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ब्रिटेन से ‘द गार्जियन’ ने भेजा सिग्नल, इधर ‘पाकिस्तान’ की चिंता में दुबली हुई कॉन्ग्रेस: कच्छ के रण में बन रहे दुनिया के सबसे बड़े सोलर पार्क पर जताई आपत्ति

विदेशी मीडिया के सहारे भारत की संसद में हंगामा मचाने की कॉन्ग्रेस की पुरानी आदत नहीं गई है। एक बार फिर उसने अंग्रेजों के एक मीडिया संस्थान की एक रिपोर्ट के आधार पर संसद में हंगामा किया है। कॉन्ग्रेस ने अब गुजरात के कच्छ में स्थापित किए गए खावड़ा सोलर पार्क को लेकर हंगामा मचाया है। कॉन्ग्रेस ने यह हंगामा ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की एक रिपोर्ट के आधार पर किया है। गार्जियन का दावा है कि पाकिस्तान सीमा के निकट स्थापित दुनिया के सबसे बड़े सोलर पार्क को सरकार ने विशेष अनुमति दी है।

कॉन्ग्रेस ने यही दावा दोहराते हुए गुरुवार (13 फरवरी, 2025) को लोकसभा में चर्चा के लिए नोटिस दिया था। कॉन्ग्रेस ने माँग की कि सारा कामधाम छोड़ कर लोकसभा इस मुद्दे पर बहस करे। कॉन्ग्रेस ने अपनी नोटिस में कहा, “अडानी समूह की खावड़ा सोलर ऊर्जा पार्क परियोजना, कच्छ के रण में संवेदनशील भारत-पाकिस्तान सीमा से सिर्फ 1 किलोमीटर किमी दूर स्थित है, जो दोनों देशों के बीच लड़ाई वाला क्षेत्र रहा है।”

कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि इस जगह पार्क स्थापित करने को सरकार ने सेना की सलाह ना मानते हुए अनुमति दे दी है। कॉन्ग्रेस का सेना और देश के रणनीतिक हितों को लेकर बात करना काफी हास्यास्पद है क्योंकि यह वही कॉन्ग्रेस है जो दशकों तक लगातार देश के सीमाई इलाकों में इन्फ्रा बनाने का विरोध करती रही है। यह वही कॉन्ग्रेस है जिसने सेना के लिए साजोसामान खरीदने से मना कर दिया था और फंड की कमी बताई थी।

क्या लन्दन से आदेश ले रही कॉन्ग्रेस?

कॉन्ग्रेस पार्टी ने स्थगन प्रस्ताव का नोटिस ब्रिटिश समाचार पोर्टल द गार्जियन की ‘एक्सक्लूसिव’ रिपोर्ट के बाद दिया है। गार्जियन अपने भारत विरोधी रवैये के लिए कुख्यात है। इस रिपोर्ट में भी अटकलों, हवा हवाई स्रोत और उल्टी सीधी जानकारी के आधार पर खावड़ा सोलर पार्क को खराब का ठप्पा दे दिया गया है।

खावड़ा सोलर पार्क को गार्जियन ने इसलिए दिक्कत वाला बताया है, क्योंकि यह ‘पाकिस्तान सीमा के करीब’ है। गार्जियन के अनुसार, इसमें दूसरी समस्या यह है कि इसे अडानी समूह बना रहा है। इस पूरे लेख में कोई पक्का सबूत या कारण नहीं दिया गया है, लेकिन गार्जियन चाहता है कि उसके लिखे वाक्यों को ब्रह्मवाक्य माना जाए।

गार्जियन का कहना है कि अडानी पर अमेरिका में मुकदमा दायर किया गया था, इसलिए यह प्रोजेक्ट ठीक नहीं है। गार्जियन यह नहीं बता पाया है कि अडानी समूह पर लगाए गए मुकदमे के खिलाफ अमेरिका के ही सांसद खड़े हो गए हैं। उन्होंने जाँच की है। वहीं नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वह कानून ही खत्म कर दिया, जिसके तहत अडानी पर कार्रवाई होनी थी।

गार्जियन के लिए यह लेख लिखने वाले वाले भी हन्ना एलिस पीटरसन और रवि नायर हैं। इनमें से पीटरसन भारत और हिन्दू विरोधी होने के लिए जाना जाता है जबकि रवि नायर OCCRP से जुड़ा है। OCCRP, जॉर्ज सोरोस से पैसा लेता है। गार्जियन ने यहाँ दावा किया है कि भारत ने सुरक्षा नियमों को बदला ताकि यह प्रोजेक्ट लग सके।

यह समझने में गार्जियन को भी दिक्कत हुई कि आखिर भारत अगर कोई नियम अपने यहाँ इन्फ्रा विकसित करने के लिए बदलता है तो इसमें क्या समस्या है। इससे पहले भी कई बार नियम बदले गए हैं। दूसरी बात यह है कि भारत को अपना सीमाई इलाका क्यों नहीं विकसित करना चाहिए।

क्या सीमाई इलाका होने चलते छोड़ दें?

कॉन्ग्रेस ने दशकों तक भारत के सीमाई क्षेत्रों को अविकसित छोड़ दिया था। यहाँ के गांवों को कभी भी अच्छी सड़कें, स्कूल या रोजगार के अवसर नहीं मिले। चाहे वह कच्छ का रण हो, जम्मू और कश्मीर, जैसलमेर, लद्दाख या उत्तर पूर्व भारत, कहीं भी अच्छे इन्फ्रा पर काम नहीं हुआ।

जब सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर सड़केंऔर तकनीकी कनेक्टिविटी होती है, तो यह किसी युद्ध के समय सेना की ही मदद करता है। यह दुश्मन देश को एक मजबूत संदेश भी देता है कि कोई भी इलाका उजाड़ नहीं हैं ताकि वे अपनी मर्जी से वहाँ घुसते चले आएँ।

वर्तमान में सैन्य रणनीति सिर्फ बन्दूक-टैंक तक सीमित नहीं है। बल्कि यह इन्फ्रा और एनर्जी जैसे क्षेत्रों तक फैला है। द गार्जियन और कॉन्ग्रेस द्वारा यह दावा करना कि खावड़ा में बनी विश्व की सबसे बड़ी ग्रीन एनर्जी परियोजना परियोजना ‘सुरक्षा जोखिम’ होगी, भ्रामक है और इसका साफ़ उद्देश्य जनता में डर फैलाना है।

