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‘रामायण’ और ‘महाभारत’ एक बार फिर से TV पर: 7 और साढ़े 7 बजे की है टाइमिंग

सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा दूसरी बार चलाए गए प्रसिद्ध धारावाहिक ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ को यदि आप देखने से वंचित रह गए हैं तो एक बार फिर से दर्शकों की माँग पर इन्हें प्रसारित किया जा रहा है। इस बार ‘रामायण’ को स्टार प्लस और महाभारत को कलर्स टीवी पर देखा जा सकेगा। इस बात की जानकारी स्वयं टीवी चैनलों ने सोशल मीडिया के माध्यम से दी है।

स्टार प्लस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में लिखा गया है कि अयोध्या के वासी, पुरुषों में सर्वोत्तम, सबके प्रिय मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कहानी रामायण 4 मई से शाम साढ़े सात बजे स्टार प्लस पर दिखाई जाएगी। ट्वीट में श्रीराम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल, लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले सुनील लहरी और माता सीता का किरदार निभाने वालीं दीपिका चिखलिया को भी टैग किया गया है।

इस पर ‘रामायण’ में लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले सुनील लहरी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा कि दुनिया का सबसे ज्यादा देखा जाने वाले शो का रिकॉर्ड बनाने वाले प्रोग्राम को एक बार और देखने का और सराहने का अवसर…। ‘रामायण’ एक बार फिर स्टार प्लस पर देखने का अवसर 4 मई से शाम 7:30 बजे, मिलतें है आप के घर में।

वहीं दूसरी ओर कलर्स टीवी चैनल द्वारा 3 मई को किए गए अपने आधिकारिक ट्वीट के मुताबिक आज 4 मई से बीआर चोपड़ा के प्रसिद्ध शो ‘महाभारत’ को दिखाया जाएगा। चैनल ने अपने ट्वीट में लिखा है कि तैयार हो जाइए एक बार फिर देखने के लिए ‘महाभारत’ की अनोखी कहानी, कल से हर दिन शाम 7 बजे सिर्फ़ कलर्स पर।

आपको बता दें कि 24 मार्च को पहले लॉकडाउन के ऐलान के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ धारावाहिकों के पुन: प्रसारण का एलान किया गया था। इसके बाद 28 मार्च से ‘रामायण’ डीडी नेशनल और ‘महाभारत’ डीडी भारती पर प्रसारित होना शुरू हुआ।

दूसरी बार प्रसारित किए गए धारावाहिक ‘रामायण’ को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। इसका परिणाम यह रहा कि ‘रामायण’ ने पिछले कई रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए टीवी जगत में एक के बाद एक नए कीर्तिमान स्थापित किए। इस धारावाहिक ने दूरदर्शन पर ऑन एयर होते हुए टीआरपी के पिछले पाँच साल के पुराने सभी रिकार्डों को ध्वस्त कर दिया था।

यहाँ तक कि ‘रामायण’ के 16 अप्रैल के एपिसोड को दुनियाभर में 7.7 करोड़ लोगों ने देखा, जो कि सबसे लोकप्रिय शो गेम ऑफ़ थ्रोन्स से भी कहीं ज़्यादा है। इस नंबर के साथ यह शो एक दिन में दुनिया भर में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला शो बन गया।

गौरतलब है कि जबसे ‘रामायण’ शुरू हुआ है तभी से टीआरपी की लिस्ट में नंबर वन है। कुछ दिनों पहले प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर ने बताया था कि साल 2015 से लेकर अब तक जनरल एंटरटेनमेंट कैटगरी (सीरियल्स) के मामले में यह शो टॉप पर है। वर्ष-2015 से अब तक का सबसे अधिक टीआरपी जनरेट करने वाला हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट शो ‘रामायण’ है।

याद रहे कि कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए देश में लागू किए गए लॉकडाउन के बाद से ही सभी फिल्मों और धारावाहिकों की शूटिंग पर रोक लगी हुई है।

हंदवाड़ा मुठभेड़ के बलिदानियों का TheWire ने उड़ाया मजाक, आतंकियों के आगे लिखा- ‘कथित’

द वायर की अजेंडायुक्त पत्रकारिता ने इस बार देश के लिए वीरगति को प्राप्त हुए सेना के जवानों के बलिदान का खुलेआम मखौल उड़ाया है। अपनी रिपोर्ट में द वायर ने हंदवाड़ा में सुरक्षाकर्मियों को मारने वाले आतंकियों को ‘कथित आतंकवादी’ बताया है। सबसे घृणा की बात ये है कि ये काम द वायर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई की आड़ में किया है। उन्होंने पीटीआई की रिपोर्ट को, जिसे आमतौर पर मीडिया हाउस जस का तस अपने पोर्टल आदि के लिए इस्तेमाल करते हैं, उसी में अपना प्रोपगेंडा परोसकर ये घिनौना खेल खेला है।

पीटीआई की रिपोर्ट को यदि हम ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’, ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ जैसे नामी पोर्टल्स पर देखें, तो मालूम चलता है कि पीटीआई ने अपनी खबर में आतंकी शब्द का ही प्रयोग किया था। मगर, एस वरदराजन के ‘द लायर’ ने इसमें अपने अनुसार बदलाव कर लिया और आतंकियों के आगे ‘कथित’ लिख कर उनके आतंकी होने पर संदेह पैदा किया।

बस फिर क्या? इस हरकत को देखकर लोगों ने ‘द वायर’ को एक बार फिर लताड़ लगाई और आरोप लगाया कि ये संस्थान हंदवाड़ा को भी बाटला हाउस जैसा केस बनाना चाहता है, इसलिए जरूरी है कि केंद्र सरकार अब इनके ख़िलाफ़ सख्त एक्शन ले।

इस समय सोशल मीडिया पर द वायर की इस हरकत के लिए उनकी बहुत थू-थू हो रही है। हालाँकि, उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है। लेकिन, फिर भी यूजर उसका स्क्रीनशॉट लेकर उन्हें शब्दों के बीच का फर्क़ बता रहे हैं।

