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एक ही थाली में 6-7 लोग खाते थे, सेक्स करना भी सिखाते थे: मरकज में 21 दिन रहे शख्स का खुलासा

तबलीगी जमात का नजामुद्दीन स्थित मरकज यूॅं ही देश में कोरोना वायरस संक्रमण का केंद्र बनकर नहीं उभरा है। वहॉं न केवल सरकार निर्देशों का उल्लंघन कर आयोजन हुए, बल्कि मरकज की दिनचर्या भी कुछ ऐसी थी जिससे संक्रमण फैलना ही था। यहॉं तक कि एक ही थाली में बैठकर 6-7 लोग खाना खाते थे।

यह खुलासा तेलंगाना के एक व्यक्ति ने किया है। वह मरकज में बीते साल नवंबर में 21 दिनों तक ठहरा था। उक्त व्यक्ति ने ‘स्वराज्य’ के स्वाति गोयल शर्मा से बातचीत की। इस दौरान उसने कई चौंकाने वाले दावे किए। यहाँ हम इस व्यक्ति का बदला हुआ नाम ‘जॉनी’ इस्तेमाल करेंगे।

जॉनी शुरू में ईसाई था। धर्मांतरण कर इस्लाम अपना लिया। उसने अपनी प्रेमिका के परिवार को ख़ुश करने के लिए ऐसा किया। एक डॉक्टर ने उसका लिंग-विच्छेद (खतना) किया। उसकी सलाह पर ही जॉनी ने तबलीगी जमात में शामिल होने का फ़ैसला किया। नवंबर में मरकज़ में जाने से पहले वह कई दिनों तक तेलंगाना की विभिन्न मस्जिदों में प्रवास कर चुका था।

उसने बताया कि तबलीगी जमात पूरी दिनचर्या तय करता है। खाने-पीने से लेकर मल-मूत्र त्याग करने तक सब कुछ। यहाँ तक कि सेक्स कैसे करना है, ये भी जमात ही सिखाता था। जॉनी को भी उस ‘ऑर्थोडॉक्स’ संस्था से जुड़ाव हो गया था और वो सब कुछ करता था, जैसे कहा जाए।

हालाँकि, जॉनी को जमातियों के रहन-सहन का तरीका पसंद नहीं आया। उसने कहा कि मरकज़ आज कोरोना वायरस का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गया है, ये आश्चर्यचकित करने वाली बात नहीं है। उसने वहाँ के तौर-तरीकों का जिक्र करते हुए बताया कि ये निश्चित है कि अगर वहाँ एक व्यक्ति को कोई ऐसा संक्रमण हुआ तो फिर बाकियों को भी हो ही जाएगा। जॉनी ने बताया:

“वहाँ 4 लोग एक साथ बैठ जाते हैं और एक ही प्लेट में भोजन करते हैं। रोटी, चावल और करी वगैरह भी एक ही प्लेट में खाते थे। यहाँ तक कि हम चम्मच का भी प्रयोग नहीं किया करते थे और साथ ही खाते थे। कभी-कभी 6-7 लोग भी ऐसा ही करते थे। अंदर बाथरूम बहुत कम हैं और सभी को शेयर करना पड़ता है। हालाँकि, एक समय पर मरकज़ में निश्चित लोग ही रहते हैं। लोग वहाँ आते-जाते रहते हैं। कभी-कभी तो वहाँ हज़ार से भी अधिक लोग एक साथ रह रहे होते हैं। इतनी भीड़ होती है कि आप दिन में कभी भी बाथरूम जाएँ, अंदर कोई न कोई होता है और आपको 5-7 मिनट इन्तजार करना ही करना पड़ेगा।”

जॉनी ने बताया कि मरकज़ के बाथरूम को रोज साफ़ किया जाता था लेकिन टॉयलेट्स से हमेशा दुर्गन्ध आती ही रहती थी। इतनी संख्या में लोग उसका प्रयोग करते थे कि ऐसा हेमशा होता था। दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य विभाग की डायरेक्टर डॉक्टर नूतन मांडेजा ने भी कहा था कि मरकज़ में जिस तरह लोग रहते थे, उसी का पारिणाम है कि आज इतनी संख्या में वहाँ से कोरोना मरीज निकले हैं। उन्होंने कहा था कि वाशरूम और बर्तन साझा करने से ऐसा हुआ।

मरकज़ में स्विमिंग पूल की तरह एक पानी का पूल है, जिसे ‘वुडू’ कहते हैं। ये एक प्रक्रिया है, जिसके तहत समुदाय के लोग नमाज़ पढ़ने से पहले अपने हाथ-पाँव और मुँह को धोते हैं। इसके लिए वहाँ के लोग उसी पानी का प्रयोग करते थे, जिससे वायरस का फैलाव हुआ होगा। जॉनी ने अपने परिवार को नहीं बताया था कि वो दिल्ली में है। वो अभी भी कहता है कि जमात जीवन जीने के सही तौर-तरीके सिखाता है। यहाँ तक कि वहाँ अंदर मोबाइल फोन तक निकालना मना है। बाहर भी सेल्फी वगैरह क्लिक करने पर बाकी लोग ताना देते हैं और उनके मजहब पर सवाल उठाते हैं।

