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लॉकडाउन में घरेलू हिंसा: महिलाओं पर बढ़े अत्याचार, क्या महामारी भी नहीं दे रही पुरुषों को सीख?

दुनिया पर अभी कोरोना नामक महामारी का काला साया छाया हुआ है। कई देशों में लोग लॉकडाउन में अपने-अपने घरों में कैद हैं। अब तक करीब एक लाख 80 हजार लोग मर चुके हैं और करीब 26 लाख लोग बीमार हैं। कितनी हैरानी की बात है न कि जब हर जान खतरे में है, अरबों लोग घरों में कैद हैं तो लॉकडाउन में घरेलू हिंसा यानी दुनियाभर में पुरुषों द्वारा महिलाओं पर अत्याचार और तेज हो रहे हैं।

ये आँकड़े चौंकाऊ, लेकिन सच हैं कि लॉकडाउन के दौरान दुनियाभर में घरेलू हिंसा तेजी से बढ़ी है। इस लिस्ट में हमारा देश भी शामिल है, वो धरती जहाँ नारियों को पूजने की परंपरा है। शर्मनाक है, लेकिन आज का सच यही है।

लॉकडाउन में लॉकडाउन में घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों के बीच आज हर एक भारतीय को खुद से कुछ प्रश्न जरूर करना चाहिए। हमारी असमानतावादी सोच महिला सशक्तिकरण के मार्ग में एक अवरोध है, चाहे इसे हम स्वीकार करें या ना करें।

भारत कोरोना संकट से निपटने हेतु बहुतेरे प्रयास कर रहा है। लेकिन लॉकडाउन के समय महिलाओं पर ज्यादती के तेजी से बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। सामान्यतया पुरुषों की अपेक्षा महिलाएँ घरों में औसतन ज्यादा काम करती हैं। आज जब लॉकडाउन हुआ है तो प्रत्येक घर में महिलाओं हेतु काम भी बढ़ गए हैं। साथ ही उनके खिलाफ हिंसा भी।

राष्ट्रीय महिला आयोग को 23 मार्च से 16 अप्रैल तक के बीच में 587 शिकायतें मिलीं। इनमें से 239 घरेलू हिंसा से संबंधित हैं। ये तो वे केस है जो दर्ज हुए हैं। परंतु घरेलू हिंसा के अभी तो ढेर सारे मामले होंगे जो या तो परिवार या समाज के लोक-लाज की वजह से दर्ज नहीं हुए होंगे। आज इस संकट की घड़ी में महिलाओं पर काम का बोझ और उन पर अत्याचार दोनों बढ़ गए हैं। उपरोक्त परिस्थितियाँ हमें सोचने पर मजबूर कर रही है कि कैसे महिलाओं को सुरक्षित रखा जा सकता है।

महिलाओं पर घरेलू हिंसा ना हो जैसे महत्वपूर्ण विषय को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने कई सारे स्वागत-योग्य कदम उठाए है। राष्ट्रीय महिला आयोग हर प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है और जहाँ कहीं भी किसी तरीके की महिलाओं पर घरेलू हिंसा या मानसिक प्रताड़ना हो रहा है और वो उनकी नजर में आता है तो आयोग तुरंत कार्यवाही करता है।

बात इतने पर ही नहीं ठहरती है। रेखा शर्मा जी ने एक सरल एवं बेहतरीन कदम उठाया। वो यह है कि महिलाओं हेतु 10 अप्रैल को एक व्हाट्सएप नम्बर लॉन्च किया गया जिसके अंतर्गत अगर कोई महिला किसी भी तरीके की घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं तो वो तुरंत दिए गए व्हाट्सएप नम्बर पर कॉल करें एवं अपना रिपोर्ट दर्ज कराए। जवाब में शीघ्रातिशीघ्र उपयुक्त सहायता उस महिला तक पहुँच जाएगी।

इस व्हाट्सएप नंबर के लॉन्च होने के बाद से घरेलू हिंसा से जुड़ी हुई करीब 40 मैसेज आयोग को मिले हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग के अनुसार इन संदेशों की पहले जाँच की जाती है और जो भी घरेलू हिंसा के मामले लॉकडाउन के दौरान हुए होते हैं उन्हें प्राथमिकता दी जाती है। राज्य पुलिस और प्रशासन की मदद से पीड़ित महिलाओं को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय महिला आयोग का यह प्रयास क़ाबिलेतारीफ़ है।

संकट की इस घड़ी में, कई सारी समाजसेवी संस्थाएँ भी आगे आ रहे हैं। उनकी नजर भी इस समस्या पर है ताकि कहीं भी कोई महिला पर किसी तरीके की घरेलू हिंसा ना हो। इनमें एक संस्था ‘भारतीय स्त्री शक्ति’ है जो महिला सशक्तिकरण हेतु सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।

1988 में स्थापित यह संस्था, महिलाओं, परिवारों और समाज को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह संस्था पंचसूत्रीय कार्य पर बल देती है: शिक्षा और कौशल विकास, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, आत्म-सम्मान, वित्तीय स्वतंत्रता और लिंग समानता।

नयना सहस्रबुद्धे इस संस्था की वाइस प्रेसिडेंट हैं। वे पिछले कई सालों से इस संस्था के माध्यम से महिलाओं के मौलिक अधिकारों हेतु आवाज़ उठा रही हैं। आज जब संकट की घड़ी आई है तब भी यह संस्था अपना योगदान देने से पीछे नहीं हट रही है। नयना सहस्रबुद्धे के निर्देशन में इस समाजसेवी संस्था द्वारा हरसंभव प्रयास किया जा रहा है ताकि महिलाओं को सुरक्षित रखा जा सके और उन पर कोई घरेलू हिंसा ना हो।

नयना सहस्रबुद्धे एवं उनकी संस्था के वालंटियर्स हर प्लेटफॉर्म से आवाज़ उठा रहे हैं ताकि लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जा सके एवं महिलाओं की स्थिति को सुरक्षित किया जा सके। घरेलू हिंसा एवं मानसिक प्रताड़ना से पीड़ित महिलाओं हेतु इस संस्था ने महाराष्ट्र राज्य के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ हेल्पलाइन नम्बर भी जारी किए हैं। ‘भारतीय स्त्री शक्ति’ जैसी संस्था का ये कदम सराहनीय है।

