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लॉकडाउन 3: जानिए 4 मई से कहाँ किन गतिविधियों पर होगी छूट और किन पर पाबंदी

देश में कोरोना वायरस कहर बढ़ता ही जा रहा है। भारत में कोरोना वायरस से संक्रमितों का आँकड़ा 40  हजार पार कर गया है और अब तक 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, कोरोना के कहर को देखते हुए लॉकडाउन 3 को 17 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है। इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि केंद्र सरकार ने जो छूट और पाबंदी बताई है हम उसे लागू करेंगे।

दिल्ली में क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद

केजरीवाल ने कहा कि कि दिल्ली में किताबों की दुकानें खुलेंगी, साथ ही सिनेमा हॉल, मॉल और जिम को बंद रखने का फैसला लिया गया है। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में शादी समारोहों में 50 मेहमानों की और अंतिम संस्कार में केवल 20 लोगों की इजाजत दी गई है।

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन 3 में 4 मई से सभी सरकारी दफ्तर खुलने जा रहे हैं, जो सरकारी दफ्तर आवश्यक सेवाओं से संबंधित हैं उसमें 100 फीसदी अटेंडेंस होगी, कल से दिल्ली के सारे प्राइवेट ऑफिस खुलेंगे पर ये सिर्फ 33 फीसदी स्टाफ के साथ काम करेंगे। ऐसे सरकारी दफ्तर जो आवश्यक सेवाओं से संबंधित नहीं हैं उनमें डिप्टी सेक्रेटरी स्तर तक 100 फीसदी स्टाफ आएगा, इससे नीचे के स्तर पर 33 फीसदी स्टाफ आएगा।

गली-मोहल्ले की स्टैंडअलोन दुकानें खुली रहेंगी। इसके साथ-साथ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के ऑफिस भी खुले रहेंगे। मॉल, सिनेमाघर, सैलून, बाजार कॉम्प्लेक्स, दिल्ली मेट्रो बंद रहेंगे। ई-कॉमर्स एक्टिविटी में सिर्फ जरूरत के सामान की अनुमति है। स्कूल और कॉलेज सहित जितने भी शिक्षा से संबंधित संस्थान हैं सभी फिलहाल बंद रहेंगे। इस दौरान ट्रांसपोर्ट बंद रहेगा और दिल्ली के अंदर भी परिवहन सेवाएँ बंद रहेगी। इसके अलावा मंदिर, सैलून, स्पा, नाई की दुकान वगैरह बंद रहेंगे।  इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, सफाई वालों, घोबी, घरेलू सहायकों को काम करने की इजाजत दी गई है।

उत्तर प्रदेश में किन गतिविधियों पर छूट पर पाबंदी

उत्तर प्रदेश में लॉकडाउन 3 में छूट के तहत रेड जोन वाले क्षेत्रों को छोड़कर अन्य जगह पर शराब की दुकानें नौ घंटा तक खुलेंगी। ऑरेंज जोन में कैब सर्विस को अनुमति दी गई है। कैब में एक ड्राइवर और दो यात्रियों की अनुमति है। कैब सिर्फ जिले की सीमाओं के भीतर चल सकेगी। व्यक्तिगत वाहनों में ड्राइवर के अतिरिक्त दो यात्री की अनुमति है। वहीं ग्रीन जोन में बसों का संचालन 50 फीसदी सीटों के साथ हो सकता है। हालाँकि, पाबंदी के तहत प्रदेश के सभी सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल वगैरह बंद रहेंगी और साथ ही किसी तरह के सामूहिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं होगी।

शराब की दुकानों पर सोशल डिस्‍टेंसिंग अनिवार्य

राजस्थान में ग्रीन और ऑरेंज जोन में नाई की दुकान और सैलून खोले जा सकेंगे। दोनों जोन में ही ई-कॉमर्स कंपनियाँ गैर जरूरी सामान भी डिलीवर कर सकेंगी। हालाँकि, रेड जोन में सिर्फ जरूरी सामान की डिलीवरी की ही छूट होगी। साथ ही शर्तों के साथ शराब की बिक्री भी शुरू होगी। प्रदेश में गुटका, तंबाकू और पान की बिक्री पर रोक जारी रहेगी। शराब की दुकान पर सामाजिक दूरी का पालन करना अनिवार्य किया गया है।

‘शांति रैली’ के नाम पर तृणमूल नेताओं ने हावड़ा के रेड जोन में भीड़ जुटाकर किया लॉकडाउन का उल्लंघन, BJP ने उठाए सवाल

देश में जारी लॉकडाउन के बीच सभी प्रकार के कार्यक्रमों पर रोक है, लेकिन इसके बाद भी पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए ‘शांति रैली’ का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं ने हिस्सा लिया। इतना ही नहीं रैली में सोशल डिस्टेंसिंग की सरेआम धज्जियाँ उड़ाई गई। अब इसे लेकर बीजेपी ने ममता सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।

दरअसल, हावड़ा शहर के टिकियापाड़ा क्षेत्र में रविवार(3 मई, 2020) को शहर के सहायक पुलिस आयुक्त आलोक दास के नेतृत्व में ‘शांति रैली’ का आयोजिन किया गया। इस रैली में लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए सैकड़ों की संख्या में तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं ने हिस्सा लिया। इतना ही नहीं रेड जोन इलाके में निकाली गई इस ‘शांति रैली’ में पुलिस अधिकारियों के साथ टीएमसी के नेताओं ने सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियाँ उधेड़ी।

