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वृंदावन-मथुरा में कॉरिडोर, माँ विंध्यवासिनी-अष्टभुजा सहित कई मंदिरों का होगा विकास: योगी सरकार ने पेश किया UP का सबसे बड़ा बजट, मेधावी छात्राओं को मिलेगी स्कूटी

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने गुरुवार (20 फरवरी 2025) को विधानसभा में बजट पेश किया। उत्तर प्रदेश सरकार ने 8 लाख 8,736 करोड़ रुपए के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक पेंशन, गरीब, युवा, किसान, धार्मिक पर्यटन और महिलाओं के उत्थान पर फोकस रखा है। यह बजट उत्तर प्रदेश सरकार का अब तक सबसे बड़ा बजट है, जो पिछले साल के मुकाबले 9.8 प्रतिशत अधिक है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025-26 के अपने बजट में राज्य में टेक्सटाइल पार्क की स्थापना के लिए 300 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। प्रदेश सरकार ने ‘जीरो पॉवर्टी अभियान’ (गरीबी उन्मूलन अभियान) शुरू किया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक गाँव से निर्धनतम परिवारों को चिह्नित करके उनकी आय को कम-से-कम 1,25,000 रुपए सालाना किया जाएगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में वित्त सुरेश खन्ना ने बजट में चार नए एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से गंगा एक्सप्रेस-वे को जोड़ने के लिए 900 करोड़ रुपए की लागत से नए एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा। गंगा एक्सप्रेस-वे को प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, सोनभद्र से जोड़ा जाएगा। इस विंध्य एक्सप्रेस-वे के लिए 50 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

वहीं, मेरठ को हरिद्वार से जोड़ने के लिए गंगा एक्सप्रेस-वे का विस्तारित एक्सप्रेस–वे बनाया जाएगा। इसके लिए भी 50 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इसके अलावा, बुंदेलखंड-रीवा एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए भी बजट में 50 करोड़ रुपए तय किए गए हैं। इसके साथ ही प्रदेश सरकार 58 नगरपालिकाओं को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की है। इसके लिए बजट में प्रावधान किए गए हैं।

छात्रों और युवाओं के लिए खास प्रावधान

योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल के चौथे बजट में प्रतिभाशाली छात्राओं को फ्री में स्कूटी देने का पहली बार ऐलान किया गया है। युवाओं को पहले से दी जा रही स्मार्टफोन और टैबलेट वाली योजना जारी रहेगी। वहीं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए हर जिले में ‘मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना’ के तहत कोचिंग सेंटर खोला जाएगा। वहीं, युवाओं को ब्याजमुक्त लोन दिया जाएगा।

बजट में ‘एक जनपद एक खेल’ योजना की शुरुआत की गई है। इसके लिए राज्य सरकार सभी 72 जिलों में ‘खेलो इंडिया’ सेंटर बनाएगी। इसके अलावा, वाराणसी में क्रिकेट स्‍टेडियम बनाने की घोषणा की गई है। वाराणसी के ही सिगरा स्टेडियम को भी डेवलप किया जा रहा है। प्रदेश स्तर पर एक खेल विश्वविद्यालय का निर्माण मेरठ में किया जा रहा है।

इस खेल विश्वविद्यालय के लिए 223 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। राज्य के राजकीय पॉलीटेक्निकों में स्मार्ट क्लासेज तथा पूर्णतया डिजिटल लाईब्रेरी की स्थापना की। इसके साथ ही बजट में हर साल 1 लाख नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। लखनऊ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी बनाने का ऐलान भी किया गया है।

धार्मिक पर्यटन का भी रखा गया ख्याल

राज्य के पर्यटन क्षेत्र को विस्तार करने के लिए मथुरा-वृंदावन कॉरिडोर के लिए 150 करोड़ रुपए का भी प्रावधान किया है। मिर्जापुर के त्रिकोणीय क्षेत्र में माँ विन्ध्यवासिनी मन्दिर, माँ अष्टभुजा मन्दिर, माँ काली खोह मन्दिर के परिक्रमा पथ एवं जनसुविधा स्थलों को विकसित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार ने 200 करोड़ रुपए देने का प्रावधान किया है।

इसके साथ ही संरक्षित मन्दिरों के जीर्णोद्वार और पुनर्निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। सीतापुर के नैमिषारण्य में वेद विज्ञान केंद्र की स्थापना की जाएगी और इसके लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए 2,000 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

वन ट्रिलियन इकॉनमी पर जोर

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर बनाने का लक्ष्य रखा है। इस के लिए राज्य सरकार द्वारा 10 सेक्टर- कृषि एवं संवर्गीय सेवाएँ, इंफ्रा, उद्योग, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, पर्यटन, नगर विकास, वित्तीय सेवाएँ, ऊर्जा, पूँजी निवेश क्षेत्र में कार्य योजना तैयार की गई है।

वित्तमंत्री ने खन्ना ने बताया कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए 4% बजट आवंटित किया गया है, जिसमें पेंशन, छात्रवृत्ति आदि शामिल हैं। रोजगार सृजन के लिए मनरेगा, कौशल विकास मिशन, युवा उद्यमी विकास अभियान आदि के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 6% बजट का प्रावधान है। इसमें आयुष्मान भारत योजना, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन आदि शामिल है।

किसानों को आर्थिक सहायता, फसल बीमा, सोलर पंप योजना, गन्ना मूल्य भुगतान आदि के लिए 11% बजट आवंटित किया गया है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में उत्तरोत्तर विकास के लिए शिक्षा क्षेत्र के लिए 13% बजट आवंटित किया गया है। इसमें स्कूलों में आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लासेस, पॉलिटेक्निक संस्थानों में डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की योजना आदि शामिल है।

‘शीशमहल’ में नहीं रहेंगी दिल्ली की नई CM रेखा गुप्ता: केजरीवाल के ‘भ्रष्टाचार’ से खड़ी इमारत बनेगी म्यूजियम, 8 मार्च को महिलाओं के खाते में पहुँच जाएगा ₹2500

