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भारत विरोध के चलते नेपाल के पीएम ओली की कुर्सी पर गहराया संकट: प्रचंड समेत कई बड़े नेताओं ने माँगा इस्तीफा

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। उनकी अपनी ही सत्ताधारी पार्टी के बड़े नेताओं ने उनसे इस्तीफा माँग लिया है। मंगलवार (जून 30, 2020) को नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक हुई, जिसमें पीएम ओली से इस्तीफे की माँग की गई।

सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की आपसी घमासान काफी बढ़ गया है। सत्ता संघर्ष में पीएम केपी शर्मा ओली और पार्टी सह-अध्यक्ष पुष्पा कमल दहल प्रचंड आमने सामने आ गए हैं। पार्टी की स्थाई समिति की बैठक में प्रचंड और अन्य वरिष्ठ नेता माधव नेपाल, झाला नाथ खनाल और बामदेव गौतम ने भारत सहित विभिन्न मुद्दों पर अपनी विफलता का हवाला देते हुए पीएम केपी ओली का इस्तीफा माँगा।

गौरतलब है कि इससे पहले पार्टी के सह-अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ उनको समर्थन को अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी भूल मान चुके हैं। पार्टी की स्‍थाई समिति की पिछली बैठक में प्रचंड ने साफ तौर पर कहा था कि पार्टी के अध्यक्ष पद और प्रधानमंत्री पद में से ओली को कोई एक पद चुनना पड़ेगा। सरकार और पार्टी के बीच समन्वय का अभाव है।

बता दें कि हाल ही में ओली ने अपनी कुर्सी पर छाए संकट के लिए भारत पर दोषारोपण किया था और कहा था कि उनकी सरकार को गिराने की साजिश रची जा रही है। यही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्हें कुर्सी से हटाना असंभव है। उन्होंने आरोप लगाए थे कि भारत ने काठमांडू स्थित दूतावास में और एक होटल में उनकी सरकार गिराने के लिए साजिश रची है।

उनकी दलील है कि भारत उनसे नेपाली संसद से नया राजनीतिक नक्शा पास करवाने के लिए संविधान संशोधन करवाए जाने से नाराज हैं। जबकि हकीकत पहले से ही सामने आ रही है कि न तो उनके कार्यकलापों से उनकी पार्टी के नेता ही खुश हैं और न ही विपक्षी नेपाली कॉन्ग्रेस। नेपाली पीएम ने कहा था कि उन्हें पद से हटाने के लिए खुली दौड़ हो रही है। किसी ने सोचा नहीं था कि नक्शे को छापने के लिए किसी पीएम को पद से हटाया जाएगा।

मोदी की स्पीच में छठ और दिवाली लेकिन ईद गायब, लिबरल्स ने किया 80 करोड़ लोगों में से समुदाय विशेष को अलग

अक्सर नाम में ‘मजहब’ तलाशने की शिकायत करने वालों ने आज 80 करोड़ जनता में से समुदाय विशेष को अलग कर लिया है। देश के लिबरल गिरोह को शिकायत की है कि पीएम मोदी 5 माह में 80 करोड़ लोगों को अनाज देने की बात तो करते हैं लेकिन इस बीच समुदाय विशेष का जिक्र नहीं करते।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शाम 4 बजे देशवासियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का विस्तार अब दीपावली और छठ पूजा तक, यानी नवंबर माह के आखिर तक किया जाएगा। इस तरह से आने वाले 5 माह में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देने वाली यह योजना जुलाई से नवंबर तक लागू रहेगी।

पीएम मोदी ने मुफ्त राशन की योजना 5 महीने और जारी रखने का ऐलान करते हुए कहा कि इतने बड़े देश में हर गरीब के घर चूल्हा जलता रहे, यह केवल मेहनती किसानों और ईमानदार टैक्स पेयर्स की वजह से संभव हो पाया। लेकिन लिबरल मीडिया और इन्टरनेट उदारवादियों को पीएम मोदी के आज के सम्बोधन ने सरदर्द दे दिया है।

पीएम मोदी के इस संबोधन में उदारवादियों ने 80 करोड़ की इस जनता में मजहबी एंगल तलाश लिया और अब उनका कहना है कि पीएम मोदी ने छठ पूजा और दिपावली का जिक्र तो किया लेकिन समुदाय विशेष के त्यौहार बकरीद का जिक्र नहीं किया है।

