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Qraa Men ब्रांड ने महिलाओं की नग्न तस्वीरों के साथ किया पुरुष प्रॉडक्ट का प्रचार, सोशल मीडिया पर भड़के लोग, किया विरोध

पुरुषों को सजाने और सवारने वाले प्रॉडक्ट ब्रांड Qraa Men को अपने हालिया विज्ञापनों को लेकर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। दरअसल, ब्रांड ने अपने उत्पादों के प्रचार के महिलाओं के ऐसी चित्रों का इस्तेमाल किया था। जिसमें उन्होंने सौंदर्य उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए बिना कपड़ों की महिलाओं को प्रदर्शित करते हुए लिखा था, “ओह, हीरो! सिर्फ देखते रहने से कुछ नहीं मिलना। देखने लायक बना, बियर्ड को और खुद को, Qraa बियर्ड आयल के साथ।

जैसे ही उन्होंने अपने अपने विज्ञापनों को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। सिर्फ इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर ही नहीं बल्कि लोगों ने ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी इसकी तीखी आलोचना की। वहीं रवलीन सभरवाल नाम की एक यूजर ने डिलीट किए गए पोस्ट के स्क्रीनशॉट डालते हुए कहा, “क्या यह किसी तरह का भद्दा मजाक है या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बुशफायर की तरह फैला हुआ विज्ञापन है… इस तरह की मार्केटिंग करके वे सीधे महिलाओं को लक्षित कर रहे हैं।” इसके साथ ही उन्होंने अपने पोस्ट में NCW की चेयरपर्सन रेखा शर्मा को भी टैग किया।

ब्रांड ने एक समय के बाद उन सभी टिप्पणियों को अपने कमेंट बॉक्स से डिलीट करना शुरू कर दिया जिसमें लोगों ने ब्रांड और उसके विज्ञापनों की आलोचना की थी।

हालाँकि, लोगों की कड़ी प्रतिक्रियाओं को देखते हुए Qraa Men हालही में पोस्ट किए विज्ञापन सामग्री को हटा दिया है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर महिलाओं ऑब्जेक्टिफाई किया था। बता दें कई पॉपुलर महिलाओं और पुरूष इंफ्लुएंसर्स ने अतीत में Qraa Men ब्रांड के लिए प्रचार किया हैं। जिसमें फ्लाइंगबीस्ट भी शामिल है, जो सुरक्षा चिंताओं पर सवाल उठाने के बाद एयर एशिया में अपनी नौकरी से हाथ धो बैठे थे।

गौरतलब है कि इस ब्रांड ने महिलाओं के ऐसी तस्वीरों को कुछ पुरुषों के दृष्टिकोण को देखते हुए चुना जो महिलाओं को उत्पाद बेचने के लिए वासना की वस्तु मानते है। जहाँ अभी तक ब्रांड के लिए यह तरीका काफ़ी काम आया था। लेकिन, इस बार सोशल मीडिया यूज़र्स द्वारा भेजे गए कठोर टिप्पणियों के चलते उन्हें अपने विज्ञापनों को हटाना पड़ा। जो उनके लिए एक गहरा सबक है।

पैगंबर की फिल्म से भावनाएँ होंगी आहत, YouTube, फेसबुक, Instagram सब जगह करो बैन: महाराष्ट्र सरकार

इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मुहम्मद के जीवन पर आधारित ईरानी फिल्म ‘मुहम्मद दी मेसेंजर ऑफ गॉड’ (Muhammad: The Messenger of God) पर प्रतिबंध लगाने को लेकर महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि उनके पास फिल्‍म के खिलाफ सूफी सुन्नी संगठन रज़ा एकेडमी (Raza Academy) की तरफ से शिकायत आई है।

फ़िल्म पर बैन की माँग को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।

दरअसल, सूफी सुन्नी संगठन रज़ा एकेडमी ने इस सबंध में महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद ही महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कैबिनेट मंत्री सूचना और प्रौद्योगिकी को पत्र लिख इस फिल्म को बैन करने के साथ ही यूट्यूब सहित फेसबुक, इन्स्टाग्राम जैसे सभी डिजिटल प्लैटफ़ार्म पर इसे बैन करने और इसका यूआरएल ब्लॉक करने के लिए पत्र लिखा है।

शिकायतकर्ता की तरफ से कहा गया है कि इस फिल्‍म की वजह से कानून व्यवस्था खराब हो सकती है। ऐसे में, उन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से इसे सस्‍पेंड करने के लिए कहा गया है जिन पर यह फिल्‍म आगामी 21 जुलाई को रिलीज होनी है। माजिद मजीदी कि इस फिल्म यानी, ‘मुहम्मद: द मैसेंजर ऑफ गॉड’ में एआर रहमान ने संगीत दिया है।

इसके साथ ही पत्र में अपील की गई है कि यूट्यूब, फेसबुक जैसे सभी प्‍लैटफॉर्म्‍स को इसे लेकर निर्देश जारी किए जाएँ। शिकायतकर्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह फिल्‍म धार्मिक भावनाओं को आहत करेगी और इससे सामाजिक विद्वेष फैल सकता है।

गौरतलब है कि इस फिल्म को लेकर देशभर के मुस्लिमों में नाराजगी देखी गई है। दरअसल, फिल्म में पैगंबर हजरत मुहम्मद के किरदार को फिल्माया गया है। जबकि, इस्लाम में पैगंबर हजरत मुहम्मद के किसी भी तरह के चित्र बनाने की इजाजत नहीं है।

यह फिल्‍म छठी सेंचुरी पर आधारित है और इसकी कहानी पैगंबर मुहम्मद के बचपन के इर्द-गिर्द घूमती है। बताया जा रहा है कि ईरानी सिनेमा की यह अब तक की सबसे बड़े बजट की फिल्‍म है। फिल्‍म का डायरेक्‍शन माजिद मजीदी ने किया है।