इस आयोजन के बाद रैली की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। सोशल मीडिया पर आई वीडियो में आप देख सकते हैं कि मुँह पर मास्क लगाए सैकड़ों लोग बंद बाजार के बीच से जिंदाबाद के नारे लगाते हुए निकल रहे हैं। इस दौरान रैली पर कुछ लोग खिड़कियों से पुष्प वर्षा भी करने में लगे हुए हैं। पुष्प वर्षा के साथ कुछ लोगों को तालियाँ भी बजाते हुए देखा जा सकता है।

कार्यक्रम की योजना का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि रैली के रुट को पहले ही निर्धारित कर लिया गया था।

अब इसे लेकर बंगाल बीजेपी ने ममता सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ‘शांति रैली’ का वीडियो ट्वीट किया है। ट्वीट में लिखा है कि पश्चिम बंगाल पुलिस हावड़ा के टिकियापाड़ा में रेड जोन का मजाक बना रही है! अगर संवेदनशील इलाकों में पुलिस इस तरह से लॉकडाउन के नियमों का पालन करा रही है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बंगाल के बाकी हिस्सों में क्या हो रहा है।

क्या ममता बनर्जी सरकार ने अपनी सभी जिम्मेदारियों से किनारा कर लिया है?

गौरतलब है कि मंगलवार (अप्रैल 28, 2020) को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में लॉकडाउन का पालन करवाने गई पुलिस के ऊपर हमला किया गया था। इस दौरान अराजक तत्वों ने पुलिस की गाड़ी में भी जमकर तोड़फोड़ की थी। इतना ही नहीं बेकाबू और आक्रामक भीड़ को काबू करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स को बुलाना पड़ा था।

वहीं पिछले कई दिनों से ममता और केन्द्र सरकार के बीच कोरोना मरीजों की संख्या को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इससे पहले राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने शनिवार (2 मई, 2020) को बंगाल की ममता सरकार पर कोरोना संक्रमण के आँकड़ों को छिपाने का आरोप लगाया था। अपने आरोप में राज्यपाल ने कहा था कि 30 अप्रैल तक ममता बनर्जी सरकार ने राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या हेल्थ बुलेटिन में 572, जबकि उसी समय में केन्द्र सरकार को 931 बताई है।

इसे लेकर प्रदेश के राज्यपाल जगदीप घनखड़ ने ममता सरकार पर सवाल खड़े किए था। साथ ही आँकड़ों पर पर्दा डालने का आरोप लगाता हुए कहा था कि ममता राज्य वासियों तथा केंद्र सरकार को अलग-अलग जानकारी दे रही हैं। अपने दो ट्वीट में राज्यपाल ने लिखा, कोविड-19 संक्रमण के आँकड़ों पर पर्दा डालने के अभियान को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बंद करना चाहिए। इसे पारदर्शी रूप से साझा करें।

भूख से कितने मर-मरा गए, कोई गिनती नहीं: पी चिदंबरम ने कोरोना पर बोलते-बोलते कॉन्ग्रेस की ही खोल दी पोल

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने कोरोना और इससे निपटने के सरकार के प्रयासों पर चर्चा की है। चर्चा नहीं, इसे अनर्गल प्रलाप कह लीजिए। उन्होंने दावा किया है कि लॉकडाउन न तो इस वायरस का इलाज है और न ही इसे रोक सकता है। बकौल चिदंबरम, लॉकडाउन स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का समय है। इस अवधि में जागरूकता फैलाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि सरकार को मेडिकल व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के लिए और कितना समय चाहिए? उन्होंने दावा किया कि अस्पतालों में पर्याप्त जगह नहीं है।

पी चिदंबरम का लेख या ‘रिसर्च पेपर’?

यहाँ पी चिदंबरम, जो कि एक राजनेता हैं, एक मेडिकल साइंटिस्ट की तरह बातें करते दिख रहे हैं। दुनिया भर के कई देशों ने लॉकडाउन किया है, क्या वो सभी मुर्ख थे? दुनिया भर के विशेषज्ञों ने लॉकडाउन की सलाह दी है ताकि इस वायरस का प्रसार रुक सके, यूरोप में स्पेन और इटली सहित कई देश लॉकडाउन की स्थिति में हैं। कई मेडिकल विशेषज्ञों ने इसे सही भी बताया है। ऐसे में क्या चिदंबरम ने कोई मेडिकल रिसर्च किया है, जिसके आधार पर वो लॉकडाउन को कोस रहे हैं? अगर पर्याप्त संसाधन आज भी नहीं हैं तो क्या इसके लिए कॉन्ग्रेस जिम्मेदार नहीं?

