मा को तीन गोलियाँ लगी थीं। एक पेट में, एक जाँघ में और एक दाहिने हाथ में। अपने पूरे जीवन में 60 आतंकियों को मारने वाले और 200 से ज्यादा अपराधियों को पकड़ने वाले मोहन चंद शर्मा ने उस एनकाउंटर में घायल होने के बाद होली फैमिली अस्पताल में अपने प्राण त्याग दिए थे।

बता दें कि बाटला हाउस एनकाउंटर की नींव 13 सितंबर 2008 को राजधानी में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के बाद पड़ी थी जिसे इंडियन मुजाहिद्दीन ने अंजाम दिया था।

इस सीरियल बम ब्लास्ट में 26 लोग मारे गए थे और कई घायल हुए थे। लेकिन, पुलिस कार्रवाई में जब बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ तो हर जगह यह फैलाया गया कि दिल्ली पुलिस ने छात्रों को आतंकी समझकर मार गिराया।

इस एनकाउंटर पर काफी विवाद हुआ था। कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने तो एक चुनाव प्रचार के दौरान यह भी कहा था कि जब उन्होंने बाटला हाउस एनकाउंटर की तस्वीरें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को दिखाईं तो वह रो पड़ी। साथ ही तस्वीरों को देखकर यह भी कहा कि एनकाउंटर की जाँच होनी चाहिए।

बेंगलुरु दंगे में SDPI का नाम आने पर इसे बैन करने की तैयारी: कर्नाटक सरकार के मंत्री ने कहा- 20 अगस्त को फैसला

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में भड़की हिंसा के पीछे सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का नाम सामने आया है। सूबे की येदियुरप्पा सरकार इस पर प्रतिबंध लगा सकती है। कर्नाटक के मंत्री केएस ईश्वरप्पा ने कहा कि SDPI एक बेकार संगठन है हम इसे बैन करने के बारे में विचार कर रहे हैं।

मंत्री ने कहा, “SDPI एक वाहियात संगठन है और इस पर बैन लगाने पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही दो फैसले लिए जाएँगे। पहला ये कि बेंगलुरू हिंसा में शामिल लोगों की संपत्ति जब्त की जाएगी। दूसरा एसडीपीआई पर प्रतिबंध। 20 अगस्त को कैबिनेट की बैठक में इन 2 मामलों पर चर्चा की जाएगी।”

बता दें, एसडीपीआई इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का राजनीतिक संगठन है। गत गुरुवार को बेंगलुरु पुलिस ने कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता केजे जॉर्ज के करीबी सहयोगी एसडीपीआई के सदस्य कलीम पाशा को बेंगलुरु हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया है। जिला सचिव मुज़म्मिल पाशा सहित दो अन्य लोगों को बुधवार को गिरफ्तार किया गया था।

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के नेता मुजम्मिल पाशा को दंगों का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि बेंगलुरु में 11 अगस्त की हिंसा के सिलसिले में 60 और लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जिसमें कलीम पाशा को मिलाकर हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या 206 हो चुकी है। वहीं उपमुख्यमंत्री सीएन अश्वथ नारायण के अनुसार हिंसा के संबंध में इसके 4 सदस्यों को गिरफ्तार किए जाने के बाद सरकार SDPI पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार कर रही थी।

पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR के अनुसार, 5 लोगों के एक गिरोह ने 200 से 300 लोगों की भारी सशस्त्र भीड़ का नेतृत्व किया और उन्हें पुलिस पर हमला करने के लिए कहा था।

बेंगलुरु के जीडे हल्ली इलाके में मंगलवार रात करीब 9.30 बजे उपद्रवियों ने कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के घर को निशाना बनाया था। इस दौरान विधायक के घर का एक हिस्सा आग के हवाले कर दिया गया था। दरअसल, विधायक श्रीनिवास के भतीजे ने सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट किया था, जिसके बाद संप्रदाय विशेष के लोगों ने जमकर बवाल मचाया था। करीब 250 गाड़ियाँ फ़ूंक दी गई। वहीं हिंसा के दौरान हमले में एडिशनल पुलिस कमिश्नर समेत 60 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं थीं।

