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देश के 80 जिलों में 14 दिन से कोई नया मामला नहीं, लॉकडाउन न होता तो एक लाख पर कर जाता आँकड़ा: स्वास्थ्य मंत्रालय

देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वहीं शुक्रवार को स्‍वास्‍थ्‍य और गृह मंत्रालय ने देश में कोरोना वायरस से निपटने और लॉकडाउन की स्थितियों के समाधान के लिए प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया। इस मौके पर स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के संयुक्‍त सचिव लव अग्रवाल ने लॉकडाउन को सही कदम बताते हुए कहा कि देश के 15 जिलों में 28 दिनों में कोराना वायरस का नया मामला नहीं आया है। वहीं देश के 80 जिले हैं जहाँ पिछले 14 दिनों से कोई मामला नहीं आया है।

संक्रमित मरीजों के मामलों पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में COVID-19 के 1684 पॉजिटिव केस सामने आए हैं, जो कि भारत में कुल 23,077 मामले की पुष्टि करता हैं। वहीं कल से आज तक 491 लोग ठीक हुए हैं, ठीक होने वालों की कुल संख्या 4748 हो गई है, अब हमारा रिकवरी रेट 20.57% है। उन्‍होंने कहा कि हम कोरोना वायरस के कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन (सामुदायिक प्रसार) की जाँच करने के लिए जिला, राज्य स्तरों पर सामुदायिक निगरानी को लागू कर रहे हैं।

फैक्टरियों को दिए गए दिशा-निर्देश

आगे की जानकारी देते हुए गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि 20 अप्रैल से उन क्षेत्रों में कुछ गतिविधियों की अनुमति दी गई है, जो क्षेत्र कंटेंनमेंट या हॉट स्पॉट के दायरे मे नहीं है। लेकिन गलत व्याख्या की वजह से आशंका थी कि फैक्ट्री में कोविड केस मिलने पर फैक्ट्री के CEO को सजा हो सकती है या फैक्ट्री 3 महीने के लिए सील हो सकती है। इसलिए कल गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि 15 अप्रैल को जारी दिशानिर्देशों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

साथ ही आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत 6 इंटर-मिनिस्ट्रियल सेंट्रल टीमों (IMCT) का गठन गृह मंत्रालय द्वारा किया गया था। मगर अब कोरोना वायरस की स्थिति को देखते हुए गृह मंत्रालय ने 4 और IMCT का गठन किया है जो अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद और चेन्नई भेजी जा रहीं हैं।

लॉकडाउन की वजह से संक्रमण दर हुआ कम

वहीं रोग नियंत्रण केंद्र के निदेशक डॉ. सुजीत सिंह ने कोरोना वायरस को लेकर एक राहत की खबर देते हुए कहा कि आज हमारा डबलिंग टाइम 9 दिन तक पहुँच गया है, ये दिखाता है कि जो महामारी तेज गति से फैल रही थी, लॉकडाउन कि वजह हम उसे काफी हद तक रोक लगा पाने मे सफल हैं। COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में निगरानी हमारा प्राथमिक हथियार है। लगभग 9.45 लाख लोग निगरानी प्रणाली पर हैं।

लॉकडाउन को सफल क़दम और आँकड़ो की जानकारी देते हुए नीति आयोग के सदस्य और अधिकार प्राप्त समूह 1 के अध्यक्ष डॉ. वीके पॉल ने कहा कि हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि लॉकडाउन COVID-19 की डबलिंग दर को धीमा करने और जान बचाने में प्रभावी रहा है। लॉकडाउन का निर्णय समय पर था क्योंकि भारत में लगभग 23,000 मामले आज 73,000 हो सकते थे।

वामपंथी रोस्ट रील: गंजा, झबरा, रवीश, राहुल कँवल, राहुल गाँधी | Leftist roast reel by Ajeet Bharti

अब टुटपूंजी चंपुओं की एक और लॉबी सक्रिय हो गई है। इसमें प्रतीक सिन्हा नाम का गंजा है जो फेक न्यूज के नाम पर खुद ही प्रोपेगेंडा खेलते रहता है। इसके पूरे गिरोह का यही काम है। सबके गुर्दे छीले जाएँगे…

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यूपी: रमजान मे मस्जिद में नमाज, पुलिस पर हमला; दिल्ली: चाँदनी चौक लाल कुआँ बाजार में भारी भीड़

कोरोना वायरस की महामारी के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के बीच रमजान का महीना एक बार फिर पुलिस और प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया है। उत्तर प्रदेश के बहराइच की मस्जिदों और दिल्ली चाँदनी चौक के बाजारों में नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी।

नमाजियों ने पुलिस पर किया हमला

उत्तर प्रदेश स्थित बहराइच के बोंडी थाना क्षेत्र में इसकी सूचना पर जब पुलिस दल मौके पर पहुँचा इस दौरान नमाजियों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया। पुलिस ने इस मामले में 31 नमाजियों पर हत्या के प्रयास समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है और 23 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

