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22 साल के बलिदानी बेटे मोहसिन खान को बकरीद के दिन अंतिम विदाई, हाल ही में हुई थी सगाई

वीर सपूतों की धरती झुंझुनूं का एक और बेटा भारत माता की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गया। बलिदानी मोहसिन खान राजस्थान के झुंझुनूं जिले के कोलिंडा गाँव के रहने वाले थे। 22 वर्षीय मोहसिन खान को बकरीद के दिन 1 अगस्त 2020 को अंतिम विदाई दी गई।

भारतीय सेना की 16 ग्रेनिडियर के सिपाही मोहसिन खान जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में तैनात थे। शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) को पेट्रोलिंग के दौरान सरहद पार से हुई गोलीबारी में वे वीरगति को प्राप्त हो गए थे। शनिवार (अगस्त 1, 2020) शाम को बलिदानी मोहसिन खान का पार्थिव शरीर कोलिंडा गाँव पहुँचा। बेटे को तिरंगे में लिप​टा देखकर हर किसी की आँखें नम हो गई। मां बलकेश बानो, दादा सन्नू खान समेत परिवार के अन्य का सदस्य रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

शाम को कोलिंडा के ​कब्रिस्तान में नमाज अदा कर मोहसिन के पार्थिव शरीर को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इससे पहले जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कमांडर परवेज अहमद हुसैन, सांसद नरेन्द्र खींचड़, प्रधान अलसीसर गिरधारी लाल खींचड़, सुशीला सीगड़ा, जिला परिषद सदस्य प्यारे लाल ढूकिया आदि ने बलिदानी की पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित किए। इस दौरान तिरंगे को शहीद के पिता सूबेदार सरवर अली खान को सौंपा गया। जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। 

परिजनों ने बताया कि मोहसिन खान की हाल ही में कोलाली गाँव निवासी युवती से रिश्ता तय हुआ था। कुछ दिनों पहले ही उनकी सगाई हुई थी। एक महीने के अवकाश के बाद महीने भर पहले ही वो ड्यूटी पर लौटे थे। चार भाई-बहनों में सबसे छोटे शहीद मोहसिन के परिवार से कई सदस्य सेना में हैं। पिता सरवर खान सेना से सूबेदार पद से रिटायर हुए हैं। भाई अमजद अली 14 ग्रेनेडियर में है। अभी ज्वाइनिंग मिलनी बाकी है। इनके अलावा चाचा और ताऊ भी सेना में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं।

बलिदानी के चचेरे भाई नवाब अली ने बताया कि ईद उलजुहा पर्व की रौनक हर चेहरे से गायब हो गई। ईद के पहले दिन ही गाँव को अपने लाडले की शहादत की जानकारी मिल चुकी थी। शनिवार को दिन भर गाँव में मातम छाया रहा।

हैप्पी रक्षाबंधन मेरा स्वीट सा बेबी… आप हमेशा हमारा गर्व रहोगे: रक्षाबंधन पर सुशांत की बहन का इमोशनल पोस्ट

सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने इंस्टाग्राम पर भाई के साथ बिताए पलों को याद करते हुए भावनात्मक मैसेज पोस्ट किया है। बचपन की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है, “हैप्पी रक्षाबंधन मेरा स्वीट सा बेबी। बहुत प्यार करते हैं हम आपको जान… और हमेशा करते रहेंगे… आप थे, आप हो और आप हमेशा हमारा गर्व रहोगे।”

सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद उनकी बहन का यह पहला रक्षाबंधन है। सुशांत की बहन श्वेता अपने भाई के बहुत करीब थी। श्वेता उनकी आत्महत्या से पहले उनके साथ दो दिन मुंबई में रही थी। कथित तौर पर उस वक्त सुशांत रिया के साथ हुए ब्रेकअप से बहुत परेशान थे।

श्वेता हमेशा सुशांत के स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित रहती थी। सुशांत को न्याय दिलाने के लिए श्वेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट भी किया था। इसमें उन्होंने सुसाइड केस की तत्काल जाँच के लिए पीएम से अनुरोध किया था।

सुशांत सिंह आत्महत्या

प्रतिभाशाली अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून 2020 को अपना जीवन समाप्त कर लिया था। उन्होंने एम एस धोनी, डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी, काई पो चे, शुद्ध देसी रोमांस जैसी कई फिल्में की थी। लोग उनकी एक्टिंग और अंदाज को काफी पसंद करने लगे थे। उनकी मृत्यु के पीछे का कारण पहले लोगों ने फ़िल्म इंडस्ट्री में चल रहे भाई-भतीजावाद को बताया था। लेकिन अब कहा जा रहा है कि उनकी पूर्व प्रेमिका ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया था।

बात दें सुशांत सिंह राजपूत के पिता ने अपने बेटे की आत्महत्या को लेकर कई खुलासे किए थे। सुशांत के पिता केके सिंह ने रिया को सुशांत की मौत का जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि रिया ने सुशांत को सुसाइड के लिए उकसाया है। सुशांत के पिता ने पटना में रिया और उनके परिवार समेत सहयोगियों पर भी एफआईआर दर्ज किया है।

सुशांत के पिता ने अपनी शिकायत में बताया कि रिया चक्रवर्ती सुशांत का लैपटॉप, उनका पॉसवर्ड और कई सारी ज्वैलरी लेकर चली गई थीं। सुशांत के पिता ने रिया पर पैसे हड़पने तक का आरोप लगाया था। दर्ज एफआईआर के बाद से सोशल मीडिया पर रिया चक्रवर्ती बुरी तरह ट्रोल होने लगी है। एफआईआर दर्ज होने के बाद बिहार पुलिस आत्महत्या की जाँच में जुट गई है। पुलिस की एक टीम जाँच के लिए मुंबई भी पहुँची है।

एसआईटी को इस मामले में यह पता चला कि 9 से 13 जून के बीच सुशांत सिंह के मोबाइल में 14 सिम बदले गए थे। वहीं बिहार पुलिस ने इस मामले में मुंबई पुलिस पर सहयोग ना करने का आरोप लगाया है। दोनों राज्यों की पुलिस के बीच सुशांत केस को लेकर खींचतान चल रही है। वहीं सुशांत सिंह राजपूत का परिवार, भाजपा सहित कई नेता और सुशांत के फैन न्याय और मामले की सीबीआई जाँच की माँग कर रहे है।

टाइम्स नाउ के दावे को BJP ने बताया फर्जी, कहा था- 4 MP, 1 MLA सहित 21 नेता टीएमसी में शामिल हो सकते हैं

पश्चिम बंगाल में भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय ने टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट को बकवास बताया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि राज्य में बीजेपी के 21 नेता तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो सकते हैं। इनमें 4 सांसद, 1 विधायक और 16 पार्षद शामिल हैं। मुकुल रॉय ने इस खबर को फर्जी, बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया।

टाइम्स नाउ ने यह दावा तृणमूल कॉन्ग्रेस के सूत्रों के हवाले से किया। इसमें दावा किया गया कि आने वाले दिनों में 21 बीजेपी नेता टीएमसी में शामिल हो सकते हैं। इनमें 4 सांसदों में से तीन ऐसे सांसद हैं, जिन्होंने पिछले साल लोकसभा चुनाव से ठीक पहले या बाद में बीजेपी का दामन थामा था। इसके अलावा एक विधायक भी टीएमसी में घर वापसी की चाह में हैं।

