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रायपुर में 2000+ कामगारों की पहचान का सत्यापन, 150 नहीं दे पाए दस्तावेज: बांग्लादेशी-रोहिंग्या होने की आशंका, छत्तीसगढ़ पुलिस चला रही है ‘ऑपरेशन समाधान’

छत्तीसगढ़ पुलिस ने ‘ऑपरेशन समाधान’ के तहत राजधानी रायपुर में दूसरे राज्यों से आए 2 हजार से अधिक कामगारों की पहचान का सत्यापन किया। इनमें से 150 से अधिक संदिग्ध पाए गए हैं। इनके बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम होने की आशंका है। ये पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश बॉर्डर के हैं। ये सभी अपनी वास्तविक पहचान के दस्तावेज पेश नहीं कर पाए।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने यह कार्रवाई रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों का पता लगाने के लिए की है। जिन लोगों के दस्तावेज नहीं मिले हैं, उनके मोबाइल नंबर की तकनीकी जाँच करके कम से कम पिछले तीन महीने के की जानकारी जुटाई जा रही है। ये सभी खमतराई, टिकरापारा और उरला थाना क्षेत्र में रह रहे थे और ऑटो चलाने तथा मजदूरी आदि का काम कर रहे थे।

दूसरे राज्यों से आए इन लोगों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वे एक-दो साल पहले ही काम की तलाश में रायपुर आए हैं। हालाँकि, ये सभी यहाँ कब से हैं इसकी सही जानकारी पुलिस को भी नहीं है। पुलिस ने एक-एक करके पुलिस इसकी जाँच कर रही है और वास्तविकता का पता लगाने की कोशिश की कर रही है।

दरअसल, रायपुर के अलग-अलग क्षेत्रों से कुल 2,013 बाहरी श्रमिकों को उठाकर पुलिस लाइन लेकर आई थी। वहाँ पर एसएसपी डॉक्टर लाल उम्मेद सिंह की मौजूदगी में सभी से एक-एक करके पूछताछ की गई। इन सबसे रायपुर आने का मकसद पूछा गया। इसके अलावा, सभी मजदूरोें से एक वेरीफिकेशन फॉ़र्म भी भरवाया गया।

इन सभी लोगों की पूरी जानकारी उनके संबंधित पुलिस थाने में भेजी जाएगी और वहाँ से उनके आपराधिक डिटेल माँगी जाएगी। जो आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होगा, उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई करेगी। इस दौरान संदिग्ध गतिविधियों को लेकर 224 लोगों के खिलाफ धारा 151 जैसी प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में जल्द ही नगरीय निकाय चुनाव और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर प्रशासन सतर्क है, ताकि भी बाहरी एवं संदिग्ध व्यक्ति इसमें अवैध हस्तक्षेप ना कर पाए। इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के विभिन्न इलाकों में बाहर से आए लोगों की जाँच कर रही है।

ट्रम्प ने कनाडा-मेक्सिको पर ठोंकी 25% की कस्टम ड्यूटी, चीन को 10% के घेरे में लिया: जवाब में ट्रूडो ने किया टैरिफ का ऐलान, लोग बोले- क्या ये ट्रे़ड वॉर की शुरुआत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन, कनाडा और मेक्सिको पर नए टैरिफ (कस्टम ड्यूटी) का ऐलान कर दिया है। चीन से अमेरिका आने वाले सामान पर 10% जबकि कनाडा और मेक्सिको से अमेरिका आने वाले सामान पर 25% ड्यूटी लगाई गई है। ट्रम्प के इस कदम से एक बार फिर ट्रेड वॉर का खतरा बढ़ गया है। अमेरिका के इस कदम के जवाब में कनाडा के प्रधानमंत्री ने भी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने शनिवार (1 फरवरी, 2025) को इन टैरिफ का ऐलान किया। उन्होंने तीनों देशों से आने वाले सामान पर टैरिफ के आदेशों पर दस्तखत कर दिए। व्हाइट हाउस ने कहा कि यह कदम अमेरिका में बढती ड्रग्स की घुसपैठ को लेकर उठाया गया है।

उन्होंने इसे ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ का नाम दिया है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि जब नशीली ड्रग ‘फेंटानिल’ अमेरिका में आणि बंद नहीं हो जाती, तब तक वह यह टैरिफ जारी रखेंगे। यह भी कहा गया है कि इस टैरिफ को बढ़ाया भी जा सकता है।

अमेरिका के भीतर फेंटानिल के लिए ट्रम्प प्रशासन चीन, मेक्सिको और कनाडा को जिम्मेदार मानता है। उसका कहना है कि यह देश अमेरिकी जाँच एजेंसियों को सहयोग नहीं दे रहे। अमेरिका ने कहा है कि जब भी यह देश अपने संसाधन अमेरिका की सहायता में लगाएँगे, तब यह टैरिफ हटाने पर विचार होगा।

राष्ट्रपति ट्रम्प के इस कदम से दुनिया में ट्रेड वॉर और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति का दौर चालू होने की आशंका है। ट्रम्प के इस कदम की पहली प्रतिक्रिया कनाडा से आई है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ऐलान किया है कि उनका देश अमेरिका के इस कदम के खिलाफ लड़ाई लड़ेगा।

ट्रूडो ने ऐलान किया है कि कनाडा, अमेरिका से आने वाले सामान पर 25% का टैरिफ लगाएगा। यह टैरिफ इसी सप्ताह से लागू हो जाएगा। कनाडा ने कहा है कि वह अमेरिका से आने वाले खाने-पीने के समान तक पर टैरिफ लगाने जा रहा है।

