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105 गाँव, 1.5 लाख लोग: 500 साल बाद पहनेंगे पगड़ी, जूता और लेंगे छाता – पूरी हुई राम मंदिर की प्रतिज्ञा

5 अगस्त को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भव्य राम मंदिर की नींव रखी। देश और दुनिया के तमाम आस्तिकों ने इसके लिए प्रार्थना की थी। कुछ ने प्रार्थना तो कुछ ने प्रतिज्ञा भी की थी, ऐसी अटूट प्रतिज्ञाएँ, जो सालों पुरानी थीं और 5 अगस्त को उनका तर्पण हुआ।

अयोध्या के नज़दीक पूरा बाज़ार और उसके आस-पास लगभग 105 गाँव मौजूद हैं। यहाँ के सूर्यवंशी क्षत्रिय परिवारों ने प्रतिज्ञा की थी कि वे लोग मंदिर निर्माण के बाद ही पगड़ी पहनेंगे। गाँव के क्षत्रियों ने संकल्प लिया था कि वह राम मंदिर निर्माण पूरा होने तक न तो पगड़ी धारण करेंगे और न ही चमड़े का जूता पहनेंगे।

जानकारी के मुताबिक़ राम मंदिर पर हमले के वक्त सूर्यवंशी समाज के क्षत्रियों ने शपथ ली थी। इसके अनुसार जब तक मंदिर निर्माण नहीं होता, तब तक वह पगड़ी नहीं पहनेंगे, छाते से सिर नहीं ढकेंगे। इसके अलावा चमड़े का जूता भी नहीं पहनेंगे।

सूर्यवंशी क्षत्रिय अयोध्या के अलावा बस्ती जिले के कई गाँवों में भी रहते हैं। यह सारे परिवार खुद को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का वंशज मानते हैं। इन सभी गाँवों में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद से पगड़ी बाँटी जा रही है।    

क्षत्रिय समाज के लिए यह जितना धर्म का मसला था, उतना ही जज्बातों का भी था। इस मुद्दे पर अयोध्या के रहने वाले महेंद्र प्रताप ने स्वराज्य से कई बातें बताई। उन्होंने कहा “हमारे पूर्वजों ने बहुत पहले ही पगड़ी पहनने से मना कर दिया था। उन्होंने शपथ ली थी कि जब तक रामलला का भव्य मंदिर नहीं बन जाता, तब तक वह बिना पगड़ी और बिना जूतों के ही रहने वाले हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वो अपने सम्मान से समझौता नहीं करते हैं और न ही हार स्वीकार करते हैं। और पगड़ी उनके लिए सम्मान का विषय है, इसलिए उन्होंने पगड़ी का त्याग कर दिया। इसके बाद प्रताप ने बताया कि उनकी पीढ़ी के लोगों ने तो गमछे का इस्तेमाल करना भी बंद कर दिया था।    

साक्षात्कार के दौरान बात करते हुए प्रताप कई बार भावुक तक हुए। उन्होंने कहा, “हमने रामलला को सालों तक टेंट में देखा और इस कष्ट की व्याख्या नहीं की जा सकती है। अपने आराध्य श्रीराम को इस तरह टेंट में देखना बहुत पीड़ा देने वाला दौर था। हम हिंदुओं के साथ यही दिक्कत है, हम एक नहीं हो पाते हैं। हम खुद घरों में रह रहे थे लेकिन इस बात पर अफ़सोस नहीं जताते थे कि हमारे आराध्य टेंट में रह रहे थे।”

अंत में उन्होंने बताया कि भले 5 अगस्त बीत गई है लेकिन अभी तक माहौल वैसा ही बना हुआ है। रामायण और सुंदर-कांड का पाठ अभी भी चल रहा है। लोग अभी भी श्रीराम का भजन गा रहे हैं और खुशी मना रहे हैं।    

इसके बाद शीतला सिंह ने खुशी से कहा, “पहनेंगे पगड़ी और साफ़ा पहनेंगे। भूमि पूजन हो चुका है और अब मंदिर निर्माण शुरू होगा। हमारे समुदाय के लोग पगड़ी पहनेंगे, हमसे ज़्यादा खुशी और किसे होगी।” इनके अलावा रमेश सिंह अयोध्या में हुए प्रसाद वितरण में मदद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना होगा कि अतीत में न जाएँ। बल्कि वर्तमान को ही सत्य माना जाए।        

अयोध्या के नज़दीक ही सरायरासी नाम की जगह है। बासदेव सिंह यहीं के रहने वाले हैं और पेशे से वकील हैं। भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश होने के बाद सरायरासी में अब तक 400 पगड़ी बाँटी जा चुकी है। अयोध्या और इसके आस-पास स्थित गाँवों में इस समाज के लगभग 1.5 लाख लोग रहते हैं। इनमें से कोई शादी, सामाजिक समारोह और पंचायत तक में पगड़ी नहीं बाँधता था।    

अयोध्या के भारती कथा मंदिर की महंत ओमश्री भारती ने भी इस बारे में अपना नज़रिया रखा। उन्होंने कहा “क्षत्रिय समाज अभी तक अपनी प्रतिज्ञा का पालन करते हुए सिर पर मौरी रखता था। जिसमें सिर खुला रहता था। वह अभी तक खड़ाऊ पहनते थे क्योंकि उस ज़माने में जूते-चप्पल चमड़े के बने होते थे। जब बिना चमड़े के जूते चप्पल आए तो उन्हें भी पहनना शुरू किया लेकिन चमड़े का कुछ भी धारण नहीं किया। क्षत्रियों में इस बात को लेकर बहुत ज़्यादा खुशी है, अब तो उन्हें बस मंदिर निर्माण की प्रतीक्षा है।”          

इन सभी के अलावा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश डीपी सिंह ने भी इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 16वीं शताब्दी में ठाकुर गज सिंह ने मंदिर की रक्षा के लिए मुग़लों से लड़ाई लड़ी थी। लेकिन वे मंदिर की रक्षा नहीं कर पाए, क्षत्रिय समाज हार गया। फिर गज सिंह ने जूते और पगड़ी न धारण करने की प्रतिज्ञा ली। इस पर कवि जयराज ने भी लिखा है, “जन्मभूमि उद्धार होय ता दिन बड़ी भाग। छाता पग पनही नहीं और न बांधहिं पाग।”

दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए बाहरी लोग जिम्मेदार: केजरीवाल के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन

कोरोना वायरस महामारी ने शनिवार (9 अगस्त, 2020) को 1,404 नए मामलों और 16 मरीजों की मौत के साथ देश की राजधानी दिल्ली में कहर बरपाया है। इस तरह दिल्ली में कुल संक्रमितों की संख्या 1,44,127 हो गई है। दिल्ली में इस वक्त कोरोनावायरस के 10,688 ऐक्टिव केस हैं। वहीं अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्‍या 4,098 हो गई है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कोरोना वायरस को नियंत्रित करने प्रयास शुरू किए जाने से पहले चीन के वुहान शहर से फैले इस वायरस ने दिल्ली को काफी प्रभावित किया था। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने 10 जून को दावा किया था कि सक्रिय मामलों की संख्या 12 से 15 दिनों में 30,000 तक बढ़ जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सूचित किया था कि महीने के अंत तक 15000 बिस्तरों की अतिरिक्त आवश्यकता होगी।

इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए दिल्ली में मोर्चा सँभाला। दिल्ली में जुलाई की शुरूआत से ही कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों में काफी गिरावट देखी गई थी। कथित तौर पर, 18 जून से RT-PCR और रैपिड एंटीजेन टेट्स में उछाल आया है। 24 जून से 2 जुलाई के बीच, सक्रिय मामलों में 23.8% से 11.39% की कमी आई है। 27 जून से 3 जुलाई के बीच नए मामलों की संख्या 3000 के आँकड़े को पार नहीं कर पाई।

हालाँकि इस वक़्त दिल्ली में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या फिर से बढ़ रही है तो वहीं स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने इसकी जिम्मेदारी लेने के बजाय बाहरी लोगों पर इसका दोष मढ़ना शुरू कर दिया। न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि सक्रिय मामलों की संख्या में वृद्धि का कारण दिल्ली के बाहर के लोग हैं। जो कोरोना वायरस का टेस्ट दिल्ली में करा रहे हैं।

सत्‍येंद्र जैन ने दो-टूक कहा, “कुछ रिपोर्ट्स हैं कि दिल्‍ली में कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं। इसकी वजह ये है कि दिल्‍ली से बाहर के बहुत सारे लोग यहाँ आकर टेस्‍ट करा रहे हैं। इसके चलते यहाँ पर पॉजिटिव केस की संख्‍या बढ़ रही है। नहीं तो, दिल्‍ली में कोविड-19 मामलों का ट्रेंड घट रहा है।”

इससे पहले भी दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया था कि दिल्ली के मूल निवासियों को अस्पतालों में और अधिक बेडों की आवश्यकता है। उनके इस निर्णय के पीछे दूसरे राज्यों से आए दिल्ली में रहने वालों को दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पताओं और दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित करना भी था।

अपने इस अजीबोगरीब निर्णय के पीछे उनका तर्क था, “जैसा कि हमने पता लगाया पड़ोसी राज्यों में कोरोना के बहुत कम मामले हैं, इसलिए उन राज्यों को इस निर्णय से समस्या नहीं होनी चाहिए।” कहीं न कहीं ऐसा करके दिल्ली की कोरोना से चरमराई हालत का जिम्मा केंद्र सरकार पर मढ़ना था और इसके लिए सत्येन्द्र जैन ने केंद्र पर यह आरोप भी लगाया कि दिल्ली में इस स्थिति की जिम्मेदार केंद्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को समय पर न बंद किया जाना भी है।

खुद के बचाव में रिया ने सार्वजनिक किए व्हाट्सऐप चैट, सुशांत की बहन को विलेन बताने की कोशिश

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से संदेह के घेरे में आई रिया चक्रवर्ती अब लगातार अलग-अलग तरीके से खुद का बचाव करने की कोशिश कर रही हैं। शनिवार (अगस्त 8, 2020) को उनकी लीगल टीम ने उनके और सुशांत के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट सार्वजनिक की। इसमें सुशांत अपनी बहन प्रियंका को लेकर बातें कर रहे हैं। इस चैट में सुशांत कथित तौर अपनी बहन से काफी नाराज दिख रहे हैं।

इस व्हाट्सऐप चैट में पहले तो दोनों बेहद ही आराम से बात करते हैं। इसके बाद सुशांत एक के बाद एक अपनी बहन को लेकर कई बातें रिया को बताते हैं। सुशांत पहले रिया को मैसेज करते हैं और उसमें लिखते हैं, “तुम्हारा परिवार बहुत शानदार है। सर (रिया के पिता) बहुत सही हैं। शौविक सहानुभूति से भरा हुआ है और तुम भी जो कि मेरी हो, इन जरूरी बदलावों के पीछे तुम एक पर्याप्त कारण हो। तुम सभी के आसपास रहना मेरे लिए खुशी की बात होगी। चीयर्स मेरी दोस्त, मेरी रॉकस्टार बनने के लिए।”

रिया-सुशांत की वॉट्सऐप चैट में सामने आई ये बातें, बहन से थी नाराजगी!

अगले मैसेज में सुशांत लिखते हैं, “तुम प्लीज मुस्कुराती रहो, तुम इसमें बहुत अच्छी लगती हो। मैं अब सोने की कोशिश करता हूँ। काश मुझे जमीला जैसा कोई सपना आए। कितना अच्छा होगा ना? टाटा…” ये चैट दोनों के बीच शाम 6 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट के बीच हुई थी।

रिया-सुशांत की वॉट्सऐप चैट में सामने आई ये बातें, बहन से थी नाराजगी!

इसके बाद रिया एक बार फिर से रात को 8 बजे के आसपास मैसेज कर उनका हालचाल लेती हैं। इसके जवाब में सुशांत की तरफ से मैसेज आता है, “अच्छा नहीं है…मेरी बहन अब सिड भाई को विक्टिम कार्ड खेलकर मैनिपुलेट कर रही है ताकि इस पूरी बात से ध्यान भटक कर (वही बात जिसे मैं और तुम पीछे छोड़ रहे हैं) मुझ पर आ जाए कि मैंने फिजिकली पनिशमेंट उन्हें दी। ये बहुत निराशाजनक बात है।”

बताया जा रहा है कि ‘सिड भाई’ के रूप में संभवतः वह सिद्धार्थ पिठानी की बात कर रहे हैं। इसके बाद रिया उनसे कहती हैं कि मीटिंग के बाद फोन करना। इसके बाद सुशांत का मैसेज है। यह मैसेज उन्होंने अपनी बहन को किया था।

सुशांत ने लिखा, “(प्रियंका के लिए) इस गिरी हुई हरकत के लिए, शराब के नशे में छेड़छाड़ में तुम विक्ट‍िम कार्ड का गेम खेलकर उसे कवरअप करने की कोश‍िश कर रही हो। तो मेरी प्यारी बहन, वहाँ हमारी माँ है और भगवान हैं, जिन्होंने मुझे सिखाया, और तुमने उस सीख के मुताबिक एक अपराध किया है।”

रिया-सुशांत की वॉट्सऐप चैट में सामने आई ये बातें, बहन से थी नाराजगी!

