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पुलिस के अनुरोध पर 7 दिन में लीजिए निर्णय: दिल्ली दंगों पर LG का अरविन्द केजरीवाल को अल्टीमेटम

देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुए हिंसक झड़प और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शन के मामलों को लेकर उपराज्यपाल (LG) अनिल बैजल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि मामले पर दिल्ली पुलिस की ओर से पैरवी करने के लिए छह वरिष्ठ वकीलों को नियुक्त करने के विभाग के प्रस्ताव पर सीएम केजरीवाल एक सप्ताह के अंदर निर्णय लें।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के सूत्रों के मुताबिक उप-राज्यपाल (LG) ने खत में कहा है कि कार्यवाहक गृहमंत्री मनीष सिसोदिया, दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुए जबकि पुलिस ने इसके लिए विस्तारपूर्वक स्पष्टीकरण भी दिया था।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए हिंसक झड़प मामले में दिल्ली पुलिस ने 85 मामलों पर पैरवी करने के लिए छह वरिष्ठ वकीलों को नियुक्त करने और सीएए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित 24 मामलों को विशेष लोक अभियोजक को सौंपने का प्रस्ताव दिया है।

LG अनिल बैजल ने सीएम अरविंद केजरीवाल को लिखे खत में कहा कि उन्होंने गृह मंत्री से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव पर सहमति जताने के लिए अनुरोध किया है। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार (जुलाई 17, 2020) को मतभेदों को दूर करने के लिए कोरोना काल में LG और सिसोदिया के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक बैठक आयोजित की गई लेकिन वहाँ भी इस मसले का कोई समाधान नहीं निकल पाया।

उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा लिखे पत्र के हवाले से एक सूत्र ने कहा,

“चूँकि मतभेद अभी खत्म नहीं हुआ है तो मैं मुख्यमंत्री से इस मामले में जल्द से जल्द राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार कानून, 1991 की धारा 45 के तहत जीएनसीटीडी के टीबीआर के 49 नियम के तहत मंत्री परिषद को भेजने का उनुरोध करता हूँ। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आग्रह किया जाता है कि मंत्रिमंडल का फैसला शीघ्रता से एक हफ्ते के भीतर बता दिया जाए।”

बताया जा रहा है कि अगर पत्र में दिए समय के अंदर सहमति नहीं बनती है तो एलजी अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे। सूत्रों के मुताबिक अगर दिल्ली मंत्रिमंडल पुलिस के अनुरोध से सहमत नहीं होता है तो उपराज्यपाल के पास संविधान के अनुच्छेद 239एए(4) के प्रावधानों के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने का विकल्प होगा।

गौरतलब है कि AAP सरकार और उपराज्यपाल के बीच फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में साम्प्रदायिक दंगों से जुड़े मुकदमों में पैरवी के लिए 11 विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति को लेकर जून में सबसे पहले टकराव सामने आया था। तब दिल्ली सरकार ने इस मुद्दे पर पुलिस के अनुरोध को खारिज कर दिया था और उपराज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 239एए(4) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया था।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले उपराज्यपाल (LG) अनिल बैजल ने केजरीवाल सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में केवल दिल्ली के लोगों का इलाज किया जाएगा।  बाहर के मरीजों का इलाज नहीं किया जाएगा। उपराज्यपाल ने यह फैसला डीडीएमए चेयरपर्सन होने की हैसियत से लिया था।

इस्लाम अपनाओ या अल्लाह के क्रोध का सामना कर मरने को तैयार रहो: ISIS की राष्ट्रवादी जनम टीवी को धमकी

इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने कथित तौर पर केरल के राष्ट्रवादी चैनल, जनम टीवी के ऑफिसों में तोड़-फोड़ और नुकसान पहुँचाने की धमकी दी है। इसके अलावा उसने इस चैनल में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी दी है।

आतंकवादी संगठन द्वारा दी गई धमकियों के बाद, राज्य के पुलिस प्रमुख लोकनाथ बेहरा ने पुलिस विभाग को जनम टीवी के कार्यालयों में सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया है।

ISIS ने इंस्टाग्राम पर जनम टीवी को दी धमकी

इस्लामिक स्टेट (ISIS) की केरल इकाई ने कथित तौर पर इंस्टाग्राम पर चैनल को धमकी दी है। आतंकी संगठन ने चैनल के कर्मचारियों को इस्लाम के धर्म में परिवर्तित होने या पूरी तरह से खत्म हो जाने के लिए धमकाया।

ISIS द्वारा जनम टीवी को दी गई धमकी

आतंकवादी संगठन ने इंस्टाग्राम पर भेजे गए मैसेज में लिखा था, “मुजाहिदीन का संदेश जनम टीवी को! हम आपको इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए आमंत्रित करते हैं या फिर दुनिया को अलविदा कहने और अल्लाह के क्रोध और दंड का सामना करने के लिए तैयार हो जाओ।”