जनवरी में जॉनी को भी सर्दी-बुखार और कफ हो गया था। उसने कोई दवा नहीं ली। वो बताता है कि 20-25 दिन में वो अपने-आप ठीक हो गया। बकौल जॉनी, जमात ने सिखाया है कि डॉक्टरों के पास नहीं जाना चाहिए और अल्लाह में यकीन करना चाहिए। जॉनी कहता है कि वो इन चीजों को पूरी तरह फॉलो नहीं करता, क्योंकि अगर उसकी तबीयत ज्यादा ख़राब हुई तो उसे अस्पताल जाना ही पड़ेगा।

उत्तराखंड की 60 वर्षीय महिला ने दान की उम्रभर की जमा पूँजी, PM-CARES फंड में दिए ₹10 लाख

कोरोना वायरस के कारण पैदा आपदा से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से PM-CARES में योगदान की अपील की थी। देश का लगभग हर वर्ग अपनी क्षमता के अनुसार इसमें योगदान दे रहा है। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इस दौरान एक उदाहरण बनकर सामने आए हैं। ऐसा ही एक नाम उत्तराखंड की देवकी भंडारी का है।

60 साल की देवकी भंडारी ने अपने जीवनभर की कमाई को PM-CARES फंड में दे दी है। देवकी बताती हैं कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के प्रति सेवाभाव से प्रभावित होकर उन्होंने यह निर्णय लिया है।

उत्तराखंड के चमोली जिले के गौचर की निवासी देवकी भंडारी ने 10 लाख रुपए प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करवाकर समाज के सामने कोरोना वायरस की माहमारी के बीच एक बड़ी मिसाल पेश की है।

उन्होंने बताया कि उनके बैंक में एफडी और पेंशन की रकम से कुल 10 लाख रुपए जमा हुए थे। कोरोना संकट को देखते हुए उन्होंने जीवन भर की कमाई इस महामारी से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री केयर फंड में दान दे दी है।

देवकी भंडारी के पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। यह पहला अवसर नहीं है जब साठ वर्षीय देवकी भंडारी ने समाज सेवा में हिस्सा लिया हो। उल्लेखनीय है कि देवकी भंडारी की अपनी कोई संतान नहीं है लेकिन उन्होंने एक गरीब मेधावी छात्र को पढ़ाने में भी मदद की। इस बच्चे का खर्च देवकी देवी खुद वहन करती हैं।

केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपने ट्विटर एकाउंट से यह जानकारी साझा करते हुए लिखा है, “उत्तराखंड केचमोली जिले में स्थित गौचर से हमारी मातृ शक्ति आदरणीया देवकी भंडारी जी ने PM नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर अपने जीवन की सम्पूर्ण संचित जमा पूँजी- 10 लाख रुपए की धन राशि #PMCaresFunds में #coronavirus से लड़ने के लिए देश सेवा में समर्पित की है।”

SBI में 10 लाख रुपए PM-CARES फंड में डालने के बाद देवकी भंडारी जी का सन्देश इस लिंक पर सुन सकते हैं;

डॉक्टरों की नहीं सुनी, कोरोना संक्रमित पिता का निकाला जनाजा: 200 लोग हुए क्वारंटाइन

कुछ समय पहले दुबई से लौटे 70 वर्षीय व्यक्ति एक व्यक्ति की मौत की खबर चेन्नई से आई थी। उन्हें 2 अप्रैल को स्टैन्ली मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया और 2 घंटे बाद मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने इस बीच कोविड-19 की जाँच के लिए उनका सैंपल लिया और शव परिजनों को सौंप दिया। परिवारवालों से डॉक्टरों ने कहा कि मृतक कोरोना संक्रमित हो सकते हैं इसलिए तय दिशा-निर्देशों के तहत ही उनका दाह संस्कार करें।

बावजूद इसके मृतक के परिवार ने लोगों को इकट्ठा कर जनाजा निकाला। डॉक्टरों की सलाह नकारते हुए सभी रिवाज़ पूरे किए। 4 मार्च को जब मृतक की रिपोर्ट आई तो पता चला की वे कोरोना पॉजिटिव थे। इसके बाद उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का इल्जाम लगा दिया। अस्पताल प्रशासन ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि इस संबंध में मृतक के बच्चों को सब अच्छे से समझाया था।

अब इस मामले में पुलिस ने मृतक के दो बेटों पर मामला दर्ज किया है। न्यू इंडियन एक्प्रेस के मुताबिक, कीलाकरई पुलिस ने मृतक के दो बेटों को “सच्चाई दबाने” के लिए हिरासत में लिया है। इन पर महामारी रोग अधिनियम, तमिलनाडु सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल ने शव WHO प्रोटोकॉल के तहत सील बॉडी बैग में सौंपा था। लेकिन मृतक के बेटों ने इसकी अनदेखी करते हुए बैग से शव निकाल स्नान कराया। लोगों को जुटाकर जनाजा निकाला और पूरे रीति-रिवाज के साथ शव को दफनाया।

