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भीड़ में घुसे और भगदड़ मच गई… रिपोर्ट में दावा- कैमरों में 120 संदिग्ध दिखे, पहचान में जुटी STF: वसंत पंचमी पर महाकुंभ में 1.9 करोड़+ श्रद्धालुओं ने किया अमृत स्नान

प्रयागराज महाकुंभ में वसंत पंचमी के मौके पर लाखों श्रद्धालु और साधु संत जुटे हैं। संगम समेत प्रयागराज के बाकी गंगा घाटों पर लगातार स्नान जारी है। वसंत पंचमी (3 फरवरी, 2025) को शाम 4 बजे तक महाकुंभ में 1.98 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके थे। इस बीच मौनी अमावस्या को मची भगदड़ को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को AI कैमरों की वीडियो हाथ लगी है, इसमें कुछ संदिग्ध चेहरे दिखाई पड़े हैं। दावा है कि इनके घुसने के बाद ही संगम पर भगदड़ हुई।

वसंत पंचमी के मौके पर अखाड़ों समेत बाकी श्रद्धालुओं ने सुबह से ही अमृत स्नान चालू कर दिया था। पिछले हादसे को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यवस्था चाक चौबंद कर दी है। महाकुंभ में अमृत स्नान के मौके पर योगी सरकार ने पुष्प वर्षा भी करवाई है। हेलिकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर फूल फेंके गए। मकर संक्रांति से चालू हुए महाकुंभ में वसंत पंचमी तक लगभग 36 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। संभावना है कि कुछ ही दिनों में यह आँकड़ा 40 करोड़ हो जाएगा, जैसा उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुमान लगाया था।

अखाड़ों ने बताया है कि यह उनका अंतिम अमृत स्नान है। उन्होंने इसके बाद वाराणसी जाने का ऐलान किया है। हालाँकि, अभी महाकुंभ आयोजन जारी रहेगा। महाकुंभ में मौनी अमावस्या को हुई भगदड़ के बाद वसंत पंचमी पर सरकार ने सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। बसंती पंचमी के अमृत स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान कराने के लिए 28 स्ट्रैटेजिक प्वाइंट बनाए गए हैं। यहाँ कई और अफसरों की तैनाती की गई थी जिन्हें पूर्व में ऐसे आयोजन का अनुभव है। भीड़ प्रबन्धन के लिए भी नए नियम लाए गए हैं।

मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ की जाँच भी तेज कर दी गई है। मामले की जाँच UPSTF कर रही है। भगदड़ के समय संगम घाट पर मौजूद मोबाइल नम्बरों की जाँच के साथ ही अब यहाँ लगे AI कैमरों की जाँच की जा रही है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, STF को इन कैमरों की जाँच में 120 ऐसे संदिग्ध दिखे हैं। इससे पहले भगदड़ में फंसे लोगो ने बताया था कि भीड़ में कुछ लोगों के घुसने के बाद ही भगदड़ मची थी। पुलिस ने जिन चेहरों की पहचान की है, उन पर जाँच की जाएगी।

सुरक्षा एजेंसियों घटना के समय की वीडियो की फोरेंसिक जाँच करवा रही हैं। STF ने घटना के समय मौजूद 16 हजार मोबाइल नम्बरों को भी खंगाला है। इनमें से उन नम्बरों पर फोकस ज्यादा है, जो महाकुंभ के बाद से बंद आ रहे हैं। महाकुंभ में शामिल साधुओं ने भी साजिश को लेकर चिंता जताई है और दुष्प्रचार पर बात की है। मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ की जाँच के लिए बनाए गए न्यायिक आयोग ने भी सभी पहलू जांचने की बात कही है।

मिशनरियों के विरोध, घर वापसी जैसे अभियानों से बौखलाया ‘वाशिंगटन पोस्ट’, चाहता है जनजातीय समाज को ईसाई बनाने के लिए मिले खुला मैदान: हिंदू संगठनों को जी भर कोसा

भारत और हिन्दुओं के विरुद्ध लगातार प्रोपेगेंडा करने वाले ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने अब देश के लोगों के बीच नई खाई पैदा करने की कोशिश की है। अपने नए हमले में वाशिंगटन पोस्ट ने हिन्दुओं और जनजातीय समुदाय को भड़का कर झारखंड में संघर्ष को बढ़ावा देने का प्रयास किया है।

वाशिंगटन पोस्ट ने शनिवार (1 फरवरी, 2025) को इसी से सम्बन्धित एक लेख प्रकाशित किया है। वाशिंगटन पोस्ट ने आरोप जड़ दिया है कि हिन्दू संगठन झारखंड के जनजातीय समुदाय को ‘सनातन धर्म’ में धर्मान्तरित करना चाहते हैं और इसके लिए प्रचार अभियान भी चला रहे हैं।

वाशिंगटन पोस्ट ने आरोप जड़ा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अन्य हिन्दू संगठन जनजातीय समुदाय को यह विश्वास दिला रहे हैं कि वह भी ‘वृहत्तर हिन्दू धर्म’ का हिस्सा है। वाशिंगटन पोस्ट ने आरोप लगाया कि इससे वह इन जनजातियों की पहचान छीन रहे हैं।

वाशिंगटन पोस्ट ने यह दावे तब किए हैं जब झारखंड में ईसाई मिशनरियां तेजी से अपनी घुसपैठ बढ़ा रही हैं और साथ ही कमजोर तबकों के लोगों को इस्लाम में धर्मांतरण के लिए भी प्रयास चल रहे हैं। राज्य में इस बीच बांग्लादेशी घुसपैठ बढ़ी है, इसके चलते जनजातीय समुदाय घटा है।

वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा, “यहाँ तक ​​कि घने जंगलों में भी, भारत का दक्षिणपंथी हिंदू आंदोलन ऐतिहासिक रूप से सेक्युलर देश को हिंदू राष्ट्र में बदलने के अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, और वह लंबे समय से मुख्यधारा के धर्म से बाहर रहे लाखों जनजातीय लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहा है कि वे भी हिंदू ही हैं।”

