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97% जानवरों की हत्या, 90% डोनेशन हवाबाजी पर खर्च: जल्लाद भी है हिंदूफोबिक PETA

PETA यानी पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स। यह संस्था खुद को पशुओं के अधिकार का संरक्षक कहती है। लेकिन इस मुखौटे के पीछे कई चेहरे छिपे हैं। हिंदुओं से घृणा करने वाली यह संस्था जानवरों की निर्ममता से हत्या भी करती है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस संस्था पर अमेरिका में मासूम जानवरों की जान लेने के आरोप लगते रहे हैं। यह भी स्पष्ट हो चुका है कि यह संस्था पशुओं को बचाने के नाम पर खुद इन पशुओं की हत्या कर देती है।

वर्जीनिया डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर एंड कंज्यूमर सर्विसेज (VDACS) की रिपोर्ट के मुताबिक PETA ने पिछले साल यानी 2019 में 1,593 कुत्तों, बिल्लियों और अन्य पालतू जानवरों को मार दिया था। वहीं 2018 में 1771 जानवरों की हत्या कर दी गई। इसी तरह 2017 में 1809, 2016 में 1411 और 2015 में 1456 जानवरों को मार दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार 1998 से लेकर 2019 तक PETA ने 41539 जानवरों की हत्या कर दी।

इस संबंध में HUFFPOST नामक एक अमेरिकी वेबसाइट पर वर्ष 2017 में एक लेख प्रकाशित हुआ था जिसमें तथ्यों के साथ यह दावा किया गया था कि PETA ना सिर्फ खुद जानवरों को मारता है, बल्कि दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करता है। इसके लिए PETA पशुओं से संबन्धित क़ानूनों का दुरुपयोग करता है। इस लेख के मुताबिक PETA ने अमेरिका के वर्जीनिया में वर्ष 2014 में एक पालतू कुत्ते को बिस्किट का लालच देकर अपने पास बुलाया और उसे पकड़ लिया। 

वर्जीनिया के कानून के मुताबिक PETA जैसी संस्थाओं को सिर्फ आवारा पशुओं को ही अपने कब्जे में लेने की आज़ादी है, लेकिन PETA ने यहाँ साफ तौर पर इस कानून का उल्लंघन किया था। जिस कुत्ते को PETA के कर्मचारियों ने कब्जे में लिया था, वह पालतू था। इसके अलावा कानून के मुताबिक विशेष परिस्थितियों में PETA जैसी संस्थाओं के पास कम से कम जानवरों को 5 दिन अपने पास रखने के बाद उन्हें जान से मारने का अधिकार है।

हालाँकि, PETA ने उस कुत्ते को अपने कब्जे में लेने के महज़ कुछ घंटों में ही मार दिया। इसके बाद उस कुत्ते को पालने वाले परिवार ने PETA पर केस किया और PETA को उस परिवार को 50 हज़ार डॉलर का मुआवजा देना पड़ा।

इस लेख के मुताबिक वर्ष 2014 में PETA ने सिर्फ उस कुत्ते को ही नहीं, बल्कि 2324 पशुओं को मौत के घाट उतार दिया था। जितने भी पशुओं को PETA ने अपने कब्जे में लिया था, उनमें से सिर्फ 1 प्रतिशत पशुओं को ही लोगों ने गोद लिया।

इसमें कहा गया है कि PETA के कार्यकर्ता धोखे से, चोरी से या झूठ बोलकर जानवरों को उठाते हैं और उन्हें जहर देकर मार देते हैं। PETA ये दावा करता है कि जिन पशुओं को वह मारता है, उनमें से अधिकतर गोद लेने के लायक नहीं होते हैं, लेकिन तथ्य इस बात का समर्थन नहीं करते हैं। आगे इस लेख में यह तक दावा किया गया है कि जिन पशुओं को PETA अपने कब्जे में लेता है, उनमें से अधिकतर स्वस्थ होते हैं, लेकिन उन्हें भी कब्जे में लेकर जहर देकर मार दिया जाता है।

साल 2012 में PETA के मीडिया अधिकारी जेन डॉलिंगर ने द डेली कॉलर से कहा था कि संस्था की निगरानी में मौजूद कई जानवर चोट, बीमारी, बुढ़ापा, उत्तेजना या “अच्छे आवास के अभाव” में मर जाते हैं।

द डेली कॉलर की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार PETA के दो कर्मचारियों को अमेरिकी पुलिस ने 2005 में जानवरों के शव को नार्थ कैरोलिना डंपस्टर में फेंकते हुए पकड़ा था। इन जानवरों की PETA कर्मचारियों ने संस्था की वैन में “हत्या” की थी।  PETA के खिलाफ अभियान चलाने वाली संस्था सेंटर फॉर कंज्यूमर फ्रीडम (सीसीएफ) का आरोप है कि PETA कुत्ते-बिल्लियों के लिए जरूरी आवास के निर्माण के बजाय मीडिया और विज्ञापन पर ज्यादा खर्च करती है। सीसीएफ के अनुसार PETA का सालान बज़ट 3.74 करोड़ डॉलर (करोड़ 254 करोड़ रुपए) है।

साल 2011 में एक इंटरव्यू में PETA ने कहा था कि वो जानवरों को उत्पीड़िन करने, भूखे रखने या शोध के लिए बेचने” के बजाय उन्हें “दर्दरहित” मौत देना बेहतर समझती है। 

बता दें कि यह वही PETA है जो भारत में हिंदुओं के त्योहारों को लेकर हल्ला मचाता है और उन्हें पशुओं के अधिकारों का हनन करने वाला बताता है। उदाहरण के तौर पर तमिलनाडु में हिंदुओं द्वारा मनाए जाने वाले जलीकट्टू त्योहार के खिलाफ PETA ने सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी जमकर हल्ला मचाया था।

वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था और इसमें ‘एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया’ और PETA इंडिया की सबसे बड़ी भूमिका थी। इसके बाद जब वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर दोबारा से जलीकट्टू के आयोजन को मँजूरी दी थी, तब भी यह PETA ही था जिसने सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में इस अधिसूचना के खिलाफ याचिका दायर की थी।

हाल ही में PETA इंडिया ने रक्षा बंधन को गाय की रक्षा से जोड़ दिया। इस संगठन ने लोगों से अपील की कि ‘चमड़ा-मुक्त बनो।’ अब सोशल मीडिया पर पेटा से सवाल किया जा रहा है कि राखी का चमड़े से क्या लेना-देना? सोशल मीडिया पर उससे यही पूछा जा रहा है, “आपका मतलब है कि राखियाँ चमड़े से बनती हैं? एक ऐसे त्योहार को क्यों चुना, जिसका जानवरों की हत्या से कोई लेना-देना नहीं है।”

वहीं एक यूजर ने लिखा, “ऐसा लगता है कि पेटा इंडिया तभी नींद से जागता है, जब हिंदुओं का कोई त्योहार आता है और तुमने कहाँ देखा है लोगों को चमड़े की राखी पहनते हुए?? रक्षा बंधन के पवित्र त्योहार पर तो हम मीट या अंडे भी नहीं खाते।”

बता दें कि PETA एक गैर-सरकारी संगठन है जिसका कहना है कि पशुओं का भोजन, वस्त्र, प्रयोग या मनोरंजन के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पेटा के अनुसार संस्था पशुओं के “कल्याण और पुनर्वास” के लिए काम करती है।

हिंदू देवी-देवताओं को गाली देने वाला अब ब्राह्मणों (बामन) को दिखा रहा नीचा, खुद को कॉमेडियन कहता है संजय राजौरा

संजय राजौरा – खुद को स्टैंड अप कॉमेडियन बताते हैं। ये वही हैं, जो कुछ समय पहले तक हिंदू धर्म और उसके रीति-रिवाज़ों पर अनैतिक टिप्पणी करने और अपशब्द कहने के लिए चर्चा में बने हुए थे। एक बार फिर उन्होंने एक ऐसे ही विवाद की शुरुआत की है। इस बार राजौरा ने ब्राह्मण समुदाय के लोगों पर जातिगत टिप्पणी करते हुए नया विवाद खड़ा कर दिया है।   

घनघोर वामपंथी स्टैंड अप कॉमेडियन राजौरा किसी भी लिहाज़ से मज़ाकिया नहीं हैं। साथ ही साथ यह कॉमेडी करने के दौरान जम कर अपशब्दों का उपयोग करते है। इस बार राजौरा ने फेसबुक पर मोटिवेशनल स्पीकर संदीप माहेश्वरी का वीडियो साझा करते हुए अपनी बात कही – लेकिन छेड़छाड़ करते हुए। संदीप माहेश्वरी के वीडियो का छोटा सा हिस्सा पूरी सावधानी के साथ एडिट किया गया। इस वीडियो में वो कोरोना वायरस से पनपी महामारी के बारे में बात कर रहे हैं।   

राजौरा दवारा साझा किए गए वीडियो में संदीप यह कहते हैं कि इस महामारी ने लोगों के ज़हन पर असर डाला है। लोगों पर इस महामारी का मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा है। संदीप ने इस पर अपना नज़रिया रखते हुए कहा कि जैसे ही जाँच की संख्या कमेगी, वैसे ही कम से कम मरीज़ सामने आएँगे। इससे मीडिया भी इस मामले पर लोगों में डर और सनसनी नहीं फैला पाएगा।   

वीडियो में संदीप माहेश्वरी का कहना था कि कुछ लोगों का घरों से बाहर निकलना समय की माँग है। जिस तरह से महामारी के दौर में सब कुछ ठप्प और बंद पड़ा हुआ है, ऐसे में ज़रूरी लोगों के बाहर निकलने से अर्थव्यवस्था की हालत में सुधार होगा। माहेश्वरी का कहना है कि लोग कोरोना वायरस से कम डर रहे हैं बल्कि ख़बरों में जो दिखाया जा रहा है, उससे ज़्यादा डर रहे हैं।   

इसके बाद स्वघोषित कॉमेडियन, अभिव्यक्ति की आज़ादी के असल हिमायती और पुरोधा संजय राजौरा इसमें घुसते हैं। वो इस मामले (वीडियो) पर संदीप माहेश्वरी का मज़ाक बनाने लगे। राजौरा ने संदीप का मज़ाक ही नहीं बनाया बल्कि उन पर जातिगत टिप्पणी भी कर दी।   

संजय राजौरा की टिप्पणी

“आखिर कब ब्राह्मण और बनिया इस तरह की मोटिवेशनल स्पीच देना बंद करेंगे। मेरिट ऐसे ही नजर आता है।”

इस बयान से इतना स्पष्ट था कि राजौरा को संदीप माहेश्वरी के विचार से कोई लेना देना नहीं था। बल्कि संदीप को जातिगत बहस का हिस्सा बनाना था।   

इसी तरह राजौरा ने पिछले हफ्ते भी एक अनैतिक टिप्पणी की थी। तब राजौरा ने तंज करते हुए ने ‘ब्राह्मण’ को ‘बामन’ लिखा था। रेसिज्म (नस्लभेद) पर जमैका के क्रिकेट कॉमेंटेटर माइकल होल्डिंग का एक वीडियो साझा करते हुए राजौरा ने लिखा था, “आज के भारत में नस्लभेद पर बात करने के बाद कुछ बामनों की तरफ से दुष्कर्म की धमकी मिलने लगती है।” 

संजय राजौरा द्वारा साझा किया गया वीडियो

सोशल मीडिया पर राजौरा का एक और वीडियो खूब चर्चा में बना हुआ था। प्रधानमंत्री मोदी ने विज्ञान के आधुनिकीकरण और प्राचीन भारत में औषधियों पर एक बयान दिया था। वीडियो में राजौरा ने प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान का मज़ाक बनाया था

