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पतंजलि की कोरोनिल को मिला सशर्त लाइसेंस: इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में बिकेगी, नहीं होगा कोरोना का उल्लेख

पतंजलि द्वारा निर्मित कोरोनिल को आयुष मंत्रालय ने बतौर इम्युनिटी बूस्टर मंगलवार (जून 30, 2020) को अप्रूव करते हुए उन्हें लाइसेंस दे दिया। हालाँकि मंत्रालय ने पतंजलि को यह स्पष्ट किया कि वह कोरोनिल को कोरोना वायरस का उपचार बताकर नहीं बेच सकते।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि बाबा रामदेव की दिव्य योग फार्मेसी कोरोनिल की पैकेजिंग पर कोरोना का उल्लेख कहीं भी नहीं कर सकती और न ही उससे संबंधित चित्र छाप सकती है।

कुल मिलाकर राज्य औषधि नियंत्रक द्वारा जारी लाइसेंस के आधार पर ही पंतजलि इन दवाओं की बिक्री कर सकेगा। यानी इन्हें इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर ही आगे बेचा जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण का इलाज करने का दावा करने वाली आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल को लॉन्च करने के बाद, आयुष मंत्रालय ने कंपनी से इस दवा की संरचना का विवरण और इसे तैयार करने से पहले किए गए शोध को प्रस्तुत करने के लिए कहा था।

इसके साथ ही आयुष मंत्रालय ने मीडिया की खबरों पर संज्ञान लेते हुए पंतजलि आयुर्वेद लिमिटेड को इस दवा यानी, ‘कोरोनिल’ का विज्ञापन और ऐसे दावे को प्रकाशित करने से रोक दिया था।

आयुष मंत्रालय ने पतंजलि की दवा पर स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा था कि मंत्रालय को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मंत्रालय ने पतंजली कम्पनी से कहा है कि पहले वो अपने कागज मंत्रालय में जमा करवाएँ और तब तक किसी भी तरह का विज्ञापन या दावा करने से बचें, जब तक इस पर जाँच पूरी नहीं होती।

आयुष मंत्रालय ने राज्य सरकार, उत्तराखंड से भी इस दवाई कोरोनिल को लेकर जरूरी जानकारी माँगी थी। मंत्रालय ने राज्य लाइसेंसिंग ऑथोरिटी को लाइसेंस कॉपी और प्रोडक्ट को मंजूर किए जाने से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट माँगे थे। आयुष मंत्रालय ने 21 अप्रैल को जारी गैजेट नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए कहा था कि आयुर्वेदिक दवाओं की रिसर्च को लेकर बाकायदा नियम कानून जारी किए गए थे, उसी के तहत कोरोना वायरस पर रिसर्च की जा सकती है।

प्रदेश के आयुष विभाग को भी इसकी जाँच करने के लिए कहा गया था। जिस पर आयुर्वेद विभाग के लाइसेंसिंग अधिकारी ने दिव्य योग फार्मेसी को नोटिस जारी कर तीन बिंदुओं पर जवाब माँगा। विभागीय अधिकारियों का कहना था कि कोरोनिल टैबलेट को इम्यूनिटी बूस्टर और श्वासरी वटी को सर्दी-खांसी के साथ ही श्वसन संबंधी समस्या के लिए मंजूरी दी गई थी। दिव्य फार्मेसी ने अपने आवेदन में कोरोना का कहीं उल्लेख ही नहीं किया और न कोरोना किट के निर्माण की अनुमति ली।

वहीं, दिव्य फार्मेसी ने इस नोटिस के जवाब में कहा कि उन्होंने कभी भी कोरोना की दवा बनाने का दावा नहीं किया था। उन्होंने कहा कि हाँ हम यह कह सकते हैं कि हमने ऐसी दवाई बनाई है, जिससे कोरोना के मरीज ठीक हुए हैं।

चीनी कंपनियाँ Huawei और ZTE राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, रोक दिया गया फंड्स: अब अमेरिका में लगा चीन को झटका

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के फ़ेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने चाइनीज कम्पनियाँ Huawei और ZTE को ऐसी कम्पनियों की श्रेणी में डाल दिया है, जिससे देश की सुरक्षा को ख़तरा है। FCC के अध्यक्ष अजीत पाई ने कहा कि इस फ़ैसले के बाद Huawei और ZTE, ये दोनों ही टेलीकॉम कम्पनियाँ $8.3 बिलियन के यूनिवर्सल सर्विस फंड का इस्तेमाल नहीं कर पाएँगी। बता दें कि FCC के इस फंड का इस्तेमाल इन कम्पनियों द्वारा सप्लाई किए जाने वाले उपकरणों और ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर किया जाना था।

FCC ने कहा है कि उसने ये फैसला टेलीकॉम कम्पनीज से सिक्योरिटी रिस्क को देखते हुए लिया है। FCC की पब्लिक सेफ्टी और होमलैंड सिक्योरिटी ब्यूरो ने Huawei और ZTE के सम्बन्ध में ये निर्णय लिया। साथ ही दोनों ही कंपनियों से संबंद्ध अन्य कम्पनियाँ, इनकी पैरेंट कम्पनियाँ और इनसे जुड़ी अन्य कंपनियों पर भी ये नियम लागू होगा। संस्था ने कहा है कि पुष्ट सबुत होने के कारण ही ये फैसला लिया गया है।

अमेरिका द्वारा चीन को इसे तगड़ा झटका माना जा रहा है। अमेरिका के FCC चेयरमैन और भारतीय मूल के अजित पाई ने मंगलवार (जून 30, 2020) को ट्विटर पर अपने एक बयान में कहा कि हम चीनी कंपनी के साथ अपने नेटवर्क साझा नहीं कर सकते हैं, जिससे हमारे कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुँच पाए। हालाँकि, अभी तक इस फैसले पर दोनों कंपनियों में से किसी का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