जी हाँ, इस समय देश की आम जनता ‘कथित वरिष्ठ पत्रकारों’ के एक संस्थान को आड़े हाथों लेते हुए ये समझा रही है कि जिन्होंने उत्तर कश्मीर में सेना के जवानों पर हमला किया उन्हें ‘कथित आतंकवादी’ नहीं कहा जाएगा बल्कि ‘100% आतंकवादी’ ही कहा जाएगा। इसके अलावा जो हमारे 5 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए, उन्हें बलिदानी कहा जाएगा न कि ‘मारे गए’।

गौरतलब हो कि इस समय ट्विटर पर कई सक्रिय यूजर्स की यही माँग है कि पीटीआई को अपनी स्टोरी के साथ इस तरह की छेड़छाड़ के लिए द वायर पर एक्शन लेना चाहिए। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि द वायर पाक आधारित चैनल है, जो वक्त आने पर इस तरह हमारे जवानों के बलिदान का मजाक उड़ा रहा है।

बता दें कि शब्दों के हेर-फेर से देश के युवाओं और अपने पाठकों को बरगलाने का काम द वायर बहुत लंबे समय से करता आ रहा है। अब तो सब जान चुके हैं कि उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य क्या है। कभी-कभी पड़ोसी मुल्क से आए आतंकियों को बचाने के लिए इनकी प्रतिबद्धता देखकर लोग संदेह जताते हैं कि शायद इसके लिए इन्हें बाकायदा फंडिंग भी उधर से ही होती हो।

या कुछ लोगों ऐसा भी लगता है कि प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए अस्तित्व में आया द वायर अब धीरे-धीरे आतंकी संस्थानों का मुखपत्र बनता जा रहा है। जिनके पास सूचना के लिए पीटीआई जैसे पर्याप्त स्रोत है, मगर फिर भी वे आतंकियों को कथित आतंकी बताकर कश्मीर में घटी घटना का सामान्यकरण करना चाहता है और आतंकियों के लिए सहानुभूति बटोरना चाहता है। मुमकिन है आज ये पोर्टल जो आतंकियों को कथित आतंकी बोल रहा है, कल को देश का सम्मानित नागरिक बताने लगे।

बता दें कि कल 3 मई को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में स्थित हंदवाड़ा में आतंकियों के साथ एनकाउंटर के दौरान एक मेजर और एक कर्नल समेत 5 भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। इन सभी वीर सपूतों ने एक इमारत में छिपे आतंकियों से लोहा लेने के लिए बाहर से हमला करने के बजाय अंदर जाकर कार्यवाई करना मुनासिब समझा था, ताकि नागरिकों की जानमाल की क्षति न हो। लेकिन बावजूद, इस तथ्य के द वायर उनकी बहादुरी और उनके साहस के बारे में पाठकों को बताने की जगह, आतंकियों के लिए अपनी खबर चला रहा है। ताकि एक बार फिर उन्हें पढ़ने वाला बुद्धिजीवी वर्ग खड़ा हो, और सवाल पूछे कि कैसे मालूम कि जवानों को मारने वाले आतंकी ही थे?

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने से इंकार, महीने भर से फरार सुलेमान, मलील, शरीफ को नहीं ढूँढ रही पुलिस: मधुबनी पीड़िता काला देवी के बेटे का आरोप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर 5 अप्रैल 2020 को दीप जलाने की वजह से बिहार के मधुबनी जिले में एक 70 वर्षीय महिला काला देवी की हत्या कर दी जाती है। हत्या के आरोपित सुलेमान नदाफ, मलील नदाफ और शरीफ नदाफ फरार हैं। इस घटना को एक महीना हो गया है, लेकिन अभी तक न तो आरोपितों को ही गिरफ्तार किया जा सका है और न ही पीड़ित परिवार को ही किसी तरह की मदद दी गई है।

इतना ही नहीं, अभी तक मधुबनी के पीड़ित परिवार को मृतक काला देवी का पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी नहीं दिया गया। काला देवी के पुत्र सुरेंद्र मंडल बताते हैं कि वो बार-बार पुलिस स्टेशन जाते हैं और इंसाफ की गुहार लगाते हैं, लेकिन थाना प्रभारी उनकी बातों पर कोई ध्यान नहीं देते हैं। सुरेंद्र ने रहिका थाना प्रभारी राहुल कुमार से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट माँगी, मगर उन्होंने देने से इनकार कर दिया। थाना प्रभारी राहुल कुमार का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लिखा है कि बुजुर्ग महिला की मौत हार्ट अटैक से हुई है।

जब हमने इस बारे में सुरेंद्र से पूछा तो उन्होंने कहा, “मैंने, मेरे भाई ने और गाँव के लोगों ने भी देखा कि मलीन नदाफ ने मेरी माँ के सिर पर दो-तीन बार मारा। इसके बाद उसने इतनी जोर से उनका गला दबाया कि वह बेंच पर से नीचे गिर गईं और उनकी मौत हो गई।” सुरेंद्र ने थाना प्रभारी पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनकी पूरी शिकायत ही नहीं लिखी और आधी-अधूरी रिपोर्ट लिखकर आगे भेजा।

हालाँकि, इस बात की पुष्टि मधुबनी के विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के जिलाध्यक्ष महेश प्रसाद, बीजेपी जिलाध्यक्ष शंकर झा और बीजेपी मंडल अध्यक्ष प्रभांशु झा उर्फ सोनू ने भी की। इन लोगों का भी यही कहना है कि थाना प्रभारी ने ही लापरवाही दिखाई। उन्होंने सच्चाई छुपाकर गलत रिपोर्ट बनाई। प्रभांशु झा ने बताया कि थाना प्रभारी ने FIR भी दो दिन बाद दर्ज किया। वो भी काफी आना-कानी के बाद, जब आरोपित फरार हो गए।

