Home Blog Page 4583

हसन और यमन ने कुत्ते का कान काट कर उसके सामने रख दिया’ – सोशल मीडिया पर वायरल हो गई तस्वीर का फैक्ट चेक

सोशल मीडिया पर एक भयावह तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें एक निरीह जानवर के साथ बर्बरता होती हुई देखी जा सकती है। तस्वीरों के साथ दिए गए सन्देश में कहा जा रहा है कि ये तस्वीरें तुर्की की हैं, जहाँ संप्रदाय विशेष के दो लड़कों ने बेरहमी दिखाते हुए एक कुत्ते के कान काट लिए। साथ ही बताया गया है कि बेख़ौफ़ आरोपितों ने अपनी इस घृणास्पद करतूत पर गर्व करते हुए इसे फेसबुक पर भी शेयर किया।

दावा किया जा रहा है कि फेसबुक पर दोनों आरोपित ने लिखा कि घरेलू कुत्ते काफी गंदे होते हैं और इस्लाम मानने वालों को उनके साथ ऐसा ही व्यवहार करना चाहिए। इस खबर को सोशल मीडिया पर पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग अंतराल पर कई बार शेयर किया गया। दोनों आरोपित इसमें युवा ही दिख रहे हैं और वो धारदार हथियारों से कुत्ते के दोनों कान काट कर उसे अपने हाथ में लेकर हँसते हुए दिखा रहे हैं।

हमने जब इस खबर की पड़ताल की तो पाया कि ये तुर्की की खबर है। तुर्किश मीडिया के अनुसार, इन दोनों ने मिल कर कुत्ते के दोनों कान काट लिए, जिसके बाद उन पर प्रशासन द्वारा 950 यूरो का फाइन लगाया गया। यानी, उन्हें बस 93,000 रुपए का आर्थिक दंड देकर छोड़ दिया गया। लेकिन, पेंच ये है कि ये खबर फ़रवरी 2017 की है, यानी 3 साल पुरानी। इसी खबर को आज भी शेयर किया जा रहा है।

दरअसल, तुर्की के उक्त दोनों युवक डॉग फाइटिंग में मशगूल थे और वो कुत्तों की लड़ाई करा कर अपना मनोरंजन किया करते थे और रुपए भी कमाते थे। जिस कुत्ते का उन्होंने दोनों कान काट लिए, उसे भी उन्होंने अपनी तरफ से फाइटिंग में लगाया था। लेकिन, वो कुत्ता हार गया और उन दरिंदों ने उसके कान काट कर उसे इसकी ‘सज़ा’ दी। ये घटना दक्षिणी-पश्चिमी तुर्की के इस्पार्टा सिटी की है।

इसके बाद उनकी तस्वीरें वायरल हो गई थीं, जिसमें खून से लथपथ कुत्ते को देखा जा सकता है। दोनों आरोपितों के नाम हसन कुजू और नेसेट यमन है, जिन्हें सजा के नाम पर सिर्फ आर्थिक जुर्माना भर देना पड़ा। एक फोटोग्राफ तो इतना भयावह है कि उसमें कुत्ते के काटे हुए कान को जमीन पर रख कर उसे उसकी ओर देखने के लिए विवश किया जा रहा है। इसके बाद दुनिया भर के पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था।

स्थानीय मीडिया का कहना था कि उनके इस कृत्य में एक तीसरा आदमी भी शामिल था, जिसने ये तस्वीरें क्लिक की और साथ ही उनका वीडियो भी बनाया। बाद में विरोध होने पर पर उन्होंने सोशल मीडिया से इन तस्वीरों को हटा दिया। पशु क्रूरता के मामले में तुर्की में नियम-कानून काफी मामूली हैं, जिन्हें सख्त बनाने की माँग समय-समय पर होती रही है। इस तरह से ये खबर तो सच्ची है लेकिन 3 साल पुरानी है।

रिलीज हो गई है लेकिन स्ट्रीमिंग पर रोक लगाई जाए और माफ़ी भी माँगें: ‘गुंजन सक्सेना’ को लेकर NCW सख्त

जाह्नवी कपूर अभिनीत फिल्म ‘गुंजन सक्सेना’ नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है लेकिन इसे नित नए विवादों का सामना करना पड़ रहा है। अब राष्ट्रीय महिला आयोग ने फिल्म पर आपत्ति जताई है। इससे पहले भारतीय वायुसेना ने फिल्म पर अपनी खराब छवि दिखाने का आरोप लगाते हुए इसे प्रतिबंधित करने की माँग की थी। राष्ट्रीय महिला आयोग ने अब निर्माताओं से कहा है कि ‘गुंजन सक्सेना’ की स्ट्रीमिंग पर रोक लगाई जाए।

साथ ही राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा है कि ‘गुंजन सक्सेना’ ने भारतीय वायुसेना की जिस तरह से नकारात्मक छवि दिखाई है, उसके लिए इसके निर्माताओं को माफ़ी माँगनी चाहिए। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने लिखा कि असली गुंजन सक्सेना को सामने आकर इसका खुलासा करना चाहिए कि लिंग के आधार पर वायुसेना में उनके साथ भेदभाव हुआ या नहीं। क्या फिल्म में जो दिखाया जा रहा है वो सही है?

