Home Blog Page 4899

3.10 करोड़ को भोजन, 28 लाख परिवारों को कच्चा राशन, 26 लाख को मास्क: RSS चीन और Pak सीमा पर भी कर रहा मदद

देश कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इस दौरान अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभा रहा है। समाजसेवा के क्षेत्र में नए झंडे गाड़ने वाले संघ ने जनसेवा का ऐसा उदाहरण पेश किया है कि इसके प्रखर विरोधी भी इसकी प्रशंसा करते नहीं थक रहे। संघ देश के उन सुदूर इलाक़ों में ज्यादा ध्यान दे रहा है, जहाँ तक सरकार भी आसानी से नहीं पहुँच पाती। म्यांमार, बांग्लादेश सीमा और पाकिस्तान सीमा पर भी लोगों को मदद पहुँचाई जा रही है।

जम्मू कश्मीर में भी संघ उत्कृष्ट काम कर रहा है। ‘दैनिक जागरण’ में प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार, पूरे देश में संघ के तीन लाख से अधिक कार्यकर्ता 3.10 करोड़ लोगों को भोजन कराने के साथ-साथ 38 लाख से अधिक परिवारों में कच्चा राशन पहुँचाने का काम कर चुके हैं। सबसे बड़ी बात तो ये कि पीड़ितों की धर्म, जाति व संप्रदाय देखे बिना संघ उनकी सेवा में लगा है। 26 लाख से भी अधिक लोगों को मास्क बाँटे गए हैं। 60 हज़ार लोगों को आयुर्वेदिक काढ़ा पिलाया गया है।

राष्ट्रीय सेवा भारती के महामंत्री श्रवण कुमार ने बताया है कि इस राहत कार्य में पूरे देश में सेवा भारती के कार्यकर्ता भी लगे हैं। पूरे देश में जरूरत के अनुसार राहत कैंप चलता रहेगा। इससे पहले बताया गया था कि देश भर में ‘सेवा भारती’ के 2.1 लाख स्वयंसेवक काम में लगे हुए हैं, जो ‘सेवा भारती’ के बैनर तले कार्यरत हैं। संगठन ने भारत में कुल 1200 संस्थाओं के साथ संपर्क साधा है

संस्था उन सभी के साथ मिल-जुलकर काम कर रही है। इन 1200 संस्थाओं के साथ मिल कर ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई इलाक़ा छूट न जाए। श्रवण ने बताया कि 26 लाख लोगों तक उनकी सीधी पहुँच है, जिन्हें भोजन कराया जा रहा है।

दक्षिण भारत पर भी RSS का जोर

दक्षिण भारत में संघ के 77 हज़ार कार्यकर्ता काम में लगे हुए हैं। इनमें केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक शामिल है। लॉकडाउन के बीच वहाँ 33 लाख लोगों को संघ द्वारा संचालित कैम्पों से राहत सामग्री मिल चुकी है। सबसे ज्यादा संख्या में कार्यकर्ताओं को केरल में लगाया गया है। बुजुर्गों के बाल काटने में भी RSS के स्वयंसेवक उनकी मदद कर रहे हैं। घरों में सब्जियाँ पहुँचाई जा रही हैं। दिल्ली के चर्च में 50 परिवार फँसे हैं, जिनके खाने-पीने का इंतजाम संघ ने किया हुआ है।

नार्थ-ईस्ट में RSS के राहत-कार्य के लाभान्वितों में अधिकतर ईसाई समुदाय के लोग हैं। जम्मू कश्मीर सहित कई अन्य राज्यों में बड़ी संख्या में समुदाय विशेष की मदद की गई है। झारखण्ड के गोड्डा में एक स्वयंसेवक हैं, जिनके ख़ुद के घर में दो वक़्त का राशन नहीं है लेकिन वो लगातार दूसरों तक खाने-पीने की सामग्रियाँ पहुँचाने में लगे हुए हैं। उनका नाम सुबोध हरिजन है। उन्होंने पहाड़ों पर रहने वाले 2500 आदिवासी परिवारों को राशन पहुँचाया है। स्थानीय स्वयंसेवक उनकी मदद कर रहे हैं।

बता दें कि आरएसएस के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी वर्चुअल मंच के माध्यम से इसके प्रमुख अपना भाषण देंगे। संघ ने जानकारी दी है कि भागवत 26 अप्रैल को शाम 5 बजे ‘वर्तमान स्थिति और हमारी भूमिका’ पर संबोधन देंगे। आरएसएस ने सभी को परिवार के सदस्यों और शुभचिंतकों के साथ इस सत्र में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह संबोधन इस संकट से निपटने के उपायों पर केंद्रित होगा।

भारत के कट्टरपंथी पाकिस्तानियों के साथ मिल कर अरब देशों में कार्यरत हिंदुओं को बना रहे निशाना

अरब (Arab) देशों में भारतीय हिन्दू लोगों के खिलाफ अब पाकिस्तानियों ने नया मोर्चा खोल लिया है, जो संभवतः आईएसआई (ISI) द्वारा समर्थित है। सोशल मीडिया पर अपने आपको अरब (Arab) का दिखा कर, भारतीय प्रधानमंत्री मोदी से इस्लामोफोबिया फैलाने की ‘शिकायत’ कर रहे हैं। ऑर्गेनाइज़र के एक लेख में कहा गया है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम पारित करने के जवाब में कुछ भारतीयों द्वारा शुरू किए गए लगातार भारत विरोधी अभियान के बाद, पश्चिम में इस्लामी कट्टरपंथी खाड़ी देशों (gulf countries) में भारतीय हिन्दू लोगों के खिलाफ जहर उगलने का मौका पा गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, केरल स्थित इस्लामी चरमपंथियों ने नफ़रत फैलाने वाले अभियान का नेतृत्व किया, जिसमें अरब देशों की पुलिस आदि से खाड़ी में काम करने वाले भारतीय हिन्दू लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया गया क्योंकि वे भारत में समुदाय विशेष वालों को मारते हैं। इसी काम को अंजाम देने के लिए, सोशल मीडिया पर कई फर्जी अकाउंट भारत के खिलाफ झूठ फैलाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।

यह एक सच्चाई है कि नई दिल्ली में निजामुद्दीन मरकज़ के तब्लीगी जमात ने भारत में कुल कोरोनावायरस रोगियों का 30% योगदान दिया है। आम जनता का गुस्सा इसलिए भी है कि इनमें से कई ने अपने यात्रा इतिहास को छिपाया है और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार भी किया है। इसमें नर्सों से छेड़छाड़ और डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर पथराव भी शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार, केरल मे स्थित विभिन्न इस्लामी संगठनों ने अरबों को प्रभावित करने के लिए प्रमुख व्यापारियों और धार्मिक नेताओं का उपयोग किया और उन्हें भारत के खिलाफ नकली बयान के साथ बरगलाया। अरब देशों के बाहर गल्फन्यूज़, अल जज़ीरा, खलीज टाइम्स जैसे मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भारत में वहाँ के हिन्दू लोगों द्वारा समुदाय विशेष के साथ किए गए बर्ताव की गलत जानकारी को फैलाने के लिए किया गया था।