अमेरिका और इटली जैसे देशों में तो संसाधन की कोई कमी नहीं है। मेडिकल सुविधाएँ भी विश्वस्तर की हैं। वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के मामले में भी एक से बढ़ कर एक प्रतिभा और विशेषज्ञ भरे पड़े हैं। फिर भी वहाँ तबाही क्यों आई? वहाँ भी लॉकडाउन हुए। अगर संसाधन प्रचुर होने से ही कोरोना ख़त्म हो जाता तो फिर उन देशों में इतनी बड़ी तबाही होती ही नहीं? और क्या भारत सरकार ने पीपीई किट्स, मास्क, वेन्टिलेटरों और उपकरणों को जुटाने के बड़े स्तर पर काम नहीं किया? रेलवे ने भी क्वारंटाइन फैसिलिटी सक्रिय की।

पी चिदंबरम लिखते हैं कि मजदूरों को शेल्टर होम्स में अच्छी व्यवस्था नहीं दी जा रही है। वहाँ पंखे तक नहीं लगे हुए हैं। चिदंबरम दिल्ली की जिस रिपोर्ट का जिक्र कर रहे हैं, वो यहाँ के पुलिस अधिकारियों ने ही तैयार की थी। जिला प्रशासन ने पुलिस को उन शेल्टर होम्स में जाकर स्थिति से अवगत होने और रिपोर्ट तैयार करने को कहा था। ये रिपोर्ट तैयार करने का मकसद ही था कि उन सेंटरों में अच्छी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ लेकिन चिदंबरम इसे लेकर राजनीति कर रहे हैं। हाँ, उन्होंने इस मामले में एक बार भी अरविन्द केजरीवाल का नाम नहीं लिया है।

क्या दिल्ली की जनता के प्रति यहाँ की राज्य सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती? इसके बाद तिहार से लौट कर आए पी चिदंबरम ने उस रिपोर्ट की कुछ बातें हूबहू पेस्ट कर दी हैं। वो पूछ रहे हैं कि मजदूरों को वापस भेजने के बजाए इन्हीं शेल्टर होम्स में सुविधाएँ क्यों दी गईं? असल में मजदूरों ने ही वापस जाने की माँग की थी। तब यही कॉन्ग्रेस नेतागण कह रहे थे कि मजदूरों को जबरदस्ती क्यों रोका जा रहा है? आज ये कह रहे कि क्यों भेजा जा रहा है? दिल्ली, मुंबई और सूरत में मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन किए थे, ताकि उन्हें वापस भेजा जाए।

कोरोना के बहाने नौकरी, भूख और उद्योग के लिए मोदी की आलोचना

जैसे सरकार नहीं बताती है क्राइम का डेटा तो सोशल मीडिया के दौर में वो भी छुप जाता है क्या? पहले इन लोगों ने कहा कि टेस्टिंग कम हो रहा है, वो प्रपंच नहीं चला। भारत में अब तक 10 लाख की टेस्टिंग हो चुकी है। फिर नौकरियों के जाने की बात की गई, वो भी लोगों ने स्वीकारा कि ये एक असामान्य परिस्थिति है, तो वो भी नहीं चला। अब भूख से मरने की बात फैलाई जा रही है, ताकि लोग ये कहें कि सरकार भोजन पहुँचाने में भी नाकाम है। लेकिन सोशल माडिया के दौर पर ऐसी बातें अगर होने लगीं, तो वो छुप नहीं सकती।

चिदंबरम लिखते हैं कि भूख से कितने लोग मर गए, इसका आँकड़ा कोई भी राज्य सरकार सार्वजनिक नहीं करेगी। आज जब सौ तरह की सामाजिक संस्थाएँ रोज सर्वे पर सर्वे करती रहती हैं, क्या राज्य सरकारों के आँकड़ों का न जारी होना कोई बहुत बड़ा मुद्दा है? चिदंबरम अपनी पार्टी व गठबंधन की सरकारों से कह के अपने शासन वाले राज्यों के आँकड़े जारी करवाएँ लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि इन्हें सिर्फ बातें करनी है।

आज भी लाखों भूखे मर रहे हैं। आज भी अस्पतालों के पास संसाधन नहीं हैं। आज भी शेल्टर होम्स में अच्छी व्यवस्थाएँ नहीं हैं। आज भी मजदूर पलायन को मजबूर हैं। आज भी नौकरियाँ नहीं हैं। इस तरह की बातें कर के क्या चिदंबरम अपनी ही पार्टी की दशकों तक चली सरकार की पोल नहीं खोल रहे? 2019 में आई संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 10 सालों में ग़रीबी दर 55% से घट कर 28% तक आ गया है। भारत में लगभग 27 करोड़ लोग ग़रीबी से बाहर निकले हैं।

बड़े इंडस्ट्रियों और नौकरियों के लिए भी चिदंबरम ने मोदी सरकार ऊपर ही आरोप लगाया है। भारत सरकार आर्थिक पैकेज लेकर भी आई। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत ग़रीबों के खाते में डायरेक्ट ट्रांसफर की व्यवस्था की गई। उन्हें खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराया गया। लॉकडाउन के 36 घंटे के भीतर सरकार 1.7 लाख करोड़ रुपए का राहत पैकेज लेकर आई, क्या ये कबीले तारीफ नहीं है? 80 करोड़ लाभार्थियों के लिए अगले 3 महीने तक के राशन की व्यवस्था की गई। चिदंबरम इन बातों की चर्चा क्यों नहीं करते?

कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में चिदंबरम की सीख काम नहीं आती?

