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पंचायती राज दिवस पर PM मोदी ने शुरू किए 2 अहम प्रोजेक्ट, कहा-ग्रामीणों ने विश्व को दिया 2 गज का संदेश

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के मौके पर आज यानी 24 अप्रैल को PM नरेंद्र मोदी ने देशभर के सरपंचों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पहले उन्होंने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल व मोबाइल ऐप लॉन्च किया। यह ऐप पंचायती राज मंत्रालय की तरफ से की गई अनोखी पहल है। इसमें ग्राम पंचायतों के फंड और उनके कामकाज की पूरी जानकारी होगी।

पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी शुरू किए। एक तो ई ग्राम स्वराज और दूसरा स्वामित्व योजना। ग्राम स्वराज पोर्टल को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि इससे पारदर्शिता और परियोजना में तेजी आएगी। वहीं, स्वामित्व योजना को लेकर कहा कि ग्रामीणों को इससे एक नहीं अनेक लाभ होंगे। उन्होंने बताया कि इससे संपत्ति को लेकर भ्रम और झगड़े खत्म होंगे। इससे गाँव में विकास योजनाओं की प्लानिंग में मदद मिलेगी। इससे शहरों की तरह गाँवों में भी लोग बैंकों से लोन ले सकेंगे।

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट के बीच ग्रामीणों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने विश्व को 2 गज दूरी का संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “आप सभी ने दुनिया को बहुत सरल शब्दों में मंत्र दिया है- ‘दो गज दूरी’ का, या कहें ‘दो गज देह की दूरी’ का। इस मंत्र के पालन पर गाँवों में बहुत ध्यान दिया जा रहा है। ये आपके ही प्रयास हैं कि आज दुनिया में चर्चा हो रही है कि कोरोना को भारत ने किस तरह जवाब दिया है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कहा कि पंचायती राज व्यवस्था के सभी सदस्य प्रेरणा के स्रोत हैं, क्योंकि उन्होंने संक्रमण को रोकने में बहादुर योद्धाओं की भांति पूरे समर्पण से अपनी भूमिका निभाई है। PM मोदी ने कहा कि इस लड़ाई में सामूहिक एकता भारत की शक्ति है।

देशभर के सरपंचों से बात करने के दौरान उन्होंने कहा, “कोरोना ने हम सभी के काम करने के तरीके को बहुत बदल दिया है। पहले हम किसी कार्यक्रम को आमने-सामने रहकर करते थे। लेकिन आज वही कार्यक्रम वीडियो कॉन्फेंसिंग के माध्यम से करना पड़ रहा है। आज इस कार्यक्रम में जुड़े सभी लोगों का मैं स्वागत करता हूँ।”

उन्होंने कोरोना महामारी के बीच पैदा हुए संकट में भी सभी सरपंचों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने माना कि कोरोना महामारी ने अनेकों मुसीबतें पैदा की हैं। इनकी कल्पना तक नहीं हो सकती। लेकिन इससे भी बड़ी बात ये है कि इस महामारी ने हमें नई शिक्षा और संदेश भी दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर आत्मनिर्भरता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि ये जरूरी है कि गाँव, जिला, राज्य और पूरा देश अपनी-अपनी जरूरतों पर आत्मनिर्भर बनें। अब ये बहुत आवश्यक हो गया है।

उन्होंने पंचायत ब्रॉडबैंड का मुद्दा उठाया और बताया कि 5-6 साल पहले एक दौर वो भी था जब देश की सौ से भी कम पंचायतें ब्रॉडबैंड से जुड़ी थीं। अब सवा लाख से ज्यादा पंचायतों तक ब्रॉडबैंड पहुँच चुका है। इतना ही नहीं, गाँवों में कॉमन सर्विस सेंटरों की संख्या भी तीन लाख को पार कर रही है। सरकार ने भारत में ही मोबाइल बनाने का जो अभियान चलाया है, उसी का परिणाम है कि आज गाँव-गाँव तक कम दामों वाले स्मार्टफोन पहुँच चुके हैं। ये आज जो इतने बड़े स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंस हो रही है, ये सब इसी के कारण संभव हो पाया है।

देश भर के सरपंचों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हुए पीएम मोदी ने किसानों के स्वस्थ रहने का मुद्दा उठाया और कहा कि वे हमारे अन्नदाता हैं, जो निस्वार्थ भाव से देशवासियों का पेट पालते हैं। उनकी वजह से ही इस दौरान देश को अनाज, दूध, दही, फल की कमी नहीं हुई। उन्होंने गलतफहमियों से लोगों को बाहर निकालने की बात की और गावों में सैनिटाइजेशन, क्वारंटाइन सेंटर जल्द से जल्द बनाने पर भी बल दिया।

बता दें, इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अप्रैल को सभी मुख्यमंत्रियों से बात की थी। उनसे लॉकडाउन पर राय-मशविरा लिया था। इसके बाद उन्होंने 14 अप्रैल को देश को संबोधित करते हुए लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाया था।

