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7 सितारा सुख-सुविधाओं वाले विमान में यात्रा करते हैं PM मोदी, कॉन्ग्रेसी नेता ने शेयर की फोटो: Fact Check

जीतू पटवारी ने एक विमान का फोटो शेयर करते हुए लिखा, “रेल बिक गई, चाय का क्या? अरे भाई! पीएम साहब चाय वाली पृष्ठभूमि से आते हैं तो क्या हुआ, हम जब उन्हें ज्यादा सुविधाएँ देंगे, तभी तो वो भारत को विश्वगुरु बनाएँगे। प्रधानमंत्री के विमान के अंदर के दर्शन।” साथ ही उन्होंने जिस विमान की तस्वीर शेयर की, उसमें अंदर सोफे-टेबल, टीवी और कई अन्य महँगी वस्तुएँ रखी दिख रही हैं।

इस ट्वीट के माध्यम से जीतू पटवारी का आरोप था कि देश की जनता के रुपयों से पीएम मोदी अपनी सुविधाएँ बढ़ा रहे हैं और वो भोग-विलास की वस्तुओं से लैस विमान में ही यात्रा करते हैं। हालाँकि, सोशल मीडिया में कई लोगों ने उनका झूठ पकड़ लिया। ‘स्ट्रेटेजिक स्पामिंदर भारती’ ने जीतू पटवारी के इन दावों की सबूतों के साथ पोल खोली। दरअसल, वो प्रधानमंत्री मोदी के विमान की तस्वीर थी ही नहीं।

दरअसल, जीतू पटवारी ने जिस 787 जेट की तस्वीर शेयर की, वो प्राइवेट है, पीएम मोदी की नहीं है। उसे दुनिया का पहला ‘787 ड्रीम जेट’ बताया गया है, जिसका प्रबंधन सितम्बर 2016 से ही डियर जेट नामक कम्पनी करती आ रही है। इस एयरक्राफ्ट को हॉन्गकॉन्ग स्थित डियर जेट के बड़े में शामिल किया गया है। इसका डिजाइन फ़्रांस के मशहूर इंटीरियर डिजाइनर जैक्स प्लेरेजियन ने किया है।

उन्होंने एयरक्राफ्ट कंप्लीशन सेंटर के साथ मिल कर 2.5 साल में क्राफ्टिंग के इस नमूने को तैयार किया, जो ऐरोस्पेस में अलग ही स्थान रखता है। यह जेट 17 घंटे बिना रुके उड़ान भर सकता है। ये एक सात सितारा प्राइवेट जेट है, जिसमें सारी सुख-सुविधाएँ तो उपलब्ध है ही, साथ ही इसे चलाने के लिए पायलट्स का भी चुनाव अलग तरीके से होता है। ये जेट भारत की है ही नहीं। इसीलिए इसका पीएम मोदी का होने का तो सवाल ही नहीं उठता।

इससे पहले जीतू पटवारी ने नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार पर ये कहते हुए निशाना साधा था कि केंद्र का प्रयास था कि एक बेटा यानी ‘विकास’ हो। लेकिन उसके बदले 5 बेटियाँ यानी ‘नोटबंदी’, ‘जीएसटी’, ‘महंगाई’, ‘बेरोजगारी’ और ‘मंदी’ पैदा हो गई। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी संबित पात्रा की शिकायत पर जीतू के ट्वीट पे संज्ञान लिया था। भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने इसे कॉन्ग्रेस की निकृष्टतम विचारधारा करार दिया था।

अभी कमजोर हूँ, जब मेरी सत्ता आएगी… लाठी आएगी तो बदला लूँगा: राम मंदिर पर समुदाय विशेष की प्रतिक्रिया, वीडियो वायरल

नवम्बर 2019 में सुप्रीम कोर्ट का राम मंदिर को लेकर आया अंतिम फैसला भला किसे नहीं याद होगा, जब देश की सबसे बड़ी अदालत में रामलला विराजमान की जीत के बाद सैकड़ों का सालों का इंतजार ख़त्म हुआ था और भगवान राम के टेंट से निकल कर भव्य मंदिर में जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया था। लेकिन, उस समय मुस्लिमों का रिएक्शन क्या रहा था? राम मंदिर को लेकर मुस्लिमों की प्रतिक्रिया वाला एक वीडियो वायरल हो रहा है।

ये वीडियो तभी का है, जब पूरा देश राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का जश्न मना रहा था। ‘The Rajdharma’ के वीडियो में कुछ मुस्लिम कहते दिख रहे हैं कि अल्लाह इंसाफ करेगा और वो लोग बदला ज़रूर लेंगे। एक मुस्लिम ये कहता दिख रहा है कि आज उसके पास पावर नहीं है लेकिन आज से कुछ साल बाद जब पावर आएगा तब वो बता देगा कि कैसे बदला लेना है। हालाँकि, कुछ मुस्लमान ये भी कहते नज़र आए कि उनके लिए देश पहले है।

एक मौलवी की तरह दिख रहे शख्स ने कहा कि वो राम मंदिर पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ख़ुश नहीं है। उसने कहा कि अगर सरकार सोचती है कि वो 5 एकड़ जमीन देकर मुस्लिम को खुश कर देगी तो वो 5 एकड़ जमीन देने को तैयार है। उसने कहा कि वहाँ मस्जिद थी और मस्जिद रहेगी। उसने मुस्लिम को इस देश में कमजोर भी बताया। उसने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने गलत फैसला दिया है, जिसे वो नहीं मानता।