नमाजियों ने पुलिस पर डंडों से हमला किया और पत्थरबाजी की, जिसमें 2 दरोगा और 6 पुलिसकर्मियों को काफी चोट आई हैं। कुछ हमलावर वहाँ से फरार भी हो गए।

पुलिस को शुक्रवार को जब दिहवाकला स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ने की सूचना मिली तो नमाजियों ने सिपाहियों पर हमला बोल दिया। वहाँ पर किसी तरह से पुलिस ने उपद्रवियों पर काबू पाया और नमाज पढ़ रहे 23 लोगों को हिरासत में लिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार मौलाना सईद, गुल्लऊ, इरफान, सद्दाम, अनवर अली, मो. अतीक, मो. सईद, जाकिर, ताज मोहम्मद, हजरद्दीन, ताहिर, ननकऊ, लुकमान, नफीस, इसारत, जाकिर, बदलू, अलीयार, सद्दीक, सूफियान, लल्लन, जाबिर अली, अली मोहम्मद के खिलाफ लॉकडाउन उल्लंघन व जानलेवा हमले समेत कई अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।

दिल्ली में भी रमजान के दौरान लॉकडाउन की धज्जियाँ

राजधानी दिल्ली में भी शुक्रवार को रमजान की खरीदारी के लिए दिल्ली के चाँदनी चौक इलाके में मुस्लिमों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का जमकर मजाक बनता नजर आया। आशंका जताई जा रही है कि यदि ऐसे ही हालात रहे तो आने वाले वक्त में दिल्ली की स्थिति और बदतर हो जाएगी।

सरकार ने लोगों से घरों में नमाज पढ़ने और कहीं इफ्तार पार्टी आयोजित नहीं करने की अपील की थी। इस दौरान बाजार में मौजूद भीड़ में ना तो दुकानदार और ना ही ग्राहकों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया।

पाक के बाद अब इंडोनेशिया में कोरोना से नहीं डरे मुस्लिम, लॉकडाउन तोड़कर हजारों नमाज के लिए पहुँचे मस्जिद

विश्व कोरोना महामारी की चपेट में है, लेकिन इन दिनों मुस्लिम कट्टरपंथियों की जारी हरकतों से विश्व समुदाय परेशान नजर आ रहा है। भारत-पाकिस्तान के बाद अब खबर इंडोनेशिया से है, जहाँ लॉकडाउन को तोड़कर हजारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मस्जिदों में पहुँच गए। इस दौरान मुँह पर मास्क लगाए नमाजियों ने जमकर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ाईं।

न्यूज 18 हिंदी की खबर के मुताबिक इंडोनेशिया में कोरोना वायरस के चलते जारी लॉकडाउन के बीच कुछ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने सरकार की गाइडलाइन का जमकर उल्लंघन किया। इंडोनेशिया के अचे प्रांत में रमजान के मौके पर सैंकड़ों की तादाद में लोग लॉकडाउन तोड़कर मस्जिद में सामूहिक नमाज़ के लिए पहुँच गए। इस दौरान ज्यादातर नमाजियों के मुँह पर मास्क जरूर दिखाई दिए, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की अनदेखी करते हुए काफी करीब-करीब बेठकर नमाज़ पढ़ी गई। बताया जा रहा है कि ऐसा एक स्थान पर नहीं बल्कि प्रांत में कई स्थानों पर देखा गया।

वहीं इंडोनेशिया से पुतरी सराह नाम के एक नमाज़ी ने BBC से बात करते हुए कहा, “कोरोना वायरस का डर है लेकिन नमाज़ के लिए निकलने में कोरोना से डर नहीं है। इससे बचने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है ख़ुद को साफ़ रखना। हम लगातार हाथ धो रहे हैं और मास्क भी पहन रहे हैं।” हालाँकि, इस दौरान कुछ ऐसे लोग भी नज़र आए जो घरवालों के दबाव में नमाज़ पढ़ने आ गए थे। वाहयुका नाम के एक ऐसे ही शख्स ने बताया, “मुझे साथ में नमाज़ अदा करने में डर लग रहा है इसलिए मैं लाइन से बिल्कुल दूर हूँ।”

बताया जा रहा है कि इंडोनेशिया में इलाके के कई स्थानीय मौलानाओं ने फ़तवा देकर लोगों को ऐसा करने के लिए उकसाया था। अचे में सिया कुअला यूनिवर्सिटी में समाज विज्ञान के प्रोफ़ेसर मारिनी कृस्टिआनी ने बीबीसी से कहा कि यहाँ के लोगों ने सरकार के दिशा-निर्देशों की तुलना में इस्लामिक समूहों और कट्टरपंथी मौलानाओं के फतवे का पालन करना ठीक समझा। बता दें कि अचे इंडोनेशिया का अकेला ऐसा इलाक़ा है जहाँ इस्लामिक शरिया क़ानून का सख्ती से पालन होता है।

