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सुप्रीम कोर्ट को प्रशांत भूषण की माफी कबूल नहीं, 11 साल पहले कहा था- पिछले 16 चीफ जस्टिस में आधे करप्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (अगस्त 10, 2020) को वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 का आपराधिक अवमानना मामला खारिज करने से इनकार कर दिया। 11 साल पुराने इस केस में कोर्ट ने प्रशांत भूषण की स्पष्टीकरण और खेद मँजूर करने से इनकार कर दिया है।

बता दें कि यह केस प्रशांत भूषण की ओर से तहलका पत्रिका को दिए गए इंटरव्यू को लेकर है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत के पिछले 16 मुख्य न्यायाधीशों में से आधे भ्रष्ट थे। तरुण तेजपाल उस समय तहलका पत्रिका के संपादक थे। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय पीठ प्रशांत भूषण की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अदालत से 2009 के अपने बयान के लिए “खेद” स्वीकार करने का अनुरोध किया। उन्होंने अदालत में एक लिखित बयान दिया जिसमें कहा गया कि उनके कहने का मतलब भ्रष्टाचार नहीं था, बल्कि सही तरीके से कर्तव्य न निभाने की बात थी। अदालत ने याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि अवमानना के मामले में आगे सुनवाई की जरूरत है। 

इस मामले की पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि फ्री स्पीच और कंटेम्प्ट के बीच बहुत बारीक लाइन है। अब मुद्दा ये है कि सिस्टम के सम्मान को बचाते हुए यह मामला कैसे निपटाया जाए?

कोर्ट ने प्रशांत भूषण के वकील राजीव धवन से कहा कि आप ही रास्ता बताइए। क्या आप इस तरह की अनाप-शनाप बातों को रोकने का तरीका बता सकते हैं? जवाब में धवन ने कहा कि प्रशांत भूषण पहले ही सफाई दे चुके हैं।

भूषण ने इस संबंध में शीर्ष अदालत में अपना स्पष्टीकरण पेश किया है, जबकि तहलका के संपादक तरुण तेजपाल ने माफी माँगी है। अदालत ने कहा कि वह इस मामले में विचार करेगा कि न्यायाधीशों के बारे में भ्रष्टाचार की टिप्पणी असल में अवमानना है या नहीं।

चार अगस्त को, शीर्ष अदालत ने भूषण और तेजपाल को स्पष्ट किया था कि वह मामले में अगर उनका स्पष्टीकरण या माफी स्वीकार नहीं करती है तो वह सुनवाई करेगी। वहीं, इससे पहले सुनवाई में भूषण ने 2009 में दिए अपने बयान पर खेद जताया था, लेकिन बिना शर्त माफी नहीं माँगी थी। 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (जुलाई 21, 2020) को स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रशांत भूषण के खिलाफ अदालत की अवमानना का केस दर्ज किया था। अपने ट्वीट में प्रशांत भूषण ने कहा था, “जब भविष्य में इतिहासकार वापस मुड़कर देखेंगे कि किस तरह से पिछले 6 वर्षों में औपचारिक आपातकाल के बिना ही भारत में लोकतंत्र को नष्ट किया गया है, तो वे विशेष रूप से इस विनाश में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को चिह्नित करेंगे, और पिछले 4 CJI की भूमिका को और भी अधिक विशेष रूप से।”

22 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशांत भूषण को नोटिस जारी कर पूछा था कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए।

‘इसी महीने बीजेपी में शामिल हो सकते हैं शरद पवार के 12 MLA’: महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने बताया अफवाह

महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) के 12 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। वे इस महीने के अंत तक पार्टी का दामन थाम सकते हैं। यह दावा रिपब्लिक टीवी ने किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक इन विधायकों में से अधिकतर पश्चिमी महाराष्ट्र से हैं और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के संपर्क में हैं।

रिपब्लिक टीवी को सूत्रों ने बताया कि एनसीपी के ये विधायक, महाविकास आघाड़ी सरकार के कामकाज के तरीके से खुश नहीं हैं। उन्हें अभी भी उन बातों को लेकर सुनाया जाता है, जब उन्होंने 2019 में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और पार्टी के वरिष्ठ नेता अजित पवार का समर्थन कर भाजपा साथ मिलकर अल्पकालिक सरकार बनाई थी।

बता दें कि पिछले महीने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विपक्ष को सरकार गिराने की चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि जिस किसी को उनकी सरकार गिरानी हो वो आज ही ऐसा कर सकते है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि उनकी सरकार तीन पहियों की रिक्शा है और ये वो गरीबों का है जिसकी स्टेयरिंग उनके हाथों मे है।

उन्होंने कहा था कि उनके गठबंधन के साथी, एनसीपी और कॉन्ग्रेस “सकारात्मक” हैं और महाविकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार उनके अनुभव से लाभान्वित हो रही है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ये बातें शिवसेना के मुखपत्र सामना को दिए एक इंटरव्यू में कही थी।

हालाँकि राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के 12 विधायकों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की खबरों को पार्टी के प्रवक्ता और उद्धव सरकार में मंत्री नवाब मालिक ने अफवाह और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के कई विधायक उनकी पार्टी के टच में हैं और वे भाजपा छोड़ एनसीपी में आना चाहते हैं।