उसने ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’ वाली कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि कल को जब उसके हाथ में लाठी आएगी तो वो भी भैंस को नचाएगा। वो कहता रहा कि फ़िलहाल वो कमजोर है लेकिन कभी तो मजबूत होगा। दिन होगा तो रात आएगी और रात है तो दिन आनी ही है। उसने तो यहाँ तक कहा कि अगर 50 साल बाद भी उसके हाथ में पावर आया तो वो बदला लेकर दिखा देगा।

राम मंदिर पर मुस्लिमों के रिएक्शन का वीडियो (साभार: The Rajdharma)

आज इस फैसले को आए 9 महीने हो गए हैं। अयोध्या में आगामी 5 अगस्त को राम मंदिर की आधारशिला रखी जानी है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या जाएँगे और भूमि पूजन के बाद राम मंदिर की पहली ईंट रखेंगे। भूमि पूजन के लिए बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत को भी आमंत्रण भेजा गया है। इस समारोह का दूरदर्शन द्वारा सीधा प्रसारण किया जाएगा।

अपनी भाषा में शिक्षा देते हैं दुनिया के शीर्ष 20 देश, अब मातृभाषा में पढ़ेंगे भारत के भी विद्यार्थी: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (अगस्त 1, 2020) को ‘ऑल इंडिया स्मार्ट हैकथॉन’ के ग्रैंड फिनाले को सम्बोधित किया। उन्होंने इसमें भागीदारी लेने वालों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये लोग देश के सामने जो चुनौतियाँ हैं, ये उनका समाधान तो देते ही हैं, साथ ही डेटा, डिजिटलाइजेशन और हाईटेक भविष्य को लेकर भारत की आकांक्षाओं को भी मज़बूत करते हैं। पीएम मोदी ने हैकथॉन में कहा कि सभी एक से बढ़ कर एक सोल्यूशन्स पर काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि बीती सदियों में भारत ने दुनिया को एक से बढ़कर एक बेहतरीन वैज्ञानिक, बेहतरीन तकनीक विशेषज्ञ और तकनीक आधारित उद्योगपति दिए हैं। उन्होंने चेताया कि ये 21वीं सदी है और तेजी से बदलती हुई दुनिया में, भारत को अपनी वही प्रभावी भूमिका निभाने के लिए उतनी ही तेजी से बदलना होगा। पीएम ने आश्वासन दिया कि अब देश में इनोवेशन, रिसर्च, डिजाइन, डेवलपमेंट और स्टार्टअप्स के लिए ज़रूरी माहौल तेजी से तैयार किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने हैकथॉन फिनाले में जानकारी दी कि ऑनलाइन एजुकेशन के लिए नए संसाधनों का निर्माण हो या फिर स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन जैसे ये अभियान, प्रयास यही है कि भारत की शिक्षा और आधुनिक व मॉडर्न बने, यहाँ की प्रतिभाओं को पूरा अवसर मिले। नई शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए पीएम ने कहा कि ये पॉलिसी, 21वीं सदी के नौजवानों की सोच, उनकी जरूरतें, उनकी आशाओं-अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को देखते हुए बनाई गई है।

पीएम मोदी ने हैकथॉन में शामिल युवाओं से कहा कि आज भी अनेक बच्चों को लगता है कि उनको एक ऐसे विषय के आधार पर जज किया जाता है, जिसमें उसकी रूचि ही नहीं है। माँ-बाप का, रिश्तेदारों का, दोस्तों का दबाव होता है तो वो दूसरों द्वारा चुने गए सबजेक्ट्स पढ़ने लगते हैं। बकौल मोदी, इस तरीके ने देश को एक बहुत बड़ी आबादी ऐसी दी है, जो पढ़ी-लिखी तो है, लेकिन जो उसने पढ़ा है, उसमें से अधिकांश उनके काम नहीं आता। डिग्रियों के अंबार के बाद भी वो अपने आप में एक अधूरापन महसूस करता है। उन्होंने कहा:

“नई एजूकेशन पॉलिसी के माध्यम से इसी अप्रोच को बदलने का प्रयास किया जा रहा है, पहले की कमियों को दूर किया जा रहा है। भारत की शिक्षा व्यवस्था में अब एक व्यवस्थागत रिफॉर्म, शिक्षा का इंटेंट और कंटेंट, दोनों को बदलने का प्रयास है। हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, हमारे देश के महान शिक्षाविद बाबा साहेब आंबेडकर कहते थे कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो सभी की पहुँच में हो, सभी के लिए सुलभ हो। ये शिक्षा नीति, उनके इस विचार को भी समर्पित है। ये शिक्षा नीति Job seekers की बजाय Job Creators बनाने पर बल देती है। ये हमारे माइंडसेट और अप्रोच में रिफॉर्म लाने का प्रयास है।“

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ध्यान दिलाया कि हमारे देश में भाषा हमेशा से एक संवेदनशील विषय रही है। इसकी एक बड़ी वजह ये है कि हमारे यहाँ स्थानीय भाषा को अपने हाल पर ही छोड़ दिया गया, उसे पनपने और आगे बढ़ने का मौका बहुत कम मिला। उन्होंने बताया कि अब एजुकेशन पॉलिसी में जो बदलाव लाए गए हैं, उससे भारत की भाषाएँ आगे बढ़ेंगी, उनका और विकास होगा। ये भारत के ज्ञान को तो बढ़ाएँगी ही, भारत की एकता को भी बढ़ाएँगी।

