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’14 साल के रोहित को मारकर दुर्गा मंदिर के प्रांगण में बने कुएँ में फेंक दिया’: सराजुद्दीन, इस्ताक और शहन पर केस

बिहार के छपरा प्रखंड में एक गाँव है- नैनी। इस गाँव में 31 जुलाई को उर्मिला देवी नामक विधवा के 14 वर्षीय बेटे रोहित की कथित तौर पर हत्या कर दी गई। महिला का आरोप है कि उनके घर के पास रहने वाले दूसरे समुदाय के कुछ लड़कों ने ही उनके बेटे की हत्या की और अगले दिन खोजबीन के बहाने उसका शव लाकर घर के बाहर रख दिया।

इस मामले में पुलिस पर भी आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि नामजद आरोपित अभी तक गिरफ्तार नहीं किए गए हैं। उनकी गिरफ्तारी को लेकर आवाज उठाने पर भाजपा के कुछ नेताओं पर भी केस दर्ज कर दिया गया।

14 वर्षीय रोहित

ऑपइंडिया ने इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा उपाध्यक्ष शैलेंद्र सेंगर से बात की। उनके ख़िलाफ़ भी शांति भंग करने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है। उन्होंने हमें केस की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को इंसाफ नहीं मिला है।

शैलेंद्र के मुताबिक, मृतक की माँ ने आरोपितों के ख़िलाफ़ नामजद एफआईआर लिखवाई। लेकिन कोई कार्रवाई अब तक नहीं की गई है। उनका कहना है कि जब उन लोगों ने इसका विरोध किया तो उनके ख़िलाफ़ ही उलटा एफआईआर हो गई। शैलेंद्र ने बताया कि पोस्टमार्टम हो चुका है। लेकिन उसमें क्या कहा गया है, इसका अभी पता नहीं चल रहा है। भाजपा नेता की मानें तो चुनाव नजदीक होने के कारण इस मामले की सच्चाई लोगों को नहीं बताई जा रही है। न ही ये बताया जा रहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आखिर क्या कहा गया है।

रोहित हत्याकांड पर मीडिया रिपोर्ट्स

शैलेंद्र की बातें सुनकर हमने सारे मामले की पुष्टि करने के लिए मुफस्सिल थाना इंचार्ज से संपर्क किया। लेकिन थाना इंचार्ज ने कोई संतोषजनक जवाब देने की जगह यह कहकर फोन काट दिया कि वह बाद में संपर्क करेंगे। आगे अगर इस संबंध में वो हमसे बात करते हैं तो हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।

रोहित की मॉं

रोहित की माँ अपने बेटे की मृत्यु के बाद से ही इंसाफ की माँग कर रही हैं। वह बार-बार यही कहती हैं, “31 जुलाई को सराजुद्दीन, इस्ताक और शहन शाह बबुआ को खेलने के बहाने ले गए। जब वह वापस नहीं आया तो हमने उसकी छानबीन की। रात के 11 बजे तक हम उसे ढूँढते रहे। हमें कुछ पता नहीं चला। उन लोगों ने उसे कुएँ में फेंक दिया था और अगले दिन वही लोग शव लाकर घर पर रख गए। अब हमें बस इंसाफ चाहिए।”

उर्मिला देवी ने इस संबंध में तीनों आरोपितों के ख़िलाफ़ एफआईआर करवाई है और अपना लिखित बयान भी दिया है। उनका कहना है कि 1 अगस्त को आरोपित रोहित के चचेरे को भाई को लेकर उसे ढूँढने गए और थोड़ी देर उन लोगों ने उसे इधर-उधर घुमाया। फिर उसे घटनास्थल पर सीधे ले गए। कुएँ में रोहित मृत अवस्था में था। आनन-फानन में आरोपितों ने ही उसका शव निकाला और उनके दरवाजे पे ले जाकर रख दिया। रोहित का शव देखकर जब घर में हल्ला हुआ तो पड़ोसी इकट्ठा हुए और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

रोहित की माँ उर्मिला देवी का बयान

रोहित के मामा ने बताया कि वे चाहते हैं कि दोषी पकड़े जाएँ और उन्हें फॉंसी हो। लेकिन इस मामले में प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। गाँव के ही आकाश का कहना है कि रोहित को संप्रदाय विशेष के लोगों ने बेरहमी से मारा। इसके बाद दुर्गा मंदिर के प्रांगण में जो कुआँ है उसमें फेंक दिया। घटना को कई दिन बीत चुके हैं। अभी तक दोषी इस मामले में गिरफ्तार नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामवासियों ने जब रोहित के लिए इंसाफ माँगा तो प्रशासन ने उलटा उन्हीं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर दिया।

ग्रामीण आकाश ने बताया कि रोहित को मारकर दुर्गा माँ के प्रांगण में बने कुएँ में फेंका गया।
रोहित मर्डर पर पर ग्रामीण आकाश

इस मामले में कार्रवाई में देरी से ग्रामीणों और हिंदुवादी संगठनों में रोष है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए बीजेपी किसान मोर्चा उपाध्यक्ष के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सड़क जाम किया था। इसके बाद शैलेंद्र सेंगर, भाजपा मंडल अध्यक्ष विश्वास गौतम, बालेश्वर सिंह, ज्ञानरंजन, राजू कुमार सिंह, संतोष महतो, हन्नी सिंह, प्रकाश कुमार सिंह, विकास कुमार सिंह सहित कई लोगों पर शांति भंग करने के आरोप में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।