राजौरा ने तब PM मोदी के लिए कहा था, “उन्होंने (प्रधानमंत्री मोदी) ने कहा कि दुनिया की सबसे पहली प्लास्टिक सर्जरी भारत में हुई थी। आप जानते हैं किसकी? गणेश जी की। अगर दुनिया की पहली सर्जरी भारत में हुई भी है तो इसे अच्छे से किया जा सकता था। इससे यह पता लगता है कि कोई भी काम गाँजा फूँक कर नहीं करना चाहिए।”

इसके कुछ ही समय बाद ऑनलाइन कार्यक्रम ‘ऐसी तैसी डेमोक्रेसी’ पर मामला भी दर्ज किया गया था। जिसमें राजौरा पर हिंदू देवी-देवताओं का मज़ाक उड़ाने और धार्मिक भावनाएँ आहत करने का आरोप लगा था। संजय राजौरा के लिए कॉमेडी के नाम पर गालियाँ और हिंदू विरोधी बातें करना कोई नई बात नहीं है।

अपने ख़त्म कॉमेडी करियर के साथ राजौरा अपने साथ के अन्य वामपंथी स्टैंड-अप कॉमेडियन की तरह सोशल मीडिया पर नेटिज़न के साथ गाली गलौच में उलझे रहते हैं।   

आलिया और अनन्या से बेहतर फिर भी बी ग्रेड एक्ट्रेस हैं तापसी और स्वरा: कंगना

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से अभिनेत्री कंगना रनौत लगातार बॉलीवुड में नेपोटिज्म और इनसाइडर बनाम आउटसाइडर के मुद्दे पर मुखर होकर बोल रही हैं। उन्होंने फ़िल्ममेकर करण जौहर के खिलाफ़ मोर्चा खोल रखा है।

हाल ही में रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को दिए इंटरव्यू में कंगना ने ना सिर्फ करण जौहर को निशाने पर लिया, बल्कि तापसी पन्नू और स्वरा भास्कर पर भी नेपोटिज़्म का साथ देने का आरोप लगाया।

इंटरव्यू के दौरान कंगना ने कहा, “तापसी पन्नू और स्वरा भास्कर जैसे आउटसाइडर लोग आकर कहेंगे कि सिर्फ कंगना को ही करण जौहर से समस्या है। हम तो करण जौहर को पसंद करते हैं। अगर आप लोग करण जौहर को पसंद करती हैं, फिर भी आप लोग बी ग्रेड एक्ट्रेस क्यों हैं। तुम दोनों आलिया और अनन्या से बेहतरीन एक्ट्रेस हो, फिर भी तुम्हें काम क्यों नहीं मिल रहा है? आप लोग ही अपने आप में नेपोटिज़्म का प्रमाण हैं।”

कंगना रनौत का बयान सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। स्वरा भास्कर ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। स्वरा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्विटर पर लिखा कि कंगना ने उन्हें आलिया भट्ट और अनन्या पांडे से बेहतर बताने के लिए शुक्रिया कहा है। स्वरा ने कहा कि उन्हें लगता है कि यह उनकी तारीफ है। इसके अलावा स्वरा ने कंगना को खूबसूरत, उदार और महान एक्टर बताया।

कंगना और स्वरा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की काफी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही है। कुछ लोग स्वरा के बयान को ‘व्यंग्य’ के रूप में ले रहे हैं तो कुछ लोगों ने इसे ‘सकारात्मक’ बताया।

कंगना के इस इंटरव्यू के सपोर्ट में अब कई लोग सामने आ रहे हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेस सिमी ग्रेवाल ने भी कंगना रनौत के खुलकर बोलने के अंदाज की सराहना की है। सिमी ने ट्वीट करके लिखा, “मैं कंगना रनौत की सराहना करती हूँ, जो मुझसे कहीं ज्यादा बहादुर और बोल्ड हैं। सिर्फ मैं ही जानती हूँ कि कैसे एक पावरफुल इंसान ने बहुत बेरहमी से मेरे करियर को बर्बाद करने की कोशिश की थी। मैं चुप रही क्योंकि मैं इतनी बहादुर नहीं थी।”

बता दें कि कंगना रनौत ने सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में लगाए गए आरोपों को लेकर कहा कि अगर वे अपने आरोप साबित नहीं कर पाईं तो पद्मश्री लौटा देंगी।

इसके साथ ही रिपब्लिक टीवी को दिए इंटरव्यू में एक और खुलासा करते हुए कंगना ने कहा, “जावेद अख्तर ने मुझे अपने घर बुलाया। इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर मैं ऋतिक रोशन से माफ़ी नहीं माँगी तो मुझे आत्महत्या करनी पड़ेगी।” उन्होंने कहा था, “तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि वह तुम्हें जेल में बंद कर देंगे। उन्होंने (ऋतिक रोशन) तुम्हारे खिलाफ़ सारे सबूत इकट्ठा कर लिए हैं। वह समझ चुके हैं कि केस पूरी तरह उनके हाथों में है।”

इस साल एजेंसियाँ कोरोना नियंत्रण में लगी थीं: केजरीवाल ने दिल्ली डूबने का दोष महामारी पर मढ़ा

देश की राजधानी दिल्ली में रविवार (19 जुलाई, 2020) को हुई भारी बरसात के बाद जो हालात सामने आए उसने केजरीवाल सरकार के ड्रेनेज सिस्टम और बरसात प्रबंधन की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। नाले में बहती झुग्गी और डूबा शहर देखकर, दिल्ली सरकार की मॉनसून को लेकर सारी तैयारियाँ भी पहली ही बारिश में धुलती नजर आईं। कई इलाकों में भारी जल भराव होने के कारण जनजीवन काफी प्रभावित हुआ है। इस जलभराव के कारण मिंटो रोड पर स्थित एक टेंपो ड्राइवर की मौत हो गई।

