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नवीन की ‘प्रोफाइल’ के सहारे, इंडिया टुडे बेंगलुरु को जलाने वाली भीड़ का हिस्सा बन गया, जो खून की प्यासी थी: जानिए कैसे

हाल ही में बेंगलुरु में हुए दंगों में जहाँ संप्रदाय विशेष की एक भीड़ पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ एक कथित ईशनिंदा पोस्ट के कारण भड़की थी, उसको लेकर मेनस्ट्रीम मीडिया ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि वो आम लोगों का दुश्मन है। मीडिया जो अब असल अपराधी को छिपाने का काम कर रही है।

ईशनिंदा के आरोपित नवीन के खिलाफ चरित्र हनन का एक ठोस अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें उसके कथित आपत्तिजनक पोस्ट को गलत बताते हुए संप्रदाय विशेष की भीड़ द्वारा की गई हिंसा को सही ठहराया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि यह पोस्ट हिन्दू घृणा से प्रेरित पोस्ट के कमेंट में लिखा था।

डेक्कन हेराल्ड द्वारा नवीन को ‘सीरियल अपराधी’ के रूप में चित्रित करने के बाद, अब इंडिया टुडे ने दलित कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे की एक ‘कैरेक्टर प्रोफ़ाइल’ प्रकाशित की है, जिसके आधार पर यह दावा किया गया है कि 35 वर्षीय नवीन, सनी लियोन के प्रशंसक हैं। इंडिया टुडे ने इस विशेष तथ्य पर विशेष जोर दिया है कि मंगलवार रात को जो कुछ भी हुआ, उससे सनी लियोन का कोई संबंध नहीं है, कारण इंडिया टुडे को ही बेहतर पता होगा।

Rahul Kanwal tweet sharing the India Today report

चरित्र प्रोफ़ाइल का लहजा और सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि इंडिया टुडे का उद्देश्य क्या है। इसका उद्देश्य नवीन को पूरे प्रकरण के खलनायक के रूप में चित्रित करना है ताकि संप्रदाय विशेष की भीड़ के अपराधों को समाप्त किया जा सके और हिंसा को उचित ठहराया जा सके, जो न सिर्फ कॉन्ग्रेस विधायक के परिवार के खिलाफ थी। बल्कि उस क्षेत्र के अन्य आम लोगों के भी भी खिलाफ थी।

चरित्र प्रोफ़ाइल की शुरुआत बुरे तरीके से की जाती है। इसमें लिखा गया है, कॉमर्स ग्रेजुएट पी नवीन पिछले दिनों बेंगलुरु में हुई हिंसा के बाद से ही विवादों में है। जो कि अब गिरफ्तार है। और पूरे रिपोर्ट में, इंडिया टुडे को उनके बारे में एक अच्छी बात नहीं मिली।

इसमें कुछ सबटाइटल्स भी दिए गए हैं। जिसमें ‘किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा से जुड़ाव नहीं’, ‘राजनीतिक महत्वाकांक्षी’, ‘सनी लियोनी का फैन’, ‘विवादों से अजनबी नहीं’, ‘मेधावी छात्र नहीं’ जैसे सब टाइटल्स शामिल हैं।

The post was blasphemous, rules India Today

उदाहरण के लिए, यह दावा किया जाता है कि नवीन की कठोर राजनीतिक विचारधारा नहीं है। इसमें कहा गया है कि वो अपने मामा और कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति के साथ संप्रदाय विशेष को ईद की शुभकामनाएँ देने वाली पोस्ट में दिखा।

आगे लिखा गया है कि 5 अगस्त को, अयोध्या में भूमिपूजन वाले दिन नवीन ने राम मंदिर निर्माण के समर्थन में पोस्ट लिखी। इस पर कुछ आलोचनात्मक कमेंट भी आए। लेकिन इंडिया टुडे के ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस से इस शख्स के बारे में अधिक खुलासा हुआ। नवीन के फेसबुक हैंडल को बारीकी से खंगालने पर पता चला कि उसकी कोई दृढ़ राजनीतिक विचारधारा नहीं है।

जन्माष्टमी की शुभकामनाओं वाली एक पोस्ट में, भारत की धर्मनिरपेक्षता पर वह गर्व जताता है। इसने ऐसी तस्वीर अपलोड की जिसमें बुर्का पहने एक महिला के साथ राधा-कृष्ण बने बच्चे देखे जा सकते हैं।

ये इंडिया टुडे द्वारा प्रदान किए गए औचित्य हैं जिनसे साबित होता है कि नवीन की कठोर राजनीतिक विचारधारा नहीं है। यह वास्तव में काफी प्रफुल्लित करने वाला है। ये टिप्पणियाँ वास्तव में नवीन को धर्मनिरपेक्ष के रूप में चित्रित करती हैं। इंडिया टुडे जैसे लिबरल मीडिया हाउस को जश्न मनाया जाना चाहिए, न कि आलोचना करना चाहिए।

This was reason enough for India Today to brand Naveen a Sunny Leone fan

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि एक्ट्रेस सनी लियोनी नवीन के लिए एक और रोल-मॉडल लगती हैं। 12 मई को, नवीन ने सनी लियोनी की तस्वीर पोस्ट करने के साथ कैप्शन लिखा- “सनी लिओनी ने साबित किया कि हमारा अतीत कभी हमारे भाग्य का फैसला नहीं कर सकता।”