रोहित मर्डर पर चश्मदीद

पूर्व सपा नेता शाहजेब रिजवी पर मेरठ पुलिस ने दर्ज किया FIR: कर्नाटक कॉन्ग्रेस MLA के भतीजे के सर पर रखा था ₹51 लाख का इनाम

कर्नाटक कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन के सर कलम करनें पर 51 लाख रूपए का ईनाम देनें का ऐलान करनें वाले पूर्व सपा नेता शाहजेब रिजवी (Shahzeb Rizvi) पर यूपी के मेरठ में एफआईआर दर्ज हो गई है। रिजवी ने संप्रदाय विशेष के लोगों को इनाम के लिए पैसे इक्कठा करने के लिए भी कहा था।

खबरों के मुताबिक, सपा नेता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की के बाद, मेरठ एसएसपी अजय साहनी ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए मामले की जाँच के आदेश दिए थे।

जिला पंचायत चुनाव लड़ चुके पूर्व सपा नेता शाहजेब रिजवी के खिलाफ 13 अगस्त की देर रात को मेरठ पुलिस द्वारा फलावदा पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 153A, 505(2) के तहत केस दर्ज हुआ है, आरोपी रिजवी के घर पर पुलिस ने दबिश दी, लेकिन वो फरार मिला।

मेरठ (ग्रामीण) के एसपी अविनाश पांडे ने कहा, “यहाँ के एक शख्स ने बेंगलुरु हिंसा के सिलसिले में 51 लाख रुपए का ईनाम घोषित किया है। उनके खिलाफ सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश के तहत मामला दर्ज किया गया है और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

शाहजेब रिजवी का विवादित बयान

गौरतलब है कि संप्रदाय विशेष के नेता शाहजेब रिजवी ने गुरुवार को एक विवादित वीडियो पोस्ट करते हुए कहा था कि, “फेसबुक पोस्ट के माध्यम से उसनें हुजूर के शान में जो गुस्ताखी की है, मैं उसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता हूँ, रिजवी ने ऐलान किया की इस युवक जो सर कलम करके लाएगा उसे मैं 51 लाख का नगद ईनाम दूँगा। रिजवी ने संप्रदाय विशेष के लोगों से अपील की है कि सब मिलकर 51 लाख रुपए जमा करो।”

शाहजेब रिजवी उत्तरप्रदेश के मेरठ में फलावदा थाना क्षेत्र के रसूलपुर गाँव के रहने वाला हैं। वह पहले समाजवादी पार्टी का अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश सचिव रह चुका है। लेकिन इस वक्त वह सपा में सक्रिय नहीं हैं। पिछली बार जिला पंचायत के चुनाव में वह हार गया था। वर्तमान में वह अपने आप को सामाजिक कार्यकर्ता बताता है।

बेंगलुरु दंगा

कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन के फेसबुक पोस्ट को लेकर सारा विवाद शुरू हुआ था। उस पर पैगम्बर मुहम्मद को लेकर विवादित पोस्ट डालने का आरोप है। जिसकी वजह से मंगलवार शाम को संप्रदाय विशेष के लोग हिंसा पर उतर आए।

बेंगलुरु दंगों में शामिल अब तक हिंसा करने वालों में से 150 को गिरफ्तार किया गया है। बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने लोगों को शांति बनाए रखने की अपील की है। इस घटना में 3 लोग मारे गए और 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके साथ ही दंगाइयों ने 250 के करीब गाड़ियों को आग लगा दी और करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया है।

फिर सामने आया विकिपीडिया का वामपंथी चेहरा, संप्रदाय विशेष को बचाने के लिए बेंगलुरु दंगों को बताया ‘टकराव’

11 अगस्त को जहाँ एक तरफ देश में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ संप्रदाय विशेष के कुछ लोग फेसबुक पर एक पोस्ट से आहत हो गए। इस हद तक आहत हुए कि पूरे बेंगलुरु को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। संप्रदाय विशेष की उग्र भीड़ द्वारा किए गए दंगों में 3 लोगों ने अपनी जान गॅंवाई और 60 लोग घायल हुए। कट्टरपंथी भीड़ ने केजे हल्ली और डीजे हल्ली नामक पुलिस स्टेशन पर जम कर तोड़फोड़ की और गाड़ियाँ तक फूँक दी। इसकी वजह सिर्फ इतनी थी कि कॉन्ग्रेस नेता के रिश्तेदार ने पैगंबर मोहम्मद पर एक फेसबुक पोस्ट में टिप्पणी कर दी थी।   

इस घटना पर विकिपीडिया में जानकारी साझा कर दी गई है। इन दंगों पर दी गई जानकारी के शुरुआती हिस्से में “clash” शब्द का इस्तेमाल किया गया है। यानी विकिपीडिया के अनुसार यह बेलगाम दंगा टकराव था। उनके मुताबिक़ यह घटना एक सांप्रदायिक टकराव का नतीजा थी। जबकि टकराव के असल मायने यह होते हैं, जब दो अलग धर्म या समुदाय के लोगों के बीच किसी विवाद को लेकर टकराव की स्थिति बनती है। उन दंगों के वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि दंगों के दौरान अल्लाह-हु-अकबर के नारे लग रहे थे। लेकिन विकिपीडिया पर लिखने वाला व्यक्ति दंगों की इस घटना में संप्रदाय विशेष द्वारा फैलाई गई हिंसा को छिपाना चाहता है।   

