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बकरीद पर पाकिस्तान में हिंदू कारोबारी की हत्या, राजा किशन पर घर लौटते वक्त किया गया हमला

पाकिस्तान के खैरपुर में बकरीद के मौके पर हिंदू कारोबारी राजा किशन चंद की अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी। राजा किशन चंद सुक्कुर पर यह हमला तब किया, जब वे अपने घर लौट रहे थे।

कुछ दिन पहले ही एक अन्य हिंदू व्यापारी मैनक मल की कार पर कुछ बंदूकधारियों ने गोलियाँ चलाई थी, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं पर आए दिन किसी ना किसी प्रकार का अत्याचार का मामला सामने आ रहा है। अल्पसंख्यक हिन्दू व्यापारी राजा किशन चंद की मौत की जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है। लोगों का कहना है कि इसी कारण भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून की जरूरत थी।

राजा किशन की हत्या को लेकर अभी तक भी मुख्यधारा की मीडिया में कोई चर्चा नहीं है। हालाँकि, सोशल मीडिया पर लोग उनके लिए न्याय माँग रहे हैं।

गौरतलब है कि पाकिस्तान की केंद्रीय कैबिनेट द्वारा इसी मई 05, 2020 को वहाँ के प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की गई थी। दावा किया जा रहा था कि पाकिस्तान में इस अल्पसंख्यक आयोग के गठन का प्रमुख उद्देश्य पाकिस्तान में मौजूद अल्पसंख्यकों को धार्मिक स्वतन्त्रता उपलब्ध कराना था।

लेकिन इस आयोग के गठन के बाद भी पाकिस्तान में हिन्दुओं पर होने वाले अपराधों में किसी प्रकार की कमी नहीं आई है। लगभर हर दिन ही पाकिस्तान में हिन्दू नाबालिग लड़कियों के अपहरण, बलात्कार, जबरन धर्मांतरण और हत्या के मामले सामने आते रहे हैं।

इसके अलावा, पाकिस्तान के सिंध में हिन्दू, पंजाब में ईसाई धर्म और खैबर पख़्तूनख़्वाह का कैलाश समुदाय, जबरन धर्मांतरण की शिकायत पिछले कई वर्षों से करते आया है। यहाँ तक कि मानवाधिकार आयोग समेत ही अन्य संगठन भी इन मामलों की पुष्टि कर चुके हैं।

जम्मू-कश्मीर: अब नहीं बचेंगे देश विरोधी गतिविधियों में शामिल सरकारी कर्मचारी, कार्रवाई के लिए बनी समिति

जम्मू-कश्मीर में देश विरोधी गतिविधियों में शामिल सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए सरकार ने 6 सदस्यीय एक समिति का गठन किया है। इस समिति का गठन गुरुवार (जुलाई 30, 2020) को संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (c) के तहत मामलों की जाँच और सिफारिश करने के लिए किया गया।

ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार इस समिति का गठन देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त कर्मचारियों का पता लगाने और उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने के लिए किया गया है।

इस पैनल की अध्यक्षता मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम द्वारा किया जाएगा। इस पैनल में गृह सचिव और पुलिस प्रमुख के अलावा अन्य सदस्य भी शामिल होंगे। समिति उन सभी मामलों की जाँच करेगी, जिनका उल्लेख गृह विभाग और पुलिस द्वारा किया गया है। बताया जा रहा है कि ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय संविधान की धारा 311 के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

खबर है कि पैनल की सिफारिश के आधार पर, देश विरोधी गतिविधियों में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा उन सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है, जो इस वक्त हिरासत में हैं।

बता दें, सोशल मीडिया पर फर्जी एकाउंट बनाकर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने वाले कर्मचारी भी इस प्रावधान के दायरे में आएँगे। इसके अलावा हिरासत में बंद कर्मचारियों के ऊपर भी ये प्रावधान लागू होगा।

नए प्रावधान के तहत जाँच की जरूरत नहीं

जानकारी के मुताबिक अगर जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा को खतरे में डालने में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ आरोपों को दबाती है, तो ही इन मामलों की जाँच के लिए सामान्य प्रशासन विभाग से सिफारिश की जाएगी।

कथित तौर पर, पुलिस जाँच रिपोर्ट और कोलैटरल सबूत के आधार पर अपने मामले को वापस ले सकते है। इस प्रकार इसमें किसी भी जाँच की आवश्यकता नहीं होगी। विभाग इसके बाद ही निलंबन या बर्खास्तगी का आदेश जारी करेगा।

बता दें कि सरकार को पहले पुलिस की निष्क्रियता और प्रशासनिक लापरवाही के बारे में कई शिकायतें मिली थीं। मगर राजनीतिक दबाव के कारण, सुरक्षा को खतरे में डालने या सशस्त्र बलों के खिलाफ लोगों को उकसाने के लिए कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 1990 में 5 सरकारी कर्मचारियों को देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप और अन्य कर्मचारियों के 73 दिन की हड़ताल के बाद उन्हें बहाल कर दिया गया। इसके अलावा 1993 में एक पुलिस विद्रोह के बाद लगभग 130 पुलिसकर्मियों को निकाल दिया गया था, लेकिन फिर उन्हें फायर विभाग और अन्य सेवाओं में रखा गया था।

बिहार पुलिस को नहीं दी सुशांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, रिया चकवर्ती के अंडरग्राउंड होने की अटकलें

सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच करने मुंबई पहुँची बिहार पुलिस की टीम को तेजी से सफलता मिल रही है। नए-नए क्लू हाथ लग रहे हैं। लेकिन कदम कदम पर मुंबई पुलिस बिहार पुलिस की जाँच की राह में रोड़े अटका रही है।

अब खबर आ रही है कि जब बिहार पुलिस की टीम आरएन कूपर म्यूनिसिपल हॉस्पिटल में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के पास पहुँची तो डॉक्टरों ने रिपोर्ट से संबंधित कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वो मुंबई पुलिस को सुशांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट दे चुके हैं। उन्हें इसके बारे में जो भी बात करनी है, वो मुंबई पुलिस से करें। पटना आईजी ने भी इस बात की पुष्टि की कि बिहार पुलिस को अब तक सुशांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है।

इससे पहले शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) को मुंबई पुलिस ने बिहार पुलिस के साथ शर्मनाक हरकत कर सबको हैरत में डाल दिया था। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बिहार पुलिस ने जब मीडिया से बात करनी चाही तो मुंबई पुलिस ने बात करने से रोक दिया और उन्हें तेजी से धक्का देते हुए पुलिस वैन में बैठा दिया।

मामला सामने के बाद बिहार से लेकर मुंबई तक हलचल मच गई। इसी बीच सीएम उद्वव ठाकरे ने कहा कि मुंबई पुलिस अपना काम कर रही है। उन्होंने कहा, “अगर किसी के पास इस मामले को लेकर कोई सबूत है तो मुझे दे। उसके आधार पर आरोपितों से पूछताछ की जाएगी और दोषियों को सजा भी दी जाएगी। इस मामले को बेवजह बिहार और महाराष्ट्र के बीच झगड़े का विषय न बनाएँ।”

बताया जा रहा है कि बिहार पुलिस को जाँच के दौरान रिया के खिलाफ कई अहम सबूत मिले हैं। आगे भी पुलिस ठोस सबूत जुटाने में लगी है। पुलिस ने बैंक से दस्तावेज भी लिए हैं जो रिया से जुड़े अहम सबूत हो सकते हैं। अब जल्द ही बिहार पुलिस कोर्ट में रिया की गिरफ्तारी के लिए अर्जी लगाकर रिया के नाम का वारंट ले सकती है। पुलिस रिया की तलाश में है जो अपने परिवार संग अपना ठिकाना बदल रही है। खबर है कि रिया परिवार के साथ अंडरग्राउंड हो गई हैं।

भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्स्वामी ने भी पीएमओ को पत्र लिखकर अभिनेता के मौत की सीबीआई जाँच का अनुरोध किया था। इसके साथ ही सुशांत की बहन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न्याय की गुहार लगाई है। 

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के केस में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना के राजीव नगर थाने में रिया चक्रवर्ती समेत 4 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई।

इसके बाद बिहार पुलिस की एक विशेष टीम सुशांत सिंह राजपूत के केस की जाँच करने के लिए मुंबई पहुँच गई।हालाँकि टीम के पहुँचने के बाद से ही ऐसी खबरें आ रही हैं कि मुंबई पुलिस उनका सहयोग नहीं कर रही है।

जलाकर मार डाले गए 27 महिला, 22 पुरुष, 10 बच्चे भी रामभक्त ही थे, अयोध्या से ही लौट रहे थे

गोधरा में 27 फरवरी 2002 की सुबह साबरमती एक्सप्रेस के कोच एस-6 को जला दिया गया। इस ट्रेन के कोच में बैठे 59 कारसेवकों की मृत्यु हो गई। ये कारसेवक अयोध्या से विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित पूर्णाहुति महायज्ञ में भाग लेकर वापस लौट रहे थे। 27 फरवरी की सुबह ट्रेन 7:43 बजे गोधरा पहुँची। जैसे ही ट्रेन गोधरा स्टेशन से रवाना होने लगी उसकी चेन खींच दी गई। ट्रेन पर 1000-2000 लोगों की भीड़ ने हमला किया। भीड़ ने पहले पत्थरबाजी की फिर पेट्रोल डालकर उसमें आग लगा दी। इसमें 27 महिलाओं, 22 पुरुषों और 10 बच्चों की जलने से मृत्यु हो गई।

गुजरात सरकार ने इस घटना की जाँच के लिए गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश केजी शाह की एक सदस्यीय समिति गठित की। इसका विरोध विपक्ष व मानवाधिकार संगठनों ने किया तो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) जीटी नानावटी की अध्यक्षता में समिति का पुनर्गठन किया और न्यायाधीश केजी शाह को इसका अध्यक्ष बनाया गया। न्यायाधीश केजी शाह की 2008 में मृत्यु हो जाने पर गुजरात उच्च न्यायालय ने उनकी जगह सेवानिवृत्त न्यायाधीश अक्षय कुमार मेहता को अप्रैल 2008 में समिति का सदस्य नियुक्त किया। अत: इस समिति को नानावटी मेहता समिति के नाम से जाना गया। इस समिति ने 6 साल तक तथ्यों और घटनाओं की जाँच करने के बाद 2014 में अपनी रिपोर्ट सौंपी।