पत्रकार तमाल साहा ने आगे दावा किया कि एक बीजेपी सांसद, जो दो बार सांसद रह चुके हैं और पश्चिम बंगाल से बताए जा रहे हैं, वह भी पिछले तीन महीनों से दिल्ली में टीएमसी नेताओं से संपर्क बनाए हुए हैं और टीएमसी में शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं। बीजेपी ने पूरी रिपोर्ट को बकवास करार दिया।

टाइम्स नाउ ने आगे दावा किया कि राज्य भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष और मुकुल रॉय के बीच कथित रूप से तनातनी चल रही है। चैनल ने इस बात पर भी जोर दिया कि मुकुल रॉय भाजपा के प्रमुख नेताओं में से एक हैं, जो बीजेपी छोड़ने को इच्छुक थे।

भाजपा ने पार्टी के खिलाफ मनगढंत समाचारों के प्रचार के लिए चैनल के एडिटर इन चीफ को पत्र लिख कर फटकार लगाई। पत्र में बंगाल में भाजपा के मीडिया प्रभारी सप्तर्षि चौधरी ने लिखा, ”अपने चैनल द्वारा प्रसारित समाचार में आपने बताया है कि 4 सांसदों और 1 विधायक सहित 21 भाजपा नेताओं के टीएमसी में शामिल होने की संभावना है। आपने भ्रम पैदा करने के एकमात्र उद्देश्य से कई ज्ञात चेहरों के लिए संकेत दिया है। यदि आप अपनी खबरों के बारे में निश्चित हैं, तो आप आसानी से व्यक्तियों का नाम ले सकते हैं।”

पत्र में आगे लिखा गया, “आपने अपनी खबर में किसी का नाम नहीं लिया, जिससे साबित होता है कि आपकी खबर का जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है। हाल के दिनों में, आपने पश्चिम बंगाल बीजेपी की छवि को धूमिल करने के लिए खबरें प्रकाशित की हैं।”

सप्तर्षि चौधरी ने पत्र में आगे लिखा, “आपसे अनुरोध है कि खबर के स्रोत का खुलासा करें और फर्जी कहानी को प्रसारित करने के लिए बिना शर्त माफी माँगें। आपसे यह भी अनुरोध है कि नामों का खुलासा करें अन्यथा कानून का रास्ता अपनाना होगा और इसके जिम्मेदार आप होंगे। मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूँ कि भविष्य में ऐसी फर्जी कहानियों को प्रकाशित करने से खुद को रोकें अन्यथा मेरे पास कानूनी कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।”

दिलीप घोष ने कहा, “वे सभी लोग और समाचार चैनल जो पाश्चिम बंगाल में भाजपा के उदय से ईर्ष्या कर रहे हैं, वे नियमित रूप से फर्जी समाचार प्रसारित कर रहे हैं।” उन्होंने इसे शर्मनाक बताया है। पश्चिम बंगाल में भाजपा के अन्य निर्वाचित प्रतिनिधि भी रिपोर्ट को बकवास करने के लिए आगे आए।

‘शुभ कार्य पर असुर बाधा पैदा करते हैं, दिग्विजय सिंह वही कर रहे’: कॉन्ग्रेस सांसद ने भूमि पूजन के मुहूर्त को बताया था अशुभ

5 अगस्त को अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन की तैयारियाँ हो चुकी है। समूची अयोध्या रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के उल्लास में डूबी नजर आ रही है। घर-घर में तैयारी और उल्लास का माहौल है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए चुनी गई तारीख की अशुभ बताते हुए लोगों को भ्रामित करने की कोशिश की है।

उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीति करने के लिए बेशर्मी से गृहमंत्री अमित शाह की तबीयत पर निशाना साधा। सिंह का कहना है कि मुहूर्त शुभ नहीं है। प्रथा को अनदेखा करने की वजह से गृह मंत्री शाह से लेकर भाजपा के अन्य नेता कोरोना संक्रमित हो गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी से इस कार्यक्रम को स्थगित करने का आग्रह किया।

कॉन्ग्रेस नेता ने शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा भूमि पूजन के मुहूर्त के बारे में दिए गए एक निराधार डर पैदा करने वाले बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने ट्वीट किया कि भूमि पूजन के लिए दिन अनुकूल न होने के बावजूद, इसे पीएम मोदी की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चुना गया है।

उन्होंने कहा, “मोदी जी की सुविधा पर यह अशुभ मुहूर्त निकाला गया। यानी मोदी जी हिंदू धर्म की हजारो वर्षों की स्थापित मान्यताओं से बड़े हैं। क्या यही हिंदुत्व है?”

कॉन्ग्रेस नेता इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह, कर्नाटक सीएम बीएस येदियुरप्पा और भाजपा के कई नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये नेता इसीलिए कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हैं, क्योंकि राम मंदिर भूमिपूजन के लिए अशुभ घड़ी को चुना गया है।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन हिंदू धर्म की मान्यताओं को अनदेखा करने की वजह से भाजपा नेता और राममंदिर के पुजारी इसके शिकार हुए हैं।

दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “हम अनादि काल से देखते आ रहे हैं कि, जब भी कुछ अच्छा या शुभ हो रहा होता है तब ‘असुर’ समस्याएँ पैदा करने की कोशिश करते हैं। दिग्विजय भी ऐसा ही कर रहे हैं।”

राम मंदिर के लिए 5 अगस्त को भूमि पूजन होना है। तीन दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत आज गौरी गणेश पूजा से हुई। सुबह 11 बजे मंत्रों के जाप के साथ सुबह 8 बजे पूजा शुरू हुई। इसके अलावा अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में रामायण पाठ आयोजित किया गया।

48 घंटे से भी कम का वक्त बचा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखेंगे। प्रधानमंत्री मोदी 5 अगस्त को सुबह 11 बजे अयोध्या पहुँचेंगे। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक अयोध्या में रहेंगे।

इस कार्यक्रम में कुल 200 लोग शिरकत करेंगे। कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के बीच हो रहे इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सोशल डिस्टेन्सिंग और सैनिटाइजेशन के नियमों का ध्यान रखा जाएगा। इस दिन को न्यूयॉर्क में भी यादगार बनाने के लिए के लिए कोशिशें की जा रही हैं। 5 अगस्त को न्यूयॉर्क की प्रतिष्ठित इमारत टाइम्स स्क्वायर पर भगवान राम की भव्य तस्वीर प्रदर्शित होगी। 17,000 वर्ग फीट वाली एलईडी स्क्रीन पर उनकी त्रिआयामी (थ्रीडी) चित्रों का प्रदर्शन किया जाएगा।

‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहने वाले इकबाल अंसारी को भूमि पूजन का पहला कार्ड, कहा- एक समुदाय के नहीं, सबके हैं राम

अयोध्या में 5 अगस्त को होने वाले राम मंदिर भूमि पूजन के लिए आमंत्रण-पत्र भेजे जाने शुरू हो गए हैं। सोमवार (अगस्त 3, 2020) को कार्यक्रम का पहला आमंत्रण पत्र बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी को भेजा गया। निमंत्रण पत्र पाकर अंसारी काफी खुश दिखे। उन्होंने कहा, “यह भगवान राम की ही इच्छा होगी कि मंदिर निर्माण का पहला आमंत्रण पत्र मुझे मिले। मैं इसे स्वीकार करता हूँ।”

