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‘रमजान में 4 बजे दे दो छुट्टी’ : कर्नाटक में कॉन्ग्रेस नेताओं ने मुस्लिम कर्मचारियों के लिए उठाई माँग, केंद्रीय मंत्री ने कहा- अस्वीकार्य, हिंदू भी तो रखते हैं उपवास

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सरकारों द्वारा रमज़ान के महीने में मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों को शाम 4 बजे के बाद दफ्तर से छुट्टी देने की घोषणा के बाद, अब कर्नाटक में भी ऐसी ही माँग उठी है। कॉन्ग्रेस के कर्नाटक प्रदेश उपाध्यक्ष ए. आर. एम. हुसैन और सैयद अहमद ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि मुस्लिम कर्मचारियों को इफ्तार के लिए घर जाने की अनुमति दी जाए। इस मामले में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कॉन्ग्रेस नेताओं के कदम को अस्वीकार्य बताया है और कहा है कि हिंदू भी तो व्रत रखते हैं, फिर मुस्लिमों ने ऐसी कोई माँग भी नहीं है। उन्होंने इसे तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा गुरुवार (20 फरवरी 2025) को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को लिखे पत्र में कहा गया कि रमज़ान के दौरान मुसलमान दिनभर रोजा रखते हैं, ऐसे में उन्हें इफ्तार के लिए घर जाने की सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार मुस्लिम कर्मचारियों को सुबह 9 बजे काम शुरू करने और 4 बजे दफ्तर छोड़ने की अनुमति दे सकती है, जिससे उनकी नियमित कार्यक्षमता बनी रहे। अभी कर्नाटक में सरकारी कर्मचारियों के लिए सुबह 10 से शाम 5 बजे तक काम करना अनिवार्य है।

इस मुद्दे पर हुसैन ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक अनुरोध है और अंतिम निर्णय सरकार के हाथ में है। उन्होंने कहा कि रमज़ान 2 मार्च से 30 मार्च तक चलेगा और इस दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को नमाज़ और इफ्तार के लिए जल्दी छुट्टी देने से उनकी मजहबी आस्था का सम्मान होगा।

इस मामले में बीजेपी ने तीखा पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, ‘यह (मुस्लिमों की छुट्टी) अस्वीकार्य है क्योंकि आज भी कई हिंदू कई दिनों तक उपवास रखते हैं और विभिन्न परंपराओं का पालन करते हैं। यह सही नहीं है। यहाँ तक कि मुस्लिम समुदाय ने खुद इसकी माँग नहीं की है। हम इस तरह की तुष्टिकरण की राजनीति से सहमत नहीं है।”

तेलंगाना सरकार पहले ही 17 फरवरी को आदेश जारी कर चुकी है, जिसमें सभी सरकारी मुस्लिम कर्मचारी, शिक्षक, अनुबंधित कर्मचारी, आउटसोर्सिंग स्टाफ, बोर्ड, निगम और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को 2 मार्च से 31 मार्च तक शाम 4 बजे कार्यालय छोड़ने की अनुमति दी गई है। कुछ ऐसा ही आदेश आंध्र प्रदेश सरकार ने भी दिया है।

‘PM मोदी मेरे बड़े भाई, मैं उनसे सीखने आया हूँ’ : SOUL लीडरशिप कॉन्क्लेव में बोले भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, कहा-‘मैं स्टूडेंट, पीएम मोदी मेंटर’

नई दिल्ली में चल रहे SOUL लीडरशिप कॉन्क्लेव में भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना ‘बड़ा भाई’ बताया। उन्होंने कहा कि जब भी वो मोदी से मिलते हैं, उन्हें बहुत खुशी होती है और वो प्रेरित होकर अपने देश के लिए और मेहनत करने का मन बनाते हैं।

भूटान के पीएम शेरिंग तोबगे ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मेंटर भी कहा और उनकी तारीफ में बोले कि SOUL यानी स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप पीएम मोदी की सोच का नतीजा है। ये एक ऐसा मंच है जो सच्चे लीडर्स को तैयार करने और भारत को मजबूत बनाने में मदद करेगा। भूटान के पीएम ने कहा कि पीएम मोदी का विजन और मेहनत हर बार उन्हें प्रभावित करती है।