उन्होंने आगे लिखा, “अगर तुम्हें अपने अहंकार की वजह से कुछ नजर नहीं आ रहा है तो फिर भगवान ही तुम्हारा भला करे क्योंकि मैं नहीं डरता और मैं आगे भी उस काम को जारी रखूँगा जो अब तक किया है। मैं दुनिया में जरूर बदलाव लाता रहूँगा। भगवान और प्रकृति को ही यह फैसला करने दें कि किसका काम सही है।”

सुशांत ने अगला मैसेज जो रिया को भेजा वो ‘सिड’ के लिए था, जिसमें लिखा था, “उन्होंने तुम्हें मेरी आँखों के सामने मारा और वो मेरी बहन ने किया जिसे लोग समझते हैं कि शराब के नशे में किया होगा और तुम उसकी विक्ट‍िम कार्ड वाली बातों को मान भी रहे हो।”

इसमें आगे लिखा गया, “प्लीज मुझे यह भी बताओ कि तुमने और मैंने ऋष‍िकेश बस में क्या किया था। तब तो हम दोनों बार-बार शर्म‍िंदा होंगे, अगर हम बहन के नजर‍िए से देखें तो। मैं मह‍िलाओं की इज्जत करता हूँ पर उन्होंने यह भी सिखाया है कि हमेशा सही का साथ दें और जो बराबर में है उससे डरे नहीं।”

सुशांत आगे लिखते हैं, “क्या तुम्हें लगता है कि बहस करने वाली मेरी कोई भी बात एक परेशानी है और उनका काम सही है। भाई मैं सभी रिश्ते छोड़ दूँगा और दुनिया में पॉजिट‍िव बदलाव लाने के लिए जो कर रहा हूँ उसमें ही लग जाऊँगा। तुम वही करो जो तुम्हें सही लगता हो। मैं समझ लूँगा।”

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एक और चैट में सुशांत लिखते हैं कि उन्हें अपनी बहन की चिंता हो रही है। वह बहुत दुष्ट है। फिर रिया कहती हैं चलो ये मामला निपटाते हैं, मैं उन्हें (बहन को) फोन करूँगी।

ये चैट्स रिया चक्रवर्ती के वकील सतीश मानेशिंदे ने साझा की हैं। ये चैट्स कितनी सही हैं और कितनी गलत ये हम नहीं कह सकते। इन चैट्स के मुताबिक सुशांत की बहन प्रियंका ने सिद्धार्थ पिठानी पर हाथ उठाया था और सुशांत इस बात का विरोध कर रहे थे। साथ ही रिया चक्रवर्ती इसमें सुशांत का साथ दे रही थीं।

हालाँकि, सुशांत के फैंस का कहना है कि रिया खुद के प्रति सहानुभूति बटोरने और एक्टर की बहन को गलत साबित करने की कोशिश कर रही हैं। 

गौरतलब है कि सुशांत के पिता केके सिंह ने 25 जुलाई को पटना में रिया चक्रवर्ती के खिलाफ सुशांत के साथ धोखाधड़ी करने और उन्हें खुदकुशी के लिए उकसाने का केस दर्ज करवाया था। इस केस में उन्होंने रिया, उनके पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती, माँ संध्या चक्रवर्ती, भाई शौविक चक्रवर्ती को आरोपित बनाया था।

केके सिंह ने मीडिया से भी बातचीत में रिया पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इसमें सुशांत के अकाउंट से पैसे निकालने का आरोप भी है। फिलहाल, इस मामल में ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर रिया से पूछताछ कर रही है।

भारत विरोध का गढ़ बन चुके तुर्की पहुँचे आमिर खान, वहाँ की मिनिस्ट्री के समर्थन से करेंगे फ़िल्म शूटिंग

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान अपनी अगली फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ की शूटिंग के लिए तुर्की पहुँच गए हैं। तुर्की के ‘कल्चर एंड टूरिज्म मिनिस्ट्री’ ने इसकी सूचना दी है। आमिर की अगली फिल्म टॉम हैंक अभिनीत अंग्रेजी की 1994 की फिल्म ‘फारेस्ट गंप’ की रीमेक है। इसकी आधी शूटिंग हो चुकी है, बाकी बची आधी फिल्म को तुर्की में ही फिल्माया जाएगा। बता दें कि फ़िलहाल भारत विरोधी रुख को लेकर तुर्की चर्चा में है।

बताया गया है कि कोरोना वायरस संक्रमण आपदा की वजह से भारत में शूटिंग करना संभव नहीं हो पा रहा है, इसीलिए आमिर खान तुर्की गए हैं। तुर्की की मीडिया का कहना है कि आमिर खान वहाँ की तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, सिनेमा के लिए एडवांस फ़ैसिलिटी और वर्कफोर्स कैपेसिटी से खुश हैं। इससे पहले उन्होंने वहाँ के दौरों मे इन चीजों को देखा था। तुर्की का पर्यटन मंत्रालय उनकी सहायता कर रहा है।

सोशल मीडिया पर आमिर खान की तुर्की की तस्वीरें वायरल हैं, जिसमें वो मास्क लगाए दिख रहे हैं। उजले बालों में दिख रहे आमिर खान के साथ कुछ अन्य लोग भी दिख रहे हैं। इससे पहले कोलकाता और चंडीगढ़ में इस फिल्म की शूटिंग हुई थी। ‘लाल सिंह चड्ढा’ का निर्देशन अद्वैत चंदन ने किया है। इस फिल्म में करीना कपूर बतौर मुख्य अभिनेत्री काम कर रही हैं। ये आमिर खान की महत्वाकांक्षी फिल्म है।

बता दें कि अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर तुर्की ने पाकिस्तान की बातों का समर्थन किया था। इसके बाद वह भारत विरोधी गतिविधियों का गढ़ बन चुका है। तुर्की में पनप रहे इस नए तरह के आतंकवाद को कोई और नहीं बल्कि वहाँ की एर्दोगन सरकार खुद बढ़ावा दे रही है। तुर्की की तरफ से भारत के लोगों को कट्टर बनाने की भरपूर कोशिश जारी है। इतना ही नहीं तुर्की भारत के कट्टरपंथियों को और कट्टर बना कर उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल करना चाहता है।