नहीं महसूस किया कोई भेदभाव, मिले बराबर अवसर: IAF की आपत्ति के बाद गुंजन सक्सेना ने भी बयाँ किया अनुभव

नेटफ्लिक्स (Netflix) की फिल्म ‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ में अनुचित नकारात्मक चित्रण पर IAF की आपत्ति के बाद गुंजन सक्सेना ने अपने वास्तविक अनुभवों पर बयान जारी किया है। 

उन्होंने अपनी बात रखते हुए यह स्पष्ट किया कि उनके साथ उनके वरिष्ठों ने, साथियों ने और कमांडिंग ऑफिसर्स ने किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया। उन लोगों ने तो हर प्रकार से उनका सहयोग किया

IANS से बात करते हुए सक्सेना ने भारतीय वायु सेना की संस्कृति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि IAF के प्रशिक्षण और मजबूत नीतियों ने ही उन्हें असाधारण रूप से साहसी उपलब्धियाँ हासिल करने के लिए साहस प्रदान किया।

उन्होंने बताया कि भारतीय सशस्त्र बल की सभी शाखाओं की सभी महिला अधिकारी जिन्होंने संगठन में रहकर देश की सेवा की है या कर रही हैं, वह सभी वायुसेना के मजबूत मूल्यों और समृद्ध सांस्कृतिक लोकाचार से प्रेरित हैं।

साल1994 में प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करके IAF से जुड़ने वाली सक्सेना बताती हैं, “हाँ, कमर्शियल फिल्म के रूप में या फिक्शन के रूप में, फिल्म ने मेरी कहानी को दिखाने की कोशिश की है। लेकिन जो बात किसी भी संदेह से परे है वो ये कि मेरे लिए दरवाजों खोले गए और कई अवसर दिए गए। और ये चीज फिल्म में भी दिखाई गई है।”

सक्सेना का यह भी कहना है कि भारतीय वायुसेना में रहते हुए उन्होंने कोई भेदभाव का सामना नहीं किया। उन्हें और अन्य अधिकारियों को बराबर अवसर दिए गए। उन्होंने इस बात पर भी गौर करवाया कि भारतीय वायु सेना में महिला अधिकारियों की बढ़ती दर संगठन की समतावादी नीतियों की प्रमाण हैं।

भारतीय वायुसेना में जाने के बाद शुरुआती सालों में जब उनसे लैंगिक भेदभाव पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “IAF भारत की एक बेहद सम्मानित संस्था है। वह आप में बदलाव लाने के बारे में प्रगतिशील और सकारात्मक है।”

गौरतलब है कि गुंजन सक्सेना के जीवन व संघर्षों पर आधारित फिल्म में नकारात्मक चित्रण पर एयरफोर्स ने आपत्ति जताई थी। इंडियन एयर फोर्स ने सेंसर बोर्ड को लिखे अपने पत्र में बातें साफ-साफ समझाई थी। IAF ने कहा था, “नेटफ्लिक्स और धर्मा प्रोडक्शंस ने भारतीय वायु सेना का प्रतिनिधित्व प्रामाणिकता के साथ करने की सहमति व्यक्त की थी ताकि यह फिल्म अगली पीढ़ी को वायु सेना में ज्वाइन करने के लिए प्रेरित करने में मदद करती।”

IAF के अनुसार जब फिल्म का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया, तो यह देखा गया कि इसमें भारतीय वायुसेना को अनुचित ढंग से दिखाया गया है। गुंजन सक्सेना मतलब श्रीदेवी की बेटी जाह्णवी कपूर (बॉलीवुड में नेपोटिजम) के स्क्रीन कैरेक्टर को महिमामंडित करने के लिए फिल्म में जबरन ऐसी परिस्थितियाँ प्रस्तुत की गईं, जो वायु सेना की कार्य संस्कृति के विपरीत है।

