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भाजपा नेता समेत परिवार के 6 लोगों की जघन्य हत्या, ज़मीनी विवाद के चलते रिश्ते के भाइयों ने तलवार से काट डाला

जबलपुर मंडला ज़िले के अंतर्गत आने वाले औद्योगिक क्षेत्र मनेरी में बुधवार के दिन भयावह घटना सामने आई है। जिसमें ज़मीन के पारिवारिक विवाद के चलते कुल 6 लोगों की बेहद निर्दयता से हत्या कर दी गई। ज़मीनी विवाद के चलते हुए इस झगड़े ने कुछ ही समय में इतना हिंसक रूप ले लिया कि 6 लोगों की हत्या हुई और 5 लोग बुरी तरह घायल हुए हैं।  

मरने वालो में भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेता राजेन्द्र सोनी, पुत्र बिन्नू सोनी, पुत्री रानू सोनी, बिन्नू सोनी के दो बेटे सहित 1 रिश्तेदार शामिल हैं। दरअसल, राजेन्द्र सोनी पर हमला करने वाले कोई और नहीं बल्कि रिश्ते में उनके भाई लगने वाले संतोष सोनी और हरीश सोनी हैं। ख़बरों के मुताबिक़ इनके बीच पिछले कुछ समय से ज़मीन को लेकर पारिवारिक रंजिश जारी थी। बुधवार के दिन इस रंजिश ने बेहद हिंसात्मक रूप ले लिया।  

संतोष सोनी और हरी सोनी ने राजेन्द्र सोनी और उनके परिवार पर तलवार से हमला कर दिया। इसके बाद घटनास्थल पर ही कुल 4 लोगों की मौत हो गई और 2 लोगों ने उपचार के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया। घटना इतनी नृशंस थी कि कुछ ही देर में मौके पर भीड़ इकट्ठा हो गई और भीड़ ने मौके पर मौजूद आरोपियों को जम कर पीटा।  

फिलहाल, हमला करने वालों की हालत भी गंभीर बताई जा रही है। ख़बरों के मुताबिक़ एक हमलावर को पैर में गोली भी लगी है, हालाँकि, अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घायलों को मंडला के स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहाँ उनका उपचार चल रहा है। मामला संवेदनशील होने की वजह से घटनास्थल पर काफी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं।  

कई खबरों में प्रकाशित चश्मदीदों के बयान के मुताबिक़ घटना बेहद भयावह थी। अपने हाथों में तलवार लिए हमलावर संतोष सोनी और हरी सोनी कह रहे थे ‘तलवार तब तक चलेगी जब तक पूरा परिवार ख़त्म नहीं हो जाता है। ’ऐसे में किसी दूसरे या तीसरे व्यक्ति के लिए बीच बचाव करना भी बहुत मुश्किल था। ख़बरों के मुताबिक़ बचाव करने वाले भी काफी घायल हुए। इसके अलावा दो हमलावरों में से एक के पैर पर पुलिस ने गोली भी मारी। उसके पहले भीड़ ने भी उन्हें पकड़ कर बहुत पीटा था जिसके बाद उनकी हालत नाज़ुक हो गई थी। 

आदित्य ठाकरे को ‘बेबी पेंग्विन’ और उद्धव को कहा औरंगजेब: नागपुर के युवक पर FIR दर्ज

मुंबई पुलिस ने ट्विटर पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी, उनके बेटे और पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे को ‘बेबी पेंग्विन’ और ऊर्जा मंत्री नितिन राउत के खिलाफ भद्दे पोस्ट करने के लिए समित ठक्कर नाम के एक युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

शिकायत के अनुसार, तीस वर्षीय आरोपित नागपुर निवासी समित ठक्कर ने जून 01, जून 30 और जुलाई 01 को ठाकरे और राउत के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट किए थे। ऐसे ही एक ट्वीट में समित ठक्कर ने उद्धव ठाकरे को औरंगज़ेब और आदित्य ठाकरे को ‘बेबी पेंग्विन’ कहा था।

वीपी रोड पुलिस ने गत सोमवार को समित ठक्कर पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मानहानिकर लेख लिखने और अश्लील लेख प्रसारित करने, ड्राइंग या फिर किसी अन्य तरह से अपमानित करने पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।

ट्विटर पर समित ठक्कर के इस वक्त 42,700 से अधिक फॉलोअर्स हैं। मुंबई के अधिवक्ता धर्मेंद्र मिश्रा, जो शिवसेना के कानूनी सलाहकार हैं, ने ये पोस्ट देखे और 13 जुलाई को वीपी रोड पुलिस स्टेशन के साथ ठक्कर के खिलाफ शिकायत दर्ज की।

समित ठक्कर पर जिस वीडियो को लेकर FIR हुई है, उसे ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा है – “बेबी पेंग्विन और दिशा पटानी को पहली बार व्यंगात्मक तरीके से पेश कर रहा हूँ। एन्जॉय।”

मिश्रा ने कहा, “किसी की आलोचना करने के लिए अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करते समय कुछ सीमाएँ होनी चाहिए। आप बेकार और अशिष्ट भाषा का प्रयोग करते हुए किसी के साथ भी सार्वजनिक रूप से दुर्व्यवहार नहीं कर सकते। मैंने ठक्कर को सम्मानित राजनीतिक हस्तियों के बारे में ऐसी अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने से रोकने के लिए सूचित किया था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और ऐसा करना जारी रखा। इसलिए, मैंने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।”