दिल्ली की नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़े ऐलान किए हैं। उन्होंने सीएम पद की शपथ लेने से पहले ही बता दिया कि भाजपा ने चुनाव के वक्त जो वादे किए थे उन्हें हर हाल में पूरा किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि चुनाव से पहले 2500 रुपए की धनराशि महिलाओं को देने की बात कही गई थी, उसकी पहली किस्त अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जारी की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने ‘शीशमहल’ पर भी बड़ा बयान दिया।

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा 2500 रुपए की पहले किस्त आठ मार्च तक दिल्ली की महिलाओं के खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करना दिल्ली में बीजेपी के सभी 48 विधायकों की जिम्मेदारी है। सभी वादों को पूरा करेंगे, जिसमें महिलाओं को दी जाने वाली सहायता राशि भी शामिल है।

दिल्ली की नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उस आधिकारिक आवास में भी रहने से मना किया है जिसे अरविंद केजरीवाल ने ‘शीशमहल’ में बदल दिया था। उन्होंने साफ किया कि वे अरविंद केजरीवाल द्वारा खड़े किए गए शीशमहल में नहीं रहेंगी और उसे संग्रहालय बनाएँगी। उन्होंने कहा- “हम शीशमहल को म्यूजियम बनाएँगे… हम उन सभी वादों को पूरा करेंगे जो पीएम मोदी ने किए हैं। इस पद के लिए मुझे चुने जाने के लिए मैं आभार व्यक्त करती हूँ।”

बता दें कि दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय थी। इस बार, महिला मतदाताओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ते हुए मतदान में अधिक सक्रियता दिखाई। आँकड़ों के अनुसार, महिला मतदाता टर्नआउट 60.92% रहा, जबकि पुरुषों का टर्नआउट 60.21% था।

इसके अलावा महिलाओं ने 40 सीटों पर पुरुषों की तुलना में अधिक मतदान किया। इनमें से भाजपा ने 29 सीटों पर जीत हासिल की, जो दर्शाता है कि पार्टी ने महिला मतदाताओं को साधने के लिए प्रभावी रणनीतियाँ अपनाई थीं। भाजपा द्वारा महिलाओं के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

70 ईसाइयों को अगवा कर चर्च में ले गए ISIS आतंकी, रेत दिया गला… 7 साल में 6000+ मार डाले गए: जानिए कैसे इस्लामी खिलाफत के लिए हो रहा ‘काफिरों’ का कत्लेआम

अफ़्रीकी देश कांगो में इस्लामी आतंकियों का उत्पात लगातार जारी है। कांगो में ISIS के आतंकी लगातार ईसाइयों को निशाना बना रहे हैं और काफिर होने के चलते उनकी हत्या कर रहे हैं। उन्होंने एक चर्च में गए 70 ईसाइयों की हाल ही में हत्या कर दी। कई का गला रेत दिया गया। 2025 के पहले महीने में ही कांगो में इस्लामी आतंकियों ने 80 से अधिक ईसाई मौत के घाट उतार दिए थे। कांगो में जारी अस्थिरता के बीच यहाँ रहने वाले ईसाइयों के लिए जीना मुहाल हो गया है।

72 का गला रेत कर मारा

दुनिया भर में प्रताड़ित ईसाइयों के लिए काम करने वाली एक संस्था ओपन डोर्स के अनुसार, 13 फरवरी, 2025 को इस्लामिक स्टेट (ISIS) के साथ जुड़े लड़ाकों ने लुबेरो इलाके में हमला कर दिया। यहाँ एक गाँव को घेर कर यह 20 महिलाओं और पुरुषों का अपहरण कर ले गए।

जब यहाँ के गाँव वालों ने इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन किया तो यह इस्लामी लड़ाके फिर आ गए और 50 और लोगों को उठा ले गए। इसके बाद इन्हें दूसरे एक इलाके में चर्च के भीतर ले जाया गया। इसके बाद यहाँ इनकी गला रेत कर हत्या कर दी गई।

घटना के बाद यहाँ रहने वाले कई ईसाई अपना घर छोड़ कर भाग गए हैं। कई ईसाइयों का अंतिम संस्कार तक नहीं हो पाया है। ईसाइयों की हत्या करने वाले इस्लामी लड़ाके खुला घूम रहे हैं। हालाँकि, कांगो के भीतर ईसाइयों पर यह कोई पहला हमला नहीं है।

ISIS के आतंकी बना रहे निशाना

ईसाइयों के लिए काम करने वाले एक और संगठन बार्नबास एड के अनुसार, जनवरी 2025 में ही 89 ईसाइयों की हत्या कांगो में की गई है। यह हत्याएँ ISIS ने ही की हैं। ज्यादातर हत्याएँ इतुरी और उत्तरी कीवू राज्य में की गई हैं। यह राज्य बीते कई सालों से हिंसाग्रस्त हैं।

इसी संस्था के अनुसार, 2017 से लेकर अब तक कम से कम 6 हजार ईसाइयों की हत्या ISIS कांगो के भीतर कर चुका है। ISIS के आतंकी यहाँ गाँवों पर हमला करके लोगों का अपहरण करते हैं और मार देते हैं। यह लोगों के घरों में भी आग लगा देते हैं।

कांगो में क्रिसमस, 2024 के बाद से 200 से अधिक ईसाई अलग-अलग हमलों में मारे जा चुके हैं। इस्लामी आतंकियों के निशाने पर ईसाइयों को मदद पहुँचाने वाले संगठन भी हैं। 7 फरवरी, 2025 को ही एक एजेंसी के 3 ईसाई कार्यकर्ताओं को मार दिया था। 10 फरवरी, 2025 को 50 ईसाइयों को मार दिया गया था।

95% ईसाई, फिर भी प्रताड़ना

कांगो एक ईसाई बहुल देश है, फिर भी वही इस देश में प्रताड़ित किए जा रहे हैं। कांगो की आबादी 10 करोड़ से अधिक है। इसमें से लगभग 95% आबादी ईसाई है। हालाँकि, इन ईसाइयों पर कांगों और आसपास के देशों से आने वाले इस्लामी आतंकी लगातार हमले करते हैं।