रिपोर्ट के अनुसार गोधरा दुर्घटना एक षड्यंत्र था। मुख्य षड्यंत्रकारी गोधरा का मौलवी हुसैन हाजी इब्राहिम उमर और ननूमियाँ थे। इन्होंने सिग्नल फालिया एरिया के मुस्लिमों को भड़काकर इस षड्यंत्र को अंजाम दिया। ट्रेन को जलाने के लिए रज्जाक कुरकुर के गेस्ट हाउस पर 140 लीटर पेट्रोल भी एकत्रित किया गया। रिपोर्ट में पेट्रोल/ ज्वलनशील पदार्थ छिड़कने की सत्यता को प्रमाणित करने के लिए फॉरेंसिक लेबोरेट्री के प्रमाणों का भी उल्लेख किया गया। गुजरात फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री के अनुसार आग लगने के कारण ज्वलनशील द्रव को कोच के अंदर डाला जाना था और आग लगाना केवल दुर्घटना मात्र नहीं थी।

गोधरा में हिंदू-मुस्लिम आबादी में ज्यादा अंतर नहीं है और गोधरा साम्प्रदायिक हिंसा का लंबे समय से शिकार रहा है। स्वंय न्यायालय ने भी ऐसी 10 घटनाओं का उल्लेख किया जो 1965 से 1992 के मध्य घटी और इसमें हिंदुओं की दुकानों एवं घरों को जलाया गया।

आरोपियों के वकील का तर्क था कि रेलवे स्टेशन पर मुस्लिम दुकानदारों से कारसेवकों ने दुर्व्यवहार किया जिससे दंगा शुरू हुआ परन्तु न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय का मानना था कि रेलवे स्टेशन के पास स्थित सिग्नल फालिया एरिया के लोगों को यह अफवाह फैलाकर एकत्रित किया गया कि कारसेवक मुस्लिम लड़की का अपहरण कर रहे हैं। पास की मस्जिद से भी लोगों को भड़काने वाले नारे लगाए गए। बाद में एकत्रित हो भीड़ से ट्रेन रोकने के लिए कहा गया। न्यायालय ने माना कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र था, क्योंकि 5-6 मिनट के अंदर मुस्लिम लोगों को हथियार सहित एकत्रित कर रेलवे स्टेशन और ट्रेन तक लाना बिना पूर्व निर्धारित योजना के संभव नहीं है।

मई 2004 में जब यूपीए सरकार आई तो लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री बने। उन्होंने घटना के पुन: जाँच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश उमेश चंद्र बनर्जी की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति नियुक्त की। उमेश चन्द्र बनर्जी समिति ने जनवरी 2005 में अंतरिम रिपोर्ट पेश की। इसमें गोधरा की घटना को और ट्रेन के जलने को केवल एक दुर्घटना माना गया।

बनर्जी कमीशन की रिपोर्ट को गोधरा दुर्घटना में घायल नीलकांत भाटिया ने गुजरात उच्च न्यायालय में चुनौती दी। अक्टूबर 2006 में उच्च न्यायालय ने बनर्जी समिति की रिपोर्ट को खारिज कर दिया और उनकी जाँच को अवैधानिक एवं शून्य घोषित कर दिया। उच्च न्यायालय के अनुसार बनर्जी समिति का यह निष्कर्ष कि ट्रेन में आग दुर्घटनावश लग गई थी और कोई षड्यंत्र नहीं था, प्राप्त आधारभूत प्रमाणों के विपरीत है।

SIT ने 68 लोगों के विरुद्ध चार्जशीट फाइल की। इसमें यह उल्लेख था कि भीड़ ने पुलिस पर भी हमला किया और फायर ब्रिगेड को भी रोकने की कोशिश की। विशेष ट्रॉयल कोर्ट ने 2011 में 31 लोगों को दोषी पाया। 11 लोगों को मौत की सजा दी। यह लोग वो थे जिन्होंने गोधरा में ट्रेन जलाने का षड्यंत्र रचा और कोच में जाकर पेट्रोल छिड़का था। कोर्ट ने अन्य 20 को आजीवन कारावास की सजा दी।

दोषियों ने गुजरात उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने 11 मृत्युदंड पाए अभियुक्तों की सजा मृत्युदंड से बदलकर आजीवन कारावास कर दी। इस प्रकार उच्च न्यायालय ने सभी 31 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी। जिन दोषियों को ट्रॉयल कोर्ट ने छोड़ दिया था उनको उच्च न्यायालय ने भी बरी कर दिया।

इस गोधरा कांड के बाद हुए दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अभियुक्त बनाने की याचिका दायर की गई। परन्तु एसआईटी और उच्च न्यायालय ने मोदी को क्लीनचिट दे दी।

बिहार के भागलपुर में बवाल: लॉकडाउन में मस्जिद पहुँचे नमाजी, पुलिस ने समझाया तो बरसाए पत्थर

कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए बिहार में लॉकडाउन है। इसके बावजूद भागलपुर की एक मस्जिद में जुमे पर बड़ी संख्या में लोग नमाज पढ़ने के लिए जुट गए। पुलिस ने समझाने की कोशिश की तो पथराव किया गया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार घटना भागलपुर के तातारपुर थाना इलाके के इर्तिजा हुसैन लेन बाग मस्जिद की है। पथराव के बाद मौके पर भगदड़ मच गई। पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है।

दरअसल, कोरोना वायरस के कारण बिहार में लॉकडाउन किया गया है। इसी बीच तातारपुर थाने की पुलिस को सूचना मिली कि इर्तिजा हुसैन लेन बाग मस्जिद में लॉकडाउन के बावजूद बड़ी भीड़ जुमे की सामूहिक नमाज पढ़ने के लिए एकत्रित हुई है।