सुशांत सिंह केस: सुब्रमण्यम स्वामी ने पत्र लिख PM मोदी से की CBI जाँच की माँग, कहा- पुलिस छिपाना चाहती है बॉलीवुड के बड़े नाम

सुशांत सिंह राजपूत के निधन को पूरा 1 महीना हो चुका है। लेकिन अभी तक उनकी आत्महत्या के पीछे की वज़ह का खुलासा नहीं हो पाया है। सुशांत डेथ केस में फैंस और कई सेलेब्रिटीज़ लगातार सीबीआई (CBI) जाँच की माँग कर रहे हैं। इसके अलावा बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने भी इसकी सीबीआई जाँच की डिमांड की है। वहीं अब सुशांत के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सीधे पीएम मोदी को पत्र लिखकर सीबीआई जाँच की माँग की है।

सुब्रमण्यम स्वामी के पत्र को एडवोकेट ईशकरण सिंह भंडारी ने ट्वीट के जरिए शेयर किया है। जिसमें बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा, ”आप एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बारे में भलीभाँति जानते होंगे। मेरे सहयोगी ईशकरण भंडारी ने सुशांत सिंह राजपूत की कथित सुसाइड पर कुछ रिसर्च की है। पुलिस मामला दर्ज करने के बाद मामले की जाँच कर रही है। मैंने मुंबई में स्थित अपने सूत्रों से सुना है कि इस मामले में बॉलीवुड के कई बड़े नाम, जिनके दुबई के डॉन से संबंध हैं, इसे पुलिस जाँच के जरिए कवर-अप करना चाहते हैं, ताकि इसे आत्महत्या साबित किया जा सके।”

“चूँकि महाराष्ट्र सरकार के पास ऐसे कई बड़ी लोगों की राय हैं, जिनसे यह साबित हो जाए कि मिस्टर राजपूत ने ख़ुदकुशी की है। इसलिए जनता के भरोसे के लिए मैं यह माँग करता हूँ कि मुंबई पुलिस इसकी निष्पक्ष जाँच करे। इसलिए इस देश के मुखिया होने के नाते और मासूम लोगों के लिए आपके झुकाव को देखते हुए, मैं आपसे गुज़ारिश करता हूँ कि आप महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को सीधे या राज्यपाल के ज़रिए सीबीआई जाँच के लिए सहमत कर सकते हैं। मुंबई पुलिस पहले ही कोरोना वायरस पैनडेमिक और दूसरे मामलों में व्यस्त है। जनता के भरोसे को बहाल करने के लिए सीबीआई जाँच ज़रूरी है।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले पूर्व कैबिनेट मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी ने तीनों खानों की संपत्ति की जाँच की माँग की थी। स्वामी ने सवाल उठाया कि बॉलीवुड के तीन बाहुबली सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान सुशांत सिंह राजपूत के कथित आत्महत्या मामले पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? उन्होंने विदेश, खासकर दुबई में उनकी सम्पत्तियों की जाँच के लिए भी आवाज़ उठाई। इसके साथ ही उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या पर भी शक जताते हुए अधिवक्ता ईशकरण भंडारी से मामले में तथ्यों की जाँच कर के सीबीआई जाँच की गुंजाइश पर विचार करने को कहा था।

बता दें सुब्रमण्यम स्वामी के अलावा बिहार के पूर्व सांसद पप्पू यादव ने भी गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर एक्टर के सुसाइड मामले में सीबीआई जाँच की माँग की थी।

वहीं दूसरी ओर बीजेपी सांसद रूपा गांगुली ने भी सोशल मीडिया के जरिए इस घटना को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। उन्होंने मुंबई पुलिस की जाँच पर संदेह जताया था। इसके साथ सीबीआई जाँच की माँग करते हुए पूछा था कि सुशांत सिंह की मौत के बाद भी उनके सोशल मीडिया एकाउंट लगातार एक्टिव कैसे हैं।

गौरतलब है कि पिछले महीने (जून) की 14 तारीख को ही सुशांत सिंह राजपूत ने अपने घर में फाँसी लगाकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी। उस दिन से अब तक पुलिस लगभग तीन दर्जन लोगों से पूछताछ कर चुकी है। सुशांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी बताती है कि उनकी मौत फाँसी लगने के बाद साँस लेने में तकलीफ से हुई है।

पालघर: महाराष्ट्र CID की चार्जशीट से साधुओं की लिंचिंग में धार्मिक कारण से इनकार, हत्या को बताया अफवाहों पर आधारित

पालघर, महाराष्ट्र में साधुओं की लिंचिंग पर महाराष्ट्र सीआईडी ​​ने बुधवार (जुलाई 15, 2020) को दहानू कोर्ट में 126 व्यक्तियों और दो नाबालिगों के नाम वाले दो आरोप पत्र (चार्ज शीट) दायर किए।

महाराष्ट्र पुलिस ने कहा है कि दो चार्जशीट में क्रमशः 5000 पेज और 6000 पेज शामिल हैं, जो कि प्रारंभिक चार्ज शीट हैं, में जाँच जारी रहेगी। आरोप पत्र में उल्लेख किया गया है कि साधुओं की लिंचिंग अफवाहों पर आधारित थी और इसका कोई धार्मिक कारण नहीं था।

25 आरोपियों को जमानत देने से इनकार

रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले दिन, सत्र अदालत ने पालघर में मॉब लिंचिंग के मामले में 25 आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपित ने तकनीकी आधार पर जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे पालघर जिला अदालत ने खारिज कर दिया है।

जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए पब्लिक प्रोसीक्यूटर सतिश मानसिंदे ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने ‘आरोपितों के खिलाफ कई सबूत’ एकत्र किए थे, जिसमें मोबाइल कॉल डेटा रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी सबूत शामिल थे।