दरअसल, अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा – “त्योहारों का ये समय, जरूरतें भी बढ़ाता है, खर्चे भी बढ़ाता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार अब दीवाली और छठ पूजा तक, यानी नवंबर महीने के आखिर तक कर दिया जाए।”

इसी पर उदारवादियों को समस्या है। ऐसी शिकायत करने वालों में शेखर गुप्ता के द प्रिंट के पत्रकारों से लेकर प्रोपेगेंडा समाचार चैनल NDTV के पत्रकार तक शामिल हैं।

जैनाब सिकंदर ने ट्विटर पर लिखा है – “172 मिलियन लोगों के एक राष्ट्र के पीएम ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ईद के त्यौहार (जो अगस्त में है) का उल्लेख नहीं किया है। उन्होंने आने वाले महीनों में हर त्यौहार का जिक्र किया लेकिन ईद का नहीं। तुच्छ। नहीं, सुंदर नहीं। मैंने कहा तुच्छ।”

वहीं NDTV के ही एक रिपोर्टर सोहित मिश्रा ने ट्वीट में लिखा – “इस साल ईद नहीं है क्या? देश में अब उसपर भी बैन लग गया? भाषण में ज़िक्र भी नहीं। वैसे चीन का भी ज़िक्र नहीं था, पर चना के बारे में ज़रूर बोला है।”

कुश अम्बेडकरवादी ने लिखा है – “छठ पूजा याद रही और ईद को भूल गए, कितना गिरोगे साहेब #झूठा_मोदी।”

ट्विटर पर अक्सर विवादों में घिरे रहने वाले हंसराज मीणा ने लिखा है – “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, ईद की याद नहीं आई कोई बात नहीं, लेकिन कम से कम देश के 20 जवानों की शहादत को ही याद कर लेते।”

न नया डाउनलोड होगा, न पुराना ऐप काम करेगा: TikTok भारत में पूरी तरह बंद

गूगल प्ले स्टोर पर अब चायनीज मोबाइल ऐप TikTok पूरी तरह से बंद हो गई है। यानी, अब भारत में ना ही टिकटोक को यूजर्स अब डाउनलोड कर सकते हैं और ना ही इसे इस्तेमाल कर पाएँगे। भारत सरकार द्वारा 59 चायनीज ऐप प्रतिबंधित करने के बाद भी यह ऐप मोबाईल में काम कर रही थी लेकिन अब इस पर वीडियो स्ट्रीमिंग बंद हो चुकी है।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने टिकटोक समेत ही 59 चायनीज मोबाइल ऐप को प्रतिबंधित कर दिया है। सरकार ने कहा है कि ये ऐप लोगों की गोपनीयता के कारण सुरक्षित नहीं हैं।

कुछ दिन पहले ही भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सरकार को 52 एप्स को लेकर अलर्ट जारी किया था और देश के नागरिकों को भी इन एप्स को इस्तेमाल करने से मना किया था। खुफिया एजेंसियों के इस अलर्ट के बाद सरकार ने इन 52 एप्स समेत 59 एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने इन चाइनीज एप्स को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

सरकार द्वारा बैन लगाने के 12 घंटे के अंदर भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय एप TikTok गूगल प्ले-स्टोर और एपल के स्टोर से हटा दिया गया है। वहीं, चायनीज ऐप पर इस प्रतिबंध पर टिकटॉक इंडिया ने ट्वीट करके कहा है कि सरकार द्वारा लगाया गया यह बैन अस्थाई है और वह सरकार के साथ इस मसले पर बात कर रही है।

चायनीज ऐप पर बैन से बौखलाए कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता ने की नमो ऐप को भी बैन करने की माँग

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण (Prithviraj Chavan) ने NaMo ऐप पर प्रतिबंध लगाने की माँग करते हुए आरोप लगाया कि यह भारतीयों की गोपनीयता और निजता का उल्लंघन कर रहा है।

मोदी घृणा में लिप्त महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने नमो ऐप की तुलना चायनीज ऐप से करते हुए यह भी आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधिकारिक मोबाइल फोन एप्लिकेशन, NaMo ऐप (नमो ऐप), गोपनीयता सेटिंग्स (प्राइवेसी सेटिंग्स) में परिवर्तन करता है और अमेरिका में मौजूद थर्ड पार्टी कंपनियों को डेटा भेजता है अमेरिका।