बता दें कि इकबाल अंसारी के पिता हाशिम अंसारी बाबरी अयोध्या विवाद में बाबरी मस्जिद के मुद्दई थे। वे 1949 से मुकदमे की पैरवी कर रहे थे। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में हाशिम अंसारी कॉन्ग्रेस को दोषी मानते थे। वहीं, मुस्लिम नेताओं के भी आलोचक थे। उनके इंतकाल के बाद इकबाल ने बाबरी मस्जिद को लेकर कानूनी लड़ाई जारी रखी थी। हालॉंकि अदालत के फैसले के बाद उन्होंने इसका स्वागत किया था।

वैसे इकबाल पिछले साल उस समय भी चर्चा में आए थे जब अंतरराष्ट्रीय शूटर वर्तिका सिंह से उनका विवाद हुआ था। गौरतलब है कि 3 सितंबर को वर्तिका सिंह राम मंदिर को लेकर बात करने इकबाल अंसारी से के घर पहुँची थीं। इस दौरान दोनों में विवाद हो गया था। वर्तिका का कहना था कि बातचीत के दौरान इक़बाल अंसारी ने न सिर्फ़ पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को लेकर अपशब्द भी कहे।

वर्तिका सिंह की याचिका के बाद पुलिस ने इकबाल अंसारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147, 504, 505 (2) और 506 के तहत राम जन्मभूमि थाने में केस दर्ज किया था। वर्तिका ने कोर्ट में दी याचिका में इकबाल अंसारी पर मारपीट का आरोप लगाया था।

निमंत्रण मिलने के बाद अंसारी ने कहा कि भूमि पूजन के कार्यक्रम में भागीदार बनकर उन्हें मंदिर निर्माण में सहभागी बनने का मौका मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाकर विवाद खत्म कर दिया है। अब आगे कोई विवाद नहीं होना चाहिए। दोनों मिलकर रहें। अंसारी ने कहा कि भगवान राम किसी एक के नहीं सारे समुदाय के हैं। हम उनकी नगरी में ही रहते हैं, यह सौभाग्य की बात है।

इकबाल अंसारी ने पहले भी कहा था कि भूमिपूजन में अगर उन्हें निमंत्रण दिया जाता है तो वह जरूर जाएँगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रामनामी पटका से स्वागत करने की इच्छा भी जताई है। इसके अलावा इकबाल अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रामचरित मानस भेंट करने की इच्छा जताई है।

बता दें कि 5 अगस्त को होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा संघ प्रमुख मोहन भागवत विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहेंगे।

राम को काल्पनिक बताने वाले कॉन्ग्रेस MP को संबित पात्रा ने कहा ‘राइस बैग कन्वर्ट’, आखिर क्या है इसका मतलब

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने अयोध्या और राम मंदिर भूमिपूजन को लेकर न्यूज़ चैनल पर हो रही एक डिबेट के दौरान कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद कुमार केतकर को ‘राइस बैग कन्वर्ट’ कहा। कॉन्ग्रेस सांसद ने दावा किया था कि भगवान श्रीराम इतिहास या फिर साहित्य की रचना है।

कॉन्ग्रेस नेता ने कहा था, “रामायण की वजह से राम का अस्तित्व है। हालाँकि, इस निष्कर्ष पर पहुँचना अभी बाकी है कि राम इतिहास इतिहास की रचना है या साहित्य की। वाल्मीकि ने एक महान महाकाव्य लिखा था और इसका प्रभाव भारत और विदेशों दोनों में महसूस किया गया था। लेकिन, मुझे नहीं पता कि वह इतिहास में मौजूद है या नहीं।”इस बयान पर संबित पात्रा ने उन्हें राइस बैग कन्वर्ट कहते हुए संबोधित किया।

केतकर के विवादित बयान पर मुँहतोड़ जवाब देते हुए संबित पात्रा ने कहा,”ये कॉन्ग्रेस का आदमी क्या कहना चाहता है? वह पूछ रहा है कि भगवान राम इतिहास या साहित्य की रचना हैं? ये हमें राम के अस्तित्व के सबूत दिखाने को कह रहा है। अगर आपने अल्लाह के बारे में ऐसे ही बात कही होती, तो अब तक आपका सर कट चुका होता। आभारी रहें कि आप एक हिंदू हैं, वरना आप ऐसा कुछ कहने का दुस्साहस नहीं कर पाते।”

राइस बैग कन्वर्ट का मतलब

राइस बैग कन्वर्ट या राइस क्रिश्चियन, शब्द का उपयोग ऐसे लोगों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है, जो मिशनरियों से प्रेरित होकर अपने फायदे के लिए ईसाई धर्म में परिवर्तित हो जाते हैं। 19 वीं शताब्दी में प्रकाशित ब्रूअर डिक्शनरी ऑफ फ्रेज़ एंड फैबल ने राइस क्रिश्चियन को “सांसारिक लाभों के लिए ईसाई धर्म में धर्मान्तरित, जैसे कि भारतीयों को चावल की आपूर्ति के रूप में परिभाषित किया।” ईसाई धर्म का जन्म धन से हुआ है, विश्वास से नहीं।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के लिए एक लेख में जेसन वर्डी ने लिखा, “17 वीं सदी के अंत में इंडो-पैसिफिक का दौरा करने वाले एक अंग्रेज खोजकर्ता विलियम डाम्पियर के लेखन में राइस क्रिश्चियन शब्द का उल्लेख है। डाम्पियर ने इंडो-चाइना में उस समय सक्रिय फ्रांसीसी कैथोलिक पुजारियों के बारे में लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा कि उपदेश की जगह चावल की भिक्षा देने से अधिक लोग ईसाई धर्म में परिवर्तित हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा, “16 वीं शताब्दी से यूरोपीय समुद्री यात्रा के लिए यूरोपीय यात्राओं के मद्देनजर भौतिक रूप से अवसरवादी धार्मिक अनुयायी इस क्षेत्र में पहुँचे। इन्हें लोग आमतौर पर “राइस क्रिश्चियन” के रूप में जानते थे। इन लोगों का हॉन्गकॉन्ग और अन्य जगहों पर एक लंबा और आमतौर पर अरुचिकर इतिहास है। इस प्रकार इसका मतलब सिर्फ यह नहीं कि लोग सिर्फ चावल का लालच देते थे या सिर्फ चावल तक ही सीमित थे। लेकिन चावल (खाने की सामग्री) ही धर्म परिवर्तन की प्रमुख वजह मानी जाती है।”

राइस बैग कन्वर्ट और राइस क्रिश्चियन

कहा जाता है कि, राइस बैग कन्वर्ट और राइस क्रिश्चियन से संबंधित मामले अक्सर भारत, जापान और चीन जैसे एशियाई देशों से आते हैं। इतिहास में जापान ने धर्म परिवर्तन को खत्म करने के ईसाई मिशनरियों के साथ युद्ध किया, क्योंकि वे उन्हें सांस्कृतिक और साथ ही राजनीतिक खतरा मानते थे।

बदलते दौर में अब ईसाई मिशनरी धर्मांतरण के लिए चावल के थैलों का इस्तेमाल नहीं करते हैं, क्योंकि अब लोगों को अलग-अलग वस्तु का लालच दिया जाता है। मिशन इंडिया, एक ईसाई संगठन है। इस संगठन ने अपने एक परियोजना का नाम राइस बैग प्रोजेक्ट रखा है। इस परियोजना में बच्चों को ‘मिशन इंडिया राइस बैग्स’ सौंपा जाता है।