इन सबूतों के आधार पर जाँच से साबित हुआ कि उस रात पालघर के कासा में गडचिंचले गाँव के पास घटना के समय आरोपित मौजूद थे, जब 500 की भीड़ ने दो साधुओं और उनके ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

केंद्र ने संत समुदाय को आश्वासन दिया है कि वह इस संगीन अपराध के मामले में महज एक दर्शक नहीं होगा, बल्कि केवल तभी हस्तक्षेप कर सकता है जब राज्य सरकार सहमति या सक्षम अदालत ऐसा करने का आदेश दे।

उल्लेखनीय है कि गत 16 अप्रैल को, महाराष्ट्र के पालघर जिले के गड़चिनचले गाँव में तकरीबन 200 लोगों की भीड़ द्वारा तीन लोगों को कथित तौर पर चोर समझकर मौत के घाट उतार दिया गया था, जिनमें दो साधू और एक उनका ड्राइवर शामिल था।

यह पूरी घटना वहाँ मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों के सामने हुई। इसके बाद साधुओं को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। जूना अखाड़े के दो साधु महंत सुशील गिरी महाराज (35), महंत चिकने महाराज कल्पवृक्ष गिरी (65) अपने ड्राइवर निलेश तेलगडे (30) के साथ मुंबई से गुजरात के सूरत में अपने साथी के अंतिम संस्कार के लिए जा रहे थे। उन्होंने वैन किराए पर ली थी। कोरोना वायरस के दौरान जारी लॉकडाउन के बीच वे 120 किलोमीटर का सफर तय कर चुके थे।

जबकि पुलिस शुरू में इस मामले की जाँच कर रही थी, महाराष्ट्र राज्य के गृह मंत्रालय ने मामले को राज्य सीआईडी ​​को स्थानांतरित कर दिया है। इसके अलावा, महाराष्ट्र के सीएम और शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे को सांप्रदायिक एंगल देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है, जबकि राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि सभी संदिग्ध पीड़ितों के एक ही धर्म के थे।

महाराष्ट्र राज्य सरकार ने साधुओं की हत्या और मॉब लिंचिंग के लिए सांप्रदायिक कारण को खारिज कर दिया था। लेकिन संत समुदाय में आशंकाओं के कारण, इस मामले को सीबीआई को स्थानांतरित करने के लिए बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है, जबकि दो याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं – एक इस हत्या के मामले को एनआईए और दूसरी इस मामले को सीबीआई को सौंपने को लेकर है।

हैंड-सैनिटाइजर पर GST छूट घरेलू उत्पादों की कीमत बढ़ाने और चीन से आयात को प्रोत्साहित कर सकता है, जानिए कैसे

कल ही अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (AAR) ने कहा कि सभी अल्कोहल-आधारित हैंड-सैनिटाइज़र पर 18% वस्‍तु व सेवा कर (GST) आरोपित होगा। एएआर ने अपने फैसले में कहा कि चूँकि आवेदक द्वारा निर्मित हैंड सैनिटाइजर ‘अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइजर’ की श्रेणी के हैं, इसलिए 18 फीसद जीएसटी लागू होगा।

दरअसल, प्राधिकरण गोवा स्थित एक ऐसे सैनिटाईजर निर्माता को जवाब दे रहा था, जिसने कहा था कि उत्पाद पर 12% टैक्स लगाया जाना चाहिए क्योंकि यह औषधि श्रेणी के अंतर्गत आता है। स्प्रिंगफील्ड इंडिया डिस्टिलरीज ने एएआर की गोवा पीठ में अपील कर कंपनी की ओर से देशभर में आपूर्ति किए जाने वाले सैनिटाइजर का वर्गीकरण (Classification) करने को कहा था।

स्प्रिंगफील्‍ड की दलील थी कि हैंड सैनिटाइजर पर 12% जीएसटी लगता है। इसके अलावा कंपनी ने यह भी पूछा था कि अब सैनिटाइजर आवश्यक वस्तु (Essential item) है, तो क्या इस पर जीएसटी छूट मिलेगी।

लेकिन एएआर ने फैसला सुनाया कि यद्यपि कोरोना वायरस महामारी के दौरान हैंड सैनिटाइटर्स को एक आवश्यक वस्तु के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, जीएसटी कानूनों के तहत छूट वाली वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक अलग अधिसूचना है, और अल्कोहल-आधारित सैनिटाइजर इस छूट वाली श्रेणी में नहीं हैं।

जीएसटी प्राधिकरण ने फैसला किया है कि साइनसाइटर्स हार्मोनाइज्ड सिस्टम ऑफ़ नोमेनक्लेचर (HSN) के चैप्टर 3808 के अंतर्गत आते हैं, जिसके लिए GST दर 18% है, और कुछ निर्माता 12% टैक्स के साथ चैप्टर 3004 के तहत उत्पाद को गलत तरीके से वर्गीकृत करके 12% GST का भुगतान कर रहे हैं।

इस फैसले ने आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी पर बहस को फिर से जगह दे दी है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने मौजूदा स्थिति के दौरान हैंड-सैनिटाइजर पर टैक्स लगाने के लिए सरकार की आलोचना की, क्योंकि यह उत्पाद कोरोना वायरस से सुरक्षा में सबसे आवश्यक उत्पादों में से एक बन गया है।

कई लोगों ने माँग की है कि चायनीज कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में आवश्यक हैंड-सैनिटाइजर और ऐसी ही आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी से छूट दी जानी चाहिए। सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी ने माँग की कि मोदी सरकार को मानव जीवन को बचाने के लिए सैनिटाइजर और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर सभी टैक्स में तुरंत छूट देनी चाहिए।

