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‘रावण ने सबसे पहले उड़ाया एयरक्राफ्ट, एविएशन का था जनक’: श्रीलंका सरकार ने शुरू किया रिसर्च

श्रीलंका ने रावण को एविएशन तकनीक का जनक बताते हुए उसके पुष्पक विमान को लेकर रिसर्च शुरू किया है। बता दें कि रावण वाल्मीकि रचित रामायण का विलेन है और श्रीराम ने उसका वध किया था। श्रीलंका की सरकार का कहना है कि उस युग में पूरी दुनिया के एविएशन जगत में उस क्षेत्र की तूती बोलती थी और इस पर वृहद रिसर्च शुरू किया गया है। इसके लिए एडवर्टाइजमेंट भी दिया गया है।

न्यूज 18 की ख़बर के अनुसार, श्रीलंका सरकार ने विज्ञापन जारी किया है कि अगर किसी भी व्यक्ति को रावण व उसकी एविएशन तकनीक के बारे में कोई भी जानकारी है, कोई पुस्तक या दस्तावेज हैं तो वो सरकार से संपर्क कर सकते हैं। श्रीलंका के ‘मिनिस्ट्री ऑफ टूरिज्म एंड एविएशन’ ने अख़बारों में ये विज्ञापन जारी किया। श्रीलंका के खोए गौरव को फिर से हासिल करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

न्यूज़ 18 की खबर के अनुसार, श्रीलंका सरकार का मानना है कि रावण विश्व का पहला एविएटर था जो 5000 वर्ष पूर्व भी आसमान में उड़ा करता था। वहाँ का सिविल एविएशन अथॉरिटी पता लगाने में जुटा है कि उस समय एयरक्राफ्ट उड़ाने में किस तकनीक व विधि का उपयोग किया जाता था। पिछले साल श्रीलंका के सबसे बड़े बंदारनाईके एयरपोर्ट में इतिहासकारों और एविएटर्स की एक सभा भी हुई थी।

श्रीलंका के सिविल एविएशन अथॉरिटी के पूर्व उपाध्यक्ष शशि दानतुंगे ने कोलम्बो से फोन पर ‘न्यूज़ 18’ से बातचीत करते हुए कहा कि रावण एयरक्राफ्ट उड़ाने वाला पहला व्यक्ति था और साथ ही एविएशन का अगुआ था। उन्होंने रावण को एक जीनियस करार देते हुए कहा कि वो एक एविएटर था। उन्होंने कहा कि ये सब माइथोलॉजी नहीं है बल्कि वास्तविकता है, इतिहास है। उन्होंने दावा किया कि 5 सालों के रिसर्च के बाद श्रीलंका इसे साबित कर देगा।

श्रीलंका में सिविल एविएशन विशेषज्ञों के हुए कॉन्फ्रेंस में भी ये निष्कर्ष निकाला गया कि रावण एयरक्राफ्ट से भारत गया था और फिर वापस लौटा था। हालाँकि, उन्होंने रावण को बुरा बताने वाली कहानियों को भारतीय वर्जन बताया और कहा कि वो एक अच्छा राजा था। श्रीलंका में कई लोग रावण को बहुत बड़ा विद्वान मानते हैं। रामायण में भी उसे समस्त वेद-वेदांगों का पारंगत बताया गया है।

बता दें कि ‘रावण-1’ श्रीलंका का ऐसा सैटेलाइट है, जिसे अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया गया था। जून 17, 2019 को ये प्रक्रिया सफलतापूर्वक संचालित की गई थी। इसे अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से कक्षा में स्थापित किया गया था। यह सैटेलाइट धरती से 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करेगा। श्रीलंका के इस पहले सैटेलाइट (कक्षा में स्थापित) का वजन 1.5 किलोग्राम है।

अफगानिस्तान में अपहृत सिख को छुड़ाया गया, अब CAA के माध्यम से मिल सकती है भारतीय नागरिकता

अफगानिस्तान में सिख व्यक्ति निधान सिंह सचदेवा का 1 महीने पहले अपहरण कर लिया गया था। अब उन्हें शनिवार (जुलाई 18, 2020) को छोड़ दिया गया। सिख निधान सिंह सचदेवा को अफगानिस्तान के पक्तिआ प्रान्त में स्थित एक गुरूद्वारे से अपहृत कर लिया गया था। भारत ने उनकी रिहाई के लिए अफगानिस्तान सरकार को धन्यवाद दिया है। इस दौरान CAA का भी जिक्र किया गया।

भारत सरकार ने इशारा किया है कि निधान सिंह सचेदवा भारतीय नागरिकता के लिए CAA के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। सचदेवा और उनका परिवार 1990 के दशक से ही भारत में रहता आ रहा है और CAA के माध्यम से भारतीय नागरिकता पाने के योग्य भी है। बता दें कि दिसंबर 31, 2014 को CAA का कट-ऑफ डेट रखा गया है। सचेदवा ‘लॉन्ग टर्म वीजा’ लेकर लम्बे समय से दिल्ली में रह रहे हैं।