अक्टूबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना तुर्की दौरा रद्द कर दिया था। तुर्की द्वारा जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को समर्थन दिए जाने के बाद भारत ने अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव करते हुए तुर्की की आलोचना की थी। तुर्की लगातार कुर्दिश और सीरिया के लोगों की हत्या कर रहा है, जिसकी भारत ने आलोचना की थी। भारत ने कुर्द की स्वतंत्रता का समर्थन किया था। साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी ने साइप्रस के राष्ट्रपति से मुलाक़ात कर उसकी सम्प्रभुता को समर्थन दिया था।

बता दें कि जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत आए थे तब तीनों खान ने उनका बहिष्कार किया था। कई बॉलीवुड हस्तियों को उनसे मिलने के लिए आमंत्रण दिया गया था, लेकिन आमिर खान सहित तीनों खान नहीं पहुँचे। कई लोगों ने तब ‘असली हीरो’ कह कर उनकी तारीफ की थी।

बाबर के नाम पर कुछ भी कबूल नहीं, मोहम्मद साहब के नाम पर हो मस्जिद: मोहसिन रजा

उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक मंत्री मोहसिन रज़ा ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का नाम मोहम्मद साहब के नाम पर रखने का सुझाव दिया है। मोहसिन रज़ा का कहना है कि जिस तरह अयोध्या में राम के नाम का मंदिर बन रहा है, वैसे ही मस्जिद मोहम्मद साहब के नाम पर होनी चाहिए। 

उन्होंने कहा कि बाबर ने कोई अच्छा काम नहीं किया है। उसके नाम पर कुछ भी रखना सही नहीं होगा। अगर बाबर के नाम पर कुछ भी बनाया जाता है तो उसे कबूल नहीं किया जाना चाहिए।

रज़ा ने कहा कि कि अयोध्या में बनाई जाने वाले मस्जिद का नाम ‘मस्जिद-ए-मोहम्मदी’ रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाबर के नाम पर मजहब के 73 फ़िरके भी सहमत नहीं होंगे।

इससे पहले अयोध्या में बनने वाली मस्जिद को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो टूक जवाब दिया था।  उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा था कि वह बतौर योगी और बतौर हिंदू मस्जिद के शिलान्यास का हिस्सा नहीं बनेंगे। न तो वह ऐसे किसी कार्यक्रम में शामिल होंगे और न ही उन्हें ऐसी किसी कार्यक्रम से बुलावा आएगा।

उन्होंने कहा था, “अगर आप मुझसे एक मुख्यमंत्री के रूप में पूछेंगे तो मुझे किसी मज़हब, संप्रदाय से परहेज नहीं है। अगर एक योगी के रूप में पूछेंगे तो कतई नहीं जाऊँगा। मैं इसलिए नहीं जाऊँगा क्योंकि क्योंकि मैं एक योगी हूँ। हिंदू धर्म का होने के नाते मेरे पास अपने तौर तरीकों से पूजा करने का अधिकार है। इसलिए न तो मुझे कोई मस्जिद के शिलान्यास में बुलाएगा। न ही मैं इस तरह के किसी आयोजन का हिस्सा बनने वाला हूँ।”

राहुल जी से टाइम माँगते हैं तो वह कहते हैं मैं अध्यक्ष नहीं हूँ: कॉन्ग्रेस को बचाने की सिंघवी ने लगाई गुहार, कहा- जल्द चुने नया अध्यक्ष

राहुल गॉंधी के तौर-तरीकों की शिकायत करते हुए पूर्व में भी कई लोग कॉन्ग्रेस छोड़ चुके हैं। अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इस तरफ इशारा किया है। उन्होंने पार्टी को बचाने के लिए जल्द अध्यक्ष चुने जाने की गुहार लगाई है।

सिंघवी ने सत्य हिंदी को दिए साक्षात्कार में कहा कि अगर राहुल गॉंधी कॉन्ग्रेस की कमान नहीं सॅंभालना चाहते हैं तो उनकी जगह किसी और को पार्टी अध्यक्ष चुना जाना चाहिए। राहुल ने 2019 के आम चुनावों में पार्टी की करारी शिकस्त के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। काफी मान-मनौव्वल के बाद भी जब वे दोबारा जिम्मेदारी सॅंभालने को तैयार नहीं हुए तो सोनिया गॉंधी को अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया। सोमवार को बतौर अंतरिम अध्यक्ष साल भर हो जाएँगे।

सिंघवी का यह साक्षात्कार ऐसे वक्त में सामने आया है जब कॉन्ग्रेस के अस्तित्व पर संकट मॅंडरा रहा है। स्थायी अध्यक्ष न होने के कारण उसके सामने निलंबन और पार्टी का चुनाव चिह्न जब्त होने का खतरा है। इस साल की शुरुआत में मध्य प्रदेश में सरकार गॅंवाने वाली पार्टी के सामने यही खतरा राजस्थान में है। झारखंड की गठबंधन सरकार में भी सब कुछ ठीकठाक नहीं चल रहा। यहॉं तक कि पंजाब में भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व पर सांसद प्रताप सिंह बाजवा लगातार सवाल उठा रहे हैं।

सिंघवी से जब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के चुनाव को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “अभी हमारी हालत ख़राब है, लेकिन हार के बाद भी यह कहना गलत होगा कि वे (राहुल गॉंधी) दोबारा नहीं हो सकते। हम कह रहे हैं कि राहुल गाँधी आएँ और अगर वो नहीं आना चाहते, उनकी ज़िद है तो फिर इस पर फ़ैसला करके नए अध्यक्ष को चुना जाए, यह अनिश्चितता नहीं रहनी चाहिए। इससे नुक़सान हो सकता है। कुछ हफ्तों में हल निकलेगा। कोई तो आएगा ही और चुनाव के रास्ते आएगा।”

यह पूछे जाने पर कि क्या गॉंधी परिवार के बिना कॉन्ग्रेस का काम चल सकता है सिंघवी ने कहा, “राहुल गाँधी पिछले एक साल से अध्यक्ष नहीं हैं कॉन्ग्रेस का काम चल रहा है। सोनिया जी अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर काम कर रही हैं, बल्कि कई बार राहुल जी के पास टाइम माँगते हैं तो वह कहते हैं कि मैं अध्यक्ष नहीं हूँ। लेकिन प्रकृति हो या पार्टी, कहीं भी वैक्यूम नहीं रह सकता, लेकिन यह लॉन्ग टाइम विकल्प नहीं है।”