पाई ने कहा कि दोनों ही कंपनियों के चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और चीनी सेना से गहरे सम्बन्ध हैं। उन्होंने कहा कि जाँच में पाया गया है कि दोनों कम्पनियाँ चीन के नियम-क़ानून का पालन करने के लिए बाध्य हैं, जिसके कारण उन्हें वहाँ की ख़ुफ़िया एजेंसियों की बातें माननी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका कभी भी चीन को हमारे टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर की कमजोरियों का फायदा उठाने की अनुमति नहीं देगा।

उधर कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने चीनी कंपनी Huawei को भारत में 5G ट्रायल की रेस में शामिल किए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। मनीष तिवारी ने ट्वीट करके केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से सवाल पूछा कि आखिर क्यों Huawei को 5G ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति प्रदान की जा रही है। उन्होंने चीनी कंपनी पर अमेरिका की तर्ज पर चलते हुए बैन लगाने की माँग की है।

मनीष तिवारी ने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा कि अमेरिका ने Huawei और ZTE को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। ऐसे में रविशंकर प्रसाद Huawei को 5G ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति कैसे दे सकते हैं? उन्होंने सलाह दी कि Huawei और ZTE पर तुरंत प्रतिबन्ध लगाया जाए।

बता दें कि टिकटॉक को लेकर भी ऐसे ही सवाल उठाए गए थे। सोशल मीडिया पर गिरोह को सदस्यों ने ‘टिकटॉक ने जो 30 करोड़ दिए, वो लौटा दो’ से ले कर ‘मोदी ने भी तो चीनी कम्पनियों से पैसे लिए’ की बातें कर रहे हैं। ये दोनों ही बातें कई स्तर पर असमान और अतार्किक हैं। प्रपंचियों ने सोशल मीडिया पर इसे लेकर जम कर कुतर्क फैलाया था। कहा गया था कि मोदी सरकार रुपए लेकर भी कम्पनी को बैन कर रही है।

जितने बजे हुई सुशांत की मौत, उसके पहले ही विकिपीडिया पर डाल दी गई थी आत्महत्या की खबर? – Fact Check

सोशल मीडिया पर सुशांत सिंह राजपूत के विकिपीडिया पेज को उनकी मौत से पहले ही एडिट किए जाने की बात चल रही है। उनकी मौत के दो हफ्ते बाद लोगों ने स्क्रीनशॉट्स शेयर कर के दावा किया है कि उनके विकिपीडिया पेज को पहले ही एडिट कर लिया गया था कि उन्होंने आज आत्महत्या कर ली है, जबकि उस समय ये ख़बर आई भी नहीं थी। लोग पूछ रहे हैं कि आख़िर वो ‘भविष्यवेत्ता’ था कौन?

प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर कहा है कि इस मामले में बड़ी गड़बड़ सामने आ रही है क्योंकि जून 14, 2020 को 9 बजकर 08 मिनट पर ही विकिपीडिया एडिट कर दिया गया था कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत हो गई है। इस मामले में अब सीबीआई जाँच की माँग भी तेज़ हो गई है। ‘न्यूज़ 18’ की ख़बर के अनुसार, मुंबई पुलिस ने अपने साइबर सेल को इस मामले की जाँच सौंप दी है। बता दें कि उसी दिन सुबह 10 बजे के बाद उनकी आत्महत्या करने की बात पता चली थी।

ट्विटर पर लोगों का कहना है कि सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की ख़बर दोपहर 1 बजे के बाद ही मीडिया में आई थी, ऐसे में किसी के द्वारा उनका विकिपीडिया पेज उपडेट कर दिया जाना किसी बड़ी साज़िश की ओर इशारा कर रहा है। मुंबई पुलिस इसकी पड़ताल में लगी हुई है। लोगों ने सुशांत सिंह राजपूत का विकिपीडिया पेज एडिट करने वालों का आईपी एड्रेस भी शेयर किया। हालाँकि, एडिट करने वाले यूजर की पहचान स्पष्ट नहीं है।

जो स्क्रीनशॉट्स शेयर किए जा रहे हैं, उनमें किसी यूजर द्वारा पेज को एडिट किए जाने वाली बात दिख रही है। मुंबई पुलिस ने पंचनामा और पोस्टमॉर्टम के हवाले से बताया है सुशांत सिंह राजपूत जून 14 को लगभग 9 बजकर 30 मिनट पर बाहर आए थे। इसके बाद उन्होंने जूस पिया और क़रीब 10 बजे के आसपास अपने कमरे में चले गए। जबकि आत्महत्या वाला एडिट इससे पहले का ही बताया जा रहा है।

बता दें कि विकिपीडिया पन्नों को बदलना बहुत कठिन नहीं है। किसी भी पन्ने को बदलने के लिये ‘Edit This Page’ विकल्प को क्लिक किया जाता है। यह यूजर को एक नये पन्ने पर ले जाता है, जहाँ वो एक टेक्स्ट बॉक्स में उस विकी पेज के लेख को बदल सकता है। उसमें टाइप कर के बदलाव किया जाता है। एडिट बॉक्स के नीचे सारांश (Summary) में अपने बदलाव का छोटे में सार लिखने की व्यवस्था है और ‘Save The Change’ (सेव) बटन को दबाते ही वो एडिट हो जाता है।