रेखा शर्मा ने कहा कि वो कभी सोच भी नहीं सकती कि भारत के रक्षा अधिकारी गुंडों की तरह व्यवहार करें। रेखा शर्मा ने कहा कि चाहे वो महिला अधिकारी हों या कोई और महिला, उन्हें सुरक्षा बलों में उचित सम्मान मिलता है। बता दें कि रेखा शर्मा खुद एक सैन्य परिवार से सम्बन्ध रखती हैं और उन्होंने इस मुद्दे को भावनात्मक रूप से लिया है। अभी तक निर्माता करण जौहर ने माफ़ी नहीं माँगी है।

बाद में रेखा शर्मा ने गुंजन सक्सेना के ताजा बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सच्चाई फिल्म में जो दिखाया गया, उसके उलट है तो निर्माताओ को जरूर माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने फिल्म की स्क्रीनिंग भी रोकने को कहा। रेखा शर्मा ने पूछा कि अपने ही सुरक्षा बलों की गलत छवि दिखाने वाली फिल्म पर रोक क्यों नहीं लगनी चाहिए, वो भी तब, जब ये सब गलत हो। वायुसेना पहले ही इस पर आपत्ति जता चुका है।

इंडियन एयर फोर्स ने सेंसर बोर्ड को लिखे अपने पत्र में बातें साफ-साफ समझाई थी। IAF के अनुसार, “नेटफ्लिक्स और धर्मा प्रोडक्शंस ने भारतीय वायु सेना का प्रतिनिधित्व प्रामाणिकता के साथ करने की सहमति व्यक्त की थी ताकि यह फिल्म अगली पीढ़ी को वायु सेना में जॉइन करने के लिए प्रेरित करने में मदद करती।” IAF के अनुसार जब फिल्म का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया, तो यह देखा गया कि इसमें भारतीय वायुसेना को अनुचित ढंग से नकारात्मक तरह से दिखाया गया है।

वहीं गुंजन सक्सेना ने फिल्म में दिखाई गई बातों से इतर भेदभाव की बातों को नकार दिया था। उन्होंने बताया कि भारतीय सशस्त्र बल की सभी शाखाओं की सभी महिला अधिकारी जिन्होंने संगठन में रहकर देश की सेवा की है या कर रही हैं, वह सभी वायुसेना के मजबूत मूल्यों और समृद्ध सांस्कृतिक लोकाचार से प्रेरित हैं। उन्होंने बताया कि  मेरे लिए दरवाजों खोले गए और कई अवसर दिए गए।

सिर्फ घर नहीं जलाया, 3 करोड़ रुपए के सोने-चाँदी भी लूटे: बेंगलुरु कॉन्ग्रेस MLA ने उस रात की बताई हर बात

बेंगलुरु में हुई दंगों की घटनाओं मे हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक़ 11 अगस्त 2020 के दिन हुए दंगों में पुलिस की गाड़ियाँ जलाई गई थीं। कॉन्ग्रेस विधायक के घर तोड़-फोड़ हुई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। लेकिन बेंगलुरु पुलिस ने कुछ और बड़े खुलासे किए हैं। बेंगलुरु पुलिस के मुताबिक़ उस दिन भीड़ ने लगभग 3 करोड़ के सामान भी लूटे।    

बेंगलुरु पुलिस की जाँच में एक और हैरान कर देने वाली बात सामने आ रही है। दंगों के संबंध में 12 अगस्त को सैयद नदीम नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। इसके बाद पुलिस ने उसे आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। कुछ समय बाद नदीम ने सीने और पेट में दर्द की बात कही। जिसके बाद उसे बोरिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।    

इस दौरान नदीम पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी। शनिवार के दिन नदीम की मृत्यु हो गई। कुछ ही समय बाद उसकी कोरोना जाँच की रिपोर्ट भी सामने आई। जिसमें यह पता चला कि वह कोरोना पॉजिटिव था। क्षेत्र के अतिरिक्त मंडलायुक्त हेमंत निम्बलकर ने भी इस घटना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सैयद नदीम को कई तरह की परेशानियाँ थी, जब उसकी हालत पर संदेह हुआ, तब उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ कुछ ही समय बाद उसकी मृत्यु हो गई।    

घटना के संबंध में कॉन्ग्रेस विधायक ने भी प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसमें दंगों से जुड़ी कई अहम बातें आई हैं। बेंगलुरु पुलिस के मुताबिक़ कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर में लगभग 3 हज़ार लोगों ने तोड़-फोड़ मचाई और गाड़ियों को आग के हवाले किया। इतना ही नहीं घर में मौजूद सोना, चाँदी और नकदी मिला कर लगभग 3 करोड़ का सामान भी लूटा गया। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है और अभी तक कुल 206 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।        

इसके पहले कॉन्ग्रेस विधायक इस घटना पर अपना पक्ष रख चुके हैं। कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति ने पत्रकारों से बात करते हुए दुखी मन से कहा था, “मैं इस्लाम मानने वालों को अपना भाई मानता था। कम से कम 25 साल से हम मिल-जुलकर रह रहे थे। फिर भी आज मैंने अपना 50 साल पुराना घर खो दिया।”

दिल दहला देने वाली घटना को याद करते हुए कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा कि उनके घर पर संप्रदाय विशेष के 2000-3000 लोगों की भीड़ पहुँची, पथराव किया, पेट्रोल डाला, टायर जलाए और घर में आग लगा दी। उन्होंने बताया कि उग्र दंगाइयों ने तलवार, कुल्हाड़ी, लाठी से हमला किया और उनके आवास पर पेट्रोल बम भी फेंके। इसके अलावा कॉन्ग्रेस MLA ने कहा, “सवाल यह उठता है कि अगर कानून बनाने वाले को यह भुगतना पड़े तो मैं आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे कर सकता हूँ?”

उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपने परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की है। साथ ही मामले की जाँच सीबीआई या सीआईडी ​​को सौंपने की अपील की है। उन्होंने कहा, “एक विधायक होने और कर्नाटक में सबसे बड़े मार्जिन से जीतने के बावजूद आज मेरी यह हालत है। अन्य विधायकों की क्या स्थिति हो सकती है?”

बेंगलुरु के जीडे हल्ली इलाके में मंगलवार रात करीब 9.30 बजे उपद्रवियों ने कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के घर को निशाना बनाया था। इस दौरान विधायक के घर का एक हिस्सा आग के हवाले कर दिया गया था। दरअसल, विधायक श्रीनिवास के भतीजे ने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट किया था, जिसके बाद संप्रदाय विशेष के लोगों ने जमकर बवाल मचाया था। करीब 250 गाड़ियाँ फ़ूँक दी गई। वहीं हिंसा के दौरान हमले में एडिशनल पुलिस कमिश्नर समेत 60 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं थीं।

‘राम’ है दुनिया की सबसे महँगी करेंसी, छपी है भगवान की फोटो भी: एक राम की कीमत 886.5 रुपए – फैक्ट चेक

सोशल मीडिया पर एक दावा शेयर हो रहा है कि दुनिया की सबसे मजबूत और महँगी करेंसी का नाम राम है। साथ ही बताया जा रहा है कि आज की तारीख में 1 राम की कीमत 10 यूरो के बराबर है। बता दें कि 1 यूरो फिलहाल 88.65 भारतीय रुपयों के बराबर होता है। इस तरह से दावे के मुताबिक़ एक राम की कीमत 886.5 रुपए हुए। कहा जा कि ये मुद्रा आज भी चलती है और इसे हॉलैंड की डच सरकार ने मान्यता दी हुई है।

सोशल मीडिया पर इस दावे को शेयर करते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत पटेल उमराव ने लिखा कि महर्षि महेश योगी ने हॉलैंड में आज से लगभग बीस साल पहले “राम” नाम से करेंसी चलाई थी। साथ ही उन्होंने 1, 5 और 10 ‘राम’ का नोट भी शेयर किया, जिस पर भगवान राम की तस्वीर बनी हुई है और साथ हुई ‘विश्व शांति राष्ट्र’ अंकित किया हुआ है। इस पर ‘नीदरलैंड’ भी लिखा हुआ है।

कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इस दावे को आगे बढ़ाया और लिखा कि एक हमारे यहाँ के नेता हैं, जो राम नाम को ही सांप्रदायिक मानते हैं और राम मंदिर पर मोदी सरकार का समर्थन करने से दूर भागते हैं क्योंकि ये सब उनकी तुष्टिकरण की नीति के खिलाफ है। लोगों ने लिखा कि जिस देश में राम का जन्म हुआ, उससे ज्यादा बाहर के लोग उन्हें मान-सम्मान दे रहे हैं और उनके नाम पर करेंसी भी है।

ऑपइंडिया ने जब सोशल मीडिया के इन दावों की पड़ताल की तो पाया कि राम नाम की करेंसी हॉलैंड में है और इसे वहाँ मान्यता भी मिली हुई है। इस दौरान हमें फ़रवरी 2003 की एक बीबीसी की खबर मिली, जिसमें बताया गया था कि डच सेन्ट्रल बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि महर्षि महेश योगी द्वारा जारी की गई ‘करेंसी’ राम उसके नियमों का उलंघन नहीं करती। साथ ही बताया गया था कि उस वक़्त हॉलैंड में 100 से अधिक दुकानें इसका लेनदेन करती हैं।

इसे अक्टूबर 2001 में ‘द ग्लोबल कंट्री ऑफ वर्ल्ड पीस’ द्वारा लॉन्च किया गया था। कई शहरों और गाँवों में, यहाँ तक कि बड़े मॉल्स में भी इस करेंसी को स्वीकार किया जाता है। डच सेन्ट्रल बैंक ने कहा था कि ये सब कुछ नियमानुसार हो रहा है। महर्षि मूवमेंट के ‘वित्त मंत्री’ रहे बेंजमिल फेल्डमैन ने कहा था कि गरीबी से लड़ने में राम मददगार साबित हो सकता है और कृषि में इसके उपयोग को बढ़ावा मिलना चाहिए।

राम को ‘वर्ल्ड पीस बॉन्ड’ के नाम से भी जाना जाता है। महर्षि मूवमेंट का कहना है कि इससे विश्व शांति को मजबूती मिलेगी, अर्थव्यवस्था में संतुलन बनेगा और साथ ही गरीबी से लड़ाई में ये कारगर सिद्ध होगा। यूरोप में इसकी कीमत 10 यूरो के बराबर होती है, वहीं अमेरिका में ये 10 डॉलर के बराबर हो जाता है। राम के नोट सिर्फ 3 डेनोमिनाशन में आते हैं। इसका सर्कुलेशन काफी तेजी से बढ़ा था।

फ़िलहाल इसे आर्थिक विशेषज्ञ ‘बेयरर बॉन्ड’ या लोकल करेंसी कहते हैं। नीदरलैंड के 30 शहरों में इसका उपयोग किया जाता है। लोवा में स्थित महर्षि सिटी को इसकी राजधानी कहा जाता है। इसके द्वारा अमेरिका के विभिन्न शहरों में ‘पीस पैलेस’ बनाए जा रहे हैं। इस तरह से ये दवा सही है कि राम करेंसी को हॉलैंड में डच सरकार की मान्यता मिली हुई है और इसकी कीमत 10 यूरो है। लेकिन, बात ‘ लीगल टेंडर’ की हो तो इसे दुनिया की सबसे महँगी करेंसी नहीं कह सकते।

