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‘धर्म विशेष से डर के कारण यह मकान बिकाऊ है’: दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाकों में हिंदुओं के घरों पर पोस्टर

ऑपइंडिया ने अपनी हालिया रिपोर्टों में बताया था कि इस साल फरवरी में किस तरह उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों को अंजाम दिया गया था। अब समुदाय विशेष के डर की वजह से प्रभावित इलाके के हिंदू अपना घर बेचकर जाने को मजबूर हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मोहनपुरी, मौजपुर और नूर-ए-इलाही इलाके में रहने वाले हिंदुओं ने घरों पर ‘धर्म विशेष से डर के कारण यह मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर लगाए हैं। ये इलाके बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र में पड़ते हैं। यहाँ से दिल्ली की आप सरकार के मंत्री गोपाल राय विधायक हैं।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी इस संबंध में ट्वीट किया है। उन्होंने शुक्रवार (31 जुलाई 2020) को प्रभावित इलाकों का दौरा भी किया।

तिवारी ने बताया है कि अपने संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले मोहनपुरी और मौजपुरी का दौरा करने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा है। इसमें इलाके में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।

पत्र में तिवारी ने दिल्ली सरकार पर हिंदुओं के साथ भेदभाव का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा है कि दौरा करने के दौरान पता चला कि कुछ हिस्सों में सुरक्षा के लिए लोगों को अपने पैसे से गेट लगवाने पड़े हैं, जबकि बगल के इलाकों में दिल्ली सरकार ने करदाताओं के पैसे से गेट लगाए हैं। साथ ही कहा है कि इस इलाके में एक खास समुदाय का प्रभाव है। पीड़ितों ने बताया कि स्थानीय विधायक और मंत्री ने आज तक न तो उनकी सुध ली है और न उन्हें अब तक मुआवजा मिला है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि दिल्ली सरकार एक ही समुदाय के लोगों को कानूनी मदद मुहैया करा रही है। उन्होंने केजरीवाल से इस भेदभाव की वजह पूछी है। तिवारी ने पूछा है कि हिंसा में सभी पीड़ित हुए हैं तो फिर मुआवजे के नाम पर दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है? सरकार चेहरा और नाम पूछकर भेदभाव क्यों कर रही है?

रिपोर्टों के अनुसार विशेष समुदाय की धमकियों से हिंदू परिवार परेशान हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार समुदाय विशेष के कुछ लोग रात में उनके घरों का दरवाजा खटखटाते हैं। धमकियाँ देते हैं।

गौरतलब है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को हिंदू विरोधी दंगों की शुरुआत हुई थी। हालॉंकि इसकी पूरी योजना जनवरी में ही तैयार हो गई थी। 23 फरवरी को जाफराबाद में हिंसा की पहली घटना हुई और इसके अगले दिन सुनियोजित तरीके से दंगे भड़के थे।

इन दंगों पर ऑपइंडिया की विस्तृत रिपोर्ट अब अमेज़न के किंडल पर उपलब्ध है। इसमें दंगों में जान-माल की भारी क्षति और हिन्दुओं को किस तरह निशाना बनाया गया, उसका पूरा विवरण है।

हालाँकि, लिबरल गैंग द्वारा पूरा प्रयास किया गया था कि इन दंगों के लिए हिन्दुओं को अपराधी दिखा कर पेश किया जाए, असली इस्लामी कट्टरवादी दंगाइयों को बचाया जाए और कट्टरपंथियों को पीड़ित घोषित किया जाए। लेकिन, पुलिस की चार्जशीट और ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट्स ने सच्चाई सामने ला दी।

कॉन्ग्रेस की इशरत जहाँ को HC से नहीं मिली राहत, ‘अरब मुस्लिमों’ की धमकी देने वाले इस्लाम खान को अग्रिम जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने आज (जुलाई 31, 2020) दिल्ली हिंसा मामले की आरोपित व UAPA के तहत गिरफ्तार कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ की याचिका पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। उन्होंने अपनी याचिका में निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जाँच के लिए 60 दिन का अतिरिक्त समय दिया था।