संसद सत्र में हंगामा कॉन्ग्रेस की पुरानी आदत

ससंद सत्र में फर्जी बातों पर हंगामा करना कॉन्ग्रेस की पुरानी आदत रही है। पार्टी अभी तक यह नहीं समझ पाई है कि संसद में उन मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए जो वास्तव में भारत की जनता के लिए चिंता का विषय हैं। उसे पश्चिमी देशों में अपने विदेशी आकाओं को खुश करने के लिए नाटक करना बंद देना चाहिए।

बजट सत्र 2025 की शुरुआत में, पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस और विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि 2014 के बाद पहली बार संसद का सत्र बिना किसी ‘विदेशी चिंगारी‘ के शुरू होने वाला है। वह कॉन्ग्रेस पार्टी की पुरानी आदत की ओर इशारा कर रहे थे। हालाँकि, कॉन्ग्रेस इस बार भी पुरानी आदत नहीं छोड़ पाई।

यह लेख संघमित्रा पुरोहित ने लिखा है। इसको अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

आज हुए आम चुनाव तो BJP अकेले ही पार कर जाएगी बहुमत का आँकड़ा, NDA भी होगा 300 पार: कॉन्ग्रेस की 80 सीट भी नहीं, सर्वे ने बताया- 9 महीने में ही उतरा INDI गठबंधन का पानी

लोकसभा चुनाव अगर 2025 में करवा लिया जाए तो भाजपा को फिर एक बार देश बहुमत देगा। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को 300 से अधिक सीटें मिलेंगी। इन चुनावों में कॉन्ग्रेस का हाल और बिगड़ जाएगा। वह 80 सीट भी नहीं ला सकेगी। यह सारी जानकारी इंडिया टुडे के मूड ऑफ़ द नेशन (MOTN) में सामने आई है।

इंडिया टुडे के सर्वे के अनुसार, अगर वर्तमान में देश में लोकसभा चुनाव करवाए जाते हैं तो भाजपा को 280 सीट मिलेंगी। यानी भाजपा तीसरी बार बहुमत पाने में सफल रहेगी। वहीं भाजपा के सहयोगियों की 51 सीट आएँगी। सर्वे बताता है कि भाजपा के नेतृत्व वाला NDA 343 सीट पाएगा। NDA का वोट शेयर भी 3% बढ़ने का अनुमान है।

इंडिया टुडे के इस सर्वे के अनुसार, वर्तमान में चुनाव होने पर कॉन्ग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों को भारी नुकसान होगा। कॉन्ग्रेस को जहाँ इन चुनावों में 78 सीट मिलने का अनुमान है जबकि बाकी विपक्षी पार्टियाँ 184 सीट पाएँगी। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस और बाकी विपक्षी पार्टियों के INDI गठबंधन का वोट महज 1% बढ़ेगा।

यह सर्वे जनवरी-फरवरी 2025 के बीच किया गया है। इसमें 1 लाख 23 घार लोगों ने हिस्सा लिया है। इंडिया टुडे के सर्वे से साफ़ हो गया है कि अप्रैल-मई, 2024 में हुए देश में लोकसभा चुनाव से अच्छे नतीजे भाजपा और NDA को देखने को मिलेंगे। इस सर्वे और लोकसभा चुनाव 2024 में 9 महीने का अंतर है।

लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को 240 सीट मिली थीं जबकि NDA की कुल सीटें 292 थीं। भाजपा बहुमत से थोड़ा दूर रह गई थी। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस को 99 सीट मिली थीं। वह लगातार तीसरी बार 100 सीट का आँकड़ा पार करने में नाकाम रही थी।

इसी चुनाव में INDI गठबंधन की बाकी पार्टियों को 232 सीट मिलीं थी। इंडिया टुडे के सर्वे ने यह भी साफ़ कर दिया है कि लोकसभा चुनाव के बाद से भाजपा की स्थिति काफी मजबूत हुई है और वह फिर से अच्छा प्रदर्शन करने को तैयार है। इसके साथ ही इन आँकड़ों से मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के शुरूआती कामकाज पर भी मुहर लग गई है।

भाजपा की मजबूत स्थिति बीते कुछ चुनावों में देखने को भी मिली है। भाजपा और NDA ने महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण राज्य बड़े बहुमत के साथ जीते हैं। वहीं 99 सीट पाकर आत्मविश्वास में आई कॉन्ग्रेस महाराष्ट्र, हरियाणा में बुरी तरह हारी है तो वहीं दिल्ली में उसको तीसरी बार 0 सीट मिली हैं।

चर्च= यीशु दा मंदिर, पास्टर= पापा जी, जिंगल बेल्स= येशु दी बल्ले-बल्ले… पंजाबियत का चोला ओढ़कर पसर रहा ईसाइयत, पगड़ी-कड़ा वाले ईसाई चारों तरफ

पंजाब में ईसाइयत तेजी से पैर पसार रही है। इस बार ईसाई बनाने वालों ने नई तरकीब अपनाई है। नए ईसाइयों का नाम पीटर, जॉन या रिचर्ड नहीं है। नए ईसाई गुरविंदर, प्रीतिंदर या जसप्रीत जैसे ही नाम वाले हैं। उनके सिरों पर सिक्खी की पहचान पगड़ी भी है। कई के हाथ में पंच ककार की पहचान बताने वाला कड़ा भी है। लेकिन उनकी जबान पर नाम नानक जी का नहीं बल्कि यीशु मसीह का है। ईसाइयत का यह स्थानीय वर्जन हर तरीके की समस्या हल करने का दावा करता है। कोट पैंट पहनने वाले पास्टर चमत्कार दिखाते हैं।

