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‘गाँजा फूँक कर हुई थी गणेश की प्लास्टिक सर्जरी’: कॉमेडियन संजय राजौरा के खिलाफ शिकायत दर्ज

हिन्दू भगवान का अपमान करने के लिए ‘ऐसी तैसी डेमोक्रेसी’ के कॉमेडियन संजय राजौरा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि उन्होंने हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान किया और लोगों की भावनाओं को आहत किया। शिवसेना के नेता रहे रमेश सोलंकी ने मुंबई पुलिस के समक्ष ये शिकायत दर्ज कराई है। संजय ने एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार के सामने भी भगवान गणेश पर टिप्पणी की थी। तब रवीश हँस रहे थे।

शिवसेना नेता ने कहा कि वो न सिर्फ़ शिकायत दर्ज करा रहे हैं बल्कि ये भी सुनिश्चित करेंगे कि राजौरा और उनकी टीम को उचित सज़ा मिले। एक कॉमेडी शो के दौरान हिन्दू धर्म का मजाक बनाते हुए संजय ने स्टेज पर कहा था:

“हमारा प्राइम मिनिस्टर बोलता है यार कि दुनिया की पहली प्लास्टिस सर्जरी भारत में हुई है। पता है किसकी? गणेश की। मैं मान गया कि पहली प्लास्टिस सर्जरी यहीं हुई है, भारत में ही हुई है। अगर किया तो ठीक से तो कर लेते। इसको देख कर तो यही लगता कि गाँजा फूँक के नहीं करना चाहिए ये सब। कौन आएगा तुम्हारे पास अगर तुम आदमी के सिर की जगह जानवर की लगा दो। टाँग की सर्जरी करते समय पता चला कि गदहे की टाँग लगा दी, तो?”

एक और वायरल वीडियो में संजय राजौरा यही बातें रवीश कुमार के बगल में बैठ कर करते हुए दिख रहे हैं और रवीश उनकी बातों पर हँसते हुए नज़र आते हैं। कई कॉमेडियनों द्वारा लोगों को हँसाने के लिए हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाने की ख़बरें आती रहती हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी संजय के इस बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ज़रा सोचिए अगर यही भगवान श्री गणेश जी के विषय में न हो के किसी और धर्म के लिए होता तो क्या होता? कितना आसान है आस्था की हत्या करना!

इससे पहले फारूकी मुनव्वर ने भगवान राम और माँ सीता का मजाक उड़ाते हुए कहा था- “मेरा पिया घर आया ओ राम जी। राम जी डोंट गिव अ फ़*** अबाउट पिया। यह सुन राम जी कहते हैं मैं खुद चौदह साल से घर नहीं गया। अगर सीता ने सुन लिया, वो तो शक करेगी। सीता को तो माधुरी पे पहले से ही शक है। वो गाना है तेरा करूँ गिन-गिन इंतजार। उसे लग रहा है वनवास गिन रही है 14 पर आकर रुक गई।” फारुकी ने गोधरा ब्लास्ट पर भी कॉमेडी की थी।

श्रमिक ट्रेन में कोई किराया नहीं, कोई चार्ज नहीं… लेकिन सोनिया गाँधी की कॉन्ग्रेस देगी पैसे, आखिर किसे और कैसे?

कॉन्ग्रेस ने अब श्रमिक स्पेशल ट्रेनों पर राजनीति शुरू कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के बाद भारतीय रेलवे ने सभी राज्यों में फँसे श्रमिकों और छात्रों को उनके गृह राज्य में वापस भेजने के लिए स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की। कॉन्ग्रेस का कहना है कि पार्टी उन श्रमिकों का रेलवे किराया वहन करेगी। वो किराया, जो पहले से ही मुफ्त है। सोनिया गाँधी ने अपने बयान में इसका जिक्र किया है।

कॉन्ग्रेस पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से बताया गया है कि प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक व कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी व इस बारे जरूरी कदम उठाएगी। कॉन्ग्रेस ने ये भी दावा किया है कि सरकार इन मेहनतकश मजूदरों से किराया वसूल रही है। पार्टी ने इसकी तुलना 1947 के देश विभाजन से कर दी और कहा कि पैदल घर लौट रहे मजदूरों को देख कर यही लगता है कि वैसी ही स्थिति आ गई है।

सरकार द्वारा श्रमिकों के लिए ट्रेनें चलाने की घोषणा के बाद पत्रकार रोहिणी सिंह और वामपंथी नेता सीताराम येचुरी सहित रवीश कुमार जैसों ने किराया वसूले जाने की अफवाह फैलाई थी, जिसका आधार ‘द हिन्दू’ की एक ख़बर को बनाया गया था, जो भ्रामक और झूठी थी। शुरुआत में ज़रूर कुछ संशय था लेकिन जब शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य मुख्यमंत्रियों ने इस पर स्पष्टीकरण दिया कि राज्य सरकारें ख़र्च वहन करेंगी, तो भी इनका प्रोपेगेंडा चलता रहा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तो पूछ दिया कि मजदूरों का किराया राज्यों पर क्यों थोपा जा रहा है? कॉन्ग्रेस का इस पर क्या कहना है?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार (मई 3, 2020) को ही स्पष्ट कर दिया था कि श्रमिकों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि दूसरे राज्यों से स्पेशल ट्रेन से उन्हें वापस लाने के लिए तैयार है। और इस संबंध में राज्य व केंद्र सरकार, रेल मंत्रालय के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी थी कि किराया भी प्रदेश सरकार वहन करेगी। बावजूद इसके कॉन्ग्रेस पार्टी किराया वहन करने की बात कर रही है।