कनाडा ने फेंटानिल आपूर्ति वाले आरोपों को भी नकारा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका पहुँचने वाली 1% से कम फेंटानिल कनाडा से जाती है। इसी कड़ी में मेक्सिको ने भी अमेरिका के आरोप नकारे हैं। मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया पार्डो ने अपने वाणिज्य मंत्री को निर्देश दिए हैं कि वह अमेरिकी सामान पर टैरिफ लगाएँ।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के उनकी सरकार के ड्रग तस्करों से मिले होने के आरोप बिलकुल हवा हवाई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका उनके देश में चलने वाले ड्रग गैंग को हथियार बेच रहा है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका को अपने देश के भीतर ड्रग की बिक्री रोकनी चाहिए।

चीन की तरफ से अभी इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि चीन भी इन टैरिफ के बदले कुछ कदम उठा सकता है।

उपराष्ट्रपति ने सिर पर शिवलिंग रखकर संगम में लगाई डुबकी, 77 देशों के 118 राजनयिकों ने भी महाकुंभ में किया स्नान: CM योगी ने प्रयागराज मेला क्षेत्र का लिया जायजा

प्रयागराज महाकुंभ में 29 जनवरी को मौनी अमावस्या को हुए हादसे के दो दिन बाद ही हालात पूरी तरह बदल गए हैं। स्थिति का जायजा लेने के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार (1 फरवरी 2025) को मेला क्षेत्र में पहुँचे और तैयारियों का जायजा लिया। वहीं, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और 77 देशों के 118 राजनयिकों ने भी 1 फरवरी को संगम तट पर स्नान किया।

प्रयागराज में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपराष्ट्रपति के साथ संगम में स्नान किया। इसके साथ ही उन्होंने संतों से भी मुलाकात की। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि षडयंत्र रचने वाले कभी कामयाब नहीं होंगे। कुछ लोग लगातार गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “भगदड़ के दिन संतों ने धैर्य नहीं खोया। सनातन ही मानव धर्म हैं। सनातन रहेगा तो मानव रहेगा। सनातन धर्म का बाल भी बाँका नहीं हो सकता है।”

संतों से मुलाकात के दौरान सीएम योगी ने कहा, “कुछ पुण्यात्मा एक हादसे का शिकार हो गए थे। उस स्थिति में आप लोगों (संतों) ने धैर्य के साथ एक अभिभावक के रूप में पूरी हिम्मत के साथ उन चुनौतियों का सामना किया और उससे उबरने में मदद की कोशिश की। कुछ लोग जो सनातन के विरोधी हैं। उनकी कोशिश थी कि संतों का धैर्य जवाब दे दे। उसके बाद जगहँसाई का कार्य कराया जाए।”

वहीं, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सिर पर शिवलिंग रखकर संगम में डुबकी लगाई। धनखड़ के साथ सीएम योगी ने पक्षियों को दाना खिलाया। इसके बाद लेटे हनुमान मंदिर में पूजा की और सरस्वती कूप एवं अक्षयवट के दर्शन किए। उपराष्ट्रपति ने कुंभ क्षेत्र का दौरा भी किया। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 5 फरवरी को महाकुंभ में स्नान कर सकते हैं।

वहीं, प्रयागराज महाकुंभ में अमेरिका, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, रूस, स्विट्जरलैंड, जापान, न्यूजीलैंड, जर्मनी, नेपाल, कनाडा सहित 77 देशों के 118 राजनयिकों ने स्नान किया। इससे पूर्व 2019 के कुंभ में भी 73 देशों के राजनयिकों को बुलाया गया था। इन राजनयिकों ने प्रयागराज महाकुंभ और उसकी व्यवस्था का मुक्त कंठ से प्रशंसा की है।

महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु स्वच्छता का भी ध्यान रख रहे हैं। 13 से 31 जनवरी तक महाकुंभ में 31.50 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं। यह संख्या दिल्ली की आबादी से लगभग नौ गुना अधिक है। हालाँकि, इतनी आबादी आने के बावजूद भी 19 दिन में मेला क्षेत्र में सिर्फ 6,000 मीट्रिक टन कूड़ा ही निकला। यहाँ रोज औसतन 300 और विशेष पर्वों पर 400 मीट्रिक टन कूड़ा निकल रहा है।

मेला क्षेत्र में निकले कूड़ा का घूरपुर स्थित प्लांट में भेजा जा रहा है।  रोजाना प्लांट में कूड़ा प्रोसेसिंग के बाद आरडीएफ को सीमेंट फैक्टरी में भेज दिया जा रहा है। बता दें कि करीब करीब 3.46 करोड़ की जनसंख्या वाली दिल्ली में रोजाना 11,000 मिट्रिक टन कूड़ा निकलता है। कूड़ा उत्सर्जित करने में पहले नंबर पर लखनऊ और दूसरे स्थान पर कानपुर है। 

नया या पुराना… अब कौन सा टैक्स स्लैब है बेहतर, ₹12 लाख तक की कमाई के आयकर मुक्त होने का क्या है मतलब; ₹13 लाख पर कितना देना होगा इनकम टैक्स: जानिए सब कुछ एक साथ

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025-26 में मिडल क्लास को राहत देते हुए इनकम टैक्स की नई दरों की घोषणा की है। बजट में ऐलान किया गया है कि अब ₹12 लाख तक की सालाना कमाई पर कोई भी इनकम टैक्स नहीं लगेगा। सैलरी पाने वाले लोगों को ₹12.75 लाख की कमाई तक कोई टैक्स नहीं देना होगा।