ईसाइयत का हो गया लोकलाइजेशन

विज्ञान में एक थ्योरी है, अगर आप एक मेंढक को उबलते पानी में डाल देंगे, तो वह उछल कर भाग जाएगा। लेकिन आप ठन्डे पानी में मेंढक को डाल दें और धीमे-धीमे पानी गरमाएँ, तो अपनी ऊर्जा नए तापमान पर एडाप्ट होना में लगाएगा और जबतक तापमान उसे जलाने के स्तर तक पहुँचेगा, वह अपनी शक्ति खो चुका होगा। पंजाब और ईसाइयत का यही नाता है। पंजाब में ईसाइयत को फ़ैलाने वालों ने लोगों को धीमे-धीमे तरबियत देना चालू किया है। नई मिशनरियाँ ना किसी को नाम बदलने को कहती हैं, ना ही अपनी पहचान।

आजतक की एक ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि पंजाब के सीमाई इलाकों में बड़ी संख्या में चर्च और मिनिस्ट्री (जहाँ पास्टर रहते हैं और ईसाइयत से जुड़े काम होते हैं) फैली हुई हैं। रिपोर्ट बताती है कि यहाँ चर्च का नाम बदल कर ‘यहोवा दा मंदिर’ हो गया है। पास्टर यानी पादरी को ‘पापा जी’ कहा जाता है। बाइबल और बाकी किताबों को ‘पवित्र शास्त्र’ या ‘नीतिवचन’ जैसे नामों से चलाया जाता है। यहाँ तक कि यीशु की प्रार्थना में गाए जाने वाले ईसाई भजन भी पंजाब में आकर टप्पे (स्थानीय संगीत) और भजन का रूप ले लिया है।

किताबों का बदला स्वरुप (साभार: आजतक)

अगर आप भजन के बोल पर ध्यान ना दें, तो शायद बता भी ना पाएँ कि कोई यीशु की शान में कसीदे पढ़ रहा है। पंजाब में ईसाइयत का नया ढाँचा आपकी पहचान नहीं बदलता, आपके विचार जरूर बदल देता है। आपको अपने मूल धर्म से दूर कर देता है। यह काफी सोच समझ कर किया गया है। ईसाइयत में लाए जा रहे लोगों को लगता है कि कुछ भी ऐसा नहीं बदल रहा जो उनको बाहर से दिखे, ऐसे में क्या बुराई है। इन्हीं को ‘क्रिप्टो क्रिश्चियन’ कहते हैं।

चमत्कार की कहानी, पवित्र तेल और गवाहियाँ

आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, ईसाइयत को फैलाने के लिए बनाई गई मिनिस्ट्री का रकबा एकड़ों में है। ऐसी ही एक मिनिस्ट्री में आजतक की एक पत्रकार पहुँची थी। यह पास्टर अंकुर नरूला की थी। यहाँ विश्व का चौथा सबसे बड़ा चर्च बन रहा है। रिपोर्ट बताती है कि इस संस्थान के भीतर हर कदम पर वो लोग खड़े हैं, जो अपनी चमत्कार की कहानी सुनाते हैं। सारी कहानियों में ईसाइयत या फिर ‘पापा जी’ की शरण में आने से पहले की दुखभरी कहानी होती है, जबकि शरण के बाद सारी समस्याएँ खत्म हो चुकी होती हैं।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ मिले हुए लोग नए आए लोगों को दिल का दौरा सही होने से लेकर कैंसर ठीक करने तक के चमत्कार बताते हैं। आजतक की एक रिपोर्टर को एक महिला अपनी माँ के दिल का दौरा सही करने की कहानी सुनाती है। वह यहाँ मिलने वाले एक पवित्र तेल का प्रताप इसमें बताती है। रिपोर्ट बताती है कि इस मिनिस्ट्री के भीतर कई काउंसिलर तक बैठे हैं। वह यहाँ आने वालों की समस्या सुनते हैं। उनकी विदेश जाने जैसी इच्छाएँ भी सुनते हैं। हर तरह की समस्या के लिए एक अलग काउन्टर बनाया गया है।

इन चर्च में हर चीज के लिए दुआ करवाई जाती है। सास-बहू का झगड़ा हो या भूत-प्रेत का साया, कोई अगर अपने पैर पर नहीं चल पाता तो उसके लिए भी प्रार्थनाएँ भी हैं। हेल्पलाइन नम्बर भी है। यूट्यूब पर अंकुर नरूला के चैनल पर ऑटिज्म वाले बच्चे को सही करने से लेकर विदेश यात्रा तक के किस्से पड़े हैं। इन्हें अंकुर नरूला के लोग गवाहियां कहते हैं। इसी चैनल पर एक वीडियो पड़ी है, जिसमें पश्चिम बंगाल में किसी जगह पर लोग अजीब तरह से अपने शरीर को झूंकते दिखते हैं। इसमें भी ना जाने कितने लोगों का चमत्कार दिखाया गया है।

लगातार पॉपुलर होते पास्टर

पंजाब में ईसाइयत फ़ैलाने के मिशन के केंद्र में कुछ पास्टर हैं। इनकी पूरी व्यवस्थाएँ हैं। बड़े बड़े चर्च हैं। इनमें सबसे चर्चित नाम ‘तेरी बहन बोल नहीं सकती थी’ से फेमस हुए बजिंदर सिंह का है। उनके अलावा अंकुर नरूला एक दूसरा बड़ा नाम हैं। तीसरा बड़ा नाम गुरनाम सिंह खेड़ा हैं। गुरनाम पहले पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर थे। एक और नाम अमृत संधू का है। सुखपाल राणा भी ईसाइयत फैलाने वाले एक बड़े किरदार हैं। इन सबके अलावा एक महिला पास्टर कंचन मित्तल भी पंजाब में काफी सक्रिय हैं।

अंकुर नरूला और कंचन मित्तल

इन सबके बीच एक चीज कॉमन हैं। इनमें से अधिकांश पेंटाकोस्टल खेमे से जुड़े हैं। यह ईसाइयत का ही एक रूप है। ईसाइयत को बढ़ावा दे रहे यह लोग सालों पहले अपना पूर्व धर्म छोड़ चुके हैं, लेकिन नाम वैसा ही है, ताकि स्थानीय लोगों से जुड़ने में मदद मिले। सबको यूट्यूब पर लाखों फॉलोअर हैं। सबके यूट्यूब पर चमत्कार के किस्से हैं। कहीं कोई किसी महिला के माँ बनने का किसा बताता है तो कोई जन्म से अपाहिजों को चलाने का।

अंकुर नरूला के एक प्रोग्राम की भीड़

निशाने पर कौन?