पृथ्वीराज चव्हाण ने अपने एक ट्वीट में लिखा है – “यह अच्छा है कि मोदी सरकार 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाकर 130 करोड़ भारतीयों की गोपनीयता की सुरक्षा कर रही है। नमो ऐप 22 डेटा पॉइंट्स एक्सेस करके अमेरिका में थर्ड पार्टी कंपनियों को डेटा भेजने के लिए प्राइवेसी सेटिंग्स को बदलता है और भारतीयों की प्राइवेसी का भी उल्लंघन करता है।”

कॉन्ग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने सोमवार (जून 29, 2020) को 59 चायनीज मोबाइल एप्लिकेशन पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसमें बेहद लोकप्रिय टिकटोक और यूसी ब्राउज़र भी शामिल हैं। सरकार ने कहा है कि वे देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं हैं।

भारत सरकार ने यह कदम चीन के साथ सीमा गतिरोध पर चीनी सरकार के रवैए और पूर्वी लद्दाख क्षेत्र स्थित गलवान घाटी में हाल ही में हुए हिंसक संघर्ष के खिलाफ लिया है।

कॉन्ग्रेस पार्टी चीन के साथ चल रहे इस संघर्ष पर शुरुआत से ही राजनीति करते हुए चीन का पक्ष लेती नजर आ रही है। कॉन्ग्रेस के पूर्व पार्टी अध्यक्ष ने भारत पर आत्मसर्पण करने तक का आरोप लगाया था और इसके बाद यह चायनीज ऐप के समर्थन में देखी जा सकती है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस द्वारा इससे पहले कोरोना वायरस की महामारी के दौरान जारी की गई आरोग्य सेतु ऐप पर भी सवाल खड़े किए गए थे। अब यही कॉन्ग्रेस राजनीतिक लाभ लेने के लिए चीनी ऐप की तुलना नमो ऐप से कर रही है। हालाँकि, अभी तक कॉन्ग्रेस कभी भी यह साबित कर पाने में नाकाम रही है कि वास्तव में सरकार की यह ऐप्स जनता की गोपनीयता के लिए खतरा हैं।

EVM से लेकर भारतीय मोबाइल ऐप्स के नाम पर कॉन्ग्रेस जनता के बीच भ्रम फैलाती देखी जाती रही हैं। ऐसे में चीन के साथ चल रहे कूटनीतिक संघर्ष के बीच भी वह अपनी ही सरकार के विरोध में चीन का समर्थन तक करने के लिए राजी हो गई है।

दिलचस्प बात यह है कि अगर आप कॉन्ग्रेस की मोबाइल ऐप को डाउनलोड करते हैं तो आपको 10 जानकारियाँ देनी होती हैं लेकिन कॉन्ग्रेस ने कभी इस सम्बन्ध में बात नहीं की हैं। जबकि नमो एप के सम्बन्ध में भाजपा आईटी सेल कई बार यह स्पष्ट कर चुका है कि जिस डाटा को तीसरी पार्टी के साथ शेयर किया जाता है वो मात्र विश्लेषण के लिए ही होता है ना कि इसे संग्रह किया जाता है, जैसा विश्लेषण गूगल एनालिटिक्स करता है और इससे यूजर्स को अपने पसंद के मुताबिक जानकारी मिलती है।

’59 एप्स बैन करने से क्या हो जाएगा’ कहने वालों को झटका: बौखलाए चीन ने जारी किया बयान, कर रहा समीक्षा

जहाँ एक तरफ भारत में कुछ प्रपंची वामपंथी और विपक्षी नेता ये कह रहे थे कि मोदी सरकार द्वारा 59 चीनी एप्लीकेशंस को बैन करने से चीन का क्या बिगड़ जाएगा, वहीं दूसरी तरफ चीन भारत के इस क़दम से बौखला गया है और उसने अपने बयान में कहा है कि वो जल्द ही इसकी पूरी समीक्षा कर के आगे क़दम उठाएगा। चीन ने कहा है कि वो भारत सरकार के इस क़दम से ख़ासा चिंतित है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लीजियान ने एप्स बैन किए जाने के मुद्दे पर कहा कि चीन ताज़ा स्थिति की पुष्टि के लिए प्रयास कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि चीन की सरकार का हमेशा इस बात पर जोर रहता है कि चीनी कम्पनियाँ अंतरराष्ट्रीय नियम-कायदों और स्थानीय विधान का पालन करते दूसरे देशों में कारोबार करें। साथ ही उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के हितों की रक्षा करना भारत सरकार की जिम्मेदारी है।