ऐसा प्रतीत होता है कि इंडिया टुडे भी इस बात के लिए इतना उतावला था कि चरित्र प्रोफाइल का एकमात्र उद्देश्य कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे की चरित्र की हत्या के अलावा और कुछ नहीं था। इसमें कहा गया है, “एक दशक से क्षेत्र में सुरक्षा गार्ड और ड्राइवर का काम करने वाले एक शख्स ने इंडिया टुडे को बताया कि नवीन को कभी काम पर जाते नहीं देखा, इसके बजाय उन्हें अक्सर “दोस्तों के साथ मस्ती” करते देखा गया था।”

ऐसा मालूम होता है कि इंडिया टुडे ने उस व्यक्ति को चरित्र हनन के माध्यम से दंडित करने की बेबसी महसूस की, जिसने इस्लाम के पैगंबर का अपमान किया। वैसे तो मुख्यधारा का मीडिया, जो दलितों के बारे में बहुत परवाह करने का दिखावा करता है, मगर संप्रदाय विशेष के भीतर कट्टरपंथी तत्वों के प्रति उनका पूर्णतया समर्पण प्रतीत होता है। डेक्कन हेराल्ड और इंडिया टुडे इसकी अगुवाई करते हुए दिखाई देते हैं।

यूनिवर्सिटी कैंपस कोई एंक्लेव नहीं, जहाँ पुलिस नहीं पहुँच सकती: जामिया हिंसा मामले में हाईकोर्ट में दिल्ली पुलिस

जामिया हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (अगस्त 14, 2020) को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के दौरान आगजनी व संपत्ति के नुकसान से बिगड़ी स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने जामिया में प्रवेश किया था।

पुलिस के खिलाफ छात्रों पर बल प्रयोग के मामले में दायर याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीएन पटेल व न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने यह जानकारी दी।

अमन लेखी ने दलील दी कि जामिया हिंसा से जुड़ी सारी याचिकाएँ एक राय और एजेंडे से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने पुलिस पर बर्बरता के आरोपों को सरासर झूठ बताया।

उन्होंने दलील दी कि घटना वाली रात पुलिस का वहाँ जाना जरूरी था। इसके पीछे एक मकसद था, जो पूरी तरह से कानूनी था। उन्होंने कहा, “यूनिवर्सिटी कैंपस कोई एंक्लेव नहीं है, जहाँ पुलिस नहीं पहुँच सकती।” उन्होंने कोर्ट से कहा कि मामले में दायर सारी याचिकाएँ न्यूज पेपर रिपोर्ट और विडियो फुटेज पर आधारित हैं, जिन पर एविडेंस एक्ट के तहत भरोसा करके अदालत नहीं चल सकती।

कोर्ट को बताया गया कि हिंसा भड़काने के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी और उसमें चार्जशीट भी दायर की जा चुकी है। लेखी ने साफ किया कि कानूनन अदालत आने के लिए हर व्यक्ति स्वतंत्र है, पर मौजूदा मामले में जिन लोगों ने याचिकाएँ दायर की है, वे न तो सीधे तौर पर घटना से जुड़े हैं और न ही पीड़ित हैं।

इसके अलावा उन्होंने दलील दी कि दायर की गई याचिकाओं दो तरह के पक्षकार हैं एक वे हैं जो अखबार में प्रकाशित खबरों के आधार पर अदालत आए हैं। वहीं, दूसरे वे हैं जो हिसा प्रभावित हैं, लेकिन उन्होंने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।

अमन लेखी ने कहा कि समाचार रिपोर्टो पर साक्ष्य के तौर पर भरोसा नहीं किया जा सकता है क्योंकि वे वास्तविक हो सकती हैं, लेकिन सटीक नहीं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाएँ आरोप पत्रों का उल्लेख नहीं करती हैं और उनके बारे में पूरी तरह से चुप हैं।

याचिकाकर्ताओं ने जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई हिसा की जाँच के लिए विशेष जाँच दल गठित करने या फिर जाँच आयोग बनाने की माँग की थी। इस पर अमन लेखी ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की कोई भी माँग मंजूर नहीं की जा सकती। मामले में अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।

इसके अलावा हिंसा के आरोपित जामिया के स्टूडेंट और आरजेडी (RJD) के युवा प्रदेश अध्यक्ष मीरान हैदर ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मीरान हैदर का कहना है कि हिंसा के लिए उसने करीब 5 लाख रुपए जमा किए थे।

पुलिस के मुताबिक, अपने कबूलनामे में मीरान हैदर ने कहा कि हिंसा की साज़िश पहले से ही रची जा चुकी थी। उसने बताया कि दिल्ली में चलने वाले प्रदर्शन में लोगों की भीड़ इकठ्ठा करने की जिम्मेदारी उसी थी। साथ ही वहाँ के इंतजाम की देखरेख भी वो ही करता था। मीरान हैदर के मुताबिक जामिया में हुई हिंसा के बाद दिल्ली में दंगों की प्लानिंग की गई थी। दिल्ली में हिंसा के लिए PFI ने फंड दिया था।

हैदर ने पुलिस को बताया कि, दिल्ली के जाफराबाद और सीलमपुर इलाकों को सबसे पहले हिंसा के लिए चुना गया था। आरोपित मीरान हैदर के मुताबिक उसने खुद लोगों को चाकू, पेट्रोल, पत्थर आदि इकठ्ठा करने के लिए कहा था। मालूम हो कि हिंसा के आरोपित मीरान हैदर को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल UAPA यानी गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून के तहत गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।

मोतियाबिंद वाले रवीश कुमार: पहलू खान को सौ हिन्दुओं ने मारा, बेंगलुरु के दंगाइयों का मजहब नहीं दिख रहा