सुप्रीम कोर्ट से अर्नब गोस्वामी को राहत, तीन सप्ताह तक नहीं होगी कार्रवाई, ले सकते हैं बेल

सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी की गिरफ़्तारी पर 3 सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। इस दौरान वे अग्रिम जमानत भी माँग सकते हैं। अपने खिलाफ विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को लेकर अर्नब ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने और साम्प्रदायिकता फैलाने के आरोप में सौ से अधिक FIR अर्नब के खिलाफ दर्ज कराया गया था ।

कोर्ट में अर्नब गोस्वामी की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और एडवोकेट सिद्धार्थ भटनागर ने पक्ष रखा, तो महाराष्ट्र राज्य की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने। इसके अलावा राजस्थान राज्य के लिए मनीष सिंघवी और छत्तीसगढ़ के लिए विवेक तन्खा ने पक्ष रखा।

अर्नब गोस्वामी ने याचिका दायर करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत भाषण की अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का एक प्रयास किया गया है। इस याचिका पर शुक्रवार (अप्रैल 24, 2020) को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने सुनवाई की।

बता दें कि एक शो के दौरान अर्नब गोस्वामी की टिप्पणी से बौखलाए कॉन्ग्रेसियों ने अर्नब के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में बताई गई कि छत्तीसगढ़ के 27 जिलों में ही 101 FIR दर्ज कराई गई है। इसके अलावा अर्नब गोस्वामी के खिलाफ पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान और झारखंड के अलग-अलग थानों में एक दर्जन से अधिक FIR कॉन्ग्रेस नेताओं के द्वारा दर्ज कराई गईं थी। नागपुर में दंगे भड़काने के आरोप में अर्नब के खिलाफ आईपीसी की धारा 153, 153A, 153B, 295A, 208, 500, 504, 505(2), 506, 120B और 117 में केस दर्ज किया गया।

कॉन्ग्रेसियों ने अर्नब गाेस्वामी पर आराेप लगाया था कि महाराष्ट्र के पालघर जिले में दाे साधुओं समेत तीन की लिचिंग मामले में उन्होंने अपने टीवी चैनल के कार्यक्रम में देश के लोगों को गुमराह किया। धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास भाषा के आधार पर नफरत फैलाने की काेशिश की है।

दो कॉन्ग्रेसियों ने किया था अर्नब पर हमला

गौरतलब है कि 22-23 अप्रैल की रात एडिट कॉल निपटा कर लौटते हुए अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर कॉन्ग्रेस के दो मोटरसाइकिल सवार गुंडों ने हमला किया था। रिपब्लिक टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी ने खुद इस हमले की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी कार के आगे अपनी मोटरसाइकिल खड़ी कर दी और फिर हमला किया।

अर्नब ने कहा कि उनके सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि दोनों हमलावर युवा कॉन्ग्रेस के सदस्य थे और वो उन्हें सबक सिखाने आए थे। रिपब्लिक भारत के ही स्तम्भकार अजित दत्ता (Ajit Datta) ने एक ट्वीट के जरिए दावा किया था कि हमलावरों के पास स्पेशल लॉकडाउन पास थे। इसी लॉकडाउन पास के नाम पर हमलावरों ने बाहर निकलकर अर्नब और उनकी पत्नी पर हमला किया।

क्या है मामला?

दरअसल पिछले दिनों महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं सहित तीन लोगों की भीड़ ने निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। लेकिन कॉन्ग्रेस चुप रही। राज्य सरकार में वह शिवसेना के साथ सत्ता में साझीदार है। इस मॉब लिंंचिंग पर चुप्पी को लेकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को घेरते हुए ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने तीखे सवाल पूछे थे।

अर्नब ने कहा था कि इस मामले में मीडिया का रवैया काफ़ी पक्षतापूर्ण है। कोरोना वायरस पर तो सभी न्यूज़ चैनल कार्यक्रम कर रहे हैं। लेकिन साधुओं की मॉब लिंचिंग पर सारे के सारे मौन धारण किए हुए हैं। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर भी निशाना साधा था और उनसे सवाल पूछे।

क्या कहा था अर्नब गोस्वामी ने?