अभी तो भारत ने चीन को उसी की भाषा में जवाब देना शुरु ही किया है लेकिन चीन से पहले उसके यहाँ के झंडाबरदारों को ये चीजें बुरी लग जा रही हैं। इसीलिए चीन का बयान बाद में आया, यहाँ हंगामा पहले शुरू हो गया। कॉन्ग्रेस नेताओं और सोशल मीडिया लिबरल्स ने इसका विरोध किया। कइयों ने TikTok द्वारा पीएम केयर्स में 30 करोड़ रुपए देने की बात करते हुए सरकार पर सवाल दागना शुरू कर दिया।

महाराष्ट्र के वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने भारत सरकार के फैसले के विरोधस्वरूप ये माँग कर दी है कि नमो ऐप भी प्रतिबंधित होना चाहिए। उन्होंने नमो ऐप पर डेटा चुराने और लोगों की प्राइवेसी से खिलवाड़ करने तक के आरोप मढ़ दिए। ट्विटर पर प्रशांत भूषण और स्वाति चतुर्वेदी जैसे लोगों ने पूछा कि TikTok ने जो रुपए दिए हैं, क्या उसे लौटाया जाएगा? हालाँकि, लोगों ने ऐसे प्रपंचियों को भरपूर जवाब दिया।

वहीं उधर TikTok ने भी अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि भारत सरकार ने चीन के 59 एप्लीकेशंस को प्रतिबंधित किया है और वो इस आदेश के पालन की प्रक्रिया में हैं। साथ ही TikTok ने ये भी जानकारी दी है कि उसके लोग भारत सरकार में इस मामले से जुड़े लोगों से संपर्क में है और जल्द ही वो उनसे मिल कर अपना स्पष्टीकरण देने वाले हैं। TikTok ने कहा कि वो भारत सरकार के नियम-क़ानून के दायरे में रहते हुए डेटा की प्राइवेसी और सिक्योरिटी की ज़रूरतों का ख्याल रखता है। 

बता दें कि एप्स के प्रतिबंधित होने का मामला आगे एक समिति के पास जाएगा। मंत्रालय के संयुक्त सचिव इस समिति के अध्यक्ष हैं। हालाँकि, इसमें कई अन्य मंत्रालयों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।  प्रतिबंधित एप्स का प्रबंधन समूह इस समिति के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है। इसके बाद ये समिति तय करेगी कि प्रतिबंध जारी रखा जाए या हटा दिया जाए। अब इन एप्स का भारतीय वर्जन्स बनाने पर जोर दिया जा रहा है। 

‘मंदिर बनाने का फैसला… हम इस फैसले को जूती के ऊपर रखते हैं’ – इस्लामाबाद में कट्टरपंथियों ने उगला जहर

पिछले दिनों पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हिंदुओं के लिए मंदिर बनाए जाने को लेकर चर्चाएँ काफी गर्म रहीं। सोशल मीडिया पर इस मामले पर कई प्रतिक्रिया आईं। किसी ने इस कदम को पाकिस्तानी हिंदुओं के हित में बताया तो किसी ने इसे इमरान सरकार की कोई युक्ति की तरह देखा। 

लेकिन इसी बीच एक मत कट्टरपंथियों का भी सामने आया। जिन्होंने इस खबर को सुनते ही इसका विरोध शुरू कर दिया और देखते ही देखते इस मसले पर कुछ मजहबी उलेमाओं की वीडियो भी वायरल होना शुरू हो गई।

फेसबुक पर वायरल एक वीडियो में हम एक मौलवी से उसका उपदेश इस मसले पर सुन सकते हैं। हालाँकि वीडियो कब की है? इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। लेकिन उलेमा इस वीडियो में इस्लामाबाद में बनने जा रहे मंदिर पर ही अपनी राय रख रहा है। इस वीडियो में वह हिंदुओं के ख़िलाफ़ व उनके धार्मिक स्थलों के ख़िलाफ़ जहर उगलता दिख रहा है। 