इस्लामी हिंसा को लेकर मीडिया का एक बड़ा वर्ग हमेशा ‘दंगाइयों और आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता’ वाला राग अलापता रहता है। लेकिन जैसे ही किसी घटना में एक भी हिन्दू को दोषी करार देने की गुंजाइश हो, तो यही लोग उसका धर्म बता-बताकर पूरे समुदाय को कोसते हैं। बेंगलुरु दंगों के मामले में भी यही हुआ। एनडीटीवी के रवीश कुमार ने भी यही किया।

हालाँकि, रवीश कुमार का ऐसा करना अप्रत्याशित नहीं है। उन्होंने बेंगलुरु दंगों के बारे में क्या कुछ कहा है, उससे पहले हमें ये जानना चाहिए कि पहलू खान और सुबोध सिंह हत्याकांड को लेकर उन्होंने किस तरह हिन्दुओं को निशाना बनाया था। रवीश कुमार के इस वीडियो को ‘मिल्लत टाइम्स’ ने जनवरी 2020 में ‘रवीश कुमार बनाम गोदी मीडिया’ नाम से डाला था। इसमें उन्होंने मोदी सरकार पर जम कर निशाना साधा था।

इस कार्यक्रम में रवीश ने कहा था कि वे एक हिसाब समझा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि एक पहलू खान को मारने के लिए 100 लड़के गए। एक सुबोध सिंह को मारने के लिए 100 लड़के गए। रवीश कुमार ने दावा किया कि दोनों जगह 100-100 लड़के जो हत्या करने गए, वो हिन्दू थे। साथ ही उन्होंने इसे राजनीति करार देते हुए कहा कि ये हिन्दू लड़कों को दंगाई बनाने की साजिश है।

इसके बाद रवीश कुमार ने कहा था, “अब हिन्दू लोग तय कर लें कि वे अपने बच्चों को डॉक्टर बनाना चाहते हैं या फिर दंगाई बनाना चाहते हैं। ये सब आप डिसाइड कर लो, मुझे कोई समस्या नहीं है।” लेकिन, इसी रवीश कुमार के सुर बेंगलुरु दंगों परवे इस्लामी भीड़ का मजहब छिपाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। हिंसा के मामले में बदल जाते हैं और वो संप्रदाय विशेष की भीड़ का मजहब छिपाने के लिए सारी कोशिश करते हैं। बेंगलुरु हिंसा पर रवीश कुमार का क्या कहना है, आइए जानते हैं।

बेंगलुरु हिंसा को लेकर रवीश कुमार ने कहा है कि जो दंगाई होते हैं, वो दंगाई होते हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें न तो हिन्दू ‘मजहब’ से कोई मतलब होता है और न ही इस्लाम से कोई मतलब होता है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि उन्होंने हिन्दू धर्म को भी ‘मजहब’ कह कर सम्बोधित किया। रवीश कुमार ने कहा कि दंगाई मानसिकता हर भीड़ में मौजूद होती है, जिसे भड़कने के लिए किसी चीज का इन्तजार रहता है।

ठीक इसी तरह, बेंगलुरु में संप्रदाय विशेष की 1000 लोगों की भीड़ द्वारा किए गए दंगों के बारे में मीडिया ने चुप्पी साध रखी है। लेकिन एक मानव श्रृंखला का भी गुणगान किया गया और बताया कि ये वो संप्रदाय विशेष के लोग हैं, जो मंदिर बचाने के लिए खड़े हैं। हालॉंकि इस मानव श्रृंखला की पोल खुलने में भी वक्त नहीं लगी।

ज्ञात हो कि 1000 के क़रीब की संप्रदाय विशेष की भीड़ ने न सिर्फ कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर तोड़फोड़ की थी, बल्कि बाहर खड़ी गाड़ियों को भी जला डाला था। विधायक आवास में तोड़फोड़ का नज़ारा काफी भयावह लग रहा था। दंगाइयों ने मजहबी नारे लगाते हुए पत्थरबाजी और आगजनी की थी।

अयोध्या में आयोजित होगी दुनिया की सबसे बड़ी रामलीला: रवि किशन बनेंगे भरत तो मनोज तिवारी निभाएँगे अंगद का किरदार

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन के बाद अब विश्व के सबसे बड़े रामलीला के आयोजन की तैयारी की जा रही है। इस रामलीला में फिल्म स्टार से लेकर राजनेता तक बड़ी भूमिकाओं में नज़र आएँगे। इसी सिलसिले में भोजपुरी जगत के सुपरस्टार और गोरखपुर के वर्तमान सांसद रवि किशन और बीजेपी के सीनियर नेता मनोज तिवारी का नाम रामलीला के किरदार के लिए सामने आ रहा है।

जानकारी के मुताबिक, अयोध्या में इस बार विश्व के सबसे बड़े रामलीला का आयोजन किया जाना है। इसे लेकर तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। इसमें सांसद रवि किशन भरत की भूमिका निभाएँगे, तो वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेता मनोज तिवारी अंगद के रोल में नजर आएँगे।

बॉलीवुड के जाने-माने फिल्म स्टार बिंदु दारा सिंह भगवान हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं, तो वहीं शहबाज खान रावण की भूमिका में नजर आएँगे। सीता और राम की भूमिका में बहुत बड़े फिल्म स्टार अयोध्या की रामलीला में नजर आएँगे।