मॉब लिंचिंग पर सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर अर्नब ने कहा था, “सोनिया गाँधी तो खुश हैं। वो इटली में रिपोर्ट भेजेंगी कि देखो, जहाँ पर मैंने सरकार बनाई है, वहाँ पर हिन्दू संतों को मरवा रही हूँ। वहाँ से उन्हें वाहवाही मिलेगी। लोग कहेंगे कि वाह, सोनिया गाँधी ने अच्छा किया। इनलोगों को शर्म आनी चाहिए। क्या उन्हें लगता है कि हिन्दू चुप रहेंगे? आज प्रमोद कृष्णन को बता दिया जाना चाहिए कि क्या हिन्दू चुप रहेंगे? पूरा भारत भी यही पूछ रहा है। बोलने का समय आ गया है।”

उद्धव सरकार में मंत्री जितेंद्र आव्हाड कोरोना पॉजिटिव, स्टाफ के 14 लोग भी हो चुके हैं संक्रमित

महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित राज्य है। अब राज्य की उद्धव सरकार में मंत्री जितेंद्र आव्हाड कोरोना पॉजीटिव पाए गए हैं। 54 वर्षीय मंत्री को एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इससे प्रदेश की सरकार में इससे हड़कंप मच गया है। इससे पहले मंत्री के 14 स्टाफ संक्रमित पाए गए थे।

ठाणे जिले के कालवा-मुंद्रा से विधायक और NCP नेता जितेंद्र आव्हाड ने जानकारी देते हुए बताया था कि वे एक ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए थे जो बाद में कोरोना पॉजिटिव निकला था। इसके बाद उन्होंने क्वारंटीन में जाने की घोषणा की थी। हालाँकि 13 अप्रैल को ही मंत्री को जाँच में कोरोना निगेटिव पाया गया था, जिसके बाद वह अपने आवास पर ही थे।

इसके एक हफ्ते बाद यानी कि मंगलवार को फिर से एक अस्पताल में जाँच कराई, जिसकी गुरुवार को आई रिपोर्ट में मंत्री को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। हाल ही में आव्हाड के 14 निजी स्टाफ कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इनमें 14 स्टाफ में 5 पुलिस कॉन्स्टेबल थे, जो उनकी सुरक्षा में तैनात हैं, जबकि बाकी 9 लोगों में उनके निजी स्टाफ, घर के नौकर और पार्टी के कार्यकर्ता शामिल थे।

दरअसल आव्हाड एक पुलिस अधिकारी के संपर्क में आए थे, जो बाद में कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इस अधिकारी ने मुंब्रा क्षेत्र में तबलीगी जमात के सदस्यों को पकड़ने के लिए एक अभियान चलाया था। इसके तहत 13 बांग्लादेशी और 8 मलेशियाई नागरिकों को पकड़ा गया था।

इतना ही नहीं पुलिस अधिकारी के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद मुंब्रा पुलिस स्टेशन के 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों को होम क्वारंटाइन किया गया था। इससे पहले मुंबई में केन्द्रीय सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले के बंगले पर तैनात एक कॉन्स्टेबल को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। वहीं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के मालाबार हिल्स पर तैनात दो महिला पुलिसकर्मी को भी कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। इसके बाद वहाँ तैनात 6 पुलिसकर्मियों को क्वारंटाइन कर दिया गया था।

आपको बता दें कि देश में सबसे अधिक कोरोना के मरीज महाराष्ट्र में हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या 283, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 6430 हो गई है। मुंबई में कोरोना के 4205 मामले हो गए हैं, जबकि यहाँ पर अब तक 167 लोगों की मौत हो चुकी है।

एक हिंसा के लिए उकसाती है, दूसरी समर्थन करती है: बहन रंगोली का समर्थन करने पर कंगना रनौत के खिलाफ शिकायत

बहन रंगोली चंदेल का समर्थन करने के कारण अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस से शिकायत वकील अली कासिफ खान देशमुख ने की है। बीते दिनों मुरादाबाद में डॉक्टरों पर हमले को लेकर रोष जताने के बाद ट्विटर ने रंगोली का अकाउंट सस्पेंड कर दिया था। साथ ही उनके खिलाफ सोशल मीडिया में अभियान चलाया गया था।

मुंबई के रहने वाले अली कासिफ ने कहा है कि एक बहन हत्या और हिंसा के लिए उकसाती है। दूसरी उसका समर्थन करती है, जब इसके लिए दुनियाभर में उसकी आलोचना हो रही है और उसका अकॉउंट ट्विटर ने सस्पेंड कर दिया है।

शिकायत में कंगना और उनकी बहन रंगोली पर निजी फायदे के लिए स्टारडम, फैनबेस, पैसे, नाम, पावर का इस्तेमाल कर घृणा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है।

बता दें, पिछले दिनों मुरादाबाद की घटना पर आक्रोश व्यक्त करने के बाद कट्टरपंथियों ने रंगोली का ट्विटर अकॉउंट रिपोर्ट कर कर सस्पेंड करवा दिया था। उन्होंने अपने ट्वीट में उन लोगों पर गुस्सा उतारा था जिन्होंने डॉक्टरों की टीम पर हमला किया।

उन्होंने लिखा था, ““एक जमाती की कोरोना से मौत हो गई, जब पुलिस और डॉक्टर उसके परिवार को चेक करने गए तो उन्होंने उनपर (पुलिस और डॉक्टर) हमला किया और उन्हें मारा। धर्मनिरपेक्ष मीडिया और इन मुल्लाओं को एक पंक्ति में खड़ा कर गोली मार देनी चाहिए। इतिहास में वे हमें नाजी कह सकते हैं, किसे चिंता है, जिदंगी फेक इमेज से ज्यादा जरूरी है।“

कंगना रनौत ने वीडियो में क्या कहा?