पाकिस्तान ने भारतीय समुदाय विशेष से हाथ मिलाया

पाकिस्तान की 2016 की नीति ‘भारत और पाकिस्तान के बीच विकसित नवीनतम परिस्थितियों के मद्देनजर नीतिगत दिशा-निर्देश’ शीर्षक से ‘भारतीय प्रसार प्रचार’ के सदस्यों के रूप में चुनिंदा पत्रकारों के साथ ‘मीडिया समन्वय समिति’ रखने और विशेष रूप से एक मीडिया रणनीति को बढ़ावा देने की सिफारिश की थी। नीति ने अंतरराष्ट्रीय लॉबिस्टों और रणनीतिक संचार संगठनों को वैश्विक नैरेटिव बदलने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। नीति दस्तावेज में भारतीय समाज में ‘दोष-रेखाओं’ को उजागर करने का आह्वान किया गया है। वे विशेष रूप से मजहब विशेष, सिखों, ईसाइयों और दलितों को अलग-थलग वर्गों के रूप में उल्लेख करना चाहते थे। नीति ने मोदी और आरएसएस (RSS) की विचारधारा को लक्षित करने के लिए भी कहा, और भारत में उन लोगों तक पहुँचने का सुझाव दिया जो “मोदी के अतिवाद के विरोध में” हैं। नीति ने विशेष रूप से राजनीतिक दलों, मीडिया और नागरिक समाज में लोगों तक पहुँचने के बारे में बात की।

इसलिए, पाकिस्तान का इस प्रचार पर समर्थन मिलना कि “भारत मजहब विशेष के खिलाफ है,” उतने आश्चर्य की बात नहीं है।

अलर्ट नेटिज़ेंस ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में, विभिन्न ट्विटर उपयोगकर्ताओं ने अपने ट्विटर हैंडल को बदल कर भारत में समुदाय विशेष के खिलाफ ‘घृणा’ की निंदा करने के लिए ट्वीट किया।

जैसा कि ऊपर देखा जा सकता है कि किस तरह “H. H. Mona bint Fahad al” के ट्विटर हैंडल से किस प्रकार भारत को धमकियाँ दी जा रही है।

पिछले कुछ दिनों में इस तरह के कई ट्विटर हैंडल लगातार ट्रेंड कर रहे हैं।

ट्विटर पर अरब होने का दिखावा करने वाले Kahlown Yasin संभवतः पाकिस्तान से है। जैसा कि ट्विटर यूजर @PokerShash ने पता लगाया कि यासीन कोई शेख नहीं, बल्कि खाड़ी में काम करने वाला पाकिस्तानी है।

कई लोगों ने तो अपने प्रोफाइल हैंडल और चित्रों को भी महिला के नाम और चेहरे से बदल दिया और यह दिखाने का प्रयास किया कि महिलाएँ भी भारत में हो रहे ‘समुदाय विशेष के खिलाफ अत्याचारों’ की निंदा कर रही है।

अरब मामला: भारतीय हिन्दू कर्मचारियों पर निशाना

ऑर्गेनाइज़र की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ प्रवासी भारतीयों ने कहा था कि पश्चिम एशिया और अरब देशों में भारतीयों, विशेष रूप से हिंदू लोगों के खिलाफ़, सीएए के विरोध प्रदर्शनों को लेकर जल्द ही हमला होने वाला है। केरल के एक प्रवासी कार्यकर्ता का हवाला देते हुए, ऑर्गनाइज़र का कहना है कि पीएफ़आई और जमात-ए-इस्लामी जैसे इस्लामिक संगठनों के कैडर नियमित रूप से यूएई, सऊदी, कुवैत, कतर आदि में भारतीयों को निशाना बनाते हैं। दिसंबर 2019 में, इस्लामी कट्टरपंथियों के एक झुंड ने कतर अस्पताल से एक भारतीय डॉक्टर को यह कह कर निष्कासित करवा दिया था कि सीएए के प्रति डॉक्टर का समर्थन समुदाय विरोधी और सांप्रदायिक था।

तब्लीगी जमात के सदस्यों की लापरवाही और दुर्व्यवहार के खिलाफ गुस्सा व्यक्त करने के कारण अब कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने तो भारतीयों पर किए गए हमले को भी सराहा है:

कई भारतीयों, विशेष रूप से पत्रकारों को, ऐसा लगता है कि उनके अनुसार की गई अनर्गल बाते लोगो के हित के लिए होती है। मगर वो ये भूल जाते हैं कि उनकी वजह से लोगो में एक दूसरे के प्रति डर का माहौल पैदा कर दिया गया है।

तब्लीगी, इस्लाम में एक विचारधारा है। जो इस्लाम के अंदर आता है। उनके गलत बर्ताव पर उनका बचाव करना या उनके अनुसार कार्य करना पूरे समुदाय को बदनाम करता है। इसमें अधिकांश लोग वो भी आ जाते है जिनका इससे कोई लेना देना ही नहीं होता है।

वे 22 हिन्दू चेहरे जिनकी लिंचिंग पर पूरा मीडिया शांत रहा- क्योंकि उनका नाम तबरेज, अखलाक नहीं था?

महाराष्ट्र के पालघर में हिन्दू नागा साधुओं की लिंचिंग के बाद तथाकथित सेकुलरों व मीडिया गिरोह की चुप्पी रह-रहकर कचोटने वाली है। मगर, इस बीच ये ध्यान रखने की आवश्यकता है कि ये पहला मामला नहीं है जब समाज ने हिंदुओं की जान जाने को मात्र एक अपराध बताया और इस खबर को प्राथमिकता देने की बजाय, ये साबित करने में जुट गए कि आखिर क्यों इस खबर में साम्प्रदायिकता नहीं ढूँढी जानी चाहिए। बीते कुछ समय में कई ऐसे मामले आए जब हिंदुओं की सरेआम लिंचिंग हुई। मगर, मीडिया ने खबर में केवल तबरेज और अखलाक को जगह दी। क्योंकि तब अपराधी हिंदू थे।

कुछ उन्हीं नामों के साथ आज हम आपको एक बार फिर वो वाकये याद दिला रहे हैं। जिन्होंने शायद तबरेज या अखलाख से कम दर्द नहीं सहा। मगर उनके लिए वामपंथियों कट्टरपंथियों की सहानुभूति मूक रही। क्योंकि उन्हें मारने वाले इस्लामिक भीड़ का हिस्सा थे

1. विष्णु गोस्वामी– 16 मई 2019 को यूपी के गोंडा जिले में इमरान, तुफैल, रमज़ान और निज़ामुद्दीन ने विष्णु गोस्वामी को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया। विष्णु की गलती बस ये थी कि वे अपने पिता के साथ लौटते हुए सड़क के किनारे लगे नल पर पानी पीने लगा था। बस इसी दौरान इन्होंने विष्णु व उसके पिता से विवाद बढ़ाया और बात खिंचने पर उसे पेट्रोल डालकर आग के हवाले झोंक दिया।

2.वी.रामलिंगम– तमिलनाडु में दलितों के इलाके में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को चलता देख वी राम लिंगम ने पीएफआई के कुछ लोगों का विरोध किया था। जिसके बाद 7 फरवरी को पट्टाली मक्कल काची के नेता की घर से खींचकर हत्या कर दी गई । इस मामले में पुलिस ने पाँच लोगों को हिरासत में लिया था- निजाम अली, सरबुद्दीन, रिज़वान, मोहम्मद अज़रुद्दीन और मोहम्मद रैयाज़। 