केंद्र सरकार ने टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव किए हैं। अब ₹4 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। वहीं ₹4 लाख-₹8 लाख तक की कमाई पर 5%, ₹8 लाख-₹12 लाख तक 10% और ₹12 लाख-₹16 लाख तक 15% और ₹16 लाख-20 लाख तक 20% और ₹20 लाख से ₹24 लाख की कमाई पर 25% टैक्स लगेगा।

सबसे ज्यादा टैक्स ₹30 लाख से अधिक कमाई पर लगेगा। यह टैक्स स्लैब 30% का होगा। अब प्रश्न उठे हैं कि अगर अब ₹12 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना तो फिर इस कमाई के नीचे ही क्यों दो टैक्स स्लैब बनाए गए हैं। क्योंकि ₹4 लाख से ₹8 लाख पर 5% और ₹8 लाख से ₹12 पर 10% का टैक्स लगाया गया है।

दरअसल, यह टैक्स स्लैब इसलिए बनाए जाते हैं ताकि इनके आधार पर टैक्स का कैलकुलेशन किया जा सके। क्योंकि जब किसी की कमाई ₹12 लाख से ज्यादा होगी तो इस पर सीधे-सीधे टैक्स नहीं लगाया जाएगा बल्कि इसको अलग-अलग स्लैब में बाँटा जाएगा।

उदाहरण के लिए, यदि किसी की कमाई अगर ₹13 लाख है तो उसे इस पूरी कमाई पर ₹12 लाख से ₹16 लाख वाले 15% के स्लैब के अनुसार टैक्स नहीं लगेगा। यानी इस कमाई पर ₹1.95 लाख का टैक्स नहीं लिया जाएगा।

इस कमाई पर सारे टैक्स स्लैब में बाँट कर टैक्स लगाया जाएगा। इसके लिए सबसे पहले इसमें से ₹75 हजार घटाए जाएँगे। इन्हें स्टैण्डर्ड डिडक्शन कहते हैं। तब यह कमाई ₹12.25 लाख बनेगी। अब इसको स्लैब में बाँट कर अलग अलग दरों से सरकार टैक्स जोड़ेगी।

इस ₹12.25 लाख में से ₹4 लाख तक 0% टैक्स लगेगा। इसके बाद अगले ₹4 लाख से ₹8 लाख पर 5% टैक्स लगेगा, यानी इस पर ₹20 हजार का टैक्स लगाया जाएगा। अगले बचे हुए ₹4 लाख पर 10% टैक्स लगेगा। यानी यह ₹40 हजार होगा। इसके बाद जो ₹25 हजार बचेंगे उन पर 15% वाले स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। यह ₹3750 होगा।

इस प्रकार कुल टैक्स ₹63750 हजार होगा। इसमें कुछ सेस वगैरह भी जोड़े जाते हैं। इसमें भी अलग-अलग तरह की छूट मिलती है। सरकार यह स्लैब इसलिए बनाती है ताकि टैक्स देने वालों को फायदा हो। यदि वह कमाई पर सीधे-सीधे टैक्स लेने लगे तो यह ज्यादा हो जाएगा जबकि स्लैब के हिसाब से लेने पर यह अलग-अलग हिस्सों में बंट जाता है।

यही टैक्स पुराने स्लैब के हिसाब से कहीं अधिक होता। अभी तक लागू टैक्स स्लैब में भी पहले ₹75 हजार घटाए जाते। इसके बाद इस कमाई में सबसे पहले ₹0-3 लाख वाली दरें लगाई जाती। चूंकि यह शून्य है, ऐसे में यह टैक्स फ्री होता है। इसके बाद ₹3 लाख-₹7 लाख वाला टैक्स लैब लगाया जाएगा। यह टैक्स 5% था। ऐसे में इस पर ₹20 हजार टैक्स लगता।

अगला स्लैब इस कमाई पर ₹7 लाख से ₹10 लाख वाला होता। इस पर 10% टैक्स लगता। यानी यहाँ ₹30 हजार का टैक्स लगाया जाता। इसके बाद इस कमाई में बचे रुपयों पर ₹10 लाख से ₹12 लाख वाला स्लैब लगाया जाएगा। यहाँ 15% टैक्स लगता है।

इसमें भी ₹30 हजार का टैक्स लगता। इसके बाद बचते ₹25 हजार, जिन पर ₹20% की दर लगती, जो ₹12 लाख से ₹15 लाख की कमाई के बीच लगता। यह ₹5 हजार होता। इस प्रकार इन सबको जोड़ा जाए तो यह ₹85 हजार होता। यानी अब ₹13 लाख कमाने वाले को कमसे कम ₹22 हजार की बचत होगी।

एयरपोर्ट, मखाना बोर्ड, NIFTEM… दुलारी देवी की दी साड़ी में आईं, बजट में दिखाया दुलार: 50+ साल से अटके कोसी नहर की भी ली सुध, जानिए कैसे बिहार की तस्वीर बदलेगी मोदी सरकार

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार (1 फरवरी 2025) को बजट पेश किया। इस दौरान वह बिहार की मशहूर मधुबनी पेंटिंग वाली क्रीम कलर की साड़ी पहनी हुई नजर आईं। मिथिला क्षेत्र में रेशम और कपास से बनने वाली हस्त निर्मित इस साड़ी को बिहार की रहने वाली पद्मश्री विजेता दुलारी देवी ने 2 महीने पहले उन्हें उपहार में दिया था। उस दौरान वह एक कार्यक्रम के लिए मधुबनी आई थीं।