इसी ट्वीट के बाद रंगोली चंदेल का अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया था और उनके ख़िलाफ़ एक्शन लेने की माँग हुई थी। मामला बढ़ने पर कंगना रनौत खुद अपनी बहन के सपोर्ट में एक वीडियो के माध्यम से सबके सामने आईं थीं।

उन्होंने वीडियो में कहा था, “मेरी बहन रंगोली ने एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि जो लोग डॉक्टर्स और पुलिस पर हमला कर रहे हैं उनको गोली से मार देना चाहिए। लेकिन, फराह खान अली जो सुजैन खान की बहन हैं, उन्होंने ये झूठा दावा किया कि रंगोली ने मुस्लिम लोगों के लिए यह कहा है। अगर ऐसा कहीं भी साबित होता है तो मैं और रंगोली खुद सामने से आकर माफी माँगेंगे।”

इसके बाद कंगना ने आगे कहा, “क्या वह ये कहना चाहते हैं कि हर मुस्लिम आतंकवादी है। हमारा तो यह मानना नहीं है कि हर मुस्लिम, डॉक्टर्स और पुलिस वालों पर हमला कर रहे हैं। हमने कभी ऐसा नहीं कहा। मैं केंद्र सरकार से अपील करना चाहूँगी कि ये जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैं जो यहांँ का पैसा खाकर हमारी ही कश्ती में छेद कर रहे हैं, ऐसे प्लेटफॉर्म का दाना-पानी बंद कर देना चाहिए। हमें अपने खुद के प्लेटफॉर्म शुरू करने चाहिए।”

गौरतलब है कि इस वीडियो के आने के बाद सेकुलरों ने कंगना पर इल्जाम लगाया था कि उन्हें केंद्र सरकार और आरएसएस से बहुत पैसा मिलता है। इसके अलावा ये भी कहा कि वे हिंदुत्व अतिवाद और इस्लामोफोबिया का झंडा बुलंद करती हैं और चाहती हैं कि भाजपा उन्हें हिमाचल से टिकट दे।

खाड़ी देशों में रहने वाले हिंदुओं के ख़िलाफ़ AMU छात्र फैला रहे प्रोपेगेंडा, सोशल मीडिया बना हथियार

खाड़ी देशों में हिंदुओं को निशाना बनाने के अभियान के पीछे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के कुछ पूर्व व वर्तमान छात्र-छात्राओं के नाम सामने आया है। आरोप है कि ये लोग खाड़ी देशों में रह रहे हिंदुओं के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया में पोस्ट कर अभियान चला रहे हैं।

इन छात्रों पर शिकायत दर्ज कराने के लिए AMU के ही एक पूर्व छात्र निशित शर्मा ने कुछ स्क्रीनशॉट्स प्रमाण के रूप में पेश किए हैं। शर्मा ने दावा किया है कि इन्हीं सबके कारण अरब देशों में गुजर-बसर कर रहे हिंदुओं का कोरोना महामारी के बीच बहिष्कार शुरू हुआ है। वहाँ हिंदुओं को न उचित इलाज मुहैया कराया जा रहा है और न ही उनका कोरोना टेस्ट हो रहा है।

इन स्क्रीनशॉट्स से साफ मालूम होता है कि AMU के छात्र लगातार अनऑफिशियल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी फेसबुक पेज पर अरब देशों में रह रहे हिंदुओं के ख़िलाफ़ साजिश रच रहे थे। वे अपने पोस्टों में हिंदुओं के ख़िलाफ़ नफरत फैलाने का काम कर रहे थे। ये लोग सोशल मीडिया पर ऐसे हिंदुओं को खोज रहे थे जो खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। जैसे निशित ने जो स्क्रीनशॉट सामने रखे हैं उनमें राजीव नाम के व्यक्ति के ख़िलाफ़ अनऑफिशियल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पेज से शिकायत करने की माँग की गई है।

इसके अलावा एक देवासुरम नाम का व्यक्ति जिसने पिछले दिनों एक पोस्ट किया कि वे मुस्लिमों से सामान नाम नहीं लेगा और न ही मुस्लिमों को कंपनी में हायर करेगा। उसे भी कुछ पूर्व छात्रों ने हाइलाइट किया है। 

इसके अतिरिक्त अली सोहराब नामक विवादित पत्रकार भी इस सूची में शामिल है। उसने दुबई में रह रही हिंदू धारा पटेल नाम की महिला की शिकायत की, क्योंकि, वे तबलीगी जमातियों और पाकिस्तानी आतंकी समूह के बारे में मुखर होकर लिख रही थी।