3. ध्रुव त्यागी– बेटी के साथ छेड़खानी का विरोध करने पर 51 वर्षीय ध्रुव त्यागी को सरेआम सबके सामने मोहम्मद आलम और जहाँगीर खान ने धारधार हथियारों से राष्ट्रीय राजधानी के मोती नगर में मौत के घाट उतारा था। इसके बाद इन हत्यारों ने ध्रुव त्यागी के बेटे पर भी हमला किया था। हालाँकि, उस समय पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। मगर बाद में पुलिस  को पड़ताल से पता चला कि उस दिन उन्हें 11 लोगों ने घेर कर मारा था।

4. चन्दन गुप्ता–  कासगंज में तिरंगा यात्रा के दौरान हुई हिंसा में मारे गए अभिषेक उर्फ़ चंदन गुप्ता की हत्या शायद ही किसी के जेहन से निकले। अभी हाल ही में दिल्ली में हुए प्रदर्शनों में इनका नाम एक बार फिर सामने आया था। चंदन का जुर्म सिर्फ़ ये था कि वे 26 जनवरी के मौके पर विहिप और एबीवीपी की तिरंगा यात्रा में शामिल थे। जहाँ मुस्लिम बहुल इलाके में उनपर छत से गोली चला दी गई। घटना में चंदन की मौत हो गई और बाद में पुलिस ने मुख्य आरोपित सलीम को गिरफ्तार किया 

4. हीना तलरेजा– साल 2017 में 5 जुलाई को हिना तलरेजा का शव बरामद हुआ। जिसके बाद उनकी हत्या की खबरे सुर्खियों में आई। पड़ताल के बाद मालूम हुआ कि हिना के पति अदनान ने पहले अपनी आँखों के सामने अपने दोस्तों से उसका गैंगरेप करवाया और फिर उसे गोली मारकर हत्या कर दी। बाद में शव को कौशांबी जिले के एक हाइवे पर फेंककर फरार हो गया।

6. अंकित सक्सेना– मुस्लिम गर्लफ्रेंड के परिवार वालों ने जिसे दिल्ली के टैगोर गार्डन की एक गली में सबके सामने मौत के घाट उतारा, उस अंकित शर्मा को भुला पाना नमुमकिन हैं। साल 2018 की 1 फरवरी की वो घटना जिसमें दिल्ली सरकार ने खूब राजनीति की रोटियाँ सेकीं थी। उसमें मुस्लिम लड़की ने खुद बताया था कि उसके परिवारवालों ने उसके प्रेमी अंकित को मारा।

7. प्रशांत पुजारी– साल 2015 में कर्नाटक के सबसे संवेदनशील मेंगलुरु से 40 किलोमीटर दूर मूदबिद्री में 9 अक्टूबर को बीच बाजार में देर शाम को प्रशांत पुजारी की बेहरमी से हत्या की गई। इस मामले में पुलिस ने हनीफ, इब्राहिम, इलियास और अब्दुल रशीद को गिरफ्तार किया। पड़ताल में मालूम हुआ कि प्रशांत को साजिश के तहत मारा गया। वे एक गौ रक्षक थे। जिन्होंने अपने दल के साथ कई बार मवेशियों से लदे ट्रक और लॉरियों को जब्त करवाया था।

8. विधु जैन– साल 2013 में 30 सितंबर को पंजाब के मलेरकोटला में कुछ जिहादियों ने हिंदू बच्चे विभु जैन का बेरहमी से कत्ल किया था। जिस समय विभु का अपहरण हुआ वह 12 साल का था। बाद में खबर आई कि कट्टरपंथियों ने उसे जिंदा जला दिया। 

9. ट्विंकल शर्मा– अलीगढ़ के टप्पल में हुआ ये हत्याकांड वो घटना है जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया कि अब इंसानियत समाज में बाकी बची भी है या नहीं। इस घटना के आरोपितों का नाम मोहम्मद जाहिद और मोहम्मद असलम था। जिन्होंने केवल 10 हजार के लिए बच्ची के साथ बेरहमी की हर हद पार की। उन्होंने बच्ची को मारने से पहले 8 घंटे उसे इतना मारा था उसकी आँख तक डैमेज हो गई। बाद में उसका शव भी ऐसी जगह फेंका जहाँ उसे कुत्तों ने बुरी तरह नोचा था।



10. सुबोध सिंह– 3 दिसंबर 2018 को स्याना के चिंगरावठी में हुई हिंसा में सुबोध सिंह की हत्या हुई। उनके अलावा इस घटना में 2 और लोगों को मारा गया।

11. डॉ. पंकज नारंग – साल 2016 में दिल्ली के विकासपुरी में पंकज नारंग की हत्या की गई। इसमें 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 4 नाबालिग थे। उनकी मौत का कारण सिर्फ ये था कि उन्होंने अपने भांजे के साथ क्रिकेट खेलने के दौरान कुछ लोगों को मना किया था कि वे गाड़ी तेज न चलाएँ। जिसके बाद उन लोगों ने पंकज नारंग पर हमला कर दिया।

12. रिया गौतम-साल 2017 में दिल्ली में रहकर एयर होस्टेस की ट्रेनिंग ले रही रिया गौतम नाम की लड़की की हत्या की गई। इस वारदात को अंजाम देने वाले का नाम आदिल था। रिया का जुर्म सिर्फ़ ये था कि वे आदिल की पड़ोसी थी और उसकी उससे कई साल से दोस्ती थी। लेकिन एक दिन उसने आदिल से मिलने से मना कर दिया जिसके बाद आदिल ने उसे एक दिन चाकू से गोद डाला। इस मामले में पुलिस ने आदिल के साथ उसके 2 दोस्तों को भी गिरफ्तार किया था। जिनका नाम जुने सलीम अंसारी और फाजिल राजू अंसारी था।

13. बन्धु प्रकाश – बंगाल के मुर्शिदाबाद इलाके में आरएसएस कार्यकर्ता बंधु प्रकाश पाल, उनकी सात माह की गर्भवती पत्नी, तथा आठ साल के बेटे की 8 अक्टूबर 2019 को धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। जिसने सबको हिलाकर रख दिया था। पहले पुलिस ने इसे निजी कारणों से हुई हत्या बताया था। बाद में इसके पीछे 24000 रुपए का एंगल जोड़ दिया था।

14. प्रीति माथुर- 24 वर्षीय प्रीति माथुर उस लड़की का नाम है जिसे उसके सिरफिरे आशिक ने निजामुद्दीन इलाके में सरेआम चाकूओं से घोंपकर मार डाला।

15. कमलेश तिवारी– हिंदुत्व का झंडा बुलंद कर कट्टरपंथियो के ख़िलाफ मुखर होकर बोलने वाले हिंदू नेता कमलेश तिवारी की मौत ने साल 2019 में सबको झकझोर दिया। जब जाँच हुई तो इसके पीछे न एक लंबी साजिश का खुलासा हुआ बल्कि कट्टरपंथियों की उस हकीकत का भी जो अहमदाबाद से लेकर यूपी तक फैली थी।

16. प्रीति रेड्डी– हैदराबाद का वो मामला जिसने पिछले साल नवंबर महीने के खत्म होते-होते सबको झकझोर दिया। शमसाबाद के टोल प्लाजा के पास घटी घटना में मुख्य आरोपित मोहम्मद पाशा था। जिसने अपने अन्य तीन साथियो के साथ मिलकर उस महिला डॉक्टर का गैंगरेप किया। फिर उसे पेट्रोल डालकर जलने को छोड़ दिया।