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने कहा कि निचली अदालत के आदेश में कुछ भी अवैध नहीं है। उच्च न्यायालय ने कहा, “मौजूदा याचिका में कोई दम नहीं है इसलिए इसे खारिज किया जाता है।”

गौरतलब है कि दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के बाद इशरत जहां को 26 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें मामले में जाँच पूरी करने के लिए 90 दिनों की अवधि के अतिरिक्त 2 और महीने का वक्त पुलिस को दिया गया था।

15 जून के आदेश को चुनौती देने वाली जहां की याचिका पर 20 जुलाई को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस बीच इस याचिका पर दिल्ली पुलिस ने भी अपना विरोध दर्ज कराया था। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जहाँ तक मामले में जाँच की अवधि बढ़ाने के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के फैसले का संबंध है तो उच्च न्यायालय को मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

बता दें, एक ओर आज जहाँ कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहां को हाईकोर्ट से आज झटका मिला है, वहीं देशद्रोह मामले में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व प्रमुख जफरुल इस्लाम खान को अग्रिम जमानत मिली है।

न्यायाधीश मनोज कुमार ओहरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए इस्लाम के मामले पर सुनवाई करते हुए 72 वर्षीय खान को राहत दी। कोर्ट ने अपना फैसला अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर के माध्यम से दायर खान की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया। इस याचिका में अनुरोध किया गया था कि उनकी उम्र, स्वास्थ्य जोखिमों और कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए उन्हें राजद्रोह मामले में अग्रिम जमानत दी जाए। पुलिस ने भी इस दौरान यही कहा कि मामले में आगे की जाँच के लिए उनकी जरूरत नहीं है।

उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट डालते के कारण जफरुल इस्लाम खान विवादों में आए थे। 28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के मुस्लिमों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के मुस्लिमों एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

ज़ालिम! दिल की बात जुबान पर आ ही गई: राम मंदिर के स्वागत से भड़के ओवैसी

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का स्वागत करते हुए एक वीडियो ट्वीट किया। इससे नाराज हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने उन पर तंज कसते हुए कहा, “ज़ालिम! दिल की बात जुबान पर आ ही गई।”

AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “आपको (कमलनाथ) यहीं नहीं रूकना चाहिए। मेरा सुझाव है कि अयोध्‍या में मंदिर निर्माण के लिए कॉन्ग्रेस के हर ऑफिस से मिट्टी जानी चाहिए।”

दरअसल, कमलनाथ ने राम मंदिर निर्माण को लेकर एक ट्वीट करते हुए कहा था कि, “मैं अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का स्वागत करता हूँ। देशवासियों को इसकी बहुत दिनों से अपेक्षा और आकांक्षा थी। राम मंदिर का निर्माण हर भारतवासी की सहमति से हो रहा है, ये सिर्फ़ भारत में ही संभव है।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी असदुद्दीन ओवैसी ने राम मंदिर भूमि पूजन को लेकर ज़हर उगला था। उन्होंने भूमि पूजन में पीएम मोदी के शामिल होने का विरोध करते हुए कहा था कि उनका ऐसा करना उनकी उस शपथ का उल्लंघन होगा, जो उन्होंने प्रधानमंत्री पद ग्रहण करते हुए ली थी।

ओवैसी ने दावा किया था कि सेकुलरिज्म हमारे संविधान की सबसे मूल संरचना है। वो कभी नहीं भूलेंगे कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद 400 वर्षों तक खड़ा रहा था। इसके साथ ही उन्होंने 1992 बाबरी मस्जिद ध्वस्त करने वालों को भी ‘आपराधिक भीड़’ करार करते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद एक मस्जिद था और हमेशा मस्जिद ही रहेगा।

उल्लेखनीय है कि कमलनाथ का राम मंदिर का समर्थन करना इस्लामी कट्टरपंथियों को बेहद नागवार गुजरा है। कई यूज़र्स ने तो उन्हें चुनाव के समय इसका अंजाम भुगतने की धमकी तक दे डाली। एक मुस्लिम यूजर ने यह भी लिखा कि यह सभी भारतीयों की सहमति से नहीं बना है।

