विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद उससे संबंधित कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर इस वक्त तेजी से वायरल हो रही हैं। वहीं अब गैंगस्टर विकास दुबे के राइट हैंड कहे जाने वाले अमर दुबे की 29 जून को हुई शादी का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में चौकी इंचार्ज केके शर्मा भी दिखाई दे रहे हैं। यह केके शर्मा वहीं दारोगा है जिसे विकास दुबे के लिए मुखबिरी के शक मे निलंबित किया जा चुका है।
शादी में शामिल दारोगा केके शर्मा गैंग के सरगना विकास दुबे के साथ ब्राउन कलर की शर्ट पहने अमर दुबे के पीछे खड़ा है। यह तस्वीर पुलिस-अपराधियों की मिलीभगत पर गंभीर सवाल खडे़ कर रही हैं। एक अन्य तस्वीर में वह अमर और उसकी पत्नी खुशी को आशीर्वाद देते दिख रहा है जबकि एक तस्वीर में कुछ लोगों के बीच खड़ा है।
हिंदुस्तान न्यूज़ की रिपोर्ट में शेयर किए गए वीडियो में आप देख सकते है कि किस तरह वर वधू को आशीर्वाद देने के दौरान विकास दुबे दरोगा केके शर्मा से कह रहा है डरो नहीं पास आओ। वहीं विकास दुबे एक नवविवाहिता के साथ फोटो खिंचवाता दिख रहा है, जिसमें नवविवाहिता उसे मामा कहते हुए संबोधित करती है। और कहती है कि उसके साथ एक फोटो खिंचवा लो। जिस पर विकास दुबे जवाब देता है कि, वो बैठकर नहीं, खड़े होकर ही फोटो खिंचवाता है। यह वीडियो विकास के गुर्गे अमर दुबे और खुशी की शादी का है।
साभार: हिंदुस्तान
बता दें इससे पहले कानपुर कांड में पकड़े गए शशिकांत की पत्नी का ऑडियो वायरल हुआ था। ऑडियो में शशिकांत की पत्नी रिश्तेदार को फोन करके पूरी घटना के बारे में बता रही थी। जिसमें उसने विकास दुबे द्वारा मारे गए पुलिसकर्मियों और फरार होने की बात का खुलासा किया था।
जानकारी के मुताबिक शशिकांत ने गिरफ्तारी के बाद कैमरे के सामने स्वीकार किया है कि गोली जबरदस्ती विकास दुबे ने चलवाई थी। शशिकांत ने बताया, “घटना को अंजाम देने वालों में मैं, अमर दुबे, विकास दुबे, प्रभात मिश्रा, बउवा, अतुल दुबे शामिल थे। विकास ने हमारे ऊपर दबाव बनाया कि तुम गोली नहीं चलाओगे तो तुम्हे मार डालेंगे।”
गौरतलब है कि 8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या करने वाले खूंखार गैंगस्टर विकास दुबे की मदद और दबिश की मुखबरी करने के आरोपों में निलंबित चल रहे चौबेपुर के पूर्व SHO विनय तिवारी और सब इंस्पेक्टर केके शर्मा की गिरफ्तारी हुई थी।
रिपोर्ट के अनुसार विकास दुबे को भगाने के पीछे विनय तिवारी और केके शर्मा का हाथ बताया जा रहा है। इन लोगों ने ही दबिश के दौरान पुलिस की जान खतरे में डाली थी। और उन्हें मरता हुआ छोड़ कर भाग गए थे।
पुलिस अधिकारियों के गिरफ्तारी की पुष्टि आईजी मोहित अग्रवाल ने की है। गैंगस्टर विकास दुबे को बचाने में चौबेपुर थाने के एसएचओ विनय तिवारी और अन्य पुलिसकर्मियों पर संलिप्तता के आरोप लगने के बाद इसकी जाँच के आदेश दिए गए थे।
उल्लेखनीय है कि वारदात वाले दिन को लेकर पुलिस इस बात की भी आशंका जता रही थी कि महकमे के ही किसी शख्स ने इस बात की मुखबिरी की है। इसी सिलसिले में आईजी मोहित अग्रवाल ने चौबेपुर थाना प्रभारी विनय तिवारी को सस्पेंड कर दिया गया था।
जाँच के दौरान, पुलिस ने इन्वेस्टिगेशन के चलते 2200 नम्बरों को सर्विलांस पर लगाया है। जिससे मुठभेड़ रात तक मतलब 24 घंटे के भीतर विकास ने जिस भी किसी शख्स से बातचीत की हो उसका पता लगाया जा सके। रेड से पहले विकास गुप्ता को इसकी पल-पल की जानकारी मिल रही थी। काल डिटेल में कई पुलिसकर्मियों के भी नम्बर सामने आए थे। जिसके चलते चौबेपुर के दरोगा, सब इंस्पेक्टर केके शर्मा और होम गार्ड की तहकीकात की जा रही थी।
दबिश की सूचना को लीक करने का शक थानाध्यक्ष विनय तिवारी पर गया था। यहाँ तक इलाके की पूरी जानकारी होने के बावजूद दबिश के समय विनय तिवारी पीछे चल रहे थे और गोलीबारी के समय वे जेसीबी के पीछे छुप गए थे। और वहाँ से बच कर निकल गए थे। जिससे इस बात का साफ पता चलता है कि विनय तिवारी को पहले से ही इस हमले की जानकारी थी।
मेवात के नगीना में एक गाँव है- उलेटा। इस गाँव के सरपंच का नाम अलीम है। अलीम पुत्र मकसूद पर आरोप है कि उसने अपने गाँव के दलितों व गरीब तबके के लोगों के साथ धोखाधड़ी की। अलीम ने बड़ी चालाकी से कुछ समय पहले अपने गाँव के लोगों को सुविधाओं का झाँसा देकर उनसे उनके पहचान पत्र आदि की कॉपी इकट्ठा कर ली। फिर उसकी मदद से उनके नाम पर फर्जी मनरेगा जॉब कार्ड और बैंक अकॉउंट बनवा लिए और बाद में बिना उनको सूचित किए उससे लाखों की ट्राजेक्शन करवाता रहा।
ऑपइंडिया को जब इस संबंध में सूचना मिली तो हमने अलीम की धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों से बात की। हमारा संपर्क उलेटा निवासी जसवंत व हकीमुद्दीन से हुआ। दोनों ग्रामीणों ने हमें बताया कि गाँव का सरपंच अलीम उनके व उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर जॉबकार्ड बनवाकर हजारों रुपए निकलवाता रहा और उन्हें लंबे समय तक इस बारे में पता भी नहीं चला।