भूमिपूजन करते PM मोदी के हाथ में कॉन्ग्रेस MLA ने थमाया कटोरा, फिर डिलीट किया ट्वीट: तस्वीर से छेड़छाड़ को लेकर FIR

मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस विधायक जीतू पटवारी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो के साथ छेड़छाड़ कर सोशल मीडिया में पोस्ट करने का आरोप लगा है। इस संबंध में इंदौर के छत्रीपुरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। विधायक के खिलाफ धारा 188 और 164 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे की शिकायत पर केस दर्ज किया गया। प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर के साथ छेड़खानी कर अपने ट्विटर अकाउंट से फोटो शेयर करने वाले विधायक पटवारी के खिलाफ भाजपा नेताओं ने शनिवार (अगस्त 8, 2020) रात डीआइजी से शिकायत की थी। छत्रीपुरा थाने के इंस्पेक्टर पवन सिंघल ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है।

शनिवार रात को भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, सांसद शंकर लालवानी, विधायक रमेश मेंदोला, मधु शर्मा, जेपी मूलचंदानी सहित अन्य नेता डीआइजी से उनके कार्यालय में जाकर मिले और ज्ञापन देकर विधायक पटवारी के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की माँग की थी। नेताओं का कहना है कि पटवारी लगातार सोशल मीडिया पर सरकार और संगठन को लेकर अभद्र टिप्पणी करते हैं।

नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे ने विधायक जीतू पटवारी पर निशाना साधते हुए उनका मानसिक संतुलन खराब हो गया। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि हम विधानसभा में भी कॉन्ग्रेस विधायक की सदस्यता समाप्त करने की माँग करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने जीतू पटवारी की गिरफ्तारी की भी माँग की।

 MP: Complaint Against Congress MLA Jitu Patwari For Posting Morphed Image Of PM Modi; Second Such Post In Past 8 Days
जीतू पटवारी द्वारा किया गया ट्वीट

बता दें कि अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के भूमिपूजन के समय प्रधानमंत्री की तस्वीर में छेड़छाड़ कर पटवारी ने अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी को लेकर टिप्पणी की थी। पटवारी द्वारा पोस्ट की गई फोटो में पीएम मोदी हाथ में कटोरा के साथ दिखाए गए थे। लेकिन पीएम के हाथ में भूमि पूजन के दौरान कहीं भी कटोरा नहीं था।

इसे लेकर भाजपा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की ओरिजनल तस्वीर से छेड़छाड़ कर यह फोटो तैयार की गई है। हालाँकि विवाद बढ़ने पर जीतू पटवारी ने देर शाम अपने ट्विटर हैंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में कटोरा लेने वाली तस्वीर को हटा दिया और ट्वीट भी डिलीट कर दिया

गौरतलब है कि पिछले दिनों भी पूर्व मंत्री जीतू पटवारी अपने ट्वीट को लेकर बीजेपी के निशाने पर आए थे। उन्होंने एक विमान के अंदर की तस्वीर शेयर की थी। साथ ही यह दावा किया था कि यह प्रधानमंत्री का विमान है और तस्वीर उस विमान के अंदर की है। जीतू पटवारी द्वारा शेयर की गई यह तस्वीर वायरल हो गई थी बाद में पीआईबी ने पूरे मामले की पड़ताल करने पर इस तस्वीर को गलत ठहराया था।

7.2 करोड़ YouTube व्यूज के लिए रैपर बादशाह ने दिए थे ₹72 लाख: मुंबई क्राइम ब्रांच का खुलासा

मुंबई पुलिस ने रैपर बादशाह के साथ लगातार 3 दिनों तक चली पूछताछ के बाद खुलासा किया है कि उन्होंने अपने गाने ‘पागल है’ का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए रुपए दिए थे। मुम्बई की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट ने बताया कि रैपर बादशाह ने यूट्यूब पर 7.2 करोड़ व्यूज के लिए 72 लाख रुपए दिए थे। फेक एकाउंट्स, लाइक्स और व्यूज बेचे जाने का मामले में बादशाह से शनिवार (अगस्त 8, 2020) को लगातार तीसरे दिन पूछताछ हुई।

बादशाह ने पूछताछ के दौरान ही उक्त बातें कबूल कीबादशाह ने दावा किया था कि उनके गाने ‘पागल है’ ने रिलीज के पहले 24 घण्टे में ही यूट्यूब पर 7.5 करोड़ व्यूज पाए थे, लेकिन यूट्यूब की स्वामित्व वाली कम्पनी अल्फाबेट और गूगल ने इन दावों को नकार दिया था। आदित्य सिंह उर्फ बादशाह से पूछताछ के लिए पुलिस ने 25 सवालों की सूची तैयार की थी। इस दौरान रैपर ने कबूल किया कि उन्होंने एक कम्पनी को सोशल मीडिया पर व्यूज बटोरने के लिए रुपए दिए थे।

डीसीपी नंदकुमार ठाकुर ने कहा कि बादशाह किसी गाने की रिलीज के पहले 24 घण्टों का विश्व रिकॉर्ड सेट करना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने ऐसा किया। अब पुलिस की रडार में बादशाह के कई अन्य गाने भी आ गए हैं, जिन्हें सोशल मीडिया पर रिलीज किया गया था। उनकी व्यूज में धोखाधड़ी की बात की भी जाँच की जाएगी। सोशल मीडिया मार्केटिंग एजेंसी के नाम पर फेक एकाउंट्स बेचे जाने के नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

इस मामले में अब तक सेलेब्रिटीज और सोशल मीडिया मार्केटिंग कम्पनीज के लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। अब तक 20 लोगों से पूछताछ हो चुकी है। 11 जुलाई को जब भूमि त्रिवेदी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि किसी ने उनका फेक एकाउंट बनाया है, तब जाकर इस रैकेट का खुलास हुआ। वहीं बादशाह ने कहा है कि वो इन चीजों में संलग्न नहीं थे और मुम्बई पुलिस की जाँच में सहयोग कर रहे हैं।

इससे पहले सोशल मीडिया ‘फर्जी फ़ॉलोअर्स केस’ में मुंबई पुलिस की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) ने 29 साल के काशिफ़ मंसूर को गिरफ्तार किया था। काशिफ़ मंसूर एक सिविल इंजीनियर है और उस पर इंस्टाग्राम, ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर लोगो को फेक ‘लाइक्स’, ‘व्यूज’ और ‘फॉलोअर्स’ मुहैया कराने का आरोप है। वो एक ऐसी वेबसाइट चलाता था, जो प्रोफ़ाइल यूजर, जिसमें मुख्यतः कई प्रसिद्ध हस्तियाँ भी शामिल थीं, को फ़ेक फॉलोवर्स बेचा करते थे।