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जनम टीवी के टीआरपी रेटिंग्स में भारी वृद्धि देखी गई है और अब यह राज्य के शीर्ष पाँच मलयालम समाचार चैनलों में दिखाई देता है। उक्त चैनल केरल में एक राष्ट्रवादी परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है जो सुदूर-वाम मीडिया में हावी है।

आ गई राम मंदिर के भूमि पूजन की तारीख, PM मोदी को बुलावा: 161 फीट होगी ऊँचाई, बनेंगे 5 गुम्बद

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के भूमि-पूजन के लिए दो तारीख की है, जिनमें से किसी एक पर पीएम मोदी मुहर लगाएँगे और मंदिर निर्माण शुरू हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए 3 अगस्त और 5 अगस्त की तारीख भेजी गई है, जिनमें से किसी एक को PMO फाइनल करेगा। सामरिक मसलों, प्रधानमंत्री मोदी के व्यस्त शेड्यूल और नए कारकों को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला लिया जाएगा।

ट्रस्ट के सदस्य चंपत राय ने जानकारी दी कि गुजरात के भव्य सोमनाथ मंदिर का निर्माण करने वाले सोमपुरा मार्बल ब्रिक्स को ही राम मंदिर के निर्माण के लिए जिम्मेदारी दी जाएगी। मंदिर बनाने के लिए 10 करोड़ परिवारों द्वारा दान दिया जाएगा, ऐसा बताया गया है। ट्रस्ट ने कहा है कि राम मंदिर निर्माण में वित्त की कमी नहीं होगी। मंदिर की नींव का निर्माण मिट्टी की क्षमता के आधार पर 60 मीटर नीचे किया जाएगा।

लार्सन ऐंड टुब्रो कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है कि वो मिट्टी के परीक्षण के लिए नमूने जुटाए। नक्शे के आधार पर जल्द ही नींव रखने का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। सर्किट हाउस मे हुई बैठक में महंत नृत्य गोपाल दास सहित तमाम ट्रस्टी मौजूद रहे। शनिवार (जुलाई 18, 2020) की शाम 4 बजे शुरू हुई बैठक से पहले विश्व हिन्दू परिषद और आरएसएस के लोगों ने संतों के साथ मुलाकात कर इस विषय में बातचीत की।

बताया गया है कि राम मंदिर मे कुल 5 गुलम्बद होंगे और मंदिर की ऊँचाई 161 फीट होगी। चंपत राय ने बताया कि देश की सीमा पर कई समस्याएँ चल रही हैं, ऐसे में पीएम मोदी के आने या न आने पर अंतिम फैसला PMO ही करेगा। उन्हें महंत दास ने निमंत्रण भेजा है। ट्रस्ट के सभी सदस्यों ने अब तक के समतलीकरण के कार्यों पर संतुष्टि जताते हुए बताया कि 3 वर्षों मे राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने की उम्मीद है।

उधर बाबरी मस्जिद के पैरोकार रहे इकबाल अंसारी ने भी कहा कि वो अयोध्या में प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए तैयार है। इकबाल ने सुर बदलते हुए कहा कि जो संत समाज की इच्छा है, वही उसकी भी है। सभी संतों ने दोहराया कि जल्द से जल्द मंदिर का निर्माण शुरू कराया जाए। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव रहे नृपेन्द्र मिश्रा ने भी अयोध्या का दौरा किया था और व्यवस्थाओं का जायज लिया था।

इस दौरान श्रीराम जन्मभूमि से जुड़ी कुछ अफवाहें भी सामने आने लगीं थीl जैसे राम मंदिर निर्माण का समय नज़दीक आ रहा है वैसे इस मामले से संबंधित अफ़वाहों का बाज़ार भी गर्म हो रहा हैl एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अयोध्या में सर्व धर्म स्थल बनाना चाहते हैं। सच्चाई ये है कि अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा। सर्व धर्म स्थल बनाने का पीएम का कोई इरादा नहीं है। अयोध्या में सर्व धर्म स्थल बनाने से राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्रा ने अफवाहों की बातों से इनकार किया है।

इस्लामाबाद में फिर से शुरू हो श्रीकृष्ण मंदिर का निर्माण: Pak के ही मानवाधिकार संगठन ने की माँग

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हिन्दू मंदिर बनाए जाने की माँग एक बार फिर से उठी है। यह माँग पाकिस्तान के ही एक मानवाधिकार संगठन ने की है। ह्यूमन राइट्स फ़ोकस पाकिस्तान (HRFP) नाम के मानवाधिकार संगठन ने इस्लामाबाद में मंदिर निर्माण को फिर से शुरू करने की माँग की है, जिसे इस्लामवादियों के दबाव के बाद रोक दिया गया था।