अभी तक सामने आई ख़बरों में यह बात कहीं नहीं मौजूद है कि हिंदू समुदाय के लोगों का इन दंगों से कोई लेना-देना है। हिंसा भड़काने में सिर्फ संप्रदाय विशेष की उग्र भीड़ का हाथ था जो मोहम्मद पर की गई पोस्ट से आहत हुए थे। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि भीड़ ने इस्लामी नारे लगाते हुए कॉन्ग्रेस विधायक के घर पर पत्थर चलाए। इसके बाद पुलिस स्टेशन में तोड़फोड़ करती है और गाड़ियाँ जलाती है।   

इस मामले में कलीम पाशा की गिरफ्तारी हो चुकी है और पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में उसका नाम भी दर्ज किया है। फिर भी विकिपीडिया में कलीम पाशा के नाम का कोई ज़िक्र ही नहीं है। कलीम पाशा, बेंगलुरु नगरपालिका से कॉन्ग्रेस पार्षद इरशाद बेगम का पति है। इसके अलावा पूर्व कॉन्ग्रेस मंत्री केजे जॉर्ज का सहयोगी और करीबी भी रह चुका है। पुलिस ने इस मामले में कलीम पाशा समेत लगभग 206 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।   

पुलिस ने दंगों के मामले में कलीम पाशा को 7वॉं आरोपित बनाया है। उसे दंगों का षड्यंत्र रचने वाला मुख्य आरोपित भी बताया जा रहा है। इसके पहले वह खुद नगवाड़ा वार्ड से पार्षद रह चुका है और उसके कॉन्ग्रेस में अच्छे संबंध हैं। कलीम पाशा के अलावा SDPI के नेता मुज़ाम्मिल पाशा को भी बेंगलुरु दंगों के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। इन बातों के अलावा विकिपीडिया ने इस मुद्दे पर अपने “Talk” पेज पर कई हैरान कर देने वाली बातों का ज़िक्र किया है।   

विकिपीडिया Talk पेज

विकिपीडिया के इस पेज पर दिल्ली में दंगों (2020) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। साथ ही यह भी बताया गया है कि कैसे हिंदुओं ने उपद्रव किया। लेकिन बेंगलुरु में हुई घटना पर जानकारी देते समय संप्रदाय विशेष के बारे में सीधे तौर पर एक शब्द भी नहीं लिखा गया है। उन्होंने दिल्ली दंगों की घटना में हिंदुओं को आरोपित घोषित कर दिया, लेकिन बेंगलुरु की घटना में संप्रदाय विशेष को आरोपित नहीं कहा।   

इस मामले में एक और उल्लेखनीय बात यह है कि 2020 के दिल्ली दंगों में विकिपीडिया ने ताहिर हुसैन का ज़िक्र बस एक बार किया है। जबकि उस पर अंकित शर्मा की हत्या का आरोप भी लग चुका है। लेकिन विकिपीडिया ने अपने पेज में इस तरह का कोई खुलासा नहीं किया है। न ही पुलिस द्वारा दी गई किसी तरह की जानकारी उस पेज पर जोड़ी गई है। जब बेंगलुरु दंगों से जुड़ी जानकारी के मामले में विकीपीडिया से शिकायत की गई (ऑपइंडिया द्वारा), तब विकिपीडिया ने दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगा दिया।   

मंगलवार (11 अगस्त 2020) को कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन द्वारा सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के कथित अपमानजनक पोस्ट को लेकर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए दंगों में उग्र भीड़ द्वारा ‘पुलिसकर्मियों को मार डालो, उन्हें मत छोड़ो, उन्हें खत्म करो’ के नारे भी लगाए गए। नवीन को भी फिलहाल गिरफ्तार कर लिया गया है। विधायक के आवास और डीजे हाली के एक थाने में संप्रदाय विशेष के उपद्रवियों ने उत्पात मचाया, जिन्होंने कई पुलिस और निजी वाहनों को भी आग लगा दी और लूटपाट भी मचाई। 

मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की शाम कॉन्ग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्ति के आवास पर संप्रदाय विशेष के हज़ारों की भीड़ इकट्ठा हुई। कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे, जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हैं।  

यह पहला मौक़ा नहीं था जब वामपंथी मानसिकता के प्रति विकिपीडिया का झुकाव सामने आया हो। इसके पहले 25 फरवरी को दिल्ली में हुए दंगों के मामले में विकिपीडिया पर एक लेख प्रकाशित हुआ था। जिसके शुरूआती हिस्से में दंगों की तस्वीर नहीं बल्कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा की तस्वीर लगी हुई थी। लेख का शीर्षक है  North East Delhi riots और इसके एडिटर का नाम है  DBigXray। इस लेख का एक अलग हिस्सा है जिसमें कपिल मिश्रा को दिल्ली दंगों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया है।   

वहीं आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान ने भी उस दौरान कई भड़काऊ भाषण दिए थे। लेकिन उन बातों को भी विकिपीडिया से हटा दिया गया है। दिल्ली दंगों के मामले में अमानतुल्लाह खान पर मामला भी दर्ज किया गया है। लेकिन विकिपीडिया ने ऐसा कहा है कि वह मामले दूसरी घटनाओं की वजह से दर्ज किए गए हैं। सीएए और एनआरसी के विरोध में जारी प्रदर्शन के दौरान मोहम्मद शाहरुख नाम के व्यक्ति ने पिस्टल से गोलियाँ चलाई थीं। लेकिन विकिपीडिया ने इस व्यक्ति का कोई ज़िक्र ही नहीं किया है।   