मैं इस्लाम मानने वालों को भाई समझता था, उन्होंने मेरे घर पर पेट्रोल बम फेंके: रो पड़े कॉन्ग्रेस के दलित MLA

कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति ने पत्रकारों से बात करते हुए दुखी मन से कहा, “मैं इस्लाम मानने वालों को अपना भाई मानता था और कम से कम 25 साल से हम मिल-जुलकर रह रहे थे… फिर भी आज मैंने अपना 50 साल पुराना घर खो दिया।”

हाल ही में बेंगलुरु में हुए दंगों के दौरान, उग्र इस्लामवादियों ने पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ कर हिंसक प्रदर्शन किया। संप्रदाय विशेष की भारी भीड़ ने सड़कों पर जमकर तोड़फोड़ की और कॉन्ग्रेस विधायक आर मूर्ति के घर को जला दिया। इसके साथ दंगाइयों ने डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस स्टेशनों पर हमला किया। पुलिस वाहनों और कई अन्य वाहनों को आग लगा दी और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया।

दिल दहला देने वाली घटना को याद करते हुए कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा कि उनके घर पर संप्रदाय विशेष के 3000-4000 दंगाइयों की भीड़ पहुँची, पथराव किया, पेट्रोल डाला, टायर जलाए और घर में आग लगा दी।” उन्होंने बताया कि उग्र दंगाइयों ने तलवार, कुल्हाड़ी, लाठी से हमला किया और उनके आवास पर पेट्रोल बम भी फेंके।

कैमरे के सामने अपने दुख को व्यक्त करते हुए विधायक ने कहा कि दंगाइयों ने जिसे जलाया वह मेरा पुश्तैनी घर था। वहीं वे अपने भाई-बहनों के साथ बड़े हुए है और अपने माता-पिता के साथ रह रहे थे। उन्होंने बताया कि परिवार पिछले 50 वर्षों से उस घर में रह रहा था।

विधायक श्रीनिवास मूर्ति दलित समुदाय से हैं। अपने निर्वाचन क्षेत्र में संप्रदाय विशेष के भारी वोट शेयर होने के बावजूद, वे पिछले 4 चुनावों से अच्छे अंतर से जीत रहे हैं। उनके संप्रदाय विशेष के स्थानीय नेताओं के साथ अच्छे संबंध होने की भी खबर है। विधायक ने दंगों को उकसाने के लिए बाहरी लोगों को भी दोषी ठहराया और स्थानीय निवासियों से उन दोषियों को पकड़ने में मदद करने का आग्रह किया।

सीबीआई या सीआईडी जाँच की जाँच की माँग

कॉन्ग्रेस MLA ने कहा, “सवाल यह उठता है कि अगर कानून बनाने वाले को यह भुगतना पड़े तो मैं आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे कर सकता हूँ?” उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपने परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की है। साथ ही मामले की जाँच सीबीआई या सीआईडी ​​को सौंपने की अपील की है।

उन्होंने कहा, “एक विधायक होने और कर्नाटक में सबसे बड़े मार्जिन से जीतने के बावजूद आज मेरी यह हालत है। अन्य विधायकों की क्या स्थिति हो सकती है?”