हम सुन सकते हैं मौलवी वीडियो में कहता है कि इस्लामी रियासत में काफिरों के लिए उनका इबादतखाना नहीं बनाया जा सकता। तो फिर आखिर कैसे इस्लामाबाद में मंदिर बनाने का ऐलान किया गया? मौलवी आगे कहता है, “हम इस फैसले को जूती के तलवे के ऊपर रखते हैं।”

अपने अनुयायियों को इस्लाम का हवाला देकर भड़काते हुए मौलवी कहता है कि वो इस्लामाबाद जिसे इस्लाम के नाम पर आबाद किया गया। उसके अंदर ये लोग मंदिर बनाना चाहते हैं। पहले पाकिस्तान के अंदर गुरुद्वारे बनाए गए। अब आज मंदिर बना देना चाहते हैं।

मौलवी अपने भाषण में मस्जिद में राजा रणजीत सिंह की मूर्ति लगाने को लेकर भी सवाल करता है और उनका उल्लेख करते हुए कहता है कि ऐसा करके इस्लाम का जनाजा निकाला गया।

मौलवी की मानें तो काफिर यानी हिंदुओं के लिए कोई भी इबादतखाना बनवाने की इजाजत इस्लाम बिलकुल भी नहीं देता। तो फिर आखिर प्रशासन ने किस नियम के तहत इस्लामाबाद के अंदर मंदिर बनाने का ऐलान किया?

गौरतलब है कि इस मामले में इस मौलवी की यह अकेली वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं हो रही। बल्कि कुछ अन्य वीडियोज भी है, जिसमें इस्लामाबाद में मंदिर बनने के फैसले पर कट्टरपंथी ये सवाल पूछ रहे हैं कि क्या हुकूमत का नाम इस्लामाबाद इसलिए रखा गया था कि यहाँ पर हिंदुओं के लिए मंदिर बनाकर उसे मंदिराबाद बनाने की कोशिश की जाए?

बता दें कि पिछले हफ्ते खबर आई थी पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पहली बार हिंदुओं के लिए मंदिर बनने जा रहा है। इसकी आधारशिला मंगलवार को रखी गई। इस मंदिर को इस्लामाबाद के H-9 इलाके में 20 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बनाया जाएगा। इसका नाम श्री कृष्ण मंदिर होगा। इसे बनाने में लगभग 10 करोड़ रुपयों का खर्चा आएगा। ये सभी खर्चा इमरान सरकार उठाएगी।

सुरक्षाबलों ने लिया CRPF जवान और बच्चे की मौत का बदला: अनंतनाग में 2 आतंकी ढेर, 24 घंटे में 5 का सफाया

जम्मू-कश्मीर से आतंकवादियों का सफाया लगातार जारी है। अनंतनाग जिले के वाघमा इलाके में सुरक्षाबलों ने मंगलवार (जून 30, 2020) को 2 आतंकी मार गिराए हैं। ये वही थे, जिन्होंने अनंतनाग के बिजबेहड़ा में पिछले शुक्रवार (जून 26, 2020) को सीआरपीएफ की पार्टी पर हमला किया था। उस अटैक में सीआरपीएफ का एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गया और 5 साल के बच्चे की मौत हो गई थी।

इससे पहले सोमवार (जून 29, 2020) को आर्मी और पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन में अनंतनाग जिले के खुलचोहर इलाके में 3 आतंकियों को ढेर कर डोडा जिले को आतंकवाद मुक्त घोषित कर दिया था।

कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने बताया, “अनंतनाग के वाघामा इलाके में आज एक मुठभेड़ में दो कट्टर आतंकवादी मारे गए। पिछले 24 घंटों में अनंतनाग पुलिस और सुरक्षा बलों ने पाँच आतंकवादियों को निष्प्रभावी कर दिया है।”

विजय कुमार ने आगे कहा, “तीन आतंकवादियों के बारे में जानकारी थी। उनमें से एक जेकेआईएफ का कमांडर जाहिद डार था, जो चुपके से भागने में सफल रहा था। पुलिस, सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों ने इलाके की घेराबंदी कर ली थी।”

जम्मू-कश्मीर के डीजी दिलबाग सिंह ने बताया कि वाघमा बिजबेहारा में एक मुठभेड़ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान और एक 5 वर्षीय बच्चे की हत्या करने वाले दो आतंकवादियों को मार गिराया गया।

अनंतनाग के वघामा इलाके में मंगलवार सुबह सुरक्षाबलों को आतंकियों के छिपे होने का इनपुट मिला। इसके बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों आतंकी मारे गए।