बीजेपी ने इस मसले पर जब केजरीवाल सरकार को घेरा तो सफाई देने खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सामने आए। अरविंद केजरीवाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब ट्वीट के माध्यम से दिया। उन्होंने कहा, “इस साल सभी एजेंसियाँ, चाहे वो दिल्ली सरकार की हों या एमसीडी की, सभी कोरोना के नियंत्रण में जुटी हुई हैं। कोरोना के कारण उन्हें कई कठिनाइयाँ आईं हैं। ये वक्त एक दूसरे पर दोषारोपण का नहीं है। सबको मिल कर अपनी जिम्मेदारियाँ निभानी है। जहाँ-जहाँ पानी भरेगा, हम उसे तुरंत निकालने का प्रयास करेंगे।”

इससे पहले बारिश के चलते भरे हुए नाले और दिल्ली की खराब स्थिति को देखते हुए बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने ट्विटर के जरिए अरविंद केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा था।

मनोज तिवारी ने कहा था कि, “कुछ घंटों की बारिश में बिगड़े हालात, तो महीनों की बारिश में दिल्ली का क्या हाल होगा? अरविंद केजरीवाल जी मॉनसून की पहली बारिश ने ही आपकी तैयारियों की कलई खोल दी। आगे होने वाली बारिश से निपटने के लिए तुरंत ठोस योजना तैयार करें, ताकि दिल्ली को डूबने और लोगों को तकलीफ से बचाया जा सके।”

गौरतलब है कि, दिल्ली के मिंटो रोड अंडरपास में भारी जलभराव की वजह से जिस कुंदन नाम के शख्स की मौत हुई थी, वह अपने परिवार में कमाने वाला इकलौता सदस्य था। कुंदन के टेम्पो पर सीआईपीएफ का स्टीकर लगा था। जिससे पता चलता है कि उसने कोरोना काल के समय दिन-रात लोगों की मदद की है। कुंदन के सर पर उसके माता-पिता, पत्नी और दो बेटियों की जिम्मेदारी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में कुंदन के बड़ी बेटी की शादी तय थी। कुंदन के भाईयों की पहले ही एक सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी। वहीं अब दिल्ली प्रशासन की लापरवाही ने उसकी भी जान ले ली। अब सवाल यह उठता है कि क्या केजरीवाल सरकार कुंदन के परिवार की जिम्मेदारी उठाएगी। जो सपना कुंदन ने अपनी बेटी के लिए सँजो रखा था, क्या वो अब पूरा हो पाएगा?

ज्ञात हो कि आज सुबह मिंटो रोड ब्रिज के पास पानी में एक शव तैरता हुआ मिला। एक ट्रैकमैन ने इस शव को देखा और बाहर निकाला। बाद में दिल्ली पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान 60 वर्षीय कुंदन के रूप में हुई है। कुंदन सिंह टेंपो ड्राइवर था। वह सुबह कनॉट प्लेस की तरफ जा रहा था। उसने अंडरपास से अपना वाहन निकालने की कोशिश की जहाँ पानी भरा था। ऐसा लगता है कि भारी बारिश में जल-भराव में डूबने से उसकी मौत हुई है। क्योंकि उसके शरीर पर किसी बाहरी चोट का कोई निशान सामने नहीं आया है।

बारिश में डूब गई दिल्ली: मिंटो ब्रिज के नीचे तैरता मिला ऑटो ड्राइवर का शव, जा रहा था कनॉट प्लेस

राजधानी दिल्ली और एनसीआर में रविवार यानी आज (19 जुलाई, 2020) सुबह से ही भीषण बारिश हो रही है। इसके चलते तमाम मुख्य मार्गों पर भरे पानी ने प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है। मिंटो रोड ब्रिज (Minto Road Bridge) के पास पानी में एक शव तैरता हुआ मिला। एक ट्रैकमैन ने इस शव को देखा और बाहर निकाला।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान 60 वर्षीय कुंदन के रूप में हुई है। कुंदन सिंह टेंपो ड्राइवर था। वह सुबह कनॉट प्लेस की तरफ जा रहा था। उसने अंडरपास से अपना वाहन निकालने की कोशिश की जहाँ पानी भरा था। ऐसा लगता है कि डूबने से उसकी मौत हुई है। बाहरी चोट का कोई निशान नहीं है।

वहीं बारिश के चलते भरे हुए नाले और दिल्ली की खराब स्थिति को देखते हुए बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने ट्विटर के जरिए अरविंद केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा है।

मनोज तिवारी ने ट्वीट किया, “कुछ घंटों की बारिश में बिगड़े हालात, तो महीनों की बारिश में दिल्ली का क्या हाल होगा? अरविंद केजरीवाल जी मॉनसून की पहली बारिश ने ही आपकी तैयारियों की कलई खोल दी। आगे होने वाली बारिश से निपटने के लिए तुरंत ठोस योजना तैयार करें, ताकि दिल्ली को डूबने और लोगों को तकलीफ से बचाया जा सके।”

नॉर्थ दिल्ली के मेयर जय प्रकाश ने निगम अधिकारियों के साथ मिंटो रोड का निरीक्षण किया। उन्होंने इस घटना पर कहा, हमने दिल्ली सरकार को शहर में नालों की सफाई के बारे में सचेत किया था, लेकिन उन्होंने हमारे अनुरोधों पर कभी ध्यान नहीं दिया। इस तरह की घटनाएँ दिल्ली सरकार की गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण हो रहीं है। मुख्यमंत्री को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और मृतक के परिजनों को सहायता राशि देनी चाहिए। सरकार को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटना दोबारा न हो।

इससे पहले इसी इलाके में पुल के नीच गहरे पानी में एक डीटीसी बस डूब गई थी। हालाँकि उस वक्त बस में यात्री सवार नहीं थे, जिसके कारण बड़ा हादसा होने से टल गया। मिंटो पुल के नीचे बस के साथ ही दो ऑटो भी पानी में फँस गए थे। सूचना मिलने पर दमकल कर्मियों ने बस और ऑटो के चालकों और कंडक्टर को सुरक्षित बाहर निकाला।