कीलाकरई गाँव के प्रशासनिक ऑफिसर मरिमुत्थु ने सोमवार को कीलाकरई पुलिस थाने में इन दोनों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया। दोनों भाइयों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार इस प्रकार किया जिससे कोरोना वायरस का संक्रमण फैल सकता था। दोनों के ख़िलाफ़ सच्चाई छिपाई के मामले में केस दर्ज हुआ है। रामनाथपुरम के एसपी वी. वरुण कुमार ने बताया कि मृतक को कोरोना वायरस वाले वार्ड में भर्ती किया गया था और उन्हें कोरोना संदिग्ध बताया गया था।

मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने उनसे जानकारी छिपाई। इसलिए उन्होंने शव को दफनाते हुए कोई एहतियात नहीं बरता। जानकारी के अनुसार, मृतक के शव को उसी दिन एंबुलेंस से ले जाया गया था और अगले दिन करीब 10 बजे उन्हें दफना दिया गया। बताया जा रहा है कि जनाजे में रामनाथपुरम के विधायक और पूर्व मंत्री एम मणिकंदन सहित कई लोग शामिल हुए थे। इसे देखते हुए करीब 200 लोगों को क्वारंटाइन किया गया है। इसकी सूचना राज्य की स्वास्थ्य सचिव बीला राजेश ने मंगलवार को दी।

सारी स्थिति साफ होने के बाद परिजन अब भी दावा कर रहे हैं कि अस्पताल में न तो उन्हें उनके पिता के कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी दी गई और न ही उनका सैंपल लिया गया। इसके अलावा उनका कहना है कि शव भी उन्हें एक हरे कपड़े में मिला। उनके मुताबिक शनिवार को जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो इसकी सूचना उन्हें दी गई। अस्पताल प्रशासन ने परिजनों के सभी इल्जामों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मृतक का शव COVID-19 प्रोटोकॉल के अनुसार लपेटा गया था और चेतावनी के साथ सौंपा गया था कि वे संक्रमित हो सकते हैं।

जारी हुआ राम मंदिर ट्रस्ट का लोगो: दिखी सूर्यवंशी राजा रामचंद्र की छवि, भगवा का भी जलवा

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर अपना लोगो जारी किया है। इसमें भगवान श्रीराम की तस्वीर के पीछे सूर्य बना दिख रहा है, जो उनके सूर्यवंशी राजा होने की पहचान है। साथ ही इसमें हनुमानजी की दो तस्वीरें बनी हुई हैं, जिसमें वो अपने आराध्य श्रीराम को प्रणाम करने की मुद्रा में बैठे हुए हैं। लोगो में पीले और लाल रंग से सूर्य की लपटों को दिखाया गया है। लाल घेरे पर ट्रस्ट का नाम लिखा है और बीच में भगवान श्रीराम की तस्वीर है।

प्रतीक चिह्न की ऊपरी परिधि में ट्रस्ट का नाम लिखा है, जबकि नीचे ‘रामो विग्रहवान धर्म:’ अंकित किया गया है, जिसका अर्थ है- भगवान श्रीराम धर्म के साक्षात् साकार रूप हैं। इस तस्वीर में भगवान अभयदान की मुद्रा में दिख रहे हैं। लोगो में लाल और पीले रंग के अलावा भगवा रंग का भी प्रयोग किया गया है। किसी भी तरह के पत्राचार या अन्य ज़रूरी चीजों के लिए ट्रस्ट अब इसी लोगो का प्रयोग करेगा। आधिकारिक कार्यों में इस लोगो का प्रयोग किया जाएगा।

लेटर हेड सहित अन्य आवश्यक कागज़ातों व दस्तावेजों पर इसी प्रतीक चिह्न को अंकित किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने कोरोना वायरस से संक्रमण से उपजी आपदा के बीच पीएम केयर्स फंड में दान दिया था। ये दान राम मंदिर की तरफ से देश को दिया गया है। अब आप सोच रहे होंगे कि भव्य राम मंदिर का तो अभी निर्माण भी नहीं हुआ है लेकिन इसकी तरफ से पीएम केयर्स फंड में दान कैसे दे दिया, तो आपको बता दें कि ऐसा सच में हुआ है।

विनोद बंसल ने ‘जय श्री राम’ लिखते हुए इस बात की सूचना दी और साथ ही जिलाधिकारी के साथ ट्रस्टियों की तस्वीर भी शेयर की, जिसमें वो चेक सौंपते हुए दिख रहे हैं। साथ ही उन्होंने पीएम केयर्स फंड के अकाउंट डिटेल्स शेयर किए, ताकि अन्य लोग भी डोनेट कर सकें। बता दें कि पीएम केयर्स फंड में एक हफ्ते में 6500 करोड़ रुपए की धनराशि जमा हो गई है। जहाँ तक राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की बात है, इस ट्रस्ट की घोषणा की जानकारी ख़ुद पीएम मोदी ने दी थी। राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद इसका गठन किया गया था।