कहा जा रहा है कि पद्मश्री दुलारी देवी ने उपहार देते समय वित्त मंत्री को से आग्रह किया था कि इस साड़ी को वह बजट पेश करने के दिन पहनें। निर्मला सीतारमण ने दुलारी देवी का मान रखते हुए उनकी दी साड़ी को पहनकर बजट किया। इस बजट में उन्होंने मध्यम वर्ग के लोगों को 12 लाख रुपए तक की आय को आयकर मुक्त करने के साथ-साथ बिहार को बड़ी सौगात भी दिए।

इनमें इनमें ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, मखाना बोर्ड का गठन, राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान, आईआईटी पटना का विस्तार, मिथिलांचल में पश्चिमी कोसी नहर परियोजना, बोधगया एवं वैशाली सहित भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों का विकास आदि शामिल हैं। इस बजट से बिहार के लोगों के साथ-साथ बिहार के नेता भी खुश हैं। इन परियोजनाओं के कारण बिहार को कई तरह का फायदा होगा।

बोर्ड के गठन से मखाना के उत्पादन, मार्केटिंग और प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलेगा। बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र के लगभग 35,000 हेक्टेयर में मखाने की खेती होती है। इससे लगभग 25,000 किसान परिवार जुड़े हैं। बिहार सरकार भी अगले दो-तीन साल में 50-60 हजार हेक्टेयर में मखाना की खेती होने और 50 हजार और किसानों को जोड़ने के लिए प्रयासरत है। बोर्ड बन जाने के किसानों की आय बढ़ेगी।

देश में सबसे अधिक मखाना उत्पादन बिहार में होता है। देश के कुल मखाना का 85 प्रतिशत उत्पादन होता है। इसलिए, इस खेती से जुड़े लोगों को FPO के रूप में संगठित करने की घोषणा वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने किया है। मखाना बोर्ड इससे जुड़े किसानों को सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करेगा। इसके साथ ही बोर्ड इससे जुड़े किसानों को सभी प्रासंगिक सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करेगा।

इससे मधुबनी, दरभंगा, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, अररिया, सीतामढ़ी और किशनगंज जिले में मखाना की खेती प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा बंगाल, असम और यूपी के उन जिलों को भी फायदा होगा, जहाँ मखाने की खेती होती है। बिहार का मखाना अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जापान, इंग्लैंड जैसे देशों में निर्यात किया जाता है। भारत में मखाना का बाजार 100 करोड़ रुपए है।

बिहार को तीन ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट भी मिले हैं। ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का मतलब होता कि किसी ऐसी जमीन पर एयरपोर्ट बनाना, जहाँ पहले से कोई निर्माण नहीं किया गया हो। यह पूर्णया नए सिरे से विकसित करके बनाया जाता। है। आमतौर पर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को शहर से काफी दूर बनाया जाता है। ये पटना एयरपोर्ट के विस्तार और बिहटा में एक ब्राउनफील्ड हवाई अड्डे के अतिरिक्त होंगे।

बता दें कि पटना एयरपोर्ट पर 1,400 करोड़ रुपए की लागत से नए टर्मिनल भवन का निर्माण का हो रहा है, जो अपने अंतिम चरण में है। इसे इसी महीने पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। नए टर्मिनल के बन जाने से यात्रियों की क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में पटना एयरपोर्ट का पीक आवर में रोजाना 1300 यात्रियों की क्षमता है। इसकी वार्षिक क्षमता 23 लाख है।

यहाँ पर अभी एक साथ पाँच फ्लाइट को पार्क किया जा सकता है। पटना एयरपोर्ट का रनवे भी अभी बेहद छोटा यानी 6800 फीट का है। इसके साथ ही यहाँ से विदेशों के लिए सीधी उड़ान भी नहीं है। देश के कई शहरों के साथ भी पटना सीधे नहीं जुड़ा है। पटना एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का भवन के शुरू हो जाने के बाद यहाँ यात्रियों की सालाना क्षमता एक करोड़ हो जाएगी।

इसके साथ ही पटना देश के कई शहरों से सीधी उड़ान के साथ जुड़ जाएगा। पटना से विदेशों के लिए भी सीधी उड़ान सेवा शुरू होने वाली है। इसके अलावा, यात्रियों की सुविधाओं में भी तेजी से वृद्धि होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में उड़ान स्‍कीम के तहत नए एयरपोर्ट के निर्माण के साथ बंद पड़े एयरपोर्ट के जीर्णोंद्धार की बात भी कही है। इससे बिहार को फायदा मिलने की उम्मीद है।

वहीं, बिहटा हवाई अड्डे की नई इमारत 66,000 वर्ग मीटर में फैली होगी, जो सालाना 50 लाख यात्रियों को सँभालेगी। इसे सालाना 1 करोड़ यात्रियों तक बढ़ाया जा सकता है। वाई अड्डे पर एक समय में 3,000 यात्रियों की क्षमता होगी। इसके साथ ही 10 विमानों को पार्किंग बनाए जाएँगे। लगभग 2027 के अंत तक पूर्ण होने वाले इस एयरपोर्ट की रनवे की लंबाई 3700 मीटर तक बढ़ाने की योजना है।

वित्त मंत्री ने बिहार में बिहार में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) की स्थापना करने की भी घोषणा की है। इससे पूरे पूर्वी क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण क्षमताएँ मजबूत होंगी। इसके साथ ही किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इससे पूर्वी भारत में बिहार खाद्य प्रसंस्करण के केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

केंद्रीय बजट में IIT पटना में सीटों की संख्या बढ़ाने की भी घोषणा की गई है। बिहार 2008 में स्थापित आईआईटी पटना के छात्रावास और अन्य बुनियादी ढाँचे की क्षमता में विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही बिहार को एजुकेशनल हब बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके साथ ही बिहार सहित देश भर में AI शिक्षा के लिए 500 करोड़ रुपए के बजट प्रावधान किया गया है।

पटना से करीब 35 किलोमीटर दूर बिहटा में लगभग 501 एकड़ जमीन पर IIT बनाया गया है। इस संस्थान को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान माना जाता गया है। इसमें आधुनिक क्लासरूम, प्रयोगशाला और पुस्तकालय हैं। संस्थान में छात्र-छात्राओं के लिए फुटबॉल, क्रिकेट, बॉस्केटबॉल और वॉलीबॉल जैसी खेल सुविधाएँ हैं। IIT में बीएससी, एमटेक, एमबीए और बीबीए जैसे कोर्स कराए जाते हैं।

साल 2024 में आईआईटी पटना के 817 सीटों में 797 सीटों पर दाखिला हुआ था। वहीं, 20 सीटें खाली रह गई थीं। आईआईटी पटना में फिलहाल दो बॉयज हॉस्टल हैं और एक गर्ल्स हॉस्टल है। पीएचडी और मास्टर्स के छात्रों के लिए दो मैरिड स्कॉलर अपार्टमेंट भी उपलब्ध हैं। फिलहाल IIT पटना के हॉस्टल में 1500 से अधिक छात्र-छात्राएँ रह रहे हैं।  

बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाके कोसी क्षेत्र में पश्चिमी कोसी नहर परियोजना शुरू की जाएगी। इस परियोजना से बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में 2.5 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खेती करने वाले किसानों को लाभ मिलेगा। इसमें बाढ़ के कहर से बचाने की कोशिश की गई है। बता दें कि वेस्टर्न कोसी कैनाल प्रोजेक्ट करीब 50 साल से अधर में लटका हुआ है। इससे पूरा मिथिलांचल प्रभावित होगा।

बजट में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का भी ऐलान किया गया, जिसमें पहली बार में देश के 100 जिलों को शामिल किया गया है। इनमें बिहार के भी कई जिले शामिल हैं। इसके अलावा, भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों को पर्यटन स्थल के के रूप में बढ़ावा देने की भी घोषणा की गई है। इस योजना के तहत बिहार के बोधगया और वैशाली का विकास किया जाएगा।

इन दोनों देश के अन्य बौद्ध स्थलों से जोड़ा जाएगा। इससे बिहार में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और दुनिया भर से बिहार आने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगा। निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश के शीर्ष 50 पर्यटन स्थलों को संबंधित राज्यों के साथ साझेदारी में चुनौती मोड में विकसित किया जाएगा। इससे दुनिया के नक्शे पर बिहार के स्थलों की पहचान बढ़ेगी।

मुस्लिम बना लें उर्दूस्तान, तमिल बनाएँ द्रविड़स्तान: खालिस्तानी आतंकी पन्नू मणिपुर को अलग-थलग करने की रच रहा था साजिश, भारत सरकार ने SFJ पर 5 साल बैन और बढ़ाया

भारत से मणिपुर को अलग करने के लिए खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का संगठन सिख फॉर जस्टिस मणिपुर के तमिलों, मुस्लिमों और ईसाइयों को भड़काने में जुटा था। ये जानकारी गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश के बाद सामने आई है। गृह मंत्रालय ने पन्नू के खालिस्तानी संगठन पर 5 साल के लिए बैन को बढ़ा दिया है। इससे पहले SFJ कोल आतंकी संगठन घोषित करते हुए बैन साल 2020 में लगा था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, खुफिया नोट में कहा गया है कि सिख फॉर जस्टिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के खिलाफ धमकियों सहित आतंकी कृत्यों की योजना बनाई थी। इसके अलावा इसमें ये भी कहा गया कि ये संगठन अल्पसंख्यक समुदायों को दूसरे समुदायों के खिलाफ भड़काकर सांप्रदायिक आधार पर लोगों को बाँटकर अपने भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाता है।

आगे नोट में कहा गया कि आतंकी संगठन ईसाइयों को भड़काकर कहता है कि उनको अपना अलग देश बनाना चाहिए। इसी तरह मुस्लिमों को भड़काकर उर्दूस्तान बनाने को कहता है और तमिलों को उकसाकर द्रविड़स्तान बनाने को कहता है।

रिपोर्ट में ये भी जानकारी दी गई है कि कैसे सिख फॉर जस्टिस संगठन भारत में किसानों को भड़काने में शामिल था और कैसे वो दलित समुदायों को भड़काता है। SFJ दलितों को कहता था कि भारत सरकार ने उनका उत्पीड़न किया है इसलिए उन्हें अपना अलगाववादी अभियान शुरू करना चाहिए।

गौरतलब है कि सिख फॉर जस्टिस का उद्देश्य भारत के अल्पसंख्यकों को भड़काने और भारत में हिंसा कराना रहता है। संगठन को पाकिस्तान से समर्थन प्राप्त है और वह आतंकवादियों, गैंगस्टरों तथा कश्मीरी अलगाववादियों के साथ संपर्क में रहता है। यह संगठन विदेशों में रह रहे सिखों को भी अपने उद्देश्यों के लिए प्रेरित करने का प्रयास करता है। इन्हीं सब बिंदुओं को देखते हुए सरकार ने इस संगठन पर एक्शन लेते हुए इस पर पाँच साल तक प्रतिबंध बनाए रखने का निर्णय लिया।

किसान से लेकर डिलिवरी बॉय तक, मिडिल क्लास से लेकर MSME तक… सब हुए बम-बम: जानिए बजट की महत्वपूर्ण बातें, किस वर्ग को क्या मिला; कैसे शिक्षा-इन्फ्रा पर दिया जोर

देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2025-26 का बजट पेश कर दिया है। इस बजट से सबसे बड़ी राहत देश के मिडल क्लास को मिली है। मोदी सरकार ने मिडल क्लास को राहत देते हुए इनकम टैक्स में छूट की सीमा को बढ़ा दिया है। मिडल क्लास के अलावा कृषि क्षेत्र के लिए भी सरकार ने नई योजनाओं का ऐलान किया है। बजट में देश के MSME सेक्टर के लिए भी बड़े ऐलान किए गए हैं। इन्फ्रा सेक्टर को लेकर भी मोदी सरकार ने कई ऐलान किए हैं।

नए टैक्स स्लैब का हुआ ऐलान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025-26 में ऐलान किया है कि अब ₹12 लाख की कमाई तक कोई भी इनकम टैक्स नहीं लगेगा। अब तक यह सीमा ₹7 लाख थी। अब इसे ₹5 लाख और बढ़ा दिया गया है। इसी के साथ देश में इनकम टैक्स की दरें भी बदल गई हैं। वित्त मंत्री ने टैक्स दरों में भी बदलाव किया है।

वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया है कि टैक्स में छूट देने से सरकार को डायरेक्ट टैक्स में ₹1 लाख करोड़ और इनडायरेक्ट टैक्स में ₹2600 करोड़ का नुकसान होगा। सरकार जल्द ही टैक्स को लेकर नया बिल लाएगी।

किसानों के लिए नई योजना

केंद्र सरकार देश के किसानों के लिए एक नई योजना ला रही है। यह योजना देश के उन 100 जिलों में लागू की जाएगी, जहाँ पैदावार बाकी जिलों से औसतन कम है। इसके लिए उन जिलों को फोकस में रख कर काम होगा। इसका नाम प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना होगा। वित्त मंत्री ने कहा है कि इससे 1.7 करोड़ किसानों को फायदा होगा।

इसमें पहले से चल रही कृषि योजनाओं को भी शामिल किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा है कि इससे कृषि क्षेत्र में रोजगार के मौके पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि इससे पलायन केवल एक विकल्प के रूप में रह जाएगा, ना कि मजबूरी होगा। इस योजना में फोकस महिलाओं और युवाओं पर होगा।

सरकार दालों के उत्पादन के लिए भी कमर कस रही है। सरकार ने कहा है कि वह दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए एक मिशन लॉन्च करेगी। यह 6 वर्षों में पूरा किया जाएगा। इसमें तुअर, उड़द और मसूर की डाल पर मुख्य फोकस होगा। केन्द्रीय एजेंसियाँ इन दालों की पूरी उपज की खरीद करेंगी।

सरकार बिहार में मखाना पैदावार के लिए मखाना बोर्ड का गठन करेगी। इस क्षेत्र के किसानों को संगठित करेगी और उन्हें ट्रेनिंग भी देगी। सरकार किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा भी ₹3 लाख से बढ़ा कर ₹5 लाख कर देगी। इसके अलावा यूरिया का एक नया प्लांट असम में भी लगाया जाएगा।

डिलीवरी बॉय भी होंगे लाभान्वित

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि जोमैटो-स्विगी समेत बाकी ऐसी ही कंपनियों के लिए काम करने वाले डिलीवरी बॉय (गिग वर्कर्स) को सरकार श्रमिक का दर्जा देगी। उनके लिए E-श्रम पोर्टल में रजिस्ट्रेशन का विकल्प खोला जाएगा।

इन्हें पहचान पत्र जारी किए जाएँगे। इसके अलावा इन्हें पीएम आरोग्य योजना के अंतर्गत बीमा दिया जाएगा। सरकार के इन क़दमों से 1 करोड़ से अधिक गिग वर्कर्स को फायदा होगा। सरकार इसके अलावा इन गिग वर्कर्स की सुरक्षा के लिए भी कदम उठाएगी।

MSME को भी दिए कई गिफ्ट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में MSME क्षेत्र के लिए भी कई बड़े ऐलान किए हैं। बजट में ऐलान किया गया है कि सरकार अब माइक्रो स्तर के कारोबारियों के लिए क्रेडिट कार्ड जारी करेगी। इसमें ₹5 लाख तक की लिमिट होगी। सरकार इस तरह के 10 लाख कार्ड जारी करने जा रही है। सरकार ने MSME की श्रेणियाँ भी बदलने का फैसला किया है।

अब सरकार माइक्रो उद्यमी उन्हें मानेगी जिनका निवेश ₹2.5 करोड़ होगा। पहले यह ₹1 करोड़ था। इसके अलावा स्माल उद्यमी की सीमा बढ़ा कर ₹10 करोड़ से ₹25 करोड़ और मध्यम उद्योग की सीमा बढ़ा कर ₹50 करोड़ से ₹125 करोड़ कर है। सरकार इनकी कर्ज गारंटी भी बढ़ाने जा रही है।

इन्फ्रा पर भी जोर, जल जीवन मिशन बढ़ा

केंद्र सरकार ने इन्फ्रा पर भी जोर दिया है। बजट में ऐलान किया गया है कि अब जल जीवन मिशन को भी 2028 तक बढ़ा दिया है। इससे 100% नल से जल का मिशन पूरा किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि देश में अगले 10 वर्ष में 120 नए एयरपोर्ट बनाए जाएँगे।

यह उड़ान स्कीम के तहत बनाए जाएँगे। इससे 4 करोड़ यात्रियों को हवाई सेवा दिए जाने का लक्ष्य है। सबसे अधिक फायदा इससे बिहार को होगा। बिहार में सरकार बिलकुल नए सिरे से एयरपोर्ट बनाएगी।वित्त मंत्री ने कहा है कि बिहार में पटना एयरपोर्ट का विस्तार भी किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा है कि उड़ान स्कीम के तहत 88 छोटे शहर भी हवाई सेवा से जोड़े जाएँगे।

सरकार छोटे न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने के लिए ₹20 हजार करोड़ देगी। 2033 तक पाँच नए रिएक्टर चालू हो जाएँगे। इसके अलावा रोड तथा रेल पर निवेश भी जारी रहेगा। सरकार ने बजट में ऐलान किया है कि वह स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कदम उठाने जा रही है।

शिक्षा पर भी जोर

 सरकार 2014 के बाद बनाए गए 5 IIT में नया इन्फ्रा बनाएगी। इससे इन IIT में 6500 छात्रों को भर्ती किया जा सकेगा और उन्हें सुविधाएँ दी जा सकेगीं। इस इन्फ्रा के तहत हॉस्टल और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएँ बनाई जाएँगी।

वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि IIT पटना का भी विस्तार किया जाएगा। उन्होंने यह भी ऐलान किया है कि देश के मेडिकल कॉलेज में 10,000 अतिरिक्त सीट बढ़ाई जाएंगी। अगले पाँच वर्षों में 75000 सीट बढ़ाने की योजना है। उन्होंने यह भी ऐलान किया है कि देश के हर जिला अस्पताल में कैंसर सेंटर स्थापित किए जाएँगे। यह काम अगले तीन साल के भीतर होगा।

यीशु की शरण में आओ, ईसा मसीह से छोटे हैं तुम्हारे देवी-देवता… नाम- कीर्ति केशरवानी, काम- लालच दे हिंदुओं को ईसाई बनाना: रायपुर में घर को बना रखा था ‘चर्च’, बीमार और गरीब थे मेन टारगेट

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हिंदुओं का धर्मांतरण के लिए आयोजित एक चंगाई सभा को लेकर जमकर हंगामा हुआ। चंगाई सभा में महिलाओं और बच्चों समेत 10 लोग मौजूद थे। आरोप है कि पादरी ने इस दौरान हिंदू देवी-देवताओं को लेकर अभद्र टिप्पणी की। धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने के आरोप में पुलिस ने पादरी कीर्ति कुमार केशरवानी, महारथी बंजारे और जीवन लाल साहू को गिरफ्तार कर लिया है।

दरअसल, हिंदू कार्यकर्ताओं को 26 जनवरी को सूचना मिली कि पंडरी थाना क्षेत्र के मितान विहार में चंगाई सभा का आयोजन किया गया है। इसमें लोगों का धर्मांतरण और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया जा रहा है। इसके बाद हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता भारी संख्या में जुटकर घटनास्थल पर हंगामा करने लगे। सिटी एडिशनल एसपी लखन पटले को जानकारी मिली तो वे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे।

दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में आरोपितों के खिलाफ दर्ज FIR के हवाले से कहा गया है कि पादरी कीर्ति कुमार केशरवानी और उसके सहयोगी चंगाई सभा में हिंदू देवी-देवताओं को ईसा मसीह से छोटा बता रहे थे। वे लोगों से ईसा मसीह की शरण में आने के लिए उकसा रहे थे और कह रहे थे कि यीशु की शरण में आने से सारे दुख दूर हो जाते हैं। चंगाई सभा पादरी के किराए के मकान में चल रहा था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 9 सालों से यहाँ रह रहे पादरी ने मकान में अस्थाई चर्च बना रखा है। यहाँ पर लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए बहकाया और कई तरह से लालच दिया जाता है। लोगों का कहना है कि गरीब और बीमार हिंदुओं को ये लोग निशाना बनाते थे और उन्हें ईसाई धर्म अपनाने का लालच देते थे। वे कहते थे कि ईसाई बन जाने पर सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा।

घटना के दिन वे चार हिंदू परिवारों का ईसाई में धर्मांतरण करा रहे थे। कहा जा रहा है कि पादरी और उसके साथी केरल के बिलीवर्स ईस्टर्न चर्च से जुड़े हैं। सिविल लाइन CSP अजय कुमार ने बताया कि पादरी कीर्ति कुमार केशरवानी के खिलाफ माया अग्रवाल ने FIR दर्ज कराई है। उनके घर में हर रविवार को प्रार्थना सभा होती थी। उस प्रार्थना सभा में कई परिवार शामिल होने के लिए आते थे।

जशपुर राजघराने के प्रमुख एवं अखिल भारतीय घर वापसी के मुखिया प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि मतांतरण एक विदेशी षड्यंत्र है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक आतंकवाद बताते हुए इस पर जल्द-जल्द काबू किए जाने की जरूरत की बात कही। भाजपा नेता प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा, “मिशनरी हमारे लिए स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं। दोषियों को सजा देने के लिए एक कड़ा कानून बहुत जरूरी है।”

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने साजिश के तहत शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिशनरियों के हवाले कर दिया। इन मिशनरियों ने सेवा के बदले सौदा की नीति के तहत धर्मांतरण का खेल खेला है। वहीं, छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने इसे साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि ईसाई समाज को डराने की कोशिश की जा रही है। पन्नालालव ने कहा, “हमारे आदमियों पर जबरन कार्रवाई की गई है, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं।”