बीजेपी जिलाध्यक्ष शंकर झा और मंडल अध्यक्ष प्रभांशु झा का कहना है कि थाना प्रभारी राहुल कुमार के काम का पिछला रिकॉर्ड भी कुछ ऐसा ही रहा है। उनका अपराधियों के साथ उठना-बैठना रहा है। उन्हें पुलिस स्टेशन में कई बार मुख्य अभियुक्त के साथ बैठे हुए, सेल्फी लेते हुए और वीडियो बनाते हुए देखा गया है। इस मामले में उनका कहना है कि वो आरोपित के साथ मिला हुआ है। उन्होंने बताया कि आरोपित का पैतृक घर पुलिस स्टेशन से मात्र आधा किलोमीटर दूर है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने कभी भी वहाँ पर छापा नहीं मारा। आरोपित खुलेआम घूम रहा है। 

इस बारे में जब हमने सुरेंद्र से पूछा तो उन्होंने भी हामी भरी। इसके साथ ही प्रभांशु झा ने बताया कि थाना प्रभारी पीड़ित परिवार के साथ कोई सहयोग नहीं कर रहे हैं। उसके पुलिस स्टेशन में जाने के बाद भी बात नहीं सुनते हैं और 4-5 घंटे तक बैठाने के बाद अगले दिन आने के लिए बोलते हैं। इसी तरह से लगभग 1 महीने से दौड़ा रहे हैं। बिस्फी के पूर्व विधायक और भाजपा नेता हरिभूषण ठाकुर बचौल ने भी इस बात की पुष्टि की और कहा कि वो लॉकडाउन की वजह से फिलहाल कुछ कर नहीं पा रहे हैं।

शंकर झा का भी कहना है कि थाना प्रभारी पर राजद विधायक फैयाज अहमद का दबाव है। कहीं न कहीं थाना प्रभारी प्रभावित हैं। वरना एक गाँव में मात्र दो मुस्लिम घर होने के बावजूद किसी को इतना संरक्षण कैसे मिल सकता है। यह यहाँ के राजद नेताओं की साजिश है। उन्होंने कहा कि जिस समुदाय के लोगों ने इस वारदात को अंजाम दिया है, उनका एक नेटवर्क है। खासकर जब घटना हिंदू परिवार के साथ होता है तो पूरे जिले में उनका नेटवर्क सक्रिय हो जाता है और बिना सबूत छोड़े इस तरह से काम करता है कि आपको कानों-कान खबर न हो। मगर फिर भी उनकी पार्टी के सांसद जो कर सकते थे, सब किया और अभी भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि पीड़ित को न्याय और अपराधी को सजा मिल सके।

हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट तौर पर राजद विधायक का नाम तो नहीं लिया, लेकिन यह आशंका जताई कि उनके कहने पर थाना प्रभारी ने डॉक्टर को पैसे खिलाकर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को बदलवाया है। बता दें कि इससे पहले सुरेंद्र मंडल ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया था कि फकरे आलम ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बदलवाने की कोशिश कर रहे हैं। 

जब हमने महेश प्रसाद, शंकर झा और प्रभांशु झा से पूछा कि उनके क्षेत्र में इतनी बड़ी घटना हो गई है तो आपलोग क्या कर रहे हैं, तो उनका भी यही कहना था कि लॉकडाउन की वजह से हाथ बँधे हुए हैं। हमें तो पीड़ित परिवार को न्याय भी दिलाना है और कोरोना से भी लड़ना है।

इस सवाल के जवाब में कि लॉकडाउन हटने तक तो घटना के 2 महीने हो चुके होंगे, क्या तब तक फाइल दब नहीं जाएगी, प्रभांशु झा कहते हैं कि चाहे लॉकडाउन हटने में 2-4 या 6 महीने ही क्यों न लग जाए, हम फाइल को दबने नहीं देंगे। लॉकडाउन खत्म होने के बाद हम इस मामले को उग्र रुप देंगे। अभी हमें सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखना है।

हमने इस बाबत थाना प्रभारी राहुल कुमार का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया। हमने कई बार उनके नंबर पर कॉल किया, मगर हर बार वो किसी न किसी वजह से बाहर थे। इसलिए उनसे सीधा संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद हमने मधुबनी के एसपी, डीएसपी और डीएम से संपर्क किया। डीएम और एसपी ने व्यस्त होने की बात कहकर बात को टाल दिया। वहीं डीएसपी ने कहा कि उनके पास नीचे से फाइल ही नहीं आया है। उनके पास फाइल आएगा तो ही कुछ बता पाएँगी। जब हमने मामले में के बारे में और भी जानकारी लेनी चाही, तो उन्होंने यह कहकर फोन काट दिया कि अगर जानकारी चाहिए तो हमारे ऑफिस आइए। हम फोन पर जानकारी नहीं देते हैं। 

बता दें कि डीएसपी मैडम ने लगभग एक सप्ताह पहले सुरेंद्र मंडल को बयान लिखवाने के लिए बुलाया था। मगर जब वो वहाँ पहुँचा था तो वो ऑफिस में नहीं थीं और उनके स्टाफ ने सुरेंद्र को ऑफिस के अंदर भी नहीं आने दिया। उनसे बोला गया कि जो भी बोलना है, यहीं पर बोलो। इसके बाद सुरेंद्र बाहर से बयान लिखवाकर लौट आए थे। फिर सुरेंद्र ने डीएसपी और आईजी को पत्र लिखकर भी इस स्थिति से अवगत करवाया। हालाँकि, अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सुरेंद्र का कहना है कि उन्हें सिर्फ इंसाफ चाहिए और कुछ नहीं।

चीन को कहकर Bye-Bye, कोरियन कंपनियाँ योगी के उत्तर प्रदेश में निवेश को तैयार

चीन के वुहान से निकलकर पूरे विश्व में तबाही मचाने वाले कोरोना संक्रमण के बाद अलग-अलग देशों का रवैया चीन के प्रति बदलने लगा है। हाल ही में कोरियन उद्योगपतियों ने चीन से निकलकर उत्तर प्रदेश (UP, यूपी) में निवेश करने की अपनी इच्छा जाहिर की है।

कोरिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (KCCI) के अध्यक्ष योंगमैन पार्क ने इस विषय पर उत्तर प्रदेश के छोटे और मझोले उद्योगों के मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह से बात की है। उन्होंने कहा कि कोरिया के इलेक्ट्रानिक निर्माता राज्य में निवेश करने के लिए उत्सुक हैं। इसके बाद सिंह ने उन्हें आश्वस्त किया है कि वे यूपी में उनके प्लांट सेटअप के लिए हर संभव मदद करेंगे।