सबसे बड़ी बात कि चिदंबरम अपना मॉडल महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और पंजाब में लागू क्यों नहीं करते, जहाँ उनकी पार्टी की या गठबंधन की सरकार है। महाराष्ट्र में तो स्थिति सबसे बुरी है। अकेले वहाँ जितने कोरोना मरीज हैं, उसके आधे भी किसी राज्य में नहीं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पूछते हैं कि मजदूरों को वापस बुलाने का ख़र्च राज्य सरकार क्यों वहन करे? पंजाब में कॉन्ग्रेस नेताओं की यही चिंता है कि दारू के ठेके कब खुलेंगे, ऐसे में क्या ये सारी अच्छी-अच्छी बातें केवल केंद्र सरकार के लिए ही है? महाराष्ट्र और पंजाब की सरकारें आपस में लड़ रही हैं। अशोक चव्हाण कहते हैं कि नांदेड़ में पंजाब ने कोरोना फैलाया।

पी चिदंबरम लिखते हैं कि केंद्र सरकार ने दूसरे पैकेज का वादा किया है और अभी तक इस सम्बन्ध में कुछ नहीं हुआ है। क्या इसकी रूपरेखा तैयार करने में समय नहीं लगेगा? हड़बड़ी में घोषणा हो तो उनकी ही पार्टी कहेगी कि इतनी जल्दबाजी क्या थी, ‘एग्जेक्यूटिव प्लान’ क्यों नहीं बनाया? चिदंबरम जनता को जागरूक करने की बात करते हैं। जब यही काम केंद्र सरकार ‘आरोग्य सेतु ऐप’ के माध्यम से करती है तो उनके बेटे कार्ति कहते हैं कि ये जर्मनी का हिटलरशाही वाला मॉडल है। वो अपने मनी लॉन्ड्रिंग आरोपित बेटे को ये बातें नहीं सिखाते?

कोरोना के चक्कर में उन्होंने जीएसटी और नोटबंदी को भी घसीट लिया है, जबकि सरकार कई बार बता चुकी है कि इन दोनों क़दमों से क्या फायदे हुए। लाखों फर्जी कंपनियों के पकड़े जाने से लेकर टैक्स कलेक्शन में अभूतपूर्व वृद्धि तक, चिदंबरम को ये बातें रास नहीं आएँगी क्योंकि उनके समय में तो ‘फोन बैंकिंग’ चलती थी, जिससे विजय माल्या और नीरव मोदी जैसों को तुरंत लोन मिल जाता था। हाँ, इन चीजों का आरोप अब मोदी सरकार पर ज़रूर लादा जा रहा है। जबकि एनपीए के प्रावधान इसी सरकार ने कड़े किए हैं।

चीन: कच्चे साँप और कच्चे समुद्री खाद्य पदार्थ खाने वाले आदमी के फेफड़े कीड़े से भरे हुए मिले

चीन के जियांग्सू प्रांत के सुकियान में वांग नाम के उस चीनी व्यक्ति, जो कि अपने नियमित आहार में पानी के घोंघे, क्रेफ़िश और कच्चे साँप का सेवन करता था, को अपने पित्ताशय की थैली में संक्रमण पाए जाने की जानकारी हुई है। साँस लेने में परेशानी महसूस करने के बाद चीनी व्यक्ति ने एक साँस संबंधी चिकित्सक डॉ. झाओ हैयान से संपर्क किया।

चीन के उस व्यक्ति को लगता था कि उसके फेफड़ों में जीवित साँप और कीड़े हैं। इसके बाद कराए सीटी स्कैन फुटेज में व्यक्ति के फेफड़ों में एक लाइन के आकार का कुछ संक्रमण नजर आया। पेरागोनिमिसिस, जो कि फीता कृमि के मिश्रण वाले अशुद्ध पानी की पीने से हो सकता है।

वांग के फेफड़ों में रेखा के आकार का संक्रमण (फोटो क्रेडिट: डेली मेल)

यह देखते हुए कि वांग ने कच्चा समुद्री भोजन खाया, शायद वह इस तरह के भोजन करने से पेथोगन्स से संक्रमित हो गए। जब डॉक्टरों ने उस व्यक्ति से उसके आहार के बारे में पूछा तो वांग ने बताया कि उसने समुद्री भोजन जैसे कि क्रेफ़िश और नदी के घोंघे को खाने का आनंद लिया था। उसने यह भी स्वीकार किया कि उसने एक बार पहले भी एक कच्चे साँप का सेवन किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन से महामारी खत्म हो गई है, इसलिए चीन ने अपने यहाँ वेट मार्केट को फिर से चालू कर दिया है। इस समय चीन की इन मार्केटों में खुलेआम पिंजरे में बंद करके कुत्ते, बिल्ली, बतख, खरगोश का मांस बिक रहा है। इसके अलावा यहाँ चमगादड़, केकड़े और छिपकलियाँ भी बेची जा रही हैं। इन्हें यहाँ पारंपरिक दवाइयों की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है।

आपको बता दें कि आमतौर वेट मार्केट शब्द का प्रयोग ताजे मांस, मछली आदि बेचने वाले बाजारों के लिए किया जाता है, लेकिन चीन के इन बाजारों को जंगली जानवरों का मांस बेचने के लिए जाना जाता है, जो वुहान कोरोना वायरस जैसी कई घातक बीमारियों का स्रोत भी है। वैज्ञानिक रिपोर्टों से पता चलता है कि चीन के हुबेई प्रांत की एक 55 वर्षीय महिला शायद पहली महिला थी, जो इसी तरह के वेट मार्केट से कोरोना से संक्रमित हुई थी।