भूटान के पीएम टोबगे ने हिंदी में कहा कि उनके लिए ये ‘शानदार मौका’ है, क्योंकि वे दुनिया के ‘सबसे बड़े लीडर’ पीएम मोदी से नेतृत्व सीखेंगे। उन्होंने कहा, “मैं नेतृत्व पर कोई ज्ञान देने नहीं आया, बल्कि एक स्टूडेंट की तरह सीखने आया हूँ। मुझे नरेंद्र मोदी जैसे महान लीडर से सीखने का मौका मिला है, जो मेरे लिए बड़े भाई की तरह हैं और हमेशा मेरा मार्गदर्शन करते हैं।”

टोबगे ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी समझ, हिम्मत और शानदार नेतृत्व से 10 साल में भारत को तरक्की की राह पर ला दिया। वहीं, पीएम मोदी ने भी इस मौके पर कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए नागरिकों का विकास बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छे लीडर्स तैयार करना भी उतना ही अहम है।

मोदी ने SOUL को ‘विकसित भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने ये भी कहा कि जल्द ही SOUL का बड़ा कैंपस तैयार हो जाएगा, जहाँ लीडरशिप की ट्रेनिंग और बेहतर तरीके से होगी। इस कॉन्क्लेव में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के साथ अपने मजबूत रिश्ते और भारत-भूटान की दोस्ती को भी दिखाया।

‘मुस्लिमों को विलेन दिखाना घिसा-पिटा कॉन्सेप्ट’ : फिल्ममेकर अब्बास टायरवाला का बयान, बोले- ये सब बहुत बढ़ता जा रहा है

फिल्ममेकर और राइटर अब्बास टायरवाला ने बॉलीवुड में मुस्लिम किरदारों को विलेन दिखाने के बढ़ती ट्रेंड को लेकर बयान दिया है। अब्बास टायरवाला ने कहा कि अब उन्हें फिल्मों का ऐसा रुख देखकर शर्मिंदगी होती है। अब्बास ने ‘जाने तू या जाने ना’ जैसी हिट फिल्म डायरेक्ट की और ‘वॉर’, ‘2.0’, और ‘पठान’ जैसी फिल्मों के डायलॉग लिखे हैं।

लल्लनटॉप से बातचीत में उन्होंने कहा कि पहले फिल्में इंडिविजुअल फिल्ममेकर्स बनाते थे और उनके साथ काम करते वक्त फिल्मों का राजनीतिक नजरिया या विलेन का किरदार उन्हें परेशान नहीं करता था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। उन्होंने साफ किया कि ये बात वो इंडियन मुस्लिम होने की वजह से नहीं, बल्कि एक राइटर के नजरिए से कह रहे हैं। उनका मानना है कि बार-बार मुस्लिम विलेन दिखाना अब पुराना और बोरिंग हो गया है।

अब्बास इन दिनों पवन कल्याण की तेलुगु पीरियड ड्रामा ‘हरि हर वीरा मल्लू’ के हिंदी डायलॉग पर काम कर रहे हैं। इस फिल्म में मुगल बादशाह औरंगजेब को विलेन के तौर पर दिखाया गया है। हाल ही में रिलीज हुई हिंदी फिल्म ‘छावा’ में भी औरंगजेब विलेन था। अब्बास ने कहा कि औरंगजेब को विलेन दिखाने में एक अहमियत होती है क्योंकि इतिहास में उनकी सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता। लेकिन फिल्मों के लिए इस सच्चाई को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। उनका कहना है कि जो हुआ, वो हुआ, इसे झुठलाया नहीं जा सकता।

अब्बास ने अपने करियर की शुरुआत 2001 में ‘लव के लिए कुछ भी करेगा’ से बतौर लिरिसिस्ट की थी। इसके बाद ‘दम’ और ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ जैसे फिल्मों में उनके गाने हिट हुए। फिर 2008 में ‘जाने तू या जाने ना’ से डायरेक्शन में कदम रखा, जो सुपरहिट रही। इसके बाद उन्होंने ‘झूठा ही सही’ डायरेक्ट की। हाल के सालों में वो स्क्रीनराइटर बन गए और ‘बैंग बैंग’, ‘वॉर’, ‘2.0’, और ‘पठान’ जैसी बड़ी फिल्मों के डायलॉग लिखे।