वहीं कुछ ईसाई संगठनों ने इसके खिलाफ आवाज भी उठाई है, क्योंकि उनका मानना ​​है कि लालच के माध्यम से किया गया रूपांतरण दिल से परिवर्तन नहीं होता, इसका परिवर्तन सिर्फ सतह पर होता है। उनमें से कुछ ने मिशनरियों को निर्देश भी जारी किए हैं ताकि दूसरे संगठन धर्मांतरण के लिए लालच का उपयोग करने से परहेज करें।

एक लेख में कहा गया है, “कंबोडिया के रिलेटिव रिलिजन फ्रीडम ने ईसाई समूहों को राज्य में दुकान स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया है, लेकिन वे गरीबों को उपदेश देते हुए उन्हें ‘राइस क्रिश्चियन’ बनाते हैं।”

एक और लेखक ने उल्लेख किया है, “अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता के लिए मैंने इसे भली-भाँति समझाने की कोशिश की, लेकिन गुमराह करने वाले पादरी ने कहा कि क्रॉस-कल्चरल मिनिस्ट्री के लिए उनका दृष्टिकोण राइस राइस क्रिश्चियन के लिए बाध्य था जो अमेरिकन वकेशनलैंड का फ्री ट्रिप का लोगों को लालच देते थे।”

ग्राउंड रिपोर्ट: नहीं बजा सकते हनुमान चालीसा, घर बेचने/छोड़ने पर मजबूर, कट्टरपंथी देते हैं धमकी

“समुदाय विशेष के भय से यह मकान बिकाऊ है। डर के कारण, यह मकान तत्काल बिकाऊ है।” हर तरफ थोड़े बहुत भाषा के अंतर के साथ बस एक ही बात- “मकान बिकाऊ है।” ऐसे एक दो नहीं बल्कि दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों के आग में झुलसी और अब झूठे आरोपों में अपने ही परिवार जनों के लौट आने की आस लिए करीब 150-200 हिन्दुओं के घरों के बाहर या तो ऐसे ही पोस्टर लगे हैं और लोग अपने घरों में दुबके या घर के बाहर पोस्टर और दरवाजे पर ताला लगा के अपना सब कुछ छोड़ के चले गए हैं कि अगर ज़िन्दगी रही तो संपत्ति फिर बना लेंगे।

यह हालात किसी दूर-दराज के गाँव की नहीं बल्कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के नॉर्थ घोंडा का सुभाष मोहल्ला, मधुबन मोहल्ला और मौजपुर के मोहनपुरी क्षेत्र में हिन्दुओं की तीन गलियों का है। इस इलाके में हिन्दू अल्पसंख्यक रहते हैं। जहाँ हिन्दुओं के घरों के बाहर एक लाइन से ऐसे पोस्टर देखने को मिलेंगे। वैसे उस इलाके में पलायन की खबरें भले पहले रिपोर्ट न हुई हों लेकिन वहीं के कई लोगों ने बताया कि जब इन इलाकों में गुर्जर भी नहीं टिक सके तो भला वे हर रोज जान जाने का भय लिए कैसे रहें? वो भी तब जब दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों की आग अभी भी वहाँ रह गए हिन्दुओं को झुलसा रही है।

मामला इतना सीधा भी नहीं है। चलिए ऑपइंडिया आपको ले चलता है उन इलाकों में, जहाँ बस नाम पता चल जाए तो हो सकता है कि किसी झूठे आरोप में फँसा दिया जाए। अगर आप प्रतिष्ठित हैं इलाके में तो चांस ज़्यादा है। ऐसा मैं नहीं कह रहा हूँ बल्कि ऐसे कई स्याह सच से हमें वहीं के स्थानीय लोगों ने रू-ब-रू कराया। इसलिए वीडियो पर समस्याएँ बहुतों ने बताई पर इस दरख़्वास्त के साथ कि नाम न रिकॉर्ड करें तो सही रहेगा!

मोहनपुरी गली नंबर 6 से 8: पलायन को विवश हिन्दू परिवार

सबसे पहले ऑपइंडिया वहीं से शुरू कर रहा है, जहाँ हम पहली सूचना के आधार पर पहुँचे। यह इलाका है- उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र में मौजपुर का मोहनपुरी मोहल्ला। जहाँ गली नंबर: 6-7-8 है, जिसमें ज़्यादातर रहने वाले परिवार हिन्दू हैं। और जिन गलियों का जिक्र यहाँ नहीं है, उनमें ज़्यादातर दूसरे मजहब वालों का सघन निवास है।

कहने का तात्पर्य यह है कि इस इलाके में हिन्दू घिरे हैं, एक तरह से दूसरे मजहब की आबादी से। और यही वजह भी रही कि दिल्ली दंगों में चौतरफा नुकसान हिन्दुओं को झेलना पड़ा। वहाँ के लोगों ने मुझे उन गेटों को दिखाया, जहाँ से भारी संख्या में दंगाई भीड़ हिन्दुओं के गलियों में प्रवेश करती है और 24-25 फरवरी 2020 को घटित दिल्ली दंगे, यहाँ के हालात और ख़राब कर देते हैं।

मैंने इन गलियों में जब दिल्ली दंगों में लूटे और जला दिए गए “पंडित जी रसोई” नामक ढाबे को देखा तो ठिठक गया। पूछने पर स्थानीय लोगों ने CCTV फुटेज का हवाला देते हुए बताया कि दिल्ली दंगों के दौरान पड़ोस के रुई के दुकान वाले ने ही दंगाई भीड़ को उकसा कर इसमें आग लगाने को कहा। और वहाँ के लोगों ने यह भी बताया कि यही भीड़ रसोई के सामने के एक बड़ी सी गंगा मेडिकल स्टोर को लूट कर आग के हवाले कर देती है।

गंगा मेडिकल स्टोर की जली हुई दरो-दीवार आज भी अपनी कहानी खुद ही बयाँ कर रही थी। इस मकान के गेट पर ही पहला पोस्टर दिखा- “यह मकान बिकाऊ है।” करीब 5 महीने पहले लूटी और जलाई गई दूकान अभी दोबारा नहीं खुल सकी है। बल्कि अब नौबत डर और दहशत से मकान बेचकर कहीं और आशियाना और सुकून ढूँढने की आ गई है। वैसे मुख्य सड़क पर ही चुन कर कई हिन्दुओं की दुकानें, मकान और गाड़ियाँ जला दी गई थीं।

यहाँ से सिलसिला शुरू हुआ तो दोनों तरफ लगभग हर हिन्दू घर के बाहर मकान बेचने के पोस्टर चिपके पड़े हैं। और जिस गेट पर खड़े हो जाइए वही अपनी पीड़ा सुनाने को तैयार ताकि हम उनकी बात देश के उन लोगों तक पहुँचा सकें, जो इन हिन्दू परिवारों को यह एहसास दिलाएँ कि वो अकेले नहीं हैं।

तीनों गलियों में मैंने कई चक्कर लगाए। हर दरवाजे पर चस्पा मकान बेचने के पोस्टर पढ़ता रहा। और जिस डर का सभी जिक्र कर रहे थे, उस ‘सन्नाटे की चीख’ भी महसूस की। लगभग पचासों लोगों से मैंने बातें कीं।

उन सभी से सवाल किए कि क्यों डरे हैं वो इतने? क्यों अपना मकान बेच कर यहाँ से चले जाना चाहते हैं? कौन लोग हैं, जो दिल्ली दंगों के बीत जाने के लगभग 5 महीने बाद तक उन्हें डराते आ रहे हैं? दंगों के दौरान इस मोहल्ले को कितना नुकसान हुआ? उन्हें और उनके परिवार को आखिर क्या-क्या समस्याएँ हैं? और उसके समाधान के लिए उन लोगों ने अब तक क्या किया?