एनसीपी नेता ने ट्वीट करते हुए कहा, “कुछ लोग 12 एनसीपी विधायकों के बीजेपी में जाने की अफवाह फैला रहे हैं। यह बेबुनियाद और मनगढ़ंत खबर है। चुनाव से पहले बीजेपी में गए विधायक एनसीपी में लौटने के लिए आतुर हैं, लेकिन इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। जल्द फैसला कर जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।”

बता दें कि अक्टूबर, 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी-शिवसेना के गठबंधन ने चुनाव में स्‍पष्‍ट बहुमत हासिल किया था। लेकिन इसके बावजूद इस गठबंधन की सरकार नहीं बन सकी थी। मुख्‍यमंत्री किस पार्टी का हो, इसे लेकर बीजेपी और शिवसेना में गंभीर मतभेद उभर आए थे, इसके फलस्‍वरूप शिवसेना ने बीजेपी का साथ छोड़ दिया था।

इसके बाद एनसीपी नेता अजित पवार ने अपने चाचा और पार्टी प्रमुख शरद पवार के खिलाफ बगावती तेवर दिखाते हुए भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देकर गुपचुप तरीके से सरकार बना ली थी। बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस सीएम और अजित पवार डिप्टी सीएम बने थे। हालाँकि, यह सरकार सिर्फ 80 घंटे चली और दोनों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा था।

बुर्के वाली औरतों की टीम तैयार की गई थी, DU के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने दंगों का दिया था मैसेज: गुलफिशा ने उगले राज

दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार गुलफिशा उर्फ गुल से पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल का कहना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के प्रोफेसर अपूर्वानंद भी हिंसा की साजिश में शामिल थे। हिंसा भड़काने के लिए बुर्के वाली महिलाओं की टीम तैयार की गई थी।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक डीयू के प्रोफेसर अपूर्वानंद भी दिल्ली हिंसा की साजिश का हिस्सा थे। जी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली दंगों में UAPA एक्ट में गिरफ्तार आरोपित जाफराबाद की गुलफिशा उर्फ गुल ने पुलिस को दिए बयान में यह खुलासा किया है।

पुलिस का कहना है कि गुलफिशा ने उन्हें बताया है, “प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा था कि हिंसा की साजिश के लिए तैयार रहो।” हिंसा के बाद प्रोफेसर अपूर्वानंद ने गुलफिशा की तारीफ की थी।

गुलफिशा ने बताया, “हिंसा के बाद अपूर्वानंद ने मुझसे कहा था कि तुमने अच्छा काम किया है। लेकिन पकड़े जाने पर मेरा और पिंजड़ा तोड़ की सदस्यों का नाम मत लेना। प्रोफेसर ने हमे दंगों के लिए मैसेज दिया था। पत्थर, खाली बोतलें, एसिड, छुरियाँ इकठ्ठा करने के लिए कहा गया था। सभी महिलाओं को लाल मिर्च पाउडर रखने के लिए बोला था।”

गुल ने बताया कि प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा कि जामिया कॉर्डिनेशन कमिटी (JCC) दिल्ली में 20-25 जगह पर आंदोलन शुरू कर करवा रही है। इन आंदोलन का मकसद भारत सरकार की छवि को ऐसे पेश करना है जैसे ये खास मजहब के खिलाफ है। ये तभी होगा जब हम प्रदर्शन की आड़ में दंगे करवाएँगे।

गुल ने आगे बताया, “हम खुफिया जगह पर मीटिंग करते थे जिसमें प्रोफेसर अपूर्वानंद, उमर खालिद और अन्य मेंबर शामिल होते थे। उमर खालिद ने कहा था कि उसके PFI और JCC से अच्छे रिश्ते हैं। पैसों की कमी नहीं है। हम इनकी मदद से मोदी सरकार को उखाड़ फेंकेगे। उमर खालिद, प्रोफेसर अपूर्वानंद को अब्बा समान मानता है।”  

जानकारी के मुताबिक गुलफिशा ने हिंसा के लिए 2 व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए थे, जिनका नाम- औरतों का इंकलाब और वॉरियर था। गुलफिशा ने बताया कि साजिश के तहत वो खुद बुर्के वाली महिलाओं और बच्चों को गली-गली जाकर CAA और NRC के खिलाफ इस कदर भड़काती थी कि महिलाएँ प्रोटेस्ट में आने के लिए राजी हो जाती थीं। महिलाओं और बच्चों को प्रदर्शन में जोड़ने की वजह ये होती थी कि पुलिस महिलाओं और बच्चों को जबरन नहीं उठाएगी, जैसे शाहीन बाग में हो रहा था।

गुलफिशा के मुताबिक, उसकी दोस्ती डीयू के पिंजड़ा तोड़ ग्रुप की सदस्य देवांगना और परोमा राय से भी हुई थी। इनके जरिए गुल की मुलाकात अपूर्वानंद से हुई थी। गुलफिशा ने आगे बताया, “फ्रूट मंडी सीलमपुर में प्रदर्शन शुरू होने के बाद JCC के सदस्य हमें हर तरह से मदद करते थे और सफूरा और मिरान हैदर हमारे और दूसरे प्रदर्शन को को-ऑर्डिनेट करते थे। उमर खालिद भी हमें पैसों से मदद करते थे और भीड़ को भड़काऊ भाषण देते थे जिससे लोग धरने में जुड़े रहते थे।”