जब उनका अपहरण किया गया, तब वो चमकनी स्थित थाला श्री गुरु नानक साहिब गुरुद्वारा में थे। बता दें कि सचदेवा अक्सर गुरुद्वारों में जाकर ‘सेवा’ करते रहे हैं। जून 17 को उनके अपहरण के बाद उनकी पत्नी महरवंती ने पीएम नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। 25 जून को भेजे गए पत्र में उन्होंने अपने पति की रिहाई के लिए सरकारी मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने खुलासा किया था कि पक्तिआ पिछले कुछ समय से तालिबानी क्रियाकलापों का केंद्र बन कर उभरा है।

उन्होंने बताया था कि ये इलाक़ा हक्कानी नेटवर्क के आतंकियों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना बन गया है और निधान सिंह सचेदवा को भी आतंकियों ने ही अपहृत किया है। उन्होंने पीएम मोदी को भेजे पत्र में आगे लिखा था:

“अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार किया जा रहा है। यहाँ उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है और वो आज भी बेहाल हैं। हमारी अपील को अफगानिस्तान में उच्चाधिकारियों के समक्ष उठाई जाए, ताकि मेरे पति की रिहाई हो सके। उन्हें जल्द से जल्द स्वदेश लाने की कोशिश की जाए और हमारे पूरे परिवार को भारतीय नागरिकता दी जाए। उन्हें नई दिल्ली लाने के लिए प्रयास किए जाएँ।”

बता दें कि CAA के तहत पाँच धर्मों के लोग भारतीय नागरिकता ले सकते हैं, जो कट-ऑफ तारीख से पहले से भारत आकर रह रहे हैं। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले प्रताड़ितों को ये सुविधा दी गई है। सचेदवा के पुत्र जसमीत सिंह ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि उनके पिता ने एक वीडियो में बताया है कि बंधक रहने के दौरान उन्हें जम कर प्रताड़ित किया गया था।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने निधान सिंह सचदेवा की रिहाई के लिए अफगानिस्तान सरकार के साथ-साथ स्थानीय प्रबुद्धजनों की भी तारीफ की है, जिनके प्रयासों के कारण उन्हें छुड़ाया जा सका। मंत्रालय ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि वो अपने ‘बाहरी ताकतों’ के जरिए अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहा है। अब ये पता लगाया जा रहा है कि निधान सिंह का अपहरण क्यों किया गया?

इससे पहले ख़बरों में कहा गया था कि यह अपहरण स्थानीय माफिया की करतूत हो सकती है। इसमें तालिबान शामिल नहीं है, जैसा कि पहले आरोप लगाया गया था। दिल्ली में रहने वाले निधान सिंह के चचेरे भाई चरण सिंह सचदेवा ने बताया था कि निधान का अपहरण तालिबान ने बल्कि स्थानीय भू-माफिया ने किया है। उन्होंने कहा था कि अपहरणकर्ताओं ने पहले तस्वीरें और वीडियो व्हाट्सएप पर भेजे थे।

निधान सिंह डायबिटीज के मरीज हैं। बताया गया था कि माफियाओं ने गुरुद्वारा की जमीन पर कब्जा कर लिया था, क्योंकि लोग वार्षिक मेला यात्रा के लिए मुश्किल ही वहाँ जाते हैं। निदान जमीन पर वापस नियंत्रण पाने की कोशिश में लगे हुए थे। गुरुद्वारे की जमीन अफगानिस्तान में सिख समुदाय की है और निधान सिंह का परिवार इस गुरुद्वारे की देखभाल करता है। यह गुरुद्वारा पाकिस्तान की सीमा के पास स्थित है और वहाँ सिखों की जनसँख्या काफी कम है।

‘तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी… तेरा मुँह काला हो जाएगा तो जाएगी कहाँ?’ – तब जावेद अख्तर ने कंगना से कहा था

फ़िल्मी दुनिया के कुछ किरदार ऐसे हैं, जो बॉलीवुड के बारे में खुल कर अपना नज़रिया रखते हैं। इस कड़ी में सबसे मज़बूत नाम है, कंगना रनौत। कंगना ने पिछले कुछ समय में फ़िल्मी दुनिया के हर नकारात्मक पहलू पर बेबाक होकर अपना नज़रिया पेश किया है।

हाल ही में कंगना रनौत ने रिपब्लिक भारत को दिए साक्षात्कार में कई हैरान कर देने वाली बातें कही हैं। साक्षात्कार के दौरान ही कंगना ने जावेद अख्तर पर बेहद गंभीर आरोप लगाए।   

कंगना ने साक्षात्कार में कहा, “जावेद अख्तर ने मुझे अपने घर बुलाया। इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर मैं ऋतिक रोशन से माफ़ी नहीं माँगी तो मुझे आत्महत्या करनी पड़ेगी।” जिसके बाद साक्षात्कार ले रहे अर्नब गोस्वामी ने कंगना को जवाब दोहराने के लिए कहा। दूसरी बार भी कंगना ने ठीक वही बात कही।   

कंगना ने बताया कि जावेद अख्तर ने उनसे क्या-क्या कहा था”

“तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि वह तुम्हें जेल में बंद कर देंगे। उन्होंने (ऋतिक रोशन) तुम्हारे खिलाफ़ सारे सबूत इकट्ठा कर लिए हैं। वह समझ चुके हैं कि केस पूरी तरह उनके हाथों में है।”

लेकिन बकौल कंगना, उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर कौन से सबूतों की बात जावेद अख्तर कर रहे हैं। तब कंगना सोच में पड़ गई थीं क्या उन्होंने कोई चोरी की है? या उनका कुछ लिया है? कुछ देर सोचने के बाद कंगना ने जावेद से पूछा कि वो किन सबूतों की बात कर रहे हैं? और उन्होंने ऐसा क्या गलत किया है? इस सवाल पर जावेद अख्तर ने कहा, “तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि तेरा मुँह काला हो जाएगा तो तू जाएगी कहाँ?”

इसके अलावा कंगना रनौत के मामले पर आज ही एक बात सामने आई है। CS (चोपड़ा साहब) नाम के ट्विटर एकाउंट से एक ट्वीट किया गया। ट्वीट में ऐसा लिखा गया कि महेश भट्ट ने कंगना रनौत पर चप्पल फेंकी थी। और वो कंगना पर हमला भी करने वाले थे। ऐसा इसलिए क्योंकि कंगना ने उनकी एक फिल्म ठुकरा दी थी, जिसमें एक आत्मघाती आंतकी का महिमामंडन किया जाना था।   

इसी साक्षात्कार में बात करते हुए कंगना ने कुछ और अहम बातें कहीं। इसमें सबसे ज़्यादा उल्लेखनीय है सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर उनका बयान। इस पर कंगना ने कहा, 

“मुंबई पुलिस ने मुझे समन भेजा। मैंने उन्हें बताया कि मैं मनाली में हूँ। वह किसी को भेज कर मेरा बयान दर्ज करा सकते हैं लेकिन इसके बाद मुझसे किसी ने संपर्क नहीं किया। मैं खुद स्पष्ट करना चाहती हूँ अगर मैंने कुछ सार्वजनिक रूप से कहा है और अगर मैं इसे साबित नहीं कर सकी तो अपना पद्मश्री लौटा दूँगी।” उन्होंने कहा, “मैं ऐसी इंसान नहीं हूँ कि बस यूँ ही इतनी बड़ी बात सार्वजनिक रूप से कह दूँ।”

जिस ब्रिटिश सांसद को भारत में नहीं मिली थी एंट्री, उसे Pak ने दिए 30 लाख रुपए, कश्मीर पर फैलाती है प्रोपेगेंडा

भारत ने जब ब्रिटिश सांसद डेबी अब्राहम्स को वीजा नहीं दिया था तो लिबरलों ने जम कर हंगामा मचाया था। अब डेबी अब्राहम्स के पाकिस्तान से लिंक सामने आए हैं। उन्हें भारत-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण वीजा नहीं दिया गया था। अब जब पाकिस्तान से उनका खुल कर जुड़ाव सामने आ गया है, लिबरल चुप हैं। उनके संसदीय समूह को पाकिस्तान ने 30 लाख रुपए (33,000 पाउंड्स) दिए हैं।

डेबी अब्राहम्स को जब रोका गया था तो प्रोपेगेंडाबाज पत्रकार राणा अयूब ने कहा था कि जम्मू कश्मीर पर मंथन करने वाले संससदीय समूह की अध्यक्ष डेबी अब्राहम्स को अधिकारियों ने रोक दिया और उन्हें इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से बाहर एंट्री नहीं दी गई। साथ ही उन्होंने मोदी सरकार को तुच्छ और बदले की भावना वाली सरकार करार दिया था। कई अन्य लिबरलों ने भी उनके लिए आँसू बहाए थे।

पत्रकार शेखर गुप्ता ने कहा था कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने की आलोचना करने वाली ब्रिटिश सांसद को भारत में एंट्री नहीं दी गई और कहा गया कि वो कैंसल्ड वीजा पर यहाँ आई हैं। आकार पटेल ने तो इसके लिए भारत को ‘बनाना रिपब्लिक’ और हिन्दू राष्ट्र तक बताया था। साथ ही उन्होंने दावा किया था कि पीएम मोदी इसकी आँच को महसूस कर रहे हैं और ये अच्छा है।

इस संसदीय समूह का दावा है कि वो कश्मीर के लिए न्याय की जुगाड़ में लगा है और साथ ही वो कश्मीरियों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में प्रयास करने का भी दावा करता है। पाकिस्तान ने न सिर्फ इस समूह को पूरे POK में घुमाया बल्कि 30 लाख पाकिस्तानी रुपए भी दिए। इस संसदीय समूह में पाकिस्तानी मूल के सांसद तो हैं ही, अधिकतर ऐसे हैं, जो पाकिस्तान से सहानुभूति रखते हैं। साथ ही ये समूह अपने एजेंडे के लिए ब्रिटिश संसद के समर्थन के लिए भी प्रयास करता है।