बता दें कि 17 से 25 अक्टूबर के बीच ऐतिहासिक रामलीला होने जा रही है। रामलीला के किरदारों की ड्रेस डिजाइनिंग विष्णु पाटिल करेंगे। वहीं इसे प्रवेश कुमार डायरेक्ट करेंगे। इस राम लीला में जाने माने ऐक्शन डायरेक्टर कुमार देव गोरा भी शामिल होंगे। बॉबी मलिक रामलीला की प्रस्तुति करेंगे।

बता दें कि बॉबी मलिक 5 सालों में दिल्ली में दो बार रामलीला कर चुके हैं। मलिक ने कहा, ”मेरी कई सालों से इच्छा थी कि मैं श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या में रामलीला करूँ। मुझे बड़ी खुशी हुई, जब मैंने बिंदु दारा सिंह को बताया कि मैं रामलीला करने जा रहा हूँ और हनुमान जी का रोल आप से करवाना चाहता हूँ तो उन्होंने एकदम से हामी भर दी।”

बिंदु दारा सिंह ने कहा, “मुझे राम जन्मभूमि अयोध्या में होने जा रही रामलीला के अंदर हनुमान जी का किरदार निभाने के लिए दिया गया है। इससे बड़ा सौभाग्य मुझे प्राप्त नहीं हो सकता। मेरे पिता दारा सिंह ने कई फिल्मों, टीवी सीरियल के अंदर हनुमान जी की भूमिका निभाई और मैंने भी उनके आशीर्वाद से कई फिल्मों और टीवी सीरियल्स में हनुमान जी की भूमिका निभाई।”

रामलीला के बारे में बात करते हुए रवि किशन ने कहा, ”बॉबी मलिक वह नाम है जिन्होंने अपनी इमेज से कभी समझौता नहीं किया।” वहीं बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा, ”बॉबी मलिक पुराने अनुभव धारक है, इन्होंने आज तक जो भी किया है अच्छा किया है और दिल्ली की रामलीला को बनाने वाले बॉबी मलिक ही हैं।”

बता दें कि यह रामलीला ऑनलाइन दिखाई जाएगी। अगर सब कुछ ठीक रहा तो दर्शकों को मंच से भी इसको देखने का अवसर मिलेगा। मगर फिलहाल कोरोना के बढ़ते संकट को देखते हुए अभी ऑनलाइन टीवी चैनल, इंस्टाग्राम लाइव, यूट्यूब, फेसबुक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ही आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

‘वैज्ञानिकों ने पेशाब से बना लिए स्पेस ब्रिक्स’: यूरिया को यूरिन लिखने वाले NDTV को IISC प्रोफेसर ने लताड़ा

बेंगलुरु स्थित ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस’ के एक अस्सिस्टेंट प्रोफेसर ने NDTV के प्रोपेगंडा की पोल खोली है। दरअसल, प्रोपगैंडाबाज मीडिया संस्थान NDTV ने भारतीय वैज्ञानिकों को बदनाम करने के लिए और उनके प्रयासों पर मिट्टी डालने के लिए जानबूझ कर गलत सूचना शेयर की, जिसके बाद उसे तगड़ी लताड़ लगी। NDTV ने खबर फैलाई थी कि भारतीय वैज्ञानिक मूत्र (यूरिन) से ‘स्पेस ब्रिक्स’ बना रहे हैं।

NDTV का दुष्प्रचार,वैज्ञानिकों को किया बदनाम

जबकि सच्चाई ये है कि ये वैज्ञानिक यूरिन नहीं बल्कि यूरिया से स्पेस ब्रिक्स बना रहे थे। इसके बाद ट्विटर पर रोज ज़हर की उलटी करने वाले अशोक स्वाइन ने तो यहाँ तक कह दिया कि मूत्र को लेकर भारत का जुड़ाव अब चाँद तक पहुँच गया है। बता दें कि लिबरल गिरोह अक्सर आयुर्वेद की निंदा करता है और इस चक्कर में गोमूत्र की आलोचना करता है। इसी क्रम में स्वाइन ने एनडीटीवी के खबर के हवाले से तंज कसा।

असिस्टेंट प्रोफेसर आलोक कुमार ने NDTV की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘स्पेस ब्रिक्स’ बनाने में यूरिन के इस्तेमाल वाली खबर को नकार दिया। साथ ही उन्होंने मीडिया संस्थान को सलाह दी कि वो अपनी गलत हैडलाइन को तो बदले ही, साथ ही अपने कर्मचारियों को इतनी सैलरी दे कि वो प्रेस रिलीज को ठीक से पढ़ सकें। इसके बाद पहली सलाह को गंभीरता से लेते हुए NDTV ने तुरंत हैडलाइन बदल डाली।

बिना जाने-समझे मजे लेने के लिए कूद पड़े अशोक स्वाइन जैसे लिबरल

आलोक कुमार ने एनडीटीवी की हैडलाइन और अशोक स्वाइन की प्रतिक्रिया की तुलना सर्कस से की। ऑपइंडिया से बात करते हुए आलोक कुमार ने बताया कि उन्होंने इस प्रक्रिया में यूरिया का इस्तेमाल किया है, जो कई स्रोतों से आता है। इस प्रक्रिया में आर्टिफीसियल एडिटिव का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने बताया कि कुछ रिसर्च लैब्स यूरिया के सोर्स के लिए यूरिन के अध्ययन की प्रक्रिया में लगे हैं।