यूजर बदलाव सुरक्षित करने के पहले अपने परिवर्तनों की झलक देखने के लिये ‘See Preview’ बटन का उपयोग भी कर सकते हैं। बता दें कि इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार ने भी सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले की सीबीआई जाँच कराने की माँग की थी। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष रहे मनोज तिवारी ने उनके परिजनों से मुलाकात के बाद इसी प्रकार की माँग की थी। बिहार के सभी दलों के नेताओं द्वारा ऐसे बयान देने का मतलब है कि उन्होंने जनता की नब्ज को पहचाना है और जनता सुशांत की मौत से सच में व्यथित है।

केंद्र सरकार की मुफ़्त राशन योजना का श्रेय लेते पकड़े गए केजरीवाल, BJP नेता मीनाक्षी लेखी ने किया खुलासा

भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने एक ई-कूपन का स्क्रीनशॉट शेयर किया है, जिसे दिल्ली सरकार ने ‘मुख्यमंत्री कोरोना राहत मुफ़्त राशन योजना’ के तहत मुफ़्त राशन के लिए जारी करने का दावा किया है। आम आदमी पार्टी (AAP) को विज्ञापन पर आवश्यकता से अधिक खर्च करने के लिए कई बार आलोचना का सामना करना पड़ा है। केंद्र सरकार की योजनाओं का श्रेय लेने की उनकी तकनीक ने लोगों को कई बार हैरान भी किया है।

भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी का कहना है कि कूपन पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की एक तस्वीर है जिसमें दिखाया गया है कि यह दिल्ली राज्य सरकार की योजना है। हालाँकि, इस बात का कोई उल्लेख नहीं है कि दिल्ली सरकार को केंद्र से पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत राशन मिला है।

पिछले मई में, भाजपा नेता मनोज तिवारी ने आरोप लगाया था कि केंद्र द्वारा दिल्ली को आवंटित 36,367 टन खाद्यान्न में से दिल्ली सरकार ने केवल 1% खाद्यान्न वितरित किया था।

इस सम्बन्ध में मीनाक्षी लेखी ने एक वीडियो भी साझा किया था, जिसमें सर्वोदय कन्या विद्यालय राशन वितरण केंद्र में एक व्यक्ति को राशन से वंचित रखा गया। उन्होंने पोस्ट में आरोप लगाया था कि केंद्र से दिल्ली को लगभग 37,000 टन अनाज मिलने के बावजूद केजरीवाल सरकार जरूरतमंदों को सामान उपलब्ध कराने में विफल रही है।

गौरतलब है कि मई के महीने, दिल्ली उच्च न्यायालय ने जरूरतमंदों के लिए खाद्य सुरक्षा के वादे को पूरा करने में असमर्थता के लिए दिल्ली सरकार को फटकार भी लगाई।

यह पहली बार नहीं है जब आम आदमी पार्टी ने मीडिया मैनेजमेंट के लिए संवेदनशील मुद्दों का इस्तेमाल किया हो। कोरोना वायरस की महामारी के शुरुआती दिनों के दौरान ही AAP के विधायकों, जिसमें मनीष सिसोदिया और राघव चड्ढा भी शामिल हैं, ने स्वयं कीटाणु मुक्त अभियान का नेतृत्व करते हुए तस्वीरें पोस्ट कीं थीं।

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में राधा स्वामी केंद्र में हाल ही में स्थापित कोरोना वायरस सुविधा का श्रेय लेने की कोशिश की, जिसके लिए कि वास्तव में केंद्र सरकार ने काम किया था।

चीन से तनाव के बीच भारी मात्रा में Spice-2000 बम खरीदने की तैयारी में भारत, बालाकोट एयरस्ट्राइक में मचाई थी इसी से तबाही

पाकिस्तान के बाद अब चीन और नेपाल के मोर्चे पर तनाव का सामना कर रहे भारत में Spice-2000 बम खरीदने पर विचार हो रहा है। खबर है कि रक्षा मंत्रालय Spice-2000 बम के जरिए वायु सेना को और मजबूत करने की रणनीति बना रहा है।

बता दें कि इन्हीं Spice-2000 बम की मदद से भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट में सफल सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। समाचार एजेंसी ANI ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि भारतीय वायु सेना के पास पहले से Spice-2000 बम हैं, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ाने पर विचार हो रहा है।

Spice-2000 बम से 70 किमी दूर तक टारगेट को नष्ट कर सकता है। साथ ही बंकर को भी ध्वस्त करने की क्षमता रखता है। इसका नया वर्जन बंकर्स और बेहद मजबूत शेल्टर्स की भी धज्जियाँ उड़ा सकता है। बालाकोट एयरस्ट्राइक में जिस वर्जन का इस्तेमाल किया गया था वह मजबूत शेल्टर्स और बील्डिंग में घुसकर तबाही मचाने में सक्षम है। 

चीन के साथ सीमा पर तनाव बढ़ने के मद्देनजर नरेंद्र मोदी सरकार ने हथियार और गोला बारूद खरीदने के लिये सेना के तीनों अंगों को 500 करोड़ रुपए तक का कोई भी हथियार खरीदने की छूट दी है। तीनों सेनाओं के वाइस चीफ को आवश्यक हथियारों की फास्ट ट्रैक प्रोसिजर के तहत हथियार उपकरण खरीद के लिए 500 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

सेनाओं को यह छूट पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक क्षड़प के बाद दी गई है, जिसमें 20 भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। इसी तरह की वित्तीय खरीद की छूट सुरक्षाबलों को उरी हमले और पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट हवाई हमले के बाद दी गई थी।

भारतीय सेना ने इजरायली एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल के साथ ही अमेरिका से हथियारों की खरीद की। भारतीय सेना को इस तरह के फंड देने का मुख्य मकसद किसी भी चुनौती के मुकाबले के लिए शॉर्ट नोटिस पर खुद को तैयार करना है।