डेबी अब्राहम्स जब भारत आई थीं तो उन्हें दुबई डिपोर्ट कर दिया गया था। फिर वो पाकिस्तान गईं और POK में उन्होंने कहा कि वो कश्मीरियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही उन्होंने करतारपुर साहिब को जल्द से जल्द खोले जाने की भी आशा जताई थी। बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदनेर सिंह पहले ही कह चुके हैं कि करतारपुर साहिब यात्रा आईएसआई की एक साजिश हो सकती है।

बता दें कि उन्हें वापस भेजे जाने के फैसले को लेकर कॉन्ग्रेस के दो नेताओं में दो फाड़ देखने को मिला था। एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने महिला सांसद के साथ हो रहे ‘इस तरह के बर्ताव’ पर सवाल उठाए थे तो वहीं पार्टी के दिग्गज नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सरकार के इस फैसले का समर्थन करते हुए डेबी अब्राहम्स को पाकिस्तान का प्रॉक्सी (पक्षधर) बताया था। अब ये बात दुनिया के सामने खुल कर आ गई है। 

चीनी सेना के लिए काम करने वाली कंपनियाँ मोदी सरकार के रडार पर: 7 की पहचान, हजारों करोड़ का है निवेश

केंद्र सरकार ने अब भारत में मौजूद सभी चीनी कपनियों को स्कैन करने का निर्णय लिया है। इसे ‘PLA स्कैन’ कहा जा रहा है। भारत में जितनी भी चीनी कम्पनियाँ कार्यरत हैं, या फिर जिन भी कंपनियों को चीन से फंडिंग मिलती है, वो सभी सरकार के रडार पर हैं। सरकार का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था में चीन के दखल को रोकने और उस पर नजर रखने के लिए ये आवश्यक है।

इन सबके अलावा चीन की कंपनियों द्वारा भारत में किए गए निवेश पर भी सरकार नजर बनाई हुई है, क्योंकि इस बात का शक है कि चीन की सेना PLA भारत के खिलाफ जाते हुए यहाँ की अर्थव्यवस्था से खिलवाड़ कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की इन कंपनियों की पहचान करते हुए इनकी सूची तैयार कर ली गई है। इनके खिलाफ सरकार क्या कार्रवाई करने वाली है, इस पर अभी फैसला किया जाना बाकी है

भारत सरकार ने अब तक चीन की ऐसी 7 कंपनियों की पहचान की है, उनमें अलीबाबा, टेंसेंट, हुवावे, एक्सइंडिया स्टील्स लिमिटेड, जिंज़िंग कैथे इंटरनेशनल ग्रुप, चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉरपोरेशन और एसएआईसी मोटर कॉरपोरेशन लिमिटेड शामिल हैं। एक्सइंडिया स्टील्स लिमिटेड के बारे में बता दें कि ये भारत और चीन के बीच सबसे बड़ा ज्वाइंट वेंचर है। वहीं कैथे ने छत्तीसगढ़ स्थित एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1000 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

वहीं एसएआईसी एसयूवी एमजी हेक्टर की पैरेंट कपंनी के रूप में काम करती है। ये गाड़ियाँ एमजी मोटर्स द्वारा बनाई जाती हैं। बता दें कि भारत ने चीन के 59 एप्स को बैन करने का फैसला लिया था, जिसके बाद चीनी कंपनियों और उनके साथ PLA के संबंधों की जाँच की जा रही है। इससे पहले अमेरिका ने भी चीन की कई कंपनियों की जाँच करने की बात कही थी। वहाँ Huawei जैसी कंपनियों की फंडिंग पर रोक भी लगा दी गई।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के फ़ेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने चाइनीज कम्पनियाँ Huawei और ZTE को ऐसी कम्पनियों की श्रेणी में डाल दिया था, जिससे देश की सुरक्षा को ख़तरा है। FCC के अध्यक्ष अजीत पाई ने कहा था कि इस फ़ैसले के बाद Huawei और ZTE, ये दोनों ही टेलीकॉम कम्पनियाँ $8.3 बिलियन के यूनिवर्सल सर्विस फंड का इस्तेमाल नहीं कर पाएँगी।

भारत में काम कर रही चीनी कंपनियों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीनी सेना PLA से संबंध होने और उनके लिए जासूसी करने का शक है, जिसकी जाँच की जाएगी। अमेरिका की जाँच में सामने आ चुका है कि दुनिया के किसी भी कोने में काम करने वाली ये चीनी कम्पनियाँ चीन की ख़ुफ़िया एजेंसियों का सहयोग करती हैं और वो उन्हें सारी जानकारियाँ देने के लिए बाध्य हैं। इसीलिए इन पर नकेल कसी जाएगी।

जलियाँवाला बाग में महिलाओं की अर्धनग्न तस्वीरें, बगल में गुरु नानक देव व रंजीत सिंह की तस्वीर: PM मोदी से शिकायत

शहीद स्मारक/स्थल जलियाँवाला बाग़ को अंग्रेज़ी हुक़ूमत के अत्याचारों का प्रतीक माना जाता है। पिछले कुछ समय से वहाँ नवीनीकरण का काम चल रहा है। इस काम में कुल 15 से 20 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। लेकिन फिलहाल एक नया विवाद सामने आ रहा है।