बकौल आलोक कुमार, ऐसा इसीलिए किया जा रहा है ताकि अगर भविष्य में चाँद पर मानवों की कोई कॉलनी बसती है तो उनके मल-मूत्र का उपयोग भी कंस्ट्रक्टिव कार्यों के लिए हो सके। हालाँकि, लिबरल गैंग ने इसे मजाक में ले लिया। IISC की प्रेस रिलीज में भी कहा गया है कि यूरिया केवल इसका एक हिस्सा है। चाँद पर ‘ब्रिक लाइक स्ट्रक्चर’ के लिए ISRO और IISC ने साथ मिल कर काम किया था।

कई मीडिया संस्थानों ने चलाई खबर, सिर्फ NDTV ने हैडलाइन में की कारगुजारी

लोड लेने वाली संरचना बनाने के लिए इसमें लूनर मिट्टी के साथ-साथ अन्य सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है। हालाँकि, इसकी खबर प्रकशित करते समय NDTV ने PTI से सूचना ली थी लेकिन हैडलाइन में उसने खुद से कारगुजारी की थी। वहीं ‘द इकनोमिक टाइम्स’ ने भी PTI की ही खबर डाली लेकिन उसने हैडलाइन में गड़बड़ी नहीं की। इससे NDTV के असली इरादों का पता चलता है।

बेंगलुरु के दंगे: गजवा-ए-हिन्द की वही साजिश, वही मंसूबे

बेंगलुरु में 11 अगस्त 2020 की रात कुछ ही घंटों में सब कुछ खाक हो गया। 60 से अधिक पुलिसकर्मी एवं कई स्थानीय लोग जख्मी हो गए। करोड़ों की सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ। कथित तौर पर सोशल मीडिया में एक कमेंट की वजह से यह दंगा हुआ।

कॉन्ग्रेस के दलित विधायक आर मूर्ति के भतीजे नवीन पर पैंगम्बर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक कमेंट करने का आरोप है। इसकी वजह से संप्रदाय विशेष के लोग विधायक के घर के बाहर इकट्ठा होकर हिंसा करने लगे। विधायक ने इस पोस्ट के लिए माफी भी मॉंगी। बावजूद जो कुछ हुआ उससे जाहिर है कि दंगाई तो बस हिंसा का बहाना खोज रहे थे।

देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में दंगाई विधायक के घर के बाहर और केजी हाली पुलिस थाने में जमा हो गए। वे आरोपी को तत्काल फाँसी की मॉंग कर रहे थे। मानो न्यायपालिका वे ही चलाते हों और जो उन्होंने कह दिया वही सच है।

पुलिस ने भीड़ को समझाने की कोशिश की। भरोसा दिलाया कि वे उचित कार्यवाही कर रहे हैं। परंतु भीड़ हिंसक हो गई। वाहनों और थाने को फूॅंक दिया गया। जल्द ही बेंगलुरु से भयावह तस्वीर सामने आने लगी।

सोशल मीडिया पर इस तरह का माहौल बनाया गया कि मानो इस्लाम खतरे में आ गया है। संप्रदाय विशेष के लोगों को जुटने का संदेश दिया गया। बेंगलुरु में हर जगह संप्रदाय विशेष की भीड़ जमा होने लगी। मंदिर के पास भी उन्हीं की भीड़ थी। जिसे बाद में मानव श्रृंखला का नाम देकर बताया गया कि वे तो मंदिर की सुरक्षा कर रहे थे।

ऐसा नहीं है कि किसी धर्म को लेकर टिप्पणी पहली बार हुई थी। इसी हिंदुस्तान में हिन्दू देवी-देवताओं पर अश्लील फब्तियॉं कसी जाती है। उनके अश्लील चित्र बनाए जाते हैं। कॉमेडी शो में हिन्दू संस्कृति, हिन्दू धर्म का मजाक उड़ाया जाता है। माँ दुर्गा को वेश्या तक कहा गया। सीता माता एवं रावण के सम्बंध बताना एवं जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के चरित्र पर सवाल उठाना आम है। हाल ही में असम में एक प्रोफेसर ने भगवान राम पर अश्लील टिप्पणी की थी। लेकिन देश में कहीं भी न हिन्दू धर्म खतरे में आया, न ही कहीं दंगे हुए।

केरल में माँ दुर्गा की नग्न तस्वीर का पोस्टर वामपंथी कई बार लगा चुके हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने माँ दुर्गा को वेश्या तक कह दिया था। अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बकायदा अकाउंट हैं, जिनका काम ही हिन्दू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक पोस्ट करना है।

ऐसा भी नहीं है कि हाल के दिनों में ही यह देखने को मिला है। कथित पेंटर एमएफ हुसैन हिन्दुओं को नीचा दिखाने के लिए हिन्दू देवियों के अश्लील चित्र बनाता था।

लेकिन कभी हिंदू हिंसक नहीं हुआ। य​दि इनके खिलाफ आवाज उठती भी है तो हिंदू अकाउंट की रिपोर्ट कर शांत हो जाते हैं। लेकिन बेंगलुरु में एक फेसबुक कमेंट ने सुनियोजित दंगे का रूप ले लिया।

ऐसे में सवाल उठता है कि ये अचानक हुआ या इसकी पहले से योजना तैयार थी? इसी साल फरवरी में भयानक हिंदू विरोधी दंगे हुए थे। दंगों के एक आरोपित ताहिर हुसैन ने ने कबूल किया है दंगों की योजना कई महीने पहले ही बना ली गई थी। इन्हें विदेशी ताकतों का समर्थन और पैसा भी हासिल था।