जब उन्हें इस बारे में भनक लगी तो उन्होंने सच्चाई जानने की कोशिश की। साइबर कैफे से उन्होंने अपने नाम के जॉब कार्ड निकलवाए। जिससे पता चला कि उनके नामों पर फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा था और पैसे भी निकाले जा रहे थे। जबकि उन्होंने तो कभी मनरेगा स्कीम के तहत कोई काम ही नहीं किया था।
उलेटा निवासी जसवंत कहते हैं कि उन्हें सबसे पहले उनके जॉब कार्ड के बारे में 1 जून को पता चला था। इससे पहले सरपंच ने उनसे और गाँव के अन्य लोगों को यह कहा था कि नए बीपीएल बन रहे हैं और इसके लिए ग्रामीणों को अपने पहचान पत्र से जुड़े सभी दस्तावेज देने होंगे।
ग्रामीण के अनुसार उन्होंने सरपंच पर यकीन किया और बीपीएल के नाम पर सभी लोगों ने अपने दस्तावेज उन्हें दे दिए। लेकिन सरपंच ने उन आईडी नंबर का इस्तेमाल करके उनके नाम पर फर्जी जॉबकार्ड बनवा दिए। फर्जी से मतलब वो जॉबकार्ड जिनमें नाम तो पहचान पत्र वालों का ही रखा गया। मगर तस्वीर किसी ऐसे इंसान की चिपकाई गई जिन्हें गाँव के लोग भी नहीं जानते।
जसवंत और अनीता के जॉबकार्ड से हुई ट्राजेक्शन
जसवंत आरोप लगाते हुए कहते हैं कि इन सबके पीछे ब्लॉक वालों की मिलीभगत और बैंक मैनेजर का भी इसमें हाथ है, जिसके कारण उन्होंने बैंक के हेडक्वार्टर में शिकायत भेजी है। वे बताते हैं कि उन्होंने इस मामले में दरख्वास्त बनवाई थी। इस दरख्वास्त में उन्होंने सरपंच, ब्लॉक सेक्रेट्री, बैंक मैनेजर पर आरोप लगाते हुए कहा था कि इन सबने मिलीभगत करके इस फर्जीवाडे को अंजाम दिया है।
जसवंत की शिकायत
जसवंत के अनुसार, इस मामले के मद्देनजर शिकायत के बाद उन्हें बीडीओ ऑफिस भी बुलाया गया था। उन्होंने वहाँ बयान दिया था कि उन्होंने कभी भी मनरेगा जैसी योजना के तहत काम नहीं किया है और न ही कभी बैंक में खाता खुलवाया। उन्होंने वहाँ ये भी बताया कि सरपंच ने उन्हें सुविधाओं की लालच देकर उनकी आईडी ली थी। जिसका उसने गलत इस्तेमाल किया।
जसवंत ने हमारे साथ दरख्वास्त की कॉपी और जॉब कार्ड भी साझा किए। इन प्रमाणों से यह सिद्ध होता है कि सरपंच की ऐसी हरकतों से वह लोग कितने त्रस्त हो चुके हैं। अभी कुछ दिन पहले जसवंत के भतीजे व परिवार पर हमला भी बोला गया था। इस हमले में उनके भतीजे राहुल के सिर पर फरसे से वार हुआ था। तब, आवाज उठाने पर इसी अलीम ने उनके लिए जातिसूचक शब्द इस्तेमाल किए थे और कहा था “इस साले चमार को जान से मार दे मैं अपने आप देख लूँगा।”
यहाँ बता दें, जॉबकार्ड के फर्जीवाड़ा की कहानी सिर्फ़ जसवंत नहीं बताते बल्कि उनके ही गाँव में रहने वाले हकीमुद्दीन भी इस बात की पुष्टि करते हैं। 52 वर्षीय हकीमुद्दीन कहते हैं कि अलीम सरपंच की करतूत के बारे में उन्हें जसवंत से कुछ दिन पहले ही मालूम हुआ था।
इसके बाद उन्होंने अपना जॉब कार्ड निकलवाया। जिसे देख उन्हें ज्ञात हुआ कि बिना मनरेगा में काम किए उनके नाम पर फर्जी ढंग से जॉब कार्ड अपडेट हुआ और पैसे निकाले जाते रहे।
उनका कहना है कि उनके नाम पर खुले अकॉउंट से पहले साल 2019 के नवंबर, दिसंबर में और फिर उसके बाद 2020 में भी कुछ महीने हजारों रुपए निकाले गए।
वे कहते हैं कि उनके घर के 5 सदस्यों के नाम पर सरपंच ने 5 जॉब कार्ड बनवाए हुए हैं। जबकि भाई का परिवार भी मिलाया जाए तो कुल 10 जॉब कार्ड उनके परिवार में बनाए गए।
इस संबंध में ग्रामीणों ने थाने में अपनी दरख्वास्त दे रखी है। कुछ लोगों के कहने पर उन्होंने बैंक के हेडक्वार्टर्स में भी अपने बैंक मैनेजर के ख़िलाफ़ शिकायत दी है। उनका मानना है कि इस मामले में बिना मिलीभगत के पैसे नहीं निकाले जा सकते थे। इसलिए उन्होंने ये शिकायत की है।
इस मामले के संबंध में हमारे पास कुछ हलफनामे हैं जिनमें ठगे गए गरीबों व दलितों के बयान है। इसमें उन्होंने उलेटा ग्राम सरपंच, ग्राम सचिव तथा अन्य संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को उत्तरदायी बताया है।
मध्य प्रदेश के गुना में दलित किसान दंपति के साथ प्रशासन के अधिकारियों ने जिस तरह से मारपीट की, इस मामले पर विवाद बढ़ता जा रहा है। वहीं अब इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी नाराज़गी व्यक्त की है। इसके साथ ही मामले की रिपोर्ट तलब करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस से निष्पक्ष और जल्दी जाँच को सुनिश्चित करने के लिए कहा है। आयोग ने इस मामले की एक प्रारंभिक रिपोर्ट की भी माँग की है।
NCW की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने इस मामले से जुड़े वीडियो को देखते हुए मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी को एक पत्र लिखा है। उन्होंने पुलिस की तरफ से किए गए अमानवीय व्यवहार पर चिंता ज़ाहिर करते हुए घटना की पूर्ण जानकारी का ब्यौरा माँगा है। इसके साथ ही शर्मा ने पुलिस से इस मामले में बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जाँच जल्द से जल्द करने को कहा है।