जब पुलिस दल मौके पर पहुँचा तो उन्होंने सूचना को सही पाया और नमाज पढ़ने की तैयारी कर रहे लोगों को शांतिपूर्वक तरीके से लॉकडाउन के दिशा-निर्देशों का पालन करने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का ध्यान रखने की सलाह दी। लेकिन पुलिस की सलाह वहाँ मौजूद भीड़ को पसंद नहीं आई। देखते ही देखते वहाँ उपद्रवियों ने विरोध में पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।

इस घटना कि जानकारी मिलते ही सिटी एसपी सुशांत कुमार सरोज, सिटी डीएसपी राजवंश सिंह सहित थाने के पुलिस अधिकारीयों ने घटनास्थल पर पहुँचकर उपद्रव का जायजा लेते हुए ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त ना करने की बात कही और आरोपितों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कानून के साथ खिलवाड़ करने वाले लोगों की पहचान कर उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि कल ही बिहार राज्य शिया वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने अपील की थी कि केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए 01 से 31 अगस्त तक ‘अनलॉक-3’ के तहत निर्देश जारी किया है। इसके अंतर्गत किसी भी तरह की धार्मिक आयोजन पर पाबंदी लगाई गई है। बोर्ड ने अपील की थी कि केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देश का अनुपालन राज्य में रहेगा।

जिला शिया वक्फ कमेटी के सचिव जीजाह हुसैन ने भी लोगों से कहा था कि जिस तरह से उन लोगों ने शबे बरात, रमजान और ईद में इबादत और नमाज घर पर अदा की, उसी तरह 01 अगस्त को होने वाली बकरीद पर भी नमाज अपने-अपने घरों में अदा करें।

अमेरिका में टिकटॉक पर आज से बैन संभव, ट्रंप ने दिए संकेत: सौदे पर माइक्रोसॉफ्ट से चीनी कंपनी की हो रही बात

चीनी ऐप टिकटॉक की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। भारत के बाद अमेरिका ने भी इस वीडियो शेयरिंग ऐप को बैन करने के संकेत दिए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ बढ़ते तनाव और जासूसी के आरोपों के बीच इसके संकेत दिए हैं। इधर बाइटडांस (ByteDance) और माइक्रोसॉफ्ट के बीच सौदे को लेकर बातचीत चलने की भी खबर है। बाइटडांस टिकटॉक की पैरंट कंपनी है।  

ट्रंप ने कहा, “जहाँ तक टिकटॉक की बात है, उस पर अमेरिका में प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। हो सकता है यह कार्रवाई शनिवार के दिन पूरी हो जाए।” इसके पहले ट्रंप ने कहा था, “हम कुछ कदम उठा ही सकते हैं, हमारे पास कई विकल्प हैं। लेकिन ठीक इस वक्त बहुत कुछ एक साथ हो रहा है। फ़िलहाल हम टिकटॉक के लिए कई विकल्प तलाश रहे हैं। जल्द से जल्द कोई नतीजा हासिल करेंगे।”

ऐसी ख़बरें भी सामने आ रही हैं जिनके मुताबिक़ माइक्रोसॉफ्ट, अमेरिका में टिकटॉक का कारोबार खरीद सकती है। ब्लूमबर्ग न्यूज़ और वाल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट्स में इस बात का ज़िक्र किया है कि अमेरिकी सरकार बाइटडांस को कड़े कदम उठाने के निर्देश दे सकती है। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने टिकटॉक को खरीदने या इसमें निवेश करने की इच्छा जताई थी।  

इस बारे में न्यूयॉर्क टाइम्स और फॉक्स बिज़नेस ने ख़बर भी प्रकाशित की थी। इसके मुताबिक़ माइक्रोसॉफ्ट टिकटॉक को खरीदने के लिए बात शुरू कर चुका है। अरबों डॉलर का यह समझौता सोमवार तक पूरा हो सकता है। आगामी एक दो दिनों में इस मुद्दे पर ह्वाइट हाउस के प्रतिनिधियों और टिकटॉक- इक्रोसॉफ्ट की बैठक हो सकती है। हालाँकि माइक्रोसॉफ्ट ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है।   

टिकटॉक के वर्तमान के निवेशक सॉफ़्ट बैंक, सिक्वॉअ कैपिटल और जेनरल अटलांटिक जैसी कम्पनियाँ हैं। वह टिकटॉक को बचाने के लिए इसमें एक बड़ा शेयर लेने के लिए सोच रही हैं, ताकि इसका चीनी होने का ठप्पा ख़त्म किया जा सके। लेकिन टिकटॉक की मार्केट वैल्यू 100 बिलियन डॉलर पहुँचने के बाद निवेशकों के लिए एक बड़ा शेयर लेना भी काफ़ी महँगा समझौता साबित हो सकता है। ब्लूमबर्ग ने लिखा है कि ट्रम्प विशेष अधिकार का प्रयोग करके बाइटडांस को इस बात के लिए फ़ोर्स कर सकते हैं कि वह अपना US ऑपरेशन बेचकर उनके देश से सम्मानपूर्वक निकल जाए।

US ऑपरेशन बेचने का तात्पर्य यह है कि टिकटॉक अमेरिका और टिकटोक टिकटॉक दो अलग-अलग इंडिपेंडेंट ईकाई हो जाएँगी। अमेरिका में टिकटॉक का कारोबार लगभग 20 से 40 बिलियन डॉलर का है। इसके अलावा अमेरिका में टिकटॉक के 165 मिलियन यूज़र हैं।