शहर की ही एक अन्य 21 वर्षीय युवती ने भी इसी तरह की शिकायत के साथ पुलिस से संपर्क किया और कहा कि उसे ठक्कर की पोस्ट अश्लील और घटिया लगी। पुलिस ने उvका बयान दर्ज किया और उन्हें ठक्कर के खिलाफ दर्ज पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में शामिल कर लिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विषय पर समित ठक्कर ने कहा, “मैंने सिर्फ मजबूत भाषा का इस्तेमाल किया है, जो किसी भी तरह से असंवैधानिक नहीं है। अगर मेरी पोस्ट अपमानजनक थी तो ट्विटर ने उसे हटाया क्यों नहीं? मैंने सिर्फ सरकार की आलोचना करने के लिए अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल किया। जब वीपी रोड पुलिस अधिकारियों ने मुझसे संपर्क किया तो मैंने उनसे कहा कि मैं बाद में पुलिस स्टेशन का दौरा कर पाउँगा क्योंकि अभी लॉकडाउन प्रभावी है और मैंने ईमेल के माध्यम से पुलिस आयुक्त और डीसीपी को अपना बयान भेज दिया है।”

आदित्य ठाकरे को क्यों कहा जा रहा है बेबी पेंग्विन?

सोशल मीडिया पर अक्सर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे का ‘पेंग्विन’ कहकर मजाक बनाया जाता है। इसके पीछे वजह यह है कि महाराष्ट्र में देवेन्द्र फडणवीस सरकार के दौरान उन्होंने मुंबई के चिड़ियाघर में पेंग्विन लाने पर जोर दिया था।

आदित्य ठाकरे की जबरदस्ती पर पेंग्विन को दक्षिण कोरिया के सियोल से मुंबई चिड़ियाघर में लाने के लिए एक असफल परियोजना शुरू की गई। और फिर इसके लिए कृत्रिम वातावरण बनाया गया था, लेकिन कुछ दिनों के बाद, कुछ पेंग्विन की मौत हो गई।

मुंबई में मौसम ऐसे पक्षियों के अनुकूल नहीं है और ऐसे प्रोजेक्ट पर अनावश्यक रूप से पैसा लगाया गया। पेंग्विन के प्रति आदित्य ठाकरे परिवार और उनकी पार्टी के लगाव के कारण ही उन्हें ‘बेबी पेंग्विन’ नाम देकर मजाक बनाया जाता है।

बिहार: उद्घाटन के 29वें दिन बारिश में ढह गया पुल? सरकार पर उठे सवाल, जारी हुआ स्पष्टीकरण

बुधवार के दिन गोपालगंज और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाले पुल का एक हिस्सा भारी बारिश की वजह से पूरी तरह टूट जाने की खबर विपक्ष द्वारा उछाली गई। जिसमें विपक्ष ने आरोप लगाया कि केवल 29 दिन पहले ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस पुल का उद्घाटन किया था वह टूट गई है। जबकि प्रशासन ने पुल नहीं बल्कि बाढ़ में डूबी एक अप्रोच पुलिया के टूटने की बात कही है। जो कि मुख्य पुल से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर है।  

बिहार प्रशासन द्वारा जारी स्पष्टीकरण

बिहार प्रशासन और बिहार सरकार के मंत्री ने मुख्य पुल टूटने की बात का खंडन करते हुए बयान दिया है। बिहार सरकार के सड़क निर्माण विभाग के मंत्री नन्द किशोर यादव ने वीडियो शेयर कर इसका प्रमाण के साथ खंडन करते हुए स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने विपक्ष और मीडिया पर झूठ फ़ैलाने का आरोप भी लगाया।

गौरतलब है कि जिस पल के टूटने की बात फैलाई गई थी वह गंडक नदी पर बना 1.4 किलोमीटर लंबा सत्तर घाट महासेतु पुल है। जिसे 16 जून के दिन आम लोगों के लिए शुरू किया गया था। इस पुल का निर्माण कार्य आज से लगभग 8 साल पहले, अप्रैल 2012 में शुरू किया गया था। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने इसे 264 करोड़ रूपए की लागत से तैयार किया था।  

अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ भारी बारिश होने की वजह से नदी का जलस्तर बढ़ गया और वाल्मीकि नगर से काफी पानी छोड़े जाने की वजह से इस पुल से करीब 2 किलोमीटर दूर स्थित अप्रोच पुलिया दबाव नहीं झेल पाई। इलाके में बारिश बढ़ने के बाद से ही बाढ़ में डूबे उक्त 18 मीटर लम्बे पुल के कुछ हिस्से कमज़ोर हो चुके थे। जिससे वह टूट गई।  

यह सही है कि पुलिया के टूट जाने की वजह से क्षेत्र का यातायात भी काफी बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रहा है। कई इलाकों के बीच आवागमन पूरी तरह बंद पड़ा है, इतना ही नहीं यह पुल गोपालगंज और पूर्वी चंपारण के बीच का इकलौता माध्यम है। और संभवतः यही वजह भी है कि इस मुद्दे पर जनता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और बिहार कॉन्ग्रेस मुखिया मदन मोहन झा ने भी प्रदेश सरकार की आलोचना करते हुए कई ट्वीट कर मुख्य पुल के टूटने की बात फैला दी।  

तेजस्वी यादव ने अपने आधिकारिक ट्वीटर एकाउंट से एक वीडियो साझा करते हुए ट्वीट में लिखा, “8 वर्ष में 263.47 करोड़ की लागत से निर्मित गोपालगंज के सत्तर घाट पुल का 16 जून को नीतीश जी ने उदघाटन किया था आज 29 दिन बाद यह पुल ध्वस्त हो गया। ख़बरदार। अगर किसी ने इसे नीतीश जी का भ्रष्टाचार कहा तो? ₹263 करोड़ तो सुशासनी मुँह दिखाई है। इतने की तो इनके चूहे शराब पी जाते हैं।”   

इसके बाद उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, “₹263 करोड़ से 8 साल में बना लेकिन मात्र 29 दिन में ढह गया पुल। संगठित भ्रष्टाचार के भीष्म पितामह नीतीश जी इस पर एक शब्द भी नहीं बोलेंगे और न ही साइकिल से रेंज रोवर की सवारी करने वाले भ्रष्टाचारी सहपाठी पथ निर्माण मंत्री को बर्खास्त करेंगे। बिहार में चारों तरफ लूट ही लूट मची हुई है।”  