अब आपको सीधे ले चलता हूँ मोहनपुरी के इन तीनों गलियों के इकलौते गली नंबर- 8 स्थित लक्ष्मी-नारायण मंदिर के बाहर खड़े कुछ लोगों के पास जिनके मकानों पर अपना घर बेच देने का पोस्टर और आँखों में डर है कि उन्हें कहीं कुछ हो न जाए। अपने लेवल पर इन सभी ने गलियों के हर प्रवेश द्वार पर गेट लगवा दिया है। कई तो दिन में भी बंद रहती हैं और रात में एक को छोड़कर सभी हिन्दुओं ने अपने पैसे से चौकीदार रख दिया है ताकि वह किसी खतरे के समय उन्हें सीटी बजाकर चौकन्ना कर दे।

लेकिन बात इतनी ही नहीं। लोगों को शिकायतें बहुत सारी हैं। वहाँ मंदिर तो है लेकिन वो उसमें लाउडस्पीकर पर भजन या हनुमान चालीसा नहीं बजा सकते। पूजा के समय आरती के स्वर भी मंदिर की चहारदीवारी में घुटकर रह जाती है। आवाज तेज हुई और पड़ोस के गलियों तक पहुँच गई तो पास के कई लोग आकर धमकी दे जाते हैं कि बंद कर लो, यहाँ यह सब नहीं चलेगा। यह आवाज हमारी कानों तक नहीं आने चाहिए।

जबकि वहाँ रहने वाले हिन्दुओं को हर पहर जब-जब अज़ान या कोई जलसा होता है, मस्जिद से आने वाली लाउडस्पीकर की तेज आवाज में अज़ान सुननी पड़ती है। चारो तरफ मस्जिद पर लाउडस्पीकर तो है ही, आस-पास के सभी ऊँचे दूसरे समुदाय के मकानों पर एक्सटेंशन वायर के जरिए लाउडस्पीकर लगा दिए गए हैं।

वहाँ रहने वाले हिन्दू परिवारों ने ही बताया कि अज़ान से उन्हें उतनी समस्या नहीं है। समस्या तो तब है, जब उनको अपने धार्मिक क्रियाकलापों और उत्सवों से भी वंचित करने की कोशिश हो रही है। दंगों के बाद से यह दबाव और बढ़ा है।

पड़ोस के मुहल्लों से कोई भी आदमी इधर से गुजरते हुए तंज कसता हुआ निकल जाता है कि बना लो मकान, रहना तो उन्हें ही है। छोड़ के जाना होगा। तो कोई घर के बाहर पोस्टर देखकर यही पूछता हुआ निकल जाता है कि यह मकान तो वही ख़रीदेंगे।

स्थानीय लोगों ने ऑपइंडिया को यह भी बताया कि गलियों में लड़कियों-महिलाओं का खड़े रहना भी दुश्वार है। कब कोई समुदाय विशेष का झुण्ड तेजी से 4-5 की सवारी के साथ बाइक चलाता हुआ, फिकरे कसता हुआ निकल जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। कुछ बोल दिया तो झगड़े की नौबत! अब कौन लड़े उनसे? अपना काम-धंधा करें, पढ़े-लिखें या उनसे लड़ें? उनमें से ज़्यादातर को कोई काम तो है नहीं, कोई पंचर बनाता है, कोई अंडे, जूस या ऐसे ही कुछ बेचता हुआ नजर आता है।

कभी दरवाजे तक आकर भी पास के लोग मोहल्ले का कोई झूठे केस में फँसा देने की धमकी देता हुआ निकल जाता है। डर का डोज कम न हो, इसके लिए रोजों के समय इनके उत्पात और बढ़ जाते हैं। ईद के समय तो जान-बूझकर हिन्दू मोहल्लों में हलाल करने वाले ऊँट जैसे जानवर आदि शोर-शराबे के साथ घुमाते हैं और हिन्दू सहम कर सब कुछ सहने को मजबूर।

मैंने पूछा कि क्या यहाँ के विधायक या पार्षद आपसे मिलने आए? तो लोगों ने जो बताया वो और भी चौकाने वाला और भेदभावपूर्ण नजर आया। लोगों ने कहा कि आप आदमी पार्टी के विधायक गोपाल राय पास के मोहल्ले नूर-ए-इलाही में तो आए, वहाँ खाना भी बँटवाया, मजहबी मोहल्लों में सरकारी पैसों से गेट आदि लगवाया लेकिन जब से जीते हैं तभी से, यहाँ तक कि दिल्ली दंगों के बाद भी इधर झाँकने तक नहीं आए।

स्थानीय लोगों का कहना है यहाँ के दूसरे मजहब वाले जिन लोगों को जानते थे, उनमें से कई लोगों को दिल्ली दंगों में ही बहुत बाद में झूठे केस में फँसा चुके हैं। इनके कई परिवारों के कमाने वाले लोग दिल्ली दंगों के बाद कई मामलों में फँसाए जा चुके हैं।

साहिल के पिता परवेज की हत्या के मामले में खुद से पुलिस की मदद के लिए क्राइम ब्रांच गए 16 लोग सिर्फ मोबाइल लोकेशन के आधार पर गिरफ्तार कर जेल में डाल दिए गए हैं। न कोई चार्जशीट फाइल हो रही है और न उन्हें जमानत मिल रही है और यहाँ के समुदाय के लोग हर रोज धमकी देकर जाते हैं कि जैसे उन लोगों को फँसा कर जेल भिजवाया, तुम सब जाओगे, सबका नंबर आएगा।

यह डर आए दिन बढ़ती धमकियों के साथ बढ़ता जा रहा है। हालाँकि, अपनी सुरक्षा के लिए हिन्दुओं ने अपने पैसे से चंदा जमा कर गेट लगा लिया है और वहाँ के एक मुख्य गेट पर रखे चौकीदार को देने के लिए और भी चंदा इकट्ठे करते दिखे।

उन सभी लोगों के परिवार बेहद डरे हैं। कई घरों में तो एकलौते वही कमाने वाले थे, जो किसी न किसी आरोप में फँसा दिए गए हैं। ज़्यादातर उसमें से वही हैं, जिनकी (उनके अनुसार) मजहबी दंगाई भीड़ द्वारा दुकानें लूटी और जलाई गईं। और उल्टा वो सभी एक ऐसे मामले में अभी जेल में हैं, जिसमें उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। बस एक FIR में चुनकर कई लोगों के नाम लिखा दिए गए। इनमें से कई उस समय दिल्ली में भी नहीं थे और इसका उनके पास प्रमाण भी है।

अब आगे बढ़ने से पहले यहीं संक्षेप में यह भी जान लीजिए कि दिल्ली दंगों के दौरान वह मामला क्या था, किस आधार पर और कौन से 16 लोग पिछले करीब 4 महीनों से जेल में बंद हैं।

साहिल के पिता परवेज 3 बार में 3 तरह से, 2 अलग जगहों पर मरे… और 16 हिन्दुओं के नाम FIR में

दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों में मोहनपुरी इलाके में 25 फरवरी 2020 को एक लाश मिलती है। लाश की पहचान परवेज आलम के रूप में होती है। ये घटना 25 फरवरी के शाम सात बजे की बताया जाता है।