हालाँकि, क्या हैंड सैनीटाइज़र्स पर 18% टैक्स लगाया जाना चाहिए? यह बहस का विषय है। लेकिन 12% जीएसटी छूट की माँग भी वास्तव में बहुत तार्किक नहीं कही जा सकती।

एक बार के लिए ऐसा लग सकता है कि कर की दर शून्य होने पर कीमतें कम होंगी, लेकिन यह सच नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जीएसटी वास्तव में एक ऐसा वैट (VAT/मूल्य वर्धित कर) है, जहाँ उत्पादन के प्रत्येक चरण में जोड़े गए मूल्य पर टैक्स लगाया जाता है।

इस प्रणाली के तहत, उत्पादक कच्चे माल और पूँजीगत वस्तुओं पर पहले से भुगतान किए गए GST के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा कर सकते हैं। लेकिन यदि किसी उत्पाद का GST शून्य है, तो निर्माता इस इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर सकता है।

इसलिए, उत्पादन में प्रयोग किए जाने वाले कच्चे माल पर भुगतान किए गए पूरे जीएसटी को उत्पाद के अंतिम मूल्य में जोड़ा जाएगा, जो इसे कम करने के बजाय कीमत बढ़ाएगा ही।

दरअसल, तीन साल पहले सेनेटरी नैपकिन पर जीएसटी पर बहस के दौरान यह मामला पहले ही सुलझ गया था। राजनीतिज्ञों, कार्यकर्ताओं और मीडिया से सैनिटरी नैपकिन पर जीरो टैक्स की बढ़ती माँग के जवाब में, तत्कालीन वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली ने समझाया था कि ऐसा करना तर्कसंगत क्यों नहीं है।

उन्होंने कहा था कि नैपकिन में इस्तेमाल होने वाले बहुत से कच्चे माल पर 18% टैक्स लगता है, जो कि निर्माता इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में दावा कर सकते हैं, जबकि अंतिम उत्पाद पर जीएसटी 12% है।

अब यदि जीएसटी वापस ले लिया जाता है, तो मैन्युफैक्चरर्स यानी निर्माता, कच्चे माल पर पहले से चुकाए गए टैक्स के लिए आईटीसी यानी, इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर सकते हैं, जिसे बिक्री मूल्य में जोड़ना होगा।

इससे सैनिटरी नैपकिन फिर आयातित उत्पादों पर महँगा हो जाएगा, जिन पर 12% कर लगता है, इसलिए आयातित उत्पादों की तुलना में स्थानीय रूप से या लोकल स्तर पर बनाए गए उत्पाद (प्रोडक्ट) नुकसान झेलेंगे।

उस समय, जुलाई 2018 में सैनिटरी नैपकिन पर जीएसटी घटाकर शून्य कर दिया गया था। लेकिन इससे सैनिटरी नैपकीन के मूल्य में कोई कमी नहीं आई। जबकि कुछ कंपनियों ने इसका मूल्य बहुत थोड़ा ही घटाया, और कई लोगों ने नहीं क्योंकि इनपुट टैक्स क्रेडिट को हटाने से जीरो टैक्स का लाभ समाप्त हो गया है, और उसी मूल्य को बनाए रखा है।

यही गणना हैंड सैनिटाइज़र और ऐसी ही अन्य वस्तुओं जैसे – आवश्यक वस्तुओं (एसेंशियल कॉमोडिटी) के मामले में लागू होती है, क्योंकि जीएसटी से छूट के रूप में कीमतों में कमी आने की संभावना नहीं है क्योंकि ऐसे में आईटीसी बाधित हो जाएगा।

इसके अलावा, इससे निर्माताओं के लिए काम और आँकड़ों का बोझ भी बढ़ जाएगा, क्योंकि उन्हें इनपुट्स, इनपुट सेवाओं और पूँजीगत वस्तुओं के लिए अलग-अलग खातों को बनाए रखने की आवश्यकता होगी।

यदि कोई निर्माता अलग खाता बनाए रखने की स्थिति में नहीं है, तो उन्हें विस्तृत गणना करने के बाद छूट प्राप्त वस्तुओं के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले सभी इनपुट सेवाओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट को उल्टा करना होगा।

वहीं, इस तरह की छूट का सीधा असर घरेलू विनिर्माण पर पड़ता है और उन्हें हतोत्साहित करने का काम करता है, क्योंकि आईटीसी की रुकावट के कारण घरेलू उत्पादों की कीमत बढ़ जाती है।

चूँकि, आयात शुल्क में कोई परिवर्तन नहीं होगा, इसलिए आयातित उत्पादों की लागत समान रहती है, जबकि घरेलू उत्पाद की लागत बढ़ती है। इस प्रकार, यदि जीएसटी में छूट दी जाती है, तो इससे आयात में वृद्धि होगी, जो कि मुख्य रूप से चीन से होगा।

रक्षाबंधन पर गाय के चमड़े के उपयोग न करने की सलाह पर खुद ही फँसा PETA इंडिया, लोगों ने पूछा- राखी में कहाँ होता है चमड़े का उपयोग

पशु अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करने का दावा करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था PETA ने गाय के चित्र वाले उस बैनर ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जिसमें रक्षाबंधन के दौरान राखी में चमड़े का उपयोग न करने की सलाह दी गई है।

इस बैनर को लेकर जम कर हंगामा हुआ। PETA ने कहा है कि गायों को भी रक्षा की ज़रूरत है। दरअसल, बुधवार (जुलाई 15, 2020) को गुजरात से सोशल मीडिया यूज़र्स ने उस बैनर की तस्वीर शेयर की थी। इसके बाद विवाद खड़ा हो गया था क्योंकि PETA को यह तक पता नहीं कि रक्षाबंधन में चमड़े का उपयोग नहीं होता है। और लोगों ने तो PETA इंडिया से बकरीद पर भी ऐसी ही एक अपील की बात कह कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