‘वहॉं नुकीले पत्थर निकले हैं… तो जमीन को समतल करना पड़ेगा, बैठने लायक करना पड़ेगा’

आज एनआरसी, सीएए और एनपीआर पर जिस तरह भ्रम पैदा करने की कोशिश हो रही है। समुदाय विशेष को उकसाया जा रहा। विरोध के नाम पर हिंसा हो रही। हिंदुत्व की कब्र खुदेगी जैसे नारे लग रहे हैं। ऐसे वक्त में अटल ​बिहारी वाजपेयी होते तो कॉन्ग्रेसियों और वामपंथियों की साजिश को लेकर क्या कहते?

इसकी झलक राम मंदिर को लेकर संसद में दिए वाजपेयी के एक भाषण में मिलती है। अयोध्या में राम मंदिर को लेकर भी कभी आज के तरह ही साजिश रची गई थी। बीते साल 16 अगस्त को आखिरी सॉंस लेने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐसी ही साजिशों का जवाब देते हुआ सालों पहले बहुसंख्यक हिंदुओं की ओर से एक सपना देखा था। वह सपना था नैतिक विश्वास के बल पर अयोध्या में राम का मंदिर बनाने का। इसी साल सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इस स्वप्न के पूरा होने का रास्ता साफ हुआ है।

हालॉंकि राम मंदिर आंदोलन को लेकर वाजपेयी का जिक्र अक्सर 5 दिसंबर 1992 को लखनऊ की रैली में दिए गए उनके भाषण को लेकर किया जाता है। अयोध्या में कारसेवा से ठीक एक दिन पहले हुई उस रैली में कहा था “वहॉं नुकीले पत्थर निकले हैं। उन पर तो कोई नहीं बैठ सकता तो जमीन को समतल करना पड़ेगा, बैठने लायक करना पड़ेगा।” इन पंक्तियों का हवाला देकर कुछ लोग वाजपेयी पर कारसेवकों को उकसाने का आरोप भी लगाते रहते हैं।


5 दिसंबर 1992 का वाजपेयी का संबोधन

ऐसा करने वाले वहीं हैं, जो हमेशा से भाजपा पर राम के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते रहे हैं। जो 6 दिसंबर 1992 को साजिश का हिस्सा बताते हैं। करीब 500 साल से कॉन्ग्रेसियों, वामपंथियों, लिबरलों, समाजवादियों और धर्मनिरपेक्षता के कथित ठेकेदारों का यही गिरोह अयोध्या में इस्लामी अक्रांताओं के गुनाह को महिमामंडित कर रहा था। जब से सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या की विवादित जमीन ही रामजन्मभूमि स्थान है, यह गिरोह फिर से जान-बूझकर 6 दिसंबर को उभारने की कोशिश में लगा है।

अयोध्या में राम मंदिर को लेकर वाजपेयी की सोच क्या थी? बहुसंख्यक हिंदू समुदाय क्या सोचता था? इसकी झलक लोकसभा में 17 दिसंबर 1992 को वाजपेयी के संबोधन से मिलती है। अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान उन्होंने कहा था, “राम का मंदिर छल और छद्म से नहीं बनेगा। राम का मंदिर अगर बनेगा तो एक नैतिक विश्वास के बल पर बनेगा। अगर ढॉंचा तोड़ने का इरादा होता, तो ढॉंचा तोड़ने के लिए वहॉं इतने कारसेवक इकट्ठे करने की जरूरत नहीं थी। अयोध्या में तीन महीने में मेले होते हैं। अगर छुपकर काम करना था, अगर चोरी से काम करना था, अगर योजना बनाकर तोड़ना था तो इसके लिए कारसेवा की जरूरत नहीं थी।”

17 दिसंबर 1992 का वाजपेयी का पूरा भाषण पढ़ने के लिए क्लिक करें


वाजपेयी के संबोधन का अंश

उन्होंने यह भी कहा था, “हम यह भी कहते थे कि हम मस्जिद को तोड़ना नहीं चाहते। हम सम्मान के साथ उसे दूसरे स्थान पर ले जाना चाहते हैं, राम जन्मस्थान से अलग। थोड़ा दूर जाकर वहॉं मस्जिद बने। हम उसमें कारसेवा करने के लिए तैयार हैं। हम उसमें योगदान देने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह नहीं हो सका।”

सुप्रीम कोर्ट के फैसला भी इस भावना के अनुकूल है। सारे सबूत रामलला के पक्ष में थे। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकार उस जमीन पर अपने दावे के पक्ष में कोई सबूत पेश नहीं कर सके। बावजूद इसके शीर्ष अदालत ने उन्हें मस्जिद के लिए पॉंच एकड़ जमीन सरकार को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

राम मंदिर आंदोलन तो भाजपा के एजेंडे में जून 1989 में हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में ​हुए पार्टी अधिवेशन में शामिल हुआ था। आंदोलन को लहर में बदलने वाली लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक की प्रसिद्ध रथ यात्रा तो सितंबर 1990 में शुरू हुई। लेकिन, उससे भी करीब दो साल पहले मुंबई की एक जनसभा में वाजपेयी ने कहा था, “एक अच्छी भावना के साथ रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद की पूरी जमीन हिंदुओं को दे देनी चाहिए और इस भावना के बदले में हिंदुओं को मौजूदा ढॉंचे के साथ बिना कोई छेड़छाड़ किए मंदिर बनाना चाहिए।” 1989 में वामपंथी नेता हिरेन मुखर्जी को लिखे पत्र में भी वाजपेयी ने इसका उल्लेख किया है। यह पत्र वाजपेयी ने अपने नाम 5 जून 1989 को लिखे गए हिरेन के खुले खत का उत्तर देते हुए लिखा था।