गौरतलब है कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच इन दिनों तनाव चरम पर है। चीनी आक्रामकता का जवाब देते हुए सेना ने सीमा पर मिसाइलों और टैंकों की तैनाती कर दी है। बड़ी संख्या में सैनिकों को एलएसी पर तैनात किया गया है।

उल्लेखनीय है कि भारत ने 14 फरवरी को पुलवमा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले के 13 दिन बाद 27 फरवरी 2019 को पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर एयरस्ट्राइक की थी। इस दौरान Spice-2000 बम का इस्तेमाल किया गया था। Spice-2000 बमों ने जैश कैंप की इमारतों की छतों पर छेद कर दिया था। खास बात यह है कि इमारत के अंदर जाने के बाद हुए इन बमों के धमाकों से मौजूद शख्स के बचने की संभावना नहीं होती है।

व्यंग्य: टिकटॉक बैन पर रवीश कुमार क्या बोले? | Satire: Ravish Kumar reacts on TikTok ban

टिकटॉक बैन पर रवीश कुमार क्या बोले? आखिर अल्पसंख्यकों को जीने क्यों नहीं दे रही ये सरकार? फासीवादी सरकार ने टिकटॉक बैन कर के बहुत बुरा किया है!

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

फर्जी लाइसेंसधारी पायलट्स की खबर के चलते अब EU ने भी लगाया पाकिस्तानी फ्लाइट्स पर 6 माह का बैन

यूरोपियन यूनियन एयर सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) की उड़ानों पर छह महीने के लिए रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद जुलाई 01, 2020 से अगले छह महीने तक, यानी दिसंबर 2020 तक PIA की उड़ानें यूरोप नहीं जा सकेंगी।

यह मामला पाकिस्तान में फर्जी लाइसेंस वाले पायलट्स के खुलासे के बाद प्रकाश में आया है। PIA के कुछ पायलटों के लाइसेंस फर्जी होने की खबरों के आधार पर यूरोपियन यूनियन एयर सेफ्टी एजेंसी ने ये फैसला लिया है।

कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान के उड्डयन मंत्री गुलाम सरवर खान ने अपने देश की संसद में कराची विमान हादसे की जाँच रिपोर्ट पेश करते हुए 262 पायलटों के लायसेंस फर्जी होने की बात कही थी। ईएएसए ने पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा 860 से अधिक पायलटों को 260 से अधिक जारी किए गए ‘फर्जी’ लाइसेंसों के बारे में उड्डयन मंत्री गुलाम सरवर खान के संसद में किए गए खुलासे प्रकटीकरण का संदर्भ दिया।

पाकिस्तान स्थित कराची में हादसे का शिकार हुए प्लेन की जाँच में पाया गया कि उस विमान को चला रहे पॉयलट्स का ठीक तरह से ट्रेंड ना होना भी इस विमान हादसे की एक वजह थी।

इसके साथ ही पाकिस्तान में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और कुल केस की संख्या दो लाख को पार कर चुकी है, ऐसे में हर देश अब काफी सतर्कता बरत रहा है। यूरोपियन यूनियन से पहले पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए इमरान सरकार के लचर रवैए को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी (GCAA) और वियतनाम की एविएशन ऑथोरिटी ने भी पाकिस्तान से आने वाली सभी उड़ानों को निलंबित करने की घोषणा की है।

हाल ही में एक रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ था कि यूनाइटेड किंगडम पहुँचने वाले कोरोना वायरस के कुल मामलों के 50% से अधिक के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 मार्च से अब तक पाकिस्तान में यूनाइटेड किंगडम से लगभग 190 उड़ानें उतरी हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड से पता चला है कि कुल 30 लोग जो विदेश से ब्रिटेन आए थे, उनका कोरोना वायरस का इलाज हुआ था।

इनमें बताया गया कि पाकिस्तान से कई यात्रियों को ब्रिटेन पहुँचने पर आईसीयू में भर्ती होना पड़ा। इससे पहले, संयुक्त अरब अमीरात ने 30 यात्रियों को हॉन्गकॉन्ग जाने वाली एक फ्लाइट में कोरोना वायरस का पता चलने के बाद पाकिस्तान से अपनी उड़ानें रद्द कर दी थीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 2 पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) उड़ानें हर दिन ब्रिटेन पहुँचती हैं। भले ही शुरुआती उड़ानें ब्रिटिश और पाकिस्तानी नागरिकों को निकालने के लिए थीं, बाद में, दैनिक यात्रा के लिए उड़ान संचालन फिर से शुरू कर दिया गया था।

व्यंग्य: अल्पसंख्यकों को खुश नहीं देखना चाहती सरकार: बकैत कुमार दुखी हैं टिकटॉकियों के जाने से

टिकटॉक को आखिरकार सरकार ने बैन करवा दिया। एक फासीवादी सरकार ये कर सकती है, क्योंकि वो वाकई ऐसा कर सकती है। आप ही ने तो चुन कर भेजा था न? मैंने तो कहा था कि सब ढोंग है, मेरी नहीं माने। मेरे चैनल को टॉप टेन से भी बाहर कर दिया। खैर, मुझे आपसे बैर नहीं है क्योंकि मैं जानता हूँ कि आपमें मजहबी टार भरा गया है। मैं जानता हूँ कि सरकार ने आपके भीतर धीरे-धीरे जहर घोला है।

ये तो होना ही था क्योंकि एक आम शांतिप्रिय समुदाय को दो खास लोग फूटी आँखों नही सुहाते। वरना क्या मजाल था कि हमारे कॉन्ग्रेस की जमाने में किसी भी शांतिप्रिय समुदाय के बलात्कारी का नाम पूरी खबर में आ जाता! क्या हिम्मत थी किसी की कि वो अपने रिपोर्ट की हेडलाइन में असलम या आरिफ लिख देता… डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकार में तो… खैर रहने दीजिए, मैं लाइव टीवी पर रोना तो चाहता हूँ पर रो नहीं सकता क्योंकि कुमार सानू जी ने भी कहा है कि सोचेंगे तुम्हें प्यार करें कि नहीं!