जलियाँवाला बाग़ में नवीनीकरण कार्यों के दौरान वहाँ गैलरी में 2 महिलाओं के अर्धनग्न चित्र लगा दिए गए हैं। यह चित्र शेर-ए-पंजाब महाराजा रंजीत सिंह की लड़ाइयों के चित्र के ठीक नीचे लगाया गया है।   

इस चित्र पर विवाद को लेकर इंटरनेशनल सर्व कम्बोज समाज (International Sarv Kamboj Samaj) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने चित्रों पर आपत्ति जताई और उचित कार्रवाई की माँग की

दरअसल जलियाँवाला बाग़ में फरवरी से नवीनीकरण का काम चल रहा है। इसमें लगभग 15 से 20 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है। इस काम के दौरान ही वहाँ दो महिलाओं के अर्धनग्न चित्र लगा दिए गए हैं।   

इन अर्धनग्न चित्रों की दाहिनी तरफ गुरु नानक देव जी का बड़ा चित्र लगा हुआ है। इसके ठीक नीचे हाथ में खड्ग लिए रंजीत सिंह की तस्वीर लगी है। इन दोनों के साथ ही बाबा बंदा बहादुर सिंह की मूर्ति भी स्थापित की गई है।

जलियाँवाला बाग़ गैलरी के ऊपरी हिस्से में सतलुज सहित अन्य पाँच नदियों का ज़िक्र है। कुल मिला कर अर्धनग्न चित्र ऐसे स्थान पर लगाए गए हैं, जहाँ पंजाब के इतिहास के बारे में जानकारी दी गई है।   

इंटरनेशनल सर्व कम्बोज समाज ने जलियाँवाला बाग़ में लगाए गए इन चित्रों पर कड़ी आपत्ति जताई है। इस समाज के अध्यक्ष शिंदर पाल सिंह ने इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र लिखा है।

पत्र में कम्बोज समाज का कहना है कि ऐसे चित्र शहीदों का अपमान करते हैं। इसके पहले जलियाँवाला बाग़ ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मुख्य (प्रवेश) द्वार पर शहीद उधम सिंह की मूर्ति के सामने टिकट विंडो बना कर अपमान करने का आरोप लगाया था।   

पिता के हत्यारों पर कार्रवाई के लिए बिलखती हुई भोपाल की किरन का वीडियो वायरल: सरकार से लगा रही न्याय की गुहार

सोशल मीडिया पर इस वक्त भोपाल की एक लड़की का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें किरन राजपूत नाम की एक लड़की अपने पिता की हत्या को लेकर अपने दर्द को जाहिर करते हुए सरकार से न्याय गुहार लगा रहीं है। लड़की ने वीडियो में भोपाल के गोविंदपुरा इलाके के पुलिस अधिकारियों पर हत्यारों से मिलीभगत का आरोप लगाया है।

लड़की ने रोते हुए वीडियो में कहा, “क्या कोई है जो हमारी मदद कर सकता है। हम बहुत गरीब हैं और हमारे साथ बहुत कुछ गलत हो रहा है। मेरे पिता की हत्या के बाद भी, गोविंदपुरा पुलिस स्टेशन के अधिकारी आर एन चौहान ने रिश्वत लेकर मामले में दायर चार्जशीट हेरफेर की है। मुझे आज ये चार्जशीट मिली है, इस चार्जशीट में पुलिस ने स्वतंत्र गवाह हत्यारों के रिश्तेदारों को बनाया गया है और जो गवाह हमने प्रदान किए थे, उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। जिसके चलते सारे हत्यारें बच निकलें। हमारे घर पर हमला किया गया, जिसकी वजह से हमें घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। हमारे पास न कुछ खाने को है और न ही सही से रहने को। पुलिस फिर भी उनका साथ दे रही है। अगर ऐसा ही चला तो हम लोग हत्या कर लेंगे।”

बता दें, किरन अप्रैल के मध्य से ही अपने पिता की हत्या के लिए लड़ रही थी। मगर इंसाफ नहीं मिलने के बाद उसने कल यह वीडियो सोशल मीडिया पर अपडेट किया। इस दिल दहलाने वाले वीडियो को सोशल यूज़र्स ने गंभीरता से लिया है। इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया यूज़र्स किरन के सपोर्ट में आगे आए है। इसके साथ ही उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार से किरन द्वारा लगाए गए आरोपों के जाँच की माँग भी की है। किरन द्वारा अपलोड किए गए वीडियो के बाद से ही ट्विटर पर #JusticeForKiranRajput ट्रेंड कर रहा है। लोग पीड़ित और उसके पिता की हत्या के लिए जाँच की अपील कर रहे हैं।

हमलावरों द्वारा किरन के पिता का कत्ल

भोपाल के गोविंदपुरा इलाके की रहने वाली किरन ने 20 अप्रैल को अपने पिता की मौत के संबंध में एक ट्वीट किया था। अपने पिता के शव की तस्वीर साझा करते हुए किरन ने दावा किया कि लगभग 8 लड़कों ने उसके घर में घुसकर उसके पिता पर हमला कर दिया। उसके पिता 3 दिन तक घर में बेहोश थे। जिसके बाद उनकी मौत हो गई।