17 दिसंबर 1992 के भाषण में ही वाजपेयी ने कहा था, “अयोध्या ट्रेजेडी है। आप हम पर जितना दोषारोपण करेंगे हम उतना ही सुर्खरू होंगे।” राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बहुसंख्यक हिंदुओं की भावना और सुर्खरू हुई है। NRC के मामले में भी छल और छद्म परास्त होंगे, हम और सुर्खरू होंगे!

इस उन्माद, मजहबी नारों के पीछे साजिश गहरी… क्योंकि CAA से न जयंती का लेना है और न जोया का देना

कहानी एक अब्दुल की जिसे टीवी एंकर दंगाई बनाता है… उसकी मौत से फायदा किसको?

2019 की इस मजहबी उन्मादी आग से 2024 में कितनी रोशन होगी भाजपा?

बॉलीवुड माफिया का माउथपीस महेश भट्ट, मेरी 16 साल की बेटी को लगातार धमका रहे थे: जिया खान की माँ

जिया खान के अवसाद में होने की बात कही जा रही थी। इसी मुद्दे पर ‘इंडिया टुडे’ द्वारा जब जिया की माँ से ये सवाल पूछा गया तो उन्होंने इस सवाल पर सवाल पूछा कि उनकी बेटी के डिप्रेशन में होने की बात महेश भट्ट के अलावा और किसने कही थी? राबिया (जिया खान की माँ) ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी के अंतिम संस्कार के वक़्त महेश भट्ट के सामने ही ये बात कही थी कि मुझे माफ़ कीजिएगा लेकिन जिया खान डिप्रेशन में नहीं थी।

इससे पहले भी राबिया ने ध्यान दिलाया था कि किस तरह महेश भट्ट ने सुशांत सिंह राजपूत के मानसिक स्वस्थ्य को लेकर बातें की थीं। राबिया ने महेश भट्ट को बॉलीवुड का माउथपीस बताते हुए कहा कि उन्हें कुछ नहीं पता है, वो इतने तरस के लायक हैं कि उन्हें कुछ पता ही नहीं है। उन्होंने खुलासा किया कि जब जिया खान मात्र 16 साल की थी और भट्ट कैम्प में काम कर रही थी, तब महेश भट्ट उन्हें धमकाते रहते थे।

साथ ही महेश भट्ट ने राबिया से ये भी कहा था कि वो जिया को अकेला छोड़ दें। उन्होंने पूछा कि आखिर वो अपनी बेटी को अकेला कैसे छोड़ सकती हैं? उन्होंने कहा कि वो न्याय के लिए लड़ती रहेंगी। राबिया ने कहा कि वो दुनिया को इन लोगों की सच्चाई बताते रहेंगी। राबिया ने कहा कि सुशांत की भी जिया की तरह ही हत्या होने के कारण वो असहाय महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि दोनों को झूठे प्यार के जाल में फँसाया गया।

राबिया खान ने सुशांत और जिया की मौत में बताई समानता

राबिया ने कहा कि जिया और सुशांत, दोनों को ही शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उनके रुपयों के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया गया। साथ ही दोनों को ही अपने परिवार और चाहने वालों से दूर कर दिया गया। दोनों को काम की कमी की वजह से मानसिक रूप से अवसादग्रस्त करार दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनके पार्टनरों का नियंत्रण उन पर से खो गया तो दोनों की हत्या कर दी गई।

ज्ञात हो कि 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा के अपने घर में लटके मिले थे। 8 जून को उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या की थी। इसी दिन सुशांत का घर उनकी गर्लफ्रेंड रिया चकवर्ती ने छोड़ा था। 8 से 13 जून के बीच महेश भट्ट और रिया चकवर्ती के बीच फोन पर कई बार बात हुई। इस दरम्यान रिया ने 16 बार महेश के नंबर पर कॉल किया। ईडी सूत्रों के हवाले से रिया के कॉल डिटेल्स के आधार पर यह दावा किया गया है।

13 साल की दलित लड़की से रेप के बाद फोड़ दी आँखें, काट डाला जीभ: UP पुलिस ने गिरफ्तार किए दो आरोपित

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ 13 साल की दलित लड़की के साथ बलात्कार की घटना हुई है। बलात्कार के अलावा भी हैवानियत की सीमाएँ पार की गई, लड़की की आँखें फोड़ दी गई। इसके बाद उसकी जीभ तक काट दी गई। अंत में उसके गले में रस्सी बाँधा गया और गन्ने के खेत में काफी दूरी तक घसीटा गया।    

घटना लखीमपुर, उत्तर प्रदेश और नेपाल सीमा स्थित पकरिया गाँव, ईसानगर थाने के पास हुई है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार लड़की घर से निकली थी। इसके बाद वह अपने घर वापस नहीं लौटी। काफी समय बीतने के बाद लड़की के परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की। फिर उन्होंने पुलिस से भी इस घटना की शिकायत दर्ज कराई।    

पुलिस द्वारा की गई खोजबीन में लड़की का शव गन्ने के खेत में बरामद हुआ। शव बेहद भयावह स्थिति में था, उसकी आँखें फोड़ दी गई थीं और जीभ तक काट दी गई थी। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि लड़की के साथ बलात्कार हुआ है। मामले में जाँच करते हुए पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।  