जाफराबाद पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में परवेज की जेब से 13 जिंदा कारतूस (गोलियाँ), एक नोकिया फोन और चाभियों का एक गुच्छा बरामद होने की बात है। इसके बाद यह लिखा गया कि इस व्यक्ति को घोंडा चौक से बाबू राम चौक की तरफ जाने वाली सड़क से घायल अवस्था में अस्पताल में दाखिल कराया गया। जहाँ बाद में उन्हें बताया गया कि उनकी मौत हो गई है।

साहिल के बयानों के अनुसार ही उसके पिता परवेज की हत्या तीन बार में, तीन तरह से दो अलग जगहों पर होती है। और लगभग 1 महीने बाद दर्ज शिकायत में चुनकर कई आरोपितों के नाम बढ़ाए जाते हैं।

वैसे, साहिल ने 25 फरवरी के बाद 19 मार्च 2020 को एक आवेदन पत्र लिखा जो कि भजनपुरा पुलिस स्टेशन के SHO के नाम था। 3 अप्रैल 2020 को साहिल के बयान को पुलिस ने लिखा है। जबकि चश्मदीदों ने ऑपइंडिया को बताया (आरोपितों के परिजन विक्रान्त त्यागी, शशि मिश्रा, चंद्रप्रकाश माहेश्वरी, निशा, श्रीमती चावला) मोहनपुरी इलाके में जो भी होना था, वो सब 24 फरवरी को हो चुका था।

मजहब भीड़ ने ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए त्यागी परिवार के घर में पेट्रोल बम फेंके, मोटर सायकिल को आग लगा दी, और गेट को तोड़ने की कोशिश की। साथ ही मुख्य सड़क पर हिन्दुओं के दुकान, मकान और गाड़ियों को निशाना बनाया गया।

मुख्य सड़क पर इस FIR में नामित 16 आरोपितों में से कइयों के दुकान आदि थे, जिन्हें बुरी तरह से तोड़ा गया, आग लगाई गई। जबकि उनके परिवारों का कहना है कि इलाके के हिन्दू लोगों में डर इतना ज्यादा था कि घरों में दुबके ये लोग ईश्वर से अपने बचने की प्रार्थना कर रहे थे और लगातार पुलिस को कॉल कर रहे थे।

ख़ैर, यह सब उस समय तक खत्म हो चुका था। इसके बाद सीधे 8 अप्रैल 2020 को 16 आरोपितों को पुलिस ने नोटिस भेज कर द्वारका स्थित क्राइम ब्रांच में पूछताछ के लिए बुलाया। इसके बाद, फिर अगले दिन भी इन्हें बुलाया और, चूँकि इन्होंने कुछ अपराध किया नहीं था, तो ये पुलिस के साथ जाँच में सहयोग देने की इच्छा से अपनी गाड़ियों में वहाँ गए। परिजन बताते हैं कि वहाँ से रात को फोन आया कि सारे लोग गिरफ्तार हो गए हैं। तब से आज तक परिजनों को न तो मिलने दिया गया, न बातचीत हुई।

यह पूरी कहानी कि कब क्या हुआ और कैसे लोगों ने अपनी बात रखी और ऑपइंडिया को भी तमाम सबूतों के साथ बताया वह आप इस विस्तृत रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं। फिलहाल इसी रिपोर्ट के हवाले से इतना बता दूँ कि साहिल ने दो बार बताया कि हत्या के समय वो अपने पिता के साथ नमाज पढ़ने जा रहा था।

साहिल ने इनमें से एक बयान में रिवॉल्वर के गायब होने की बात की है। पुलिस ने लाश की जेब से तेरह जिंदा कारतूस के होने की बात अपनी प्राथमिकी में दर्ज की है। अब साहिल को यह भी बताना चाहिए कि क्या मस्जिद में नमाज पढ़ने जाते हुए गोली और पिस्तौल रखना किस हिसाब से सही है? अब यह पूरा मामला जाँच का एक अलग विषय है। उस पर जाँच जरूर होनी चाहिए।

कौन हैं ये कथित रूप से गिरफ्तार हुए 16 लोग?

साहिल ने अपने 3 अप्रैल वाले बयान में कुल 16 लोगों पर आरोप लगाए हैं: सुशील, जयबीर, सुप्रीम, पवन, अतुल चौहान, वीरेन्द्र चौहान, सुरेश पंडित, अमित, नरेश त्यागी, उत्तम त्यागी, दीपांशु, राजपाल त्यागी, अखिल चौधरी, उत्तम मिश्रा, हरिओम मिश्रा, संदीप चावला। हत्या की वारदात 25 फरवरी को हुई, और इन सबको नोटिस 8 अप्रैल को मिले। उसके बाद इन्हें एक दिन द्वारका क्राइम ब्रांच में बुलाया गया और बाद में गिरफ्तारी हुई।

स्थानीय लोगों ने ही यह भी बताया कि जिन लोगों को इस झूठे आरोप में फँसाया गया है, उसमें से ज़्यादातर संघ और विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े हैं। उनका यह भी कहना है कि साजिशन इसकी योजना हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए दंगों से प्रभावित कैंप में कट्टरपंथियों द्वारा बनाई गई। अब सच क्या है, यह जाँच का विषय है।

कट्टरपंथियों से डर की कहानी, वहाँ के हिन्दू परिवार की जुबानी:

नॉर्थ घोंडा का मधुबन मोहल्ला

इस मोहल्ले में जयप्रकाश माहेश्वरी और चौहान परिवार का मकान है। इनके घरों के बाहर भी मकान बिकाऊ है, के पोस्टर लगे हैं। जयप्रकाश माहेश्वरी ने ऑपइंडिया से अपने बेटे की उसी उपरोक्त मामले में गिरफ़्तारी का जिक्र करते हुए बताया कि उनके बेटे को झूठे आरोप में फँसा दिया गया है। उन्होंने बताया कि अब हर रोज अज्ञात लोगों द्वारा धमकियाँ मिल रही हैं।

उन्होंने कहा, “अननोन लोग आते हैं और कह कर जाते हैं कि अभी बेटा ही अंदर हुआ है। तुम भी छोड़ के जाओगे।” जयप्रकाश जी का कहना है, “बस मेरा निर्दोष बेटा बाहर आ जाए फिर यह इलाका छोड़कर कुछ भी करके कहीं जी-खा लेंगे। मुझे यहाँ नहीं रहना है अब।”

मधुबन मोहल्ले के ही अतुल और वीरेंद्र चौहान के घर के लोगों से भी ऑपइंडिया ने बात की तो उनका पूरा दर्द बाहर आ गया। परिवार में इकलौते वही लोग कमाने वाले थे। घर में बूढ़े बीमार पिता हैं, जिनके दवा के लिए भी अब पैसे नहीं बचे हैं।

घर में सिर्फ चार महिलाएँ- उन दोनों की पत्नियाँ, उनके बच्चे, बूढ़ी माँ और बीमार बिस्तर पर पड़े पिता हैं। साथ ही रक्षाबंधन पर उनकी बहन भी आई हैं, राखी बाँधने की उम्मीद लिए, जिसके पूरे होने की कोई सम्भावना नहीं नजर आ रही। रिश्तेदारों ने पैसा और मदद देने से मना कर दिया है। महिलाएँ हर रोज अपने परिजनों का इंतजार कर रही हैं। और चाहती हैं कि बस एक बार वो बाहर आ जाएँ तो वो मकान बेचकर चले जाएँगे।