अली सोहराब ने दुबई पुलिस का ध्यान धारा की ओर आकर्षित कराते हुए बोला कि ये महिला सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैला रही है। इससे साम्प्रदायिकता फैल सकती है।

इतना ही नहीं, AMU के पूर्व छात्रों ने अरब देशों में रह रहे हिंदुओं के ख़िलाफ़ अपनी कुँठा व्यक्त करने के लिए अपनी टाइमलाइन पर उन्हें संघी करार दिया है और ये भी कह रखा है कि अरब में अभी सिर्फ़ चार लोग एक्टिव हुए हैं और संघी बाप सावरकर की तरह माफी वीडियो डाल रहे हैं। 

अब इन्हीं सब स्क्रीनशॉट्स आदि को प्रमाण के रूप में पेश करते हुए निशित शर्मा ने इन सबके ख़िलाफ़ उपयुक्त कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा है, “अरब देशों में रह रहे हिंदू भारतीयों पर अत्याचार के पीछे एक संगठित वर्ग है। इसका संचालन पाकिस्तान एवं भारत के विभिन्न स्थानों से सोशल मीडिया के माध्यम से हो रहा है।”

उन्होंने लिखा, AMU के पूर्व एवं वर्तमान छात्र-छात्राएँ सोशल मीडिया पर निरंतर अरब देशों में रह रहे हिंदुओं के विरुद्ध अभियान चला रहे हैं। ये वही अराजक तत्व हैं जो नागरिकता संशोधन कानून विरोधी आंदोलन में हिंसक गतिविधियों में लिप्त रहे थे।

अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखे गए पत्र में दावा किया गया है कि ये सब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को धूमिल करने, हिंदू धर्म के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर द्वेष फैलाने और हिंसा भड़काने की एक सुनियोजित साजिश है। इसमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़े लोग भी लिप्त हैं।

बता दें, खाड़ी देशों में कार्य कर रहे भारतीय मूल के लोगों पर अत्याचार एवं धार्मिक कट्टरपंथी मढ़ना कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान के आतंकी समूहों के प्रोपेगेंडा के कारण वहॉं ये सब कई बार हो चुका है। शिकायतकर्ता ने 2019 के एक वाकए का जिक्र किया है, जब केवल सीएए का समर्थन करने के कारण एक भारतीय डॉक्टर को मुस्लिम विरोधी करार देकर, अस्पताल से निकाल दिया गया था।

‘यह मकान बिकाऊ है’: पटना में लॉकडाउन विवाद में सन्नी गुप्ता की गोली मारकर हत्या, शवयात्रा पर पथराव

बिहार की राजधानी पटना में लॉकडाउन को लेकर हुए विवाद में सोमवार को सन्नी गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुख्य आरोपित चॉंद मोहम्मद अब भी फरार है। इधर, इस घटना से डरे-सहमे सन्नी के पिता ने अपने घर पर ‘यह मकान बिक्री का है’ की तख्ती टॉंग दी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस घटना से सन्नी गुप्ता का पूरा परिवार दहशत में है। डर के कारण वे अपना घर बेच कर कहीं और जाने को मजबूर हैं। गोपाल बैंड के मालिक और सन्नी गुप्ता के पिता गोपाल ने मकान पर तख्ती लगाते हुए उस पर लिखा है कि यह मकान बिक्री का है।

दैनिक जागरण ने गोपाल के हवाले से कहा है, “मैं 28 वर्षों से इस मकान में पूरे परिवार के साथ रह रहा हूँ। इस मकान के साथ कई सारी यादें जुड़ी हुई हैं। लेकिन जिस मोहल्ले में मेरा परिवार ही सुरक्षित नहीं है, वहाँ रहकर क्या करुँगा?”

गोपाल ने बताया कि पुलिस ने परिवार की सुरक्षा के नाम पर 4 लाठीधारी होमगार्ड को तैनात किया है। ऐसे में अगर परिवार पर हमला होता है तो ये लाठीधारी आखिर कैसे उनकी परिवार की सुरक्षा करेंगे।

दैनिक जागरण के पटना संस्करण में प्रकाशित खबर

इस घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है। माहौल को देखते हुए बड़ी संख्या में जिला प्रशासन ने इलाके में पुलिस फोर्स को तैनात कर रखा है। मुख्य आरोपित मोहम्मद चाँद की गिरफ्तारी नहीं होने से नाराज वार्ड नंबर 60 की पार्षद शोभा देवी और पूर्व पार्षद बलराम चौधरी अपने समर्थकों के साथ उपवास पर बैठे हुए हैं। उपवास पर बैठे लोगों की माँग है कि प्रशासन तत्काल मुख्य आरोपित चाँद की गिरफ्तारी करे, पीड़ित परिवार को मुआवजा और सुरक्षा दे और मृतक की पत्नी को नौकरी दे।