गुलफिशा ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि 22 फरवरी को चक्का जाम करने की साजिश के तहत महिलाओं को इकट्ठा कर कैंडल मार्च के बहाने हम निकले और जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे बैठ गए और रोड ब्लॉक कर दिया गया। जिसके बाद 24, 25, 26 फरवरी को जबरदस्त हिंसा हुई थी।

गुलफिशा ने अपने बयान में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे का भी जिक्र किया है। गुलफिशा ने कहा, “ट्रंप दौरे को ध्यान में रखते हुए। चाँद बाग रोड का भी ‘चक्का जाम’ व्हाट्सऐप पर पोस्ट किया गया। इसको भी प्रोफेसर अपूर्वानंद मॉनिटर कर रहे थे। इसका मकसद था कि चक्का जाम करने से हिन्दू फँस जाएँगे। वहाँ लोग गुस्से में आ जाएँगे। फिर पथराव करा देंगे। फिर भारत की हर जगह छवि खराब हो जाएगी।”

बता दें कि 4 अगस्त 2020 को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने डीयू के प्रोफेसर अपूर्वानंद को पूछताछ के लिए बुलाया था। करीब 5 घंटे तक पूछताछ की गई थी। पुलिस ने प्रोफेसर का मोबाइल भी जाँच के लिए जब्त कर लिया था।

पूछताछ के बाद प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा था ”मैं जाँच में सहयोग कर रहा हूँ। विरोध-प्रदर्शन करना सभी का मौलिक अधिकार है। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों का समर्थन करने वालों को दंगे स्रोत बताना चिंताजनक है।”

रायबरेली की MLA अदिति सिंह ने CM योगी को बताया राजनीतिक गुरु, कभी गाँधी परिवार की थीं खास

कॉन्ग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना राजनीतिक गुरु बताया है। अदिति हाल में पार्टी विरोधी स्टैंड को लेकर चर्चा में रही हैं।

एक जमीन से कब्जा छुड़वाने पहुँचीं अदिति सिंह ने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की और उनके आगे ही योगी जिंदाबाद के नारे भी जमकर लगाए गए।

सोमवार (अगस्त 10, 2020) को अदिति सिंह रायबरेली के सिविल लाइन चौराहे पर पहुँची थीं। वह कमला नेहरू ट्रस्ट की जमीन पर काबिज पटरी दुकानदारों को हटाए जाने का विरोध कर रही थीं। पुलिस का कहना था कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद जमीन खाली कराई जा रही है, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं थीं। वह खुलकर दुकानदारों के पक्ष में उतर आईं।

विधायक अदिति सिंह ने सबके सामने सीएम योगी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “मैं खुले मुँह से कहना चाहती हूँ कि गरीबों की जो दुकानें बची हैं वह मेरे राजनीतिक गुरु और हमारे माननीय मुख्यमंत्री महाराज योगी आदित्यनाथ की वजह से है। उनकी वजह से हम यह लड़ाई लड़ रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि गरीबों को योगी सरकार में प्रताड़ित नहीं किया जाएगा। चाहे कुछ सोसायटी या भूमाफिया लोग कितनी भी कोशिश कर लें। आप कितने लोगों को पैसे खिलाएँगे? योगी सरकार गरीबों के साथ है। अदिति सिंह के बयान पर जमकर योगी आदित्नयाथ जिंदाबाद के नारे लगे।

अदिति सिंह ने कहा कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होंने मामले की जाँच कराने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण को जब मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया तब उन्होंने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन देते हुए भरोसा दिया है कि अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

इस दौरान उन्होंने कमला नेहरू ट्रस्ट पर निशाना साधते हुए कहा कि जब जमीन पर कई दशक से ये दुकानदार काबिज है तो ट्रस्ट के पक्ष में ये जमीन कैसे फ्री होल्ड हो गई।

गाँधी परिवार की करीबी रहीं अदिति सिंह को बीते दिनों पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया गया था। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली की सदर सीट से विधायक अदिति सिंह की सदस्यता समाप्त करने को लेकर कॉन्ग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष के पास याचिका दायर की थी। जिसे उन्होंने खारिज कर दिया।

गौरतलब है कि विधायक अदिति सिंह ने उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के बसों के लिए हो रही राजनीति पर सवाल उठाया था। अपनी ही पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए पूछा था कि कोरोना आपदा के समय इतनी ‘ओछी राजनीति’ करने की क्या आवश्यकता थी? 

अदिति सिंह ने ट्वीट कर लिखा था, “आपदा के वक्त ऐसी निम्न सियासत की क्या जरूरत, एक हजार बसों की सूची भेजी, उसमें भी आधी से ज्यादा बसों का फर्जीवाड़ा। 297 कबाड़ बसें, 98 ऑटो रिक्शा व एबुंलेंस जैसी गाड़ियाँ, 68 वाहन बिना कागजात के, ये कैसा क्रूर मजाक है। अगर बसें थीं तो राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र में क्यूँ नहीं लगाई।”

पिछले दिनों ये खबरें भी आईं थीं कि अदिति सिंह को कॉन्ग्रेस ने महिला विंग के महासचिव पद से हटा दिया है। राष्ट्रपति महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती के मौके पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र का कॉन्ग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने बहिष्कार किया था। मगर कॉन्ग्रेस के बहिष्कार के बावजूद अदिति सिंह ने सदन में पहुँच कर सभी को चौंका दिया था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने का भी समर्थन किया था।