रेलवे के नीचे संलग्न किए गए ट्वीट को देखिए। इसमें स्पष्ट लिखा है कि किसी को टिकट ख़रीदने के लिए स्टेशन आने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि वही लोग यात्रा कर सकेंगे, जिन्हें राज्य सरकारों ने चुना है। साथ ही उनके पूरा किराया और भोजन-पानी के लिए भी राज्य सरकारें ही ख़र्च कर रही हैं। टिकट बिक्री चालू ही नहीं है तो मजदूरों से किराया वसूले जाने की बात कहाँ से आई? रेलवे ने उन यात्रियों को स्टेशन आने से भी मना किया है, जिन्हें राज्य सरकारें नहीं ला रही हैं।

राहुल गाँधी ने भी ऐसा ही झूठ फैलाया। उन्होंने दावा किया कि एक तरफ रेलवे दूसरे राज्यों में फँसे मजदूरों से टिकट का भाड़ा वसूल रही है, वहीं दूसरी तरफ रेल मंत्रालय पीएम केयर फंड में 151 करोड़ रुपए का चंदा दे रहा है। रेलवे ने देशहित में कोरोना से लड़ने के लिए वित्तीय मदद दी तो ये तो अच्छी बात है। रेलवे ने वो रुपए कहाँ से दिए थे? केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल और राज्यमंत्री सुरेश अंगाडी ने एक-एक महीने की सैलरी डोनेट की, जबकि 13 लाख रेलवे पीएसयू कर्मचारियों ने अपनी-अपनी एक दिन की सैलरी डोनेट की। ये सब मिला कर 151 करोड़ रुपए हुए।

क्या राहुल गाँधी चाहते हैं कि रेलवे के कर्मचारी अपने रुपयों से वो सब करें जो कॉन्ग्रेस पार्टी चाहती है? उन्होंने रेलवे कर्मचारियों पर ही सवाल खड़ा कर दिया कि उन्होंने पीएम केयर्स में दान क्यों दिया। इस तरह से राहुल गाँधी ने दो झूठ एक साथ फैलाए- एक श्रमिकों को लेकर और दूसरा रेलवे द्वारा पीएम केयर्स में दान देने को लेकर। कॉन्ग्रेस ने पूरे दिशा-निर्देशों और फ़ैसले का इन्तजार किए बिना हंगामा शुरू कर दिया था।

रेलवे द्वारा जारी गाइडलाइन्स के अनुसार, जिस स्टेशन से ट्रेन चलेगी, वहाँ की राज्य सरकार की तरफ से यात्रियों को खाने के पैकेट और पानी मुहैया कराया जाएगा। यदि यात्रा 12 घंटे से अधिक के लिए होगी तो एक समय का खाना रेलवे की ओर से दिया जाएगा। साथ ही राज्य सरकारों के द्वारा यात्रियों को आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। प्रत्येक ट्रेन लगभग 1,200 यात्रियों को ले जा सकती है।

अर्नब गोस्वामी पर मुंबई पुलिस ने की FIR: सांप्रदायिक अशांति फैलाने, मस्जिद को जानबूझकर दिखाने का आरोप

रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के खिलाफ अपनी मुंबई पुलिस ने अब एक और एफआईआर (FIR) दर्ज किया है। नई FIR 14 अप्रैल को बांद्रा में प्रवासी श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन पर की गई उनकी टिप्पणी पर दर्ज की गई है। इस कारण से यह एफआईआर सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के दायरे में नहीं आता, जिसमें कहा गया था कि पालघर की घटना को लेकर सोनिया गाँधी पर की गई टिप्पणी के आधार पर अर्नब गोस्वामी के खिलाफ कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रज़ा एजुकेशनल वेलफेयर सोसाइटी के सचिव इरफ़ान अबुबकर शेख और दक्षिण मुंबई के नल बाज़ार के निवासी की शिकायत पर नई एफआईआर रविवार को पाइधोनी पुलिस स्टेशन (Pydhonie police station) में दर्ज की गई। शिकायत में कहा गया कि अर्नब गोस्वामी ने विरोध प्रदर्शन स्थल के पास की एक मस्जिद के साथ बांद्रा के विरोध को जोड़कर दूसरे समुदाय के खिलाफ नफरत पैदा करने की कोशिश की थी, जबकि इसका आपस में कोई लिंक नहीं था।