किरन ने आरोप लगाते हुए कहा कि गोविंदपुरा पुलिस थानों के पुलिस अधिकारी को हत्यारों ने रिश्वत दे दी है। जिस कारण पुलिस वाले उन्हीं का साथ दे रहे है। ये लोग पैसे वाले पावरफुल लोग है। ये लोग मेरे पिता से मजदूरी करवाते थे।

किरन के साथ हुई दर्दनाक घटना का जिक्र एक न्यूज़ ब्लॉग में किया गया है। जिसमें किरन ने बताया है कि 16 अप्रैल की दोपहर करीब 14 लोग उसके घर आए। 14 में से 6 लोग उसके घर में घुस गए और उसके पिता को घर से घसीट कर बाहर चबूतरे पर ले गए। रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग उसके घर में घुसे थे उनका नाम दीपक, अमन, आकाश, भूरा, टॉम्मा और राज था। वे सभी रोड, लोहे के पाइप, डंडे, बेसबॉल, हॉकी और बैट जैसे हथियारों से लैस थे।

भोपाल की लड़की किरन के पिता को इन गुंडों ने बेरहमी से पीटा था। यहाँ तक ​​कि उसके परिवार के सदस्यों को भी इन लोगों ने नहीं बख्शा था। उसने अपने साथ हुए इस भयावह घटना के साथ मारपीट के जख्मों की तस्वीरों को भी साथ में लगाया था। 3 दिनों तक उसके पिता ने हमलवारों द्वारा दिए गए घाव को बर्दाश्त किया। लेकिन 18 अप्रैल को उसके पिता की मृत्यु हो गई।

पुलिस और हमलावरों की मिलीभगत

मेरे पिता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है, “उनकी आँखों को फोड़ दिया गया था। उनके सर पर भी गंभीर चोटें आई थी। इसके अलावा उनके शरीर के अलग-अलग हिस्सों में 9 जगहों पर गंभीर चोटें आई थीं। क्या यह सब बिना हथियार के किया जा सकता है?” लेकिन पुलिस ने इन सभी बातों को मानने से इनकार कर दिया था। यहाँ तक कि एफआईआर में आरोपितों के नाम देने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। हमले के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियारों की जानकारी देने के बावजूद उनका जिक्र एफआईआर में नहीं किया गया।

भोपाल की लड़की किरन ने गोविंदपुरा पुलिस स्टेशन के स्पेशल इंस्पेक्टर आरएन चौहान के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। भोपाल की लड़की किरन ने दावा किया है कि पुलिस ने आरोपितों को बचाने के लिए उनसे रिश्वत ली है।

साध्वी प्रज्ञा ने लिया भोपाल की पीड़ित लड़की किरन के मामले पर संज्ञान

गौरतलब है कि भोपाल की लड़की किरन द्वारा जारी किए गए वीडियो पर संज्ञान लेते हुए, भोपाल की सांसद, साध्वी प्रज्ञा ने उनसे, इस घटना के बारे में पूरी जानकारी देने के लिए कहा है। इसके साथ ही एक फोन नंबर दे कर किरन को संपर्क करने के लिए कहा है।

नोट: ऑपइंडिया ने भी भोपाल की पीड़ित लड़की किरन राजपूत से संपर्क करने की कोशिश की है। ताकि उनके द्वारा पुलिस पर लगाए गए आरोपों को समझा जा सके। लेकिन अभी तक हमें उनसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। जैसे ही हम उनके साथ संपर्क स्थापित करेंगे, हम इसे आगे अपडेट करेंगे।

बलूचिस्तान के 40 करोड़ टन के सोने व ताम्बे के खदान चीन को सौंपे: कंगाल Pak के खिलाफ बलूचों ने किया विरोध प्रदर्शन

जहाँ एक तरफ पूरी दुनिया कोरोना वायरस संक्रमण आपदा से परेशान है, पाकिस्तान और चीन मिल कर भारत को परेशान करने में लगे हुए हैं। पाकिस्तान भले ही 100 अरब डॉलर के लोन के साथ कंगाली की ओर बढ़ रहा है लेकिन बलूचिस्तान में उसने चीन को खुली छूट दे रखी है, जिससे वहाँ के स्थानीय लोग हलकान हैं। मार्च से अब तक पाकिस्तान में 2 करोड़ नौकरियाँ जा चुकी हैं और 2000 उद्योग ठप्प हुए हैं।

पाकिस्तान में रहने वाले बलूचिस्तान के बलूच अब चीन के बढ़ते निवेश के कारण नाराज़ हैं। चीन की एक कपनी की नज़र बलूचिस्तान में सोने और ताम्बे के खदानों पर थी, जिसके बाद उसने खनन का ठेका भी ले लिया। बलूचिस्तान प्रांत के चागी जिले में स्थित सैंडक के सैंडक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट पर फिर से काम शुरू हो गया है। चीन की कम्पनी मेटालर्जिकल कॉर्पोरेशन को अगले 10 सालों के लिए ये टेंडर सौंप दिया गया है।