ह्यूमन राइट्स फ़ोकस पाकिस्तान के अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने सोशल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से श्री कृष्ण मंदिर परिसर के खिलाफ नकारात्मक प्रोपेगेंडा फैलाने की निंदा की। इसके लिए उन्होंने धार्मिक और राजनीतिक माध्यमों की भी आलोचना की।

बता दें कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में पहला कृष्ण मंदिर बनने जा रहा था, जो सहिष्णुता का प्रतीक हो सकता था, मगर हिंसा और विवाद ने एक बार फिर से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा को उजागर किया। कई मौलवियों ने फतवा और फरमान जारी किया कि यहाँ पर मंदिर नहीं बन सकता, क्योंकि यह एक मुस्लिम देश है।

वाल्टर ने कहा, “हिंदू मंदिर का निर्माण उसी तरह सामान्य होना चाहिए, जैसे मस्जिद या अन्य धर्मों के पूजा स्थल किसी भी देश की राजधानी और दुनिया भर के क्षेत्रों में बन सकते हैं।”

नवीद वाल्टर ने कहा कि यदि किसी के पूजा स्थल का स्वामित्व और वित्त पोषण राज्य द्वारा किया जाता है तो राज्य ने दूसरों के लिए अलग नीति क्यों अपनाई?

वाल्टर ने कहा, “प्रार्थना और पूजा स्थल हर नागरिक और हिंदुओं सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों का एक बुनियादी अधिकार है।” उन्होंने कहा कि 1947 में विभाजन के समय, पाकिस्तान की लगभग 23 प्रतिशत आबादी गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक थे, लेकिन आज वे घटकर 5 प्रतिशत रह गए और अगर भेदभावपूर्ण प्रथाओं को जारी रखा जाएगा तो वे और भी कम हो जाएँगे।

नवीद वाल्टर ने सवाल किया कि क्या हिंदुओं के मंदिर निर्माण पर रोक का मतलब यह नहीं है कि देश का भूमि स्वामित्व केवल उन चरमपंथियों का है जो किसी भी मंदिर, चर्च, पूजा स्थल की स्थापना के लिए अनुमति देने का निर्णय ले सकते हैं अथवा नहीं?

वाल्टर ने कहा कि “न केवल पूजा स्थलों, कब्रिस्तानों, सामुदायिक संस्थानों के बारे में इसके कई उदाहरण हैं, बल्कि इसे व्यक्तिगत मामलों में भी गंभीर रूप से देखा गया है।

उन्होंने नदीम जोसेफ का हालिया मुद्दा के बारे में बताया, जिसका पेशावर में मुस्लिम पड़ोसियों द्वारा हत्या कर दी गई थी। नदीम जोसेफ ईसाई समुदाय से था। उसने पेशावर में मुस्लिम इलाके में घर खरीदा था, जिससे नाराज पड़ोसियों ने नदीम और उसकी सास पर अंधाधुंध गोलियाँ चला दी। जिसमें दोनों की मौत हो गई। इससे पहले नदीम को घर छोड़ने की धमकी भी दी गई थी, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रहा।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में इस्लामवादियों ने हाल ही में देश की राजधानी इस्लामाबाद में श्री कृष्ण मंदिर के निर्माण का विरोध किया था। इसके निर्माण के खिलाफ फतवा भी जारी किया गया था। फतवे से इतर, इस्लामाबाद हाईकोर्ट में भी मंदिर निर्माण के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। बाद में, जिस चारदीवारी का निर्माण किया गया था, उसे एक इस्लामवादी ने ध्वस्त कर दिया था, जिसने यह संकल्प लिया था कि वह वहाँ कभी भी हिंदू मंदिर का निर्माण नहीं होने देगा।

इससे संबंधित कई वीडियो सामने आए। एक वीडियो में मंदिर निर्माण की जगह पर एक मुस्लिम युवक खुली जमीन पर खड़े होकर अजान दे रहा है। इसके अलावा एक अन्य वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे कुछ पाकिस्तानी कट्टरपंथी मंदिर के लिए रखी नींव को उजाड़ते दिख रहे हैं और एक-एक ईंट उठाकर फेंक रहे हैं।

इसी तरह एक दूसरे वीडियो में एक मौलवी हिंदुओं से अपनी घृणा जाहिर करते हुए पाकिस्तानी हुकूमत को भी धमकाने वाले लहजे में सचेत कर रहा है।