ऑपइंडिया से बात करते हुए PETA इंडिया के इस अभियान की कोऑर्डिनेटर राधिका सूर्यवंशी ने बताया, “रक्षा बंधन हमारी बहनों की रक्षा का समय है, और गाय हमारी बहनें हैं। हमारी तरह, वे भी रक्त, मांस और हड्डी से बनी हैं और जीना चाहती हैं। हमारा विचार प्रतिदिन गायों की रक्षा करने का है और रक्षा बंधन एक बहुत ही अच्छा दिन है। जिसमें हम आजीवन चमड़े से मुक्त रहने का संकल्प ले सकते है। ”

सोशल मीडिया पर PETA इंडिया के इस अभियान की अदूरदर्शिता पर भड़के आक्रोश पर अपनी नाराजगी जताते हुए सूर्यवंशी ने कहा, “अभियान से ज्यादा यह अपमानजनक है कि गायों और भैंसों को इतनी ज्यादा संख्या में वाहनों पर लाद दिया जाता है। जिससे उनकी हड्डियाँ झुलस जाती हैं और उनका दम भी घुटने लगता है। जो बच जाते हैं, उनका गला दूसरे गाय भैसों के सामने रेत दिया जाता है। हमें इस हिंसा के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करनी चाहिए। लेकिन लोग इस हिंसा के प्रति नहीं बल्कि अपना गुस्सा पेटा के खिलाफ निकालते है जब कि हम गायों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।”

इससे पहले PETA ने लखनऊ में एक बिलबोर्ड लगवाया था। जिसमें एक बकरी की तस्वीर के साथ लोगों को शाकाहारी बनने और लखनऊ में अप्रत्यक्ष रूप से मुस्लिमों द्वारा बकरी की हत्या को रोकने की अपील की गई थी।

जिसके बाद सुन्नी मौलवी ने इसका विरोध किया था। और यह दावा किया कि मुस्लिम इस त्यौहार के मौके पर कुर्बानी देते हैं। यह पोस्टर पूरी तरह आपत्तिजनक है। इस पोस्टर ने हमारी धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। बकरी की कुर्बानी हमारे धर्म का एक हिस्सा है।

वहीं इस विरोध के बाद, उस बिलबोर्ड अर्थात होर्डिंग को वहाँ से हटा दिया गया था। जिसे हटाने को लेकर PETA ने दावा किया कि उन होर्डिंग्स को पुलिस अधिकारियों ने हटा दिया था। फिर भी, वे होर्डिंग्स को हटाने से सहमत नहीं थे। हालाँकि, ऑपइंडिया से बात करते हुए, लखनऊ पुलिस ने कहा था कि पेटा ने खुद ही होर्डिंग्स हटा दिए थे।

पीएम ओली के ‘अयोध्या ज्ञान’ पर माहौल बिगड़ने के बाद नेपाल ने जारी किया स्पष्टीकरण, कहा- किसी को दुख पहुँचाने की नहीं थी नियत

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की ओर से अयोध्या और हिंदुओं के आराध्य भगवान श्री राम को लेकर दिए गए विवादित बयान को लेकर नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक स्पष्टीकरण जारी किया है। गौरतलब है कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 13 जुलाई को कहा था कि श्री राम नेेपाली थे और भारत ने सांस्कृतिक अतिक्रमण करने के लिए वहाँ फर्जी अयोध्या का निर्माण कराया।

इसके साथ ही पीएम केपी शर्मा ओली ने यह भी कहा था, ”हालाँकि वास्तविक अयोध्या बीरगंज के पश्चिम में थोरी में स्थित है, भारत अपने यहाँ भगवान राम का जन्मस्थल होने का दावा करता है।” वहीं अब अजीबोगरीब दावे के बाद खुद को बुरी तरह घिरता देख ओली ने विदेश मंत्रालय के जरिए सफाई पेश करवाई है।

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा कि आदिकवि भानु भक्त आचार्य की 207 वीं जयंती समारोह के दौरान पीएम ओली द्वारा दिए गए बयान की गलत व्याख्या की गई थी। पीएम के भाषण का राजनीतिक मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं था। इससे किसी की भावना को ठेस पहुँचाने का इरादा नहीं था।

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी इस स्पष्टीकरण में कहा गया है, “प्रधानमंत्री ओली श्री राम, अयोध्या और इनसे जुड़े विभिन्न स्थानों को लेकर तथ्यों की जानकारी के लिए केवल उस विशाल सांस्कृतिक भूगोल के अध्ययन और शोध के महत्व का उल्लेख कर रहे थे जिसे रामायण प्रदर्शित करती है।” उन्होंने आगे कहा कि श्री राम और उनसे जुड़े स्थानों से संबंधित कई पौराणिक कथाएँ और संदर्भ हैं।

मंत्रालय ने आगे कहा कि पीएम का मतलब अयोध्या के महत्व और सांस्कृतिक मूल्यों के महत्व को कम करना नहीं था। नेपाल और भारत में हर साल “विवाह पंचमी” मनाया जाता है। इस अवसर पर भारत के अयोध्या से नेपाल के जनकपुर तक बारात आती है। नेपाल और भारत के प्रधानमंत्रियों ने मई 2018 में रामायण सर्किट लॉन्च किया था जिसका जनकपुर-अयोध्या बस सेवा एक अहम हिस्सा है।

नेपाल और भारत के संबंधों में टकराव

उल्लेखनीय है कि चीन का साथ देते हुए भारत के खिलाफ उठाए गए कई कदमों की वजह से भारत और नेपाल के बीच संबंध खराब हुए हैं। जहाँ नेपाली संसद ने नए मानचित्र में भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को नेपाल का हिस्सा बता कर शामिल किया गया था। जिसको लेकर भारतीय पक्ष ने विरोध भी किया था।