अमेरिकी अखबार ने जनजातीय समुदाय की प्रथाओं और उनके रीति रिवाजों को बचाने के लिए हिन्दू संगठनों के प्रयास का मजाक भी उड़ाया है। वाशिंगटन पोस्ट के प्रोपेगेंडा से लगता है कि वह झारखंड में ईसाई मिशनरियों के दुष्प्रचार को जवाब मिलने पर बौखलाया हुआ है।

धर्मांतरण रोकने को ‘मिशनरी अभियान’ बता रहा वाशिंगटन पोस्ट

झारखंड को बिहार से अलग करके बनाया गया था। झारखंड को इस उद्देश्य के साथ बनाया गया था कि यहाँ रहने वाले जनजातीय समुदाय का विकास हो सके। 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य में रहने वाले 67.8% लोग (बहुमत) हिंदू है।

‘द वाशिंगटन पोस्ट’ के दावों के उलट, यहाँ काम करने वाले हिन्दू संगठन किसी को हिन्दू बनाने नहीं आए हैं, क्योकि यह राज्य पहले से ही हिन्दू बहुल है। बल्कि हिन्दू संगठन यहाँ उन मिशनरियों को रोकने और धर्मांतरण के नेक्सस को तोड़ने के लिए काम कर रहे हैं।

हिन्दू संगठन लगातार राज्य में उन संगठनों के खिलाफ भी अभियान चला रहे हैं, जो गरीब जनजातीय जनता को किसी प्रकार का लालच देकर धर्मांतरित करते हैं। बहला फुसला कर ले जाए गए लोगों को वापस रास्ते पर लाने का काम भी हिन्दू संगठन कर रहे हैं।

‘वनवासी कल्याण आश्रम’ और ‘विकास भारती’ को भी बनाया निशाना

वाशिंगटन पोस्ट ने अपने लेख में झारखंड में जनजातीय समुदाय के विकास के लिए काम करने वाली संस्थाओं ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ और ‘विकास भारती’ को भी निशाना बनाया और इन पर झूठ फ़ैलाने की कोशिश की। वाशिंगटन पोस्ट ने आरोप लगाया कि विकास भारत संगठन जनजातीय समुदाय को प्रकृति पूजक, हिन्दू और ईसाई में बाँट रहा है।

वाशिंगटन पोस्ट ने विकास भारत द्वारा शिवरात्रि पर आयोजित किए गए एक कार्यक्रम को भी निशाना बनाया। इस कार्यक्रम में स्थानीय जनजातीय समुदाय को भी शामिल किया गया था।वाशिंगटन पोस्ट ने दावा किया कि यह कार्यक्रम प्रकृति पूजकों को हिन्दू धर्म में लाने का एक प्रयास था।

वाशिंगटन पोस्ट ने झारखंड में जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए काम करने वाले ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ को भी निशाना बनाया और दावा किया कि यह धर्मांतरण के लिए काम करता है। वाशिंगटन पोस्ट ने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम कथित तौर पर ‘हिन्दू धर्म’ से अलग रहे जनजातीय समुदाय को हिन्दू बना रहा है।

सरना कोड के सहारे विवाद का प्रयास

वाशिंगटन पोस्ट ने हिंदुओं और ‘प्रकृति पूजकों’ के बीच और अधिक खाई पैदा करने के लिए ‘सरना कोड’ का मुद्दा उठाया और इसे RSS के लिए ‘नया विवाद’ और ‘चुनौती’ बताया। वाशिंगटन पोस्ट ने दावा किया, “छत्तीसगढ़ के जशपुर और बिशुनपुर में हिन्दू संगठन के लिए काम करने वाले जनजातीय लोग भी अलग धार्मिक पहचान सरना कोड की वकालत कर रहे हैं।”

वाशिंगटन पोस्ट ने ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ के साथ काम करने वाली एक ‘प्रकृति पूजक’ जनजातीय नर्स का उदाहरण दिया। वाशिंगटन पोस्ट के साथ बातचीत में कथित तौर पर नर्स ने आरोप लगाया कि उसे खुद को हिन्दू बताने पर मजबूर किया जा रहा है जबकि वह ‘सरना’ धर्म मानती है।

अपने इस प्रोपेगेंडा लेख में वाशिंगटन पोस्ट ने दावा किया कि हिन्दू सरना कोड इस लिए नहीं चाहते क्योंकि इससे जनजातियों के विदेशी मिशनरियों से खतरे की बात कमजोर होती है। हालाँकि, यह बात सच ही है क्योंकि ईसाई मिशनरियों को जनजातीय और गरीब तबकों में ज्यादा सफलता मिली है।

सरना कोड का मामला

भारत का क़ानून हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन जैसे 6 धार्मिक समुदायों को मान्यता देता है। कॉन्ग्रेस-JMM सरकार ने ने इसके अतिरिक्त सरना धर्म के लिए भी धार्मिक संहिता लागू करने का वादा किया है। नवम्बर, 2020 में झारखंड की INDI गठबंधन सरकार ने इस संबंध में एक प्रस्ताव विधानसभा से पारित करवाया था।

इसको भाजपा ने भी समर्थन दिया था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संबंध में पत्र लिखा था। भाजपा ने झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में सरना संहिता पर विचार करने का वादा किया था। झारखंड भाजपा चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान ने कई मौकों पर इस रुख को दोहराया।

सरना कोड जनजातीय समुदाय समाज को एक अलग धार्मिक समूह के रूप में मान्यता देता है। भाजपा इसका सार्वजनिक रूप से विरोध नहीं करती। भाजपा ने सार्वजनिक रूप से इसका विरोध नहीं किया है, लेकिन RSS जनजातीय समाज को हिंदू धर्म का हिस्सा मानता है।

RSS वनवासी कल्याण आश्रम जैसे संगठनों के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में इसी मान्यता के साथ काम करता है। RSS से जुड़े आदिवासी सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय समन्वयक (बिहार-झारखंड) संदीप उरांव का दावा है कि सरना कोड लागू करने से विभिन्न स्तरों पर कई समस्याएं पैदा होंगी।