इससे पहले इंडोनेशिया ने कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस साल ईद मनाने के लिए लोगों को घर लौटने पर प्रतिबंध लगा दिया है। राष्ट्रपति जोको विडोडो ने मंगलवार को कहा था कि इंडोनेशिया में बड़ी संख्या में लोग रमजान के आखिरी सप्ताह में शहरों से गाँवों में अपने घरों को लौटते हैं, इस साल कोरोना वायरस संक्रमण के चलते इसे प्रतिबंधित किया जा रहा है।

वहीं आपको बता दें कि इससे पहले पाकिस्ताना में भी कट्टरपंथी मौलवियों ने इमरान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि सरकार मस्जिदों में सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने की बंदिशों को आगे बढ़ाने की भूल न करे। पाकिस्‍तान के अखबार द डॉन के मुताबिक, वक्‍फकुल मदरिस अल अरेबिया से जुड़े देश के करीब 50 से अधिक मौलवियों ने सरकार को इसके लिए चेतावनी दी थी। बताया जा रहा है कि ये सभी मौलवी रावलपिंडी और इस्‍लामाबाद से ताल्‍लुक रखते थे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 689, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 8211 हो गई है। पूरे विश्व की बात करें तो कोरोना से मरने वालों की संख्या 192,022, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 2,748,126 हो चुकी है।

अब्दुल्ला मस्जिद में विदेशी जमातियों को छिपाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद सस्पेंड, योगी सरकार सख्त

योगी सरकार के द्वारा लगातार चेतावनी के बाद भी निजामुद्दीन मरकज से जुड़ी जानकारी छिपाने और विदेशियों को शरण देने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय (Allahabad University) के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद (Professor Shahid) को सस्पेंड कर दिया गया है। उन्हें विश्विद्यालय प्रशासन ने विदेशी नागरिकों को छिपाने सहित कई अन्य मामलों में उनकी संलिप्तता और चौतरफा हो रही बदनामी को ध्यान में देखते हुए यह कार्रवाई की है। तत्काल प्रभाव से प्रशासन ने सस्पेंशन ऑर्डर भी जारी कर दिया है।

सस्पेंशन ऑर्डर

गौरतलब है कि प्रोफ़ेसर मोहम्मद शाहिद तबलीगी जमात में शामिल होने दिल्ली स्थित निजामुद्दीन के मरकज़ गए थे। लेकिन, प्रयागराज लौटने के बाद उन्होंने अपनी ट्रैवेल हिस्ट्री छिपाई थी। इंटेलीजेंस के द्वारा यह सूचना जब मिली तब उन्हें 8 अप्रैल की रात को पुलिस ने घर से पकड़कर क्वारंटाइन सेंटर भेजा था। प्रशासन की सख्ती तब और बढ़ गई जब पता चला कि शाहिद ने ही इंडोनेशिया से आए आठ विदेशी समेत नौ जमातियों को प्रयागराज की अब्दुल्ला मस्जिद में छिपकर रहने में मदद की थी। उनकी सिफारिश पर ही इन नौ जमातियों को मस्जिद में जगह मिली थी।

21 अप्रैल को पुलिस ने प्रोफ़ेसर शाहिद समेत 30 लोगों को गिरफ्तार कर लिया जिसमें कुल 19 तबलीगी जमाती हैं। ये सभी जमाती, वही हैं जो निजामुद्दीन से निकल कर प्रयागराज जनपद में आकर छिपे हुए थे। प्रयागराज जनपद से गिरफ्तार किए जमातियों में 7 जमाती इंडोनेशिया और 9 थाईलैंड के हैं। एक जमाती केरल और एक पश्चिम बंगाल का है। शाहगंज थाना क्षेत्र की अब्दुला मस्जिद एवं करैली थाना क्षेत्र के कुछ इलाकों से 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन लोगों ने जमातियों को छिपाया हुआ था।

गौरतलब है कि दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज़ में आयोजित तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) के कार्यक्रम में शामिल होकर लौटने के बाद से वह खुफिया तंत्र की निगाह में थे। मोहम्मद शाहिद के खिलाफ प्रयागराज की शिवकुटी पुलिस ने महामारी ऐक्ट समेत कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है और अब उन्हें 30 अन्य के साथ जेल भेज दिया गया है।