महिलाओं को सुरक्षित रखने हेतु, सरकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों द्वारा किए जा रहे ढेरों प्रयास अपने आप में इस बात का संकेत हैं कि हमारे समाज में महिलाओं के साथ किसी भी तरीके का असमान व्यवहार नहीं होना चाहिए। ये संस्थाएँ इस लक्ष्य पर प्रतिबद्ध हैं। महिलाओं पर किसी भी तरीके की हिंसा ना हो इस हेतु इन संस्थाओं को पंचायत, गाँव, मोहल्ला स्तर पर इकाई-बद्ध होकर कार्य करने की जरूरत है। साथ ही साथ इन्हें अपने वालंटियर्स को इस दिशा में प्रशिक्षित करना होगा। संभवतः तब जाकर अधिकतर महिलाएँ अपनी पीड़ा साझा कर पाएँगी।

आज हमें एक जागरूक नागरिक की तरह सोचने की जरूरत है कि आखिर महिलाओं की स्थिति अभी तक ऐसी क्यों बनी हुई है? इनकी सुरक्षा का प्रश्न क्यों उठ खड़ा होता है? हमारी माताएँ, बहने क्यों नहीं सुरक्षित महसूस करती हैं?

आज हमें इस बात को भी स्वीकार करना चाहिए कि महिलाओं पर घरेलू हिंसा का एक प्रमुख कारण महिला स्वयं भी हैं। कहीं सास, तो कहीं बहू, कहीं ननद, तो कहीं भाभी, तो कहीं पड़ोस की चाची, घरेलू हिंसा को तूल या बढ़ावा देती रहती हैं। महिलाओं को एक कड़ी के रूप में कार्य करने की जरूरत है। हर महिला को ये प्रण लेना चाहिए कि किसी भी तरीके की हिंसा अपने घर की महिलाओं पर नहीं होने देंगे। फिर देखिए, सारी समस्याओं का अंत खुद ही हो जाएगा।

महिला की स्थिति हर प्रकार से समाज में सबसे ऊपर है। इन्हें जग जननी कहते हैं। हम कब समझेंगे कि जिस समाज में महिलाओं को उचित मान-सम्मान नहीं मिलता है वह समाज गर्त की ओर जाता है। मनुस्मृति में उल्लिखित एक श्लोक यहाँ प्रासंगिक है-

“शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम्।
न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्धि सर्वदा।।”

इस श्लोक का अर्थ यह है कि जिस कुल में स्त्रियाँ कष्ट भोगती हैं, वह कुल शीघ्र ही नष्ट हो जाता है और जहाँ स्त्रियाँ प्रसन्न रहती हैं, वह कुल सदैव फलता-फूलता और समृद्ध रहता है। आखिर हम कब इस बात को समझेंगें कि महिलाएँ हैं तो हम हैं, ये नहीं तो हम नहीं।

‘आज पुलिस वालों से पुराना हिसाब चुकाना है’ – अलीगढ़ में पुलिस पर हमले के पीछे की कहानी, हाजी सलीम की साजिश

हर दिन की तरह अलीगढ़ पुलिस शहर के भुजपुरा इलाके में गश्त कर रही थी। हर दिन की तरह ही समय पूरा होने पर पुलिसकर्मी दुकानदारों से दुकानें बंद करने की अपील कर रहे थे। हर दिन की तरह ही पुलिसकर्मी इलाके के लोगों को लॉकडाउन के नियमों को बता रहे थे, लेकिन हर दिन की तरह बुधवार को भुजपुरा के दुकानदारों ने न तो दुकाने बंद कीं, न ही लॉकडाउन के नियमों का पालन किया और न ही हर दिन की तरह पुलिस की अपील को स्वीकार किया।

इन सब के पीछे एक कारण प्रमुख माना जा रहा है। माना जा रहा है कि हाजी सलीम नाम के व्यक्ति ने लोगों को पुलिस से बदला लेने के लिए उकसाया था। कैसा बदला? वही जो पुलिस ने इन लोगों के साथ CAA-NRC विरोध के दौरान सख्ती बरती थी, उसी का बदला पुलिस वालों से लेना है।

अलीगढ़ में बुधवार को लॉकडाउन के दौरान दुकानों को बंद कराने गई पुलिस पर हुए हमले में पुलिस को एक अहम जानकारी मिली है। वह ये कि भुजपुरा क्षेत्र में रहने वाले हाजी सलीम ने पहले तो पुलिसकर्मियों की कम संख्या को देखकर भीड़ को इकट्ठा किया और फिर यह कहते हुए पुलिसकर्मियों पर भीड़ को हमला करने के लिए उकसा दिया कि आज मौका है पुलिस से पुराना हिसाब किताब चुकता करने का।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर की कटिंग

अमर उजाला की खबर के मुताबिक लॉकडाउन का पालन कराते घूम रहे पुलिसकर्मियों पर बुधवार को भुजपुरा में हुए हमले के दौरान उठी एक आवाज कुछ और ही इशारा कर रही है, क्योंकि कुछ लोग पथराव के दौरान इस तरह से चीखकर लोगों को उकसा रहे थे कि आज पुलिस वालों से हिसाब चुकाना है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर वो कौन सा हिसाब था?

वहीं आशंका जताई जा रही है कि इससे पहले इलाके से बड़ी संख्या में लोगों ने सीएए-एनआरसी के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। जिस पर पुलिस ने इन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी। वहीं पुलिस पर हमले के संबंध में दर्ज मुकदमे में एक नामजद हाजी सलीम पर इस आरोप का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

अब इसे लेकर पुलिस जाँच में जुट गई है कि पुलिस पर किया गया हमला कहीं सीएए-एनआरसी का विरोध करवाने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई का बदला तो नहीं। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि इनमें से कितने ऐसे लोग हैं, जिन पर सीएए-एनआरसी के विरोध के दौरान कार्रवाई की गई थी।

वहीं भुजपुरा में पुलिसकर्मियों पर हुए हमले के मामले में चौकी प्रभारी मोनू कुमार आर्य की ओर से 33 नामजद व 22 अज्ञात पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। इंस्पेक्टर के अनुसार पुलिस पर हमला-पथराव मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें हाजी सलीम, अलीम, इक्तियार अली, शारिक, आसिफ, फुरकान, शरीफ, रफीक को गिरफ्तार किया गया है। सभी से पुलिस अभी पूछताछ में जुटी हुई है। वहीं इलाके में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए फिलहाल पुलिस बल के साथ आरएएफ के जवानों को भी तैनात किया गया है।