असम से लेकर म्यांमार सीमा तक अफीम की खेती की गई नष्ट, 220 बीघा में लगी थी: बोले CM सरमा- ड्रग्स के बारे में सोचने से पहले पुलिस को याद कर लेना

असम पुलिस ने राज्य में लगभग 170 बीघे में लगी अफीम की खेती को नष्ट कर दिया। इस ड्रग्स की अनुमानित कीमत 27 करोड़ रुपए है। इसकी जानकारी ग्वालपाड़ा पुलिस और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दी है। वहीं, असम राइफल्स ने मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा पर स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर लगभग 30 एकड़ (लगभग 50 बीघा) की अवैध अफीम की खेती को नष्ट कर दिया।

असम के सीएम सरमा ने सोशल मीडिया साइट X पर अपने पोस्ट में लिखा, “प्रिय स्थानीय पाब्लो एस्कोबार्स (कोलंबिया का कुख्यात ड्रग माफिया), आपकी योजनाबद्ध उड़ता असम पार्टी को बिगाड़ने के लिए क्षमा करें! क्योंकि ग्वालपाड़ा पुलिस ने जनवरी में चार इलाकों में ₹27.20 करोड़ मूल्य की 170 बीघा अफीम की खेती नष्ट कर दी थी। तो अगली बार जब आप ड्रग्स के बारे में सोचें तो सबसे पहले असम पुलिस के बारे में सोचें।”

वहीं, ग्वालपाड़ा पुलिस ने अपने ट्वीट में कहा, “नशीली दवाओं के खिलाफ अपने अभियान को जारी रखते हुए चुनारी थाने के अंतर्गत सीतलमारी चार में 100 बीघा भूमि पर अवैध अफीम की खेती को एएसपी (मुख्यालय) जीएलपी और ओसी एलपीआर पीएस के नेतृत्व में ग्वालपाड़ा पुलिस टीम ने सीओ लखीपुर, आबकारी निरीक्षक और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में नष्ट कर दिया।”

बता दें कि पिछले सप्ताह 30 जनवरी 2025 को ग्वालपाड़ा पुलिस ने सोनारी सर में 40 बीघा क्षेत्र में अफ़ीम की खेती को नष्ट कर दिया था। ग्वालपाड़ा प्रशासन ने 2021 और 2023 में शियालमारी में बड़े पैमाने पर अफ़ीम की खेती को नष्ट किया था। सर क्षेत्र में अफ़ीम की खेती सबसे पहले 2010 में दरंग ज़िले के मगुरमारी सर में सामने आई थी।

सूत्रों के अनुसार, राज्य के बाहर का एक गिरोह राज्य में सर की दुर्गमता का फायदा उठाकर स्थानीय निवासियों के एक वर्ग के साथ मिलकर अफीम की खेती करता है। यह गिरोह स्थानीय निवासियों को अफीम के बीज और अन्य सामग्री सहित हर चीज की आपूर्ति करता है। दरअसल, सर के इलाकों में रहने वाले लोगों को असल पता ही नहीं है कि अफीम वास्तव में होता क्या है।

द सेंटिनेल की रिपोर्ट के मुताबिक, सर निवासी अशरफ अली ने कहा, “लोगों को लगता है कि यह फूलों की खेती है। सर के इलाकों के कुछ नेता इसका फायदा उठाकर स्थानीय लोगों को मज़दूर के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। अगर ज़िला प्रशासन अफीम की खेती देखने के लिए बाहर से आने वाले रैकेट के लोगों और उन्हें पनाह देने वाले लोगों पर नज़र रखे तो उनके ठिकानों का पता लगाया जा सकता है।”

प्रयागराज महाकुंभ में मची भगदड़ साजिश तो नहीं? पड़ताल कर रही यूपी STF, 16 हजार मोबाइल नंबरों का खंगाला जा रहा डेटा: बसंत पंचमी पर अमृत स्नान के लिए 28 नए स्ट्रैटेजिक प्वॉइंट

प्रयागराज महाकुंभ में सोमवार (3 फरवरी 2025) को बसंत पंचमी के मौके पर अमृत स्नान को लेकर लोगों की भीड़ फिर जुटने लगी है। 1 फरवरी से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुँच रहे हैं। हालाँकि, मौनी अमावस्या पर 29 जनवरी को हुई हादसे के बाद प्रशासन अत्यधिक सावधानी बरत रहा है। वहीं, उस भगदड़ की जाँच कर रही STF की टीम साजिश के एंगल को भी खंगाल रही है।

प्रशासन को उम्मीद है कि बसंत पंचमी के मौके पर लगभग 4.5 करोड़ लोग महाकुंभ में स्नान करेंगे। बता दें कि जिस दिन मौनी अमावस्या थी, उस दिन स्नान के सारे रिकॉर्ड टूट गए। उस दिन लगभग 8 करोड़ लोगों ने कुंभ में डुबकी लगाई थी। बसंती पंचमी के अमृत स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान कराने के लिए 28 स्ट्रैटेजिक प्वाइंट बनाए गए हैं।

इन प्वाइंट्स पर पुलिस के साथ ही रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पैरामिलिट्री के जवानों की संयुक्त टीम की तैनात की गई है। इस बार बैरिकेड तोड़ने वालों की प्रशासन की विशेष निगाह रहेगी। ऐसे लोगों पर नजर रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। सभी पॉइंट पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और कमांड सेंटर से उन पर निगरानी रखी जा रही है।

इतना ही नहीं, मेला क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ अन्य अधिकारियों को भी इलाके में भेजा गया है। साल 2019 में प्रयागराज के मंडलायुक्त रहे आशीष गोयल तथा प्रयागराज विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं डीएम रहे भानुचंद्र गोस्वामी के साथ-साथ पाँच विशेष सचिवों को नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, PCS स्तर के पाँच अधिकारियों को भी मेला क्षेत्र में तैनात किया गया है।