गौतलब है कि मध्यप्रदेश के गुना में मंगलवार को अतिक्रमण हटाने के लिए पहुँची पुलिस ने किसान दंपति की लाठियों से जमकर पिटाई की। इसके साथ ही किराए की जमीन पर खेती कर रहे किसान पति-पत्नी ने आत्महत्या करने का भी प्रयास किया। इससे जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। जिसपर गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुना के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की बर्बरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुना मामले में उच्च स्तरीय जाँच के आदेश भी दिए हैं, जो भी इस घटना में दोषी है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले के सामने आने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी ट्वीट किया। जिसमें लिखा कि, “गुना की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस संबंध में मैंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी से चर्चा करके ऐसे असंवेदनशील व दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही का अनुरोध किया है।”
गुना की दुर्भाग्यपूर्ण घटना को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी ने गुना के कलेक्टर और एसपी को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दे दिए है। @ChouhanShivrajhttps://t.co/zrehxYZV0n
— Jyotiraditya M. Scindia (@JM_Scindia) July 15, 2020
उल्लेखनीय है कि गुना शहर के जगनपुर क्षेत्र में एक सरकारी मॉडल कॉलेज के निर्माण के लिए निर्धारित सरकारी जमीन के अतिक्रमण से जबरन निकाले गए एक दलित दंपति ने मंगलवार (जुलाई 14, 2020) को इस मुहिम के विरोध में कीटनाशक पी लिया था।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अतिक्रमणकारी दंपति और उनके परिवार के लोगों द्वारा अतिक्रमण हटाने की मुहिम का विरोध करने पर पुलिस को लाठीचार्ज करने के लिए मजबूर होना पड़ा। कीटनाशक पी लेने के बाद पुलिस द्वारा दंपति को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ फिलहाल उनकी हालत में सुधार है।
जगह छोड़ने का विरोध कर रहे दंपति को पीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें पुलिस लाठी से एक आदमी को कथित तौर पर पीट रही है और उसकी पत्नी और अन्य लोग उसे बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें महिला भी अपने पति के ऊपर लेट जाती है और महिला पुलिसकर्मी उसे मौके से हटाते हुए नजर आ रही हैं।
केरल के हाई प्रोफाइल गोल्ड स्मगलिंग मामले में जो नए विवरण सामने आए हैं, वे केरल में सीपीआई (एम) सरकार के नेतृत्व वाले पिनाराई विजयन के लिए मुसीबत को और गहरा कर सकते हैं। बहुचर्चित गोल्ड स्मगलिंग केस की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश और पीआर सरिथ राज्य के बड़े नेताओं से लगातार संपर्क में थे।
स्वप्ना सुरेश की फोन कॉल से यह खुलासा हुआ है, इतना ही नहीं वह केरल के उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील से भी टच में थी। केरल के उच्च शिक्षा मंत्री और CPI (M) नेता केटी जलील और आरोपित स्वप्ना सुरेश के बीच कॉल डेटा रिकॉर्ड से पता चला कि दोनों के बीच 16 कॉल किए गए थे और वह निरंतर सम्पर्क में थे।
स्वप्ना सुरेश केरल गोल्ड तस्करी केस की प्रमुख आरोपित है। इससे पहले, NIA ने UAE से दुबई में रहने वाले तीसरे आरोपित फैसल फरीद के प्रत्यर्पण की माँग की थी। NIA ने यह भी दावा किया है कि सोने की तस्करी आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए की जा रही थी।
पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार और केरल गोल्ड तस्करी के आरोपितों के बीच साँठगाँठ
कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के अनुसार, केटी जलील ने स्वप्ना सुरेश को कई कॉल किए थे, जिसकी जाँच एनआईए और कस्टम अधिकारियों द्वारा की जा रही है। विवरण में कहा गया है कि मंत्री और स्वप्ना सुरेश के बीच मई और जून के महीने में कई कॉल हुए थे। जलील के दो निजी कर्मचारी भी स्वप्ना सुरेश के संपर्क में थे।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के अनुसार, स्वप्ना सुरेश और उनके साथी सरिथ कुमार, दोनों कांसुलर कार्यालय के पूर्व कर्मचारी, खेप की डिलीवरी के लिए राजनयिक पत्रों की व्यवस्था में सक्रिय रूप से शामिल थे। स्वप्ना सुरेश वर्तमान में केरल स्टेट आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (केएसआईटीआईएल) के अंतर्गत कार्यरत है, जो कि सीधे आईटी विभाग के अंतर्गत आता है।
CM विजयन के प्रमुख सचिव एम शिवशंकर के साथ स्वप्ना सुरेश लिंक
इससे पहले, पिनाराई विजयन के साथ आरोपित स्वप्ना सुरेश के कथित संबंध भी सामने आए थे, जब यह बताया गया था कि विजयन के प्रमुख सचिव एम शिवशंकर आरोपित स्वप्ना सुरेश के करीबी थे।
स्वप्ना सुरेश टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में सलाहकार के पद पर रही हैं। वह केरल सरकार के आईटी सचिव एम शिवशंकर की करीबी बताई जा रही हैं। इन दोनों के नाम सामने आने के बाद विपक्ष लगातार केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन पर निशाना साध रहा है।