दिल्ली दंगों की चार्ज शीट और आरोपित ताहिर हुसैन का बयान

दिल्ली दंगों का कारण वे बड़े फैसले थे जो देश की संसद और न्यायपालिका ने लिए थे। इनमें मुख्य रूप से तीन तलाक, राम मंदिर, नागरिकता संशोधन कानून था। सुनियोजित तरीके से पहले यह दुष्प्रचार किया गया कि ये सब इस्लाम विरोधी हैं। फिर कुछ राजनीतिक संगठन जिनमें वामपंथी एवं कट्टरपंथी ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान से संबंध रखने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे कट्टर इस्लामिक संगठनों ने हिंसा की साजिश रची।

अमेरिका के हालिया दंगों में ANTIFA नामक एक संगठन का हाथ पाया गया था। इसके बाद अमेरिकी सरकार ने उस पर प्रतिबंध लगा यिा। ANTIFA का सम्बन्ध भी दिल्ली दंगों से जुड़ा मिला। वामपंथियों के नेतृत्व में यह संगठन जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी ​सक्रिय है।

जेएनयू में ANTIFA

ऐसे में बेंगलुरु में भी जो कुछ हुआ वह सुनियोजित ही लगता है। कोरोना संक्रमण के इस दौर में अचानक कुछ ही घंटों के भीतर इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुट जाना, दंगाई भीड़ के इस्लामी नारे, आगजनी, हिंसा, सब कुछ इसी ओर इशारा करते हैं।

दिल्ली दंगों की जॉंच में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उससे भी जाहिर है कि बेंगलुरु में भी इस तरह की हिंसा बिना योजना के मुमकिन नहीं थी। इस मामले में हैरत की बात यह भी है कि कॉन्ग्रेस विधायक मूर्ति दलित समुदाय से आते हैं। बावजूद न तो कथित दलित हितैषियों ने इस मामले में चुप्पी तोड़ी है और न ही कॉन्ग्रेस ने अपने विधायक और उनके परिवार को निशाना बनाकर किए गए इस हिंसा की निंदा की है।

भारत में आज भी ऐसे लोग हैं जो गजवा-ए-हिन्द का सपना लिए बैठे हैं। 1946 के लेकर आज तक इन दंगों की जगह भले बदली हो पर तरीका आज भी वही है।

सिर्फ इसलिए कि मैं कॉन्ग्रेस से हूँ, क्या मुझे धर्म के बारे में नहीं बोलना चाहिए: बेंगलुरु ‘ईशनिंदा’ आरोपित नवीन

कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे पी नवीन का कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ उनके संबंधों का खुलासा हुआ है। बता दें कि नवीन पर आरोप है कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने बेंगलुरु की सड़कों पर हिंसा फैलाने के लिए संप्रदाय विशेष की भीड़ को भड़काया था।

नवीन इस समय अपने आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर पुलिस हिरासत में है। कन्नड़ दैनिक विजयवाणी की एक रिपोर्ट के अनुसार, नवीन ने शुक्रवार (अगस्त 14, 2020) को बेंगलुरु दंगों के मामले की पुलिस जाँच के दौरान पूछताछ में कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ अपने जुड़ाव की खुलकर पुष्टि की है।

युवा कॉन्ग्रेस नेता ने पूछताछ के दौरान पुलिस से कहा, “सिर्फ इसलिए कि मैं कॉन्ग्रेस से हूँ, क्या मुझे धर्म के बारे में नहीं बोलना चाहिए।”

कथित तौर पर, कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे ने जाँच के दौरान पुलिस अधिकारियों को बेंगलुरु दंगों से संबंधित सनसनीखेज जानकारी दी है। बेंगलुरु पुलिस ने नवीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए और 295 के तहत मामला दर्ज किया है।

जाँच के दौरान, नवीन ने किसी भी धर्म या आस्था के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट करने या किसी भी तरह का अपमान करने से इनकार किया है। गिरफ्तार कॉन्ग्रेस पार्टी कार्यकर्ता ने यह भी कहा है कि उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंदू विरोधी टिप्पणियों का समय-समय पर जवाब दिया है और आरोप लगाया है कि इसी वजह से कुछ लोग उसके खिलाफ साजिश कर रहे हैं।

नवीन ने पुलिस को यह भी बताया कि इस घटना के बाद से उसे जान से मारने की बहुत सारी धमकियाँ मिल रही है।

गौरतलब है कि बेंगलुरु के दंगों के बाद, नवीन को इस्लामवादियों, संप्रदाय विशेष की मॉब से इस्लाम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए धमकियाँ मिल रही हैं। हमने इस बात की सूचना दी थी कि कैसे बेंगलुरु में हुए दंगों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर इस्लामवादियों ने नवीन की मौत की कामना की थी।

आरिफ खान नाम के युवक द्वारा नवीन की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा गया – “यही वो कॉन्ग्रेस MLA का नेफ्यू है, जिसने रसूलल्लाह की शान में गुस्ताखी की है..।”

इस पोस्ट के कमेंट्स में सलमान अंसारी और सरताज ने नवीन को ‘लानत’ दी हैं। अन्सीर बाशा ने लिखा है – “इस को फॉरवर्ड मत करो, सब्र करो और इसका हश्र देखो आगे।”

इससे पहले, पूर्व सपा नेता शाहबेज रिजवी ने कर्नाटक कॉन्ग्रेस के दलित विधायक आर मूर्ति के भतीजे नवीन का सिर काटने पर 51 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। हालाँकि, उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

