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पैगंबर की निंदा करने पर बीच कोर्ट में मारी गोली, हत्यारे के समर्थन में सड़कों पर उतरे हजारों लोग: नया पाकिस्तान

पाकिस्तान के पेशावर शहर के एक स्थानीय अदालत में जज के सामने एक बुजुर्ग अहमदिया की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद हजारों कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने हत्यारे के साथ एकजुटता व्यक्त की और उसका समर्थन करने के लिए सड़कों पर उतर आए।

मृत ताहिर अहमद नसीम एक अमेरिकी नागरिक थे। उन पर 2018 से पैगंबर मुहम्मद के अपमान के आरोप में ईशनिंदा कानून के तहत मुकदमा चल रहा था। इस घटना के बाद, पुलिस ने हत्यारे खालिद खान को गिरफ्तार कर लिया।

कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच सोशल डिस्टेंसिंग के दिशा-निर्देशों की धज्जियाँ उड़ाते हुए हजारों पाकिस्तानी सड़क पर उतर आए। ये सभी ईशनिंदा करने वालों के लिए सिर्फ मौत की सजा में विश्वास रखते हैं।

सभी कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने अमेरिकी नागरिक अहमद के हत्यारे के सपोर्ट में हाथों में बैनर लेकर एक जुलूस निकाला। इसके साथ ही इन्होंने “अल्लाह हू अकबर” और “नारा-ए-तकबीर” के नारे लगाए और हत्यारे को सलाम किया।

इससे पहले सोशल मीडिया पर हत्यारे को हीरो बताते हुए खूब प्रशंसा की गई थी। लोगों ने ईशनिंदा करने वाले की हत्या करने पर उसे “लॉयन ऑफ इस्लाम” के रूप में सम्मानित भी किया था। सोशल मीडिया पर लोगों ने दावा किया उसने ऐसा करके इस्लाम को बचाया है।

पाकिस्तानी खालिद खान द्वारा किए गए इस जघन्य अपराध को बहादुरी बताते हुए उसे सही ठहरा रहे हैं। वहीं भरी अदालत के अंदर एक निहत्थे बुजुर्ग व्यक्ति को मारने पर उसे हीरो समझा जा रहा है। कट्टरपंथी मुस्लिम उसकी जयजयकार कर रहे हैं।

इस पूरी घटना के गवाह एक वकील ने बताया कि मृतक के खिलाफ ईशनिंदा कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसी सिलसिले में आरोपित को पेशावर सेंट्रल जेल से कोर्ट लाया गया था।

वकील ने कहा, “मामले की सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ता ने कहा कि आरोपी एक अहमदी था और उसने उसे कलिमा-ए-तय्यबा सुनाने के लिए कहा।” ताहिर अहमद नसीम मुस्लिम “पैगंबर मुहम्मद” का अपमान करने के लिए जाँच के दायरे में थे। अहमद 2018 से जेल में था।

कथित तौर पर, अदालत प्रांतीय विधानसभा भवन, पेशावर उच्च न्यायालय, मुख्यमंत्री सचिवालय और गवर्नर हाउस के बगल में कैंटोनमन्‍ट क्षेत्र में एक उच्च सुरक्षा क्षेत्र में स्थित है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि सशस्त्र हमलावर इतनी सिक्योरिटी होने के बावजूद अदालत में कैसे प्रवेश कर गया।

‘राम-राम नहीं, जय भीम बोलो’: दरोगा रमेश राम ने माँ का श्राद्ध कर रहे परिजनों को जम कर पीटा, CM योगी ने लिया संज्ञान

गाजीपुर के नगसर हॉल्ट थानाध्यक्ष द्वारा किए गए कृत्य का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। नूरपुर की इस घटना के बाद थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया गया है। बता दें कि थानाध्यक्ष रमेश कुमार राम ने एक भारतीय सेना के जवान सहित 8 लोगों की क्रूरतापूर्वक सिर्फ इसीलिए पिटाई कर दी क्योंकि क्योंकि उसने अपनी माँ का श्राद्ध किया था। मुख्यमंत्री ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ओमप्रकाश आर्य ने नूरपुर पहुँच कर पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने नगसर हॉल्ट थाने के पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की। उन्होंने इस मामले में जाँच कर के तुरंत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय को इस घटना को लेकर अवगत कराया। जिले के प्रभारी मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल ने भी नूरपुर पहुँच कर स्थिति का जायजा लिया। पीड़ित का नाम झनकू पांडेय उर्फ़ राजन है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उक्त थाना प्रभारी रमेश कुमार राम ने पीड़ित को थाने में बंद कर के कई घंटों तक पीटा और जब दर्द के मारे उनके मुँह से राम-राम निकलने लगा तो दरोगा ने ‘जय भीम’ कहने को कहा। जातिवादी टिप्पणी करते हुए उसने कहा कि वो ब्राह्मणों और ठाकुरों को सबक सिखाने के लिए ही पुलिस में भर्ती हुआ है। पीड़ित की चमड़ी तक उधेड़ दी गई। दरोगा ने परिवार के 9 लोगों को जेल भी भेज दिया।

सोशल मीडिया पर पीड़ितों की पिटाई के बाद की तस्वीरें वायरल हो गईं, जिसके बाद लोगों ने इस घटना पर आक्रोश जताया। पीड़ितों के कपड़े उतार कर पिटाई की गई थी, जिससे उनके शरीर पर लाल-लाल धब्बे बन गए थे। पीड़ितों में सुशिल पांडेय भी शामिल हैं, जो सेना में हैं। ये मामला शुरू हुआ माया देवी नामक महिला की मृत्यु के बाद जो पीड़ितों की बड़ी माता थीं। श्राद्ध में कई परिजन भी पहुँचे थे।

परिजन जब खाने-पीने की व्यवस्था कर रहे थे, तभी दरोगा रमेश कुमार राम ने पुलिसकर्मियों के साथ सादी वर्दी में पहुँच कर माँ की गाली दी और आरोप लगाया कि उनलोगों ने झनकू पांडेय को घर में छिपा रखा है। जातिवादी टिप्पणी करते हुए थानाध्यक्ष ने अपने पुलिसकर्मियों को पीड़ितों की पिटाई करने का निर्देश दिया। थानाध्यक्ष ने कहा कि इनकी हड्डियाँ तोड़ दो। लाठी और बन्दूक के पिछले हिस्से से मार खाते हुए बचने के लिए लोग घरों में घुस गए।

इसके बाद रमेश कुमार राम और उसके मातहत पुलिसकर्मियों ने घर में घुस कर भी लोगों की पिटाई की और सामान को तोड़ना शुरू कर दिया। उनके बचाव में आए ग्रामीणों को भी गाड़ी में ठूँस कर थाने ले जाया गया। पीड़ितों के मुँह पर मुक्के भी मारे गए। एफआईआर में परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस की इस हरकत के कारण श्राद्ध तक नहीं हो पाया। वहीं पुलिस ने पीड़ित परिवार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है।