संभल हिंसा की आड़ में वकील विष्णु जैन की हत्या करना था मकसद: UP पुलिस के सामने गुलाम ने उगला सचा, बताया- पहले ही दिखा दी गई थी फोटो

संभल हिंसा मामले में पुलिस ने वांछित आरोपित गुलाम को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने स्वीकारा कि उसका मकसद वकील विष्णु जैन की हत्या करना था।

एसपी विश्नोई ने बताया कि गुलाम ने स्वीकारा है कि इस हिंसा के साजिशकर्ता शारिक साठा और उसके गिरोह को पहले राजनीति संरक्षण प्राप्त था, जिसकी वजह से वह संभल के दीपा सराय में काम कर लेते थे, लेकिन अब पुलिस की सख्ती की वजह से काम करना मुश्किल हो गया है।

गुलाम ने खुलासा किया कि हिंसा से पहले पहचान के लिए वकील जैन की तस्वीर दिखाई गई थी। उसके नेताओं ने उसे हिंसा का फायदा उठाकर जैन की हत्या करने का जिम्मा सौंपा था।

पुलिस ने गुलाम के पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं, जिनमें जर्मनी, ब्रिटेन और चेकोस्लोवाकिया जैसे देशों में बने हथियार शामिल हैं। आरोपित देश भर में हथियारों की तस्करी करता था।

पूछताछ में ये भी सामने आया है कि गुलाम का आपराधिक इतिहास काफी पुराना है और उसने हिंसा के दौरान हमलावरों को हथियार मुहैया कराए थे। गुलाम के खिलाफ संभल समेत कई जिलों में करीब 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

एसपी विश्नोई ने बताया कि हिंसा से एक दिन पहले यानी 23 नवंबर 2024 को गुलाम की अपने बॉस साठा से बातचीत हुई थी। साठा को एक स्थानीय व्यक्ति ने संभल जामा मस्जिद के कोर्ट द्वारा आदेशित सर्वे के बारे में बताया था, जो 24 नवंबर 2024 को होना था। इसी दौरान उसे विष्णु जैन की तस्वीर भी दिखाई गई थी ताकि मौका मिलते ही उन्हें मारा जा सके।

बता दें कि संभल हिंसा मामले में अब तक 79 आरोपितों को गिरफ्तार किया है और बाकी आरोपितों की तलाश लगातार जारी है। 24 नवंबर को इन उपद्रवियों ने पूर्व साजिश के तहत सर्वे करने आई टीम पर हमला बोला था। उनपर पथराव किया था और गोलियाँ चलाई थीं।

अमेरिका को देख कनाडा की हेकड़ी ढीली, 7 ग्रुपों को करना पड़ा ‘आतंकी समूह’ घोषित: मंत्री बोले- सीमा सुरक्षा बढ़ाने पर करेंगे ₹7939 करोड़ खर्च

कनाडा ने सात लैटिन अमेरिकी अपराधी संगठनों को आतंकवादी समूह घोषित किया है। ये कदम फेंटेनाइल नाम की खतरनाक ड्रग की तस्करी रोकने के लिए उठाया गया है। इनमें मेक्सिको के सिनालोआ कार्टेल, जालिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल और ला नुएवा फमिलिया मिचोआकाना जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री डेविड मैकगुइंटी ने कहा कि इससे ड्रग्स को कनाडा और अमेरिका की सड़कों पर आने से रोका जा सकेगा। ये घोषणा अमेरिका के आठ लैटिन अमेरिकी अपराधी समूहों को आतंकवादी संगठन घोषित करने के एक दिन बाद हुई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाली फेंटेनाइल और अवैध प्रवास की शिकायत की थी। उन्होंने कनाडा पर 25% टैरिफ की धमकी दी थी, जो अब 4 मार्च तक टाल दी गई है। हालाँकि, अमेरिकी डेटा के मुताबिक, उत्तरी सीमा पर सिर्फ 1% फेंटेनाइल पकड़ी जाती है। फिर भी, कनाडा ने मदद का भरोसा दिया है। बाकी आतंकवादी संगठनों में मेक्सिको के कार्टेल डेल गोल्फो, कार्टेलेस यूनिदोस, वेनेजुएला का ट्रेन डे अरागुआ और अल सल्वाडोर में सक्रिय एमएस-13 शामिल हैं।