हैकथॉन को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने आशा जताई कि इससे विश्व का भी भारत की समृद्ध भाषाओं से परिचय होगा। और एक बहुत बड़ा लाभ ये होगा की विद्यार्थियों को अपने शुरुआती वर्षों में अपनी ही भाषा में सीखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि GDP के आधार पर विश्व के शीर्ष 20 देशों की लिस्ट देखें तो ज्यादातर देश अपनी गृहभाषा, मातृभाषा में ही शिक्षा देते हैं। ये देश अपने युवाओं की सोच और समझ को अपनी भाषा में विकसित करते हैं और दुनिया के साथ संवाद के लिए दूसरी भाषाओं पर भी बल देते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि एक ओर जहाँ स्थानीय लोक कलाओं और विद्याओं, शास्त्रीय कला और ज्ञान को स्वभाविक स्थान देने की बात है तो वहीं शीर्ष वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों को भारत में कैंपस खोलने का आमंत्रण भी है। उन्होंने याद किया कि किस तरह कोरोना के बीच फेस शील्ड्स की डिमांड को 3D प्रिंटिंग टेक्नॉलॉजी के साथ पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर देश के युवा आगे आए।

महाराष्ट्र: 2 महीने से नहीं मिली थी सैलरी, सरकारी कर्मचारी ने की आत्महत्या

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का विस्फोट जारी है। इसका असर अब लोगों पर भी पड़ने लगा है। महामारी के चलते सैलरी नहीं मिलने की वजह से बड़ी संख्या में लोग डिप्रेशन से ग्रस्त हो रहे हैं। राज्य परिवहन निगम के एक कर्मचारी ने पिछले दो महीनों की सैलरी नहीं मिलने के कारण आत्महत्या कर ली है।

इस्लामपुर पुलिस के अनुसार, अमोल माली एसटी के इस्लामपुर डिपो के मैकेनिक विभाग में काम कर रहा था। कोरोनोवायरस संक्रमण के कारण लगाए गए लॉकडाउन में एसटी यातायात कुछ हद तक बंद है। इस दौरान एसटी कर्मचारियों को उनका उचित वेतन नहीं मिला। वहीं काम के अनुसार वेतन नहीं मिलने के कारण अमोल काफी दिनों से परेशान था।

रिपोर्ट के अनुसार, 35 वर्षीय अमोल ढोंडीराम माली ने गुरुवार (30 जुलाई, 2020) की देर रात फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी। वह सांगली जिले के इस्लामपुर डिपो में काम करता था। पिछले 2 महीने से वेतन न मिलने के कारण वह काफी तनाव में था।

अमोल दिन-रात सिर्फ इसी चिंता में डूबा रहता था कि कैसे इस लॉकडाउन में अपने परिवार का पालन-पोषण करेगा। वह पिछले 2 महीने से मजदूरों की तरह काम कर रहा था। लेकिन सैलरी नहीं मिलने की वजह से वह दिनभर परेशान रहता था। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह अपनी माँ, पत्नी, पाँच साल का बेटा और तीन साल की बेटी का भरण-पोषण न कर पाने की वजह से हताश हो चुका था। इसी कारण आखिरकार उसने आत्महत्या कर ली।

इससे पहले यह खबर आई थी कि न केवल महाराष्ट्र सरकार के कर्मचारी, डॉक्टरों और नर्सों का वेतन भी महाविकास अघाड़ी सरकार द्वारा काफी देर से दिया गया था। इस वजह से कई डॉक्टर और नर्स वापस अपने घर केरल चले गए थे। उन्होंने यह आरोप लगाया था कि बीएमसी द्वारा लगातार उनकी सैलरी समय पर नहीं दी जा रही।

गौरतलब है कि, कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन की वजह से राज्य को आर्थिक रूप से काफी नुकसान हुआ है। इस वक्त राज्य के एक बड़े वर्ग को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। लेकिन इसी दौर में जहाँ एक तरफ महाराष्ट्र सरकार अपने कर्मचारियों को सैलरी नहीं दे पा रही है और स्वास्थ्य देखभाल संसाधनों के लिए अन्य राज्यों से अनुरोध कर रही है, वहीं ऐसे गंभीर हालातों में राज्य सरकार ने हाल ही में अपने मंत्रियों के लिए 6 नए लक्जरी वाहनों की खरीद की इजाजत दी थी।

उल्लेखनीय है कि उद्धव ठाकरे सरकार ने यह मँजूरी ऐसे समय में दी है, जब राज्य कोरोना वायरस महामारी के चलते हुए लॉकडाउन की वजह से आर्थिक संकट से जूझ रहा है।

राज्य सरकार ने लोअर परेल मुंबई, मधुबन मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड से 22,83,086 रुपए की इनोवा क्रिस्टा 2.4 ZX (7 सीट) की खरीद के लिए अपनी मँजूरी दी थी। यह बात ध्यान देने लायक है की सरकार ने खरीद की सीमा 20 लाख रुपए रखी थी,। जो इस माड़ में निर्धारित राशि से ज्यादा थी। इसके बाद नई गाड़ी के लिए वित्त विभाग की राज्य स्तरीय वाहन समीक्षा समिति और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विशेष रूप से इसकी मँजूरी दी थी।