शेख ने कहा कि अप्रैल में रिपब्लिक भारत के एक शो में एंकर अर्नब गोस्वामी द्वारा बांद्रा रेलवे स्टेशन के पास प्रवासियों के विरोध का फुटेज इस्तेमाल किया गया था। आगे शिकायत में कहा कि प्रदर्शनकारी केवल मस्जिद के पास एक खुले स्थान पर एकत्र हुए थे। लेकिन मस्जिद और विरोध प्रदर्शनों के बीच कोई संबंध नहीं था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया, “अर्नब ने शहर में सांप्रदायिक अशांति पैदा करने के लिए मस्जिद को जानबूझकर उजागर किया।” इसके अलावा अर्नब ने कई बार अपने डिबेट्स में मजहब विशेष को टारगेट किया और यहाँ तक कि उनके द्वारा कोरोना वायरस फैलाने की बात भी कही।

अर्नब गोस्वामी के खिलाफ पाइधोनी पुलिस ने IPC की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पाइधोनी पुलिस ने मीडिया को बताया, “हमने अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी के मालिक के खिलाफ नफरत के लिए मामला दर्ज किया है। और आगे की जाँच चल रही है। बयान लेने के बाद सबूत के तौर पर हमने एक पेन ड्राइव में क्लिप के साथ शो के फुटेज एकत्र किए हैं।”

आपको बता दें कि 27 अप्रैल को देश के विभिन्न राज्यों में कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा उनके खिलाफ 150 से अधिक एफआईआर दर्ज किए थे। इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी एफआईआर को मिलाकर मुंबई स्थानांतरित कर दिया था। जिसके बाद अर्नब गोस्वामी से मुंबई पुलिस ने एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन में 12 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। उसी मामले में रिपब्लिक नेटवर्क के सीएफओ से भी कई घंटों तक पूछताछ की गई थी। इसके अलावा सर्वोच्च अदालत ने रिपब्लिक टीवी एडिटर को तीन सप्ताह की अंतरिम सुरक्षा भी दी थी।

अर्नब ने पालघर में दो हिंदू संतों और उनके ड्राइवर की बेरहमी से की गई हत्या पर सोनिया गाँधी की चुप्पी को लेकर सवाल खड़े किए थे। साथ ही उनके जन्म के नाम का इस्तेमाल किया था। जिसके बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने अर्नब गोस्वामी के खिलाफ युद्ध का मोर्चा खोल दिया। सोनिया गाँधी के खिलाफ इस हमले की शुरुआत करते हुए, अर्नब गोस्वामी ने सवाल किया था कि अगर पालघर में हुए भयावह लिंचिंग की घटना में हिंदू साधुओं की जगह ईसाई पादरियों को मार दिया जाता तो क्या वह मौन बनाए रखतीं। टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी ने उनके खिलाफ विभिन्न राज्यों में पुलिस से शिकायतें दर्ज की थीं। इनमें से ज्यादातर कॉन्ग्रेस शासित राज्य थे।

इसके बाद अर्नब गोस्वामी पर कॉन्ग्रेस के दो गुंडों ने 22 से 23 अप्रैल के बीच की रात के बीच में हमला किया था। हालाँकि उन्होंने अर्नब गोस्वामी के सुरक्षा अधिकारी तथा पुलिस के सामने कॉन्ग्रेस के सदस्य होने की बात कबूल की थी। लेकिन मुंबई पुलिस ने इस बात का उल्लेख करने से इनकार कर दिया। दर्ज की गई एफआईआर में गोस्वामी ने आरोप भी लगाया कि पुलिस द्वारा हमले को नजरअंदाज किया जा रहा है।

सफूरा जरगर को प्रेगनेंसी से बचने के लिए कंडोम यूज करना था: सलाह देने वाली MBBS छात्रा को कट्टरपंथी दे रहे गाली

जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्र नेता सफूरा जरगर दिल्ली दंगों के मामले में जेल में बंद हैं। मीडिया के एक गिरोह विशेष ने सफूरा जरगर की प्रेगनेंसी की बात करते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा। सफूरा जरगर के बारे में ट्विटर यूजर डॉक्टर जेली ने ट्वीट किया था कि उन्हें किसने कहा था कि वो कंडोम के बिना सेक्स करें? इसके बाद से जेली के इनबॉक्स में गालियों की बौछार हो गई है।

दरअसल, सलमान निजामी ने सफूरा जरगर को एक्टिविस्ट बताते हुए ट्वीट किया था कि वो प्रेगनेंसी के दौरान और रमजान के महीने में जेल में हैं जबकि कपिल मिश्रा जैसे ‘घृणा फैलाने वाले लोग’ खुले घूम रहे हैं। उन्होंने लिखा था कि भारत में मुस्लिम होना ही अपराध है, सरकार को कुछ तो शर्म करना चाहिए। सलमान निजामी सहित अन्य इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी सफूरा जरगर को जेल से रिहा करने की माँग की थी। इस पर डॉक्टर जेली ने पूछा था कि उन्होंने बिना कंडोम का प्रयोग किए सेक्स किया ही क्यों?