बता दें 5 अगस्त को अयोध्या में होने वाले श्रीराम मंदिर भूमिपूजन को लेकर मुस्लिम समुदाय के कई दिग्गज नेता से लेकर अन्य लोग भी अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस को घसीटते हुए कहा था कि बाबरी विध्वंस में कॉन्ग्रेस का भी हाथ था। उन्होंने कहा कि मस्जिद के विध्वंस में संघ के साथ कॉन्ग्रेस भी मिली हुई थी।

‘हॉं हम हिंदू हैं, हिंदुस्तान हमारा है’: राम मंदिर आंदोलन की एक साध्वी जिसे तोड़ नहीं पाई दिग्विजय की पुलिस

माँ-बाप ने नाम रखा निशा। लेकिन राम नाम की उसने ऐसी अलख जगाई कि दुनिया ने उसे साध्वी ऋतम्भरा के नाम से जाना। भक्तों की दीदी मॉं साध्वी ऋतम्भरा राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख किरदारों में से एक हैं।

ये साध्वी ऋतम्भरा ही थीं, जिन्होंने कहा, “हॉं हम हिंदू हैं, हिंदुस्तान हमारा है।” जिनमें खुलकर यह कहने का साहस था, “महाकाल बनकर दुश्मन से टकराएँगे, जहॉं बनी है मस्जिद, मंदिर वहीं बनाएँगे।”

साध्वी ऋतम्भरा का वह ओजस्वी भाषण आप नीचे सुन सकते हैं;

राम जन्मभूमि को वापस पाने का साध्वी ऋतंभरा का संघर्ष आसान नहीं था। उन्हें नीचा दिखाने की तमाम कोशिशें तत्कालीन सरकारों ने की थी। मुस्लिम तुष्टिकरण की मसीहा इन सरकारों ने इस तरह का माहौल बनाया गया जैसे वह साध्वी न होकर कोई आतंकी हों।

ऐसे ही एक वाकये का जिक्र करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने एक इंटरव्यू में बताया था, “एक बार दिग्विजय सिंह की सरकार ने मुझे गिरफ्तार कर बीच रास्ते में ही उतार दिया। रात का समय था। पैदल चलते समय मैं ठोकर खा कर गिर गई। एक पुलिसवाले ने मुझसे कहा- लाओ साध्वी तुम्हारा हाथ पकड़ लूँ। मैंने उसे जवाब देते हुए कहा- चंडी का हाथ पकड़ने का तुम में सामर्थ्य है?”

5 अगस्त को अयोध्या में भव्य राम मंदिर के भूमि पूजन से पहले दैनिक जागरण से बातचीत में उन्होंने आंदोलन से जुड़ी यादें ताजा की है। साध्वी ऋतंभरा ने बताया कि उन्होंने सरयू का जल हाथ में लेकर राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। अब अयोध्या में 5 तारीख को इतिहास रचने जा रहा है। उन पलों का साक्षी बनना अपने आप में गौरव की बात है। वे कहती हैं, “मेरी तरुणाई श्रीराम जन्मभूमि को अर्पित हुई, इसका अगाध सुख है।”

वे कहती हैं राम मंदिर आंदोलन के लिए प्राण गँवाने वाले और जिन्होंने इस आंदोलन का नेतृत्व किया उनकी बस एक ही चाहत थी कि रामलला हमारे मंदिर में विराजमान हों। उनका संकल्प अब पूरा होने जा रहा है। 491 वर्षों तक श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का स्वप्न संजोए जिन लाखों रामभक्तों ने संघर्ष करते हुए अपना बलिदान दिया, ये दिन उनकी आत्मिक शांति को समर्पित होगा।

अयोध्या आंदोलन का सफर

साध्वी ऋतम्भरा 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा बनीं। विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा संचालित “श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन” का एक तेजस्वी चेहरा बनकर उभरीं। उन्होंने इस आंदोलन की सफलता के लिए सारे भारत में धर्म जागरण किया।