मौलवी कहता है, “मस्जिदों का निर्माण तो यहाँ चंदा से हो रहा है। लेकिन मंदिर का निर्माण पाकिस्तान के खजाने से पैसे निकालकर किया जा रहा है।” मौलवी आगे आवाज ऊँची करते हुए कहता है, “अगर तुम मंदिर बनाओगे तो पाकिस्तानी गैरतमंद कौम तुम्हारी गर्दनें काट कर मंदिर के बाहर फिरने वाले कुत्तों को सामने डाल देंगी।”

अब दिल्ली में एक और दुर्लभ रोग की दस्तक… कोरोना संक्रमित बच्चों में मिल रहे खतरनाक ‘कावासाकी’ के लक्षण

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई अस्पतालों में कोरोना वायरस संक्रमित बच्चों में कावासाकी (Kawasaki) नाम की बीमारी के लक्षण पाए गए हैं। इन लक्षणों में शरीर पर चकत्ते पड़ना और सूजन शामिल है। कावासकी एक किस्म का सिंड्रोम है, जिसके होने की वजह अब तक नहीं पता चली है। इसमें तेज बुखार आता है। यह बीमारी मुख्य रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है।

यह रोग वास्कुलिटिस का एक रूप है, जिसमें शरीर की रक्त वाहिकाओ में सूजन आ जाती है। जिसके चलते बुखार आमतौर पर पाँच दिनों से अधिक समय तक रहता है और सामान्य दवाओं से इस बीमारी पर कोई असर नहीं होता है।

पिछले कुछ महीनों में दिल्ली के कई अस्पतालों ने बताया है कि कोविड-19 लक्षणों वाले बच्चों में कावासाकी जैसी दुर्लभ बीमारी से जुड़े लक्षण सामने आए हैं। देश में बच्चों के लिए बने अस्पतालों में एक दिल्ली स्थित कलावती सरन ने बुखार, चकत्ते, श्वसन और जठरांत्र संबंधी लक्षणों के साथ बच्चों के पाँच-छह मामलों की सूचना दी है। यह वे लक्षण हैं जो कावासाकी रोग में पाए जाते हैं। यह सभी बच्चे कोविड पॉजिटिव पाए गए थे। इनमें से एक बच्चे की मौत भी हो गई है।

कलावती सरन अस्पताल के बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ वीरेंद्र कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “ये सबसे आम लक्षण हैं जो दुनिया भर में प्रचलित हैं। अन्य वायरस भी इस सिंड्रोम को की वजह बन सकते हैं लेकिन हम महामारी के बीच में हैं। यह संभावना है कि बीमारी कोविड -19 से संबंधित हो।”

डॉ वीरेंद्र कुमार ने आगे कहा, “हम ये बिल्कुल नहीं कह रहे हैं कि वे कावासाकी से संक्रमित थे, लेकिन उनमें कावासाकी जैसे लक्षण थे। बच्चों को अनएक्सप्लेन्ड टैचीकार्डिया था और उनमें से कुछ सदमे की स्थिति में थे।”

इस बारे में बीएलके सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की पीडिएट्रिक्स क्रिटिकल केयर की डॉक्टर रचना शर्मा ने बताया कि ज्यादातर मामले में कोविड का असर बच्चों में नहीं होता है। अगर किसी में इंफेक्शन होता भी है, तो उसमें लक्षण नहीं आते हैं। लेकिन अब देश में कई ऐसे मामले देखे जा रहे हैं, जो कावासाकी बीमारी की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

रचना शर्मा ने आगे बताया, “यह मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम भी बहुत सारे पाचन मुद्दों का कारण बनता है, जैसे कि कुछ ऐसे बच्चे होते हैं जिन्हें पेट में दर्द, उल्टी और लूज़ मोशन होते हैं। यदि आप लक्षणों को जल्दी नहीं पहचानते हैं, तो उनके घातक परिणाम हो सकते हैं। कुछ बच्चों की किडनी फेल भी हो सकती है।”

बीएलके अस्पताल ने ऐसे दो मामले देखे गए हैं, जबकि सर गंगा राम अस्पताल ने ऐसे छह मामले सामने आए हैं। डॉ शर्मा ने यह भी कहा कि “कोविड मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम” में आम तौर पर 50-60% मामलों में दिल प्रभावित होता है और बच्चा सदमे में चला जाता है।

कावासाकी के लक्षणों की बात करें तो इसमें बच्चे को तेज बुखार चढ़ता है। आँखें लाल हो जाती हैं और गर्दन के पास गठान होने लगती है। इतना ही नहीं, होठ और जीभ भी काफी लाल हो जाती है। शरीर में जगह-जगह रेशेज होने लगते हैं। शरीर पर पड़ने वाले चकत्तों में सूजन भी आने लगती है।