थाना का कहना है कि पीड़ित परिजनों ने मुजरिम को घर में छिपा रखा था और तहकीकात करने गई पुलिस के साथ उन्होंने हाथापाई की। वहीं 3 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी कही गई है। पुलिस के अनुसार, उसे सूचना मिली थी कि झनकू पांडेय हत्या की नीयत से रिवाल्वर लेकर गाँव में घूम रहा है। मौके से कारतूस बरामद होने की बात भी कही गई है। लेकिन, थाने में हुई बर्बरतापूर्वक पिटाई से जनाक्रोश अभी भी है।

अपहरण, हत्या और… 30 लाख का ‘खेल’: संजीत मर्डर केस की अब होगी CBI जाँच, योगी सरकार की सिफारिश

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रविवार (2 अगस्त, 2020) को लैब टेक्निशियन संजीत यादव के अपहरण और हत्या के मामले की जाँच अब सीबीआई से करवाने का फैसला लिया है। संजीत कानपुर के बर्रा इलाके के रहने वाले थे। कुछ दिन पहले बदमाशों ने उनका अपहरण करने के बाद हत्या कर दी थी।

राज्य सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने बताया कि सरकार ने संजीत यादव के परिवार वालों के आग्रह पर मामले की जाँच सीबीआई से कराने की सिफारिश करने का फैसला किया है।

पुलिस के मुताबिक इस हत्याकांड में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जिनमें एक महिला (नीलू सिंह) और संजीत यादव के दो दोस्त ज्ञानेंद्र यादव, कुल्दीप गोस्वामी भी शामिल हैं। पुलिस इन आरोपितों का पूछताछ के लिए नार्को टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है।

न्याय की माँग करते हुए संजीत यादव की बहन रुचि यादव ने अतिरिक्त महानिदेशक (ADG- पुलिस मुख्यालय) बीपी जोगदंड से मुलाकात की थी। यहाँ उन्होंने इस पूरे मामले की सीबीआई जाँच की माँग करते हुए संदेह जताया था कि हत्या के पीछे और भी लोग शामिल हो सकते हैं।

वहीं इस मामले को लेकर संजीत यादव के परिवार के सदस्य ने मीडिया के सामने यह दावा किया था कि उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में एक फ्लाईओवर से रेलवे ट्रैक पर 30 लाख रुपए से भरा बैग फेंका था। इसके अलावा अपहरणकर्ताओं ने जो भी माँग रखी थी, वह भी पूरा किया था लेकिन अफसोस इतने के बाद भी संजीत को जिंदा नहीं छोड़ा गया।

मीडिया को दिए इस बयान को सर्कल ऑफिसर विकास पांडे ने गलत बताते हुए कहा था कि पुलिस की मौजूदगी में फिरौती की रकम नहीं दी गई थी। परिवार के सदस्य द्वारा लगाया गया यह आरोप गलत है।

वहीं इस मामले में पुलिस विभाग ने एसपी अपर्णा, एसओ रंजीत राय और दूसरे पुलिसकर्मियों को उनकी संदिग्ध भूमिका के लिए सस्पेंड कर दिया है।

गौरतलब है कि कानपुर के बर्रा में जून महीने में एक लैब टेक्नीशियन का काम करने वाले युवक संजीत का अपहरण हो गया था। यह मामला तब गरमाया, जब अपहृत के परिजनों ने पुलिस पर यह आरोप लगाया कि पुलिस के कहने पर उन्होंने 30 लाख रुपए की फिरौती अपराधियों को दे दी है। लेकिन फिर भी अपहृत युवक का कुछ पता नहीं चल सका है। ऐसे कई सवाल इस हत्याकांड के बाद उठ रहे हैं, जिनके जवाब पुलिस के पास भी नहीं हैं।

कुछ गलत नहीं किया तो चूहे-बिल्ली का खेल बंद करें रिया: बिहार पुलिस को मुंबई पुलिस ने बताया- अनजाने में फाइल डिलीट हो गई

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े मामले में बिहार पुलिस ने एक बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने बताया है कि सुशांत सिंह राजपूत जिन सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे उनमें से कोई भी सिम सुशांत के नाम से नहीं थी। इनमें से एक सिम उनके दोस्त सिद्धार्थ पिथानी के नाम पर थी।

बता दें कि सिद्धार्थ पिथानी और सुशांत एक साल फ्लैटमेट रहे थे। सिद्धार्थ ने रिपब्लिक टीवी से बातचीत के दौरान सुशांत को दवाई देने की बात कबूली थी। हालॉंकि, रिया चकवर्ती से जुड़े सवाल पूछे जाने पर सिद्धार्थ बीच में ही रिपब्लिक टीवी का इंटरव्यू छोड़कर चले गए थे।

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने बताया कि मुंबई पुलिस ने बिहार पुलिस के साथ सुशांत सिंह राजपूत की ऑटोप्सी रिपोर्ट शेयर करने से इनकार कर दिया है। मुम्बई पुलिस से अभी कई जरूरी कागजात और सीसीटीवी फुटेज की माँग की गई है लेकिन ये सब उपलब्ध नहीं कराया गया है।

सुशांत सिंह राजपूत केस की जाँच में मुंबई आई बिहार पुलिस ने अपना दायरा बढ़ा दिया है। बिहार पुलिस की टीम सुशांत की पूर्व-मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े दस्तावेजों को एकत्रित करने के लिए शन‍िवार (अगस्त 1, 2020) शाम को मालवणी पुलिस थाने पहुँची।

शन‍िवार शाम बिहार पुलिस की टीम मालवणी पुलिस थाने में दिशा साल‍ियन की अप्राकृतिक मौत के बारे में पूछताछ करने गई। मुंबई पुलिस के जाँच अधिकारी ने सभी विवरण साझा करने की बात कही, लेकिन उसी समय एक कॉल मिलने के बाद चीजें बदल गईं। उन्होंने बिहार से आई टीम को बताया कि दिशा के विवरण वाला फोल्डर “अनजाने में डिलीट हो गया है।” और इसे ढूँढ नहीं सकते।

जब बिहार पुलिस ने कहा कि वे फाइल को दोबारा प्राप्त करने में उनकी मदद कर सकते हैं, तो उन्होंने अपना लैपटॉप उन्हें देने से इनकार कर दिया। बिहार के अधिकारियों को मुंबई पुलिस ने पेड लीव का आनंद लेने और मामले की जाँच नहीं करने के लिए कहा, क्योंकि राजनेता आपस में लड़ रहे हैं। आज बिहार पुलिस दिशा के परिवार के सदस्यों के बयान लेने गई थी लेकिन परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं मिला।

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने यह भी खुलासा किया कि रिया चक्रवर्ती का कोई अता-पता नहीं है। गुप्तेश्वर पांडेय शनिवार को सिलसिलेवार तरीके से मीडिया से मुखातिब हुए और इस मामले से जुड़ी कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। गुप्तेश्वर पांडेय ने एक चैनल से कहा कि अगर रिया खुद को दोषी नहीं मानती हैं तो फिर वह पुलिस के साथ चूहे-बिल्ली का खेल बंद करें और सामने आकर अपना बयान दर्ज कराएँ।