उन्होंने इस आंदोलन के लिए हिन्दू समाज की विभिन्न जातियों को एकता के सूत्र में बाँधा। इसी एकात्म हुई हिन्दू शक्ति ने इस आंदोलन की सफलता के रूप में अपने आराध्य श्री रामलला की जन्मभूमि पर अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण का सम्पूर्ण न्यायालयीन अधिकार प्राप्त किया।

राम मंदिर आंदोलन के समय की बातों का जिक्र करते हुए साध्वी ऋतंभरा बताती हैं कि कुछ लोगों ने उनका इस्तेमाल करने भी कोशिश की। आंदोलन के समय एयरपोर्ट पर लोग मुझे आतंकवादी के रूप में देखते थे। 10 घंटे मुझे बैठाया जाता था। मेरी चेकिंग की जाती थी। लेकिन मुझे पता था कि मैंने कोई अपराध नहीं किया था।।

उन्होंने बताया कि पुलिस से बचने के लिए वे उस समय भेष बदल कर यात्रा करती थीं। उस समय का दौर ऐसा था कि उन्हें खेतों, स्टेशनों, भिखारियों के बीच कितनी रातें भूखे-प्यास काटनी पड़ी। कई बार तो वे अनजान लोगों के घर भी आश्रय लेने को मजबूर हुईं। पुलिस के डर से लोग अपने घरों में उन्हें ठहराने से भी डरने लगे थे।

फिलहाल साध्वी ऋतंभरा श्रीकृष्ण की लीला स्थली वृंदावन में वात्सल्य ग्राम चलाती हैं। वात्सल्य ग्राम की पूरी परिकल्पना के माध्यम से वे भारतीय पारिवारिक व्यवस्था की सकारात्मकता पर जनमानस का ध्यान आकर्षित कर उसका प्रसार करने का सम्पूर्ण प्रयास कर रही हैं।

‘5 अगस्त से नाम होगा श्रीनगर’: 370 हटने का दर्द कम करने के लिए हाइवे का नाम बदलेगा पाकिस्तान

पिछले साल भारत सरकार ने 5 अगस्त को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को निरस्त कर दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर दो केंद्र शासित देशों में तब्दील हो गया। 

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान इस फैसले से सकपका गया। उसने इस दिन को ‘काला दिवस’ के तौर पर मनाने का निर्णय लिया और अब कश्मीर पर कब्जे के मंसूबों को चकनाचूर होने के बाद अपने एक हाइवे का नाम श्रीनगर करने का फैसला किया है।

पाकिस्तान सरकार पिछले 70 सालों से जम्मू-कश्मीर को अपना हिस्सा बताकर उस पर कब्जा करने के झूठे सपने देखती रही। लेकिन, राज्य से अनुच्छेद 370 हटते ही सभी उम्मीदों पर पानी फिर गया। ऐसे में अब जब भारत 5 अगस्त को भारत में जम्मू और कश्मीर के एकीकरण की पहली वर्षगाँठ पूरी कर रहा है, तब पाकिस्तान ने एक प्रतीकात्मक कार्रवाई करने का फैसला किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा, “हमारी मंजिल श्रीनगर है इंशाल्लाह… 5 अगस्त से अब कश्मीर हाइवे का नाम बदल कर श्रीनगर हाइवे कर रहे हैं। ये हमें हमारे लक्ष्य तक ले जाएगा ।”

अपने बयान में कुरैशी ने कहा कि उनकी सरकार अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों, सांसदों को नियंत्रण रेखा पर ले जाएगी और भारत की क्रूरता के कथित ‘पीड़ितों’ से बात करेगी। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के पाकिस्तानी जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता से खड़े होंगे और घाटी में भारत के कथित अत्याचारों को उजागर करेंगे।

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं है कि पाकिस्तान ने इस प्रकार की प्रतिकात्मक रूप से प्रतिक्रिया दी हो। पिछले साल भी पाकिस्तान और चीन मिलकर इस मामले को UNSC ले गए थे। हालाँकि, वहाँ के सदस्यों ने इसे द्विपक्षीय मामला बताकर इसे दोनों देशों पर छोड़ दिया। अब उन्होंने इसी प्रतीकात्मक प्रतिक्रिया के रूप में कश्मीर हाइवे को आधार बनाया है।