घर में BJP कैंडिडेट की लाश, बाहर पेड़ से लटके थे पति: दीया जलाने पर TMC ने कही थी निशान बनाने की बात

शकुंतला हलदर को बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों के लिए उम्मीदवार घोषित कर रखा था। लेकिन, 7 अप्रैल को अपने ही घर में वह संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिलीं। उनका शव घर के भीतर बिस्तर पर पड़ा था। उनके पति चंद्र हलदर घर के पिछले हिस्से में आम के पेड़ से लटके मिले। घटना कुलताली के कनकासा गॉंव की है।

हत्या का आरोप सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों पर लग रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि हत्या के बाद टीएमसी के गुंडों ने घर में घुसकर मृतक दंपती के बच्चों को भी धमकाया। इन बच्चों में से एक की उम्र करीब 16 साल तो दूसरे की 11 साल है। बंगाल बीजेपी ने अपने ट्विटर हैंडल से बताया है कि पंचायत चुनावों के लिए बीजेपी उम्मीदवार शकुंतला हलदर और उनके पति चंद्र हलदर की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई है। जब पूरी दुनिया कोरोना से लड़ने में जुटी है पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हत्याओं का सिलसिला जारी है।

इस घटना को 5 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एकजुटता दिखाने के लिए घरों की बत्ती बुझाकर दीया, टॉर्च, मोमबत्ती जलाने की अपील से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि इसको लेकर इलाके के कई परिवारों को टीएमसी के लोगों ने धमकी दी थी। तृणमूल से जुड़े कवि प्रसून भौमिक ने एक फेसबुक पोस्ट में दावा भी किया था कि 5 अप्रैल को रात 9 बजे ऐसे लोगों के घरों के दरवाजे पर निशान लगा कर चिह्नित किया जाएगा, जहाँ लाइट्स ऑफ होंगे। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों के दरवाजे पर चॉक से निशान बनाया जाएगा।

मंगलवार की सुबह स्थानीय लोगों ने चंद्र हलदर का शव पेड़ से लटकते देखा। पड़ोसी उनके घर में गए तो शकुंतला बिस्तर पर मृत पड़ी थी। इसके बाद ग्रामीणों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। दोनों का शव मंगलवार को दिनभर थाने में पड़ा रहा। टीएमसी के गुंडों के दबाव में पुलिस शवों को पोस्टमार्टम के लिए नहीं भेज रही थी। बीजेपी नेताओं के इस पर नाराजगी जताने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए।

शकुंतला और उनके पति ईंट भट्ठे पर काम करते थे। बताया जा रहा है कि बुधवार की सुबह TMC के गुंडे मृतक दंपती के घर पहुॅंचे और उनके बच्चों को धमकी दी। खबर लिखे जाने तक इस मामले में शिकायत दर्ज नहीं किए जाने की सूचना थी।

गौरतलब है कि राजनीतिक हिंसा के लिए बदनाम पश्चिम बंगाल में यह पहली घटना नहीं है जब बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या का आरोप टीएमसी के गुंडों पर लगा है। मार्च में गंगा सागर में बीजेपी के बूथ प्रेसिडेंट देवाशीष मंडल की हत्या कर दी गई थी। फरवरी में सोनारपुर में बीजेपी नेता नारायण विश्वास की निर्मम हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या का आरोप भी टीएमसी पर लगा था। गुंडों ने पहले उन्हें गोली मारी और जब वो जख्मी होकर नीचे गिर गए तो धारदार हथियार से उनकी हत्या कर दी।

इसी साल मार्च में अमित शाह के दौरे के दौरान टीएमसी के गुंडों ने भाजपा के कार्यालय में तोड़-फोड़ करने के बाद आग के हवाले कर दिया था। भाजपा ने उस समय आरोप लगाया था कि इस घटना को तृणमूल कॉन्ग्रेस के उपद्रवियों ने अंजाम दिया है, क्योंकि राज्य में भाजपा की संगठनात्मक शक्ति बढ़ रही है और टीएमसी इससे भयभीत है।

शाह की रैली में जाने की वजह से बीजेपी नेता अर्चना विश्वास के घर पर फायरिंग की गई थी। कोलकाता के शहीद मीनार मैदान में हुई इस रैली से भाजपा कार्यकताओं पर हमले हुए थे। भाजपा ने आरोप लगाया था कि महानगर के हेस्टिंग्स व हुगली जिले में शाह की सभा से लौट रहे कार्यकर्ताओं पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया। उनका कहना था कि इन घटनाओं में दर्जन भर कार्यकर्ता जख्मी हुए। इससे पहले टीएमसी के गुंडों ने जलपाईगुड़ी जिले में सात भाजपा समर्थकों के घरों में तोड़-फोड़ के बाद आग लगा दी थी।

देश में ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ की कोई कमी न आज है, न कल होगी: स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया- पिछले 1 दिन में कोरोना के 773 मामले