17. रतन लाल– 24-25 फरवरी को उत्तरपूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में वीरगति को प्राप्त हुए रतन लाल का नाम शायद ही आने वाले समय में कोई भूल पाए। एक ऐसा वीर जिसने दिल्ली को जलने से रोकने के लिए खुद को इस्लामिक भीड़ का बलि बना दिया। उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स से पता चला था कि पत्थरबाजी के कारण नहीं बल्कि रतन लाल की मौत गोली लगने के कारण हुई थी। 

18. विनोद कुमार– दिल्ली में हुई हिंदूविरोधी हिंसा में मरने वालों में एक नाम 51 वर्षीय विनोद कुमार का है। जिन्हें मुस्लिम आतताइयों ने अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते हुए मौत के घाट उतारा और उनकी लाश भेजकर अन्य लोगों को संदेश दिया कि उन्हें रात भर ऐसी लाशें मिलती रहेंगी।

19. अंकित शर्मा- उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के दौरान IB के अंकित शर्मा की निर्मम तरीके से हत्या हुई थी। उन्हें मारने के दौरान उनपर 400 बार चाकुओं से हमला हुआ था। करीब 6 लोगों ने 2 से 4 घंटे तक उन्हें गोदा था।

20. महाराज कल्पवृक्ष गिरी, सुशील गिरी, निलेश तेलगड़े– महाराष्ट्र के पालघर में मारे गए वो दो साधु और उनका ड्राइवर जिनके कारण आज हिंदुओं की लिंचिंग की घटनाओं पर फिर से लिखने की आवश्यकता पड़ी। जिन्हें एक भीड़ ने पुलिस की उपस्थिति में मार डाला। लेकिन वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों ने चूँ तक न कहा। बल्कि वे सेकुलर लोग इस घटना पर ढाँढस बँधाकर शांत रहने का काम करते दिखे। जो मुस्लिमों को पीड़ित देखकर देश के लोकतंत्र को खतरे में बताने लगते हैं।  

21. नीरज प्रजापति– सीएए के समर्थन में 23 जनवरी को आयोजित रैली में शामिल होने पर लोहरदगा के नीरज प्रजापति को मुस्लिमों की हिंसा का शिकार होना पड़ा था। इस हिंसा में न केवल नीरज ने अपनी जान गवाई थी। बल्कि उनके परिजनों के जीने का सहारा भी खत्म हो गया था। तब ऑपइंडिया ने अभियान चलाकर 32 लाख रुपए इकट्ठा किए थे।

गौरतलब है कि ये सूची यही पर समाप्त नहीं होती। ये उन लोगों की लिस्ट से केवल चंद नाम हैं। जिन्हें पिछले सालों में इस्लामी ताकतों ने अपना निशाना बनाया। इनके अतिरिक्त भी कई नाम हैं और होते रहेंगे। क्योंकि हिंदुओं के ख़िलाफ़ ये अपराध करने वाले जानते हैं कि उन्हें ‘सेकुलर मीडिया’ की आड़ हमेशा मिलती रहेगी। जिसमें अंत में उन्हें निर्दोष साबित कर दिया जाएगा।

दरबारी पत्रकारों से लेकर नेताओं तक: सोनिया से सवाल पूछने पर अर्नब गोस्वामी के खिलाफ खड़ा हुआ गिरोह विशेष

कॉन्ग्रेस नेता ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक-संपादक अर्नब गोस्वामी के पीछे हाथ धो के पड़ गए हैं। उन्होंने महाराष्ट्र स्थित पालघर में साधुओं की भीड़ द्वारा निर्मम हत्या को लेकर सवाल क्या पूछ दिया, कॉन्ग्रेस के दरबारी नेताओं का गैंग उनके पीछे ही पिल पड़ा। उनके ख़िलाफ़ पार्टी ने एफआईआर तक दर्ज कराने का निर्णय लिया। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने तो एक वीडियो क्लिप शेयर कर के पूर्व प्रधानमंत्री द्वय इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की हत्या की बात उठाई। हालाँकि, ऐसा उन्होंने क्या किया, ये समझ से परे है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी माँग की है कि अर्नब गोस्वामी पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने सांसद राजीव चंद्रशेखर से अर्नब को बर्खास्त करने की माँग की। चंद्रशेखर ने उन्हें करारा जवाब देते हुए कहा कि अर्नब को कोई नहीं निकाल सकता, उन्होंने ये सब अपनी मेहनत से ख़ुद पाया है और ‘रिपब्लिक’ के ओनर वही हैं।

लॉकडाउन में खाली बैठे कॉन्ग्रेस समर्थकों ने भी अर्नब गोस्वामी पर निशाना साधने में अपना समय खपाया और कॉन्ग्रेस आलाकमान को ख़ुश करने के लिए तरह-तरह के तिकड़म आजमाते नज़र आए। कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया सेल में कार्यरत गौरव पांडी ने अर्नब गोस्वामी पर पालघर में साधुओं की हत्या को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया। उन्होंने एक वीडियो बना कर उन पर निशाना साधा।

यूथ कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया हैंडल ने अपनी पार्टी की अध्यक्ष को ‘महान’ बताने के लिए उनके एक बयान को आधार बनाया। सोनिया गाँधी ने कहा था कि वो इसी देश में अपनी अंतिम साँस लेगी और यूथ कॉन्ग्रेस ने इस बयान को चलाते हुए अर्नब को आड़े हाथों लिया। पार्टी ने लिखा कि आज कॉन्ग्रेस का नायकत्व, अदम्य साहस, इच्छाशक्ति और त्याग से परिपूर्ण देशभक्त के पास है, जो एक गर्व की बात है।

दरबारी पत्रकारों में भी हलचल ही मच गई। पत्रकार विजेता सिंह ने दावा किया कि ये भारत सरकार के ब्रॉडकास्ट नियमों का खुला उल्लंघन है। साथ ही उन्होंने एमआईबी इंडिया को टैग कर के इस पर जवाब माँगा। साथ ही पूछा कि इस पर क्या कार्रवाई की गई है?

राजदीप सरदेसाई ने भी अर्नब गोस्वामी द्वारा एडिटर्स गिल्ड से लाइव शो के दौरान इस्तीफा दिए जाने की बात करते हुए उन पर निशाना साधा। राजदीप ने बिना नाम लिए कहा कि अर्नब ने पिछले 12 सालों में एडिटर्स गिल्ड की एक भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि जब मीडिया व पत्रकारों पर हमले हो रहे थे, तब भी अर्नब गोस्वामी उनके पक्ष में खड़े नहीं हुए, जो उनकी ‘मीडिया की स्वतंत्रता’ के प्रति ‘प्रतिबद्धता’ को बताता है।

सोनिया गाँधी को लेकर क्या कहा था अर्नब गोस्वामी ने?