नोएडा विकास प्राधिकरण में तैनात देवेंद्र कुमार सिंह, बुंदेलखंड औद्योगिक प्राधिकरण के ओएसडी राम कुमार शुक्ला, फिरोजाबाद से शिव ध्यान पांडेय, उन्नाव के प्रशांत कुमार नायक तथा सीतापुर के पराग माहेश्वरी को 15 फरवरी तक के लिए महाकुंभ मेला प्राधिकरण से जोड़ दिया गया है। ये अधिकारी व्यवस्था सँभालने में मदद करेंगे।

मौनी अमावस्या को हुई भगदड़ में साजिश की आशंका

29 जनवरी को मौनी अमावस्या के अमृत स्नान पर हुई भगदड़ में 30 से अधिक लोगों ने अपनी जान गँवा दी। इसको लेकर प्रदेश की योगी सरकार बेहद गंभीर है। हादसे के बाद कई ऐसे वीडियो सामने आए, जिनमें श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि कुछ लड़के जान-बूझकर लोगों को धक्का दे रहे थे। अलग-अलग लोगों द्वारा एक तरह के आरोप लगाने के बाद सरकार इस एंगल से भी जाँच कराने की जुट गई है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार (1 फरवरी 2025) को कुंभ क्षेत्र की तैयारियाँ का जायजा लेने के लिए एक बार फिर से प्रयागराज आए थे। इस दौरान उन्होंने उन स्थानों का भी जायजा लिया, जहाँ पर भगदड़ हुई थी। योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल का जायजा लेने के बाद अधिकारियों को कई तरह के निर्देश दिए थे।

उस दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा था, “षडयंत्र रचने वाले कभी कामयाब नहीं होंगे। कुछ लोग लगातार गुमराह कर रहे हैं। भगदड़ के दिन कुछ पुण्यात्मा एक हादसे का शिकार हो गए थे, लेकिन संतों ने अपना धैर्य नहीं खोया। कुछ लोग जो सनातन के विरोधी हैं, उनकी कोशिश थी कि संतों का धैर्य जवाब दे दे। सनातन ही मानव धर्म हैं। सनातन रहेगा तो मानव रहेगा। सनातन धर्म का बाल भी बाँका नहीं हो सकता है।”

अब यूपी STF इस एंगल से जाँच कर रही है। आशंका है कि एक साजिश के तहत महाकुंभ मेले में भगदड़ करवाई गई थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को इसको लेकर शक बढ़ता जा रहा है। दरअसल, घटना वाले दिन संगम नोज के आसपास मौजूद मोबइल नंबरों को खंगाला जा रहा है। वहाँ के करीब 16,000 से अधिक नंबरों का डेटा एनालिस्ट किया जा रहा है।

डेटा एनालिसिस के दौरान STF ने पाया कि घटना के बाद से ही कई नंबर बंद आ रहे हैं। वहीं, घटना के दौरान उपस्थित दो लोगों ने STF को बताया कि कुछ लोग भगवा झंडा लेकर मेला में अचानक घुस आए, इससे वहाँ भगदड़ मची। अब मेला क्षेत्र में लगे एक-एक सीटीटीवी कैमरे के वीडियो का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाता रहा है। एजेेंसियाँ Face Recognition तकनीक के जरिए संदिग्धों की पहचान कर रही है।

जिस कॉलेज से पढ़ी हैं CM ममता बनर्जी, वहाँ सरस्वती पूजा के लिए हाई कोर्ट को देना पड़ा दखल: कहा- छात्रों को सुरक्षा दो, TMC नेता शब्बीर अली दे रहा था रेप-मर्डर की धमकी

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक प्रसिद्ध लॉ कॉलेज में छात्रों को सरस्वती पूजा का आयोजन नहीं करने दिया गया। छात्र-छात्राओं का आरोप है कि सात्ताधारी TMC का एक नेता लगातार उन्हें अब धमका रहा है। उन्हें रेप-मर्डर तक की धमकी दिए जाने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिम बंगाल तृणमूल कॉन्ग्रेस छात्र परिषद (TMC का छात्र संगठन) के महासचिव शब्बीर अली ने जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज में छात्र-छात्राओं को सरस्वती पूजा का आयोजन करने से रोका। पूजा आयोजन करने पर रेप-मर्डर तक की धमकी छात्र-छात्राओं को दी गई।

उन्होंने अब चारूमार्केट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित छात्र-छात्राओं ने कॉलेज के प्रिंसिपल पंकज रॉय को भी शिकायत दी है। उन्होंने TMC नेता मोहम्मद शब्बीर अली पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। विडंबना की बात ये है कि पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इसी कॉलेज से पढ़ी हुई हैं।

एक छात्रा ने बताया, “ये बाहरी लोग जबरन वसूली करने आते हैं। वे चाहते हैं कि हम सरस्वती पूजा का आयोजन न करें। उन्होंने हमें गलियाँ दी और मारपीट की, उन्होंने रेप की धमकी तक दी।”

एक अन्य छात्रा ने कहा, “हमें पूजा आयोजित करने का अधिकार है। आखिर हमें क्यों रोका जा रहा है? हमसे कहा गया है कि अगर हमने सरस्वती पूजा का आयोजन किया तो वह हमेंअनवर शाह रोड से गुजरते समय मार देगा। वे लोग यहाँ वसूली कर रहे हैं।”

TMC नेता मोहम्मद शब्बीर अली पर आरोप लगाया गया है कि वह लड़कियों के हॉस्टल में छात्रों में भजने कि धमकी देता है। आरोप है शब्बीर ने छात्राओं को उनके हॉस्टल में भी सरस्वती पूजा आयोजन करने से मना किया। इस कॉलेज में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित है।

छात्राओं का आरोप है कि शब्बीर अली और TMC के बाकी गुंडे यहाँ घुस कर उत्पात मचाते रहते हैं। डर का इतना माहौल ऐसा है कि प्रिंसिपल खुद सरकारी कॉलेज में जाने से डरते हैं। प्रिंसिपल पंकज रॉय ने बताया, “पिछले साल कॉलेज में घुसते समय मुझे परेशान किया गया था। मैंने अपने 40 साल के करियर में कभी नहीं देखा।”