बता दें कि कोरोना संक्रमण का प्रमुख केंद्र बने मरकज से जुड़े लोगों की खोजबीन के दौरान ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इस हाई प्रोफाइल मामले के आने के बाद से सनसनी मच गई। प्रोफ़ेसर मोहम्मद शाहिद समेत 30 जमातियों और उनके मददगारों को अस्थायी जेल में शिफ्ट किया गया था। इनमें 16 विदेशी जमाती भी शामिल हैं। इन सभी लोगों को पुलिस ने सोमवार (अप्रैल 20, 2020) की रात में गिरफ्तार किया था और मंगलवार (अप्रैल 21,2020) को नैनी जेल भेजा गया था।

प्रशासन को पता चलने के बाद से ही इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर मोहम्मद शाहिद नजर रखते हुए इनके बारे में कई जानकारी इकठ्ठा कर रही थी। क्योंकि तबलीगी जमात से लौटने के बाद वह कई दिन यूनिवर्सिटी भी गए थे। उस दौरान दो दिन में उन्होंने तकरीबन साढ़े तीन सौ स्टूडेंट्स की परीक्षा भी ली थी। इसके अलावा वह कई शिक्षकों, कर्मचारियों और बाहरी लोगों से भी मुलाकात की थी। जिसका पता बाद में चला।

गिरफ्तारी के बाद प्रोफेसर शाहिद ने पुलिस को बताया था कि वह इथोपिया के इस्लामी संगठन से भी जुड़े थे। साथ ही बीते वर्ष संगठन की ओर से आयोजित दो सम्मेलनों में भी शिरकत कर चुके थे। अंतिम बार बीते वर्ष दिसंबर में वह सम्मेलन में शिरकत करने इथोपिया की राजधानी अदीस अबाबा गए थे। सम्मेलनों में शिरकत करने के लिए जाने के बारे में विवि प्रशासन से अनुमति के सवाल पर वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके थे वहीं से उन पर शक गहराता गया और अब हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। 

गौरतलब है कि प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद पिछले दस वर्षों में कई देशों की यात्राएँ कर चुके हैं। इन यात्राओं को देखते हुए पुलिस अब पुलिस मजहबी चंदे का विवरण भी खंगाल रही है। इतना ही नहीं इनका पूरा मामला ही मजहबी और संदिग्ध लग रहा है। प्रोफ़ेसर शाहिद, विदेश के कई मुस्लिम संगठनों से भी जुड़े हुए हैं। प्रोफ़ेसर शाहिद थाईलैंड, कतर, हांगकांग, नीदरलैंड, मलेशिया, साउथ अफ्रीका, बांग्लादेश, जापान, कनाडा, इथोपिया, यूक्रेन, लन्दन, दुबई और केन्या जैसे देशों की यात्रा कर चुके हैं।

पुलिस ने बताया कि नीदरलैंड और सऊदी अरब की यात्रा उन्होंने एक से ज्यादा बार की है। पुलिस का कहना है कि इन विदेश यात्राओं को देखते हुए विदेशी चंदे के बारे में भी पता लगाया जा रहा है। प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद किस-किस मजहबी संगठनों के संपर्क में हैं और कितने विदेशी संगठनों ने चन्दा दिया है, इस दिशा में भी जाँच की जा रही है।

बता दें कि इससे पहले योगी सरकार के मंत्री बृजेश पाठक ने कहा था कि जो लोग कोरोना को छुपा रहे हैं और फैला रहे हैं, उन पर अटेम्पट टु मर्डर का केस दर्ज होना चाहिए। इसके अलावा योगी सरकार ने सख्त आदेश देते हुए कहा था कि पुलिस दो दिन में सभी जमातियों को ढूँढे। उन्होंने कहा था कि अगर दो दिन में जमाती नहीं मिले, तो थानेदारों को खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

‘डांग आदिवासियों की घरवापसी से घबराए वेटिकन के ईसाई लीडर्स से लेकर सोनिया गाँधी ने किया था क्षेत्र का दौरा’

महाराष्ट्र के पालघर में हुई संतों की मॉब लिंचिंग और उसके पीछे ईसाई मिशनरी की भूमिका निरंतर संदेह के घेरे में है। इसी प्रकरण में सोनिया गाँधी की चुप्पी की भी चर्चा हुई जो कि एक अलग ही मामला बना हुआ है। आदिवासी बहुल जगहें ईसाई मिशनरियों के निशाने पर एक लंबे अरसे से रही हैं।

इसी के विरोध में हिन्दू संगठन अतीत में भी काफी संख्या में इन आदिवासियों को ‘घरवापसी’ कार्यक्रम के अंतर्गत वापस हिन्दू धर्म में लेकर आए थे। इन्हीं में से एक किस्सा है गुजरात के डांग जिले का जहाँ स्वामी असीमानंद ने करीब 150 आदिवासियों की घरवापसी करवाई थी, जिसके बाद कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने खुद वहाँ का दौरा किया था।