इसके बाद मदन मोहन झा ने ट्वीट करते हुए लिखा, “₹263 करोड़ की लागत से बने इस पुल का उदघाटन 16 जून को हुआ था और 15 जुलाई को यह पूरी तरह टूट गया। अब इसके लिए चूहों को ज़िम्मेदार मत ठहराइएगा। ’

 

MP: गुना में पिटाई की घटना के बाद CM शिवराज सिंह चौहान ने DM और SP को हटाकर दिए जाँच के आदेश

मध्य प्रदेश के गुना में दलित दंपति को निर्दयता से पीटे जाने की घटना को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुना के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की बर्बरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुना मामले में उच्च स्तरीय जाँच के आदेश भी दिए हैं, जो भी इस घटना में दोषी है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले के सामने आने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी ट्वीट किया है। सिंधिया ने अपने ट्वीट में लिखा, “गुना की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस संबंध में मैंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी से चर्चा कर के ऐसे असंवेदनशील व दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही का अनुरोध किया है।”

सिंधिया ने आगे लिखा कि गुना, मध्य प्रदेश की दुर्भाग्यपूर्ण घटना को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुना के कलेक्टर और एसपी को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दे दिए है। उन्होंने कहा कि आगे भी कार्रवाई होगी। भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना के सांसद रहे हैं।

गौरतलब है कि गुना शहर के जगनपुर क्षेत्र में एक सरकारी मॉडल कॉलेज के निर्माण के लिए निर्धारित सरकारी जमीन के अतिक्रमण से जबरन निकाले गए एक दलित दंपति ने मंगलवार (जुलाई 14, 2020) को इस मुहिम के विरोध में कीटनाशक पी लिया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अतिक्रमणकारी दंपति और उनके परिवार के लोगों द्वारा अतिक्रमण हटाने की मुहिम का विरोध करने पर पुलिस को लाठीचार्ज करने के लिए मजबूर होना पड़ा। कीटनाशक पी लेने के बाद पुलिस द्वारा दंपति को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ फिलहाल उनकी हालत में सुधार है।

जगह छोड़ने का विरोध कर रहे दंपति को पीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें पुलिस लाठी से एक आदमी को कथित तौर पर पीट रही है और उसकी पत्नी और अन्य लोग उसे बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें महिला भी अपने पति के ऊपर लेट जाती है और महिला पुलिसकर्मी उसे मौके से हटाते हुए नजर आ रही हैं।

ट्रेनिंग के लिए पैसे नहीं? खर्च उठाने को स्टार धावक दुती चंद को बेचनी पड़ी अपनी BMW कार: फैक्ट चेक

भारत की स्टार महिला धावक दुती चंद को लेकर मीडिया में एक खबर बड़े स्तर पर शेयर की जा रही है। इसमें दावा किया जा रहा है कि दुती चंद अगले साल होने वाले टोक्यो ओलम्पिक की तैयारी के लिए धन के अभाव में अपनी कार बेच रही हैं।

दुती चंद ने इस मुद्दे पर एक ट्वीट के जरिए अपना स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि इस फैसले और उनके प्रशिक्षण का पैसे की कमी से कोई लेना-देना नहीं है और यह उनका व्यक्तिगत फैसला था।

दुती चंद ने कहा कि उन्होंने अपनी बीएमडब्ल्यू कार इसलिए बेचीं क्योंकि वह कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (केआईआईटी) और ओडिशा सरकार पर बोझ नहीं डालना चाहतीं और वह लग्ज़री कार का रखरखाव करने में भी असमर्थ हैं।

दरअसल, दुती चंद ने हाल ही में अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किया था कि वह अगले साल होने वाले टोक्यो ओलम्पिक की तैयारी के लिए अपनी कार बेच रही हैं। हालाँकि, बाद में यह पोस्ट हटा दीं लेकिन इस पोस्ट के बाद इस विषय पर कई नामी हस्तियों ने भी ट्वीट किए।

दुती के स्पष्टीकरण से पहले पूर्व टेनिस खिलाड़ी सोमदेव देवबर्मन ने अपने ट्विटर अकाउंट पर दुती चंद की कार बेचने की खबर शेयर करते हुए लिखा, “जब हमारे खिलाड़ी जीतते हैं, सिस्टम के बिना जीतते हैं, उसके कारण नहीं।”

अखबार की एक फ़ेक कटिंग के जरिए मीडिया और सोशल मीडिया पर यह साबित करने का प्रयास किया जा रहा था कि प्रशासन अपने देश के खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और आवश्यकताओं का ध्यान नहीं रखता। सोशल मीडिया पर कार बेचने को लेकर चल रहे कयासों पर विराम लगाते हुए दुती चंद ने बुधवार (जुलाई 15, 2020) को अपनी बात सामने रखते हुए लिखा –

“मैंने अपनी बीएमडब्ल्यू कार को बेचने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। मेरे पास लग्ज़री कार के रखरखाव के लिए संसाधन नहीं है। हालाँकि, मैं उससे अभी भी बहुत प्यार करती हूँ। मैंने कभी यह नहीं कहा कि मैं इसे अपने प्रशिक्षण के लिए बेच रही हूँ।”

स्टार महिला धावक ने कहा, “ओडिशा सरकार और मेरे अपने केआईआईटी विश्वविद्यालय ने हमेशा मेरा समर्थन किया है। इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता है कि मेरा प्रशिक्षण बहुत महँगा है, खासकर 2021 ओलंपिक के लिए। मैं केवल यह चाहती थी कि यह पैसा मेरे प्रशिक्षण के लिए डायवर्ट किया जा सके और राज्य सरकार से धन प्राप्त करने के बाद COVID महामारी के बाद एक कार खरीदी जा सकती है।”