इस कदम से इन संगठनों की संपत्ति जब्त होगी। बैंक और ब्रोकरेज उनके खाते फ्रीज करेंगे, और उनकी गतिविधियों में हिस्सा लेना अपराध माना जाएगा। कनाडा की पुलिस आरसीएमपी के मुताबिक, इन कार्टेल्स का जाल कनाडा तक फैला है। कुछ कनाडाई लोग मेक्सिको और दक्षिण अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी में शामिल हैं।

इस बीच, कनाडा ने फेंटेनाइल रोकने के लिए केविन ब्रॉसो को अपना ड्रग्स नियंत्रण अधिकारी बनाया है। साथ ही सीमा सुरक्षा के लिए 1.3 अरब कनाडाई डॉलर (लगभग 910 मिलियन अमेरिकी डॉलर, भारतीय मुद्रा में 7939 करोड़ रुपये) खर्च करने का ऐलान किया है, जिसमें नए हेलिकॉप्टर, तकनीक और कर्मचारी शामिल हैं।

इजरायल में 3 बसों में एक के बाद एक बम धमाका, देश भर में रुकी यातायात सेवा: हमास के चैनल ने ली हमले की जिम्मेदारी, 2 बम डिफ्यूज किए गए

इजरायल के तेल अवीव शहर में गुरुवार (20 फरवरी 2025) शाम को तीन बसों में धमाके हुए, जिससे पूरे देश में हलचल मच गई। धमाके बाट याम इलाके में हुए। हालाँकि, इन धमाकों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। पुलिस ने इस हमले को आतंकी साजिश बताया है और दो अन्य बसों में रखे बमों को समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया। इन धमाकों के थोड़ी ही देर में इजरायल ने वेस्ट बैंक में कुछ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया है।

घटना के बाद परिवहन मंत्री मीरी रेगव ने देशभर में बस, ट्रेन और लाइट रेल सेवाओं को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया, ताकि सभी सार्वजनिक वाहनों की सुरक्षा जाँच हो सके।

सोशल मीडिया पर वीडियो

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक बस में आग लगी हुई थी और पास खड़ी एक कार भी जल रही थी। तेल अवीव जिले के पुलिस प्रमुख हेम सर्गारोफ ने बताया कि धमाके टाइमर से जुड़े विस्फोटक उपकरणों की मदद से किए गए। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, इन बमों पर “Revenge Threat” लिखा हुआ था। हमास के तुल्कारेम बटालियन से जुड़ा टेलीग्राम चैनल ने इस हमले को ‘बदले की कार्रवाई’ बताया है। हालाँकि, उसने सीधे तौर पर इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।

अलर्ट पर इजरायली सुरक्षा बल

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मामले की जानकारी ली और सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की। रक्षा मंत्री योव गालांट ने सेना को वेस्ट बैंक में अपनी सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इजरायली पुलिस और खुफिया एजेंसी शिन बेट हमले की जाँच कर रही हैं। संदिग्धों की तलाश में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम पर बातचीत चल रही है। अब तक हमास ने 19 इजरायली बंधकों को रिहा किया है, जबकि बदले में 1,100 से अधिक फिलिस्तीनी कैदी छोड़े गए हैं। इस हमले के बाद इजरायल की प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

गली-गली घूम रहे लव जिहादी, शहर दर शहर पसर रहे ‘मुस्लिम गैंग’: अजमेर से ब्यावर तक हिंदू बच्चियों के शिकार का मॉडल वही, कब जागेंगी एजेंसियाँ