सन्नी गुप्ता को बीते सोमवार को उस वक्त गोली मारी गई थी कि जब वह घर की बालकनी में बैठे थे। आरोप है कि सोमवार शाम को स्थानीय युवकों और एनसीसी कैडेट्स के बीच लॉकडाउन का पालन करने को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद स्थानीय युवकों ने कैडेट्स पर पथराव करते हुए फायरिंग की। एक गोली बालकनी में बैठे सन्नी गुप्ता के सिर में जाकर लग गई। उसने देर रात अस्पताल में दम तोड़ दिया।

इसके बाद जब सन्नी की शवयात्रा निकाली गई तो उस पर भी कुछ लोगों ने पथराव किया था। इसके बाद से ही इलाके में तनाव बना हुआ है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने 100 से अधिक पुलिस फोर्स को इलाके में तैनात किया है। वहीं मृतक के भाई ने 6 नामजद सहित 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है।

पुलिस ने पाँच नामजद हसनैन, शाहजहाँ, अबुल नासिर, अंजुम और जैनब हाशमी को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपित मोहम्मद चाँद की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

त्रिपुरा भी कोरोना फ्री: गोवा, मणिपुर के बाद संक्रमण मुक्त होने वाला देश का तीसरा राज्य

गोवा और मणिपुर के बाद अब त्रिपुरा कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्त हो गया है। गुरुवार (अप्रैल 23, 2020) को राज्य के दूसरे और आखिरी मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आई। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।

मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने ट्वीट कर कहा, “माँ त्रिपुरसुंदरी जी के आशीर्वाद से तथा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दिखाए मार्ग से प्रेरित होकर, हमारा अपना त्रिपुरा आज कोरोना मुक्त हो गया है। आशा है कि जल्द ही पूरा भारत और फिर पूरा विश्व इस वैश्विक महामारी से मुक्त होगा।”

इसके बावजूद उन्होंने लोगों से सरकारी गाइडलाइन्स और सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करने की अपील की है। बता दें कि, त्रिपुरा में अब तक सिर्फ दो ही कोरोना मरीज़ मिले थे। दोनों अब संक्रमण से स्वस्थ हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने सभी डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रणी पंक्ति के योद्धाओं और जनता को राज्य को कोरोना मुक्त करने में योगदान के लिए आभार जताया।

त्रिपुरा के दूसरे कोरोना मरीज़ की रिपोर्ट भी नेगेटिव

सीएम देब ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “त्रिपुरा में कोरोना के दूसरे मरीज की टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है। इसके साथ ही हमारा राज्य कोरोना से मुक्त हो गया है। मैं सभी से अनुरोध करता हूँ कि वह सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। घर पर रहिए, सुरक्षित रहिए।”

बता दें कि त्रिपुरा में पहली कोरोना मरीज एक महिला थी जो गोमती जिले के उदयपुर शहर की रहने वाली थी। वह लॉकडाउन से ठीक पहले राज्य में वापस लौटी थी। 6 अप्रैल को उसकी टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई। ठीक होकर 16 अप्रैल को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।

उन्हें बाद में गोमती जिले के क्वारांटाइन केंद्र में शिफ्ट कर दिया गया था। वहीं दूसरा मरीज त्रिपुरा राज्य राइफल्स का एक जवान था जो 16 अप्रैल को उत्तरी त्रिपुरा के डामचेरा में पॉजिटिव पाया गया था। उसे जीबी पंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार को उसकी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है।

ये दो राज्य भी हो चुके हैं कोरोना मुक्त

कोरोना मुक्त होने वाला देश का पहला राज्य गोवा है। दूसरे नंबर पर मणिपुर है। त्रिपुरा तीसरा राज्य है जहाँ कोरोना के एक भी मरीज नहीं हैं। पिछले दिनों गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ऐलान किया था कि राज्य अब कोरोना से मुक्त हो गया है। उन्होंने इसे राज्य को लिए संतुष्टि और राहत की बात बताते हुए सभी डॉक्टरों, मेडिकल और पैरा मेडिकल कर्मचारियों का आभार जताया था। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने ट्वीट कर मणिपुर के कोरोना मुक्त होने की जानकारी दी थी।

अर्नब गोस्वामी पर हमला करने वालों के पास थे ‘लॉकडाउन पास’, खाना बाँटने के नाम पर आए थे बाहर: Republic TV

रिपब्लिक न्यूज़ चैनल के संस्थापक अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) पर हमला करने वालों के पास स्पेशल लॉकडाउन पास थे। यह दावा रिपब्लिक भारत के ही स्तम्भकार अजित दत्ता (Ajit Datta) ने एक ट्वीट के जरिए किया है। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने इसी लॉकडाउन पास के नाम पर बाहर निकलकर अर्नब और उनकी पत्नी पर हमला किया।