अर्नब ने आचार्य प्रमोद कृष्णन से कहा कि अगर किसी पादरी की हत्या होती तो आपकी पार्टी और आपकी पार्टी की ‘रोम से आई हुई, इटली वाली’ सोनिया गाँधी बिलकुल चुप नहीं रहतीं। अर्नब ने दावा किया कि मॉब लिंचिंग पर सोनिया गाँधी आज चुप हैं तो इसका मतलब है कि वो मन ही मन में खुश भी हैं। मॉब लिंचिंग पर सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर अर्नब ने कहा:

“सोनिया गाँधी तो खुश हैं। वो इटली में रिपोर्ट भेजेंगी कि देखो, जहाँ पर मैंने सरकार बनाई है, वहाँ पर हिन्दू संतों को मरवा रही हूँ। वहाँ से उन्हें वाहवाही मिलेगी। लोग कहेंगे कि वाह, सोनिया गाँधी ने अच्छा किया। इनलोगों को शर्म आनी चाहिए। क्या उन्हें लगता है कि हिन्दू चुप रहेंगे? आज प्रमोद कृष्णन को बता दिया जाना चाहिए कि क्या हिन्दू चुप रहेंगे? पूरा भारत भी यही पूछ रहा है। बोलने का समय आ गया है।”

बता दें कि अर्नब गोस्वामी ने हाल ही में एक लाइव शो के दौरान ही एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया से त्यागपत्र दे दिया था। अर्नब ने अपने इस्तीफे के लिए एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के गिरते हुए मूल्यों को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने व्यक्तिगत पूर्वग्रहों के लिए नैतिकता से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि वह काफी लंबे वक्त से एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्य हैं। लेकिन अब यह मात्र कुछ लोगों का समूह है, जिनमें फेक खबरों को फेक कहने का दम नहीं है।

रमजान में पैगंबर मुहम्मद की बात मान कर गरीबों को भोजन कराएँ मुस्लिम: हिमाचल DGP की अपील

हिमाचल प्रदेश के डीजीपी (DGP) एसआर मार्डी ने रमजान को देखते हुए मुस्लिमों को पैगम्बर मुहम्मद की बात याद दिलाई है। पैगम्बर मुहम्मद ने कहा था कि मुस्लिमों को रमजान के दौरान अपनी कुल संपत्ति का 2.5% हिस्सा दान दे देना चाहिए। बता दें कि रमजान अप्रैल 23, 2020 से शुरू हो रहा है, जो एक महीने चलेगा। रमजान के आलोक में हिमाचल डीजीपी ने कहा कि सभी मुस्लिमों को पैगम्बर मुहम्मद की बात मानते हुए ग़रीबों को भोजन कराना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वो सभी मुस्लिमों से निवेदन करते हैं कि वो निर्धन लोगों को खाना खिलाएँ। साथ ही उन्होंने कहा कि मुस्लिम पीएम केयर्स और पीएम रिलीफ फण्ड में भी डोनेट कर सकते हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स का बैंक अकाउंट डिटेल्स सार्वजनिक किया था, ताकि लोग कोरोना संक्रमण आपदा से लड़ाई में वित्तीय सहयोग करें। इसके लिए छोटी राशि से लेकर बड़ी धनराशि तक स्वीकार की जाती है। पीएम की अपील के बाद बड़े सेलेब्रिटीज और कारोबारियों से लेकर आम लोगों तक ने जी भर डोनेशन दिया था

जहाँ तक पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की बात है, यहाँ अब तक कोरोना वायरस के 39 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 21 अभी भी सक्रिय हैं। जहाँ दो लोगों को इस वायरस के संक्रमण के कारण अपनी जान गँवानी पड़ी, 16 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। इनमें से कई जमाती भी हैं। उधर पर्यटन सहित कई उद्योगों के बंद होने के कारण पहाड़ी राज्य की कमाई पर भी मार पड़ी है। राजस्व अर्जन के सारे स्रोत सूखने के कारण राज्य को पिछले एक महीने में 7000 करोड़ रुपए की चपत लगी है। सरकारी राजस्व में करीब 350 करोड़ की गिरावट एक माह के भीतर आ चुकी है।

इससे पहले हिमाचल के डीजीपी ने कहा था कि जो भी किसी व्यक्ति पर थूकने का अपराध करेगा, उस पर ‘हत्या के प्रयास’ के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर दुर्भाग्य से पीड़ित की मौत हो जाती है तो आरोपित पर सीधा हत्या का मुकदमा ही चलाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश में शुरुआत में कोरोना वायरस का एक भी मामला नहीं था लेकिन दिल्ली से जमातियों के वहाँ जाने के बाद कई मामले सामने आए थे। कई जमाती छिप भी गए थे, जिन्हें बाहर निकालने के लिए पुलिस को चेतावनी देनी पड़ी।

निजामुद्दीन मरकज से निकले रोहिंग्या कहाँ? कहीं आपके आस-पास तो नहीं, सरकार की बढ़ी टेंशन

दिल्ली निजामुद्दीन मरकज से निकलकर पूरे देश में फैले जमातियों को अभी तक खोजा नहीं जा सका है, इस बीच आई एक और अहम जानकारी ने दिल्ली सरकार के साथ सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। वह ये कि दिल्ली मरकज में आए रोहिंग्या मरकज से निकलकर कहाँ-कहाँ गए इसकी अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है, इसे लेकर सरकार अब टेंशन में आ गई है।

जानकारी के मुताबिक पिछले माह दिल्ली के तबलीगी मरकज से निकले सैकड़ों रोहिंग्या अब पूरे देश में आफत बनकर घूम रहे हैं। हजारों जमातियों की तरह कहीं यह भी देश के अलग-अलग हिस्सों में तो नहीं घूम रहे। इसे लेकर दिल्ली सरकार के साथ दिल्ली पुलिस भी अब टेंशन में आ गई है, क्योंकि पुलिस को डर है कि अगर इनमें भी कोरोना के संक्रमण पाए गए तो देश में लागू लॉकडाउन की सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।

मामले की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पाया है कि मार्च के दूसरे पखवाड़े में तबलीगी मरकज में विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों रोहिंग्या भी शामिल हुए थे। मरकज में शामिल जमातियों के साथ ये भी तबलीगी मकरज से तो निकले, लेकिन वापस अपने कैंपों में नहीं गए।

वहीं इस आशंका को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने इन गायब रोहिंग्याओं की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है। हालाँकि, अभी तक पुलिस को कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। इसे देखते हुए पुलिस ने उन इलाकों में छापेमारी तेज कर दी है, जहाँ पर ये छिपे हो सकते हैं। खासकर बाहरी दिल्ली और उत्तर पूर्वी दिल्ली के साथ पूर्वी दिल्ली के इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

यही कारण है कि इसे लेकर अब गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को अलर्ट जारी तक दिया है। साथ ही पुलिस ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर राज्यों को आगाह किया है कि वे इसकी गहनता से जाँच करें और पहचान होने पर उन्हें तत्काल स्क्रिनिंग के लिए भेजें। खुफिया इनपुट मिलने और कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण के बीच कुछ दिन पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी यूपी, हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों की सरकारों को रोहिंग्या शरणार्थियों और तबलीगी जमात के बीच लिंक की जाँच के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं दिल्ली से सटे पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की पुलिस ने भी तेजी से रोहिंग्या शरणार्थियों की तलाश तेज कर दी है। मिली जानकारी के मुताबिक, यूपी के तकरीबन 8 जिलों में 369 रोहिंग्या शरणार्थियों के मौजूद होने की सूचना है। गौतमबुद्धनगर, मेरठ, कानपुर, मथुरा, सहारनपुर, फिरोजाबाद, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और अलीगढ़ जिले की पुलिस को डीजीपी मुख्यालय की ओर से निर्देश जारी किया गया था कि वे रोहिंग्या शरणार्थियों के बारे में पुख्ता जानकारी जुटाएँ।