गौरतलब है कि बारिश के कारण दिल्ली के बिगड़ते हालातों को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अपने ट्विटर पेज पर एक ट्रैफ़िक एडवाइज़री पोस्ट की जिसमें उन्होंने यात्रियों को आगाह किया है कि, वे ऐसे मार्गों से बिल्कुल न जाए जहाँ बारिश की वजह से पानी भर गया है।

आईएमडी के अनुसार सफदरजंग वेधशाला ने जुलाई में अभी तक 47.9 मिमी बारिश दर्ज की जो 109.4 मिमी सामान्य बारिश से 56 फीसदी कम है। पालम और लोधी रोड मौसम केंद्रों ने जुलाई में 38 और 49 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की है।

PETA की हिन्दू घृणा, वैचारिक दोगलापन और डिजिटल काइयाँपन: सवाल पूछने वाले को कहा साँप, बकरे पर चुप

पशु अधिकारों के लिए संघर्ष करने का दावा करने वाली अंतररष्ट्रीय संस्था PETA का दोहरा रवैया फिर से सामने आया है। हिन्दू घृणा के लिए कुख्यात PETA ने इस बार शेफाली वैद्य को निशाना बनाया और उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से साँप तक बता दिया।

दरअसल, PETA रक्षाबंधन पर अपने हिन्दू-विरोधी बैनर के कारण विवादों में है और सवाल पूछने वालों को हड़काने में लगा हुआ है।

शेफाली वैद्य ने सवाल पूछा था कि ईद के मौके पर कोई ‘एनिमल एक्टिविस्ट’ सेलेब्रिटी ये क्यों नहीं कहता कि आप अपने इगो का त्याग करें, जानवरों को न मारें। इस पर PETA इंडिया ने जवाब दिया कि शेफाली वैद्य कभी ये नहीं कहेंगी कि वो शाकाहारी हैं, क्योंकि वो माँस खाती हैं। उसने सलाह दी कि शेफाली एक उदाहरण पेश करें और कोंकणी हो या मुस्लिम, सभी प्रकार के लोगों को शाकाहारी बनने के लिए प्रेरित करें।

PETA ने शेफाली वैद्य का मार्च का एक ट्वीट खोज कर निकाला, जिसमें उन्होंने बताया था कि वो चिकन और मछली खाती हैं। इस पर PETA ने कहा कि ये ट्वीट शेफाली को एक्सपोज करता है क्योंकि वो खुद तो माँसाहारी हैं और मुस्लिमों से अपेक्षा रखती हैं कि वो शाकाहारी हो जाएँ। PETA ने पूछा कि जिन बकरों और मुर्गों को आप खाती होंगी, उनके साथ क्या होता होगा? साथ ही सलाह दी कि शेफाली खुद से शुरुआत करें और शाकाहारी बनें।

इसके बाद शेफाली वैद्य ने PETA को ललकारा और पूछा कि क्या उसे ईद के समय जानवरों की हत्या के विरोध में बैनर लगाने की हिम्मत है? उन्होंने कहा कि जिस दिन PETA इंडिया ऐसा कर देगा, वो अपनी कोंकणी जड़ों को भूलते हुए शाकाहारी बन जाएँगी और PETA को डोनेशन भी देंगी। इस पर PETA ने जवाब दिया कि वो पहले से ही इसे लेकर कई शहरों में अभियान चला रहा है।

PETA ने शेफाली वैद्य को कहा कि वो किसी ‘चुनौती’ या किसी संस्था के लिए नहीं बल्कि जीवों की रक्षा के लिए शाकाहारी बनें। साथ ही उसने ये भी कहा कि शेफाली ऐसा कोई बैनर खुद से भी लगा सकती हैं, बाद में अन्य लोग भी इसका अनुसरण करेंगे। इसके बाद शेफाली वैद्य ने तगड़ा जवाब देते हुए PETA से पूछा कि क्या वो मुस्लिमों को शाकाहारी बनने तभी कहेगा, जब वो माँस वगैरह खाना बंद कर देंगी?

शेफाली वैद्य ने कहा कि उन्हें भी नहीं पता था कि वो PETA के लिए इतनी ज्यादा मायने रखती हैं। शेफाली के अलावा विजयंत जय पांडा ने भी संस्था पर इस दोहरे रवैये को लेकर निशाना साधा और कहा कि आखिर रक्षाबंधन में कौन लेदर की राखी पहनता है? PETA का जवाब था कि उसने बस इतना कहा है कि रक्षाबंधन एक सही दिन है, जब हम सभी ‘लेदर फ्री’ का संकल्प लें। उसने बात घुमाना शुरू कर दिया।

लेकिन, असली विवाद शुरू हुआ PETA द्वारा साँपों की चर्चा करने से। उसने कहा कि वो साँपों की भी मदद करता है, क्योंकि वो बैग, बेल्ट और जूते नहीं हैं, जीव हैं। उसने कहा कि वो भी सजीव हैं, शेफाली की तरह। इस पर एक ट्विटर यूजर ‘LolmLol’ ने PETA के दोहरे रवैये की तरफ सबका ध्यान दिलाया। उसने याद दिलाया कि PETA ने सोनम कपूर में ‘People For Ethnic Treatment Of Animals’ का अवॉर्ड दिया था।

दरअसल, सोनम कपूर S’uvimol के बैग्स का प्रमोशन करती हैं। उक्त ट्विटर यूजर ने इस कम्पनी के प्रोडक्ट के बारे में स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें बताया गया था कि वो ‘100% शुद्ध Exotic Skins’ से बना हुआ है, अर्थात इसके लिए जानवरों को मार कर उनके चमड़े का प्रयोग किया गया है। क्या PETA चमड़े से बने प्रोडक्ट्स को प्रमोट करने वाली सोनम को अवॉर्ड देकर ‘लेदर फ्री’ का अभियान चला रहा है?