साल 1992 का अजमेर सेक्स स्कैंडल और 2025 में ब्यावर में लड़कियाँ फँसाने पर बवाल। दोनों घटनाओं के बीच 33 साल का वक्त बीता है लेकिन इतने लंबे अंतराल के बावजूद अपराध करने के तरीके में कुछ नहीं बदला है। तब भी, एक समुदाय के निशाने पर हिंदू लड़कियाँ थीं और आज भी वहीं हुआ है। फर्क बस इतना है कि तब मामला खुलने में,अपराधी पकड़ने में समय लगा था, मगर इस बार कार्रवाई भी तेज है और लोग भी इसके प्रति जागरूक है

ब्यावर में हिंदू लड़कियों को फँसाने में 15 लड़के शामिल थे। इन्होंने इंस्टाग्राम के जरिए एक के बाद एक करके 5 स्कूली लड़कियों को अपने निशाने पर ले लिया था। सारी छात्राएँ 10वीं की थीं। इस गिरोह ने उन बच्चियों को पहले झाँसे में फँसाया, फिर होटल बुलाकर उनकी तस्वीरें निकालीं, उनका यौन शोषण किया और बाद में उन्हें धमकाने, उनसे पैसे वसूलने का और धर्मांतरण के लिए मजबूर करने का सिलसिला शुरू हुआ।

अगर एक लड़की अपने घर से पैसे चुराते हुए नहीं पकड़ी जाती और सवाल-जवाब होने पर वो सारी सच्चाई नहीं बताती तो शायद 5 लड़कियों की संख्या बढ़कर 50 होती और फिर 500।

ये आँकड़े बढ़ा-चढ़ाकर या कल्पना करके नहीं कहे जा रहे। अजमेर कांड की पीड़िताओं की गिनती ही इस संख्या तक पहुँचने का आधार हैं। अजमेर कांड के वक्त 100 से ज्यादा लड़कियों का रेप हुआ था और 250 तो ऐसी थीं जिनकी नग्न तस्वीरें जगह-जगह वायरल हुई थी। उस गिरोह में भी एक समुदाय के लोगों की सक्रियता ज्यादा पाई गई थी। पीड़ितों के परिजनों की हालत ये हो गई थी कि परिवार रातोंरात गायब हो रहे थे।

ब्रिटेन में फैला ग्रूमिंग गैंग का कारोबार भी इसी विचारधारा का प्रमाण था। उस गैंग ने तो चुन-चुनकर गैर-इस्लामी लड़कियों को निशाना बनाया था और उन्हें कचरा कहते हुए उनके साथ ऐसी वीभत्सता की थी जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

ब्यावर में भी शायद स्थिति ऐसी हो जाती अगर समय रहते ये मामला नहीं खुलता और पुलिस तक बात नहीं पहुँचती।

दरअसल छोटी उम्र की लड़कियों को लालच देकर फँसाना हमेशा से ऐसे गिरोहों के लिए आसान रहा है। कारण कई होते हैं। छोटे उम्र में लड़कियाँ नहीं समझ पातीं कि ऐसी स्थिति में फँसने पर उन्हें डील कैसे करना है।

एक बार झाँसे में आने बाद वो उस दलदल में इसलिए और अंदर धँसती जाती हैं क्योंकि उन्हें समाज में बदनामी और परिवार की प्रतिक्रिया दोनों का डर होता है। वे सामाजिक दबाव के कारण, अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पातीं और अकेलेपन का सामना करती हैं। इसी मनोस्थिति का फायदा ये गिरोह उठाता है और लड़कियों को धमकाने, ब्लैकमेल करने, उनका यौन शोषण करना जारी रखता है। बातें अगर खुलती भी हैं तो भी कई बार कई मामलों को लोक-लाज का सोचकर दबाने का काम होता है। मगर इसका असर उन पीड़िताओं पर क्या पड़ता है इस पर कोई विचार नहीं करता।