बहुत से लोग तो उसे हिंदू बताने लग गए थे और उन्होंने कहा कि वह सीएए एनआरसी का समर्थन कर रहा था। जबकि एक पत्रकार ने वीडियो भी साझा किया था जिसमें वह साफ़ तौर पर विरोध करने वाले भीड़ के साथ नज़र आ रहा था। इसके अलावा लेख में अशोक नगर में मौजूद मस्जिद पर हमले की बात लिखी गई है। उसमें ऐसा कहा गया है कि मस्जिद पर हमले के दौरान जय श्री राम और और हिंदुओं का हिंदुस्तान जैसे नारे लग रहे थे।   

जबकि संप्रदाय विशेष द्वारा किए गए हमलों की घटना का कहीं कोई उल्लेख ही नहीं मिलता है। ऐसे तमाम वीडियो हैं जिसमें अल्लाह-हु-अकबर और नारा-ए-तकबीर जैसे नारे लग रहे हैं। लेकिन उन वीडियो के बारे में कहीं कोई चर्चा ही नहीं की गई है। आम तौर पर विकिपीडिया के लेख कोई भी एडिट कर सकता है, उनमें बदलाव कर सकता है। लेकिन दिल्ली में हुए दंगों के मामले में ऐसा कुछ नहीं है, उन लेखों को सुरक्षित रखा गया है। इन लेखों में सिर्फ कुछ ही लोग बदलाव कर सकते हैं।   

इस संबंध में ऑपइंडिया की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ और यहाँ पढ़ी जा सकती है।   

इसके अलावा ऐसी तमाम घटनाएँ हैं जिसमें विकिपीडिया का ऐसा चेहरा सामने आता है। कुछ समय पहले एक इस्लामी यूज़र ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पेज से छेड़छाड़ करते हुए संगठन को आतंकवादी समूह बताया था। जिस यूज़र ने ऐसा किया वह पहले भी इस तरह के हिंदू विरोधी बदलाव कर चुका है। इसके अलावा विकिपीडिया ने तबलीगी जमात पर लिखे गए लेख को भी हटा दिया था। जिसमें यह बताया गया था कि कैसे जमात के लोगों ने देश भर में कोरोना वायरस फैलाया। इसके अलावा नौखली दंगों के मामले में भी हिंदू शब्द को संप्रदाय विशेष से बदल दिया था।     

AAP नेता ने शादी का झाँसा देकर 2 साल तक किया महिला का यौन शोषण: दी उसे और बच्चों को जान से मारने की धमकी, गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (14 अगस्त, 2020) को आम आदमी पार्टी के नेता मुकेश टोकस को 25 वर्षीय महिला के साथ बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। मुकेश दिल्ली के आर के पुरम निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के संगठन प्रभारी हैं।

पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश पिछले दो साल से पीड़िता को शादी का झाँसा देकर उसके साथ यौन शोषण कर रहा था। महिला दो बच्चों की माँ है। वहीं महिला को हाल ही में मुकेश के शादीशुदा होने का पता चला।

जब महिला ने सच्चाई जानकर रिश्ते पर आपत्ति जताई तो आप नेता मुकेश टोकस ने उसे और उसके बच्चों को मारने की धमकी दी। कथित तौर पर, पीड़िता ने फिर किशनगढ़ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है।

पंजाब केसरी से लिया गया स्क्रीनशॉट

आप नेता ने झूठ बोल कर फँसाया पीड़िता को अपने झाँसे में

बिहार के मोतिहारी जिले की रहने वाली पीड़िता ने किशनगढ़ पुलिस को बताया कि वह दो साल पहले आरोपित से मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश ने महिला को बताया कि उसकी कोई संतान नहीं है और पत्नी के गुजर जाने के बाद वह अकेला हो गया था। फिर उसने पीड़िता से शादी करने और उसके बच्चे की जिम्मेदारी उठाने की बात उससे कही। इस तरह उसने उसे झाँसे में ले लिया।

कथित तौर पर, आरोपित AAP नेता ने एक स्थानीय मंदिर में महिला से शादी की थी। उसे घर ले जाने का वादा किया था। फिर उसने महिला को शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। शादी के बहाने वह फिर पीड़िता का यौन शोषण करता रहा।

गौरतलब है कि पीड़िता को हाल ही में पता चला था कि मुकेश की पत्नी जिंदा है और उसके बच्चे भी है। पीड़िता की शिकायत के अनुसार, जब उसने बात का विरोध किया, तो मुकेश ने उसे और उसके बच्चों को जान से मारने की धमकी दी। मुकेश द्वारा की गई धोखाधड़ी से निराश होकर, पीड़िता ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया, जिसके बाद आरोपित को गिरफ्तार किया गया।

मुकेश टोकस की गिरफ्तारी की खबर के बाद, आप के शीर्ष नेताओं के साथ उसकी फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। जिससे आम आदमी पार्टी से उसके नजदीकी संबंध होने का पता चलता है। शेयर की गई तस्वीरों में, मुकेश आम आदमी पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेते हुए और आप नेता संजय सिंह और सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ तस्वीरों के लिए पोज़ देते नज़र आ रहे हैं।

सुशांत केस: सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाए 2 एम्बुलेंस और 2 सैमुएल पर सवाल, संजय राउत ने कहा- हम चाहते हैं कि सच सामने आए

सुशांत सिंह राजपूत की कथित तौर पर आत्महत्या के मामले में निष्पक्ष जाँच की माँग लगातार बढ़ती जा रही है। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मुद्दे पर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अभिनेता की मृत्यु के बाद दो एम्बुलेंस क्यों बुलाई गई थी? इस बात की जाँच क्यों नहीं होती है कि किसने मौके पर दो एम्बुलेंस बुलाई थी? 