उन्होंने टीएमसी के गुंडों द्वारा चलाए जा रहे जबरन वसूली रैकेट की तरफ भी इशारा किया। रॉय ने कहा, “उन्हें या तो पैसे दो, या फिर मुसीबत झेलो।” प्रिंसिपल रॉय ने बताया है कि TMC के गुंडों ने पहले कॉलेज प्रशासन के अनुमति ना देने की अफवाह फैलाई थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस घटनाक्रम के बारे में राज्य सरकार और केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।

इस मामले में कोलकाता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस से सुरक्षा प्रदान करने को कहा है।

चट्टान काटकर बना धर्मराजेश्वर मंदिर, सूर्य की किरण करती हैं विष्णु-शिव का अभिषेक: महाशिवरात्रि की रात ठहरने से मिलती है मोक्ष, अज्ञातवास में पांडवों ने कराया था निर्माण

भारत सभ्यतागत विकास की पवित्र भूमि है। यहाँ एक से बढ़कर एक सभ्यता एवं संस्कृति पनपीं और विकसित हुईं। इसके साथ ही विकसित हुईं यहाँ शिल्प एवं कला। यहाँ के कुशल शिल्पकारों ने एक बढ़कर एक आश्चर्यचकित करने वाली संरचनाएँ बनाई हैं, जिनमें मंदिर, भवन और मठ आदि भी शामिल हैं। इन्हीं में से एक एलोरा का कैलाश मंदिर है, जिसे चट्टान को काटकर बनाया गया है। कैलाश मंदिर की तरह ही मध्य प्रदेश के मंदसौर में भी चट्टान काटकर एक मंदिर बनाई गई है। इसे धर्मराजेश्वर मंदिर कहा जाता है।

एलोरा के मंदिरों एवं गुफाओं को सोलंकी क्षत्रिय से संबंधित चालुक्यों ने बनवाया था। वहीं, धर्मराजेश्वर मंदिर और धमनार के आसपास के गुफाओं को प्रतिहार क्षत्रियों वंश के राजाओं ने बनवाया है। इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी ईस्वी में हुई है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर रखी एक आदमकद प्रतिमा पर 8-9वीं शताब्दी की ब्राह्मी लिपि में एक अभिलेख उत्कीर्ण है।

धर्मराजेश्वर मंदिर को एक पहाड़ी को काटकर विशाल मंदिर एवं उसका परिसर के रूप में बनाया गया है, जो देखने में अजूबा लगता है। यह इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट नमूना भी है। इसे मध्य प्रदेश का अजंता-एलोरा कहा जाता है। धर्मराजेश्वर को ही नहीं, बल्कि धमनार सहित आसपास की 200 गुफाओं को भी अजंता की बौद्ध एवं जैन गुफाओं की शैली में पहाड़ों को काट कर बनाया गया है।

मंदसौर जिला मुख्यालय से लगभग 78 किलोमीटर और शामगढ़ तहसील से 22 किलोमीटर दूर चंदवासा गाँव में यह मंदिर स्थिति है। इसके आसपास लगभग 3 किलोमीटर तक जंगल है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, धर्मराजेश्वर मंदिर को एलोरा के कैलाशनाथ मंदिर की तरह ही पत्थर के पहाड़ को ऊपर से नीचे की ओर खोदकर बनाया गया है। यह जमीन से 9 मीटर नीचे है।

विष्णु एवं शिव मंदिर

धर्मराजेश्वर नाम के मुख्य मंदिर के चारों तरफ सात लघु मंदिर हैं। मंदिर में पहुँचने के लिए 250 फीट लम्बा रास्ता बनाया गया है। यह रास्ता भी पहाड़ी को काटकर बनाया गया है। मुख्य मंदिर में गर्भगृह में भगवान विष्णु की चार भुजाओं वाली मूर्ति और एक शिवलिंग है। इसमें नक्काशी वाले स्तंभों पर स्थित मंडप है। वहीं, दूसरे लघु मंदिरों में वराह, दशावतार, शेषशायी विष्णु तथा पंचमहादेवी की मूर्तियाँ हैं।

इसके अलावा, मंदिर प्रांगण पानी के लिए एक छोटा कुआँ भी खोदा हुआ है। इस कुएँ का पानी शीतल और मीठा है। मंदिर की ओर से पहली मंजिल पर जाने के लिए दायीं और बायीं ओर सीढ़ियाँ बनी हुई हैं। पहली मंजिल पर पत्थरों को काटकर भिक्षुओं के ध्यान के लिए गुफाएँ बनाई गई हैं। इतिहासकारों का मानना है कि धमनार की गुफाएँ बौद्ध दर्शन पर है और उनका इस मंदिर से गहरा संबंध है।

कहा जाता है कि बौद्ध मठ को बाद में विष्णु मंदिर और फिर शैव मंदिर में बदल दिया गया। गर्भगृह में एक शिवलिंग भी स्थापित कर दिया गया। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह मंदिर मूलत: बौद्ध मंदिर या जैन मंदिर हो सकता है। अधिकतर इतिहासकार इसे बौद्ध मठ का प्रचार स्थल बताते हैं। इसमें मौजूद प्रतिमाएँ इसकी ओर इशारा करती हैं। बाद में इसे हिंदू मंदिर में बदल दिया गया।

लगभग 1415 मीटर में फैले इस मंदिर के बाई ओर ढेरों गुफाएँ हैं, जिनमें भगवान बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं में प्रतिमाएँ आज भी मौजूद हैं। जगह-जगह दीवारों पर उनके चित्र उकेरे हुए हैं। वहीं, इन गुफाओं में भगवान बुद्ध के अलावा जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव, भगवान नेमिनाथ, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान शांतिनाथ और भगवान महावीर की पाँच मूर्तियाँ भी पाई गई हैं।

बौद्धकाल के दौरान चंदवासा गाँव का नाम चंदन गिरि था। इसके साथ ही इस मंदिर एवं गुफा को चंदन गिरि महाविहार था। दरअसल, सन 1962 में डॉक्टर वाकणकर को यहाँ एक मिट्टी की सील मिली थी। उसका नाम चंदन गिरी महाविहार मिलता है। इसी आधार पर इतिहासकार चंदवासा का प्राचीन नाम चंदिन गिरि बताते हैं।