KCCI अध्यक्ष और भाजपा नेता के बीच ये बातचीत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई, जिसे PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आयोजित करवाया था। KCCI कोरिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा व्यावसायिक संगठन है। एक विशेष अधिनियम द्वारा एक सार्वजनिक कानूनी इकाई के रूप में स्थापित, यह 73 क्षेत्रीय चैंबर और 100 से अधिक प्रमुख संस्थानों और संगठनों से बना है, जो कि सभी वाणिज्य और उद्योग से संबंधित है और जो विभिन्न क्षेत्रों की लगभग 180,000 सदस्य कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है।

अब इन्हीं पहलुओं को देखते हुए यूपी मंत्री सिंह ने कोरियाई निवेशकों को राज्य में प्लांट लगाने के लिए हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने अपनी बात में मौजूदा उद्योगपतियों की शिकायतों को जल्द से जल्द हल करने की बात भी कही है। उन्होंने यह भी बताया है कि केंद्र और यूपी सरकार घरेलू औद्योगिक क्षेत्र को पटरी पर लाने की दिशा में सामूहिक रूप से काम कर रही है।

यहाँ याद दिला दें कि पिछले माह योगी आदित्यनाथ ने भी इस संबंध में अपनी अपने मंत्रियों के सामने अपनी बात रखी थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि लॉकडाउन के बाद राज्य में औद्योगिक हब को बढावा दिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों को ये भी निर्देश दिए थे कि वे उन कंपनियों के बारे में पता लगाएँ, जो चीन से निकलने का विचार बना रही है। ताकि वे उन्हें राज्य की औद्योगिक रिवाइवल स्ट्रैटेजी (पुनरुद्धार रणनीति) के रूप में उपयोग कर सकें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद सूचना है कि राज्य सरकार ने मुख्य रूप से जापान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, यूरोपीय संघ आदि के आधार पर ऐसे कंपनियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब माना जा रहा है व्यवसाय की दृष्टि से उत्तर प्रदेश के लिए यह एक शानदार मौक़ा है।

तुरंत POK खाली करो, गिलगित बाल्टिस्तान सहित पूरा J&K और लद्दाख हमारा: भारत की पाकिस्तान को दो टूक

भारत ने पाकिस्तान के सामने ये साफ़ कर दिया है कि पूरा जम्मू कश्मीर और लद्दाख (POK सहित) देश का अंग है और इसका विलय भारत में पूरे वैध तरीके से हुआ है, जिसे कभी पलटा नहीं जा सकता। भारत ने कहा है कि वो पाकिस्तान के उन सभी क़दमों का कड़ा विरोध करता है, जिनके तहत वो अपने कब्जे वाले भारतीय प्रदेशों की स्थिति में बदलाव लाने के लिए उठा रहा है। भारत ने पाकिस्तान को तुरंत अपने अवैध कब्जे वाले प्रदेशों को खाली करने को कहा है।

हंदवाड़ा में आतंकियों और सेना के बीच हुई मुठभेड़ के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। भारत ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी डिप्लोमेट को ‘गिलगित बाल्टिस्तान’ पर वहाँ के कोर्ट द्वारा किए जा रहे छेड़छाड़ पर आपत्ति जताई। भारत ने कहा कि गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू कश्मीर इसका अभिन्न हिस्सा है। पाकिस्तान को अवैध रूप से कब्जाए इन क्षेत्रों के मामले में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं

भारत ने कहा कि वो पाकिस्तान द्वारा हस्तक्षेप की सभी कोशिशों की निंदा करता है और उन्हें नकारता है। ऐसी कोशिशों से ये छिप नहीं जाएगा कि उन भारतीय प्रदेशों को पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा रखा है, जबरन हथिया रखा है। भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में मानवाधिकार हनन की लगतार हो रही क्रूर घटनाओं पर भी आपत्ति जताई है। भारत ने कहा कि वहाँ के लोगों के स्वतंत्रता के अधिकार को पाकिस्तान द्वारा नकार दिया गया है।

भारत ने पिछले 70 वर्षों से पाकिस्तान द्वारा उसके कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में इस तरह की हरकतों के होने पर आपत्ति जताई है। भारत ने बताया इस मामले में देश का रुख 1994 में संसद में पास हुए प्रस्ताव के अनुरूप ही है। उस प्रस्ताव में कहा गया था कि शिमला और लाहौर में हुए समझौतों का पालन करते हुए भारत इस मुद्दे को द्विपक्षीय बातचीत और शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने में विश्वास रखता है।

बता दें कि हंदवाड़ा में हुए मुठभेड़ में एक कर्नल और एक मेजर सहित 5 जवानों के वीरगति को प्राप्त होने के बाद एक बार फिर से कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को लेकर बहस छिड़ गई है। कोरोना वायरस की आपदा के बीच भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। हंदवाड़ा में एक इमारत में छिपे आतंकियों ने वहाँ के नागरिकों को बंधक बना लिया था। नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए सशस्त्र बलों ने इमारत के भीतर जाकर ऑपरेशन करना उचित समझा। इसमें लश्कर का टॉप कमांडर हैदर भी मारा गया है।

तबलीगी जमातियों ने अलवर के रैन बसेरे में मचाया हंगामा: आसपास के लोग भयभीत, धरने पर बैठे BJP विधायक

तबलीग़ी जमात के 40 लोगों ने रविवार (3 मई, 2020) को अलवर के केदलगंज स्थित शेल्टर होम में हंगामा मचाया। इन सभी को राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने 28 दिनों के लिए क्वारंटाइन कर रखा था। जैसे ही उन्हें शेल्टर होम में स्थानांतरित किया गया, उन्होंने उग्र होकर हंगामा मचाना शुरू कर दिया। इस कारण भाजपा विधायक संजय शर्मा अपने समर्थकों सहित धरने पर बैठ गए। वो इन सभी को शेल्टर होम से निकालने की माँग कर रहे थे।