अब, सीडीआर ने खुलासा किया है कि एम शिवशंकर हाई प्रोफाइल केस के पहले आरोपित सरिथ पीएस के संपर्क में था। इस मामले के सामने आने के कुछ दिनों पहले दोनों ने कई बार फोन किया था। शिवशंकर ने भी सुरेश और सरिथ, दोनों को कॉल की थी।
इस बीच केरल सरकार के मंत्री केटी जलील ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने स्वप्ना सुरेश से केवल काउंसल-जनरल के निर्देशानुसार आधिकारिक मामलों के बारे में बात की।
उन्होंने कहा, “मुझे काउंसल-जनरल का संदेश मिला कि रमजान के खाद्य किट वितरण के लिए तैयार हैं। वह चाहते थे कि अगर मेरी रुचि हो तो मैं वापस आ जाऊं। इसके बाद, मुझे काउंसल-जनरल से निर्देश के अनुसार स्वप्ना सुरेश से संपर्क करने के लिए कहा गया। बातचीत विशुद्ध रूप से आधिकारिक थी।”
हालाँकि, कॉल विवरण ने मंत्री के बयान का खंडन किया है क्योंकि यह पता चला है कि मंत्री उनके संपर्क में थे, और उन्होंने रमजान के बाद भी अभियुक्तों को कई कॉल किए थे।
कस्टम्स ने पहले पाया था कि स्वप्ना सुरेश, सरिथ और संदीप नायर (एक अन्य आरोपित) अक्सर राज्य की राजधानी में शिवशंकर के अपार्टमेंट में इकट्ठा होते थे। राज्य सचिवालय के पास के फ्लैट को शिवशंकर ने किराए पर लिया था।
केरल की राजधानी में यूएई दूतावास से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल सोने की तस्करी मामले में उनका नाम सामने आने के बाद पिछले हफ्ते केरल सरकार ने एम शिवशंकर को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के पद से हटा दिया था। उनकी जगह अब आईएएस मीर मोहम्मद अली ने ले ली है।
एनआईए ने पाया कि रैकेट सितंबर, 2019 से तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर राजनयिक चैनलों के माध्यम से देश में 1.5 क्विंटल (150 किलोग्राम) सोना लाने में कामयाब रहा। एनआईए ने आगे खुलासा किया कि सोने की तस्करी गहनों के लिए नहीं की गई थी लेकिन भारत में आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग के लिए की थी।
सोमवार को, एनआईए ने संदिग्धों – स्वप्ना सुरेश और यूएई काउंसलेट के लिए काम करने वाले संदीप नायर को 21 जुलाई तक एजेंसी की हिरासत में भेज दिया है।
गोल्ड स्मगलिंग केस
तिरुअनंतपुरम एयरपोर्ट पर कस्टम अफसरों ने 3 जुलाई को कार्गो फ्लाइट से 30 किलो सोना जब्त किया था। यह सोना यूएई के वाणिज्य दूतावास का था। जब कस्टम विभाग ने जाँच की तो इस मामले में स्वप्ना सुरेश और दूतावास के प्रतिनिधि सरिथ का नाम सामने आया था।
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के अब्दुल्लापुर में 13 जुलाई को एक 60 वर्षीय बुजुर्ग को इतना पीटा गया कि उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया। बुजुर्ग का नाम कांति प्रसाद था। वह अब्दुल्लापुर स्थित एक शिव मंदिर के उपाध्यक्ष थे और मंदिर की दुकानों में ही दुकान करके अपना घर परिवार चलाते थे। उनकी वेशभूषा अक्सर संतो जैसी रहती थी। मंदिर में पूजा पाठ साफ-सफाई का जिम्मा भी उन्हीं पर था।
सोमवार का दिन कांति प्रसाद के लिए कोई अलग दिन की तरह नहीं था। वह अपनी आम दैनिक क्रियाएँ करके केवल बिजली का बिल जमा करने बिजली घर तक गए थे। मगर, उनकी बदकिस्मती बस ये थी कि वहाँ पर उन्हें अनस कुरैशी मिल गया।
#MulsimsLynchedHindu तिलक लगाने व गले में भगवा पटका पड़ा होने पर मेरठ के मुस्लिम बहुल गांव अब्दुल्लापुर में एक हिन्दू बुजुर्ग मंदिर सेवक की मुस्लिमों द्वारा पीट पीटकर हत्या कर दी गई।
वही अनस जो उन्हें पिछले काफी समय से परेशान कर रहा था और उस दिन बिल जमा कराने की जगह भी उनपर धार्मिक टिप्पणियाँ कस रहा था।
अब, ये टिप्पणियाँ क्या थी? और क्यों इनसे विवाद बढ़ा? अनस ने कांति प्रसाद पर कहाँ हमला किया? उसके साथ कौन-कौन था? इन सभी सवालों की जानकारी जुटाने के लिए हमने कांति प्रसाद के बेटे आदेश से संपर्क किया।
कांति प्रसाद के बेटे आदेश से ऑपइंडिया की बातचीत
30 वर्षीय आदेश पुत्र कांति प्रसाद ने हमें बताया कि उनके पिता 8-9 साल से मंदिर में रहते थे और पिछले 7-8 साल से बजरंग दल से जुड़े थे। मंदिर में रहते हुए उनके शरीर पर भगवा रंग का गमछा और माथे पर तिलक रहता था। जिसके कारण पिछले कुछ समय से कुछ लोग उन्हें बहुत परेशान करते थे। हालाँकि, अधिकांश लोग कहते थे कि तुम्हारी सरकार है तुम तो भगवा पहनोगे ही। लेकिन अनस उन्हें कुछ ज्यादा ही तंग करता था।
आदेश की अनुसार, अनस कुरैशी उनके पिता के पीछे पिछले 2-3 साल से पड़ा था और उन्हें समय दर समय काफी परेशान करता था। उनके भगवा गमछे और तिलक को देखकर ये भी कहता था, “तेरा तिलक पोछ देंगे और भगवा भी उतार देंगे। अच्छे से पंडित बना देंगे। तू मंदिर में घंटी बजाने के काबिल भी नहीं बचेगा।”
आदेश के मुताबिक, उसके पिता सोमवार को बिजली का बिल जमा कराने बिजलीघर तक गए थे। तब अनस ने दोबारा उनपर टिप्पणियाँ करके छेड़ना शुरू किया। इससे पहले वो मंदिर में भी ऐसा कर चुका था। जिसके कारण कांति प्रसाद ने उस दिन अनस का रवैया देखकर उससे पूछ ही डाला कि आखिर वो उन्हें क्यों छेड़ता है? इन सबसे उसे क्या मिलेगा?