स्टार किड्स की फिल्में नहीं देखो, किसी ने जबर्दस्ती किया है: नेपोटिज्म पर बहस को करीना कपूर ने बताया अजीब

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से बॉलीवुड में नेपोटिज्म का मुद्दा चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में इस मसले पर करीना कपूर ने भी अपनी राय रखी थी। इसकी वजह से वह आलोचना का शिकार हो रही हैं।

करीना ने बरखा दत्त के साथ बातचीत में नेपोटिज्म पर चर्चा को अजीब बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उन्हें किसी भी प्रकार का विशेष फायदा स्टार किड होने के नाते मिला।

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर करीना कपूर ट्रेंड करने लगीं और लोग उन्हें अपने-अपने तरह से बताने लगे कि कैसे एक स्टार किड होने के नाते ही वह अब तक बॉलीवुड में बनी हुई हैं।

बरखा के यूट्यूब चैनल मोजो स्टोरी पर अपलोड इस इंटरव्यू में करीना कपूर ‘बरादरी प्रोजेक्ट’ पर बात करते हुए उन कारीगरों पर चर्चा कर रही थीं जिनके काम को फैशन क्षेत्र के केंद्र में लाने के लिए नम्रता जकारिया नामक पत्रकार ने इस प्रोजेक्ट को शुरू किया है।

वीडियो लगभग 27 मिनट का है। मगर इस वीडियो 18 मिनट के स्लॉट के आसपास बरखा दत्त करीना कपूर के सामने नेपोटिज्म पर सवाल करती हैं। इसके बाद करीना कहती हैं कि दरअसल लोग स्थिति को समझना नहीं चाहते हैं। वह बस हमलावर रहते हैं। चाहे कोई किसी भी बैकग्राउंड से आता है। उनकी मानें तो यह उनका संघर्ष है जो आज वो बॉलीवुड के नामी सितारों में गिनी जाती हैं। वरना कौन इस इंडस्ट्री में 2 दशक बिता पाता है।

वह कहती हैं, “21 साल तक काम में बने रहना मुझे नहीं लगता नेपोटिज्म से मुमकिन हो पाता है। ये मुमकिन नहीं है। मैं लंबी लिस्ट बता सकती हूँ ऐसे लोगों की जिनके लिए यह आसान नहीं था।”

नेपोटिज्म को उचित ठहराते हुए वह डॉक्टर के बच्चे का उदहारण देती हैं और कहती हैं कि एक डॉक्टर का लड़का भी चाहता है कि वह डॉक्टर बने। इसके बाद बरखा दत्त भी भाई-भतीजावाद को उचित ठहराने के लिए कहती हैं कि वह एक पत्रकार की बेटी हैं और वह भी कई लोगो को जानती हैं जिनके बच्चे भी उसकी प्रोफेशन में हैं। लेकिन उन पर ऐसे हमले नहीं होते।

करीना अपनी बात को बढ़ाते हुए कहती हैं कि उन्हें लगता है स्टार किड्स लोगों के लिए बहुत आसान टारगेट होते हैं। वे इन सबके समाधान के रूप में कहती हैं कि हमें बस काम करते रहना चाहिए। उनका मानना है कि उन्हें नहीं लगता कि उन्हें कुछ भी उनके बैकग्राउंड के कारण मिला। उनकी पहचान बनाने में उनका संघर्ष था। हाँ ये बात और है कि उनका स्ट्रगल उतना दिलचस्प नहीं था जितना कि किसी बाहरी का होता है, जो ट्रेन से जेब में 10 रुपए लेकर आता है। वह कहती हैं कि किसी का संघर्ष दिलचस्प हो सकता है लेकिन उनके पास भी उनकी कहानी है। उनका मानना है कि किसी पर ऊँगली उठाना काफी खराब बात है।

सबसे हैरानी की बात इस पूरी बातचीत में ये होती है कि जब करीना आगे इस बारे में बात करती हैं तो वह नेपोटिज्म के लिए जिम्मेदार दर्शकों को ठहरा देती हैं। वह कहती हैं,”दर्शकों ने ही हमें बनाया है। किसी और ने नहीं बनाया। यही लोग ऊँगली उठा रहे हैं। जिन्होंने स्टार्स के बच्चों को स्टार बनाया। आप जा रहे हो न फिल्म देखने? मत जाओ। किसी ने आपको जबरदस्ती किया है। मैं नहीं समझ पाती। मुझे तो यह चर्चा ही अजीब लगती है।”

वह अक्षय कुमार, शाहरूख खान, आयुष्मान खुराना और राजकुमार राव का उदहारण देकर कहती हैं कि यह सब बाहरी हैं। लेकिन आज सफल इसलिए हैं क्योंकि इन्होंने मेहनत की। ऐसे ही आलिया हो या करीना कपूर, सबने मेहनत की। लोग फिल्म देखते हैं और इंजॉय करते हैं। इसलिए ये दर्शक ही होते हैं जो कलाकार को बनाते हैं और बिगाड़ते हैं।

गौरतलब है कि इस मुद्दे पर चर्चा करने के बाद एक हफ्ते के भीतर करीना कपूर सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं। लोग कह रहे हैं कि उनकी आने वाली मूवी कोई मत देखो, क्योंकि वह खुद कह रही हैं कि दर्शक उनकी फिल्म न देखने जाएँ।