दरअसल, कांगो लम्बे समय से गृह युद्ध में फंसा हुआ है। कांगो की सरकार के खिलाफ M23 नाम के एक विद्रोही समूह ने हथियार उठा रखे हैं। M23 लगातार कांगो के भीतर हमले कर रहा है और बड़े इलाकों में अपने कब्जे स्थापित कर रहा है। कांगों की सरकार का आरोप है कि M23 समूह को पड़ोसी देश रवांडा का समर्थन प्राप्त है।

फरवरी, 2025 तक M23 समूह उत्तरी कीवू में कई शहरों और बड़े इलाके पर कब्जा जमा चुका है। M23 और सरकार के बीच की लड़ाई में ISIS के लड़ाके ईसाइयों को प्रताड़ित कर रहे हैं। उनका प्रभाव भी उन इलाकों में अधिक है, जहाँ यह लड़ाई जोर-शोर से चल रही है। कांगो के ईसाई समूह लगातार विद्रोही लड़ाके और सरकार के बीच बातचीत के प्रयासरत हैं।

इस्लामी खिलाफत बनाना चाहता है IS

अमेरिकी सरकार के अनुसार, कांगो में ISIS के आतंकी खिलाफत का राज्य कायम करना चाहते हैं। कांगों में इनकी हरकतें 2019 में तेज हुई थीं। तब इन्होने सरकार के विद्रोही के तौर पर लड़ाई लड़ना चालू की थी और लगातार हमले करते थे।

जल्द ही इन आतंकियों को सीरिया में बैठे ISIS के बड़े आतंकियों की मुहर मिल गई। इन्हें कांगो में ISIS का राज स्थापित करने के लिए कहा गया। बताया जाता है कि कांगो में लगभग 2000 ISIS लड़ाके मौजूद हो सकते हैं। हालाँकि, इनकी ठीक-ठीक संख्या का अंदाजा किसी को नहीं है।

कांगो ISIS आतंकी पड़ोसी देश युगांडा में भी हमले करते हैं। यह सीधे हमले करने के साथ ही IED धमाके करना भी सीख गए हैं। इनका मुखिया सेका मूसा बुलाकू नाम का एक आतंकी है। वहीं मेड्डी नाम का एक आतंकी इनके मिलिट्री ऑपरेशन देखता है।

कांगो के ईसाई बहुल देश होने के चलते ISIS के निशाने पर यही लोग रहते हैं। कांगो में इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थिति ठीक नहीं है और सरकारी सुरक्षा एजेंसियाँ भी मजबूत नहीं हैं। ऐसे में ISIS आतंकी जिस इलाके को चाहें, निशाना बनाते हैं और हमला करने के बाद भाग जाते हैं।

दलित बच्ची की चीख सुनाई नहीं पड़े, इसलिए मुँह में कपड़ा ठूँस रेप करता था फैजल, दाँतों से काटता था प्राइवेट पार्ट: दोस्तों के सामने भी परोसा, राजस्थान की पीड़िता ने डेढ़ साल भोगी दरिंदगी-ब्लैकमेलिंग

राजस्थान के कुख्यात अजमेर स्कैंडल की तरह की ब्यावर से भी एक मामला आया है, जहाँ लड़कियों को ब्लैकमेल करके दूसरी हिंदुओं लड़कियों को लाने के लिए मुस्लिम लड़के दबाव डालते थे। इसी से मिलता-जुलता एक और मामला राजस्थान के टोंक जिले से आया है, जहाँ एक मुस्लिम ने हिंदू दलित समुदाय की नाबालिग लड़की को ब्लैकमेल कर महीनों तक रेप किया और फिर उसे अपने दोस्तों से भी रेप करवाया।

दरअसल, राजस्थान के टोंक जिले की रहने वाली नाबालिग दलित लड़की सोशल मीडिया इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करती है। करीब डेढ़ साल पहले इंस्टाग्राम के जरिए वह नाबालिग मुस्लिम आरोपित फैजल अकरम (बदला हुआ नाम) के संपर्क में आई। फैजल ने नाबालिग के इंस्टाग्राम पर मैसेज करके उसकी वीडियो की तारीफ करने लगा। 14 साल की नाबालिग लड़की ने थैंक यू कहकर उसका जवाब दिया।

अब फैजल मैसेज करके उसे अपने झाँसे में लेने लगा। धीरे-धीरे दोनों में बातचीत होने लगी। इसी दौरान फैजल ने नाबालिग लड़की से उसका मोबाइल नंबर माँगा और दोनों में बातचीत होते-होते दोस्ती हो गई। कुछ समय बाद वह लड़की से मिलने का दबाव बनाने लगा। वह लड़की के घर के आसपास उससे मिलने के लिए आने लगा। इस दौरान वह लड़की से बेहद सभ्य तरीके से पेश आता था।

इसी बीच उसने लड़की को बहका कर उसका एक आपत्तिजनक वीडियो माँग लिया। जब लड़की ने मना किया तो वह तमाम तरह के झाँसे दिए। उसकी बातों में आकर नाबालिग लड़की ने अपनी कुछ आपत्तिजनक वीडियो बनाया और उसे फैजल के मोबाइल और स्नैपचैट अकाउंट पर भेज दिया। लड़की का आपत्तिजनक वीडियो हाथ लगते ही फैजल का व्यवहार बदल गया। वह लड़की को ब्लैकमेल करने लगा।

वह नाबालिग को धमकाता कि अगर वह उसे रुपए नहीं देगी तो उसका आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा। ब्लैकमेल से सदमे में आई नाबालिग लड़की ने उसे चार हजार रुपए दिए। इसके बाद भी फैजल ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। वह पैसे के लिए नाबालिग दलित लड़की को बार-बार प्रताड़ित करता। लोक-लाज के डर से लड़की परिजनों से किसी बहाने से पैसे माँगती और आरोपित को दे देती।