आज सरकारें ऐसे दरिंदों को सजा देने के लिए कई कानून ला चुकी हैं। धर्मांतरण विरोधी कानून से लेकर लव जिहाद के खिलाफ तक कानून आ चुका है, लेकिन सवाल फिर वही है कि जब ऐसी घृणित मानसिकता के लोग गली-गली में बसे हैं तब इनसे कैसे लड़ा जाएगा। इनका ठिकाना सिर्फ राजस्थान के ब्यावर नहीं, अजमेर से लेकर ब्रिटेन का रॉदरहैम तक है। अजीब बात ये है कि एक तरफ इनका पैटर्न जानने के बावजूद भी लड़कियाँ सचेत नहीं हो रहीं और दूसरी तरफ ये अपना घिनौना खेल सोशल मीडिया के माध्यम से भी खेलने लगे हैं। इनकी बढ़ती रफ्तार देख जरूरत है अब जाँच एजेंसियाँ जागें और समय से पहले इनपर शिकंजा कसा जाए।

हाई कोर्ट जज पर आरोप- निजी कंपनी के पक्ष में फैसले के लिए सिफारिश की, पर जाँच से पहले सुप्रीम कोर्ट में लोकपाल के ‘अधिकार क्षेत्र’ पर लड़ाई: चिंताजनक बता केंद्र सरकार से माँगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने लोकपाल के एक आदेश पर रोक लगा दी है। लोकपाल ने कहा था कि वह हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ दर्ज की गई शिकायत पर सुनवाई कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये बहुत चिंताजनक बात है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख का समर्थन केंद्र सरकार ने भी किया है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस अभय ओका और जस्टिस सूर्य कान्त की एक बेंच ने लोकपाल वाले मामले पर गुरुवार (20 फरवरी, 2025) को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने इसे काफी परेशान करने वाला बताया और केंद्र सरकार को विषय में नोटिस भेजा है।

केंद्र सरकार की तरफ से इस मामले में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि हाई कोर्ट का हर एक जज अपने आप में संस्था है। उन्होंने कहा है कि कोई भी हाई कोर्ट या उसके जज कभी भी लोकपाल कानून, 2013 के दायरे में नहीं आ सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में लोकपाल की कार्रवाई पर भी रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने लोकपाल की कार्रवाई के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए एक मामला चालू किया था। केंद्र सरकार के जवाब के बाद इस मामले में सुनवाई होगी और लोकपाल के अधिकार क्षेत्र पर बात होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला 27 जनवरी, 2025 के एक लोकपाल के फैसले पर चालू किया है। लोकपाल ने 27 जनवरी, 2025 को कहा था कि वह हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ आई शिकायतों पर सुनवाई कर सकता है। लोकपाल ने कहा था कि उसके पास यह अधिकार क्षेत्र है क्योंकि हाई कोर्ट के जज ‘सरकारी कर्मचारी’ की परिभाषा के दायरे में आते हैं।

वर्तमान में भारत के लोकपाल जस्टिस AM खानविलकर हैं। उन्होंने ही लोकपाल सदस्यों के साथ मिलकर हाई कोर्ट के जजों के विषय में यह फैसला दिया था। लोकपाल ने यह फैसला हाई कोर्ट के एक जज के विरुद्ध मिली 2 शिकायतों पर दिया था।

हाई कोर्ट के जज पर आरोप था कि उसने एक जिला जज और एक हाई कोर्ट के दूसरे जज पर अपना प्रभाव जमाया। यह दबाव एक निजी कम्पनी के पक्ष में फैसला देने के लिए डाला गया था। शिकायत के अनुसार, इस कम्पनी के लिए पहले जज ने वकील रहते हुए काम किया था।

जज के खिलाफ मिली शिकायत इस आचरण पर की गई शिकायत को लेकर लोकपाल ने पहले अधिकार क्षेत्र तय करने को लेकर फैसला दिया था और शिकायत को CJI संजीव खन्ना को भेज दिया था। लोकपाल ने इससे पहले जनवरी, 2025 में ही सुप्रीम कोर्ट के जज और CJI के खिलाफ शिकायत सुनने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

नहाती हुई महिला, कपड़े बदलती हुई महिला… महाकुंभ की फोटो-वीडियो बता बेच रहे थे डार्क बेव पर: UP पुलिस हुई सख्त तो कई अकाउंट हुए बंद, ‘पत्रकार’ कामरान पहुँचा हवालात