सुब्रमण्यम स्वामी इस मामले में शुरू से सीबीआई जाँच की वकालत कर रहे हैं। इस मामले में ट्वीट करते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने लिखा कि सुशांत के घर का मैनेजर सैमुएल का कुछ अता-पता नहीं है। आखिर दोनों सैमुएल कह क्या रहे हैं? स्वामी ने दो सैमुएल का ज़िक्र किया है, पहला जो सुशांत सिंह राजपूत के साथ साझा तौर पर रहता था। दूसरा जिसे रिया चक्रवर्ती ने सुशांत के घर का मैनेजर बनाया था।   

रिपब्लिक टीवी द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में सुशांत सिंह की मौत के वक्त से संबंधित तीन अलग-अलग जानकारी सामने आ चुकी हैं। एम्बुलेंस मालिक लक्ष्मण बंडगर ने रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए इस बारे में जानकारी दी। उसने कहा मुंबई पुलिस शव लेकर गई थी। सिद्धार्थ पिथानी ने कहा था उसने चाक़ू से कपड़ा काटा और सुशांत के शव को उतारा। वहीं अक्षय बंडगर (एम्बुलेंस चालक) का कहना था कि उसने शव उतारा था।   

इसके अलावा स्वामी का कहना है कि सैमुएल की कोई जानकारी नहीं है। सुशांत के घर का मैनेजर सैमुएल मिरांडा पिछली बार 6 अगस्त को नज़र आया था। जब उसे प्रवर्तन निदेशालय ने 9 घंटे तक चली पूछताछ के लिए बुलाया था। वहाँ से निकलने की बाद उसने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की थी। इसके पहले उसने बिहार पुलिस को अपना बयान दर्ज कराया था। पड़ोसियों के मुताबिक़ उस दिन के बाद से उसकी कोई जानकारी नहीं मिली है।   

दूसरी तरफ सुशांत सिंह राजपूत के फ़्लैटमेट सैमुएल हाओकिप ने इस मुद्दे पर सीबीआई जाँच की माँग की थी। उसने यह भी कहा था कि वह मीडिया द्वारा दिखाई या बताई जा रही किसी भी जानकारी पर भरोसा नहीं करना चाहता है। सैमुएल ने यह भी कहा था कि उसे सिद्धार्थ पिथानी द्वारा कही गई किसी बात पर भी भरोसा नहीं है। इसलिए वह इस मामले की सीबीआई जाँच चाहता है।           

इसके अलावा संजय राउत ने भी सुशांत सिंह राजपूत मामले पर लगातार महाराष्ट्र सरकार का पक्ष रखा है। इस दौरान उन्होंने कई विवादित बयान भी दिए थे। ताज़ा बयान में संजय राउत ने कहा, “हमें सुशांत सिंह के परिवार के साथ पूरी सहानुभूति है। बीते दिन कही गई मेरी बात का यह मतलब था कि सभी को धैर्य रखना चाहिए। जबकि इसे कुछ ऐसा दिखाया गया जैसे मैं उन्हें धमका रहा हूँ।” 

क्या लोगों को वाकई लगता है कि मैंने कोई धमकी दी थी? मुंबई पुलिस पर भरोसा रखिए अगर उस पर भरोसा नहीं हो तो सीबीआई की जाँच की माँग करिए। इसके अलावा भी संजय राउत ने सुशांत सिंह के मामले पर कई बातें कहीं। उन्होंने कहा सुशांत सिंह हमारे बेटे जैसा था। वह मुंबई में रहता था और एक उम्दा कलाकार था। आखिर हमारी उससे क्या ही दुश्मनी होगी? हम खुद यह चाहते हैं कि इस मौत के पीछे जितने राज़ हों वह बाहर आएँ।     

इसके पहले टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक़ संजय राउत अब राजनेताओं से लेकर सुशांत के परिवार तक से चुप रहने की बात कर रहे थे। श‍िवसेना नेता संजय राउत ने कहा था कि यह जाँच अब खत्‍म होने ही वाली है। ऐसे में जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती, सभी को शांत बैठना चाहिए। संजय राउत ने कहा कि सुशांत की फैमिली हो या कोई राजनीतिक दल सभी को शांत बैठना चाहिए।

यहाँ बता दें कि शिवसेना सांसद संजय राउत ने बीते दिनों पार्टी के मुखपत्र सामना में एक लेख लिखा था, जिसमें उन्‍होंने सुशांत के परिवार पर टिप्‍पणी की थी। इसमें उन्‍होंने कहा था कि सुशांत के पिता ने दो शाद‍ियाँ की हैं और दूसरी शादी के बाद से सुशांत और उनके पिता के रिश्‍ते ठीक नहीं थे।

 

शृंगेरी स्थित आदि शंकराचार्य की मूर्ति को इस्लामी झंडे में लपेटा: आरोपित रफ़ीक, साहिल गिरफ्तार, SDPI पर साज़िश का आरोप

कर्नाटक हाल ही में हुए दंगों से उबर ही रहा था कि राज्य का माहौल बिगाड़ने की एक और कोशिश सामने आई है। यह घटना चिकमंगलूर जिले के शृंगेरी में हुई है जहाँ शारदा पीठ स्थित है। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित 4 अद्वैत और दिव्य पीठों में एक। यह स्थान हिंदू समुदाय के लोगों के लिए बेहद पवित्र मानी जाती है। बुधवार (12 अगस्त 2020) को शृंगेरी स्थित आदि शंकराचार्य की मूर्ति को किसी अज्ञात व्यक्ति ने एक इस्लामिक झंडे से ढँक दिया। उस इस्लामी झंडे पर अरबी भाषा में काफी कुछ लिखा हुआ था।   