लोग उनकी पुरानी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं जिसमें उन्होंने कठुआ को लेकर अपने हिंदू होने पर शर्म व्यक्त की थी। इसके अलावा कुछ लोग उनके फिल्मों की कमाई को शेयर कर कह रहे हैं कि करीना को ऐसे दावे करने से पहले कि दर्शक ही उन लोगों को बनाते-बिगाड़ते हैं, एक बार अपनी पिक्चरों की कमाई देखने की जरूरत है। अगर वाकई उन्हें दर्शकों ने बनाया होता तो कभी फिल्में फ्लॉप नहीं होतीं।

किसी ने उन्हें नेपो क्वीन कहा तो किसी ने उनकी मूवी न देखने की अपील की। एक यूजर ने उन्हें एक्टिंग में जीरो बताते हुए यह पूछा कि आखिर लोग इन्हें ट्रेंड ही क्यों करवा रहे हैं। इन्होंने ही एक इंटरव्यू में कहा था कि सारा अली खान को अपनी पहली फिल्म के एक्टर को डेट नहीं करना चाहिए।

संप्रदाय विशेष के लिए हो अलग निर्वाचन समूह, संसद में मिले आरक्षण: आकार पटेल की संविधान विरोधी माँग, जिन्ना का समर्थन

मानवतावादी संस्था के रूप में खुद को प्रचारित करने वाले ‘एमनेस्टी इंडिया’ के प्रमुख रह चुके आकार पटेल ने संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की माँग की है। उन्होंने पाकिस्तान के स्थापना का भी बचाव किया और मुहम्मद अली जिन्ना के सिद्धांतों को आगे बढ़ाया। उन्होंने ट्विटर पर कहा कि संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए अब संसद से लेकर अन्य प्रतिनिधित्व समूहों में अपने लिए अलग जगह माँगने का वक्त आ गया है।

आकार पटेल ने विभाजन के असली कारणों को छिपाते हुए दावा किया कि कॉन्ग्रेस ने संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए अनुपात के आधार पर प्रतिनिधित्व देने से इनकार कर दिया था, इसलिए पाकिस्तान का गठन हुआ। उन्होंने कहा कि अब स्वतंत्र भारत ने जिन्ना के डर को सही साबित कर दिया है। साथ ही आकार पटेल संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए अलग इस्लामिक स्टेट की माँग करते हुए इसके लिए हिंदुओं को जिम्मेदार ठहराने से भी नहीं चूके।

उन्होंने आनुपातिक प्रतिनिधित्व की बात करते हुए कहा की हर एक जनप्रतिनिधियों के समूह में संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए एक निश्चित संख्या में सीटें आरक्षित होनी चाहिए। कुछ लोगों ने इसका अर्थ ये भी निकाला की सेना से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक में संप्रदाय विशेष के लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये सबसे काम है जो हम संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू राष्ट्र इस माँग को नहीं ठुकरा सकता, क्योंकि ये वैध है।

हिंदुओं के कत्लेआम के लिए ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ की बात करने वाले मुहम्मद अली जिन्ना का बचाव करते हुए आकर पटेल ने कहा कि वो दक्षिणी मुंबई में रहने वाले गुजराती थे, जो आम भारतीयों से कहीं ज्यादा शहरी थे। नरेंद्र मोदी को संविधान के खिलाफ काम करने वाला प्रधानमंत्री कहने वाले आकार पटेल इस दौरान ये भी भूल गए कि वो जो कह रहे हैं, उसे संविधान सभा पहले ही ठुकरा चुका है।

मुहम्मद इस्माइल ने कहा था कि संप्रदाय विशेष के लोगों को जब तक अलग निर्वाचन क्षेत्र नहीं मिलता और उन्हें इस तरह का प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तब तक उनके साथ न तो न्याय हो सकता है और न ही वो जगह मिल सकती है, जिसके लिए वो इच्छुक हैं। आरके सिधवा ने तब कहा था अगर वो अब भी ऐसा सोचते हैं तो फिर वो आज भी न सिर्फ टू नेशन थ्योरी में विश्वास रख रहे हैं, बल्कि सांप्रदायिकता को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

उन्होंने ये भी बताया था कि ये सिस्टम भारत में क्यों काम नहीं करेगा। उन्होंने कहा था कि छोटे देशों में ये चल सकता है, लेकिन यहाँ नहीं। ये एक ऐसा सिस्टम है जिसे बुद्धिजीवी वर्ग ही समझ सकता है। उन्होंने गिनाया था कि बेल्जियम और स्विट्जरलैंड में कुछ लाख ही जनसंख्या है, जबकि भारत में 40 करोड़ है और यहाँ के संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों में ही लाख तक जनसंख्या होती है।

यहाँ तक कि जवाहरलाल नेहरू भी इस तरह के आरक्षण के खिलाफ थे और उन्होंने कहा था कि एक लोकतंत्र में इस तरह की व्यवस्था इसके विरुद्ध ही हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जब एक राजनीतिक लोकतंत्र में ऐसा किया जा रहा है तो इसका अर्थ है कि आप उस अल्पसंख्यक समुदाय को अलग-थलग कर रहे हो। उन्होंने कहा था कि इसका अर्थ यह हुआ कि उनमें हमारा विश्वास नहीं है।