ऑपइंडिया ने इस सम्बन्ध में शेफाली वैद्य से बातचीत की। उन्होंने बताया कि PETA ने पिछले 48 घंटों मे सारा का सारा ध्यान उन्हें ट्रोल करने में लगाया है और इसके सिवा कुछ नहीं किया है। उन्होंने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय संस्था एक महिला को निशाना बनाने में अपनी सारी ऊर्जा खर्च कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि PETA एक ट्रोल के सिवा कुछ नहीं है। शेफाली ने कहा कि जैसे सोशल मीडिया पर फेसलेस ट्रोलस घूमते रहते हैं, वैसा ही कुछ PETA भी कर रहा है।

शेफाली वैद्य ने इस दौरान PETA को दी गई चुनौती पर भी बात की, जिसमें उन्होंने ईद पर उसके द्वारा बैनर लगाने पर शाकाहारी बन जाने की बात कही थी। शेफाली ने कहा कि उनकी चुनौती का जवाब देने कि बजाए PETA दुनिया भर की बातें कर रहा है और ट्रोलिंग में लगा हुआ है। शेफाली वैद्य का सवाल था कि आखिर 2 दिन से एक इंटरनेशनल इन्स्टिट्यूशन एक प्राइवेट इन्डविजूअल को निशान बनाने में क्यों लगा हुआ है?

बता दें कि हाल ही में PETA ने गाय के चित्र वाले उस बैनर से लोगों का ध्यान आकर्षित किया था, जिसमें रक्षाबंधन के दौरान राखी में चमड़े का उपयोग न करने की सलाह दी गई है। इसके बाद विवाद खड़ा हो गया था क्योंकि PETA को यह तक पता नहीं कि रक्षाबंधन में चमड़े का उपयोग नहीं होता है। लोगों ने तो PETA इंडिया से बकरीद पर भी ऐसी ही एक अपील की बात कह कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

इसी तरह PETA इंडिया ने अभिनेत्री ऋचा चड्ढा की भी तारीफ करते हुए कहा था कि वो जानवरों को लेकर काफी दयालु हैं, इसीलिए हम सब उनसे प्यार करते हैं। जबकि ऋचा चड्ढा ने बयान दिया था कि गोमाँस को प्रतिबंधित करना सांप्रदायिक राजनीति है। ख़ुद को शाकाहारी बताने वाली चड्ढा इस तरह का बयान देती हैं और PETA उन पर वारे-न्यारे हो जाता है, जो फिर से उसके दोहरे रवैये का प्रदर्शक है।

स्टेज पर नंगे होकर प्रदर्शन करने वाली कॉमेडियन: जिसे है बुर्के से प्यार, करती है हिंदू देवी-देवता से नफरत

पिछला कुछ समय देश के स्टैंड अप कॉमेडी करने वालों के लिए बिलकुल अच्छा नहीं रहा है। पूरी बहस अग्रिमा जोशुआ विवाद से शुरू हुई लेकिन अब इसकी आँच सभी कॉमेडियनों तक पहुँच गई है। अब कॉमेडीयंस के ट्वीट, स्क्रीनशॉट और उनके कार्यक्रमों के छोटे-छोटे हिस्से सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। जिसके बाद कुछ को अपना ट्विटर एकाउंट तक बंद करना पड़ा।   

यह पूरा घटनाक्रम शुरू हुआ बड़े ही जोश में। लेकिन अंत में इन ‘कॉमेडियंस’ पर आकर ख़त्म हो गया, जो कथित क्रांति के उन्माद में चूर हैं। ऐसे कॉमेडियन जो भाजपा पर फास्टिस्ट होने का आरोप लगाते रहे हैं, अंत में वो महा विकास अघाड़ी की गठबंधन सरकार और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से झुक कर माफ़ी माँगते दिख रहे हैं।   

ऐसी ही एक कॉमेडियन हैं जिनके ट्वीट और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे, नाम है – ‘राधिका वाज’। राधिका ऐसी महिला हैं, जिसे बहुत पसंद भी नहीं किया जाता है, लेकिन हँसी-मज़ाक को ढाल बना कर वो अपना घटिया रवैया और अनैतिकता छिपाती हैं।

इस बार भी यही हुआ। जैसे ही उनके ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल होने शुरू हुए, तब खुद को फँसा देख उसने इस मामले पर सफाई दी। उसने अपने बचाव में कहा, “मैंने किसी धर्म का मज़ाक नहीं उड़ाया है। बल्कि इंसानों के बनाए हुए रिवाज़ों पर सवाल उठाया है।” यानी इतना दबाव बढ़ने और महसूस करने के बाद वह उतनी क्रांतिकारी नहीं रह गई।    

राधिका वाज का ट्वीट

एक वक्त हालाँकि ऐसा भी था, जब राधिका वाज़ कुछ ज़्यादा ही क्रांतिकारी महसूस कर रही थीं। इतना कि सार्वजनिक मंच पर बिना कपड़ों के कॉमेडी कर रही थी। साल 2015 में एक शो हुआ था ‘WHAT THE F**K SHOULD I WEAR?’ शीर्षक के मुताबिक़ ही राधिका अपने भ्रम का प्रदर्शन करने के लिए स्टेज पर ‘नंगे’ होकर कॉमेडी कर रही थी।   

बदकिस्मती से राधिका के चुटकुले औसत भी नहीं थे और कॉमेडी भी बहुत अच्छी नहीं थी। वीडियो देख कर किसी के ज़हन में यह सवाल उठना लाज़मी है कि देखने वाले राधिका के चुटकुलों पर हँस रहे थे या खुद उसे देख कर। कुल मिला कर वीडियो कॉमेडी नहीं नज़र आती बाकी नैतिक उपदेश ज़रूर सुनाई देते हैं।  