पांडेय ने कहा, “रिया भाग क्यों रही हैं? अगर वह दोषी नहीं हैं तो सामने आएँ और जाँच में पुलिस की मदद करें। हम किसी निर्दोष को सजा देने के हिमायती नहीं हैं। हम चाहेंगे कि वह सामने आकर अपना पक्ष रखें और अगर वह खुद को निर्दोष साबित करने में सफल रहीं तो हम उन्हें हाथ भी नहीं लगाएँगे। लेकिन अगर वह हमसे भागेंगी तो मैं इतना जरूर कहूँगा कि हम एक न एक दिन उन तक जरूर पहुचेंगे और तब दूध का दूध और पानी का पानी हो ही जाएगा।”

सुशांत सिंह राजपूत केस मामले में पटना के सिटी एसपी विनय तिवारी मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं। सिटी एसपी वहाँ जाँच के लिए पहले से पहुँची चार सदस्यीय पटना एसआईटी का नेतृत्व कर मामले की मॉनिटरिंग करेंगे। मामले की पुष्टि एसएसपी रेंज ने की है। बता दें कि बिहार की टीम भले ही मुंबई में जाँच कर रही है, लेकिन इसकी पल-पल की मॉनीटरिंग पटना स्थित कंट्रोल रूम से हो रही है। बिहार के डीजीपी गुप्‍तेश्‍श्‍वर पांडेय ने कहा है कि पुलिस जिम्मेदारों के चेहरे से नकाब जरूर उतारेगी।

बकरीद पर कुर्बानी तो ठीक लेकिन उसके अवशेष फेंकने पर पाबंदी: सिंध हवाई अड्डे के लिए आया ऑर्डर

पाकिस्तान के सिंध में जानवरों से संबंधित एक अहम अधिसूचना जारी की गई है। राज्य के हवाई अड्डे के नज़दीक जानवरों के अवशेष फेंकने या डंप करने पर पाबंदी लगा दी गई है। उस इलाके में जानवरों के अवशेष पड़े रहने की वजह से कई तरह के पक्षी मंडराते रहते हैं। जिसके चलते हवाई जहाज़ों के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना बनती है। 

इस बात को ध्यान में रखते हुए हवाई अड्डे के आस-पास के इलाकों में जानवरों के अवशेष डंप करने को प्रतिबंधित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने उस पूरे इलाके में धारा 144 लगा दी है, जहाँ तक हवाई अड्डे की सीमा है। यह धारा पूरे एक महीने तक लागू रहने वाली है।

यह कदम ठीक उस घटना के बाद उठाया गया है, जिसमें पाकिस्तान का एक हवाई जहाज बुरी तरह दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। जिसके बाद पूरे देश में यह माँग उठाई गई थी कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ।

22 मई के दिन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयर-लाइन का हवाई जहाज PK-8303 दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। यह घटना कराची स्थित जिन्नाह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नज़दीक भीड़ वाले इलाके में हुई थी। इस दुर्घटना में कुल 97 लोगों की जान गई थी।

इसके पहले सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। उनका कहना था कि सरकार को ऐसी कोई जगह तय कर देनी चाहिए, जहाँ जानवरों को काटा और मारा जाए। उन्होंने कहा था “अगर जानवर इस तरह सड़कों पर कहीं भी मारे जाएँगे तो इससे बीमारी भी फ़ैल सकती है।” 

कुल मिला कर उनका सरकार से यह कहना था कि जानवरों की डम्पिंग के लिए कोई जगह तय कर दी जाए। जिससे तमाम तरह की दिक्कतें एक बार में ही ख़त्म हो जाए। और आने वाले समय में कोई बड़ी दुर्घटना न हो या किसी तरह की बीमारी न फैले।

इसके पहले शाह ने प्रशासनिक अधिकारियों को एक और आदेश दिया था। जिसके मुताबिक़ बाज़ार लगाने की जगहें तय की जाएँ, ख़ासकर शहरी इलाकों से बाहर। जिससे कोरोना वायरस फैलने का ख़तरा न बढ़े। 

‘इससे अल्लाह खुश… तो शैतान किससे खुश होगा?’ – गाय को क्रेन से लटकाया, काफी ऊँचाई से जमीन पर गिरी… फिर काटा

एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। इसमें एक गाय की हत्या करने के लिए उसे क्रेन से गिराया (जानबूझकर या स्लिप होकर गिरा – यह स्पष्ट नहीं है लेकिन चाकू लाओ-चाकू लाओ से यह स्पष्ट है कि इसकी कुर्बानी दी जानी थी) जा रहा है। गाय को क्रेन से काफी ऊपर उठा कर नीचे गिराने के इस वीडियो को देख कर कई लोगों का दिल दहल गया। बता दें कि पाकिस्तान में गोहत्या आम बात है और वहाँ बकरीद के मौकों पर लाखों जानवरों को क्रूरतापूर्वक मार डाला जाता है। अब ये गाय का वीडियो सामने आया है और इसे वहीं का बताया जा रहा है।

प्रसिद्ध लेखक और इस्लाम पर कई पुस्तकें लिख चुके अंतरराष्ट्रीय लेखक तारिक फ़तेह ने इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा कि पाकिस्तान के लोग गोहत्या कर के बकरीद मना रहे हैं और इससे अल्लाह को ख़ुश करना चाह रहे हैं। डॉक्टर वेदिका नामक ट्विटर यूजर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि अगर अल्लाह को खुश करने के लिए ये किया जा रहा है तो फिर शैतान कैसे खुश होगा, ये सोचने वाली बात है।

पाकिस्तान का बताए जाने वाले इस वीडियो में देखा जा सकता है कि गाय को क्रेन से ऊपर उठाया गया है और कई लोग वहाँ मनोरंजन के लिए खड़े होकर तमाशा देख रहे हैं, जिनमें कई बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। गाय ऊपर छटपटा रही है। जैसे ही गाय को नीचे गिराया (जानबूझकर या स्लिप होकर गिरा – यह स्पष्ट नहीं है) जाता है, वो अपनी रीढ़ की हड्डी के बल पर ज़मीन से टकराती है। इसके बाद उसे तड़पता हुआ देखने के लिए लोग जुट जाते हैं। और बैकग्राउंड से चाकू लाओ, चाकू लाओ की आवाज आती है। इस के बाद भीड़ उस असहाय गाय की गर्दन पर चाकू फिरते सीन को मोबाइल में कैद करती है।

पाकिस्तान में खासकर घनी आबादी वाले शहर कराची में बकरीद के मौक पर क्रेन से गायों को क्यों उतारा जाता है, इसको लेकर जब आप थोड़ा सर्च करेंगे तो पाएँगे कि यह समस्या जगह को लेकर है। घनी आबादी के कारण हर कोई के पास अपनी जमीन नहीं है। लेकिन धार्मिक मजबूरियों के कारण बकरीद पर उन्हें गाय-बैल की कुर्बानी देनी ही होती है। ऐसे में फ्लैट में रहने वाले लोग छोटे-छोटे बछड़े या बाछी लेकर उसे छत पर पालते हैं और जब वो बड़े हो जाते हैं तो फिर उसे नीचे उतारने के लिए क्रेन के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं होता।