पंजाब में लगातार ईसाइयत को बढ़ावा दे रहे इन लोगों का पहला निशाना वो लोग हैं, जो किसी समस्या से परेशान हैं। दूसरे वो हैं जिनके मन में विदेश जाने जैसी अभिलाषाएँ हैं। यह सभी पास्टर इन सारी समस्याओं का हल देने की बात कहते हैं। दैनिक जागरण की हाल ही में आई एक रिपोर्ट बताती है कि बीते 2 वर्षों में यहाँ 3.50 लाख लोग ईसाई बनाए गए हैं। तरनतारन जैसे जिलों में यह संख्या तेजी से बढ़ी है। इसको रोकने के लिए सिख धर्मगुरु ज्ञानी हरप्रीत सिंह धर्मांतरण कानून की माँग कर चुके हैं।

मी लॉर्ड से माननीय तक, रोहिंग्या पर सब हुए दरियादिल: सुप्रीम कोर्ट चाहता है इनके बच्चों को पढ़ाए सरकार, पप्पू यादव ने की ‘घुसपैठियों’ को ‘भारत का नागरिक’ बनाने की वकालत

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (12 फरवरी 2025) को कहा कि बच्चों की शिक्षा के मामले में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए और यह बात रोहिंग्या के बच्चों पर भी लागू होती है। दरअसल, ‘रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव’ नाम के एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए सुविधाओं की माँग की है। इनमें बच्चों की मुफ्त शिक्षा भी शामिल है। वहीं, पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने रोहिंग्या मुस्लिमों को नागरिकता देने की माँग की है। 

पप्पू यादव ने कहा कि देश में रोहिंग्या-रोहिंग्या होते रहता है। पूरी दुनिया में इनकी संख्या सिर्फ 17 लाख है। उन्होंने कहा कि जो लोग भारत में लंबे समय से रह रहे हैं, उन्हें भारत की नागरिकता दी जानी चाहिए। इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 पर पप्पू यादव ने कहा, “मैं इमिग्रेशन बिल का समर्थन करता हूँ, लेकिन पिछले 10-12 सालों में क्या वे यह पता लगा पाए हैं कि हमारे देश में कितने अप्रवासी हैं? वे सिर्फ़ वोट बैंक के लिए रोहिंग्याओं की बात करते हैं… सरकार को उन लोगों को नागरिकता देनी चाहिए जो लंबे समय से यहां रह रहे हैं…।”

रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव द्वारा दायर याचिका में कोर्ट से ये निर्देश देने की माँग की गई थी कि रोहिंग्या शरणार्थियों के बच्चों को स्कूल में प्रवेश और सरकारी लाभ दिया जाए। इसके लिए आधार कार्ड अनिवार्यता और उनकी नागरिकता की स्थिति की परवाह ना की जाए। इस मामले पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की खंडपीठ ने की।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने पीठ के समक्ष कहा कि रोहिंग्या शरणार्थी एक निराशाजनक स्थिति का सामना कर रहे हैं। इस पर न्यायालय ने कहा, “हमें छात्रों और उनके माता-पिता के बारे में बताएँ। वे कहां रह रहे हैं? हमें घर का नंबर, परिवारों की सूची, उनके रहने के सबूत दें। हमें पंजीकरण संख्या आदि दिखाएँ। हम देखेंगे कि क्या किया जा सकता है।”

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता एनजीओ को निर्देश दिया था कि वह कोर्ट को बताए कि दिल्ली में रोहिंग्या शरणार्थी कहाँ-कहाँ बसे हुए हैं और उन्हें क्या-क्या सुविधाएँ मिली हुई हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि रोहिंग्या ‘शरणार्थियों’ को स्कूलों और अस्पतालों में प्रवेश से वंचित रखा जाता है, क्योंकि उनके पास आधार कार्ड नहीं है।

कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा, “वे शरणार्थी हैं, जिनके पास UNHCR (शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त) कार्ड हैं और इसलिए उनके पास आधार कार्ड नहीं हो सकते। लेकिन, आधार कार्ड के अभाव में उन्हें सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।” उन्होंने बताया कि रोहिंग्या शाहीन बाग और कालिंदी कुंज में झुग्गियों में और खजूरी खास में किराए के मकानों में रह रहे हैं।

बता दें कि इस एनजीओ द्वारा दायर याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकारों को निर्देश देने की माँग की गई है कि वे रोहिंग्या बच्चों को आधार कार्ड या भारतीय नागरिकता न होने के बावजूद मुफ्त शिक्षा दें। जनहित याचिका में आगे माँग की गई थी कि इन रोहिंग्या ‘शरणार्थियों’ को सरकार द्वारा पहचान पत्र माँगे बिना कक्षा 10, 12 और स्नातक सहित सभी परीक्षाओं में भाग लेने की अनुमति दी जाए।

PM मोदी पहुँचे अमेरिका, इजरायली PM के बाद दूसरे नेता जिनसे US राष्ट्रपति करेंगे मुलाकात: नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गेबार्ड से कई मसलों पर की चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय फ्रांस यात्रा समाप्त कर दो दिवसीय अमेरिका यात्रा पर वॉशिंगटन पहुँच गए हैं। वहाँ पर प्रधानमंत्री मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। यहाँ वे नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा सहयोग, आतंकवाद, भारत-प्रशांत क्षेत्र, चीन, H1B वीजा जैसे गंभीर मुद्दों पर बातचीत होगी।

वॉशिंगटन पहुँचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड से मुलाकात की। इसको लेकर पीएम मोदी ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, “वॉशिंगटन में अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड से मुलाकात हुई। इस पद पर उनकी नियुक्ति के लिए बधाई देता हूँ। भारत-अमेरिका की दोस्ती के कई आयामों पर चर्चा हुई, जिनकी वह हमेशा से वकालत करती रही हैं।”

अमेरिका पहुँचने पर पीएम मोदी का भव्य स्वागत हुआ। पीएम मोदी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बाद विश्व के दूसरे ऐसे राजनेता हैं, जिनसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में मुलाकात कर करेंगे। पीएम मोदी डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका की यात्रा कर रहे हैं। वे व्हाइट हाउस के पास स्थित 200 साल पुराने ऐतिहासिक अतिथि गृह ‘ब्लेयर हाउस’ में ठहरे हैं।