दोनों में बात बढ़ने लगी तो बिजली घर मे मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें शांत करवा दिया और कहा बिल जमा करवाके अपने घर जाओ। मगर, अनस चूँकि लाइन में आगे था इसलिए वो पहले बिल जमा करवाकर रास्ते में खड़ा हो गया। जब कांति प्रसाद लौटने लगे तो उसने उन्हें रोका और पकड़ के पीट दिया। मार खाने के बाद भी बुजुर्ग ने अनस को कुछ नहीं कहा और लौट आए। लेकिन अनस इतने पर नहीं रुका उसने उन्हें घर के पास दोबारा पीटा।
अब की कांति प्रसाद ने अनस के घरवालों से उसकी शिकायत करने की ठानी। वे मंदिर पर साइकिल खड़ा करके उसकी शिकायत करने गए। मगर, उनकी बात सुनने की बजाय या अनस को डाँटने की बजाय उसके घरवालों ने आदेश के पिता यानी कांति प्रसाद पर हमला बोल दिया।
अनस के पिता और भाई समेत करीब 5 लोगों ने एक 60 वर्षीय बुजुर्ग को लिटा-लिटा कर मारा। उनको गुप्तांगों पर प्रहार किया। हालत गंभीर हो जाने पर एक दूसरा व्यक्ति उन्हें एक स्थानीय क्लिनिक तक लेकर आया। जहाँ डॉक्टर ने उनका इलाज करने से मना कर दिया और अस्पताल ले जाने की बात कही।
पिता की हत्या से आहत आदेश ने हमसे रुँधे गले में बात करते हुए कहा कि जब ये सब हुआ तब वो अपने काम पर थे। उन्हें जब पता चला तो वो अपने पिता से मिलने सरकारी अस्पताल में गए। वहाँ उनके पिता ने उन्हें ये सब बातें बताई और मेडिकल लेकर वापस आए।
एफआईआर में कांति प्रसाद का बयान
आदेश के अनुसार, अनस और उसके परिवार ने उनके पिता की हालत ऐसी कर दी थी कि वो कुछ बोल भी नहीं पा रहे थे। जब उन्होंने अपना बयान दर्ज करवाया तो उन्हें होश नहीं था और पुलिस ने भी इस मामले में केवल अनस का नाम लिख दिया।
ऐसे में जब उन लोगों को रिपोर्ट का पता चला तो उन्होंने दोबारा रिपोर्ट बदलवाई और कहा कि जैसा उनके पिता ने उन्हें बताया है उस हिसाब से रिपोर्ट दर्ज हो। इसके बाद उन्होंने इस मामले में 5 लोगों का नाम और जुड़वाया।
कांति प्रसाद की हत्या में हिस्ट्रीशीटर नदीम कनेक्शन
आदेश कहते हैं कि इस पूरे मामले में एक मुख्य आरोपित नदीम है। उसी का ये सब किया हुआ है। वही सबको भड़काता है। उसपर कई मामले दर्ज हैं। जान-पहचान और पैसा होने के कारण उसपर कोई कार्रवाई नहीं होती। इस मामले में भी जब उसे गंभीर हालत का पता चला तो उसने खुद को बचाने के लिए केवल अनस को ले जाकर पुलिस को सरेंडर करवा दिया और खुद इस मामले से पल्ला झाड़ लिया।
कांति प्रसाद के पुत्र की शिकायत
आदेश कहते हैं, “ये पहली बार नहीं जब नदीम ने ऐसा कुछ किया। कुछ समय पहले भी पड़ोस में रहने वाले वसीम और सलीम ने छोटी सी बात पर हमसे झगड़ा किया था। तब तीन लोगों ने मेरे घर में मुझपर तलवार से हमला किया था। चोट इतनी गहरी थी कि 9 टाँके आए थे। जब हमने इस मामले में शिकायत की और केस शुरू हुआ। तो एक दिन नदीम हमसे मिला और कहा, “जो हो गया वो हो गया अब पैसे लेकर समझौता कर लो। लेकिन हमने इससे मना कर दिया। जिसपर उसने कहा कि अगर पैसे नहीं लोगे तो अन्य तरीकों से बताएँगें।”
यहाँ बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स से भी यह बात सामने आई है कि नदीम की भूमिका कई आपराधिक घटनाओं में रही है। जिसके कारण लोग उसके ख़िलाफ़ गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं। उस पर ये आरोप है कि उसके आतंक से लोग इतने परेशान हैं कि कई बार इलाके के अनुसूचित जाति के परिवार गाँव से पलायन करने की चेतावनी तक दे चुके हैं।
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष राजकुमार सोनकर ने अपनी शिकायत में कहा था कि नदीम मेवाती ने सरकारी तालाबों पर कब्जों सहित कई अवैध धंधे चला रखे हैं। शिकायत करने पर नदीम परिवार वालों को भी मार देने की धमकी दे चुका है।
कांति प्रसाद की हत्या के मामले में भी अब उसका नाम निकल कर सामने आया है। आदेश ने आरोप लगाया है कि उसके पिता की हत्या के बाद अनस के घरवालों ने उसे धमकी दी है कि या तो वह केस वापसी ले, या फिर उनके इलाके के हिस्ट्रीशीटर नदीम और शमीम उनका नामोनिशान मिटा देंगे।
बता दें, फिलहाल, तो बजरंग दल समेत हिंदू संगठनों के प्रदर्शन के बाद अनस की गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन नदीम की गिरफ्तारी के लिए भी आवाजें उठ रही हैं। परिवार ने इस घटना के बाद अपने लिए 25 लाख रुपए के मुआवजे की माँग की है।
ऑपइंडिया ने इस संबंध में VHP के निमेष वशिष्ठ से बात की
विश्व हिंदू परिषद के महानगर मंत्री निमेष वशिष्ठ ने हमें बताया कि उन्हें इस संबंध में अपने कार्यकर्ताओं से पता चला था। तो, उन्होंने परिवार के साथ मिलकर इस मामले में आवाज उठाई। जिसके बाद अनस गिरफ्तार हुआ और भावनपुर के एसओ का तबादला हुआ।
प्रदर्शन पर बैठे लोग
वे कहते हैं कि एसओ के तबादले के पीछे उन लोगों का कोई रोल नहीं है। ये शिकायत ग्रामीणों की ही थी कि पहले भी बहुत से ऐसे मामले सामने आए। अगर, समय रहते उन पर सही कार्रवाइयाँ होतीं। तो कभी भी ये सब नहीं होता।
अब इस घटना के बाद कांति प्रसाद के परिवार ने सरकार से मुआवजे की माँग की है। साथ ही अनस के परिवार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने घटना के बाद केस के बारे में किसी संगठन या पुलिस को न बताने के लिए उनपर दबाव बनाया और पूरे परिवार को मारने की धमकी दी।
पुलिस की कार्रवाई
यहाँ बता दें, एसओ की कार्रवाई से असंतुष्टि की बात कांति प्रसाद के पुत्र आदेश ने भी की थी। उन्होंने कहा था कि इस संबंध में जब उन्होंने पहले शिकायत की तो उपयुक्त कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया था कि नदीम की एसओ से साँठगाँठ थी। जिसके चलते उसने पहले ही मामले की सूचना उन्हें दे दी थी।
— Shilpa#India4Kashmir (@shilpainexile) July 15, 2020
उल्लेखनीय है कि वैसे तो इस संबंध में मेरठ पुलिस की ओर से जानकारी दे दी गई है कि उन्होंने आरोपित अनस को जेल में डाल दिया है और बाकियों पर भी कार्रवाई की तैयारी है। इसके अलावा गाँव में भी सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल तैनात है। लेकिन नदीम की गिरफ्तारी और एसओ के तबादले की पुष्टि के लिए फिर भी हमने भावनपुर थाने में संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वहाँ तकनीकी कारणों से हमारी बात नहीं हो पाई।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत को अब एक महीने से ज्यादा हो चुका है। मगर उनके चाहने वाले अब भी इस बात को मानने से इनकार कर रहे हैं कि सुशांत कभी ऐसा कदम उठा सकते थे। हर कोई इस मामले को संदेह की नजर से देख रहा है। पिछले दिनों कई कलाकारों व दिग्गजों ने उनकी मौत पर सीबीआई जाँच की भी माँग की थी। अब यही माँग उनकी गर्लफ्रेंड रह चुकी रिया चक्रवर्ती ने की है।
Respected @AmitShah sir , I’m sushants Singh Rajputs girlfriend Rhea chakraborty,it is now over a month since his sudden demise I have complete faith in the government, however in the interest of justice , I request you with folded hands to initiate a CBI enquiry..part 1 ..