धार्मिक मान्यता

कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ रात में रुकने से मोक्ष मिलता है। सूर्य के उदय के साथ ही उसकी किरण गर्भगृह में शिवलिंग पर पड़ती है। स्थानीय लोग मंदिर को पांडवों द्वारा निर्मित मानते हैं। वहीं, कई इतिहासकार इसे जैन और बौद्ध धर्मस्थल कहते हैं। राजेश्वर मंदिर के ठीक नीचे पहाड़ी के निचले छोर पर करीब 200 छोटी-बड़ी गुफाएँ हैं। इन्हें अंग्रेज लेखक कर्नल टॉड ने सबसे पहले खोजा था।

लोगों में मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपना अज्ञातवास का कुछ समय यहाँ बिताया था। उसी दौरान भीम ने इस मंदिर का निर्माण किया था। चूँकि, भीम के सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर को धर्मराज भी कहा जाता था, इसलिए इस मंदिर को धर्मराजेश्वर मंदिर कहा जाने लगा। बताया जाता है कि यहाँ पर एक विशाल गुफा भी है, जो इस मंदिर से उज्जैन निकलती है। पुरातत्व विभाग ने उसे बंद कर दिया है।

मंदिर में बने छोटे से कुएँ को लेकर भी एक मान्यता है। स्थानीय लोगों में मान्यता है कि इस कुएँ का पानी पिलाने से साँप आदि जैसे जहरीले जीवों का जहर उतर जाता है। इतना ही नहीं, पागल कुत्ते को काटने पर यहाँ का पानी पिलाया जाता है। लोगों का कहना है कि इससे रेबीज की बीमारी नहीं होती है। जिन्हें रेबीज हो गया है, उन्हें भी इस कुएँ का पानी पिलाया जाता है।

साल भर में मुस्लिम 1 लाख+ बढ़े, हिंदू केवल 1099: केरल में ‘डेमोग्राफी चेंज’ से थिंक टैंक ने किया आगाह, कुल आबादी में हिंदुओं से कम हिस्सेदारी पर बच्चे पैदा करने में काफी आगे

केरल में हिन्दुओं के मुकाबले आधी आबादी वाला मुस्लिम समुदाय सबसे ज्यादा बच्चे पैदा कर रहा है। यह सिलसिला लगातार जारी है। केरल में पैदा होने वाले लगभग 44% बच्चे मुस्लिम हैं। हिन्दू उनसे दुगनी आबादी में होने के बाद भी बच्चे पैदा करने के मामले में 41% के आसपास हैं। दूसरी तरफ मुस्लिमों में मौतों की संख्या उनकी आबादी के मुकाबले कहीं कम हैं। मुस्लिमों में लगातार हर साल लाखों की संख्या में नए लोग जुड़ रहे हैं। यह सारी बातें एक हालिया रिपोर्ट में सामने आई हैं। यह रिपोर्ट एक थिंक टैंक ने जारी की है।

सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज थिंक टैंक ने 30 जनवरी, 2025 को एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट का नाम रिलीजियस डेमोग्राफी इन इंडिया: राइजिंग रिलीजियस इम्बैलेंस है। इस रिपोर्ट में केरल के हिन्दू, मुस्लिम और ईसाइयों समेत बाकी समुदाय के 2008 से 2021 तक के आँकड़ों पर शोध किया गया है। रिपोर्ट में इन समुदायों में हुए नए जन्म, मौतें और उसके आबादी पर होने वाले असर के विषय में बात की गई है। रिपोर्ट में पाया गया है कि सभी कारणों के चलते बीते कुछ समय में केरल के भीतर मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी है।

हिन्दुओं से ज्यादा बच्चे मुस्लिमों में पैदा हो रहे

CPS ने अपने विश्लेषण में पाया कि 2016 के बाद से केरल के भीतर सबसे अधिक बच्चे मुस्लिम समुदाय में पैदा हो रहे हैं। 2016 में केरल में 2 लाख 7 हजार हिन्दू बच्चे पैदा हुए जबकि इसी दौरान 2 लाख 11 हजार मुस्लिम बच्चे पैदा हुए। यही हाल 2017 में रहा जब 2 लाख 10 हजार 71 हिन्दू बच्चे पैदा हुए लेकिन मुस्लिम बच्चों की संख्या 2 लाख 16 हजार 525 रही। यही रुझान 2020 तक चलता रहा। केवल 2021 ऐसा साल रहा जब हिन्दू बच्चों की संख्या ज्यादा हुई। यह आँकड़ा नीचे लगे ग्राफ से समझिए।

इस ग्राफ से साफ़ है कि केरल में 2016 के बाद से लगातार हिन्दू बचे कम पैदा हो रहे हैं। यह तब हो रहा है जब राज्य में हिन्दुओं की आबादी लगभग 55% है और मुस्लिमों की आबादी लगबग 27% है। दोनों आँकड़ों को आपस में मिलाकर समझा जाए तो, पता चलता है कि आधी आबादी में होने के बावजूद मुस्लिम हिन्दुओं से ज्यादा बच्चे पैदा कर रहे हैं। यह बदलाव 2016 के पहले धीमे धीमे आ रहा था जब हिन्दू बच्चों की संख्या लगातार घट रही थी। यह आँकड़े CPS द्वारा दिए गए इस चार्ट से समझिए।

चार्ट में साफ़ है कि 2008 में केरल में पैदा होने वाले बच्चों में 45% बच्चे हिन्दू थे जबकि 36% बच्चे मुस्लिम थे। ईसाइयों की संख्या लगभग 17.5% थी। लेकिन 2020 आते-आते पैदा होने वाले कुल बच्चों में हिन्दू बच्चों की संख्या घट कर 41.4% पर आ गई जबकि इसी दौरान मुस्लिम बच्चों का कुल जन्म में हिस्सा बढ़ कर 44% तक पहुँच गया। इसी दौरान कुल जन्मे बच्चों में ईसाइयों का हिस्सा घट कर लगभग 18% से घट कर 14% के नीचे आ गया।