ख़बरों के मुताबिक़ श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को इस घटना की जानकारी एक दिन बाद हुई। जानकारी मिलने के बाद मौके पर काफी भीड़ इकट्ठा हुई और श्रद्धालुओं ने शारदा पीठ की मूर्ति से इस्लामिक झंडा हटाया। इसके बाद लोगों ने इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। इस प्रदर्शन में विधायक डीएन जीवाराज भी शामिल हुए। उनके साथ मौजूद तमाम लोगों ने माँग उठाई कि आरोपितों को गिरफ्तार कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। विधायक जीवाराज ने यह भी कहा कि यह हरकत SDPI के सदस्यों द्वारा की गई है। उनका उद्देश्य ऐसी घटनाओं को अंजाम देकर शहर का माहौल बिगाड़ना है।   

इसके अलावा भाजपा विधायक ने कहा यह स्थान हिंदुओं के लिए आस्था का प्रतीक माना जाता है। इस हरकत से हिंदुओं में आक्रोश है अगर आरोपित जल्द से जल्द गिरफ्तार नहीं किए जाते हैं तो विरोध प्रदर्शन बड़े पैमाने पर होगा। वहीं पुलिस ने फिलहाल संप्रदाय विशेष के दो युवकों पर मामला दर्ज कर लिया है। इन युवकों का नाम रफ़ीक और साहिल है। क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने इन दोनों के खिलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है। रफ़ीक नगर पंचायत का सदस्य भी है।   

इस घटना पर कन्नड़, संस्कृति और पर्यटन मंत्री सीटी रवि जो कि इस शहर के मुखिया हैं उन्होंने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए लिखा, “मुझे शंकराचार्य की मूर्ति पर इस्लामी झंडा लगाए जाने की ख़बर का पता चला। यह घटना निराशाजनक है, मैंने एसएसपी को इसकी जाँच के आदेश दे दिए हैं।” इसके अलावा उडुपी चिकमंगलूर से भाजपा सांसद शोभा करन्दल्जे ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए गुस्सा जताया और साथ ही आरोपितों को गिरफ्तार करने की माँग उठाई है।   

यह घटना बेंगलुरु में हुए दंगों के ठीक एक दिन बाद हुई है। हैरानी की बात यह है कि बेंगलुरु की घटना में भी भीड़ की अगुवाई SDPI के सदस्यों ने की थी। कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन द्वारा सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के कथित अपमानजनक पोस्ट को लेकर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए दंगों में उग्र भीड़ द्वारा ‘पुलिसकर्मियों को मार डालो, उन्हें मत छोड़ो, उन्हें खत्म करो’ के नारे भी लगाए गए। नवीन को भी फिलहाल गिरफ्तार किया गया है।

विधायक के आवास और डीजे हाली के एक थाने में संप्रदाय विशेष के उपद्रवियों ने उत्पात मचाया, जिन्होंने कई पुलिस और निजी वाहनों को भी आग लगा दी और लूटपाट भी मचाई। मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की शाम कॉन्ग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्थी के आवास पर संप्रदाय विशेष के हज़ारों की भीड़ इकट्ठा हुई। कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़ फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हैं।  

भीमा कोरेगाँव मामले में DU में अंग्रेजी के प्रोफेसर विजयन को UAPA के तहत नोटिस जारी

भीमा कोरेगाँव मामले में हिंदू कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग के एक प्रोफेसर, पीके विजयन को पूछताछ के सम्बन्ध में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी द्वारा नोटिस भेजा गया है। यह समन भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के कई सेक्शन के तहत जारी किए गए हैं।

पीके विजयन को एनआईए का नोटिस भीमा कोरेगाँव मामले के संबंध में पूछताछ के लिए भेजा गया है। नोटिस में कहा गया है कि वह सुबह 11 बजे लोधी रोड स्थित एनआईए मुख्यालय में पेश होंगे। जाँच एजेंसी के नोटिस के अनुसार, विजयन को नई दिल्ली में पुलिस उपाधीक्षक, एनआईए के सामने पेश किया जाएगा।

‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से बात करते हुए, पीके विजयन ने कहा, “मुझे कल सुबह मुख्यालय में बुलाया गया है। यह सिर्फ एक समन नोटिस है, जो मुझे मिला है।” इससे पहले, जुलाई 28, 2020 को एनआईए ने इसी तरह के एक मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हनी बाबू को गिरफ्तार किया था।

हनी बाबू भी दिल्ली विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में पढ़ाते थे और जाति-विरोधी कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। बाबू के कई छात्रों और नागरिक अधिकार समूहों ने उनकी गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए इसे भारत में बुद्धिजीवियों को मौन कराने का प्रयास कहा है।

हनी बाबू और विजयन, 90% विकलांगता वाले एक अंग्रेजी शिक्षक, जीएन साईबाबा की रिहाई के लिए बनाई गई रक्षा समिति के सदस्य हैं, जिन पर वामपंथी संगठनों से सम्बन्ध को लेकर यूएपीए के तहत आरोप लगाया गया है और नागपुर केंद्रीय कारावास में बंद है।

यह पूछे जाने पर कि क्या रक्षा समिति के साथ जुड़ाव के कारण उन्हें बुलाया जा रहा है? विजयन ने कहा, “मुझे इस बारे में पता नहीं है, लेकिन मुझे संदेह है कि यही मामला है।”