पाकिस्तान में चीन की इस कंपनी को सैंडक मेटल्स लिमिटेड या एसएमएल के नाम से रजिस्टर किया गया है। इससे बलूचिस्तान में गुस्सा व्याप्त हो गया है और चीन-पाकिस्तान की मिलीभगत के खिलाफ विरोध जताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि चीन उनके इलाक़े से खनिज चुरा-चुरा कर अपने देश में ले जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर 2001 से ही काम शुरू हो गया था। इसके लिए चीन को बार-बार एक्सटेंशन दिया गया।

2002 में इस प्रोजेक्ट को 10 साल के लिए चीन की कम्पनी को सौंपा गया था। इसके बाद 2012 में 10 साल पूरे होने पर फिर से उसे 5 साल का एक्सटेंशन दिया गया। 2017 में चीन के डर से पाकिस्तान ने फिर से एक्सटेंशन दिया। अब 2020 में फिर से इस प्रोजेक्ट को 15 वर्षों के लिए आगे बढ़ाया गया था। पाकिस्तान सरकार इस प्रोजेक्ट के माध्यम से 4.5 करोड़ डॉलर के निवेश की उम्मीद कर रही है।

पाकिस्तान के लोगों का दावा है कि इस खादान में 40 करोड़ टन से भी अधिक धातुओं (सोना और ताम्बा) के भण्डार मौजूद हैं। जहाँ बलूचिस्तान को पाकिस्तान ने वर्षों से अपने मुल्क का सबसे गरीब प्रान्त बना कर रखा हुआ है, प्रान्त को पाकिस्तान से आज़ाद कराने की भी मुहीम चल रही है। 2005 में पाकिस्तान ने फ़ौज के जरिए दमनकारी अभियान चलाया था। कराची स्टॉक एक्सचेंज पर हुए हमले के लिए भी बलूचिस्तान के संगठन को जिम्मेदार बताया गया था।

भारत के एक और हिस्से पर चीन की नजर, डेपसांग समतल क्षेत्र में कर रहा अवैध निर्माण

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनाव को कम करने के लिए चार बार कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता हो चुकी है। इसके बावजूद डेपसांग समतल क्षेत्र और दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में चीन अवैध निर्माण करा रहा है। भारत ने इन गतिविधियों का मुद्दा सेना के अधिकारियों की बैठक में उठाया है।

भारत ने भी चीन की चुनौती से निपटने के लिए कमर कस ली है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने उनके चीनी समकक्ष सहित विशेष प्रतिनिधियों से एलएसी पर सैन्य निर्माण के मुद्दे को हल करने के लिए बातचीत की है। जिसके बाद भारत कूटनीतिक और सैन्य स्तरों समेत चीन के साथ लगातार बातचीत करके हर मुद्दे को सुलझा रहा है।

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, चीन के साथ चल रही बातचीत के दौरान हाल ही में भारत ने चीन को साफ़ साफ़ समझाया है कि उसने जो धूर्तता की, वो सबके सामने है। पहले सैन्य अभ्यास के नाम पर चीन ने पूर्वी लद्दाख में LAC पर सैनिकों को बड़ी संख्या में युद्ध-सामग्री के साथ तैनात किया था। जिसे कमर्शियल सैटेलाइट की मदद से देखा जा सकता है।

सूत्रों ने बताया कि भारतीय पक्ष ने डेपसांग मैदानों और डीबीओ क्षेत्र में चीन के बिल्डअप और निर्माण गतिविधियों के मुद्दे पर अपनी आपत्ति जताई है। भारतीय सेना की गश्त ने चीनी सेना द्वारा पेट्रोलिंग प्वाइंट 10 पर रुकावट पैदा करने का भी मुद्दा उठाया और कहा कि पेट्रोलिंग प्‍वाइंट 13 पर चीनी सेना बड़े स्तर पर निर्माण कार्य में लगी हुई है।

डेपसांग मुद्दे को प्रमुखता से उठाने से पहले, भारतीय पक्ष गलवन घाटी (पीपी -14), पीपी -15, हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और फिंगर क्षेत्र सहित चार घर्षण बिंदुओं पर विस्थापन प्रक्रिया पर चर्चा कर रहा था। कई दौर की चर्चाओं के बाद, दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी थी, जिसके बाद चीनी सेना पीछे हट गई थी। दोनों देशों के बीच हालात 15 जून को गलवन घाटी में हिंसक झड़प के बाद बिगड़े। इस झड़प में दोनों पक्षों के सैनिकों ने अपनी जान गंवा दी थी।

दोनों पक्षों के बीच हुई बैठक के दौरान कई विषयों पर चर्चा हुई। डेपसांग मुद्दे को प्रमुखता से उठाने से पहले भारतीय पक्ष गलवान घाटी (PP-14), PP-15, हॉट स्प्रिंग्‍स, गोगरा और फिंगर एरिया सहित चार बिंदुओं पर विस्‍थापन प्रक्रिया पर चर्चा कर रहा था। कई दौर की चर्चा के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी थी। जिसके बाद चीनी सेना पीछे हट गई थी।  15 जून को भारत और चीनी सेना के बीच हुई खूनी झड़प के बाद युद्ध जैसे हालात बने हुए थे जिसे आपसी बातचीत के जरिए सामान्य किया गया वहीं दोनों ही देशों की सेना के बीच तय हुआ कि, अपनी पुरानी स्थित‍ि में वापस आएँगे।