भगवान राम के ननिहाल में बनेगा माता कौशल्या का भव्य मंदिर, छत्तीसगढ़ में रामायण से जुड़े 9 स्थलों के विकास के लिए ₹134 करोड़

भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण की शुरुआत बुधवार (अगस्त 5, 2020) को भूमिपूजन के साथ ही हो जाएगी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में कभी राम के अस्तित्व को नकारने वाली कॉन्ग्रेस भी अब खुद को रामभक्त दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। जहाँ एक तरफ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ मंदिर निर्माण का स्वागत कर रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में माता कौशल्या का मंदिर बनाने की प्रक्रिया शुरू है।

छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में ही राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या का मंदिर है, जो राम की माता भी हैं। इस हिसाब से इसे राम का ननिहाल भी माना जाता है। अगस्त के तीसरे हफ्ते के बाद से ही चंदखुरी में माता कौशल्या के मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ-साथ सौंदर्यीकरण का कार्य भी शुरू हो जाएगा। आसपास के क्षेत्रों में विकास योजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री भुवेश बघेल ने बुधवार को अपनी पत्नी के साथ जाकर वहाँ के तैयारियों का जायजा लिया।

प्राचीन मंदिर के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए इसका पुनर्निर्माण करें और पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए हो रही तैयारियों का जायजा खुद मुख्यमंत्री ने लिया। इसके लिए भूमिपूजन पहले ही किया जा चुका है और अब जब अयोध्या में भूमिपूजन के लिए सरगर्मियाँ तेज हैं, ऐसे समय में चंदखुरी प्रोजेक्ट को गतिशील बनाने का निर्णय लिया गया है। भगवान राम ने वनवास के दौरान भी इस इलाक़े में अच्छा-खासा समय व्यतीत किया था।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बघेल ने बताया कि ‘राम वन गमन मार्ग’ योजना के अंतर्गत पूरे राज्य में भगवान राम की वनवास यात्रा के मार्गों को चिह्नित कर उन्हें एक बड़े पर्यटन स्थल नेटवर्क में तब्दील किया जाएगा। इसी क्रम में 15 करोड़ रुपए की लागत से छत्तीसगढ़ स्थित चंदखुरी में माता कौशल्या मंदिर व आसपास के क्षेत्रों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को तालाब में पुल और गोलाकार मार्ग बनाने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा:

प्रभु श्री राम के ननिहाल चंदखुरी का सौंदर्य अब पौराणिक कथाओं के नगरों जैसा ही आकर्षक होगा। राजधानी रायपुर के निकट स्थित इस गाँव के प्राचीन कौशल्या मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए, पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। हमारी महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ विकास परियोजना में शामिल चंदखुरी में यह पूरा कार्य 15 करोड़ 75 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा। योजना के मुताबिक, चंदखुरी में मंदिर के सौंदर्यीकरण तथा परिसर विकास का कार्य दो चरणों में कार्य पूरा किया जाएगा। नागरिक सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा। बीते 22 दिसंबर को चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए भूमि-पूजन किया गया था।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि चंदखुरी में शौचालयों और धर्मशालाओं की पर्याप्त संख्या में व्यवस्था की जाए। वहाँ ग्रामीणों ने एक राष्ट्रीय बैंक का ब्रांच खोलने की भी माँग की है। साथ ही मंदिर के पास ही एक बाईपास रोड के निर्माण की भी अनुमति दे दी गई है। बता दें कि रामायण काल में छत्तीसगढ़ को दक्षिण कौशल के रूप में जाना जाता था और ये दण्डकारण्य का एक भाग था।

त्रेता युग में भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में 4 महीने बीता कर वहाँ से लंका के लिए प्रस्थान किया था। उन्होंने हरचौका सीतामढ़ी के माध्यम से छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया थे। वो गवाई नदी में कोरिया जिले फिर उन्होंने सुकमा स्थित रामराम पहुँचने से पहले 75 जगहों पर डेरा डाला था। इनमें से 9 जगहों को ‘राम वेब गमन पर्यटन परिपथ’ के रूप में चिह्नित कर पहले फेज में पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा।

इनमें हरचौकी सीतामढ़ी (कोरिया), रामगढ़ (अंबिकापुर), शिवरीनारायण (जांजगीर-चंपा), तुरतुरिया (बलोदा बाजार), चंदखुरी (रायपुर) राजिम (गरीबन्द), सिहावा-सप्तर्षि आश्रम (धमतारी), जगदलपुर (बस्तर) और रामराम (सुकमा) शामिल है। इन 9 जगहों को विकसित करने के लिए 134.45 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट कॉस्ट रखा गया है। इस वर्ष के बजट में इसके लिए 10 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। 5 करोड़ रुपए पिछले बजट में जारी किया गया था।

जहाँ तक चंदखुरी की बात है, वहाँ मंदिर के पास स्थित झील के चारों तरफ परिक्रमा के लिए रास्ता भी तैयार किया जाएगा। इस पर एक हाईटेक ब्रिज भी बनेगा। झील के सामने पार्किंग स्थल बनेगा और लाइट-साउंड शो की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही एक फ़ूड जॉइंट भी बनेगा। मंदिर परिसर में व उसके आसपास विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे भी लगाए जाएँगे। भूपेश बघेल पहले भी इस स्थल का दौरा करते रहे हैं।

चंदखुरी में भगवान राम के प्रति लोगों में आस्था का आलम ये है कि हर वर्ष दीपावली के मौके पर लोग पहले कौशल्या माता के मंदिर में दीपक जलाते हैं, उसके बाद ही अपने-अपने घरों में रोशनी करते हैं। ऐसे में सीएम भूपेश बघेल द्वारा वहाँ मंदिर बनवा कर और उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने को अयोध्या में मोदी सरकार द्वारा राम मंदिर के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रत्युत्तर के रूप में भी देखा जा रहा है।

इधर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ 5 अगस्त के दिन होने वाले राम मंदिर के भूमि पूजन से एक दिन पहले भोपाल स्थित अपने आवास पर हनुमान चालीसा का पाठ कराएँगे। इस दिन मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के तमाम नेता अपने घरों या स्थानीय मंदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। कमलनाथ ने राम मंदिर के भव्य निर्माण का स्वागत किया था। कहा था कि मंदिर निर्माण हर भारतीय की सहमति से हो रहा है और यह केवल भारत में ही संभव है। 

बरखा दत्त ने सुशांत की तथाकथित थेरेपिस्ट का किया साक्षात्कार, जाँच के बीच रिया को क्लीनचिट देने के लिए बताई ‘बीमारी’ से जुड़ी बातें

बरखा दत्त ने 1 अगस्त के दिन सुशांत सिंह राजपूत की तथाकथित थेरेपिस्ट सुसैन वॉकर मोफत के साक्षात्कार का एक वीडियो साझा किया था। जिस पर नेटिज़न्स ने गंभीर सवाल खड़े किए। वॉकर जो खुद एक मनोवैज्ञानिक, साइकोथेरेपिस्ट और हिपनोथेरेपिस्ट हैं। उन्होंने ऐसा दावा किया था कि सुशांत बाईपोलर हैं। जिसके बाद उन पर सुशांत सिंह से जुड़ी इस तरह की जानकारी साझा करने के लिए काफी सवाल उठाए गए थे। 