आपको बता दें कि अलीगढ़ के भुजपुरा क्षेत्र में मौजूद सब्जी मंडी में बुधवार को लॉकडाउन के दौरान समय अवधि पूरी होने पर पुलिस की एक छोटी टीम दुकानें बंद कराने पहुँची थी। इसी बीच अचानक से दुकानदारों ने भीड़ के साथ मिलकर पुलिस टीम पर ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया। इसमें एक पुलिसकर्मी घायल हुआ था और लेपर्ड बाइक में तोड़फोड़ की गई थी।

‘नर्स के साथ तबलीगियों ने छेड़छाड़ की तो वो सबूत के तौर पर फटे कपड़े दिखाए’ – Live TV पर घटिया तर्क

जमातियों द्वारा नर्सों से की गई छेड़छाड़ पर तबलीगी जमात के प्रवक्ता ने एक बार फिर शर्मनाक बयान दिया है। निजामुद्दीन स्थित मरकज के प्रवक्ता मुजीबुर रहमान ने कहा है कि जो स्वास्थ्यकर्मी और नर्स तबलीगी जमात के सदस्यों पर क्वारंटीन सेंटर में मारपीट और यौन उत्पीड़न का आरोप लगा रही है, वह सबूत के तौर पर अपने फटे हुए कपड़े लाकर दिखाए।

इंडिया टीवी पर हुए एक शो में रहमान ने तबलीगी जमात के उन सदस्यों के पक्ष में बहस की, जिन्हें देश में कोरोना वायरस के सबसे बड़े केन्द्र रूप में उभरकर सामने आए निजामुद्दीन स्थित मरकज से दिल्ली पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के सहयोग से बाहर निकाला था।

दरअसल एक मुद्दे पर इंडिया टीवी द्वारा एक बहस आयोजित की गई थी, जिसमें तबलीगी जमात के प्रवक्ता मुजीबुर रहमान भी पैनल का एक हिस्सा थे। चैनल पर बहस शुरू होने से पहले दिल्ली स्थित अस्पताल की एक नर्स का साक्षात्कार चलाया गया, जिसमें नर्स ने क्वारंटाइन किए गए जमातियों पर छेड़छाड़ सहित कई गंभीर आरोप लगाए।

रिपोर्टर द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए नर्स ने इंडिया टीवी के कैमरे के सामने कहा, “तबलीगी जमात से जुड़ी आए दिन आ रही खबरों पर मैं पहले यकीन भी नहीं करती थी कि ये लोग ऐसा भी कुछ कर सकते हैं, लेकिन जब मेरे साथ घटना घटी तो मुझे यकीन हो गया कि ये लोग कुछ भी कर सकते हैं। पीड़ित नर्स ने कैमरे पर बताया कि कैसे तबलीगी जमात के लोगों ने उनके साथ छेड़छाड़ की और फिर किस तरह खाना खिलाने के लिए मजबूर किया।”

नर्स ने कहा कि “मैं इन लोगों पर फिर से भरोसा नहीं कर सकती हूँ। तबलीगी जमात के सदस्यों के बारे में मेरे सारे भ्रम टूट गए हैं। उन्होंने मुझे पीछे से गर्दन पकड़कर मुँह में भोजन डालने की कोशिश की। इस बीच मैं किसी तरह उनकी पकड़ से मुक्त होकर वहाँ से अपनी जान बचाकर भाग निकली, लेकिन उन्होंने इसके बाद भी मुझे पीछे से पकड़कर अपनी ओर खींचने की कोशिश की।”

नर्स ने आगे बताते हुए कहा कि जमातियों के इस तरह से मेरे ऊपर किए हमले से मैं डर गई और सोचा कि एक महिला पर हमला करने की क्या जरूरत थी? अगर उन्हें खाना पसंद नहीं था, तो वे इसे खाने से मना कर सकते थे। मुझ पर हमला क्यों किया? मैं बस अपना कर्तव्य निभाते हुए उन्हें भोजन उपलब्ध करा रही थी, जो क्वारंटाइन केन्द्र के लिए हमें उपलब्ध कराया गया था।

नर्स ने कहा कि मैंने कई बार तो इनके मनचाहे भोजन की माँग को पूरा करने के लिए अपनी जेब से भुगतान कर भोजन मँगाया। इस बीच इंडोनेशिया के जमाती सदस्यों ने मुझसे चाय के लिए अनुरोध किया। इस पर मैंने चाय की सामग्री खरीदी और उनकी मदद भी की।

हालाँकि नर्स द्वारा किए गए दावों पर तबलीगी जमात के प्रवक्ता मुजीबुर रहमान को भरोसा नहीं हुआ और तब्लीगी जमात के लोगों का बचाव करते हुए इंडिया टीवी के एंकर से एक नई माँग कर दी। रहमान ने कहा कि जो नर्स तबलीगी जमात के सदस्यों पर हमले का आरोप लगा रही हैं, वह सबूत के तौर पर फटे हुए कपड़े सामने लाकर दिखाएँ।

रहमान ने कहा, क्योंकि आपका टीवी रिपोर्टर नर्स के साथ है, इसलिए आप नर्स को उसके फटे कपड़े दिखाने के लिए क्यों नहीं कहते। उन्होंने अपने फटे कपड़े नहीं दिखाए। एक बार जब वे दिखा देंगे, तब मैं अपनी बात रखुँगा। इस पर टीवी के एंकर आग बबूला हो गए और रहमान को सबूत के तौर पर नर्स से फटे हुए कपड़े माँगने को लेकर आड़े हाथों ले लिया। एंकर ने कहा कि आपको शर्म आनी चाहिए कि आप लगातार अपनी बेशर्मी का परिचय देते हुए तबलीगी जमात के गलत कामों का बचाव कर रहे हैं।

दरअसल पिछले दिनों में देश भर से ऐसी कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, जिनमें तबलीगी जमात के सदस्यों ने डॉक्टरों, नर्सों, वार्ड बॉय और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट की है। दिल्ली में डीजल शेड ट्रेनिंग स्कूल हॉस्टल क्वारेंटाइन सेंटर और आरपीएफ बैरक क्वारंटाइन सेंटर में क्वारंटाइन किए गए तबलीगी जमात से जुड़े सदस्यों के नखरे, भोजन को फेंकते और अनुचित भोजन की माँग करने के रूप में सामने आ चुके हैं।

इतना ही नहीं, ये जमाती क्वारंटाइन सेंटर में डॉक्टरों, नर्सों और उनके साथ रहने वाले अन्य कर्मचारियों के साथ गंदी हरकतें करते हैं और उनके ऊपर भी थूकते भी हैं। इसके अलावा गाजियाबाद के अस्पताल में भर्ती तबलीगी जमात के सदस्यों ने नग्न होकर अस्पताल में महिला कर्मचारियों के सामने अश्लील इशारे किए थे। इसकी जानकारी खुद गाजियाबाद के जिला एमएमजी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने गाजियाबाद पुलिस को पत्र लिखकर दी थी। इसके बाद सरकार ने आदेश दिया था कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी इन महिलाओं को दूर रखा जाएगा।

