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श्रीनगर में सुरक्षाबलों पर आतंकी हमले में 2 जवान वीरगति को प्राप्त, 1 घायल: आतंकियों की तलाश जारी

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने एक बार फिर भारतीय सुरक्षाबलों को निशाना बनाया है जिसमें 2 जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं, जबकि एक जवान घायल है। शुक्रवार (अगस्त 14, 2020) सुबह श्रीनगर के बाहरी इलाके में नौगाम बाईपास पर आतंकियों ने पुलिस पार्टी पर हमला किया। इस आतंकी हमले के पीछे कौनसा आतंकी संगठन जिम्मेदार है, इस बारे में अभी जानकारी आनी बाकी हैं।

पुलिस ने एक ट्वीट में लिखा, “आतंकवादियों ने नौगाम बाईपास के पास पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।”

आतंकवादियों ने शुक्रवार सुबह श्रीनगर शहर के गुलशन चौक नौगाम इलाके में एक गश्ती पार्टी पर गोलीबारी की। रिपोर्ट्स के अनुसार, घायल पुलिसकर्मियों को पीसीआर अस्पताल श्रीनगर ले जाया गया, जहाँ उनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया। उनकी पहचान 715 आईआरपी 20 बटालियन के इश्फाक अयूब और 307 आईआरपी 20 बटालियन के फैयाज अहमद के रूप में की गई है।

इन दो के अलावा, तीसरे जवान के दाहिने हाथ में गोली लगने से घायल हुए सिपाही की पहचान सेलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल मुहम्मद अशरफ के रूप में हुई है। घटना के बाद इस इलाके को बंद कर दिया गया है और तलाशी अभियान जारी है।

हाल ही में आतंकियों ने बारामूला के सोपोर में एक सेना की पेट्रोलिंग पार्टी को निशाना बनाया था, जिसमें एक जवान के घायल होने की सूचना सामने आई थी। आतंकवादियों ने सेना, CRPF और पुलिस की संयुक्त नाका पार्टी पर ह्यागम में एक होटल के पास फायरिंग की, जिसकी जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी फायर किया, लेकिन आतंकवादी वहाँ से भागने में सफल रहे। 

कर्नाटक में अंजनेय स्वामी मंदिर में जीसस-मैरी की तस्वीर लगाने का वायरल क्लेम: पुलिस और पुजारी ने किया दावे को ख़ारिज

एक कन्नड़ वेब पोर्टल की रिपोर्ट में किए गए दावे के अनुसार, कर्नाटक के चामराजनगर की एक नई पुलिस अधीक्षक (SP) दिव्या सारा थॉमस ( Divya Sara Thomas) कथित रूप से मंदिर में यीशु और मैरी की तस्वीर लगाने और उनकी पूजा करने के लिए अंजनेय स्वामी मंदिर के पुजारी पर दबाव बनाया गया है। जबकि अब नई सूचनाओं के आलोक में यह दावा गलत साबित हुआ है।

इससे पहले बताया जा रहा था कि पुलिस अधिकारी उस समय अपने हाथों में जीसस और मैरी की फोटो लिए हुए थी, जब वह मंदिर में दर्शन करने गई। आखिरकार, पुजारी ने अधिकारी के दबाव के आगे झुक कर गर्भगृह में जीसस और मेरी की तस्वीर लगानी पड़ी। लेकिन पुलिस के बयान के अनुसार, दरअसल, मंदिर प्रशासन द्वारा ही वह तस्वीर SP दिव्या थॉमस को कई अन्य उपहारों के साथ दिया गया था।

ज्ञात हो कि 2013 के कर्नाटक बैच की आईपीएस अधिकारी दिव्या सारा थॉमस ने इसी साल जुलाई माह में कर्नाटक चामराजनगर में पहली महिला पुलिस अधीक्षक के रूप में पदभार सँभाला है। वह पहले बेंगलुरु में केंद्रीय सशस्त्र रिजर्व बल में डीसीपी के पद पर थीं।

यह घटना 5 अगस्त की ही बताई जा रही है, जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के स्वयंसेवकों ने भूमिपूजन की विशेष पूजा का आयोजन किया था।

इस अनुष्ठान के बाद ही मंदिर में जीसस और मैरी की तस्वीर लगाने के दावे के साथ बहुत सारे ट्वीट में यह अधूरी सूचना साझी की गई थी जो कि बाद में वायरल हो गया। वायरल होने के बाद अब मंदिर प्रशासन और पुलिस ने जीसस और मैरी की तस्वीरें लगाने की भ्रामक दावे पर स्पष्टीकरण देकर सच उजागर किया है। जिसके बाद नवीनतम जानकारी के आधार पर यह पोस्ट अपडेट की गई है।