पूर्व सपा नेता अमर सिंह का निधन: मणिशंकर अय्यर को पटक के पीटा था, लगाया था नाम में चौकीदार

समाजवादी पार्टी के पूर्व दिग्गज नेता रहे अमर सिंह का निधन हो गया है। वो लम्बे समय से किडनी से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित थे। अमर सिंह समय-समय पर अम्बानी, बच्चन और मुलायम परिवार के बेहद करीबी रहे हैं। उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव से पहले अपने नाम में न सिर्फ़ चौकीदार लगा लिया था बल्कि अपना जीवन नरेंद्र मोदी को समर्पित करने की भी बात कही है। उनके निधन के बाद कई नेताओं ने दुःख जताया।

अमर सिंह विभिन्न वजहों से कई बार विवादों में भी रहे। एक बार उन्होंने एक वाकया सुनाया था कि कैसे उन्होंने 1999 में कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की पिटाई की थी। मणिशंकर अय्यर ने उन्हें अवसरवादी कहा था और शराब के नशे में कुछ भी बकने का आरोप लगाया था। जब अय्यर ने उन्हें माँ की गाली दी और मुलायम को भी गाली दी तो उन्होंने वहीं पटक कर अय्यर की पिटाई कर दी।

64 वर्षीय राज्यसभा सांसद अमर सिंह का निधन सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान हुआ। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने ईद की शुभकामनाएँ भी दी थीं और साथ ही बाल गंगाधर तिलक की 100वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया था। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निधन पर दुःख जताते हुए कहा कि स्वभाव से विनोदी अमर सिंह की सार्वजनिक जीवन के दौरान सभी दलों में मित्रता थी।

आपने गोली चलवा कर हज़ारों कारसेवकों को क्यों नहीं मरवाया?: NDTV चाहता था बिछ जाए रामभक्तों की लाश

दिसंबर 1992 में उत्तर प्रदेश में विवादित ढॉंचे का ध्वंस के बाद कल्याण सिंह को अपनी सरकार गँवानी पड़ी थी। भले ही उनकी सरकार चली गई और बाद में कुछ कारणों से वे भाजपा से सस्पेंड भी किए गए, लेकिन राम मंदिर पर उनका स्टैंड ज्यों का त्यों रहा। एनडीटीवी के विजय त्रिवेदी को दिसंबर 2009 में दिए गए इंटरव्यू में भी ये साफ़ झलकता है। यही वो इंटरव्यू है, जिससे पता चलता है कि किस कदर एनडीटीवी रामभक्तों की लाशों पर ठहाके लगाना चाहता था।

बुधवार (अगस्त 5, 2020) को राम जन्मभूमि अयोध्या में बनने वाले भव्य राम मंदिर का भूमिपूजन कार्यक्रम है। इसमें कल्याण सिंह भी मौजूद रहेंगे। कल्याण सिंह का रुख आज भी वही है, लेकिन एनडीटीवी भी नहीं बदला है। कल को विजय त्रिवेदी रामभक्तों की लाश देखना चाहते थे, अब रवीश कुमार राम मंदिर से खार खाए बैठे हैं। आइए, आपको बताते हैं कि क्या था उस इंटरव्यू में।

दरअसल, विजय त्रिवेदी इस बात पर कल्याण सिंह को घेरने में लगे हुए थे कि आखिर ढाँचा गिरने के बाद उन्होंने उन अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की, जिनके रहते ये सब हुए। आखिर पुलिस अधिकारियों ने गोली चलाने का निर्देश क्यों नहीं दिया? त्रिवेदी के शब्दों का अर्थ ये था कि रामभक्तों पर गोली चला कर उनका कत्लेआम क्यों नहीं मचाया गया, वो भी एक विवादित ढाँचे को बचाने के लिए।

इस पर कल्याण सिंह ने उन्हें ये बता कर सन्न कर दिया कि उन्होंने ही अधिकारियों को सख्त आदेश दिए थे कि वहाँ जुटे लोगों पर गोली न चलाई जाए, जिसका उन्होंने पालन किया। सारा दोष अपने ऊपर लेते हुए कल्याण सिंह ने अधिकारियों को पाक-साफ़ बताया। इसके बाद एनडीटीवी के विजय त्रिवेदी ने उन्हें जो सलाह दी, वो न सिर्फ़ चैनल की हिन्दूघृणा की सोच को दर्शाता है, बल्कि राम मंदिर के प्रति उसकी घृणा को भी दिखाता है।

तब एनडीटीवी के विजय त्रिवेदी ने उन्हें कहा कि आखिर कल्याण सिंह ने गोली न चलवा कर हजारों लोगों के मारे जाने के बदले करोड़ों लोगों को बाँटने का फैसला कैसे ले लिया? यानी, एनडीटीवी अपनी एक धारणा के बदले हज़ारों रामभक्तों की लाश चाहता था। त्रिवेदी ने ये धारणा बना ली थी थी ‘लोग बँट गए’। बस इसके लिए हज़ारों श्रद्धालुओं की लाशें बिछा दी जाएँ, ऐसा उनका सोचना था।