बता दें कि जिला प्रशासन द्वारा यह निर्णय ध्यान रखते हुए लिया गया था कि ये सभी जमाती अलवर के नहीं हैं और लॉकडाउन की वजह से ये अपने-अपने घरों की यात्रा नहीं कर सकते थे।

भाजपा विधायक की माँग

मौके पर पहुँचे स्थानीय भाजपा विधायक ने जमातियों द्वारा मचाए गए हुड़दंग की खबर पुलिस में दे दी। रिपोर्टों के अनुसार, विधायक का कहना है कि जमाती शेल्टर होम में उत्पात कर रहे हैं, इससे आसपास के लोग परेशान और भयभीत हैं। उसके बाद भाजपा विधायक संजय शर्मा धरने पर बैठ गए और जमातियों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन से सख्त कदम उठाने की माँग की।

बीजेपी विधायक संजय शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह विरोध धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक इन तबलीगी जमातियों को यहाँ से हटाया नही जाता। उन्होंने देश में फैले वुहान कोरोना वायरस के लिए जमातियों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि इस तरह अलवर शहर के अंदर कोरोना वायरस को फैलाने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

शर्मा के साथ शिवसेना के प्रदेश अध्यक्ष एवं अलवर जिला व्यापार महासंघ के अध्यक्ष राज कुमार गोयल, भाजपा नेता दिनेश गुप्ता एवं अशोक गुप्ता धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि शेल्टर होम में 40 लोगों के रहने की क्षमता नहीं है। विधायक संजय शर्मा का यह भी कहना है कि रेन बसेरे का प्रभारी भी इन जमातियों के कारण परेशान हो गया है।

अहमदाबाद में तबलीगी जमातियों का हंगामा

इससे पहले, अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल में तबलीगी जमात के लोगों ने हंगामा मचाया था। साथ ही दवा या इंजेक्शन लेने से भी इनकार कर दिया था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि सरकार उन्हें मारना चाहती है। दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, जमातियों ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध ला कर रखा गया था।

आपको बता दें कि तबलीगी जमात में हिस्सा लेने वाले 26 लोगों को दरियापुर से सोला सिविल अस्पताल लाया गया और उन्हें एक आइसोलेशन वार्ड में रखा गया था। जब मेडिकल टीम ने उनका परीक्षण करने की कोशिश की, तो उन्होंने इनकार कर दिया और हंगामा खड़ा कर दिया। इसके बाद, अस्पताल के अधीक्षक को एक मुस्लिम डॉक्टर को बुलाना पड़ा। पाँच घण्टों की कड़ी मशक्कत के बाद, मुस्लिम डॉक्टर द्वारा समझाने पर जमाती जाँच के लिए राजी हुए थे।

ICU में कोरोना पीड़ित मर्द के साथ यौन शोषण: मुंबई के डॉक्टर पर आरोप, अस्पताल ने किया टर्मिनेट

मुंबई में कोरोना वायरस के फैले खतरे के बीच एक अस्पताल से यौन शोषण का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ प्राइवेट हॉस्पिटल में बतौर एमडी ड्यूटी कर रहे 34 वर्षीय डॉक्टर पर आरोप लगा है कि उसने कोरोना से संक्रमित 44 वर्षीय पुरूष मरीज को ICU में शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। बताया जा रहा है कि घटना 1 मई की है और डॉक्टर ने घटना से एक दिन पहले ही मुंबई के वॉकहार्ट अस्पताल में ड्यूटी ज्वाइन की थी। अब इस मामले पर आगे की तफ्तीश अग्रीपाड़ा पुलिस द्वारा की जा रही है।

अग्रीपाड़ा पुलिस का इस मामले पर कहना है कि फिलहाल आरोपित से ना पूछताछ की गई है और ना ही उसे गिरफ्तार किया गया है, क्योंकि उन्हें यह डर है कि वह कोरोनावायरस से संक्रमित हो सकता है। पुलिस का कहना है आरोपित को उसके ठाणे स्थित अपार्टमेंट में होम क्वारंटाइन किया गया है और उसपर बराबर निगरानी रखी जा रही है।

इसी बीच मुंबई के अस्पताल ने भी यौन शोषण आरोपित डॉक्टर को नौकरी से निकाल दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल ने अपने बयान में कहा कि डॉक्टर ने एक दिन पहली ही अपनी ड्यूटी ज्वाइन की थी। कोरोना मरीज से यौन शोषण की सूचना पाते ही प्रोटोकॉल के अनुसार, प्रशासन ने तुरंत पुलिस को इस संबंध में सूचित किया। साथ ही डॉक्टर को टर्मिनेट कर दिया।

इसके बाद पीड़ित ने आपबीती अस्पताल प्रशासन को सुनाई और फिर आरोपित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की गई। बता दें, डॉक्टर के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 377, 269, 279 के तहत केस दर्ज किया गया है।

FIR में कहा गया है कि ये डॉक्टर 1 मई को सुबह 9 बजे, अस्पताल के 10वें फ्लोर पर आईसीयू में दाखिल हुआ। अंदर जाते ही इसने मरीज को छूने की कोशिश की और फिर उसे सेक्सुअली असॉल्ट किया। मरीज ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन वो नहीं माना। इसके बाद उसने तुरंत अलार्म बजाया, जिससे हॉस्पिटल के स्टाफ वहाँ पहुँच गए और डॉक्टर ने उस मरीज को छोड़ दिया।

गौरतलब है कि ये घटना उस समय आई है जब महाराष्ट्र में रविवार तक कोरोना वायरस संक्रमण के 678 नए मामले सामने आ चुके हैं, जिसके बाद कुल संक्रमित मरीजों का आँकड़ा 12,974 पहुँच गया। राज्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया राज्य में पिछले 24 घंटे में वायरस संक्रमण से 27 और लोगों की मौत हुई है।

वामपंथियों का पैतृक गाँव है चीन, अकबर का खजांची ठेले पर गिन रहा नोट: लॉकडाउन में खुले 11 बड़े राज

कोरोना एकदम संत वाइरस है। बिल्कुल समाजवादी, सेक्युलर। सभी लोगों में बराबर फैलता है। यह किसी के धर्म, जाति, लिंग, विचारधारा या आर्थिक स्थिति के कारण भेदभाव किए बिना सबको हो सकता है। सेक्युलरिज़्म की तरह ही कोरोना पहले उतना ही संवेदनशील था, जितना लोगों ने उसे संवेदनशील समझा, जिसने नहीं समझा उसने नहीं समझा। कुछ लोग पहले दिन से गंभीर दिखे तो कुछ लोगों को लगा कोरोना किसी किताब से निकल कर आ गया है। कुछ ने तो यह घोषित कर दिया कि उनके तथाकथित आंदोलन को दबाने के लिए सरकार ने ही इस रोग का भ्रम फैलाया। 

शाहीन बाग़ उपद्रव
Go कोरोना Go कोरोना… लेकिन इस भीड़ की ट्रैफिक में फँसा कोरोना!