लखीमपुर जिले के पकरिया गाँव में रहने वाली 13 साल की लड़की गन्ने के खेत में गई थी। तभी मौके पर गाँव के दो युवक आए और उन्होंने लड़की के साथ बलात्कार किया। इस दौरान क्रूरता की सारी सीमाएँ पार की गई और लड़की को असहनीय पीड़ा दी गई। सबसे हैरानी की बात यह है कि घटना दोपहर 1 बजे हुई। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ लड़की के घर नहीं लौटने पर उन्होंने तलाश शुरू की।    

खोजने के दौरान उसका शव खेत से बरामद किया गया। जिसके बाद पोस्टमॉर्टम में लड़की के साथ बलात्कार की पुष्टि हुई। लड़की के परिवार वालों ने गाँव के युवकों (संतोष यादव और संजय गौतम) पर बलात्कार का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने आरोपितों पर लैंगिक अपराधों से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम (POSCO Act), बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज किया। फिलहाल पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। 

‘PM मोदी के कार्यकाल में आज का भारत ‘महिलाओं के विकास’ से ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ की ओर बढ़ चला है’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए सबसे पहले कोरोना वायरस से जंग जीतने की बात कही और कोरोना वॉरियर्स को नमन किया। करीब 1 घंटे 27 मिनट लंबे भाषण में प्रधानमंत्री का फोकस कोरोना वायरस, आर्थिक विकास और आत्मनिर्भर भारत पर रहा। 

इस दौरान उन्होंने महिला शक्ति से लेकर डिजिटल इंडिया और लद्दाख में चीनी घुसपैठ से लेकर शिक्षा व्यवस्था तक पर बात की। उन्होंने चीन और पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि एलओसी से लेकर एलएसी तक देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने आँख उठाई है, देश की सेना ने उसका उसी भाषा में जवाब दिया है।

पिछले 6 वर्षों से भारत के प्रधानमंत्री ने अपने प्रयासों को केवल सार्वजनिक भाषण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि भारत के नागरिकों से किए गए हर वादा, हर आशा को पूरा करने के लिए अपनी 6 साल की यात्रा के प्रत्येक दिन को बहुत लगन के साथ उपयोग किया है।

इससे पहले कभी किसी प्रधान मंत्री ने बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं, राष्ट्र के आर्थिक उपायों पर राष्ट्र की कल्पना को नई ऊँचाई नहीं दी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कार्यान्वयन करते हुए और डेटा के आधार पर भी शानदार सफलताएँ अर्जित की और सामान्य उपायों के माध्यम से उन कल्याणकारी कार्यक्रमों को प्रमुखता दी जो आम भारतीय की बुनियादी जरूरतों को पूरा करते हैं।

कई महिला राजनेता, कार्यकर्ता जो जेंडर जस्टिस के लेंस से सरकार के प्रत्येक कार्यक्रम का अध्ययन करते हैं, ने प्रधानमंत्री के महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के उद्देश्य वाले योजनाओं में प्रसन्नता जाहिर की है। मुझे याद है, जब लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने महिलाओं, खासकर स्कूल जाने वाली लड़कियों के जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए शौचालय बनवाने का स्पष्ट आह्वान किया था।

हमारा राष्ट्र 6 दशकों के लोकतांत्रिक मंथन में बुनियादी मानवीय आवश्यकता के समाधान से वंचित था। यह किसी के लिए आश्चर्य की बात नहीं होगी। वास्तव में गरीब लोगों ने इसे जीवन के एक तरीके के रूप में स्वीकार कर लिया था। पिछले 6 वर्षों में बने 11 करोड़ शौचालयों ने गरीबों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रशासनिक शिथिलता के बीच की खाई को पाट दिया और सम्मान की जिंदगी दी।

आज मैंने प्रधानमंत्री को जनऔषधि केंद्रों द्वारा मासिक स्वच्छता उत्पादों के संबंध में सेवा देने और प्रत्येक 1 रुपए की लागत पर 5 करोड़ सेनेटरी पैड की बिक्री के बारे में सुना। शौचालय से लेकर सेनेटरी पैड तक, सेवाओं की एक सार्वजनिक घोषणा, समर्थन और एक वादा जिसे महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा करने की आवश्यकता है, इस सरकार का मुख्य आधार बन गया है।

सच कहा जाए तो जब भी किसी वामपंथी से दक्षिणपंथी सरकार की प्रशासनिक क्षमता के बारे में पूछा जाएगा तो वो तिरस्कार की भाषा में ही वर्णन करेंगे। झूठी चीज़ों पर ज़ोर देकर कितना ही ये साबित करने की कोशिश की जाए कि दक्षिणपंथी सरकार महिलाओं को लेकर रूढ़िवादी सोच रखती है, लेकिन मोदी सरकार की 6 सालों की यात्रा इसके उलट ही एक कहानी कहती है।

सच्चाई तो ये है कि यह मोदी सरकार के कार्यकाल में ही संभव हुआ कि मासिक धर्म स्वच्छता प्रोटोकॉल को प्रशासनिक इकाईयों के लिए जारी किया गया, लेकिन इस बात को लिंग-आधारित बहस में कहीं जगह नहीं मिलती है लेकिन मैं इससे हैरान बिल्कुल नहीं हूँ। ना ही गर्भावस्था अधिनियम के मेडिकल टर्मिनेशन की कहीं चर्चा होती है जो 21वीं सदी में महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की सुरक्षा करती है।