कर्नाटक पुलिस ने तस्वीर लगाने के दावे को ख़ारिज करते हुए, इस घटना का सच बताने के उद्देश्य से अपने बयान में कहा, “SP जब मंदिर गई थीं तो अपने साथ कोई तस्वीर लेकर नहीं गई थी। बल्कि जीसस और मैरी की तस्वीर को मंदिर प्रशासन ने ही उन्हें अन्य हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरों के साथ अनुष्ठान समाप्त होने के बाद उपहार स्वरुप दिया गया था।”

अतः अब यह स्पष्ट है कि वायरल दावे में कोई सच्चाई नहीं है। तो ऑपइंडिया ने भी अपनी यह रिपोर्ट जो वायरल क्लेम और कई दूसरे मीडिया रिपोर्ट के आधार पर थी। उसमें अपडेट किया है।

अपडेट: यह खबर नई सूचनाओं के आधार पर अगस्त 15, 2020, समय- 6 PM पर अपडेट की गई है।

अतीक अहमद पर योगी सरकार सख्त: प्रयागराज की 7 संपत्तियों की कुर्की के आदेश, हथियार लाइसेंस भी होगा रद्द

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तरफ से अपराधियों और माफियाओं पर कार्रवाई जारी है। पिछले कुछ समय में योगी सरकार ने राज्य के कई ऐसे नामों पर शिकंजा कसा है। जो अपराध की दुनिया में जाने-पहचाने नाम थे और राजनीति से भी अच्छा भला संबंध रखते थे। इस कड़ी में योगी सरकार ने पूर्व बाहुबली सांसद अतीक अहमद पर कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में अतीक अहमद की तमाम अवैध संपत्तियाँ हैं। योगी सरकार ने इन संपत्तियों की कुर्की के आदेश जारी किए हैं।   

न्यूज़ 18 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रयागराज जिला प्रशासन ने अतीक अहमद की कुल 7 अचल संपत्तियों को कुर्की करने के निर्देश जारी किए हैं। प्रयागराज के जिलाधिकारी भानु चन्द्र गोस्वामी ने उत्तर प्रदेश की बंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा-14 (1) के अंतर्गत अतीक अहमद की कुल सात सम्पत्तियों (अवैध) को कुर्क करने का आदेश जारी किया है। इस आदेश में चकिया में स्थित तीन मकान, कालिंदीपुरम में स्थित एक मकान, ओमप्रकाश सभासद नगर में एक मकान, सिविल लाइन में एक मकान और कर्बला में एक मकान शामिल है।    

इन मकानों में मकान नं0-95 डी/1/3 चकिया थाना खुल्दाबाद, मकान नं0-3/6डी/1 कर्बला थाना खुल्दाबाद, मकान नं0-95 डी/4 चकिया थाना खुल्दाबाद, मकान नं0-95 सी/57के/1 चकिया थाना खुल्दाबाद, मकान नं0-24 एमआईजी कालिंदीपुरम थाना धूमनगंज, मकान नं0-197/39 महात्मा गाँधी मार्ग थाना सिविल लाइन्स, मकान नं0-95/51 ओम प्रकाश सभासद नगर शामिल हैं। अतीक अहमद की संपत्तियों को कुर्क किए जाने की संस्तुति पहले ही जारी कर दी गई थी। एसएसपी अभिषेक दीक्षित ने अपनी रिपोर्ट में यह संस्तुति जारी की थी। संस्तुति की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए जिलाधिकारी ने अतीक अहमद की अचल संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश जारी किया था।     

जिलाधिकारी ने प्रभारी निरीक्षक थाना खुल्दाबाद को मकान नं0-95 डी/1/3, मकान नं0-95 डी/4, मकान नं0-95 सी/57के/1 और मकान नं0-3/6डी/1 की अचल सम्पत्तियों का प्रशासक नियुक्त किया है। इसके अलावा प्रभारी निरीक्षक थाना सिविल लाइन्स को मकान नं0-197/39 महात्मा गांधी मार्ग की अचल सम्पत्ति का प्रशासक नियुक्त किया है।   

जबकि प्रभारी निरीक्षक थाना धूमनगंज को मकान नं0-95/51 ओम प्रकाश सभासद नगर और मकान नं0-24 एमआईजी कालिंदीपुरम की अचल सम्पत्ति का प्रशासक नियुक्त किया है। इसके बाद जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अतीक अहमद की इन संपत्तियों को कुर्क करने के आदेश का अनुपालन 28 अगस्त के पहले करना है।   