दुती चंद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास हर संभव संसाधन है और वह किसी बड़े वित्तीय संकट का सामना नहीं कर रही हैं। साथ ही, दुती चंद ने ओडिशा खनन निगम (OMC) से अपने मासिक वेतन के बारे में चलाई जा रही मीडिया रिपोर्ट्स का भी खंडन करते हुए लिखा –

“ओएमसी से मेरा वेतन ₹60,000 है न कि ₹80,000। मैं शिकायत नहीं कर रही हूँ। कार खरीदने का फैसला निश्चित रूप से इंतजार कर सकता है। केआईआईटी विश्वविद्यालय, मेरी अल्मा मेटर मेरे साथ और मेरी सभी कठिनाइयों में मेरे साथ खड़ी रही। मैं सिर्फ केआईआईटी या ओडिशा सरकार पर बोझ नहीं बनना चाहती थी।”

उन्होंने कहा कि क्योंकि वह अभी कोई भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा नहीं कर सकतीं, इसलिए वह अपना ट्रेनिंग प्लान पहले ओडिशा सरकार को भेजेगी और सरकार बेझिझक उन्हें इसकी इजाजत भी देगी।

अपनी कार बेचने के व्यक्तिगत निर्णय पर हो रहे बवाल से निराश दुती चंद ने लिखा – “लेकिन सिर्फ मानवीय आधार पर, क्या मैं खुद कुछ नहीं कर सकती? आत्मनिर्भर होने की मेरी इच्छा पर सवाल क्यों उठाया जाता है?”

इसे मीडिया की कारस्तानी बताते हुए दुती ने लिखा – “यह सिर्फ मीडिया द्वारा बनाया गया भ्रम है, मेरी भाषा की गलत व्याख्या (निश्चित रूप से मैं स्वीकार करती हूँ कि यह मेरी गलती नहीं है)। मैं केंद्र सरकार, राज्य सरकार और केआईआईटी के प्रति पूरा सम्मान रखती हूँ, जिन्होंने मुझे आज मैं जो कुछ भी हूँ, वह बनाया है।”

अंत में दुती चंद ने लिखा कि बीएमडब्ल्यू को बेचने का उनका इरादा संबंधित अधिकारियों से पर्याप्त धन नहीं मिलने की शिकायत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने लिखा – “मैं हाथ जोड़कर यह कहना चाहती हूँ कि मुझे न तो शिकायत थी और न ही मुझे धन की कमी का कोई कारण दिख रहा था क्योंकि मैं देश की बेटी हूँ और मेरे शुभचिंतक मेरा ध्यान रखने के लिए मौजूद हैं। मुझे कलिंग स्टेडियम में मेरे प्रशिक्षण के लिए आशीर्वाद दें ताकि अपने देश के लिए स्वर्ण प्राप्त करने का मेरा सपना सच हो।”

पाक PM इमरान ने चीन के साथ मिल कर Pok शुरू किया डायमर भाषा डैम का निर्माण, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

बुधवार के दिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर स्थित डायमर भाषा डैम (बांध) का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया। जबकि भारत इस डैम के निर्माण कार्य पर पहले ही आपत्ति जता चुका है इसके बावजूद पाकिस्तान ने चीन के साथ साझेदारी में बनाए जा रहे इस डैम का निर्माण कार्य शुरू करा दिया है।    

गिलगिट बाल्टिस्तान स्थित चिलस में एक जन सभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने इस बारे में जानकारी दी। इमरान खान ने कहा तर्बेला डैम और मंगला डैम के बाद यह पाकिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा डैम होगा। इसके माध्यम से 4500 मेगावाट बिजली पैदा होगी और 16 हज़ार नौकरियाँ उत्पन्न होंगी। इसके अलावा साल 2028 तक इस परियोजना के पूरी होने की उम्मीद है।  

पाकिस्तान सरकार ने मई महीने में चीन सरकार द्वारा संचालित एक संस्था के साथ 442 बिलियन के साझा अनुबंध पर हस्ताक्षर किया। डायमर भाषा डैम का निर्माण मुख्य रूप से चीन सरकार की एक संस्था और पाकिस्तानी सेना की आर्थिक शाखा साझा तौर पर करेगी। इस परियोजना में चीन सरकार की संस्था 70 फ़ीसदी की हिस्सेदार होगी और पाकिस्तानी सेना की आर्थिक शाखा, फ्रंटियर्स वर्क्स आर्गेनाईजेशन (FWO) केवल 30 फ़ीसदी की हिस्सेदार होगी।  

मई महीने में चीन के साथ इस डैम के निर्माण का साझा करार करने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी। भारत सरकार ने आपत्ति जताते हुए कहा कि पाकिस्तान के अवैध कब्ज़े वाले क्षेत्र में इस तरह का निर्माण कार्य सही नहीं है।  

इस मामले पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने भारत सरकार का पक्ष रखा था। उन्होंने कहा, “इस पहलू पर हमारा मत स्थिर और स्पष्ट है कि पूरे जम्मू कश्मीर और लद्दाख की सीमा भारत का अभिन्न अंग है। हम पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ इस मुद्दे पर अपना विरोध, असहमति और चिंता जताते रहे हैं।”  

पाकिस्तान काउंसिल ऑफ़ कॉमन इन्ट्रेस्ट ने साल 2010 में ही इस परियोजना को हरी झंडी दिखा दी थी। क्योंकि इस परियोजना में तमाम अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी भी शामिल थीं इसलिए इसका निर्माण कार्य रुका हुआ था। इसके कुछ समय बाद भारत ने भी इसका खुल कर विरोध किया था क्योंकि इस डैम का अधिकांश हिस्सा गिलगिट बाल्टिस्तान में आता है। वहीं इमरान खान का कहना था कि इस डैम का निर्माण इसलिए देरी से शुरू हुआ क्योंकि पिछली सरकारों ने थर्मल पावर स्टेशन बनाने पर ज़ोर दिया था।  