यह मोदी सरकार की ही नेतृत्व क्षमता का कमाल है कि जनता की सेवा के लिए वो नीतियों को इतने बेहतर तरीके से लागू कर पाते हैं भले ही उन्हें लुटियन गैंग की सराहना मिले न मिले। सरकार का संप्रदाय विशेष की महिलाओं की ज़रूरतों को समझना और बड़ी समझदारी से इसका हल निकालना पीएम मोदी की मुश्किल कार्यों को सम्पादन करने की उनकी क्षमता का ही एक नमूना है।

दशकों तक भारतीय राजनीति ने ट्रिपल तलाक के बहाने छोड़ी गई संप्रदाय विशेष की विवाहित महिलाओं को विधायी समाधान प्रदान करने के लिए दृढ़ता से मना कर दिया क्योंकि न्याय प्रदान करने का कार्य चुनावी लाभदायक वोट बैंक पर इसके प्रभाव को देखते हुए खतरे से भरा था। लेकिन लोकतंत्र के दायरे से ट्रिपल तलाक के अन्याय को दूर करने का कानून एक प्रमाण है कि नरेंद्र मोदी वास्तव में सभी के लिए न्याय में विश्वास करते हैं और इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहते हैं।

इसके अतिरिक्त, सामाजिक और आर्थिक न्याय देने की भावना के साथ, आज हम गर्व के साथ घोषणा करते हैं कि 25 करोड़ MUDRA ऋणों में से 70% लाभार्थी महिलाएँ हैं। 40 करोड़ जन-धन खातों में से 22 करोड़ खाते महिलाओं के हैं, जब पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार ने 3 दशकों के बाद शिक्षा नीति में संशोधन किया है।

इसमें पहली बार यह पाया गया है कि जेंडर इंक्लूजन फंड के तत्वावधान में हमारी युवा लड़कियों की शैक्षणिक आकांक्षाओं को आर्थिक रूप से सहायता प्रदान करने के लिए किए गए एक विशेष प्रयास है, जो देश भर के सरकारी स्कूलों में बेटियों के लिए शौचालय बनवाकर उनके समर्थन में प्रकट हुई, वह भी एक साल से भी कम समय में।

उन्होंने इस तथ्य को न केवल सच साबित किया बल्कि हमारे सशस्त्र बलों में लड़ाकू भूमिकाओं में महिलाओं की भूमिका का जश्न मनाया और एक सामाजिक स्वीकृति का मार्ग प्रशस्त किया कि भारतीय महिलाओं को अब किसी से कम नहीं माना जाता है। वे एक समान भागीदार हैं, हम एक राष्ट्र के रूप में शुरू की गई विकास प्रक्रियाओं में एक समान योगदान देती हैं।

आज जब प्रधानमंत्री जी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर इकट्ठे युवाओं को गुडबाय कहा, मैंने उनमें भविष्य के लिए उम्मीद देखी। एक ऐसा बदलाव देखा, जिसके बाद महिलाएँ प्रशासनिक और सामाजिक तौर पर अपने पुरुष साथियों पर निर्भर नहीं रह जाएँगी। आज का भारत ‘महिलाओं के विकास’ से ‘महिला के नेतृत्व वाले विकास’ की ओर बढ़ चला है।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में केंद्रीय कैबिनेट कपड़ा और महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा लिखा गया है।

महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्‍यास, कुछ देर बाद रैना ने भी की साथ निभाने की घोषणा: खेलते रहेंगे IPL

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान ने सोशल मीडिया पर अपने इंटरनेशनल करियर से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया है। महेंद्र सिंह धोनी ने इंस्टाग्राम में पोस्ट कर खुद के संन्यास लेने का ऐलान किया है। अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में एमएस धोनी ने लिखा है, “आप सभी के प्यार और समर्थन के लिए बहुत धन्यवाद। आज शाम 7.29 बजे के बाद से मुझे रिटायर समझा जाए।” अपने इस पोस्ट के साथ ही धोनी ने एक वीडियो भी शेयर किया है। एमएस धोनी के कुछ देर बाद ही सुरेश रैना ने भी इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्‍यास ले लिया है।

4 मिनट 7 सेकेंड के वीडियो में महेंद्र सिंह धोनी ने अपने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की कई सारी तस्वीरें शेयर की हैं। इसके साथ ही उन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘कभी-कभी’ का मशहूर गीत भी लगाया है, जिसके बोल हैं, ‘मैं पल दो पल का शायर हूँ, पल दो पल मेरी कहानी है, पल दो पल मेरी हस्ती है, पल दो पल मेरी जवानी है।’ 

एमएस धोनी के बाद सुरेश रैना ने भी इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्‍यास ले लिया है। हालाँकि वह आईपीएल के इस सीजन में खेलते नजर आएँगे। रैना ने भी इंस्‍टाग्राम पर पोस्‍ट करने अपने संन्‍यास की घोषणा की। रैना ने लिखा कि माही आपके साथ खेलने के अलावा कुछ भी नहीं था। पूरे दिल से गर्व के साथ मैं इस यात्रा में आपसे जुड़ना चाहता हूँ। रैना ने लिखा कि शुक्रिया भारत।