मैं वहाँ खड़ा होकर बात ही कर रहा था तभी उस गली से एक तेज बाइक कमेंट करती हुई गुजर जाती है। मेरे पूछने पर कि क्या ऐसा अक्सर होता है, जवाब मिलता है कि आस-पास के लोग दबाव बना रहे हैं कि हम अपना मकान छोड़कर या बहुत कम दाम पर बेचकर यहाँ से चले जाएँ। उनका कहना है, “हिन्दू भय के मारे खरीदेगा नहीं और मजहबी लोग डरा के फ्री में कब्ज़ा कर लेंगे।”

काफी देर वहाँ रहने के बाद यह मैंने खुद भी महसूस किया कि आस-पास के छतों और गलियों में खड़े मजहबी परिवार का कोई भी व्यक्ति उन्हें आश्वासन देने या उनका डर दूर करने नहीं आया। पास-पड़ोस का तनाव वहाँ साफ़ दिन में ही नजर आ रहा था। जिसके आधार पर वहाँ रात के क्या हालात होंगे, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

नॉर्थ घोंडा सुभाष मोहल्ला

उत्तरी घोंडा के सुभाष मोहल्ले का गली नंबर-तीन। यहाँ भी शुरुआत में ही करीब 5-6 घर हैं, जिन पर- “भय से मकान बिकाऊ है” का पोस्टर चस्पा है। इसी गली में बहुत सारे समुदाय विशेष के लोग भी रहते हैं। जिन्होंने दबाव बनाकर गली के दोनों छोरों पर लोहे का गेट भी नहीं लगाने दिया।

घोंडा में यहीं के पहले मकान त्यागी के घर की बाइक फूँकी गई थी और घर में आग लगाने की कोशिश हुई लेकिन दंगाइयों के अंदर न पहुँच पाने और अंदर से त्यागी परिवार द्वारा पानी फेंककर पेट्रोल बम से लगे आग बुझा देने के कारण बड़ा हादसा टल गया था। लेकिन दंगों के कुछ अवशेष अभी भी शेष हैं। और साथ ही CCTV में मौजूद उस दिन क्या हुआ था, उसके प्रमाण।

इस परिवार के भी दो लोग साहिल के पिता परवेज वाले FIR में नाम होने से जेल में हैं। इस परिवार ने उनके छूट के आने और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए यहाँ का मकान बेचकर चले जाने का निर्णय कर लिया है।

इसी गली के नुक्कड़ पर एक इलेक्ट्रॉनिक की दुकान भी लूटी और जला दी गई थी। उस मकान पर भी “मकान बिकाऊ है” का पोस्टर लगा है। और पूरी तरह तहस-नहस होने के बाद अब भी दुकान बंद। अब यह लोग यहाँ हर रोज दहशत और डर के साए में नहीं रहना चाहते बल्कि सब कुछ बेचकर कहीं और चले जाना चाहते हैं। जहाँ वह सुरक्षित रह सकें।

यहाँ के लोगों के डर से पलायन करते हिन्दू परिवारों से हाल ही में सांसद मनोज तिवारी भी मिलने गए थे। इलाके में पहुँचकर उन्होंने खुद पीड़ितों का दर्द जाना और मौजूदा हालात का मुआयना कर इलाके के सभी हिन्दू परिवारों को सुरक्षा का आश्वासन देते हुए गली के बाहर एक पिकेट लगाने की बात कही। साथ ही झूठे आरोप में गिरफ्तार 16 लोगों के मामले की जाँच का भी आश्वासन दिया। ऐसा वहाँ के लोगों ने ऑपइंडिया को बताया।

खास समुदाय के डर और दहशत से हिन्दुओं के पलायन की कहानी को शब्दों में समेटना आसान नहीं है। लोगों की आँखों में जो भय दिखा, उसे कहना और दूर करना भी आसान नहीं। बीजेपी सांसद के वहाँ आने के बाद भी माहौल अभी बदला नहीं है।

इलाके में भय और दहशत बनी हुई है। हमें यह भी नहीं पता कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में पलायन की सोच रहे इन हिन्दू परिवारों को प्रशासन रोक पाएगा या नहीं। उनका डर कम कर पाएगा या नहीं या फिर वहाँ के आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल राय और निगम पार्षद मामले की अनदेखी करते हुए देश की राजधानी दिल्ली में एक और मेवात, कैराना, कश्मीर की नींव तो नहीं रख देंगे!

जो कुछ भी हो रहा है और हिन्दू परिवारों को जो कुछ भी झेलना पड़ रहा है, उसे देखते और महसूस करते हुए एक सवाल जो वहीं के किसी आदमी ने पूछा कि आखिर गंगा-जमुनी तहजीब की जिम्मेदारी क्या हमेशा हिन्दुओं की ही रहेगी? हम कब तक भय के साए में रहेंगे? क्या कभी यह मंजर बदलेगा भी? मेरे पास तो कोई जवाब नहीं था, सोचिए शायद आपके पास हो!

कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम कोरोना संक्रमित, हुए होम क्वारंटाइन

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के बेटे और कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की रिपोर्ट कोरोना पॉजीटिव आई है। इसकी जानकारी खुद कार्ति ने ट्वीट करके दी है।

कार्ति ने लिखा, “मैं अभी कोरोना पॉजीटिव पाया गया हूँ। मुझे हल्के लक्षण हैं, जिसके बाद मैं होम क्वारंटाइन में हूँ। मैं उन सबसे मेडिकल प्रोटोकॉल फॉलो करने की अपील करता हूँ, जो हाल ही में मेरे संपर्क में आए हैं।”

इससे पहले रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। फिलहाल दोनों की हालत स्थिर है। उन्हें डॉक्टरों की सलाह पर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान का भी पिछले सप्ताह की शुरुआत में कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया था।

देश में कोरोना वायरस का प्रकोप जारी है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार अबतक देश में कोरोना के कुल 17 लाख 50 हजार 724 मामले सामने आ गए हैं। इनमें से पाँच लाख 67 हजार 730 एक्टिव केस हैं, वहीं 11 लाख 45 हजार 630 मरीज ठीक हो गए हैं। 37 हजार 364 संक्रमितों की इस महामारी के चलते अब तक मौत हुई है। रिकवरी रेट 65.44 फीसद हो गई है और मृत्यु दर 2.13 फीसद है।

तवलीन सिंह ने बेटे आतिश तासीर का किया बचाव, अमित शाह पर उगला जहर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार (अगस्त 3, 2020) को कोरोना पॉजिटिव पाए गए। उन्होंने खुद ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनकी तबीयत ठीक है, लेकिन डॉक्टर्स की सलाह पर मेदांता अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। इसके बाद से कट्टरपंथियों और ‘सेकुलर लिबरलों’ ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।

इसमें पत्रकार तलवीन सिंह के बेटे आतिश तासीर भी शामिल थे। आतिश तासीर ने अपने ट्वीट में अमित शाह को ‘fat b**tard’ लिखा था। आतिश ने लिखा, “जिस तरह एक स्वतंत्र प्रेस के हमारे प्यार के लिए हमें @DailyMailUK का बचाव करने की आवश्यकता होती है, उसी तरह अब हमें इस fat b**tard (जिसने अपने जीवन में बुराई के अलावा कुछ नहीं किया है) के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करनी है।”

आतिश ने अपने ट्वीट में TheTweetOfGod को भी टैग किया है। बता दें कि TheTweetOfGod एक पैरोडी अकाउंट है, जो खुद को भगवान के रूप में प्रस्तुत करता है। यदि कोई इसे फॉलो करता है और उसका टाइमलाइन चेक करता है, तो वह किसी ऐसे प्रचारक से कम नहीं है जो बराबर जहर फैलाता रहता है।