प्यार करने में क्या सोचना! खैर, विषयांतर हो रहा है। मुझे नाजियों का दौर याद आता है। मैंने यूट्यूब पर एक डॉक्यूमेंट्री देखी थी जिसमें उन्होंने कन्सन्ट्रेशन कैम्प दिखाए थे। वहाँ एक लाउडस्पीकर होता था, उसी से सायरन बजता था, सब कुछ नियंत्रण में। आज कल वही हो रहा है।

खबर आपने सुनी ही होगी, उसके बाद के रिएक्शन्स भी आपने देखे ही होंगे। जो मुझे देखते हैं, वो तो निहायत ही दुखी और क्षुब्ध होंगे कि कैसे अलग-अलग तरीकों से एक समुदाय विशेष को मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

कई लोगों ने कई तरह के सवाल किए हैं। हमने एक टिकटॉकर से बात की तो उन्होंने बताया कि कैसे देश का पूरा टैलेंट विदेश चला जाएगा। वो यूथ की बात कर रही हैं, उदास हैं लेकिन यंग हैं तो ‘डू नॉट केयर’ वाला एटीट्यूड है। हें हें हें… थोड़ा बहुत अंग्रेजी आती है भाई! खैर, आप वीडियो देखिए।

इस टिकटॉकर की चिंता जायज है। देश में 12 करोड़ लोग हर महीने सक्रिय रूप से टिकटॉक चला रहे थे। यह संख्या भाजपा को वोट देने वालों की संख्या की लगभग आधी है। आने वाले दिनों में यह शायद उसे क्रॉस भी कर जाती। क्या सरकार को इसी का डर था कि टिकटॉक पर का युवा चुनावों में खड़ा हो जाएगा और प्यार का संदेश बाँटेगा जिससे तानाशाही और फासीवादी सरकारों का सच सामने आ जाएगा!

इसी पर हमारी टीम ने रिसर्च किया तो पाया कि इंग्लैंड के नामी अखबार ‘द गार्डियन’ में एक लेख छपा है जिसमें बताया गया है कि लाखों युवा पैदल ही विदेशों की ओर निकल गए हैं। इसीलिए मैं बार-बार कहता हूँ कि अंग्रेजी अखबार पढ़ा कीजिए। ‘द स्किन डॉक्टर’ नामक ट्विटर हैंडल ने यह कटिंग शेयर की है जिसमें साफ लिखा हुआ है कि क्या हो रहा है।

मैं आपकी सुविधा के लिए हिन्दी में अनुवाद कर रहा हूँ: “भारत सरकार द्वारा टिकटॉक को प्रतिबंधित करने का निर्णय दक्षिण एशियाई देश के लिए भारी पड़ गया क्योंकि लाखों नवयुवक और नवयुवतियाँ रातों-रात यूरोप के लिए पलायन कर चुके हैं। यूरोपीय देशों में इस बात को ले कर गहमागहमी बढ़ गई है कि इन टैलेंटेड टिकटॉकियों पर सबसे पहले किसका अधिकार है।

बरतानी एयरफोर्स ने जर्मनी पर आक्रमण तब कर दिया जब एंगेला मर्कल ने कहा कि सारे टैलेंटेड भारतीय टिकटॉकर्स सिर्फ जर्मनी में ही रहेंगे। भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ऐसे समय में रोते पाए गए। उनका कहना है कि वो टैलेंटेड यूथ को भारत वापस लाना चाहते हैं, पर अब देर हो चुकी है।”

यह पहली बार नहीं है कि सरकारी की नीतियों के कारण राष्ट्र का नुकसान हुआ हो। लेकिन यह सरकार इस अघोषित आपातकाल और कोरोना के लॉकडाउन का फायदा उठाते हुए, लगातार एक के बाद एक ऐसे फैसले कर रही है जो अल्पसंख्यकों पर हमले की तरह देखा जा रहा है।

आपने गौर किया है कि किस तरह के लोग टिकटॉक पर हुआ करते थे? आपने देखा होगा कि कैसे एक चुटकी बजा कर किसी आमिर के प्यार में संगीता हिजाब पहन लिया करती थी। पंद्रह मिनट में प्यार हो जाया करता था, और जब दिल मिल जाते थे, तो चुटकी बजाते ही संगीता सलमा बन जाती थी। क्या यही इन संघियों को पसंद नहीं आया? प्यार करने वाले धर्म बदल रहे हैं तो एप्प ही बंद करा दिया!

वो लाल-पीले, जले बालों वाले लड़कों को याद कीजिए कि कैसे लड़कियों के रेप करने का, उनके द्वारा स्वयं को ब्लोजॉब देने के वीडियो बनाया करते थे। बताइए, कोई जॉब तो दे रहा है, भले ही किसी भी तरह का हो। मैंने तो नौकरी सीरीज पर इतना काम किया है लेकिन सरकार मेरी नहीं सुनती, पर कोई किसी भी तरह का जॉब दे रहा है तो उस पर बवाल क्यों?

ये सब तो सही नहीं है। किस तरह के समाज में जी रहे हैं हम? हम किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं? क्या अब कुछ छोटे बच्चे ‘जब चली हैदर की तलवार’ और ‘मैदाँ भरा था काफिर की लाशों’ से पर नाच कर अपने मजहब पर गौरव नहीं कर सकते?