एनडीटीवी के इस इंटरव्यू में विजय त्रिवेदी बार-बार इसी बात पर कल्याण सिंह को घेरने की कोशिश करते हुए नज़र आए कि आखिर उन्होंने कारसेवकों पर गोली क्यों नहीं चलवाई? हज़ारो लोगों के मरने’ की बात वो इतनी आसानी से कह रहे थे, जैसे कि वो सभी आतंकवादी हों। जबकि वे सभी आमजन थे। यही एनडीटीवी आतंकियों और नक्सलियों को Whitewash करता रहता है।

हालाँकि, सुरक्षा के इंतजाम न रहने के आरोपों और खुद के मजबूत मुख्यमंत्री की छवि पर उठे सवालों का जवाब में उदाहरण गिनाते हुए कल्याण सिंह ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति की सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम थे लेकिन घटना घटित हो गई। इंदिरा गाँधी की सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम थे लेकिन घटना घटित हो गई। राजीव गाँधी की सुरक्षा के पक्के इंतज़ाम थे लेकिन घटना घटित हो गई। उन्होंने इसे राष्ट्रीय गर्व का दिन भी करार दिया।

बता दें कि 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढाँचा गिराए जाने के 10 दिन बाद गृह मंत्रालय ने लिब्राहन आयोग का गठन किया था। इस आयोग को ज़िम्मेदारी सौंपी गई कि बाबरी मस्जिद विध्वंस में शामिल लोगों का नाम सामने आए। इस आयोग ने लगभग 17 साल बाद अपनी रिपोर्ट पेश की जिसमें कल्याण सिंह को अहम किरदार बताया था। कोर्ट की सुनवाई इस मामले में अभी तक चल रही है।

राजस्थान के राज्यपाल के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करने के तुरंत बाद भी उन्होंने कहा था कि अयोध्या करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्रबिंदु है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होता है तो इससे करोड़ों भारतीयों की इच्छा पूरी होगी। दोबारा बीजेपी का सदस्य बनने के बाद उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को राम मंदिर मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा था। अब वे 5 अगस्त को भव्य राम मंदिर भूमि पूजन के साक्षी बनेंगे।

बकरीद के लिए घर लौट रहे पश्तून मजदूरों पर पाकिस्तान ने किया हमला, कई की मौत

अफगानिस्तान सीमा पर बलूचिस्तान स्थित चमन सीमा (Chaman Border) चौकी पर पाकिस्तानी रेंजर्स की गोलीबारी में करीब 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से ज्यादा लोग घायल हो गए।

घटना बृहस्पतिवार (जुलाई 30, 2020) को तब घटी जब चमन-स्पिन बोल्डक सीमा पार से लगभग 150 लोग पाकिस्तानी सीमा पर एकत्र हुए। उनमें से कई ईद के लिए अफगानिस्तान में प्रियजनों से मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन सीमा को बंद कर दिया गया था।

अफगान अधिकारियों ने शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) को कहा कि पाकिस्तान ने अपनी दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर रॉकेटों से गोलाबारी की, जिसमें कई लोगों की जानें गई हैं और 80 से अधिक लोग घायल हो गए। पाकिस्तान ने कहा कि अफगान सीमा रक्षकों ने पहले गोलीबारी की और इस हमले के लिए उन्हें दोषी ठहराया है।

बृहस्पतिवार को भारी संख्या में लोग यहाँ फ्रेंडशिप गेट पर धरने पर बैठ गए और सीमा चौकी को खोलने की माँग करने लगे। इस पर वहाँ मौजूद पाकिस्तान के कर्मचारियों ने कहा कि जब तक प्रदर्शनकारी इस जगह से नहीं चले जाते, गेट नहीं खोला जाएगा। इस बात पर प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए और वे फ्रेंडशिप गेट पर फ्रंटियर कोर और अन्य सरकारी एजेंसियों के कार्यालयों पर हमला करने लगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसकी प्रतिक्रिया में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं।

सीमा पर तनाव बढ़ने के कारण अफगानिस्तान ने अपनी आर्मी और एयरफोर्स को भी हाई अलर्ट पर कर दिया है। जुलाई माह की शुरुआत में ही, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी कुनार प्रांत में रॉकेट दागे, जिसमें तीन लोग मारे गए थे।

पाकिस्तान 1893 में औपनिवेशिक काल के विभाजन को ही अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि अफगानिस्तान ने कभी सीमा को मान्यता नहीं दी है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों ही एक-दूसरे पर अपने दुश्मनों को शरण देने का आरोप लगाते आए हैं। पाकिस्तान का कहना है कि उसे आतंकवादियों को पार करने से रोकने के लिए बाड़ की आवश्यकता है।

पाकिस्तान का कहना है कि पाकिस्तानी विद्रोही, जैसे कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, जिसने जून में कथित तौर पर दक्षिणी बंदरगाह शहर कराची में स्टॉक एक्सचेंज बिल्डिंग पर हमला किया था, अफगानिस्तान के दक्षिणी कंधार प्रांत में छिपे हुए हैं।

ज्ञात हो कि चमन सीमा चौकी को मार्च से ही कोरोना वायरस महामारी के चलते बंद था। बकरीद को लेकर गत बुधवार को इसे खोला गया था, ताकि दोनों तरफ के लोग अपने मूल स्थानों पर जा सकें।