व्हाइट हाउस के सामने 1651 पेंसिल्वेनिया एवेन्यू में 70,000 वर्ग फीट में फैला ब्लेयर हाउस अंतरराष्ट्रीय अतिथियों के लिए सबसे प्रमुख आवास है। यहाँ कई राष्ट्राध्यक्षों, शाही परिवारों के सदस्यों और वैश्विक नेता ठहर चुके हैं। व्हाइट हाउस परिसर के सहायक प्रतिष्ठान के रूप में काम करता है।

ब्लेयर हाउस में 119 कमरों वाले चार परस्पर जुड़े हुए टाउनहाउस हैं। इनमें 14 अतिथि कक्ष, 35 बाथरूम, 3 औपचारिक भोजन कक्ष और एक सुसज्जित ब्यूटी सैलून है। इसका इंटीरियर में शामिल साज-सामान, कलाकृति और ऐतिहासिक कलाकृतियों के संयोजन के माध्यम से अमेरिकी संस्कृति को प्रदर्शित करता है।

पीएम मोदी के अमेरिका पहुँचने से पहले ब्लेयर हाउस में लगे अमेरिकी झंडे की जगह भारतीय ध्वज तिरंगा से सजाया गया है। भारतीय समुदाय के लोगों ने ब्लेयर हाउस के बाहर ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ और ‘मोदी मोदी’ के नारे लगाए। पीएम मोदी ने यहाँ पर भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की और उनसे हाथ मिलाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज गुरुवार (13 फरवरी 2025) की रात को व्हाइट हाउस में भव्य स्वागत किया जाएगा। यहाँ वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल स्तर की कई बैठकें भी आयोजित की जाएँगी। इसके साथ ही अमेरिका के नामचीन उद्योगपतियों के साथ भी उनकी मुलाकात होगी।

अफ्रीकी-अमेरिकी गायिका एवं अभिनेत्री मैरी मिलबेन भी पीएम मोदी की अमेरिकी यात्रा से उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, “भारत आज अमेरिका का एक महत्वपूर्ण भागीदार है और यह देखने के लिए मैं उत्सुक हूँ कि रिश्ते को मजबूत करने के संदर्भ में उनका एजेंडा क्या होगा। मैं यह सुनने के लिए उत्सुक हूँ कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए मिलकर क्या करना चाहते हैं। हम दुनिया भर में कुछ चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और भारत इन चुनौतियों में से कुछ को कम करने में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”

$र, &ड़े, 6 इंच… बिना स्क्रिप्ट-बिना पैसे के यही सब सुनाएगी ‘रिबेल किड’? जानिए मुंबई पुलिस से क्या-क्या कहा: समय रैना ने ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ के सारे एपिसोड हटाए, पर नहीं माँगी माफी

कथित कॉमेडियन समय रैना ने अपने शो ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ के सारे एपिसोड यूट्यूब से हटा लिए हैं। पर इस शो में हुई अश्लील टिप्पणियों को लेकर उन्होंने अब तक माफी नहीं माँगी है। दूसरी तरफ इस शो में भाग लेने वाले यूट्यूबर आशीष चंचलानी और इन्फ़्लुएन्सर अपूर्वा मखीजा ‘द रिबेल किड’ ने भी मुंबई पुलिस के सामने बयान दर्ज करवाया है।

अपने बयान से इन्होंने अप्रत्यक्ष तौर पर यह जताने की कोशिश की है कि चूँकि शो स्क्रिप्टेड नहीं था और इसके लिए उन्होंने कोई पैसे नहीं लिए थे, इसलिए बोलने की आजादी के नाम पर इन्हें ‘$र, &ड़े, 6 इंच, माँ-बाप का संभोग…’ जैसी टुच्ची बातें करनी की आजादी मिल जाती है।

समय रैना ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “जो कुछ भी हो रहा है, उसे संभालना मेरे लिए बहुत मुश्किल है। मैंने अपने चैनल से ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ के सभी वीडियो हटा दिए हैं। मेरा एकमात्र उद्देश्य लोगों को हंसाना और उन्हें बढ़िया समय देना था। मैं सभी एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करूँगा ताकि निष्पक्ष जाँच हो सके। धन्यवाद।”

इससे पहले अपूर्व मखीजा और आशीष चंचलानी मुंबई पुलिस के पास अपना बयान दर्ज करवाने पहुँचे। उन्होंने बताया कि समय रैना के यूट्यूब चैनल पर चलने वाले शो में जज बनने के लिए उन्हें कोई भी फीस नहीं दी जाती। हालाँकि, इस शो के क्लिप्स आदि वह अपने सोशल मीडिया पर डाल सकते हैं।

उन्होंने बताया कि शो में बोली जाने वाली कोई भी बात पहले से तय नहीं होती। इसको देखने आने वाले लोगों को टिकट खरीदनी पड़ती है और सबको यहाँ बोलने की पूरी आजादी होती है। टिकट से होने वाली कमाई को उस दिन के शो के विजेता को दे दिया जाता है। विजेता तय करने के लिए सबको मार्क्स दिए जाते हैं।

उनके अलावा रणवीर इलाहाबादिया ने भी अपने मैनेजर के माध्यम से पुलिस को अपना बयान दर्ज करवाया है। वह खुद पूछताछ में शामिल नहीं हुए। मुंबई पुलिस यह जाँच एक FIR पर कर रही है। यह FIR भाजपा की एक नेता ने करवाई है। इस बीच इसी मामले में दर्ज FIR की जाँच के लिए गुवाहाटी पुलिस की एक टीम मुंबई पहुँची है।