आप सोचिए कि उनमें से कई लोग पहले कोई काम करते होंगे। फर्ज कीजिए कि कोई जुबैर होगा जो काला चश्मा लगा कर अजय देवगन बनना चाहता होगा। वो दो सायकिलों के कैरियर पर लात रख कर एंट्री लेता होगा… पंद्रह सेकेंड की खुशी तो आपको मिलती होगी! अब वो क्या करेगा? किसी ने कहा कि पंचर की दुकान लगा लेगा।

अब ये बात भी सही नहीं है कि हर किसी को पंचर की ही दुकान दे दी जाए। उसके लिए सायकिलें भी तो होनी चाहिए! साथ ही, यह भी एक भेदभावपूर्ण बात है कि जुबैर के बारे में हमेशा पंचर का ही विकल्प दिया जाता है चाहे वो कम्प्यूटर चलाने में इतना दक्ष हो कि नवजात शिशुओं की जानकारी, किशोर लड़कों की जानकारी इस्लामी कट्टरपंथियों को दे देता हो। अब आप ही बताइए कि जुबैर आईपी अड्रेस निकालेगा या पंचर साटेगा? क्या ये सही है किसी भी तरह से?

मैं यह मानता हूँ कि हो न हो, सरकारों ने देखा होगा कि किन इन्फ्लूएन्सर्स की हैशटैग स्कर्ट वाली पोस्ट पर ज्यादा लाइक्स आते हैं… किनके फॉलोवर मिलियन्स में हैं… और तब एक खास वर्ग को, जो वंचित है, शोषित है, टैलेंटेड है, उसकी लोकप्रियता जब असह्य हो गई तो अपनी फासीवादी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उसे ब्लॉक कर दिया।

मैंने एक ऐसे ही युवा के छोटे भाई से बात की जो कश्मीर में आजादी के आंदोलन में आज सुबह शामिल हुआ था और दोपहर को भारतीय सेना ने उसे मार गिराया। आजकल सेना भी बहुत फास्ट हो गई है। खैर… उसके भाई ने जो बताया वो विचारणीय है, “मेरा भाई टिकटॉक का स्टार बनना चाहता था। उसे लगता था कि वो इसी तरीके से अनुराग कश्यप जी द्वारा नोटिस कर लिया जाएगा।”

आगे की बात कहते हुए वह रो पड़ा, तो मैंने उसे अपनी निजी जेब से निजी रुमाल निकाल कर ढाढस बँधाया, “भैया चाहते थे कि पॉकिट में लम्बी गन ले कर गीत गाएँ कि ‘अरे आओ न, ये जाँ गई, जहाँ गया, सो जाओ’, ताकि अनुराग या विशाल कोई ध्यान दे दें। कल शाम खबर आई कि टिकटॉक बैन हो रहा है। रात में ही वो एरिया कमांडर से मिले और कहे कि अब सच में ही बेरोजगार हो गए। उनको सलीम भाई ने रात में ट्रिगर दबाने की ट्रेनिंग दी और सुबह के लिए तैयार किया। लेकिन…”

आगे की बात कहने की जरूरत है नहीं। आप सोचिए कि एक अल्पसंख्यक न सिर्फ राह भटका, बल्कि रात भर में आजादी की मुहिम में शामिल हुआ और सुबह में मार दिया गया। क्या हम उसे बचा सकते थे? क्या टिकटॉक होता तो उसके हाथ में बंदूक की जगह किसी नगमा के लिए ब्यूटी मोड में ‘कॉल करें क्या, अरे कॉले न की हो’ वाला गाना हो सकता था…

शायद हाँ… या शायद कोई और गाना होता… मैं उसके पीले बालों को मिस करता हूँ। कभी देखा नहीं था, कभी मिला नहीं, लेकिन वो मुझे कोई अपना सा लगता है। मैं तो उससे ‘कौन जात हो’ भी पूछ नहीं पाया… खैर उनमें तो जात होता भी नहीं, बस अशरफ, ऐलाफ, अरजल होते हैं जिसका किसी को पता नहीं। मुझे लगता है एक समाज के तौर पर हम हार गए हैं।

हँसी तो तब आती है जब पता चलता है कि टिकटॉक के तीस करोड़ ले लिए सरकार ने उसी PM CARES में जिस पर सोनिया जी के कहने के बाद भी उन्हें भाव नहीं दिया गया। आप सोचिए कि आज के दौर में तो कोई दो रुपया भी दे दे, तो धन्यवाद कहना चाहिए, वैसे में तीस करोड़ देने वाले को बैन कर दिया। क्या पता वो परसों साठ करोड़ दे देता!

जिस चीन से इतनी नफरत भारत के युवाओं में भरी जा रही है, क्या हम उस चीन से कभी जीत पाएँगे? मैंने कई सुरक्षा मामलों के जानकारों से बात की, उन्होंने मुझे निजी तौर पर कहा कि नहीं। मुझे तो उन्होंने यहाँ तक कहा कि मैं झोला-बिस्तर ले कर रोहिंग्या की बस्ती में चला जाऊँ जहाँ बम गिरने की आशंका बहुत कम है। लेकिन चीनियों का उईगर समुदाय को ले कर जो व्यवहार है, उस कारण मैं आश्वस्त नही हो पाया।