बस इसके बाद खेल शुरू हुआ। उनके इनबॉक्स में इस्लामी कट्टरपंथी घुस आए। कादरी नायड नामक व्यक्ति ने अपशब्द कहे। मोहम्मद मुहीउद्दीन ने लिखा कि तुम डॉक्टर बनने लायक नहीं हो। अज़हरुद्दीन ने तो यहाँ तक लिख दिया कि काश आपके पैरेन्ट्स ने भी सेक्स करते वक़्त कंडोम का प्रयोग किया होता। सैयद अबरार ने तो माँ की गाली दी। इमरान मिर्जा ने तो पूछा कि क्या हम कंडोम के साथ सेक्स कर सकते हैं, मैं आपको इसके बदले रुपए दूँगा। सोहैब खान ने ‘कुतिया’ शब्द का प्रयोग किया।

डॉक्टर जेली ने ख़ुद सारे स्क्रीनशॉट्स शेयर करते हुए जानकारी दी कि उन्हें गालियाँ दी जा रही हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को ‘सिंगल सोर्स पीपल’ नाम दिया है। सफूरा जरगर सीएए विरोधी प्रदर्शनों और लोगों को भड़काने में भी सक्रिय थीं। वो अप्रैल 10, 2020 से तिहार जेल में बंद हैं। पुलिस का कहना है कि वो दिल्ली में दंगे भड़काने वाले मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है। सफूरा जामिया कोआर्डिनेशन कमिटी की मीडिया कोऑर्डिनेटर हैं।

सफूरा जरगर के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला चल रहा है। सफूरा जरगर ने जाफराबाद-सीलमपुर में 50 दिनों के हंगामा की साजिश रची थी और वहाँ महिलाओं-बच्चों को बिठाने के लिए पूरा जोर लगाया था। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस पार्टी के फिरोज ख़ान ने भी सफूरा जरगर को रिलीज करने की माँग की है। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर अपनी शक्ति का दुरूपयोग करने और लोगों के अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी उन्हें रिलीज करने की माँग की है।

इंदौर के बाद मालेगाँव कब्रिस्तान से खौफनाक आँकड़ा: 140 के मुकाबले 457 शव सिर्फ अप्रैल में दफन, कोरोना पर शक

मध्य प्रदेश के इंदौर के बाद कब्रिस्तान में दफन होने वाले शवों की संख्या ने महाराष्ट्र के मालेगाँव की स्थिति पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से लेकर अब तक यहाँ कोविड-19 के कारण मरने वाले केवल 12 लोग हैं। मगर, शहर में हुई मौतों की संख्या पिछले साल के आँकड़ों और पिछले महीने के आँकड़ों से कहीं ज्यादा हैं। 

इंडियन एक्सप्रेस की खबर में पेश किए गए आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल में मालेगाँव में कुल 580 मौतें हुई हैं। जबकि पिछले साल इसी महीने में केवल 277 मौतें हुई थीं। इसके अलावा इस साल के मार्च में भी ये संख्या 314 थी। अब इस ग्राफ में औचक बढ़ोतरी देखकर संदेह जताया जा रहा है कि कोरोना काल में इस प्रकार की वृद्धि दर्शाती है कि इनमें से कुछ लोग कोरोना पॉजिटिव भी हो सकते थे।

साभार: इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट

इससे पहले, अप्रैल महीने में स्वास्थ्य विभाग ने भी मालेगाँव पर अपना संदेह प्रकट किया था। उस समय तक कोविड-19 से केवल 8 मौतें हुईं थी। तब स्वास्थ्य विभाग ने बताया था कि मालेगाँव में इस महीने सिर्फ 8 लोगों की मौत कोरोना से हुई है। लेकिन अन्य कारणों से हुई 221 मौतों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ा कब्रिस्तान का सालाना औसत भी रोज 7-8 जनाजों का है। ऐसे में 10 अप्रैल के बाद जनाजों में बढ़ोतरी सवालों के घेरे में है। 

बता दें कि मालेगाँव में कोरोना के पहले मरीज की शिनाख्त 8 अप्रैल को हुई थी। इसके बाद यहाँ करीब 229 केस आए और रविवार तक यहाँ 12 मौतें हुईं। अधिकारियों की मानें तो नगर में 27 अप्रैल के बाद कोई मृत्यु कोरोना के कारण नहीं हुई है। लेकिन, एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि बड़ा कब्रिस्तान में करीब 2 घंटे में 9 शवों को लाते देखा गया।

मालेगाँव में अनुमानित तौर पर 79% आबादी मुस्लिमों की है। यहाँ कब्रिस्तान के एडमिनिस्ट्रेटर रईस अहमद अंसारी, इस संबंध में कहते हैं कि आम दिनों में यहाँ केवल 6 से 7 शव दफनाने के लिए लाए जाते थे। मगर, पिछले तीन दिनों में उन्होंने 30 शवों को दफनाया है। खबर की मानें तो पिछले साल अप्रैल में शवों को दफनाने की संख्या जहाँ केवल 140 गिनी गई थी, वहीं इस अप्रैल में ये आँकड़ा 457 पहुँच गया है।

कुछ अधिकारियों ने इस स्थिति के लिए लॉकडाउन में बंद हुए निजी अस्पतालों को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही निर्णय लिया है कि वे शहर में 10 अप्रैल के बाद मरने वाले सभी लोगों के परिवार वालों का रैंडम टेस्ट करेंगे। इसके अलावा मालेगाँव के स्वास्थ्य अधिकारी गोविंद चौधरी ने कहा, “हमें अभी भी यह अध्ययन करना है कि क्या कुछ मौतें कोविड-19 की वजह से हुईं, जिन्हें रिपोर्ट नहीं किया गया।”