यह मामला सिर्फ पैसे तक ही सीमित नहीं था। उसने आपत्तिजनक वीडियो के जरिए पीड़िता से कई बार रेप भी किया और उसका भी वीडियो बनाया। पीड़िता का कहना है कि रेप के दौरान आरोपित फैजल ने उसके मुँह में कपड़ा ठूँस देता था, ताकि उसकी चीख किसी को सुनाई ना दे। इस दौरान वह लड़की को तरह-तरह से प्रताड़ित करता था। एक बार तो फैजल ने उसके प्राइवेट पार्ट को अपनी दाँतों से काट डाला।

इस दौरान वह उसकी मानने के लिए लड़की को कई तरह से धमकाता भी था। एक दिन फैजल ने 8वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग पीड़िता को पिस्तौल के साथ अपनी फोटो भेजी और धमकी दी कि अगर उसने इसके बारे में किसी को बताया वह पीड़िता और उसके परिवार को मार डालेगा। इस तरह फैजल लड़की को डरा-धमकाकर अपने लगभग डेढ़ साल तक अपने दबाव में रखा।

जब लड़की से रेप करके आरोपित का मन भर गया और पैसे मिलने भी बंद हो गए तो उसने पीड़िता की आपत्तिजनक वीडियो अपने दोस्त अरबाज को भेज दी। अब अरबाज पीड़िता को फोन करके परेशान करने लगा और वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगा। वह पीड़िता को धमकाता था कि उसके साथ भी शारीरिक संबंध बनाए नहीं तो वह आपत्तिजनक वीडियो वायरल कर देगा।

पीड़ित लड़की के पिता ने दैनिक भास्कर को बताया कि एक दिन उसकी बेटी कहीं जा रही थी। रास्ते में अरबाज मिला और उसने उसकी बेटी को जबरन अपनी कार में बैठा लिया और एक कैफे में ले जाकर उसके साथ रेप किया। यह मामला ऐसे ही चलता रहा। इसके बाद अरबाज ने इन आपत्तिजनक वीडियो को अपने दो अन्य दोस्तों को भेज दिया। उसके ये दोनों दोस्त भी नाबालिग पर संबंध बनाने के लिए दबाव डालने लगे।

एक दिन अरबाज के दोनों दोस्तों ने उसे जबरन कार में बैठाया और बनास नदी हाईवे पर ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया। इस उत्पीड़न से तंग आकर लड़की ने सबका नंबर ब्लॉक कर दिया। इसका मुख्य आरोपित फैजल ने पीड़िता को फिर से धमकाना शुरू कर दिया और एक दिन अपने मोपेड पर बैठाकर एक निर्माणाधीन मकान में ले गया और वहाँ दो अन्य दोस्तों के साथ उसका गैंगरेप किया ये दोनों भी उसकी तरह ही नाबालिग थे।

कुछ दिन के बाद आरोपितों ने पीड़िता की आपत्तिजनक वीडियो उसके भाई को स्नैपचैट अकाउंट पर भेज दिया। 13 फरवरी 2025 को पीड़िता के भाई को यह वीडियो मिला तो इस मामले का खुलासा हुआ। भाई ने आरोपित से अश्लील वीडियो हटाने की विनती की, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद पीड़िता के पिता ने थाने में जाकर मामला दर्ज कराया। पुलिस ने पीड़िता का 164 के तहत बयान दर्ज करा लिया है।

इस तरह लगभग डेढ़ साल में अरबाज सहित कम-से-कम 6 नाबालिगों ने पीड़िता से हजारों रुपए ठगे और ब्लैकमेल करके बार-बार रेप और गैंगरेप किया। इससे पीड़िता सदमे में आ गई, लेकिन लोक-लाज के भय से उसने यह किसी को नहीं बताई। एसपी विकास सांगवान ने बताया कि पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है। जाँच के बाद ही तय होगा कि गिरफ्तारी करनी है या नहीं।

जो चाहता था हिंदुओं के खिलाफ ‘सशस्त्र जिहाद’, जिसके लिए 1857 की क्रांति ‘हरा₹’, उसे ‘सुधारवादी’ बता पेश कर रहा था शोएब चौधरी: दूरदर्शन ने दिखाने से किया इनकार, जानिए क्या है मामला

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमद पर बनी पहली बायोपिक को दूरदर्शन ने प्रसार भारती ओटीटी पर प्रसारित करने से मना कर दिया। इस बायोपिक के निर्माता नायब शोएब चौधरी हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रसार भारती के प्रोग्राम एग्जिक्यूटिव ने उनसे कहा,

“मुझे आपको यह सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि सर सैयद अहमद खान पर आधारित कार्यक्रम की पेशकश करने वाला आपका प्रस्ताव पीबी यानी प्रसार भारती ओटीटी आगामी प्लेटफॉर्म पर रेवेन्यू शेयरिंग मोड (RSM) के तहत प्रसारण/स्ट्रीम के लिए योग्य नहीं हो सका।”

इस कारण को सुन शोएब बोले-

“मैंने डीडी के लिए जो धारावाहिक बनाया था, वह डीडी के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चला. यह चौंकाने वाला है कि एक प्रमुख सुधारवादी और शिक्षाविद् सर सैयद पर मेरी बायोपिक नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीमिंग के लिए अयोग्य करार दी गई। ऐसा लगता है कि डीडी ने अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए मेरे प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।”

सर सैयद अहमद खान की विचारधारा और बँटवारा

बता दें कि जिन ‘सर सैयद अहमद खान’ को प्रमुख सुधारवादी बताकर उनकी जीवनी को लोगों के आगे लाने के प्रयास हो रहे हैं, वही सर सैयद अहमद खान एक समय में 1857 की क्रांति को अंग्रेजों के सामने ‘हरामजदगी’ बताया था। उन्होंने क्रांति के दौरान अंग्रेजों की नजर में मजहब विशेष के लिए ‘दया’ पैदा करने के लिए सर सैयद अहमद ने राय दी थी कि अंग्रेजों को अपने राजकाज में मुस्लिमों की भर्ती करनी चाहिए जिससे इस तरह की ‘हरामजदगी’ फिर न हों।