इतना ही नहीं जिलाधिकारी ने अतीक अहमद के पास मौजूद हथियारों को लेकर भी अहम आदेश जारी किया है। उन्होंने अतीक अहमद समेत आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कुल 23 लोगों के शास्त्र लाइसेंस रद्द करने का आदेश दिया है। जिलाधिकारी ने इन 23 लोगों पर लगाई गई तमाम गंभीर धाराओं को आधार बनाते हुए इनके हथियार का लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति जारी की। इस मामले में भी एसएसपी की रिपोर्ट का हवाला लिया गया है।   

बेंगलुरु हिंसा मामले में कॉन्ग्रेस पार्षद का पति कलीम पाशा गिरफ्तार: सामने आया SDPI-कॉन्ग्रेस कनेक्शन, SDPI पर बैन की तैयारी

कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता केजे जॉर्ज के करीबी सहयोगी कलीम पाशा को बेंगलुरु हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, आरोपित कलीम पाशा की पत्नी इरशाद बेगम कॉन्ग्रेस पार्टी की पार्षद हैं। इस हिंसा के पीछे PFI समर्थित संगठन SDPI और कॉन्ग्रेस के गठजोड़ की आशंका भी जताई जा रही है क्योंकि कलीम पाशा के कॉन्ग्रेस से बहुत अच्छे संबंध हैं।

बेंगलुरु के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) संदीप पाटिल ने कहा कि बेंगलुरु में 11 अगस्त की हिंसा के सिलसिले में 60 और लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें कलीम पाशा को मिलाकर हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या 206 हो चुकी है।

4 SDPI सदस्य गिरफ्तार

बेंगलुरु हिंसा की जाँच के लिए चार टीमों का गठन किया गया है, जिसमें तीन लोग मारे गए और लगभग 60 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं।

संप्रदाय विशेष की भीड़ द्वारा किए गए दंगों के पीछे सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की भूमिका भी संदेह के घेरे में है और उपमुख्यमंत्री सीएन अश्वथ नारायण के अनुसार, हिंसा के संबंध में इसके 4 सदस्यों को गिरफ्तार किए जाने के बाद सरकार SDPI पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार कर रही थी।

नारायण ने कार्यालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा, “पहले की घटनाओं (एसडीपीआई को मिलाकर) के सबूत हैं। सरकार ऐसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का साहसिक निर्णय लेगी। आवश्यक साक्ष्य एकत्र करने के बाद सरकार इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठाएगी।”

पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR के अनुसार, 5 लोगों के एक गिरोह ने 200 से 300 लोगों की भारी सशस्त्र भीड़ का नेतृत्व किया और उन्हें पुलिस अधिकारियों से मुठभेड़ करने के लिए कहा।

कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन द्वारा सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के कथित अपमानजनक पोस्ट को लेकर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए दंगों में उग्र भीड़ द्वारा ‘पुलिसकर्मियों को मार डालो, उन्हें मत छोड़ो, उन्हें खत्म करो’ के नारे भी लगाए गए। नवीन को भी फिलहाल गिरफ्तार किया गया है।

विधायक के आवास और डीजे हाली के एक थाने में संप्रदाय विशेष उपद्रवियों ने उत्पात मचाया, जिन्होंने कई पुलिस और निजी वाहनों को भी आग लगा दी और लूटपाट भी मचाई। मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की शाम कॉन्ग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्थी के आवास पर संप्रदाय विशेष की हज़ारों की भीड़ इकट्ठा हुई।

कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़ फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हैं।  

पूर्व सपा नेता शाहजेब रिजवी ने कॉन्ग्रेस के दलित विधायक के भतीजे का सर कलम करने पर रखा ₹51 लाख का इनाम

नेता शाहजेब रिजवी (Shahzeb Rizvi) ने गुरुवार (13 अगस्त, 2020) को एक विवादित वीडियो पोस्ट करते हुए बेंगलुरु में कॉन्ग्रेस के दलित विधायक के भतीजे नवीन का सिर काटने पर 51 लाख रुपया का इनाम रखा है। बता दें नवीन ने पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट किया था। सोशल मीडिया पर यह वीडियो इस वक्त तेजी से वायरल हो रहा है।

शाहजेब रिजवी ने अपने विवादित वीडियो में कहा, “फेसबुक पोस्ट के माध्यम से उसनें हुजूर के शान में जो गुस्ताखी की है, मैं उसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता हूँ, रिजवी ने ऐलान किया की इस युवक जो सर कलम करके लाएगा उसे मैं 51 लाख का नगद ईनाम दूँगा। रिजवी ने संप्रदाय विशेष के लोगों से अपील की है कि सब मिलकर 51 लाख रुपए जमा करो।”

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक शाहजेब रिजवी उत्तरप्रदेश के मेरठ में फलावदा थाना क्षेत्र के रसूलपुर गाँव के रहने वाला हैं। वह पहले समाजवादी पार्टी का अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश सचिव रह चुका है। लेकिन इस वक्त वह सपा में सक्रिय नहीं हैं। पिछली बार जिला पंचायत के चुनाव में वह हार गया था।