कोरोना वायरस को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार (अप्रैल 8, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कई जानकारियाँ व सूचनाएँ साझा की। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि भारत में अभी तक 402 लोग ठीक होकर अस्पतालों से डिस्चार्ज हो चुके हैं। फ़िलहाल देश में 5194 कंफर्म कोरोना पॉजिटिव केस अब तक रिपोर्ट हुए हैं। पिछले एक दिन में 773 कोरोना पॉजिटिव केस मिले हैं, जो कि बड़ी उछाल है। अब तक कोरोना की वजह से 149 लोगों की मौत हुई है। मंगलवार को ही अकेले 32 लोगों की मौत हुई थी

मंत्रालय ने बताया कि सरकार कोरोना वायरस से उपजे ख़तरों को देशव्यापी स्तर पर मॉनीटर करना चाहती है। इसी के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कोविड-19 मैनेजमेंट के लिए एक ट्रेनिंग मॉड्यूल लॉन्च किया है, जिसका नाम है ‘इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग पोर्टल’। स्वास्थ्य सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि ये पोर्टल दीक्षा प्लेटफॉर्म से संबंधित है। इस प्लेटफॉर्म के द्वारा डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिक्स और साथ ही राज्यों के अधिकारी गण, सिविल डिफेंस अधिकारी, एनसीसी, एनएसएस और रेड क्रॉस सोसाइटी के स्वयंसेवकों को और फ्रंटलाइन वर्कर्स को जरूरी संसाधन उपलब्ध करवाए जाएँगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अप्रैल को सभी मुख्यमंत्रियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस करेंगे, जिसमें विचार किया जाएगा कि लॉकडाउन बढ़ाई जाए या नहीं। आगे की रणनीति क्या होगी, इस सम्बन्ध में पीएम मोदी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से विचार-विमर्श करने के बाद तय करेंगे। प्रधानमंत्री ने आज सांसदों के साथ भी बातचीत की, जिसमें उन्होंने कहा कि देश में स्थिति ‘सामाजिक आपातकाल’ के समान है इसके लिए कड़े फैसलों की जरूरत है। पीएम मोदी ने सलाह दी कि हमें सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि राज्यों, जिला प्रशासन और विशेषज्ञों ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है।

भारतीय चिकित्सा अनुसन्धान परिषद ने बताया कि अभी तक उसने कुल 1,21,271 टेस्ट किए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आश्वस्त किया कि देश में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की कोई कमी नहीं होगी। मंत्रालय ने कहा कि न कोई कमी है और न ही भविष्य में ऐसा होने की कोई संभावना है। वहीं यूपी के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने बताया कि आगरा में कोरोना वायरस के सर्वाधिक 22 हॉटस्पॉट हैं, जिसके बाद गाजियाबाद (13), गौतम बुद्ध नगर (12) और कानपुर (12) का नंबर आता है।

14 अप्रैल के बाद भी एक साथ नहीं हटेगा लॉकडाउन: PM मोदी ने सर्वदलीय बैठक में दिए संकेत

कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू किए लॉकडाउन की अवधि पर विचार करने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (अप्रैल 8, 2020) को विपक्ष के नेताओं व राज्यों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इस कॉन्फ्रेंसिंग में उन्होंने देश में व्याप्त हालातों पर विपक्षी नेताओं से चर्चा की। साथ ही इस बात के संकेत दिए कि लॉकडाउन 14 अप्रैल के बाद भी बढ़ सकता है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस के बढ़ते केसों को देखते हुए उनके विचार से यह संभव नहीं है कि लॉकडाउन को 14 अप्रैल को खत्म कर दिया जाए। पीएम मोदी ने कहा कि वह मुख्यमंत्रियों से इस विषय में बात करेंगे लेकिन उन्हें यह मुश्किल लग रहा है कि लॉकडाउन को जल्द ही खत्म किया जा सके।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि कोरोना वायरस से पहले और उसके बाद का जीवन बिल्कुल भी एक सा नहीं रहेगा। पीएम मोदी ने राजनेताओं से कहा कि कोरोना वायरस के खत्म होने के बाद कई व्यावहारिक, सामाजिक और व्यक्तिगत बदलाव होंगे।

प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में कहा कि देश में अभी सामाजिक आपातकाल जैसी स्थिति है और ऐसे में मुश्किल फैसले लेने जरूरी हैं। हमें सतर्क रहना होगा। राज्यों, जिला प्रशासन और विशेषज्ञों ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन बढ़ाने की सलाह दी है।