इतना ही नहीं, विभाजन के समय हुए भीषण रक्तपात और नरसंहार की नींव सर सैयद बहुत पहले ही रख चुके थे। उन्होंने मुस्लिम हितों का स्वतंत्र और अलग तरीके से विचार करना शुरू किया। उनका सिद्धांत द्विराष्ट्र से भी ज्यादा भयानक था क्योंकि वो चाहते थे कि एक देश दूसरे को जीतकर अपनी सत्ता विकसित करे।

वर्ष 1888 को मेरठ में दिए अपने भाषण (Allahabad: The Pioneer Press, 1888 में प्रकाशित) में उन्होंने कहा था- 

“सबसे पहला सवाल यह है कि इस देश की सत्ता किसके हाथ में आने वाली है? मान लीजिए, अंग्रेज अपनी सेना, तोपें, हथियार और बाकी सब लेकर देश छोड़कर चले गए तो इस देश का शासक कौन होगा? उस स्थिति में यह संभव है क्या कि हिंदू और मुस्लिम कौमें एक ही सिंहासन पर बैठें? निश्चित ही नहीं। उसके लिए ज़रूरी होगा कि दोनों एक दूसरे को जीतें, एक दूसरे को हराएँ। दोनों सत्ता में समान भागीदार बनेंगे, यह सिद्धांत व्यवहार में नहीं लाया जा सकेगा।”

उन्होंने आगे कहा- 

“इसी समय आपको इस बात पर ध्यान में देना चाहिए कि मुस्लिम हिंदुओं से कम भले हों मगर वे दुर्बल हैं, ऐसा मत समझिए। उनमें अपने स्थान को टिकाए रखने का सामर्थ्य है। लेकिन समझिए कि नहीं है तो हमारे पठान बंधू पर्वतों और पहाड़ों से निकलकर सरहद से लेकर बंगाल तक खून की नदियाँ बहा देंगे। अंग्रेज़ों के जाने के बाद यहाँ कौन विजयी होगा, यह अल्लाह की इच्छा पर निर्भर है। लेकिन जब तक एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र को जीतकर आज्ञाकारी नहीं बनाएगा तब तक इस देश में शांति स्थापित नहीं हो सकती।”

फिर समुदाय विशेष के कट्टरपंथियों को भड़काते हुए उन्होंने कहा-

“जैसे अंग्रेज़ों ने यह देश जीता वैसे ही हमने भी इसे अपने अधीन रखकर गुलाम बनाया हुआ था। वैसा ही अंग्रेज़ों ने हमारे बारे में किया हुआ है। …अल्लाह ने अंग्रेज़ों को हमारे शासक के रूप में नियुक्त किया हुआ है। …उनके राज्य को मज़बूत बनाने के लिए जो करना आवश्यक है उसे ईमानदारी से कीजिए। …आप यह समझ सकते हैं मगर जिन्होंने इस देश पर कभी शासन किया ही नहीं, जिन्होंने कोई विजय हासिल की ही नहीं, उन्हें (हिंदुओं को) यह बात समझ में नहीं आएगी। मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि आपने बहुत से देशों पर राज्य किया है। आपको पता है राज कैसे किया जाता है। आपने 700 साल भारत पर राज किया है। अनेक सदियाँ कई देशों को अपने आधीन रखा है। मैं आगे कहना चाहता हूँ कि भविष्य में भी हमें किताबी लोगों की शासित प्रजा बनने के बजाय (अनेकेश्वरवादी) हिंदुओं की प्रजा नहीं बनना है।”

उनके इन्हीं बयानों और विचारों को देख-सुन मौलाना आज़ाद ने एक बार अपने भाषण में सर सैयद अहमद खान के राजनीतिक विचारों को हिंदुस्तान के लिए सबसे बड़ी ग़लती बताया था। उन्होंने कहा था कि शिक्षा और सामाजिक कार्यों की आड़ में सैयद अहमद खान ने जो राजनैतिक एजेंडा चलाया, उसके लिए वे उन्हें कभी माफ़ नहीं कर पाएँगे। मौलाना आजाद का विचार था कि सैयद अहमद खान के विचारों ने भारतीय मुसलमानों के एक धड़े को ग़लत दिशा में सोचने पर उकसा दिया और जिसका परिणाम बँटवारा था।

छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा के पास खड़े ओवैसी की तस्वीर, शिव जयंती की शुभकामना वाला संदेश: AIMIM के पूर्व सांसद को भाई जान भी कर रहे जलील, कहा- अच्छा हुआ तुम हार गए

औरंगाबाद से एआईएमआईएम पार्टी के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील पर इस्लामी कट्टरपंथी भड़के हुए हैं। हाल में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में वह छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने अपनी पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के संग खड़े दिखे और कैप्शन में लिख दिया- “शिव जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ।” उनके इसी कैप्शन को पढ़ मुस्लिम उनसे नाराज हो गए और पोस्ट के नीचे ही उन्हें गाली दी जाने लगी।

एक यूजर ने इम्तियाज जलील को ‘जलील’ कहा। दूसरे ने कहा कि इस आदमी को औरंगाबाद से हराकर जनता ने अच्छा किया।

जैद नाम के यूजर ने उन्हें लिखा- इम्तियाज भाई धोबी का गधा न घर का होता है न घाट का। एक कट्टर मुस्लिम ने कॉमेंट करते हुए कहा- कुफ्रिया कयादत से मुसलमान उम्मीद लगाए बैठे हैं, मुसलमान दीन भुलाए बैठे हैं।

युसूफ नाम के यूजर ने लिखा- ऐसे सियासतदानों से मुस्लिमों की हिफाजत करें।

मुहम्मद शाहीन ने लिखा- वाह री खयादत। शिर्कियत को किस हठधर्मी से प्रमोट किया जा रहा है।