संतों की लिंचिंग: पालघर पर लेफ्टिस्ट-सेक्युलर खामोशी और कुछ अनुत्तरित सवाल

महाराष्ट्र के पालघर में संतों की लिंचिंग हुई। त्र्यम्बकेश्वर दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के महंत कल्पवृक्ष गिरी महाराज (70), उनके साथी महंत सुशील गिरी महाराज (35) और उनके वाहन चालक नीलेश तेलगडे (30) की जघन्य तरीके से हत्या की गई। 16 अप्रैल 2020 को पालघर जिले में स्थित गढ़चिंचले गॉंव में अत्यंत नृशंसता से उनको मौत के घाट उतार दिया गया।

दोनों संत श्री पंच दशनाम अखाड़ा, वाराणसी से संबंधित थे। रात के समय की गई इस घृणास्पद हत्या में लिप्त नरराक्षसों को 17अप्रैल 2020 गिरफ्तार किया गया। घटना के वीडियो 19 अप्रैल को सोशल मीडिया में वायरल हुए और तब जाकर हमें पालघर में संतों की लिंचिंग की इस बर्बरता के बारे में पता चला।

उन वीडियो को देख किसी भी संवेदनशील आदमी का दिल दहल जाएगा। पर, हैरानी की बात है कि आमतौर पर मोमबत्ती-पोस्टर लेकर रास्ते पे हंगामा खड़ा करने वाले तथाकथित उदारवादी, वामपंथी, इस्लामी और जेएनयू गिरोह कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।

जरा सोचिए, पालघर में संतों की लिंचिंग जैसी घटना अगर किसी समुदाय विशेष के या इसी गिरोह के किसी व्यक्ति के साथ घटी होती तो आज कितना हंगामा होता। उस पर भी अगर महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार होती तो उनके रुदन का कोई पारावार नहीं रहता। पर, इस हैवानियत के शिकार भगवा धारण किए साधु थे। तो फिर उनकी अंतरात्मा क्यों ही जागृत हो?

इस घटना की घृणा और निंदा करने वालों के लिए इससे सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों की ओर ध्यान देना भी उतना ही महत्वपूर्ण और आवश्यक है। महाराष्ट्र के पालघर जिले के यह ऐसे कुछ इलाके हैं, जहाँ प्रायः कोंकणा, वारली और ठाकुर जनजाति के लोग रहते हैं। आधुनिक विकास से वंचित इन दूरदराज के गॉंवों में कई वर्षों से क्रिश्चियन मिशनरी और वामपंथियों ने अपना प्रभाव क्षेत्र बनाया हुआ है।

ज्ञात हो कि हाल ही के कुछ वर्षों में वामपंथी और मिशनरी प्रभावित जनजाति प्रदेशों में, जनजाति समुदाय के मतांतरित व्यक्तियों द्वारा अलग धार्मिक संहिता की माँग हो रही है। उन्हें बार-बार यह कह कर उकसाया जाता रहा है कि उनकी पहचान हिन्दुओं से अलग है।

भारत में ब्रिटिश राजकर्ताओं द्वारा विभाजन की राजनीति के चलते जनजातियों के लिए जनगणना में सरना नामक अलग धार्मिक संहिता का प्रावधान 1871-1951 दौरान किया गया था। स्वतंत्रता के बाद 1951 में की गई, जनगणना से उसे हटाया गया। लेकिन, वामपंथी ओर ईसाई षड्यंत्रकारियों ने आदिवासी या मूलनिवासी जैसी संज्ञाएँ जनजातियों के लिए गढ़ कर उनमें अलगाव का भाव उत्पन्न करने के अथक प्रयास किए हैं।

इसी के परिणामस्वरूप जनजातियों में कुछ मतांतरित लोगों ने हिंदू धर्म को द्वेष भावना से देखना शुरू किया। कुछ वर्षों से पालघर जिले के जनजाति समुदाय के कुछ व्यक्तियों में भी इस द्वेष भाव को उत्पन्न किया गया है। ऐसे परिणामों की चिंता ध्यान में रखते हुए क्रिश्चियन मिशनरी गतिविधियों पर नियोगी समिति की रिपोर्ट (1956) ने धर्मान्तरण के कानूनी निषेध की सिफारिश की थी। पर, कुछ दुर्भाग्यवश कारणों के चलते उसे लागू नहीं किया गया।

राष्ट्र और समाज को विखंडित करने वाली अनेक गतिविधियाँ हमारे देश में अनथक चल रही हैं। पर क्या भारत में जनजाति और नागरी समुदाय के बीच वास्तव में भेद रहा है? भारतीय सभ्यता की पहचान हमारे वेदों, पुराणों, रामायण, महाभारत आदि ग्रंथों में वनों में वास करने वालों एवं नागरी समुदाय के बीच सौहार्द एवं सामंजस्य भाव का वर्णन दिखता है।

आचार्य विनोबा भावे ऋग्वेद को जनजातियों का ग्रन्थ मानते थे। भारत की भील, गोंड, माड़िया, प्रधान जैसी अनेक जनजातियों में महादेव- भगवान शिव की पूजा की जाती है। हिन्दुओं जैसे ही जनजाति समुदाय के लोग भी प्रकृति के पूजक हैं।

विश्व के उत्तर और दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड आदि देशों के जैसा नरसंहार का कोई प्रमाण भारतीय परिदृश्य में मौजूद नहीं। आर्य आक्रमण जैसे मनगढ़ंत सिद्धांतों की भी पोल खुल गई है। तो फिर यह विद्वेष कैसा? कौन कर रहा है षड्यंत्र? हमें इस पर विमर्श करना ही होगा।

जहाँ कहीं भी भारत के साधु-संतों ने और समाजसेवी संगठनों ने इस प्रकार के राष्ट्र एवं समाज के प्रति द्रोह का विरोध किया, उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ा। इन्हीं क्रिश्चियन मिशनरी और चरमपंथी साम्यवादी विचारों वाले नक्सली गिरोह ने स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती जी की हत्या 23 अगस्त 2008 को जन्माष्टमी के पवित्र दिन की थी। उनका दोष क्या था?