बैठक में शामिल हुए ओडिशा के सांसद व बीजू जनता दल के नेता पिनाकी मिश्रा ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि 14 अप्रैल को लॉकडाउन एक बार में नहीं खोला जाएगा। पिनाकी मिश्रा के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को सदन में विपक्षी पार्टी के नेताओं व अन्य पार्टियों से संसद में कहा कि 14 अप्रैल को देशभर में एक दम से लॉकडाउन नहीं खुलने जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि ये बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार लॉकडाउन को बढ़ाने को लेकर मंथन करने में जुटी है। इसके अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूदा स्थिति को देखते हुए लॉकडाउन बढ़ाने की सलाह दे चुके हैं। ताजा जानकारी के अनुसार 5 राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना और केरल के मुख्यमंत्री भी लॉकडाउन को बढ़ाए जाने के पक्ष में हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आज इस बैठक में कॉन्ग्रेस के गुलाम नबी आजाद, तृणमूल कॉन्ग्रेस के सुदीप बंधोपध्याय, शिवसेना के संजय राउत, बीजद के पिनाकी मिश्रा, राकांपा के शरद पवार, सपा के रामगोपाल यादव, शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, वाईएसआरसीपी के विजय साई रेड्‌डी, मिथुन रेड्‌डी और जदयू के राजीव रंजन समेत कई सांसद शामिल हुए थे। बता दें यह पहली बार है जब मोदी ने विपक्षी सांसदों के साथ कोरोना पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इससे पहले वे सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, क्रिकेटर्स, फिल्मी सितारों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर चुके हैं।

15 अप्रैल की सुबह तक सील रहेंगे UP के 15 जिले, घरों तक पहुँचाई जाएगी ज़रूरी सामग्रियाँ

उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के लगातार बढ़ रहे मामलों के कारण योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। राज्य के उन 15 जिलों को सील करने का फैसला किया है जहाँ संक्रमण का ख़तरा ज्यादा बढ़ गया है। ये जिले राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण का हॉटस्पॉट माने जा रहे हैं। यह आदेश बुधवार (अप्रैल 8, 2020) की रात 12 बजे से लागू हो जाएगा और 15 अप्रैल की सुबह तक जारी रहेगा। सील करने का अर्थ है कि ये जिले ‘कम्प्लीट शटडाउन’ में रहेंगे और किसी को भी बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी

जिन जिलों को सील किया जा रहा, वे हैं- वाराणसी, लखनऊ, महराजगंज, बस्ती, बुलंदशहर, नोएडा, गाज़ियाबाद, शामली, कानपुर, सीतापुर, मेरठ, सहारनपुर, आगरा, फ़िरोज़ाबाद और बरेली। आगरा में आज ही कोरोना वायरस से पहली मौत होने की ख़बर है। इसके अलावा एक माँ-बेटी भी संक्रमित पाई गई है। राज्य में कोरोना के मामले बढ़ कर 332 तक पहुँच गए हैं। इनमें से 3 लोगों की मौत हो चुकी है और 21 लोग ठीक हुए हैं। ऐसे में सरकार सभी एहतियाती क़दम उठा रही है।

राज्य के मुख्य गृह सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि इन जिलों में अन्य इलाकों से ज्यादा सख्ती रखी जाएगी। जिलों को सील करने के बाद किस प्रकार की रणनीति अपनाई जाएगी, इसका खाका वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की बैठक में तैयार किया जाएगा। जहाँ कोरोना के मरीज मिले हैं, वहाँ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, ऐसा गृह सचिव ने बताया। आगरा का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों को सील कर ‘कम्प्लीट लॉकडाउन’ किया गया, वहाँ कोरोना के संक्रमण को रोकने में सफलता मिली। यही फॉर्मूला अब इन 15 राज्यों में आजमाया जाएगा।

इस दौरान सभी ज़रूरी सामान लोगों के घरों तक पहुँचाए जाएँगे, ताकि उन्हें किसी भी चीज की ख़रीददारी के लिए बाहर न निकलना पड़े। ज़रूरी सामग्रियों की ‘होम डिलीवरी’ की व्यवस्था की गई है। यहाँ तक कि अभी तक जो कर्फ्यू पास जारी किए गए हैं, उन सभी की समीक्षा की जाएगी। शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यूपी सरकार बताएगी कि शटडाउन के अंतर्गत कैसे काम होगा। बाकी डिटेल्स भी तभी दिए जाएँगे।

क्या 14 अप्रैल के बाद बढ़ेगा लॉकडाउन और जून तक बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज-धार्मिक स्थान?

24 मार्च से लागू हुए 21 दिन के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को आज 15 दिन बीत चुके हैं। अब जैसे-जैसे 14 अप्रैल नजदीक आ रहा है। सबके मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोरोना के बढ़ते कहर के बावजूद ये लॉकडाउन आने वाले 7 दिन में समाप्त हो जाएगा और लोग सड़कों पर खुलेआम संक्रमण के खतरे में घूमेंगे या फिर राज्य सरकारें इस स्थिति को काबू करने के लिए लॉकडाउन को आगे बढ़ाएगी?

मौजूदा जानकारी के अनुसार, भारत में इस समय कोरोना से प्रभावित केसों की संख्या 5 हजार के पार चली गई है और लगातार लॉकडाउन को आगे बढ़ाने की माँग की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के मुख्यमंत्रियों से कहा भी है कि वे इसपर विचार करें। जिसके बाद कई राज्य के मुख्यमंत्रियों ने इसे बढ़ाने पर बात की है और इसके खुलने पर अपनी चिंता जाहिर की है। साथ ही राज्यों ने कई सुझाव भी दिए हैं।

PM मोदी ने क्या कहा?