यह बीमारी शरीर की रक्तवहिनियों से जुड़ी होती है। इसमें रक्तवाहिनी की दीवारों में सूजन होती है और यह सूजन हृदय तक रक्त पहुँचाने वाली धमनियों को कमजोर कर देती है। वहीं इसकी गंभीर होने पर मरीज में हार्ट फेल्यर या हार्ट अटैक होने के चांस बढ़ जाते हैं। कहा जा रहा है कि कावासाकी पहले हुए किसी वायरस के इंफेक्शन के रिएक्शन से होती है।

लिबरलों ने दी BJP में शामिल होने की सलाह तो कॉन्ग्रेस ने बताया डर से मजबूर: मायावती पर चालू हुए चौतरफा हमले

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अशोक गहलोत की आलोचना क्या कर दी, लिबरल गैंग उन पर बिफर पड़ा है। कॉन्ग्रेस ने तो यहाँ तक कह दिया कि वो भाजपा के डर के कारण मजबूर हैं। वहीं पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी ने उन्हें भाजपा में शामिल होने की सलाह भी दे डाली। राजस्थान फोन टैपिंग विवाद के बीच राज्य में मायावती द्वारा राष्ट्रपति शासन की माँग करने से कॉन्ग्रेस को काली मिर्ची लग गई है।

आरफा ने मायावती पर तंज कसते हुए कहा कि ‘बहन जी’ द्वारा इस तरह राजस्थान सरकार को बर्ख़ास्त करने की माँग जँच नहीं रही है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि अच्छा यही रहेगा कि मायावती आधिकारिक रूप से भाजपा में शामिल हो ही जाएँ। उन्होंने सवाल दागा कि मायावती आखिर कब तक भाजपा का सिर्फ़ ‘बाहर से समर्थन’ करेंगी? इस पर आरफा को भी कई लोगों ने कॉन्ग्रेस में शामिल होने की सलाह दे डाली।

कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि मायावती की कुछ मजबूरियाँ हैं, जिनके कारण वो निःसहाय होकर भाजपा की मदद करने के लिए ऐसे-ऐसे बयान दे रही है। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पवन खेरा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने ये स्वीकार किया है कि राजस्थान में उसने ‘हॉर्स ट्रैडिंग’ की है। उन्होंने हरियाणा सरकार पर राजस्थान की एजेंसी को जाँच से रोकने का आरोप लगाया। मायावती ने गहलोत पर आरोप लगाते हुए कहा था:

“जैसा कि विदित है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहले दल-बदल कानून का खुला उल्लंघन व बसपा के साथ लगातार दूसरी बार दगाबाजी करके पार्टी के विधायकों को कॉन्ग्रेस में शामिल कराया और अब जग-जाहिर तौर पर फोन टेप कराके इन्होंने एक और गैर-कानूनी व असंवैधानिक काम किया है। इस प्रकार, राजस्थान में लगातार जारी राजनीतिक गतिरोध, आपसी उठा-पटक व सरकारी अस्थिरता के हालात का वहाँ के राज्यपाल को प्रभावी संज्ञान लेकर वहाँ राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करनी चाहिए, ताकि प्रदेश में लोकतंत्र की और ज्यादा दुर्दशा न हो।”

बता दें कि सितंबर 2018 में राजस्थान में इतिहास ने एक दशक बाद अपनेआप को दोहराया था क्योंकि 2009 में भी अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री थे और तब भी उन्होंने बसपा के 6 विधायकों को कॉन्ग्रेस के पाले में लाया था। तब भी बसपा के खाते में 6 सीटें ही थीं। सोमवार (सितम्बर 16, 2019) देर रात राजस्थान के राजनीतिक पटल पर काफ़ी उठापटक हुई थी और विधानसभा में बसपा 6 से सीधा शून्य पर आ गई थी।

पश्चिम बंगाल में टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर किया हमला, फोन और गाड़ियाँ भी छीनी: अर्जुन सिंह

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के जगतदल में, भाजपा कार्यकर्ताओं ने शनिवार (जुलाई 18, 2020) को अम्फान राहत सामग्री वितरण में कथित भ्रष्टाचार, पुलिस द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न और कई अन्य मामलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कथित तौर पर सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया।

बैरकपुर के भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने बताया कि तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा हुए हमले में कई लोग घायल हुए हैं, कुछ लोगों के मोबाइल फोन और गाड़ियाँ भी छीन लिए गए हैं।

इससे पहले शनिवार को उत्तर 24 परगना के श्यामनगर इलाके में भाजपा की एक सभा में कथित तौर पर क्रूड बम फेंके गए थे। दरअसल, बैरकपुर के सांसद अर्जुन सिंह के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा अपने कार्यकर्ताओं पर कथित अत्याचारों के खिलाफ रैली निकालने की योजना बनाई।