इन सबके बीच राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी अश्लील टिप्पणी के दौरान शो में शामिल चारों इन्फ़्लुएन्सर से जवाब तलब किया है। यह मामला लगातार राजनीतिक गलियारों में भी उठ रहा है। कई संगठन समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया समेत बाकी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ एपिसोड के दौरान रणवीर इलाहाबादिया ने एक प्रतिभागी से पूछा था कि क्या वह अपने माता-पिता को जीवन भर सेक्स करते हुए सिर्फ देखेंगे या उन्हें कभी ज्वाइन भी करेंगे। इसी शो में रिबेल किड के नाम से मशहूर अपूर्वा मुखीजा ने भी कई बेहद आपत्तिजनक बातें कहीं थी। इसकी एक क्लिप सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई थी। इसके बाद अश्लीलता फ़ैलाने का आरोप लगाते हुए उनका विरोध हुआ था।

कॉन्ग्रेस MP गौरव गोगोई की अंग्रेज बीवी का ISI से है कनेक्शन? असम CM की पोस्ट से छिड़ी बहस, दावा- जो लेते हैं जॉर्ज सोरोस से पैसा उनसे भी जुड़ा है कॉन्ग्रेस सांसद का NGO

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कॉन्ग्रेस नेता गौरव गोगोई पर बड़ा हमला किया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस सांसद का नाम लिए बिना उनकी पत्नी की नागरिकता और उनके ISI से सम्बन्धों के आरोप लेकर भी बात की है। उन्होंने इससे उठे प्रश्नों का जवाब माँगा है।

एक्स (पहले ट्विटर) पर असम मुख्यमंत्री ने लिखा, “ISI से संबंधों के आरोप, युवाओं के ब्रेनवॉश और उनको पाकिस्तानी दूतावास में कट्टरपंथी बनाने समेत पिछले 12 साल से भारतीय नागरिकता ना लेने पर उठे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, धर्मांतरण कार्टेल से जुड़ा होना और देश की सुरक्षा को अस्थिर करने के लिए जॉर्ज सोरोस समेत पैसा लेना ऐसी चिंताएँ हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।”

जहाँ हिमंत बिस्वा सरमा ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह साफ है कि वह कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न के बारे में बात कर रहे थे। दोनों की शादी 20 13 में हुई थी। 12 साल बाद भी कोलबर्न ने अपना ब्रिटिश पासपोर्ट बरकरार रखा है। उन्होंने भारत की नागरिकता नहीं ली है।

हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी सवाल उठाया कि एक सांसद की पत्नी को इतने लंबे समय तक विदेशी नागरिकता बनाए रखने की अनुमति क्यों दी गई है, जबकि राजनयिकों के लिए एक अलग नियम है। उन्होंने IFS अधिकारियों की विदेशी नागरिक से शादी को लेकर नियम पर बात की। इसके तहत उन्हें अनुमति लेनी होती है और उनके साथी को 6 महीने में नागरिकता लेनी होती है।

गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ वर्तमान में ऑक्सफोर्ड पॉलिसी मैनेजमेंट के लिए काम कर रही हैं, जो जलवायु मुद्दों पर काम करता है। वह दिल्ली में क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क (CDKN) में प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर भी काम करती हैं।

असम के सीएम उन पर सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों का जिक्र कर रहे थे। इन आरोपों के अनुसार, एलिजाबेथ अली तौकीर शेख के जरिए ISI से जुड़ी हैं, जो CDKN के एशिया का डायरेक्टर है। उसने पाकिस्तान योजना आयोग में भी काम किया है। एलिजाबेथ ने पाकिस्तान में तौकीर शेख के साथ मिलकर काम किया।

गौरव गोगोई के NGO पर FCRA उल्लंघन का आरोप

इससे पहले गौरव गोगोई ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि मणिपुर में अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए भाजपा जॉर्ज सोरोस और उनके ओपन सोसाइटी फाउंडेशन का मुद्दा उठा रही है। दिलचस्प बात यह है कि गौरव गोगोई के सोरोस से पैसे लेने वाले संगठनों से संबंध हैं।

गौरव गोगोई फार्म 2 फूड के नाम के NGO के संस्थापक हैं। जोरहाट में स्थित इस NGO का सहयोगी नेशनल फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया (NFI) है। यह संगठन जॉर्ज सोरोस और अन्य डीप स्टेट से पैसा लेता है। NFI ने जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन, फोर्ड फाउंडेशन, ओमिडयार नेटवर्क और रॉकफेलर फाउंडेशन को फंड देने वालों के रूप में बताया है।

ये सभी संगठन भारत सहित दुनिया भर में राष्ट्रवादी सरकारों के खिलाफ काम करने वाले डीप स्टेट के एसेट के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने कई भारत विरोधी अभियानों को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा, फार्म 2 फूड को FCRA लाइसेंस नहीं मिला हुआ है। ऐसे में यह विदेशी चन्दा नहीं ले सकता।

इसके बावजूद, यह NGO विदेशी संगठनों के साथ काम कर रहा है, जिससे सवाल उठता है कि क्या समूह FCRA कानूनों का प्रावधानों का उल्लंघन कर रहा है। फार्म 2 फूड ने स्विस रे फाउंडेशन को भी अपने सहयोगी के तौर पर दिखाया है। स्विस रे द्वारा संचालित फाउंडेशन जलवायु और स्वास्थ्य क्षेत्रों पर काम करता है।

इसकी वेबसाइट बताती है कि यह अन्य सहायता के अलावा अपने भागीदारों को फंड भी देता है। फार्म 2 फूड की 2022-23 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इसे उस वर्ष ₹1 लाख 80 हजार का डोनेशन और ₹14 लाख 74 हजार का चन्दा मिला। हालाँकि, इसमें पैसा देने वालों का नाम नहीं है। इसलिए, यह पता नहीं लगाया जा सकता कि इसे सीधे तौर पर कोई विदेशी फंडिंग मिली है या नहीं।

मुफ्त में चीजें मिलने से बढ़ रही कामचोरी: ‘चुनावी रेवड़ी’ पर बरसा सुप्रीम कोर्ट, कहा- उन्हें मुख्यधारा में शामिल करें; Freebies कल्चर पर PM मोदी भी कर चुके हैं आगाह

चुनावी रेवड़ी बाँटने की पीएम मोदी की चिंता पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अब मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (12 फरवरी 2025) को कहा कि चुनाव से पहले रेवड़ी बाँटने की प्रथा के कारण लोग काम नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें मुफ्त मे राशन और पैसा मिल रहा है। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में नकदी बाँटने की खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