दिल्ली के नरेला क्वारंटाइन केंद्र में भी तबलीगी जमात के सदस्यों ने सुविधाओं को लेकर हंगामा किया था। इस मामले में एक प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी जिसमें कहा गया था कि जब सफाई कर्मचारी सफाई करने के लिए गए तो दो लोगों को कमरा नंबर 212 के बाहर शौचालय के पास पाया गया था। शिविर प्रभारी ने कहा कि तब्लीगी जमात के सदस्य अपने लापरवाह व्यवहार के माध्यम से रोकथाम के उपाय कर रहे थे।

बरकत उस्मान के मजहब की वजह से सामान लेने से इनकार: डिलीवरी बॉय की शिकायत पर गजानन चतुर्वेदी गिरफ्तार

महाराष्ट्र में तिपहिए वाली उद्धव सरकार आने के बाद वहाँ समुदाय विशेष के लोगों को संरक्षण देने की आड़ में वजह-बेवजह हिंदुओं के ख़िलाफ़ एक्शन लिया जाने लगा है। बीते दिनों साधुओं की मॉब लिंचिंग ने इस बात को बेहतर तरीके से स्पष्ट कर दिया और अब खबर है कि वहाँ एक व्यक्ति को सिर्फ़ इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि एक मुस्लिम डिलीवरी बॉय ने उस व्यक्ति पर आरोप लगाया कि उन्होंने उसके हाथ से किराने का सामान लेने से मना कर दिया।

जानकारी के मुताबिक ये घटना ठाणे के कशीमिरा इलाके की है। यहाँ एक मुस्लिम डिलीवरी बॉय एक घर में किराने का सामान पहुँचाने गया। लेकिन वहाँ उसके हाथ से सामान लेने से मना कर दिया गया। इसके बाद मुस्लिम लड़के ने व्यक्ति के ख़िलाफ़ ये शिकायत कर दी कि उसके मजहब के कारण उसके साथ ऐसा हुआ। यानी उसके मुस्लिम होने के कारण आरोपित व्यक्ति ने उसके हाथ से सामान नहीं लिया। 

अब इस शिकायत के मिलने के बाद आरोपित व्यक्ति को ठाणे पुलिस ने फौरन गिरफ्तार कर लिया। साथ ही उस पर धार्मिक भावना आहत करने का मुकदमा दर्ज हुआ। आरोपित की पहचान 51 वर्षीय गजानन चतुर्वेदी के रूप में हुई है।

ठाणे के कशीमिरा पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर संजय हजारे ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि गजानन चतुर्वेदी (51) के खिलाफ आईपीसी की धारा 295ए (धार्मिक भावना को आहत करने के उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण हरकत करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इंस्पेक्टर हजारे ने मीडिया को बताया कि उनके पास सामान पहुँचाने वाले ने शिकायत दर्ज कराई है। उसने कहा है कि मंगलवार सुबह को जब वह कुछ सामान पहुँचाने चतुर्वेदी के घर पहुँचा, तब वहाँ उससे नाम पूछा गया। जब उसने अपना नाम बताया तो चतुर्वेदी ने कहा कि वह मुस्लिम समुदाय के हाथों कोई सामान नहीं लेंगे। पुलिस अधिकारी ने कहा कि मामले की जाँच चल रही है।

अभी तक की सूचना के अनुसार मालूम चला है कि गजानन चतुर्वेदी की पत्नी जया ने फोन के जरिए से किराने की दुकान से कुछ सामान के लिए ऑर्डर किया। सामान लेकर पहुँचने वाले से घर के दरवाजे पर जब उसका नाम पूछा गया, तो उसने बरकत उस्मान पटेल बताया। इस पर चतुर्वेदी ने सामान लेने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद बरकत ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखकर इन दिनों हर इंसान अपनी सुरक्षा लिहाज से लोगों से दूरी बनाने का प्रयास कर रहा है। उसके ऊपर महाराष्ट्र में तो कोरोना के सबसे अधिक मामले पाए जा चुके हैं। दूसरी ओर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि तबलीगी जमातियों की लापरवाही व हरकतों ने इसे इतने व्यापक स्तर पर फैलाया।

ऐसे में अगर कोई व्यक्ति अपने सुरक्षा लिहाज से कुछ सोचकर उससे सामान लेने से मना करता है, तो उसको बिना कोई चेतावनी दिए, गिरफ्तार कर लेना कहाँ तक उचित है? ये अपने आप में पड़ताल का विषय है।

ज्ञात हो कि बीते दिनों सोशल मीडिया पर समुदाय विशेष के लोगों की कैमरे में कैद करतूत खूब वायरल हुआ। कहीं फलों में थूक लगाकर उसे सजाते हुए देखा गया, तो कहीं 500 के नोट पर थूक लगाते। ऐसे में एक कारण ये भी कि संकट की घड़ी में आमजन को चाहते न चाहते हुए संदेह करना पड़ रहा है।

3 घंटे के अंदर ऐसे बदला DCP का बयान, पलट दी यूथ कॉन्ग्रेस वाली बात: अर्नब पर हमले की पुलिसिया कहानी

अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर कल रात हुए हमले के बाद कॉन्ग्रेस सवालों के घेरे में है। करीब 12 बजे हुई इस घटना पर अर्नब गोस्वामी ने खुद वीडियो जारी करके पूरे वाकये की जानकारी दी है। अब खबर है कि उन्होंने इस घटना पर लिखित शिकायत भी दर्ज करवा दी है। ये शिकायत उन्होंने मुंबई में हुए हमले के संबंध में आज सुबह ही करवाई है। अपनी शिकायत में उन्होंने 2 लोगों पर आरोप लगाते हुए कहा कि रिपब्लिक भारत के हेडक्वार्टर से घर लौटते हुए उन पर व उनकी पत्नी पर हमला किया गया।

लिखित शिकायत के अनुसार, पहले उन दोनों लोगों ने अर्नब की गाड़ी में ये पहचानने की कोशिश की कि उसे कौन चला कौन कहा है। फिर उनमें से एक ने अर्नब की ओर उंगली से इशारा किया और बाइक को सामने खड़ा करके उनका रास्ता रोक लिया। इसके बाद उन्होंने ख़िड़की के शीशे तोड़ना चाहा, मगर जब वो नहीं टूटा तो उन्होंने अपनी जेब से कुछ तरल पदार्थ निकाला और पूरी कार पर छिड़क दिया।