रैली शुरू होने से पहले अज्ञात उपद्रवियों ने कच्चे बम फेंके जिससे कुछ प्रदर्शनकारी घायल हो गए। हालाँकि, भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा बम विस्फोट की घटना के बाद एक विशाल रैली निकाली गई।

अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के शासन में लोकतंत्र की “हत्या” की जा रही है और भाजपा कार्यकर्ताओं और एक विधायक की हालिया मौतों का हवाला देते हुए सबूत के रूप में कहा गया है कि सत्ता पक्ष राज्य मशीनरी का उपयोग करके बंगाल में विपक्ष को मार रहा है।

अर्जुन सिंह ने ट्विटर पर लिखा, “दीदी (ममता बनर्जी), बम और गोलियों से आज जिन्हें मारने की कोशिश की है आपने, वे भी बंगाल के ही बेटे हैं। क्या उनका दोष यही है कि वे बंगाल के हैं, बांग्लादेश के नहीं? देखिए दीदी की खूनी राजनीति।”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा है, “पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या, सिर्फ ममतातंत्र बच गया है। आज बैरकपुर में दीदी के कुशासन के खिलाफ एक जुलूस का आह्वान किया था। हर इलाके में पुलिस की निगरानी में बीजेपी कर्मियों पर बम-गोलियाँ चलाई जा रही हैं। जुलूस पर हमले हो रहे हैं।”

गौरतलब है कि गुरुवार (जुलाई 16, 2020) को नादिया के कृष्णानगर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में भीमपुर थाना अंतर्गत गलकाटा गाँव में बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ता बापी घोष की हत्या कर दी गई थी। पश्चिम बंगाल बीजेपी ने इस हत्या के लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहाराया था।

यह घटना भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय के पश्चिम बंगाल के बिंदल गाँव के पास उनके आवास पर लटके पाए जाने के दो दिन बाद आई थी। हेमताबाद के भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय का मृत शरीर एक फंदे से झूलता हुआ पाया गया था। भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय रविवार (जुलाई 12, 2020) को ही अपने पैतृक गाँव बिंडोल पहुँचे थे।

शिवसेना सांसद के बेटे ने ट्रैफिक पुलिस के साथ की बदसलूकी, दी नौकरी से निकलवाने की धमकी: वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर इस समय शिवसेना सांसद के बेटे की गुंडागर्दी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल हुए वीडियो में शिवसेना सांसद विनायक राउत के बेटे योगेश राउत को एक ट्रैफिक पुलिस अधिकारी के साथ बत्तमीजी करते देखा जा रहा है। घटना कोंकण के कणकवली इलाके की है। जहाँ कथित रूप से नशे में धुत एमपी के बेटे योगेश को ट्रैफिक नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए देखा गया। इसके साथ उसने पुलिसकर्मी को नौकरी से निकालने की धमकी भी दी।

भारी बरसात में ड्यूटी कर रहे ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने बताया कि, विधायक के बेटे योगेश राउत ने मुझसे गालीगलौज किया। इसके साथ ही उन्होंने मुझे नौकरी से निकलवाने की धमकी दी। विनायक राउत वर्तमान में कोंकण के रत्नागिरी-सिंधूदुर्ग लोकसभा सीट से शिवसेना सांसद है।

बता दें शिवसेना सांसद विनायक राउत के बेटा योगेश ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर रहा था। ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने विनायक राउत के बेटे योगेश को गाड़ी पीछे लेने के लिए कहा तो योगेश आगबबूला हो गया और ट्रैफिक हवलदार परब से ऊँची आवाज में बात करने लगा। जब पुलिसकर्मी ने पलटकर योगेश को जवाब दिया तब सांसद का बेटा पुलिस हवालदार को धमकी देने लगा।

शिवसेना सदस्य ने इससे पहले नकली नेपाली व्यक्ति को किया था टॉर्चर

गौरतलब है कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने नेपाल में भगवान राम के जन्म का दावा करने के बाद बीते शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया। इसमें एक नेपाली युवक का सिर मुँडवाकर उसकी खोपड़ी पर जय श्री राम लिखते देखा गया। बाद में पता चला कि उक्त शिवसैनिक ने 1000 रुपए देकर यह नाटक रचा था।

वीडियो वायरल होने के बाद वाराणसी की भेलूपुर पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए मुकदमा दायर किया। जाँच से पता चला कि इस हरकत को अंजाम देने वाले शख्स का नाम अरुण पाठक है। हमने अरुण पाठक की फेसबुक प्रोफाइल खँगाली। और अरुण की प्रोफाइल खोलते ही हमें उसके शिवसेना से जुड़े होने के प्रमाण मिले। जिसने यह पूरा नाटक रचा था।