वहीं आईएएस पंकज आशिया का कहना है, “यहाँ अप्रैल में जो मौतों में वृद्धि हुई है, उसके बारे में बिना गहन अध्ययन के कहना मुश्किल होगा कि इनमें से कुछ मौतें कोविड-19 के कारण हुईं। हमने उन सभी के परिवार के सदस्यों का औचक ढंग से परीक्षण करने का निर्णय लिया है, जिनकी मृत्यु 10 अप्रैल को हुई है ताकि यह जाँचा जा सके कि क्या उनमें से किसी को संक्रमण है।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले पिछले महीने की शुरुआत में ऐसा संदेह इंदौर में दफन होते शवों को लेकर लगाया गया था। तब वहाँ मात्र एक हफ्ते में मुस्लिमों के कब्रगाह पर आने वाले शवों में औचक बढ़ोतरी देखने को मिली थी। मौजूदा जानकारी के अनुसार, इंदौर में मुस्लिमों के 4 कब्रिस्तान हैं, जिनमें 1 अप्रैल से 6 अप्रैल के बीच में 127 लोगों के शवों को दफनाया गया था और 7 वें दिन तक ये आँकड़ा 145 पहुँच गया था।

पश्चिम बंगाल: बाबुल सुप्रीयो ने ममता सरकार पर लगाया आरोप कहा- केन्द्र सरकार से मिले राशन को बेचा जा रहा

पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर एक बार फिर सांसद और केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रीयो ने राशन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। बाबुल सुप्रीयो ने राज्य की ममता सरकार पर केन्द्र से गरीबों के लिए मिलने वाले राशन को राइस मिलों को बेचने का आरोप लगाया है। वहीं इसे साबित करने के लिए सुप्रीयो ने इसका एक वीडियो भी शेयर किया है।

बंगाल के आसनसोल से सांसद और केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री बाबुल सुप्रीयो ने अपने ट्विटर हैंडल से एक वीडियो पोस्ट करते हुए ममता सरकार पर राशन बेचने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर आई वीडियो में आप देख सकते हैं कि ट्रक पर सैकड़ों बोरे में भरकर चावल राइस मिल के अंदर लाया गया है। इस वीडियो को हबीबपुर का बताया जा रहा है। इसमें सुना जा सकता है कि हबीबपुर के श्री कृष्णा राइस मिल में ट्रकों में भरकर सैकड़ों बोरा चावल लाया जाता है।

बंगाली भाषा में रिकॉर्ड किए गए वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि चावल बहुत अच्छी गुणवत्ता का है और वीडियो में दिखाया जा रहा है कि जिन बोरों में चावल भरा हुआ है, उन बोरों पर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का स्टीकर भी लगा हुआ है, लेकिन इन बोरों से चावल को निकालकर दूसरे बोरों में भरकर उसे पैक किया जा रहा है। इतना ही नहीं इसके बाद इसे बेचा भी जा रहा है।

बाबुल सुप्रीयो ने अपने हैंडल से किए ट्वीट में तृणमूल के साथ ममता बनर्जी को भी टैग किया है। साथ ही सुप्रीयो ने ट्वीट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछा है कि आखिर मुख्यमंत्री यह बताएँ कि बंगाल में गरीबों के लिए केंद्र सरकार जो राशन भेज रही है, उसे राशन मिल को क्यों बेच रही है? उन्होंने दावा किया है कि सत्तारूढ़ पार्टी के नेता इस राशन बिक्री में शामिल हैं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इसके लिए अनुमति मिली हुई है।

वहीं राज्य के खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने बाबुल के इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि जब बंगाल के लोग संकट में हैं तो भारतीय जनता पार्टी केवल राजनीति कर रही है। हालाँकि वीडियो में चावल को राइस मिल के अंदर ले जाने के संबंध में उन्होंने टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया है।

आपको बता दें कि कोरोना संकट के बीच व्यवस्थाओं को लेकर ममता सरकार और केन्द्र सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कभी केन्द्र सरकार ममता सरकार पर कोरोना मरीजों के सही आँकड़े छिपाने का आरोप लगाती है तो कभी राशन वितरण में ममता सरकार पर धाँधली का आरोप लगाया जाता है।

दरअसल, राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने शनिवार (2 मई, 2020) को ममता सरकार पर कोरोना संक्रमण के सही आँकड़े छिपाने का आरोप लगाया था। अपने ट्वीट में राज्यपाल ने कहा था कि ममता बनर्जी सरकार ने 30 अप्रैल तक राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या हेल्थ बुलेटिन में 572, जबकि उसी समय में केन्द्र सरकार को 931 बताई है।

इसे लेकर प्रदेश के राज्यपाल जगदीप घनखड़ ने लिखा कि कोविड-19 संक्रमण के आँकड़ों पर पर्दा डालने के अभियान को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बंद करना चाहिए। इसे पारदर्शी रूप से साझा करें।