नेहरू जी ने 62 के युद्ध में भी भारतीय एयरफोर्स को, पूरी तरह से तैयार खड़ी होने के बाद भी चीन पर हमले की इजाजत नहीं दी थी। हाल में एक वीडियो में तब के एयरफोर्स अफसर ने ऐसा खुद ही कहा। आप ही सोचिए कि नेहरू जी ने कुछ कहा होगा तो ठीक ही कहा होगा न! वो तो पढ़े-लिखे व्यक्ति थे, विदेशी लोगों के साथ उठना, बैठना, लाइटर जलाना आदि हुआ करता था उनका। उनकी सोच तो खास रही होगी। जैसे कि 2008 में ऑक्सफोर्ड के डॉक्टर मनमोहन सिंह की कि उन्होंने भी मुंबई हमलों के बावजूद पाकिस्तान पर हमले की इजाजत नहीं दी।

मैं इसीलिए मानता हूँ कि चीन को पूरी तरह से भारत को छूट दे देनी चाहिए। गुलजार साब ने भी कहा है कि ‘आँखों को वीजा नहीं लगता’। वो तो हर साल रोजा भी रखते हैं। क्यों न हम चीन बन जाएँ… क्या दिक़्क़त है? बॉर्डर हैं ही क्यों? क्या होता है बर्फीली सीमा पर सैनिकों को खड़ा रखने से? लड़ाई-झगड़े में क्या रखा है?

जब चीन ने ताइवान, हॉन्ग-कॉन्ग, मंचूरिया, पूर्वी तुर्किस्तान, तिब्बत, दक्षिणी मंगोलिया को चीन बना लिया है तो भारत को इसमें क्या समस्या हो सकती है? इतने लोगों को कोई समस्या है? जिनको समस्या है वो चले जाएँ पाकिस्तान… सोचिए कि कोई झगड़ा ही नहीं होगा, नई भाषा सीखेंगे, टिकटॉक भी चलेगा, धर्म-मजहब सब हटा दिया जाएगा…

लेकिन नहीं फासीवादियों को वामपंथी पसंद नहीं आते। चीन भले ही कितनी भी कमाल की बातें करें, जैसे कि कल ही पता चला कि वो जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिलाओं के गर्भाशय में यंत्र लगा रहे हैं, हजारों के गर्भपात करवा रहे हैं, पीरियड्स को दवाई से बंद करना चाह रहे हैं, लेकिन भारत के राष्ट्रवादियों को समस्या हो जाएगी।

आज टिकटॉक बैन किया है, कल को वो आपका फोन छीन लेंगे। यही तो बाकी है अब। आप सोचिए कि आप सड़क पर जा रहे हों, चार पुलिस वाला आएगा और हाथ से फोन छीन लेगा। आप कुछ नहीं कर पाएँगे। वो आपके पीछे-पीछे घर तक जाएगा, चार्जर भी खोल लेगा प्लग से। फिर ईयरफोन माँगेगा जो आपने ठेले वाले से पैंतीस रुपए में खरीदे थे, जिसे गरीब लोग ‘लीड’ भी कहते हैं।

क्या आप वैसे समाज में जीना पसंद करेंगे? कोरोना नहीं हो रहा होता तो मैं शाहीन बाग की बहादुर दादियों से इस पर चर्चा कर लेता। मैं दस बारह और बाग-बगीचे खुलवा देता… मैं अपने घर के दरवाजे खोल देता कि आओ, और बनाओ मेरे साथ टिकटॉक… गाओ मेरे साथ ‘चालू कर जनरेटर, तोहर देखल जा थिएटर…’

आज दुखी हूँ, वो भी बहुत ज्यादा! नमस्कार!

59 चाइनीज ऐप पर प्रतिबंध के बाद चीन ने दी WTO की शर्तों की दुहाई, कहा- इससे रोजगार प्रभावित होगा

भारत सरकार ने भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए टिकटॉक समेत 59 चाइनीज ऐप पर भारत में प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले के बाद चीन के दूतावास ने एक आदेश जारी किया है।

चीनी विदेश मंत्रालय के बाद भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने भी चाइनीज ऐप पर प्रतिबंध को लेकर प्रतिक्रिया दी है। इसको लेकर कहा है कि चीन इस पर पूरी तरह से नजर रख रहा है और इस कार्रवाई का कड़ा विरोध जता रहा है।

रोंग ने कहा कि भारत ने इन ऐप को बैन करने का जो तरीका अपनाया है वो भेदभावपूर्ण है। डब्ल्यूटीओ का हवाला देते हुए चीनी दूतावास ने बयान दिया है कि कुछ चीनी ऐप प्रतिबंधित करने के लिए जिस तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया गया है, वो ठीक नहीं है और ये विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का उल्लंघन भी है।

इससे पहले चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने भारत में चीनी एप पर रोक के बारे में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि चीन भारत द्वारा जारी नोटिस से अत्यधिक चिंतित है और स्थिति की जाँच कर रहा है।

59 चाइनीज ऐप पर प्रतिबंध के बाद चीनी दूतावास का बयान

चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने यह भी कहा कि भारत की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ई-कॉमर्स के जो सामान्य नियम हैं, उनके भी खिलाफ है। साथ ही उपभोक्ता हितों और भारत में बाजार की प्रतिस्पर्धा के लिए भी ये अनुकूल नहीं है।

उन्होंने इस बयान में कहा है कि भारत सरकार का फैसला ना सिर्फ दोनों के रिश्तों के लिए बुरा है बल्कि भारत में जो बड़ी तादाद में लोग इन ऐप्स की वजह से किसी ना किसी तरह रोजगार पा रहे हैं, उनको भी परेशानी में डालेगा।

चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने भारत सरकार के इन ऐप्स को बैन करने के पीछे दिए गए तर्क तो गलत बताते हुए कहा है कि ये ऐप उन नियमों और निर्देशों का पालन करते हुए चल रही हैं जो सरकार की ओर से मिले हैं।