अगर देश मे आंदोलन समाप्त हो जाएँ तो आधे बुद्धिजीवी भूखे ही मर जाएँ, इसलिए उन्होंने इस आपात स्थिति में भी प्रयास किया कि आंदोलन चलता रहे। जब वामपंथी लोगों को पता चला कि कोरोना भारतीय मूल का नहीं है बल्कि उनके पैतृक गाँव चीन से आया है, जहाँ कम्युनिस्ट सरकार है, तो उनको बड़ा अपनापन सा लगा। इसीलिए भारत में विलुप्त होते वामपंथियों ने इसके विरुद्ध कोई आंदोलन वग़ैरह नहीं किया, अन्यथा भारत में कोई घटना बिना वामपंथियों के आंदोलन के कैसे हो सकती है।

लेकिन लॉकडाउन होना था, सो हो गया। हो सकता है विरोध, धरना, प्रदर्शन आदि का आयोजन बाद में कर लिया जाए। दूसरी तरह के जो लोग हैं, वो हैं सेक्युलर लोग। इनके अंदर दो ही चीज़ें होती हैं एक तो गुस्सा और दूसरा नखरा। इनके नखरे न उठाओ तो गुस्सा हो जाते हैं और जब इनको गुस्सा नहीं आ रहा होता तो इनके नखरे चालू रहते हैं। सरकारें इनका नखरा उठाना ही श्रेयस्कर समझती है, क्योंकि गुस्से में तो ये लोग कुछ भी कर सकते हैं।

सरकार अंदर से, और उस अंदर के अंदर से भी सेक्युलर ही है, लेकिन कोरोना भारी पड़ गया। जिन्हें गलती करने पर भी छूना राजनीति में पाप समझा जाता था, उन्हें बिना किसी भेदभाव के खुलकर धोया गया। इससे हमें पता चला कि सरकार चाहे तो क़ानून का राज भी इस देश में चल सकता है। संविधान में पर्याप्त प्रावधान हैं कि देश में अपराधी पकड़े जा सकते हैं। पहली बार पता चला कि सरकार चाहे तो हमारी पुलिस NYPD, FBI से कम नहीं है। एक वेब-सीरीज़ इन पर भी बनाई जा सकती है।

जनता की माँग पर दूरदर्शन ने रामायण का प्रसारण किया तो पता चला कि रामायण को लेकर जितना उत्साह लोगों में है, उतना किसी और कार्यक्रम को लेकर नहीं है। रामायण के पुनः प्रसारण ने दूरदर्शन के दिन बदलने का रास्ता दिखाया है। दूरदर्शन चलाने वाले कितना समझ पाते हैं, यह भविष्य बताएगा। दूरदर्शन पर भूतकाल से वर्तमान में आए कार्यक्रम वास्तव में पारिवारिक मनोरंजन के लिए स्वस्थ और स्वच्छ हैं। 

रामायण वर्ल्ड रिकॉर्ड वामपंथी
रामायण का वर्ल्ड रिकॉर्ड पच नहीं रहा वामपंथियों को!

पहली बार पता चला कि बादशाह अकबर के खजांची आजकल संतरे बेच रहे हैं, उनको अकबर के जमाने से नोट गिनने की आदत थी और संतरे गिनते समय भी वी वैसे ही गिनती करते हैं जैसे नोट। बैंक वाले अलग ही परेशन हो गए, पहली बार पता चला कि अगर सरकार खाते में पाँच सौ रुपया डाल दे तो लाल किले और ताजमहल के मालिक-मलकाइन भी लाइन में लगे दिख जाते हैं।

लॉकडाउन के कारण एक और बात पता चली कि निज़ामुद्दीन में सिर्फ़ फाया कुन, फाया कुन नहीं होता, बल्कि एक ‘अमीर’ की स्वघोषित समानांतर सत्ता भी चलती है और उस सत्ता से बात सीधे NSA लेवल पर होती है। आश्चर्य तो तब हुआ, जब पता चला कि इस सत्ता के राजदूत देश के कोने-कोने में फैले हुए हैं, और तो और विदेशों के भी राजदूत विशेष विषयों पर चर्चा करने सीधे यहीं पहुँचते हैं। सरकार को खबर हो या न हो, जनता को खबर पहली बार लगी कि ऐसा भी कुछ होता है।

कुछ नए शब्द सीखने को मिले, मरकज, तबलीगी, जमात। सरकार ने भी इनके लिए नए शब्द गढ़ दिया – सिंगल सोर्स। पहली बार ऐसा देखने को मिला कि बीमार भाग रहे हैं और डॉक्टर भी इलाज़ करने के लिए उनके पीछे-पीछे भाग रहे हैं। सरकार मुफ्त इलाज करना चाहती है और लोग करवाना नहीं चाहते। किंचित उन्हें लगा हो कि यह सरकार की कोई संजय गाँधी “कनेक्शन कटवाओ रेडियो पाओ” योजना है, इसलिए भाग रहे हों। या फिर लोगों ने इसे ऐसा रोग समझ लिया, जिसे बताने में लज्जा आती हो और लोग रोग को छुपा कर रखने का प्रयास करने लगे।

लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों पर हुए पथराव को कोई नहीं समझ पाया। तरह-तरह के मरीज़ सामने आए। कुछ अमानवीय थे – इलाज करने वालों की कुटाई कर डाली। वहीं कुछ मजदूर ऐसे थे कि जहाँ रहे, वहाँ की रंगाई-पुताई कर डाली। कहीं एक मजदूर पैदल अपने गाँव को निकला और भूख से चल बसा और कहीं सरकारी दामाद बने मरीज खाने को नट बोल्ट माँगते दिखे। जिस तरह से हर एक घर, हर एक आदमी का ध्यान रखा गया, मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों को ट्रैक किया गया, उससे यह भी पता चला कि सरकार का तंत्र कितना सशक्त है। लेकिन दूसरी तरफ पालघर की घटना ने यह आइना भी दिखाया कि देश में छोटे-छोटे पाकिस्तान ही नहीं, छोटे-छोटे अबूझमाड़ भी फल-फूल रहे हैं। 

कोरोना-इंदौर
इंदौर में कोरोना वायरस जाँच को लेकर जब डॉक्टरों की टीम पहुँची तो उन पर हमला कर दिया गया था।

‘संकट के समय में राजनीति मत करें’ कहते हुए कुछ राजनेता राजनीति करते रहे। पहली बार पता चला कि केन्द्र सरकार के पास इतने अधिकार तो हैं कि पाकिस्तान में घुस सकती है। लेकिन इतने अधिकार नही हैं कि पश्चिम बंगाल मे घुस सके। पता तो यह भी चला कि भारत से लोग पढ़ने पाकिस्तान भी जाते हैं। क्या पढ़ने जाते हैं, इस बात का खुलासा होना चाहिए। दुनिया में कहीं भी पढ़ने चले जाओ लेकिन पाकिस्तान के पास ऐसा कौन सा पाठ्यक्रम है, जिसके लिए लोग वहाँ चले जाते हैं? इसके बाद कुछ और बड़े वाले लोग पढ़ने के लिए बांग्लादेश भी गए थे। ये और ग़ज़ब की बात थी। लॉकडाउन न हुआ होता तो पता ही नहीं चलता। 

ममता बनर्जी कोरोना
ममता बनर्जी की सरकार में ‘ममता’ कहाँ?

यह भी पता चला कि लोग जितनी खरीददारी करते हैं, उतनी खरीददारी की आवश्यकता वास्तव में है नहीं। लोगों की आवश्यकता अब भी रोटी और मकान हैं। जब घर में ही बैठे रहना है तो आदमी कच्छे बनियान में भी जीवन निकाल सकता है। इसलिए कपड़ा प्राथमिकता नहीं है। अदालत में वकील हों तो बात अलग है। दवा ज़रूरी है लेकिन जितनी माँग लोगों ने सरकार से दारू की की, दवा की नहीं की। इससे लोगों की प्राथमिकताओं का पता चलता है।  

आईटी सेक्टर ने बिना समय व्यर्थ किए घर से काम करने को सामान्य मान लिया। यह संतोष की बात रही कि देश में कई क्षेत्र ऐसे थे, जिनका काम नहीं रुका। बहुत से सरकारी दफ़्तर भी काम करते रहे। जब भीड़ शहरों से गाँवों की ओर भागी तब डर था कि कहीं कोरोना देहात में न पहुँच जाए, लेकिन गाँवों ने संभाल लिया। लोगों को एक बार फिर यह अहसास हुआ कि गाँव अधिक सुरक्षित और संपन्न हैं, हमारे गाँव इतने सक्षम हैं कि पूरे देश को घर बिठा कर खिला सकते हैं।

लॉकडाउन भारत भविष्य
मास्क पहनो, सुरक्षा-स्वास्थ्य का ध्यान रखो और काम करो: कुछ ऐसी ही होगी जिंदगी!

मोबाइल बेचकर रोटी खिलाने के दिन हमारे देश को नहीं देखने पड़ेंगे। अब लॉकडाउन कई क्षेत्रों में खुलने वाला है, जीवन पुनः पटरी पर उतरेगा। लेकिन यह अंत नहीं है, अभी कोरोना समाप्त नहीं हुआ है। सरकार अपने स्तर पर लड़ चुकी है, अब लड़ाई में लोगों को प्रत्यक्ष उतरना है। अगले दो से तीन महीने आसान नहीं होने वाले। बस उत्सवधर्मी संस्कृति के संवाहकों से इतनी ही अपेक्षा है कि लॉकडाउन में ढील मिलते ही कोरोना पर विजय का उत्सव न मनाने लगें।

मुझे प्रणाम करो, मैं VIP हूँ: कॉन्ग्रेस विधायक उमाशंकर अकेला ने अधिकारी से की बदसलूकी, मास्क नोचवाया

झारखण्ड स्थित बरही के विधायक उमाशंकर अकेला ने दंडाधिकारी कौशल किशोर के साथ बदसलूकी की है। विधायक के साथ चल रहे उनके समर्थकों ने भी दंडाधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार किया। ये घटना चतरा-हजारीबाग सीमा के पास बने परसौनी नाका की है। रविवार (मई 3, 2020) को दोपहर 12 बजे विधायक वहाँ से गुजर रहे थे और उन्होंने नाका खोलने को कहा। मना करने पर उन्होने अधिकारी को ‘औकात में रहने’ की हिदायत दी।

विधायक और दंडाधिकारी के बीच आधे घंटे तक बहस होती रही। बता दें कि कोरोना वायरस के कारण अभी पूरे देश भर में लॉकडाउन चल रहा है और अधिकतर जिलों ने अभी सीमाएँ सील कर रखी हैं। झारखण्ड में भी सरकारी आदेश को देखते हुए चतरा जिले की सीमा से आवागमन को बंद कर के रखा गया है। विधायक उमाशंकर अकेला इटखोरी के रास्ते अपने क्षेत्र के पथलगड्डा गाँव जा रहे थे। उनकी गाड़ी परसौनी के पास लगाए गए अस्थायी चेकनाका पर पहुँची, तो ये वाकया हुआ।