भारत सरकार ने जून के अंत में टिकटॉक समेत कुल 59 चीनी ऐप्स को बैन कर दिया था। चीनी ऐप्स पर बैन लगाने के फैसले पर भारत सरकार का कहना था कि सुरक्षा के मद्देनजर ये कदम उठाया गया है। इसके बाद पिछले दिनों चीन के 47 और ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके अलावा बताया गया था कि PUBG समेत 250 ज्यादा ऐप्स की केंद्र सरकार समीक्षा भी कर रही है।

150 नहीं, रोज 5000 भैंस की कुर्बानी देंगे: BMC के निर्देश से मजहबी संगठन नाराज, जाएँगे HC

बकरीद से ठीक पहले बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) को एक सर्कुलर जारी किया है। इसके अनुसार 1 से 3 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक 150 भैंसों की कुर्बानी की अनुमति होगी। मजहबी संगठन ने इस पर नाराजगी जताई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर BMC ने यह सर्कुलर जारी किया है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, स्पेशल सिविक काउंसल अनिल सखारे से कहा कि वे इस शनिवार से बकरीद में कुर्बान की जाने वाले परमिट की गई भैंसों की संख्या के बारे में अदालत में एक सर्कुलर प्रस्तुत करें।

इसके बाद बीएमसी ने सर्कुलर जारी कर कोरोना वायरस दिशा-निर्देशों के कारण बूचड़खाने में 150 भैंसों को मारने का सर्कुलर जारी किया है। BMC द्वारा जारी नए सर्कुलर में अब सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर कोरोना वायरस महामारी संबंधी दिशा-निर्देशों के तहत अन्य नियमों का कड़ाई से अनुपालन करने के लिए कहा है, जिसमें मास्क लगाया जाना बेहद आवश्यक बताया गया है, और कहा गया है कि हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग जरूर करें।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के आदेशों को अस्वीकार किया

अखिल भारतीय जमीयत के उपाध्यक्ष इमरान कुरैशी ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि बीएमसी ने उनकी जनहित याचिका में 5,000 का उल्लेख करने के बावजूद प्रतिदिन 150 मवेशियों की कुर्बानी निश्चित की है। कुरैशी ने कहा कि वो शनिवार (अगस्त 01, 2020) को अदालत की अवमानना (कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट) ​​के लिए उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।

जनहित याचिकाकर्ता मोहम्मद आसिफ कुरैशी और हाजी कुदरतुल्लाह कुरेशी ने दावा किया कि आमतौर पर बकरीद के दौरान लगभग 15,000 कुर्बानियाँ बूचड़खाने में होती थीं, लेकिन महामारी के दौरान आर्थिक कठिनाइयों को देखते हुए कुर्बानियों की संख्या 40% से कम होगी। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि चूँकि बिना किसी स्पेशल ऑर्डर के ही बूचड़खाने बंद हो गए हैं, इसलिए भैंसों की कुर्बानी संभव नहीं है।

हालाँकि, जनहित याचिका का निपटारा करते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा कि नागरिक प्रशासन और पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि सर्कुलर की शर्तों का उलंघन ना हो।

महाराष्ट्र सरकार ने दी थी राहत

महाराष्ट्र की सेक्युलर सरकार ने कथित तौर पर ईद से पहले कोरोना वायरस दिशा-निर्देशों में लगाए गए कुछ प्रतिबंधों की घोषणा की थी। शुरुआत में महाविकास अघाड़ी सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के बीच 31 जुलाई और 1 अगस्त को बकरीद मनाने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए थे।

दिशा-निर्देशों के अनुसार, लोगों को आस-पास की मस्जिदों में घूमने के बजाए घर पर नमाज अदा करने के लिए कहा गया और जानवरों को ऑनलाइन या फोन पर खरीदने के लिए कहा गया। इस पर मजहबी विधायकों सहित कट्टरपंथियों में नाराजगी और विरोध देखा गया।

हालाँकि, महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार के असंतुष्ट मजहबी नेताओं के एक समूह ने प्रतिबंधों के खिलाफ अपनी शिकायतें उठाईं, जिससे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बकरीद से पहले इन दिशा-निर्देशों की सख्ती कम कर दी।

सुशांत की बहन ने PM मोदी से लगाई गुहार: सिद्धार्थ ने दवा देने की बात कबूली, रिया पर पूछे सवाल तो भागा

सुशांत सिंह राजपूत की बहन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न्याय की गुहार लगाई है। शुक्रवार (31 जुलाई 2020) को ही रिया चक्रवर्ती ने भी एक वीडियो संदेश के माध्यम से न्याय की माँग की थी। इधर रिपब्लिक टीवी से बातचीत में सुशांत को दवाई देने की बात उनके दोस्त सिद्धार्थ पिथानी ने कबूली है।

इससे पहले भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्स्वामी ने भी पीएमओ को पत्र लिखकर अभिनेता के मौत की सीबीआई जाँच का अनुरोध किया था।

सिद्धार्थ और सुशांत एक साल फ्लैटमेट रहे थे। आत्महत्या से कुछ घंटों पहले तक भी सुशांत उनके ही साथ थे। हालॉंकि, रिया चकवर्ती से जुड़े सवाल पूछे जाने पर सिद्धार्थ बीच में ही रिपब्लिक टीवी का इंटरव्यू छोड़कर चले गए। इससे पहले उन्होंने रिया को जानने से इनकार किया था। साथ ही सुशांत के पिता केके सिंह के आरोपों को भी खारिज कर दिया था।