आकार पटेल इससे कोरोना पीड़ित अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गजों के लिए नफ़रत फैला चुके हैं। पटेल के मुताबिक़ यह 3 हस्तियाँ साबित करती हैं कि ‘पैसे से क्लास नहीं आता।’ अपनी विकृत मानसिकता का प्रदर्शन करते हुए आकार ने तीनों को ‘मिडिल क्लास ऑपोरच्युनिस्ट’ (मध्यमवर्गीय अवसरवादी) भी कहा था। कहा था कि यह छोटे ही रहने वाले हैं, इनकी मानसिकता कुएँ के मेढक जैसी ही है।’

IAS से नेता बने शाह फैसल का पॉलिटिक्स डेढ़ साल में ही बंद, शेहला रशीद ने भी छोड़ दिया था साथ

आईएएस अधिकारी से नेता बने शाह फैसल ने पॉलिटिक्स से तौबा कर ली है। जम्मू-कश्मीर में उनकी सियासी दुकान करीब डेढ़ साल ही चली। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वे दोबारा नौकरशाही का हिस्सा बन सकते हैं।

शाह फैसल प्रतिष्ठित परीक्षा पास करने वाले पहले कश्मीरी थे। 2019 की शुरुआत में उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद मार्च 2019 में जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) का गठन किया। जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद भी उनके साथ थीं।

बीते साल अक्टूबर में शेहला ने भी राजनीति से किनारा करते हुए पार्टी छोड़ दी थी। अब फैसल ने भी JKPM के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।

JKPM के वरिष्ठ नेता फ़िरोज़ पीरज़ादा ने उनके इस्तीफे की पुष्टि की है। साथ ही बताया है कि अब पार्टी की सारी जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी गई है।

ख़बरों की मानें तो इस बात के आसार हैं कि शाह फैसल फिर से प्रशासन में शामिल हो सकते हैं। हालॉंकि शुरुआत से ही फैसल का रवैया सरकार विरोधी रहा है। ऐसे में दोबारा उनके प्रशासन का हिस्सा बनने की खबर कई सवाल खड़े करती है।

रविवार के दिन शाह फैसल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से JKPM का ज़िक्र हटा दिया है। फ़िरोज़ पीरज़ादा ने बताया, “हम नहीं जानते कि वह क्या करेंगे। वह इस बारे में अक्सर बात करते थे कि वह अमेरिका जाकर आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं। ख़बरें यह भी आ रही हैं कि वह प्रशासन में फिर से शामिल होंगे। इसलिए अभी हमारे पास इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है।”    

साल 2018 में शाह फैसल पढ़ाई के लिए हार्वर्ड, अमेरिका में गए थे। वापस आने के बाद उन्होंने अपना राजनीतिक दल बनाने का फैसला लिया था। इसके बाद साल 2019 में फैसल ने जम्मू कश्मीर पीपल्स मूवमेंट JKPM नाम का राजनीतिक दल शुरू किया था। लेकिन राज्य से विशेष राज्य का दर्जा हटाए जाने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। साल 2019 के अगस्त महीने में शाह फैसल को दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लेकर कश्मीर में नजरबंद किया गया था। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर 14 अगस्त को शाह फैसल दिल्ली में नहीं रोके गए होते तो वह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में भारत के खिलाफ मामला दर्ज करा चुके होते। वह घाटी में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने की तैयारी में थे।

इसके पहले रायटर्स के एक पत्रकार देवज्योत घोषाल ने शाह फैसल के बारे में हैरान कर देने वाला दावा किया था।देवज्योत के मुताबिक़ उन्हें शाह फैसल ने बताया था कि सैटेलाइट टीवी से लोगों को सरकार के निर्णय की ख़बर मिल चुकी थी। इस दौरान फैसल ने कहा था कि सुरक्षा कम होते ही कश्मीर भभक उठेगा, क्योंकि लोग ख़ुद को छला महसूस कर रहे हैं।

फैसल ने 2016 में भी इस्तीफा देने की धमकी भी दी थी। उन्होंने राष्ट्रीय मीडिया पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा था कि बुरहान वानी से उनकी उनकी तुलना कर उनके ख़िलाफ़ दुष्प्रचार किया जा रहा है। इसके अलावा इस साल जुलाई में उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का भी समर्थन किया था। इमरान ख़ान का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा था कि वो तो शांति की प्रक्रिया स्थापित करना चाहते हैं, लेकिन भारत में ही ऐसे लोग हैं जो ये होना नहीं देना चाहते। उन्होंने इमरान को बदलाव लाने वाला नेता भी बताया था।

शिवसेना वालों की भी बहुत कहानी है, सुशांत की मौत पर टुच्चापन मत दिखाओ: संजय राउत पर भड़के निरुपम

शिवसेना सांसद संजय राउत ने पार्टी मुखपत्र सामना के एक लेख में सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को लेकर कई गंभीर दावे किए थे। इस मसले पर कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद संजय निरुपम ने उन्हें आड़े हाथों लिया है।

राउत का नाम लिए बिना निरुपम ने ट्वीट किया, “शिवसेना के सांसद सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के बारे में ओछी बातें कर रहे हैं। हर परिवार की कुछ कहानी होती है। शिवसेना वालों की भी बहुत हैं। लेकिन सुशांत की मृत्यु एक संवेदनशील विषय है। शिवसेना को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, न कि टुच्चापन।”