बेंगलुरु दंगे में कॉन्ग्रेस के लिंक आए सामने

गौरतलब है कि इस भयावह दंगों के तुरंत बाद जो डिटेल सामने आए थे, उससे संकेत मिलता है कि नगवारा कॉर्पोरेटर इरशाद बेगम के पति कलीम पाशा ने अन्य एसडीपीआई नेताओं के साथ मिलकर दंगों को अंजाम दिया।

कलीम पाशा नागवारा वार्ड का पूर्व कॉर्पोरेटर है। कथित तौर पर वह राज्य में कॉन्ग्रेस लीडर के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है। वह कर्नाटक के पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता केजे जॉर्ज के सहयोगी के रूप में भी जाना जाता है।

उसकी फेसबुक प्रोफाइल इस तथ्य पर भी प्रकाश डालती है कि वह एक सक्रिय कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता था। बेंगलुरु हिंसा मामले में पाशा और स्थानीय एसडीपीआई नेता मुज़म्मिल पाशा के खिलाफ बेंगलुरु पुलिस ने केस दर्ज भी किया है।

ऑड-ईवन बन गई कोर्ट की अवमानना: कभी लेफ्ट-लिबरल्स जताते थे अवमानना में सजा पर ख़ुशी, आज उनके समर्थक हैं नाराज

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण अदालत की अवमानना के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए हैं। प्रशांत भूषण को सजा 20 अगस्त को सुनाई जाएगी। अपने लिबरल गिरोह के आदमी को दोषी पाए जाने पर सोशल मीडिया लिबरल जमात एकबार फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताते हुए देखा जा रहा है, लेकिन उन्हें प्रशांत भूषण द्वारा 2017 में किया गया एक ट्वीट याद करना चाहिए, जिसमें प्रशांत भूषण ने अदालत की अवमानना में पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीएस कर्णन को दोषी ठहराए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की थी।

प्रशांत भूषण ने लिखा था – “ख़ुशी की बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार कर्णन को अदालत की घोर अवमानना ​​के लिए जेल में डाल दिया। उन्होंने जजों पर लापरवाही से आरोप लगाए और फिर SC के जजों के खिलाफ ‘बेतुके’ आदेश पारित किए!”

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों के ख़िलाफ़ लिखे गए न्यायमूर्ति कर्णन के कई पत्रों पर स्वत: संज्ञान लिया था। जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। इस संबंध में उन्होंने सीबीआई को आदेश दिया था कि मामले की जाँच की जाए और इसकी रिपोर्ट संसद को सौंपी जाए।

इन आरोपों के जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने इसे अदालत की आवमानना बताया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सात जजों की एक खंडपीठ गठित की, जिसने जस्टिस कर्णन के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना से जुड़ी कार्रवाई शुरू की।

कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीएस कर्णन को वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना ​​के लिए जेल भेजा गया था। न्यायमूर्ति कर्णन, जून 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे, जब तत्कालीन CJI जेएस खेहर की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संविधान पीठ ने अदालत की अवमानना ​​के मामले में उन्हें 6 महीने की जेल की सजा सुनाई और वो गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गए।

बाद में उन्हें कोयंबटूर से पश्चिम बंगाल सीआईडी ​​ने गिरफ्तार कर लिया था। देश में अपनी तरह का यह पहला मामला रहा जब अवमानना के आरोप में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के न्यायाधीश को जेल भेजा गया।

लेकिन अब प्रशांत भूषण के मामले में इन्टरनेट पर मौजूद तमाम वाम-उदारवादी वर्ग ‘ऑड-इवन’ की तर्ज पर इस बार उच्चतम न्यायालय के फैसले से नाराज नजर आ रहा है और प्रशांत भूषण को दोषी ठहराए जाने पर सुप्रीम कोर्ट की गरिमा पर सवालिया निशान लगाते हुए नजर आ रहा है।

गालिबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के ट्वीट पर इन्टरनेट पर मौजूद वकीलों से इसे कोर्ट की अवमानना साबित करने की अपील करते हुए देखी गई हैं। एक से अधिक बार उन्होंने अदालत की अवमानना के आधार पर मोदी सरकार को भी घेरने के प्रयास किए हैं। लेकिन आज प्रशांत भूषण के केस में यही गालीबाज स्वाति चतुर्वेदी सुप्रीम कोर्ट को उसके दायित्व पर पाठ पढ़ाते हुए देखी जा सकती है।

इन्टरनेट ट्रोल और इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने प्रशांत भूषण पर अदालत के फैसले के बाद कश्मीर के अपराधियों से इसकी तुलना करते हुए ट्वीट में लिखा है कि कश्मीर में हिरासत में लिए गए लोगों की बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉरपस) याचिकाएँ भी एक साल से अधिक समय से लंबित हैं!