वहीं इससे पहले पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की कार्यशैली पर लॉकडाउन के बीच राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने सवाल उठाए थे। राज्यपाल ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि निशुल्क राशन गरीबों के लिए हैं, तिजोरियों में बंद करने के लिए नहीं है। धोखाधड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। दरअसल, बंगाल के कई इलाकों में मुफ्त राशन वितरण में भारी अनियमितताएँ बरते जाने की खबरें सामने आई हैं।

बरेली: घर में काट रहे थे गोवंश, सूचना पर पहुँची पुलिस ने नवी, आलम, छोटे को किया गिरफ्तार, 16 के खिलाफ FIR

उत्तर प्रदेश के जिला बरेली में लॉकडाउन के बीच फरीदपुर के एक घर में गोवंश का कटान जारी था। इसकी सूचना पर पहुँची पुलिस देख आरोपितों के बीच भगदड़ मच गई। पुलिस ने मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया साथ ही घर से पुलिस ने ढाई क्विटंल गोमांस बरामद किया है। वहीं दूसरी ओर देर रात गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों पर मांस तस्करों ने गोली चला दी, जिसमें पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए। हालाँकि, पुलिस ने पीछा कर दोनों मांस तस्करों को दबोच लिया।

खबर के मुताबिक शनिवार (2 मई, 2020) शाम को पुलिस ने बरेली के फरीदपुर इलाके के मेवा सर्फापुर में एक घर में गोवंशीय पशु की हत्या पर छापेमारी की। सूचना पर पहुँची पुलिस ने मौके पर गोवंशीय पशु को कटा हुआ देखा। पुलिस को देख घर में गोवंश को काटने में लगे लोगों के बीच भगदड़ मच गई, लेकिन पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके से आरोपित नवी, आलम और छोटे को गिरफ्तार कर लिया, हालाँकि कुछ लोग मौके से भाग जाने में सफल रहे।

अमर उजाला के खबर की कटिंग

बरेली की पुलिस ने मौके से ढाई क्विटंल गोमांस बरामद किया, जिसे तत्काल जमीन में दफन करा दिया गया। वहीं पुलिस ने इस मामले में दस लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक इलाके में इन दिनों गो तस्कर सक्रीय हैं। बीते दिन पुलिस ने कुल 16 गो मांस तस्करों के खिलाफ में मुकदमा दर्ज किया है।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर की कटिंग

वहीं दूसरी ओर दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक घटना बरेली जिले के नवाबगंज क्षेत्र की है, जहाँ बीते शुक्रवार (1 मई, 2020) देर रात चौकी इंचार्ज दिगंबर सिंह अपनी टीम के साथ गश्त पर थे। इस बीच उन्होंने नई बस्ती के पास पनघैली नदी के किनारे दो लोगों को देखा, जो कि एक पशु को क्रूरता से पीटते हुए ले जा रहे थे। इसे देख पुलिस टीम ने जब उनका पीछा किया तो एक उनमें से एक ने पुलिस पर गोली चला दी, जिसमें पुलिस टीम के सिपाही बाल-बाल बच गए।

खुद पर गोली चलते देख पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों युवकों को दबोच लिया। पुलिस पूछताछ में दोनों की पहचान मुहम्मद ओवैस और शामा निवासी मुहल्ला कुरैशनगर के रूप में हुई। पुलिस ने दोनों के पास से एक जिंदा कारतूस, खाली खोका और चाकू बरामद किया है।

चौकी इंचार्ज दिंगबर सिंह के मुताबिक पकड़े गए दोनों आरोपितों के खिलाफ में मुकदमा दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि दोनों ही एक पशु खरीदकर लाए थे, जिसका बध कर ये लोग मांस बेचते। पहले भी ऐसी कई घटनाएँ घट चुकी हैं।

भोपाल: RSS ने नगर निगम के कोरोना कर्मवीरों को 200 PPE किट और सुरक्षा उपकरण बाँटे, उन पर बरसाए फूल

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के गुफा मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने रविवार (मई 3, 2020) को नगर निगम के स्वास्थ्य कर्मचारी, सफाई दरोगा और सहायक स्वास्थ्य अधिकारियों को PPE किट और अन्य सुरक्षा का सामान बाँटा।

कोरोना योद्धाओं की मदद के लिए समाज का हर तबका आगे आ रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कैसे पीछे रह सकता है। RSS की ओर से रविवार को भोपाल नगर निगम के कोरोना कर्मवीरों को सुरक्षा उपकरण बाँटे गए। इसमें 200 PPE किट, मेडिकेटेड ग्लब्स, मास्क और सैनिटाइजर शामिल हैं।

सभी कोरोना कर्मवीरों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ लाइन में खड़ा किया गया और उन्हें पीपीई किट, मास्क और सैनिटाइजर दिया गया। इस दौरान संघ के स्वयंसेवकों ने नगर निगम के कोरोना कर्मवीरों पर फूलों की बारिश कर उनका हौसला बढ़ाया और सम्मान किया। इस मौके पर मध्य भारत के सह संघचालक अशोक पांडेय और भोपाल विभाग के संघचालक डॉ. राजेश सेठी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। 