इसके अलावा नेपाली रेडियो स्टेशन भारत-विरोधी गाने बजाने की भी खबरें सामने आई थी। वहीं नेपाल की सांसद सरिता गिरि द्वारा भारत का समर्थक करने पर उनकी सदस्यता भी छीन ली गई थी।

7 कॉमेडियनों ने डिएक्टिवेट या प्रोटेक्ट किया अकॉउंट: हिन्दू धर्म और महापुरुषों के अपमान की ट्वीट-वीडियो होने लगी थी वायरल

अरब सागर में छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक का अपमान करने वाली स्टैंड-अप ‘कॉमेडियन’ अग्रिमा जोशुआ का मामला तूल पकड़ने के बाद स्टैंड अप कॉमेडी के नाम पर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले तथाकथित कॉमेडियन्स को चुन-चुन कर सोशल मीडिया यूजर्स आड़े हाथों ले रहे हैं।

पुराने से पुराने ट्वीट खोज कर उन्हें ट्रोल किया जा रहा है। जिसके कारण अब कम से कम 7 कॉमेडियनों ने अपना अकॉउंट प्राइवेट या फिर डिएक्टिवेट कर लिया है। दरअसल, इन्हें डर है कि कहीं और भी घटिया ट्विट्स खोज कर यूजर्स इनकी फजीहत न कर दें।

आइए बताएँ कौन से है वो SO-CALLED कॉमेडियन:

ईस्ट इंडिया कॉमेडी का साहिल शाह

छत्रपति शिवाजी महाराज पर साहिल शाह के ट्वीट्स के वायरल हो जाने के बाद साहिल ने अपना अकॉउंट प्राइवेट कर लिया है। यूजर्स इसपर संज्ञान लेकर साहिल पर निशाना साध रहे हैं।

इसके अलावा शाह की एक वीडियो भी शेयर की जा रही है। वीडियो को शेयर करते हुए कहा जा रहा है कि शाह ने छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया और महाराष्ट्र का मजाक उड़ाया। इसे महाराष्ट्र और पूरा देश बिलकुल बर्दाश्त नहीं कर सकता।

ईस्ट इंडिया कॉमेडी का अजीम बनतवल्ला

ईस्ट इंडिया कॉमेडी से जुड़ा अजीम ने भी इस दौरान अपना अकॉउंट डिएक्टिवेट किया है। लोग उसके द्वारा हिंदू देवी-देवाताओं पर किए गए ट्वीट को शेयर कर रहे थे। जिसमें उसने हिंदू देवता और डॉ भीम राव अम्बेडकर का मजाक उड़ाया था।

अजीम के एक बेहद आपत्तिजनक ट्वीट में अंबेडकर जयन्ती को “बी टी हैंगओवर डे” कहा गया था। जबकि एक दूसरे ट्वीट में गणेश चतुर्थी पर ये अप्रत्यक्ष रूप से ये कहा गया था कि ये त्योहार इसलिए मनाया जाता है क्योंकि एक पिता ने अपने बेटे का सिर काटा था।

इन ट्विट्स के सामने आने के बाद अजीम को यूजर्स की बहुत निंदा झेलनी पड़ी। इसलिए उसने मौका देखकर अपना ट्विटर बंद कर दिया।

आलोकेश सिन्हा

आलोकेश सिन्हा नामक कॉमेडियन ने भी पहले हिंदुत्व का और हनुमान चालीसा का अपने अकॉउंट से मजाक उड़ाया। लेकिन पूर्व शिव सेना सदस्य व हिंदुत्व कार्यकर्ता रमेश सोलंकी की शिकायत के बाद ट्विटर को अलविदा कह दिया। आलोकेश के ख़िलाफ़ गृह मंत्रालय के साइबर यूनिट में शिकायत दर्ज करवाई गई थी। सोलंकी ने आरोप लगाया था कि अब हिंदू धर्म का अपमान करके और हिंदू देवी-देवताओं पर तंज कसना एक ट्रेंड बन चुका है।

हालाँकि, अपने ऊपर शिकायत के बाद सिन्हा ने एक वीडियो शेयर किया । इस वीडियो में उसने अपने किए के लिए माफी माँगी और कहा कि आगे से वो कभी ऐसा कोई एक्ट नहीं करेंगे कि उनके भावनाओं को ठेस पहुँचे।

‘ऐसी तैसी डेमोक्रेसी’ के संजय रजौरा

ऐसी-तैसी डेमोक्रेसी से वामपंथी कॉमेडियन संजय रजौरा भी उसी सूची का एक नाम हैं जिन्होंने खुद को बचाने के लिए अपना ट्विटर अकॉउंट प्रोटेक्ट कर लिया। हालाँकि, संजय पर पूर्व में हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाकर भावनाएँ आहत करने के आरोप में शिकायत दर्ज है। संजय पर आरोप है कि उसने भगवान गणेश और भगवान शिव का मजाक उड़ाया था। उसपर भी रमेश सोलंकी ने इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई थी।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी संजय गाली-गलौच कर चुका है और ट्विटर यूजर्स को केवल इसलिए धमका चुका है कि वो उसके विचारों से सहमत नहीं हुए। उसने अपने ट्वीट में ब्राह्मणों व राजपूतों का भी मजाक उड़ाया था।

आदर मलिक

स्टैंड अप कॉमेडियन आदर मलिक, अनु मलिक का भतीजा है। जिसने हाल में अपना ट्विटर डिएक्टिवेट इसलिए कर दिया क्योंकि सोशल मीडिया यूजर्स उसकी उस वीडियो को शेयर कर रहे थे जिसमें उसने शिवलिंग पर तंज कसा था।