मशहूर स्टैंड अप कॉमेडियन नितिन गुप्ता ‘रिवाल्डो’ ने ट्विटर पर एक ऐसे ही किस्से को शेयर करते हुए बताया है कि ईसाई मिशनरियों द्वारा ‘आटा-चावल’ देकर किए गए आदिवासियों के धर्मांतरण को रोकने के लिए जब स्वामी असीमानंद ने प्रयास किए थे, तब किस तरह से इटली से लेकर कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी तक विचलित हो गए थे।

आतिश तासीर की माँ तवलीन सिंह ने ट्विटर पर महाराष्ट्र में 2 साधुओं और उनके ड्राइवर की मॉब लिंचिंग के मुद्दे को महज ‘आदिवासियों द्वारा चोर समझ लेने की घटना’ साबित करने का प्रयास करते हुए ट्वीट किया –

“तुम वापस मुझ पर जहर थूक रहे हो!! लिंचिंग होती ही है आतंकित करने के लिए। साधुओं को एक आदिवासी भीड़ ने चोर समझकर गलतफहमी में मारा। गृह मंत्री ने इस पर ऐसे जोर देकर बोला है जैसा कि किसी वास्तविक लिंचिंग के बाद भी उन्होंने कभी कोई बयान नहीं दिया था।”

नितिन गुप्ता ने तवलीन सिंह के इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा –

“डांग हमेशा ही मिशनरियों का पसंदीदा जगह रही। 1988 में स्वामी असीमानंद ने 40 हजार आदिवासियों की घरवापसी करवाई। इस घटना ने इतनी हलचल पैदा की कि वेटिकन के ईसाई नेताओं से लेकर सोनिया गाँधी तक ने डांग का दौरा किया। इसके बाद 2007 में स्वामी असीमानंद का नाम समझौता ब्लास्ट में घसीटा गया। और 2019 में NIA कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।”

अगले ट्वीट ने नितिन गुप्ता ने लिखा है-

“आदिवासियों के ईसाई धर्मांतरण में हिन्दू साधू-संत बहुत बड़ी दीवार हैं। पालघर में आरोपितों के नाम आपको वास्तविकता बताने के लिए काफी नहीं हैं। आदिवासी धर्मांतरण के बाद भी अपना नाम नहीं बदलते हैं। इस तरह वो अपने मूल नाम के साथ ही आरक्षण का लाभ भी उठाते रहते हैं।”

“मिशनरी आदिवासियों को धर्मांतरण के बदले खाना और दवाइयाँ उपलब्ध करवाते हैं। इस लिए देशव्यापी लॉकडाउन एक अच्छा मौका है। कुछ दिन पहले ही डॉ. वाल्वी की भी पालघर में पिटाई की गई। अन्य स्रोतों से की जा रही मदद से धर्मांतरण के टारगेट में समस्या आती?”

डॉक्टर विश्वास वाल्मीकि स्थानीय आदिवासियों के बीच एक जाना पहचाना चेहरा हैं, बावजूद इसके उनके साथ राशन बाँटते समय मारपीट की गई।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले की महाराष्ट्र के पालघर में 2 नागा साधुओं की स्थानीय आदिवासियों द्वारा मॉब लिंचिंग की गई। इसमें 2 साधुओं के अलावा उनके एक ड्राइवर को भी जान से मार दिया गया। मुख्यधारा की मीडिया के साथ ही तमाम राजनीतिक दलों के द्वारा भी इसे महज गलतफहमी के कारण की गई हत्या साबित करने का प्रयास किया जा रहा है।

हालाँकि इस मॉब लिंचिंग के मूल में क्या है, यह अभी तक भी सामने नहीं आ पाया है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यह एक बड़ा विषय बनकर उभरा है जिसने ईसाई मिशनरियों द्वारा सदियों से किए जा रहे गुपचुप धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर भी प्रकाश डाला है।

रोहिंग्याओं को देश में घुसने नहीं देंगे: बांग्लादेश ने लिया निर्णय

बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन का कहना है कि शरणार्थियों को आने देने पर संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार समूहों के कहने के बावजूद बांग्लादेश अपने दक्षिण-पूर्वी तट पर समुद्र में फँसे सैकड़ों रोहिंग्याओं को आने-जाने की अनुमति नहीं देगा।