ताब ए सुखान नाम का यूजर कहता है सीट हारकर भी अक्ल नहीं आई इसको।

बता दें कि इस्लाम में मूर्ति पूजा गुनाह माना जाता है और अल्लाह के अलावा किसी अन्य को ईश्वर नहीं माना जाता। यही वजह है कि जब कट्टर मुस्लिम छवि वाले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के साथ इम्तियाज जलील ने थोड़ा सा सेकुलरिज्म दिखाते हुए सोशल मीडिया पर फोटो डाली और उस पर शिव जयंती की शुभकामनाएँ लिखी तो लोग भड़क गए। उन्होंने इम्तियाज जलील के न केवल सांसद चुने जाने पर सवाल खड़ा किया बल्कि मुसलमान होने पर भी सवाल उठाया।

नरेंद्र मोदी का तख्तापलट करना चाहता था अमेरिका: बायडेन प्रशासन की ‘साजिश’ से डोनाल्ड ट्रम्प ने उठाया पर्दा, कहा- भारत के पास बहुत पैसा, फिर ‘वोटर टर्न आउट’ बढ़ाने को क्यों दें ₹180 करोड़

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बायडेन की सरकार भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा किसी और को लाना चाहती थी। यह आरोप अमेरिका वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सार्वजनिक सभा में लगाया है। उन्होंने USAID के $21 मिलियन (लगभग ₹182 करोड़) भारत में चुनाव के नाम पर भेजने को लेकर यह बात कही है। ट्रम्प ने कहा है कि हमें भारत को जवाब को देना पड़ेगा।

मियामी में एक समिट में डोनाल्ड ट्रम्प ने पूर्ववर्ती सरकार USAID के नाम पर अनर्गल पैसा बहाने का आरोप लगाया। ट्रम्प ने कहा, “$21 मिलियन वोटर प्रतिशत बढ़ाने को भारत में दिए गए। हमें भारत में $21 मिलियन डॉलर वोटर टर्नआउट के लिए खर्च करने की क्या जरूरत है? मुझे लगता है कि वो किसी और को चुनाव जिताने की कोशिश कर रहे थे।”

डोनाल्ड ट्रम्प ने आगे कहा. “हमें भारत सरकार को इस विषय में जवाब देना पड़ेगा क्योंकि जब रूस ने हमारे चुनाव में $2 हजार (₹1 लाख 70 हजार) कथित तौर पर खर्च कर दिए थे तो यह बड़ा मुद्दा था। उन्होंने इन्टरनेट पर कुछ विज्ञापन लगाए थे। ये बहुत बड़ा खुलासा है।”

राष्ट्रपति ट्रम्प के इस बयान में सीधे तौर बायडेन प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया गया है। ट्रम्प का आरोप है कि बायडेन प्रशासन भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा किसी और को चुनाव जितवाना चाहता था। राष्ट्रपति ट्रम्प के इस बयान से भारत के लोकसभा चुनावों में विदेशी दखलअंदाजी की पुष्टि भी हो गई है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने इससे पहले भी USAID द्वारा दिए गए इस पैसे को लेकर प्रश्न उठाए थे। उन्होंने कहा, “हम भारत को 21 मिलियन डॉलर क्यों दे रहे हैं? उनके पास बहुत पैसा है। हमारे हिसाब से वे दुनिया में सबसे ज़्यादा टैक्स लगाने वाले देशों में से एक हैं, हम वहाँ मुश्किल से व्यापार कर पाते हैं क्योंकि उनके यहाँ टैरिफ अत्यधिक हैं।”

इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग के पूर्व अधिकारी रहे माइक बेंज ने कहा था कि उनके पास USAID के भारत और बांग्लादेश में चुनावी दखल देने के सबूत हैं। उन्होंने कहा था कि अमेरिकी एजेंसियाँ लोकतंत्र के बढ़ावे के नाम पर दूसरे देशों के चुनाव प्रभावित करती हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान एलन मस्क की अगुवाई वाले विभाग DOGE के खुलासे के बाद आया है। DOGE ने ही यह बताया था कि USAID ने वोटर भागीदारी बढाने के नाम पर $21 मिलियन भारत भेजे। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ भाजपा बायडेन प्रशासन के अंतिम दिनों में ऐसे ही आरोप लगा चुकी है।

भाजपा ने कहा था कि अमेरिकी विदेश विभाग और डीप स्टेट प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ एजेंडा चलाने में जुटे हैं और उनकी छवि को धूमिल करना चाहते हैं। भाजपा ने कहा था कि अमेरिकी सरकार के अलग-अलग विभाग मीडिया के सहारे प्रधानमंत्री मोदी पर बिना सबूत के आरोप लगा रहे हैं।

भाजपा ने आरोप लगाया था कि डीप स्टेट भारत को अस्थिर करना चाहता है। इसको लेकर अमेरिका ने आपत्ति जताई थी।

‘ये लोग (हिन्दू) वहाँ क्या करने गए थे, किताब (हनुमान चालीसा) खोलकर नौटंकी करते हैं’: जमुई में पत्थरबाजी पर बोले नीतीश कुमार के मंत्री सुमित सिंह, पूछा- पाठ करने का लाइसेंस लिया था?