हिन्दुओं से 5 गुना तेजी से बढ़े मुस्लिम

CPS रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केरल में बीते बीते लगभग 3 दशकों में टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) में तेज गिरावट आई है। एक महिला जितने बच्चों को 15-49 वर्ष की आयु में जन्म देती है, उसे TFR कहते हैं। इसका औसत ही राज्य का TFR होता है। किसी भी समुदाय की आबादी जितनी है, उतनी ही बनी रहे, इसके लिए औसत TFR 2.1 होना चाहिए। 2023 के एक सर्वे के हिसाब से, केरल में मुस्लिमों का TFR अभी भी 2.25 है जबकि हिन्दुओं में यह 1.53 पहुँच चुका है।

CPS की रिपोर्ट बताती है कि इन सब बदलावों का फर्क राज्य की आबादी पर तेजी से पड़ा है। CPS ने पाया है कि 1950 के बाद से मुस्लिम सबसे तेजी से केरल में बढ़ रहे हैं। 2001 से 2011 के बीच केरल में हिन्दुओं की आबादी जहाँ मात्र 2.23% और ईसाइयों की आबादी केवल 1.38% बढ़ी तो वहीं मुस्लिम इस बीच 12.8% बढ़े। यह ट्रेंड इससे पहले से भी चालू है।

मौतों का आँकड़ा भी हिन्दुओं का ज्यादा

CPS ने अपने विश्लेषण में पाया है कि जहाँ 2008-21 के बीच पैदा होने वाले बच्चों में मुस्लिमों का हिस्सा उनकी आबादी से कहीं ज्यादा है वहीं राज्य में होने वाली मौतों में यह हिस्सेदारी उनकी आबादी के मुकाबले कम है। CPS रिपोर्ट बताती है कि 2008 से 2021 के बीच केरल में होने वाली मौतों में मुस्लिमों का हिस्सा लगभग 20% के आसपास रहा है जो उनकी आबादी 26.5% की तुलना में कहीं कम है। इसके उलट मौतों में हिन्दुओं का प्रतिशत लगभग 60% रहा है। ईसाइयों में भी मौतों की संख्या उनकी आबादी के हिसाब से बराबर रही है।

केरल की आबादी में हर साल जुड़ रहे 1 लाख+ मुस्लिम

CPS की रिपोर्ट बताती है कि केरल की आबादी में हर साल सबसे ज्याद लोग मुस्लिम समुदाय में ही जुड़ रहे हैं। यह आँकड़ा CPS ने केरल में हर समुदाय में हर साल होने वाली मौतों और हर साल पैदा होने वाले बच्चों के बीच अंतर निकाल कर तैयार किया है। CPS के अनुसार, साल 2021 में मुस्लिम समुदाय में 1 लाख 4 हजार लोग नए जुड़े हैं जबकि मात्र हिन्दुओं की आबादी मात्र 1099 बढ़ी है। ईसाइयों की आबादी तो 6218 घट गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, हिन्दुओं की आबादी में बढ़ोतरी की संख्या लगातार कम होती जा रही है। यदि यही ट्रेंड रहा तो कुछ सालों में हिन्दू आबादी घटने लगेगी। हालाँकि, मुस्लिम आबादी में लगातार 1 लाख से अधिक लोग हर साल 2008 के बाद से जुड़े हैं। रिपोर्ट बताती है कि 2011-20 के बीच उनका आबादी में हिस्सा 26% से बढ़ कर 29% के पार जा चुका है। वहीं हिन्दुओं का केरल की आबादी में हिस्सा घट रहा है। रिपोर्ट बताया गया है कि आने वाले समय में यह अंतर और बढ़ता जा सकता है।

करतूतें केजरीवाल-AAP की, विदेश में शर्मिंदा होते हैं एस जयशंकर: कहा- देश की राजधानी में बुनियादी सुविधाओं की भी कमी, वोट डालने से पहले जनता ‘बदलाव’ पर गंभीरता से करे विचार

दिल्ली विधानसभा चुनावों के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर का आम आदमी पार्टी और दिल्ली के हालातों को लेकर बयान आया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि दिल्ली में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जैसे कि पानी, बिजली, और स्वास्थ्य सेवाएँ आदि। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्हें विदेशों में यह बताने में शर्म आती है कि दिल्ली के निवासी इन मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित हैं।

जयशंकर ने एक सभा में कहा, “जब मैं विदेश जाता हूँ, तो मुझे दुनिया से बातें छुपानी पड़ती हैं। मुझे शर्म महसूस होती है कि राजधानी में रह रहे लोग घर नहीं पा रहे हैं, उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं और आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 10 वर्षों में AAP सरकार ने दिल्ली को विकास की दौड़ में पीछे छोड़ दिया है। यदि लोगों को अपने अधिकार नहीं मिल रहे हैं, तो 5 फरवरी को मतदान करते समय उन्हें बदलाव के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।

बता दें कि एस जयशंकर की तरह अन्य भाजपा नेता भी इस समय AAP की नीतियों और काम को लेकर पार्टी पर हमलावर हैं, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने सारे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए झूठ बोल रही है।

उन्होंने अपने शासनकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए बताया कि उनकी सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के लिए कई कदम उठाए हैं। वहीं अरविंद केजरीवाल ने 2025-26 के बजट पर भी निराशा जताई।

उन्होंने कहा कि बजट से सिर्फ उद्योगपतियों के कर्ज माफी की राह आसान हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों के लिए पर्याप्त धन नहीं रखा गया। आम आदमी पार्टी का कहना है कि इस बजट से आम जनता को कोई खास फायदा नहीं होने वाला है।

गौरतलब है कि दिल्ली में 70 विधानसभा सीटों के लिए 5 फरवरी को वोटिंग होने वाली है। ऐसे में हर पार्टी ने चुनाव जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाई हुई है।