आतिश तासीर, तवलीन सिंह और पूर्व पाकिस्तानी राजनेता सलमान तासीर की संतान हैं। आतिश का जन्म तवलीन और सलमान की शादी से पहले हुआ है। कैम्ब्रिज डिक्शनरी के अनुसार bas**rd का मतलब ऐसे इंसान से है, जिसका जन्म उसके माता-पिता की शादी से पहले हुआ हो।

Via Twitter

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने तासीर को बताया कि गृह मंत्री के खिलाफ उनकी अभद्र नफरत उनके खुद के परवरिश और नफरत भरे दिमाग को प्रदर्शित कर रही है।

Via Twitter

गौरतलब है कि पिता के पाकिस्तानी होने के बावजूद तासीर ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) स्टेटस का लाभ उठा रहे थे। 7 नवंबर 2019 को आतिश तासीर का OCI कार्ड रद्द कर दिया गया था। कानून के अनुसार, यदि किसी के माता-पितामें से किसी का कोई पाकिस्तानी संबंध है, तो वह व्यक्ति ओसीआई के लिए पात्र नहीं है।

MHA tweets on Atish Taseer
MHA tweets on Atish Taseer
Home Ministry’s dismissal of fake claims in media

गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार, तासीर ओसीआई कार्ड के लिए अयोग्य हो गए हैं, क्योंकि ओसीआई कार्ड के लिए बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में वो असमर्थ रहे। उन्होंने अपने पिता के पाकिस्तानी होने की बात अधिकारियों व सरकारी रिकॉर्ड में छिपाई।

OCI कार्ड रद्द होने के बाद से आतिश और तवलीन प्रेस और लेख के माध्यम से लगातार जहर उगल रहे हैं। तासीर और तवलीन दोनों ने यह नैरेटिव फैलाया कि भारत सरकार ने ‘तासीर की नागरिकता’ छीन ली है और उसे ‘बाहर निकाल दिया है।’ जबकि सच यह है कि तासीर कभी भी भारतीय नागरिक नहीं थे। वे जन्म से ब्रिटेन के नागरिक और पाकिस्तानी मूल के व्यक्ति थे।

सरकार द्वारा आतिश के ओसीआई को रद्द किए जाने पर मीडिया हाउस द प्रिंट ने दावा किया था कि तासीर के टाइम मैगजीन में इस लेख के लिखने के बाद से ही उसके ओसीआई को रद्द किए जाने पर विचार किया जा रहा था। हालाँकि, विदेश मंत्रालय ने मीडिया हाउस द्वारा फैलाए जा रहे झूठ को पूरी तरह से नकार दिया। विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि द प्रिंट की रिपोर्टिंग पूरी तरह से गलत और तथ्यरहित है।

तवलीन सिंह और उनके बेटे ने लगातार एक नैरेटिव गढ़ा कि सरकार की OCI निरस्त करने की वजह से ‘तवलीन’ को विदेश यात्रा करने से और तासीर को भारत आने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है।

हालाँकि तासीर कभी भी भारत आ सकता है, वह सामान्य तरीके से वीजा के लिए आवेदन कर सकता है। इसी तरह, तवलीन को अपने बेटे से मिलने के लिए अमेरिका या ब्रिटेन जाने से कोई नहीं रोक सकता।

तवलीन सिंह ने भी अपने हिंदूफोबिक बेटे के ट्वीट का समर्थन किया। जब एक यूजर ने लिखा कि तासीर को एक व्यक्ति (भारत के गृह मंत्री) की बीमारी पर इस तरह के असभ्य भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, तो तवलीन ने एक बार फिर से उसी OCI को लेकर आतिश को देश से ‘निर्वासित’ करने का ढिंढोरा पीटा, जो कि सरासर झूठ है।

बता दें कि इससे पहले भारत सरकार द्वारा सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर 59 चाइनीज ऐप को बैन करने के फैसले के बाद तवलीन सिंह ने इसका मखौल उड़ाते हुए ट्विटर पर लिखा कि क्या इन ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने से चीनी सैनिक हमारे क्षेत्र से पीछे हट जाएँगे।

उन्होंने अपनी कुत्सित बुद्धि का परिचय देते हुए वीरगति को प्राप्त एक जवान की माँ के लिए अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया। तवलीन ने बलिदान हुए एक सैनिक की माँ मेघना गिरीश को बीजेपी ट्रोल तक कह दिया था।

जानिए, अयोध्या के भव्य राम मंदिर के लिए कैसे किया जा सकता है दान

अयोध्या में 5 अगस्त को होने वाले राम मंदिर भूमि पूजन की तैयारियाँ लगभग पूरी हो चुकी हैं। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में अहम है। ख़बरों के मुताबिक़ ट्रस्ट लोगों से दान और आर्थिक सहयोग भी लेने वाला है। चाहे वह राशि के तौर पर हो या किसी वस्तु का दान हो। इसके लिए कोई नियम नहीं होगा, श्रद्धालु अपनी-अपनी श्रद्धा से दान कर सकेंगे। 

अभी तक राम मंदिर निर्माण के लिए धर्म गुरुओं समेत तमाम लोगों ने दान किया है। सभी ने ट्रस्ट के माध्यम से दान किया है। राम मंदिर दान के लिए ट्रस्ट ने एक वेबसाइट बनाई है। इसका लिंक नीचे है। यहाँ पर दान से जुड़ी सारी जानकारी मौजूद है,  

https://srjbtkshetra।org/donation-options/

इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी दान किया जा सकता है। भारतीय स्टेट बैंक ने इसका तरीका भी बताया है, जिसके मुताबिक़ श्रद्धालु ऑनलाइन माध्यम से दान कर सकते हैं। फिर उन्हें दान की ऑनलाइन रसीद भी मिल जाएगी। भले आपका कोई भी बैंक हो अथवा कोई भी बैंक का एटीएम कार्ड या क्रेडिट कार्ड हो, उसके द्वारा वांछित धनराशि दान की जा सकती है।

सबसे पहले कम्प्यूटर या मोबाइल पर जाकर onlinesbi.com पर लॉग इन करना होगा। इसके बाद स्टेट बैंक कलेक्ट (SB collect) का विकल्प चुनना होगा। इस पर क्लिक करते ही सामने आगे बढ़ने का विकल्प आएगा। इस पर क्लिक करने से पहले आपको शर्तों को मानने के बॉक्स पर क्लिक करना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन में शामिल होंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी सुबह 11 बजे अयोध्या पहुँचेंगे। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक अयोध्या में रहेंगे। 5 अगस्त को भूमि पूजन का कार्यक्रम सुबह 8 बजे शुरू होगा।

इस कार्यक्रम में कुल 200 लोग शिरकत करेंगे। कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के बीच हो रहे इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सोशल डिस्टेन्सिंग और सैनिटाइजेशन के नियमों का ध्यान रखा जाएगा। इस दिन को न्यूयॉर्क में भी यादगार बनाने के लिए के लिए कोशिशें की जा रही हैं। 5 अगस्त को न्यूयॉर्क की प्रतिष्ठित इमारत टाइम्स स्क्वायर पर भगवान राम की भव्य तस्वीर प्रदर्शित होगी। 17,000 वर्ग फीट वाली एलईडी स्क्रीन पर उनकी त्रिआयामी (थ्रीडी) चित्रों का प्रदर्शन किया जाएगा।