पाकिस्तान में मिली 1700 साल पुरानी गांधार सभ्यता की बुद्ध मूर्ति ‘गैर-इस्लामिक’ कहकर मजदूरों ने किया चकनाचूर: गिरफ्तार

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में तख्त-ए-बाही के पास एक घर में खुदाई के दौरान लगभग 1,700 साल पुरानी बुद्ध प्रतिमा को एक स्थानीय ठेकेदार ने मजहबी नेताओं के इशारे पर ध्वस्त कर दिया। इसके पीछे कारण यह था कि इस्लाम में बुतों, प्रतिमाओं और अवशेषों को गैर-इस्लामिक माना जाता है।

स्थानीय पुलिस ने पुरातन अवशेषों के अधिनियम के तहत एक प्राथमिकी दर्ज कर बुद्ध की इस मूर्ति को तोड़ने वालों को गिरफ्तार कर लिया है।

बता दें कि यह मूर्ति मर्दन इलाके के ‘तख्त भाई क्षेत्र’ (तख़्त-ए-बाही/Takht-i-Bahi – Throne of Origins) में मजदूरों को घर की नींव की खुदाई करते समय बरामद हुई थी, जो कि ऐतिहासिक गांधार सभ्यता का एक हिस्सा था। इसी कारण तख्त भाई क्षेत्र श्रीलंका, कोरिया और जापान के लोगों के लिए एक पर्यटन स्थल है। गांधार सभ्यता उपमहाद्वीप के इतिहास में उल्लेखित उन्नत शहरी बस्तियों में से एक है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय लोगों ने बताया कि खुदाई के दौरान जब मूर्ति मिली थी, तो ‘स्थानीय मजहबी नेताओं ने आकर कहा, “बुद्ध की इस मूर्ति को तोड़ो।” उनकी ही सलाह पर वहाँ के ठेकेदार और मजदूरों ने मूर्ति को हथौड़े से तोड़ दिया।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें मजदूर खुदाई में मिली इस बुद्ध प्रतिमा को एक बड़े हथौड़े से तोड़ते हुए इस ‘गैर-इस्लामिक’ अवशेष के खिलाफ नाराजगी प्रकट करते हुए नारेबाजी भी कर रहे हैं।

स्थानीय मीडिया ने पाकिस्तान पर्यटन विभाग के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि अधिकारियों ने इस घटना पर ध्यान दिया है और इस मामले की जाँच कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे तोड़ने का वीडियो शेयर करते हुए चिंता भी व्यक्त की है।

खैबर पख्तूनख्वा के पुरातत्व और संग्रहालय के निदेशक अब्दुल समद ने कहा कि अधिकारियों ने उस क्षेत्र को चिन्हित कर लिया है, जहाँ पर घटना हुई है और इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने कहा था, “हम क्षेत्र में मौजूद हैं और हम जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे।”

गौरतलब है कि ‘तख्त भाई’ अपने ऐतिहासिक अवशेषों के लिए जाना जाता है क्योंकि यह गांधार सभ्यता का एक हिस्सा था। वर्ष 1836 में पहली बार जब यहाँ खुदाई की गई थी, तब पुरातत्वविदों ने क्षेत्र में मिट्टी, प्लास्टर और टेराकोटा से बने सैकड़ों अवशेष प्राप्त किए थे।

पाकिस्तान के गांधार क्षेत्र में तख्त-ए-बाही और बौद्ध शहर के अवशेष सहार-ए-बहलोल के बौद्ध खंडहर बौद्ध धर्म के सबसे प्रभावशाली अवशेषों में से एक हैं।

तख्त-ए-बाही (मूल का सिंहासन) के बौद्ध मठ परिसर की स्थापना पहली शताब्दी में की गई थी। ऊँची पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के कारण, यह लगातार आक्रमणों से बचा रहा और अब भी असाधारण रूप से संरक्षित है। इसके पास में ही सहार-ए-बहलोल के खंडहर हैं, जो उसी अवधि का एक छोटा सा किलेबंद शहर है।

तख्त-ए-बाही मर्दन जिले से लगभग 30 किमी दूर स्थित है। इस क्षेत्र में न केवल पुरातत्व स्थल हैं, बल्कि बौद्ध और राजा अशोक के समय में तेरह से चौदह प्राचीन स्थल मौजूद हैं। बुद्ध की मूर्तियाँ और ऐतिहासिक शयन स्तूप भी यहाँ पाए जाते हैं।

1836 के आसपास ब्रिटिश शासन के दौरान खंडहर की खोज की गई थी और 1852 में खुदाई शुरू हुई थी। यूनेस्को ने 1980 में पुरातत्व स्थल को एक अंतरराष्ट्रीय विरासत स्थल घोषित किया।