अपने बयान में उनका कहना था कि यह उनकी ज़िम्मेदारी थी कि वह सार्वजनिक रूप से सामने आएँ। इसके अलावा उनका यह भी कहना था कि रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह की भावनात्मक रूप से मदद ही करती थीं। फिलहाल सुशांत सिंह की मौत के मामले में रिया चक्रवर्ती के खिलाफ़ जाँच जारी है। ख़बरों के मुताबिक़ फिलहाल रिया चक्रवर्ती का कोई अता-पता नहीं है।

साक्षात्कार में बरखा दत्त से बात करते हुए वॉकर ने अपने बयान में कई बातें कहीं। उन्होंने कहा गलत जानकारियों की आड़ में सोशल मीडिया पर कई तरह के झूठ और षड्यंत्र फैलाए जा रहे हैं। मैंने यह फैसला किया है कि इस मामले में बयान दर्ज कराना मेरी ज़िम्मेदारी है। मैं बतौर मनोवैज्ञानिक और फिजियोथेरेपिस्ट सुशांत सिंह और रिया चक्रवर्ती से दिसंबर और नवंबर 2019 में कई बार मिली थी। 

इसके बाद जून में रिया से इस बारे में बात भी की थी। इसके बाद वॉकर ने मानसिक बीमारी के इर्द-गिर्द अपनी बात जारी रखी। फिर उन्होंने कहा सुशांत को बाईपोलर डिसऑर्डर था जो कि एक गंभीर मानसिक बीमारी है। यह एक व्यक्ति के लिए घातक हो सकता है।

सुसैन वॉकर का मोजो को बयान

फिर वॉकर ने मानसिक बीमारी की बात जारी रखते हुए कई बातें बताई। उन्होंने कहा ऐसे में पेशेवर मनौवैज्ञानिक के लिए भी मरीज़ और उसके घरवालों की मदद करना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसी मानसिक बीमारी कैंसर या डायबटीज़ से कम नहीं है। इससे कोई भी व्यक्ति प्रभावित हो सकता है भले वह किसी भी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि का क्यों न हो। बरखा दत्त ने खुद इस बात की जानकारी दी कि वॉकर ने अपना बयान दर्ज कराने के लिए खुद उनके मीडिया संस्थान मोजो से संपर्क किया था। 

इसके बाद वॉकर ने कहा ऐसी मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों और उनके परिवार के लिए बहुत ज़रूरी है कि वह भेदभाव से बचे रहें। जिससे उन्हें सही उपचार मिलता रहे और लोग उन्हें स्वीकार करें। मानसिक बीमारी होना कोई शर्म की बात नहीं है। क्या किसी को कैंसर होने पर शर्मिंदा होना चाहिए? मानसिक बीमारी का भी इलाज संभव है। 

बल्कि मानसिक बीमारियों का असर इतना भयावह होता है कि लोग इसके चलते आत्महत्या तक कर लेते हैं। ऐसी मानसिक पीड़ा का सीधा असर लोगों के दिमाग और उनकी भावनाओं पर पड़ता है।” फिर वॉकर ने यह दावा किया कि रिया पूरी तरह निर्दोष हैं। बल्कि रिया ने सुशांत के मुश्किल वक्त में उनका साथ निभाया है। यह रिया के लिए (सुशांत की) मानसिक बीमारी का सामना करना आसान नहीं था। इसके बदले में उसे जिस तरह की नफ़रत का सामना करना पड़ रहा है वह हैरान कर देने वाला है। 

बाईपोलर डिसऑर्डर जिसे manic-depressive illness या manic depression भी कहते हैं। इसके असर के चलते लोगों का मन बहुत जल्दी बदलता है। उनकी ऊर्जा, दिन भर की गतिविधियाँ और ध्यान लगाने की क्षमता भी काफी हद तक प्रभावित होती है। ऐसे तो इस मानसिक बीमारी के लिए कोई तय उपचार या दवाई नहीं है। लेकिन मरीज़ को योग्य मनोवैज्ञानिक के संपर्क में रहने का सुझाव ज़रूर दिया जाता है। मनोवैज्ञानिक (टॉक थेरेपिस्ट) मरीज़ की मदद करते हैं अगर उसमें कोई लक्षण मौजूद होते हैं। 

नेटिज़न्स का कहना था कि थेरेपिस्ट जिन्होंने सुशांत को अपना मरीज़ बताया है। उनकी तरफ से ऐसा बयान नैतिक और वैधानिक रूप से सही नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 की धारा 23 (1) के मुताबिक़ मानसिक रूप से अ-स्वस्थ्य व्यक्ति के पास अधिकार होता है। वह अपने मानसिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल और उसके उपचार को गोपनीय बनाए रखे। नियम यह भी कहता है कि स्वास्थ्य कर्मियों की (मनोवैज्ञानिक भी) ज़िम्मेदारी होती है कि वह उपचार के दौरान मिली जानकारी को सार्वजनिक होने से बचाएँ।

इसके नियम के अगले हिस्से की धारा 24 (1) के मुताबिक़ मरीज़ से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी उसकी तस्वीर या कोई तथ्य मीडिया में नहीं लाया जा सकता है। कुछ मामलों में ऐसा किया जा सकता है जिनमें हिंसा की संभावना हो या अदालत से जुड़ा मामला हो। लेकिन सुशांत सिंह के मामले में इतने अहम नियमों की अनदेखी की गई है। ऐसा किसी और ने नहीं बल्कि डॉ. सौमित्रा पथारे (निदेशक, मेंटल हेल्थ लॉ एंड पॉलिसी) और डॉ. हरीश शेट्टी (मनोवैज्ञानिक, मुंबई) ने बरखा दत्त का जवाब देते हुए बताया।

नेटिज़न्स ने सिर्फ बरखा दत्त की आलोचना ही नहीं की बल्कि प्रशासन से सवाल भी किया कि कैसे सुसैन वॉकर सुशांत सिंह का उपचार कर रही थीं। वॉकर की लिंक्डीन प्रोफाइल और मोजो द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ वह लंदन से क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमएससी हैं। और एक मनोवैज्ञानिक बाईपोलर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति का इलाज नहीं कर सकता है। विवाद बढ़ने के बाद वॉकर ने अपनी लिंक्डीन प्रोफाइल सुरक्षित कर ली।

इसके अलावा नेटिज़न्स ने वॉकर की मान्यता रद्द करने की माँग भी उठाई। 

बरखा दत्त ने सुशांत सिंह की थेरेपिस्ट के इस बयान से ठीक एक दिन पहले एक ट्वीट किया था। ट्वीट में उन्होंने लिखा था कि सुशांत सिंह के मामले में जिस तरह निजी जानकारी साझा की जा रही है। जिस तरह उनकी जिंदगी से संबंधित मुद्दों पर बात हो रही है उस पर उन्हें दुःख है। वह इस माध्यम का हिस्सा बन कर निराश हैं। 