माना जाता है कि चीन के वुहान स्थिक हुआन सीफूड मार्केट को कोरोन वायरस का केंद्र माना जाता है। इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र से चीन के वेट मार्केट के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की थी।

गौरतलब है कि चीन के वुहान शहर से निकला कोरोना वायरस का संक्रमण आज विश्व भर में फैल गया है। इसके चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक पूरे विश्व में 245,193 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इससे 3,506,360 लोग विश्व भर में अब तक संक्रमित हो चुके हैं।

3 महीने पहले हुई थी शादी, उसने वही किया जो उसका कर्तव्य था: बलिदानी मेजर अनुज सूद के ब्रिगेडियर पिता

जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में आतंकियों के साथ हुए मुठभेड़ में 5 जवान वीरगति को प्राप्त हुए। उनमें से एक नाम मेजर अनुज सूद का भी है, जिन्होंने देश के लिए प्राण न्यौछावर कर दिया। उनके पिता ब्रिगेडियर चंद्रकांत सूद (रिटायर्ड) ने कहा है कि उनके बेटे ने सबसे बड़ा बलिदान दिया है। आँखों में आँसू लिए पिता ने कहा कि उनके बेटे के साथ जो हुआ, वो तो उसकी ड्यूटी का हिस्सा था। सूद ने कहा कि उनके बलिदानी बेटे को इसीलिए ही तो ट्रेनिंग मिली थी।

एक पिता के ये शब्द काफ़ी झकझोड़ने वाले हैं। ख़ासकर जम्मू कश्मीर की उस जनता के लिए, जिन्हें बचाने के लिए सेना के जवानों ने अपना परम बलिदान दिया। पिता भले ही सेना में रहे हों, लेकिन फिर भी वो एक पिता हैं। भले ही सेना में उन्हें या उनके बेटे को कड़ी ट्रेनिंग मिली हो, देशभक्ति उनके रग-रग में हो-लेकिन इस उम्र में उनके लिए बेटे की मौत से बड़ा सदमा शायद कुछ हो ही नहीं सकता था।

ब्रिगेडियर सूद ने कहा कि उन्हें मेजर अनुज की पत्नी के लिए ज्यादा दुःख हो रहा है। उनकी शादी 3-4 महीने पहले ही हुई थी। उन्होंने कहा कि ये तो उनके बेटे का कर्तव्य था, जो उन्होंने निभाया। उनका काम ही था कि वो लोगों की जान बचाएँ। हंदवाड़ा में हुए मुठभेड़ में 12 घंटों तक गोलीबारी होती रही, जिसके बाद वीरगति को प्राप्त जवानों से सम्पर्क टूट गया था। बाद में ऑपरेशन चला कर लश्कर के कमांडर हैदर को मार गिराया गया।

सेना को सूचना मिली थी कि आतंकवादी कुपवाड़ा जिले के चंजी मोहल्ला, हंदवाड़ा में एक घर में लोगों को बंधक बना रहे हैं। सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया था। सेना के 5 और जेके पुलिस के 1 जवान ने फँसे लोगों को निकालने के लिए उस घर में प्रवेश किया। नागरिकों के जानमाल को क्षति न पहुँचे, इसके लिए सेना ने बाहर से हमले की बजाए अंदर जाना उचित समझा।

रामायण का वर्ल्ड रिकॉर्ड शेयर करने पर एक विदेशी को वामपंथी दे रहे दम भर गाली

लॉकडाउन के दौरान लोग कोरोना या फिर देश-दुनिया से जुड़ी सभी जानकारियों के लिए सोशल मीडिया का रुख कर रहे हैं। खबरों से लेकर मनोरंजन और सलाह तक, सोशल मीडिया हर चीज में हमारे लिए उपयोगी साबित हो रहा है। ऐसे में एक विदेशी सोशल मीडिया यूजर नॉर्बर्ट एलेक्स को वामपंथी पानी पी-पीकर गालियाँ दे रहे हैं।

नॉर्बर्ट हंगरी के रहने वाले हैं और ट्विटर पर उनके दो लाख से भी ज्यादा फॉलोवर्स हैं। वह एक एंटरप्रेन्योर हैं। वह अपने ट्वीट के जरिए कोरोना से संक्रमित, मरने वाले और ठीक वालों की संख्या बताते हैं और लगभग कोरोना से जुड़ी पल-पल की जानकारी देते रहते हैं। इस बीच उन्होंने ट्विटर के जरिए एक जानकारी साझा की। नॉर्बर्ट की खासियत है कि वो डेटा से संबंधित सटिक जानकारी देने के लिए जाने जाते हैं।

इसी क्रम में उन्होंने बताया कि टीवी सीरियल रामायण हाल के वर्षों में एक रात में 77 मिलियन दर्शकों के साथ दुनिया का सबसे अधिक देखा जाने वाला शो बन गया है। इसने गेम्स ऑफ थ्रोन्स के 19 मिलियन के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। नॉर्बर्ट एलेक्स के इस ट्वीट के बाद वामपंथियों ने उन्हें भला-बुरा कहना और गालियाँ देना शुरू कर दिया।