हालाँकि, एमएस धोनी आईपीएल खेलते रहेंगे। ऐसे में उनके प्रशंसक आईपीएल में धोनी को खेलते हुए देख सकते हैं। 39 वर्षीय एमएस धोनी टेस्ट क्रिकेट से पहले ही संन्यास का ऐलान कर चुके थे। जबकि, वनडे और टी-20 में भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बने हुए थे। लेकिन अब धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। धोनी क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के कप्तान भी रह चुके हैं। साथ ही धोनी के नाम कई बड़े कीर्तिमान भी दर्ज हैं। कुछ दिन पहले ही चेन्‍नई सुपर किंग्‍स के सीईओ ने कहा था कि धोनी आईपीएल 2020 और 2021 आईपीएल खेलते रहेंगे और जहाँ तक होगा 2022 में भी नजर आएँगे।

बता दें कि एमएस धोनी ने साल 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी। धोनी ने अब तक 90 टेस्ट मैच खेले हैं। इसके अलावा 350 एकदिवसीय और 98 टी-20 मुकाबलों में उन्होंने भारत का नेतृत्व किया है।

साल 2005 में श्रीलंका के खिलाफ जयपुर में खेले एक मैच में भारत 299 रन के टारगेट का पीछा कर रहा था। एक बार फिर धोनी को नंबर 3 पर मौका मिला और उन्होंने यहाँ 50 ओवर विकेटकीपिंग करने के बाद मैच के अंत तक बैटिंग की और 183 रन ठोक डाले। धोनी का यह वनडे क्रिकेट में सर्वोच्च स्कोर है। बता दें कि धोनी काफी दिनों से क्रिकेट से दूर हैं। उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच वर्ल्ड कप 2019 सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था।

महेंद्र सिंह धोनी विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर जाने जाते हैं। माही सबसे सफल भारतीय विकेटकीपर भी हैं। उन्होंने टेस्ट में 294, वनडे में 444 और टी-20 में 91 शिकार अपने नाम किए हैं। इसके अलावा अपनी कप्तानी में धोनी ने भारत को साल 2011 में फिर से विश्व विजेता भी बनाया था। इसके अलावा 2007 में धोनी की कप्तानी में ही टीम इंडिया ने टी 20 विश्वकप अपने नाम किया था।

UP: किशोरी से छेड़छाड़, परिवार पर हमले के आरोप में कमरुद्दीन, आलमगीर, अहमद समेत कई अन्य के खिलाफ FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के भिनगा शहर के टंडवा बंकटवा गाँव में संप्रदाय विशेष के कुछ लड़कों द्वारा एक किशोरी से छेड़छाड़ की गई। जब छेड़छाड़ करने वालों का विरोध किया गया और उनके कृत्यों की आलोचना की गई, तो उन्होंने मामले पर हंगामा खड़ा कर दिया।

संप्रदाय विशेष के आरोपितों ने लाठी और धारदार हथियारों से लैस होकर पीड़ित परिवार के घरों में घुसकर उसके रिश्तेदारों पर हमला किया। घटना में लगभग 8 लोग घायल हुए हैं। इनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।

जागरण में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, मिजान, मेराज अहमद, समसुद्दीन, समदुद्दीन, आलमगीर, कमरुद्दीन, मेहताब आलम और गुलजार के अलावा 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट, हत्या के प्रयास और कई अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जानकारी के मुताबिक यह घटना तब हुई जब पीड़िता अपने पिता मनोहर लाल यादव के साथ क्लीनिक से घर लौट रही थी। जब वे वापस लौट रहे थे, तो एक चाय की दुकान पर बैठे मेराज और समसूद ने लड़की के लिए भद्दी टिप्पणियाँ कीं। जब उसके पिता ने अपनी बेटी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणियों का विरोध किया, तो उसने दोनों के साथ गाली-गलौज करते हुए दुर्व्यवहार और मारपीट की।

हंगामा सुनकर सिपाही, सांवली, दुर्गेश और दिलीप पीड़ित लड़की और उसके पिता को बचाने के लिए अपने घर से भागे। हालाँकि, तब तक संप्रदाय विशेष के लोगों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई थी। आरोपित ने संप्रदाय विशेष की भीड़ के साथ मिलकर पीड़िता के पिता पर लाठी और अन्य हथियारों से हमला किया। इससे लोगों में दहशत फैल गई और वे हिंसक भीड़ द्वारा मार खाने के डर से अपने अपने घरों में घुस गए और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।

हालाँकि, उग्र भीड़ ने फिर भी उन पर हमला जारी रखा। उन्होंने कुल्हाड़ी व लाठी-डंडा लेकर घरों में घुस-घुस कर लोगों को पीटना शुरू कर दिया। इसी दौरान हमलावरों ने जान से मारने की नीयत से सांवली पर हमला कर दिया। परिवार के अन्य सदस्यों की भी पिटाई की गई। मौके पर पहुँची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में किया। घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमले में बुरी तरह घायल हुए सांवली को लखनऊ के एक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है।

जब ऑपइंडिया ने भिनगा पुलिस स्टेशन के स्टेशन हेड ऑफिसर से संपर्क किया, तो उन्होंने इस घटना के बारे में सवाल पूछने के बाद अचानक फोन काट दिया। जब उनसे दोबारा संपर्क किया गया, तो उन्होंने दावा किया कि वह इस मामले पर बोलने के लिए अधिकृत नहीं हैं और हमें पुलिस के मीडिया सेल से संपर्क करने के लिए कहा गया। हालाँकि, पुलिस SHO द्वारा साझा किए गए मीडिया सेल का संपर्क नंबर कवरेज क्षेत्र से बाहर है। जैसे ही हमें मामले का अधिक विवरण मिलेगा हम स्टोरी को अपडेट करेंगे।