इमरान खान के मुताबिक़ इस डैम को तैयार करने का फैसला लगभग 50 साल पहले लिया गया था। इसे बनाने के लिए इससे बेहतर जगह कोई और नहीं हो सकती है, यह पूरी तरह से प्राकृतिक डैम है। आज इस डैम के निर्माण का फैसला ले लिया गया है। इसके अलावा इमरान खान ने नदियों पर कई डैम बनाने का ऐलान किया, जिससे सस्ते दामों पर ऊर्जा मिले और विदेश से ईधन खरीदने के लिए विदेशी लेन-देन का भार कम हो।  

पाकिस्तानी मीडिया समूह डॉन (dawn) में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ इस डैम के तैयार हो जाने के बाद पाकिस्तान की संग्रह क्षमता (स्टोरेज कैपेसिटी) 30 से 48 दिन हो जाएगी। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी सुविधाएँ बढ़ेगी, निवेश ज़्यादा होगा और 4500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन होगा। साथ ही इससे ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में भी मदद मिलेगी। इस दौरान इमरान खान के साथ पाकिस्तानी सेना के मुखिया कमर जावेद बाजवा और आईएसआई के मुखिया फैज़ हामिद समेत कई नेता और अधिकारी मौजूद थे।        

मेरठ शिव मंदिर उपाध्यक्ष की हत्या में ‘पार्षद’ नदीम कनेक्शन… वो, जिसे मंदिर की घंटी से भी है नफरत

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में शिव मंदिर सेवक कांति प्रसाद की हत्या के मामले में पुलिस ने अनस कुरैशी नाम के युवक को जेल भेजा है। लेकिन इस पूरे प्रकरण में एक नाम ऐसा भी सामने आया है, जिसका इस इलाके में कई वर्षों से दबदबा रहा है और लगभग हिन्दुओं के खिलाफ होने वाले हर तमाम बड़े-छोटे अपराध के पीछे इस शख्स की अहम भूमिका होती है।

इस हिस्ट्रीशीटर का नाम नदीम मेवाती है। थाना भावनपुर क्षेत्र के अब्दुल्लापुर का रहने वाला नदीम कभी नगर निगम की राजनीति में चमकने वाले पूर्व पार्षद है। बताया जा रहा है कि भावनपुर थाने के हिस्ट्रीशीटर नदीम मेवाती का थाने से लेकर चौकी तक हर मामले में दखल होता है। नदीम मेवाती का नाम हथियारों के बल पर लोगों को धमकाने में भी कई बार सामने आ चुका है।

वहीं, शिव मंदिर सेवक कांति प्रसाद की हत्या में आरोपित अनस से भी इसी नदीम मेवाती ने थाने में सरेंडर करवाया है। स्थानीय लोगों ने नदीम मेवाती की गिरफ्तारी की भी माँग की है। यही नहीं, लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुलिस पर भी हिस्ट्रीशीटर नदीम मेवाती से संबंधों का आरोप लगाया है। 

नदीम मेवाती की हिन्दुओं से घृणा नई नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इस हिस्ट्रीशीटर नदीम मेवाती के दम पर ही मुस्लिम समुदाय के लोग अब्दुल्लापुर में मंदिर में घंटी बजाने तक का विरोध करते हैं। यह वही अब्दुल्लापुर है, जहाँ स्थित शिव मंदिर के उपाध्यक्ष कांति शाह की जुलाई 14, 2020 को सिर्फ भगवा पहनने के कारण जान से मार दिया गया।

इस इलाके में नदीम मेवाती के रौब पर स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि नदीम मेवाती थानेदार की कार में बैठकर भी चलता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कांति प्रसाद की हत्या के मामले में नदीम मेवाती की गिरफ्तारी की माँग भी की है। साथ ही, पीड़ित परिवार के घर पर धमकी देने आए आरोपितों अनस के पिता निजाम कुरैशी, बाबर, अब्बास कुरैशी, हामसीब कुरैशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की भी माँग की है।

अब्दुल्लापुर में कांति प्रसाद के भगवा गमछा पहनने और माथे पर तिलक लगाने पर मुस्लिम समुदाय के लोग हर रोज ही टिप्पणी करते थे। इसी के चलते जब एक दिन कांति प्रसाद ने विरोध जताया, तो उनकी पिटाई की गई, जिसके कारण उनकी मौत हो गई।

एसपी देहात अविनाश पांडेय ने बताया कि हत्या के अलावा धमकी देने का भी मुकदमा पुलिस की तरफ से दर्ज कर लिया है। उसके बाद भी नदीम मेवाती को पुलिस ने आरोपित नहीं बनाया है।

नदीम मेवाती की दादागिरी और अपराधों की लिस्ट लम्बी है। सितम्बर 2017 में ही एक दिन इसी अब्दुल्लाहपुर में नदीम मेवाती ने अपने आधा दर्जन हथियारबंद साथियों के साथ मिलकर एक दुकान पर हमला बोल दिया और वहाँ बैठे 3 लोगों की जमकर पिटाई की थी। नदीम मेवाती ने बेख़ौफ़ दिनदहाड़े दुकान में तोड़फोड़ की और फायरिंग करता हुआ वहाँ से फरार हो गया था।

पुलिस ने जब इस मामले में कार्रवाई शुरू की तो नदीम मेवाती ने पीड़ित पर केस वापस लेने का दबाब भी बनाया। लेकिन जब पीड़ित पक्ष ने केस वापस लेने से मना कर दिया तो नदीम मेवाती ने फिर हथियारबंद होकर पीड़ित, उसके भाई और भतीजे पर हमला किया।