मुफ्त चीजें बाँटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधी ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शहरी क्षेत्रों में बेघर लोगों के आश्रय के अधिकार से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए चुनाव से पहले मुफ्त चीजें देने की प्रथा पर असहमति जताई। कोर्ट ने कहा कि बेघर लोगों को मुख्यधारा के समाज में शामिल किया जाना चाहिए।

जस्टिस गवई ने कहा, “दुर्भाग्य से इन मुफ्त सुविधाओं के कारण… लोग काम करने को तैयार नहीं हैं। उन्हें मुफ्त राशन मिल रहा है। उन्हें बिना कोई काम किए ही राशि मिल रही है।” पीठ ने कहा, “हम उनके प्रति आपकी चिंता की सराहना करते हैं, लेकिन क्या यह बेहतर नहीं होगा कि उन्हें समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बनाया जाए और राष्ट्र के विकास में योगदान करने की अनुमति दी जाए।”

केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार शहरी गरीबी उन्मूलन मिशन को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रही है, ताकि शहरी क्षेत्रों में बेघर लोगों को आश्रय प्रदान करने सहित कई मुद्दों का समाधान किया जा सके। इस पर पीठ ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि केंद्र के मिशन को लागू करने में कितना समय लगेगा। इस मामले की सुनवाई 6 सप्ताह बाद होगी।

दिल्ली हाई कोर्ट का नकदी बाँटने के मामले का सुनवाई से इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार (12 फरवरी 2025) को सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एसएन ढींगरा द्वारा BJP, आम आदमी पार्टी (AAP) और कॉन्ग्रेस के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। याचिका में चुनावों में मतदाताओं को नकदी बाँटने के दलों के राजनीतिक वादों को ‘भ्रष्ट आचरण’ आचरण बताते हुए इस पर रोक लगाने की माँग की थी।

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा। हाई कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ मामले में इसी तरह का मामला लंबित है।

यह जनहित याचिका सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ढींगरा द्वारा दायर की गई थी, जो समय यान (सशक्त समाज) नामक संगठन के अध्यक्ष भी हैं। यह याचिका दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस ढींगरा की ओर से पेश वकील ने कहा कि राजनीतिक दल सरकारी खजाने की कीमत पर मुफ्त चीजें बेचने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा मौद्रिक योजनाओं की आड़ में मतदाताओं की स्पष्ट अनुमति के बिना डेटा एकत्र किया जाता है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील सुरुचि सूरी ने कहा कि इस मामले से संबंधित एक याचिका पहले ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि 2023 के आदेश के अनुसार इस मामले में तीन जजों की बेंच गठित करने की आवश्यकता है।

इसके बाद हाई कोर्ट ने इस मामले को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता से कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में जाए। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रेवड़ी बाँटने की प्रथा पर चिंता जताई थी।

ऐसी तस्वीर नहीं बना सकता AI जिसमें कोई बाएँ हाथ से लिखता दिख रहा हो: PM मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बताई ‘सीमा’, नेटिजन्स नहीं बदल पाए नतीजा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 फरवरी को पेरिस में ग्लोबल AI शिखर सम्मेलन में भाषण दिया। अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने AI से जुड़ी कई बातें बताईं। उन्होंने कहा कि AI बीते कुछ दिनों में लोगों के लिए मददगार रहा है, उसने लोगों को मेडिकल रिपोर्ट तक समझने में सहायता की है।

जहाँ AI लगातार बेहतर होता जा रहा है, वहीं उसमें अब भी कुछ कमियाँ हैं। किसी इंसान या वस्तु की तस्वीर बनाने वाले जेनरेटिव AI को लेकर अब भी कुछ समस्याएँ हैं। पीएम मोदी ने पेरिस में ऐसी ही एक समस्या की तरफ इशारा किया। उन्होंने बताया कि AI ऐसी तस्वीरें नहीं बना सकता, जिसमें कोई व्यक्ति अपने बाएँ हाथ से लिख रहा हो।

प्रधानमंत्री मोदी की इस बात के बाद सोशल मीडिया पर इसे ट्राई करने वालों की एक बाढ़ आ गई। लोगों ने अलग-अलग तरीकों से बाएँ हाथ से लिखते हुए तस्वीर बनवाने की कोशिश AI प्रोग्राम्स से की। हालाँकि सफलता किसी को नहीं मिली और पीएम मोदी की बात हर बार सही साबित हुई।

हमने भी की कोशिश, ये रहा परिणाम

DALL.E3 पर चलने वाला बिंग AI बाएँ हाथ से लिखते हुए आदमी की तस्वीर नहीं बना पाया, चाहे हमने जैसे भी पूछा।

AI ने प्रॉम्प्ट में ‘बाएँ हाथ’ लिखे होने के चलते आदमी को उसके बाएँ हाथ से कॉफी पीते हुए दिखाया, लेकिन इसने एक भी बार बाएँ हाथ से लिखने वाली तस्वीर नहीं बनाई।

जब हमने एक दूसरे प्रॉम्प्ट में बाएँ हाथ पर जोर दिया, तो इसने तीन हाथ का आदमी बना दिया। लेकिन यहाँ भी उसके बाएँ हाथ में पेन नहीं पकड़ाया।

बिंग AI ने लेकिन एक बाज की बाएँ हाथ से लिखते हुए तस्वीर बना दी। भले ही पढ़ने में यह बड़ा हास्यास्पद लगे, लेकिन सोचने वाली बात यह है कि इसने पक्षी को दिखाया दिया लेकिन इंसान को नहीं।

ग्रोक ने कर दिया मना

ट्विटर के AI ग्रोक ने भी ऐसी तस्वीर नहीं बनाई। अलग-अलग प्रॉम्प्ट देने पर केवल दाएँ हाथ से लिखता हुआ आदमी उसने दिखाया। उसने टेक्स्ट में लिखने पर हर बार बाएँ हाथ से लिखने की तस्वीर बनाने की पुष्टि की लेकिन जब असल मेंतस्वीर बनी तो इसमें मामला गड़बड़ ही रहा।

यहाँ तक ग्रोक ने आदिमानव की भी पेंटिंग बनाती हुई तस्वीर में दाएँ हाथ से होता काम दिखाया।