बता दें कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के प्रमुख रास्तों में कश्मीर हाइवे को गिना जाता है। यह रास्ता इस्लामाबाद के पश्चिम में स्थित पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पूर्व में स्थित ई-75 एक्सप्रेसवे से कनेक्ट करता है। इस हाइवे की कुल लंबाई 25 किलोमीटर है।

कॉन्ग्रेस नेता अनूप पटेल पकड़ा गया: AIMIM के कादिर खान संग माँ-बेटी को आत्मदाह के लिए उकसाया था

लखनऊ पुलिस ने गुरुवार (जुलाई 30, 2020) को कॉन्ग्रेस नेता अनूप पटेल को लखनऊ-बाराबंकी बॉर्डर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अनूप पटेल पर आरोप है कि उसने अमेठी की उन माँ-बेटी को उकसाया था, जिन्होंने 17 जुलाई को लोक भवन के सामने खुद में आग लगाई थी।

अनूप पटेल के अलावा इस मामले में पुलिस ने 17 जुलाई को AIMIM नेता कादिर खान के साथ सुल्तान और आसमाँ को हिरासत में लिया था। अनूप पटेल वहाँ से फरार हो गया था।

यूपी पुलिस ने इससे पहले इस मामले में 4 लोगों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की थी। इसमें AIMIM के नेता कादिर खान और यूपी में कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अनूप पटेल का नाम शामिल था। पड़ताल में मालूम हुआ था कि इस घटना के पीछे आपराधिक षड्यंत्र था जिसमें दोनों नेताओं के साथ कुछ अन्य लोग भी शामिल थे। इन्हीं लोगों ने महिला को सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने के नाम पर आत्मदाह करने को कहा था।

डॉक्टर्स के अनुसार, माँ-बेटी द्वारा आत्मदाह के प्रयास में माँ का शरीर 80 प्रतिशत झुलस गया था जिसके चलते 22 जुलाई को उसकी मौत हो गई। इस मामले में अनूप पटेल के खिलाफ न्यायालय से गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया था और पुलिस टीम संभावित स्थानों पर दबिश दे रही थी। आखिरकार, गुरुवार को पुलिस ने अनूप पटेल को दबोच लिया।

पूरा मामला

17 जुलाई को साफिया नाम की महिला और उसकी बेटी गुड़िया ने सीएम ऑफिस के सामने आत्मदाह का प्रयास किया था। एसीपी हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा के मुताबिक अमेठी के जामो कोतवाली क्षेत्र के कस्बा निवासी साफिया की नाली के विवाद में दबंगों से 9 मई को मारपीट हुई थी। इसके बाद उसकी बेटी गुड़िया ने आरोपित के बेटे अर्जुन सहित चार पर छेड़छाड़ का केस दर्ज कराया था। वहीं, अर्जुन की तहरीर पर साफिया, गुड़िया सहित तीन लोगों पर भी मुकदमा दर्ज किया गया था। 

इसके बाद 17 जुलाई को यह घटना घटित हो गई। इसका विपक्ष ने जम कर फायदा उठाया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य में योगी सरकार को गरीबों की कोई चिंता नहीं है। सवाल उठाने वाले नेताओं में आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, बसपा की मायावती और सपा के अखिलेश यादव जैसे नेता शामिल थे। हालाँकि, बाद में पुलिस आयुक्त ने यह जानकारी दी कि दोनो माँ-बेटी को उकसाने में कॉन्ग्रेस नेता और ऑल इंडिया मजलिस एक इत्तेहाद उल मुस्लिमिन के कादिर खान का हाथ था।

उन्होंने बताया था कि इस मामले में AIMIM नेता कादिर खान, कॉन्ग्रेस के अनूप पटेल समेत 4 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। लखनऊ के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) नवीन अरोड़ा ने भी इस घटना से जुड़ी कुछ बातें बताई। उन्होंने कहा, “एक महिला को पुलिस वालों ने बचा लिया जबकि दूसरी की हालत गंभीर है।” 