महाकुंभ को बदनाम करने के क्रम में सोशल मीडिया पर हिंदू लड़कियों की इज्जत उछालने का मामला प्रकाश में आया है। पता चला है कि सोशल मीडिया पर कुछ अकॉउंटों से लड़कियों की नदियों में नहाते हुए फोटो-वीडियो साझा की जा रही है। इसके अलावा ये भी जानकारी सामने आई कि लड़कियों के नहाने की वीडियो को डार्क वेब पर बेचा जा रहा है। उन्हें टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर कुछ हजार रुपयों में वायरल करने का काम हो रहा है।

पुलिस ने अब इन शिकायतों की जाँच करनी शुरू कर दी है। वीडियोज डार्क वेब पर बेची गईं या नहीं, इसकी जाँच के लिए पुलिस ने इंस्टाग्राम के हेडऑफिस कैलिफोर्निया को एक ईमेल भेजकर अकाउंट की डिटेल्स माँगी है। साथ ही जिन अकॉउंट ने लड़कियों के नहाने की फोटो साझा करते हुए महाकुंभ को बदनाम करने की कोशिश की है उनके ऊपर भी पुलिस ने एक्शन लेना शुरू कर दिया है।

यूपी पुलिस ने कामरान अलवी नाम के कथित पत्रकार को गिरफ्तार किया है। उसने महिलाओं की नदी में नहाने की एक वीडियो को शेयर किया हुआ था और लिखा था- संगम घाट का भव्य नजारा। पुलिस ने इस वीडियो को देखने के बाद कामरान अलवी को अरेस्ट कर लिया है।

वहीं अन्य लोगों की भी छानबीन कर रही है जिन्होंने महिलाओं की ऐसी वीडियो प्रसारित करने का काम किया। जानकारी के मुताबिक इस मामले में कुंभ मेला प्रयागराज के साइबर थाने में सब इंस्पेक्टर पूजा रायकवार ने एक इंस्टाग्राम अकाउंट के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा–79, 353, IT एक्ट की धारा–67 में 17 फरवरी को FIR कराई है। एफआईआर में बताया गया है कि आईडी में महिलाओं के नहाने के वीडियो डाले गए हैं। अब पुलिस इस केस की जाँच कर रही है।

ये भी कहा जा रहा है कि इन वीडियोज को बनाने के बाद टेलीग्राम ग्रुप पर 1900 से 4000 रुपए तक में बेचा जा रहा है। इसकी सच्चाई क्या है पुलिस लगातार इसे जानने का प्रयास कर रही है। वहीं जो कोई भी महाकुंभ पर झूठ फैलाने का या महिलाओं की इज्जत से छेड़छाड़ करने का काम कर रहा है उनपर कार्रवाई हो रही है। जानकारी के मुताबिक कुंभ में अब तक सोशल मीडिया से जुड़ी 12 एफआईआर दर्ज हो चुकी है। एक टेलीग्राम चैनल ‘सीसीटीवी चैनल 11’ पर भी कार्रवाई हुई है।

‘पत्थर को भगवान मानते हो, हमारे समाज (इस्लाम) में आ जाओ’: हिंदू बच्चियों को मस्जिद-मौलवी के पास भेजने में लगा था ब्यावर का ‘मुस्लिम गैंग’, पैसे लाने-सिगरेट पीने को भी कहते थे

राजस्थान के ब्यावर में हिन्दू लड़कियों को फंसाने वाला ‘मुस्लिम गैंग’ उन्हें मौलवी के पास ले चलने को कहता था। हिन्दू बच्चियों से सिगरेट पीने को कहा जाता था। हिन्दू बच्चियों को उनकी सहेलियों से दोस्ती करवाने को कहा जाता था। ऐसा ना करने पर पूरे परिवार की हत्या की बात कही जाती थी। उन्हें जींस-टॉप पहनने से रोका जाता था। इस मामले में 6 मुस्लिम युवक गिरफ्तार हैं। उनका केस लड़ने से भी अजमेर के वकीलों ने मना कर दिया है।