जाँच का सबसे बड़ा चौंकाने वाला पहलू यह है कि बॉलीवुड सेलिब्रिटी दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा जोनास के साथ 10 सेलिब्रिटीज के नाम फेक फॉलोअर्स की लिस्ट में शामिल हैं। पहले ही बताया गया था कि इस मामले में फ़िल्म और क्रिकेट जगत से जुड़े कुछ बड़े नाम भी हैं, जिन्हें पुलिस बयान के लिए तलब कर सकती है। इन फेक फॉलोअर्स को इंस्टाग्राम की भाषा मे ‘Bots’ कहा जाता है। अब मुंबई पुलिस जल्द ही इन सेलिब्रिटीज से पूछताछ कर सकती है।

‘गफ्फार के साथ दारू के नशे में लूट के लिए हुई मारपीट’: जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने का लगाया था आरोप

राजस्थान के सीकर में एक ऑटो चालक ने आरोप लगाया कि उससे जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी ज़िंदाबाद’ बुलवाया गया। जनसत्ता, आजतक और नवभारत टाइम्स सहित कई मीडिया संस्थानों ने इस घटना को जगह दी। इससे पहले भी कई ऐसे मामले आ चुके हैं जहाँ खास मजहब द्वारा लगाए गए ऐसे आरोप झूठे निकले हैं। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई भी की और दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

दरअसल, हुआ यूँ कि 52 वर्षीय ऑटो ड्राइवर गफ्फार अहमद ने सीकर सदर थाने में अपने साथ मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई और साथ ही कहा कि उनसे जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी ज़िंदाबाद’ बुलवाया गया।

तस्वीरों में गफ्फार के चेहरे पर चोट के निशान भी दिख रहे हैं। उनका आरोप है कि जब वो जिगरी छोटी गाँव से लौट रहे थे तो पिकअप वैन से आकर कुछ लोगों ने उन्हें रोका और उनके साथ मारपीट की।

सीकर पुलिस का कहना है कि ये घटना शनिवार (अगस्त 8, 2020) की है, जब उक्त ऑटो चालक कल्याण सर्कल से सवारियों को गाँव छोड़ कर वापस लौट रहा था। इसी दौरान आरोपितों ने उनसे जर्दा माँगा। इसके बाद हुई कहासुनी के बाद उन्होंने ऑटो ड्राइवर को खदेड़ कर उसके साथ मारपीट की। पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के 1 घंटे के भीतर ही आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। सदर थाना प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह ने इसकी पुष्टि की।

पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपित शराब के नशे में थे और पहले भी लूटपाट की घटनाओं में संलिप्त रहे हैं। वो शराब के लिए रुपए भी माँग रहे थे। उन्होंने मारपीट के बाद रुपए भी छीन लिए। उनका इरादा लूटपाट का था।

थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपितों में से एक शंभु दयाल के ख़िलाफ़ पहले से ही 6 मामले दर्ज हैं। वहीं राजेन्द्र के ख़िलाफ़ पहले से ही मारपीट और एससी-एसटी एक्ट कर मामले दर्ज थे। वो पहले से अपराध करते रहे हैं।

सीकर मामले में पुलिस का बयान (साभार: अब तक न्यूज़)

हालाँकि, पुलिस ने ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी ज़िंदाबाद’ बुलवाए जाने को लेकर कुछ नहीं कहा। पुलिस का अनुसंधान अभी भी जारी है। इसका मतलब है कि यह बात मनगढ़ंत भी हो सकती है, क्योंकि हमने पहले भी इस तरह के कई उदाहरण देखे हैं। जब आरोपितों से ऑटो ड्राइवर की कहासुनी हुई और वो पहले से अपराध करते रहे हैं, फिर मामला साम्प्रदायिक कैसे हो गया? पुलिस के बयान में इसकी चर्चा क्यों नहीं है।

FIR दर्ज होने के भीतर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनका किसी भी हिन्दू संगठन से कोई रिश्ता नहीं निकला है। ऊपर से पुलिस की अनुसंधान में अगर ऐसी कोई बात होती तो पुलिस ने अपने बयान में इस बारे में बताया होता। आरोपित स्थानीय ही हैं। उनकी गाड़ी भी जब्त कर ली गई है।

इससे पहले भी ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जहाँ खास मजहब वालों ने इसी तरह की कहानी बनाई और बाद में झूठ पकड़े जाने पर कहा कि वो जल्दी न्याय के लिए ऐसा कर रहे थे। कभी इस्लामी टोपी उछालने तो कभी जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ बोलने वाली बात कह के सुर्खियाँ तो बटोर ली और बाद में पकड़े गए। उन्हें पता होता है कि मीडिया का एक बड़ा वर्ग ऐसी खबरों को लपकने के लिए ताक में रहता है।

इसी तरह जुलाई 2019 में आज तक और इंडिया टुडे ने खबर चलाई थी कि उत्तर प्रदेश के चंदौली गाँव में खालिद ने जय श्री राम नहीं बोला, तो उसे आग में झोंक दिया गया। मगर चंदौली के एसपी संतोष कुमार सिंह ने इस बारे में बयान जारी करते हुए कहा था कि पुलिस ने खालिद के बयानों में विरोधाभास पाया है। उन्होंने बताया था कि एक चश्मदीद के बयान के मुताबिक, खालिद को किसी समूह ने आग में नहीं झोंका, बल्कि उसने खुद ही आग लगाई थी।

गफ्फार ने थाने में दर्ज कराई शिकायत

इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि जब पीड़ित “हाय, मुझे मेरी मर्ज़ी के खिलाफ ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए मजबूर किया गया” रो दे, तो हिन्दुओं को दुष्ट, साम्प्रदायिक दानव के रूप में दिखाने के लिए तैयार बैठे मीडिया गिद्ध केस को चमका देते हैं।

संस्कृत सिर्फ भाषा नहीं… संस्कृति, विज्ञान, तार्किक क्षमता और अन्य भाषाओं की प्राण भी है

संस्कृत भाषा के महत्व पर शंका करना अपने अस्तित्व पर शंका करने के बराबर है, क्योंकि जब तक मानव है, संस्कृत का महत्व तब तक असीम है। यह केवल वर्तमान भारत भूभाग की ही आधारशिला नहीं, अपितु मानवता की आधारशिला है।

वर्तमान समय में जब भी हम संस्कृत भाषा के महत्व की समीक्षा करते हैं, तब हम अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं के समानांतर इस भाषा को रखकर विचार करते हैं कि जैसे उन भाषाओं के ज्ञाता को धन की उपलब्धि होती है अथवा आजीविका मिलती है तो क्या ऐसा संस्कृत जानने वाले को भी उपलब्ध होगा?