राउत ने दावा किया था कि सुशांत के पिता केके सिंह ने दो शादी की थी। सुशांत ने उनकी दूसरी शादी कभी स्वीकार नहीं की और उनका भावनत्मक लगाव नहीं था। राउत ने परिवार के साथ सुशांत के संबंध अच्छे नहीं होने की भी बात की थी।

राउत के दावे को गलत बताते हुए सुशांत के मामा आरसी सिंह ने कहा था कि बिहार में रहने वाले जानते हैं कि सुशांत के पिता ने एक ही शादी की थी। संजय राउत झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा था, “संजय राउत ने उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के इशारे पर गलत बयान दिया है। संजय राउत इस तरह की बात बोलकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी बात बोलकर किसी की छवि खराब करना क्या अच्छी बात है।”

सोमवार (अगस्त 10, 2020) को सुशांत के रिश्ते के भाई नीरज बबलू ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि संजय राउत को इस बेबुनियाद बयान के लिए माफी माँगनी चाहिए। नीरज का कहना है कि संजय राउत द्वारा किया गया यह दावा पूरी तरह फर्जी है। सुशांत के पिता ने कोई दूसरी शादी नहीं की है। अगर संजय राउत अपने इस बयान के लिए वह सुशांत सिंह राजपूत के परिवार से सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं माँगते हैं, तो सुशांत का परिवार उनके खिलाफ न्यायिक कार्रवाई करेगा। 

‘संजय राउत माफी माँगे या कार्रवाई के लिए तैयार रहें’ – पिता की 2 शादी मामले पर सुशांत के भाई की चेतावनी

सुशांत सिंह राजपूत की कथित तौर पर आत्महत्या के मामले में नए तथ्य और दावे लगातार सामने आ रहे हैं। बीते दिन शिवसेना सांसद संजय राउत ने सुशांत सिंह राजपूत के पिता को लेकर एक बयान दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि सुशांत के पिता ने दो शादियाँ की हैं। इस पर सुशांत के भाई नीरज बबलू ने आज (10 अगस्त 2020) अपना पक्ष रखा। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि संजय राउत को इस बेबुनियाद बयान के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए।   

नीरज ने कहा, “संजय राउत द्वारा किया गया यह दावा पूरी तरह फ़र्ज़ी है। उन्होंने कोई दूसरी शादी नहीं की है। अगर अपने इस बयान के लिए वह सुशांत सिंह राजपूत के परिवार से सार्वजनिक तौर पर माफ़ी नहीं माँगते हैं, तब सुशांत का परिवार उन पर न्यायिक कार्रवाई के लिए बाध्य होगा।”

इतना ही नहीं संजय राउत शुरुआत से ही इस मामले की सीबीआई जाँच के खिलाफ़ थे। अब उनका दावा है कि सुशांत के पिता ने दूसरी शादी की थी और इसकी वजह से सुशांत और उनके पिता के बीच संबंध अच्छे नहीं थे। संजय राउत ने तो इस बारे में सवाल तक किया था, “वह (सुशांत) अपने पिता से कितनी बार मिले थे?”

सुशांत सिंह राजपूत के भाई नीरज बबलू, चित्र साभार – डेक्कन क्रोनिकल

शिवसेना सांसद ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार की सिफारिश के बाद 1 ही दिन में सीबीआई जाँच के लिए स्वीकृति दे दी गई, जो बताता है कि सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों का राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और यह झकझोर देने वाला है।

राउत ने इसे राज्य सरकार की स्वायत्तता पर हमला करार दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर ये मामला मुंबई पुलिस के हाथ में रहता तो इससे आसमान नहीं टूट पड़ता। लेकिन इस मामले में राजनीतिक दबाव और रुचि के कारण इसे सीबीआई को दिया गया है। 

उन्होंने आरोप लगया कि इस मामले की पटकथा पहले ही लिख ली गई थी और परदे के पीछे कुछ भी हुआ हो सकता है ताकि महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ साजिश रची जाए। उन्होंने मुंबई पुलिस को दुनिया की सर्वोच्च जाँच तंत्र बताते हुए कहा कि वो प्रोफेशनल हैं और दबाव में नहीं आते।

संजय राउत का यह भी कहना है कि इस मामले में सिर्फ राजनीतिक षड्यंत्र रचे जा रहे हैं, जिसके चलते सच सामने न आ पाए। उनका पूछना है, “जब मुंबई पुलिस इस मामले की जाँच कर रही थी तब यह मामला उससे वापस क्यों ले लिया गया?”

उन्होंने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित होने वाले अपने साप्ताहिक स्तंभ में यह भी लिखा कि जब घटना मुंबई में हुई है, तब उसकी प्राथमिकी पटना में कैसे दर्ज की गई। सुशांत सिंह के परिवार ने इस मामले में पूरे 40 दिन बाद कानूनी सहारा लिया था।   

इसके पहले सुशांत के मामा आरसी सिंह ने भी संजय राउत के दावों को सिरे से खारिज किया था। एनबीटी के मुताबिक सुशांत के पिता ने दो शादियॉं नहीं की हैं। आरसी सिंह ने कहा, “बिहार में रहने वाले जानते हैं कि सुशांत के पिता ने एक ही शादी की है। संजय राउत झूठ बोल रहे हैं।”

आरसी सिंह ने कहा, “संजय राउत ने उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के इशारे पर गलत बयान दिया है। संजय राउत इस तरह की बात बोलकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी बात बोलकर किसी की छवि खराब करना क्या अच्छी बात है?”