बरखा दत्त का ट्वीट

फिलहाल बिहार पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है और वह मुंबई में ही मौजूद है। बिहार पुलिस ने रिया चक्रवर्ती के खिलाफ़ मामला भी दर्ज कर लिया है। इसके अलावा बिहार पुलिस ने मुंबई पुलिस पर जाँच में सहयोग न करने का आरोप लगाया है।   

12 लाख नए रोजगार, ₹11 लाख करोड़ के मोबाइल फोन का उत्पादन: मोदी सरकार की PLI स्कीम का कमाल

केंद्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया है कि भारत में मोबाइल फोन्स के उत्पादन में बड़ी वृद्धि होने वाली है। सैमसंग और एप्पल सहित 22 बड़ी कंपनियाँ अगले 5 साल में 11 लाख करोड़ रुपए के मोबाइल फोन्स का उत्पादन करेंगी। इनमें विदेशी के साथ-साथ भारतीय कंपनियाँ भी शामिल हैं। सरकार ने इसके लिए 41,000 करोड़ रुपए का प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI: production-linked incentive) की व्यवस्था की है।

सबसे बड़ी बात ये है कि मोबाइल फोन्स कंपनियों के सक्रियता बढ़ाने और सरकारी प्रयासों के बाद देश में 12 लाख रोजगार सिर्फ़ इसी सेक्टर में पैदा होने वाले हैं। इनमें से 3 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के मौके हैं जबकि 9 लाख अप्रत्यक्ष रूप से होंगे। मोबाइल फोन्स के मामले में वैल्यू अडिशन बढ़ कर 15-20% की मौजूद स्थिति से छलाँग लगा कर सीधा 35-40% पर चल जाएगा। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्टस के मामले मे ये आँकड़ा 45-50% होगा।

भारत 7 लाख करोड़ रुपए के मोबाइल फोन्स का निर्यात भी करेगा। इसके लिए जिन भी कंपनियों ने अप्लाई किया है, उन्हें भारत सरकार की तरफ से केन्द्रीय टेलीकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद ने धन्यवाद दिया। ताइवान, दक्षिण कोरिया, जर्मि और ऑस्ट्रिया सहित कई देशों के 22 मोबाइल फोन्स कंपनियों ने PLI स्कीम के तहत आने का फैसला लिया है। विदेशी कंपनियों में Samsung, Foxconn Hon Hai, Rising Star, Wistron और Pegatron शामिल हैं।

इसके तहत शर्त ये थी कि ये विदेशी कंपनियाँ 15,000 या उससे अधिक के मूल्य के मोबाइल फोन्स का उत्पादन करेगी। वहीं भारतीय कंपनियों के लिए ऐसा कोई भी प्राइस लिमिट नहीं रखा गया है। दुनिया भर में फिलहाल एप्पल 37% और सैमसंग 22% सेल्स की हिस्सेदारी रखता है। भारत सरकार की इच्छा है कि इन कंपनियों के उत्पादन भारत में बढ़े, जिससे यहाँ रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

उक्त प्रोपॉजल के बाद ये कंपनियाँ भारत में हजारों करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इनमें चीन की एक भी कंपनी शामिल नहीं है। हालाँकि, उन सभी कंपनियों को भारत की सिक्योरिटी क्लियरेन्स के नियमों का पालन करना पड़ेगा। 2025 तक भारत में मोबाइल फोन्स की माँग कई गुना बढ़ने वाली है, ऐसे में आत्मनिर्भर भारत के तहत पहले से ही देश को पर्डक्शन हब बनाने की तैयारी चल रही है।

‘खड़े-खड़े रेप कर दूँगा, फाड़ कर चार कर दूँगा’ – ‘देवांशी’ को समीर अहमद की धमकी, दिल्ली दंगों वाला इलाका

दिल्ली के बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित मौजपुर का मोहनपुरी इलाका, जहाँ हिन्दुओं की दो-तीन गलियाँ मुस्लिमों की घनी बस्तियों से घिरी हैं। वहीं एक लड़की को खुलेआम कोई रेप करने की धमकी दे, उसे गन्दी गलियाँ दे और मुस्लिम परिवार अपने आरोपित लड़के को घर में छिपाकर यह कहे, “लड़का है, गरम खून है, निकल जाता है।”

क्या सोच रहे हैं आप कौन पीड़िता है और कौन आरोपित? क्या नारी सुरक्षा की बात फिर से याद आ गई? किससे, कौन और कहाँ-कहाँ लड़े? पीड़िता न्याय के लिए जिसके पास उम्मीद में जाए अगर वही उस समुदाय विशेष के भीड़ के दबाव में आकर पीड़ित लड़की को ही प्रताड़ित करने लगे तो!

कभी पीड़िता को ही जेल में डाल देने की धमकी, तो कभी घंटों थाने में बैठाने के बाद उल्टा पीड़िता पर ही दबाव बनाए कि समझौता कर लो आगे से वो लड़का ऐसा नहीं कहेगा या कुछ नहीं करेगा तो ऐसे में लड़की न्याय के लिए कहाँ जाए, वो भी तब जब परिवार को वही अकेली सम्भालने वाली हो! पिता का शाया सर से उठ चुका हो, भाई बाहर, एक छोटी बहन और माँ के साथ वह उस इलाके में रहती हो।

आपको इतना पढ़ के कोई ताज्जुब नहीं हुआ होगा क्योंकि अब ऐसी घटनाओं के लोग आदी होते जा रहे हैं। फिर भी शायद कुछ लोगों में यह जानने की उत्सुकता बढ़ी होगी कि मामला क्या है? तो आपको विस्तार से बताते हैं ताकि दिल्ली या देश को बार-बार निर्भया या हैदराबाद की रेप और बर्बर हत्या की भुक्तभोगी डॉ प्रीति जैसी घटनाओं के घटित होने का ही इंतज़ार न करना पड़े।

21 फ़रवरी 2020 की एक शाम जब दिल्ली के नूर-ए-इलाही, घोंडा, चाँदबाग, जफराबाद, भजनपुरा, यमुना विहार, ब्रह्मपुरी जैसे इलाकों में दबे-छिपे कहीं दंगों की भूमिका लिखी जा रही होगी! ठीक उसी समय मौजपुर के मोहनपुरी इलाके में हिन्दू बहुल दो-तीन गलियों में से गली नंबर-8 में रहने वाली एक लड़की देवांशी (बदला हुआ नाम) अपने पालतू डॉग को गली में घूमाने निकलती है और गलती से गली नंबर-9 के उस मोड़ तक पहुँच जाती है। जहाँ से मुस्लिम बहुल घनी बस्ती शुरू होती है। एक लड़की का उस एरिया में पहुँच जाना उसकी सबसे बड़ी भूल साबित होती है और बदले में मिलती है गाली और रेप की धमकी।

ऑपइंडिया से बात करते हुए देवांशी (बदला हुआ नाम) ने पूरी बात विस्तार से बताई कि क्या हुआ था उसके साथ फरवरी की उस मनहूस शाम को। देवांशी ने बताया कि 21 फरवरी की शाम 7 बजे के आस-पास वो अपने डॉगी को बाहर घूमाने ले गई थी। पास की ही गली नंबर-9 के मोड़ तक जहाँ से मुस्लिम बहुल एरिया शुरू होता है, वहीं एक मुस्लिम लड़का जो पहले से ही कहीं बाइक से जा रहा था, उसके साथ बदतमीजी पर उतर आया। जब देवांशी ने उसे टोका तो आरोपित समीर ने कहा, “अपने कुत्ते को यहाँ पेशाब मत करवाना नहीं तो मैं तुझे फाड़ कर चार कर दूँगा, तेरा यहीं खड़े-खड़े रेप कर दूँगा।”