अक्टूबर, 2018 की एक और वारदात में, हिस्ट्रीशीटर नदीम मेवाती ने जुआ-सट्टे खेलने की शिकायत करने पर भाजपा कार्यकर्ता पर अपने साथियों के साथ उस समय हमला कर दिया था, जब वो मंदिर से लौट रहे थे। भाजपा किसान मोर्चा के सदस्य और वार्ड 17 से बूथ अध्यक्ष संदीप बिवानिया ने आरोप लगाया था कि सुबह जब वह मंदिर से पूजा करके निकले थे, तभी रास्ते में पूर्व पार्षद व थाने के हिस्ट्रीशीटर नदीम मेवाती ने आधा दर्जन युवकों के साथ लाठी-डंडों से हमला बोल दिया।

भाजपा कार्यकर्ता के साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया। तमंचे से फायरिंग की गई, जिसमें वह बाल-बाल बच गए। एक बार फिर नदीम मेवाती ने पीड़ित पर केस वापस लेने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की।

नवम्बर 2017 में ही भावनपुर के अब्दुल्लापुर में नगर निगम मेरठ के वार्ड-17 से निर्दलीय प्रत्याशी नदीम मेवाती पर बिना परमिशन सभा करने के कारण नदीम मेवाती के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज किया था।

हिस्ट्रीशीटर नदीम मेवाती के आतंक से लोग इतने परेशान हैं कि कई बार इलाके के अनुसूचित जाति के परिवार गाँव से पलायन करने की चेतावनी तक दे चुके हैं। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष राजकुमार सोनकर ने अपनी शिकायत में कहा था कि नदीम मेवाती ने सरकारी तालाबों पर कब्जों सहित कई अवैध धंधे चला रखे हैं। शिकायत करने पर नदीम परिवार वालों को भी मार देने की धमकी दे चुका है।

सावरकर को चिढ़ाने, हिंदुओं को गाली देने वाले कॉमेडियंस… अब शिवसेना से माँग रहे रहम की भीख

आखिरकार ऑनलाइन सक्रिय रहने वाले हिन्दू जागृत हुए और उन्होंने उस कॉमेडियन ब्रीड पर करारा प्रहार किया जो हिन्दुओं, उनके देवी-देवताओं और उनके प्रतीकों का अपमान किए फिरते हैं। पिछले कुछ दिनों से ऐसे कॉमेडियनों को ढूँढ-ढूँढ कर निकाला जा रहा है। खुद को क्रिएटिव बताने वाले इन कॉमेडियनों के पास जोक्स का अभाव है, तभी तो वो हिन्दू प्रतीकों का अपमान कर लोगों को हँसाने की कोशिश करते हैं।

ये कॉमेडियन हिन्दू महापुरुषों का अपमान करते हैं और उनके आदर्शों का सरेआम मजाक उड़ाते हैं। साथ ही ये अश्लील और सस्ते चुटकुले मार कर खुद की तथाकथित क्रिएटिविटी का प्रदर्शन करते हैं। अब इनके पुराने ट्वीट्स और वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनसे पता चलता है कि इनके पास ‘सेन्स ऑफ ह्यूमर’ नाम की कोई चीज है भी नहीं। हिन्दू, हिन्दू रीति-रिवाज, देवी-देवता और हिन्दू आदर्शों के प्रति घृणा ही है, जो इन्हें ऐसा बनाती है।

ऐसा ही एक विवाद अग्रिमा जोशुआ को लेकर शुरू हुआ, जिसे शायद ही कोई जानता हो। वो ख़ुद को कॉमेडियन बताती है। उसने छत्रपति शिवाजी महाराज का मजाक उड़ाया। लोगों को उसके चुटकुलों पर हँसी की जगह गुस्सा आया क्योंकि वो किसी लायक नहीं थे। जोशुआ ने विवाद के लिए ‘भाजपा आईटी सेल’ को जिम्मेदार बताया और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से माफ़ी माँगी। बाद में पता चला कि राज ठाकरे की एमएनएस और उद्धव की शिवसेना ने ही उसके घर पर हमले किए थे।

उद्धव को मदद के लिए पुकारने वाली जोशुआ ने बाद में माफ़ी माँगी। उसने अपने माफीनामे में उद्धव के अलावा राज ठाकरे, आदित्य ठाकरे और गृह मंत्री अनिल देशमुख को भी सम्बोधित किया। बता दें कि महाराष्ट्र में चल रही ‘महा विकास अघाड़ी’ की मिलीजुली सरकार से लिबरलों का विशेष प्रेम है और शिवसेना को गाली देने वाले लिबरल अब उसकी तारीफ करते हैं क्योंकि वो भाजपा से अलग जाकर कॉन्ग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार चला रही है।

जोशुआ के बाद आदर मलिक, साहिल शाह, अज़ीम बँटवाला, आलोकेश सिन्हा, कट्टरवादी वामपंथी संजय राजौरा, नीति पाल्टा और हिन्दु-विरोधी ट्वीट्स करने वाले रोहन जोशी- ये सब वो नाम हैं जो हिन्दुओं की भावनाओं को ताक पर रख कर उनका अपमान करते हैं और खुद को कॉमेडियन बताते हैं। इन कॉमेडियनों ने अपनी करतूतों के सामने आते ही सोशल मीडिया छोड़ कर भाग निकलना उचित समझा।

इनके मुठी भर समर्थक और ये खुद को भले ही फ्री स्पीच का चैंपियन बताते हों, ये सच्चाई कहने के लाख दावे करते हों और खुद को सत्ता को चुनौती देने वाले लोग की तरह पेश करते हों लेकिन जब असलियत की बात आती है और इनके कारनामों के सामने आते ही ये भाग निकलते हैं। इन कॉमेडियनों ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को डीएक्टिवेट कर लिया। एक तो इन कॉमेडियनों को हँसाने नहीं आता, ऊपर से ये गालीबाज भी हैं।