जमुई के बलियाडीह गाँव में 16 फरवरी 2025 को हनुमान चालीसा पाठ कर लौट रहे लोगों पर मस्जिद के पास हमला हुआ था। मुस्लिम भीड़ की पत्थरबाजी के बाद प्रशासन को इंटरनेट बंद करना पड़ा था। अब इस घटना पर बिहार की नीतीश कुमार सरकार के मंत्री सुमित सिंह का बयान सामने आया है।

उन्होंने पूछा है कि हनुमान चालीसा पाठ करने के लिए कोई अनुमति क्यों नहीं ली गई थी? साथ ही यह भी पूछा है कि हिन्दू वहाँ क्या करने गए थे? बिहार की चकाई सीट से निर्दलीय विधायक और राज्य सरकार में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मामलों के मंत्री सुमित सिंह ने कहा, “यहाँ पर कुछ उन्मादी लोग माहौल बिगाड़ रहे थे। फर्जी तरीके से कहीं जाकर उलटा-पुल्टा काम करना, इसका कोई औचित्य नहीं है। असमय कोई भी काम करेंगे तो उसका परिणाम बुरा होता है।”

उन्होंने आगे कहा, “असमय जाकर हनुमान चालीसा पढ़ने लगिएगा, कोई रोक थोड़े है पढ़ने पर। हमसे बड़े हनुमान जी कि भक्त थोड़े हैं, जो लोग गए थे… ये सब जो नौटंकी करते हैं किताब खोल कर एकदम चिल्ला कर, ऐसे हनुमान चालीसा नहीं पढ़ी जाती है।”

सुमित सिंह ने पूछा, “आप वहाँ पर क्यों गए थे? आप वहाँ पर क्या करने गए थे? और अगर आप वहाँ पर गए थे तो क्या आपने प्रशासन को इसकी सूचना दी थी क्या? आपने इसका लाइसेंस लिया था? हम घर में कहीं भी कोई जागरण करते हैं या कुछ करते हैं उसके लिए लाइसेंस लिया जाता है।”

कैबिनेट मंत्री सुमित सिंह ने यह बयान जमुई के बलियाडीह गाँव में रविवार (16 फरवरी, 2025) को हुई घटना के बाद दिया है। बलियाडीह में एक हिन्दू संगठन के कुछ कार्यकर्ता एक मंदिर पर हनुमान चालीसा पढ़ने गए थे। यहाँ से लौटते वक्त उनकी गाड़ियों पर मुस्लिम भीड़ ने हमला बोल दिया।

मस्जिद के पास से आई भीड़ की पत्थरबाजी में कई हिन्दू कार्यकर्ता घायल हुए थे। कई के सर भी चोटिल हो गए थे। इस दौरान हिन्दू कार्यकर्ता कई घंटे तक फंसे रहे थे। एक हिन्दू कार्यकर्ता खुशबू पांडेय ने आरोप लगाया था कि मुस्लिम भीड़ उन्हें जलाने की बात कर रही थी।

इस घटना के कुछ वीडियो भी वायरल हुए थे। पुलिस ने घटना के बाद कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज कर ली थी। पुलिस ने इस मामले में 9 उपद्रवी भी गिरफ्तार किए थे। खुशबू पांडेय को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। जमुई में घटना के बाद इन्टरनेट भी बंद कर दिया गया था।

कब्रिस्तान के पास हिंदू छात्रा का रेप करने वाला था लुकमान, लेकिन पहुँच गया लड़की का परिवार: जानिए कैसे खुली ब्यावर के ‘मुस्लिम गैंग’ की परतें, सोहेल ने ब्लेड से काट दिया था पीड़िता का हाथ

राजस्थान के ब्यावर में हिन्दू बच्चियों को फंसा कर रेप करने वाले ‘मुस्लिम गैंग’ की सच्चाई एक हिन्दू परिवार ने बाहर निकाली। उन्होंने इस मामले को पुलिस के पास पहुँचाया। अब इस मामले में 5 लड़के गिरफ्तार हो चुके हैं। उन्होंने कैमरे पर भी कबूल किया है कि उनका काम गलत था।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस गैंग के लुकमान ने एक हिन्दू बच्ची को मिलने के लिए बुलाया था। उसने बच्ची को कब्रिस्तान के पास मिलने के लिए बुलाया था। यहाँ उसने हिन्दू बच्ची का रेप करने की कोशिश की , हिन्दू बच्ची ने लुकमान की कोशिश का विरोध किया तब वह मारपीट करने लगा।

बच्ची का पीछा इस दौरान उसके घरवाले कर रहे थे। वह वहाँ मौके पर पहुँच गए थे, इसी के चलते बच्ची की जान बच सकी। बच्ची के परिजन कुछ दिन से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। बच्ची ने इससे पहले घर से पैसे चुराए थे, शक होने पर वह छानबीन कर रहे थे। इसी कड़ी में उन्होंने पीछा किया था।

लुकमान ने बच्ची के परिजनों को धमकी दी थी और उनके साथ मारपीट की थी। इस मामले में हिन्दू बच्ची की एक और सहेली पीड़ित थी। इन सबने बाद में पूरी कहानी परिवार को बताई तो 4 और लड़कियों ने अपने साथ हुई प्रताड़ना के विषय में बताया। एक पीड़िता ने यह बताया कि सोहेल बुरका पहनने, कलमा पढ़ने के लिए भी कहता था।

एक पीड़िता ने बताया कि मुस्लिम लड़के स्मार्टवाच जैसी चीजों का लालच देते थे और दूसरी लड़कियों से दोस्ती करने को कहते थे। पीड़िता ने बताया कि मुस्लिम लड़के रोजा रखने की बात कहते थे, मुस्लिम धर्म में आने की बात कहते थे। पीड़िता ने बताया कि स्कूल तक यह लड़के आ जाते थे। हाथ पर चीरे भी उन्होंने लगाए थे।

वहीं लुकमान और सोहेल मंसूरी का मीडिया से बातचीत का भी एक वीडियो सामने आया है। मोहम्मद लुकमान ने बताया कि वह 20-25 दिन से बच्चियों से बात कर रहा था। उसने बताया कि एक लड़की ने उसके ₹1200 दिए थे। लुकमान ने दावा किया कि उसने लड़की को पैसे वापस कर दिए थे।

लुकमान ने बताया कि एक और लड़के कलीम ने हिन्दू बच्ची का नम्बर लिया था। वहीं सोहेल मंसूरी ने बताया कि उसने सितम्बर से हिन्दू बच्ची से बात करता था और उन्हें कैफे लेकर जाता था। उसने बताया कि एक फोन भी उसने हिन्दू बच्ची को दिया था। यह फोन रेहान नाम का एक लड़का लाया था।