एक यूजर ने लिखा, “ये एक हिंदुत्व प्रोपेगेंडा है। इससे पहले यह 1987 में टेलीकास्ट किया गया था। यही एक कारण था, जिसने भारत के सामाजिक ताने-बाने को नष्ट कर दिया। 90 के दशक की शुरुआत में दो दूसरे मजहब पर हमले आम थे लेकिन अब हम उसी दिशा या इससे भी बदतर दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अल्पसंख्यकों पर हमला आम बात है।”

एक अन्य यूजर ने नॉबर्ट के ट्वीट पर कमेंट करते हुए लिखा कि अब उन्हें जल्द ही गोदी मीडिया रिपब्लिक टीवी नौकरी दे देगा।

खलीम नाम का एक यूजर इसे कॉन्ग्रेस सरकार की उपलब्धि बताते हुए लिखता है, “हम रामायण देखते हुए बड़े हुए हैं, लेकिन ये रिकॉर्ड तोड़ सीरियल रामायण कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान बनी थी।”

एक अन्य यूजर ने लिखा कि भारतीय लोग इसके अलावा और करते ही क्या हैं?

एक यूजर लिखता है कि नॉर्बर्ट के मुताबिक 77 मिलियन में से कितने संघी या मोदी समर्थक हैं?

इसके विपरीत काफी लोगों ने इस जानकारी को साझा करने के लिए उन्हें सराहा भी।

गौरतलब है कि नॉर्बर्ट एलेक्स किसी सरकारी वेबसाइट की तरह कोरोना से जुड़े आँकड़ों की जानकारी अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए लगातार दे रहे हैं। ऐसे में लोगों ने उनका शुक्रिया अदा करने के बजाए उन्हें सीधा ‘यमदूत’ ही बना दिया था। 

लोगों ने उन्हें ‘यमदूत’ और ‘मौत का सौदागर’ बताने के साथ-साथ यह भी कहा है कि अगर कोई कोरोना से बच भी गया तो ये बंदा (नॉर्बर्ट एलेक्स) उन्हें डरा-डराकर मार देगा। 

हंदवाड़ा एनकाउंटर में सेना को बड़ी कामयाबी, लश्कर के टॉप कमांडर हैदर का अंत, PM मोदी ने वीरों को दी श्रद्धांजलि

हंदवाड़ा एनकाउंटर में पाकिस्तान के रहने वाले टॉप लश्कर आतंकी हैदर को सुरक्षाबलों ने आज मार गिराया है। भारतीय सेना के हाथ रविवार (मई 3, 2020) को बड़ी कामयाबी लगी है। जम्मू कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने मीडिया को दिए एक बयान में इस बात की पुष्टि की है। बता दें कि घाटी से आतंकियों के सफाए के लिए जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में सेना ने ऑपरेशन चलाया था जिसमें मोस्ट वांडेड लश्कर आतंकी हैदर ढेर हो गया है।

इसके अलावा एक और आतंकी भी मारा गया है। इससे पहले हंदवाड़ा में ही एक ऑपरेशन के दौरान आतंकियों के साथ मुठभेड़ में कर्नल और मेजर समेत भारतीय सेना के पाँच जवान वीरगति को प्राप्त हो गए हैं।

गोलीबारी में सुरक्षाबलों ने दो आतंकवादियों को भी मार गिराया है। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि हंदवाड़ा के चांजमुल्ला इलाके में हुए इस एनकाउंटर में दो आतंकी मारे गए, जबकि हमारे पाँच जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। यह इलाका उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के अंतर्गत आता है। उन्होंने बताया कि सेना का ये ऑपरेशन आतंकियों द्वारा बंदी बनाए गए नागरिकों को छुड़ाने के लिए चलाया गया था।

पुलिस के अनुसार हंदवाड़ा के चांजमुल्ला में शनिवार (मई 2, 2020) को दोपहर बाद मुठभेड़ शुरू हुई। आतंकी घटनास्थल से फरार न हो जाएँ, इसके लिए सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया। रिहायशी इलाका होने के चलते सुरक्षाबल एहतियात के साथ कार्रवाई कर रहे थे। दोपहर 3:30 बजे सशस्त्र बलों और आतंकियों के बीच फायरिंग चालू हुई थी। हंदवाड़ा उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में स्थित है। इससे 1 दिन पहले उरी में पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया था, जिसमें 2 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। वहीं, मुठभेड़ शुरू होने के बाद से हंदवाड़ा में इंटरनेट सेवा अस्थाई रूप से बंद है।

सेना ने बताया कि कुपवाड़ा जिले में हंदवाड़ा के चांजमुल्ला इलाके में एक मकान में आतंकवादियों द्वारा कुछ नागरिकों को बंधक बनाए जाने की खुफिया सूचना मिलने के बाद सेना तथा जम्मू कश्मीर पुलिस ने एक संयुक्त अभियान चलाया था। इस अभियान में पाँच सैन्य और पुलिस कर्मियों की टीम नागरिकों को छुड़ाने के लिए आतंकवादियों के कब्जे वाले इलाके में घुसी और नागरिकों को सफलतापूर्वक बचा लिया

जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में आतंक-रोधी अभियान के दौरान दो अधिकारियों समेत पाँच जवानों के शहीद होने पर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि जवानों की वीरता और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, “हंदवाड़ा में शहीद हुए हमारे साहसी सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि। उनकी वीरता और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उन्होंने राष्ट्र के लिए अत्यंत समर्पण के साथ काम किया और हमारे नागरिकों की रक्षा के लिए अथक परिश्रम किया। उनके परिवारों और दोस्तों के प्रति संवेदना।”

उत्तर प्रदेश: स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने के आरोप में भीम आर्मी नेता उपकार बाबरा गिरफ्तार

भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष उपकार बाबरा को गुरुवार (अप्रैल 30, 2020) देर रात जिला अस्पताल में मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मुजफ्फरनगर के जिला अस्पताल में यह घटना जिले के पुरकाजी क्षेत्र से आए लोगों को चिकित्सकीय सुविधा देने को लेकर हुई बहस के बाद हुई।

दरअसल, जिला अस्पताल में एक युवक को उपचार के लिये भर्ती कराया गया था। गुरुवार शाम भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष उपकार बाबरा जिला अस्पताल में पहुँचे और उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्होंने डॉक्टरों के साथ बदसलूकी करनी शुरू कर दी।

इसके बाद बावरा के खिलाफ अस्पताल के मेडिकल स्टाफ ने शिकायत दर्ज कराई। इस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बाबरा को शनिवार (मई 2, 2020) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। नगर-कोतवाली पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर अनिल कपरवान ने पुष्टि की कि भीम आर्मी के नेता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। उपकार बाबरा के खिलाफ आईपीसी की धारा 269, 270, 323, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पहले भी जा चुके हैं जेल

गौरतलब है कि उपकार बावरा को दो साल पहले आरक्षण को लेकर एससी संगठनों के आंदोलन में हिंसा के बाद गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। तब उपकार बाबरा पर NSA भी लगाया गया था।

इससे पहले भोपाल से भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के मुँह पर कालिख पोतने वाले को ₹5 लाख का ईनाम देने का ऐलान करने वाले महाराष्ट्र भीम आर्मी के चीफ अशोक कांबले को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में पुलिस ने कांबले के अलावा सात अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया था। इसके अलावा अगस्त 2019 में दिल्ली के तुगलकाबाद रविदास मंदिर ध्वंस मामले में भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर समेत 96 लोगों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इन सभी पर दंगा भड़काने और हिंसा आदि का मुकदमा दर्ज किया गया था।

गुजरात: कोरोना संक्रमण रोकने के लिए मुस्लिम बहुल क्षेत्र में पाँच पुलों को किया बंद, कहा- घर पर मनाएँ रमजान

गुजरात के अहमदाबाद शहर में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन चिंतित है। इसके बाद संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रशासन ने शहर के बीच से निकलने वाली साबरमती के पाँच पुलों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। साथ ही अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों के लोगों से खास अपील करते हुए प्रशासन ने लोगों से घर में ही रमजान मनाने की अपील की है।

जानकारी के मुताबिक अहमदाबाद शहर में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की रोकथाम के लिए शहर प्रशासन ने साबरमती के ऊपर बने दो और पुल, अम्बेडकर ब्रिज और सरदार ब्रिज पर वाहनों की आवाजाही को बंद कर दिया है। इससे पहले शहर प्रशासन ने नेहरू ब्रिज, दधीचि ब्रिज और गाँधी ब्रिज पर वाहनों की आवाजाही को बंद कर दिया था। इसी के साथ बंद किए गए पुलों की संख्या अब पाँच हो गई है।

दरअसल, सरदार ब्रिज जमालपुर को पालड़ी क्षेत्र को जोड़ता है और वहीं एक फ्लाईओवर क्षेत्र को स्टेट ट्रांसपोर्ट बस टर्मिनल से जोड़ता है, हालाँकि, 2002 में हुए भयानक गुजरात दंगों के दौरान भी इस पुल के यातायात को लिए बंद नहीं किया गया था।

घर पर ही मनाएँ रमजान

गुजरात के अहमदाबाद महानगरपालिका के कमिश्नर आईएएस अधिकारी विजय नेहरा ने रविवार(3 मई, 2020) मीडिया से बात करते हुए कहा कि बाहर निकलकर कोरोना संक्रमण का खतरा मोल लेने के बजाय घर पर रहकर ही पवित्र रमजान मनाएँ। मुस्लिम बहुल जमालपुर वार्ड के लोगों को विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है क्योंकि अब तक शहर में हुई कुल मौतों में से 33 प्रतिशत अकेले वहाँ ही हुई हैं। कुल संक्रमितों का एक बड़ा हिस्सा भी वहीं से हैं।

विजय नेहरा ने कहा कि हमारे लिए यह जरुरी है कि हम अनुशासित में रहें और संकल्प लें कि हम 14 दिनों तक घर पर रहेंगे और अनावश्यक रूप से बाहर निकलकर संक्रमण का जोखिम नहीं उठाएँगे। हमने देखा है कि शहर के बहुत से लोगों ने 40 दिनों के लॉकडाउन को गंभीरता से नहीं लिया। हमें अब यह समझने की जरूरत है कि यह एक गंभीर बात है।