इतने पर लड़की ने पलट कर लड़के का कॉलर पकड़ लिया। देवांशी उस आरोपित लड़के को पहचानती हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में भी आरोपित समीर अहमद के नाम का पते के साथ उल्लेख किया। लेकिन शिकायत जब FIR में दर्ज हुई तो कई तथ्य नदारत थे।

गौरतलब है कि धमकी वाले दिन देवांशी थोड़ी ही देर में घर से अपना फोन लेकर अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए पीसीआर को कॉल करती हैं। पीसीआर आती है और उन्हें और उनकी माँ को भजनपुरा थाने ले जाया जाता है। जहाँ करीब तीन घंटे बैठाए रखने के बाद रात करीब 10.30 पर उनकी शिकायत IO मनोज भाटी द्वारा तो ले ली जाती है लेकिन अत्यधिक काम का हवाला देकर FIR दर्ज नहीं की जाती है।

अगले दिन फिर सुबह अर्थात 22 फरवरी को सुबह 9 बजे उन्हें भजनपुरा थाने बुलाया जाता है। जहाँ पहुँचकर पीड़िता IO मनोज भाटी को फोन करती हैं तो वो कहते हैं कि आरोपित को ही उठाने आया हूँ। 2 घंटे तक पीड़िता वहीं रहती हैं, तभी आरोपित समीर के परिवार और मोहल्ले के 50 से अधिक मुस्लिम थाने पर इकट्ठे हो जाते हैं।

पीड़िता देवांशी ने ऑपइंडिया को बताया कि SHO भजनपुरा आरएस मीणा से जब कई प्रभावशाली मुस्लिम अंदर मिलने जाते हैं तो उनके सुर बदल जाते हैं। 21 फरवरी की रात को जो FIR दर्ज करने की बात कही गई थी, अब उल्टा लड़की पर ही समझौते का दबाव और पीड़िता पर ही FIR दर्ज करने की बात कही जाने लगती है। 22 वर्षीय लड़की की माँ को केबिन से बाहर भेजकर उन्हें घंटों बैठाए रखा जाता है लेकिन FIR दर्ज नहीं की जाती।

थक-हारकर जब SHO मीणा और IO मनोज भाटी, और समाज के कई लोगों के कहने पर वो समझौते को राजी होती हैं तो उल्टा उन्हीं पर ही FIR की धमकी दी जाती है। थाने में ही आरोपित समीर के अपने परिवार और मुहल्ले वालों के साथ मौजूद होने और स्वयं पीड़िता के अनुसार, समीर द्वारा यह कबूल कर लेने के बाद भी कि हाँ उसने ही गाली और रेप की धमकी दी थी। लेकिन समीर के मुस्कराते चेहरे ने और SHO की धमकी और दबाव ने देवांशी का मन बदल दिया।

अब देवांशी अड़ गईं कि अगर उसकी गलती है कि रेप की धमकी पर उन्होंने उसका कॉलर पकड़ कर अपराध किया है तो उन पर FIR की जाए लेकिन उसकी शिकायत को भी FIR में दर्ज किया जाए। साथ ही उसने जब दूसरे दिन फिर से लिखित शिकायत की कॉपी माँगी तब IO मनोज भाटी ने उसके सामने ही और आरोपित समीर और अन्य मुस्लिमों की उपस्थिति में ही उसे फाड़कर कूड़ेदान में डाल दिया। उक्त बातें डिटेल में ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने फोन पर कही।

IO मनोज भाटी और SHO मीणा और वहाँ मौजूद अन्य समुदाय विशेष के इस बदले बरताव को देखकर, वह सहसा वहीं मौजूद ACP से मिलने उनके केबिन में गईं तो उन्हें वहाँ से पुलिस के द्वारा हटा दिया गया। इस कवायद में 22 फरवरी को सुबह से शाम होने वाली थी। दिन में 4 बार वो 100 नंबर पर कॉल कर चुकी थीं, जो उसी भजनपुरा थाने पर ट्रांसफर होने से निरर्थक साबित होती रही। बाद में पीसीआर पर ही मिले ACP के नंबर पर बात करने पर उन्होंने कहा कि अब जाओ FIR लिख ली जाएगी।

पीड़िता ने उसी समय राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को कॉल करके अपनी समस्या बताई तो उन्हें सीलमपुर स्थित DCP ऑफिस जाने या ACP से शिकायत करने के लिए कहा गया। ACP के आदेश पर उनकी बात सुनी जाती है और सम्बंधित भजनपुरा थाने को FIR दर्ज करने को कहा जाता है।

जब वो करीब 8 बजे थाने पहुँचती हैं और अपने एक दिन पहले की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करने को कहती हैं। और याद दिलाती हैं कि DCP ऑफिस ने कहा है कि अब जाओ, थाने में हो जाएगा। जहाँ ऊपर से फोन आने की तस्दीक करते हुए, कहा जाता है कि FIR दर्ज हो जाएगा लेकिन उसकी कॉपी लेने 12 बजे रात के आसपास आना होगा।

सोचिए एक अकेली लड़की को रात 12 बजे उस संवेदनशील इलाके में थाने बुलाया जाता है। पीड़िता के अनुसार, शायद यह सोचकर कि वह डर जाएगी और नहीं आएगी। लेकिन किसी तरह अपने चचेरे भाई को साथ लेकर करीब 12.30 बजे भजनपुरा थाने जाकर FIR की कॉपी रिसीव करती हैं। उसमें भी बड़ा झोल यह कि FIR में जो उनकी शिकायत में था, वो बात न लिखकर उसे एक आम छेड़छाड़ और बदतमीजी जैसा मामला बना दिया जाता है। साथ ही आरोपित समीर पुत्र शरफुद्दीन के नाम के साथ उसका पूरा पता देने के बावजूद FIR से वो सूचनाएँ गायब हैं।

भजनपुरा थाने में दर्ज FIR की कॉपी-1
भजनपुरा थाने में दर्ज FIR की कॉपी-2

FIR में दर्ज आरोप ठीक करने और शिकायत के अनुसार सही FIR दर्ज करने की जब वह रात में थाने में ही जिद करती हैं तो उन्हें IO मनोज भाटी ने यह कह कर टाल दिया कि जैसा बताया था, वही FIR में है। और यह कह दिया जाता है कि वो अब घर चले गए हैं। अब थाने से कुछ नहीं होगा, तुम्हें कोर्ट जाना होगा।