पाकिस्तान में रहने वाले कई पश्तून, अफगानिस्तान में मजदूरों के रूप में काम करते हैं, काम के लिए सीमा पार करते हैं और रात में घर लौटते हैं।

सोशल मीडिया पर इस हमले की भयानक तस्वीरें शेयर की जा रही हैं और मरने वालों की संख्या के अलग-अलग दावे भी किए जा रहे हैं। तस्वीरों में हताहतों के बीच छोटे मासूम बच्चे भी देखे जा सकते हैं। लोगों ने इन तस्वीरों की तुलना सीरियाई बच्चे एलेन कुर्दी से की है।

14000 फीट की ऊँचाई, LOC से सटे 3 गाँव: आजादी के 73 साल बाद बिजली से होंगे रौशन

साल के 6 महीने भारी बर्फबारी के कारण देश से कटे रहने वाले कश्मीर के तीन गाँवों को आजादी के 73 साल बाद अब बिजली मिल सकी है। पाकिस्तानी गोलाबारी के कारण साल के कई मौकों पर तनाव के साए में रहने वाले इन गाँवों में अब उम्मीद का बल्ब जलने को तैयार है।

14000 फीट की ऊँचाई पर रहने वाले इस इलाके में अब तक लोग सोलर पावर या जेनसेट्स के जरिए बिजली की व्यवस्था कर पाते थे, लेकिन अब यहाँ इलेक्ट्रिफिकेशन होने के साथ ही पावर सप्लाई का रास्ता सुनिश्चित हो सका है।

बिजली पहुँचने से रौशन हुए ये गाँव उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में स्थित हैं। नियंत्रण रेखा के संवेदनशील हिस्से में आने वाले गाँव केरन, मुंदियाँ और पतरू गाँव में एक 33केवी के पावर स्टेशन से बिजली पहुँचाई गई है।

दो साल में पूरा हुए इस प्रोजेक्ट को कश्मीर पावर डिस्ट्रिब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने पूरा किया है। केरन के जिस गाँव में बिजली पहुँचाई गई है, वह नियंत्रण रेखा से महज 500 मीटर की दूरी पर है। इस प्रोजेक्ट में 979 यूटिलिटी पोल लगाए गए हैं।

केपीडीसीएल के एमडी मोहम्मद एजाज असद ने कहा कि प्रोजेक्ट को लॉकडाउन के कारण तेजी से पूरा किया जा सका है। एजाज असद ने कहा कि ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में तमाम भौगोलिक मुश्किलें भी आईं।

इसके बावजूद तमाम पर्वतीय क्षेत्रों में हाइटेंशन तार और यूटिलिटी पोल्स लगाए गए। एजाज असद ने कहा कि चूँकि ये सारा प्रोजेक्ट डिफेंस लैंड पर पूरा किया जाना था, ऐसे में तमाम विभागीय अप्रूवल लेने के बाद ही प्रोजेक्ट को पूरा किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि इस इलाके में अब तक सोलर पावर या डीजल इंजन के जरिए बिजली पहुँचती थी। अब इस हिस्से में इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा करने के बाद काम आसान हो गया है। इस इलाके के किसानों का कहना है कि कश्मीर के हिस्से में 24 घंटे बिजली का सपना अब भी हकीकत से बहुत दूर है। हालाँकि इसकी उम्मीद की जा सकती है कि बिजली पहुँचने से इस इलाके में रोजगार और संभावनाओं के रास्ते खुलेंगे।

गौरतलब है कि इससे पहले केंद्र सरकार की ‘सौभाग्य योजना’ के तहत दक्षिण कश्मीर के शोपियाँ जिले के केल्लर (Kellar) क्षेत्र के कई दूरदराज के गाँवों में आजादी के लगभग सत्तर साल बाद बिजली पहुँची थी। इसके लिए क्षेत्र में पाँच ट्रांसफार्मर लगाए गए और महज सात दिनों के भीतर चालू कर दिए गए, जिसके बाद इलाके में बिजली पहुँच गई।

इलाके में पहली बार बिजली पहुँचने पर सहायक कार्यकारी अभियंता, बिजली विकास विभाग (पीडीडी) फारूक अहमद ने कहा था, “केल्लर, शोपियाँ के ये सुदूर इलाके सदियों से ही गैर-विद्युतीकृत गाँव थे और केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित ‘सौभाग्‍य योजना’ के तहत हमने पाँच ट्रांसफार्मर बनाए थे। बाद में ये सात दिनों के भीतर चालू कर दिए और केलरी शोपियाँ के इन गाँवों में बिजली की आपूर्ति की गई।”

बकरीद हिंदुओं का त्योहार होता तो कैसा होता लिबरल मीडिया और सेलेब्स का रिएक्शन: 10 तस्वीरों से समझें

शनिवार (अगस्त 1, 2020) को बकरीद का मनाया जा रहा है और दुनिया भर में मजहब विशेष के लोग इस दिन लाखों जानवरों को काटने में मशगूल हैं। ये पहली बार नहीं हो रहा। बकरीद पर हमेशा ऐसा ही होता आ रहा है जब लाखों निर्दोष जानवरों की जान जाती है। PETA समेत तमाम पशु अधिकार संगठन तब अपनी आँख मूँदे रहते हैं और चूँ तक नहीं करते। लेकिन, बकरीद अगर हिन्दुओं का त्योहार होता तब?