आज विपक्षी नेताओं के साथ हुई सर्वदलीय बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि यह मुश्किल प्रतीत हो रहा है कि लॉकडाउन को जल्द ही खत्म किया जा सके। उन्होंने कहा कोरोना वायरस से पहले और उसके बाद का जीवन बिल्कुल भी एक सा नहीं रहेगा। कई सामाजिक, व्यवहारिक, व्यक्तिगत बदलाव होंगे।

बता दें, कोरोना के बढ़ते मामलों को देखकर विचार किया जा रहा है कि आने वाले समय में लॉकडाउन की समयावधि बढ़ाई जाएगी या नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों और लेफ्टिनेंट गवर्नर से बातचीत करके अपना फैसला लेंगे।

याद दिला दें, पीएम मोदी ने पिछली बैठक में लॉकडाउन हटाने को लेकर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सुझाव माँगे थे, जिससे कि गरीब और प्रवासी श्रमिकों की परेशानी खत्म हो सके। न्यूज 18 की खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि सचिवों के साथ ही नीति आयोग के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि 15 अप्रैल के बाद भी पूर्ण रूप से लॉकडाउन के चलते अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान होगा। इसलिए वे उन क्षेत्रों में प्रतिबंध खत्म करने के पक्ष में हैं जो ‘रेड जोन’ नहीं है।

लॉकडाउन आगे बढ़ाने की राज्यों ने दी सलाह

उल्लेखनीय है कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच लॉकडाउन की अवधि 14 अप्रैल की रात खत्म हो जाएगी। जिसे लेकर कई राज्य चिंता में हैं। जैसे महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली समेत कई प्रदेशों में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी है। इसी कारण वे तो किसी भी हाल में अपने राज्यों से लॉकडाउन खोलने के बारे में सोच भी नहीं सकते। इसलिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि लॉकडाउन को और दो हफ्तों के लिए बढ़ा दिया जाए। क्योंकि अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को सुधारा जा सकता है, लेकिन लोगों की जान ज्यादा जरूरी है।

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री ने बयान दिया कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की माँग करेगी। लोगों का घरों में रहना ही कोरोना वायरस को फैलने से बचा सकता है। बता दें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ओर से भी इसी तरह की अपील की गई।

बिना अपवाद जून तक बंद होंगे स्कूल-कॉलेज और धार्मिक स्थल?

इंडिया टुडे के मुताबिक लॉकडाउन को लेकर आई अपीलों में सभी प्रकार की धार्मिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने को कहा जा रहा है। राज्यों का कहना है कि प्रतिबंध सभी धर्मों के लिए लागू हो और इसमें कोई छूट नहीं होनी चाहिए।

राज्यों का यह भी कहना है कि स्कूल और कॉलेज बिना किसी अपवाद के जून तक बंद रखने होंगे। साथ ही सरकारी क्षेत्र में सभी स्थानांतरण और पोस्टिंग को छह महीने के लिए टालनी होगी, क्योंकि, अगर ऐसा हुआ तो बड़े पैमाने पर भीड़ शामिल होगी।

उनका कहना है कि स्थिति में सुधार होने तक होटल, रेस्टोरेंट और बार पूरी तरह से लॉकडाउन के तहत बंद होंगे। जब तक स्थिति में सुधार नहीं होता तब तक शादियों, अंतिम संस्कारों, कॉर्पोरेट टाउन हॉल बैठक जैसे सार्वजनिक कार्यों को लॉकडाउन के तहत बंद रहना चाहिए।

कोरोना योद्धा: सेवा भारती के 2.10 लाख स्वयंसेवक: लॉकडाउन में रेड लाइट एरिया से बर्मा सीमा तक बने मददगार

पूरे देश में इस आपदा की स्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूरी तत्परता से जनसेवा में लगा हुआ है। संघ से ही सम्बद्ध संगठन ‘सेवा भारती’ ने ही अकेले इतना काम किया है और कर रही है, जिससे कई लोगों को भोजन-पानी-घर से लेकर दवाएँ तक मिली हैं। ‘सेवा भारती’ का मुख्यालय दिल्ली में है, जहाँ से पूरे देश में हो रहे राहत कार्य की मॉनिटरिंग की जाती है। केरल में इसके सबसे ज्यादा स्वयंसेवक लगे हुए हैं। वहाँ ‘सेवा भारती’ के क़रीब 1 लाख स्वयंसेवक जनसेवा में लगे हुए हैं। बता दें कि केरल वही राज्य है जहाँ वामपंथियों की सरकार चल रही और संघ से जुड़े लोगों पर अक्सर हमले होते रहते हैं।

‘सेवा भारती’ के अखिल भारतीय महामंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि संगठन यह नहीं देखता कि किस राज्य में किसकी सरकार है? जिसे मदद की ज़रूरत है उसका जाति-धर्म या पहचान क्या है? उन्होंने बताया कि संगठन विशेषकर उन जगहों तक पहुँचने में लगा हुआ है, जहाँ सरकारी कर्मचारी भी नहीं पहुँचे है।