बृहस्पतिवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्री मोमिन (AK Abdul Momen) ने एक न्यूज़ चैनल से कहा, ”हमने निर्णय किया है कि अब अपने यहाँ और रोहिंग्या को आने नहीं देंगे। COVID-19 की स्थिति के मद्देनजर ऐसा किया गया है। जिन क्षेत्रों को हम संरक्षित रखना चाहते हैं, हम वहाँ किसी भी व्यक्ति को स्वीकार नहीं कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि पहले भी उन्होंने रोहिंग्याओं के एक बैच को अनुमति दी, जो कि बंगाल की खाड़ी में पकड़े गए थे। और इसके बाद अब, और भी नाव बांग्लादेश में घुसने के इन्तजार में हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गत बुधवार को बताया कि कॉक्स बाजार जिले के पास बंगाल की खाड़ी में मंगलवार को स्थानीय मछुआरों ने करीब 500 शरणार्थियों को ले जाने वाली नौकाओं को देखा था। इस पर एक क्षेत्र सीमा-पुलिस कमांडर ने कहा था कि जिले के तट की ओर जाने वाले दुपहिया पर नजर रखने के लिए लगातार गश्त लगाई जा रही थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मलेशियाई अधिकारियों द्वारा खदेड़े जाने के बाद बुधवार को मछली पकड़ने वाली दो नावों में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों सहित लगभग 500 रोहिंग्या बंगाल की खाड़ी में दिखे थे। इससे एक हफ्ते पहले ही 15 अप्रैल को एक अन्य नौका में करीब 400 रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश पहुँचे थे। बांग्लादेश सरकार कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंका में इन्हें देश में घुसने की अनुमति देने से कतरा रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों म्‍यामांर से मलेशिया जा रहे 32 रोहिंग्‍याओं की समुद्र में भूख से तड़प-तड़पकर मौत हो गई थी। इनके जहाज को मलेशिया में नहीं घुसने दिया गया इस वजह से ये लोग कई हफ्ते तक समुद्र में भटकते रहे।

बांग्लादेश के विदेश मंत्री मोमेन ने इस बात को स्वीकार किया है कि उनके पास दो नावों के बारे में जानकारी है, लेकिन उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकार की प्राथमिकता उन शरणार्थी शिविर क्षेत्रों की सुरक्षा करना है, जहाँ पर हजारों रोहिंग्या पहले से ही रह रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कॉक्स बाजार भीड़भाड़ वाला इलाका है और यदि एक संक्रमित व्यक्ति भी किसी तरह से यहाँ आ जाता है, तो वह बड़ी हानि पहुँचा सकता है। मोमेन ने कहा, “हमारे पास किसी भी विदेशी लोगों या शरणार्थियों को शरण देने के लिए कोई जगह नहीं है।” इसके बाद भी कॉक्स बाजार में एक रोहिंग्या नेता मोहम्मद शाह आलम ने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश सरकार शरणार्थियों को जिले में उतरने की अनुमति देगी।

ज्ञात हो कि म्‍यामांर रोहिंग्‍याओं को अपना नागरिक नहीं मानता है। 2017 में हिंसक घटनाओं के बाद सेना ने रोहिंग्‍यओं के खिलाफ दमनचक्र चलाया था। हजारों रोहिंग्या म्‍यामांर छोड़कर बांग्लादेश सहित दूसरे देशों की ओर पलायन कर गए।

कर्नाटक: भीड़ जमा करके स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वालों में से 5 कोरोना पॉजिटिव, 119 को जेल

कर्नाटक के पदरायणपुरा इलाके में पिछले हफ्ते स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वाले आरोपितों में से 5 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। ये 5 उन 126 लोगों की सूची में से हैं जिन्हें स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला लेने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। इनके साथ पकड़े गए अन्य 119 को फिलहाल जेल में रखा गया है। लॉकडाउन में ढील के बीच कर्नाटक में कोरोना के 18 नए मामले सामने आए हैं। इस प्रकार राज्य में कोरोना के नए मामले सामने आने के बाद अब मरीजों की संख्या बढ़कर 463 हो गई।

ये नए मरीज गुरुवार शाम से शुक्रवार दोपहर के बीच सामने आए हैं और इनमें एक महिला तथा दो बच्चे शामिल हैं। गौरतलब है कि दोपहर में जारी एक बुलेटिन के अनुसार कुल 463 मामलों में राज्य में हुई 18 मौतें और 150 वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें इलाज के बाद राहत दे दी गई। नए मामलों में 11 लोग तो बेंगलुरु शहर के ही हैं।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते 19 अप्रैल को कर्नाटक में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और बीबीएमपी अधिकारियों की एक टीम पर 100 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने हमला किया था। ये घटना  कोरोना वायरस हॉटस्पॉट पदरायणपुरा इलाके में घटी थी। जिसकी पड़ताल में पुलिस ने पहले 59 लोगों को गिरफ्तार किया था। बाद में अन्य लोग भी पकड़े गए थे। इस मामले में एक फिरोजा नाम की महिला को भी हिरासत में लिया गया था। जिसपर भीड़ को उकसाने का इल्जाम लगा था।

इस पूरी घटना का एक वीडियो सामने भी आया था, जिसमें देखा जा सकता है कि लोग स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिसवालों पर हमला कर रहे हैं। जिसमें से अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग थे। जाँच में मालूम हुआ था कि पदरायणपुरा में हिंसा पूर्व नियोजित थी। 