फिलहाल मेरठ पुलिस रिजवी की धरपकड़ में जुट गई है। इस विवादित वीडियो को एसएसपी अजय साहनी ने संज्ञान में लेते हुए थाना अधिकारियों को जाँच के आदेश दिए है। पुलिस मामले की तहकीकात में जुट गई है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन के फेसबुक पोस्ट को लेकर सारा विवाद शुरू हुआ था। उस पर पैगम्बर मुहम्मद को लेकर विवादित पोस्ट डालने का आरोप है।

बेंगलुरु दंगों में शामिल अब तक हिंसा करने वालों में से 150 को गिरफ्तार किया गया है। बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने लोगों को शांति बनाए रखने की अपील की है। इस घटना में 3 लोग मारे गए और 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके साथ ही दंगाइयों ने 250 के करीब गाड़ियों को आग लगा दी और करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुँचया है।

बता दें कि 200-300 के क़रीब की संप्रदाय विशेष की भीड़ ने न सिर्फ कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर तोड़फोड़ की थी बल्कि बाहर खड़ी गाड़ियों को भी जला डाला था। विधायक आवास में तोड़फोड़ का नज़ारा अभी भी देखा जा सकता है। दंगाइयों ने मजहबी नारे लगाते हुए पत्थरबाजी और आगजनी की। जिसके बाद कर्नाटक के गृहमंत्री बोम्मई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा था कि सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों को नुकसान की भरपाई क्षति पहुँचाने वाले दंगाइयों को करना होगा।

सुशांत सिंह केस: रिया चक्रवर्ती और बिहार सरकार ने कोर्ट में दाखिल की लिखित दलीलें, CBI ने जाँच जारी रखने की माँगी अनुमति

सुशांत सिंह केस में अदालत की ओर से सभी पक्षों को गुरुवार (अगस्त 13, 2020) तक लिखित दलीलें दाखिल कराने को कहा गया था। बिहार सरकार, सीबीआई तथा रिया च्रकवर्ती ने अपने-अपने जवाब आज कोर्ट में दाखिल कर दिए। अब कोर्ट कभी भी इस मामले में अपना फैसला सुना सकती है।

एक तरफ जहाँ रिया ने पटना में दायर एफआईआर को मुंबई ट्रांसफर करने की बात कही है। तो वहीं, दूसरी ओर सीबीआई ने कोर्ट से जाँच जारी रखने की अनुमति माँगी है। सीबीआई ने इस मामले में ईडी की जाँच को भी जारी रखने की अनुमति देने का आग्रह कोर्ट से किया है।

बिहार सरकार ने अपनी लिखित दलील में कहा है कि सुशांत के मामले में अब तक सिर्फ उनकी तरफ से ही एफआईआर दर्ज की गई है। इसके साथ ही उन्होंने ट्रांसफर याचिका निष्प्रभावी बताते हुए खारिज करने की अपील की है। अपनी दलील में बिहार सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस राजनीतिक दबाव में है। इसी की वजह से वे इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं कर रहे है।

बीते दिनों बिहार से मुंबई गई पुलिस के साथ किए गए बरताव का भी उल्लेख करते हुए दलील में कहा गया कि मुंबई पुलिस ने किसी भी प्रकार से बिहार पुलिस की मदद नहीं की। बिहार पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर अपने क्षेत्राधिकार में ये एफआईआर दर्ज की है क्योंकि ये शिकायत एक संज्ञेनीय अपराध की थी।

अब आगे कोर्ट को तय करना है कि मामले की जाँच CBI या मुंबई पुलिस में से कौन करेगा। बता दें कुछ समय पहले जहाँ रिया ने ट्वीट कर सीबीआई जाँच की माँग की थी वहीं अब वे इसका विरोध कर रहीं है। दूसरी ओर बिहार सरकार, सुशांत के पिता और लाखों फैन सीबीआई जाँच का समर्थन कर रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार लगातार इस मामले को घुमा फिर कर इसमें सीबीआई जाँच नहीं करवाना चाहती है।

इस बीच सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने इंस्टाग्राम पर अपना एक फोटो पोस्ट किया है, जिसमें वे हाथ में व्हाइट बोर्ड लिए नजर आईं। इस पर लिखा है- “मैं सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह राजपूत हूँ और मैं सीबीआई जाँच की माँग करती हूँ।”