जम्मू कश्मीर पुलिस की ओर से बताया गया है कि मारे गए दोनों आतंकी सीआरपीएफ जवान और एक 5 साल के बच्चे की हत्या में शामिल थे। इन दहशतगर्दों ने तीन दिन पहले जवान और बच्चे की हत्या की थी।

गौरतलब है कि अनंतनाग में शुक्रवार को सीआरपीएफ की टीम पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में एक सीआरपीएफ का जवान शहीद हो गए, जबकि एक बच्चे की भी मौत हो गई है। सीआरपीएफ की यह टीम अनंतनाग के बिजबेहरा पर हाईवे की सुरक्षा में में तैनात थी। सीआरपीएफ की टीम पर हुए आतंकी हमले के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई थी। इस हमले में शामिल दोनों आतंकवादियों को आज सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया।

लोकल के लिए वोकल: रंगीन ब्लॉक प्रिंट, कांथा सिलाई और मधुबनी प्रिंट वाले आगरा के खादी के जूते देश-दुनिया में छा जाने को तैयार

कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल के लिए वोकल’ बनने के कथन की रूपरेखा जल्द ही आगरा में मूर्तरूप लेने जा रही है। दरअसल, ताजनगरी में अब जल्द ही स्वदेशी खादी के जूते तैयार किए जाएँगे। इसके लिए हाल ही में खादी ग्रामोद्योग ने खादी के जूते बनाने के लिए शहर की डाबर फुटवियर इंडस्ट्रीज और त्रिशुलि कलेक्शन से संपर्क भी किया था। जूते तैयार होने के बाद उनके सैंपल को खादी मंत्रालय भेज दिया गया है।

रंगीन ब्लॉक प्रिंट, कांथा सिलाई और मधुबनी प्रिंट ऐसे कई सैंपल उदाहरण के तौर पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) को भेजे गए हैं। जो उत्पादन शरू करने के लिए अंतिम डिजाइनों को मंजूरी देंगे। खादी के 26 जोड़ी जूतों को डिजाइन करने वाली श्रुति कौल ने बताया कि उनके द्वारा देश भर से उदाहरणों को शामिल करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि ये जूते हाथ से भी धोए जा सकेंगे।

गौरतलब है कि खादी ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन विनय सक्सेना ने स्वदेशी खादी को बढ़ावा देने के लिए आगरा के फुटवियर कारोबारी पूरन डावर से कुछ दिनों पहले संपर्क किया था। उन्होंने आगरा में खादी के जूते तैयार करने के लिए कहा था जिससे खादी को बढ़ावा मिले और खादी से जुड़े लोगों को रोजगार भी दिया जा सके।

आगरा फुटवियर मैन्यूफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर के अध्यक्ष पूरन डावर ने इस संबंध में बताया कि वो लोग खादी के जूते बनाने के लिए तैयार हैं। डावर शूज के साथ त्रिशुलि कलेक्शन की श्रुति कौल ने सैंपलिंग कराकर दिल्ली मंत्रालय को भेज दी है। पूरन डावर ने कहा कि खादी ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन ने खादी के जूते तैयार करने में काफी दिलचस्पी दिखाई।

खादी के जूते की लागत चमड़े के जूते से सस्ती और यह टिकाऊ भी रहेगा। कई लोग चमड़े के जूते पहनने से परहेज करते हैं, उनको भी यह जूते रास आएँगे। उन्होंने कहा कि आगरा में जूता उद्योग घरेलू बाजार का 65% हिस्सा है। हम उत्पादन शुरू कर देंगे। खादी के जूते तैयार करने की अनुमति मिलने के बाद यह एक नया प्रयोग होगा।

वहीं श्री क्षेत्रीय गाँधी आश्रम मंत्री शंभू नाथ चौबे ने बताया कि खादी ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन विनय सक्सेना ने खादी के जूते बनाने के लिए शहर के दो कारोबारी से संपर्क किया था। डाबर शूज के सात सैंपल, त्रिशुलि कलेक्शन से 15 सैंपल तैयार कर दिल्ली भेजे गए हैं। मंत्रालय में इसकी सैंपलिंग भी दिखा दी गई है। जल्द ही पूरे भारत के लोग आगरा में तैयार खादी का जूता पहनेंगे।