उसने अपने फेसबुक प्रोफाइल के बॉयो में लिखा है, “बाला साहेब का शिष्य एवं एक सनातन।” इसके अलावा अन्य जानकारियों में भी इस बात का उल्लेख है कि वो साल 2000 से 2003 तक शिवसेना का जिलाध्यक्ष रह चुका है। उसकी फेसबुक पर अपलोड तस्वीर देखने पर भी मालूम चलता है कि शिवसेना के बड़े नेताओं के साथ भी उसका उठना-बैठना रहा है। उसकी टाइमलाइन पर कई पोस्टर भी हैं। इनमें बाला साहेब की तस्वीर साफ देखी जा सकती है।

बंगाल की प्रज्ञा 2009 में धोखे से बना दी गई थी आएशा: करती थी आतंकी संगठन JMB में महिलाओं की भर्ती, ढाका से गिरफ्तार

ढाका पुलिस की काउंटर टेररिज्म एंड ट्रांसनेशनल क्राइम (सीटीटीसी) की इकाई ने शुक्रवार (जुलाई 17, 2020) को एक आएशा नामक (पहले प्रज्ञा) महिला को गिरफ्तार किया। गिरफ़्तार की गई 25 वर्षीय महिला गैर क़ानूनी संगठन जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) की सदस्य है।   

पूछताछ के दौरान कई हैरान कर देने वाली बातें सामने आई हैं। पूछताछ में उसने बताया कि उसका जबरन धर्मांतरण कराया गया था। असल में वह हिंदू थी, कक्षा 9 में पढ़ती थी तब उसे जबरन इस्लाम धर्म कबूल कराया गया। आएशा का असली नाम प्रज्ञा देबनाथ था।   

आएशा कोलकाता के धनियाकाली पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले गाँव पश्चिम केशाबपुर की रहने वाली थी। पढ़ाई के दौरान उसकी सबसे अच्छी दोस्त मुस्लिम थी। उसके प्रभाव में बेहद खुफ़िया तरीके से प्रज्ञा (आएशा) का धर्म परिवर्तन कराया गया। साल 2009 के दौरान धोखे से उसे इस्लाम धर्म कबूल कराया गया।   

बेहद खुफ़िया तरीके से ही प्रज्ञा को अपना नाम बदलने के लिए भी मजबूर किया गया। जिसके बाद उसे अपना नाम आएशा जन्नत मोहोना रखना पड़ा। इसके अलावा आएशा के शहर में ही रहने वाले सलफ़ी मौलवी की वजह से कट्टरता का शिकार होना पड़ा। कुछ सालों पहले ही प्रज्ञा जेएमबी की महिला इकाई से जुड़े नेताओं के संपर्क में आई। जिसके बाद उसे जेएमबी की सदस्यता दिलाई गई। महिला इकाई की मुखिया असमानी खातून (बोंदी जिबोन) ने आएशा को सदस्यता दिलाने में अहम भूमिका निभाई।   

प्रज्ञा (आएशा) को काम दिया गया था जिसके तहत उसे हिंदू लड़कियों को इस्लाम धर्म स्वीकार करने का लालच देना था। इसके बाद आएशा लड़कियों का कट्टर सलफी मौलवी से परिचय कराती थी। अंत में उन्हें जेएमबी में शामिल करने की तैयारी की जाती थी। ‘जेएमबी’ बंगाल में काफी सक्रिय है और बड़े पैमाने पर यही काम करता है। प्रज्ञा से आएशा बनी गिरफ्तार युवती से अभी और पूछताछ होनी है।   

इस मामले पर डेली स्टार में एक रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई थी जिसमें सीटीटीसी के असिस्टेंट कमिश्नर एसके इमरान हुसैन के बयान का ज़िक्र था। उसके मुताबिक़ आएशा ने साल 2016 से ही ढाका में घूमना शुरू कर दिया था। सबसे पहले उसने नकली जन्म प्रमाण पत्र बनवाया। इसकी मदद से बांग्लादेशी पहचान पत्र भी बनवाया। इतने के अलावा उसके पास एक भारतीय पासपोर्ट भी बरामद हुआ है।   

आएशा को संगठन से फंड इकट्ठा करने की ज़िम्मेदारी भी मिली थी। इमरान हुसैन ने यह भी कहा ‘आएशा ने हाल ही में आमिर हुसैन सद्दाम नाम के बांग्लादेशी युवक से फोन पर शादी की। फिलहाल वह ओमान में रह रहा है। अपने पति के सुझाव पर वह पिछले साल अगस्त महीने से बांग्लादेश में रह रही है। उसने ढाका में घर लिया और शहर के ही केरानीगंज और नारायणगंज इलाके में स्थित मदरसे में धार्मिक शिक्षक बन गई।’   