रिया चक्रवर्ती ने अपने ट्विटर पर ट्वीट करके गृहमंत्री अमित शाह से सुशांत के मामले में सीबीआई जाँच की माँग की है। उन्होंने लिखा, “माननीय अमित शाह सर, मैं सुशांत सिंह राजपूत की प्रेमिका रिया चक्रवर्ती हूँ। अब सुशांत के निधन को एक माह से ज्यादा बीत चुका है। मेरा न्याय के मामले में सरकार पर पूरा विश्वास है। मैं अनुरोध करती हूँ कि इस मामले में सीबीआई जाँच हो।”
Part 2.. I request you with folded hands to initiate a CBI enquiry into this matter . I only want to understand what pressures , prompted Sushant to take this step. Yours sincerely #satyamevajayate@AmitShah sir
अपने अगले ट्वीट में रिया लिखती हैं, “मैं इस मामले में सीबीआई जाँच के लिए आपसे अनुरोध करती हूँ। मैं जानना चाहती हूँ कि आखिर किस दबाव में सुशांत ने ये कदम उठाया।”
यहाँ बता दें कि पिछले कुछ समय में रिया चक्रवर्ती की चुप्पी को लेकर सुशांत के चाहने वालों ने उन पर कई तरह के सवाल उठाए थे। उन पर आरोप लगा था कि सुशांत की मौत के पीछे रिया चक्रवर्ती का भी हाथ हो सकता है। इसलिए उनसे भी सख्ती से पूछताछ की जाए।
हालाँकि, इन आरोपों पर अभी तक रिया ने कुछ नहीं कहा था। मगर आज उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने बताया कि अब उन्हें रेप की धमकियाँ मिलने लगी हैं। उन्होंने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए धमकियों का स्क्रीनशॉट शेयर किया और लिखा:
“मुझे गोल्ड डिगर कहा गया, मैं चुप रही। मुझे हत्यारा कहा गया मैं चुप रही…लेकिन मेरी यह चुप्पी आपको यह कहने का अधिकार कैसे देती है कि आप मुझसे बोलो कि मेरा रेप हो जाए या मेरी हत्या कर दी जाए। जो आपने कहा है क्या आप उसकी गंभीरता जानते हैं। यह अपराध है और कानून के मुताबिक कोई भी इस चीज का शिकार नहीं बनना चाहिए। मैं साइबर क्राइम हेल्पलाइन और साइबर क्राइम इंडिया से निवेदन करती हूँ कि इसके खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाए। बहुत हो गया।”
IIT दिल्ली ने नई COVID-19 टेस्ट किट ‘कोरोस्योर’ (Corosure) लॉन्च किया है। इंस्टीट्यूट का दावा है कि यह दुनिया की सबसे सस्ती कोरोना जाँच किट है। बुधवार (जुलाई 15, 2020) को केंद्रीय मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और राज्य मंत्री (HRD) संजय धोत्रे इसे लॉन्च भी कर दिया है।
— Prasar Bharati News Services (@PBNS_India) July 16, 2020
IIT अधिकारियों के अनुसार, इस RT-PCR टेस्ट किट का बेस प्राइस 399 रुपए है। आइसोलेशन और लैबोरेटरी चार्ज जोड़ देने के बाद भी प्रति टेस्ट कॉस्ट 650 रुपए तक हो जाएगी। ये किट अधिकृत परीक्षण प्रयोगशालाओं में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगा।
Union Human Resource Development Minister, Shri Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’ e-launched the World’s most affordable RT-PCR based COVID-19 diagnostic kit developed by IIT Delhi through video conferencing. MoS for HRD Shri Sanjay Dhotre was also present on the occasion. pic.twitter.com/OIvWad21oD
कोरोस्योर किट की कीमत वर्तमान में मार्केट में मौजूद किट्स की कीमत की तुलना में कम ही रहेगी। IIT दिल्ली का यह COVID-19 टेस्ट किट 3 घंटे के अंदर रिजल्ट दे सकता है।
आईआईटी दिल्ली देश का पहला ऐसा शिक्षण संस्थान है, जिसकी टेस्टिंग किट उपयोग में लाई जाएगी। कुसुम स्कूल ऑफ बॉयोलोजिकल साइंसेज की लैब में इस तकनीक को विकसित किया गया है।
आईआईटी दिल्ली ने कंपनियों को जाँच किट का व्यवसाय करने के लिए गैर-विशिष्ट मुक्त लाइसेंस दिए हैं। कंपनी न्यूटेक मेडिकल डिवाइसेस इसको बाज़ार में लेकर आएगी और उसकी कीमत तय करेगी।
HRD मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कोरोश्योर टेस्ट किट के लॉन्च के अवसर पर कहा कि ‘कोरोस्योर किट’ को पूरी तरह से भारत में बनाया गया है और यह अन्य किट्स के मुकाबले सस्ता है।
उन्होंने कहा कि देश को सस्ती और विश्वसनीय टेस्टिंग की जरूरत है, जो महामारी को नियंत्रित करने में मदद कर सके। इस किट को उच्चतम स्कोर के साथ ICMR और हाई सेंसिटिविटी व स्पेसिफिसिटी के साथ DCGI की मंजूरी मिल चुकी है।
आईआईटी दिल्ली की प्रॉब फ्री आरटी पीसीआर ( PROBE Free RT- PCR) तकनीक का उपयोग करके अब प्रति माह लगभग 20 लाख टेस्ट बेहद सस्ती कीमत पर हो सकेंगे, जो बढ़ाकर 50 लाख तक दर दिए जाएँगे।
आरटी-पीसीआर में इस बात की जाँच की जाती है कि शरीर में कोरोना वायरस मौजूद है या नहीं? इसके लिए व्यक्ति के रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट, थ्रोट स्वैब या नाक के पीछे वाले गले के हिस्से से सैंपल लिया जाता है। इसके नतीजे आने में औसतन 24 घंटे का वक्त लगता है।
राजस्थान स्पीकर के नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट में सुनवाई टल गई है। सचिन पायलट खेमे ने याचिका में संशोधन के लिए समय माँगा है। आज शाम या कल फिर सुनवाई हो सकती है। पायलट याचिका को खंडपीठ में पेश करना चाहते हैं। मुख्य न्यायाधीश समय व तारीख तय करेंगे। सचिन पायलट व अन्य की ओर से याचिका में संशोधन की बात की गई।
Rajasthan HC grants time to Sachin Pilot camp to file fresh petition, matter to be heard now by Division Bench
सचिन पायलट की ओर से हरीश साल्वे ने बहस शुरू करते हुए कहा कि सदन से बाहर हुई कार्यवाही के लिए अध्यक्ष नोटिस जारी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि नोटिस की संवैधानिक वैधता नहीं है।