   

अपने एक और वीडियो में इस कॉमेडियन ने बेहद घटिया तरीके से करवा चौथ का मज़ाक बनाया। राधिका के मुताबिक़ जो औरतें अपने पतियों की सेहत और उम्र के लिए व्रत रखती हैं, वह ‘bi*ch’ (अपशब्द, कुतिया) हैं। दो मिनट की वीडियो में राधिका ने घटिया शैली में इस धार्मिक त्यौहारों का मज़ाक बनाया था।

सरल शब्दों में कहना गलत नहीं होगा कि राधिका के हँसी-मज़ाक का तरीका बहुत ही विचित्र और अपरम्परागत है। मिसाल के तौर पर, उसने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि अपने पिता को ‘डैड’ नहीं बुलाती बल्कि ‘motherf*cker’ (अपशब्द, मादर*#द) कहती हैं।   

राधिका वाज का ट्वीट

फादर्स डे के दिन भी राधिका ने बेहद घटिया तरीके से अपनी बात रखी। उसने ट्वीट करते हुए लिखा कि बाकियों के पास दुनिया के सबसे अच्छे पिता होंगे लेकिन उसके पास दुनिया के सबसे शानदार ‘motherf*cker’ (अपशब्द, मादर*#द) हैं।

राधिका वाज का ट्वीट

इतना ही नहीं राधिका के मन में महिलाओं के जननांग के लिए बेहद घटिया तरह की सनक है। वह हिंदू त्यौहारों का मज़ाक उड़ाने के लिए अक्सर महिला जननांग का ज़िक्र लेकर आती है।   

राधिका वाज का ट्वीट

राधिका वाज बिना किसी लिहाज़ के गाली-गलौच भी खूब करती हैं। हर इंसान जो उसके ट्वीट पर जवाब देता है, उसे राधिका की गालियों का बराबर सामना करना पड़ता है। राधिका की गालियाँ सोशल मीडिया पर चलने वाले ‘गालियों भरे ट्रोल्स’ जितनी ही बुरी होती हैं। कभी-कभी तो उससे भी बद्तर।       

राधिका वाज का ट्वीट

राधिका हिंदू धर्म, मान्यताओं और हिंदू धर्म से जुड़े लोगों की भावनाएँ आहत करने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ती है। वहीं इस्लाम धर्म के लिए राधिका का रवैया/नज़रिया बेहद नर्म है। एक ऐसी कॉमेडियन, जो स्टेज पर बिना कपड़ों के कॉमेडी करती है, वही इस्लाम धर्म के पहनावे बुर्के और हिजाब में बराबर रूचि रखती है। जी हाँ, नीचे उसके ट्वीट का स्क्रीनशॉट इसका गवाह है।

राधिका वाज का ट्वीट

राधिका को हिंदू धर्म से जुड़ी हर चीज़ से नफ़रत है, हिंदू आदमियों से भी। उसका दावा है कि भारत दुनिया का चौथा सबसे खतरनाक देश है और इसके लिए हिंदू धर्म के आदमी ज़िम्मेदार हैं।    

राधिका वाज का ट्वीट

राधिका अक्सर ऐसा दावा करती है कि उसने कभी हिंदू धर्म का मज़ाक नहीं बनाया। जबकि पिछले कुछ समय उसने ऐसे तमाम ट्वीट किए हैं, जो सीधे तौर पर धर्म का मज़ाक बनाते हैं। शायद उनकी अंग्रेजी सही नहीं है, इसलिए ऐसा बोल रही होंगी। जबकि ट्वीट में जो लिखा है, उस अंग्रेजी का मतलब बेहद घटिया है।

‘वाक ऑफ़ शेम’ का मतलब होता है – जब कोई व्यक्ति संभोग (वो भी बिना प्लानिंग के) कर लौट रहा हो। और इस दौरान उसने वही कपड़े पहने हों, जो उसने पिछली रात में रहने थे। राधिका ने ठीक यही वाक्य ‘वाक ऑफ़ शेम’ ‘लक्ष्मी’ (देवी) के लिए उपयोग किया। इसके बाद राधिका ऐसा दावा करती हैं कि उसने कभी हिंदू धर्म का मज़ाक नहीं बनाया।   

राधिका वाज का ट्वीट

इन बातों, ट्वीट, वीडियो और स्क्रीनशॉट के आधार पर इतना साफ़ है कि राधिका का नज़रिया कैसा है। कैसे वह हर बार एक ही धर्म और एक ही समुदाय के लोगों को निशाना बनाती है। असल मायनों में उसका क्रांतिकारी रवैया अंदर से पूरी तरह खोखला है। वह जितनी बार स्टेज पर होती है, जैसे ही उसे अंदाज़ा होता है कि उसके सामने न्यायिक चुनौतियाँ आ सकती हैं, वैसे ही वो अपने कथित सिद्धांतों से समझौता कर लेती है।    

रहबर दानिश से AMU ने माँगा जवाब, हिंदू छात्रा को हिजाब पहनाने की धमकी देने का मामला

हिंदू छात्रा को पीतल का हिजाब पहनाने की धमकी देने के मामले में आखिरकार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) प्रशासन की भी नींद टूट गई है। उसने रहबर दानिश को शो कॉज नोटिस जारी किया है।

इस मामले में दानिश पर पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी है। दनिश और उसके खिलाफ शिकायत करने वाली छात्रा दोनों एएमयू से ही हैं।

छात्रा ने अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की शिकायत की थी। उसने अपनी शिकायत में बताया था कि रहबर दानिश ने सोशल मीडिया पर उसके खिलाफ “असभ्य भाषा” का इस्तेमाल किया। उसे हिजाब पहनाने की धमकी दी गई।

छात्रा ने शिकायत में कहा था कि उसे अभी भी अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए दो साल तक यूनिवर्सिटी में रहना है। इस घटना से वह डर गई है और उसे आशंका है कि विश्वविद्यालय खुलने के बाद दानिश उसे परेशान करेगा।