दरअसल, ये सारे के सारे डरपोक हैं। इन डरपोक कॉमेडियनों को इस बात का भय था कि उनकी करतूतों के उजागर होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स उनके हैंडल्स के खिलाफ एक्शन लेंगे, इसीलिए वो भाग निकले क्योंकि उनके खिलाफ जम कर रिपोर्टिंग हो रही थी। उनमें सवालों के जवाब देने की हिम्मत नहीं है। साथ ही इन डरपोकों को प्रशासन की कार्रवाई का भी डर है। इन डरपोकों को डर था कि उनके अकाउंट खँगालने पर उनके और बेहूदे काले कारनामे निकल आएँगे, इसीलिए ये भाग निकले।

लेकिन, कुछ दिनों बाद ये अपने बिलों से बाहर भी निकले क्योंकि इन्हें महाराष्ट्र की शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस सरकार से माफ़ी जो माँगनी थी। चूँकि, महाराष्ट्र में ‘सेक्युलर’ सरकार चल रही है, इनकी घिग्घी बँधी रहती है और ये उनसे माफ़ी माँगने से नहीं हिचकते। जबकि बात मोदी सरकार की हो तो ये ‘सत्ता को चुनौती’ देने के दावे करते हुए खुद को बहुत बड़ा शेर बताते फिरते हैं। फासिस्ट मोदी है लेकिन इन्हें माफ़ी शिवसेना से माँगनी पड़ रही है।

यहाँ ये तो सोचने वाली बात है कि जब फासिस्ट मोदी है और जिम्मेदार भाजपा आईटी सेल है तब फिर ये शिवसेना और मनसे जैसी पार्टियों और उनके नेताओं से माफ़ी क्यों माँग रहे हैं। वामपंथियों के लिए संकट खड़ा हो गया है क्योंकि उन्हें शिवसेना को अच्छा भी दिखाना है और भाजपा को कोसना भी है। अगर मोदी फासिस्ट होता तो वो मोदी से माफ़ी माँगने को मजबूर होते न? फिर शिवसेना के सामने क्यों गिड़गिड़ा रहे ये?

ठीक है, इन बेहूदा जोक मारने वाले डरपोक कॉमेडियनों ने शिवसेना और कॉन्ग्रेस के नेताओं से माफ़ी तो माँग ली लेकिन उस जनता का क्या जिनकी भावनाओं को लात मार कर ये खुला घूम रहे हैं? क्या जनभावनाओं का कोई सम्मान नहीं इनके मन में? क्योंकि ये सोचते हैं कि शिवसेना से माफ़ी माँग कर ये प्रशासनिक कार्रवाई से बच जाएँगे और साथ ही उसके कार्यकर्ताओं का कोपभाजन नहीं बनेंगे लेकिन जनता उनका थोड़े कुछ बिगाड़ पाएगी।

न इन्हें इतिहास का ज्ञान है और न ही इनका समान्य ज्ञान उस स्तर का है लेकिन वीर सावरकर के मर्सी पिटीशन पर जोक्स क्रैक करते हुए ये खुद को कूल समझते हैं। सारे कॉन्ग्रेस नेता तो यही करते हैं। क्या वो अपना काम छोड़ दें? देश के लिए 50 साल कारावास की सज़ा पाने वाले और अँग्रेजों की क्रूरता का सामना करते हुए कालापानी में एक दशक से भी ज्यादा बिताने वाले महापुरुष के लिए यही सम्मान है इनके मन में?

महात्मा गाँधी और मोतीलाल नेहरू का मजाक तो नहीं उड़ाते ये जबकि ऐसे पिटीशन तो उन्होंने भी लिखा था। क्या रामप्रसाद बिस्मिल ने मर्सी पिटीशन पर हस्ताक्षर किया तो वो कम महान हो गए? वीर सावरकर के बारे में इन्हें पता भी है? आज वो कमरा किसी तीर्थस्थल से कम नहीं है, जहाँ सावरकर रहा करते थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी वहाँ जाकर काफी देर तक ध्यान धरा था। ऐसे व्यक्ति का मजाक बनाने वालों को आखिर मिलता क्या है?

वीर सावरकर ने जिक्र किया है कि किस तरह वहाँ इंसानों को जानवरों से भी बदतर समझा जाता था। अँग्रेज उन्हें कोल्हू के बैल की जगह जोत देते थे। पाँव से चलने वाले कोल्हू में एक बड़ा सा डंडा लगा कर उसके दोनों तरफ दो आदमियों को लगाया जाता था और उनसे दिन भर काम करवाया जाता था। जो काम बैलों का था, वो इंसानों से कराए जाते थे। जो टालमटोल करते, उन्हें तेल का कोटा दे दिया जाता था और ये जब तक पूरा नहीं होता था, उन्हें रात का भोजन भी नहीं दिया जाता था।

सिर चकराता था। लंगोटी पहन कर कोल्हू में काम लिया जाता था। वो भी दिन भर। शरीर इतना थका होता था कि उनकी रातें करवट बदलते-बदलते कटती थी। धीरे-धीरे यातनाएँ और भी असह्य होती चली गईं। स्थिति ये आ गई कि सावरकर को आत्महत्या करने की इच्छा होती। इतनी भयंकर यातनाएँ दी जातीं और वहाँ से निकलने का कोई मार्ग था नहीं, भविष्य अंधकारमय लगता- जिससे वो सोचते रहते कि वो फिर देश के किसी काम आ पाएँगे भी या नहीं। 