Counsel Harish Salve says dissident MLAs want to challenge constitutional validity of disqualification notices issued by Rajasthan Speaker
सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री पद और उनके दो समर्थक कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त किए जाने के बाद राजस्थान में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने पायलट सहित उनके खेमे के 19 विधायकों को नोटिस जारी किया।
इस नोटिस के बाद सचिन पायलट और उनके साथियों ने अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सचिन पायलट और समर्थक विधायकों की याचिका स्वीकार करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए आज बृहस्पतिवार (जुलाई 16, 2020) 3 बजे का समय तय किया गया था।
इस मामले में जस्टिस सतीश चंद शर्मा की बेंच ने सुनवाई की। पायलट कैंप की ओर से वकील मुकुल रोहतगी और हरीश साल्वे केस लड़ रहे हैं। जबकि, उच्च न्यायालय में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष का प्रतिनिधित्व करने के लिए अभिषेक मनु सिंघवी मौजूद थे।
Abhishek Manu Singhvi to represent Rajasthan Assembly Speaker at the High Court. The matter will be heard at 3 pm today. https://t.co/6qqAJ3kgtk
दरअसल, राजस्थान कॉन्ग्रेस ने विधायक दल की हालिया बैठकों से अनुपस्थित रहने पर राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और 18 अन्य विधायकों को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने की माँग की है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पूर्व डिप्टी उप-मुख्यमंत्री पर भाजपा के साथ अपनी सरकार को गिराने का आरोप लगाया है। जबकि, सचिन पायलट खेमे के विधायकों का कहना है कि वे प्रतिष्ठा के लिए लड़ रहे हैं, ना कि पद के लिए।
पार्टी ने राजस्थान कॉन्ग्रेस की अशोक गहलोत सरकार को गिराने की साजिश में शामिल होने के आरोप में सचिन पायलट और दो मंत्रियों, विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को मंगलवार (जुलाई 14, 2020) को उनके पदों से बर्खास्त कर दिया था।
महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार ने राज्य की लगभग 14000 ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया था। इस प्रक्रिया में सरकार ज़िला संरक्षक मंत्रियों को भी संज्ञान में लेने वाली थी। महाराष्ट्र के विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले पर खूब सवाल किए थे।
अब एनसीपी ने ग्राम पंचायत प्रशासक पद के लिए 11000 रुपए बतौर पार्टी फंड माँगे हैं। राज्य सरकार की तरफ से प्रशासकों की नियुक्ति का आदेश जारी होने के बाद, पुणे के एनसीपी जिलाध्यक्ष प्रदीप गारटकर ने 14 जुलाई को आस-पास की सभी तहसीलों के मुखियाओं को 11000-11000 रुपए देने का निर्देश जारी किया।
लॉकडाउन और कोरोना वायरस के चलते राज्य निर्वाचन आयोग ने ग्राम पंचायत के सभी चुनावों की तारीख़ टाल दी थी। यही वजह थी कि पंचायत में प्रशासकों की नियुक्ति का आदेश जारी किया गया था। अकेले पुणे की 750 ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जाने की ज़रूरत है, जिसके लिए कई हज़ार आवेदन आएँगे। इस क्षेत्र में ज़्यादातर पंचायत भाजपा और एनसीपी के अधीन हैं।
पुणे की इन्हीं 750 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्त के लिए एनसीपी पुणे के अध्यक्ष ने एक पत्र लिखा। इस पत्र में जिन तहसीलों की ग्राम पंचायतों में चुनाव होने वाले हैं, उन (पार्टी के) सभी तहसीलों के मुखियाओं को प्रशासकों की नियुक्ति से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किया गया था।
इन दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आवेदन करने वाले हर व्यक्ति को आवेदन पत्र अनिवार्य रूप से भरना है। लेकिन इसके साथ ही, एनसीपी पुणे के आधिकारिक बैंक एकाउंट में 11000 रुपए भी डलवाने होंगे, जो कि पार्टी फंड में जाएगा और आवेदन करने वालों को वापस नहीं किया जाएगा।
पंचायत में प्रशासकों की नियुक्ति के लिए जारी किए गए इस आवेदन पत्र में प्रदीप गारटकर और पुणे शहर का नाम भी लिखा हुआ है। साथ ही इसमें आवेदक से उसकी जाति, शैक्षणिक योग्यता, गवर्नेंस/सामाजिक कार्य में अनुभव और पार्टी में निभाए किसी दायित्व की जानकारी भी माँगी गई है।
पुणे के डिविजनल कमिश्नर दीपक म्हाईसेकर ने इस मुद्दे पर कहा है कि उन्हें एनसीपी के पार्टी फंड माँगने वाले आदेश के बारे में जानकारी नहीं है। पुणे के एनसीपी जिलाध्यक्ष प्रदीप गारटकर ने इस मामले में अपनी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मालिक ने हालाँकि बताया कि पार्टी ने प्रशासकों की नियुक्ति से जुड़ा इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा, “अगर वह आने वाले चुनावों की तैयारी कर रहे हैं और उम्मीदवारों को तैयार कर रहे हैं तो उसमें कोई परेशानी नहीं है। लेकिन अगर यह पंचायत में प्रशासकों से जुड़ा मामला है तो गलत है।”
आज की तारीख़ में 2 एकड़ ज़मीन की कीमत कितनी है? अगर वो जमीन देश की राजधानी दिल्ली में, दिल्ली में भी ‘हार्ट ऑफ़ लुटियंस’ के ठीक केंद्र में हो तो? खबर की शुरुआत में 2 लाइन की भूमिका इसलिए क्योंकि खबर 2 एकड़ और दिल्ली से जुड़ी है। खबर यह है कि कॉन्ग्रेस को पार्टी कार्यालय बनाने के लिए 2 एकड़ ज़मीन मिलती है… वो भी पूरी की पूरी मुफ्त। लेकिन जमीन चली जाती है गाँधी परिवार के पास!