उल्लेखनीय है कि ताजनगरी में खादी का कारोबार करीब पाँच से छह करोड़ तक पहुँचता है लेकिन खादी के जूते बनने के बाद आगरा के फुटवियर इंडस्ट्रीज को न सिर्फ बड़ा ऑर्डर मिलेगा, बल्कि खादी का कारोबार भी देशभर में बढ़ेगा। बताया जा रहा है कि पहले खादी के लेडीज जूते तैयार होंगे। देश भर के खादी स्टोरों में इसकी सप्लाई आगरा से की जाएगी। लेडीज जूते की बिक्री की संभावना अधिक जताई जा रही है। क्योंकि इस पर रंगीन ब्लॉक प्रिंट, कांथा सिलाई और मधुबनी प्रिंट जैसी कारीगरी की गई होगी।

नवम्बर तक 80 करोड़ लोगों को 3 महीने का मुफ्त राशन, ₹90000 करोड़ होंगे खर्च: PM मोदी का राष्ट्र को सम्बोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (जून 30, 2020) को शाम 4 बजे राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए कुछ अहम ऐलान कियाा। उन्होंने कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ते-लड़ते अब हम अनलॉक-2 में प्रवेश कर रहे हैं। बकौल पीएम, हम उस मौसम में भी प्रवेश कर रहे हैं, जब सर्दी, जुखाम, बुखार जैसी बीमारी होती है। उन्होंने देशवासियों से प्रार्थना की है कि अपना ध्यान रखिए।

पीएम मोदी ने कहा कि अगर कोरोना से होने वाली मृत्यु दर को देखें तो दुनिया के अनेक देशों की तुलना में भारत संभली हुई स्थिति में है। उन्होंने कहा कि समय पर किए गए लॉकडाउन और अन्य फैसलों ने भारत में लाखों लोगों का जीवन बचाया है। साथ ही चेताया कि जब से देश में अन लॉक वन हुआ है तब से लापरवाही कुछ बढ़ती जा रही है। पहले हम मास्क को लेकर, दो गज की दूरी को लेकर, 20 सेकेंड तक दिन में कई बार हाथ धोने को लेकर बहुत सतर्क थे।

पीएम मोदी ने चेताया कि अब सरकारों को, स्थानीय निकाय की संस्थाओं को, देश के नागरिकों को, फिर से उसी तरह की सतर्कता दिखाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान देश की सर्वोच्च प्राथमिकता रही कि ऐसी स्थिति न आए कि किसी गरीब के घर में चूल्हा न जले। केंद्र सरकार हो, राज्य सरकारें हों, सिविल सोसायटी के लोग हों, सभी ने पूरा प्रयास किया कि इतने बड़े देश में हमारा कोई गरीब भाई-बहन भूखा न सोए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को किया सम्बोधित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बीते तीन महीनों में 20 करोड़ गरीब परिवारों के जनधन खातों में सीधे 31 हजार करोड़ रुपए जमा करवाए गए हैं। इस दौरान 9 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रुपए जमा हुए हैं। उन्होंने आगे आँकड़े गिनाए कि कि कोरोना से लड़ते हुए भारत में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को 3 महीने का राशन, यानी परिवार के हर सदस्य को 5 किलो गेहूँ या चावल मुफ्त दिया गया।

उन्होंने लोगों को ध्यान दिलाया कि एक तरह से देखें तो अमेरिका की कुल जनसंख्या से ढाई गुना अधिक लोगों को, ब्रिटेन की जनसंख्या से 12 गुना अधिक लोगों को, और यूरोपियन यूनियन की आबादी से लगभग दोगुने से ज्यादा लोगों को केंद्र सरकार ने मुफ्त अनाज दिया है। पीएम ने कहा कि हमारे यहाँ वर्षा ऋतु के दौरान और उसके बाद मुख्य तौर पर एग्रीकल्चर सेक्टर में ही ज्यादा काम होता है। अन्य दूसरे सेक्टरों में थोड़ी सुस्ती रहती है। जुलाई से धीरे-धीरे त्योहारों का भी माहौल बनने लगता है। उन्होंने कहा:

“त्योहारों का ये समय, जरूरतें भी बढ़ाता है, खर्चे भी बढ़ाता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार अब दीवाली और छठ पूजा तक, यानी नवंबर महीने के आखिर तक कर दिया जाए। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के इस विस्तार में 90 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होंगे। अगर इसमें पिछले तीन महीने का खर्च भी जोड़ दें तो ये करीब-करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए हो जाता है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहा कि आज गरीब को, ज़रूरतमंद को, सरकार अगर मुफ्त अनाज दे पा रही है तो इसका श्रेय दो वर्गों को जाता है। पहला- हमारे देश के मेहनती किसान, हमारे अन्नदाता। और दूसरा- हमारे देश के ईमानदार टैक्सपेयर। उन्होंने कहा कि आपने ईमानदारी से टैक्स भरा है, अपना दायित्व निभाया है, इसलिए आज देश का गरीब, इतने बड़े संकट से मुकाबला कर पा रहा है।

रवीश कुमार ने डीएसपी दविंदर सिंह के बारे में बोला झूठ, चार्जशीट दाखिल नहीं होने की वजह से ‘जेल से बाहर’ घूम रहे

एनडीटीवी पर अपने प्राइम टाइम शो में पत्रकार रवीश कुमार ने निलंबित पुलिस अधिकारी देविंदर सिंह के बारे में झूठ बोला कि मामले में चार्जशीट दायर न होने के कारण उन्हें जेल से रिहा किया गया था।

इसके साथ ही रवीश कुमार ने भारत में पुलिस तंत्र पर आरोप लगाया कि फर्जी मुठभेड़ों को अंजाम देना, निर्दोष लोगों के खिलाफ फर्जी आतंकी आरोप लगाना, उन्हें 10-20 साल के लिए जेल में बंद करना और इसी तरह की गतिविधियों को अंजाम देना भारतीय पुलिस का मजबूत पक्ष है।

रवीश कुमार ने कहा कि भारतीय पुलिस ने अपने खुद के एक अधिकारी देविंदर सिंह को बचाने में दक्षता हासिल की, जिन्हें कड़े गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम की धारा 18 के तहत गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के एक साल बाद भी मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं किया गया।

उन्होंने आगे कहा, “चार्जशीट दायर नहीं होने के कारण देविंदर सिंह को रिहा कर दिया जाता है। उन्हें जमानत दे दी जाती है। आतंकवाद को लेकर जीरो टॉलरेंस के अनगित भाषण आप कहीं पढ़े और सुने होंगे।” रवीश कुमार ने पीएम मोदी के आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर देते हुए यह बातें कही।

हालाँकि, सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने और उनकी आतंकी गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता पर संदेह जताने को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाने में व्यस्त रवीश कुमार ने निलंबित डीएसपी देविंदर सिंह के खिलाफ दर्ज मामले के विवरण को आसानी से नजरअंदाज कर दिया।

अदालत ने देविंदर सिंह और वकील इरफान शफी मीर को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा उनके खिलाफ दायर मामले में जमानत दे दी। अदालत ने गौर किया कि 90 दिनों की अनिवार्य वैधानिक अवधि बीत जाने के बाद भी आरोप-पत्र दाखिल नहीं किया गया था। जिसकी वजह से उन्हें डिफॉल्ट जमानत मिल गई। उन्हें एक लाख रुपए के निजी बांड और इतनी ही राशि के दो मुचलकों पर यह राहत दी गई।

मामले में आईओ ने अदालत के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट पेश की और कहा, “मामले की जाँच अभी तक समाप्त नहीं हुई है, इसलिए चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।” यहाँ पर उल्लेखनीय है कि देवंदर सिंह को दिल्ली पुलिस द्वारा दायर मामले में ही अदालत द्वारा जमानत दी गई थी।

उनके खिलाफ राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज किए गए मामले पर उन्हें जमानत नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल वह जेल में ही हैं। फिलहाल देविंदर सिंह अभी जेल में ही रहेंगे क्योकि वे एनआईए के केस में भी आरोपित हैं। तो रवीश कुमार का दावा कि देविंदर सिंह ‘जेल के बाहर’ घूम रहे हैं, गलत है।

हालाँकि, रवीश कुमार ने भारतीय पुलिस और केंद्र सरकार की छवि को धूमिल करने के उत्साह में, अपने आरोपों को सत्यापित करने की जहमत नहीं उठाई और व्हाट्सएप और सोशल मीडिया से इस खबर को उठाया कि दिल्ली पुलिस मामले में जमानत मिलने के बाद देविंदर सिंह जेल से बाहर घूम रहे हैं।