कानूनी पेचीदगियों से अनजान जब वह अपने वकील से बात करने को कह देती हैं तो बात अगले दिन के लिए टाल दी जाती है। लेकिन, थाने में उनकी FIR पुनः सही नहीं की जाती है। यह सब किसके दबाव और शह पर हुआ, यह पूछे जाने पर, इसके बारे में पीड़िता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इतना जरूर कहा कि उस दिन थाने में वो केवल अपनी मम्मी के साथ गई थीं जबकि आरोपित पक्ष की ओर से 50 से अधिक लोग आए थे। जिनमें से उसने इलाके के कई प्रभावी मुस्लिमों के नाम लिए, जो उसकी जानकारी में थे।

पीड़िता ने 24 फ़रवरी 2020 को सीलमपुर स्थित DCP ऑफिस में भी अपनी शिकायत दर्ज कराई। उस शिकायत में भी कार्रवाई के साथ यही अपील थी कि उसकी बात FIR में नहीं लिखी गई। लेकिन उस पर आगे कुछ नहीं हुआ।

DCP को दिया गया शिकायत पत्र-1
DCP को दिया गया शिकायत पत्र-2

तीन-चार दिन थानों में जूझने के बाद जब वह निराश और समीर के व्यंग्य भरे कुटिल मुस्कान से तंग आकर और प्रथम दृष्टया पराजय और आँखों में आँसु लिए 24 फरवरी को किसी तरह अपने घर पहुँचती हैं, तब तक अचानक से इलाके में दंगे भड़क चुके थे। उत्तर-पूर्वी दिल्ली जलने लगी थी और आरोपित समीर पर कार्रवाई और सही FIR की आस दिल में दबाए, देवांशी कई दिनों तक घर में कैद रहीं।

बाहर की दुनिया अब उनके लिए और डरावना हो चुकी थी। कुछ दिनों बाद दिल्ली का वह इलाका शांत हुआ जरूर लेकिन माहौल और प्राथमिकता बदल चुकी थी और नॉर्थ घोंडा और मौजपुर के मोहनपुरी की वो इक्का-दुक्का हिन्दू बहुल गलियाँ डर के साए में रहने लगी थीं।

डर ऐसा कि बढ़ते-बढ़ते अब वहाँ के हिंदू घरों के बाहर पोस्टर लगाकर अपना सब कुछ बेचकर दिल्ली या कहीं भी जहाँ वो सुकून से रह सकें, वहाँ चले जाने को विवश हैं। इसी बीच, उसी डर और दहशत के दौरान 9 मार्च को उन्हें भजनपुरा थाने से ही कोई आकर कोर्ट का नोटिस दे जाता है। जिसमें उन्हें कड़कड़डूमा कोर्ट में जाकर अपना बयान दर्ज करवाना था। लेकिन FIR में तो कुछ और ही बात लिखी है। जब वह थाने में एक सब-इंस्पेक्टर किरण कुमारी को फोन कर पूछती हैं तो वही बात दोहरा दी जाती है कि अब जो कुछ होगा, कोर्ट से ही होगा।

देवांशी बताती हैं कि वह अपनी मम्मी के साथ 18-19 मार्च दोनों में से किसी दिन कोर्ट गई थीं लेकिन कई घंटों तक वहाँ बैठे रहने के बावजूद मजिस्ट्रेट के सामने उनका बयान दर्ज नहीं हो पाता है। पूछने पर उन्हें पता चलता है कि अभी दिल्ली दंगों के बयान दर्ज हो रहे हैं प्राथमिकता पर, बाकी के बाद में दर्ज होंगे। वह वहाँ से भी निराश होकर लौट आती हैं। और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बदले हुए माहौल में कोर्ट द्वारा फिर से बुलाए जाने और न्याय मिलने का इंतज़ार करने लगती हैं।

इसी इंतज़ार में करीब डेढ़ महीने और गुजर जाते हैं। और एक दिन किसी के बताने पर सांसद मनोज तिवारी तक अपनी बात पहुँचाने के लिए खुद से एक शिकायती पत्र में, आरोपित समीर के साथ ही SHO आरएस मीणा, IO मनोज भाटी पर कार्रवाई की माँग करते हुए, टाइप कर भेज देती हैं। अपने सांसद मनोज तिवारी को 1 मई को भेजी शिकायत को भी अब लगभग तीन महीने होने को आए लेकिन दो सप्ताह पहले ही जो समीर उनकी तरफ देखकर तंज भरते हुए हँस कर पहले सिर्फ डराता था, घूरता था, अब वो गलती से कहीं मिल जाने पर एक दिन गली के नुक्कड़ पर अपने दोस्तों के साथ खड़ा देवांशी को देखकर कहता है, “क्या बहन के…%&DI! क्या कर लिया तेरे पुलिस ने? अभी सिर्फ कहा है, कर के भी दिखा दूँगा। पुलिस मेरे मुट्ठी में है।”

ऑपइंडिया से की गई बातचीत का कुछ महत्वपूर्ण हिस्सा आप वीडियो में देख सकते हैं:

आरोपित समीर की कुटिल मुस्कान और बार-बार के तंज और धमकी के कारण देवांशी चाहती हैं कि उस पर कार्रवाई हो। उनका कहना है, “वो मुझे बचपन से जानता है। हम एक ही स्कूल के अलग-अलग सेक्शन में थे। फिर भी आज धमकी दे रहा है तो कल ऐसा कर भी सकता है। मैं चाहती हूँ, जो मेरी शिकायत में है, वो FIR में दर्ज हो और आरोपित समीर के साथ उन सभी पर कार्रवाई हो, जिन्होंने कहीं न कहीं एक पीड़िता का साथ न देकर मुस्लिम भीड़ के दबाव में आरोपितों का ही साथ दिया।”

इसी बीच, एक दूसरे मामले में, शुक्रवार (31 जुलाई 2020) को दिल्ली के उसी मौजपुर इलाके के मोहनपुरी और घोंडा में जब सांसद मनोज तिवारी दिल्ली दंगों से पीड़ित हिन्दुओं के पलायन और उनके प्रतिष्ठित लोगों को मुस्लिमों द्वारा कथित रूप से झूठे केस में फँसाए जाने की मौजूदा शिकायतों और हालात का जायजा लेने गए थे तो समीर द्वारा गाली और रेप की धमकी की पीड़िता देवांशी ने भी उनसे अपनी बात कही और अपने पहले के शिकायत पत्र की भी याद दिलाई। जिस पर सांसद ने भी जरुरी कार्रवाई का आश्वासन दिया।

5 महीने से ज़्यादा समय हो जाने पर भी जब उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है और हाल ही में जब उन पर फिर फिकरे कसे जाते हैं, गाली दी जाती है, और धमकी याद दिलाई जाती है। तो परेशान होकर अपने साथ ही साथ अपनी बहन और गली के अन्य लड़कियों के लिए देवांशी आरोपित पर कार्रवाई चाहती हैं। वो चाहती हैं कि उन्हें न्याय मिले।

देवांशी चाहती हैं कि आगे से फिर कोई इस तरह खुलेआम किसी लड़की को धमकी देकर खुलेआम न घूमता रहे। लेकिन अभी भी आरोपित समीर अहमद बेफिक्र घूम रहा है। अब देखना यह है कि इतने के बाद भी प्रशासन हरकत में आकर कोई कार्रवाई करता है या किसी बड़ी घटना के घटने का इंतजार करता है।