इस देश में हिन्दुओं को हर चीज के लिए जिम्मेदार ठहराने और उन्हें फालतू ज्ञान देने वालों की भीड़ लगी हुई है। भले ही अधिकतर हिन्दू शाकाहार का पालन करते हों, जानवरों को न मारने का ज्ञान उन्हें ही दिया जाएगा। भले ही उनके त्योहारों में हिंसा वर्जित हो, अहिंसा का पाठ उन्हें ही पढ़ाया जाएगा। भले ही आठ-आठ बच्चे किसी और मजहब के लोग पैदा कर रहे हों, लेकिन ठीकरा हिन्दुओं पर ही फोड़ा जाएगा।

होली पर हिन्दुओं को पानी बचाने की सलाह दी जाती है। महाशिवरात्रि पर कहा जाता है कि शिवलिंग पर दूध मत चढ़ाओ। गणेश चतुर्थी के दौरान जल प्रदूषण पर बात किया जाता है। दीवाली पर पटाखे न फोड़ने की सलाह दी जाती है। होली पर तो सीमेन भरे बैलून तक की अफवाह फैलाई गई और हिन्दुओं को बदनाम किया गया। लेकिन, इस्लामी त्योहारों के दौरान लाख गलतियाँ हों लेकिन इन सेलेब्रिटीज की घिग्घी बँध जाती है।

उस दिन ये सेलेब्रिटीज लोगों को बधाइयाँ देते हैं, सोशल मीडिया पर खुशियाँ मनाते हैं, लेकिन, सोचिए कि अगर बकरीद कोई हिन्दू त्योहार होता तब क्या होता? क्या तब जीवहत्या के ठेकेदार कुकुरमुत्ते की तरह पैदा होकर हिन्दुओं को गाली नहीं दे रहे होते? क्या तब सारे एनजीओ, पत्रकार, सेक्युलर-लिबरल गैंग और सेलेब्स का समूह हिन्दुओं की आलोचना में नहीं लगा रहता? इन 10 चित्रों में समझिए अगर बकरीद हिन्दू त्योहार होता तो क्या होता?

अगर बकरीद हिन्दुओं का त्योहार होता तो प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट में जीवहत्या के खिलाफ याचिका डालते और आधी रात को सुनवाई भी हो रही होती:

गणेश जी की मूर्ति के साथ कोई कोटेशन लगा कर ज्ञान बाँटा जा रहा होता:

पश्चिम बंगाल में तो सरकार जीवहत्या पर त्वरित प्रतिबन्ध लगा देती:

स्वरा भास्कर को हिन्दू और हिंदुस्तानी होने में शर्म आ रही होती:

असदुद्दीन ओवैसी बरखा दत्त को बयान दे रहे होते कि अगर जीवहत्या हिन्दुओं के धर्म का हिस्सा है तो उन्हें नया धर्म अपना लेना चाहिए:

‘द प्रिंट’ में एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय का बयान आता कि जीवहत्या के अलावा भी बकरीद में कई बुराइयाँ हैं और ये पुरुष-प्रधान त्योहार है:

कॉमेडियन कुणाल कामरा हिन्दुओं को अत्याचारी और क्रूर बताते भारत का नक्शा शेयर कर बताता कि बकरीद के दौरान कितना खून बहता है:

‘स्क्रॉल’ ओपिनियन लिख कर हिन्दुओं को ज्ञान दे रहा होता:


मजहबी मुल्कों का समूह बकरीद की आलोचना कर रहा होता:

इतिहासकार रामचंद्र गुहा पाकिस्तान की तारीफ करते हुए हिन्दुओं की आलोचना कर रहे होते:

नोट: सभी को ईद की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। ये लेख इसीलिए है ताकि पता चले कि जो लिबरल लोग हिन्दुओं को ज्ञान देते रहते हैं वो कितने दोहरे रवैये वाले हैं और उनकी सारी आलोचना और गालियाँ एक ही समुदाय के लिए हैं, जिसे वो बार-बार निशाना बनाते रहते हैं। मेरा किसी को भी ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं है। ये लेख ‘लिबरल’ ब्रीड के लिए है।

भक्त बनकर आए आतंकी, रामलला से मात्र 50 मीटर की दूरी पर मचाई तबाही: 5 अगस्त से पहले 5 जुलाई की दास्ताँ

राम जन्मभूमि अयोध्या में अब एक भव्य मंदिर बनने जा रहा है। इसकी नींव बुधवार (अगस्त 5, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमिपूजन के साथ रखी जाएगी। इसी बीच इस्लामी कट्टरपंथी आतंकियों द्वारा अयोध्या में हमले की साजिश रचने की भी ख़ुफिया सूचना आई है। इसे देखते हुए कई राज्यों को अलर्ट कर दिया गया। क्या आपको याद है कि 5 जुलाई 2005 को भगवान राम की नगरी में आतंकियों ने कत्लेआम मचाया था?