उल्लेखनीय है कि देश कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस दौरान अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभा रहा है। संघ देश के उन सुदूर इलाक़ों में ज्यादा ध्यान दे रहा है, जहाँ तक सरकार भी आसानी से नहीं पहुँच पाती। म्यांमार, बांग्लादेश सीमा और पाकिस्तान सीमा पर भी लोगों को मदद पहुँचाई जा रही है।

‘दैनिक जागरण’ में प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार, पूरे देश में संघ के तीन लाख से अधिक कार्यकर्ता 3.10 करोड़ लोगों को भोजन कराने के साथ-साथ 38 लाख से अधिक परिवारों में कच्चा राशन पहुँचाने का काम कर चुके हैं। सबसे बड़ी बात तो ये कि पीड़ितों की धर्म, जाति व संप्रदाय देखे बिना संघ उनकी सेवा में लगा है। 26 लाख से भी अधिक लोगों को मास्क बाँटे गए हैं। 60 हज़ार लोगों को आयुर्वेदिक काढ़ा पिलाया गया है।

वैश्विक महामारी की आपदा के बीच संघ के स्वयंसेवक सड़कों पर ज़रूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। यहाँ तक कि मुस्लिमों और ईसाइयों को भी संघ से ख़ूब मदद मिल रही है। मुंबई कोरोना से सबसे ज्यादा ग्रस्त महानगर है। यहाँ जितने मामले अकेले हैं, उतने किसी अन्य राज्य में भी नहीं हैं। ऐसे में संघ ने लॉकडाउन के पहले ही दिन 30 कम्युनिटी किचेन बना कर जनसेवा का कार्य शुरू कर दिया था। रोज 1 लाख पैकेट से भी ज्यादा भोजन बाँटा जा रहा है। ग्रोसरी के भी 28000 से अधिक पैकेट रोज बाँटे जा रहे हैं।

वहीं RSS के सेवा भारती संगठन ने पश्चिम दिल्ली की एक चर्च में 250 भूखे लोगों को राशन उपलब्ध करवाया। इसके अलावा प्रयागराज के एक मुस्लिम परिवार ने भी आपदा के समय RSS से मदद माँगी। इंदौर में फँसी छात्रा तक सारी सामग्रियाँ और मदद संघ ने तुरंत पहुँचाई, जिसके बाद मुस्लिम परिवार ने संघ को धन्यवाद दिया।

श्रमिक स्पेशल ट्रेन को लेकर हो रही कंफ्यूज़न को रेलवे ने किया दूर, जारी की ज़रूरी गाइडलाइन्स

देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की वजह लॉकडाउन 17 मई तक बढ़ा दिया गया है। जनता की माँग देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा देश के अलग-अलग हिस्सों में फँसे लोगों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला लिया गया है। सरकार की घोषणा के बाद बीते शुक्रवार (1 मई 2020) को पाँच और शनिवार (2 मई 2020) को 10 श्रमिक ट्रेन चलाए गए। साथ ही इसको लेकर विस्तृत गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है।

भारतीय रेलवे के मुताबिक, ये ट्रेनें केवल मजदूरों, श्रद्धालुओं, पर्यटकों, छात्रों और अन्य ऐसे लोगों के लिए हैं, जो अपने घर-गाँव से दूर लॉकडाउन के दौरान फँस गए हैं। इन ट्रेनों के बारे में कई तरह की खबरें सामने आ रही थीं। साथ ही सोशल मीडिया पर इसको लेकर कई तरह की अफवाहें भी फैल रहे है। जो लोगों में काफ़ी कंफ्यूज़न पैदा कर रहा था। लोगों के मन में चल रहे सवालों को मद्देनजर रखते हुए रेल मंत्रालय ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को लेकर रविवार को कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

बुकिंग को लेकर सवाल

रेलवे अधिकारियों ने बताया श्रमिक स्पेशल ट्रेन से जाने के लिए अपने राज्य के अधिकारियों से संपर्क करना होगा। आवेदन के बाद संबंधित अधिकारी के पास डेटा तैयार होगा।
अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए लिस्ट को रेलवे को सौंपा जाएगा। जिसके आधार पर रेल में सफर करने की इजाजत दी जाएगी। अगर कोई बगैर आवेदन के या फिर ऐसा कोई व्यक्ति जिसका नाम लिस्ट में नहीं होगा और वह स्टेशन पहुँच जाता है, तब उसे सफर नहीं करने दिया जाएगा। इसलिए पुलिस प्रशासन से पहले जानकारी प्राप्त करने के बाद ही प्रवासी रेलवे स्टेशन पहुँचे।

टिकट को लेकर सवाल

रेल मंत्रालय का कहना है, कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन करने के लिए निर्देशित गंतव्य और राज्य द्वारा दी गई यात्रियों की संख्या के अनुसार ट्रेन टिकट की छपाई की जाएगी।

गंतव्य को लेकर सवाल

रेलवे अधिकारियों ने बताया, यह ट्रेन बीच में नहीं रुकेगी। प्रत्येक श्रमिक स्पेशल ट्रेन का केवल एक गंतव्य होगा। सामान्य तौर पर, श्रमिक स्पेशल ट्रेन 500 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए चलेंगी। ये ट्रेन गंतव्य से पहले बीच में किसी स्टेशन पर नहीं रुकेंगी। पूरी लंबाई वाली ट्रेन में यात्री सोशल डिस्टेंस के नियम का पालन करते हुए बैठेंगे और बीच वाली सीट पर कोई नहीं बैठेगा। इस तरह की प्रत्येक ट्रेन लगभग 1,200 यात्रियों को ले जा सकती है।