उन्होंने ओड़िशा के कंधमाल जिले में जनजाति लोगों को बहला-फुसलाकर मतांतरण करने का विरोध किया था। उनमें स्वदेश एवं स्वधर्म की अलख जगाने काम किया था। इसी कारण उन्हें अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी थी।

उसी प्रकार से स्वामी असीमानंद जी को छला गया। उन्होंने गुजरात के डांग जिले में जनजातियों के सामाजिक एवं धार्मिक चेतना के विकास का कार्य किया। उनके कार्य एवं विचारों से प्रेरित होकर अनेक जनजाति बन्धुओं ने हिंदू धर्म में वापस आना पसंद किया। इसी के परिणामस्वरुप उनके खिलाफ षड्यंत्र कर उन पर अनेक आरोप लगाए गए तथा उन्हें अनेक यातनाएँ सहनी पड़ीं। इसी प्रकार महाराष्ट्र के सातारा जिले में सनातन रक्षा दल के सूर्याचार्य कृष्ण्देवनंद गिरी महाराज पर भी हमला हुआ था।

महाराष्ट्र के पालघर जिले की कुछ घटनाओं का थोड़ा सा इतिहास टटोलने पर पता चलता है कि यह षड्यंत्र भीषण स्वरुप धारण किए हुए है। यहाँ पर प्रमुखता से दो घटनाओं का उल्लेख आवश्यक है। आज के पालघर जिले के थेरोंडा गाँव में उस समय के ठाणे, मुंबई, रायगड विभाग के संघ प्रचारक स्वर्गीय दामू अन्ना टोककर जी के नेतृत्व में 1965 में ‘हिंदू सेवा संघ’ की स्थापना की गई। जनजाति समाज में स्थित सामाजिक, शैक्षिक एवं आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के उद्देश्य को लेकर काम की शुरुआत हुई।

दामू अन्ना के सामाजिक एवं संवेदनपूर्ण स्वभाव के कारण जनजाति समाज के लोग उनके साथ जुड़ने लगे। अपनी जमीन खिसकती देखकर वामपंथी और मिशनरी गुंडों ने उनकी हत्या की योजना बनाई। साल 1980 की एक रात उन पर हमला बोल दिया गया। भाग्यवश दामू अन्ना कहीं ओर रुके थे।

सेवा संघ के कार्यकर्त्ता वामनराव सहस्त्रबुद्धे और उनकी धर्मपत्नी को इन गुंडों ने गंभीर रूप से घायल कर दिया। इन वामपंथी और ईसाइयों की कुंठा की दूसरी घटना है, जब उन्होंने माधवराव काणे जी को मारने के इरादे से ‘विश्व हिंदू परिषद वनवासी कल्याण केंद्र’, तलासरी पर हमला किया। 1967 में दामू अन्ना के कहने पर माधवराव जी ने महाराष्ट्र और गुजरात के बॉर्डर पर स्थित पालघर जिले के तलासरी तालुका में केंद्र की शुरुआत की। इस केंद्र के माध्यम से शिक्षा, ग्रामीण विकास, पर्यावरण सुरक्षा, वृक्षारोपण आदि कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

14 अगस्त 1991 की दोपहर के समय उनको मारने के इरादे से 700-800 गुंडों की फौज ने केंद्र पर हमला बोल दिया। माधवरावजी काम के सिलसिले में कल्याण में थे, इसलिए बच गए। पर केंद्र में स्थित महादेव जोशी जी और उनकी धर्मपत्नी वसुधा जोशी जी गंभीर रूप से घायल हुए। चोटें इतनी गहरी थीं कि दोनों ईश्वरीय कृपा से ही बच पाए।

16 अप्रैल, 2020 को दो साधुओं और उनके वाहनचालक की नृशंस और क्रूर हत्या इसी विकृत मानसिकता को दर्शाती है। वाहन चालक नीलेश तेलगडे के साथ कल्पवृक्ष गिरी महाराज और सुशील गिरी महाराज अपने गुरुबंधु की अंत्येष्टि में शामिल होने गुजरात में सिलवासा जा रहे थे। रास्ता भटक गए और कासा पुलिस चौकी में आने वाले गढ़चिंचले गाँव के रास्ते जाने लगे। रास्ते में गाँव वालों की हिंसक भीड़ ने उन्हें रोका और मारने पीटने लगे।

पास ही में स्थित फारेस्ट चौकी में मौजूद गार्ड ने उन्हें अपनी चौकी में आश्रय दिया और पुलिस को फ़ोन किया। गढ़चिंचले गाँव से कासा पुलिस चौकी का अंतर 40 किलोमीटर का है। कम से कम पुलिस को पहुँचने में आधा घंटा तो लगेगा ही और तब तक हिंसक भीड़ ने उनकी हत्या क्यों नहीं की?

पालघर में संतों की लिंचिंग के वीडियो से स्पष्ट पता चलता है कि वे वृद्ध महात्मा पुलिस का हाथ पकड़कर चल रहे हैं और पुलिस उन्हें भीड़ के हवाले करती है। क्या यह सुनियोजित साजिश तो नहीं? क्या भगवा वस्त्रधारी साधुओं को जान से मरने के लिए कोई उकसा तो नहीं रहा था? उन निष्पाप आत्माओं को बचाने के लिए पुलिस ने हवा में गोलीबारी या पैरों पर गोली चलाकर भीड़ को भगाने का प्रयास क्यों नहीं किया? क्यों साधुओं के मृत शरीर को शव परीक्षण के लिए ले जाते समय इतने अपमानित ढंग से ले जाया गया?

हृदय दहला देने वाली उस घटना को देखकर ऐसे कई सवाल खड़े होते हैं। इसलिए हिंदू समुदाय की भावनाओं का विस्फोट होने से पहले इस घटना की उच्च स्तरीय कमेटी द्वारा जाँच होनी चाहिए। जल्द से जल्द और कठोर से कठोर कार्यवाही इस घटना में संलिप्त नरराक्षसों पर होनी चाहिए।

(लेखक विवेकानंद नरताम, श्याम लाल महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक हैं)

बिहार: लॉकडाउन का पालन कराने पहुँची पुलिस टीम पर हमला, दो पुलिसकर्मी घायल, मुस्लिम समुदाय के छह गिरफ्तार

एक तरफ तो पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे कोरोना योद्धाओं का अपने-अपने तरीके से सम्मान कर रहा है। वहीं कुछ लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। इस तरह की तमाम खबरें बिहार से आ रही हैं, जहाँ कुछ लोग स्वास्थ्य कर्मियों के साथ पुलिस टीम को लगातार अपना निशाना बना रहे हैं। इस बार ताजा मामला बिहार के गया जिले से सामने आया है। जहाँ लॉकडाउन का पालन कराने गई पुलिस टीम पर लोगों ने हमला बोल दिया। इसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।

खबर के मुताबिक गया जिले के शेरघाटी नगर सुमाली मोहल्ले में लॉकडाउन के दौरान नियमों का उल्लंघन कर मंगलवार को कुछ दुकानें खुली हुई थीं। इस बात की जानकारी जब पुलिस को हुई तो पुलिस की एक टीम लॉकडाउन के बीच खुली दुकानों को बंद कराने के लिए पहुँच गई। जैसे ही वहाँ खुली चूड़ी की दुकान को पुलिस बंद कराने लगी ऐसे ही स्थानीय लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। हमले में एसआइ ददन प्रसाद व एक अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए।

वहीं पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं समेत छह हमलावरों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद तत्काल पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करते दस नामजद और 10 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। वहीं पुलिस ने गिरफ्तार किए सभी छह आरोपितों को जेल भेज दिया। उधर शेष आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

प्रशिक्षु आइपीएस सह शेरघाटी थानाध्यक्ष सागर कुमार ने बताया कि निर्देश के विरुद्ध चूड़ी की दुकान का शटर आधा खुला था और अंदर कई लोग जमा थे। पुलिस अधिकारी ने जैसे ही टोका और शटर खोलकर अंदर गए तो लोगों ने उनके साथ हाथापाई कर दी। इसकी सूचना मिलने पर दूसरे थानों की पुलिस के साथ महिला पुलिसबल को भी घटनास्थल पर भेजा गया।

पुलिस ने मौके से छह हमलावरों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए लोगों में पीर मोहम्मद, तवाब हुसैन, फिरोज नवाब, दिलनाज, शबाना प्रवीण व तरन्नुम प्रवीण शामिल हैं।