महबूबा मुफ्ती की हिरासत 3 महीने और बढ़ी, सज्जाद लोन बोले- मैं आजाद हूँ, लेकिन इसने मुझे बदल दिया

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की हिरासत शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) को 3 महीने के लिए बढ़ा दी गई। पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने से पहले मुफ्ती समेत कई नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे कई नेताओं के हाउस अरेस्ट की अवधि खत्म की गई।

बता दें, मई में भी पूर्व मुख्यमंत्री की हिरासत को तीन महीने बढ़ाया गया था जो 5 अगस्त को खत्म होने वाली थी। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक मुफ्ती अपने आधिकारिक आवास फेयरव्यू बंगले में अगले 3 महीने और हिरासत में ही रहेंगी। इस बंगले को जेल घोषित किया गया है और उन्हें कोरोना महामारी के मद्देनजर यहाँ शिफ्ट किया गया है।

आदेश में कहा गया, “कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने हिरासत की अवधि आगे विस्तारित करने की सिफारिश की है और इस पर गौर करने के बाद इसे जरूरी समझा गया।”

वहीं, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद गनी लोन को शुक्रवार को हिरासत से रिहा कर दिया गया। इसकी जानकारी लोन ने ट्वीट पर दी है। लोन को भी अनुच्छेद 370 हटने के बाद हिरासत में लिया गया था।

उन्होंने लिखा, ”आखिरकार एक साल पूरे होने से 5 दिन पहले मुझे बताया गया है कि मैं आजाद हूँ। कितना कुछ बदल गया है, मैं भी बदला हूँ। जेल का अनुभव नया नहीं था। लेकिन पहले वाले शारीरिक प्रताड़ना वाले थे, ये मानसिक तौर पर थका देने वाला था। उम्मीद कर रहा हूँ जल्दी बहुत कुछ साझा करूँगा।”

लोन की रिहाई के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा कि सुनकर अच्छा लगा कि सज्जाद लोन को अवैध नजरबंद से रिहा कर दिया गया है। उम्मीद है कि इसी तरह अवैध नजरबंदी में बंद दूसरे लोगों को भी रिहा किया जाएगा।

बता दें, महबूबा मुफ्ती के साथ हिरासत में जाने वाले कई नेता थे। इसमें फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, सज्जाद लोन जैसे कई नेताओं का नाम शामिल था। लेकिन मार्च में हिरासत के आठ महीने बाद उमर अब्दुल्ला को रिहा किया गया। वहीं, सज्जाद लोन और पीडीपी नेता वाहीन को भी एमएलए हॉस्टल से मुक्त करके हाउस अरेस्ट में शिफ्ट किया गया था।

‘सुशांत को दवाइयाँ देती थी रिया चकवर्ती’: ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया, SC में बिहार सरकार

रिया चकवर्ती की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। सुशांत सिंह राजपूत के बॉडीगार्ड ने रिया पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही बिहार सरकार ने रिया की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में कैविएट लगाई है।

रिया चक्रवर्ती के मामले को पटना से मुंबई में ट्रांसफर करने की माँग वाली याचिका पर आपत्ति जताते हुए बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कैविएट लगाई है। मुंबई पुलिस पर जॉंच के लिए आई बिहार पुलिस को सहयोग नहीं देने के भी आरोप लग रहे हैं। पूछताछ के लिए आई बिहार पुलिस को वापसी के लिए गाड़ी अंकिता लोखंडे ने उपलब्ध कराया।

बिहार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया कि न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि रिया चक्रवर्ती की याचिका पर कोई भी आदेश देने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाए। इसके अलावा राज्य सरकार ने सुशांत के पिता द्वारा लगाए गए आरोपों का भी उल्लेख किया है।

बिहार सरकार के अटॉर्नी जनरल ने मुंबई पुलिस पर बिहार पुलिस को सहयोग नहीं करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “जब एक राज्‍य की पुलिस दूसरे राज्‍य में जाँच के लिए जाती है तो संबंधित सरकार और उसके अधिकारी सहयोग करते हैं। यह दुर्भाग्‍यपूर्ण है कि वे (Mumbai Police) सहयोग नहीं कर रहे हैं।”