असल में दंडाधिकारी भी विधायक से परिचित नहीं थे और उन्हें नहीं जानते थे। उमाशंकर अकेला अचानक पहुँचे और नाका खोलने की जिद करने लगे। दंडाधिकारी ने उन्हें वरीय अधिकारियों के आदेश के बारे में बताया और कहा कि गाड़ी के नंबर की एंट्री करने के बाद ही नाका खोला जाएगा। विधायक को ये रास नहीं आया और उन्होंने गुस्से में बुरा-भला कहना शुरू कर दिया। विधायक के एक अर्दली ने दंडाधिकारी का मास्क नोच कर फेंक दिया

विधायक ने दंडाधिकारी को औकात में रहने की नसीहत देते हुए पूछा कि तुमने मुझे प्रणाम क्यों नहीं किया? अधिकारी ने कहा कि वो बस अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। विधायक ने अधिकारी को प्रोटोकॉल समझने की भी हिदायत दी। बाद में वहाँ पहुँचे बीडीओ ने मामले को शांत कराया और विधायक को जाने दिया, तब जाकर मामला शांत हुआ। विधायक ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि अधिकारी को मेरे साथ गार्ड देख कर ही समझ जाना चाहिए था कि मैं वीआईपी हूँ।

विधायक उमाशंकर अकेला की हरकत को लेकर ‘प्रभात खबर’ के राँची संस्करण में प्रकाशित ख़बर

उन्होंने कहा कि वो कुछ बुरा-भला नहीं कह रहे थे, बस प्रोटोकॉल समझा रहे थे। उन्होंने इस बात पर आक्रोश जताया कि उनके गार्ड द्वारा परिचय दिए जाने के बावजूद दंडाधिकारी ने नाका नहीं खोला। विधायक ने इस बात पर भी नाराज़गी जताई कि दंडाधिकारी उनके सामने माथे पर चश्मा लगा कर बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ये सही नहीं है। विधायक ने कहा कि उन्होंने अधिकारी को प्रोटोकॉल समझने की नसीहत दी है।

बता दें कि विधायक अकेला चंदवारा थाना क्षेत्र में वर्ष 2016 में हुए सांप्रदायिक विवाद मामले में आरोपित रहे हैं और इसके लिए उन्हें कोर्ट में आत्मसमर्पण करना पड़ा था। विधायक इसके लिए जेल भी गए थे। उन्होंने अपने समर्थकों सहित रैली की तरह जाकर कोडरमा में आत्मसमर्पण किया था। जेल से निकलने के बाद बरही चौक पर उनका फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया गया था। वो 2019 में कॉन्ग्रेस के टिकट पर जीते थे।

इससे पहले हैदराबाद में ऐसी ही घटना सामने आई थी, जब ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के पार्षद मोहम्मद मुर्तजा ने एक पुलिसकर्मी के साथ बदसलूकी करते हुए कहा था कि पहले जाकर मंदिरों को बंद कराओ, फिर मस्जिद के पास आना। सवाल पूछने पर पार्षद ने न्यूज़ एंकर अमीश देवगन को भी धमकाया था।

ठेके पर शराब-भक्तों की उमड़ी भीड़, लॉकडाउन के बाद 1-1 km तक इंतजार में खड़े दिखे लोग

लॉकडाउन के तीसरे चरण में 4 मई से शराब की दुकानों को सशर्त खोल दिया गया। करीब डेढ़ महीने से इसके इंतजार में बेचैन लोग सुबह से ही दुकान के बाहर लंबी कतार में खड़े दिखाई दिए। दिल्ली से लेकर कर्नाटक तक में इस राहत का असर देखने को मिला। हालाँकि, केंद्रीय सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग से कोई कोताही न बरतने के निर्देश सभी के लिए जारी किए। लेकिन दिल्ली के चंद्र नगर समेत कई जगहों पर इस नियम की धज्जियाँ उड़ती भी दिखीं। जहाँ लोग शराब लेने के लिए एक-दूसरे पर गिरते पड़ते नजर आए।

कई जगहों पर तो दुकानें खुलने से दो घंटे पहले ही लोग लाइन में खड़े हो गए और अपनी बारी का इंतजार करने लगे। इस दौरान दुकानदारों ने निर्देशों का ख्याल रखते हुए बैरिकेड्स लगाए।

सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बैरिकेड्स
सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बैरिकेड्स

साथ ही पुलिस की भी तैनाती की गई। आइए अब आपको अलग-अलग राज्यों की कुछ तस्वीरे दिखाते हैं। जो बताती है कि कितनी बड़ी तादाद में लोग इस दिन के लिए बेचैन थे। 

नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस तैनात

कर्नाटक के बेंगलुरु में शराब लेने उमड़ी भीड़ उत्साह में सोशल डिस्टेंसिंग ही भूल बैठी। कई तस्वीरों में लोगों को एकदम पास-पास खड़े देखा गया। तमाम निर्देशों को बावजूद दुकान के बाहर ना कोई मार्किंग दिखाई दी, ना ही लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते दिखे।

राजधानी दिल्ली में भी शराब की दुकानें खुल गई हैं। दिल्ली के सभी जिले रेड जोन में हैं, इसके बावजूद दुकानें खोली गईं। दुकानों के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए लोगों को दूर-दूर खड़े होने के निर्देश दिए गए। साथ ही जमीन पर मार्किंग भी की गई।

दिल्ली में शराब की दुकान के बाहर का नजारा
दिल्ली में 1 किलोमीटर लंबी लाइन में खड़े लोग

कर्नाटक में तो शराब की दुकानें खुलने से एक दिन पहले बाकायदा नारियल चढ़ाकर पूजा की गई। तस्वीरों में देखा गया कि बांगरपेट इलाके में एक व्यक्ति हाथ में नारियल लेकर शराब की दुकान के बाहर किसी तरह की पूजा कर रहा है।

कर्नाटक
कर्नाटक में पूजा करके चालू की गई शराब की दुकानें
NBT
लखनऊ
रेड जोन वाले लखनऊ में भी समय से पहले दुकानों के बाहर खड़े दिखे लोग।
कर्नाटक
कर्नाटक के हुबली में 7 बजे से बेसब्र नजर आए लोग, लगाए रखी दुकान के बाहर लंबी लाइन
बिलासपुर
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रैली जैसा दिखा हाल।