आसान शब्दों में कहें तो जो ज़मीन कॉन्ग्रेस को ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी के कार्यालय बनाने के लिए मिली, वह फिलहाल गाँधी परिवार के नाम है। इसके लिए जितनी बार कॉन्ग्रेस की सरकार सत्ता में आई, हर बार अपनी सुविधानुसार नियमों में ऐसे बदलाव किए, जिनके माध्यम से वो 2 एकड़ ज़मीन पार्टी मुख्यालय के बजाय एक परिवार की होकर रह गई। हैरानी की बात यह है कि इंदिरा गाँधी सरकार के समय से शुरू हुई यह प्रक्रिया यूपीए 2 के दौर तक चली।
कौन-कौन सी सरकारें रहीं शामिल
इस 2 एकड़ ज़मीन को अपने हिस्से में (मतलब गाँधी परिवार के लिए) करने के लिए कुल 4 बार बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए। 5 दशकों के दौरान चले इस ज़मीनी खींचतान की नींव पड़ी थी साल 1976 के दिसंबर महीने में यानी इंदिरा गाँधी की सरकार में। दूसरा बड़ा बदलाव हुआ साल 1988 के सितम्बर महीने में, यानी राजीव गाँधी की सरकार में। तीसरा बड़ा बदलाव किया गया नरसिम्हा राव की सरकार में, दिसंबर 1995 में और अंत में सबसे बड़ा बदलाव हुआ यूपीए 2 की सरकार के अंतिम दिनों में, मई 2014 के दौरान।
इन चार पड़ावों के ज़रिए कॉन्ग्रेस पार्टी मुख्यालय की ज़मीन, गाँधी परिवार के नाम हो गई। सबसे ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि इस दौरान यहाँ पार्टी के किसी भी दूसरे या तीसरे व्यक्ति का आना वर्जित था। अब सवाल उठता है कि इतना कुछ हुआ कैसे? हुआ ऐसे कि सबसे पहले साल 1975 के सितम्बर महीने में लुटियंस दिल्ली के नज़दीक लगभग 1 एकड़ ज़मीन कॉन्ग्रेस पार्टी मुख्यालय बनाने के लिए जारी की गई।
ज़रूरत पड़ने पर बदले गए नाम
इस खेल में कई कारनामे किए गए। कभी कॉन्ग्रेस भवन ट्रस्ट का नाम बदल कर ‘जवाहर भवन ट्रस्ट’ कर दिया गया। फिर साल 1976 में अतिरिक्त ज़मीन भी दे दी गई। फिर सत्ता में आई राजीव गाँधी सरकार। इस सरकार ने वही ज़मीन जवाहर भवन ट्रस्ट के नाम कर दी। इसमें हैरान होने वाली कोई बात नहीं है कि इस ट्रस्ट के (ट्रस्टी) सदस्य कोई और नहीं बल्कि गाँधी परिवार के ही सदस्य हैं।
साल 1995 में यह ज़मीन लगभग राजीव गाँधी फाउंडेशन के नाम कर दी गई और वह भी किराए पर। लेकिन ज़मीन के साथ खिलवाड़ की यह कहानी यहीं पर ख़त्म नहीं होती। इस खेल में सबसे बड़ा कदम उठाया गया यूपीए 2 की सरकार में। जो ज़मीन पहले ही राजीव गाँधी फाउंडेशन को किराए पर मिली थी, उसे कई हिस्सों में गाँधी परिवार के दूसरे ट्रस्ट को बाँट दी गई। जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट ब्राइट इंडिया फाउंडेशन ऑफिस ऑफ़ कमला नेहरु मेमोरियल हॉस्पिटल राजीव गाँधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ कन्टेम्प्ररी स्टडीज़
यानी कुल मिला कर दिल्ली के सबसे चर्चित और प्रशासनिक इलाके की लगभग 2 एकड़ ज़मीन, जिसकी कीमत का अंदाज़ लगा पाना मुश्किल है, वह धीरे-धीरे देश के सबसे पुराने राजनीतिक परिवार की बपौती हो गई। एक राष्ट्रीय लोकतांत्रिक दल में इस बात से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा कि जो ज़मीन पार्टी मुख्यालय के लिए जारी की गई थी, वो परिवार की जागीर हो गई।
इतना ही नहीं, ज़मीन के लिए गाँधी परिवार ने एक रुपए भी नहीं चुकाए और न जाने कितने नियमों का उल्लंघन करते हुए उस पर कब्जा जमा कर बैठ गए! अब जबकि राजीव गाँधी फाउंडेशन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के उप-निदेशक की अगुवाई में पहले ही जाँच जारी है, ऐसे में इतना बड़ा खुलासा गाँधी परिवार की कार्यशैली की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।