जब मुंबई पुलिस के इस रवैये को लेकर सवाल किया गया तो महाराष्ट्र के गृह राज्‍यमंत्री ने कहा, “बिहार पुलिस शायद इसलिए आई थी क्योंकि वहाँ एक अलग शिकायत दर्ज की गई थी। लेकिन मुंबई पुलिस की जाँच सही दिशा में है। मामले को सीबीआई को सौंपने की जरूरत नहीं है, महाराष्ट्र पुलिस जाँच करने में सक्षम है।”

रिया के खिलाफ पटना में सुशांत के पिता केके सिंह ने मामला दर्ज कराया था। वह सुशांत की गर्लफ्रेंड थीं। मुंबई पुलिस के रवैए पर उठ रहे सवालों के बीच केके सिंह ने पूछा है बिहार पुलिस की जाँच से रिया चक्रवर्ती डर क्यों रही हैं?

सुशांत के पिता द्वारा लगाए गए 15 करोड़ के हेराफेरी के आरोप में ईडी ने रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। ईडी ने केके सिंह से मिली जानकारी के आधार पर केस दर्ज किया है। आने वाले दिनों में रिया और उनके परिवार को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। प्रवर्तन निदेशालय सुशांत की रकम और उनके बैंक खातों के कथित दुरुपयोग के आरोपों की आगे की जाँच में जुटी है।

इस बीच सुशांत के बॉडीगार्ड ने रिपब्लिक टीवी को दिए इंटरव्यू में उनके पिता के आरोपों को सही ठहराया है। उन्होंने यह भी बताया कि रिया चक्रवर्ती और उनका परिवार सुशांत के पैसे पर मौज करता था। वह सुशांत को कोई दवाई देती थी, जिसके कारण वह ज्यादातर सोते रहते थे। बॉडीगार्ड ने बताया कि जब वह ये दवाई लेने मेडिकल शॉप पर जाता था तो दुकान वाले घूरकर उससे सवाल जरूर करते थे कि यह दवाई किसकी है।

‘रोड जाकर कहीं और बनाओ’: हैदराबाद में मस्जिद के पास वक्फ बोर्ड ने सड़क का निर्माण बंद करवाया

हैदराबाद से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहॉं एक मस्जिद की बाहरी दीवार को नुकसान पहुॅंचने की वजह से सड़क का निर्माण बंद करवा दिया गया।   

सियासत की रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद महानगर विकास प्राधिकरण शहर के हाइटेक सिटी इलाके में सड़क निर्माण कर रहा था। इस इलाके में क़ुतुब शाही नाम की मस्जिद मौजूद है। निर्माण कार्य के दौरान इस मस्जिद की दीवार का बाहरी हिस्सा टूट गया।  

घटना की जानकारी मिलते ही वक्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष मोहम्मद सलीम घटनास्थल पर पहुंचे। उनके साथ बोर्ड के कुछ सदस्य और समुदाय के कुछ लोग भी थे। इसके बाद उन्होंने हैदराबाद महानगर विकास प्राधिकरण के कर्मचारियों पर निर्माण रोकने का दबाव बनाया।  

प्राधिकरण 100 फीट की सड़क का निर्माण कर रहा था। इसी दौरान मस्जिद की बाहरी दीवार टूट गई। इसके बाद हैदराबाद वक्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष मोहम्मद सलीम ने कर्मचारियों को वह दीवार को वापस बनाने का आदेश दे डाला।

घटना से नाराज मुस्लिम इतने पर ही रुके नहीं और कहा इसके बाद कोई मस्जिद को हाथ नहीं लगाएगा। सड़क कहीं और बनवा लेने की बात भी कही। मोहम्मद सलीम का कहना था कि प्राधिकरण को उन्हें निर्माण कार्य के बारे में सूचित करना चाहिए था। उनके मुताबिक़ वक्फ़ बोर्ड की ज़मीन किसी और काम के लिए इस्तेमाल नहीं की जा सकती है। 