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्यावर में हिन्दू लड़कियों को फंसाने वाला गैंग उनसे मस्जिद में जाने और मौलवियों से मिलने के लिए कहता था। उनकी मतांतरण की कोशिश हो रही थी। इससे पहले पीड़िताओं ने कहा है कि मुस्लिम लड़के उन्हें रोजा रखने के बारे में बताते थे और नमाज की ट्रेनिंग देते थे। वह कलमा भी पढ़ने को बताते थे। बच्चियों ने कैमरे के सामने और भी कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

एक पीड़िता ने मुस्लिम लड़के के विषय में बताया, “फ्रेंड के जरिए मुझे जाल में फँसाया था। उस फ्रेंड को धमकी देता था। मैं जब फंस गई तो मुझे भी दूसरी लड़कियों से बात करवाने की धमकी देने लगे। मेरा को एक छोटा सा फोन दिया था… मुझे मिलने के लिए धमकाता था। मुझे 5 सकेंड के लिए मिलने के लिए बुलाया, फिर मुझे कैफे में ले गया। वहाँ गलत काम किया। मेरी फोटो ली थी, इसके बहाने धमकी देता था। घरवालों को भी मारने के लिए धमकी देता था। मेरे साथ मारपीट भी की थी। टेडी बियर-चॉकलेट लाता था।”

पीड़िता ने आगे बताया, “मुझसे काफी पैसे भी लिए है। मैं ₹10 हजार लगभग उसे दे चुकी हूँ। मेरे घरवालों ने फोन पर बात करते हुए पकड़ लिया था। उसने मना करने के बाद भी अश्लील हरकतें की। घरवालों को मारने की धमकी देता था, इसलिए मैंने नहीं बताया किसी को घर पर। सिगरेट वगैरह पीने को कहता था। कलमा पढ़ने, रोजे करने और बुरका पहनने को कहता था। जींस टॉप पहनने पर भी धमकी देता था। कहता था पत्थर को भगवान मानते हो… हमारे समाज में आ जाओ। मेरे साथ मारपीट की और चीरे भी लगाए।”

दूसरी पीड़िता ने बताया, “उस लड़के का नाम करीम है, पहले वह स्कूल की तरफ आता था। उसके दोस्त सोहेल मंसूरी, रेहान मंसूरी और सोहेफ़ वगैरह। उन्होंने पहले से जिन लड़कियों को फंसाया था, उन्हीं के माध्यम से मुझे फँसाया। उसने मुझे नमाज पढ़ने और बुर्का के लिए बोला था। शुक्रवार की पाँच नमाज बताई थी। शॉर्ट कपड़े नहीं पहनने यह कहा था। कभी कभार मिलने और बाकी लड़कियों को सम्पर्क करने के लिए कहता था। परिवार को खतरे की बात कहता था।”

पीड़िताओं के बयान पुलिस भी दर्ज करवा चुकी है। मामले में रिहान मोहम्मद (20 वर्ष), सोहेल अंसारी (19 वर्ष), लुकमान (20 वर्ष), अरमान पठान (19 वर्ष), साहिल कुरैशी (19 वर्ष) को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने उन्हें 4 दिन की रिमांड में भेजा है। पुलिस इस मामले में अब सबूत जुटाने में लगी हुई है। पुलिस ने उनकी गाड़ियाँ जब्त कर ली हैं और साथ ही एक और आरोपित नदीम कुरैशी से पूछताछ कर रही है। पुलिस ने इस मामले में फॉरेंसिक सबूत भी जुटाए हैं। वहीं आरोपितों के घरवाले हिन्दू पीड़िताओं को ही दोषी ठहरा रहे हैं।

गौरतलब है कि यह सभी मुस्लिम लड़के नाबालिग हिन्दू बच्चियों को पहले फँसाते थे और फिर उनकी अश्लील फोटो वीडियो खींच कर ब्लैकमेल करते थे। उन लड़कियों से दूसरी बच्चियों से सम्पर्क करवाने को कहा जाता था। ऐसा ना करने पर फोटो वीडियो वायरल करने की धमकी दी जाती थी। इसने पैसे वसूले गए और इनको धमकियाँ दी गई। धर्मांतरण का भी खुलासा हुआ है। अब इस मामले में पुलिस कार्रवाई कर रही है। वहीं पुलिस ने कहा है कि इस मामले में ‘लव जिहाद’ का एंगल नहीं है।