उल्लेखनीय है कि गूगल प्ले स्टोर के बाद अब चायनीज मोबाइल ऐप टिकटोक पूरी तरह से बंद हो गई है। यानी, अब भारत में ना ही टिकटोक को यूजर्स अब डाउनलोड कर सकते हैं और ना ही इसे इस्तेमाल कर पाएँगे। भारत सरकार द्वारा 59 चायनीज ऐप प्रतिबंधित करने के बाद भी यह ऐप मोबाईल में काम कर रही थी लेकिन अब इस पर वीडियो स्ट्रीमिंग बंद हो चुकी है।

भारत सरकार ने टिकटोक समेत ही 59 चायनीज मोबाइल ऐप को प्रतिबंधित कर दिया है। सरकार ने कहा है कि ये ऐप लोगों की गोपनीयता के कारण सुरक्षित नहीं हैं।

कुछ दिन पहले ही भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सरकार को 52 ऐप्स को लेकर अलर्ट जारी किया था और देश के नागरिकों को भी एप्स को इस्तेमाल करने से मना किया था। खुफिया एजेंसियों के इस अलर्ट के बाद सरकार ने इन 52 ऐप्स समेत 59 ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने इन चाइनीज ऐप्स को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

भारत के आईटी मंत्रालय ने सोमवार (29 जून) को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि उसे विभिन्न स्रोतों से कई शिकायतें मिली हैं, जिनमें एंड्रॉयड और IOS प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कुछ मोबाइल ऐप के दुरुपयोग के बारे में कई रिपोर्ट शामिल हैं। इन रिपोर्ट में कहा गया है कि ये ऐप अपने यूजर्स की जानकारी चुराकर, उन्हें गुपचुप तरीके से भारत के बाहर स्थित सर्वर को भेजते हैं।

कंगना ने चाइनीज ऐप के बैन का किया समर्थन कहा- हम भारत में चीन की जड़ों को काट दें

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने भारत सरकार के चाइनीज ऐप्स को बैन करने के फैसले का समर्थन किया है। कंगना का कहना है कि भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव के दौरान लिया गया यह फैसला एक मजबूत संदेश देगा। 

कंगना ने इस मुद्दे पर एक बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा है, “सरकार ने चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया है और मुझे लगता है कि ज्यादातर लोग जश्न मना रहे हैं क्योंकि चीन कैसा है हम सभी जानते हैं। यह एक साम्यवादी देश है और हमारी अर्थव्यवस्था और हमारी सिस्टम में गहरे तक उतर गए हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “डेटा भयानक है। हमारा व्यवसाय किस हद तक चीन पर निर्भर हो गया है और इस साल कोरोना फैलाने के साथ दुनिया को हाल के समय की सबसे बड़ी मुश्किल में डाला है। अब वे हमारी सीमाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और वे केवल लद्दाख नहीं चाहते, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम भी चाहते हैं। वे आपका असम भी चाहते हैं और यह कभी खत्म नहीं होने वाला।”

अभिनेत्री ने चीन को निशाने पर लेते हुए कहा, “उन्होंने इस महामारी और जैव युद्ध के साथ दुनिया को अपना असली चेहरा भी दिखा दिया है। उनकी अर्थव्यवस्था उन्हें ताकत दे रही है। इसलिए बेहतर है कि हम भारत में उनकी जड़ों को काट दें और जब इतना राजस्व और पैसा नहीं होगा, तो उनकी ताकत कम होगी।”

इसके साथ ही कंगना ने लोगों से लोकल को सपोर्ट करने की वकालत की है। उन्होंने कहा, “प्राचीन काल में जब भारत दुनिया का नेतृत्व करता था तो दुनिया एक समृद्ध और समावेशी जगह थी। मेरा मानना ​​है कि हमें उस समय में वापस जाने की आवश्यकता है। भारत सही नेतृत्व कर रहा है। चाहे वो धर्म, जिसका हम पालन करते हैं या फिर भाषाओं और धर्मों की विविधता हो।”

कंगना ने आगे कहा, “भारत सही मायनों में लीडर है। अगर ये कम्युनिस्ट लोग लीडर बन जाते हैं, पूँजीवादी लोग लीडर बन जाते हैं, तो यही होता है। सभी जैव-युद्ध और आर्थिक लाभ के बारे में सोचेंगे। इसलिए मुझे लगता है कि आध्यात्मिक विरासत है और इतिहास के साथ सही वर्ल्ड लीडर है, जिसकी फिलॉसॉफी में बलिदान और दुनिया की स्वीकार्यता है। इसलिए मुझे लगता है कि हमें ऐसे समय का लाभ उठाना चाहिए। चीन को दुनिया भर से नफ़रत मिल रही है। इसलिए हमें अगुवाई करनी चाहिए। यह ठीक है कि चीन आपको सब कुछ सस्ता और घटिया दे सकता है। हमें वो नहीं लेना है। हमने सस्ते और घटिया के नतीज़ों को देखा है। हमें अपने लोगों को प्रेरित करना है।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी कंगना चीनी सामान का बहिष्कार करने की अपील कर चुकी हैं। उन्होंने एक वीडियो में कहा था, “अगर कोई हमारे हाथ से हमारी ऊँगलियों को काटने की कोशिश करे या हमारी भुजाओं से हमारी हथेली काटने की कोशिश करे तो किस तरह का कष्ट होगा आपको। वही कष्ट पहुँचाया है चीन ने हमें लद्दाख पर अपनी लालची नजरें गड़ा कर। वहाँ हमारी सीमा का एक-एक इंच बचाने के लिए हमारे 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए हैं।”