श्वेता ने इस फोटो के साथ लिखा- “यह ऐसा समय है जब हमें सच्चाई का पता लगाकर न्याय पाना है। सच सामने लाने में हमारी और हमारे परिवार की मदद करें, वरना हम कभी शांति से जी नहीं सकेंगे। अपनी आवाज उठाएँ और सुशांत के लिए सीबीआई जाँच की माँग करें।”

सुशांत सिंह राजपूत केस

14 जून को सुशांत अपने मुंबई स्थित फ्लैट में मृत मिले थे। इस मामले में मुंबई पुलिस की जाँच से असंतुष्‍ट सुशांत के पिता ने पटना में एफआईआर दर्ज कराई। इसमें उन्‍होंने बेटे की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती व उनके परिवार पर धन उगाही, ब्‍लैकमेल, सुसाइड के लिए उकसाने आदि जैसे कई गंभीर आरोप लगाए। इस मामले की जाँच के लिए जब बिहार पुलिस मुंबई पहुँची तो वहाँ उसे असहयोग का सामना करना पड़ा।

फिर, बिहार सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने यह जाँच सीबीआइ को सौंप दी। वहीं अब सोशल मीडिया पर स्टन गन थ्योरी सामने आई है, जिसे एक यूजर ने सोशल मीडिया पर डाला। इस थ्योरी को मद्देनजर रखते हुए बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सुशांत सिंह राजपूत मृत्यु मामले की एनआईए जाँच की माँग की है। वहीं शेखर सुमन ने रिया के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए उसकी गिरफ्तारी की माँग की थी।

गौरतलब है कि सीबीआई तमाम मुद्दों पर रिया से पूछताछ कर रही हैं। वहीं रिया चक्रवर्ती का कॉल डिटेल रिकॉर्ड अब सीबीआई के रडार पर है। सीबीआई को रिया के कॉल लॉग से पता चलता है कि उन्होंने किसी शख्स का नाम ‘AU’ से सेव किया है।

नंबर और रिया चक्रवर्ती के बीच 44 आउटगोइंग कॉल थे। हालाँकि, जब कोई नंबर पर कॉल करता है, ‘SU’ नाम का शख्स रिसीव करता है। फिलहाल, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामले की जाँच कर रही है। ऐसे में यह देखना बाकी है कि यह व्यक्ति कौन है और क्या व्यक्ति किसी भी तरह से उक्त मामले में शामिल था।

‘कुछ फेक मीडिया वाले आकर यहाँ धर्म के नाम पर खेलना चाहते थे’: कारवाँ और द वायर की पोल खोलता सुभाष मोहल्ले का फखरुद्दीन

उत्तर पूर्वी दिल्ली के सुभाष मोहल्ला से एक फखरुद्दीन नामक व्यक्ति का वीडियो सामने आया है। वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है कि कुछ फेक मीडिया वालों ने वहाँ जाकर धर्म के नाम पर खेल करने का प्रयास किया। वह लोग तो बरसों से वहाँ प्रेम से रहते हैं।

याद दिला दें, ये फखरुद्दीन उसी सुभाष मोहल्ले के निवासी हैं जो राम मंदिर भूमिपूजन के बाद चर्चा में आया। इस मोहल्ले को लेकर वामपंथी मीडिया ने दावा किया था कि यहाँ संप्रदाय विशेष पर ज्यादतियाँ होती हैं। उन्हें दबाया जाता है। उन्हें खौफ में रखा जाता है।

कारण- एक शन्नो नाम की महिला की शिकायत थी। जिसके हवाले से द वायर ने अपनी रिपोर्ट में कई अनर्गल दावे कर दिए थे। हालाँकि, जब ऑपइंडिया ने अपनी पड़ताल की तो मालूम चला कि वहाँ वैसा कुछ नहीं हुआ जैसा रिपोर्ट में बताया गया। बल्कि रिपोर्ट के उलट पूछताछ में ये पता चला कि मोहल्ले के कुछ लोगों ने उस महिला के ख़िलाफ़ माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया है। जिसमें फकरुद्दीन भी एक शिकायतकर्ता है।

हमने इस पूरे मामले पर शन्नो की शिकायत, पुलिस के बयान, मोहल्ले वालों की शिकायत के साथ आपके समक्ष एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी।

इस घटना के अलावा द कारवाँ ने भी अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि उनके पत्रकार के साथ इस मोहल्ले में घेरकर बदसलूकी हुई।

अब इसी मोहल्ले की हकीकत और द वायर व कारवाँ जैसे मीडिया पोर्टलों की सच्चाई को उजागर करते फखरुद्दीन की वीडियो सामने आई है। फखरुद्दीन को इस वीडियो में कहते सुना जा सकता है कि वह सुभाष मोहल्ले में 16 बरसों से रह रहे हैं। वह बताते हैं कि यहाँ कुछ फेक मीडिया वाले आए। जो खुद को पत्रकार बता रहे थे।