बेंगलुरु में इस्लामिक भीड़ का भयावह चेहरा देखने के बाद भी 13 अगस्त को शाहजेब रिजवी ने एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उसने कहा था, “फेसबुक पोस्ट के माध्यम से नवीन ने हुजूर के शान में जो गुस्ताखी की है, मैं उसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता हूँ। इस युवक का जो सर कलम करके लाएगा उसे मैं 51 लाख का नगद ईनाम दूँगा।” इसके लिए रिजवी ने संप्रदाय विशेष के लोगों से मिलकर 51 लाख रुपए जमा करने की भी अपील की थी।

बता दें कि नवीन के कथित आपत्तिजनक पोस्ट पर बेंगलुरु में दंगे भड़कने बाद उसके राजनीतिक संबंध को लेकर भाजपा और विपक्षी पार्टी में वाकयुद्ध छिड़ गया था। कॉन्ग्रेस ने अपना मुस्लिम तुष्टिकरण कार्ड को संरक्षित रखते हुए पर नवीन पर इस्लाम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए हमला किया था। ऐसा करने पर, राज्य में कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रमुख डीके शिवकुमार ने दावा किया था कि नवीन भाजपा के समर्थक हैं।

डीके शिवकुमार के राजनीतिक आक्षेप का जवाब देते हुए, उपमुख्यमंत्री सीएन अश्वथ नारायण ने डीके शिवकुमार और नवीन का पोस्टर शेयर करते हुए सबूत पेश किया था कि ‘ईशनिंदा’ करने वाला आरोपित कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता था।

हालाँकि, नवीन के द्वारा खुद को कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ अपने संबंधों के बारे में कबूल करने के साथ ही उसके राजनीतिक जुड़ाव को लेकर विवाद अब समाप्त होता दिख रहा है।

सुशांत ने टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी को दिए 62 लाख रुपए, एजेंसी ने रिया चक्रवर्ती को दिए 22 लाख रुपए: ED के सूत्र

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक सुशांत ने कथित रूप से एक टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी को 62 लाख रुपए का भुगतान किया था और बाद में उसी कंपनी ने रिया चक्रवर्ती को 22 लाख रुपए का भुगतान किया। टाइम्स नाउ ने ईडी के सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में ये जानकारी दी है।

सुशांत के खातों से बड़ी रकम निकालने वाले कौन लोग थे, ईडी धीरे-धीरे इसकी तह में पहुँच रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब तक की जाँच के दौरान ईडी को पता चला है कि सुशांत के खाते से 14 नवंबर को भी सैमुअल मिरांडा ने 2 लाख रूपए की रकम निकाले थे। दस्तावेजों के मुताबिक सुशांत के बैंक खाते से एटीएम के जरिए 14 नवंबर की रात 8:33 मिनट से 8:48 तक दो लाख रुपए 20-20 हजार रुपए की शक्ल में विड्रॉ किए गए थे।

बता दें कि सैमुअल मिरांडा सुशांत का हाउस मैनेजर था, जिसे रिया ने काम पर लगाया था। वह रिया का करीबी बताया जाता है। सैमुअल मिरांडा का नाम ईडी की एफआईआर में भी है। ईडी सैमुअल मिरांडा से एक बार पूछताछ भी कर चुकी है।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के लिए एक ग्लोबल प्रेयर रखी गई है। इसकी शुरुआत आज 15 अगस्त से हो रही है। फिल्म ‘काई पो छे’ के अभिनेता की बहन श्वेता कीर्ति सिंह ने लोगों से एक पोस्ट के माध्यम से अनुरोध किया है कि सभी लोग 15 अगस्त को होने वाली 24 घंटे की वैश्विक पूजा में शामिल हों। श्वेता के अलावा अंकिता लोखंडे ने भी इस प्रेयर में लोगों ने से जुड़ने की अपील की है।

बाबा रामदेव ने हरिद्वार में दिवंगत सुशान्त सिंह राजपूत की आत्मा की शांति के लिए हवन किया। बाबा रामदेव ने कहा कि सुशान्त के जीवन को कातिलों ने छीन ली अब कम से कम उसके दिवंगत आत्मा को न्याय मिल जाए।

गौरतलब है कि सुशांत के चचेरे भाई और विधायक नीरज सिंह बबलू ने मुंबई पुलिस पर डायरी के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि डायरी के कुछ पन्ने फाड़ दिए गए हैं।

बबलू का कहना है कि सुशांत की मौत के बाद उन्होंने ही उसकी डायरी पुलिस को सौंपी थी। उन्होंने कहा कि सुशांत लंबे समय से डायरी लिखा करते थे। इसमें सुशांत के करियर प्लानिंग को लेकर सब कुछ था। वो कैसे हॉलीवुड में एंट्री लेते और फिल्में करते, इस बारे में पूरी योजना थी। उन्होंने कहा कि सुशांत हॉलीवुड मे जाने में सक्षम थे और 100 गरीब बच्चों को NASA में भी भेजना चाहते थे।

बंगाल: तिरंगा फहरा रहे BJP कार्यकर्ता की हत्या, TMC के गुंडों पर हमला और बमबारी के आरोप

स्वतंत्रता दिवस के दिन भी पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का सिलसिला नहीं थमा। कथित तौर पर तिरंगा फहराने को लेकर हुए विवाद में बीजेपी के एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। घटना हुगली के आरामबाग स्थित खनकुल की है। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों पर हमला करने का आरोप है।