अर्नब के अनुसार, इस बीच दोनों गुंडे उन्हें हिंदी में गालियाँ देते रहे और उनका रवैया हिंसक रहा। जब अर्नब ने ये सब देखते हुए अपनी गाड़ी आगे ले जाने की कोशिश की तो दोनों ने उनका रास्ता रोक लिया और फिर वहीं तरल पदार्थ फेंकने लगे। साथ ही उनकी कार का गेट भी थपथपाया। हालाँकि, थोड़े प्रयास करने के बाद वो अपनी गाड़ी आगे ले जाने में सफल रहे। आगे जाकर उन्होंने अपनी गाड़ी के बैक मिरर में देखा कि हमलावरों को मुंबई पुलिस की प्रोटेक्शन टीम के शिवाजी होस्मानी और उनके ऑफिस गार्ड ने पकड़ लिया था।

अपनी बिल्डिंग तक पहुँचने के बाद उन्होंने अपने ऑफिस गार्ड को इस बारे में पूछा। तो उसने बताया कि हमलावरों ने खुद को यूथ कॉन्ग्रेस का सदस्य बताया है, जो कह रहे थे कि वे उन्हें (अर्नब को) सबक सिखाने आए थे। अर्नब के मुताबिक इस बीच मुंबई पुलिस भी मौके में पहुँची और अर्नब की प्रोटेक्शन में तैनात शिवाजी होस्मानी ने उन्हें पूरा वाकया बताया कि उन पर हमला यूथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया। इसके बाद डीसीपी खुद अर्नब की पार्किंग में 10-15 मिनट के बाद आ गए और यहाँ भी शिवाजी होस्मानी ने उन्हें तीसरी बार पूरा वाकया बताया। साथ ही ये भी कहा कि हमलावर यूथ कॉन्ग्रेस के थे।

अर्नब अपनी शिकायत में कहते हैं कि जब उन्होंने इस मामले पर एफआईआर की बात की तो डीसीपी ने उन्हें जल्दबाजी न करने को कहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसमें वे शिकायत दर्ज करेंगे और तथ्यों को सत्यापित करने के लिए उन्हें कॉल करेंगे। मगर, जब उन्हें डेढ़ घंटे तक कॉल नहीं आई तो उन्होंने अपने सहकर्मी को फोन किया जो कि पुलिस थाने पर था। उसने अर्नब को बताया कि डीसीपी इस समय कह रहे हैं कि ये जाँच का विषय है कि वे लोग यूथ कॉन्ग्रेस के थे या नहीं।

अर्नब का अपनी शिकायत में कहना है कि सब कुछ साफ होने के बाद भी ऐसी बात कहना तथ्यों को मोड़ने जैसा है। उनका दावा है कि डीसीपी के साथ बातचीत की उनके पास 2 रिकॉर्डिंग हैं। उन्होंने बताया कि वे ये सब जानकर साढ़े तीन बजे पुलिस थाने गए और वहाँ जाकर वे तब हैरान रह गए तब डीसीपी ने उनके मुँह पर झूठ बोला कि चूँकि वे उन हमलावरों को नहीं जानते हैं इसलिए ये जाँच करने का विषय है कि वे यूथ कॉन्ग्रेस से हैं भी या नहीं।

अर्नब का आरोप है कि उन्हें शिकायत दर्ज कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि उन पर हमला करने वाले लोग वे थे, जो सत्ताधारी पार्टी से जुड़े थे। इसलिए बार-बार कहने पर भी उनकी बात को अनसुना किया जाता रहा। इस दौरान उनके सुरक्षा में तैनात प्रोटेक्शन टीम का हिस्सा रहे शिवाजी कहते रहे कि उन्होंने जिन्हें पकड़ा था, उन्होंने खुद स्वीकारा था कि वे लोग यूथ कॉन्ग्रेस से थे। जिनकी पहचान प्रतीक कुमार श्याम सुंदर मिश्रा और अरुण दिलीप बुराडे के रूप में हुई। जिनकी वीडियो और फोटोज भी उनके पास हैं।

इसके अलावा अपनी शिकायत में अर्नब ने अलका लांबा के ट्वीट का भी जिक्र किया है। जिसमें उन्होंने इस हमले के तुरंत बाद यूथ कॉन्ग्रेस जिंदाबाद लिखा। उन्होंने सोनिया गाँधी, पालघर में साधु लिंचिंग को लेकर भी अपनी बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस व उसके शीर्ष नेता लगातार उनसे, उनकी टीम से असहज हैं क्योंकि वे उनके ख़िलाफ सवाल पूछते हैं, जिससे उन्हें परेशानी होती है।

बता दें कि इस मामले में मुंबई के एनएम जोशी थाने में दोनों आरोपितों के ख़िलाफ 341 और 504 के तहत मामला दर्ज हुआ है। सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने हमले की निंदा करते हुए कहा, “हम वरिष्ठ पत्रकार अर्णब गोस्वामी पर हमले की निंदा करते हैं। हम किसी भी पत्रकार पर हमले की निंदा करते हैं। यह लोकतंत्र के खिलाफ है। जो लोग सहिष्णुता पर प्रवचन देते हैं वे उतने असहिष्णु हो गए हैं। यह अलोकतांत्रिक है।”

कॉन्ग्रेस की वो महिला नेता, जिसने अर्नब गोस्वामी पर हमले के तुरंत बाद लिखा – ‘युवा कॉन्ग्रेस जिंदाबाद’

अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर कल रात (22-23 अप्रैल की रात) बाइक सवार कॉन्ग्रेस के 2 गुंडों ने हमला किया। ये हमला ठीक उस समय हुआ जब वह रात के 10 बजे के शो के बाद की एडिट कॉल निपटा कर अपने बीवी के साथ अपने घर लौट रहे थे। मगर, घर से 500 मीटर की दूरी पर इस दौरान बाइक सवारों ने एंकर की कार के आगे अपनी मोटरसाइकिल रोक दी और फिर उन पर हमला किया। हैरानी की बात है कि इस हमले की सूचना के तुरंत बाद कॉन्ग्रेस की महिला नेता अलका लांबा ने यूथ कॉन्ग्रेस की वाह वाही में ट्वीट लिख दिया। ये ट्वीट रात के तीन बजे आया और बता दें कि अर्नब गोस्वामी पर हमला 12 से 1 बजे के बीच हुआ। जिसकी जानकारी उन्होंने वीडियो जारी करके खुद दी।