जैसा कि हमने कई बार देखा है, कपटवेश में आकर अपने खूनी इरादों को अंजाम देना आतंकियों की पुरानी चाल रही है। कभी वो सेना की वर्दी में आते हैं तो कभी आम नागरिक बन कर छलावा देते हैं। इन आतंकियों ने अयोध्या में भी उस दिन यही किया था। उन्होंने श्रद्धालुओं की वेशभूषा में वहाँ पहुँचने में कामयाबी पाई थी। वो रजिस्ट्रेशन वाली एक जीप में बैठ कर आए थे, जिसमें लगा झंडा किसी राजनीतिक दल का प्रतीत होता था।

सुरक्षा के नाम पर वहाँ लोहे की फेंसिंग भर की हुई थी। चूँकि धर्मस्थानों में पहले और जल्दी दर्शन के लिए श्रद्धालु उतावले रहते हैं, इसीलिए पहली नज़र में सभी को यही लगा कि ये श्रद्धालुओं की ही गाड़ी है जो थोड़ी जल्दी में हैं। लेकिन, इससे पहले कि महिंद्रा मार्शल जीप में बैठे आतंकियों को रोका जाता, वो उससे उतर गए। बम से लैस उस जीप को राख होने में पल भर का भी समय नहीं लगा। चारों और अफरातफरी मच गई।

पाँच आतंकियों ने इसके बाद हमले की पोजीशन बना कर सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड फेंकना शुरू कर दिया। साथ ही वो एके-47 से लगातार फायरिंग भी कर रहे थे। लगभग डेढ़ घंटे तक फायरिंग चलते रही और उसके बाद पाँचों आतंकी मार गिराए गए। लेकिन, उससे पहले उन्होंने तबाही का मंजर दिखाते हुए वो डर पैदा किया, जिसने जनता को एहसास दिलाया कि अब भारत में शायद ही कोई जगह सुरक्षित हो।

ये जुलाई 5, 2005 की सुबह थी, जिसने पूरे भारत में भय का माहौल पैदा कर दिया था। आतंकियों ने सोच-समझ कर अयोध्या को निशाना बनाया था, क्योंकि उन्हें पता था कि ये वो जगह है, जहाँ से दुनिया भर के हिंदुओं की आस्था तो जुड़ी ही हुई है, साथ ही यहाँ एक पत्ता भी खड़के तो ये पूरे देश मे बड़ी ख़बर बनती है। शायद ये हमला एक चेतावनी था, इससे भी बड़ी आतंकी कार्रवाई का।

यही बात तब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कही थी। दूरदर्शी नेता ने कहा था कि आयोध्या हमला एक चेतावनी है, इसीलिए सरकार को सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखनी चाहिए। तब नए प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा था कि आतंकवाद पर सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। मनमोहन को यही राग पुणे, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और गया मे होने वाले आतंकी हमलों में भी अलापना था।

तब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे 1990 में कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले मुलायम सिंह यादव, जिन्होंने तो सुरक्षा-व्यवस्था में चूक की सारी बातें ही नकार दी थी। भाजपा नेता जसवंत सिंह ने इसे स्पष्ट रूप से सुरक्षा-व्यवस्था में चूक का मामला मानते हुए उनके इस्तीफे की माँग की थी। ये हमला तब टेंट मे विराजमान रामलला के 50 मीटर की दूरी पर ही हुआ था। सारे आतंकी युवा थे। आखिर वो वहाँ घुस कैसे गए? तब रामलला की सुरक्षा-व्यवस्था की बात करें तो 1400 की संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान गश्त लगाते रहते थे।

13 वाच टॉवर्स को 2 टायर सिक्योरिटी के हिसाब से बनाया गया था। ‘इंडिया टुडे’ की खबर की मानें तो अयोध्या में सुरक्षा-व्यवस्था देखने में ऐसी ही लगती थी, जैसी किसी विमान में चढ़ते समय एयरपोर्ट्स पर होती है। मुलायम सिंह के शब्दों में तो वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता था, लेकिन इतनी सुरक्षा के बावजूद RDX लदी जीप के साथ हथियारबंद आतंकी मंदिर परिसर में घुसने में कामयाब हो गए थे।

2 स्थानीय लोगों की जान चली गई थी और सीआरपीएफ के 7 जवान घायल हो गए थे। 2005 में प्रयागराज की एक स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में 4 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही उन सभी पर 2.4 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। दोषी आतंकियों में डॉक्टर इरफ़ान, शकील अहमद, आसिफ इकबाल और मोहम्मद नसीम शामिल थे। वहीं मोहम्मद अजीज के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला, वो बच निकला।

इस मामले में उस जीप के ड्राइवर को भी गिरफ्तार किया गया था, जिसने उन आतंकियों को मंदिर तक पहुँचाया था। ड्राइवर रेहान आलम कुछ दूर पहले ही जीप से उतर गया था। उसने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि आतंकियों ने कहा था कि वो श्रद्धालु हैं और रामलला के दर्शन करना चाहते हैं। दरअसल, वहाँ आतंकी दो गाड़ियों से पहुँचे थे, जिनमें से एक में आत्मघाती हमलावर सवार था। उसने ही गाड़ी को ब्लास्ट किया था।

इस मामले में स्पेशल कोर्ट को फैसला सुनाने में 14 साल लग गए थे। कुल 371 सुनवाइयों के दौरान 63 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, तब जाकर इस मामले में सज़ा मिली। जहाँ इरफ़ान यूपी के ही सहारनपुर का था, बाकी आरोपित जम्मू-कश्मीर के पूँछ के रहने वाले थे। इनके तार खूँखार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। आज जब राम मंदिर का सपना साकार होने जा रहा है, हमें इस घटना को याद करने की ज़रूरत है।