संस्कृत भाषा के इस पक्ष में आई न्यूनता का मुख्य आधार परतंत्र इतिहास और स्वतंत्रता के बाद के शासन की त्रुटि है। इस पक्ष के अतिरिक्त आइए संस्कृत भाषा का महत्व विचारते हैं ।

ज्ञान की आदिमा भाषा

विश्व का सबसे प्राचीनतम उपलब्ध ग्रंथ ऋग्वेद है। यह तथ्य सर्वमान्य है। मैक्समूलर ने यहाँ तक कहा है, “जब तक मानव अपने इतिहास में रुचि लेता रहेगा और जब तक हम अपने पुस्तकालयों तथा संग्रहालयों में प्राचीन युग की स्मृतियों के चिन्ह सँजोए रहेंगे, तब तक मानव जाति के अभिलेखों से भरी-पूरी पुस्तकों की पंक्तियों के बीच पहली पुस्तक ऋग्वेद ही रहेगी।”

अत: मानव जाति के आदिम ग्रंथ की भाषा भी आदिमा है। अर्थात् संसार की प्रथम भाषा संस्कृत भाषा है। भाषा से भावों तथा ज्ञान की अभिव्यक्ति होती है तथा भाषा स्वैच्छिक वाचिक ध्वनि संकेतों की वह पद्धति है, जिसके द्वारा मानव समाज परस्पर विचारों का आदान-प्रदान करता है।

संस्कृत भाषा अन्य भाषाओं की तरह केवल अभिव्यक्ति का साधन मात्र ही नहीं है, अपितु वह मनुष्य के सर्वाधिक संपूर्ण विकास की कुंजी भी है। इस रहस्य को जानने वाले मनीषियों ने प्राचीन काल से ही संस्कृत को देव भाषा और अमृतवाणी के नाम से परिभाषित किया है।

संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं बल्कि संस्कारित भाषा है। इसीलिए इसका नाम संस्कृत है। ऋग्वेद की भाषा विश्व के भाषाई अध्ययन में प्राचीनतम एवं महत्वपूर्ण स्थान रखती है। स्वयं ऋग्वेद में अनेक स्थलों पर भाषा तत्व के गंभीर सिद्धांत, दार्शनिक चिंतन, भाषा की परिशुद्धता, वैज्ञानिकता तथा सूक्ष्मता को जानना आवश्यक बताया गया है।

अत: मानव जाति के आदि स्रोत ग्रंथ को जानने के लिए संस्कृत का महत्व अनंत है। जो व्यक्ति ज्ञान के आदि स्रोत को नहीं जानना चाहता, उसके लिए उसकी भाषा का भी कोई महत्व नहीं है ।

देवताओं की भाषा

देवता शब्द से अभिप्राय है – जो देते हैं या जो प्रकाश वाले हैं “दानाद्वा दीपनाद्वा”। विश्व के आदिम ग्रंथ में प्रकृति के महत्व को बहुत अधिक सूक्ष्मता से बताया गया है। क्योंकि मानव का अस्तित्व प्रकृति के सामंजस्य पर ही निर्भर करता है तथा ज्ञान नैमित्तिक है, मनुष्य उसे प्रकृति से सीखता है। अत: उन ग्रंथों में सृष्टि के हर उस पदार्थ को जो मनुष्य को कुछ देता है, देवता या देव कहकर संबोधित किया गया है।

वेद में सृष्टि की दैवीय शक्तियों का मनुष्य को बोध (ज्ञान) कराया गया है। उस ज्ञान कराने की शैली स्तुति परक है। स्तुति के माध्यम से हम किसी भी पदार्थ के गुण और कर्मों को बताते हैं। वेदों में प्रकृति और उस प्रकृति के संचालक एवं नियामक के स्वरूप को बताया गया है, जो प्रत्येक मनुष्य को जानने योग्य है। संस्कृत भाषा देवों के स्वरूप बताने के कारण देवों की भाषा कहलाती है। प्रकृति और उसके नियामक के स्वरूप को जानने के लिए संस्कृत भाषा का महत्व सर्वदा रहेगा ।

संस्कृति का आधार

संस्कृति का अर्थ है परिमार्जित संस्कारों से युक्त मनुष्यों की सभ्यता। हमारी आत्मा, हमारी अस्मिता, भारत की भारतीयता उसकी संस्कृति में है, जिसका प्राण संस्कृत भाषा है। संस्कृति व्यक्ति के विकास के साथ-साथ आंतरिक विकास की भी बोधक होती है।

इसका लक्ष्य व्यक्ति का विकास और प्रकृति का संतुलन है। भाषा संस्कृति की वाहिका होती है। भारतीय संस्कृति के सभी पक्षों जैसे  ऐतिहासिक, आर्थिक, धार्मिक, प्राकृतिक, राजनैतिक तथा कला, ज्ञान, विज्ञान आदि का सूक्ष्म तथा वास्तविक ज्ञान संस्कृत भाषा के माध्यम से ही हो सकता है।

वैज्ञानिक तथा तार्किक क्षमता वर्धिका

संस्कृत भाषा में वैदिक साहित्य से अतिरिक्त भी अन्य सभी विद्याओं तथा ज्ञान-विज्ञान का बहुत सूक्ष्म अध्ययन उपलब्ध है। संस्कृत हमारे दार्शनिकों, वैज्ञानिकों, गणितज्ञों, कवियों, नाटककारों, व्याकरण आचार्यों आदि की भाषा थी। इसके माध्यम से भारत की उत्कृष्टतम मनीषा, प्रतिभा, अमूल्य चिंतन, मनन, विवेक, रचनात्मक, सर्जना और वैचारिक प्रज्ञा का अभिव्यंजन हुआ है।

व्याकरण के क्षेत्र में पाणिनी और पतंजली (अष्टाध्यायी और महाभाष्य के लेखक) के समतुल्य पूरे विश्व भर में कोई दूसरा नहीं है। खगोलशास्त्र और गणित के क्षेत्र में आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और भास्कर के कार्यों ने मानव जगत को नवीन मार्ग दिखाया। वहीं औषधि के क्षेत्र में चरक और सुश्रुत ने महत्वपूर्ण कार्य किया।