ग्रोक इंसानों को नहीं, बल्कि बंदरों को तक बाएँ हाथ से काम करते नहीं दिखाता। ऐसा ही इसने एक बंदर पर दिए गए प्रॉम्प्ट में किया।

मेटा भी हो गया फेल

मेटा भी इस काम में फेल हो गया। इसका मॉडल एमू किसी भी व्यक्ति की बाएँ हाथ से लिखने की तस्वीर नहीं बना पाया।

यहाँ तक कि ये कार्टून की भी तस्वीर नहीं बना पाया।

पीएम मोदी की कही हुई बात हर बार हमारे प्रयोग में भी सही ही साबित हुई।

रोहिंग्या मुस्लिमों को बिल्कुल FREE मिले राशन+शिक्षा+चिकित्सा, सुप्रीम कोर्ट में मामला: याचिका डालने वाला गोंजाल्विस, जॉर्ज सोरोस से हैं इसके लिंक

‘रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव’ नाम के एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर शरणार्थियों के लिए सुविधाओं की माँग की है। NGO ने याचिका में कहा कि कोर्ट केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दे कि दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं को स्कूलों और अस्पतालों तक पहुँच दी जाए। इस मामले की सुनवाई सोमवार (10 फरवरी) को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह ने की।

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता एनजीओ को निर्देश दिया था कि वह कोर्ट को बताए कि दिल्ली में रोहिंग्या शरणार्थी कहाँ-कहाँ बसे हुए हैं और उन्हें क्या-क्या सुविधाएँ मिली हुई हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि रोहिंग्या ‘शरणार्थियों’ को स्कूलों और अस्पतालों में प्रवेश से वंचित रखा जाता है, क्योंकि उनके पास आधार कार्ड नहीं है।

कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा, “वे शरणार्थी हैं, जिनके पास UNHCR (शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त) कार्ड हैं और इसलिए उनके पास आधार कार्ड नहीं हो सकते। लेकिन, आधार कार्ड के अभाव में उन्हें सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।” उन्होंने बताया कि रोहिंग्या शाहीन बाग और कालिंदी कुंज में झुग्गियों में और खजूरी खास में किराए के मकानों में रह रहे हैं।

बता दें कि इस एनजीओ द्वारा दायर याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकारों को निर्देश देने की माँग की गई है कि वे रोहिंग्या बच्चों को आधार कार्ड या भारतीय नागरिकता न होने के बावजूद मुफ्त शिक्षा दें। जनहित याचिका में आगे माँग की गई थी कि इन रोहिंग्या ‘शरणार्थियों’ को सरकार द्वारा पहचान पत्र माँगे बिना कक्षा 10, 12 और स्नातक सहित सभी परीक्षाओं में भाग लेने की अनुमति दी जाए।

शिक्षा के अलावा, याचिका में इन रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए सरकारी अस्पतालों में मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ अंत्योदय अन्न योजना के तहत उपलब्ध सब्सिडी वाले खाद्यान्न देने की माँग की गई है। दरअसल, ये NGO और गोंजाल्विस चाहते हैं कि शरणार्थी के दर्जे वाले इन अवैध घुसपैठियों को भारत के एक नागरिक वाली हर सुविधा इन्हें मुफ्त में मिले।

कौन हैं गोंजाल्विस

अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (HRLN) के संस्थापक हैं। यह सामाजिक-कानूनी सूचना केंद्र के तत्वावधान में काम करता है। इसे पहले जॉर्ज सोरोस के एनजीओ से फंड मिल चुका है। HRLN ने जिन प्रयासों में भाग लिया है, उनमें इस्कॉन के अक्षय पात्र के खिलाफ अभियान, भारतीय राजद्रोह कानूनों के खिलाफ अभियान और भारत में रोहिंग्या मुस्लिमों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना शामिल है।

यह RTE अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए सक्रियता में भी शामिल रहे हैं, जो हिंदू-संचालित संस्थानों के खिलाफ काम करता है। रिपोर्ट्स कहती हैं कि गोंसाल्वेस के HRLN को 2020 के एंटी-सीएए दंगाइयों का अदालतों में बचाव करने के लिए चार यूरोपीय चर्चों से 50 करोड़ रुपए भी मिले। इसके अलावा, HRLN देश भर में कई ऐसे संगठनों से भी जुड़ा हुआ है जो भारत की क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करना चाहते हैं।

रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (R4R)

रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स एनिशिएटिव की स्थापना साल 2017 में पंजीकृत किया गया था। इसे ग्लोबल स्टेटलेसनेस फंड (GSF) से धन प्राप्त होता है। GSF नीदरलैंड स्थित इंस्टीट्यूट ऑन स्टेटलेसनेस एंड इंक्लूजन की एक परियोजना है। इन्हें दुनिया भर में सत्ता गिराने के लिए कुख्यात हो चुके जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से धन प्राप्त होता है।

रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स एनिशिएटिव के शिक्षा और आंदोलन निर्माण निदेशक अली जौहर रिफ्यूजी इंटरनेशनल (आरआई) के पहले शरणार्थी फेलो कार्यक्रम में फेलो थे। अली जौहर (मौंग थीन श्वे) 2005 में भारत आए थे। वे मूल रूप से म्यांमार के रखाइन राज्य के रहने वाले हैं। आरआई के अध्यक्ष जेरेमी कोनइंडिक विवादास्पद यूएसएआईडी के पूर्व कर्मचारी हैं।

USAID मीडिया, एक्टिविस्ट, संदिग्ध अधिकार समूहों और यहाँ तक ​​कि इस्लामी आतंकवादी संगठनों को फंड देता था। जेरेमी कोनइंडिक यूएसएआईडी के यूएस फॉरेन डिजास्टर असिस्टेंस के कार्यालय के निदेशक थे। ट्रम्प प्रशासन ने यूएसएआईडी को निष्क्रिय नहीं कर दिया है। अली जौहर फ्री रोहिंग्या गठबंधन का हिस्सा हैं। इस समूह को ग्लोबल स्टेटलेसनेस फंड से भी धन प्राप्त होता है।

(मूल रूप से अंग्रेजी में सिद्धि सोमानी द्वारा लिखी गई इस रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं)