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अगर बॉर्डर खोल दिया तो बाहरी लोगों से 2 दिन में भर जाएगा अस्पताल का बेड: केजरीवाल का असंवेदनशील तर्क

देश में अब Unlock 1.0 को शुरू किया जा चुका है। इसका सीधा मतलब है कि देश में अब धीरे धीरे कर लॉकडाउन को खत्म किया जाएगा। इस बीच दिल्ली सरकार की तरफ से एक अहम फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार (जून 1, 2020) को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वो दिल्ली की सभी सीमाओं को 1 हफ्ते के लिए सील कर रहे हैं।

इसके पीछे उन्होंने बेहद ही बेतुका और असंवेदनशील कारण दिया। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में कोरोना के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। ये चिंता की बात तो है, लेकिन घबराने की बात नहीं है। वो इसलिए क्योंकि AAP की सरकार ने दिल्ली के अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं में खूब पैसा लगाया। काफी सारे नए हॉस्पिटस, आईसीयू, मोहल्ला क्लीनिक खोला। सारे इलाज मुफ्त कर दिए।

केजरीवाल आगे कहते हैं, “दिल्ली सरकार ने पिछले 5 सालों में स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व विकास किया और यही वजह है कि जब कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण देश और दुनिया के कई हिस्सों में स्वास्थ्य व्यवस्थाएँ ध्वस्त हो गई हैं, आपका मुख्यमंत्री आपको विश्वास दिलाता है कि अगर आपके घर में किसी को कोरोना हो जाता है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। आपके लिए अस्पताल में बेड खाली है।”

मीडिया को संबोधित करते हुए केजरीवाल बताते हैं,

“आज दिल्ली में 2300-2400 मरीज हैं, जबकि लगभग साढ़े नौ हजार बेड का इंतजाम है। लेकिन अगर हमने बॉर्डर खोल दिए तो पूरे देश भर से लोग दिल्ली इलाज कराने के लिए आते हैं। लोग दो कारण से दिल्ली आते हैं। पहला कारण ये कि यहाँ का इलाज देश के किसी भी राज्य या शहर से अच्छा है और दूसरा कारण यह है कि दिल्ली के अंदर सरकारी अस्पतालों में सब कुछ मुफ्त है। 10 लाख का ऑपरेशन भी मुफ्त में होता है। तो हम जैसे ही बॉर्डर खोलेंगे देश भर से लोग इलाज कराने के लिए दिल्ली आएँगे और जो साढ़े नौ हजार बेड हमने आपके लिए रखे हैं, वो दो दिन में भर जाएँगे।”

उन्होंने दिल्ली की जनता से इस मसले पर सुझाव माँगा है। इसे आप वीडियो में 6:36 से 7:48 के बीच सुन सकते हैं।

गैरतलब है कि यह पहली बार नहीं है, जब केजरीवाल ने दूसरे राज्य के लोगों के लिए इस तरह का बयान दिया है। इससे पहले भी उन्होंने बिहार के लोगों को लेकर विवादित बयान दिया था।

उन्होंने कहा था, “दिल्ली में जिस तरह की व्यवस्था है इस तरह की व्यवस्था किसी राज्य में नहीं है। ऐसा है कि बिहार से एक आदमी 500 का टिकट लेता है और दिल्ली में आता है और अस्पताल में पाँच लाख का ऑपरेशन फ्री में करा के वापस चला जाता है। इससे ख़ुशी भी होती है कि अपने ही देश के लोग हैं, उन्हें इलाज मिलना चाहिए। सभी को ख़ुश रहना चाहिए। लेकिन दिल्ली की भी अपनी क्षमता है। दिल्ली पूरे देश के लोगों का इलाज कैसे करेगी? ज़रूरत है कि देश के अंदर व्यवस्था सुधरे।”

ब्राह्मणों को बदनाम करने से लेकर इस्लामी आक्रांताओं के महिमामंडन तक: NCERT पुस्तकों में गड़बड़ी पर नीरज अत्री से बातचीत

देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की माँग अक्सर उठती रहती है, क्योंकि पाठ्यक्रम और एनसीईआरटी में तथ्यों की विश्वसनीयता शक के घेरे में है। लेखक नीरज अत्री ने इस पर वृहद रिसर्च किया है। अत्री ने कहा कि जब उन्होंने पाया कि इन पुस्तकों में एक तरफ मुगलों और इस्लामिक शासकों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है, वहीं दूसरी तरफ हिन्दू राज्यों को ऐसे प्रस्तुत किया गया है, जैसे उनकी कोई विशेषता ही न हो।

उन्होंने बताया कि एनसीईआरटी के माध्यम से ऐसा नैरेटिव बनाया जाता है जैसे ब्राह्मण बाहर से आए थे और उन्होंने यहाँ के लोगों का शोषण किया है। अत्री ने एनसीईआरटी में तथ्यों के साथ हुए इस छेड़छाड़ के लिए 100 से भी अधिक आरटीआई लगाए। उन्होंने एनसीईआरटी पुस्तकों के बारे में बताया कि UPA सरकार के आने के बाद उसमें आर्य-द्रविड़ की थ्योरी परोसी गई, जिससे बच्चों के मन में गलत धारणाएँ बैठीं।

अत्री ने बताया कि डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने पूरी रिसर्च कर इसे पहले ही गलत साबित किया था। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के पेरियार ने इन चीजों को हवा दी थी। उन्होंने कहा कि इतिहास का लक्ष्य होता है कि बच्चों को उनकी गौरवमयी इतिहास पढ़ाया जाए और अतीत में हुई गलतियों से सीख ली जाए। इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान और अमेरिका का उदाहरण दिया। भारत सबसे पुरानी सभ्यता है और हमारे पास गौरव करने के लिए इतनी चीजें हैं, फिर भी हम अकेले देश हैं जो अपने ही बच्चों का आत्मविश्वास ख़त्म करता है। बताता है कि आपके देश में महिलाओं का शोषण होता है।

जैसे- अगर एक बच्चे पढ़ेगा कि शूद्रों या महिलाओं को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं हैं तो उन पर क्या असर पड़ेगा? अत्री ने ध्यान दिलाया कि वेदों में महिलाओं ने ऋचाएँ लिखी हैं। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति को इतनी गाली दी जाती है, लेकिन उसी मनुस्मृति में लिखा है कि जब एक बच्चे का जन्म होता है तो उसे शूद्र कहा जाता है। इसका अर्थ है कि जिन्हें शूद्र की परिभाषा तक नहीं पता है, वो भारत-विरोधी चीजें पढ़ाने में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

नीरज अत्री ने कहा कि मनुस्मृति भी दो तरह की बाजार में मिलती है। इनमें से एक क्रिटिकल एडिशन है। दूसरे वाले में काफी गलत चीजें लिखी हुई हैं, जिससे पता चलता है कि बाद में उससे काफी छेड़छाड़ की गई और नैरेटिव गढ़ने के लिए उसका इस्तेमाल किया गया। उन्होंने बताया कि एनसीईआरटी ने इसे ऐसे पेश किया, जैसे प्राचीन काल में कानून की यही एकमात्र किताब थी। मनुस्मृति मनु का विचार है, जो वो कुछ ऋषियों को बताते हैं।

अत्री ने कहा कि कहीं उन्हें ऐसा प्रमाण नहीं मिलता है, जहाँ प्राचीन राजाओं में से किसी ने कहा हो कि उनका शासन मनुस्मृति के हिसाब से चलेगा। उन्होंने कहा कि सन्दर्भ से अलग हटाकर चीजों को पेश कर उसका अर्थ बदल दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर, इन पुस्तकों में पढ़ाया गया कि सीमा विवाद के समय मनुस्मृति में प्रावधान है कि राजा को छिपाकर बाउंड्री की मार्किंग करनी चाहिए। इसके बाद बच्चों से पूछा जाता है कि क्या इससे समस्याएँ सुलझेंगी?

असली मनुस्मृति में सीमा की मार्किंग के लिए फल-फूल के पेड़ लगाने की बात कही गई है। देवालय और तालाब बनाने की बात कही गई है। कहीं भी विवादों को सुलझाने के लिए अजीबोंगरीब प्रावधानों का जिक्र नहीं है। उन्होंने एनसीईआरटी की सातवीं की पुस्तक का एक उदाहरण दिया। उसमें लिखा है कि राजपूतों के उद्भव के साथ कई ट्राइब्स ने ख़ुद को जाति व्यवस्था का हिस्सा बनाया, लेकिन रूलिंग कास्ट को ज्वाइन करने की किसी को इजाजत नहीं दी। साथ ही लिखा है कि जिन्होंने जाति व्यवस्था को नकार दिया, उन्होंने इस्लाम अपना लिया।

ऑपइंडिया के संपादक अजीत भारती के साथ नीरज अत्री की बातचीत

अत्री ने बताया कि पंजाब और सिंध के समुदायों को लेकर ये झूठा नैरेटिव गढ़ा गया है, जिसका कोई ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं है। जाट से लेकर सभी समुदायों का उलटा इस्लामिक आक्रान्ताओं के खिलाफ लड़ने का इतिहास है। फिर बताया गया है कि अहोम पहले अलग देवी-देवताओं की पूजा करते थे, लेकिन ब्राह्मणों के वहाँ जाने के साथ हिन्दू धर्म का उद्भव हुआ। लेकिन वहाँ के राजाओं ने पूरी तरह अपनी संस्कृति नहीं छोड़ी। ये बात भी गलत है।

नीरज अत्री कहते हैं कि एक-एक टॉपिक पर इसी तरह अलग नैरेटिव बनाया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि चन्द्रगुप्त मौर्य के समय मेगास्थनीज ने अपने भारत दौरे के समय लिखा है कि कोई भी व्यक्ति ब्राह्मण बन सकता है लेकिन ब्राह्मणों का जीवन सबसे कठिन है। यानी, कसी भी अन्य जाति के लोगों के पास ब्राह्मण बनने का अधिकार था। इसलिए ब्राह्मणों को लेकर जो भ्रांतियाँ फैलाई गई हैं, वो सब गलत हैं।

अत्री ने बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय के सम्बन्ध में भ्रान्ति फैलाई गई है कि दो ब्राह्मणों ने उसे जला दिया, क्योंकि वे वहाँ के छात्रों की हरकत से गुस्सा हो गए थे। डीएन झा खुद को कम्युनिस्ट बताते हैं और चमत्कार में विश्वास नहीं रखते। लेकिन यहाँ पर उन्होंने दैवीय शक्ति से पानी का झरना फूटने से लेकर सिद्धि से आग लगने तक की बातों को स्वीकार किया है। इसी तरह की कई भ्रान्तियाँ वामपंथियों ने कहीं-कहीं से लाकर फैलाई है।

वामपंथियों ने एक बेघर इंसान का सारा सामान जला डाला: जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद का Video

अमेरिका में एक अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों हुई हत्या के बाद दंगे और हिंसा अब भी जारी हैं। इसी दौरान ANTIFA से जुड़े वामपंथियों और दंगाइयों ने एक बेघर इंसान के पास जो भी था, उसे जला दिया।

इस वीडियो को ट्विटर यूजर ग्रेग रीज़ द्वारा शेयर किया गया था। ग्रेग टेक्सास स्थित InfoWars.com के प्रोड्यूसर हैं।

वीडियो में आप देख सकते है कि किस तरह दंगाइयों ने बेघर इंसान के गद्दे को आग में डाल दिया जिसके बाद लाचार और बेबस गद्दे का मालिक राख में बदलती अपनी चीजों को किसी तरह बचाने की असहाय कोशिश करता है। वीडियो में सुना जा सकता है कि वह आदमी अपने सामानों को जलता हुआ देख किस तरह चिल्लाते हुए कह रहा है – “मैं यहाँ रहता हूँ।”

इस तरह के एक दूसरे वीडियो में, दंगाइयों द्वारा एक बूढ़ी महिला और उसके पति को मारते हुए देखा जा सकता है क्योंकि वे अपने बिज़नेस को उनसे बचाने की कोशिश कर रहे थे।

यह वीडियो सिनेमेटोग्राफर ल्यूक रुडकोव्स्की ने अपने ट्विटर पर शेयर किया। उनके अनुसार, यह घटना न्यूयॉर्क के रोचेस्टर में हुई और अब पुलिस दंगाइयों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

वहीं एक अन्य वीडियो में, न्यूयॉर्क में दंगाइयों द्वारा एक महिला के चेहरे पर मुक्का मारते हुए बिज़नेस बंद करने के लिए कहा जाता है। और जब उनका पति उसे बचाने की कोशिश करता है तो वे उनके साथ भी मारपीट करते हुए दिखाई देते हैं।

ANTIFA वैसे कई दशकों से है, लेकिन अमेरिका में उसने 1980 के दशक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। 2016 में डोनाल्ड ट्रम्प के अमेरिकी राष्ट्रपति चुने जाने के बाद इसे प्रमुखता से निशाने पर लिया गया। पिछले साल यह खबरों में तब आया जब डेमोक्रेट और मेनस्ट्रीम मीडिया ने एक समलैंगिक पत्रकार पर हिंसक कम्युनिस्ट समूह द्वारा हमले को दिखाया था।

ANTIFA वामपंथ का कोई फ्रिंज एलिमेंट नहीं है। वे लिबेरल्स के सबसे चहेते लोग हैं। ओबामा प्रशासन के तहत एफबीआई ने ‘घरेलू आतंकी गतिविधियों‘ के रूप में एंटिफा की कार्रवाइयों को चिन्हित किया था।

ओबामा के राष्ट्रपति पद के दौरान उपराष्ट्रपति जो बिडेन थे। एफबीआई इन्हीं जो बिडेन के अंदर था और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के रूप में ANTIFA को तब नामित किया गया था। दिलचस्प यह है कि इसी जो बिडेन ने इस फार-लेफ्ट समूह को “अमेरिकी लोगों का साहसी समूह” कहकर 2020 के लिए अपने राष्ट्रपति पद का कैंपेन शुरू किया।

वहीं रविवार को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ANTIFA को आतंकवादी संगठन घोषित करने का फैसला किया है।

ANTIFA के सदस्य आमतौर पर काले रंग के कपड़े पहनते हैं और अक्सर अपने विरोध प्रदर्शनों के दौरान चेहरे को मुखौटे से ढके रहते हैं। वे फार लेफ्ट विचारधाराओं जैसे एन्टी कैपिटलिज्म और विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा जैसी चीजों को भी फॉलो करते हैं। वे LGBTQ और स्वदेशी अधिकारों जैसे मुद्दों को उठाते हैं।

अब पोकरण में कॉन्स्टेबल ने लगाया फंदा: राजस्थान में 10 दिन में चौथे पुलिसकर्मी ने की आत्महत्या

राजस्थान में पुलिसकर्मियों की आत्महत्या का सिलसिला थम नहीं रहा। अब पोकरण में कॉन्स्टेबल मायाराम मीणा ने फॉंसी लगाकर खुदकुशी कर ली है। 10 दिन के भीतर राज्य में पुलिसकर्मी के सुसाइड करने की यह चौथी घटना है।

23 मई को SHO विष्णुदत्त विश्नोई, 26 मई को जसविंदर सिंह और 29 मई को हेड कॉन्स्टेबल गिरिराज सिंह ने आत्महत्या कर ली थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैसलमेर के पोकरण में रविवार (31 मई, 2020) को कॉन्स्टेबल मायाराम मीणा ने उसी होटल में ख़ुदकुशी की जहाँ वह ठहरे हुए थे। मायाराम पावर ग्रिड में ड्यूटी पर तैनात थे। सुसाइड की सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पोकरण पुलिस पहुँची और पूरे मामले का जायजा लिया।

हालाँकि आत्महत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है। एक अन्य घटना में बीकानेर के सेरुणा थाना प्रभारी गुलाम नबी की आज हार्ट अटैक से मौत हो गई।

10 दिनों के अंदर तीसरे पुलिसकर्मी ने किया सुसाइड
कांस्टेबल मायाराम मीणा और सेरुणा थानाप्रभारी गुलाम नबी.

उल्लेखनीय है कि चुरू जिले के राजगढ़ थाना प्रभारी विश्नोई की आत्महत्या के बाद से ही राजस्थान की सियासत गरम है। इस मामले की सीबीआई जॉंच की मॉंग जोर पकड़ती जा रही है। इस मामले में कॉन्ग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया पर सवाल उठ रहे हैं। उन पर पुलिसकर्मियों की झूठी शिकायतें उच्चाधिकारियों से करने का आरोप है।

विश्नोई ने दो सुसाइड नोट छोड़े थे। एक एसपी को सम्बोधित था तो दूसरा माता-पिता को। सुसाइड नोट में विश्नोई ने लिखा था कि उनके चारों तरफ इतना दबाव बना दिया गया कि वो झेल नहीं सके। उन्होंने ख़ुद के तनाव में होने की बात कही। वकील को मैसेज भेज कर उन्होंने लिखा कि उन्हें गन्दी राजनीति के भँवर में फँसा दिया गया है।

इसके अलावा, 26 मई काे श्रीगंगानगर में गार्ड कमांडर जसविंद्र की आत्महत्या का मामला सामने आया था। इसके बाद दौसा के सैंथल में गिरिराज सिंह ने शुक्रवार आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में भी दबाव की आशंका जताई गई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार हेड कॉन्स्टेबल गिरिराज सिंह ने रात के लगभग 8:00 बजे अपने क्वार्टर में गमछे का फंदा बना कर फाँसी लगाई थी। वे घर में अकेले ही रहते थे। सुसाइड की खबर तब लगी जब सैंथल थाने का स्टाफ उन्हें खाना देने पहुॅंचा।

पाकिस्तान से आई हिंदू महिलाओं ने ढूँढा रोजगार, 3 लेयर मास्क तैयार करके कोरोना काल में भर रहीं परिवार का पेट

राजस्थान के जोधपुर में पाकिस्तान से आई हिंदू महिलाओं ने मास्क बना-बनाकर अपने लिए रोजगार का एक नया जरिया ढूँढ निकाला है। इस नए रोजगार से उनके घर-परिवार को कोरोना संकट के बीच काफी राहत मिली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जोधपुर में पाकिस्तान के विस्थापित हिंदू समुदाय के लिए कपड़े के मास्क की सिलाई एक संगठित विनिर्माण केंद्र में तब्दील हो चुकी है। इस समय यहाँ 70 से अधिक महिलाएँ काम करती हैं।

समुदाय के हितों के लिए निरंतर संघर्ष करने वाली यूनिवर्सल जस्ट एक्शन सोसाइटी (यूजेएएस) के सचिव हिंदू सिंह सोढा ने इस संबंध में मीडिया को बताया, “हमें इस बात का अंदाजा नहीं था कि पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को मास्क प्रदान करने की मुहिम ही उन लोगों के लिए रोजी-रोटी सहारा बन जाएगी।”

उन्होंने मीडिया को बताया कि शरणार्थियों को देने के लिए शुरू में तो सिर्फ़ 12 हजार मास्क सिलवाए गए थे, लेकिन जल्द ही मेडिकल स्टोर, उद्योग और कुछ अन्य क्षेत्रों से मास्क की माँग शुरू हो गई। इसके बाद सिलाई के लिए ये हिंदू शरणार्थी महिलाएँ आगे आईं।

अब इस दिशा में नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल और भारत सरकार के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए मास्क तैयार किए जा रहे हैं। यहाँ पाक से आईं विस्थापित हिंदू महिलाएँ सूती कपड़े के 3 लेयर के मास्क तैयार कर रही हैं।

वर्तमान में करीब 70 से ज्यादा महिलाएँ मास्क बनाने में लगी हैं। माँग के अनुसार, उत्पादन बढ़ाने के लिए करीब 200 सिलाई मशीनें शरणार्थी परिवारों को वितरित की गई है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, मास्क बनाने के कार्य में लगी एक महिला संगीता बताती हैं कि 10 रुपए में बिकने वाले एक मास्क की लागत पर करीब 6 रुपए का खर्च आता है और चार रुपए मास्क की सिलाई के लिए उन लोगों को मिलते हैं। संगीता ने बताया कि लॉकडाउन के समय में उनके समुदाय के पुरुषों का कामकाज बंद हो गया, ऐसे में मास्क बनाने के काम से उनके घरों में चूल्हा जल रहा है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना काल में लॉकडाउन की वजह से सभी काम प्रभावित हुए हैं। ऐसे में कई लोगों से उनका रोजगार भी छिना है, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, इस बीच जोधपुर में इन पाकिस्तानी हिंदू महिलाओं की कर्मठता ने इनके परिवार को एक उम्मीद की किरण दिखाई है और देश के अन्य लोगों के सामने उदाहरण पेश किया है।

देश के हर जिले में होगा मेडिकल कॉलेज, कोरोना वारियर्स के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (जून 1, 2020) को बेंगलुरु स्थिति राजीव गाँधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस के सिल्वर जुबली कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोरोना वायरस संक्रमण को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अब तक की सबसे बड़ी आपदा करार दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया ठीक उसी तरह बदल जाएगी, जैसा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ था। उनके अनुसार अब वैश्वीकरण को लेकर आर्थिक मसलों पर नहीं बल्कि मानवीय मुद्दों पर चर्चा होगी।

उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले 6 वर्षों में हुए फ़ैसलों को गिनाते हुए कहा कि सरकार ने हर पिलर पर काम किया है। उन्होंने जानकारी दी कि आयुष्मान भारत के कारण देश के 1 करोड़ लोगों का मुफ्त इलाज हुआ है। उन्होंने देश में वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएँ शुरू करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि देश के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज हो। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों की तुलना सैनिकों से करते हुए कहा कि वो भी देश के लिए लड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस ज़रूर हमारे लिए अदृश्य है लेकिन कोरोना वॉरियर्स की मेहनत सभी को दिख रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर की नज़र आज भारत के डॉक्टरों पर आकर टिक गई है। उन्होंने इन्द्रधनुष और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के बारे में कहा कि इन सबने देश के स्वास्थ्य सिस्टम में नई जान फूँकी है। उन्होंने कहा कि देश में ही अब पीपीई किट्स बन रहे हैं और एन-95 मास्क बन रहे हैं, सब ‘मेड इन इंडिया’ है।

देश में पिछले कई दिनों में स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की भी ख़बरें आईं। ऐसी घटनाओं पर प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों के बीमा की व्यवस्था की गई है और उनके साथ दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। पीएम ने कहा कि देश में 22 और AIIMS खोले गए हैं। पिछले 5 वर्षों में देश में एमबीबीएस की 30 हजार सीटें बढ़ गई हैं और पोस्ट ग्रैजुएशन की सीटों में भी 15 हजार की बढ़ोतरी हुई है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोरोना संक्रमण जैसी वैश्विक महामारी नहीं आई होती तो वो यूनिवर्सिटी में लोगों के साथ बंगलूरू में इस विशेष दिन शामिल होते। उन्होंने कहा- “इस समय, दुनिया डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्यकर्मियों और वैज्ञानिक बिरादरी की तरफ आशा और कृतज्ञता के साथ देख रही है। दुनिया को आपके देखभाल और इलाज दोनों की जरूरत है।” बता दें कि कल ‘मन की बात‘ में भी पीएम मोदी ने कोरोना वॉरियर्स की तारीफ की थी।

3 करोड़ की मेडिकल स्क्रीनिंग, 2.75 लाख की टेस्टिंग: CM योगी ने कहा- यूपी में तैयारियाँ पूरी, नहीं खुलेंगे मॉल्स

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि कोरोना संक्रमण आपदा के बीच ‘अनलॉक-1’ के तहत यूपी के 23 करोड़ लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए चीजें खोली जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से अधिकतर चीजें लॉकडाउन के चौथे फेज में ही खुल गई थीं।

यूपी में आज से बस सेवाएँ और टैक्सी-ऑटो सेवाएँ शुरू हो गई हैं। हालाँकि, उन्होंने लोगों को 5 से अधिक की संख्या में न जमा होने की अपील की है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि किसी भी ट्रांसपोर्ट सेवा में सीटों की क्षमता से ज्यादा लोग नहीं बिठाए जा सकेंगे। ‘इंडिया टीवी’ के सुशांत सिन्हा से बात करते हुए सीएम योगी ने कहा कि चीजें खुलने से यूपी की आबादी को देखते हुए चुनौती बड़ी है। लेकिन जिस तरह से पिछले कुछ सालों में भारत सरकार और यूपी सरकार ने स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया है, अस्पतालों में पर्याप्त बेड्स मौजूद हैं।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि उत्तर प्रदेश की सीमा नेपाल के साथ-साथ 7 अन्य राज्यों से लगती है। उन्होंने कहा कि अब यूपी में प्रति दिन 10 हज़ार की टेस्टिंग हो रही है, जो जून ख़त्म होने तक 20 हज़ार तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि सभी मजदूरों के लिए क्वारंटाइन की व्यवस्था की गई है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक 3 करोड़ से भी अधिक लोगों की मेडिकल स्क्रीनिंग की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि केंद्र का पूरा सहयोग मिल रहा है, मेडिकल तैयारियाँ पूरी हैं।

दिल्ली-नोएडा बॉर्डर खोलने को लेकर सीएम योगी ने कहा कि वो जान-बूझकर संक्रमण फैलाने की इजाजत नहीं दे सकते, लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि नोएडा-गाजियाबाद सीमा को पूरी तरह सील नहीं किया गया है, स्क्रीनिंग करने के बाद लोगों को आने दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आँकड़े गिनाए कि अब तक 30 लाख मजदूर उत्तर प्रदेश आए हैं। अभी तक 2.75 लाख लोगों की टेस्टिंग की जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि अभी यूपी के अस्पतालों में 1 लाख बेड्स की व्यवस्था है। धर्मस्थलों के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें संक्रमण का अड्डा नहीं बनाया जाएगा, लेकिन वो सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हैं, इसीलिए धीरे-धीरे मास्क और अन्य नियमों के साथ इन्हें खोला जाएगा। लेकिन इन्हें संक्रमण का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि दुनिया का कई देशों की जनसँख्या भारत से काफी कम है, लेकिन भारी तबाही मची है।

यूपी में फ़िलहाल मॉल्स और सिनेमा हॉल्स को खोलने की अनुमति नहीं दी गई है। साथ ही होटलों में लोगों को बिठा कर खिलाने की अनुमति भी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि अनलॉक का ये मतलब नहीं है कि जिसको जहाँ मन हो निकल जाए और जमा हो जाए। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मंडियों के लिए जमीन उपलब्ध करा कर साप्ताहिक बाजार लगाने की अनुमति दी गई है, क्योंकि गाँवों में भीड़ नहीं है। शहरों में पहले से मंडियाँ मौजूद हैं।

सीएम योगी ने कहा कि सैलूनों को भी खोला रहा है और अच्छा रहेगा कि लोग अपना रेजर या तौलिया लेकर जाएँ। उन्होंने कहा कि यूपी में मास्क, सैनिटाइजर और ग्लव्स की कोई कमी नहीं है। उन्होंने जानकारी दी कि यूपी 28 राज्यों को सैनिटाइजर उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने प्रवासी कामगारों और प्रदेश के अन्य बेरोजगार लोगों को राज्य में ही नौकरी देने के लिए आयोग के गठन की चर्चा करते हुए कहा कि इस मामले में सर्वे किया जा रहा है।

महिला स्वयंसेवक समूहों को अलग-अलग काम दिए गए हैं। मनरेगा में भी नौकरी की व्यवस्था की जा रही है। सीएम योगी ने कहा कि अपने मैनपॉवर के दम पर एक नया उत्तर प्रदेश बनेगा। उन्होंने बताया कि 1.37 लाख कॉन्स्टेबलों की भर्ती हो चुकी है और उनकी ट्रेनिंग हो रही है। शिक्षकों की भी भर्ती की जा रही है।

विपक्षी नेताओं के बारे में योगी ने कहा कि सत्ता तो विरासत में मिल सकती है, लेकिन बुद्धि विरासत में नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि यूपी परिवहन निगम के पास 12 हज़ार बसें हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहत कार्य के दौरान विपक्ष का एक भी नेता जनता के साथ खड़ा नहीं था। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने राजस्थान परिवहन निगम की बसों को सीमा पर खड़ा किया, क्या वो उनकी निजी बसें थीं? वहीं जब कोटा से छात्र लाए जा रहे थे, तब राजस्थान सरकार ने अपनी बसें नहीं दी।

अब मेरे हाथ में कुछ नहीं, अब मुझे कुछ नहीं करना… आप कोरोना के साथ सो सकते हैं: ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोरोना संक्रमण से लड़ने की जगह उसे सामान्य मान लेने की अपील राज्य की जनता से की। उन्होंने कोरोना के बढ़ते मामलों पर खुद को लाचार बताया। साथ ही ये भी कहा कि अब वो कुछ नहीं कर सकतीं।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों पर शुक्रवार को कहा, “यह मेरे हाथ में नहीं रह गया। अब मुझे कुछ नहीं करना है। आप अपने बगल में कोरोना के साथ सो सकते हो। इसे अपना तकिया बनाएँ। मुझे माफ करें।”

जानकारी के मुताबिक, अन्य राज्यों की भाँति लंबे लॉकडाउन के बाद पश्चिम बंगाल में भी कुछ रियायतें दी गईं। जिनके मद्देनजर 8 जून से राज्य में सरकारी व प्राइवेट ऑफिस खुलने का ऐलान हुआ। साथ ही 1 जून से धार्मिक स्थल भी खोले जाने की घोषणा हुई। हालाँकि स्कूलों को लेकर यह फैसला हुआ कि सभी शैक्षणिक संस्थान जून में बंद रहेंगे।

इसके अलावा राज्यों में प्रवासी मजदूरों के लौटने से ममता बनर्जी इस दौरान खासी नाराज दिखीं। जिसके कारण उन्होंने सरकार द्वारा चलाई जा रही श्रमिक ट्रेन को कोरोना एक्सप्रेस भी बताया। उन्होंने धार्मिक स्थलों के खोले जाने के ऐलान पर कहा कि अगर हजारों लोगों को एक ट्रेन में भेजा जा सकता है, तो धार्मिक स्थल भी खुल सकते हैं।

उन्होंने श्रमिक ट्रेनों से लौटते प्रवासी मजदूरों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में पिछले दो महीने से कोरोना वायरस संक्रमण को नियंत्रित करने में सफलता मिली थी। लेकिन अब मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग लौट रहे हैं। 

इस दौरान सीएम ममता बनर्जी ने पूछा, “क्या भारतीय रेल श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के बजाय ‘कोरोना एक्सप्रेस’ ट्रेनें चला रही है?” उन्होंने यह भी पूछा कि अन्य राज्यों से लौट रहे प्रवासी श्रमिकों के लिए और अधिक ट्रेन क्यों नहीं चलाई जा रही है?

ममता बनर्जी ने कहा कि रेलवे को अधिक ट्रेनें चलाने से किसी ने नहीं रोका। उन्होंने बोला, “मैं रेल मंत्री थी। मुझे मालूम है ट्रेन में 20 से 25 कोच होते हैं। मगर, यहाँ 48 घंटे में हजारों लोग जर्जर हालत में यात्रा कर रहे हैं। जो संक्रमित नहीं भी हैं, वो भी संक्रमित हो रहे हैं।”

मुख्यमंत्री बनर्जी ने यह भी बताया कि करीब 5 लाख प्रवासी राज्य में आए हैं। इनमें 75 हजार लगभग ट्रेन से हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस संख्या में से भी अधिकतर वे लोग हैं, जो दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे कोरोना हॉट्स्पॉट से आए हैं। अपनी विवशता दर्शाते हुए उन्होंने आगे लोगों को बताया कि अब कुछ भी उनके हाथों में नहीं रह गया। और न ही उन्हें अब कुछ करना है। लोग चाहें तो कोरोना के साथ बगल में सो सकते हैं।

गौरतलब है कि इस समय बंगाल में कोराना के हालात दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे हैं। वर्तमान में वहाँ कोरोना संक्रमितों संख्या 5501 पहुँच गई है। वहीं, सक्रिय मामले 3027 हैं। मीडिया रिपोर्ट्स बताती है कि रविवार को राज्य में सबसे अधिक मामलों के साथ 371 केसों की पुष्टि हुई। जबकि अब तक ठीक होने वाले 2, 157 हैं।

मेड इन चीन है स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, उसे तोड़ दो: सरदार पटेल को लेकर कॉन्ग्रेस समर्थकों की दिखी नफरत

सीमा पर चीन के सैन्य गतिरोध के जवाब में सोनम वांगचुक सहित कई सेलिब्रिटी ने चीन के आर्थिक बहिष्कार की अपील की थी। वांगचुक ने कहा था, “एक सप्‍ताह में चीन के सभी सॉफ्टवेयर को छोड़ें और एक साल में चीन के सभी हार्डवेयर को।” वांगचुक वही शख्स हैं, जिनसे प्रेरित होकर फिल्म थ्री इडियट्स बनाई गई थी।

इसके बाद से ​गिरोह विशेष के पत्रकार और कॉन्ग्रेसी समर्थकों ने सोशल मीडिया में दुष्प्रचार चला रखा है। सरदार पटेल की मूर्ति स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को चीन निर्मित बताकर उसे गिराने की मॉंग कर रहे हैं। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा है।

द वायर के स्तंभकार ने पूछा कि क्या चीन का आर्थिक बहिष्कार करने के लिए स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को भी गिरा दिया जाएगा?

कई लोग तो स्टैच्यू के ‘मेड इन चाइना’ होने का दावा करते हुए इसे ध्वस्त करना चाहते थे।

पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी इस झूठ को फैलाया कि मूर्ति चीन में बनाई गई थी।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को मेड इन चीन बताने वाले इस ट्वीट को राजदीप सरदेसाई ने अब हटा दिया है…

क्या स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ‘मेड इन चीन’ है ?

आपको बता दें, दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का निर्माण भारत के सबसे बड़े नेताओं में से एक “सरदार वल्लभभाई पटेल” को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया है। वास्तव में यह चीन से नहीं, बल्कि भारत की प्रमुख इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन ऐंड टुब्रो द्वारा बनाया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ एक तीन-स्तरीय प्रतिमा है। जिसकी पहली और सबसे अंदर की परत में दो 127 मीटर ऊँचे टॉवर हैं जो कंक्रीट से बने हैं। इसकी दूसरी परत का निर्माण स्टील का उपयोग कर किया गया है। ये दोनों परतें भारत में ही बनी थीं।

जो तीसरा सबसे बाहरी परत है, वह कांस्य आवरण का उपयोग करके बनाया गया है, जो पटेल के कपड़े, मुद्रा और चेहरे के भावों को अच्छे से दर्शाता है। इसी परत को चीन में बनाया गया था।

सबसे जरूरी बात यह है कि जब स्टैच्यू का निर्माण शुरू हुआ, तो बिल्डरों को पता चला कि भारत में 15 प्रमुख कांस्य ढलाई में से कोई भी इन क्लैडिंग का निर्माण करने में सक्षम नहीं है। इसके बाद लार्सन ऐंड टुब्रो ने ग्लोबल टेंडर निकाला। इसके तहत ही चीनी कंपनी को काम दिया गया था।

2015 में L&T ने खुद यह स्पष्ट किया था कि इस स्टैच्यू को भारत में बनाया जा रहा है और कंपनी सिर्फ ब्रॉन्ज प्लेट्स चीन से मँगा रही है। L&T ने एक आधिकारिक बयान में कहा था, “पूरी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत में बन रही है और सिर्फ ब्रॉन्ज प्लेट्स चीन से आयात कर रहा है, जिसकी कीमत इस पूरे प्रॉजेक्ट का सिर्फ 9 प्रतिशत है।”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, स्टैच्यू प्रोजेक्ट के साइट पर दो शिफ्टों में काम करने वाले कुल 4,076 मजदूरों में से केवल 200 श्रमिक ही चीन के थे। सितंबर 2017 से प्रत्येक बैचों में दो-तीन महीनों के लिए काम करने वाले श्रमिक, एक हजार श्रमिकों वाली टीम का हिस्सा थे, जिन्हें क्लेडिंग के काम के लिए लगाया गया था। यह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण में शामिल कुल कर्मचारियों की संख्या का केवल 5 प्रतिशत है।

इस स्टैच्यू को भारत के 95 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों के साथ बनाया गया है। साथ ही 90 प्रतिशत काम भारतीय कंपनियों द्वारा किया गया है।

लेकिन सरदार पटेल के प्रति कॉन्ग्रेस समर्थकों के मन में भरा नफ़रत उन्हें इससे आगे सोचने और समझने की क्षमता ही नहीं देता।

‘बुर्का पहन जिहादी, नहीं तो तुम्हें भी काट कर…’ – पति पर टिप्पणी, ‘भाग्यविधाता’ वाली ऋचा सोनी ने किया केस

अभिनेत्री ऋचा सोनी ने एक इंस्टाग्राम यूजर के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। ऋचा का कहना है कि उसने उन्हें दूसरे मजहब में शादी करने को लेकर ट्रोल किया था। बता दें कि कलर्स पर प्रसारित सीरियल ‘भाग्यविधाता’ से लाइम लाईट में आने वाली ऋचा ने फ़रवरी 11, 2018 को लम्बे समय से अपने बॉयफ्रेंड रहे जिगर अली संभानिया से बंगाली रीति-रिवाज के तहत शादी रचाई थी। इसके ठीक 1 सप्ताह बाद 18 फ़रवरी को दोनों का निकाह भी हुआ था।

‘शरारत’ से मनोरंजन जगत में क़दम रखने वाली ऋचा ने इन्स्टाग्राम पर कई वीडियो शेयर किए, जिनमें वो उन्हें फटकारती हुई दिख रही हैं, जिन्होंने उन्हें जिगर अली से निकाह करने को लेकर ट्रोल किया था। ऋचा ने अपने वीडियो मैसेज में कहा कि उन्हें कभी इसका अंदेशा नहीं था कि उन्हें कोरोना वायरस आपदा और लॉकडाउन के बीच इस तरह से वीडियो रिकॉर्ड करना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ एनोनिमस एकाउंट्स बना कर उनके जीवन जीने के व्यवहार और मनोदृष्टि को निशाना बना रहे हैं।

ऋचा को कई लोगों ने जिहादी कहा था और उन्हें बुर्का पहनने की सलाह दी थी। ऋचा को मानसी दीक्षित की हत्या का उदाहरण दिया गया। सईद नामक फोटोग्राफर ने मानसी की हत्या कर दी थी क्योंकि उन्होंने सेक्स के लिए मना किया था। एक यूजर ने लिखा कि तुझे मानसी की तरह काट कर फेंक देगा, तब समझ आएगा। मुंबई की इस घटना की लोगों ने ऋचा को याद दिलाई। ऋचा ने पूछा कि क्या उन्होंने जिगर से गुपचुप तरीके से शादी की है?

उन्होंने कहा कि कुछ यूजर्स उनके बारे में गन्दी बातें लिखते हैं और समुदायों में विभाजन पैदा करने की कोशिश करते हैं। ऋचा ने कहा कि उन्होंने जवाब देने की बजाए उन ‘ट्रोल्स’ से सीधे बातचीत करने का फ़ैसला लिया है। ऋचा ने कहा कि जब वो उनसे घृणा करने वालों की ‘तारीफ’ अपने शब्दों में करेंगी तो वो लोग इसे काफी पसंद करेंगे। जिगर अली से निकाह को लेकर उन्हें ट्रोल करने वाले व्यक्ति के बारे में ऋचा ने कहा कि उस ‘ट्रोल’ ने उन्हें कुछ ज्यादा ही प्यार करना शुरू कर दिया है। ऋचा ने कहा:

“मुझे पता है ऐसी ही भाषा आप समझते हैं। एक पोस्ट में मैंने लिखा था कि आपको अपने दिल को मानवता और दयालुता से भरना चाहिए। इसके बाद इस व्यक्ति ने पूछा कि क्या आप इस्लामी त्योहारों को एकदम फ्री होकर मना सकती हैं? उसे मैंने जवाब दिया कि हाँ, एकदम हिन्दू पर्व-त्योहारों की तरह। इसके बाद उसने मुझसे पूछा कि किसे मूर्ख बना रही हो, तुमने कब हिन्दू त्यौहार मनाए? साथ ही उसने मुझे याद दिलाया कि तुम्हारा शौहर तो दूसरे मजहब से है। “

ऋचा ने सहयोग के लिए मुंबई पुलिस को दिया धन्यवाद

इसके बाद ऋचा ने उक्त यूजर से पूछा कि क्या उन्हें उसके सवालों का जवाब देना ज़रूरी है? इसके बाद एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा कि उस ‘फेक आईडी’ के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करा दिया गया है और कानूनी एक्शन लिया जा रहा है। उन्होंने लिखा कि वो दबाए जाने वालों में नहीं हैं और लोगों को पता होना चाहिए कि वो किसे ट्रोल कर रहे हैं। इसके बाद ऋचा ने कहा कि इस बार वो ब्लॉक नहीं करेंगी, इन्तजार करेंगी। बता दें कि बंगाली अभिनेत्री और सांसद नुसरत जहाँ भी हिन्दू से शादी करने को लेकर ट्रोल की जाती रही हैं