खाने-पीने की व्यवस्था

गाइडलाइन्स के अनुसार जिस स्टेशन से ट्रेन चलेगी, वहाँ की राज्य सरकार की तरफ से यात्रियों को खाने के पैकेट और पानी मुहैया कराया जाएगा। यदि यात्रा 12 घंटे से अधिक के लिए होगी तो एक समय का खाना रेलवे की ओर से दिया जाएगा। साथ ही राज्य सरकारों के द्वारा यात्रियों को आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।

यात्रा करने वाले प्रत्येक यात्रियों के लिए दिशा-निर्देश?

  • सभी यात्रियों का फेस मास्क पहनना अनिवार्य होगा।
  • 12 घंटे से अधिक लंबी यात्रा वाली ट्रेनों में एक समय का भोजन रेलवे द्वारा प्रदान किया जाएगा।
  • जहाँ से ट्रेन चलेगी, वहाँ प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि राज्य सरकार द्वारा यात्रा करने के लिए मंजूरी व टिकट मिलने के बाद ही यात्री ट्रेन पर यात्रा करें। यात्रियों को स्क्रीनिंग के बाद ट्रेन में बैठने दिया जाएगा।
  • गंतव्य पर पहुँचने के बाद राज्य सरकार के अधिकारी यात्रियों की अगवानी करेंगे और उनकी स्क्रीनिंग, जरूरी होने पर पृथक-वास और आगे की यात्रा से संबंधित सभी प्रबंध करेंगे।
  • रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा।

हंदवाड़ा में वीरगति को प्राप्त कर्नल आशुतोष के परिवार को 50 लाख रुपए व एक सदस्य को नौकरी देगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए पाँच जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए प्रदेश के वीर जवान कर्नल आशुतोष शर्मा के परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। यूपी के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने इसकी जानकारी दी है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार (मई 3, 2020) को 21 राष्ट्रीय रायफल्स के वीरगति को प्राप्त कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, नायक राजेश, लांस नायक दिनेश तथा जम्मू-कश्मीर पुलिस के शहीद सब-इंस्पेक्टर के शौर्य और वीरता को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले माँ भारती के वीर सपूतों के शौर्य व शहादत को कोटिशः नमन। आप सभी शहीदों का यह सर्वाेच्च बलिदान अविस्मरणीय है। देश को आप पर गर्व है।”

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा क्षेत्र के एक गाँव में आतंकवादियों के साथ एनकाउंटर में यूपी के बुलंदशहर के गाँव परवाना के रहने वाले कर्नल आशुतोष शर्मा रविवार को वीरगति को प्राप्त हो गए। कर्नल के वीरगति के प्राप्त होने की खबर मिलते ही पूरे गाँव और आसपास के इलाके शोक है। लोगों ने उनकी शहादत को सलाम किया है।

जवानों ने यूँ लिखी बहादुरी की इबारत

हंदवाड़ा के एक घर में छिपे आतंकी फायरिंग कर रहे थे। खुफिया सूचना पर सुरक्षा बलों ने जॉइंट ऑपरेशन चलाया। 21 राष्ट्रीय रायफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा इस ऑपरेशन को लीड कर रहे थे। उनके साथ RR के मेजर अनुज सूद, नायक राजेश और लांस नायक दिनेश भी थे। जम्मू-कश्मीर पुलिस के सब-इंस्पेक्टर शकील काजी भी उनके साथ थे।

कर्नल शर्मा की पूरी टीम उस घर में घुस गई जहाँ आतंकी छिपे हुए थे। एक-एक करके बंधक बनाए गए सभी नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया। इस ऑपरेशन के दौरान जवानों को कई गोलियाँ लग गईं। जख्‍मी जवान वीरगति को प्राप्त हो गए मगर आतंकियों को खत्‍म करके ही दम लिया। इसमें पाकिस्तान के रहने वाले मोस्ट वांटेड लश्कर आतंकी हैदर भी ढेर हो गया।

कर्नल आशुतोष शर्मा को मिले थे वीरता के दो मेडल

RR की गार्ड्स रेजिमेंट से आने वाले कर्नल शर्मा लंबे समय से कश्‍मीर घाटी में तैनात थे। वह अपनी बहादुरी के लिए दो-दो बार वीरता पुरस्‍कार से सम्‍मानित किए जा चुके थे। वह आतंकियों को सबक सिखाने के लिए जाने जाते थे। आशुतोष शर्मा को कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर अपने कपड़ों में ग्रेनेड छिपाए हुए आतंकी से अपने जवानों की जिंदगी बचाने के लिए वीरता मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। घाटी में सेना ने कर्नल रैंक के अधिकारी आखिरी बार पाँच साल पहले, 2015 में खोया था। जनवरी 2015 में पुलवामा में एक ऑपरेशन के दौरान, कर्नल एमएन रॉय वीरगति को प्राप्त हुए थे।