भीमा कोरेगाँव मामला

जनवरी 01, 2018 को पुणे के पास भीमा कोरेगाँव में दलितों और मराठों के बीच हिंसा भड़क उठी। दलित समुदाय के लोग करीब 200 साल पहले दलितों और मराठाओं के बीच हुई लड़ाई में दलितों की जीत का जश्न मनाने के लिए वहाँ हर साल इकट्ठा होते हैं। पुलिस का आरोप था कि कार्यक्रम के आयोजकों के नक्सलियों से संबंध थे। 2 जनवरी को दलित संगठनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद के दौरान हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई।

जनवरी 01, 1818 को ईस्ट इंडिया कपंनी की सेना ने पेशवा की बड़ी सेना को कोरेगाँव में हरा दिया था। पेशवा सेना का नेतृत्व बाजीराव-2 बाद में इस लड़ाई को दलितों के इतिहास में एक खास जगह मिल गई। बीआर अम्बेडकर के समर्थक दलित इस लड़ाई को राष्ट्रवाद बनाम साम्राज्यवाद की लड़ाई न मानकर इस लड़ाई को दलितों की जीत मानते हैं। उनके मुताबिक इस लड़ाई में दलितों के खिलाफ अत्याचार करने वाले पेशवा की हार हुई थी।

2018 इस युद्ध का 200वाँ साल था। इस अवसर पर भीमा कोरेगाँव में आयोजित जनसभा में मुद्दे हिन्दुत्व की राजनीति के खिलाफ थे। इस मौके पर कई तथाकथित बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण भी दिए थे और इसी दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी।

SC ने अवमानना मामले में प्रशांत भूषण को ठहराया दोषी: 20 अगस्त को होगी सजा

अवमानना केस में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट ने दोषी करार दिया है। इस मामले में अब 20 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी। विवादित ट्वीट मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण को कोर्ट की अवमानना का दोषी माना है। इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने कहा था कि ट्वीट भले ही अप्रिय लगे, लेकिन यह अवमानना नहीं है।

अवमानना के मामले में दोषी पाए जाने पर कंटेम्ट ऑफ़ कोर्ट्स ऐक्ट, 1971 के तहत प्रशांत भूषण को 6 महीने तक की जेल की सज़ा जुर्माने के साथ या इसके बगैर भी हो सकती है। हालाँकि, इसी क़ानून में यह भी प्रावधान है कि यदि अभियुक्त माफ़ी माँग ले तो अदालत चाहे तो उसे माफ़ भी कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अवमानना के बीच एक पतली रेखा है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था, “पहली नज़र में हमारी राय यह है कि ट्विटर पर इन बयानों से न्यायपालिका की बदनामी हुई है और सुप्रीम कोर्ट, और ख़ास तौर पर भारत के चीफ़ जस्टिस के ऑफ़िस के लिए जनता के मन में जो मान-सम्मान है, यह बयान उसे नुक़सान पहुँचा सकते हैं।”

हाल ही में चीफ़ जस्टिस बोबडे के मोटरसाइकिल पर बैठने को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रशांत भूषण ने अपने एफिडेविट में कहा था कि पिछले 3 महीने से भी ज़्यादा समय से सुप्रीम कोर्ट का कामकाज व्यवस्थित रूप से न हो पाने के कारण वे परेशान थे और उनकी टिप्पणी इसी बात को जाहिर कर रही थी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (जुलाई 21, 2020) को स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रशांत भूषण के खिलाफ अदालत की अवमानना का केस दर्ज किया था। अपने ट्वीट में प्रशांत भूषण ने कहा था, “जब भविष्य में इतिहासकार वापस मुड़कर देखेंगे कि किस तरह से पिछले 6 वर्षों में औपचारिक आपातकाल के बिना ही भारत में लोकतंत्र को नष्ट किया गया है, तो वे विशेष रूप से इस विनाश में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को चिह्नित करेंगे, और पिछले 4 CJI की भूमिका को और भी अधिक विशेष रूप से।”

22 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशांत भूषण को नोटिस जारी कर पूछा था कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (अगस्त 10, 2020) को वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 का आपराधिक अवमानना मामला खारिज करने से इनकार कर दिया। 11 साल पुराने इस केस में कोर्ट ने प्रशांत भूषण की स्पष्टीकरण और माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया है।

ज्ञात हो कि यह केस प्रशांत भूषण की ओर से तहलका पत्रिका को दिए गए इंटरव्यू को लेकर है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत के पिछले 16 मुख्य न्यायाधीशों में से आधे भ्रष्ट थे। तरुण तेजपाल उस समय तहलका पत्रिका के संपादक थे। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

नेपाल के रुई गाँव पर चीन के कब्ज़े का खुलासा करने वाले पत्रकार बलराम बनिया का मिला शव: संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत

नेपाल के 50 वर्षीय पत्रकार बलराम बनिया मंगलवार (11 अगस्त 2020) को मृत पाए गए थे। उनका शरीर मकवानापुर, सिसनेरी के मंडो हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के पास बरामद किया गया था। लगभग 2 महीने पहले उन्होंने नेपाल के रुई गाँव पर चीन के कब्ज़े की ख़बर तैयार की थी। ख़बरों के मुताबिक़ बलराम सोमवार तक अपने परिवार से संपर्क में थे।   