माछ, मखान और पान… मिथिला के सारे शुभ संकेत के साथ आया देश का बजट: कौन हैं दुलारी देवी जिनकी मिथिला पेंटिंग वाली साड़ी निर्मला सीतारमण ने पहनी

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2025 को 8 वीं बार बजट पेश कर रही हैं। इस खास अवसर वह विशेष परिधान में नजर आईं। उन्होंने क्रीम रंग की साड़ी पहनी, जिस पर अपनी कला की छाप छोड़ी है पद्म पुरस्कार से सम्मानित दुलारी देवी ने। इस साड़ी में मछली, पान, मखाना जैसे चित्र बनाए गए हैं जो मिथिला की संस्कृति में बेहद शुभ माने जाते है।

कौन हैं दुलारी देवी

दुलारी देवी बिहार के मधुबनी जिले की शान हैं। रांटी गाँव में जन्मीं दुलारी वैसे तो मछुआरा जाति से ताल्लुक रखती हैं लेकिन उनकी कला ने उन्हें आज वैश्विक पहचान दिलाई है। जीवन के शुरुआती साल उन्हें संघर्ष भरे बीते। घरवालों ने उनकी शादी छोटी उम्र में ही करवा दी थी। न पढ़ने-लिखने का मौका मिला और न सही से दुनिया समझने का।

बाद में एक वक्त आया जब उन्होंने पति के तानों से तंग आकर उसको भी छोड़ दिया और उन्हें आर्थिक तंगी से भी जूझना पड़ा। इसके बाद खेतों में मजदूरी करके, लोगों के घर झाड़ू-पोंछा करके अपना जीवनयापन किया। इसी बीच वह पहुँची मिथिला पेंटिंग की मशहूर कलाकार कर्पूरी देवी के घर। वहाँ उनका मिथिला पेंटिंग के लिए प्रेम जगा और वह महासुंदरी देवी से ट्रेनिंग लेने लगीं।

आगे चलकर उनकी कला न केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम बनी, बल्कि उन्होंने सामाजिक मुद्दों जैसे बाल विवाह, एड्स और भ्रूण हत्या पर जागरूकता फैलाने का कार्य भी किया।

कैसे दी वित्त मंत्री को मिथिला पेंटिंग वाली साड़ी

पिछले दिनों जब वित्त मंत्री बिहार का दौरा करते हुए मधुबनी के सौराठ स्थित मिथिला पेंटिंग इंस्टिट्यूट पहुँची थीं, वहीं पद्मश्री दुलारी देवी ने उन्हें ये साड़ी भेंट में दी थी। इस साड़ी में उन्होंने सारे शुभ चिह्न उकेरे थे और शायद यही वजह है कि बजट वाले दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साड़ी को खास दिन के लिए चुना।

किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज की लिमिट बढ़ी, आएगी प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना, बिहार में बनेगा मखाना बोर्ड: लगातार 8वीं बार बजट पेश कर रहीं हैं निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बजट पेश कर दिया है। उन्होंने इस बजट में कृषि क्षेत्र के लिए एक नई योजना का ऐलान किया है। इसका नाम प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना होगा। वित्त मंत्री ने कहा है कि इससे 1.7 करोड़ किसानों को फायदा होगा।

वित्त मंत्री ने शनिवार (1 फरवरी, 2025) को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश किया है। वित्त मंत्री ने कहा है कि इस योजना में राज्यों की सहायता से कृषि पर काम होगा। यह योजना सबसे पहले चरण 100 जिलों में चालू की जाएगी। यह वो जिले होंगे जहाँ कृषि क्षेत्र का विकास नहीं हुआ है।

इसके लिए पहले से चल रही कृषि योजनाओं को भी शामिल किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा है कि इससे कृषि क्षेत्र में रोजगार के मौके पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि इससे पलायन केवल एक विकल्प के रूप में रह जाएगा, ना कि मजबूरी होगा। इस योजना में फोकस महिलाओं और युवाओं पर होगा।

वित्त मंत्री ने तिलहन के क्षेत्र के लिए भी नए प्रावधान लाने का ऐलान किया है। सरकार अब दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए एक मिशन लॉन्च करेगी। यह 6 वर्षों में पूरा किया जाएगा। इसमें तुअर, उड़द और मसूर की डाल पर मुख्य फोकस होगा। केन्द्रीय एजेंसियाँ इन दालों की पूरी उपज की खरीद करेंगी।

इसके अलावा सरकार सब्जियों तथा फलों के लिए भी योजना लाएगी। इसके लिए भी एक नया प्रोग्राम चालू किया जाएगा। वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि बिहार के भीतर मखाना बोर्ड का गठन होगा। यह मिथिला क्षेत्र को सबसे अधिक फायदा देगा।

मखाना पैदा करने वालों को संगठित किया जाएगा। उनका किसान संगठन (FPO) बनाया जाएगा। अच्छे बीजों के लिए भी काम किया जाएगा। वित्त मंत्री ने बजट में ऐलान किया है कि मत्स्य उत्पादन के लिए भी सरकार काम करेगी, सबसे अधिक फोकस अंडमान निकोबार तथा लक्षद्वीप पर रहेगा।

सरकार किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा भी ₹3 लाख से बढ़ा कर ₹5 लाख कर देगी। इसके अलावा यूरिया का एक नया प्लांट असम में भी लगाया जाएगा।