सुशांत सिंह राजपूत के दोस्त सिद्धार्थ पिथानी ने समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया है कि वह सुशांत को एक डॉक्टर के कहे अनुसार दवाइयाँ देते थे। उन्होंने कहा, “मैंने दो गोलियाँ दीं, लेकिन मुझे नहीं पता कि वे किस चीज़ की थी। “

सुशांत के घर छोड़ने से पहले रिया चक्रवर्ती के साथ हुई आखिरी बातचीत का खुलासा करते हुए, पिथानी ने कहा, “उसने कहा कि उसकी देखभाल करो, मैं सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर हूँ, जब भी जरूरत होगी मैं वापस आ जाऊँगी।”

पिथानी ने आगे कहा कि उन्होंने उन्हें प्राइवेसी दी और कभी भी उनके निजी जीवन में दखलअंदाजी नहीं की। सुशांत की मौत के पहले उनके घर पर हुई किसी पार्टी के सवाल पर सिद्धार्थ पिथानी ने कहा कि वहाँ कोई पार्टी नहीं हुई थी। जब सिद्धार्थ से रिया और सुशांत के के बीच उनके डिप्रेशन को लेकर चल रही बातों पर सवाल पूछे गए तो सिद्धार्थ ने इंटरव्यू बीच में ही छोड़ दिया।

इससे पहले सिद्धार्थ ने एक अन्य इंटरव्यू में कहा था, “वह 13 की रात को लगभग 1 बजे मेरे कमरे में आया और कहा- बुद्ध, तुम अभी तक सोए नहीं हो? मैंने उससे पूछा- तुम सोए क्यों नहीं? उसने कहा- मैं अभी सोने जा रहा हूँ। हमने एक-दूसरे को शुभरात्रि कहा। अगली सुबह, जब मैं नीचे गया, केशव ने मुझसे कहा कि सर दरवाजा नहीं खोल रहे हैं। दीपेश और मैंने उसे जगाने के लिए दरवाजा खटखटाने की कोशिश की। हमने चाबी बनाने वाले को फोन किया। बहन को भी तुरंत बताया, वो भी वहाँ पहुँच गई। जब हमने दरवाजा खोला, तो वह फाँसी से लटका हुआ था।”

‘डरे हुए थे सुशांत’

अर्नब गोस्वामी के साथ बातचीत में ही सुशांत की ही एक दोस्त स्मिता ने दावा किया है कि दिशा सलियन की मौत के बाद अभिनेता सुशांत अपनी जिन्दगी के लिए बेहद डरे हुए थे और मुंबई छोड़ना चाहते थे। उसने सुशांत की बहन मीतू सिंह का जिक्र करते हुए कहा, “सुशांत ने उसे बताया कि वह डर गया था और दिशा की मौत के बाद शहर छोड़ना चाहता था।”

स्मिता ने कहा कि खबरों में आने लगा कि सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर ने आत्महत्या कर ली है। इस सिचुएशन से सुशांत की घबराहट बढ़ गई कि कहीं दिशा की मौत के केस में उनको फंसा न दिया जाए वह इसी वजह से लगातार गूगल चेक कर रहे थे। रिया ने सुशांत का नंबर ब्लॉक कर दिया था, जिस वजह से वह और भी परेशान थे।

स्मिता ने कहा- “8 जून के दिन रिया ने सुशांत का घर छोड़ दिया था। मुझे बताया गया था कि दो बड़े सामान भरे हुए बैग उसके साथ थे, शायद वो बैग टूट गए, और ड्राइवर ने उसे उसके घर पर छोड़ दिया। मीतू दी उसी शाम आई। सुशांत बिलकुल ठीक था। 9 तारीख को दिशा सलियन की मौत ने सुशांत को काफी परेशान किया। वह मीतू दी को लगातार कह रहा था, ‘वे अब मुझे नहीं छोड़ेंगे। वे मेरे पीछे आएँगे।’ वह बहुत चिंतित था। दिशा की मौत से पहले, वह टीटी खेल रहा था, उसने योग के अपनी क्लास पूरी कर ली थी। लेकिन दिशा की मौत के बाद, उन्होंने मीतू दी को बार-बार कहा- वे अब मेरा पीछा करेंगे। मुझे नहीं पता कि वे ‘किस’ के बारे में बात कर रहे थे, उन्होंने उस बारे में कभी किसी को नहीं बताया।”

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस के साथ-साथ बिहार पुलिस भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जाँच कर रही है। बुधवार (जुलाई 29, 2020) को रिया ने उच्चतम न्यायालय का रूख करते हुए पटना में उसके खिलाफ दर्ज FIR को मुंबई स्थानांतरित करने की माँग की थी। इसके खिलाफ बिहार सरकार ने कैविएट दायर की है।

सुशांत की बहन श्वेता ने की PM मोदी से न्याय की माँग

शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) को सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती ने बेहद साधारण कपड़ों में और बिना मेकअप के एक वीडियो रिलीज कर न्याय की माँग की थी। अब सुशांत की बहन श्वेता सिंह ने भी पीएम नरेंद्र मोदी से न्याय की अपील की है।

01 अगस्त की सुबह ही ट्विटर पर पीएम नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने लिखा- “मैं सुशांत सिंह राजपूत की बहन हूँ और मैं पूरे मामले की तत्काल जाँच का अनुरोध करती हूँ। हम भारत की न्याय व्यवस्था में विश्वास करते हैं और किसी भी कीमत पर न्याय की उम्मीद करते हैं। #JusticeForSushant #SatyamevaJayat.”