कौन हैं पूनम गुप्ता जिनको राष्ट्रपति भवन में विवाह करने की मिली अनुमति, क्यों उनसे प्रभावित हैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: 12 फरवरी को बजेगी शहनाई

राष्ट्रपति भवन में पहली बार एक सीआरपीएफ अधिकारी की शादी का आयोजन होने जा रहा है। वे सीआरपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट हैं। उनका नाम पूनम गुप्ता है। 12 फरवरी को उनकी शादी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अनुमति से भवन के मदर टेरेसा क्राउन परिसर में होगी।

इस समारोह में सिर्फ सीमित रिश्तेदार और दोस्तों का ही आना होगा और हर किसी की एंट्री से पहले उनकी जाँच होगी। संभव है कि खुद राष्ट्रपति इस कार्यक्रम में शिरकत करें और कुछ राजनैतिक हस्तियाँ भी आएँ।

बता दें कि जिन पूनम गुप्ता की शादी समारोह के लिए राष्ट्रपति ने अनुमति दी है वो वर्तमान में राष्ट्रपति भवन में पीएसओ की पोस्ट पर तैनात हैं। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति ने पूनम गुप्ता के सौम्य व्यवहार, मधुर वाणी और कार्य से प्रभावित होकर उनकी शादी की अनुमति भवन के भीतर दी।

पूनम गुप्ता ने साल 2023 में सीआरपीएफ की महिला टुकड़ी का नेतृत्व किया था। वो गणित में स्नातक और अंग्रेजी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उन्होंने जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर से बीएड भी किया है। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी CAPF परीक्षा-2018 में 81वीं रैंक हासिल कर CRPF में असिस्टेंट कमांडेंट बनने का गौरव प्राप्त किया।

पूनम गुप्ता अपने इंस्टाग्राम पर अक्सर अपनी तस्वीरें डालती हैं और अपने अकॉउंट के जरिए वो विभिन्न तरह के जागरूकता अभियान चलाने का भी काम करती हैं।

पारिवारिक बैकग्राउंड की बात करें तो उनके पिता शिवपुरी की श्रीराम कॉलोनी में रहते हैं। वे नवोदय विद्यालय मगरौनी में कार्यालय अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वहीं पूनम गुप्ता के होने वाले जीवनसाथी की बात करें तो जानकारी है कि पूनम की शादी जम्मू कश्मीर में तैनात सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट अविनीश कुमार से हो रही है।

गैंग मुस्लिमों का, पर सबके नाम हिंदू, गाड़ी पर लिखा ‘जय बजरंग बली’… लड़कियों को दोस्ती-प्यार के जाल में फँसा बनाते थे सेक्स वर्कर: सरगना आफताब खुद को बताता था अंकित तिवारी

बिहार के पूर्णिया में हिन्दू लड़कियों को देह व्यापार में धकेलने वाला एक गैंग पकड़ा गया है। इस सेक्स रैकेट का सरगना आफताब नाम का एक युवक बताया जा रहा है। आफताब अंकित तिवारी बन कर हिन्दू लड़कियों को फंसा रहा था। उसके साथ मौसम और शाकिब समेत कई लोग शामिल थे। इनके ऊपर भी फर्जी रूप से हिन्दू नाम रखने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार (29 जनवरी, 2025) को पूर्णिया के कटिहार मोड़ इलाके में चालू हुई छापेमारी से 11 नाबालिग रेक्स्यू की गईं। इन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेला गया था। पुलिस छापेमारी में 32 लोग पकड़े गए हैं। इनमें 6 पुरुष हैं जबकि 26 महिलाएँ हैं।

पूर्णिया के इस रेड लाईट इलाके से रेस्क्यू की गई एक लड़की ने पूरे गैंग की सच्चाई दैनिक भास्कर को बताई है। दैनिक भास्कर को पीड़िता ने बताया है कि इस गैंग का सरगना आफताब खान है। उसने अपना नाम बदल कर अंकित तिवारी कर लिया था। उसने एक थार गाड़ी खरीदी थी और इस पर ‘जय बजरंग बली’ भी लिखवा रखा था।

आफ़ताब बदले हुए नाम के सहारे खुद को कट्टर हिन्दू बताता था। इसके बाद वह हिन्दू लड़कियों को फंसाने लगा। उन्हें शादी का झांसा देता था और फिर उनको धमका कर देह व्यापार करवाने लगता था। रिपोर्ट के अनुसार, उसके धंधे में तीन और लोग शामिल थे। इन्होने भी मुस्लिम नाम बदल कर हिन्दू नाम अपना लिया था।

इनमें एक का नाम मोहम्मद शाकिब है, उसने अपना नाम बदल कर राजीव साह कर लिया था। शाकिब अलग-अलग इलाके से लड़कियाँ लाकर उन्हें देह व्यापार में लगाता था। उसके साथ ही मौसम खान ने अपना नाम ऋषभ साह कर लिया था। वह रॉंग नम्बर के सहारे लड़कियों से दोस्ती करता था। फिर उन्हें देह व्यापार में धकेलता था।

मौसम पर एक लड़की की हत्या का भी मामला दर्ज है। इसी तरह गुड्डू खान नाम का एक युवक भी इस पूरे मामले में संलिप्त है। इस पूरे गैंग में एक महिला जुबैदा भी शामिल है। उसने अपना नाम कैटरीना रखा हुआ है। इन चारों ने आसपास की हिन्दू आबादी में घुलने मिलने को हिन्दू नाम अपनाया हुआ था।

यह लड़कियों से वेश्यावृत्ति करवाने के एक रात के ₹10 हजार तक लेते थे। यह लड़कियों को दूसरे राज्य में बेचते भी थे। लड़कियों को उनकी सुन्दरता के हिसाब से ₹5 लाख तक में बेचा जाता था। यह कुछ दलालों से लडकियाँ खरीदते भी थे।

पुलिस ने इस मामले में रेस्क्यू की गई नाबालिग लड़कियों को बाल सुधार गृह भेज दिया है। बाकी सभी को जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर कार्रवाई चालू कर दी है। हालाँकि, आफताब अभी फरार है। उसके लिए छापेमारी चल रही है।