यहाँ भीड़ ने 4 टीमों में बँट कर इस वारदात को अंजाम दिया। पहली टीम को मुख्य सड़क पर हिंसा करते हुए देखा गया, जबकि दूसरी टीम चेक पोस्ट पर बर्बरता कर रही थी, वहीं तीसरी टीम पुलिसकर्मियों पर पथराव कर रही थी और चौथी टीम सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचा रही थी।

जानकारी के लिए बता दें बंगलुरू में आशा वर्कर और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की ये पहली घटना नहीं थी। इससे पहले बेंगलुरु के सादिक मोहल्ले में कोरोना संक्रमण के लक्षणों के बाबत जाँच पड़ताल करने और नमूने लेने के लिए गई नर्स और आशा कार्यकर्ता पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया गया था था।

पालघर साधु लिंचिंग: साधुओं के साथ मारे गए ड्राइवर के परिजनों की मदद की अपील करते हुए रवीना टंडन ने किया ट्वीट

महाराष्ट्र के पालघर साधु लिंचिंग मामले में दो साधुओं के साथ मारे गए एक ड्राइवर के परिवार की मदद करने के लिए अभिनेत्री रवीना टंडन ने लोगों से मदद के लिए एक औपचारिक अपील करते हुए ट्वीट किया था। इस फण्ड रेजर को मानवाधिकार कार्यकर्ता रितु राठौर ने शुरू किया है। रवीना टंडन ने उसी अपील को आगे बढ़ाते हुए लोगों से मदद के लिए कहा था।

अभिनेत्री रवीना टंडन ने मृतक ड्राइवर नीलेश तेलवाडे की माता, भाई, पत्नी और दोनों बेटियों का एक वीडियो अपलेड करते हुए ट्वीट किया है। ट्वीट में रवीना ने लिखा है, “हम 29 साल के ड्राइवर के लिए, जो हाल ही में हुए पालघर मॉब लिंचिंग में साधुओं के साथ मारे गए, फंड इकट्ठा कर रहे हैं। उनकी दो छोटी लड़कियाँ हैं। कृपया अपने स्तर से मदद करें।”

रवीना टंडन द्वारा पोस्ट की गई वीडियो में सुना जा सकता है कि मृतक का भाई पहले को परिवार से परिचय कराता है और फिर मृतक नीलेश की पत्नी अपनी परिवार की स्थिति से अवगत कराते हुए बताती हैं कि परिवार में वो, माताजी, उनके भाई और दो बेटियाँ हैं, “परिवार में वही एक कमाने वाले थे। अभी तक हम उनके ही सहारे जी रहे थे। आगे का भविष्य कैसा होगा। उनके भरोसे ही हमारा घर चल रहा था। आगे का हम लोग क्या करें हमें कुछ समझ नहीं आ रहा है।” हालाँकि, यह मुहीम एक फण्ड रेज़र की तरह नहीं बल्कि अपने स्तर से मदद की अपील थी।

पालघर साधु लिंचिंग मामला

दरअसल घटना 16 अप्रैल महाराष्ट्र की है। जूना अखाड़ा के 2 महंत कल्पवृक्ष गिरी महाराज (70 वर्ष), महंत सुशील गिरी महाराज (35 वर्ष) अपने ड्राइवर नीलेश तेलगडे (30 वर्ष) के साथ मुंबई से गुजरात अपने गुरु भाई को समाधि देने के लिए जा रहे थे। रास्ते में उन्हें महाराष्ट के पालघर जिले में स्थित दहानु तहसील के गडचिंचले गाँव में पालघर थाने के पुलिसकर्मियों ने पुलिस चौकी के पास रोका।

इस बीच करीब 200 लोगों की भीड़ ने जूना अखाड़े के दो संतों और उनके ड्राइवर की पुलिस के सामने ही बड़ी बेरहमी से पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। इन दो हिन्दू साधुओं और ड्राइवर की लिंचिंग का मामला तीन दिन बाद सामने आया।

घटना के ह्रदयविदारक कई वीडियो जब सामने आए तो लोगों ने सोशल मीडिया पर उद्धव सरकार पर निशाना साधा और घटना की कड़ी निंदा भी की थी। वहीं मॉब लिंचिंग मामले में अभी तक 101 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। इसके बाद घटना से नाराज अखिल भारतीय संत समिति ने मामले की CBI से जाँच कराने की माँग की है। साथ ही समिति ने कहा था कि उन्हें महाराष्ट्र के गृहमंत्री पर भरोसा नहीं है।

नोट: ये स्टोरी अप्रैल 25, 2020 को 9.50 pm पर अपडेट की गई है।

अर्नब पर हमले के बाद सोनिया गाँधी की चाटुकारिता में जुटा यूथ कॉन्ग्रेस, ट्वीट कर कहा- माँ तुझे सलाम