अलका लांबा ने देर रात ट्वीट में लिखा, “युवा कॉन्ग्रेस जिंदाबाद।” अब सोचने की बात है कि कॉन्ग्रेस ने ऐसा क्या किया? जो अलका लांबा को देर रात युवा कॉन्ग्रेस जिंदाबाद कहना पड़ा। तो बता दें कि अर्नब गोस्वामी की टिप्पणी के अलावा कॉन्ग्रेस कल किसी मुख्य कारण चर्चा में नहीं आई। और अलका लांबा जो ये ट्वीट कर रही हैं उससे पहले वे और राजस्थान सीएम समेत कई कॉन्ग्रेसी नेता अर्नब पर एक्शन लेने की माँग कर रहे थे। मगर जैसी ही हमले की खबर सार्वजनिक हुई। उन्होंने यूथ कॉन्ग्रेस की जय-जयकार शुरू कर दी। जिसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी उन्हें आड़े हाथों लिया और जमकर सुनाया। लोगों ने कहा कि ये हमला अलका लांबा के कारण हुआ, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को भड़काया था, इसके लिए उन्होंने 2 ट्वीट भी किए थे।

दरअसल, कल अर्नब ने अपने शो में साधुओं की लिंचिग पर सोनिया गाँधी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा था, “सोनिया गाँधी तो खुश हैं। वो इटली में रिपोर्ट भेजेंगी कि देखो, जहाँ पर मैंने सरकार बनाई है, वहाँ पर हिन्दू संतों को मरवा रही हूँ। वहाँ से उन्हें वाहवाही मिलेगी। लोग कहेंगे कि वाह, सोनिया गाँधी ने अच्छा किया। इनलोगों को शर्म आनी चाहिए। क्या उन्हें लगता है कि हिन्दू चुप रहेंगे? आज प्रमोद कृष्णन को बता दिया जाना चाहिए कि क्या हिन्दू चुप रहेंगे? पूरा भारत भी यही पूछ रहा है। बोलने का समय आ गया है।”

इस टिप्पणी को सुनकर कई कॉन्ग्रेसियों की प्रतिक्रिया आई। उनपर एफआईआर की गईं। उनके ख़िलाफ आवाज उठी। यहाँ तक सहमति -असहमति आम बात है। मगर अलका लांबा ने यहाँ अपने कार्यकर्ताओं को भड़काना शुरू कर दिया। पहले अलका लांबा ने लिखा कि अगर अर्नब गोस्वामी को साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी जी को लेकर की गई टिप्पणी पर गिरफ्तार नहीं किया जाता, तो भारतीय युवा कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को बिना सोचे सड़कों पर उतर जाना चाहिए, वरनाकोरोना से पहले यह नफ़रत कर ज़हर देश को मार डालेगा।

इसके बाद, अलका लांबा यहीं पर नहीं रुकी। उन्होंने इसी बयान पर अपनी आगे बात रखी और फिर कहा, “देशभर के कार्यकर्ता अर्नब गोस्वामी द्वारा कॉन्ग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी जी पर दिए गए ब्यान को लेकर बेहद आहत हैं, अगर समय रहते महाराष्ट्र ने उचित क़ानूनी कार्यवाही नहीं की तो मैं यह चेतावनी दे रही हूँ कि फिर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को सड़कों पर उतर आने से कोई नहीं रोक पाएगा।”

अब भले ही, इन ट्वीट को करने के बाद अलका लांबा अर्नब के विरोध में और सोनिया गाँधी के समर्थन में कितनी ही बातें रखें। मगर, सोशल मीडिया पर लोगों का यही मानना है कि अर्नब की टिप्पणी के बाद अलका लांबा के भड़काने के कारण उन पर हमला हुआ। हालाँकि ये बात कितनी सच है? ये भी जाँच का विषय है क्योंकि यूजर्स के इल्जाम निराधार नहीं है।

पहले लगातार अर्नब की निंदा और फिर अपने कार्यकर्ताओं को सड़क पर उकसाने की बात कहना, फिर अचानक अर्नब पर कॉन्ग्रेस के गुंडों का हमला करना और देर रात कॉन्ग्रेस नेता का ट्वीट आना… ये सब एक क्रम से होना दर्शाता है कि हमले के सोनिया गाँधी पर टिप्पणी सुनकर अलका लांबा ने हिंसा भड़काने और नियमों का उल्लंघन करने के लिए उकसाने के लिए ट्वीट किया। उन्होंने लगातार कहा कि उनके युवा नेता सड़कों पर आ जाएँगे। जबकि वो जानती है कि ये लॉकडाउन का समय है और सरकार लोगों को घर में रहने की सलाह दे रही है।

कॉन्ग्रेस के गुंडों ने अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर किया हमला: देखें उनका वीडियो

रात के 10 बजे के शो के बाद की एडिट कॉल निपटा कर लौटते हुए अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर कॉन्ग्रेस के दो मोटरसाइकिल सवार गुंडों ने हमला कर दिया। यह घटना 22 और 23 अप्रैल के बीच की रात्रि को हुई। हमारे सूत्र बताते हैं कि बाइक सवार गुंडों ने रिपब्लिक टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी की कार के आगे अपनी मोटरसाइकिल खड़ी कर दी और फिर हमला किया।

अर्नब पर जो हमला हुआ उसके बारे में अर्नब स्वयं इस वीडियो में बता रहे हैं:

सोनिया गाँधी को लेकर क्या कहा था अर्नब गोस्वामी ने?