उसका मुख्य कार्य यही था कि सबसे पहले वह ऐसे युवाओं की पहचान करे जिन्हें आसानी से कट्टरपंथी बनाया जा सकता है। इसे बाद उन्हें जेएमबी की सदस्यता दिलवाना था। इस साल के फरवरी महीने में आएशा (प्रज्ञा) की दिशा निर्देशक अस्मानी खातून गिरफ्तार की गई थी। जिसके बाद उसने मदरसे में पढ़ाना बंद कर दिया था। फिर वह जेएमबी के सोशल मीडिया के सहारे युवाओं को प्रभावित करती थी।   

पुलिस ने अपने द्वारा दी गई जानकारी में यह भी बताया कि पिछले कुछ महीनों में उसने कई युवाओं को जेएमबी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान उसने कई बार अंतरराष्ट्रीय सीमा भी पार की। डेली स्टार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़, गिरफ्तारी के बाद और जाँच के दौरान वह थोड़ी देर के लिए भी परेशान नज़र नहीं आई। जिससे एक बात साफ़ हो जाती है कि वह अपने काम में कितनी माहिर है और उसे अपने लक्ष्य के अलावा बहुत कम बातें समझ आती हैं।   

सबसे पहले वामपंथी सरकारों ने पश्चिम बंगाल में मुस्लिम तुष्टिकरण की शुरुआत की। इसके बाद इस काम को कई कदम आगे लेकर गई तृणमूल कॉन्ग्रेस। जिसके चलते पश्चिम बंगाल में इस्लामी कट्टरपंथियों और मौलवियों के लिए कुछ भी करना बहुत आसान है। पूरे बंगाल में सलफ़ी मौलवियों ने ऐसे हज़ारों मदरसे और मस्जिदें बनाई हैं। जिन्हें खाड़ी के देशों से फंड मिलते हैं, यहाँ कट्टर पंथ और धर्म परिवर्तन के अलावा कुछ और नहीं होता है। जेएमबी के भी तमाम आतंकवादियों ने रिफ्यूजी बन कर बंगाल में शरण ले रखी है।  

LOC पर तैनात भारतीय जवानों की रेकी कर रहे पाकिस्तानी घुसपैठिए को सेना ने दबोचा, पूछताछ जारी

सीमा पर लगातार आतंकियों का सफाया कर रहें सुरक्षाबलों ने शनिवार (18 जुलाई, 2020) को एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को गिरफ्तार किया है। सेना के अधिकारी ने बताया कि घुसपैठिए को कल रात सीमा पार करते हुए देखा गया था। वहीं अब सेना के अफ़सर घुसपैठिए से कड़ी पूछताछ कर जानकरियाँ उगलवाने की कोशिश कर रहे है। खबरों के अनुसार, ये एलओसी के आसपास तैनात जवानों की रेकी करने के लिए आया हुआ था।

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, कल रात राजौरी जिले के नौशेरा के पास लाम सेक्टर में उन्होंने एक अनजाने व्यक्ति को देखा। जो देर रात सीमा के आसपास घूम रहा था। उस व्यक्ति को देख कर सेना चौकन्नी हो गई। इसके बाद जब उस व्यक्ति ने एक प्रायोजित तरीके से सीमा को पार कर भारत में घुसने की कोशिश की तो सेना से सतर्कता दिखाते हुए उसे फौरन गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल सेना के कैम्प में उससे जाँच पड़ताल की जा रही है।

बता दें पाकिस्तान की तरफ से आतंकियों द्वारा घुसपैठ का प्रयास किए जाने की लगातार मिल रही सूचनाओं के आधार पर एलओसी के अग्रिम हिस्सों में चौकसी को बढ़ाते हुए सभी नाका पार्टियों को सचेत किया गया था। पकड़े गए घुसपैठिए से भी सेना के अधिकारी लगातार जानकारी हासिल कर रहें है। इस गिरफ्तारी की जानकारी एसएसपी राजौरी चंदन कोहली ने दी है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान से आए इस घुसपैठिए का कोरोना टेस्ट कराया जाएगा। जिसके बाद इससे जम्मू कश्मीर पुलिस को सौंप दिया जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले 15 जुलाई को जम्मू-कश्मीर में पुंछि जिले के मेंढर में भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटे बालाकोट क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने पीओके के एक नागरिक को गिरफ्तार किया है। वह नियंत्रण रेखा के उस पार से घुसपैठ कर अवैध रूप से भारतीय क्षेत्र में घूम रहा था। सुरक्षाबल के जवान उसे बालाकोट पुलिस चौकी लेकर आए और पूछताछ की। उसकी पहचान अब्दुल रहमान (28) पुत्र मोहम्मद रशीद रूप में हुई थी, जो कि निख्याल पीओके में रहने वाला है।