यहाँ बीच-बीच जो ट्वीट्स संलग्न किए गए हैं, उनमें आप इन डरपोक गालीबाजों की कथित कॉमेडी के नमूने देख सकते हैं। हालाँकि, इससे आपको गुस्सा ही आएगा। अब जब इनकी करतूतों को लेकर इनकी आलोचना हो रही है तो ये विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं। एक राज्य सरकार के आगे गिड़गिड़ाने वाले ये कॉमेडियन मोदी को फासिस्ट बता कर केंद्र से लड़ने के दावे करते फिरते हैं। माफ़ी उद्धव और राज ठाकरे से माँगेंगे क्योंकि अपने कार्यकर्ताओं के गुस्से से यही नेता तो बचाएँगे इन्हें। 

अपहरण किए गए बीजेपी नेता को पुलिस ने किया रेस्क्यू, लश्कर कमांडर ​​हैदर के परिवार को हिरासत में लेकर शुरू हुआ था ऑपरेशन

जम्मू कश्मीर के बारामुला जिले से अपहरण किए गए भाजपा नेता मेहराजउद्दीन मल्ला (Mehrajuddin Malla) को पुलिस ने सुरक्षित रिहा करा लिया है। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों और जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा चलाए गए ऑपरेशन के बाद मल्ला को रेस्क्यू किया गया है।

बारामूला के वाटरगाम में नगर समिति के उपाध्यक्ष मेराजुद्दीन मल्ला को बचाने के लिए चलाए गए ऑपरेशन को लश्कर के सोपोर कमांडर सज्जाद उर्फ ​​हैदर के परिवार के सदस्यों को हिरासत में लेकर शुरू किया गया था। बता दें दो दिन पहले हैदर ने जम्मू-कश्मीर के पुलिस और भाजपा पार्टी कार्यकर्ताओं को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। जिसके बाद मल्ला का अपहरण कर लिया गया। आतंकवादियों ने इसी तरह की एक धमकी कश्मीर के महानिरीक्षक (IG), को भी जारी की थी।

गौरतलब है कि कश्मीर में एक भाजपा नेता की गोली मारकर हत्या करने के एक सप्ताह बाद, बारामुला जिले में एक भाजपा कार्यकर्ता मेहराजुद्दीन मल्ला का अज्ञात व्यक्तियों द्वारा अपहरण कर लिया गया था।

भाजपा नेता मेहराजुद्दीन मल्ल जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में वाटरगाम नगर समिति के उपाध्यक्ष भी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मेहराजुद्दीन मल्ला को उस समय एक सैंट्रो कार में अगवा कर लिया गया, जब वह अपने दोस्त से मिलने के लिए सड़क से गुजर रहे थे।

मेहराजुद्दीन मल्ला का कथित तौर पर सोपोर शहर के रास्ते से अपहरण कर लिया गया। वो सोपोर में म्युनिसिपल कमेटी के वाइस प्रेसिडेंट हैं। मेहराजुद्दीन मल्ल के अपहरण के बाद अधिकारियों ने खोज अभियान शुरू कर दिया था।

पुलिस के सूत्रों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस को प्राप्त इनपुट के आधार पर, अल बद्र समूह के पाकिस्तानी आतंकवादी इन घटनाओं को अंजाम दे रहे थे। हालाँकि, इस बारे में अभी तक किसी भी प्रकार का आधिकारिक अंतिम बयान नहीं मिला था।

ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में बीजेपी नेता शेख वसीम बारी, उनके भाई और पिता की आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उनके पिता, बशीर अहमद और भाई, उमर बारी भी हमले में घायल हुए थे। तीनों को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया।

हमले के बाद, पुलिस ने मारे गए भाजपा नेता के 10 सुरक्षा गार्डों को हिरासत में लिया और उनसे सवाल किया गया था कि जब भाजपा नेता पर हमला हुआ था तो उनमें से कोई भी उसके साथ क्यों नहीं था? जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा था कि भाजपा नेता की हत्या के पीछे लश्कर के दो आतंकवादी थे।

घाटी में भाजपा के जनप्रतिनिधियों पर किए गए हालिया हमले पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों की हताशा को दर्शाते हैं। दरअसल, महज वर्ष 2020 में ही, नए केंद्र शासित प्रदेश में विभिन्न अभियानों के तहत 130 से अधिक आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार जम्मू-कश्मीर में शांति प्रक्रिया को विफल करने की कोशिश कर रहा है, जो कि घाटी में निरंतर ही आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए प्रशिक्षित आतंकवादियों को भेजकर नियंत्रण रेखा के पास लगातार संघर्ष विराम उल्लंघन कर रहा है।

सफूरा जरगर, छात्रा या रतन लाल की हत्या में शामिल दंगाई? | Ajeet Bharti on Safoora Zargar’s role in Ratan Lal murder

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगा मामले में आरोपित सफूरा जरगर के लिए मजहब, गर्भवती, स्टूडेंट जैसे विशेषणों का प्रयोग कर उसके ‘पापों’ और ‘अपराधों’ को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। चार्जशीट के मुताबिक सफूरा भी पुलिस हेड कॉन्सटेबल रतन लाल की हत्या की उतनी ही जिम्मेदार है, जितनी कि दंगाइयों की भीड़।

रतन लाल की हत्या में सफूरा का नाम मुख्य साजिशकर्ता में शामिल है। इस दंगे की पूरी प्लानिंग की गई थी। सफूरा जरगर और अन्य दंगाइयों को पहले से ही पता था कि इसका अंजाम कितना खतरनाक होने वाला है। रतन लाल की मौत से 2 दिन पहले 50 लोगों ने मीटिंग की और 24 फरवरी को ये अपने मंसूबे में कामयाब हो गए। इसमें बुर्के वाली महिलाएँ भी शामिल थी। इनकी साजिश काफी गहन, गहरी और काफी अच्छे तरीके से प्लान किया गया था। भीम आर्मी पार्टी के मार्च का नेतृत्व भी सफूरा जरगर कर रही थी।

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