नीति पालता

हिंदू देवी देवताओं का मजाक उड़ाने वाली नीति पालता ने भी अभी हाल में अपना ट्विटर डिएक्टिवेट कर दिया है। उसने अपने ट्वीट में दावा किया था कि उसे पूजा के लिए विशेष अंतर्वस्त्र खरीदने के लिए स्पैम मैसेज आया है। उसने लिखा था कि उसे हैरानी होगी अगर इन कपड़ों में मंदिर की घंटी फिट होकर आए।

एक अन्य ट्वीट में नीति ने शिव नाम का भी मजाक उड़ाया। उसने कहा था कि आप कैसे अपने बच्चे का नाम शिव रखते हैं और उम्मीद करते है कि वो विध्वंसकारी न हो।

AIB का रोहन जोशी

अभी कल ऑल इंडिया बकचोद (AIB) के सह संस्थापक रोहन जोशी ने भी अपना अकॉउंट डिएक्टिवेट किया है। दरअसल, उसका भी पुराना ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हो गया था। जहाँ उसने शरद पवार के लिए अपशब्द कहे थे और अन्य राजनेताओं पर भी अपनी बेवकूफी दिखाई थी।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर मजाक उड़ाना, इतिहास के नायकों पर तंज कसना, ह्यूमर के नाम पर गंद परोसना बेहद आम बातें हो चली हैं। कई ऐसे मामले पिछले दिनों सामने आए हैं जहाँ इस तरह के कॉमेडियन पर शिकायतें दर्ज हुई और उन लोगों ने अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर खुद का बचाव करना चाहा। मगर, आज यूजर्स की सजगता ने इन्हें फिर कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है, जिसके कारण इन्हें अकॉउंट बंद करना पड़ रहा है या फिर कुछ लोगों तक सीमित।

केरल में नाबालिग के रेप के आरोप में 20 साल कैद की सजा काट रहे पादरी ने की रेप पीड़िता से शादी की माँग, पीड़िता की भी है सहमति

केरल के एक 52 वर्षीय कैथोलिक पादरी रॉबिन वडक्कमचेरी (Robin Vadakkumchery), जिसे इस वर्ष की शुरुआत (फरवरी 2020) में ही एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने के आरोप में 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी, ने केरल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और इस बलात्कार की शिकार लड़की से शादी करने की अनुमति माँगी है।

संयोग की बात यह है कि सिर्फ रॉबिन ही नहीं बल्कि पीड़िता ने भी संयुक्त रूप से शादी के लिए याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में पुलिस रिपोर्ट माँगी है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार (जुलाई 17, 2020) को होगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपित पादरी ने उच्च न्यायालय में यह दलील देने की कोशिश की है कि वह उस लड़की से शादी कर सकता है, जिसका कि उसने बलात्कार किया था और उसे गर्भवती किया था।

इस साल फरवरी माह में, पादरी को कन्नूर के थालास्सेरी, जो कि POCSO अधिनियम के मामलों की सुनवाई के लिए नामित अदालत है, में एक अतिरिक्त जिला सत्र अदालत द्वारा एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने और अभद्रता करने के आरोपों का दोषी पाया गया था।

केरल के 52 वर्षीय कैथोलिक पादरी को 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद, उसे पोप फ्रांसिस ने पादरी के कामों यानी सभी प्रार्थना कर्तव्यों और अधिकारों से भी बर्खास्त कर दिया था।

अदालत ने पीड़िता के माता-पिता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही का भी आदेश दिया था। लड़की की कस्टडी लीगल सर्विसेज सोसाइटी को दी गई और अन्य छह आरोपितों को बरी कर दिया गया था।

पादरी वडक्कमचेरी कन्नूर में चर्च के अंतर्गत चलने वाले स्कूल का मैनेजर भी था। इसी स्कूल में 11वीं क्‍लास में पी‍ड़‍िता छात्रा पढ़ती थी। मई 2016 में 16 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार करने के आरोप में पादरी को फरवरी 27, 2017 की रात को कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास से उस समय गिरफ्तार किया गया था जब वह देश छोड़ने की फिराक में था। पुलिस ने कहा कि लड़की के साथ पादरी के कमरे में ही कई बार बलात्कार किया गया था।

स्कूली बच्चों के बीच काम करने वाली एक चाइल्ड लाइन एजेंसी (Child Line agency) ने पादरी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। साल 2017 में नाबालिग लड़की द्वारा 07 फरवरी को चर्च द्वारा संचालित क्राइस्ट राजू अस्पताल में पीड़‍िता ने बच्चे को जन्म दिया था, जिसके बाद यह मामला सामने आया और पादरी पर कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ गया था।

रॉबिन वडक्कमचेरी ने पुलिस को घटना की सूचना नहीं देने के लिए ‘पुरस्कार’ के रूप में अस्पताल को ‘दान’ भी दिया था। पुलिस की शुरूआती जाँच के अनुसार, प्रसव के बाद वायनाड में क्रिस्टु दासी कॉन्वेंट से नेलयाली थैंकम, डॉ लिज़ मारिया और सिस्टर अनीता ने अस्पताल से बच्चे को कार में रखकर वायनाड के एक अनाथालय में ले गईं।

पादरी ने बचने की काफी कोशिशें की। यहाँ तक कि सुनवाई के दौरान पी‍ड़ि‍ता और उसकी माँ बलात्कार की बात से मुकर भी गए थे। फ‍िर भी अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाया।

जब पुलिस ने एक मामला दर्ज किया, तो उसने पीड़िता के पिता (जो कि एक गरीब मजदूर है) को यह स्वीकार करने के लिए विवश किया कि उसने ही अपनी बेटी के साथ बलात्कार किया और अब वह एक और बच्चे को जन्म देने वाली है।

सुनवाई के दौरान पीड़िता के पिता और उसकी बेटी ने भी यही बात स्वीकारी कि उसके पिता ने ही उसका बलात्कार किया लेकिन NGO की ख़ुफ़िया रिपोर्ट्स के आधार पर आखिर में सच सामने आ सका।