इसके पहले भी मस्जिद को लेकर तेलंगाना में समुदाय विशेष के लोग ऐसा ही रुख दिखा चुके हैं। हैदराबाद सचिवालय में पुनर्निर्माण कार्य चल रहा था। इस दौरान सचिवालय परिसर में स्थित मस्जिद और मंदिर को नुकसान पहुँचा था। इस घटना के बाद एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी समेत कई नेताओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की धमकी दी थी।  

इस मुद्दे पर ओवैसी समेत कई मौलवियों और नेताओं ने साझा तौर पर अपना बयान जारी किया था। जारी किए गए बयान में उन्होंने कहा था कि मस्जिद अल्लाह की संपत्ति है। इसे न तो नुकसान पहुँचाया जा सकता है और न ही इसकी जगह बदली जा सकती है। इसके बाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने कहा था कि नए सचिवालय परिसर में नई मस्जिद बना कर दी जाएगी। 

मिलिए खुशबू सुंदर से, जानिए क्यों कहा- राहुल गाँधी माफ करें, पर मैं कठपुतली या रोबोट नहीं

34 साल बाद आई नई शिक्षा नीति का ज्यादातर तबकों में स्वागत हो रहा है। हालॉंकि कॉन्ग्रेस जैसे विपक्षी, मीडिया गिरोह और लिबरल बुद्धिजीवियों को यह भी नहीं पच रहा। इस बीच अभिनेत्री और कॉन्ग्रेस नेता खुशबू सुंदर ने पार्टी स्टैंड से हटकर नई नीति का समर्थन किया है।

खुशबू ने शिक्षा नीति को लेकर चार ट्वीट किए। पहले ट्वीट में उन्होंने कहा, “नई शिक्षा नीति 2020 पर मेरे विचार मेरी पार्टी से अलग हैं और मैं इसके लिए राहुल गाँधी से माफी माँगती हूँ। लेकिन मैं कठपुतली या रोबोट की तरह सिर हिलाने के बजाए तथ्यों पर बात करती हूँ। हर चीज पर हम अपने नेता से सहमत नहीं हो सकते हैं और एक नागरिक के तौर पर बहादुरी से अपनी राय रखने का साहस रख सकते हैं।”

दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा कि राजनीति सिर्फ हल्ला मचाने के लिए नहीं है। ये मिलकर काम करने का विषय है, जिसे भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री को समझना होगा। हम विपक्ष के रूप में इसे विस्तार से देखेंगे और इसकी कमियों को इंगित करेंगे।

उन्होंने आगे लिखा, “मैं सकारात्मक पहलुओं को देखना पसंद करती हूँ और नकारात्मक चीजों पर काम करती हूँ। हमें समस्याओं के समाधान की पेशकश करनी है न कि केवल आवाजें बुलंद करनी हैं। विपक्ष का मतलब देश के भविष्य के लिए काम करना भी है। मैं अटल जी की जिंदगी से एक अंश लेना चाहूँगी।”

अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “संघी ज्यादा खुश न हों। मैं बीजेपी में नहीं जा रही हूँँ। मेरी राय पार्टी से अलग है, लेकिन मैं खुद की सोच के साथ एक व्यक्ति हूँ। नई शिक्षा नीति में कुछ जगहों पर खामियाँ हैं, लेकिन मुझे अभी भी लगता है कि हम सकारात्मकता के साथ बदलाव को देख सकते हैं।”

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक ने बुधवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को मंजूरी देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है क्योंकि 34 साल तक देश की शिक्षा नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ था।

वहीं, नई शिक्षा नीति पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने कहा कि इस नीति गुणवत्ता, पहुँच, जवाबदेही, सामर्थ्य और समानता के आधार पर एक समूह प्रक्रिया के अंतर्गत बनाया गया है। जहाँ विद्यार्थियों के कौशल विकास पर ध्यान दिया गया है, वहीं पाठ्यक्रम को लचीला बनाया गया है ताकि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सके। उन्होंने कहा, “मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारत अपने वैभव को पुनः प्राप्त करेगा।”