देश भर में 2.1 लाख स्वयंसेवक काम में लगे हुए हैं, जो ‘सेवा भारती’ के बैनर तले कार्यरत हैं। संगठन ने भारत में कुल 1200 संस्थाओं के साथ संपर्क साधा है और उन सभी के साथ मिल-जुलकर काम कर रही है। इन 1200 संस्थाओं के साथ मिल कर ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई इलाक़ा छूट न जाए। श्रवण ने बताया कि 26 लाख लोगों तक उनकी सीधी पहुँच है, जिन्हें भोजन कराया जा रहा है। ऐसे कई लोग हैं जिनके भोजन की पूरी जिम्मेदारी ‘सेवा भारती’ ने ही उठाई है।

सभी राज्यों के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। कोई व्यक्ति अगर किसी समस्या में फँस जाता है तो वो इन नंबरों पर कॉल कर मदद माँग सकता है। रेलवे स्टेशनों से लेकर बस स्टेशनों तक फँसे लोगों की मदद की जा रही है। सबसे बड़ी बात है कि दिल्ली के रेडलाइट एरिया में रहने वाली 986 महिलाओं तक लगातार राशन-सामग्री पहुँचाई जा रही है।

‘सेवा भारती’ का ज्यादा जोर नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों तक है, जहाँ सुदूर सीमावर्ती इलाक़ों तक पहुँचने के लिए सरकारी कर्मचारियों की मदद ली जा रही है। अब तक संगठन जो भी कर रहा है, वो सिर्फ़ अपने संसाधनों के दम पर बिना किसी सरकारी सहायता के कर रहा है। श्रवण कुमार बताते हैं कि संगठन सरकार से वित्तीय सहायता लेता भी नहीं है। सिर्फ़ सुदूर इलाक़ों में पहुँचने के लिए प्रशासन की मदद ली जाती है। नॉर्थ-ईस्ट में रेलवे स्टेशनों पर चादर और कम्बल वितरित किए जा रहे हैं। लोगों तक स्वच्छ जल पहुँचाया जा रहा है। उन्हें सरकारी और मेडिकल दिशा-निर्देशों के बारे में बता कर जागरूक भी किया जा रहा है।

इसके अलावा घुमंतू लोगों का भी ध्यान रखा जा रहा है, जिनके पास सरकार भी नहीं पहुँच पाती है। बर्मा सीमा पर ‘सेवा भारती’ जनसेवा कर रही है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पदाधिकारी और स्वयंसेवक एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं और सारे काम सुचारु रूप से चलते रहते हैं। नॉर्थ-ईस्ट के कई छात्र ‘सेवा भारती’ के स्कूलों में पढ़ते हैं। कइयों को उनके घर सकुशल पहुँचाया गया है। वहीं कई की अभी भी देखभाल की जा रही है। जिन इलाक़ों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, वहाँ ख़ास ध्यान दिया जा रहा है।

इन सबके अलावा ‘सेवा भारती’ घरेलू मास्कों का उत्पादन भी कर रहा है। अकेले जम्मू में 1 लाख मास्क बाँटे गए हैं। जगह-जगह मास्क तैयार किए जा रहे हैं। जम्मू के बाद केरल में सबसे ज्यादा मास्क वितरित किए गए हैं। हालाँकि, श्रवण कहते हैं कि उनके संगठन का सभी राज्यों पर बराबर ध्यान है और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है। कोरोना की आपदा ख़त्म होने तक ‘सेवा भारती’ इस कार्य में लगातार लगा रहेगा।

इससे पहले हमने बताया था कि अकेले दिल्ली में सेवा भारती के 45 किचेन काम कर रहे हैं। समाजसेवा में डॉक्टरों और सरकार की सलाहों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। सोशल डिस्टन्सिंग का पालन किया जा रहा है। प्रत्येक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वो एक स्थानीय बुजुर्ग की पूरी जिम्मेदारी उठाए और उनकी दवाओं से लेकर भोजन तक का इंतजाम किया जा रहा है। पूरी दिल्ली में क्राउड मैनेजमेंट के लिए भी काम किया जा रहा है। जैसे, आनंद विहार में जब मजदूरों की भीड़ उमड़ पड़ी तो 250 संघ कार्यकर्ताओं ने वहाँ जाकर लोगों को सँभालने में पुलिस की मदद की।

‘आज तक’ ने दिल्ली में ‘सेवा भारती’ के कम्युनिटी किचेन के लिए केजरीवाल की पीठ थपथपा कर फेक न्यूज़ फैलाया था। सच्चाई ये है कि इस कम्युनिटी किचेन को ‘झंडेवालान मंदिर कमिटी’ और समाजसेवा संगठन ‘सेवा भारती’ मिल कर चला रही है। इसीलिए आजतक ने बाद में हेडिंग को बदल दिया और ‘कैसा है केजरीवाल का कम्युनिटी किचेन’ की जगह ‘कैसा है मंदिर का कम्युनिटी किचेन’ कर दिया।