ऑपइंडिया को पीड़ित छात्रा ने बताया था कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है। उसने बताया कि शिकायत के बाद दानिश ने उससे संपर्क कर मॉफी मॉंगी थी।

बकौल छात्रा दानिश ने उसे फोन कर कहा कि उसे और उसके परिवार वालों को धमकियाँ मिल रही हैं। कोई उसकी माँ और बहन के साथ बलात्कार की बातें कह रहा है।

छात्रा ने कहा था कि शिकायत के बाद भले दानिश का हृदय परिवर्तन हो गया हो पर यूनिवर्सिटी खुलने के बाद वह क्या करेगा, किसी को मालूम नहीं। इस मामले के संज्ञान में आने के बाद महिला आयोग ने भी कार्रवाई की बात कही थी।

दरअसल छात्रा ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया था कि कैसे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्याल के हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों को खुद को ढँकने के लिए मजबूर किया जाता है और महिलाओं को उनके कपड़ों के आधार पर ऑब्जेक्टिफाइड किया जाता है। छात्रा के इस पोस्ट के बाद दानिश और उसके साथी उस पर हमलावर हो गए थे और अपमानजनक और भद्दी-भद्दी गालियाँ देने लगे थे।

बाप तक पहुँची MP की टाइगर पॉलिटिक्स: दिग्विजय सिंह पर शिवराज के मंत्री ने साधा निशाना

मध्य प्रदेश में ‘टाइगर’ पॉलिटिक्स जारी है। शिवराज सिंह चौहान के मंत्री अरविंद भदौरिया ने कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर पलटवार करते हुए विवादित बयान दिया है।

मध्य प्रदेश के सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा, “मैं बेंगलुरु में था, तब दिग्विजय सिंह मेरे भाई पर केस रजिस्टर्ड करके पुलिस से उठवा रहे थे, तेरे बाप में हिम्मत है। मैं चंबल की माटी में पैदा हुआ हूँ, किसी से डरता नहीं हूँ। दिग्विजय सिंह कहते हैं कि 2-2 टाइगर मारेंगे, तेरे बाप ने भी कभी टाइगर नहीं मारे होंगे।”

उनके इस बयान वीडियो वायरल हो रहा है। दरअसल, भदौरिया मंत्री बनने के बाद पहली बार भिंड पहुँचे थे। जिले की सीमा में प्रवेश करते ही गर्मजोशी के साथ कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। स्वागत का सिलसिला मालनपुर से शुरू होकर भिंड तक चला। भिंड बस स्टैंड पर उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इसी दौरान दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए उन्होंने यह बात कही।

राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि टाइगर जिंदा है। सिंधिया का ये बयान काफी वायरल हुआ था। इसके बाद एक कार्यक्रम में उनसे पूछा गया कि शिवराज सिंह चौहान और उनमें टाइगर कौन है, तो सिंधिया ने कहा था- दोनों टाइगर हैं। इस पर दिग्विजय सिंह ने पलटवार करते हुए कहा था कि हम और माधवराव सिंधिया साथ में शेर का शिकार करते थे।

सबसे पहले इसका इस्तेमाल शिवराज सिंह चौहान ने किया था। 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार के बाद जब वे सीएम हाउस छोड़ रहे थे, तो कहा था कि टाइगर अभी जिंदा है। इसके बाद से उनको ‘मामा शिवराज’ के साथ ‘टाइगर शिवराज’ भी कहा जाने लगा था। इसी टाइगर वाले बयान को लेकर दिग्विजय सिंह चौहान ने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर लिखा था कि उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया के साथ पहले टाइगर का खूब शिकार किया था।

डूब गई दिल्ली: बारिश में एक साथ नाले में बह गई झुग्गियाँ, देखें Video

दिल्ली में भारी बारिश की वजह से जगह-जगह भीषण जलजमाव हो गया। एक नाले के पास मौजूद लगभग 10 झुग्गियाँ बह गईं। हादसा आईटीओ स्थित अन्ना नगर में हुआ। नाले के पास 10 झुग्गियाँ मौजूद थीं जो बारिश के तेज बहाव में बह गईं।   

इन झुग्गियों के नज़दीक ही WHO के मुख्यालय का निर्माण हो रहा है। ठीक इसी जगह पर जलभराव भी हुआ था। जिसकी वजह से वहाँ स्थित नाले में ओवरफ्लो हुआ और यह इतना बड़ा हादसा हो गया। उस इलाके में स्थित तमाम घरों में अभी तक पानी भरा हुआ है।

घटना के वीडियो में कई लोग चीखते चिल्लाते हुए नज़र आ रहे हैं। वह कह रहे हैं कि घरों को जल्दी से खाली कर दो, जल्दी निकलो। बारिश के इस बहाव में झुग्गियाँ बह जाने के बाद भी लोग चीखते हुए सुने जा सकते हैं। कई लोगों का कहना है कि बारिश में उनका लगभग सब कुछ बह गया है।   

इसके कुछ ही समय पहले ख़बर आई थी कि बारिश का असर मिंटो ब्रिज पर भी हुआ है। इस ब्रिज के नीचे इतना पानी भर गया कि एकऑटो ड्राइवर फँस गया। बाद में उसकी मौत हो गई। मिंटो रोड पर एक और हादसा हुआ था जिसमें जलभराव की वजह से डीटीसी बस फँस गई थीl हालांकि इस घटना में किसी की जान नहीं गई और चालक भी भी सुरक्षित रूप से निकाल लिया गया थाl इसके अलावा दिल्ली के अन्य इलाकों से भी जलभराव की ख़बरें सामने आई थीं। इन ऐसी ख़बरें राजधानी में बारिश का सामना करने के लिए सारी सरकारी तैयारियों की पोल खोलती हैं।    

   After the rain, the rain in Delhi, some of the houses were washed away together,