बलराम ने अंतिम बातचीत अपने दफ्तर में कॉन्ग्रेस नेता राम चंद्र पौडेल के संबंध में की थी। उनका शरीर बागमती नदी में बालखु पुल के पास तैरता हुआ पाया गया था। जिसके बाद उन्हें हेतौडा अस्पताल लेकर जाया गया था। उनका शव एक दिन पहले यानी मंगलवार को ही बरामद कर लिया गया था।   

फिर भी पुलिस ने शव की पहचान करने के लिए 1 दिन का समय लगाया। बलराम बनिया के परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा-बेटी भी मौजूद हैं। वह ‘कान्तिपुर डेली’ नाम के अखबार में काम करते थे। बलराम ने राजनीति, संसद, नौकरशाही, गवर्नेंस, ऊर्जा, हाइड्रो पावर जैसे अहम मुद्दों पर पत्रकारिता की। 

ख़बरों के मुताबिक़ चीन ने रुई नामक गाँव पर कब्ज़ा किया है। यह नेपाल के गोरखा जिले में स्थित है। इस ख़बर को सबसे पहले बलराम बनिया ही सामने लेकर आए थे। जबकि तिब्बत और चीन दोनों इस गाँव को लेकर दावे करते हैं। चुम्बुल नगरपालिका वार्ड संख्या 1 के राष्ट्रपति बीर बहादुर लामा ने इस बात की पुष्टि की थी। गाँव के लोगों ने नेपाल सरकार के साथ ज़मीन का रेवेन्यू साझा किया था।   

इसके बावजूद यहाँ तिब्बत और चीन की तरफ से अतिक्रमण हुआ था। खबरहब ने इस संबंध में रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि समदो और रुई गाँव के बीच पिलर नंबर 35 बनाया गया था। इस पिलर के पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ। तमाम विरोधों के बावजूद चीन ने इस गाँव पर कब्ज़ा कर लिया।       

अभी तक सामने आई ख़बरों के मुताबिक़ फेडरेशन ऑफ़ नेपाली जर्नलिस्ट, फ्रीडम फोरम और नेपाल प्रेस यूनियन ने पत्रकार बलराम की हत्या पर जाँच की माँग उठाई है। समूह के प्रतिनिधियों का कहना है कि वह चाहते हैं पत्रकार की रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई मृत्यु की जाँच की जाए। नेपाल प्रेस यूनियन का इस मुद्दे पर यह भी कहना था कि बलराम के शरीर पर कई घाव के निशान थे। नेपाल प्रेस यूनियन के सचिव अजय बाबू शुवाकोटी ने इस मुद्दे पर कहा कि वह जिस तरह के विषय उठाते थे। उसका इस मृत्यु से संबंध ज़रूर हो सकता है।   

बलराम बनिया के साथियों का कहना है कि वह बेहद ईमानदार,सहज और मृदुभाषी थे। इसके अलावा पत्रकारिता के सिद्धांतों से समझौता नहीं करते थे। वह फेडरेशन ऑफ़ नेपाली जर्नलिस्ट के सचिव भी रह चुके हैं। कान्तिपुर के संपादक का कहना था कि बलराम अपने काम को लेकर जुझारू स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्हें नेपाल के तंत्र और राजनीति की अच्छी भली समझ थी। इसके अलावा उन्होंने कहा, “मुझे हमेशा बलराम की ज़रूरत महसूस होती थी जब किसी अहम मुद्दे पर सवाल तैयार करने होते थे। उसके जैसा काम करने वाला बहुत मुश्किल से मिलता है।”

श्रीनगर में सुरक्षाबलों पर आतंकी हमले में 2 जवान वीरगति को प्राप्त, 1 घायल: आतंकियों की तलाश जारी

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने एक बार फिर भारतीय सुरक्षाबलों को निशाना बनाया है जिसमें 2 जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं, जबकि एक जवान घायल है। शुक्रवार (अगस्त 14, 2020) सुबह श्रीनगर के बाहरी इलाके में नौगाम बाईपास पर आतंकियों ने पुलिस पार्टी पर हमला किया। इस आतंकी हमले के पीछे कौनसा आतंकी संगठन जिम्मेदार है, इस बारे में अभी जानकारी आनी बाकी हैं।

पुलिस ने एक ट्वीट में लिखा, “आतंकवादियों ने नौगाम बाईपास के पास पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।”

आतंकवादियों ने शुक्रवार सुबह श्रीनगर शहर के गुलशन चौक नौगाम इलाके में एक गश्ती पार्टी पर गोलीबारी की। रिपोर्ट्स के अनुसार, घायल पुलिसकर्मियों को पीसीआर अस्पताल श्रीनगर ले जाया गया, जहाँ उनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया। उनकी पहचान 715 आईआरपी 20 बटालियन के इश्फाक अयूब और 307 आईआरपी 20 बटालियन के फैयाज अहमद के रूप में की गई है।

इन दो के अलावा, तीसरे जवान के दाहिने हाथ में गोली लगने से घायल हुए सिपाही की पहचान सेलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल मुहम्मद अशरफ के रूप में हुई है। घटना के बाद इस इलाके को बंद कर दिया गया है और तलाशी अभियान जारी है।

हाल ही में आतंकियों ने बारामूला के सोपोर में एक सेना की पेट्रोलिंग पार्टी को निशाना बनाया था, जिसमें एक जवान के घायल होने की सूचना सामने आई थी। आतंकवादियों ने सेना, CRPF और पुलिस की संयुक्त नाका पार्टी पर ह्यागम में एक होटल के पास फायरिंग की, जिसकी जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी फायर किया, लेकिन आतंकवादी वहाँ से भागने में सफल रहे।