हालाँकि, यही राजदीप सरदेसाई कुछ समय पहले राम मंदिर के विषय पर अदालत की अवमानना जैसे हथियारों को याद करते देखे जा रहे थे। इसी क्रम में निखिल वागले सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता तक पर सवाल खड़े करते देखे जा रहे हैं।

प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन कश्मीर में 4G इन्टरनेट सेवा को लेकर मोदी सरकार पर और पूर्व CJI की पीएम मोदी से मुलाकात को अदालत की अवमानना का विषय बता चुके हैं।

प्रोपेगेंडाबाज वामपंथी कविता कृष्णन भाजपा नेताओं के बयान पर अदालत की अवमानना का ही जिक्र करते हुए देखी गईं हैं।

मतभेद और अवमानना में फर्क

प्रशांत भूषण को दोषी ठहराए जाने पर भारत का वाम-उदारवादी वर्ग यह दलीलें देते हुए नजर आ रहा है कि प्रशांत भूषण ने जो भी कहा था वह सिर्फ उनके ‘विचार’ थे। वामपंथी लिबरल वर्ग तर्क दे रहा है कि मतभेदों को अवमानना नहीं मन जाना चाहिए।

लेकिन सवाल यह है कि प्रशांत भूषण द्वारा जितने भी आरोप सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और मुख्य न्यायाधीशों पर लगाए गए, वह सब बेबुनियाद और हर दूसरे राह चलते आदमी के निष्कर्षों से भी ज्यादा वाहियात थे।

प्रशांत भूषण ने एक ट्विटर ट्रोल की तरह तंज भरा ट्वीट करते हुए लिखा था कि जब उच्चतम न्यायालय लॉकडाउन की अवस्था में नागरिकों को न्याय के उनके मौलिक अधिकारों से वंचित कर रहा है तब नागपुर स्थित राजभवन में प्रधान न्यायाधीश बगैर मास्क या हेलमेट के भाजपा नेता की 50 लाख की मोटरसाइकिल की सवारी कर रहे हैं।

प्रशांत भूषण के इन गंभीर आरोपों में न ही मतभेद नजर आते हैं और ना ही तर्क नजर आते हैं। वास्तविकता यही है कि ये प्रशांत भूषण जैसे लोग ही हैं, जो अपने बेबुनियाद और बिना सर-पैर के आरोपों के कारण ही हर्ष मंदर जैसे लोग नागरिकों को न्याय में यकीन न करकर सड़क पर उतर जाने के लिए उकसाते हुए नजर आते हैं।

प्रशांत भूषण जैसे लोग ही सस्थाओं को महत्वहीन साबित करने का हर संभव प्रयास कर समाज के ढाँचों को अस्थिर करते नजर आते हैं। और आखिर में इन आरोपों की परिणति बेंगलुरु दंगों और दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों के रूप में देखी जाती है, जब कोई अब्दुल पेट्रोल बम लेकर पहले वाहन और फिर थोड़ा सा हौंसला और बढ़ाकर पुलिस थानों को ही फूँकने निकल पड़ता है।

370-CAA-बाबरी से गुस्से में था, जकात के फंड से भड़काए दंगे: जामिया के मीरान हैदर का कबूलनामा

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र मीरान हैदर ने दिल्ली में फरवरी में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के सिलसिले में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हैदर लालू यादव की पार्टी राजद के युवा विंग की दिल्ली इकाई का अध्यक्ष भी है। उसे दिल्ली पुलिस ने दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