अर्नब ने आचार्य प्रमोद कृष्णन से कहा कि अगर किसी पादरी की हत्या होती तो आपकी पार्टी और आपकी पार्टी की ‘रोम से आई हुई, इटली वाली’ सोनिया गाँधी बिलकुल चुप नहीं रहतीं। अर्नब ने दावा किया कि मॉब लिंचिंग पर सोनिया गाँधी आज चुप हैं तो इसका मतलब है कि वो मन ही मन में खुश भी हैं। मॉब लिंचिंग पर सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर अर्नब ने कहा:

“सोनिया गाँधी तो खुश हैं। वो इटली में रिपोर्ट भेजेंगी कि देखो, जहाँ पर मैंने सरकार बनाई है, वहाँ पर हिन्दू संतों को मरवा रही हूँ। वहाँ से उन्हें वाहवाही मिलेगी। लोग कहेंगे कि वाह, सोनिया गाँधी ने अच्छा किया। इनलोगों को शर्म आनी चाहिए। क्या उन्हें लगता है कि हिन्दू चुप रहेंगे? आज प्रमोद कृष्णन को बता दिया जाना चाहिए कि क्या हिन्दू चुप रहेंगे? पूरा भारत भी यही पूछ रहा है। बोलने का समय आ गया है।”

बता दें कि अर्नब गोस्वामी ने हाल ही में एक लाइव शो के दौरान ही एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया से त्यागपत्र दे दिया था। अर्नब ने अपने इस्तीफे के लिए एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के गिरते हुए मूल्यों को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने व्यक्तिगत पूर्वग्रहों के लिए नैतिकता से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि वह काफी लंबे वक्त से एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्य हैं। लेकिन अब यह मात्र कुछ लोगों का समूह है, जिनमें फेक खबरों को फेक कहने का दम नहीं है।

इससे पहले, लॉकडाउन में खाली बैठे कॉन्ग्रेस समर्थकों ने भी अर्नब गोस्वामी पर निशाना साधने में अपना समय खपाया और कॉन्ग्रेस आलाकमान को ख़ुश करने के लिए तरह-तरह के तिकड़म आजमाते नज़र आए। कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया सेल में कार्यरत गौरव पांडी ने अर्नब गोस्वामी पर पालघर में साधुओं की हत्या को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया। उन्होंने एक वीडियो बना कर उन पर निशाना साधा।

यूथ कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया हैंडल ने अपनी पार्टी की अध्यक्ष को ‘महान’ बताने के लिए उनके एक बयान को आधार बनाया। सोनिया गाँधी ने कहा था कि वो इसी देश में अपनी अंतिम साँस लेगी और यूथ कॉन्ग्रेस ने इस बयान को चलाते हुए अर्नब को आड़े हाथों लिया। पार्टी ने लिखा कि आज कॉन्ग्रेस का नायकत्व, अदम्य साहस, इच्छाशक्ति और त्याग से परिपूर्ण देशभक्त के पास है, जो एक गर्व की बात है।

यूपी में 10 जिले हुए कोरोना मुक्त, योगी सरकार ने दिए सप्लाई व कम्युनिटी किचन से जुड़े लोगों की जाँच के निर्देश

योगी सरकार के उत्तर प्रदेश में बुधवार दोपहर तक कोरोना वायरस के 75 नए मामले सामने आए। इस तरह राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 1412 हो गई है। यूपी में धीरे-धीरे बढ़ रहे कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच दस जिलों से राहत भरी खबर है। 10 जिलों में पिछले कई दिनों से एक भी नया मामला सामने नहीं आया है। पिछले 22 जिले और अब 10 जिले को लेकर प्रदेश में कुल 32 ऐसे जिले हैं जहाँ कोरोना का कोई मरीज नहीं है।

ये 10 जिले हुए कोरोना मुक्त

पीलीभीत, लखीमपुर, हाथरस, बरेली, प्रयागराज, महाराजगंज, शाहजहाँपुर, बाराबंकी, हरदोई और कौशाम्बी जो अब कोरोना मुक्त जिलों की श्रेणी में आ गए हैं।

प्रमुख सचिव ने कहा कि पहले तबलीगी जमात और फिर इन्फेक्शन से संक्रमण बढ़ रहा है। कोरोना की कोई वैक्सिन या दवा न होने कारण बचाव ही इसका इलाज है।

मुख्यमंत्री के निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सप्लाई चेन में लगे लोगों की कोरोना जाँच कराए जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही टीम-11 की बैठक कर लॉकडाउन की समीक्षा की हैं। उन्होंने 10 से अधिक मरीज वाले जिलों में सख्ती से लॉकडाउन के निर्देश भी दिए हैं। अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी से मिली जानकारी के अनुसार सीएम ने टेस्टिंग लैब की क्षमता और अधिक तेजी से बढ़ाने और मेडिकल इंफेक्शन से बचाव के लिए विशेष निर्देश दिए हैं।

अप्रभावित जिलों में उद्योगों के संचालन का निर्देश

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया की यूपी में इस वक्त 6,980 इकाइयाँ क्रियाशील हैं और इनमें सवा लाख श्रमिक कार्य कर रहे हैं। इसके साथ 1227 ईंट-भट्ठे प्रदेश में चालू हैं और यहाँ करीब 15 लाख श्रमिक काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 119 चीनी मिलों में साठ हजार श्रमिक कार्य कर रहे हैं। गन्ने की कटाई पूरी हो गई। 77 फीसद गेहूँ की भी कटाई हो चुकी है। इस दौरान लेबर की कमी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि 30 लाख क्विंटल गेहूँ की खरीद हो चुकी है। इसकी 62 फीसद गेहूँ किसानों तक पहुँचकर खरीदा गया है।

इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों के कच्चे और तैयार माल के आवागमन में हो रही दिक्कत को भी सुलझाने की बात कही। सरकार इस बात को ध्यान में रख रही कि इस महामारी के दौर में किसी भी नागरिक को राशन पानी की दिक्कत न आए इसलिए तीन करोड़ छह लाख कार्ड धारकों को राशन वितरण किया जा चुका है, जो कि एक रिकार्ड है। ढाई लाख नए राशन कार्ड बनाए गए हैं।

कोटा से लौटे सभी छात्र होम क्वारंटाइन

अवनीश कुमार अवस्थी ने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले कोटा से लाए गए सभी छात्रों को होम क्वारंटाइन किया गया हैं। समय-समय पर उनका हालचाल भी फ़ोन के जरिए लिया जा रहा हैं। साथ ही महामारी से बचने के सारे नियमों का पालन करने के लिए भी कहा गया हैं।

पंचायती राज विभाग द्वारा सहायता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लोक भवन में पंचायती राज मंत्री भूपेन्द्र सिंह चैधरी एवं प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने पंचायती राज विभाग की ओर से 53 करोड़ 20 लाख रुपए का चेक ‘मुख्यमंत्री का पीड़ित सहायता कोष-कोविड केयर फण्ड’ के लिए भेंट किया। मुख्यमंत्री ने विभाग के इस योगदान की सराहना की है। फण्ड की धनराशि से टेस्टिंग, एल-1, एल-2 तथा एल-3 अस्पतालों की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण, लाॅजिस्टिक्स जैसे पीपीई किट, एन-95 मास्क, वेंटिलेटर्स आदि की व्यवस्था की जाएगी।