अदालत की कार्यवाही के दौरान, पीड़िता के साथ-साथ उसके परिवार ने भी दुश्मनी कर ली थी। हालाँकि, अभियोजन पक्ष ने सरकारी डॉक्टर के बयान पर भरोसा किया और यह साबित किया कि लड़की नाबालिग थी और यौन संबंध, भले ही वह नाबालिग की सहमति हो, केवल बलात्कार माना जा सकता था।

चर्च के स्वामित्व वाले मीडिया संगठनों ने खुले तौर पर बलात्कार और बलात्कारी को बचाने के शर्मनाक ब्यान दिए और उल्टा पीड़िता को ही इसके लिए लज्जित करने का प्रयास किया। एक कैथोलिक अखबार, ‘संडे शालोम’ ने एक संपादकीय में यह बात कही –

“इस घटना में 15 वर्ष की लड़की से भी ज्यादा लोग पाप के भागीदार हैं। अपनी बेटी की ही तरह तुम्हें मानकर मैं कह रहा हूँ, बेटी तुम्हारी भी गलती थी। सबसे पहले भगवान के लिए तुम्हारी जवाबदेही होगी। तुम यह क्यों भूल गई कि पादरी कौन था? तुम यह क्यों नहीं जानते कि एक पादरी की पवित्रता यीशु के हृदय की पवित्रता के बराबर है। उसके पास मानव शरीर है, जो प्रलोभन में आ सकता है। अगर वह कुछ देर के लिए अपना दायरा भूल भी गया था तो तुमने उसे रोका क्यों नहीं या उसे गलत क्यों नहीं ठहराया?”

यूपी में अपराध पर नकेल: माफिया मुख्तार अंसारी के करीबियों से मुक्त कराई गई ₹39.80 करोड़ की संपत्ति, 33 शस्त्र लाइसेंस निलंबित

योगी सरकार ऑपरेशन क्लीन के तहत प्रदेश में आपराधिक वारदातों को अंजाम देने वाले कुख्यात गैंग्स का सफाया करने में जुटी हुई है। इसी सिलसिले में जेल में बंद माफिया डॉन और मऊ के विधायक मुख्तार अंसारी पर जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। जिसमें पुलिस ने अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन और अवैध तरीकों से अर्जित की गई 39.80 करोड़ रुपए की संपत्तियों को भी मुख्तार के करीबियों से मुक्त कराया है। इसके साथ ही मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े लोगों के 33 असलहों के लाइसेंस निलंबित कर पुलिस थानों में जमा करवाए गए हैं।

बता दें यूपी पुलिस मुख्तार अंसारी के करीबी होने का लाभ उठाकर अवैध काम करने वालों के खिलाफ अभियान चला रही है। इसके साथ लगातार उनपर कार्रवाई कर रही है। वहीं प्रशासन ने अब तक जनपद में 17 माफियाओं को चिन्हित किया है। चिन्हित माफियों में तीन गौ तस्कर, तीन शराब माफिया एवं शेष आपराधिक माफिया हैं। टॉप और इनामिया बदमाशों को दबोचने के लिए पुलिस टीम गठित कर सक्रिय कर दी गई है।

फिलहाल, इस वक्त माफिया गैंग का सरगना मुख्तार अंसारी और उसका संचालन करने वाले जेल के सलाखों के पीछे हैं। तो कई वर्तमान में जमानत पर बाहर है। जिनकी गतिविधियों पर पुलिस पैनी नजर बनाए रखी है। इसके साथ इनके विरूद्ध कार्रवाई भी की जा रही है। पुलिस अब इन बदमाशों द्वारा कब्जा की गई सरकारी जमीनों को भी मुक्त कराने काम तेजी से कर रही हैं। इतना ही नहीं मुख्तार अंसारी के गैरकानूनी कारनामों पर नकेल कसने के लिए पुलिस उसके रिश्तेदारों समेत सभी सहयोगियों के शास्त्र लाइसेंसो को निरस्त करने का अभियान भी चला रही है।

उत्तरप्रदेश प्रशासन के इस रुख से सारे माफिया इस वक्त ख़ौफ में आ गए है। वहीं कई बदमाश पुलिस के डर से अंडर ग्राउंड भी हो गए है। जिनको पकड़ने के लिए पुलिस अधीक्षक की ओर से एक टीम गठित की गई है। इसके अलावा, सभी थानाध्यक्षों को इनकी धर-पकड़ के लिए निर्देशित किया गया है।

एसपी ने बताया कि शासन के निर्देश पर माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहें अभियान के क्रम में जनपद स्‍तर पर चिन्हित माफियाओें, भू-माफियाओं, गोतश्‍कर, शराब माफिया, अपराधिक माफिया, मुख्‍तार अंसारी, त्रिभुवन सिंह, गोरा राय, अमित राय, करमवीर सिंह उर्फ सोनू, महेंद्र जायसवाल, गोल्‍डेन उर्फ इम्तियाज, पारस सिंह कुशवाहा, सुभाष यादव, विनय पांडेय, अफरोज खान उर्फ चुन्‍नू, आदि के खिलाफ अनवरत कार्रवाई की जा रही है।

गौरतलब है कि केवल गाजीपुर में ही नहीं बल्कि मऊ, वाराणसी और जौनपुर सहित पूर्वी यूपी के जिलों में मछली व्यापार में मुख्तार के गुर्गों के एकाधिकार को तोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर यूपी पुलिस द्वारा कार्रवाई की जा रही हैं। वहीं मऊ पुलिस ने टैक्सी स्टैण्ड के नाम पर जबरन वसूली करने वाले मुख्तार समर्थित रैकेट पर भी अब शिकंजा कस दिया है।