जी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, हैदर ने जाँचकर्ताओं को बताया है कि जामिया हिंसा के बाद पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों की योजना बनाई गई थी। उसने पुलिस को बताया कि केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 हटाने, सुप्रीम कोर्ट द्वारा बाबरी मस्जिद के फैसले और फिर CAA के लागू होने से उसके मन में गुस्सा और नफरत भर गया था और उसने सरकार के खिलाफ संप्रदाय विशेष के लोगों को एकजुट करने के बारे में सोचा।

जरूरत पड़ने पर उसने केंद्र के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के लिए तैयार रहने का भी आह्वान किया। आरोपित मीरान हैदर ने पुलिस को बताया कि वह खुद सभी राज्यों में सहायता जुटाने और सीएए-एनआरसी के खिलाफ लोगों को उकसाने के लिए गया था।

मीरान हैदर के अनुसार, दिसंबर 15, 2019 को JCC (जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी) का गठन किया गया। फिर इसी JCC के नाम से ही व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया, जिस पर आगे की प्लानिंग होने लगी। इसी ग्रुप में AAJMI ( Allumani Association of Jamia Milliya islamaiya) और कई छात्र संगठन भी शामिल थे।

मीरान हैदर ने दिल्ली पुलिस को बताया था कि जामिया विश्वविद्यालय के परिसर में भड़की हिंसा के बाद दंगों को लेकर साजिश रची गई थी। मीरान को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन और दंगों के लिए भीड़ इकट्ठा करने के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं की देखरेख करने का काम सौंपा गया था।

संप्रदाय विशेष बहुल इलाकों को चुना

उसने खुलासा किया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों के लिए फंड उपलब्ध कराया था। हैदर ने खुद दंगों के लिए लगभग 5 लाख रूपए इकट्ठा किए थे। हैदर ने दिल्ली पुलिस को बताया कि दिल्ली के संप्रदाय विशेष बहुल इलाकों जाफराबाद और सीलमपुर को पहले दंगों के लिए चुना गया था, जिसके लिए मीरान और अन्य लोगों ने चाकू, पेट्रोल और पत्थर आदि इकट्ठा किए थे।

मीरान हैदर, जिसे UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था और न्यायिक हिरासत में है, ने दंगों से पहले एक रजिस्टर तैयार किया था, जिसमें उसने इस उद्देश्य के लिए एकत्रित किए जा रहे सभी फंड्स का रिकॉर्ड रखा था।

मीरान हैदर के मुताबिक दिल्ली में दंगा करवाने के लिए सबसे पहले दिल्ली के नॉर्थ-ईस्ट सीलमपुर और जाफराबाद को ही चुना गया था, क्योंकि संप्रदाय विशेष बाहुल्य इलाके में ऐसी गतिविधियाँ चलाना उन्हे ज्यादा आसान लगा। खुद हैदर ने लोगों से चाकू, पेट्रोल और पत्थर इकठ्टा करने के लिए कहा था।

जकात के फंड से दिल्ली दंगे किए

फंड्स की मदद से उसके निर्देश पर गैजेट्स खरीदे गए। हैदर ने बताया कि ‘ज़कात’ के रूप में जुटाए गए धन का उपयोग उसने पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगों के लिए किया गया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मीरान हैदर ने खुलासा किया कि दंगे की स्क्रिप्ट को 3 हिस्सो में बाँटा गया था- पहला प्रोटेस्ट, दूसरा रोड ब्लॉक और आखिर में भयानक दंगे। दिल्ली पुलिस को दिए अपने बयान में आरोपित मीरान हैदर ने बताया की वो दंगों के पहले से ही जेनयू (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद और खालिद सैफी को जानता था।

मीरान हैदर ने दिल्ली पुलिस को बताया कि वह भी 2014 से 2017 तक आम आदमी पार्टी में था, लेकिन नगर निगम चुनाव लड़ने के लिए टिकट ना मिलने पर उसने 2017 में पार्टी छोड़ दी और राजद में शामिल हो गया।