दर्शन के क्षेत्र में गौतम (न्याय व्यवस्था के जन्मदाता) शंकराचार्य बृहस्पति आदि ने पूरे विश्व भर में विस्तृत दार्शनिक व्यवस्था को प्रतिपादित किया है। ये सब ग्रंथ संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता तथा तार्किकता के द्योतक हैं क्योंकि किसी भी विषय को कम से कम शब्दों में सूत्र रूप में कहना उस भाषा की वैज्ञानिकता को बताता है।

संस्कृत भाषा इतनी सक्षम है कि इसमें तकनीकि विचारों को पूरे विशुद्धता, तार्किकता और सुस्पष्टता के साथ व्यक्त किया जा सकता है। विज्ञान में परिशुद्धता कि आवश्यकता होती है, साथ ही विज्ञान को एक लिखित भाषा की जरूरत होती है, जिसमें विचारों को पूरे स्पष्टता और तार्किकता के साथ व्यक्त किया जा सके।

जैसे- अंग्रेजी के ‘A’ से ‘Z’ तक के वर्णों को किसी तार्किक आधार पर व्यवस्थित नहीं किया गया है। इसके पीछे कोई विशेष कारण नहीं है कि F, G से पहले क्यों आता है या P, Q से पहले क्यों आता है? अंग्रेजी के वर्णों को यादृच्छता के आधार पर व्यवस्थित किया गया है। जबकि दूसरी तरफ, पाणिनी ने अपने पहले 14 सूत्रों में संस्कृत भाषा को अत्यंत वैज्ञानिक व तार्किक आधार पर व्यवस्थित किया है।

संस्कृत के अतिरिक्त विश्व की किसी और भाषा के वर्णों को इस तरह से तार्किक व वैज्ञानिक रूप से नहीं रखा गया है। इस तरह से हम देखते हैं कि संस्कृत भाषा में छोटे-छोटे विषयों को कितनी गंभीरता से लिया गया है, बड़े-बड़े विषयों पर कितनी गहराई से चिंतन किया गया होगा।

संस्कृत के बारे में इंग्लैंड के विद्वान और एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल के फोर्ट विलियम के न्यायाधीश सर विलियम जोन्स ने 1786 में कहा था कि संस्कृत भाषा की प्राचीनता जो भी हो, यह एक अद्भुत संरचना है। यह ग्रीक भाषा से अधिक परिपूर्ण, लैटिन भाषा से अधिक समृद्ध और इन दोनों की अपेक्षा अधिक शुद्ध और मनोहारी है।

अत: ऐसी वैज्ञानिक भाषा के अध्ययन से व्यक्ति के मस्तिष्क का विकास होता है।

विश्वकल्याणकारी भाषा

संस्कृत भाषा की एक प्रमुख विशेषता यह है कि वह व्यष्टि से समष्टि को तथा परमेष्टि को जोड़ती है। उसकी प्रत्येक प्रार्थना में विश्व बंधुत्व की भावना व्याप्त है। जो विपुल ज्ञान भंडार संस्कृत में है, उसे देश की प्रगति और मानवता के कल्याण के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।

संस्कृत के बारे में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पुस्तक ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में लिखा है, “यदि कोई मुझसे पूछता है कि भारत के पास बहुमूल्य खजाना क्या है और इसके पास सबसे बड़ी धरोहर क्या है, तो मैं बेहिचक कह सकता हूँ कि वह खजाना संस्कृत भाषा और उसमें निहित समस्त वांगमय है। यह एक महत्त्वपूर्ण विरासत है। यह जब तक सक्रिय रहेगी और हमारे सामाजिक जीवन को प्रभावित करेगी, तब तक भारत की आधारभूत बुद्धिमत्ता बनी रहेगी।”

अन्य भाषाओं की प्राण

संस्कृत भाषा से ही विश्व की अनेक भाषाओं की उत्पत्ति हुई है। विश्व की अधिकांश भाषाओं में संस्कृत भाषा के शब्द मिश्रित हैं, जो उनके व्यावहारिक प्रयोग को सरल करने में सहायक हैं।

संस्कृत भाषा हमारी भारतीय भाषाओं को भी बहुत सशक्त करती है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 251 में स्पष्टत: उल्लेख है कि ‘हम भारतीय भाषाओं को सशक्त करेंगे और भारतीय भाषाओं के विकास और समृद्धि के लिए संस्कृत अहम भूमिका निभाएगी।’

यह संस्कृत की ही विशिष्टता और सुंदरता है कि यदि संस्कृत में ‘आकाश:’ बोलते हैं, तो हिंदी में ‘आकाश’, तेलुगु में ‘आकाशमु’ और कन्नड़ में ‘आकाशवु’ बोलते हैं। इसी प्रकार संस्कृत में यदि ‘भूमि:’ बोलते हैं, तो हिंदी, तेलुगु और कन्नड़ में भी ‘भूमि’ ही बोलते हैं।

संस्कृत से अन्य भारतीय भाषाओं की तुलना करने पर अनेक मौलिक समानताओं को देखा जा सकता है। इस तथ्य को वैश्विक संदर्भ में देखने पर संस्कृत की अनेक पाश्चात्य भाषाओं में अंत: समानताएँ ज्ञात होती हैं।

तुलनात्मक भाषा विज्ञान के अध्ययन में विद्वानों ने संस्कृत की ग्रीक, लैटिन आदि भाषाओं से समानता को प्रदर्शित किया है और संस्कृत भाषा को ही तुलनात्मक भाषा विज्ञान का जनक माना है। अंग्रेजी और संस्कृत में भी अनेक समानताएँ स्पष्टत: दिखाई देती हैं, जिनके आधार पर संस्कृत से अंग्रेजी की उत्पत्ति मान सकते हैं।

जैसे माँ को संस्कृत में ‘मातर’ बोलते हैं तो अंग्रेजी में उसी को ‘मदर’ बोलते हैं। बेटी को संस्कृत में ‘दुहितर’ बोलते हैं, तो अंग्रेजी में ‘डॉटर’ बोलते हैं। इस प्रकार से देखा जाए, तो दुनिया की दर्जनों भाषाओं में संस्कृत का विपुल शब्द भंडार व्याप्त है।

इस प्रकार संस्कृत भाषा और इसके समृद्ध साहित्य का महत्व सहज ही स्पष्ट हो जाता है। प्राचीनता, अविच्छिन्नता, वैज्ञानिकता, व्यापकता, धार्मिक व सांस्कृतिक मूल्य तथा कलात्मक दृष्टि से ही नहीं अपितु धर्म व दर्शन के विचारात्मक अध्ययन की दृष्टि से भी संस्कृत भाषा का अपना निजी महत्त्व है।