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वाजिद खान का निधन: किडनी और हार्ट की बीमारी के बाद कोरोना टेस्ट भी आया था पॉजिटिव, बॉलिवुड में शोक

बॉलीवुड इंडस्ट्री के मशहूर संगीतकार वाजिद खान का कल (1 मई 2020) रात मुंबई के चेम्बूर में स्थित सुरराणा सेठिया अस्पताल में निधन हो गया। वे 42 साल के थे। वाजिद कई सालों से किडनी और हार्ट की बीमारी से पीड़ित थे। हाल ही में उनका किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ था। एक हफ्ते पहले उनका कोरोना टेस्ट भी पॉजिटिव आया था।

किडनी की समस्या के कारण उनका इम्युनिटी लेवल बहुत कम हो गया था। जिसके चलते रविवार शाम को उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया मगर तमाम कोशिशों के बाद भी डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए।

वाजिद की मौत की वजहों में कोविड-19, किडनी का संक्रमण से लेकर हार्ट अटैक जैसी अलग-अलग अटकलें लगाई जा रही हैं। पिछले साल भी वाजिद को हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उनकी एंजिओप्लास्टी की गई थी। फिल्म इंडस्ट्री में साजिद-वाजिद की जोड़ी के रूप में मशहूर वाजिद खान के निधन को लेकर प्रियंका चोपड़ा, सोनू निगम, सलीम मर्चेंट सहित बॉलिवुड के तमाम अन्य बड़ी हस्तियों और उनके समर्थक ट्विटर पर शोक जाहिर कर रहे हैं।

बता दें कि वाजिद खान ने फिल्मी जगत के कई मशहूर सितारों के साथ काम किया है। उनकी जोड़ी ने सलमान खान की कई फिल्मों में जैसे कि ‘तुमको ना भूल पाएँगे’, ‘तेरे नाम’, ‘गर्व’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘पार्टनर’, ‘गॉड तुस्सी ग्रेट हो’, ‘वांटेड’, ‘मैं और मिसेज खन्ना’, ‘वीर’, ‘दबंग’, ‘नो प्रॉब्लम’ और ‘एक था टाइगर’ में अपना संगीत दिया है। सलमान के लिए ‘हमका पीनी है’, ‘मेरा ही जलवा’ समेत कई हिट गाने उन्हीं ने दिए हैं।

इसके अलावा उनकी जोड़ी ने शो ‘सा रे गा मा पा सिंगिंग सुपरस्टार’ और ‘बिग बॉस सीजन जैसे कई रियलिटी शो के लिए टाइटल ट्रैक किया था। आईपीएल के चौथे सीजन के थीम म्यूजिक ‘धूम धूम धूम धड़ाका’ को कोई कैसे भूल सकता है। इसका भी टाइटल ट्रैक वाजिद खान ने ही गाया था।

UP में नहीं लगेगा कोई अतिरिक्त टैक्स, प्रवासी मजदूर हैं हमारी ताकत: CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना महामारी के बीच राज्य में लागू हुए 2 महीने के लॉकडाउन के बाद एक महत्वर्ण फैसला लिया। इस फैसले के मद्देनजर उन्होंने कंटेनमेंट जोन को नियंत्रित करते हुए बाकी जगहों पर ज्यादातर कार्य शुरू करने की अनुमति प्रदान की। साथ ही ऐलान किया कि अब सरकार कोरोना के नाम पर कोई टैक्स नहीं लगाएगी।

यूपी CM ने कहा, “प्रदेश में कंटेनमेंट जोन को नियंत्रित करते हुए बाकी जगहों पर अधिकतम कार्य शुरू करने की अनुमति दी जा रही है। अब सरकार कोरोना के नाम पर कोई नया टैक्स नहीं लगाएगी। पिछले महीने की अपेक्षा राजस्व बेहतर हुआ है। हमारा ध्यान जनता को अधिक से अधिक छूट देने पर है।”

सीएम योगी ने बताया, “उत्तर प्रदेश में अधिकतर विकास योजनाएँ शुरू हो चुकी हैं। हमारा प्रयास है कि ‘जान भी और जहान भी’ दोनों को साथ लेकर चलेंगे। हम कोरोना की कड़ी तोड़कर आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं।”

वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के जरिए रविवार (मई 31, 2020) को मीडिया से बात करते हुए सीएम योगी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित गरीब कल्याण पैकेज तथा अन्य राहतों का सबसे ज्यादा फायदा उत्तर प्रदेश को मिला है। उसी का नतीजा है कि वह अपनी योजनाओं को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा सके हैं।

इसी के साथ उन्होंने जानकारी दी कि 4 चरणों के लॉकडाउन के बाद यूपी में सोमवार यानी आज से सभी सरकारी ऑफिस पूरी क्षमता के साथ खुलेंगे और बाजार भी रोटेशन बेसिस पर सुबह 9 बजे से शाम 9 बजे तक खुलेंगे। इसके अतिरिक्त अनलॉक-1 में पार्लर-सैलून खुलेंगे। इस दौरान टैक्सी कैब, ऑटो रिक्शा निर्धारित सवारी क्षमता के अनुसार बिठाकर चल सकेंगे। अब सारे प्रतिबंध कंटेनमेंट जोन तक ही सीमित रहेंगे।

इसके अलावा सामूहिक जुटान पर अभी भी प्रदेश में प्रतिबंध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिक लोगों को एकत्र होने से हर हाल में रोकना है, इसलिए कोई बड़े आयोजन नहीं होंगे। मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन के दौरान प्रदेश वापस लौटे प्रवासी मजदूरों को लेकर बोला कि अन्य राज्यों से यूपी में 30 लाख प्रवासी मजदूर लौटे हैं। ऐसे में सभी का मानना है कि इनके कारण अव्यवस्था फैलेगी। लेकिन उनका मानना है कि ये सरकार की ताकत हैं।

उन्होंने बताया, “सरकार ने उद्योगों की मैपिंग शुरू कर दी है। उद्योगों को बड़े पैमाने पर मैनपावर की जरूरत है। हम आर्थिक पैकेज का ज्यादा से ज्यादा लाभ एमएसएमई तक पहुँचाने में जुटे हैं। इसलिए, यूपी में काम की कोई कमी नहीं है।”

विपक्ष के तीखे सवालों और राजनीति पर भी सीएम योगी ने इस कॉन्फ्रेंस में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भगवान न करे विपक्ष के किसी नेता को कोरोना हो और उन्हें कोविड-19 अस्पताल जाना पड़े, अन्यथा वह वहाँ की वास्तविक स्थिति देखते। उन्होंने बताया कि जनता सुविधाओं से प्रसन्न है और वह हकीकत जानती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कॉन्ग्रेस पर दो टूक कहा कि ट्विटर पर टिप्पणी करने वालों ने किसी को मदद का एक पैकेट भी नहीं दिया। बल्कि कोटा से बच्चों को लाने का पैसा लिया और इस संकट की घड़ी में भी अपना फर्जीवाड़ा जारी रखा।

गौरतलब है कि इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जो मुद्दे एक समय तक नारों में सीमित थे, उन्हें मोदी सरकार ने हकीकत में बदला। जनधन अकाउंट, डीबीटी, पीएम आवास योजना, उज्ज्वला योजना कोरोना काल में लोगों के लिए मददगार बनीं। उन्होंने कहा, “संकट में देश का नेतृत्व कैसे किया जाता है यह PM मोदी से सीखना चाहिए। विश्व के अनुपात में भारत में कोरोना के केस व मौत के आँकड़े इसकी पुष्टि करते हैं।”

अमेरिका: दंगों के दौरान ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे, महिला प्रदर्शनकारी ने कपड़े उतारे: Video अपनी ‘श्रद्धा’ से देखें

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विरोध-प्रदर्शन देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा, दंगा, आगजनी, लूटपाट में तब्दील हो चुका है। सोशल मीडिया पर दो वीडियो सामने आए हैं। इनमें से एक में दंगाई ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे लगा रहे हैं। दूसरे वीडियो में एक महिला प्रदर्शनकारी कपड़े उतारते दिख रही है।

@diorIucas नाम के यूजर द्वारा ट्विटर पर शेयर की गई वीडियो में आप देख सकते हैं कि दंगाई लगातार इस्लामिक नारे लगा रहे हैं। वे ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के साथ ही ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए देखे और सुने जा सकते हैं।

दूसरे वीडियो में आप देख सकते हैं कि सैकड़ों की संख्या में सड़क पर प्रदर्शनकारी जमा हैं। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को अर्धनग्न अवस्था में देखा जा सकता है, जिनमें महिलाएँ भी शामिल हैं।

वीडियो में आप देखेंगे कि एक महिला पल्टी कार के ऊपर चढ़ती है और अपने कपड़े उतारकर विरोध जताती है। इतना ही नहीं पास में खड़े लोग अपने मोबाइल से इस दृश्य को कैद करने में लगे हुए हैं।

इस प्रदर्शन के एक फोटो को @Millie__Weaver नाम के यूजर ने भी अपने ट्विटर एकाउंट से शेयर किया है।

आपको बता दें कि 46 वर्षीय अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की एक मिनिपोलिस पुलिस अधिकारी के हाथों मौत हो गई थी। कथित तौर पर उस मिनिपोलिस पुलिस अधिकारी ने फ्लॉयड की गर्दन पर लगभग 9 मिनट तक अपना घुटना रखा। जॉर्ज फ्लॉयड इस दौरान घुटना हटाने की गुहार लगाता रहा।

उसने यह भी कहा कि वह साँस नहीं ले पा रहा है। लेकिन पुलिस अधिकारी नहीं पिघला और फ्लॉयड की मौत हो गई। इसके बाद लोगों का गुस्सा पुलिस के प्रति भड़क गया और हिंसक रूप ले लिया।

शनिवार (30 मई 2020) को यह विरोध-प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया, जिसके कारण कई शहरों ने कर्फ्यू लगा दिया गया। फिलाडेल्फिया में प्रदर्शनकारियों ने मियामी में राजमार्ग को यातायात को बंद करने के दौरान एक मूर्ति को गिराने की कोशिश भी की।

गौतरतलब है कि पिछले साल भारत में हुए सीएए विरोध प्रदर्शनों में के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान छात्रों को ला इलाहा इल्लल्लाह, मुहम्मदान रसूलुल्लाह का नारा लगाते हुए सुना गया था।

इतना ही नहीं शरजील इमाम के समर्थन में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने द्वारा 22 फरवरी, 2020 को निकाले गए मार्च में भी जामिया के छात्रों ने ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ जैसे मजहबी नारे लगाए थे। साथ ही कई अन्य नारों के जरिए मोदी सरकार का विरोध किया गया था और शरजील इमाम का समर्थन किया गया था।

जासूसी करते पकड़े गए पाकिस्तानी उच्चायोग के आबिद और ताहिर हुसैन, भारत छोड़ने के लिए 48 घंटे का वक्त

दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के दो कर्मचारी जासूसी करते पकड़े गए हैं। इनकी पहचान आबिद हुसैन और ताहिर हुसैन के तौर पर की गई है। दोनों उच्चायोग के वीजा विभाग में काम करते हैं।

दिल्ली पुलिस ने रविवार (मई 31, 2020) को इन्हें भारत विरोधी गतिविधि में लिप्त होते रंगे हाथों पकड़ा। दोनों को भारत छोड़ने के लिए दो दिनों का वक्त दिया जाएगा।

बताया जा रहा है कि दोनों ने भारतीय नागरिक होने की फर्जी पहचान बना ली थी। हर जगह इसका ही इस्तेमाल करते थे। जल्द ही उन्हें भारत विरोधी गतिविधियाँ करने के आरोप में अवांछित व्यक्ति (Persona-non grata ) घोषित किया जाएगा और दोनों को पाकिस्तान वापस भेज दिया जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले 2016 में, पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी महमूद अख्तर के पास से संवेदनशील दस्तावेज मिलने के बाद उन्हें persona non grata घोषित किया गया था।

पूछताछ के दौरान, अख्तर ने खुलासा किया था कि वह पाकिस्तान सेना की बलूच रेजिमेंट से संबंधित था और डेपुटेशन पर पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस (ISI) में शामिल हो गया था। वह सितंबर 2013 से नई दिल्ली के पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात था।

पाकिस्तान के उच्चायुक्त को तत्कालीन विदेश सचिव ने बुलाया और अख्तर की गतिविधियों पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान ने उसी दिन बदले की नीयत से इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के एक सहायक कार्मिक और वेलफेयर अधिकारी सुरजीत सिंह को persona non grata घोषित कर दिया था।

28 साल पहले घरवालों ने जिसे मरा बताया, वह कोरोना के डर से अमेरिका से भारत लौटा, CBI ने पकड़ा

पंजाब के पटियाला से CBI ने एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ा है जो 28 वर्ष पहले खुद को मरा दिखाकर अमेरिका भाग गया था। कोरोना के कारण उसे भारत लौटना पड़ा।

इस व्यक्ति की पहचान पटियाला के पंजाबीबाग निवासी 65 वर्षीय निर्मल सिंह के रूप में हुई है। करीब दो महीने पहले अमेरिका से लौटे निर्मल सिंह की जानकारी जैसे ही सीबीआई को हुई तो वह शनिवार (30 मई, 2020) को उसके घर पहुँच गई।

सीबीआई टीम के घर पहुँचते ही मामले की पोल खुलने पर निर्मल सिंह बेहोश हो गया। सीबीआई ने निर्मल सिंह और उसकी पत्‍नी को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपित को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सीबीआई के सब इंस्पेक्टर विकास कुमार ने बताया कि एंबुलेंस से पति-पत्नी दोनों को चंडीगढ़ ले जाया गया है। वहाँ मेडिकल करवाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि निर्मल सिंह की पत्‍नी ने एक यूट्यूब चैनल खोल रखा था, जिसे कुछ महीने पहले ही उसने एक दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया था।

इसके बाद दोनों में विवाद हो गया था, जिसकी शिकायत सिविल लाइन थाना में भी दर्ज करवाई गई थी। दोनों में झगड़ा इस कदर बढ़ गया कि निर्मल सिंह के इस फर्जीवाड़े की सूचना सीबीआई तक भी पहुँच गई और टीम ने शनिवार को उसे पकड़ लिया। फिलहाल सीबीआई ने मदद करने के आरोप में उसकी पत्नी पीएस बाठ पर भी केस दर्ज किया है।

सीबीआई से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 1985 में निर्मल सिंह ने ढाई लाख की ठगी की थी। मामला हाईप्रोफाइल होने के बाद इसकी जाँच सीबीआई को सौंपी गई थी। मामले में कार्रवाई करते हुए वर्ष 1990 में जब सीबीआई ने आरोपित के खिलाफ में मुकदमा दर्ज किया। वर्ष 1991 में निर्मल सिंह के परिजनों ने उसे मरा हुआ दिखा दिया।

इतना ही नहीं परिजनों ने एक व्यक्ति के शव को निर्मल का बताकर उसका अंतिम संस्कार भी करा दिया। परिजनों ने इसकी जानकारी सीबीआई को देने के साथ ही सबूत के तौर पर व्यक्ति के डेथ सर्टिफिकेट को भी जारी करवा लिया था। फिलहाल सीबीआई इस जाँच में जुट गई है कि मरने वाला व्यक्ति आखिर कौन था।

सोनू सूद पर टूट पड़े कॉन्ग्रेसी: BJP का एजेंट बताया, कहा- महाराष्ट्र सरकार को बुरा दिखाने के लिए कर रहे अच्छा काम

बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने पिछले कुछ हफ्तों से एक ऐसा जिम्मा उठाया हुआ है, जिसके लिए उन्हें चारों तरफ से तारीफें मिल रही हैं। लॉकडाउन में फँसे बेबस प्रवासी मजदूरों को सोनू बस का इंतजाम कर उनके घर भेजने का काम कर रहे हैं।

लेकिन इस बीच वे कॉन्ग्रेसियों के निशाने पर आ गए हैं। इसका कारण सोनू सूद का महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलना है। बता दें कि सोनू सूद ने शनिवार (मई 30, 2020) को राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात की थी।

बताया जा रहा है कि सोनू सूद ने राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें घर पहुँचाए जा रहे प्रवासी मजदूरों के बारे में जानकारी दी। इस दौरान सोनू सूद ने राज्यपाल को यह भी बताया कि वह कैसे प्रवासियों को घर पहुँचा रहे हैं और उनके लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सोनू सूद के इस अच्छे काम की सराहना की और उन्हें पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।

इसके तुरंत बाद सोनू सूद के ऊपर कॉन्ग्रेस समर्थकों ने हमला बोला। उन्होंने सोनू सूद को बीजेपी का एजेंट करार देते हुए कहा कि वो अच्छा काम इसलिए कर रहे हैं, ताकि राज्य में कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना की सरकार को बुरा दिखाया जा सके।

सोनू सूद की तुलना अन्ना हजारे के साथ भी की गई, जिन्होंने इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन शुरू किया, जिसके कारण अंततः आम आदमी पार्टी का निर्माण हुआ।

इतना ही नहीं, उन्हें खलनायक भी बनाया गया, क्योंकि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी एवं अन्य भाजपा नेताओं ने उनके काम की तारीफ की और उनके काम में मदद भी की।

गौरतलब है कि भाजपा नेता भी लगातार लोगों की मदद कर रहे हैं। भाजपा दिल्ली के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा लॉकडाउन शुरू होने के बाद से ही दिल्ली में फँसे प्रवासियों की राशन आदि देकर मदद पहुँचा रहे हैं। वहीं, सोनू सूद के काम की प्रशंसा कॉन्ग्रेस नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी की थी।

इसी तरह, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी उनके प्रयासों की सराहना की थी।

उन पर ‘उच्च जाति के हिंदू’ होने के लिए हमला किया गया।

जल्द ही इसमें कॉन्ग्रेस मिशनरी भी शामिल हो गए और सोनू सूद पर निशाना साधने लगे।

कुछ लोगों ने तो यह भी आगाह किया कि वे उनकी तारीफ करने से परहेज करें, क्योंकि अगर वह भविष्य में भाजपा में शामिल हो जाते हैं तो फिर क्या होगा।

रविवार (मई 31, 2020) को एक और कपोल कल्पना को हवा दी गई कि चूँकि उन्होंने अखिल भारतीय बंजारा सेवा संघ के अध्यक्ष शंकर पवार की मदद की, जिन्होंने कभी पीएम मोदी के साथ अपनी तस्वीर क्लिक करवाई थी, तो इसका मतलब है कि प्रवासियों को घर पहुँचाने में वह निश्चित रूप से भाजपा की कठपुतली है। 2017 में शंकर पवार के बेटे सनी पवार ने ठाणे चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में लड़ा था।

बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद उन प्रवासियों के लिए बसों की व्यवस्था कर रहे हैं जो देश के अन्य हिस्सों में अपने फँस गए हैं। उन्होंने सैकड़ों बसों की व्यवस्था की है और हजारों प्रवासी श्रमिकों को घर भेजा है। वह लगातार बिना रुके ये काम कर रहे हैं और अब तो उन्होंने एक हेल्पलाइन नंबर भी इसके लिए जारी कर दिया है।

हालाँकि, अब उनके सभी अच्छे काम उनके राजनीतिक झुकाव की कोरी कल्पना के तहत सोशल मीडिया पर एक विशेष वर्ग द्वारा संदेह के घेरे में है।

कोरोना+ कॉरपोरेटर इमरान पाशा ने आइसोलेशन में जाने से पहले जुटाई भीड़, कॉन्ग्रेस MLA पिता की भी नहीं सुनी

सोशल डिस्टेंसिंग के उल्लंघन के आरोप में शनिवार (मई 30, 2020) को जेडीएस (JDS) नेता इमरान पाशा के खिलाफ FIR दर्ज की गई। वे बेंगलुरु के पदरायनपुरा वार्ड से पार्षद हैं।

कोरोना संक्रमण की पुष्टि के बावजूद उन्होंने अपने घर के पास लोगों की भीड़ इकट्ठा की थी। यह सब उन्होंने आइसोलेशन में जाने से पहले किया था।

जानकारी के मुताबिक इमरान पाशा को शुक्रवार (मई 28, 2020) को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद पूरे इलाके को सील करने के साथ ही स्वास्थ्यकर्मी इमरान पाशा को आइसोलेशन में ले जाने के लिए आए। इस दौरान जेडीएस पार्षद ने अपने घर के पास काफी ड्रामा किया। सैकड़ों की संख्या में समर्थकों ने इकट्ठा होकर नारे लगाए।

जर्नलिस्ट शिव अरूर ने इसका एक वीडियो शेयर किया है। इसमें जेडीएस नेता को समर्थकों को हाथ हिलाते हुए और कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद एक महिला के पाँव छूते हुए देखा जा सकता है।

एक कोरोना पॉजिटिव मरीज के इस तरह से सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन कर अपने समर्थकों से मिलने की वजह से इलाके में डरावनी स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्हें विक्टोरिया हॉस्पिटल जाने के दौरान एंबुलेंस से पीपीई किट पहने हाथ हिलाते हुए देखा गया।

इमरान पाशा के खिलाफ बेंगलुरु के जेजे नगर पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 188, 270 और 271 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बता दें कि पदरायनपुरा इलाका, जहाँ के पार्षद इमरान पाशा है, वहाँ पर सप्ताह भर पहले फ्रंटलाइन वर्करों पर मुस्लिम भीड़ द्वारा आक्रामक हमला किया गया था। इमरान ने कोरोना पॉजिटिव होने के बाद आइसोलेशन जाने की बजाय हाई वोल्टेज ड्रामा किया और इलाके में डर का माहौल बना दिया।

स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के अनुसार, पाशा को तुरंत शहर के कोरोना वायरस अस्पताल विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए था। मगर, उन्हें एक मरीज के रूप में अस्पताल में दाखिल होने में 15 घंटे लग गए।

जेडीएस नेता से अस्पताल में भर्ती होने के लिए आशा कार्यकर्ताओं समेत वरिष्ठ अधिकारियों को गुहार लगानी पड़ी। यहाँ तक कि पाशा के पिता और चामराजपेट से कॉन्ग्रेस के विधायक ज़मीर अहमद ने भी उन्हें आइसोलेशन में रहने का आग्रह किया, मगर फिर भी वह अस्पताल जाने के लिए तैयार नहीं थे। वह जोर देकर कह रहे थे कि वह घर में ही क्वारंटाइन में रहेंगे।

इसके बाद जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने संक्रमण फैलाने के लिए आईपीसी के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की धमकी दी, तब जाकर जेडीएस पार्षद विक्टोरिया अस्पताल में क्वारंटाइन में रहने के लिए तैयार हुए।

बताया जा रहा है कि जेडीएस नेता के संपर्क में आने के बाद कम से कम एक वरिष्ठ अधिकारी को क्वारंटाइन में रखने की जरूरत होगी। कई अन्य बीबीएमपी अधिकारी जेडीएस नेता के संपर्क में थे। पाशा की प्राइमरी कॉन्टैक्ट लिस्ट में 19 लोग और सेकेंडरी कॉन्टैक्ट लिस्ट में 21 लोग शामिल हैं।

चीन सीमा पर रोड बनाने के लिए झारखंड से जाएँगे 12000 वर्कर, रक्षा मंत्रालय ने मॉंगी 11 स्पेशल ट्रेन: रिपोर्ट

चीन सीमा के पास सड़क निर्माण के लिए करीब 12 हजार श्रमिकों को झारखंड से ले जाने की रक्षा मंत्रालय तैयारी कर रहा है। इसके लिए 11 स्पेशल ट्रेने मॉंगी गई है। ट्रेनों से मजूदरों को जम्मू और चंडीगढ़ ले जाया जाएगा। इसके बाद वे चीन की सीमा से सटे इलाकों में ले जाए जाएँगे। हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।

सूत्रों ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि 22 मई को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने झारखंड से 11,815 प्रवासी कामगारों को ले जाने के लिए 11 विशेष ट्रेनों की व्यवस्था करने का रेल मंत्रालय को निर्देश दिया था। यह महत्वपूर्ण कदम लाइन ऑफ कंट्रोल (LAC) के साथ चार स्थानों पर भारतीय और चीनी सेना के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए उठाया गया है।

मामले से परिचित तीन अनाम अधिकारियों ने बताया कि सरकार मई से नवंबर तक के इस समय को नहीं गँवाना चाहती है। उन्होंने बताया कि सैन्य गतिरोध कब तक चलेगा इसका कोई पता नहीं है। यह कई हफ्तों तक भी जारी रह सकता है।

इस प्रकार, बचे हुए सड़क परियोजनाओं को अनिश्चित समय तक के लिए नहीं रोका जा सकता है। कुछ निर्माण कार्य लद्दाख में रणनीतिक दरबुक-श्योक-डोलेट बेग ओल्डी सड़क पर पहले ही शुरू हो चुके है।

कथित तौर पर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस मामले से अवगत कराया था। लॉकडाउन को खत्म करने की योजनाओं को लेकर मुख्यमंत्रियों से बातचीत के दौरान ही इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी। ज्यादातर श्रमिक झारखंड के दुमका के रहने वाले हैं।

राज्य सरकार से कहा गया है कि वह भारतीय रेल द्वारा इस तरह की यात्रा को सुगम बनाने के लिए केंद्र सरकार को सूचित करे। चीन द्वारा सीमा पर श्रमिकों के आवागमन के लिए 19 मई को केंद्र द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन किया जाएगा।

गुरुवार को हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया था कि कोरोनवायरस प्रकोप के बावजूद, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) चीन सीमा के पास सड़क और सुरंग निर्माण के लिए 40000 श्रमिकों को नियुक्त करने की योजना बना रहा था।

लेफ्टिनेंट जनरल एसएल नरसिम्हन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे क्षेत्रों में, मिलिट्री और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए बुनियादी ढॉंचे का विकास जरूरी है।

रिपोर्ट के अनुसार, 15 मई को, लद्दाख प्रशासन ने बीआरओ को लिखा था कि उन्हें उन श्रमिकों को लेकर कोई आपत्ति नहीं है, जिन्होंने परियोजना के लिए आवेदन किया है। हालांकि, अन्य स्थानों से लद्दाख पहुँचने वाले श्रमिकों के लिए सोशल डिस्टेंसिग के दिशा-निर्देशों और 14 दिनों के लिए अनिवार्य क्वारंटाइन का पालन करना बहुत जरूरी है। 2022 के अंत तक बीआरओ को सीमा के साथ 61 रणनीतिक सड़कों को पूरा करने का काम सौंपा गया है। यह सशस्त्र बलों को आगे के क्षेत्रों में तेजी से जुटाने में मदद करेगा।

आपको बता दे चीन सेना ने अपने लगभग 5000 जवानों को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पास अभ्यास की आड़ में भारतीय पक्ष की ओर मोड़ दिया था। 5-6 मई को सिक्किम के नाकुला सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हाथापाई हुई। इसके बाद दोनों ही देशों ने सीमा पर अतिरिक्त जवानों को तैनात किया है, जिसमें लद्दाख में गलवान घाटी प्रमुख है।

भारत और चीन के बीच तनाव लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) को लेकर बुधवार को थोड़ा कम हो गया। चीन ने इस मामले संघर्षपूर्ण दृष्टिकोण से इतर कहा कि भारत के साथ सीमा पर स्थिति “पूरी तरह से स्थिर और नियंत्रण में है।” चीन द्वारा सफेद झंडे दिखाने के पीछे भारत सरकार और सेना का आक्रामक रवैया ही सबसे बड़ी वजह माना जा सकता है।

मेरठ से दबोचा गया खालिस्तानी आतंकी तीरथ सिंह, सीमा पार से गोला-बारूद लाने के लिए हथियार तस्कर से जुड़ा था

उत्तरप्रदेश के एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) और पंजाब पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने शनिवार की रात एक ज्वाइंट ऑपरेशन में मेरठ के थापर नगर से खालिस्तानी आतंकवादी तीरथ सिंह को गिरफ्तार किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेरठ के थापर नगर में 32 साल के खालिस्तानी आतंकवादी तीरथ सिंह की मौजूदगी को लेकर पंजाब पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी। इस सूचना को पंजाब पुलिस ने उत्तर प्रदेश एटीएस के साथ साझा की।

पुलिस के अनुसार, तीरथ सिंह सोशल मीडिया के जरिए खालिस्तान आंदोलन से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही जनवरी 2020 में तीरथ सिंह के खिलाफ मोहाली पुलिस द्वारा राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के तहत केस दर्ज किया गया था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मेरठ के सदर बाजार पुलिस थाना क्षेत्र के थापरनगर इलाके में तीरथ सिंह रह रहा था। वह काफी लंबे समय से सोशल मीडिया पर खालिस्तान आंदोलन से जुड़ा हुआ है।

पुलिस ने उसके पास से जरनैल सिंह भिंडरावाले के पोस्टर और कुछ अन्य संदिग्ध समान बरामद किए हैं। अम उजाला की रिपोर्ट के अनुसार वह सीमा पार से गोला-बारूद की खेप मॅंगाने के लिए एक हथियार तस्कर से भी जुड़ा था।

उत्तर प्रदेश एटीएस के एडिशनल डीजीपी डीके ठाकुर के अनुसार सिंह के पास से खालिस्तान आंदोलन से संबंधित साहित्य मिले हैं। पुलिस ने यह भी कहा कि तीरथ सिंह के सोशल मीडिया अकाउंट और व्हाट्सएप में खालिस्तान आंदोलन को लेकर समर्थन दिखाने वाले कई संदेश भी मौजूद थे।

‘भाई राजदीप! जब नहीं था… तो क्यूँ कूदा?’ सरदेसाई ने फर्जी न्यूज से चाहा सोनम वांगचुक को घेरना, ट्विटर ने खोली पोल

बार-बार फजीहत कराने वाले पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक बार फिर से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को लेकर फर्जी खबर फैलाने की कोशिश की। हालाँकि एक बार फिर से उन्हें मुँह की खानी पड़ी। लोगों ने उन्हें एक बार फिर से उनकी फजीहत कर डाली।

दरअसल बॉलीवुड फिल्म थ्री इडियट्स के असली हीरो सोनम वांगचुक ने चीन के खिलाफ एक अभियान छेड़ा है।उन्होंने लोगों से चीनी कंपनियों में बने सामानों के बहिष्कार करने की अपील की है। वांगचुक ने इस संबंध में एक वीडियो जारी करते हुए कहा, “एक सप्‍ताह में चीन के सभी सॉफ्टवेयर को छोड़ें और एक साल में चीन के सभी हार्डवेयर को।”

राजदीप सरदेसाई ने इसी वीडियो को लेकर सोनम वांगचुक को घेरना चाहा। उन्होंने लिखा कि वो निश्चित रूप से टिकटॉक के बिना रह सकते हैं, लेकिन मेड इन चाइन स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का क्या? क्या हम सभी यहाँ जाना बंद कर देंगें? इसके साथ ही उन्होंने एक स्माइली भी लगाया है।

जैसा कि कहा गया है कि झूठ के पैर नहीं होते हैं, तो राजदीप सरदेसाई का झूठ भी काफी देर तक चल न सका। जल्द ही सोशल मीडिया यूजर्स ने राजदीप की पोल खोलते हुए सच को सामने रख दिया। इसके बाद उनके पास सिवाय ट्वीट डिलीट करने के कोई और विकल्प नहीं रह गया। वो ट्वीट डिलीट कर चुपचाप निकल लिए।

ट्विटर पर @BACK_BencherGuy नाम के यूजर्स ने सच्चाई सामने रखते हुए लिखा, “सर आप मोदी विरोध में देश विरोधी क्यों बन रहे हो।”

यूजर ने बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का प्रोजेक्ट लार्सन ऐंड टूब्रो (L&T) को दिया गया था। उस समय भी ऐसी अफवाहें फैली कि लार्सन ऐंड टूब्रो ने चीनी फैक्टरी के साथ सौदा किया है। इसके बाद 2015 में L&T ने खुद यह स्पष्ट किया था कि इस स्टैच्यू को भारत में बनाया जा रहा है और कंपनी सिर्फ ब्रॉन्ज प्लेट्स चीन से मँगा रही है।

L&T ने एक आधिकारिक बयान में कहा था, “पूरी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत में बन रही है और सिर्फ ब्रॉन्ज प्लेट्स चीन से आयात कर रहा है, जिसकी कीमत इस पूरे प्रॉजेक्ट का सिर्फ 9 प्रतिशत है।”

L&T ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के मेड इन चाइना होने की अफवाहों को खारिज किया और कहा था कि पूरी की पूरी मूर्ति को चीन में बनवाकर भारत लाने वाली खबरें पूरी तरह गलतफहमी हैं।

बता दें कि राजदीप सरदेसाई के इस झूठ पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी खूब मजे लिए। एक यूजर ने लिखा, इस महापुरुष का जन्म इस दुनिया में साक्षात बदनामी के लिए हुआ है। प्रणब दा से नरेंद्र मोदी तक सबने इसकी खूब बजाई है। कहीं राहुल बाबा भी मजे में हारमोनियम ना बजा दें।

वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि वो इस स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं, मगर ‘आदत से मजबूर’ हैं।

नीलेश नाम के यूजर ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने को लेकर FIR और गिरफ्तारी की माँग की। वहीं एक यूजर ने लिखा, “एक बार अगर कोई मुझे कहे की कुत्ते की दुम सीधी हो सकती है तो मैं उसे मान भी लूँगा, लेकिन ये आदमी… लाइलाज है।”

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है, जब राजदीप सरदेसाई ने इस तरह की झूठी खबरें फैलाई हों। इससे पहले भी उन्होंने अमित शाह को लेकर फर्जी खबर फैलाने की कोशिश, जिसके बाद उन्हें दो बार ट्वीट डिलीट करनी पड़ी थी।

वहीं एक ट्वीट में राजदीप ने बताया कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने पंजाब को केवल 71 करोड़ रुपए दिए हैं। जबकि राजदीप के दावों के उलट पजांब को 247 करोड़ रुपए मिले थे।