एक टीवी डिबेट में रिपब्लिक भारत के एडिटर अर्नब गोस्वामी ने सोनिया गाँधी को लेकर कुछ तीखे सवाल किए थे। पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की चुप्पी को लेकर उन्होंने बुधवार (22 अप्रैल) को सवाल उठाए थे। इसके बाद यूथ कॉन्ग्रेस अपना ‘मातृ प्रेम’ जाहिर करने में जुट गया।

यूथ कॉन्ग्रेस के दो सदस्यों ने बुधवार देर रात अर्नब की कार पर हमला किया।। शुक्रवार को अपनी चाटुकारिता का प्रदर्शन करते हुए यूथ कॉन्ग्रेस ने ‘माँ तुझे सलाम’ के स्लोगन के साथ सोनिया की तस्वीर ट्वीट की। लेकिन, सोशल मीडिया यूजर्स को यूथ कॉन्ग्रेस की यह चाटुकारिता रास नहीं आई। उन्होंने जमकर खरी खोटी सुनाई।

यूजर्स ने इस दिखावटी प्रेम पर कहा कि इसी कारण वे कॉन्ग्रेस को वोट नहीं देते। इसी कारण से भाजपा लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली है।

एक यूजर ने कॉन्ग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, अच्छा तो ये आधिकारिक हो गया है अब? सोनिया ही भारत हैं और भारत ही सोनिया है?

एक यूजर ने कहा कि ‘माँ तुझे सलाम’ में माँ के समकक्ष भारत माँ को रखा गया था। इसलिए ये कुछ ज्यादा हो गया। क्या ये (सोनिया गाँधी) अब भारत के समकक्ष हैं जो तुमने इन्हें तिरंगे के ऊपर रख दिया है और इन्हें माँ बोल रहे हो? खुशी बस इसकी है कि तिरंगे के केसरी रंग को लाल से रंग से रिप्लेस नहीं किया। वरना अलग देश का ही झंडा बन जाता।

यूजर इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने सुब्रमण्यम स्वामी के वीडियोज ट्वीट करते हुए सोनिया गाँधी को इटैलियन माफिया क्ववीन तक बता दिया। कुछ ने यूथ कॉन्ग्रेस के सदस्यों को कहा कि ये बेवकूफ इसी लायक हैं।

कुछ लोगों ने भारत माता की तस्वीर पोस्ट करते हुए कहा कि ये हमारी माँ हैं। वहीं, एक यूजर ने कहा कि यही कारण है तुम्हारे पतन का, क्योंकि भाजपा के लिए माता सिर्फ़ भारत माता है और तुम्हारे लिए एक व्यक्ति विशेष। इसलिए अब भी सँभल जाओ।

भारत माँ की बराबरी सोनिया गाँधी से करता देख कुछ लोगों ने ये भी कहा कि चमचे अपनी माँ को इज्जत नहीं देंगे, विदेशी ईसाई महिला एंटोनिया उर्फ सोनिया मैडम को देंगे। जिन्होंने देश को आगे में झोंका। अब ये लोग अपनी मम्मी की चमचागिरी कर रहे हैं, इसलिए स्वदेशी अपनाओ, विदेशी भगाओ।

कुछ लोगों ने यूथ कॉन्ग्रेस का मजाक बनाते हुए मीम भी शेयर किए। इसमें उन्होंने बॉलीवुड की माँ, देश की माँ और चमचों की माँ को अलग-अलग दिखाया। इसके अलावा गाँधी परिवार व सोनिया गाँधी के पहले की जिंदगी को लेकर भी कई तस्वीरें पोस्ट की गईं। साथ ही उनके इटैलियन होने के प्रमाण भी दिए गए। लोगों ने कहाँ यही फर्क हैं भाजपा और कॉन्ग्रेस में। उनके लिए सोनिया गाँधी माँ हैं और भाजपा के लिए भारत माता।

गौरतलब है कि सोनिया गाँधी के लिए सोशल मीडिया पर यूथ कॉन्ग्रेस का ये प्यार अर्नब गोस्वामी के जिस डिबेट के बाद देखने को मिला, उसमें रिपब्लिक टीवी के संपादक ने ‘यूथ कॉन्ग्रेस की माँ’ और सोनिया गाँधी से केवल ये सवाल पूछा कि आखिर वो साधुओं की मॉब लिंचिंग पर चुप क्यों हैं? और क्या वे तब भी चुप रहती जब किसी और समुदाय के धर्मगुरुओं की ऐसे हत्या होती? बता दें, उनके इसी सवाल के बाद बुधवार देर रात उनपर यूथ कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने हमला किया। जिसके बाद अर्नब गोस्वामी ने एक वीडियो जारी करके सोनिया गाँधी पर आरोप लगाया कि इसके लिए सोनिया गाँधी जिम्मेदार और वे उनके इन हमलों से डरकर अपनी आवाज नहीं दबाने वाले।