फकरुद्दीन के अनुसार, “जब उनसे आईडी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने दिखाने से मना कर दिया। वह यहाँ का माहौल बिगाड़कर धर्म के नाम पर खेल करवाना चाह रहे थे। हम यहाँ बरसों से रह रहे हैं। यहाँ सभी प्यार से रहते हैं यहाँ ऐसा कुछ नहीं है। यहाँ सभी मिलजुल कर रहते हैं।”

पंचजन्य की रिपोर्ट में एक नियाज मोहम्मद नाम के व्यक्ति का जिक्र है। रिपोर्ट के अनुसार नियाज कहते हैं, “हम यहाँ 25 बरसों से रह रहे हैं। हिंदू और इस्लाम को मानने वाले दोनों मिलजुल कर रहते हैं। कभी किसी तरह की कोई लड़ाई यहाँ नहीं हुई। सभी बहुत शांति से रहते हैं। यहाँ कुछ मीडिया वाले आए थे और यहाँ का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। जब उन्हें रोका गया तो उन्होंने लोगों ने बहस की।”

गौरतलब है कि शन्नो का मामला सामने आने के बाद और द वायर की रिपोर्ट देखकर इस बारे में हमारी ओर से भजनपुरा थाने के एसएचओ की संपर्क किया गया था। SHO अशोक शर्मा ने कहा था कि इस इलाके में हिंदू और संप्रदाय विशेष दोनों लोग रहते हैं। उन्होंने पटाखे भी फोड़े। अब वे हमें उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कह रहे हैं। जब राष्ट्र में हर कोई जश्न मना रहा है, दीया जला रहा है और पटाखे फोड़ रहा है, तो फिर मुद्दा क्या है?

SHO शर्मा ने कहा कि यह एक समस्या तब होती, जब उनके घर के दरवाजे पर यह किया गया होता, दीया जलाना और केसरिया झंडे लगाना कोई अपराध नहीं है। अशोक शर्मा ने कहा है कि इस विषय में स्थानीय लोगों के साथ बात करने पर ही पता चल पाएगा कि यह मुद्दा क्या है और यदि कोई विवाद है तो क्या यह आपसी बातचीत से हल किया जा सकता है।

चीन के ग्लोबल टाइम्स ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर छापा पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा: गायब किया भारत का पक्ष, पढ़ें पूरा मामला

पिछले कुछ समय में चीन ने भारत के खिलाफ़ षड्यंत्र रचने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ा है। सबसे ताज़ा घटना में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। चीन के समाचार समूह ग्लोबल टाइम्स ने पाकिस्तान के राजदूत मोईन उल हक़ का एक साक्षात्कार प्रकाशित किया है। इस साक्षात्कार में पाकिस्तानी दूत ने जम्मू कश्मीर के हालात बताने का प्रयास किया है। लेकिन दूसरी तरफ ग्लोबल टाइम्स ने इस मुद्दे पर भारत का पक्ष प्रकाशित नहीं किया है।  

ग्लोबल टाइम्स का पाकिस्तानी प्रोपोगैंडा

ग्लोबल टाइम को दिए साक्षात्कार में पाकिस्तान राजदूत मोईन उल हक़ ने जम्मू कश्मीर के तमाम पहलुओं पर अपना पक्ष रखा है। मोईन ने कहा, “सिर्फ इस साल के अंदर लगभग 200 निर्दोष कश्मीरियों की हत्या हुई है। 50 से अधिक दुष्कर्म और शोषण के मामले सामने आए हैं। तकरीबन 1000 घरों को तबाह कर दिया गया है। लगभग 2200 आम नागरिकों को गिरफ्तार किया जा चुका है।  

जम्मू कश्मीर में स्थानीय नागरिकों और सेना के बीच होने वाले टकराव पर संयुक्त राष्ट्र ने जून में एक रिपोर्ट तैयार की थी। उस रिपोर्ट में लगभग 15 बच्चों की मृत्यु की जानकारी दी हुई थी जिनकी उम्र 1 साल से लेकर 17 साल तक थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यह जानें केंद्रीय सुरक्षा बल, भारतीय सेना (राष्ट्रीय राइफल) और जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा चलाए गए अभियान के दौरान हुई हैं।  

इसके अलावा 68 ऐसी घटनाएँ भी सामने आई हैं  जिसमें कम उम्र के बच्चों की गिरफ्तारी हुई है। साथ ही सुरक्षाबलों पर आरोप है कि वह घाटी के आम लोगों पर पैलेट गन का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा चीनी राजदूत ने कहा, “भारत के फैसलों की वजह से जम्मू कश्मीर की शांति व्यवस्था और सुरक्षा का बुरी तरह नुक्सान हुआ है।” 