अब इस मामले में लुकमान और सोहेल सहित पाँच लड़के पुलिस की रिमांड में हैं। इन सभी ने एक ही स्कूल में एक क्लास में पढ़ने वाली हिन्दू बच्चियों को निशाना बनाया था। उनके सामने यह नम्बर वाली पर्ची फेंकते थे और फिर जबरदस्ती उन्हें कैफे-रेस्टोरेंट ले जाते थे।

हिन्दू बच्चियों की यहाँ अश्लील फोटो और तस्वीर ली जाती थीं। इसके बाद उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था। उन्हें इस गैंग में शामिल मुस्लिम लड़के इसके बाद दूसरी लड़कियों से दोस्ती करवाने को कहते थे। इस मामले में रिहान मोहम्मद (20 वर्ष), सोहेल अंसारी (19 वर्ष), लुकमान (20 वर्ष), अरमान पठान (19 वर्ष), साहिल कुरैशी (19 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया है।

प्रयागराज महाकुंभ से सृजित हुआ ₹3 लाख करोड़ का कारोबार, 56.25 करोड़ श्रद्धालु लगा चुके हैं डुबकी: व्यापार और आस्था-संस्कृति का नया बेंचमार्क स्थापित, CM योगी ने मृतकों को दी श्रद्धांजलि

प्रयागराज महाकुंभ अपने अवसान पर है। दुनिया का सबसे बड़ा समागम कुंभ सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक केंद्र बनकर भी उभरा है। कुंभ के लगभग 40 दिनों में लगभग 3 लाख करोड़ रुपए (360 अरब अमेरिकी डॉलर) का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसकी जानकारी अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (CAIT) ने दी है।

CAIT के महासचिव और चाँदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि कुंभ ने आस्था और अर्थव्यवस्था के बीच संबंध स्थापित कर दिया है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ के कारण स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिल रहा है, क्योंकि महाकुंभ थीम पर आधारित उत्पादों जैसे डायरी, कैलेंडर, जूट बैग और स्टेशनरी की माँग में भारी वृद्धि हुई है। सावधानीपूर्वक ब्रांडिंग के कारण बिक्री में वृद्धि हुई है।

खंडेलवाल ने कहा कि महाकुंभ के शुरुआत होने से पहले प्रारंभिक अनुमानों में 40 करोड़ लोगों के आने और लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का कारोबार होने का अनुमान लगाया गया था। हालाँकि, 40 दिनों में महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 18 फरवरी तक 56 करोड़ पहुँच चुकी है। महाकुंभ 26 फवरी तक है। ऐसे में यह आँकड़ा कम से कम 60 करोड़ पहुँचने का अनुमान है।

श्रद्धालुओं की इस आँकड़े के साथ ही कारोबार भी 3 से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके कारण उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त वृद्धि हुई है और रोजगार के नए साधन भी पैदा हुए हैं। खंडेलवाल ने कहा कि महाकुंभ के कारण कई व्यावसायिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियाँ देखी गई हैं, जिनमें आतिथ्य और आवास, खाद्य और पेय क्षेत्र, परिवहन और रसद प्रमुख हैं।

इसके अलावा, धार्मिक पोशाक, पूजा सामग्री, हस्तशिल्प, वस्त्र, अन्य उपभोक्ता सामान, स्वास्थ्य देखभाल एवं कल्याण सेवाएँ, मीडिया, विज्ञापन एवं मनोरंजन, नागरिक सेवाएँ, दूरसंचार, मोबाइल, एआई-आधारित तकनीक, सीसीटीवी कैमरे और अन्य उपकरण आदि से संबंधित व्यवसायिक क्षेत्रों के कारोबार में भारी उछाल देखने को मिला है।

खंडेलवाल ने कहा कि महाकुंभ से संबंधित आर्थिक फायदा सिर्फ प्रयागराज तक ही सीमित नहीं है। इसका असर प्रयागराज के 150 किलोमीटर क्षेत्र की परिधि में देखने को मिला है। इसके अलावा, अयोध्या, काशी, मथुरा, विंध्याचल में श्रद्धालुओं के जाने के कारण इन शहरों एवं उसके आसपास के इलाकों में भी भारी आर्थिक गतिविधियाँ हुई हैं, जिसका फायदा लोगों और सरकार को हुआ है।

खंडेलवाल के अनुसार, महाकुंभ ने भारत में व्यापार, वाणिज्य, कारोबार, सांस्कृतिक क्षेत्र में एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है। बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ को लेकर प्रयागराज में फ्लाईओवर, सड़कों और अंडरपास के सुधार के लिए 7500 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इनमें से 1,500 करोड़ रुपए महाकुंभ व्यवस्था के लिए निर्धारित किए गए थे।

महाकुंभ को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 19 फरवरी को 2 बजे तक 56.25 करोड़ लोग आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। उन्होंने कहा, “जब हम सनातन धर्म, मां गंगा, भारत या महाकुंभ के खिलाफ कोई निराधार आरोप या फर्जी वीडियो बनाते हैं तो यह इन 56 करोड़ लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ है।”

सीएम योगी ने कहा, “यह आयोजन किसी पार्टी या संगठन विशेष का नहीं, यह आयोजन समाज का है। सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए सेवक के रूप में है। यह हमारा सौभाग्य है कि हमारी सरकार को इस सदी के महाकुंभ से जुड़ने का अवसर मिला। देश और दुनिया ने इस आयोजन में भाग लिया है और तमाम झूठे अभियानों को दरकिनार करते हुए इसे सफलता की नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है।”

भगदड़ में हुई मौत को लेकर सीएम योगी ने कहा, “महाकुंभ के सात दिन बचे हैं। हमारी संवेदनाएँ उन सभी लोगों के साथ हैं, जो 29 जनवरी को भगदड़ के शिकार हुए। हम उन लोगों के साथ हैं, जिन्होंने कुंभ के लिए यात्रा करते समय सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गँवाई। हमारी संवेदनाएँ परिजनों के साथ हैं। सरकार उनके साथ खड़ी है और उन्हें हरसंभव मदद करेगी। इस पर राजनीति करना उचित नहीं है।”