रिपब्लिक भारत ने अपने समाचार पोर्टल पर भी इस तरह की सम्भवना व्यक्त की थी। इसमें लिखा गया है कि सूत्रों से पता चला है कि जिन कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने रात में अर्नब गोस्वामी पर हमला किया था, उन्हें कोरोना वायरस के बीच भोजन वितरित करने के लिए ‘लॉकडाउन पास’ दिया गया था। बताया गया है कि ये हमलावर इसी लॉकडाउन पास के माध्यम से भोजन बाँटने के लिए बाहर आए थे।

अर्नब गोस्वामी पर कल देर रात हमला करने वाले यूथ कॉन्ग्रेस के सदस्यों को लेकर चर्चाएँ इस समय सोशल मीडिया पर गर्म हैं। इन दोनों ने कल देर रात अर्नब और उनकी पत्नी पर हमला किया। यह हमला अर्नब के घर से बमुश्किल 500 मीटर की दूरी पर हुआ जब वो और रिपब्लिक टीवी के संपादक सम्यब्रत रे गोस्वामी अपनी टोयोटा कोरोला कार में घर वापस आ रहे थे।

बाद में पकड़े जाने पर हमलावरों ने खुद की पहचान यूथ कॉन्ग्रेस के सदस्यों के रूप में बताई और कहा कि वे उन्हें सबक सिखाने आए थे। हालाँकि, आरोपितों द्वारा खुद इस बात को स्वीकारे जाने के बाद भी वहाँ के डीसीपी इस घटना पर एक्शन लेने से टालमटोल करते रहे और कहते रहे कि ये जाँच का विषय है कि ये दोनों कॉन्ग्रेस के सदस्य हैं भी या नहीं।

गौरतलब है कि कल रात अर्नब पर हमले के तुरंत बाद कॉन्ग्रेस नेता अलका लांबा ने यूथ कॉन्ग्रेस की वाहवाही में पोस्ट किया था। जिसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके पुराने पोस्ट को शेयर करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने ही अर्नब के ख़िलाफ़ यूथ कॉन्ग्रेस को सड़क पर उतरने को उकसाया और अब उनकी जय-जयकार कर रही हैं। बता दें अलका लांबा ने देर रात ट्वीट करके ‘युवा कॉन्ग्रेस जिंदाबाद’ लिखा था।

आज कॉन्ग्रेस हमलावर है, कभी एक बाहुबली ने अर्नब गोस्वामी को कर लिया था ‘अगवा’

रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी की कार पर बुधवार की रात मुंबई में कॉन्ग्रेस के गुंडों ने हमला किया था। पूरी पार्टी उनके पीछे पड़ी है। इसी तरह करीब ढाई दशक पहले उनके पीछे बिहार का एक बाहुबली नेता लग गया था। उस नेता का नाम पप्पू यादव है।

पॉंच बार सांसद रहे पप्पू यादव ने 1996 में अर्नब गोस्वामी को कथित तौर पर ‘अगवा’ कर लिया था। तब वे एक सामान्य पत्रकार हुआ करते थे। बकौल अर्नब वह उनका पहला इलेक्शन कवरेज था।

इस घटना के बारे में कुछ साल पहले अर्नब ने खुद एक कार्यक्रम के दौरान बताया था। उन्होंने कहा था कि इंटरव्यू समाप्त कर जब वे जाने लगे तो उन्हें पप्पू यादव के एक आदमी ने रोक लिया। उनसे कहा कि बिना पप्पू यादव की इजाजत के वे नहीं जा सकते।

अर्नब ने बताया कि उन्होंने जाने की इजाजत मॉंगी तो कहा गया कि वे नहीं जा सकते। उन्होंने अपने कैमरामैन की तरफ देखा और पूछा कि ये क्या हो रहा। उसने उन्हें बताया कि वे अगवा किए जा चुके हैं। यह सुन अर्नब को झटका लगा क्योंकि उन्होंने अगवा किए जाने की कई डरावनी कहानियों के बारे में सुन रखा था।

1996 की उस घटना के बारे में बताते अर्नब गोस्वामी

अर्नब के अनुसार वे करीब डेढ़ दिन तक पप्पू यादव के कब्जे में रहे थे। इस दौरान पप्पू जहॉं भी जाते उन्हें अपने साथ ले जाते। वे छोटी-छोटी सभाएँ करते। उन सभाओं के दौरान पप्पू खुद चारपाई पर बैठते और उन्हें सुनने वाले नीचे।

अगवा किए जाने की उस घटना के बारे में अर्नब गोस्वामी बताते हैं, “पप्पू यादव ने लोगों से कहा ये जो लड़का इधर मेरे साथ है, पता है ये कहाँ का है। आसपास बैठे सभी लोग कहते नहीं पता। पप्पू यादव कहते ये बीबीसी का है। मुझे झटका लगा, क्योंकि मैंने कभी बीबीसी में नौकरी नहीं की। मैं चुप रहा और सभी लोगों चुपचाप मुझे देख रहे थे।”