ट्वीट के साथ ही एक सन्देश का पोस्टर शेयर करते हुए श्वेता सिंह ने लिखा है “डियर सर, मेरा दिल कहता है कि आप सच के साथ और सच के लिए खड़े होते हैं। हम बहुत सामान्य परिवार से हैं। मेरे भाई के पास कोई गॉडफादर नहीं था, जब वह बॉलीवुड में थे और ना ही हमारे पास अब कोई गॉडफादर है। मेरा अनुरोध है कि आप तुरंत इस मामले को देखें और सुनिश्चित करें कि सब कुछ साफ तरीके से सँभाला जाए और किसी भी सबूत के साथ कोई छेड़खानी ना की जाए। इंसाफ की उम्मीद है।”

जम्मू-कश्मीर: अब तक 3.7 लाख लोगों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट, अरसे से बाट जोह रहे थे वाल्मीकि

जम्मू-कश्मीर में बीते हफ्ते तक करीब 3.7 लाख लोगों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट दिया गया था। 22 जून से इसकी प्रक्रिया शुरू हुई थी। डोमिसाइल सर्टिफिकेट पाने वालों में से करीब 78 फीसदी जम्मू से हैं।

इनमें ज्यादातर ऐसे लोग हैं जो केंद्र शासित प्रदेश में लंबे समय से रह रहे थे। ज़्यादातर लोग सरकारी सेवाओं से जुड़े हुए हैं या वाल्मीकि समाज से आते हैं। पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद इन्हें डोमिसाइल देने का रास्ता खुला था। आगामी 5 अगस्त को इसके एक साल पूरे हो जाएँगे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया है कि 22 जून को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद से जम्मू में लगभग 2.9 लाख लोगों को निवास प्रमाण-पत्र दिया गया। वहीं कश्मीर घाटी में लगभग 79, 300 लोगों को प्रमाण-पत्र मिला है।    

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि डोमिसाइल पाने वालों में 20 हजार पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थी हैं। वाल्मीकि समुदाय के करीब 2000 सफाई कर्मचारियों और 700 गोरखा को भी डोमिसाइल सर्टिफिकेट दिया गया है।   

वाल्मीकि समाज में सबसे पहला निवास प्रमाण-पत्र 71 साल की दीपू देवी को मिला। उन्होंने कहा, “मैं चाहती थी कि मरने के पहले मेरी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता की ख़्वाहिश पूरी हो जाए। अब यह सपना पूरा हो गया है। अब मैं मेरे बच्चे यहाँ मान-सम्मान के साथ रह पाएँगे।”

नए नियमों के अमल में आने के बाद जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से कार्यरत आईएएस अधिकारी नवीन चौधरी पहले स्थायी निवासी बने थे। चौधरी मूल रूप से बिहार के दरभंगा के रहने वाले हैं।

नए नियमों के मुताबिक जो लोग 15 साल से जम्मू-कश्मीर में रह रहे हैं या 7 साल तक यहॉं पढ़ाई की है, वे स्थायी निवासी बन सकते हैं। केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारी, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी और बैंक कर्मचारी जिन्होंने 10 साल तक जम्मू-कश्मीर में काम किया है वो भी स्थायी निवासी बन सकते हैं।

हालॉंकि केंद्र शासित प्रदेश की पार्टियॉं इसका विरोध कर रही हैं। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और अलगाववादी अमलगाम हुर्रियत कॉन्फ्रेंस जैसी पार्टियों ने इसे जनसांख्यिकी में बदलाव की साजिश करार दिया है। साथ ही उनका कहना है कि आरएसएस के इशारे पर सरकार ऐसा कर रही है।

‘5 अगस्त को फासिस्ट हिंदुओं के विरोध में जुटे’: भूमि पूजन पर न्यूयॉर्क में उत्सव से चिढ़ा भारत विरोधी संगठन

5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन होना है। इस मौके पर न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर भारतवंशी उत्सव मनाएँगे। भारत विरोधी कट्टर वामपंथी समूह दक्षिण एशिया सॉलिडैरिटी इनिशिएटिव (SASI) ने इन आयोजकों को ‘फासिस्ट हिंदू’ बताते हुए इसके विरोध में जुटने की अपील की है।

SASI ने यह अपील प्रवासी भारतीयों की ओर से 5 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित टाइम्स स्क्वायर पर भगवान श्रीराम की भव्य तीन आयामी तस्वीर (3D चित्र) प्रदर्शित करने की योजना को देखते हुए किया है।

SASI – ट्विटर से ली गई तस्वीर

SASI ने ट्विटर पर एक बयान में यह भी कहा कि वीएचपी एक ‘घृणा फ़ैलाने वाला समूह’, है जो ‘कई फासीवादी संगठनात्मक शाखाओं’ में से एक है। दावा किया गया है कि VHP को ‘गोरक्षा, धर्मांतरण, मंदिर के जीर्णोद्धार और लव जिहाद के नाम पर भीड़ की हिंसा के लिए जाना जाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को नकारात्मक दिखाने के प्रयास में SASI ने दावा किया कि वे ‘पीढ़ियों के नरसंहार’ के लिए जिम्मेदार हैं। SASI ने एक बयान में कहा है, “मोदी 1992 में मस्जिद के विध्वंस के प्रमुख आयोजकों में से एक थे। उन्होंने गुजरात में एक दशक बाद फिर से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहाँ उन्होंने नरसंहार भड़काया। आज उन्हें न्यूयॉर्क शहर के फासीवादियों द्वारा सराहा जा रहा है।”