अंत में मोईन ने कहा पाकिस्तान यह चाहता है कि इस मुद्दे के संबंध में वैश्विक स्तर पर दखलंदाज़ी हो। जिससे जम्मू कश्मीर में परेशानियों का सामना कर रहे आम लोगों की ज़िंदगी बेहतर हो पाए। हम इसकी उम्मीद करते हैं कि दुनिया के देश इस मुद्दे पर एक साथ आए आएँ जिससे भारत के ग़ैरक़ानूनी फ़ैसलों पर लगाम लगे।       

लेकिन यह जम्मू कश्मीर मुद्दे का केवल एक पक्ष था जो चीन के समाचार समूह ग्लोबल टाइम्स ने प्रकाशित किया। ग्लोबल टाइम्स ने इस मुद्दे के हिस्से का ज़िक्र नहीं किया वह था भारत का पक्ष। जम्मू कश्मीर के हालातों पर भारत ने भी जानकारी दी थी लेकिन चीन के ग्लोबल टाइम्स ने उसे प्रकाशित नहीं किया है। भारत ने जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाए जाने के बाद वहाँ के हालातों का विस्तृत वर्णन किया है।  

भारत ने अपने पक्ष की शुरुआत में लिखा है कि केंद्र शासित राज्य जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं। उससे पाकिस्तान जैसे किसी भी देश का कोई लेना देना ही नहीं है। मोईन उल हक़ ने जम्मू कश्मीर के बारे में बहुत सी बातें बताई। लेकिन इतने दिनों में वहाँ जितना कुछ अच्छा हुआ उसके बारे में कुछ नहीं कहा। उन्हें मालूम होना चाहिए कि 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वहाँ के स्थानीय लोगों के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकार सुनिश्चित हुए हैं।  

साथ ही वंचित वर्ग से आने वाले बच्चे और महिलाओं के अधिकारों पर भी खूब काम हुआ है। 24 अक्टूबर 2019 को वहाँ के खंड विकास चुनाव हुए थे। जिसमें लोगों को अपना प्रतिनिधि चुनने की पूरी आज़ादी थी। इसके अलावा जम्मू कश्मीर में शिक्षा और रोज़गार के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं। पिछले एक साल में वहाँ लगभग 50 से अधिक शिक्षण संस्थान शुरू किए गए हैं। लगभग 5 लाख छात्रों को छात्रवृत्ति मिली है और 10 हज़ार नई नौकरियों की शुरुआत होगी। इसके अलावा लगभग 3 लाख घरों में बिजली बाँटी गई।   

अंत में भारत ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि भारत की कोशिश हमेशा से यही रही है कि घाटी में शांति व्यवस्था बनी रहे। लेकिन सीमा पार से होने वाली आतंकवाद की घटनाएँ वहाँ के हालात बिगाड़ने की हर संभव कोशिश करती हैं। पाकिस्तानी सीमा की तरफ से साल 2020 के जुलाई महीने तक सीज़फ़ायर की 3 हज़ार घटनाएँ हुई हैं। इतना ही नहीं 450 आतंकवादी गतिविधियों की ख़बरें भी सामने आई हैं। इसके बाद अगर पाकिस्तान के दूत का दावा कुछ और कहता हो तो यह खुद में हैरानी की बात है।   

रिलायंस खरीद सकता है चाइनीज ऐप TikTok: भारत में 3 बिलियन डॉलर से ज़्यादा लगाई गई है ऐप की वैल्यू

भारत से बैन किए जाने के बाद TikTok यहाँ फिर से एंट्री करने की तैयारी में दिख रहा है। टेक क्रंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड टिक टॉक में निवेश करने को लेकर बातचीत कर रही है। बता दें 29 जून से टिकटॉक ऐप भारत में बैन है और इसके साथ ही चीन के 58 और ऐप्स बैन किए गए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक़ जुलाई के अंत से रिलायंस और टिकटॉक की पेरेंट कंपनी बाइटडांस डील को लेकर दोनों कंपनियाँ आपस में बातचीत कर रही हैं, हालाँकि, दोनों कंपनियाँ अभी किसी भी सौदे पर नहीं पहुँची हैं।

भारत टिकटॉक के लिए चीन के बाद सबसे बड़ा मार्केट है और शायद यही वजह की कंपनी किसी भी तरह से यहाँ बिज़नेस करना चाहेगी। चाहे डायरेक्ट या इनडायरेक्टली। टेक क्रंच ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा है कि भारत में टिकटॉक की वैल्यू 3 बिलियन डॉलर से ज़्यादा की लगाई जा रही है। लेकिन रिलायंस और बाइटडांस ने इसे लेकर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया या स्टेटमेंट नहीं जारी किया है।