इसके बाद पप्पू यादव ने कहा, “आपको पता है कि बीबीसी ने क्या बोला है। बीबीसी ने बोला है कि पूर्णिया से इस बार पप्पू यादव जीतेगा।” बकौल अर्नब यह कहने के बाद पप्पू यादव उनकी ओर देखने लगते और वे समझ नहीं पाते थे कि कोई आपके सामने कैसे इस तरह झूठ बोल सकता है।

पप्पू यादव फिलहाल जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष हैं। उनकी पत्नी कॉन्ग्रेस में हैं। पति-पत्नी दोनों को 2019 के लोकसभा चुनाव में हार झेलनी पड़ी थी। ताजा घटना के बाद कॉन्ग्रेस के सुर में सुर मिलाते हुए पप्पू यादव ने ट्वीट कर अर्नब पर हमला किया है।

असल में ताजा विवाद की शुरुआत टीवी शो के दौरान कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को लेकर अर्नब के तीखे सवालों से हुई थी। पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग पर सोनिया की चुप्पी को लेकर उन्होंने सवाल किए थे। इसके बाद कॉन्ग्रेस ने उन पर एफआईआर दर्ज करवाने की बात कही। फिर बुधवार की रात उनकी कार पर यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा हमले की खबर आई। हमले के वक्त वे अपनी पत्नी के साथ घर लौट रहे थे।

JNU नेता उमर खालिद व कई संगठनों से जुड़े उसके सहयोगियों ने मिलकर रची दिल्ली दंगों की साजिश, FIR में कई गंभीर आरोप

दिल्ली पुलिस दिल्ली में गत फरवरी माह में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों की साजिश रचने के आरोप में JNU छात्र उमर खालिद की भूमिका की जाँच में जुटी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, उमर खालिद के एक भड़काऊ भाषण की जाँच की जा रही है। इस मामले में पुलिस जल्द ही उससे पूछताछ कर सकती है। उमर खालिद के खिलाफ इस मामले में 6 मार्च को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पहले ही हिंसा की साजिश का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कर लिया था।

इस FIR के तहत स्पेशल सेल दिल्ली में भड़के हिन्दू-विरोधी दंगों में उमर खालिद की भूमिका की जाँच कर रही है। खालिद के साथ ही दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप में जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी की मीडिया प्रभारी सफूरा जरगर पर UAPA के तहत कार्रवाई की गई है।

FIR में बताया गया है कि उत्तर-पूर्व दिल्ली में गत 23, 24 और 25 फरवरी को जो हिंसा हुई वह पूर्व नियोजित साजिश थी। इस हिंसा को फैलाने की साजिश जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और उसके सहयोगियों, जो अलग-अलग संगठन से जुड़े हैं, ने मिलकर रची थी। इस साजिश के तहत दो अलग-अलग जगहों पर उमर खालिद ने भड़काऊ भाषण दिए थे जिनकी जाँच की जा रही है।

पुलिस ने FIR में दावा किया है कि दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगे पूर्व नियोजित साजिश का परिणाम थे, जो उमर खालिद व उसके दो अन्य सहयोगियों ने रची थी। उमर खालिद पर दर्ज FIR में लगे आरोपों के अनुसार, उमर खालिद और उसके सहयोगियों ने औरतों-बच्चों को सड़कों पर उतारकर हिंसा भड़काने की साजिश रची थी। इसके बाद यमुनापार के मौजपुर, कर्दमपुरी, जफराबाद, चाँदबाग, शिव विहार में और इसके आस-पास के इलाकों में दंगे हुए थे।

उल्लेखनीय है कि मीरान हैदर पीएचडी छात्र है और दिल्ली में राजद की युवा इकाई का अध्यक्ष है, वहीं जरगर जामिया मिल्लिया इस्लामिया से एमफिल कर रही हैं। इन पर हिंसा में हिस्सा लेने के लिए बाहर से अलग-अलग जगहों से भीड़ जुटाने का आरोप है। आरोप है कि इनके द्वारा ही 23 तारीख को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे औरतों-बच्चों को इकट्ठा किया गया ताकि तनाव बढ़े और हिंसा हो। छात्रों पर राष्ट्रद्रोह, हत्या, हत्या का प्रयास, धार्मिक आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी फैलाने और दंगे करने का भी मामला है।

ज्ञात हो कि दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगे डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा की पहली शाम से ही भड़के थे। FIR में बताया गया है कि हथियार, पेट्रोल बम, तेजाब की बोतलें और पत्थर कई घरों में साजिश के तहत इकट्ठे किए गए थे।

गौरतलब है कि दिल्ली में नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर बड़े स्तर पर हिन्दू-विरोधी दंगों को अंजाम दिया गया था। यह सिलसिला शाहीन बाग़ से शुरू हुआ था जो गत दिसम्बर माह से ही अपनी गतिविधियों के कारण चर्चा का विषय बना रहा।