आपको बता दें कि अन्य महानगरों के साथ अहमदाबाद शहर को भी रेड जोन में रखा गया है। अब तक अहमदाबाद में कोरोना वायरस के रिकॉर्ड 3,500 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जो कि गुजरात राज्य में सबसे अधिक है। इनमें से 37 लोग वेंटिलेटर पर हैं और 2,815 सक्रिय मामले हैं।

राहत की बात यह कि इनमें से 525 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। वहीं अहमदाबाद में दस वार्डों को कंटेनमेंट जोन में रखा गया है, जिनमें दानी लिमडा, मणिनगर, जमालपुर, खड़िया, दरियापुर, शाहपुर, असरवा, बेहरामपुरा, गोमतीपुर और सरसपुर शामिल हैं।

तबलीगी जमात सबसे बड़ी समस्या

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने एक मीडिया हाउस के साथ बातचीत करते हुए कहा था कि राज्य में कोरोना वायरस पॉजिटिव मामले दिल्ली स्थित मरकज निजामुद्दीन में हुए तबलीगी जमात के से संबंधित है, क्योंकि जमात के लोगों ने अपनी यात्रा के संपर्कों को छिपाया था। उन्होंने कहा कि शहर की महज 10 प्रतिशत आबादी वाले पुराने अहमदाबाद में ही 90 प्रतिशत कोरोना संक्रमिल मामले मिले।

विजय रूपाणी ने राज्य में कोरोनो वायरस के बढ़ते मामलों के लिए तबलीगी जमात को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि राज्य सरकार इसे समझने में असफल रही।रुपाणी से पहले, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के सीएम त्रिवेणी सिंह रावत, और मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने-अपने राज्यों में कोरोनो वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों के लिए तबलीगी जमात को ही जिम्मेदार ठहराया था।

आपको बता दें कि स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में कोरोना से मरने वालों की संख्या 262, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 5054 हो गई है। वहीं राहत की बात यह है कि राज्य में कुल 896 मरीज ठीक होकर अस्पतालों से घर जा चुके हैं।

मैंने ना तो माफी माँगी है और न ही ट्वीट डिलीट किया है: हिंदुओं को अरब की धौंस दिखाने वाले जफरुल इस्लाम

अरब के मजहब विशेष के नाम पर हिन्दुओं को धमकी देने वाले दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार में माइनॉरिटी कमीशन (दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग) के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम ख़ान ने कहा है कि उन्होंने न तो अपना ट्वीट डिलीट किया है और न ही इसके लिए माफी माँगी है। उन्होंने कहा है कि अपनी बात पर अब भी कायम हैं।

जफरुल इस्लाम का बयान

जफरुल इस्लाम ने कहा, “कुछ मीडिया हाउस ने इस तरह से रिपोर्ट किया कि मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी माँगी और उसे डिलीट कर दिया है। मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी नहीं माँगी है और न ही उसे डिलीट किया है। मैंने ट्वीट के लिए नहीं बल्कि मेडिकल इमरजेंसी के समय ट्वीट करने के लिए खेद जताया था। वो ट्वीट अभी भी मेरे ट्विटर और फेसबुक अकाउंट पर उपलब्ध हैं। 1 मई 2020 को अपने बयान में मैंने कहा था कि मैं अभी भी अपने विचार के साथ पूरी दृढ़ता के साथ खड़ा हूँ। मैं आगे भी देश में घृणित राजनीति के खिलाफ लड़ता रहूँगा। FIR, गिरफ्तारी या फिर जेल भी मुझे अपने रास्ते पर जाने से नहीं रोक सकती, जो रास्ता मैंने अपने देश को, अपने लोगों को भारतीय सेकुलर हुकूमत को और संविधान को बचाने के लिए अपनाए हैं।” 

बता दें कि 28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत में रह रहे दूसरे मजहब के लोगों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के लोग एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे। इस पर माफी की बात आई थी लेकिन अभी उन्होंने इनकार कर दिया है। बता दें कि इस्लाम के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने देशद्रोह का केस दर्ज किया है।

खान ने पोस्ट में शाह वलीहुल्ला देहलवी, अबू हस्सान नदवी, बहुदुद्दीन खान और ज़ाकिर नाइक को हीरो की तरह पेश किया था। बता दें कि मलेशिया में रह रहे इस्लामी प्रचारक ज़ाकिर नाइक को वापस लाने के लिए भारत सरकार प्रयत्न कर रही है और उसके ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर आतंकियों को भड़काने तक के आरोप हैं।

इसके बाद कुछ मीडिया हाउस ने बताया कि जफरुल इस्लाम ने अपने इस बयान के लिए माफी माँगी है। जिसमें कहा गया कि इस्लाम ने कहा, “28 अप्रैल, 2020 को मेरे द्वारा जारी किए गए ट्वीट में उत्तर-पूर्वी जिले की हिंसा के संदर्भ में कुवैत को भारतीय समुदाय विशेष के उत्पीड़न पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद दिया गया, कुछ लोगों को इससे पीड़ा हुई, जो कभी भी मेरा उद्देश्य नहीं था। मुझे महसूस हुआ कि जिस समय पूरा देश मेडिकल इमरजेंसी का सामना कर रहा है, उस समय मेरा ये ट्वीट असंवेदनशील था, मैं उन सभी से माफी माँगता हूँ, जिनकी भावनाएँ आहत हुईं।”