इससे पहले मंगलवार को आरा जिले के नवादा थाना क्षेत्र के जवाहर टोला मुहल्ला में लॉकडाउन की वजह से रास्ता रोके जाने को लेकर दो गुट आमने-सामने आ गए। इतना ही नहीं इस दौरान हथियार बंद एक पक्ष ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें गोली लगने से दो लोग घायल हो गए। आनन-फानन में घायल 35 वर्षीय विनोद पासवान और 40 वर्षीय सुनील पासवान को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए फायरिंग मामले में पिता पूरन मियाँ और पुत्र शमी को गिरफ्तार किया है। साथ ही आरोपितों के घर से पुलिस ने एक एयरगन और एक बंदूक समेत दस गोली बरामद की हैं।

वहीं बिहार से लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों पर बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दिनों कहा था कि जो लोग ऐसा करेंगे उनको जेल में सड़ा देंगे। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों का नाम गुंडा पंजी में भी दर्ज होगा और स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाई जाएगी, लेकिन उनका आदेश बिहार में समुदाय विशेष पर कोई असर नहीं दिखा रहा है।

अर्नब गोस्वामी पर FIR कराएगी कॉन्ग्रेस: साधुओं की मॉब लिंचिंग पर सोनिया गाँधी से पूछे थे तीखे सवाल

कॉन्ग्रेस पार्टी ख़ुद को स्वतंत्र मीडिया और पत्रकारों की हितैषी बताती है। लेकिन अब उसने ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक संपादक अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराने का फ़ैसला लिया है। पार्टी ने उन पर सोनिया गॉंधी को लेकर गलत टिप्पणी का आरोप लगाया है।

पार्टी का आरोप है कि अर्नब गोस्वामी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। छत्तीसगढ़ के रायपुर में अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराया गया है। अब पार्टी आधिकारिक रूप से ख़ुद मामला दर्ज करवाएगी। लोग अब कॉन्ग्रेस से मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर सवाल पूछ रहे हैं।

इससे पहले कॉन्ग्रेस पार्टी मीडिया पर हमले का मुद्दा उठाती रही है। हाल ही में जब जम्मू-कश्मीर में घृणा फैलाने वाले पत्रकारों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई, तब भी कॉन्ग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए मीडिया की आज़ादी का हवाला दिया था।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी माँग की है कि अर्नब गोस्वामी पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने सांसद राजीव चंद्रशेखर से अर्नब को बर्खास्त करने की माँग की। चंद्रशेखर ने उन्हें करारा जवाब देते हुए कहा कि अर्नब को कोई नहीं निकाल सकता, उन्होंने ये सब अपनी मेहनत से ख़ुद पाया है और ‘रिपब्लिक’ के ओनर वही हैं।

पालघर और सोनिया गाँधी पर क्या बोले थे अर्नब?

बता दें कि महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं सहित तीन लोगों की भीड़ ने निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। लेकिन कॉन्ग्रेस चुप रही। राज्य सरकार में वह शिवसेना के साथ सत्ता में साझीदार है। इस मॉब लिंंचिंग पर चुप्पी को लेकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को घेरते हुए ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने तीखे सवाल पूछे थे।

अर्नब ने कहा था कि इस मामले में मीडिया का रवैया काफ़ी पक्षतापूर्ण है। कोरोना वायरस पर तो सभी न्यूज़ चैनल कार्यक्रम कर रहे हैं। लेकिन साधुओं की मॉब लिंचिंग पर सारे के सारे मौन धारण किए हुए हैं। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर भी निशाना साधा था और उनसे सवाल पूछे।

अर्नब ने याद दिलाया कि देश की 80% जनसंख्या सनातन धर्म को मानती है। सनातनी है। वे साधुओं की क्रूरता से की गई हत्या से व्याकुल दिखे थे। अर्नब ने कहा था कि आज भारत में हिन्दू होना और भगवा वस्त्र धारण करना पाप हो गया है। अर्नब ने कहा था कि अगर किसी पादरी की हत्या होती तो कॉन्ग्रेस पार्टी और इसकी ‘रोम से आई हुई, इटली वाली’ सोनिया गाँधी बिलकुल चुप नहीं रहतीं। अर्नब ने दावा किया कि मॉब लिंचिंग पर सोनिया गाँधी आज चुप हैं तो इसका मतलब है कि वो मन ही मन में खुश भी हैं। 

कश्मीर: सोशल मीडिया के जरिए आतंकवाद का महिमामंडन, पत्रकार गौहर गिलानी पर UAPA के तहत मामला दर्ज

पत्रकार गौहर गिलानी के खिलाफ UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है। कश्मीर जोन की साइबर पुलिस ने मंगलवार को उन पर मामला दर्ज किया। सोशल मीडिया के माध्यम से गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पोस्ट और लेखों के आरोप में उन पर मामला दर्ज किया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि गौहर गिलानी सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट के माध्यम से आतंकवाद का महिमामंडन करते हुए गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त थे।

जम्मू और कश्मीर पुलिस ने कहा कि गौहर गिलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर जो पोस्ट लिखी थीं उससे राष्ट्रीय अखंडता, संप्रभुता और भारत की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा हो सकता है। साथ ही यह भी उल्लेख किया कि गिलानी की गैरकानूनी गतिविधियों में कश्मीर घाटी में आतंकवाद का महिमामंडन करना और लोगों के मन में डर पैदा करना शामिल है।

गिलानी के खिलाफ मिली शिकायत

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि गौहर गिलानी के खिलाफ लोगों को डराने-धमकाने की कई शिकायतें भी मिली थी। पुलिस के बयान में कहा गया है कि उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियों और कश्मीर घाटी में आतंकवाद का महिमामंडन करना, देश के प्रति अविश्वास पैदा करना और जनता के मन में भय पैदा करने का आरोप है। इससे शांति और सुरक्षा को नुकसान पहुँच सकता है।

पुलिस ने बताया कि, गौहर गिलानी पर UAPA के तहत साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर जाँच शुरू की गई है।

अन्य कश्मीरी पत्रकारों पर भी UAPA

इससे पहले, जम्मू और कश्मीर पुलिस ने दो अन्य कश्मीरी पत्रकारों मसर्रत ज़हरा और पीरज़ादा आशिक पर सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने और देश विरोधी पोस्ट को आपराधिक इरादे से साझा करने के लिए मामला दर्ज किया था। पुलिस ने ज़हरा के खिलाफ उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर देश विरोधी पोस्ट डालने के लिए गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) लागू किया था। जिसके बाद ज़हरा को पूछताछ के लिए साइबर पुलिस स्टेशन बुलाया गया था।

पीरज़ादा आशिक ने शोपियाँ मुठभेड़ के बारे में कथित तौर पर झूठी खबर प्रकाशित की थी। पुलिस के अनुसार, द हिंदू में आशिक का लेख तथ्यात्मक रूप से गलत था और जिला अधिकारियों से सही जानकारी प्राप्त किए बिना प्रकाशित किया गया था। इसके बाद उस पर भी सोशल मीडिया पर ‘राष्ट्र विरोधी’ सामग्री और ‘फर्जी’ समाचार प्रकाशित करने का मामला दर्ज हुआ है।