SASI ने एक ट्वीट में लिखा है कि VHP और मोदी ने हमेशा ही नरसंहार और दंगे भड़काए हैं और अब हिन्दू राष्ट्रवाद को ‘ना’ कहने का समय आ गया है।

यहाँ पर यहाँ बताना अनावश्यक है कि इस संगठन द्वारा लगाए गए ये सभी आरोप काल्पनिक और बेबुनियाद आरोप हैं और वास्तविकता से दूर-दूर तक इनका कोई वास्ता नहीं है। 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई आरोप नहीं है और तब वे आज की तरह एक ख्याति प्राप्त राष्ट्रीय चेहरा नहीं थे।

उस विशेष मामले के मुख्य आरोपित अन्य राजनेता हैं। इसके अलावा, भारतीय न्यायपालिका ने नरेंद्र मोदी पर 2002 के गुजरात दंगों के संबंध में लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। इस प्रकार, यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि SASI इस तरह के आरोपों को वर्तमान संदर्भ में सिर्फ और सिर्फ कुछ राजनीतिक नजरियों से प्रभावित होकर लगा रहा है।

SASI की गतिविधियाँ स्पष्ट रूप से उनके भारत विरोधी घृणा को काफी प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करती हैं। ‘कश्मीर लिबरेशन मूवमेंट’ पर SASI ने ही कहा था “SASI कश्मीरी मुक्ति आंदोलन के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है। कश्मीर भारत के राज्य का एक अभिन्न अंग नहीं है, बल्कि यह एक देश है, जो कब्जे में है। कश्मीर की आवाज़ों को हमेशा अपने फैसले के अधिकार के लिए स्वतंत्र होना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “भारतीय राज्य द्वारा कब्जे का विरोध करने वाले कश्मीरियों के साथ SASI हमेशा खड़ा है और हम आजादी और इसकी मुक्ति के लिए आह्वान करते हैं।”

पुलवामा आतंकी हमले पर SASI ने कहा था, “राष्ट्रवादी हिन्दू पुलवामा हमले को मजहब वालों के खिलाफ हिंसा और युद्ध भड़काने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलवामा हमले के फौरन बाद, जम्मू-कश्मीर और साथ ही, भारत के कई राज्यों में मजहब के कश्मीरियों के खिलाफ भयावह हिंसा भड़की। भले ही जम्मू में कर्फ्यू लगा दिया गया हो, हिंदुत्व की भीड़ को खुलेआम घूमने और समुदाय वालों की कॉलोनियों पर हमला करने, घरों को जलाने और उनके वाहनों को जलाने की अनुमति दी गई थी।”

इस बयान में आगे कहा गया था, “हम इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय और कश्मीरी मु###नों के लिए डरे हुए हैं और उनके साथ खड़े हैं। वे भयानक राजनीतिक माहौल का सामना कर रहे हैं। हमें कब्जे को समाप्त करने और कश्मीर के कब्जे वाले क्षेत्रों से सेना को जल्द से जल्द हटाने पर काम करना होगा।”

अपने बयान में SASI संगठन ने कहीं भी पुलवामा आतंकी हमले की निंदा नहीं की और ना ही इसे आतंकवादी कृत्य कहा।

यही संगठन ‘SASI स्टैंड विद कश्मीर’ (SWK), जो कि एक कश्मीरी अलगाववादी संगठन है, के साथ मिलकर काम करता है। ये SWK संगठन नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के दौरान भी सक्रिय था और कश्मीर पर पाकिस्तानी विचारों के समर्थन के लिए जाना जाता है। इस SWK पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और कश्मीरी पंडितों के नरसंहार में लिप्त होने का सहयोगी कहा जा सकता है।

SASI संस्था के नाम से ही यह स्पष्ट है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के व्यक्ति SASI के साथ भी जुड़े हुए हैं। वे संयुक्त राज्य में चल रही सामाजिक उथल-पुथल के दौरान भी काफी मुखर रहे हैं।

एक ऑनलाइन पॉडकास्ट में, SASI के सामूहिक सदस्य छाया, नूफ़ेल, शीला और थेरेसा के बीच चर्चा चल रही थी, जिसमें वो कह रहे थे, “ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के दौरान, एक महामारी के समय न्यूयॉर्क शहर में विरोध प्रदर्शन के साथ हमारे अनुभव, कई एकजुटता समूहों पर इस विचार के लिए संगठनों के निर्माण किया कि ‘हिंदुत्व समूह किस तरह से ब्लैक लाइव्स मैटर आन्दोलन को अपने फ़ासिस्ट एजेंडा के लिए इस्तेमाल करते हैं।”

इस प्रकार, SASI के कारनामों से सब कुछ स्पष्ट है। इसी कारण से, यह बिल्कुल भी आश्चर्यजनक नहीं है कि वे ऐसे अवसर पर भारत की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं जो दुनिया भर में हिंदुओं के लिए शुभ है।