वहीं कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम ने भी राउत के इन दावों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि दिवंगत अभिनेता के परिवार पर ऐसे निचले स्तर की टिप्पणी करना सही नहीं है। हालाँकि इस दौरान उन्होंने किसी नेता का नाम लेकर उसकी आलोचना नहीं की। इसके अलावा संजय निरुपम ने यह कहा कि सुशांत सिंह की कथित तौर पर आत्महत्या का मामला संवेदनशील है। इस पूरे मामले की जाँच संवेदनशीलता से होनी चाहिए। ऐसे बयानों का केवल नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।   

वहीं दूसरी तरफ आज सुबह रिया चक्रवर्ती और उनके भाई प्रवर्तन निदेशालय में पूछताछ के लिए पेश हुए थे। सुशांत सिंह की कथित तौर पर आत्महत्या के मामले में दोनों मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आरोपित हैं। दोनों के साथ शुक्रवार और शनिवार के दिन भी पूछताछ का लंबा दौर चला था। इसके अलावा रिया चक्रवर्ती की प्रबंधक श्रुति मोदी से भी इस मामले में पूछताछ जारी है।                

सिर्फ एक साल में 937% बढ़ गया रिया चक्रवर्ती का फिक्स्ड एसेट्स: ED की पूछताछ के बाद ITR डिटेल्स से खुलासा

फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती से लगातार पूछताछ चल रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पहले शुक्रवार और फिर आज सोमवार (अगस्त 10, 2020) को रिया, उनके भाई, पिता और मैनेजर से पूछताछ की।

पूछताछ के दौरान जाँच एजेंसी को रिया की कमाई को लेकर कई अहम जानकारियाँ हाथ लगी हैं। रिया ने ईडी को ITR (Income Tax Return) सौंपा है।

वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 के ITR में रिया चक्रवर्ती की कमाई में अचानक इजाफा हो गया। ये आखिर कैसे हुआ? क्या था इनकम का सोर्स? इसके बारे फिलहाल कुछ भी पता नहीं चला है।

रिया की साल 2017-18  में सलाना कमाई 18.75 लाख रुपए थी जो कि साल 2018-19 में ये 18.23 लाख रुपए हो जाती है। रिया की साल 2017-18 में बाहर के सोर्स से होने वाली कमाई 1,27,625 होती है लेकिन अचानक ही साल 2018-19 में ये बढ़कर 2,38,334 हो जाती है। हालाँकि साल 2017-18 में सालाना सभी सोर्सेज से होने वाली नॉर्मल बिजेनस इनकम 17,57,442 से घटकर 16,04,936 हो जाती है।

एक और अहम बात रिया के ITR में दिखी है, जिसमें उनके फिक्स्ड एसेट्स साल 2017-18 में 96 हजार है जबकि साल 2018-19 में ये फिक्स्ड एसेट्स बढ़कर 9 लाख तक पहुँच जाते हैं। ये एक बड़ा मार्जिन है। रिया के शेयर होल्डर फंड साल 2017-18 में 34,05,727 है जबकि साल 2018-19 में ये शेयर होल्डर फंड्स 42,06,338 हो गए।

ईडी इसकी भी जाँच कर रही है कि रिया ने 2017-18 में 34 लाख रुपए के शेयर कहाँ से खरीदे, जबकि कमाई 18 लाख ही है। रिया का शेयर होल्डर फंड 2017-18 में 34 लाख से 2018-19 में 42 लाख तक पहुँच गया। यानी दो साल में शेयर की कीमत में 8 लाख की बढ़ोतरी हुई। ITR में 2017-2019 के बीच किसी बड़े ट्रांजेक्शन की जानकारी नहीं है। इसके अलावा HDFC बैंक, ICICI बैंक में उनकी एफडी की भी जाँच हो रही है।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत के परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि सुशांत के बैंक अकाउंट में से 15 करोड़ रुपए निकले हैं। इसके अलावा भी कई और पैसों के लेन-देन की बात कही गई थी। इसी के बाद से ही ईडी ने इस पूरे मामले में पूछताछ तेज की है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ईडी की पूछताछ में फर्जी शेल कंपनी का खुलासा हुआ था। जानकारी के मुताबिक जाँच में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का मामला सामने आया है। ईडी को शक है कि सुशांत के अकाउंट से जो पैसा ट्रांसफर हुआ है, वह फर्जी शेल कंपनी के जरिए किया गया। इन शेल कंपनियों का ताल्लुक रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक से बताया जा रहा है।

खबरों के मुताबिक 18 घंटे से भी ज्यादा समय तक चली पूछताछ के बावजूद ईडी, शोविक के जवाब से संतुष्ट नहीं हो सका। उन्होंने कई सवालों के गोलमोल जवाब दिए। वहीं रिया भी अपने और पिता के नाम पर रजिस्टर्ड दो फ्लैट्स के बारे में स्पष्ट रूप से जानकारी नहीं दे सकीं थीं। वो अपनी आय और खर्चों पर भी ठीक से जवाब नहीं दे पाई थी। इसलिए ईडी ने रिया को फिर से सोमवार को तलब किया।