बता दें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भी शॉर्ट वीडियो प्लेटफार्म टिकटॉक को 15 सितंबर तक की डेडलाइन दी है। 15 सितंबर के बाद टिक टॉक को अमेरिका में बैन किया जा सकता है। टिकटॉक का अमेरिकी कारोबार बेचने के लिए भी माइक्रोसॉफ्ट और ट्विटर के अलावा कई कंपनियों के साथ बात चल रही है।

इस ऐप को बैन करने से चीन को बहुत बड़ा झटका लगा था। इस शॉर्ट वीडियो मेकिंग और शेयरिंग ऐप के भारत में करीब 12 करोड़ यूजर्स थे। यूजर्स के लिहाज से भारत टिकटॉक के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाजार रहा है। अगर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने टिकटॉक में निवेश कर लिया। तो इससे दोनों कंपनी को काफी फायदा होगा। एक तरफ भारत में फिर से टिक टॉक शुरू हो जाएगा। तो वहीं रिलायंस का दबदबा इस ऐप पर भी हो जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले दिनों गलवान घाटी में 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद भारत में 59 चीनी ऐप्लीकेशन को बैन कर दिया गया था। भारत ने अपने फैसले के पीछे संप्रभुता, सुरक्षा और निजता का हवाला देते हुए बैन की बात कही थी। बता दें कि TikTok पर चीन की सरकार के साथ यूजर के डेटा शेयर करने का आरोप कई देश लगाते रहे हैं।

टिकटॉक के अलावा यूसी ब्राउजर, कैम स्कैनर, शेयर इट, हैलो, लाइक सहित कई ऐप्स को भी बैन कर दिया गया है।बायडू मैप, केवाई, डीयू बैटरी स्कैनर भी बैन हो गया है। सरकार ने इन चीनी एप्स पर आईटी एक्ट 2000 के तहत बैन लगाया है।

चीन से अपनी गन्दी होती नदियों को बचाने के लिए POK में लोगों ने निकाली मशाल रैली: हुआ भारी विरोध प्रदर्शन

कोरोना वायरस के समय में एक ओर जहाँ चीन और पाकिस्तान की दोस्ती और गहरी हुई है। वहीं, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थानीय लोगों के बीच चीन के ख़िलाफ़ रोष बढ़ता ही जा रहा है।

खबरों की मानें तो नीलम-झेलम नदी पर बाँध निर्माण के विरोध में पीओके के मुजफ्फराबाद शहर में लोगों ने बुधवार (अगस्त 12, 2020) को विशाल मशाल रैली निकाल कर अपना विरोध दर्ज कराया है। ये विरोध मुख्यत: चीनी कंपनियों के खिलाफ़ था जो वहाँ बाँध निर्माण करवाने का काम कर रहे हैं।

बता दें कि पीओके की जनता की ओर से निकाली गई इस रैली में शामिल प्रदर्शनकारियों ने नदियों को बचाने के लिए नारेबाजी भी की। एएनआई न्‍यूज एजेंसी के मुताबिक वहाँ, ”दरिया बचाओ, मुजफ्फराबाद बचाओ,’ ‘नीलम-झेलम बने, हम जिंदा फिर से करें’ ‘नीलम और झेलम नदियों को बहने दो, हमें जीने दो” जैसे नारे लगाए।

पीओके के कार्यकर्ता डॉ अमजद मिर्जा ने नदी पर चीनी कंपनियों द्वारा बाँध निर्माण को पानी के प्राकृतिक संसाधनों के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने कहा, “नीलम-झेलम नदी अब नाले जैसी बनती जा रही है। यह गंदगी से भरी हुई है। स्थानीय लोगों के पास पीने का पानी नहीं है।” 

उन्होंने कहा कि पानी को लेकर हमारे प्राकृतिक संसाधन CPEC (चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) की चपेट में आकर बर्बाद होते जा रहे हैं।

यहाँ बता दें कि हाल ही में, पाकिस्तान और चीन ने पीओके में आजाद पट्टन और कोहाला जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के अनुसार 1.54 बिलियन अमेरिकी डालर की इस परियोजना को चीन के जियोझाबा ग्रुप कंपनी (CGGC) द्वारा प्रायोजित किया जाएगा।

कोहाला हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट जो झेलम नदी पर बनाया जाएगा, पीओके के सुधनोटी जिले में आज़ाद पट्टन ब्रिज से लगभग 7 किमी ऊपर और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 90 किमी दूर है।साल 2026 तक पूरा होने की उम्मीद वाला यह प्रोजेक्ट चाइना थ्री गोरजेस कॉर्पोरेशन, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IFC) और सिल्क बैंक फंड द्वारा प्रायोजित किया जाएगा।