मृतक भाजपा कार्यकर्ता का नाम सुदर्शन प्रमाणिक है। बताया जा रहा है कि उन पर झंडोत्तोलन के दौरान गुंडों ने धारदार हथियारों से हमला किया। उन्हें स्थानीय हेल्थ सेंटर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हत्याकांड के बाद क्षेत्र में तनाव पसर गया है। भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। तृणमूल कॉन्ग्रेस पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज का विरोध करने के आरोप लग रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शनिवार (अगस्त 15, 2020) को दौलतचक में भाजपा और तृणमूल के कार्यकर्ता झण्डा फहरा रहे थे। अचानक सुबह 9 बजे दोनों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। बाद में संघर्ष हिंसक हो गया। स्थानीय लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि बमबारी भी शुरू हो गई थी। इसी दौरान सुदर्शन प्रमाणिक पर हमला किया गया और वे जमीन पर गिर पड़े।

भाजपा ने इस हिंसा के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर कहा है, “ममता राज में स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराना भी अपराध हो गया है। आरामबाग क्षेत्र के भाजपा के बूथ कार्यकर्ता सुदर्शन प्रमाणिक की इसी मामले में हत्या कर दी गई। शक है कि ये TMC के गुंडों का काम है। आज हमें इस गुंडा राज से मुक्त होने का संकल्प लेना ही होगा।”

वैसे यह पहली घटना नहीं है जब बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या को लेकर सत्ताधारी TMC पर आरोप लगे हों। हाल ही में उत्तरी दिनाजपुर में भाजपा नेता की बहन की कथित तौर पर बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। घटना के ठीक एक दिन बाद आरोपित फिरोज अली की भी लाश मिली थी। इसके बाद आरोपित की हत्या के आरोप में मृतका के पिता और दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया था। मृतका के परिवार वालों ने हत्या और बलात्कार का आरोप फिरोज अली पर लगाया था, उसका सम्बन्ध तृणमूल कॉन्ग्रेस से था।

स्वतंत्रता दिवस पर मोगा में प्रशासनिक भवन पर फहराया खालिस्तानी झंडा: CM अमरिंदर ने दिए सख्त कार्रवाई के आदेश

पंजाब के मोगा में स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले खालिस्तानी तत्वों ने मुख्य प्रशासनिक भवन के ऊपर ही खालिस्तान का झंडा फहरा दिया। इतना ही नहीं, खालिस्तान समर्थकों ने वहाँ लगे तिरंगे झंडे को भी हटा दिया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस घटना को सख्ती से लिया है और जिला प्रशासन को ऐसा करने वाले असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

घटना मोगा स्थित जिला प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स की है। डीसी दफ्तर के सामने दो खालिस्तान समर्थक युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया है। इन दोनों ने 5वीं मंजिल पर चढ़ कर छत की पाइप पर खालिस्तान का झंडा लगा दिया। इसके बाद हड़कंप मच गया। आनन-फानन में अधिकारियों ने खालिस्तान का झंडा हटा कर वहाँ फिर से ससम्मान तिरंगा झंडा फहराया। मौके पर एसएसपी और एसडीएम भी पहुँचे।

हिन्दू संगठनों ने भी तिरंगा झंडा उतार कर खालिस्तान का झंडा फहराए जाने को लेकर रोष प्रकट किया है। शुक्रवार (अगस्त 14, 2020) को आयोजित एक बैठक में एंटी खालिस्तान फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष निशांत शर्मा व राष्ट्रीय चेयमैन अमित घई ने कहा कि रेफरेंडम 2020 के प्रचार के तहत ही उक्त घटना को अंजाम दिया गया है। बता दें कि खालिस्तान गैंग अलग सिख मुल्क के लिए रेफरेंडम की माँग करते हुए दुष्प्रचार कर रहा है।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, पंजाब में खालिस्तान समर्थक तेजी के साथ सक्रिय होने का प्रयास कर रहे है। सभी इसे एक सुर में माहौल बिगाड़ने की साजिश बता रहे हैं।

फ़िलहाल पुलिस ने कॉम्प्लेक्स के सभी सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खँगाले जा रहे हैं। दोषियों के बारे में सूचना देने पर 50,000 रुपए का इनाम रखा गया है। सीएम अमरिंदर ने ‘सिख फॉर जस्टिस’ और आतंकी गोरपतवंत सिंह पन्नी को चुनौती देते हुए कहा कि वे उन्हें अच्छा सबक सिखाएँगे। उन्होंने युवाओं को भारत-विरोधी तत्वों से दूर रहने की सलाह दी है।

बताया गया है कि संदेह पैदा न हो, इसीलिए दोनों युवक कर्मचारियों की एंट्री के समय उनके साथ ही कॉम्पलेस में घुस गए थे। सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा है कि कुछ युवा भारत-विरोधी खालिस्तानी गैंग के जहरीले प्रोपेगेंडा के शिकार बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाबी समुदाय भारत में पूरी समृद्धि के साथ रह रहा है और देशविरोधी गतिविधियों का विरोध करता है। उन्होंने कहा कि खालिस्तानी गैंग भारत-विरोधी तत्वों से रुपए ऐंठने के लिए ऐसी हरकतें कर रहा है।

बता दें कि पाकिस्तान भी सिखों को भड़काने के लिए चालें चल रहा है। खालिस्तान के लिए चलाई जा रही मुहिम रेफरेंडम-2020 को लेकर पाकिस्तान इंटरनेट कॉल के जरिए सिखों को भड़का रहा है और साथ ही ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान भी चला रहा है, जो भारत को बाँटने की एक साजिश है। पंजाब में फिर से माहौल ख़राब करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे सुरक्षा और ख़ुफ़िया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।