पाकिस्तान: मामूली आँधी भी नही सह पाया इमरान खान द्वारा बनवाया 100 करोड़ का करतारपुर कॉरिडोर गुरुद्वारा

पाकिस्तान लाख राग अलापता रहे कि वह अपने यहाँ सिख समुदाय को बराबरी और सम्मान का हक देता है, लेकिन हर बार उसकी पोल खुल ही जाती है। इसका जीता जागता सबूत है, करतारपुर कॉरिडोर गुरुद्वारा। जिसका पुनर्निर्माण दो साल पहले 2018 में ही हुआ था। वह मामूली आँधी में ही ढह गया। जानकारी के मुताबिक तेज हवा और बारिश के चलते दो गुम्बद क्षतिग्रस्त होकर दूर जा गिरे।

इस घटना की वजह से करतारपुर कॉरिडोर और गुरुद्वारा के निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि इन गुंबदों के पुनर्निमाण में सीमेंट और लोहे के बजाय फाइबर का उपयोग किया गया है। पाकिस्तान ने पिछले साल करतारपुर कॉरिडोर गुरुद्वारा को लेकर पुरी दुनिया मे जबरदस्त ढिंढोरा पीटा था और इसके निर्माण का खर्चा सौ करोड़ रुपए बताया था। लेकिन अब पता चला है कि निर्माण की गुणवत्ता कितनी खराब थी कि ये हल्के आँधी-तूफान को भी नहीं झेल सके।

पाकिस्तान में सिख समुदाय ने इस घटना के बाद काफी नाराज़गी जाताई है। उनका कहना है कि पाकिस्तान सरकार से कभी किसी अन्य मजहब को सम्मान नहीं मिलता। लोगों का आरोप है कि इमरान खान के लिए करतारपुर सिर्फ एक दिखावा था। लोगों की नजरों में ऊपर उठने का केवल सियासी स्टंट।

कॉन्ग्रेस नेता, पूर्व सांसद व पंजाब सरकार में भूतपूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने करतारपुर साहिब के उद्घाटन समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की शान में जम कर कसीदे पढ़े थे।

बता दें कि, पाकिस्तान में सिखों के दो पवित्र तीर्थ स्थल हैं। पहला ननकाना साहिब जो लाहौर से लगभग 75 किलोमीटर दूर है। ये गुरु नानक देव जी का जन्मस्थल है। दूसरा है करतारपुर जहाँ गुरु नानकदेव अंतरध्यान हुए थे। यह स्थान लाहौर से लगभग 117 किलोमीटर दूर है। करतारपुर साहिब गुरुद्वारे में भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए करतारपुर कॉरीडोर बनाया गया था।

सिखों के प्रथम गुरु नानक साहब का निवास स्थान होने के कारण सिख संप्रदाय के लिए यह स्थल काफ़ी महत्व रखता है। नानक देव जी यहीं रहे और फिर यहीं पर ज्योति में समा गए। इससे पहले भारतीय सीमा से मात्र 3 किलोमीटर दूर इस पवित्र स्थल का दर्शन सिख दूरबीन के माध्यम से किया करते थे।

अर्नब को ‘रिपब्लिक टीवी’ से Arnab ही हटा सकते हैं: जानकारी के अभाव में गहलोत ने BJP सांसद से लगाई गुहार

अर्नब गोस्वामी ने पालघर में साधुओं की हत्या को लेकर सोनिया गाँधी से सवाल क्या पूछा, सभी कॉन्ग्रेस नेता उनके पीछे लग गए। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी माँग की है कि अर्नब गोस्वामी पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने सांसद राजीव चंद्रशेखर से अर्नब को बर्खास्त करने की माँग की। चंद्रशेखर ने उन्हें करारा जवाब देते हुए कहा कि अर्नब को कोई नहीं निकाल सकता, उन्होंने ये सब अपनी मेहनत से ख़ुद पाया है और ‘रिपब्लिक’ के ओनर वही हैं।

इस दौरान अशोक गहलोत शायद ये भूल गए कि केवल अर्नब गोस्वामी ही हैं, जो अर्नब गोस्वामी को ‘रिपब्लिक टीवी’ से बर्खास्त कर सकते हैं। सांसद राजीव चंद्रशेखर ऐसा नहीं कर सकते। जब अर्नब ने ‘टाइम्स नाउ’ छोड़ा था, तब उन्होंने ‘रिपब्लिक टीवी’ की स्थापना की थी। आज इसके हिंदी और अँग्रेजी, दो अलग-अलग न्यूज़ चैनल हैं। राजीव चंद्रशेखर के स्वामित्व वाले ‘एशियानेट’ ने भी इसमें वित्त लगाया था। वो न्यूज़ नेटवर्क में डायरेक्टर भी थे।

लेकिन, मई 2019 में अर्नब ने एशियानेट से ‘रिपब्लिक’ के शेयर वापस ख़रीद लिए। इसके साथ ही वो ‘रिपब्लिक टीवी’ में सबसे बड़े और प्रमुख शेयरधारक हैं। चंद्रशेखर ने भाजपा ज्वाइन करने के बाद कम्पनी में डायरेक्टर के पद से भी इस्तीफा दे दिया था। अब न्यूज़ नेटवर्क के मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ, दोनों अर्नब गोस्वामी ही हैं। ‘रिपब्लिक टीवी’ और ‘रिपब्लिक भारत’ न्यूज़ चैनलों को एआरजी आउटलाइन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड संचालित करता है, जिसमें 82% शेयर Arnab गोस्वामी के हैं। इसके अलावा चैनल का डिजिटल संस्करण भी है।

अर्नब गोस्वामी अब इस न्यूज़ नेटवर्क का पूर्ण कण्ट्रोल रखते हैं। वो शायद एकलौते ऐसे पत्रकार हैं, जिन्होंने एक पूरे न्यूज़ नेटवर्क का स्वामित्व अपने पास रखा हुआ है। हालाँकि, एशियानेट अभी भी नेटवर्क में शेयर रखता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि राजीव चंद्रशेखर Arnab गोस्वामी को उनके पद से हटा सकते हैं। इसीलिए, अशोक गहलोत जानकारी के आभाव में उन्हें हटाने की बातें कर रहे हैं।

अर्नब गोस्वामी ने हाल ही में एक लाइव शो के दौरान ही एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया से त्यागपत्र दे दिया था। Arnab ने अपने इस्तीफे के लिए एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के गिरते हुए मूल्यों को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने व्यक्तिगत पूर्वग्रहों के लिए नैतिकता से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि वह काफी लंबे वक्त से एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्य हैं।